अरुणाचल की 27 जगहों को मैप पर अलग से दिखाया:राज्य से सलाह के बाद फैसला; चीन ने कई बार भारतीय सीमा वाले इलाकों के नाम बदले

भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है।

अरुणाचल की 27 जगहों को मैप पर अलग से दिखाया:राज्य से सलाह के बाद फैसला; चीन ने कई बार भारतीय सीमा वाले इलाकों के नाम बदले

भारत सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया। यह कदम चीन की ओर से सीमावर्ती राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान सुनिश्चित करना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्रालय ने बयान में कहा, “भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की राज्य सरकार से सलाह लेकर राज्य में स्थित कुल 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर उनके मानक नामों के साथ दर्ज किया है।” बयान में कहा गया कि इन जगहों को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज करने का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान आसान बनाना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन समय-समय पर अरुणाचल प्रदेश की जगहों के लिए नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता। लॉन्गजू में 1959 में चीनी सेना पहुंची थी सर्वे ऑफ इंडिया के नक्शे पर औपचारिक रूप से दर्ज जगहों में वास्तविक नियंत्रण रेखा(LAC) के पास स्थित लॉन्गजू भी शामिल है। 1959 में चीनी सेना के इस इलाके में घुसने के बाद लॉन्गजू भारत-चीन सीमा तनाव के शुरुआती केंद्रों में से एक बना था। अपर सुबनसिरी जिले का पास का माजा गांव भी इन जगहों में शामिल है। जयरामपुर सुरक्षा बलों के लिए लॉजिस्टिक्स हब चांगलांग जिले का जयरामपुर भी पहचानी गई जगहों में शामिल है। यह एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब है, जो पूर्वी अरुणाचल प्रदेश और म्यांमार सीमा की ओर सुरक्षा बलों की आवाजाही में मदद करता है।

‘एक और पाकिस्तान…’, आतंकवाद पर को शेख हसीना के बेटे ने दिखाया आईना, भारत ने कही ये बात

भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे साजीब वाजेद जॉय के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया दी। बता दें कि, जॉय ने दावा किया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बढ़ते आतंकवाद के कारण बांग्लादेश, भारत के पूर्वी हिस्से के लिए “एक और पाकिस्तान” बन गया है। शुक्रवार 8 अगस्त को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मुद्दे पर कहा कि भारत पूरी तरह सतर्क है और पड़ोसी देशों में हो रही हर गतिविधि पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने कहा, “हम अपने क्षेत्र और पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते हैं। सुरक्षा के लिहाज से हर स्थिति की निगरानी की जाती है और जरूरत पड़ने पर उचित कदम भी उठाए जाते हैं।”

हसीना के बेटे ने क्या दावा किया?

साजीब वाजेद जॉय ने यह बयान बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम साउथ एशिया फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (एफसीसी) की ओर से आयोजित किया गया था। उन्होंने यह बात बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन से पहले कही। भारत की सुरक्षा का जिक्र करते हुए जॉय ने दावा किया कि “भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता यह होनी चाहिए कि बांग्लादेश उसके पूर्वी मोर्चे पर एक और पाकिस्तान बनता जा रहा है।” उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) को बांग्लादेश में खुलकर काम करने की छूट मिली हुई है।

शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन पर क्या बोला विदेश मंत्रालय?

बांग्लादेश में 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए बड़े आंदोलन के बाद शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं। हसीना के पद छोड़ने के बाद मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उनकी देखरेख में देश में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हुई और इस साल फरवरी में चुनाव कराए गए।

इस बीच, भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि शेख हसीना के वर्चुअल संबोधन के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा, “जिस कार्यक्रम की बात की जा रही है, उसका आयोजन एक निजी मीडिया संस्था कर रही है। इसमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है और न ही सरकार उस मंच पर रखे जाने वाले विचारों का समर्थन करती है।”

Retirement Planning: क्या सिर्फ पोस्ट ऑफिस स्कीम के भरोसे आपका रिटायरमेंट सुरक्षित होगा? 8.2% रिटर्न देने वाली योजना की लिमिटेशन भी जानिए

Retirement Planning:  जीवन के पड़ाव में रिटायरमेंट एक ऐसा समय होता है जब पहली बार नियमित वेतन आना बंद हो जाता है। इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वर्षों की अपनी जमा-पूंजी और बचत को अगले 20 या 30 सालों तक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से कैसे चलाया जाए। ऐसी स्थिति में अगर पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाएं सेवानिवृत्त लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। पोस्ट ऑफिस की योजनाएं पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा समर्थित हैं और इनमें निवेश करने के बाद निवेशकों को रोजाना शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।

हालांकि, रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ पैसों को सुरक्षित जगह पर रखना भर नहीं होता है। बावजूद इसके कि सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों के लिए पोस्ट ऑफिस योजनाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनी हुई हैं, लेकिन वे तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब वे एक बड़ी और व्यापक फाइनेंशियल प्लानिंग की जाए। अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वहां लगाने से पहले, यह समझना भी बेहद जरूरी है कि आप अपनी बचत का कैसा इस्तेमाल चाहते हैं।

क्या सिर्फ सुरक्षित होना काफी है?

अधिकांश सेवानिवृत्त लोग असाधारण रिटर्न पाने के पीछे नहीं भागते हैं। वे आमतौर पर यह भरोसा चाहते हैं कि जब भी उन्हें जरूरत हो उनकी बचत सुरक्षित और उपलब्ध रहे। इस मामले में पोस्ट ऑफिस की योजनाएं बेहतरीन साबित होती हैं। सरकार समर्थित होने की वजह से इनमें एक तय अवधि के लिए मिलने वाला रिटर्न पहले से पता होता है। जो लोग बाजार के जोखिमों से डरते हैं, उनके लिए यह निश्चितता काफी राहत देने वाली होती है। लेकिन रिटायरमेंट सिर्फ पैसे की रक्षा करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के बारे में भी है कि आपका पैसा समय के साथ आपके लिए काम करता रहे।

विभिन्न जरूरतें और पोस्ट ऑफिस की प्रमुख योजनाएं

हर पोस्ट ऑफिस निवेश योजना एक ही उद्देश्य को पूरा नहीं करती है। कुछ स्कीम नियमित इनकम देने के लिए बनाई गई हैं, जबकि अन्य लंबी अवधि की बचत के लिए बेहतर हैं।

सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम: 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए यह एक सुरक्षित 5-वर्षीय सरकारी जमा योजना है। इस पर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की उच्च ब्याज दर के साथ तिमाही भुगतान मिलता है। इस खाते में न्यूनतम 1000 रुपये के मल्टिपल में ही जमा किया जा सकता है और अधिकतम निवेश की सीमा 30 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): यह भी 5 साल की एक निवेश योजना है जिसमें एकल (Single) या संयुक्त (Joint) खाता खोला जा सकता है। यह 7.4 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर पर गारंटीकृत मासिक आय प्रदान करती है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): इंडिया पोस्ट आम जनता के लिए कोई एक्सक्लूसिव रिटायरमेंट पेंशन तो खुद नहीं देता, लेकिन यह एनपीएस जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं के लिए ऑथराइज डिस्ट्रिब्यूटर के रूप में काम करता है। 18 से 70 वर्ष की आयु के नागरिकों के लिए यह एक स्वैच्छिक, बाजार से जुड़ी योजना है। इसमें काम करने के दौरान नियमित योगदान दिया जाता है और 60 वर्ष की आयु पर जमा राशि का एक हिस्सा कर-मुक्त निकाला जा सकता है, जबकि शेष राशि से मासिक एन्युटी (खरीदी जाती है।

अटल पेंशन योजना (APY): 18 से 40 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को टारगेटेट यह एक गारंटीकृत पेंशन योजना है। इसमें अंशदान के स्तर के आधार पर 60 वर्ष की आयु से 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की निश्चित मासिक पेंशन मिलती है।

बेहतर विकल्प का चुनाव केवल ब्याज दर पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने मासिक खर्चों को कैसे पूरा करने की योजना बनाते हैं।

पूरा फंड एक जगह न लॉक करें: लिक्विडिटी का रखें ध्यान

सुरक्षित महसूस होने वाले प्रॉडक्ट्स में अपनी पूरी रिटायरमेंट पूंजी निवेश कर देना लुभावना लग सकता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जिंदगी में योजना के मुताबिक सब कुछ चलना मुश्किल होता है। कोई मेडिकल इमरजेंसी, घर की मरम्मत या परिवार के किसी सदस्य की अचानक आर्थिक मदद करने जैसी स्थितियों में तुरंत कैश (नकद) की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगर आपका एक-एक रुपया तय अवधि वाले फिक्स्ड-टेन्योर निवेशों में बंधा होगा, तो कम समय में पैसे का इंतजाम करना काफी कठिन हो सकता है।

महंगाई दर पर ध्यान देना है बेहद जरूरी

सेवानिवृत्ति के बाद आपके खर्चे साल-दर-साल एक समान नहीं रहते हैं। स्वास्थ्य सेवा का खर्च, बिजली के बिल और दैनिक घरेलू सामान समय के साथ महंगे होते जाते हैं। अगर आपकी पूरी रिटायरमेंट पूंजी दशकों तक केवल फिक्स्ड रिटर्न ही कमाती है, तो समय के साथ आपकी पर्चेजिंग पावर धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। यही वजह है कि कई रिटायर्ड लोग अपनी बचत का कम से कम एक हिस्सा ऐसे निवेशों में रखते हैं जो जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर लंबी अवधि में महंगाई को मात देने वाला बेहतर ग्रोथ दे सकें।

आपकी रिटायरमेंट आय का स्रोत तय करेगा सही रणनीति

जिस व्यक्ति को पर्याप्त पेंशन मिल रही है, उसका निवेश का तरीका उस व्यक्ति से अलग हो सकता है जो पूरी तरह से अपनी बचत पर ही निर्भर है। अगर आपकी पेंशन, किराया या अन्य निवेश पहले से ही अधिकतर मासिक खर्चों को कवर कर रहे हैं तो पोस्ट ऑफिस की योजनाएं आपके पोर्टफोलियो का सिर्फ एक हिस्सा बन सकती हैं। लेकिन अगर आपकी जमा पूंजी ही आपकी आय का प्राथमिक जरिया है तो सही प्रॉडक्ट्स का मिश्रण चुनना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

सिर्फ ब्याज दरों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय, यह अनुमान लगाकर शुरुआत करें कि आपको वास्तव में हर महीने कितने पैसे की आवश्यकता होगी। पोस्ट ऑफिस बचत योजनाएं भारत में सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट निवेशों में से एक हैं और जीवन के उस मोड़ पर स्थिरता प्रदान करती हैं जब वित्तीय निश्चितता का मूल्य सबसे अधिक होता है। फिर भी उन्हें आपके पूरे रिटायरमेंट कॉर्पस का एकमात्र ठिकाना नहीं बनना चाहिए। एक अच्छी तरह से नियोजित रिटायरमेंट में आमतौर पर भरोसेमंद आय, आसानी से उपलब्ध बचत (लिक्विडिटी) और बढ़ते खर्चों के साथ तालमेल बिठाने वाले निवेश का सही संतुलन शामिल होता है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सेना आयोजित करेगी साइबर क्वेस्ट, 20 अगस्त तक करें आवेदन

Indian Army Cyber Quest 2026: देश की साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और साइबर दुनिया के खतरों से निपटने के लिए इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह एक प्रतियोगिता है जिसमें छात्र, साइबर प्रोफेशनल, इनोवेटर्सऔर टेक्नोलॉजी के शौकीन हिस्सा ले सकेंगे। इस प्रतियोगिता का आयोजन साइबरपीस फाउंडेशन के साथ मिलकर टेरिटोरियल आर्मी करेगी। इस आयोजन में हिस्सा लेने के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 20 अगस्त तक आधिकारिक पोर्टल के जरिए रजिस्टर कर सकते हैं।

इंडियन आर्मी टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 टाइमलाइन

रजिस्ट्रेशन : 30 जुलाई से 20 अगस्त, 2026

शॉर्टलिस्टिंग फेज : ऑनलाइन शॉर्टलिस्टिंग प्रोसेस 1 सितंबर से 10 सितंबर, 2026 तक चलेगा।

ग्रैंड फिनाले : कॉम्पिटिशन का ग्रैंड फिनाले 6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर, 2026 तक होगा।

अवार्ड सेरेमनी : अवार्ड सेरेमनी 9 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में होगी।

अंतिम राउंड में चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक इनाम और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही, उन्हें भारतीय सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों से मिलने का मौका मिलेगा। इस प्रतियोगिता के विजेता रक्षा संस्थानों का दौरा भी करेंगे।

प्रतियोगिता का फॉर्मेट

शॉर्टलिस्टिंग राउंड में सभी उम्मीदवार एक ऑनलाइन कैप्चर-द-फ्लैग (CTF) चैलेंज में हिस्सा लेंगे। इस राउंड में चयनित टीमें फिर 36 घंटे के लाइव फिनाले में आगे बढ़ेंगी। यहां वे एक कृत्रिम नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर सैंडबॉक्स में इंडियन आर्मी के लिए खास तौर से विकसित सॉल्यूशन पर काम करेंगी। फिनाले के दौरान, टीमें कमजोरियों की पहचान करेंगी, गलतियों को दर्ज करेंगी, और डोमेन में कमाए गए अपने साइबर सिक्योरिटी सर्टिफिकेशन या बैज के लिंक सबमिट करेंगी।

कौन हिस्सा ले सकता है ?

छात्र, साइबर सुरक्षा पेशेवर, एथिकल हैकर्स, सेना से जुड़े लोग और शोधकर्ता।

फॉर्मेट : एक पूरी तरह से ऑनलाइन सीटीएफ क्वालिफायर राउंड के बाद एक इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले होगा। हर टीम में टीम लीडर समेत ज्यादा से ज्यादा तीन सदस्य हो सकते हैं।

स्कोरिंग : एक विशेषज्ञ पैनल ग्रैंड फिनाले के दौरान जमा की गई एंट्री का आकलन कमजोरियों की गंभीरता, सुलझाने का तरीका और जटिलता के आधार पर करेगा।

ग्रैंड फिनाले

टॉप 10 शॉर्टलिस्टेड टीमें नई दिल्ली में 36 घंटे के इन-पर्सन ग्रैंड फिनाले में मुकाबला करेंगी। सभी प्रतिभागी रियलिस्टिक डमी डेटा का इस्तेमाल करके एक खासतौर से तैयार सिस्टम स्टैक पर लाइव कमजोरी तलाशेंगे और दर्ज करेंगे। पहचानी गई वल्नरेबिलिटीज का उनकी गंभीरता, मूलता और जटिलता के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। एक विशेषज्ञ पैनल खोजों को सत्यापित करेगा और फाइनल स्कोर तय करेगा। टॉप तीन टीमों को उनके पूरे प्रदर्शन के आधार पर विजेता घोषित किया जाएगा।

मेडल और सर्टिफिकेट

टेरिटोरियल आर्मी प्रतियोगिता में उम्मीदवारों के योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें मेडल और सर्टिफिकेट देगी। प्रतिभागियों को टेरिटोरियल आर्मी के साथ काम करने, रक्षा विशेषज्ञों के साथ काम करने, राष्ट्रीय सुरक्षा इकोसिस्टम में योगदान देने और वरिष्ठ सरकारी और सेना के अधिकारियों के साथ बातचीत करने का मौका मिलेगा।

विजेताओं का सम्मान

इस प्रतियोगिता के विजेताओं को भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सम्मानित किया जाएगा और उन्हें खास डिफेंस एस्टैब्लिशमेंट्स में जाने का भी मौका मिलेगा।

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न्यू मैक्सिको कोर्ट का मेटा पर ₹5,390 करोड़ का जुर्माना:कहा- बच्चों की सुरक्षा नहीं, एन्गेजमेंट और मुनाफा चुना, इससे उनकी मेंटल हेल्थ बिगड़ी

न्यू मैक्सिको की एक अदालत ने मेटा पर 567 मिलियन डॉलर यानी भारतीय रुपयों में 5000 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया है। यह आदेश मेटा के प्लेटफॉर्म्स के कारण बच्चों की मेंटल हेल्थ पर हुए दुष्प्रभाव के खिलाफ जारी किया गया है। अदालत ने यह फैसला कंपनी की जवाबदेही तय करते हुए सुनाया है। यह पहली बार है जब किसी राज्य ने एक बड़ी टेक कंपनी के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की है। गुरुवार देर रात आए फैसले में जज ब्रायन बीडशेड ने कहा कि जुर्माने की रकम का बड़ा हिस्सा 420 मिलियन डॉलर युवाओं के इलाज में इस्तेमाल होगा। बाकी रकम अगले 5 साल तक अवेयरनेस, प्रिवेंशन, स्क्रीनिंग सर्विस पर खर्च की जाएगी। मेटा के प्लेटफॉर्म्स इंस्टाग्राम-फेसबुक पर बच्चों की सुरक्षा और मेंटल हेल्थ को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि कंपनी के प्लेटफॉर्म्स का बच्चों पर नकारात्मक असर पड़ा है। Meta आगे क्या कदम उठा सकती है… मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल सेन शुरू किया था मुकदमा यह मामला न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेस ने दायर किया था। आरोप था कि मेटा के इंस्टाग्राम-फेसबुक बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कंपनी ने जानबूझकर इन खतरों को नजरअंदाज किया। कंपनी पर आरोप लगा कि एल्गोरिदम को ऐसे डिजाइन किया है कि वे बच्चों को ‘एडिक्टिव’ (लत लगाने वाले) बनाते हैं। इसके असर से बच्चों में डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर और आत्महत्या जैसी समस्याओं में बढ़ोतरी हुई। मुकदमा केवल मेंटल हेल्थ तक सीमित नहीं था। इसमें यह भी आरोप लगाया गया था कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बाल यौन शोषण और बच्चों को फंसाने के लिए किया जा रहा था, और कंपनी ने इस खतरे के बारे में जानते हुए भी ठोस कदम नहीं उठाए। कोर्ट ने कहा- फेडरल कानून मेटा को बच्चों की एज वैरिफिकेशन से रोकता है अदालत ने कहा कि बच्चों की प्राइवेसी से जुड़े फेडरल कानून मेटा को 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर एज वैरिफिकेशन इक्विपमेंट लागू करने से रोकते हैं। चाइल्ड ऑनलाइन प्राइवेसी प्रिवेंशन एक्ट (COPPA) का अर्थ है कि यह मेटा को बच्चों से व्यक्तिगत डेटा जमा करने का अनुरोध करने या एज वैरिफिकेशन उद्देश्यों के लिए भी ट्रैक किए जाने का आदेश नहीं दे सकता है। एक दिन पहले भारत सरकार से माफी मांगनी पड़ी Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को पीएम मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में भारत सरकार से माफी मांगी है। इसी दौरान कंपनी ने यह भी माना कि उसके प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मैटेरियल, डीपफेक और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चूक हुई हैं।

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।

India-Myanmar territory: क्या म्यांमार से भारत करेगा अनसुलझे जमीन की अदला-बदली? सीमा विवाद को सुलझाने पर MEA का बड़ा बयान

India-Myanmar territory: भारत और म्यांमार के बीच मणिपुर से लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा के एक अनसुलझे हिस्से को लेकर बातचीत जारी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच सीमा के जिन क्षेत्रों का अभी तक सीमांकन नहीं हुआ है, उन्हें लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, भारत सरकार ने अनसुलझे जमीन की अदला-बदली की खबरों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लेकिन सूत्रों ने बताया कि भारत और म्यांमार मणिपुर में अपनी साझा सीमा के एक ऐसे हिस्से को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं जिसकी सीमा अभी तय नहीं हुई है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान इससे जुड़े सवाल पर कहा, “सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें अभी सुलझाया जाना बाकी है। उन क्षेत्रों पर बातचीत जारी है।” हालांकि, क्षेत्र के संभावित आदान-प्रदान की खबरों ने मणिपुर में नागरिक समाज समूहों के विरोध को जन्म दे दिया है, जिन्हें राज्य की क्षेत्रीय अखंडता को लेकर चिंताएं हैं। चर्चा के तहत आने वाला यह हिस्सा लगभग 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में आता है, जो म्यांमार के सगाइंग क्षेत्र की कबाव घाटी (Kabaw Valley) से सटा हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट में क्या दावा?

अमेरिका की मैगजीन ‘द डिप्लोमैट (The Diplomat)’ की 17 जुलाई की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत सरकार मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा के बॉर्डर पिलर 65 से 68 के बीच सीमांकन पूरा करने के लिए करीब 1.4 वर्ग मील जमीन के संभावित आदान-प्रदान के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मई 2026 के एक आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा गया कि इस सीमांकन प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। यह इलाका करीब 2.8 किलोमीटर लंबा है। ये मणिपुर के चंदेल जिले में स्थित है, जो म्यांमार की काबाव घाटी (Sagaing Region) से सटा हुआ है।

भारत-म्यांमार सीमा कितनी लंबी है?

भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। ये अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से होकर गुजरती है। यह सीमा पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों से होकर निकलती है, जहां कई जनजातीय समुदायों के दोनों देशों में पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं।

गृह मंत्रालय के अनुसार, इस सीमा में से करीब 1,472 किलोमीटर हिस्से का सीमांकन सीमा स्तंभों (Boundary Pillars) के जरिए किया जा चुका है। जबकि लगभग 171 किलोमीटर हिस्सा अब भी अनसुलझा है। इनमें मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश के लोहित सेक्टर और मणिपुर की काबाव घाटी के कुछ हिस्से शामिल हैं।

सीमा पर बाड़ लगाने की योजना

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित सीमांकन का उद्देश्य भारत-म्यांमार सीमा पर फेंसिंग (बाड़) का काम पूरा करना है। ताकि अवैध घुसपैठ, उग्रवादियों की आवाजाही और सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके।

साल 2024 में केंद्र सरकार ने पूरे 1,643 किलोमीटर लंबे भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र पर बाड़ लगाने और फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) को समाप्त करने की घोषणा की थी। 2018 में लागू इस व्यवस्था के तहत सीमा से लगे जनजातीय समुदायों को बिना वीजा 16 किलोमीटर तक एक-दूसरे के क्षेत्र में आने-जाने की अनुमति थी।

1967 के समझौते के बाद भी बाकी हैं कुछ विवादित हिस्से

भारत और म्यांमार के बीच वर्तमान अंतरराष्ट्रीय सीमा 1967 के द्विपक्षीय समझौते के तहत तय की गई थी। इसके बावजूद कुछ हिस्सों का सीमांकन आज भी पूरा नहीं हो सका है। सरकार ने साल 2018 में संसद को बताया था कि शेष क्षेत्रों का समाधान द्विपक्षीय सीमा तंत्र के माध्यम से किया जाएगा और इसके तहत नौ नए सीमा स्तंभ स्थापित किए जाने हैं।

मणिपुर में मोलचाम सेक्टर (पिलर 64-68), मोरेह सेक्टर (75-79) और चोरो खुन्नौ सेक्टर (88-95) को संवेदनशील माना जाता है। भारत का कहना है कि म्यांमार के साथ कोई व्यापक सीमा विवाद नहीं है। केवल कुछ सीमा स्तंभों का अंतिम निर्धारण होना बाकी है।

मणिपुर में शुरू हुआ विरोध

जमीन अदला-बदली की खबरों के सामने आने के बाद मणिपुर के कई नागरिक संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (COCOMI) ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही साबित होती है और राज्य की जमीन का कोई हिस्सा म्यांमार को सौंपने की कोशिश की जाती है तो संगठन इसका कड़ा विरोध करेगा।

संगठन ने कहा कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं हो सकती। COCOMI का आरोप है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय के बाद राज्य पहले ही अपने ऐतिहासिक क्षेत्र का कुछ हिस्सा खो चुका है। अब किसी भी नई कटौती को स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने केंद्र सरकार से बिना राज्य की जनता की सहमति के कोई फैसला नहीं लेने की मांग की है।

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मामले में बड़ी बातें

  • विदेश मंत्रालय ने केवल सीमा के अनसुलझे हिस्सों पर बातचीत की पुष्टि की है।
  • जमीन की अदला-बदली को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
  • मीडिया रिपोर्ट में 1.4 वर्ग मील भूमि के संभावित आदान-प्रदान का दावा किया गया है।
  • प्रस्तावित इलाका मणिपुर के चंदेल जिले में भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित है।
  • केंद्र सरकार सीमा पर फेंसिंग कर अवैध घुसपैठ और उग्रवादी गतिविधियों पर रोक लगाना चाहती है।
  • मणिपुर के नागरिक संगठनों ने किसी भी संभावित क्षेत्रीय हस्तांतरण का विरोध किया है।

YEIDA New Plan: जेवर एयरपोर्ट और फिल्म सिटी के बाद YEIDA का नया धमाका, अब बनेगा एनिमेशन और गेमिंंग पार्क

YEIDA AVGC XR Park Near Jewar Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और इंटरनेशनल फिल्म सिटी के बाद अब यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने एक और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को डिजिटल मीडिया और क्रिएटिव टेक्नोलॉजी का बड़ा हब बनाने की तैयारी में है।

इसी कड़ी में, YEIDA ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आगामी फिल्म सिटी के पास एक अत्याधुनिक AVGC-XR (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियल्टी) पार्क विकसित करने की योजना बनाई है।

हाई-टेक सुविधाओं से लैस होगा AVGC-XR पार्क

YEIDA अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्तावित पार्क में आधुनिक और अगली पीढ़ी के कंटेंट निर्माण से जुड़ी तमाम आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी:

एनिमेशन और VFX स्टूडियो: फिल्मों और शो के लिए हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स लैब।

गेम डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर्स: वीडियो गेमिंग और डिजाइनिंग के लिए एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर।

मोशन कैप्चर और वर्चुअल प्रोडक्शन: फिल्मों और विजुअल मीडिया के लिए आधुनिक शूटिंग तकनीक।

AI और VR/AR लैब्स: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-पावर्ड कंटेंट निर्माण, एक्सटेंडेड रियल्टी (XR), वर्चुअल रियल्टी (VR) और ऑगमेंटेड रियल्टी (AR) लैब्स।

सेक्टर-21 की फिल्म सिटी के साथ मिलकर करेगा काम

यह AVGC-XR पार्क सेक्टर-21 में बन रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर होगा, जो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बिल्कुल नजदीक स्थित है।

YEIDA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘यह पार्क एक ऐसा एकीकृत इकोसिस्टम बनाएगा जहां फिल्म निर्माण, एनिमेशन, गेमिंग और विजुअल इफेक्ट्स एक ही जगह उपलब्ध होंगे। इससे भारतीय कंटेंट क्रिएटर्स को विदेशी प्रोडक्शन हाउस पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और यह पार्क घरेलू व वैश्विक स्टूडियोज को भारत की ओर आकर्षित करेगा।’

केंद्र सरकार के विजन के अनुकूल है प्रोजेक्ट

यह परियोजना भारत सरकार की उस नीति से भी मेल खाती है, जिसके तहत देश को एनिमेशन, गेमिंग और विजुअल मीडिया (AVGC-XR) के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। डिजिटल कंटेंट, मोबाइल गेमिंग और AI क्रिएशन टूल्स की बढ़ती मांग के कारण भारत में AVGC-XR सेक्टर मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा बन चुका है।

युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते

इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से जेवर और आसपास के इलाकों का आर्थिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा:

रोजगार के मौके: एनिमेशन, गेम डिजाइन, विजुअल इफेक्ट्स (VFX), एआई और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में युवाओं के लिए हजारों नौकरियों के अवसर पैदा होंगे।

इन्वेस्टमेंट हब: यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पहले से ही सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल डिवाइसेज, लॉजिस्टिक्स और रियल एस्टेट का बड़ा केंद्र बन रहा है। इस पार्क के जुड़ने से यहां वैश्विक स्तर का टेक-क्रिएटिव इकोसिस्टम तैयार होगा।