बांग्लादेश ने भारत की जगह चीन को सौंपा तीस्ता प्रोजेक्ट:बदले में ₹7 हजार करोड़ का सॉफ्ट लोन; भारत ने ₹9 हजार करोड़ का ऑफर दिया था

बांग्लादेश और चीन के संबंधों में ‘चीनी’ कुछ ज्यादा ही घुलने लगी है। बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने तीस्ता नदी प्रोजेक्ट में भारत के इन्वेस्टमेंट ऑफर को ना कर इसे चीन को सौंप दिया है। चीन लगभग 9 हजार करोड़ रुपए के तीस्ता रिवर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट (TRMP) में ₹7 हजार करोड़ सॉफ्ट लोन के रूप में देगा। बांग्लादेश को इसे 50 साल में चुकाना होगा। जबकि भारत ने चीन को बाहर रखने के लिए 2024 में तत्कालीन शेख हसीना सरकार को 9 हजार करोड़ का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि हसीना सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं किया। अब रहमान सरकार ने चीन की सरकारी कंपनी पावर चाइना से समझौता किया है। इस जीटूजी एग्रीमेंट के तहत चीन के इंजीनियरों का दल पिछले हफ्ते ही बांग्लादेश आया था। लगभग 50 इंजीनियरों और टेक्नीकल स्टाफ ने तीस्ता कैचमेंट एरिया का सर्वे किया। इस मानसून में तीस्ता नदी का सर्वे करेगा चीन सूत्रों के अनुसार इस मानसून के दौरान चीन का दल तीस्ता नदी के फ्लो का आकलन कर बांध, जेट्‌टी और अन्य निर्माण कार्यों का प्लान तैयार करेगा। साथ ही इस सीजन में तीस्ता कैचमेंट एरिया में सिल्ट (तलछट) की सफाई में भी चीन ने सहयोग का वादा किया है। बांग्लादेश की मांग थी कि तीस्ता के रन ऑफ (अतिरिक्त बहाव) को चीन इसी मानसून में रोके। जिससे कि अगले साल से प्रस्तावित प्रोजेक्ट के निर्माण से पहले ही बांग्लादेश तीस्ता नदी के पानी का खरीफ ​की बुआई के लिए ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर सके। चीन सेना के इंजीनियर भी प्रोजेक्ट कंपनी में 1. पूर्वोत्तर का एंट्री पॉइंट: परियोजना क्षेत्र (नीलफामारी और रंगपुर) भारतीय सीमा से 10-12 किमी जबकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) से 22 किमी दूर है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को जोड़ता है। पूर्वोत्तर के एंट्री पॉइंट के लिए खतरा हो सकता है। 2. पावर चाइना कंपनी सेना से जुड़ी: पावर चाइना स्वतंत्र व्यावसायिक कंपनी नहीं, बल्कि चीन की सैन्य-नागरिक फ्यूजन नीति से गहराई से जुड़ी सरकारी कंपनी है। ये कंपनी एशिया और अफ्रीका में कई मल्टी पर्पज प्रोजेक्ट्स काे चला रही है। कंपनी में चीन सेना की इंजीनियरिंग काेर के भी लाेग होते हैं। 3. दो-मोर्चों पर चुनौती: सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता है कि सैकड़ों चीनी इंजीनियरों और तकनीशियनों की भारत की पूर्वोत्तर की संवेदनशील सीमा पर लंबे समय तक मौजूदगी भारत के लिए बड़ी चुनौती होगी। भारत के पूर्वी मोर्चे पर चीन अपनी पैठ को और बढ़ाने में जुट सकता है। बड़ी डिफेंस डील की तैयारी, चीन फाइटर जेट देगा सूत्रों के अनुसार पीएम तारिक रहमान के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल शमशुल इस्लाम ने हाल में चीन के राजदूत के साथ मुलाकात की थी। इसमें बांग्लादेश को चीन के साथ जे सीरीज फाइटर जेट्स देने पर चर्चा हुई। बताया जाता है कि चीन अक्टूबर में 12 जेट्स की पहली खेप देने वाला है। ————————- भारत-बांग्लादेश से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश ने भारत से छीनकर चीन को दिया मोंगला पोर्ट; सिर्फ 80 किमी दूर बैठेगा चीन, ये कितनी बड़ी चिंता 22 से 26 जून 2026 तक बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान चीन में थे। इसी दौरान बांग्लादेश ने अपने मोंगला पोर्ट का प्रोजेक्ट भारत से छीनकर चीन को दे दिया। यानी हमारे तट से महज 80 किमी दूर मोंगला पोर्ट पर चीन बैठेगा। पूरी खबर पढ़ें…

रोहित शर्मा की विदाई लगभग तय, लॉर्ड्स में हो सकता है अंतिम वनडे

ENGvsIND इंग्लैंड की 2 पारियों में फ्लॉप होने के बाद रोहित शर्मा के लिए वह घड़ी आ गई है जब वह या तो खुद से बल्ला टांगेंगे या फिर अगली सीरीज से ड्रॉप होंगे। मीडिया सूत्रों में चल रही खबरों के मुताबिक चयनकर्ताओं ने उनको बता दिया है कि वह एकदिवसीय विश्वकप 2027 के लिए टीम की योजनाओं में नहीं है। 

रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे। आज दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था। 

रोहित ने कप्तानी गंवाने के बाद अपने आक्रामक रवैए पर अंकुश लगाया लेकिन उन्हें अभी तक इससे खास फायदा नहीं हुआ है।रोहित ने पिछले साल अक्टूबर से 13 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने एक शतक और चार अर्धशतकों की मदद से 46.91 के औसत से 563 रन बनाए हैं।यह कोई मामूली रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन भारतीय ड्रेसिंग रूम के मौजूदा हालात ने रोहित के लिए लगभग हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करना अनिवार्य बना दिया है।

रोहित अब इस स्थिति में है कि वह किसी भी चीज को भाग्य के सहारे नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि भारत के शीर्ष क्रम में इशान किशन के रूप में विकल्प मौजूद है।अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

NEET UG 2026 Result जारी! पंजाब और हरियाणा के छात्रों ने किया टॉप, लड़कियों का शानदार रहा प्रदर्शन

NEET UG Result 2026: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (अंडरग्रेजुएट), NEET UG 2026 री-एग्जाम का रिजल्ट और फाइनल आंसर-की जारी कर दी है। एग्जाम में शामिल हुए 20 लाख से अधिक उम्मीदवार अब आधिकारिक वेबसाइट पर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। इस बार पंजाब के आर्यन गुप्ता और हरियाणा के पांशुल बंसल ने संयुक्त रूप से 715/720 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR 1) प्राप्त की है। कुल 11.21 लाख उम्मीदवार क्वालिफाई हुए हैं। क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों में 58 प्रतिशत से अधिक महिलाएं शामिल हैं। एग्जाम 13 भाषाओं में आयोजित की गई थी।

क्यों जल्दी जारी हुआ रिजल्ट?

NTA द्वारा जारी फाइनल आंसर-की के अनुसार, परीक्षा का एक सवाल ड्रॉप कर दिया गया है। इसी आधार पर अंतिम परिणाम तैयार किए गए हैं। NTA ने कहा कि NEET-UG के नतीजे समय पर घोषित किए गए हैं ताकि मेडिकल कोर्स में एडमिशन और उम्मीदवारों की काउंसलिंग का शेड्यूल योजना के अनुसार आगे बढ़ सके।

सभी क्वालिफ़ाई करने वाले उम्मीदवारों में से 58 प्रतिशत से ज़्यादा महिलाएं हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के क्वालिफ़ाई करने की दर भी अधिक रही। परीक्षा में शामिल होने वाली 56.8 प्रतिशत महिलाएं क्वालिफ़ाई हुईं हैं। जबकि पुरुषों के मामले में यह आँकड़ा 55.1 प्रतिशत था।

लड़कियों का प्रदर्शन रहा बेहतर

इस साल NEET UG 2026 में लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों से बेहतर रहा:-

  • कुल सफल उम्मीदवारों में 58% से अधिक लड़कियां हैं।
  • परीक्षा में शामिल हुई 56.8% छात्राएं सफल रहीं।
  • 55.1% छात्र क्वालिफाई कर सके।

कैटेगरी के अनुसार सफल उम्मीदवार

जनरल (General): 2.91 लाख

OBC-NCL: 5.12 लाख

SC: 1.59 लाख

ST: 63,716

जनरल-EWS: 95,026

PwBD: 3,666

PwD: 303

साथ ही सभी कैटेगरी के कट-ऑफ अंक और पर्सेंटाइल भी जारी कर दिए गए हैं।

कितने छात्रों ने बनाए बड़े स्कोर?

NTA ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के टॉपर्स की लिस्ट भी जारी की है। इनमें प्रमुख नाम हैं:-

जिगमेट यांगचेन लामो (लद्दाख) – 530 अंक

ध्रुव त्रिपाठी (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) – 606 अंक

फहमीदा अनीस (लक्षद्वीप) – 573 अंक

इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों के टॉपर्स की लिस्ट भी जारी की गई है। कुल 17 राज्य टॉपर्स ने 700 या उससे अधिक अंक। जबकि 26 राज्य टॉपर्स ने 690 से अधिक अंक हासिल किए हैं।

परीक्षा शुल्क वापसी की प्रक्रिया

NTA ने बताया कि 3 मई को आयोजित परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार परीक्षा शुल्क की वापसी (Refund) के लिए अपनी बैंक खाते की जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। अब तक 11.46 लाख से अधिक उम्मीदवार अपनी बैंक डिटेल्स जमा कर चुके हैं।

ऐसे करें रिजल्ट चेक

री-NEET UG 2026 परीक्षा में शामिल उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर एप्लीकेशन नंबर और पासवर्ड की मदद से अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के साथ ही अब उम्मीदवारों की नजर काउंसलिंग प्रक्रिया पर होगी, जिसके जरिए देशभर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में MBBS, BDS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होगी।

Income Tax Bill: विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट देने वाला बिल संसद में आएगा, जानिए क्या बदलेगा

Income Tax Bill: केंद्र सरकार मानसून सत्र में Income-tax (Amendment) Bill, 2026 पेश करने की तैयारी में है। यह बिल पिछले महीने लाए गए अध्यादेश (Ordinance) की जगह लेगा। इस अध्यादेश के तहत विदेशी निवेशकों को सरकारी बॉन्ड (Government Securities) से मिलने वाले ब्याज और कैपिटल गेन पर आयकर से छूट दी गई थी।

इस बिल का मकसद क्या है?

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ा था। ऐसे में सरकार ज्यादा विदेशी निवेश लाना चाहती है। इसी मकसद से यह टैक्स छूट दी गई थी। सरकार चाहती है कि भारत के सरकारी बॉन्ड बाजार में ज्यादा विदेशी निवेश आए। इससे बाजार में नकदी बढ़ेगी। सरकारी बॉन्ड बाजार भी मजबूत होगा।

सरकार का मानना है कि दुनिया में इस समय काफी अनिश्चितता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। सप्लाई चेन भी कई जगह प्रभावित है। ऐसे माहौल में विदेशी पूंजी आकर्षित करना जरूरी है।

विदेशी निवेशकों को क्या फायदा होगा?

सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को ब्याज से होने वाली कमाई और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स नहीं देना होगा। यह छूट 1 अप्रैल 2026 से लागू मानी गई है।

पहले विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए शेयर और बॉन्ड पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता था। सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स भी लगता था।

अध्यादेश क्यों लाना पड़ा?

जब यह फैसला लिया गया, तब संसद का सत्र नहीं चल रहा था। इसलिए सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी किया। बाद में इसे कानून बनाने के लिए अब संसद में बिल लाया जाएगा।

मानसून सत्र में और क्या होगा?

सरकार MSME Development (Amendment) Bill, 2026 भी पेश करेगी। इसका मकसद छोटे कारोबारियों के लिए कारोबार करना आसान बनाना है। साथ ही भुगतान में देरी से जुड़े विवादों का समाधान भी मजबूत किया जाएगा।

इसके अलावा सरकार वित्त वर्ष 2022-23 के लिए Demands for Excess Grants भी संसद में पेश करेगी।

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विराट और श्रेयस के अर्धशतक के बावजूद भारत इंग्लैंड के खिलाफ 233 रनों पर सिमटा

 

ENGvsIND श्रेयस अय्यर (66) और विराट कोहली (65) के अर्धशतकों से भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ गुरूवार को दूसरे वनडे में 44 ओवर में 233 रन का स्कोर बनाया। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम के मध्यक्रम ने पूरी तरह से निराश किया है।

अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुन्दर और शिवम दुबे के विकेट गुच्छों में गिरे। उससे पहले ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भारतीय टीम आसानी से 300 के स्कोर को पार कर सकती है। हालांकि जोफ़्रा आर्चर, साकिब महमूद और गस एटकिंसन ने कमाल का काउंटर अटैक किया। कोहली के विकेट पतन के बाद सबसे बड़ी साझेदारी 20 रनों की हुई, जो श्रेयस और बुमराह के बीच हुई। परिणाम यह रहा कि भारतीय टीम एक सम्मानजनक स्कोर से भी थोड़ी सी दूर रह गई।

श्रेयस ने 71 गेंदों पर 66 रन की पारी में पांच चौके और दो छक्के लगाए जबकि विराट कोहली ने 66 गेंदों पर 65 रन में आठ चौके लगाए। कप्तान शुभमन गिल ने 33 और ओपनर रोहित शर्मा ने 26 रन का योगदान दिया। जसप्रीत बुमराह ने 13 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के की मदद से 20 रन बनाकर भारत को 233 तक पहुंचाया। यह मेन इन ब्लू की तरफ से सबसे भरोसेमंद बैटिंग नहीं थी।

शुभमन गिल ने तेज़ शुरुआत दी, लेकिन रोहित शर्मा लय में नहीं दिखे और कुछ शुरुआती राहत मिलने के बावजूद इसका फ़ायदा नहीं उठा पाए। विराट कोहली ने एक अच्छी हाफ सेंचुरी के साथ पारी को संभाला, जबकि श्रेयस अय्यर ने एक कीमती पारी खेलकर भारत को एक सम्मानजनक टोटल तक पहुंचाया।

जसप्रीत बुमराह ने कुछ ज़रूरी रन जोड़े, जिससे भारत को आखिर में एक और धक्का मिला। इंग्लैंड की बॉलिंग पूरी टीम की परफॉर्मेंस थी। जोफ्रा आर्चर ने तीन अहम विकेट लेकर लीड किया, जबकि गस एटकिंसन ने भी तीन विकेट लेकर उनकी बराबरी की। साकिब महमूद ने भी दो विकेट लिए, जिससे यह पक्का हो गया कि भारत कभी भी कोई मोमेंटम न बना पाए। पहली पारी में पेसरों ने नौ विकेट लिए।

Home Loan: सिर्फ सस्ते घर नहीं, आसान होम लोन भी जरूरी; एक्सपर्ट बोले- तभी बढ़ेगा हाउसिंग सेक्टर

Home Loan: भारत में घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। अफोर्डेबल हाउसिंग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज मंजूरियों पर अक्सर चर्चा होती है। लेकिन इन सबसे पहले एक सवाल आता है। क्या आम परिवार के पास घर खरीदने के लिए आसान और समय पर लोन उपलब्ध है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के हाउसिंग सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ इसी सवाल के जवाब पर निर्भर करेगी।

होम लोन सिर्फ फाइनेंशियल प्रोडक्ट भर नहीं है। ज्यादातर परिवारों के लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है। यह आर्थिक सुरक्षा, स्थिरता और बेहतर भविष्य का भरोसा देता है। लेकिन यह सपना तभी पूरा होता है, जब सही समय पर लोन मिल सके। इसलिए हाउसिंग सेक्टर की असली ताकत सिर्फ मकानों की संख्या नहीं, बल्कि लोगों तक क्रेडिट की पहुंच है।

तेजी से बढ़ सकता है होम लोन बाजार

CareEdge Ratings के मुताबिक, भारत का होम लोन बाजार फिलहाल करीब ₹33 लाख करोड़ का है। FY25 से FY30 के बीच इसके 15-16% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। इस रफ्तार से बाजार का आकार ₹77 लाख करोड़ से ₹81 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

हालांकि, यह ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों या कॉर्पोरेट कर्मचारियों से नहीं आएगी। अगली बड़ी मांग छोटे शहरों, स्वरोजगार करने वालों, छोटे कारोबारियों और उन परिवारों से आने की उम्मीद है, जो अपना पहला घर खरीदना चाहते हैं।

असली चुनौती लोन तक पहुंच

देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जिनके पास लोन चुकाने की क्षमता है। लेकिन पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में उन्हें अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वजह साफ है। बैंक लंबे समय तक सैलरी स्लिप, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और स्थायी नौकरी को ही सबसे बड़ा आधार मानते रहे हैं।

इस कारण छोटे दुकानदार, फ्रीलांसर, स्वरोजगार करने वाले और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग लोन से वंचित रह जाते हैं। जबकि उनकी आय और भुगतान क्षमता मजबूत हो सकती है।

AI और डिजिटल डेटा बदल रहे हैं तस्वीर

अब लोन देने का तरीका तेजी से बदल रहा है। फाइनेंस कंपनियां और बैंक डिजिटल डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे ग्राहक की वास्तविक वित्तीय स्थिति और भुगतान क्षमता को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

अब सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि ग्राहक के फाइनेंशियल व्यवहार और लेनदेन का भी आकलन किया जा रहा है। इससे पहले जिन लोगों के लिए लोन लेना मुश्किल था, उनके लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।

टेक्नोलॉजी के साथ भरोसा भी जरूरी

डिजिटल प्रक्रिया ने लोन लेना आसान बनाया है। फिर भी पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह फैसला आसान नहीं होता। दस्तावेज, नियम, EMI और दूसरी शर्तें कई बार लोगों को उलझन में डाल देती हैं।

ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी के साथ भरोसेमंद सलाहकारों की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। सही सलाह मिलने से ग्राहक बेहतर फैसला ले पाते हैं और पूरे लोन प्रोसेस को आसानी से समझते हैं।

सफलता का असली पैमाना क्या?

हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि कितना लोन बांटा गया। असली सफलता इस बात में होगी कि कितने नए परिवार अपने घर का सपना पूरा कर पाए।

जब ज्यादा लोगों तक आसान होम लोन पहुंचेगा, तो इसका फायदा सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे रियल एस्टेट, निर्माण, रोजगार और पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यही वजह है कि आसान और समावेशी क्रेडिट एक्सेस को भारत की अगली हाउसिंग ग्रोथ स्टोरी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है।

(यह आर्टिकल मनीकंट्रोल हिंदी के लिए अतुल मोंगा ने लिखा है, जो बेसिक होम लोन के को-फाउंडर और सीईओ हैं)

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Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स ने ओडिशा में शुरू किया एल्युमीनियम फॉयल प्लांट, ₹800 करोड़ का निवेश

Shyam Metalics: श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी लिमिटेड (SMEL) की सब्सिडियरी SMEL Steel Structural Pvt. Ltd. ने ओडिशा के संबलपुर स्थित अपनी एल्युमीनियम फॉयल यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट पर कुल करीब ₹800 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश में एल्युमीनियम फॉयल और फ्लैट रोल्ड प्रोडक्ट्स (FRP) दोनों यूनिट शामिल हैं।

18,000 TPA क्षमता वाली फॉयल यूनिट शुरू

नई एल्युमीनियम फॉयल यूनिट की सालाना उत्पादन क्षमता 18,000 टन (TPA) है। यहां 6 से 40 माइक्रोन मोटाई वाली प्रीमियम ग्रेड एल्युमीनियम फॉयल बनाई जाएगी। कंपनी के मुताबिक, इस यूनिट में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

सितंबर तक शुरू होगी FRP यूनिट

श्याम मेटालिक्स की Aluminium Flat Rolled Products (FRP) यूनिट अंतिम चरण में है। इसके सितंबर 2026 तक कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है। इस यूनिट की सालाना क्षमता 60,000 TPA होगी। यहां 0.3 से 4.0 मिमी मोटाई वाले एल्युमीनियम प्रोडक्ट्स तैयार किए जाएंगे।

ऑपरेटिंग मार्जिन में 40-50% बढ़ोतरी की उम्मीद

कंपनी का कहना है कि दोनों यूनिट पूरी तरह चालू होने के बाद ऑपरेटिंग मार्जिन में 40% से 50% तक सुधार हो सकता है। बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ज्यादा रियलाइजेशन से रेवेन्यू में भी मजबूत बढ़ोतरी की उम्मीद है। कंपनी का अनुमान है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार के दम पर उसकी टॉपलाइन 2 से 2.5 गुना तक बढ़ सकती है।

‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा

श्याम मेटालिक्स का कहना है कि यह निवेश वैल्यू-एडेड एल्युमीनियम उत्पादों में कंपनी की मौजूदगी को मजबूत करेगा। इससे हाई-क्वालिटी एल्युमीनियम उत्पादों की घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिलेगी। साथ ही आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

श्याम मेटालिक्स ने क्या कहा?

श्याम मेटालिक्स एंड एनर्जी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर बृज भूषण अग्रवाल ने कहा कि संबलपुर में फॉयल प्रोडक्शन की शुरुआत कंपनी के लिए एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य हाई-वैल्यू एल्युमीनियम उत्पादों के जरिए नए बाजारों में विस्तार करना है। इससे ओडिशा में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सितंबर तक FRP यूनिट शुरू होने के बाद कंपनी का डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम इकोसिस्टम और मजबूत होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

MP बनेगा निवेश का नया हब, भारत टेक्स-2026 में मिले 20,193 रुपए करोड़ के प्रस्ताव, 27 हजार नौकरियों का रास्ता साफ

'हमारे मध्यप्रदेश में लेबर की कोई प्रॉब्लम नहीं होती। अगर कोई उद्योगपति यहां उद्योग लगाकर 10-20 साल कहीं और कुछ करना चाहे तो उसके उद्योग को कुछ नहीं होगा। प्रदेश की जनता अपने काम को अच्छे से करना और निभाना जानती है।' यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। सीएम डॉ. यादव 16 जुलाई को नई दिल्ली की होटल द लीला पैलेस में आयोजित 'इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्म्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर कई उद्योगपतियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेश संबंधी एमओयू साझा किए गए।

बता दें, राज्य ने नई दिल्ली में आयोजित भारत टेक्स-2026 तथा “इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश” के माध्यम से निवेश आकर्षित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दोनों आयोजनों में प्रदेश को 20 हजार 193 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इन प्रस्तावों से लगभग 27 हजार 592 लोगों के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। दोनों कार्यक्रमों में सीएम डॉ. यादव ने निवेशकों-उद्योगपतियों और वैश्विक ब्रांड के प्रतिनिधियों से गहन चर्चा की। उन्होंने सभी को जनवरी-2027 में आयोजित होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS-2027) में भाग लेने का आमंत्रण दिया।

 

'इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्म्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मैं सभी उद्योगपतियों-निवेशकों का अभिनंदन करता हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के नक्शे पर अपनी साख और धाक बना रहा है। हम सब सौभाग्यशाली हैं कि हम देश के बदलते समय को देख पा रहे हैं। आदि काल से सोने की चिड़िया जैसे अलंकरणों से भारत की पहचान होती रही है। 12 साल का समय बहुत छोटा होता है। इस छोटे से समय में भी वो सारी चीजें भी हो गईं, जिसके लिए कभी-कभी कहा जाता था कि ये तो भारत में हो ही नहीं सकता, भारत के लोग ये कैसे कर देंगे, ये तो यहां असंभव है। मुझे इस बात का संतोष है कि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में वर्तमान के समय में असंभव भी संभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि आश्चर्य की बात यह भी है कि वो निर्णय जो राजनेताओं के कदम रोकते थे , उन निर्णयों को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने मिथक तोड़े हैं। अब तो लोग यह कहने लगे हैं कि जो सारे जहां में असंभव है, वो भारत में संभव है।  

 

राज्य कल्याण के लिए उठाए कई कदम

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आम तौर पर जब कोई नेता प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठता था, तो वह जिस प्रदेश और शहर का होता था, राजनीति उसके आसपास घूमती थी। लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी ने समान रूप से सभी को अवसर प्रदान किए, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार किया, सभी राज्यों को प्रगति के समान अवसर और प्रमोशन के मौके दिए। हमारी सरकार के गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें और बाकी राज्यों के बीच सौहार्द्रपूर्ण माहौल बनाया। उन्होंने कहा कि मैं अभी से आप सभी को जीआईएस 2027 का निमंत्रण देने आया हूं, यही समय के परिवर्तित होने का प्रमाण है। हमारी सरकार ने व्यवसाय को गंभीरता से लिया है। हमारे अधिकारियों ने प्रजेंटेशन के जरिये सरकार की नीति और नियति बताने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि एक वर्ष को छोड़ दिया जाए तो, बाकी के वर्ष में हमने राज्य के कल्याण के लिए कई कदम उठाए। 

 

टेक्सटाइल में अनंत संभावनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे राज्य ने सारे सेक्टर में प्रतिबद्धता सिद्ध की है। कपास और ऑर्गेनिक कपास की खेती के लिए राज्य नंबर-1 है। लेकिन, ब्रिटिश काल की नीतियों और सरकारों की उदासीनता ने वो ताज छीन लिया। हमारे इंडस्ट्रियल पार्क का जिस दिन भूमि-पूजन होता है, उस दिन सारे प्लॉट भी आवंटित हो जाते हैं। जीआईएस 2025 में हमारे पास 32 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए थे। जीआईएस के प्रस्ताव अगर 10 फीसदी भी धरातल पर उतर जाएं तो बहुत बड़ा आंकड़ा माना जाता है। लेकिन, डेढ़ साल में ही 10 लाख करोड़ के प्रस्ताव न केवल धरातल पर उतरे, बल्कि काम भी शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे बिजली मध्यप्रदेश से मिल रही है। कहीं और उद्योग लगाओ तो जनरेटर का सेट लगाना पड़ता है, लेकिन अगर प्रदेश में उद्योग लगाओ तो बिजली जाती ही नहीं है। हमारे पास बिजली सरप्लस है। मध्यप्रदेश में कुशल और व्यवहारिक कामगारों की पर्याप्त उपलब्धता भी है। राज्य में एमएसएमई, लघु-कुटीर उद्योग, माइनिंग, फार्मा, टेक्सटाइल प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ने की अनंत संभावनाएं हैं। मध्यप्रदेश देश का दूसरा बड़ा खाद्यान्न उत्पादक राज्य है। देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं का उपार्जन मध्यप्रदेश ने किया है। मध्यप्रदेश फूड इंडस्ट्री के लिए अनुकूलता वाला राज्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियां ऐसी हैं कि अगर एक रुपए निवेश करें तो 75 पैसे सब्सिडी के रूप में वापस मिल जाते हैं। हमारी सरकार रोजगार परक उद्योग स्थापित करने पर श्रमिकों के वेतन के लिए निवेशकों को 5 साल तक 5000 रुपए प्रति श्रमिक आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। मध्यप्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक है। बिजली और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। प्रदेश में फूड पार्क, लॉजिस्टिक्स पार्क, मल्टी मॉडल पार्क जैसी अनेकों सौगातें मिली हैं। मध्यप्रदेश में 5 लाख किलोमीटर लंबा रोड नेटवर्क है। सुदृढ़ रेलवे कनेक्टिविटी, 8 एयरपोर्ट, 6 अंतरराष्ट्रीय कंटेनर, एक्सप्रेसवे और हाइवे हैं। आइए, मध्यप्रदेश के साथ मिलकर आगे बढ़ें।

 

भारत टेक्स-2026 में क्या हुआ

भारत मंडपम में आयोजित टेक्सटाइल राउंड टेबल में प्रदेश के वस्त्र एवं परिधान उद्योग, पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, तकनीकी वस्त्र, निर्यात संवर्धन, कौशल विकास और निवेश प्रोत्साहन पर विस्तृत चर्चा हुई। इस आयोजन में 1,592 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 15,700 रोजगार सृजित होने की संभावना है। इंटरैक्टिव सेशन के दौरान एमपीआईडीसी ने निर्यात संवर्धन, ई-कॉमर्स, वैश्विक व्यापार, एमएसएमई और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सात महत्वपूर्ण समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। साथ ही रक्षा, डेटा सेंटर, आईटी, एआई, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण सहित अनेक क्षेत्रों में निवेश अवसर प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा दिल्ली निवेश संवाद में रक्षा, डेटा सेंटर, ट्रांसफॉर्मर निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग और खिलौना उद्योग सहित विभिन्न क्षेत्रों में 18 हजार 601 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 11,892 रोजगार सृजित होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इन निवेश प्रस्तावों, साझेदारियों और एमओयू के माध्यम से मध्यप्रदेश देश के अग्रणी निवेश गंतव्यों में अपनी स्थिति और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

 

दुनियाभर के निवेशक हो रहे आकर्षित

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर 2025 को मध्यप्रदेश के धार को देश के पहले पीएम मित्र पार्क की सौगात दी थी। गारमेंट सेक्टर के इस पार्क के भूमि-पूजन के साथ ही यहां 90 प्रतिशत भू-खंडों का आवंटन भी पूरा कर लिया गया। यह एक रिकॉर्ड है और काम के प्रति राज्य सरकार की दक्षता प्रकट करती है। उन्होंने कहा कि पीएम मित्र पार्क के आसपास भी निवेशक अब उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन की मांग कर रहे है।

प्रदेश में उद्योगों के लिए अनुकूलता, कच्चे धागे के लिए माल की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर मध्यप्रदेश निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। प्रदेश की बढ़ती निर्यात क्षमता और रोजगार सृजन की शक्ति से दुनिया परिचित हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश टेक्सटाइल, गारमेंट और फुटवियर सेक्टर में विशेष पहचान रहा है। राज्य में उद्योगों को आर्थिक सब्सिडी, बिजली आपूर्ति, भूमि आवंटन, स्टांप ड्यूटी में छूट जैसी नीतियों से निवेशक आकर्षित हो रहे हैं। राज्य में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन, कौशल विकास प्रशिक्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है। मध्यप्रदेश देश के मध्य में है और अपनी विशेषताओं के कारण दुनियाभर के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में मध्यप्रदेश को 33 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से 10 लाख करोड़ का निवेश धरातल पर आ चुका है। वर्ष 2027 में फिर जीआईएस का आयोजन होगा, उम्मीद है कि इसमें निवेश का रिकॉर्ड टूटेगा।

AI Bubble: क्या AI का बबल फूट रहा? इन 5 बड़े ‘क्रैश’ ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई

AI Bubble: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार को नई रफ्तार दी है। AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई। लेकिन अब तस्वीर बदलती दिख रही है। दुनिया भर के बाजारों में AI शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या AI का बूम भी डॉट-कॉम बबल की तरह खत्म होने वाला है?

दक्षिण कोरिया का Kospi Index गुरुवार को 6% से ज्यादा टूट गया। AI चिप बनाने वाली SK Hynix के शेयर 11% और Samsung Electronics के शेयर 8% गिर गए। निवेशकों को अब कंपनियों की ऊंची वैल्यूएशन और भविष्य की कमाई की चिंता सता रही है।

आइए जानते हैं हाल के समय में AI थीम से जुड़े 5 बड़े झटकों के बारे में।

IBM

आईटी और कंसल्टिंग कंपनी IBM के शेयर जुलाई 2026 में करीब 25% टूट गए। इससे कंपनी का करीब 70 अरब डॉलर का मार्केट कैप साफ हो गया। कमजोर शुरुआती नतीजों के साथ यह चिंता भी बढ़ी कि AI कंपनी के पारंपरिक कंसल्टिंग कारोबार पर असर डाल सकता है।

SaaS सेक्टर

सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयर फरवरी 2026 में बुरी तरह टूटे। इसकी वजह Anthropic का नया Agentic AI प्लेटफॉर्म रहा। इसके बाद Salesforce, Adobe और ServiceNow जैसे शेयरों में तेज बिकवाली हुई। निवेशकों को लगा कि AI पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बदल सकता है।

Nvidia

AI चिप बनाने वाली कंपनी Nvidia को जनवरी 2025 में बड़ा झटका लगा। कंपनी का मार्केट कैप एक ही दिन में करीब 600 अरब डॉलर घट गया। इसकी वजह चीन के AI स्टार्टअप DeepSeek का सस्ता AI मॉडल था। इसके बाद निवेशकों को डर सताने लगा कि महंगे AI चिप्स की मांग उम्मीद से कम हो सकती है।

Alphabet और Big Tech

टेक दिग्गज कंपनियों Alphabet, Amazon, Meta और Microsoft के शेयर जून 2026 में फिसल गए। Alphabet करीब 6% और Amazon लगभग 5% टूट गया। निवेशकों को चिंता थी कि AI पर हो रहा भारी खर्च कब मुनाफे में बदलेगा।

भारतीय आईटी सेक्टर

भारतीय आईटी कंपनियां भी इस दबाव से नहीं बचीं। IBM की गिरावट के बाद AI को लेकर चिंता बढ़ गई। Infosys, TCS, Wipro, HCLTech, Persistent Systems, Coforge और LTIMindtree जैसे शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। Nifty IT Index करीब 2% टूट गया। जबकि Nifty 50 और Sensex बढ़त के साथ बंद हुए।

फिलहाल AI सेक्टर की लंबी अवधि की कहानी मजबूत मानी जा रही है। लेकिन ऊंची वैल्यूएशन, मुनाफे को लेकर सवाल और AI से बदलते कारोबार की वजह से इस सेक्टर में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

3500 रुपये के इन्वेस्टमेंट से खड़ा कर लिया 1.5 करोड़ का मिलेट बिजनेस! नासिक के इंजीनियर तुषार ने किया कमाल

Business idea: जीवन में कभी-कभी बड़ी कठिनाइयों के दौरान ही बड़े अवसर क्रिएट करने का मौका मिलता है। ऐसा ही कुछ हुआ नासिक के एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रैजुएट के साथ। भारत समेत पूरी दुनिया जब कोरोना की महामारी से जूझ रही थी तो उसी समय इस इंजीनियर ने एक शानदार बिजनेस की शुरुआत के लिए कदम बढ़ा दिया। ये कहानी है तुषार तलवारे की जिन्होंने कोरोना लॉकडाउन के दौरान महज 3500 रुपये के शुरुआती निवेश से अपने घर से मिलेट (बाजरा/मोटा अनाज) बेचने का एक छोटा सा प्रयोग शुरू किया था।

आज उनका यह स्टार्टअप फूडोनिक नाम के एक बड़े ब्रांड में बदल चुका है। इसका सालाना रेवेन्यू 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह कंपनी आज पूरे भारत में मिलेट खाखरा, आटा, पास्ता, नूडल्स और कई तरह के हेल्दी स्नैक्स बेच रही है।

कॉलेज के रूममेट और IIT बॉम्बे के सेमिनार से मिला आइडिया

तुषार की इस एंटरप्रेन्योरशिप जर्नी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। 30Stades के साथ एक इंटरव्यू में तुषार ने बताया कि जब वह नवी मुंबई में पढ़ाई कर रहे थे तब उनके एक कॉलेज रूममेट ने उन्हें उनकी फिटनेस और वेलनेस के प्रति रुचि को देखते हुए हेल्दी फूड सेक्टर में करियर तलाशने की सलाह दी थी।

तुषार की यह रुचि तब एक ठोस बिजनेस आइडिया में बदल गई जब उन्होंने पवई स्थित IIT बॉम्बे में प्रसिद्ध मिलेट रिसर्चर डॉ खादर वली के एक सेमिनार में हिस्सा लिया। इस सेशन से उन्हें मिलेट्स की न्यूट्रिशनल वैल्यू का पता चला और उन्होंने महसूस किया कि उस समय बाजार में मिलेट-आधारित प्रोडक्ट्स बहुत ही कम उपलब्ध थे।

इस सेक्टर को बेहतर ढंग से समझने के लिए तुषार ने कई दूसरे सेमिनार्स में हिस्सा लिया और मिलेट की खेती, इसके स्वास्थ्य लाभ व सप्लाई चेन को समझने के लिए ऑनलाइन कोर्सेज भी पूरे किए।

₹3500 का पहला ऑर्डर और लॉकडाउन में डिलीवरी की चुनौती

बड़ा निवेश करने के बजाय तुषार ने पहले इस आइडिया को छोटे स्तर पर टेस्ट करने का फैसला किया। साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान नासिक में अपने घर पर रहते हुए तुषार ने मात्र 3500 रुपये निवेश किए। उन्होंने डॉ खादर वली के नेटवर्क के जरिए तमिलनाडु के एक किसान से 5 अलग-अलग किस्मों के 5-5 किलो मिलेट्स खरीदे।

परिवार, दोस्तों और शुरुआती ग्राहकों से मिले सकारात्मक फीडबैक से उत्साहित होकर उन्होंने अपने अगले ऑर्डर को बढ़ाकर हर किस्म का 20-20 किलो कर दिया। लॉकडाउन के कारण जब लॉजिस्टिक्स सेवाएं पूरी तरह प्रभावित थीं तब तुषार ने ऑर्डर हासिल करने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप्स और लोगों की सिफारिशों का सहारा लिया। उस समय सिर्फ इंडिया पोस्ट की सेवाएं चालू थीं, इसलिए वे घर पर ही अपने हाथों से एक-एक किलो के पाउच पैक करते थे और डाक के जरिए पूरे देश में ग्राहकों को भेजते थे।

किफायती कीमत की वो रणनीति जो कर गई काम

मार्केट रिसर्च के दौरान तुषार ने देखा कि कई विक्रेता 5 किलो मिलेट्स के लिए करीब 1200 रुपये तक चार्ज कर रहे थे। चूंकि उनकी खरीद लागत काफी कम थी, इसलिए उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स की कीमत को किफायती रखने का फैसला किया। तुषार बताते हैं कि उतनी ही मात्रा के लिए उनकी खरीद लागत सिर्फ 400 रुपये के आसपास थी।

इसलिए उन्हें अपने पैक्स की कीमत पोस्टल चार्ज और प्रॉफिट मार्जिन मिलाकर 700 रुपये रखी। इससे ग्राहकों को काफी किफायती दाम में हेल्दी फूड मिलने लगा और तुषार को भी एक बेहतर मार्जिन मिला। यह प्राइसिंग स्ट्रेटजी पूरी तरह सफल रही और देश के अलग अलग हिस्सों से ताबड़तोड़ ऑर्डर आने शुरू हो गए।

₹1.5 लाख से ₹1.5 करोड़ तक का सफर

जैसे-जैसे मांग बढ़ी तुषार ने नासिक में ही 2000 रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया और अपने काम को वहां शिफ्ट कर दिया। रेडी-टू-ईट मिलेट प्रोडक्ट्स की मांग को देखते हुए उन्होंने कांट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स के साथ पार्टनरशिप की और आटा, पास्ता व नूडल्स जैसे प्रोडक्ट तैयार करवाने लगे जबकि उनका खुद का ध्यान ब्रांडिंग, सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन पर रहा।

कंपनी ने भी फिर रफ्तार पकड़ी। साल 2020 में 1.5 लाख का टर्नओवर, साल 2021 में 12 लाख के टर्नओवर में बदल गया। साल 2023 में उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में मिलेट चिवड़ा, फ्लेक्स और दूसरे स्नैक्स शामिल किए।

कारोबार के विस्तार के साथ तुषार को केंद्र सरकार की PMFME योजना (PM Formalisation of Micro Food Processing Enterprises Scheme) के तहत 10 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। इस मदद से उन्होंने 15 अलग-अलग वैरायटी के मिलेट खाखरा बनाने के लिए अपनी खुद की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की।

हीरो हैं ये 8 महिलाएं: बिना किसी केमिकल के तैयार होता है खाखरा

फैक्ट्री स्थापित करना तो केवल शुरुआत थी, मिलेट खाखरा को बड़े पैमाने पर बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। शुरुआत में आटा मशीनों से चिपक जाता था और सही खाखरा नहीं बन पाता था। फूड कंसल्टेंट्स ने इसमें बाइंडर्स और एडिटिव्स मिलाने की सलाह दी लेकिन तुषार इसे 100% नेचुरल रखना चाहते थे।

महीनों की कड़ी मेहनत और 2000 किलो से अधिक मिलेट आटा इस्तेमाल करने के बाद उनकी टीम ने परफेक्ट रेसिपी तैयार की। ये खाखरे बिना किसी प्रिजर्वेटिव, एडिटिव्स या सिंथेटिक बाइंडर्स के बनाए जाते हैं और स्वाद को बरकरार रखने के लिए कंपनी अपने खुद के मसालों का मिश्रण तैयार करती है।

वर्तमान में नासिक स्थित Fudonik की इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को 8 महिलाएं संभाल रही हैं। बाजार में खाखरा लॉन्च करने से पहले कंपनी ने 6 महीने तक ग्राहकों का फीडबैक लिया और लैबोरेटरी टेस्ट भी पूरे किए।

भविष्य की योजनाएं

आज यह कंपनी इन-हाउस खाखरा और चिवड़ा बनाती है जिसके पास 2500 से अधिक रिटेल ग्राहक हैं और यह अपने B2B बिजनेस का भी तेजी से विस्तार कर रही है। अपनी आगे की योजनाओं को लेकर तुषार बताते हैं कि वे अगले साल मिलेट कुकीज भी लॉन्च करने की तैयारी कर रहे हैं।

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Disclaimer: यह रिपोर्ट पूरी तरह से थर्ड पार्टी मीडिया आउटलेट्स की रिपोर्ट पर आधारित है। मनीकंट्रोल ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही वह इनका समर्थन करता है।