अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक पार्टी शासित राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नए टैरिफ फैसले को अदालत में चुनौती दी है। राज्यों ने अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में याचिका दाखिल कर इन टैरिफ को अवैध घोषित करने की मांग की है। फैसले के तहत ट्रम्प ने 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। ये 60 देश अमेरिकी आयात का 99.4 फीसदी हिस्सा हैं। याचिका में कहा गया है कि इस कदम से देश में महंगाई बढ़ जाएगी। पिछले महीने अमेरिका ने जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) के मुद्दे पर 60 देशों पर 10 फीसदी से 12.5 फीसदी के बीच नए टैरिफ लगाए थे। भारत समेत 17 देशों पर 10 फीसदी की दर से टैरिफ लगाया गया है। डेमोक्रेटिक राज्यों का तर्क है कि प्रशासन ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का गलत इस्तेमाल कर रहा है। अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स का कहना है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के पास किसी भी देश पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… इथियोपिया में भूस्खलन से 14 की मौत, पवित्र जल लेने थे पहुंचे थे लोग इथियोपिया के अम्हारा इलाके में भारी बारिश के कारण सोमवार को हुए भूस्खलन में 14 लोगों की मौत हो गई और 7 अन्य घायल हो गए। कई लोग अभी भी लापता हैं। यह भूस्खलन त्सदकाने डेब्रे मिटमाक सेंट मैरी मठ में हुआ, जहां सैकड़ों श्रद्धालु पवित्र जल से शुद्धि की रस्म के लिए जमा हुए थे। डायोसिस के जनरल मैनेजर मेगाबे हादिस नेका तिबेब अबाबू ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया- “मरने वालों में से कई लोग पवित्र जल लेने के लिए जमा हुए थे। मरने वालों में से 11 लोगों को मठ में ही दफना दिया गया है, जबकि बाकी लोगों के शव उनके घर दिए गए हैं।”
अमेरिका के 25 डेमोक्रेटिक पार्टी शासित राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नए टैरिफ फैसले को अदालत में चुनौती दी है। राज्यों ने अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में याचिका दाखिल कर इन टैरिफ को अवैध घोषित करने की मांग की है। फैसले के तहत ट्रम्प ने 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए टैरिफ लगाए गए हैं। ये 60 देश अमेरिकी आयात का 99.4 फीसदी हिस्सा हैं। याचिका में कहा गया है कि इस कदम से देश में महंगाई बढ़ जाएगी। पिछले महीने अमेरिका ने जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) के मुद्दे पर 60 देशों पर 10 फीसदी से 12.5 फीसदी के बीच नए टैरिफ लगाए थे। भारत समेत 17 देशों पर 10 फीसदी की दर से टैरिफ लगाया गया है। डेमोक्रेटिक राज्यों का तर्क है कि प्रशासन ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का गलत इस्तेमाल कर रहा है। अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स का कहना है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के पास किसी भी देश पर मनमाने ढंग से टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… इथियोपिया में भूस्खलन से 14 की मौत, पवित्र जल लेने थे पहुंचे थे लोग इथियोपिया के अम्हारा इलाके में भारी बारिश के कारण सोमवार को हुए भूस्खलन में 14 लोगों की मौत हो गई और 7 अन्य घायल हो गए। कई लोग अभी भी लापता हैं। यह भूस्खलन त्सदकाने डेब्रे मिटमाक सेंट मैरी मठ में हुआ, जहां सैकड़ों श्रद्धालु पवित्र जल से शुद्धि की रस्म के लिए जमा हुए थे। डायोसिस के जनरल मैनेजर मेगाबे हादिस नेका तिबेब अबाबू ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया- “मरने वालों में से कई लोग पवित्र जल लेने के लिए जमा हुए थे। मरने वालों में से 11 लोगों को मठ में ही दफना दिया गया है, जबकि बाकी लोगों के शव उनके घर दिए गए हैं।”
कनाडा के गुरुद्वारे में गोलक के हिसाब को लेकर 2 गुट आपस में भिड़ गए। जिस वक्त ये घटना हुई, गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की मीटिंग चल रही थी। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान एक मेंबर की तरफ बरछा (भाला) ताने हुए नजर आए। मेहर सिंह गुट के लोगों ने आरोप लगाया कि प्रधान ने हमला करने की कोशिश की। इसके बाद दोनों गुटों में भिड़ंत हो गई। उन्होंने एक-दूसरे से धक्कामुक्की की और वहां जमकर हंगामा हो गया। इस झगड़े का CCTV फुटेज सामने आया है। जिसे 2 अगस्त को ‘जट्ट वी लाइक कनाडा’ नाम के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया। इसी पेज पर प्रधान का एक कथित ऑडियो भी पोस्ट किया गया, जिसमें उन पर लड़कियों को फोन करने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, दैनिक भास्कर इस ऑडियो की पुष्टि नहीं करता। 5 पॉइंट में जानें, CCTV में क्या दिख रहा… प्रधान पर क्या आरोप हैं?
गुरुद्वारे के प्रधान सुरजीत सिंह पंजाब के अमृतसर जिले के चिट्टा गांव के रहने वाले हैं। वह पिछले करीब 10 साल से गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी से जुड़े हैं। आरोप है कि गोलक का हिसाब मांगने पर उन्होंने गुस्से में हमला करने की कोशिश की। पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी नहीं
खबर लिखे जाने तक मॉन्ट्रियाल पुलिस की ओर से इस मामले में किसी शिकायत, केस दर्ज होने या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। घटना का CCTV सोशल मीडिया पर वायरल है। घटना के बाद संगत में नाराजगी
वीडियो सामने आने के बाद कनाडा में सिख संगत और भारतीय समुदाय में नाराजगी है। श्रद्धालुओं ने धार्मिक स्थल पर हिंसा और हथियार निकालने को गुरु घर की मर्यादा के खिलाफ बताया। संगत ने गोलक के पैसों की निष्पक्ष जांच, प्रधान को पद से हटाने और नए प्रबंधक की नियुक्ति की मांग की है। ************** ये खबर भी पढ़ें…
अमेरिकी पुलिस गुरुद्वारे में जूते पहनकर घुसी, VIDEO:सिर भी नंगा; गोलक को लेकर हुआ था झगड़ा अमेरिका की पुलिस एक गुरुद्वारे में जूते पहनकर ही अंदर घुस गई। जिस जगह पुलिस वाले खड़े थे, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब का पवित्र स्वरूप भी रखा हुआ था। इसका वीडियो सामने आते ही पंजाब में सिख संगठनों में गुस्सा है। उन्होंने इसे मर्यादा के उलट बताया है। पुलिस यहां गोलक को लेकर हुए विवाद के बाद आई थी (पढ़ें पूरी खबर)
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीसीसीआई से अब गौतम गंभीर को पहले जैसा मजबूत समर्थन नहीं मिल रहा है। पिछले एक साल के मुकाबले उनकी स्थिति बदल गई है और टीम के प्रदर्शन को लेकर उन पर दबाव बढ़ गया है। टीम के हालिया प्रदर्शन के बाद बोर्ड के कुछ अधिकारियों और टीम से जुड़े कुछ लोगों के बीच उनके काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि, बोर्ड और टीम से जुड़े कुछ अहम लोगों का भरोसा भी पहले जैसा नहीं रहा।
गंभीर से खुश नहीं बीसीसीआई
cricblogger.com की रिपोर्ट्स के अनुसार, गंभीर कभी भी हार की जिम्मेदारी खुद लेते हैं, वह हार का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ते हैं। बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों का मानना है कि टीम की हार के बाद गौतम गंभीर अक्सर खिलाड़ियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) या सपोर्ट स्टाफ को जिम्मेदार ठहराते हैं। वहीं टीम प्रबंधन के फैसलों की जिम्मेदारी कम ही लेते हैं। रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया कि इस सोच का असर अब भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में भी देखने को मिल रहा है। वहीं टीम के कुछ सीनियर खिलाड़ियों ने निजी तौर पर पूर्व क्रिकेटरों और बीसीसीआई के कुछ अधिकारियों के सामने गौतम गंभीर के कोचिंग के तरीके पर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
श्रीलंका दौरा होगा अहम
रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई के भीतर गौतम को लेकर माहौल पहले जैसा नहीं रहा है। ऐसे में श्रीलंका दौरा गौतम गंभीर के लिए काफी अहम माना जा रहा है। अगर इस सीरीज में भी टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, तो उनके कामकाज पर सवाल और बढ़ सकते हैं। हाल के टेस्ट मुकाबलों और इंग्लैंड दौरे में खराब प्रदर्शन के बावजूद गंभीर को उनके 2027 तक के कॉन्ट्रैक्ट का सहारा है। माना जा रहा है कि विश्व कप से पहले बीसीसीआई जल्दबाजी में मुख्य कोच को हटाने जैसा बड़ा फैसला नहीं करेगा।
कब उठे थे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार के बाद गौतम गंभीर पर ज्यादा सवाल नहीं उठे थे, क्योंकि उस समय हार की जिम्मेदारी मुख्य रूप से खिलाड़ियों पर डाली गई थी। बाद में उनकी आलोचना तब बढ़ी जब उन्होंने टीम के खराब प्रदर्शन की वजह बदलाव के दौर (ट्रांजिशन) को बताया। आलोचकों ने इस पर सवाल उठाए, क्योंकि अपने कार्यकाल की शुरुआत में गंभीर खुद कह चुके थे कि टीम में किसी तरह का ट्रांजिशन नहीं चल रहा है।
CWG 2026: ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव का शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम भार वर्ग में मेडल जीता है। वहीं मुकाबले के दिन ज्ञानेश्वरी यादव पीरियड्स के दर्द से परेशान थीं। पीरियड्स के पहले दिन असहनीय दर्द के बाद भी ज्ञानेश्वरी ने अपना ध्यान लक्ष्य से नहीं हटने दिया।उन्होंने कहा कि पूरे मुकाबले के दौरान वह खुद को लगातार फोकस बनाए रखने के लिए प्रेरित करती रहीं और आखिरकार ग्लासगो में सिल्वर मेडल जीतने में सफल रहीं। वहीं अब उनका अगला लक्ष्य सितंबर महीने में होने वाले एशियन गेम्स है। हाल ही में ज्ञानेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पीरियड्स के दर्द के दौरान कैसे गेम पर फोकस बनाए रखा
पीरियड्स के दौरान भी की थी ट्रेनिंग
पीटीआई से बातचीत में ज्ञानेश्वरी यादव ने बताया, “मैंने पहले भी पीरियड्स के दौरान ट्रेनिंग की थी, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि पीरियड्स के पहले दिन ही मुझे कॉम्पिटिशन में उतरना पड़ा। उस समय मैं खुद से बार-बार कह रही थी कि ध्यान मत भटकने देना। मेरे परिवार और कोच ने भी लगातार मेरा हौसला बढ़ाया और भरोसा दिलाया कि सब ठीक होगा।” उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मुकाबले में शांत रहकर प्रदर्शन किया और पहली लिफ्ट सफल होने के बाद उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया।
ज्ञानेश्वरी ने कहा, “मैंने खुद से कहा कि मेरे लक्ष्य के सामने यह दर्द कुछ भी नहीं है। इसी सोच ने मुझे अपनी सभी लिफ्ट सफलतापूर्वक पूरी करने की ताकत दी।”
माता-पिता ने दिया साथ
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय वर्षों की मेहनत, परिवार, कोच और राजनांदगांव के लोगों के सहयोग को दिया। ज्ञानेश्वरी ने कहा, “हर सफलता के पीछे लंबा संघर्ष होता है। मेरे माता-पिता ने भी मेरे साथ हर मुश्किल का सामना किया। आज भी मुझे याद है कि मेरे पिताजी रोज साइकिल से मुझे जिम लेकर जाते थे। उन्होंने मुझसे कहा था कि वह खुद नेशनल या इंटरनेशनल लेवल तक नहीं पहुंच सके, लेकिन चाहते थे कि मैं उनका सपना पूरा करूं और देश का नाम रोशन करूं।”
छत्तीसगढ़ सरकार ने दिया 30 लाख का इनाम
ज्ञानेश्वरी यादव की शानदार उपलब्धि के बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें सम्मानित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने उनके लिए 30 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्हें पुलिस विभाग में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) के पद पर विशेष प्रमोशन देने को भी मंजूरी दे दी गई।

IMD Rain Alert: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के विभिन्न हिस्सों में मॉनसून की सक्रियता को देखते हुए 4 अगस्त के लिए अलर्ट जारी किया है। उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों—विशेषकर असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका जताई गई है। वहीं, दिल्ली-एनसीआर, यूपी, राजस्थान और मध्य भारत के राज्यों में भी हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।
उत्तर-पूर्व और पूर्वी भारत में रेड अलर्ट जैसी स्थिति
मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों में अगले 24 घंटों में सबसे ज्यादा सतर्कता की आवश्यकता है। असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में बहुत भारी वर्षा हो सकती है। इसके अलावा नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है।
पूर्वी भारत की बात करें तो बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। निचले इलाकों में जलभराव और नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को मुस्तैद रहने की सलाह दी गई है।
दिल्ली, यूपी और मध्य भारत का मौसम
उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम मिला-जुला रहेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कहीं-कहीं तेज हवाएं और भारी बारिश हो सकती है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। दूसरी ओर, कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र के घाट क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रहेगी। कई जिलों में एहतियातन स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।
राजस्थान में कैसा रहेगा मॉनसून?
राजस्थान में पिछले 24 घंटों के दौरान पाली जिले के जैतारण में सर्वाधिक 161 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम केंद्र के अनुसार, मॉनसून के ट्रफ लाइन के खिसकने से जोधपुर, उदयपुर और कोटा संभाग में बारिश की गतिविधियों में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि, शेखावाटी क्षेत्र, बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में 3 से 5 अगस्त के दौरान हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिलेगी।
दक्षिण भारत का हाल
दक्षिण भारत में केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। तटीय इलाकों में तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है, जबकि तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।

Supreme Court on Live-in Relationship: सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A का दायरा बढ़ाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई लिव-इन रिश्ता 'शादी जैसा' है और दोनों पक्षों का विवाह करने का इरादा था, तो महिला पार्टनर को भी कानून के तहत पत्नी जैसा सुरक्षा अधिकार मिलेगा। ऐसे रिश्तों में महिला के साथ क्रूरता करने पर पुरुष पार्टनर और उसके रिश्तेदारों पर मुकदमा चलाया जा सकता है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि हर लिव-इन रिलेशनशिप पर यह दंडात्मक प्रावधान (IPC 498A) लागू नहीं होगा। यह कानून केवल उन लिव-इन रिश्तों पर लागू माना जाएगा जो बालिग व्यक्तियों की आपसी सहमति से बने हों, 'शादी जैसे रिश्ते' की श्रेणी में आते हों और जिनमें विवाह करने का इरादा रिश्ते का अहम हिस्सा रहा हो। अदालत ने यह भी साफ किया कि यह साबित करने की शुरुआती जिम्मेदारी उसी महिला पर होगी जो कानून के तहत सुरक्षा चाहती है।
शुरुआती जांच के बिना नहीं होगी गिरफ्तारी
सुप्रीम कोर्ट ने दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े निर्देश भी जारी किए हैं। पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी से बचाव के नियमों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
कोर्ट का आदेश : लिव-इन पार्टनर या उसके रिश्तेदारों पर यदि महिला के साथ क्रूरता का आरोप लगता है, तो शुरुआती जांच के बिना किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की जाएगी।
अनुच्छेद 14 का हवाला और कानून की व्याख्या
शीर्ष अदालत ने कहा कि धारा 498A के तहत मिलने वाली सुरक्षा के मामले में शादीशुदा महिला और 'शादी जैसे लिव-इन रिश्ते' में रहने वाली महिला के बीच फर्क करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है, क्योंकि इसका मुख्य मकसद घरेलू हिंसा और क्रूरता को रोकना है।
कोर्ट ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत केवल IPC की धारा 498A तक ही सीमित रहेगा और इस व्याख्या का असर किसी अन्य कानूनी प्रावधान पर नहीं पड़ेगा।

Yogi Adityanath statement on Ram Temple funds: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने गरीब, युवा, महिला व किसान के मुद्दे पर विपक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ये सभी डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है।
एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन, तय होगा न्यूनतम मानदेय
सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है।
किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने
मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया। उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।
खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश
सीएम ने किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, 21 चीनी मिलें औने-पौने दाम पर बेच दी गईं, लेकिन हमारी सरकार में 3.23 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है। 122 में से 105 से अधिक चीनी मिलें चौथे-पांचवें दिन ही किसानों के खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था। ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।
नकारात्मकता की राजनीति त्यागें विपक्ष के साथी
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। सीएम ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है।
संवाद से ही सरकार कर सकी बेहतर काम
सीएम ने कहा कि 9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।
विधायिका से संभव होता है गरीबों के जीवन में परिवर्तन
सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है।
सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।
आधी आबादी के जीवन में व्यापक परिवर्तन
सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधी आबादी के जीवन में भी व्यापक परिवर्तन आया है। 2017 में जो महिला श्रमबल 12 फीसदी था, वह अब बढ़कर 37-38 फीसदी से अधिक हो गया है। डबल इंजन सरकार सभी बड़े महानगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और उसमें 20 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ प्रदेश सरकार ने कीर्तिमान स्थापित किया है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे युवाओं का अभिनंदन
सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सुरक्षा व अन्य कारणों से निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। लाखों युवाओं को अपने जनपद, क्षेत्र में नौकरी व रोजगार की गारंटी मिली है। परंपरागत उद्यम को प्रोत्साहित करते हुए एक जनपद-एक उत्पाद और पीएम विश्वकर्मा आदि योजनाओं से व्यापक बदलाव हुए हैं। करोड़ों नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे युवाओं का अभिनंदन किया।
विधानसभा व परिषद के सदस्य सावन के आयोजनों में लेंगे भाग
मुख्यमंत्री ने सावन में शिवभक्तों की आस्था को भी नमन किया और कहा कि देश-प्रदेश में शिवभक्त हर-हर, बम-बम के उत्साहपूर्ण माहौल में शिवभक्ति को निवेदित कर रहे हैं। अभी से करोड़ों शिवभक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार के पावन धाम में हर की पैड़ी से गंगाजल लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। शासन, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी, सामाजिक, व्यापारिक व धार्मिक संगठनों ने उनके स्वागत, सुरक्षा, सुविधा के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विधानसभा व परिषद के सदस्य भी 7 अगस्त से इन आयोजनों में भाग लेंगे।
सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा करें जनप्रतिनिधि
सीएम ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा बनाए रखने के लिए कार्य करें। सरकारी कर्मचारियों, आउटसोर्स व संविदा कार्मिकों ने 9 वर्षों में मेहनत की पराकाष्ठा दिखाई है, ऐसे में सरकार उनके वेलफेयर के लिए भी कार्य कर रही है। अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा दी गई। साथ ही सरकार ने अनुदेशकों, शिक्षामित्रों के मानदेय को भी बढ़ाया है।
पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

Har Ghar Tiranga Abhiyan 2026 UP: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के विद्यालय इस बार राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और जनभागीदारी के सबसे बड़े केंद्र बनेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने 14 अगस्त के 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' और 15 अगस्त तक चलने वाले 'हर घर तिरंगा अभियान-2026' को विद्यालयों के माध्यम से जनआंदोलन का स्वरूप देने की व्यापक तैयारी पूरी कर ली है।
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना जारी करते हुए प्रदेशभर के विद्यालयों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, संविधान के प्रति सम्मान और तिरंगे के गौरव का संदेश घर-घर पहुंचाया जाएगा।
अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस को जनभागीदारी, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का व्यापक जन अभियान बनाना है। इसके अंतर्गत सभी बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में निर्धारित कार्यक्रमों का समयबद्ध आयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रत्येक गतिविधि में विद्यार्थियों की अधिकतम भागीदारी, सामुदायिक सहयोग और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर होंगे विशेष आयोजन
14 अगस्त को प्रदेश के सभी विद्यालयों में 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मनाया जाएगा। विद्यार्थियों को भारत विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों, उसके मानवीय प्रभाव तथा राष्ट्रीय एकता के महत्व से परिचित कराया जाएगा। विद्यालयों में विशेष व्याख्यान, परिचर्चा, प्रदर्शनी और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे, ताकि नई पीढ़ी इतिहास से सीख लेकर राष्ट्रीय अखंडता, सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति संवेदनशील बने।
'हर घर तिरंगा' बनेगा जनभागीदारी का अभियान
15 अगस्त तक चलने वाले 'हर घर तिरंगा अभियान-2026' के अंतर्गत विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विद्यालय अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार का केंद्र बनेंगे और स्थानीय समुदाय की सहभागिता सुनिश्चित करेंगे, ताकि तिरंगे के सम्मान और राष्ट्रगौरव का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।
प्रतियोगिताओं और तिरंगा यात्राओं से गूंजेंगे विद्यालय
अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में निबंध, चित्रकला, भाषण, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रभात फेरी, तिरंगा यात्रा तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों को राष्ट्रीय ध्वज संहिता, संविधान में निहित मूल कर्तव्यों तथा राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका से भी परिचित कराया जाएगा, ताकि उनमें राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व और गौरव की भावना और अधिक सशक्त हो।
डिजिटल माध्यमों से भी जुड़ेगा अभियान
अभियान से जुड़ी गतिविधियों का व्यापक प्रचार-प्रसार डिजिटल एवं सोशल मीडिया माध्यमों से भी किया जाएगा। विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि कार्यक्रमों के फोटो एवं वीडियो निर्धारित माध्यमों पर साझा किए जाएं। साथ ही विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को 'हर घर तिरंगा' अभियान के आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान नई पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और संविधान के प्रति सम्मान के संस्कार विकसित करने का सशक्त माध्यम है। उत्तर प्रदेश के विद्यालय इस अभियान के सबसे बड़े केंद्र बनेंगे। हमारा प्रयास है कि प्रत्येक विद्यार्थी तिरंगे के सम्मान, स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों और विकसित भारत के संकल्प से जुड़े। विद्यालयों से उठने वाला राष्ट्रगौरव का यह संदेश प्रत्येक घर तक पहुंचे और जनभागीदारी के माध्यम से स्वतंत्रता दिवस एक सच्चे राष्ट्रीय उत्सव का स्वरूप ग्रहण करे।

-डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी
सावन के इस महीने में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में कांवड़ियों के झुंड कंधों पर गंगाजल लिए शिवत्व को आत्मसात करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं तो यह सनातन परंपरा की उस अनंत धारा का साक्षात प्रकटीकरण है जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना में प्रवाहित होती रही है। यह महीना शिव-आराधना का सबसे पवित्र काल है। यही वह समय है जब पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था और सृष्टि को विनाश से बचाया था।
कांवड़िए गंगाजल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं तो यह उस देवता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है, जिसने संसार के कल्याण के लिए विष पिया। यह त्याग और भक्ति के शाश्वत सिद्धांत की जीवंत अभिव्यक्ति है। आस्था के इसी धरातल पर, यदि हम इस यात्रा को सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप में देखें, तो ऐसी संरचना उभरती है जिसमें मनुष्य की सामूहिक चेतना, अनुशासन और सामाजिक सहयोग की गहरी परतें हैं। यही गहराई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूर्ण समर्पण से इन तपस्वियों के प्रति सेवा भाव के लिए प्रेरित करती है।
इस यात्रा का मूल तत्व आस्था और अनुशासन है। आस्था मनुष्य की सहनशक्ति बढ़ा देती है। सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा, वह भी भीषण गर्मी और मानसून की अनिश्चितता के बीच, किसी सामान्य शारीरिक क्षमता का काम नहीं। श्रद्धा के आवेग में शरीर धीरे-धीरे थकान की सीमाओं को पार करता जाता है। शिव भक्त को अपने शरीर की सीमाओं का नए सिरे से साक्षात्कार होता है। यह अनुभव दीर्घकालिक और सामूहिक है। यहां प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहभागिता केंद्र में होती है। शरीर की यह परीक्षा व्यक्ति को यह सिखाती है कि सीमाएं जितनी भौतिक होती हैं, उतनी ही मानसिक भी, और अक्सर मन शरीर से पहले हार मान लेता है।

इसी बिंदु से मानसिक अनुशासन का प्रश्न जुड़ता है। लंबी पदयात्रा में कांवड़ियों को एक निश्चित संयम और मर्यादा का पालन भी करना पड़ता है। समय पर विश्राम, भोजन में सादगी, और सबसे महत्वपूर्ण, कांवड़ को भूमि पर न रखने जैसे नियमों का निर्वहन। यह अनुशासन स्वेच्छा से स्वीकार किया गया प्रतिबंध है। जब कोई व्यक्ति किसी बड़े लक्ष्य के लिए स्वयं को संयमित करता है, तो उसमें आत्म-नियंत्रण की क्षमता विकसित होती है। अनेक कांवड़िए इस अनुभव को केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि आत्म-परिष्करण की एक प्रक्रिया के रूप में वर्णित करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो कांवड़ को भूमि पर न रखने का नियम भी गहरा प्रतीकात्मक अर्थ रखता है। यह जल साक्षात गंगा का, स्वयं शिव की जटाओं से प्रवाहित पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय परंपरा में तप, व्रत और संयम को सदा मोक्ष के मार्ग के रूप में देखा गया है, और कांवड़ यात्रा इसी तपस्या-परंपरा का समकालीन रूप है।
समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखें तो कांवड़ यात्रा ऐसी सामूहिकता है जो सामाजिक ढांचों, जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति की सीमाओं को अस्थायी रूप से धुंधला कर देती है। सड़क पर चलते समय एक मजदूर और एक व्यापारी, दोनों समान रूप से थकान और कष्ट साझा करते हैं। यह साझा अनुभव एक अस्थायी किंतु सशक्त बंधन उत्पन्न करता है। मनुष्य के सामाजिक स्वभाव में यह प्रवृत्ति गहराई से अंतर्निहित है कि साझा कष्ट और साझा उद्देश्य समुदाय को अधिक दृढ़ता से बांधते हैं। साझा सुख में यह दृढ़ता नहीं होती।
इसी सामूहिकता में सेवा शिविरों की व्यवस्था भी है। मार्ग में स्थान-स्थान पर स्थापित सेवा शिविर, जहां स्थानीय निवासी, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक निःशुल्क भोजन, विश्राम और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं, पूरी यात्रा का सामाजिक आधार बनाते हैं। यह स्वतःस्फूर्त सामुदायिक सहयोग का उदाहरण है। हजारों परिवार और संस्थाएं बिना किसी प्रत्यक्ष लाभ की अपेक्षा के इस व्यवस्था में योगदान देती हैं। आज के दौर में जहां आधुनिक शहरी जीवन व्यक्तिवाद और पारस्परिक अलगाव की ओर बढ़ रहा है, कांवड़ यात्रा वर्ष में एक बार ही सही, पारस्परिक निर्भरता और सामुदायिक दायित्व की भावना को पुनर्जीवित करती है।
राज्य की भूमिका पर विचार किए बिना यह विषय पूरा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते वर्षों में इस यात्रा को व्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय बनाने की दिशा में जो प्रयास किए हैं, वे एक स्पष्ट सांस्कृतिक दृष्टि का प्रतिबिंब हैं। मार्ग प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, ड्रोन निगरानी, स्वच्छता अभियान, पुष्प वर्षा और यातायात प्रबंधन जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि योगी सरकार श्रद्धालुओं को भीड़ के रूप में नहीं, सम्मानित आस्था-यात्रियों के रूप में देखती है।
योगी आदित्यनाथ स्वयं धर्माचार्य हैं और उनके नेतृत्व में यह प्रयास सांस्कृतिक पुनर्जागरण या 'सनातन गौरव की पुनर्स्थापना' के रूप में देखा जाता है। एक ऐसी दृष्टि जिसके अंतर्गत काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण, अयोध्या में राम मंदिर के आसपास के अवसंरचनात्मक कायाकल्प, और कुंभ जैसे आयोजनों की भव्यता को भी रखा जा सकता है। कांवड़ यात्रा मार्ग की हर सड़क, हर लाइट, हर सेवा शिविर, आस्था और शासन के बीच सम्मानजनक संबंध का प्रतीक है। स्वाभाविक है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक विषय पर भिन्न मत भी होते हैं, और कुछ टिप्पणीकार इस विषय पर अलग दृष्टिकोण भी रखते हैं परंतु व्यापक जनसमर्थन और श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप है।
कांवड़ यात्रा को सिर्फ आस्था या अनुशासन के ही रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह यात्रा वास्तव में इन दोनों तत्वों के संगम पर खड़ी है जहां आध्यात्मिक विश्वास शारीरिक कष्ट को अर्थ प्रदान करता है, और शारीरिक कष्ट उस विश्वास को अधिक सघन, अधिक प्रत्यक्ष और अधिक अनुभवजन्य बना देता है। आस्था के बिना यह यात्रा केवल एक कठिन शारीरिक परीक्षा रह जाती और अनुशासन के बिना यह केवल भावुक उन्माद बनकर रह जाती। किंतु, जब लाखों भक्त शिव के प्रति अपने प्रेम में एक साथ चलते हैं, कष्ट सहते हैं और फिर भी मुस्कुराते हुए 'बोल बम' का उद्घोष करते हैं, तब यह केवल सामाजिक व्यवहार नहीं रह जाता, यह सनातन धर्म की अजेय जीवंतता का प्रमाण बन जाता है।
जब राज्य स्वयं आगे बढ़कर इस आस्था को गरिमा, सुरक्षा और सम्मान देता है, तो यह सभ्यता की उस स्मृति के प्रति राजकीय कृतज्ञता है जिसने हमें सनातन पहचान दी है। इन दोनों के संतुलन में ही इस परंपरा की वास्तविक शक्ति निहित है। एक ऐसी शक्ति जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ती है, समुदाय को एक-दूसरे से जोड़ती है, और राष्ट्र को उसकी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ती है। (लेखक श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में वेद विभागाध्यक्ष हैं)

