MP-CG में Jio का जलवा! ब्रॉडबैंड ग्राहक 21 लाख के पार, नए सस्ते Wi-Fi और TV कॉम्बो प्लान लॉन्च

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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ टेलीकॉम सर्किल में रिलायंस जियो ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख के पार पहुंच गई है।भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, MP-CG सर्किल में जियोफाइबर और FWA आधारित जियोएयरफाइबर सेवाओं से 46 हजार से अधिक नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े हैं। इसी अवधि में एयरटेल के करीब 14 हजार नए ब्रॉडबैंड ग्राहक जुड़े।
 

रिपोर्ट के अनुसार, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में सभी टेलीकॉम कंपनियों के कुल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 35 लाख से अधिक हो चुकी है। इनमें अकेले जियो के ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 21 लाख से ज्यादा है। वहीं, मोबाइल सेवाओं में भी जियो का मजबूत प्रदर्शन जारी है और कंपनी के मोबाइल ग्राहकों की संख्या 5.05 करोड़ से अधिक हो चुकी है।

 

इस उपलब्धि के साथ जियोहोम ने डिजिटल मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट को हर घर तक पहुंचाने के लिए नए और बेहद किफायती सर्विस पैक पेश किए हैं। कंपनी ने विशेष रूप से टीवी मनोरंजन पसंद करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए ‘टीवी-ओनली’ पैक लॉन्च किया है।
 

‘टीवी-ओनली’ पैक

इस पैक के तहत ग्राहक प्रभावी रूप से मात्र 400 रुपये प्रति माह की लागत पर टीवी मनोरंजन का लाभ ले सकते हैं। यह पैक 2 महीने और 5 महीने की अवधि के विकल्पों में उपलब्ध है। इसके माध्यम से ग्राहक 1,000 से अधिक लाइव टीवी चैनलों का आनंद ले सकते हैं। इनमें 200 से अधिक HD चैनल और 15 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल शामिल हैं।

‘वाई-फाई-ओनली’ पैक

इसी तरह, केवल इंटरनेट की सुविधा चाहने वाले ग्राहकों के लिए ‘वाई-फाई-ओनली’ पैक भी उपलब्ध हैं। 30 Mbps स्पीड वाला पैक 2,200 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 450 रुपये प्रति माह है। वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला पैक 3,000 रुपये में 5 महीने के लिए उपलब्ध है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 600 रुपये प्रति माह है।

 

ग्राहकों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जियोहोम ने ऑल-इन-वन  विकल्प भी उपलब्ध कराए हैं। 3-इन-1 कॉम्बो पैक में 30 Mbps की इंटरनेट स्पीड, 1,000  लाइव टीवी चैनल और 12 OTT ऐप्स की सुविधा उपलब्ध है। यह पैक 2,222 रुपये में 4 महीने के लिए लिया जा सकता है, जिसकी प्रभावी मासिक लागत 555 रुपये प्रति माह है।वहीं, 100 Mbps स्पीड वाला कॉम्बो पैक 2,122 रुपये में 3 महीने के लिए उपलब्ध है। इसकी प्रभावी मासिक लागत 707 रुपये प्रति माह है।

 

इन नए पैक्स के माध्यम से जियोहोम ग्राहकों को उनकी जरूरतों और बजट के अनुरूप टीवी, मनोरंजन और हाई-स्पीड इंटरनेट के किफायती तथा सुविधाजनक विकल्प उपलब्ध करा रहा है।

VIDEO: ऑफिस की लाइव मीटिंग में लड़की ने लगा लिया फेस मास्क! Gen Z की इस हरकत को कूलनेस कहें या लापरवाही?

सोशल मीडिया पर एक ऑफिस मीटिंग का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में Gen Z के वर्क कल्चर को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में एक युवा कर्मचारी ऑनलाइन ऑफिस कॉल के दौरान फेस मास्क लगाए नजर आती है। मैनेजर के सवाल पर युवा कर्मचारी का दिया गया रिप्लाई सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा। कुछ लोग कर्मचारी के जवाब का समर्थन कर रहे हैं, तो कई इसे अनप्रोफेशनल बिहेवियर बता रहे हैं।

मैनेजर ने कैमरा ऑन करने को कहा

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 28 सेकेंड के वीडियो में एक ऑनलाइन ऑफिस मीटिंग के दौरान मैनेजर बार-बार कर्मचारी से अपना कैमरा ऑन करने के लिए कहता है। मैनेजर ने युवा कर्मचारी से कहा, “क्या आप प्लीज अपना कैमरा चालू कर सकती हैं? मैं आपके साथ प्लान शेयर करूंगा। क्या आप प्लीज अपना कैमरा चालू कर सकती हैं?” वहीं इसके बाद जब कर्मचारी कैमरा ऑन करती है, तो वह चेहरे पर फेस मास्क लगाए दिखाई देती है। यह देखकर मैनेजर हिंदी में कहता है, “यह सब आप अपने लंच टाइम पर किया करो।”

15 मिनट का होता है लंट टाइम

इस पर कर्मचारी तुरंत जवाब देती है, “आप लंच टाइम में ही 15 मिनट का समय देते हो। मेरे फेस पैक को सूखने में 20 मिनट लगते हैं।” इसके बाद वह पूछती है, “क्या मैं अब अपना कैमरा बंद कर सकती हूं?” ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों के बीच इसे लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी। कुछ लोगों का मानना है कि ये Gen Z के काम करने के तरीके को दिखाता है, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि ये वीडियो सिर्फ सोशल मीडिया पर ध्यान खींचने के लिए बनाया गया है।

लोगों ने किया कमेंट

कई यूजर्स ने वीडियो के असली होने पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने कर्मचारी के जवाब की आलोचना की। एक यूजर ने कमेंट किया, “उम्मीद है कि ये स्क्रिप्टेड होगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं है, तो ये गलत है। अगर आप किसी ऑर्गनाइजेशन के लिए काम कर रहे हैं, तो आपको उनके नियमों का पालन करना होगा। अगर आप खुश नहीं हैं, तो बस चले जाइए। वह काम करने के लिए बहुत ज़्यादा हकदार है और अपनी नौकरी की कद्र नहीं करती।” दूसरे यूजर ने कहा, “पता नहीं भारतीय कंपनियों को कैमरा चालू करने का इतना जुनून क्यों है?? मेरी शकल देखकर क्या करेगा भाई?”

Crude Oil Price: क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट, अचानक प्राइस गिरने की वजह क्या है?

क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। भारतीय समय के मुताबिक, 4 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड 2.23 फीसदी गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड तो एक समय 3 फीसदी से ज्यादा गिर गया था। शाम करीब 6 बजे यह 2.84 फीसदी की गिरावट के साथ 78 डॉलर प्रति बैरल था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर जल्द समझौते की उम्मीद

क्रूड ऑयल की कीमतों में अचानक गिरावट की वजह अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बहुत जल्द यहां तक कि मंगलवार या बुधवार को समझौता हो सकता है। अगर दोनों देशों के बीच यह समझौता हो जाता है तो क्रूड की कीमतों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा।

अमेरिका और ईरान में समझौते के लिए बातचीत जारी

सीएनबीसी से बातचीत में बेसेंट ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते जहाजों की आवाजाही जल्द शुरू हो जाने की उम्मीद जताई। यह पूछने पर कि क्या प्रस्तावित समझौते से ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का इस्तेमाल करने वाले जहाजों से टोल वसूलने का अधिकार मिल जाएगा, उन्होंने कहा कि अमेरिका का भरोसा आवाजाही की आजादी में है।

पहले भी अमेरिका और ईरान में समझौते की कोशिशें हो चुकी हैं

बेसेंट के इस बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि दोनों देशों के बीच मामले के हल के लिए कूटनीतिक स्तर पर कोशिशें जारी हैं। हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका से किसी तरह की सीधी बातचीत से इनकार किया है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच समझौते की कई कोशिशें हो चुकी हैं। लेकिन, उनका कोई नतीजा नहीं निकला।

छह महीने मध्यपूर्व में जारी लड़ाई से क्रूड की कीमतों में उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई 28 फरवरी को हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। हालांकि, 120 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के बाद कीमतों में नरमी आई हैं। इसके बावजूद ये लड़ाई से पहले के अपने लेवल से काफी ऊपर हैं। क्रूड की ऊंची कीमतें भारत के लिए अच्छा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड में उछाल से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा चुकी हैं।

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहने से ऑयल की सप्लाई पर पड़ सकता है असर

भारत क्रूड की अपनी 90 फीसदी जरूरत इंपोर्ट करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ जाता है। लंबे समय तक क्रूड के हाई लेवल पर रहने का काफी खराब असर सरकार की सेहत पर पड़ेगा। स्ट्रेट ऑफ होर्मजु के रास्ते जहाजों की आवाजाही नहीं होने से भारत में क्रूड की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।

Commonwealth Games में भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने जीते 16 पदक (Video)

Neeraj Chopra

भारतीय सेना ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अपने खिलाड़ियों के ‘शानदार प्रदर्शन’ की मंगलवार को तारीफ की और कहा कि यह अलग-अलग खेलों में उनके जोश और लगन का सबूत है।सेना ने बताया कि उसके खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में 16 पदक जीते और इस बात पर जोर दिया कि ये उपलब्धियां विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने और देश की खेल से जुड़ी उम्मीदों को आगे बढ़ाने के लिए उसकी प्रतिबद्धता को फिर से साबित करती हैं।

सेना ने कहा, ‘‘हर काम, देश के नाम, जनरल धीरज सेठ, सीओएएस और भारतीय सेना में सभी पद के लोग राष्ट्रमंडल खेले ग्लास्गो 2026 में शानदार प्रदर्शन के लिए भारतीय सेना के खिलाड़ियों को दिल से बधाई देते हैं।’’ सेना ने बताया कि उसके खिलाड़ियों ने जूडो, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, पैरा-एथलेटिक्स और भारोत्तोलन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने जीत के पलों की झलक दिखाने वाली एक वीडियो क्लिप भी साझा की।

सेना ने कहा, ‘‘भारतीय सेना के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन उनके जोश और लगन का सबूत है। ये उपलब्धियां विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने और मिशन ओलंपिक 2036 के जरिए देश की खेल से जुड़ी उम्मीदों को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को फिर से साबित करती हैं।’’

तीन अगस्त को संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने कुल 39 पदक जीते जिसमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक शामिल हैं। भारत चौथे स्थान पर रहा। गुजरात का अहमदाबाद 2030 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करेगा जिससे दो दशक बाद इस प्रतियोगिता की भारत में वापसी होगी।भारत ने पिछली बार 2010 में नयी दिल्ली में इन खेलों की मेजबानी की थी।

क्या पाकिस्तान का नक्शा बदलने वाला है और उससे अलग नया देश बन पाएगा बलूचिस्तान? समझिए आजादी के दावे के पीछे कितना दम

Balochistan Claim Explained: रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का दावा करने वाले बलूच समूहों ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस घोषित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील तेज कर दी है। पाकिस्तान से आजादी का ऐलान करने के बाद बलूचों के इस ग्लोबल कैंपेन ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बलूचिस्तान वास्तव में दुनिया का सबसे नया संप्रभु देश बन सकता है और क्या इससे पाकिस्तान का नक्शा बदल जाएगा? इसको लेकर सोशल मीडिया पर कैंपेन चल रहे हैं लेकिन इंटरनेशन कानून और ग्लोबल डिप्लोमेसी का इतिहास बताता है कि सिर्फ स्वतंत्रता का ऐलान कर देने से ही कोई नया देश अस्तित्व में नहीं आ जाता। किसी भी क्षेत्र को नए राष्ट्र के रूप में स्थापित होने के लिए कूटनीतिक मान्यता, रीजनल कंट्रोल और इंटरनेशनल वैलिडेशन की सबसे बड़ी चुनौतियों से पार पाना होता है।

आजादी का ऐलान केवल पहला कदम, संप्रभुता के लिए क्या हैं नियम?

अंतरराष्ट्रीय कानून किसी भी क्षेत्र या समूह द्वारा खुद को स्वतंत्र घोषित करने पर प्रतिबंध नहीं लगाता। हालांकि सिर्फ एकतरफा ऐलान कर देने से ऑटोमेटिकली कोई नया देश नहीं बन जाता। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मोंटेवीडियो कन्वेंशन के मानदंडों के मुताबिक किसी क्षेत्र को संप्रभु राज्य के रूप में काम करने के लिए मुख्य रूप से चार शर्तों को पूरा करना जरूरी होता है-

  • 1 – उस क्षेत्र में एक स्थायी आबादी होनी चाहिए।
  • 2 – उस देश की एक डिफाइंड टेरिटरी और बॉर्डर होना चाहिए।
  • 3 – उस देश में एक प्रभावी सरकार होनी चाहिए।
  • 4 – दूसरे संप्रभु देशों के साथ संबंध स्थापित करने की क्षमता होनी चाहिए।

अगर बलूच समूह इनमें से कुछ शर्तों का आंशिक रूप से दावा भी करते हैं तब भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बिना कोई भी नया क्षेत्र वैश्विक संस्थाओं का हिस्सा नहीं बन सकता।

कूटनीतिक मान्यता: बलूचिस्तान के राह की सबसे बड़ी रुकावट

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने ग्लोबल कम्युनिटी से संप्रभुता स्वीकार करने की अपील की तो है लेकिन अब तक दुनिया के किसी भी देश ने इसे आधिकारिक रूप से मान्यता नहीं दी है। कूटनीतिक मान्यता एक संप्रभु देश द्वारा लिया जाने वाला विशुद्ध राजनीतिक निर्णय होता है। जब तक बलूचिस्तान को अन्य देशों से औपचारिक कूटनीतिक मान्यता नहीं मिलती, तब तक वह संयुक्त राष्ट्र (UN) का सदस्य नहीं बन सकता। इसके अलावा अन्य देशों के साथ सामान्य कूटनीतिक संबंध स्थापित नहीं कर सकता। इसके साथ ही साथ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (जैसे IMF, विश्व बैंक) का फायदा उसे नहीं मिल सकता।

जमीनी हकीकत: पाकिस्तान का प्रशासनिक व सैन्य नियंत्रण

संप्रभु देश का दर्जा हासिल करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानदंडों में से एक प्रभावी क्षेत्रीय नियंत्रण है। भले ही बलूचिस्तान के अलग अलग हिस्सों में अलगाववादी संगठन सक्रिय हैं लेकिन इस्लामाबाद अभी भी अपने नागरिक प्रशासन, सुरक्षा बलों और न्यायिक प्रणाली के माध्यम से इस पूरे प्रांत पर संवैधानिक और प्रशासनिक नियंत्रण रखता है। जब तक पाकिस्तान का इस प्रांत पर व्यावहारिक और प्रशासनिक नियंत्रण बना रहता है तब तक बलूचिस्तान की संप्रभुता के किसी भी दावे को व्यावहारिक धरातल पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर क्या कहता है?

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का तर्क है कि उनके लोगों के पास आत्मनिर्णय का अधिकार है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दस्तावेज आत्मनिर्णय के अधिकार को स्वीकार करते हैं लेकिन इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून मौजूदा संप्रभु राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता की भी कड़ाई से रक्षा करता है। ऐतिहासिक रूप से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में ही किसी देश से अलग होने का समर्थन किया है, जैसे कि औपनिवेशिक शासन से मुक्ति या व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन के साथ लंबे समय से जारी सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में।

क्या भारत दे सकता है बलूचिस्तान को मान्यता?

बलूच नेताओं द्वारा कूटनीतिक समर्थन की अपील के बाद यह सवाल भी उठता है कि क्या भारत बलूचिस्तान को एक अलग देश के रूप में मान्यता दे सकता है? भारत का आधिकारिक और पुराना कूटनीतिक रुख यही रहा है कि वह बलूचिस्तान को पाकिस्तान का अभिन्न अंग मानता है। भारत ने बलूचिस्तान में मानव अधिकारों के उल्लंघन और सुरक्षा चिंताओं का मुद्दा तो बार-बार उठाया है लेकिन उसने अलगाववादी दावों या अलग देश की घोषणा को कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी है। किसी भी अलग हुए क्षेत्र को मान्यता देना भारत की लंबी अवधि की विदेश नीति में एक बहुत बड़ा बदलाव होगा, जिसके व्यापक भू-राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।

इतिहास के सबक: सिर्फ घोषणा से नहीं बनते नए देश

आपको बता दें कि दुनिया का इतिहास भी इस बात का गवाह है कि सिर्फ स्वतंत्रता की घोषणा करने से राज्य का दर्जा नहीं मिल जाता। इसे कोसोवो के उदाहरण से समझा जा सकता है। कोसोवो ने 2008 में अपनी आजादी की घोषणा की थी और उसे 100 से अधिक देशों ने मान्यता दी है लेकिन इसके बावजूद कई बड़ी वैश्विक शक्तियां आज भी इसे पूर्ण देश नहीं मानती हैं। सोमालीलैंड, उत्तरी साइप्रस और ट्रांसनिस्ट्रिया जैसे क्षेत्रों के पास वर्षों से अपना खुद का शासन ढांचा है लेकिन व्यापक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मान्यता न मिलने की वजह से वे आज भी औपचारिक देशों की श्रेणी से बाहर हैं।

पाकिस्तान के लिए चुनौतियां और बलूचिस्तान का भविष्य

बलूच अलगाववादी समूहों की यह ताजा घोषणा ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक सुरक्षा, राजनीतिक अस्थिरता, खैबर पख्तूनख्वा में उग्रवाद और बलूचिस्तान में जारी उग्रवाद से जूझ रहा है। 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस घोषित करने और कूटनीतिक अपील करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बलूचिस्तान के मुद्दे पर ध्यान जरूर आकर्षित हुआ है। हालांकि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कानूनी और कूटनीतिक ढांचे के तहत बलूचिस्तान के एक मान्यता प्राप्त संप्रभु देश बनने की राह बेहद कठिन और अनिश्चित है। जब तक प्रभावी क्षेत्रीय नियंत्रण, व्यापक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मान्यता और वैश्विक संस्थाओं में प्रवेश हासिल नहीं होत, तब तक सिर्फ स्वतंत्रता के दावों से अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बलूचिस्तान की कानूनी स्थिति रातों-रात नहीं बदल सकती।

शेख हसीना का भाषण रोकने से भारत का इनकार:बांग्लादेश की मांग पर कहा- हमें उससे मतलब नहीं, कल 2 साल बाद दिखेंगी पूर्व PM

भारत सरकार ने कहा है कि 5 अगस्त को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ऑनलाइन संबोधन से उसका कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, यह कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इस मंच पर रखे जाने वाले किसी भी विचार का सरकार समर्थन भी नहीं करती। दरअसल, शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वह 5 अगस्त को नई दिल्ली स्थित ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA)’ के कार्यक्रम में वीडियो लिंक के जरिए शामिल होंगी। अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह पहली बार होगा, जब वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आएंगी। बांग्लादेश ने भारत से भाषण रोकने की अपील की थी फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) नई दिल्ली स्थित पत्रकारों का एक पेशेवर संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। शेख हसीना इसी संगठन के कार्यक्रम में वीडियो लिंक के जरिए शामिल होंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक चलेगा। बांग्लादेश ने कल सोमवार को भारत से अपील की थी कि शेख हसीना या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े किसी भी व्यक्ति को भारत की जमीन से राजनीतिक भाषण देने या ऐसी गतिविधियां करने की अनुमति न दी जाए, जिससे बांग्लादेश में अस्थिरता फैल सकती हो। यह मुद्दा सोमवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर और ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात के दौरान भी उठाया गया था। शेख हसीना ने 5 अगस्त का दिन ही क्यों चुना 5 अगस्त 2024 को ही छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। प्रदर्शनकारी उनके सरकारी आवास तक पहुंच गए थे। इसके बाद वह इस्तीफा देकर सेना के विमान से भारत आ गई थीं। यानी जिस दिन उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी, उसी दिन वह दो साल बाद फिर लोगों के सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि वह इसी दिन अपनी राजनीतिक वापसी का मैसेज देना चाहती हैं। हसीना के साथ उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के दूसरे नेता भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। उम्मीद है कि हसीना बताएंगी कि वह बांग्लादेश कब लौटेंगी। हाल ही में उन्होंने कहा था कि वह दिसंबर में वापस जाकर अदालत के सामने पेश होंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें पता है कि लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी जान को खतरा हो सकता है।

PoK का सच दिखाया तो भड़का पाकिस्तान! ‘अल जजीरा’ पर कसा शिकंजा, जानिए क्या है PoK की हकीकत

Al Jazeera ban in Pakistan

Al Jazeera ban in Pakistan: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हालिया चुनावी घटनाक्रम और सरकार विरोधी प्रदर्शनों की निष्पक्ष कवरेज करने पर कतर के अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क 'अल जजीरा' पर पाकिस्तान सरकार की गाज गिरी है। पाकिस्तान में अल जजीरा की वेबसाइट को ब्लॉक किए जाने की खबरें हैं। जानिए इस पूरे विवाद का विवरण और क्या है PoK से जुड़ा ऐतिहासिक व राजनीतिक मामला।

 

मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया दावों के मुताबिक, शहबाज शरीफ सरकार ने कतर के इस प्रमुख समाचार नेटवर्क की अंग्रेजी वेबसाइट तक पहुंच को बाधित (ब्लॉक) कर दिया है। हालांकि पाकिस्तान सरकार ने औपचारिक रूप से बैन का आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन देश भर में यूजर्स अल जजीरा की वेबसाइट एक्सेस नहीं कर पा रहे हैं। ALSO READ: PoK के रावलकोट में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता, मुनीर ने पाकिस्तानी क्रिकेटर को ही गोलियों से भून डाला

पाकिस्तान सरकार का आरोप

पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अल जजीरा की रिपोर्टिंग पर सख्त ऐतराज जताते हुए उस पर 'चुनिंदा रिपोर्टिंग' और 'पीत पत्रकारिता' करने का आरोप लगाया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जारी बयान में कहा कि अल जजीरा ने PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद के कुछ चुनिंदा मतदान केंद्रों से एकतरफा रिपोर्टिंग की और चुनिंदा लोगों के बयानों को दिखाकर पूरी चुनाव प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश की। पाकिस्तान का दावा है कि इस तरह की कवरेज बाहरी ताकतों के उस एजेंडे को बढ़ावा देती है जिसका मकसद लोकतांत्रिक प्रक्रिया और जनादेश को कमजोर करना है। ALSO READ: PoK में विरोध प्रदर्शन पर MEA का बड़ा बयान, Hormuz और Pakistan को लेकर क्या है भारत का प्लान

CPJ की चिंता, पत्रकारों के गायब होने से बवाल

दूसरी ओर, प्रेस की स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मीडिया पर बढ़ते प्रतिबंधों और सेंसरशिप पर गहरी चिंता व्यक्त की है। CPJ के अनुसार, 1 अगस्त को स्वतंत्र पत्रकार राजी ताहिर और उनके सहयोगी मुहम्मद सैफ को इस्लामाबाद स्थित उनके दफ्तर से पुलिस की वर्दी में आए लोग उठा ले गए, जिसके बाद से वे लापता हैं।

 

एक अन्य कश्मीरी पत्रकार राजा इकराम को भी 1 अगस्त को हिरासत में लिया गया था, हालांकि उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। CPJ का कहना है कि 5 जून से ही PoK में आंशिक इंटरनेट बंदी, टेलीकॉम सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध और अल जजीरा जैसी वैश्विक वेबसाइट्स को ब्लॉक करना यह साबित करता है कि पाकिस्तान मीडिया की आवाज दबाने के लिए हर संभव हथकंडा अपना रहा है। ALSO READ: पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK/PoJK): कब बनेगा भारत का हिस्सा, जानिए इतिहास

क्या है PoK से जुड़ा पूरा मामला?

वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के बाद, पाकिस्तान ने कबायलियों के वेश में अपनी सेना भेजकर जम्मू-कश्मीर रियासत के एक बड़े भू-भाग पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। इसे भारत पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) कहता है। पाकिस्तान इस क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटकर देखता है— एक हिस्से को वह 'आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK)' कहता है और दूसरे हिस्से को 'गिलगित-बाल्टिस्तान'।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत का स्पष्ट और निरंतर रुख रहा है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (जिसमें PoK और गिलगित-बाल्टिस्तान शामिल हैं) भारत का अखंड और अभिन्न अंग है। 1994 में भारतीय संसद में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव के तहत, पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली करना होगा।

PoK में जनता का आक्रोश

PoK में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ स्थानीय जनता में भारी असंतोष है। महंगाई, भारी टैक्स, बुनियादी सुविधाओं की कमी, राजनीतिक अधिकारों के हनन और चुनावों में धांधली को लेकर मुजफ्फराबाद, रावलकोट, और कोटली जैसे इलाकों में अक्सर बड़े पैमाने पर उग्र प्रदर्शन होते रहे हैं। पाकिस्तान जब भी यहां दिखावे के लिए चुनाव कराता है, तो उस पर भारी धांधली और सेना के हस्तक्षेप के आरोप लगते हैं।

RBI MPC Meet: 5 अगस्त के फैसले से क्या आपकी FD पर बढ़ेगा ब्याज? जानिए क्या है एक्सपर्ट्स की उम्मीदें

RBI Monetary Policy Repo Rate Update: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 5 अगस्त 2026 को अपनी अहम पॉलिसी का ऐलान करने वाली है। इस घोषणा से पहले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वाले निवेशक टकटकी लगाए बैठे हैं कि क्या बैंक अब उन्हें एफडी पर ज्यादा ब्याज देंगे?

यह सवाल इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि जून में रिटेल महंगाई दर बढ़कर 4.38% हो गई है, जो पिछले 17 महीनों में पहली बार RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर निकली है। हालांकि, महंगाई अभी भी RBI के 2% – 6% के दायरे में है, लेकिन कोर इन्फ्लेशन भी 4% के करीब बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि कीमतों का दबाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुआ है।

तो क्या इस पॉलिसी के बाद FD निवेशकों को ज्यादा रिटर्न मिलेगा? आइए समझते हैं पूरा सिनेरियो।

क्या RBI रेपो रेट में करेगा बदलाव?

अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे 5.25% पर ही बरकरार रखेगा। आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक फिलहाल ‘वेट-एंड-वॉच’ की नीति अपना सकता है।

पीएल कैपिटल की लीड इकोनॉमिस्ट प्राची केले का कहना है, ‘हमें उम्मीद है कि मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच MPC सतर्क रुख अपनाएगी। भविष्य की नीतियों के लिए वह डेटा-आधारित अप्रोच रखेगी। अगस्त की बैठक में हम रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रहने की उम्मीद कर रहे हैं।’

अगर रेपो रेट नहीं बढ़ा, तो क्या FD रेट्स बढ़ेंगे?

अगर RBI रेपो रेट में बढ़ोतरी नहीं करता है, तो निवेशकों को तत्काल कोई बड़ी खुशखबरी नहीं मिलेगी, लेकिन इसका एक फायदा यह भी है कि बैंक फिलहाल डिपॉजिट रेट्स में कटौती भी नहीं करेंगे। FD की ब्याज दरें सिर्फ रेपो रेट पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि इन 3 प्रमुख कारकों पर भी तय होती हैं:

लिक्विडिटी: बैंकों के पास नकदी की स्थिति कैसी है।

लोन की डिमांड: अगर बाजार में कर्ज की मांग ज्यादा है और बैंकों को अतिरिक्त फंड की जरूरत है, तो वे बिना रेपो रेट बढ़े भी FD पर ब्याज बढ़ा सकते हैं।

प्रतिस्पर्धा: ग्राहकों के डिपॉजिट को आकर्षित करने के लिए बैंकों के बीच की आपसी प्रतिस्पर्धा।

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी ने कहा, ‘वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद उम्मीद है कि RBI अपना रुख जस का तस रखेगा। अगर ऐसा होता है, तो FD निवेशकों को इस स्थिर ब्याज दर वाले माहौल का फायदा मिलता रहेगा और रिटर्न पहले की तरह अनुमानित रहेगा।’

सीनियर सिटीजन्स के लिए कैसा है माहौल?

वरिष्ठ नागरिकों के लिए एफडी पर अभी भी शानदार मौके हैं। कई बैंक वरिष्ठ नागरिकों को चुनिंदा अवधियों पर आम जमाकर्ताओं के मुकाबले 0.50% से ज्यादा का प्रीमियम दे रहे हैं, जिससे उनका कुल ब्याज 8% से भी ऊपर चला जाता है। हालांकि, यह दरें बैंक-दर-बैंक अलग होती हैं।

FD निवेशकों को क्या करना चाहिए?

महंगाई दर और वैश्विक हालात को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि ब्याज दरें फिलहाल ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी। हालांकि, FD रेट्स में कोई भी बड़ी बढ़ोतरी केवल एक पॉलिसी पर नहीं, बल्कि बैंकों की फंडिंग जरूरतों पर निर्भर करेगी। वैसे अगर आप निवेश करने का प्लान बना रहे हैं, तो लंबी अवधि की एफडी लॉक करने से पहले बैंकों के अलग-अलग रेट्स की तुलना जरूर कर लें।