Restaurant Brands का शेयर बना रॉकेट, 18% दौड़ा, क्या यह है खरीदारी का सही समय?

Restaurant Brands Asia Share Price: बर्गर किंग इंडिया की पैरेंट कंपनी रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया (Restaurant Brands Asia) के शेयरों में मंगलवार 4 अगस्त को तेज छलांग लगाते नजर आए। शेयर इंट्राडे में 19 फीसदी से ज्यादा चढ़ा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया के शेयर की कीमत ₹84 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस ₹70.76 से 18.56% ज़्यादा है। इस क्विक-सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) स्टॉक में इस साल अब तक 28% की बढ़त हुई है।

शेयर में आज की तेज़ी इस स्मॉल-कैप स्टॉक को उसके 52-हफ़्ते के उच्चतम स्तर ₹87.65 के करीब ले आई है, जो पिछले साल सितंबर में बना था। वहीं, इसका 52-हफ़्ते का निचला स्तर ₹57.15 है।

कैसे रहे Q1 नतीजे

जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए, कंपनी ने ₹28.3 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस दर्ज किया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह नुकसान ₹48 करोड़ था। मैनेजमेंट ने कहा कि वे प्राइसिंग ऑप्टिमाइज़ेशन, मेन्यू में नए बदलाव और फिक्स्ड कॉस्ट (जिसमें यूटिलिटीज़ भी शामिल हैं) पर बेहतर नियंत्रण के ज़रिए मुनाफा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

इस बीच, समीक्षाधीन तिमाही के दौरान कंपनी के रेवेन्यू में साल-दर-साल (Y-o-Y) 18% की बढ़त हुई और यह ₹822.6 करोड़ हो गया। इसकी मुख्य वजह भारत के कारोबार में मज़बूत प्रदर्शन था, जबकि इंडोनेशिया का कारोबार कुल ग्रोथ पर दबाव डालता रहा।

कंपनी ने 13% की इंडस्ट्री-लीडिंग सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ (SSSG) बनाए रखी। इसे डाइन-इन और डिलीवरी दोनों चैनलों पर अच्छी मांग और वैल्यू ऑफरिंग से मदद मिली।

इसने Q1 में नौ स्टोर जोड़े और FY27 में 80 स्टोर खोलने की अपनी योजना को दोहराया। इंडोनेशिया में, इसकी टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी पर काम चल रहा है और RBA लागत पर बेहतर नियंत्रण और ऑपरेशनल सुधारों के ज़रिए नुकसान कम करने पर ध्यान दे रही है।

क्या यह है खरीदारी की सही समय

घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) इस शेयर को लेकर पॉजिटिव बनी हुई है। कंपनी ने बेहतर मार्जिन को देखते हुए FY27 के लिए EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के अनुमान को 5% और FY28 के लिए 8% बढ़ा दिया है।

MOFSL का कहना है कि जैसे-जैसे और स्टोर मैच्योर होंगे और नेटवर्क में नए आउटलेट्स का योगदान बेहतर होगा, उनसे मार्जिन रिकवरी में मदद मिलने की उम्मीद है। कंपनी को उम्मीद है कि इंडोनेशियाई बिजनेस में धीरे-धीरे सुधार होगा क्योंकि कंपनी ने खराब प्रदर्शन करने वाले स्टोर बंद करके अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाया है। हालांकि, उसे उम्मीद है कि इंडोनेशिया में निकट भविष्य में चुनौतियां बनी रहेंगी।

ब्रोकरेज ने 125 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ अपनी ‘BUY’ रेटिंग को दोहराया है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से 75% की बढ़त का संकेत है।

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पाकिस्तान से आजाद हुआ बलूचिस्तान! 11 अगस्त को मनाएगा स्वतंत्रता दिवस, क्या भारत देगा मान्यता?

Republic of Balochistan

बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से आजादी का ऐलान करने के बाद 11 अगस्त को अपना 'स्वतंत्रता दिवस' घोषित किया है। बलूचिस्तान के नेताओं ने दुनिया के देशों से मान्यता देने की अपील की है। इस दावे को पाकिस्तान ने स्वीकार नहीं किया है। बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र देश के रूप में किसी भी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था या संयुक्त राष्ट्र ने मान्यता नहीं दी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत बलूचिस्तान को अलग देश के रूप में मान्यता देगा। ALSO READ: ड्रैगन का 'परमाणु सीक्रेट' बेनकाब! सच निकला अमेरिका का दावा, भारत के लिए भी खतरे की घं

 

'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' की तरफ से जारी एक बयान में बलूच लोगों से राष्ट्रीय एकता के साथ 'स्वतंत्रता दिवस' मनाने का आग्रह किया गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इसे एक स्वतंत्र और संप्रभु बलूचिस्तान के तौर पर मान्यता दें। संगठन का दावा किया कि लगभग 6 करोड़ बलूच खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र का नागरिक मानते हैं।

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का दावा है कि 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन समाप्त होने से ठीक पहले, बलूचिस्तान ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। कहा जाता है कि उस वक्त पाकिस्तान ने भी कलात नाम की इस रियासत की स्वतंत्रता को माना था लेकिन बाद में छल से उसने इसे पाकिस्तान में मिलने के लिए मजबूर किया।

मीर यार बलोच ने बलोच राष्ट्र के लोगों से अपने घरों, मोहल्लों, बाजारों, दुकानों, शिक्षण संस्थानों और अन्य सार्वजनिक जगहों पर आजाद बलोचिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अपील की। ALSO READ: बांग्लादेश में जो हुआ वो भारत के लिए वॉर्निंग, लेखिका तस्लीमा नसरीन क्‍या मैसेज देना चाहती हैं सरकार को?

 

बलूचिस्तान ने 8 फरवरी 2026 के दिन अपना संविधान भी छापा था। बलूचिस्तान की आजादी का खाका आधिकारिक तौर पर दुनिया के सामने पेश किया जा चुका है। इसे बलूच नेता मीर यार बलूच ने तैयार किया है।

टी दिलीप: बेस्ट फील्डर मेडल की संस्कृति लाने वाले कोच ने लिखा भावुक पोस्ट

भारतीय फील्डिंग में सबसे ज्यादा क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले फील्डिंग कोच टी-दिलीप का कार्यकाल समाप्त हो गया है और वह टीम के साथ श्रीलंका नहीं जा रहे हैं। फील्डिंग कोच टी-दिलीप ने भारतीय खिलाड़ियों का फील्डिंग स्तर खासा बढ़ाया। खासकर एकदिवसीय विश्वकप के दौरान जब हर मैच के बाद टीम को फील्डिंग मेडल दिया जाता था। यह एक ऐसी प्रथा थी जिससे हर खिलाड़ी प्रोत्साहित हुआ।अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भावुक पोस्ट लिखा।

टी दिलीप ने लिखा” एक ऐसे सफ़र के लिए सही शब्द ढूँढना मुश्किल है जो मेरे लिए बहुत मायने रखता है।जब मैं पहली बार इस टीम से जुड़ा, तो मेरा मकसद बस एक ही था – हर दिन अपना सब कुछ झोंक देना।

उस खेल में योगदान देने का मेरा तरीका हमेशा से फील्डिंग ही रहा है जिसे मैं बहुत प्यार करता हूँ, और मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि मुझे इस टीम के सफ़र का हिस्सा बनने का मौका मिला।फील्डिंग मेडल हमेशा मेरे दिल के बहुत करीब रहेगा। ड्रेसिंग रूम में इसने जो उत्साह पैदा किया, जो मुस्कान बिखेरी और खिलाड़ियों ने इसे जो अहमियत दी – ये सब ऐसी यादें हैं जो हमेशा मेरे साथ रहेंगी।

इन उपलब्धियों का हिस्सा बनने पर मुझे हमेशा गर्व रहेगा:

  • दो ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप जीत (2024 और 2026)
  • ICC चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीत (2025)
  • दो एशिया कप जीत (2023 और 2025)
  • ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और ICC मेन्स क्रिकेट ODI वर्ल्ड कप (2023) में रनर-अप
  • वर्ल्ड स्टेज पर कई यादगार सफ़र

मुझ पर भरोसा करने और भारतीय क्रिकेट की सेवा करने का मौका देने के लिए BCCI और भारतीय क्रिकेट टीम का दिल से शुक्रिया। राहुल द्रविड़ और गौतम गंभीर, आपके भरोसे के लिए धन्यवाद। आप दोनों के साथ काम करना बहुत अच्छा अनुभव रहा।

रोहित शर्मा, सूर्या कुमार, विराट कोहली, हार्दिक पांड्या, शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर, आप सभी के साथ काम करना और आपके कप्तानी के समय में योगदान देना मेरे लिए सम्मान की बात थी। हर खिलाड़ी, कोच और सपोर्ट स्टाफ़ के सदस्य को… धन्यवाद। हमने साथ में जो यादें बनाई हैं, वे ज़िंदगी भर मेरे साथ रहेंगी।

जैसे ही यह अध्याय समाप्त हो रहा है, मैं हमेशा शुक्रगुज़ार रहूँगा कि मुझे पाँच यादगार वर्षों तक भारत का बैज पहनने का सम्मान मिला।हमेशा आभारी रहूँगा। सफ़र जारी है।”

T Dilip

भारत के क्षेत्ररक्षण कोच टी दिलीप ने खुलासा किया कि वह ट्रेनिंग सत्र की शुरुआत में खिलाड़ियों के समूहों के बीच क्षेत्ररक्षण प्रतियोगिताओं का आयोजन करना पसंद करते हैं क्योंकि इससे सही माहौल बनाने में मदद मिलती है।हाल ही में हुए एक प्रशिक्षण सत्र की बारीकियों को समझाते हुए दिलीप ने कहा कि उन्होंने गेंद को सीमा रेखा से वापस फेंकने पर काम किया। इस सत्र में भारतीय खिलाड़ियों को दो समूहों में विभाजित किया गया था।उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि सभी लोग एक साथ मिलकर टीम ड्रिल करें लेकिन साथ ही चाहते हैं कि वे मैच के लिए भी तैयार हों।’’

देशभर में मिले 1.19 करोड़ पांडुलिपियों के रिकॉर्ड! जानिए क्या है ज्ञान भारतम मिशन, क्यों इसपर हो रहा करोड़ों रुपये का खर्च?

Gyan Bharatam Mission: भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को सहेजने की दिशा में केंद्र सरकार के ज्ञान भारतम मिशन को एक ऐतिहासिक सफलता मिली है। देशभर में चलाए गए राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान 1.19 करोड़ से भी अधिक पांडुलिपियों (Manuscripts) के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। संस्कृति और पर्यटन केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए इस स्कीम से जुड़ी अहम जानकारियां शेयर की हैं। आपको बता दें कि संस्कृति मंत्रालय की यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, पांडुलिपियों के संरक्षण, इनके डिजिटलाइजेशन और ग्लोबल रिसर्च कम्युनिटी के लिए इसे उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

क्या है ज्ञान भारतम मिशन और बजट 2025-26 में क्यों हुई थी घोषणा?

ज्ञान भारतम मिशन (GBM) भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय का एक विशेष कार्यक्रम है। इसका ऐलान केंद्रीय बजट 2025-26 के दौरान पांडुलिपियों से जुड़ी गतिविधियों को गति देने के लिए की गई थी। इस पैन-इंडिया पहल का मुख्य उद्देश्य किसी भी लिपि, भाषा, ज्ञान परंपरा, क्षेत्र या समुदाय की संरक्षक परंपराओं से परे हटकर संपूर्ण भारत की पांडुलिपि विरासत का संरक्षण करना है। पांडुलिपियों के सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, डिजिटलाइजेशन और प्रिजर्वेशन को फाइनेंशियल और एडमिनिस्ट्रेटिव मजबूती देने के लिए स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने साल 2025 से 2031 के लिए 491।66 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है। इसी फंड का इस्तेमाल देश की बहुमूल्य प्राचीन धरोहरों को नष्ट होने से बचाने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने में किया जा रहा है।

क्या हैं ज्ञान भारतम मिशन के मुख्य उद्देश्य?

ज्ञान भारतम मिशन के तहत कई लक्ष्य तय किए गए हैं। इसमें मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पांडुलिपियों के डिजिटलाइजेशन और उनके डॉक्युमेंटशन की स्पीड को बढ़ाना है। देशभर में मौजूद पांडुलिपियों का सर्वे करने के साथ इसमें उनका ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन भी कराया जा रहा है। भारतीय पांडुलिपियों की सटीक कैटलॉगिंग करने से लेकर उन्हें अप टू डेट बनाने का टास्क भी है। पांडुलिपियों सभी तक पहुंचें और ये किताब के साथ-साथ मशीन रीडेबल यानी डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं, ये भी इस मिशन का एक बड़ा लक्ष्य है।

पांडुलिपियों को बचाने के लिए ट्रेनिंग, जागरूकता अभियानों और फाइनेंशियल मदद देने की तैयारी है। इसके अलावा भारतीय भाषाओं और पांडुलिपिविज्ञान की स्डडी, स्कॉलपशिप और रिसर्च को बढ़ावा देने की भी तैयारी की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि पांडुलिपियों की एक विशाल नेशनल डिजिटल रिपॉजिटरी भी तैयार की जाए।

मार्च 2026 में शुरू हुआ राष्ट्रीय सर्वेक्षण: 1.19 करोड़ से ज्यादा पांडुलिपियां रिपोर्ट की गईं

पांडुलिपियों के धारकों, संग्रहकर्ताओं और अलग अलग भाषाओं व लिपियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाओं की पहचान करने के लिए मार्च 2026 में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण शुरू किया गया था। इस सर्वे के दौरान देशभर से 1.19 करोड़ से अधिक पांडुलिपियों की मौजूदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। अभी देशभर में 8 लाख से अधिक डिजिटल पांडुलिपियां उपलब्ध हैं। इनमें से 4.40 लाख से अधिक पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम पोर्टल पर आम जनता के देखने के लिए उपलब्ध करा दिया गया है, जिन्हें राज्यवार आसानी से एक्सेस किया जा सकता है।

क्लस्टर सेंटर्स और राज्यों के साथ संस्थागत ढांचा

मिशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक मजबूत संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है। इसके तहत क्लस्टर सेंटर्स और इंडिपेंडेंट सेंटर्स बनाए गए हैं। इनमें यूनिवर्सिटी, रिसर्च इंस्टिट्यूट, पुस्तकालय, अभिलेखागार, निजी संरक्षक, धार्मिक संस्थान और दूसरे स्टेकहोल्डर्स शामिल हैं। इसके अलावा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने क्षेत्रों में ज्ञान भारतम के कार्यान्वयन के लिए नोडल कोआर्डिनेटिंग अथॉरिटी के रूप में जोड़ा गया है। उदाहरण के तौर पर, बिहार की कई प्रमुख संस्थाएं इस मिशन से जुड़ चुकी हैं, जिनमें नवा नालंदा महाविहार (नालंदा), खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी (पटना) और श्री बोधगया मठ (बोधगया) शामिल हैं।

कॉपीराइट और सुरक्षा का रखा जा रहा पूरा ध्यान

डिजिटल पांडुलिपियों तक एक्सेस देते समय इनके कस्टोडियनों और अधिकार धारकों के अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जिन पांडुलिपियों पर कोई कानूनी या तकनीकी रोक नहीं है उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी के माध्यम से सार्वजनिक और विद्वानों के शोध के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं संवेदनशील, प्रतिबंधित या अधिकार-संरक्षित पांडुलिपियों तक पहुंच के लिए उचित शर्तें और नियम लागू किए जाएंगे।

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देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

Gold Report: गोल्ड की बढ़ती चमक ने इसकी मांग सुस्त की लेकिन बिक्री वैल्यू रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई। इसका खुलासा वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों से हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council- WGC) की भारत पर बनी ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस साल 2026 की दूसरी तिमाही अप्रैल-जून 2026 में भारतीयों ने वॉल्यूम के हिसाब से कम सोना खरीदा लेकिन रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण सोने पर अब तक का सबसे अधिक खर्च किया। जून 2026 तिमाही में देश में गोल्ड की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131 टन रह गई, जो हालिया वर्षों में साल की सबसे कमजोर जून तिमाही में से एक रही।। हालांकि जितनी भी डिमांड रही, उसकी वैल्यू 50% बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.98 लाख करोड़ पर पहुंच गई, क्योंकि घरेलू बाजार में गोल्ड के भाव इस दौरान करीब 59% मजबूत हुए।

इस कारण कमजोर हुई गोल्ड की मांग

गोल्ड के सेल्स वॉल्यूम में गिरावट की मुख्य वजह इसके भाव में दो साल में ताबड़तोड़ तेजी रही। इसके अलावा मई के मध्य में आयात शुल्क में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और खरीदारी के लिए शुभ नहीं समझे जाने वाले महीने ने भी दबाव बनाया। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमतें कुछ नरम हुईं लेकिन आयात शुल्क और रुपये की कमजोरी के कारण भारत में इसके भाव ऊंचे बने रहे। हालांकि मार्च तिमाही की तुलना में जून तिमाही में अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के मौसम की खरीदारी के चलते ज्वेलरी की मांग 14% बढ़कर 75 टन हो गई लेकिन फिर भी सालाना आधार पर यह 15% कम रही और साल 2000 के बाद दूसरी सबसे कमजोर जून तिमाही रही।

बदला खरीदारी का तरीका

ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने सोना खरीदना बंद नहीं किया, बल्कि अपनी खरीदारी का तरीका बदल दिया। ज्वेलर्स के मुताबिक हल्के वजन, कम कैरेट और स्टडेड (रत्न जड़ी) ज्वेलरी की मांग बढ़ी। पुराने गहने बदलकर नए खरीदने का चलन भी तेज हुआ और कुछ ज्वेलर्स के मुताबिक उनकी कुल बिक्री का 70% तक हिस्सा इसी के जरिए आया और जून तिमाही में इसमें 10–20% की तेजी आई। जून तिमाही में ज्वेलरी की खरीदारी वॉल्यूम के हिसाब से भले ही कम हुई लेकिन वैल्यू 34% बढ़कर ₹1.13 लाख करोड़ हो गई। इस दौरान भारत दुनिया का सबसे बड़ा ज्वेलरी मार्केट बना रहा और ग्लोबल ज्वेलरी डिमांड में उसकी हिस्सेदारी 27% रही।

बार, कॉइन्स और गोल्ड ईटीएफ मिलाकर इंवेस्टमेंट डिमांड तीन धमाकेदार तिमाही के बाद जून तिमाही में कमजोर हुई। निवेश की मांग घटकर 54 टन रह गई जबकि इससे पहले की तीन तिमाहियों में औसतन मांग 100 टन की थी। हालांकि जून तिमाही में मांग घटने के बावजूद यह लॉन्ग टर्म एवरेज से ऊपर बनी रही।

बार और सिक्कों की खरीदारी मार्च तिमाही की तुलना में 19% घटकर जून तिमाही में 50 टन रह गई, क्योंकि कीमतों में तेज उछाल के बाद निवेशकों ने कुछ समय के लिए इंतजार करना उचित समझा। फिर भी सालाना आधार पर यह 9% अधिक रहा और इस साल की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीद 13 साल के रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गई।

गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो मार्च तिमाही में रिकॉर्ड निवेश के बाद जून तिमाही में इसकी मांग घटकर लगभग 4 टन रह गई। इसके बावजूद भारत उन देशों में शुमार रहा, जहां गोल्ड ईटीएफ में निवेश आया, जबकि अमेरिका और चीन जैसे देशों में निवेशकों ने पैसे निकाले। जून के अंत तक भारत में गोल्ड ईटीएफ की कुल होल्डिंग 119 टन और AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंच गईं।

सप्लाई की बात करें तो देश में गोल्ड की उपलब्धता घटकर 120 टन रह गई, जो पिछले छह साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने के आयात में भारी गिरावट रही। तिमाही आधार पर इसमें 53% और सालाना आधार पर 22% की गिरावट आई। हालांकि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि घरेलू बाजार में गोल्ड की कोई कमी नहीं थी। पहले से मौजूद स्टॉक और रिसाइकल्ड गोल्ड मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त रहा।

रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची कीमतों के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने की बजाय उन्हें गिरवी रखकर कर्ज लेना अधिक पसंद किया। बैंकों में बकाया गोल्ड लोन सालाना आधार पर दोगुना होकर ₹5.1 लाख करोड़ पहुंच गया, जबकि एनबीएफसी कंपनियों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 70% बढ़कर यह ₹3.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

EPF Account: रिटायरमेंट के तुरंत बाद PF का पूरा पैसा निकालना बड़ी भूल!

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को किया स्वतंत्रता दिवस का ऐलान, पाकिस्तान से आजादी और अब फहराएगा नया झंडा!

Republic of Balochistan: पाकिस्तान से आजादी का ऐलान करने के कुछ ही हफ्तों बाद खुद को रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान घोषित करने वाले समूह ने 11 अगस्त को अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस मनाने का फैसला किया है। इसके साथ ही बलूच समुदाय ने दुनिया के दूसरे देशों, ग्लोबल कम्युनिटी से एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में बलूचिस्तान को औपचारिक मान्यता देने की अपील फिर से की है।

CNN-न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने एक बयान जारी कर ऐलान किया है कि 11 अगस्त को बलूचिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। दुनिया भर में रहने वाले बलूच समुदाय से इस खास मौके पर राष्ट्रव्यापी और वैश्विक स्तर पर जश्न मनाने की अपील की गई है।

नया झंडा फहराने और जश्न मनाने का आह्वान

बलूच स्वतंत्रता संग्राम के नेता मीर यार बलूच ने लोगों से अपने घरों, मोहल्लों, बाजारों, दुकानों, शैक्षणिक संस्थानों और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र बलूचिस्तान का नया राष्ट्रीय ध्वज फहराने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य इस दिन के महत्व को बनाए रखना और इसके ऐतिहासिक संदर्भ को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान 11 अगस्त को ही अपना वास्तविक स्वतंत्रता दिवस मानता है और अब से यह दिन हर साल इसी तरह मनाया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए नए सिरे से अपील

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक संप्रभु राज्य के रूप में बलूचिस्तान को औपचारिक रूप से मान्यता देने और उनके रुख का समर्थन करने का नया आह्वान किया है। उनका मानना है कि जब तक पाकिस्तान अपने मौजूदा स्वरूप में कायम रहेगा तब तक इस क्षेत्र में स्थायी शांति, विकास और समृद्धि हासिल नहीं की जा सकती। बयान में यह दावा भी किया गया है कि रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान और उसके लगभग 6 करोड़ बलूच लोग खुद को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र मानते हैं।

स्वतंत्रता दिवस के लिए 11 अगस्त की तारीख ही क्यों?

बयान के मुताबिक 11 अगस्त 1947 वह ऐतिहासिक दिन था जब भारतीय उपमहाद्वीप से अंग्रेजों की वापसी के दौरान बलूचिस्तान ने सबसे पहले अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। बयान में दावा किया गया है कि इस स्वतंत्रता की घोषणा को द न्यूयॉर्क टाइम्स सहित अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने कवर किया था और ऑल इंडिया रेडियो ने भी इसका प्रसारण किया था। इसी ऐतिहासिक आधार पर बलूच राष्ट्र लगातार 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मानता आया है और भविष्य में भी इसी तारीख को यह दिवस मनाता रहेगा।

पाकिस्तान के इतिहास और भूमिका की कड़ी आलोचना

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अपने बयान में भारतीय उपमहाद्वीप के विभाजन के बाद के घटनाक्रमों और पाकिस्तान के रिकॉर्ड की जमकर आलोचना की है। बयान में कहा गया है कि विभाजन के बाद पूरे क्षेत्र में दशकों तक संघर्ष, अशांति, आतंकवाद, आर्थिक अस्थिरता और राजनीतिक संकट का दौर बना रहा। यह भी आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान की नीतियों ने न केवल दक्षिण एशिया बल्कि दुनिया के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित किया है।

कई ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र किया गया है। इनमें कश्मीर विवाद, मार्च 1948 में बलूचिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई, 1971 का संघर्ष जिसके बाद बांग्लादेश का निर्माण हुआ, जॉर्डन में फिलिस्तीनियों से जुड़ी सैन्य कार्रवाइयां, सोवियत-अफगान युद्ध, चागाई जिले में 1998 में पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण और अमेरिका में 9/11 के हमलों के बाद के घटनाक्रम शामिल हैं। बयान के मुताबिक, इन सभी वजहों से पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता, संघर्ष और खून-खराबा बढ़ा है।

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गौरतलब है कि बलूचिस्तान की ओर से 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है, वहीं भारत 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएगा।

डाबर के प्रोडक्ट्स पर FSSAI का बड़ा एक्शन! कई प्रोडक्ट्स पर लगाई रोक, शेयरों में 2.4% की गिरावट

Dabur India Share Price Fall: FMCG सेक्टर की प्रमुख कंपनी डाबर इंडिया के शेयरों में मंगलवार, 4 अगस्त को 2.42% की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही कंपनी के शेयर टूटकर ₹415.50 के स्तर पर आ गया। शेयर बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह खाद्य नियामक FSSAI द्वारा कंपनी के कई पॉपुलर फूड प्रोडक्ट्स पर भ्रामक ‘100%’ दावों के साथ बिक्री करने पर लगाया गया प्रतिबंध है।

खाद्य नियामक ने डाबर इंडिया को आदेश दिया है कि वह अपने उन सभी खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोके, जिन पर ‘100% Natural’, ‘100% Pure’ या ‘100% Organic’ जैसे भ्रामक और अस्पष्ट दावे लिखे गए हैं।

किन-किन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर लगा ब्रेक?

FSSAI ने डाबर के इन प्रोडक्ट्स पर रोक लगा दी हैं:

  • शहद और गाय का घी
  • एप्पल साइडर विनेगर
  • वर्जिन कोकोनट ऑयल व तिल का तेल
  • नारियल पानी और डाबर होममेड कोकोनट मिल्क

FSSAI ने क्यों लिया इतना कड़ा फैसला?

खाद्य सुरक्षा नियामक ने स्पष्ट किया कि ‘100% शुद्धता’ या ‘100% नेचुरल’ जैसे दावे नियमों के खिलाफ हैं। FSSAI के मुताबिक, FSS (Advertising & Claims) रेगुलेशन, 2018 के तहत ऐसे दावे अस्पष्ट, असत्यापित हैं और ये आम उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले हैं।

जांच में सामने आया कि ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक हनी’ पर बिना वैध FSSAI ऑर्गेनिक एंडोर्समेंट के ही ‘जैविक भारत’ का लोगो प्रदर्शित किया जा रहा था। ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ जैसे मिश्रित खाद्य पदार्थ पर ‘100% Purity’ लिखना नियमानुसार पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

नोटिस के बावजूद नहीं हुआ सुधार, अब 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट

FSSAI ने बताया कि उसने पहले भी डाबर इंडिया को ऐसे ‘100%’ प्योर वाले दावों को हटाने और विज्ञापन बंद करने का निर्देश दिया था। हालांकि, कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक पॉजिटिव कदम नहीं उठाया गया। अब नियामक ने कड़ा रुख अपनाते हुए डाबर को 15 दिनों के भीतर ‘Action Taken Report (ATR)’ सौंपने का आदेश दिया है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि उसे FSSAI का नोटिस मिल गया है और वह अपनी वेबसाइट व लेबलिंग की जांच कर आवश्यक कदम उठा रही है।

एफएमसीजी कंपनियों पर FSSAI का चौतरफा शिकंजा

यह कार्रवाई केवल डाबर तक सीमित नहीं है, बल्कि FSSAI पैकेज्ड फूड और ड्रिंक्स के क्षेत्र में विज्ञापन संबंधी नियमों को लेकर लगातार सख्ती बरत रहा है। हाल ही में पेप्सिको India ने अपने मशहूर ड्रिंक ‘Sting’ की कैन और बोतलों से ‘Energy’ शब्द हटा दिया था, क्योंकि नियामक ने ‘एनर्जी ड्रिंक्स’ को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता देना बंद कर दिया है।इससे पहले जूस बनाने वाली कंपनियों को भी टेट्रा पैक्स से ‘100% फ्रूट जूस’ का दावा हटाने के निर्देश दिए गए थे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में DMK नेता उदयनिधि स्टालिन को चेन्नई पुलिस ने किया गिरफ्तार, एक्ट्रेस तृषा को लेकर विवादित बयान पर विवादों में घिरे

Udhayanidhi Stalin arrest: तमिलनाडु में विपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को तंजावुर में DMK की एक रैली के दौरान एक्ट्रेस तृषा के बारे में विवादित टिप्पणी करने के आरोप में चेन्नई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना से विपक्षी DMK और सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब तंजावुर ईस्ट पुलिस ने एक विरोध सभा के दौरान DMK नेता की टिप्पणियों को लेकर मिली शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया।

इसके बाद पुलिस उदयनिधि स्टालिन के घर पहुंची और उन्हें पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। इसके बाद उनके घर के बाहर DMK कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। DMK ने सरकार पर उदयनिधि स्टालिन को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने का आरोप लगाया। मुख्य विपक्षी पार्टी ने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद उन्हें विधानसभा के चल रहे सत्र में हिस्सा लेने से रोकना था।

तमिलनाडु में सत्ताधारी पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) ने मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को राष्ट्रीय महिला आयोग में DMK यूथ विंग के सेक्रेटरी और विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। यह शिकायत 3 अगस्त को तंजावुर में DMK के एक प्रदर्शन के दौरान उनके द्वारा कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर की गई है। इसे फिल्म एक्ट्रेस पर निशाना साधकर कही गई बात माना जा रहा है।

विवादित बयान पर बवाल

तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन सोमवार को अभिनेत्री तृषा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद विवादों में घिर गए। उदयनिधि ने कावेरी जल विवाद को लेकर आयोजित विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की उदासीनता के कारण तमिलनाडु को कावेरी का एक बूंद पानी भी नहीं मिला। रैली के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने ‘तृषा, तृषा’ के नारे लगाए।

पीटीआई के मुताबिक, उदयनिधि ने इस पर अपना भाषण रोककर मुस्कुराते हुए कथित तौर पर ‘द्विअर्थी’ आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद उनका राजनीतिक विरोध शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में FIR दर्ज होने के बाद चेन्नई पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया है।

BJP ने बताया शर्मनाक बयान

तमिलनाडु की BJP इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने X पर कहा कि उदयनिधि की कथित द्विअर्थी टिप्पणी घृणित, अश्लील, आपत्तिजनक और शर्मनाक है। BJP नेता ने कहा, “सचमुच, कोई बदमाश या चोर भी, जिसकी मां, पत्नी या बेटी हो, इतनी अभद्र भाषा में बात नहीं करेगा। कोई भी मां, पत्नी या बेटी ऐसी टिप्पणी करने वालों को माफ नहीं करेगी।”

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उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी के लिए उदयनिधि को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। तिरुपति ने कहा, “इस तरह की निम्नस्तरीय भाषा के लिए उदयनिधि स्टालिन को गिरफ्तार कर जेल भेजना तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के लिए मार्कंडेयन (DMK विधायक) की गिरफ्तारी से अधिक श्रेयस्कर होगा। अब देखना होगा कि अदालतें इस टिप्पणी के लिए सजा देती हैं या जमानत मंजूर करती हैं।”

पूर्वोत्तर में भूस्खलन का खतरा, उत्तर भारत में भी भारी बारिश के आसार, IMD ने जारी किया अलर्ट

rain alert 4 august

Weather Alert 4 August:  भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देशभर में सक्रिय मानसून को देखते हुए 4 अगस्त के लिए ताजा मौसम अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश के साथ ही भूस्खलन होने की आशंका है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य भारत के कई हिस्सों में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। ALSO READ: Top News 4 August: जम्मू कश्मीर में बादल फटे, चीन का न्यूक्लियर सीक्रेट बेनकाब, EPFO वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी

 

जम्मू कश्मीर के 6 जिलों में बादल फटे

जम्मू-कश्मीर के 6 जिलों में बादल फटने से हाहाकार मच गया। कुपवाड़ा के लोलाब में बाढ़ में बहने से महिला की मौत हो गई। शोपियां में बारिश ने भारी तबाही मचाई। बाढ़ में फंसे 80 लोगों को बचाया गया है। डल झील में नाव में फंसे 4 युवकों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया है। मौसम विभाग ने अगले 2 दिन भी भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताई है।

 

पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका

आईएमडी के मुताबिक अगले 24 घंटों के दौरान असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में अत्यधिक बारिश हो सकती है। लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन और जलभराव का खतरा भी बना हुआ है। इसके अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने का अनुमान है।

 

 पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी वर्षा की चेतावनी जारी की गई है। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

 

दिल्ली, यूपी और मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश राज्यों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं के साथ भारी बारिश भी हो सकती है। 

 

वहीं, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। दूसरी ओर, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश जारी रहने की संभावना है। कई जिलों में एहतियात के तौर पर स्कूलों में अवकाश भी घोषित किया गया है। ALSO READ: उत्तर-पूर्व भारत में बाढ़ का खतरा, यूपी-दिल्ली से राजस्थान तक जानें मौसम का हाल

 

राजस्थान में बारिश की गतिविधियों में बदलाव

राजस्थान में पिछले 24 घंटों के दौरान पाली जिले के जैतारण में सबसे अधिक 161 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, मॉनसून ट्रफ के उत्तर की ओर खिसकने से जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभाग में बारिश की गतिविधियों में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, शेखावाटी, बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में 3 से 5 अगस्त के बीच हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी हुई है।

 

दक्षिण भारत में भी बरसेंगे बादल

दक्षिण भारत के केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। तटीय क्षेत्रों में तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। वहीं, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

US New Tariffs Row: भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ को लेकर डोनाल्ड ट्रंप का भारी विरोध, 25 अमेरिकी राज्यों ने ठोका मुकदमा

US New Tariffs Row: डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे।

ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के ग्लोबल इंपोर्ट ड्यूटी के स्थान पर लागू किए गए हैं। राज्यों का तर्क है कि व्हाइट हाउस जबरन मजदूरीसे जुड़ी चिंताओं का गलत इस्तेमाल करके एक बड़े टैरिफ सिस्टम को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इस साल की शुरुआत में उसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हार का सामना करना पड़ा था।

इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार 3 अगस्त को अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है।

जेम्स ने एक बयान में कहा, “सुप्रीम कोर्ट में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।” भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली।

बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, “प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे। लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।”

25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर

न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुकदमे में शामिल 25 राज्यों में से 23 में डेमोक्रेटिक गवर्नर हैं। जबकि नेवादा और वरमोंट में रिपब्लिकन गवर्नर हैं। कोर्ट में हार के बाद प्रशासन ने सेक्शन 301 का रास्ता अपनाया ट्रंप ने पहले ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए थे। उनका तर्क था कि अमेरिका का लगातार बना हुआ व्यापार घाटा एक राष्ट्रीय आपातकाल के बराबर है।

हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि यह कानून राष्ट्रपति को ऐसे टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसके चलते प्रशासन को उस व्यवस्था के तहत वसूले गए शुल्क (ड्यूटी) वापस करने पड़े। इसके बाद व्हाइट हाउस ने कुछ समय के लिए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया, जो 24 जुलाई को खत्म हो गया।

इसके बाद ‘ट्रेड एक्ट 1974’ के सेक्शन 301 के तहत मौजूदा शुल्क लागू किए गए। ट्रंप प्रशासन ने इन नए शुल्कों को सही ठहराने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया। उनका तर्क था कि प्रभावित देश जबरन मजदूरी (forced labour) से बने सामान के आयात को रोकने में नाकाम रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने टैरिफ का बचाव किया

ट्रंप प्रशासन ने इस मुकदमे को खारिज कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि ये टैरिफ कानूनी रूप से पूरी तरह सही हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल उन अनुचित कार्यों, नीतियों और प्रथाओं को खत्म करने के लिए कर रहा है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “किसी विदेशी देश का जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक न लगाना और उसे प्रभावी ढंग से लागू न कर पाना अनुचित है। इससे अमेरिकी व्यापार और अमेरिकी श्रमिकों पर बोझ पड़ता है। इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए। राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ कानूनी रूप से मजबूत हथियार साबित हुए हैं और अभी भी हैं।”

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ट्रंप ने ऊंचे टैरिफ का बचाव करते हुए इसे अपने आर्थिक एजेंडे का एक अहम हिस्सा बताया है। उनका तर्क है कि इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को फिर से बढ़ावा मिलेगा, घरेलू श्रमिकों की सुरक्षा होगी और व्यापार वार्ता में वाशिंगटन को बेहतर स्थिति मिलेगी।