फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध में बदल गया है। अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को देशभर में हुए प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस में करीब 1.10 लाख लोगों ने मार्च निकाला। कई जगह पुलिस से झड़प, दुकानों में लूटपाट और सरकारी इमारतों में आगजनी हुई। पेरिस और आसपास के इलाकों में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस आंदोलन ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि दुनिया के अमीर देशों में शामिल फ्रांस को लगातार आंदोलनों का सामना क्यों करना पड़ता है… 1. फ्रांस में प्रदर्शन करना लोगों की आदत नहीं, ताकत है फ्रांस में सरकार के फैसलों के खिलाफ सड़क पर उतरना कोई नई बात नहीं है। यहां छात्र, कर्मचारी और आम लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए प्रदर्शन और हड़ताल करते रहे हैं। इसके पीछे फ्रांस का इतिहास भी एक बड़ी वजह है। 2. ट्रेड यूनियन और हड़तालें आंदोलन को बड़ा बनाती हैं फ्रांस में ट्रेड यूनियन कर्मचारियों को एकजुट कर बड़े पैमाने पर हड़तालें आयोजित करती हैं। इसका असर तब ज्यादा होता है, जब परिवहन, स्कूल और दूसरे सरकारी विभागों के कर्मचारी एक साथ काम बंद कर देते हैं। 1995 में इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला। तत्कालीन प्रधानमंत्री एलेन जुप्पे की सरकार ने पेंशन में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। इसके विरोध में रेलवे समेत कई क्षेत्रों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। फ्रांस में रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और पेरिस में लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई। कई हफ्तों तक चले विरोध के बाद सरकार को अपनी प्रस्तावित योजना के अहम हिस्से वापस लेने पड़े। 3. फ्रांस में अमीर-गरीब की खाई भी विरोध की वजह फ्रांस में अमीर और गरीब के बीच आर्थिक असमानता लंबे समय से एक मुद्दा रही है। इसका असर सिर्फ लोगों की कमाई और जीवनशैली पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और आगे बढ़ने के अवसरों पर भी पड़ता है। फ्रांस की सरकारी संस्था INSEE के मुताबिक, देश के सबसे अमीर 10% परिवारों के पास कुल संपत्ति का करीब 47% हिस्सा है। वहीं, सबसे कम संपत्ति वाले 50% परिवारों के पास सिर्फ 8% संपत्ति है। यानी देश की आधी आबादी के मुकाबले अमीर परिवारों के पास कहीं ज्यादा संपत्ति है। आर्थिक असमानता का असर बच्चों की पढ़ाई में भी दिखाई देता है। OECD की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में अमीर परिवारों के बच्चों ने गणित में गरीब परिवारों के बच्चों के मुकाबले औसतन 113 अंक ज्यादा हासिल किए। 4. स्कूलों की खस्ता हालत भी 2026 में आंदोलन की वजह बनी फ्रांस स्कूलों की खराब हालत 2026 के आंदोनल की बड़ी वजह बनी। छात्रों की शिकायत है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और इसका असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। इसके पीछे फ्रांस की आर्थिक तंगी और उस पर बढ़ते कर्ज को भी वजह बताया जा रहा है। फ्रांस का सरकारी कर्ज उसकी GDP के 119.3% के बराबर है। धीमी आर्थिक विकास दर और कर्ज पर बढ़ते ब्याज के कारण सरकार पर बजट संभालने का दबाव है। सरकार को रक्षा, अस्पताल, नई तकनीक और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे क्षेत्रों पर भी खर्च करना है। ऐसे में शिक्षा सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बजट तय करना चुनौती बन गया है। 5. फ्रांस में आंदोलन का असर यूरोप पर क्यों पड़ सकता है? फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों का असर यूरोप के दूसरे देशों की राजनीति पर भी पड़ सकता है। महंगाई, प्रवासन और सरकार की नीतियों से पहले से नाराज लोगों के बीच फिलिस्तीन के झंडे दिखने और दुकानों में लूटपाट के आरोप राष्ट्रीय पहचान और कानून-व्यवस्था पर बहस तेज कर सकते हैं। यूरोप में आर्थिक असंतोष नया नहीं है। फ्रांस के येलो वेस्ट आंदोलन से लेकर जर्मनी और ब्रिटेन में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों तक, जीवन-यापन का बढ़ता खर्च लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह रहा है। वहीं, सीमा सुरक्षा और प्रवासन को लेकर भी कई देशों में बहस जारी है। ऐसे माहौल में फ्रांस में मरीन ले पेन की नेशनल रैली, जर्मनी में AfD और इटली में जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी जैसे दक्षिणपंथी दलों को अपने मुद्दे उठाने का मौका मिल सकता है। फ्रांस में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता रहने से रक्षा, प्रवासन और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर यूरोपीय देशों के बीच सहमति बनाना भी मुश्किल हो सकता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें…. फ्रांस में दुकानों से आईफोन लूटे, पुलिस को दौड़ाया:जोकर, कैप्टन अमेरिका बनकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, 143 साल पुरानी इमारत में आग लगाई; 15 PHOTOS फ्रांस में महंगाई के खिलाफ शनिवार को 8 लाख लोग सड़कों पर उतर आए। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों पर पत्थर फेंके और पुलिसकर्मियों को दौड़ाया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
फ्रांस में स्कूलों की खराब हालत को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ बड़े विरोध में बदल गया है। अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को देशभर में हुए प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोग सड़कों पर उतरे। पेरिस में करीब 1.10 लाख लोगों ने मार्च निकाला। कई जगह पुलिस से झड़प, दुकानों में लूटपाट और सरकारी इमारतों में आगजनी हुई। पेरिस और आसपास के इलाकों में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस आंदोलन ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि दुनिया के अमीर देशों में शामिल फ्रांस को लगातार आंदोलनों का सामना क्यों करना पड़ता है… 1. फ्रांस में प्रदर्शन करना लोगों की आदत नहीं, ताकत है फ्रांस में सरकार के फैसलों के खिलाफ सड़क पर उतरना कोई नई बात नहीं है। यहां छात्र, कर्मचारी और आम लोग अपनी मांगें मनवाने के लिए प्रदर्शन और हड़ताल करते रहे हैं। इसके पीछे फ्रांस का इतिहास भी एक बड़ी वजह है। 2. ट्रेड यूनियन और हड़तालें आंदोलन को बड़ा बनाती हैं फ्रांस में ट्रेड यूनियन कर्मचारियों को एकजुट कर बड़े पैमाने पर हड़तालें आयोजित करती हैं। इसका असर तब ज्यादा होता है, जब परिवहन, स्कूल और दूसरे सरकारी विभागों के कर्मचारी एक साथ काम बंद कर देते हैं। 1995 में इसका बड़ा उदाहरण देखने को मिला। तत्कालीन प्रधानमंत्री एलेन जुप्पे की सरकार ने पेंशन में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। इसके विरोध में रेलवे समेत कई क्षेत्रों के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। फ्रांस में रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और पेरिस में लोगों को आने-जाने में परेशानी हुई। कई हफ्तों तक चले विरोध के बाद सरकार को अपनी प्रस्तावित योजना के अहम हिस्से वापस लेने पड़े। 3. फ्रांस में अमीर-गरीब की खाई भी विरोध की वजह फ्रांस में अमीर और गरीब के बीच आर्थिक असमानता लंबे समय से एक मुद्दा रही है। इसका असर सिर्फ लोगों की कमाई और जीवनशैली पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और आगे बढ़ने के अवसरों पर भी पड़ता है। फ्रांस की सरकारी संस्था INSEE के मुताबिक, देश के सबसे अमीर 10% परिवारों के पास कुल संपत्ति का करीब 47% हिस्सा है। वहीं, सबसे कम संपत्ति वाले 50% परिवारों के पास सिर्फ 8% संपत्ति है। यानी देश की आधी आबादी के मुकाबले अमीर परिवारों के पास कहीं ज्यादा संपत्ति है। आर्थिक असमानता का असर बच्चों की पढ़ाई में भी दिखाई देता है। OECD की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस में अमीर परिवारों के बच्चों ने गणित में गरीब परिवारों के बच्चों के मुकाबले औसतन 113 अंक ज्यादा हासिल किए। 4. स्कूलों की खस्ता हालत भी 2026 में आंदोलन की वजह बनी फ्रांस स्कूलों की खराब हालत 2026 के आंदोनल की बड़ी वजह बनी। छात्रों की शिकायत है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और इसका असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। इसके पीछे फ्रांस की आर्थिक तंगी और उस पर बढ़ते कर्ज को भी वजह बताया जा रहा है। फ्रांस का सरकारी कर्ज उसकी GDP के 119.3% के बराबर है। धीमी आर्थिक विकास दर और कर्ज पर बढ़ते ब्याज के कारण सरकार पर बजट संभालने का दबाव है। सरकार को रक्षा, अस्पताल, नई तकनीक और जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे क्षेत्रों पर भी खर्च करना है। ऐसे में शिक्षा सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लिए बजट तय करना चुनौती बन गया है। 5. फ्रांस में आंदोलन का असर यूरोप पर क्यों पड़ सकता है? फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों का असर यूरोप के दूसरे देशों की राजनीति पर भी पड़ सकता है। महंगाई, प्रवासन और सरकार की नीतियों से पहले से नाराज लोगों के बीच फिलिस्तीन के झंडे दिखने और दुकानों में लूटपाट के आरोप राष्ट्रीय पहचान और कानून-व्यवस्था पर बहस तेज कर सकते हैं। यूरोप में आर्थिक असंतोष नया नहीं है। फ्रांस के येलो वेस्ट आंदोलन से लेकर जर्मनी और ब्रिटेन में महंगाई के खिलाफ हुए प्रदर्शनों तक, जीवन-यापन का बढ़ता खर्च लोगों की नाराजगी की बड़ी वजह रहा है। वहीं, सीमा सुरक्षा और प्रवासन को लेकर भी कई देशों में बहस जारी है। ऐसे माहौल में फ्रांस में मरीन ले पेन की नेशनल रैली, जर्मनी में AfD और इटली में जॉर्जिया मेलोनी की पार्टी जैसे दक्षिणपंथी दलों को अपने मुद्दे उठाने का मौका मिल सकता है। फ्रांस में लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता रहने से रक्षा, प्रवासन और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दों पर यूरोपीय देशों के बीच सहमति बनाना भी मुश्किल हो सकता है। ————————— ये खबर भी पढ़ें…. फ्रांस में दुकानों से आईफोन लूटे, पुलिस को दौड़ाया:जोकर, कैप्टन अमेरिका बनकर पहुंचे प्रदर्शनकारी, 143 साल पुरानी इमारत में आग लगाई; 15 PHOTOS फ्रांस में महंगाई के खिलाफ शनिवार को 8 लाख लोग सड़कों पर उतर आए। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों पर पत्थर फेंके और पुलिसकर्मियों को दौड़ाया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
नौकरी के इंटरव्यू में महिलाओं से शादी और बच्चे की प्लानिंग को लेकर सवाल पूछने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया है। महिला ने बताया कि जब उन्होंने HR को अपने पति के बारे में बताया, तो उनसे पूछा गया कि क्या वह बच्चे की प्लानिंग रही है। इस सवाल के बाद महिला ने कॉर्पोरेट कंपनियों में महिलाओं को मिलने वाले समान अवसरों और महिला सशक्तिकरण के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इस तरह के सवाल नौकरी के इंटरव्यू में महिलाओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर चिंता पैदा करते हैं।
हैरान रह गई महिला
शताक्षी द्विवेदी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने नौकरी के इंटरव्यू के दौरान HR की ओर से पूछे गए एक सवाल का जिक्र किया। वीडियो में उन्होंने बताया कि, जब HR को पता चला कि उनकी हाल ही में शादी हुई है, तो उनसे एक ऐसा सवाल पूछा गया, जिसने उन्हें हैरान कर दिया। उन्होंने इस एक्सपीरिएंस को शेयर करते हुए इसे HR की ओर से पूछा गया सबसे गलत सवाल बताया। शताक्षी द्विवेदी ने बताया कि इंटरव्यू की शुरुआत में सब कुछ सामान्य था।
शताक्षी ने बताया कि, HR ने उनसे पूछा कि वह कहां रहती हैं और घर से ऑफिस आने-जाने में उन्हें कोई परेशानी तो नहीं होगी, क्योंकि उनका घर काफी दूर था। इस पर शताक्षी ने कहा कि उन्हें आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने ये भी बताया कि उनके पति भी उसी इलाके में आते-जाते हैं, इसलिए वह उनके साथ ऑफिस आ-जा सकती हैं।
बेबी प्लानिंग को लेकर किया सवाल
बातचीत का रुख तब बदल गया जब HR ने शताक्षी की शादी को लेकर सवाल करना शुरू कर दिया। शताक्षी ने बताया कि HR ने उनसे कहा कि आपने बताया था कि आप शादीशुदा हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि उनकी हाल ही में शादी हुई है। इसके बाद HR ने उनसे पूछा कि क्या वह जल्द ही बच्चा पैदा करने की योजना तो नहीं बना रही हैं। इस सवाल ने शताक्षी को हैरान कर दिया। इस सवाल से शताक्षी द्विवेदी असहज हो गईं।
वायरल हो रहा वीडियो
उन्होंने कॉर्पोरेट कंपनियों के महिला सशक्तिकरण और समान अवसर देने के दावों पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि एक तरफ कंपनियां बराबरी की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ इंटरव्यू में महिलाओं से शादी और बच्चे की प्लानिंग जैसे निजी सवाल पूछे जाते हैं। शताक्षी ने उस कंपनी का नाम नहीं बताया, जहां उनके साथ यह घटना हुई थी। सोशल मीडिया पर ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई महिलाओं ने भी अपने साथ हुए ऐसे ही अनुभव साझा किए और बताया कि नौकरी के दौरान उन्हें भी इस तरह के निजी सवालों का सामना करना पड़ा है। वहीं, कई लोगों ने इंटरव्यू में महिलाओं से ऐसे सवाल पूछने के तरीके की आलोचना की।
लोगों ने किया कमेंट
एक यूजर ने लिखा कि, ‘उसके साथ भी ऐसा ही हुआ था। इंटरव्यू के दौरान उससे सीधे बच्चे पैदा करने की योजना के बारे में पूछा गया। उसने कहा कि साल 2026 में भी महिलाओं को नौकरी पाने के लिए ऐसे असहज सवालों का सामना करना पड़ रहा है।’ एक यूजर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि, ‘इंटरव्यू के दौरान उनसे भी सीधे बच्चे की प्लानिंग को लेकर सवाल पूछा गया था। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि साल 2026 में भी महिलाओं को इस तरह के अजीब सवालों का सामना करना पड़ रहा है।’
वहीं, एक अन्य यूजर ने समाज के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अविवाहित महिलाओं से पूछा जाता कि, ‘वे शादी कब करेंगी, शादीशुदा महिलाओं से बच्चे की प्लानिंग के बारे में सवाल किए जाते हैं और मां बनने के बाद उनसे पूछा जाता है कि वे काम और बच्चे की जिम्मेदारियों को कैसे संभालेंगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 22 साल की उम्र से लेकर नौकरी छोड़ने या 50 साल की उम्र तक इंटरव्यू में ऐसे सवालों का सामना करना पड़ सकता है।’
(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)
IMD Weather Update: देशभर में इस समय धूमधाम से दुर्गापूजा और नवरात्रि मनाया जा रहा है। वहीं त्योहारों के मौसम के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने टेंशन भरा अलर्ट जारी कर दिया है। देश के कई हिस्सों में 19 अक्टूबर को मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। आने वाले कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा कई राज्यों में बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। मौसम को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं दिल्ली से लेकर केरल तक कैसा होगा कल का मौसम
19 अक्टूबर को दक्षिण भारत समेत कई राज्यों में बारिश, तेज हवाओं और बिजली कड़कने की संभावना है। वहीं दिल्ली और यूपी में भी बारिश का अलर्ट जारी किया है। लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर ध्यान देने और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कैसा होगा दिल्ली का मौसम
दिल्ली में 19 अक्टूबर को मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक, राजधानी में बारिश होने के साथ 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सतही हवाएं चल सकती हैं। तापमान की बात करें तो दिन में पारा 32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि रात में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
कैसा होगा यूपी और बिहार का मौसम
उत्तर प्रदेश और बिहार में 19 अक्टूबर को मौसम बदलने की संभावना है। यूपी के मेरठ, आगरा, गाजियाबाद, मथुरा, प्रयागराज, देवरिया, बिजनौर, गोरखपुर, अमरोहा, बुलंदशहर, कानपुर और झांसी में कुछ जगहों पर बारिश के साथ आंधी चल सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। वहीं, बिहार के पटना, गया, भोजपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, बेगूसराय, कटिहार, भागलपुर और मुंगेर में हल्की से भारी बारिश हो सकती है। यहां भी तेज हवाएं चलने की संभावना है।
इन जगहों पर होगी तेज बारिश
आईएमडी के मुताबिक देश के दक्षिणी हिस्से में तेज बारिश की संभावना है। आईएमडी के अलर्ट के मुताबिक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ जगहों पर बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका जताई है। इन इलाकों में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। वहीं, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, आंतरिक कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, तेलंगाना और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी मौसम बदल सकता है। यहां बिजली कड़कने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना है। इन क्षेत्रों में बारिश के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इन जगहों पर गरज-चमक के साथ होगी बारिश
इसके अलावा छत्तीसगढ़, तटीय कर्नाटक, पूर्वी मध्य प्रदेश, कोंकण और गोवा तथा महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने का भी अनुमान है। ऐसे में लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
चलेंगी तेज हवाएं
समुद्र में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम अरब सागर और उत्तर-पश्चिमी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर के आसपास 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ समय के लिए इनकी गति बढ़कर 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है। ऐसे मौसम में समुद्र में जाने वाले लोगों और मछुआरों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
बिहार की सड़कों पर होगा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का जलवा, पूरे राज्य में लगेंगे चार्जिंग स्टेशंस
बिहार की सड़कों पर जल्द इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का जलवा देखने को मिल सकता है। सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। इसके लिए पटना सहित पूरे राज्य में चार्जिंग स्टेशंस लगाए जाएंगे। इससे लोगों की दिलचस्पी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के इस्तेमाल में बढ़ेगी।
पहले इन स्थानों पर लगेंगे चार्जिंग स्टेशंस
सबसे पहले सरकारी कार्यालयों, बस डिपो और कमर्शियल कॉम्पलेक्स में चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने की तैयारी है। इन जगहों पर इलेक्ट्रिक कार के साथ ही ई-बसों, दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक व्हीकल्स चार्ज किए जा सकेंगे। इसके लिए बिहार सरकार की तरफ से अनुदान की भी व्यवस्था की गई है। चार्जिंग स्टेशनों को उन जगहों पर इंस्टॉल करने का प्लान है, जहां गाड़ियों की आवाजाही ज्यादा होती है। इससे समय की बचत होगी।
पटना के 10 सरकारी परिसरों में चार्जिंग की सुविधा
राजधानी पटना में 10 प्रमुख सरकारी परिसरों में फास्ट डीसी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना है। प्रस्तावित स्थानों में मुख्य सचिवालय, बिहार विधानसभा, समाहरणालय, विश्वेश्वरैया भवन, विकास भवन, सिंचाई भवन, मल्टी मॉडल हब कंकड़बाग, बेउर मोड़ और हार्डिंग रोड शामिल हैं। ये सभी वैसे स्थान हैं जहां रोजाना काफी गाड़ियों की आवाजाही होती है। नए चार्जिंग स्टेशंस परिवहन विभाग और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के बीच हुए समझौते के तहत लगाए जाएंगे। इन फास्ट चार्जिंग स्टेशन के जरिए इलेक्ट्रिक कारों को लगभग 45 से 60 मिनट में फुल चार्ज किया जा सकता है। इन चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग सिर्फ परिसर के कर्मचारी ही नहीं बल्कि आम लोग भी कर सकते हैं।
इलेक्ट्रिक बसों के लिए भी बनेंगे चार्जिंग स्टेशंस
निजी और छोटे गाड़ियों के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए भी चार्जिंग व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है। इसके लिए 50 बसों की क्षमता वाले डिपो में आठ-आठ चार्जिंग पॉइंट विकसित किए जा रहे हैं। इससे ई-बसों को निर्धारित समय में चार्ज करने और उनके नियमित परिचालन में मदद मिल सकती है। फिलहाल, पटना के फुलवारीशरीफ, राजगीर और मुजफ्फरपुर के बस डिपो में चार्जिंग स्टेशन कार्य कर रहे हैं। शहर में चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें यहीं से चार्ज होती हैं। इसके अलावा, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और गया में भी निर्माण कार्य चल रहा है। पूर्णिया में भी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
डेढ़ घंटे में चार्ज हो जाएगी ई-बस की बैटरी
एक ई-बस को चार्ज करने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगेगा। सार्वजनिक परिवहन के लिए यह व्यवस्था इसलिए जरूरी है, क्योंकि बसों का संचालन तय समय-सारिणी के अनुसार होता है। पर्याप्त चार्जिंग पॉइंट उपलब्ध रहने से वाहनों को दोबारा सेवा में लगाने की प्रक्रिया व्यवस्थित बनी रहेगी।
निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने पर फोकस
चार्जिंग नेटवर्क को केवल सरकारी परियोजनाओं तक सीमित रखने के बजाय निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर है। इसके लिए बिहार ईवी नीति 2026 के तहत सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वाले पात्र संस्थानों को मशीनरी और उपकरणों की लागत का 25 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख रुपये तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। इस व्यवस्था के दायरे में सरकारी भवन, व्यावसायिक परिसर, होटल, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स, आवासीय अपार्टमेंट, हाउसिंग सोसायटी, पेट्रोल पंप, हाईवे के ढाबे-रेस्टोरेंट, बस स्टैंड और पार्किंग स्थल आएंगे।
(पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट)
एलआईसी ने अपना नया कैंसर कवर प्लान 19 अक्तूबर को लॉन्च कर दिया। इस प्लान के तहत पॉलिसीहोल्डर को कैंसर के शुरुआती चरण और बाद के चरणों में फाइनेंशियल प्रोटेक्शन मिलेगा। कंपनी ने कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह प्लान पेश किया है। इस प्लान की पूरी अवधि में प्रीमियम फिक्स्ड रहेगा।
इलाज की एक्चुअल कॉस्ट की जगह फिक्स्ड फाइनेंशियल बेनेफिट्स
LIC New Cancer Cover एक नॉन-लिंक्ड प्लान है और प्योर रिस्क प्लान है। इस प्लान के तहत पॉलिसीहोल्डर को इलाज की एक्चुअल कॉस्ट की जगह फिक्स्ड फाइनेंशियल बेनेफिट्स मिलता है। सम एश्योर्ड के 25 फीसदी का पेमेंट अर्ली स्टेज कैंसर का पता चलते ही पॉलिसीहोल्डर को कर दिया जाता है।
बाद के स्टेज वाले कैंसर का पता चलने पर 100% सम एश्योरेंड का पेमेंट
बाद के स्टेज वाले कैंसर (Major-Stage Cancer) का पता चलने पर पॉलिसीहोल्डर को 100 फीसदी अप्लिकेबल सम एश्योर्ड का पेमेंट किया जाता है। पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक, कैंसर का पता चलने के बाद पॉलिसीहोल्डर का प्रीमियम माफ हो जाता है।
प्लान को खरीदने की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 65 साल
इस प्लान को खरीदने की न्यूनतम उम्र 18 साल है, जबकि अधिकतम उम्र 65 साल है। उम्र के कैलकुलेशन अंतिम बर्थडे के आधार पर होगा। इस प्लान में लेवल सम एश्योर्ड और इक्रिजिंग सम एश्योर्ड का विकल्प है। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति दोनों में से किसी एक विकल्प का चुनाव कर सकता है।
यह पॉलिसी 10 साल या 15 साल के टर्म के लिए ली जा सकती है
इस पॉलिसी का मिनिमम टर्म 10 साल है, जबकि मैक्सिमम टर्म 15 साल है। इसका मतलब है कि अगर 18 साल का कोई व्यक्ति 10 साल के टर्म के लिए पॉलिसी खरीदता है तो उसके 28 साल के होने पर पॉलिसी मैच्योर हो जाएगी।
उम्र की रेंज के आधार पर चार मिनिमम बेसिक सम एश्योर्ड के स्लैब
18 से 34 साल के पॉलिसीहोल्डर के लिए मिनिमम बेसिक सम एश्योर्ड 35,00,000 रुपये हैं। 35 से 40 साल के पॉलिसीहोल्डर के लिए यह 30,00,000 रुपये है। 41 से 50 साल के लिए यह 20,00,000 रुपये है। 51 से 65 साल के लिए 15,00,000 रुपये है।
प्योर रिस्क हेल्थ पॉलिसी होने की वजह से किसी तरह का डेथ बेनेफिट्स नहीं
इस पॉलिसी में किसी तरह का डेथ बेनेफिट शामिल नहीं है, क्योंकि यह टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान नहीं है। यह प्योर रिस्क हेल्थ इंश्योरेंस प्लान है। अगर पॉलिसीहोल्डर को पॉलिसी के टर्म के दौरान कैंसर की बीमारी का पता नहीं चलता है यानी इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है तो मैच्योरिटी पर उसे किसी तरह का बेनेफिट नहीं मिलेगा।
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एलआईसी से सीधे पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम में रिबेट का फायदा
इस पॉलिसी में प्रीमियम का पेमेंट सालाना या छमाही आधार पर किया जा सकता है। सीधे एलआईसी से यह पॉलिसी खरीदने पर प्रीमियम में रिबेट मिलता है। एजेंट, कॉर्पोरेट एजेंट या इंश्योरेंस मार्केटिंग फर्म से पॉलिसी खरीदने पर रिबेट नहीं मिलेगा। इस प्लान में लोन की फैसिलिटी उपलब्ध नहीं है। किसी तरह की सरेंडर वैल्यू भी नहीं होगी।
Hanuman Ansh Collection: 7 अगस्त सिनेमाघरों में ‘हनुमान अंश’ रिलीज हुई थी। जब ये फिल्म आई तो किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुई थी। 4 नए नवेले लोगों ने अपना सबकुछ दांव पर लगाकर ये फिल्म बनाई और वो करिश्मा कर दिखाया जिसकी किसी को उम्मीद किसी ने की नहीं थी। हनुमान अंश को रिलीज के टाइम पर सिर्फ 3 थिएटर ही नसीब हुए थे, लेकिन धीरे-धीरे फिल्म का ऐसा रुतबा बढ़ा की लोगों की डिमांड पर स्क्रीन बढ़ गई और सुबह से लेकर रात तक का हर शो हाउसफुल हो गया।
विशाल चतुर्वेदी के डायरेक्शन में बनी ‘हनुमान अंश’ ने देश और विदेश में बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन किया है। बॉक्स ऑफिस पर ‘जेलर 2’, ‘दृश्यम 3’, ‘मिर्जापुर’ जैसी बड़ी फिल्मों से टकराने के बावजूद हनुमान अंश अभी भी पैसे कमा रही है।
रजनीकांत की ‘जेलर 2’ और अजय देवगन की ‘दृश्यम 3’ भी ‘हनुमान अंश’ को सिनेमाघरों से हिला नहीं सकी है। रिलीज के ढाई महीने बाद भी ‘हनुमान अंश’ का थिएटर्स में चल रही है। नीम करौली बाबा के जीवन पर बनी इस फिल्म ने चमत्कार कर दिखाया है।
‘हनुमान अंश’ को सिनेमाघरों में 72 दिन हो गए हैं, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमाई का सिलसिला रुका नहीं है। फिल्म ने 72वें दिन भारत में 0.26 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया। इसके साथ ही फिल्म की घरेलू कमाई के आंकड़े में बढ़त हुई है। वहीं दुनियाभर में भी फिल्म ने 449 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन किया है।
सैकनिल्क की रिपोर्ट के अनुसार रिलीज के 72वें दिन भारत में कुल 0.26 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। फिल्म के हिंदी में 354 शोज थे, जिसके जरिए हनुमान अंश की कमाई 0.26 करोड़ रुपये हुई है।
भारत के अलावा विदेशी में भी ‘हनुमान अंश’ ने 72वें दिन ओवरसीज मार्केट में 0.10 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। इसके साथ ही विदेशों में कुल ग्रॉस कमाई 48.50 करोड़ रुपये हुई। भारत और विदेशों के कलेक्शन को मिलाकर फिल्म का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 449.38 करोड़ रुपये हो गया है।
Where EPFO invests PF money: नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से हर महीने प्रोविडेंट फंड (PF) के नाम पर जो कटौती होती है, उसे हम भविष्य की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार मानते हैं। जितनी रकम आपकी सैलरी से कटती है, उतना ही योगदान आपकी कंपनी भी आपके खाते में जमा करती है।
लेकिन क्या कभी आपने यह जानने की कोशिश की है कि आपकी तिजोरी में जमा होने वाले करोड़ों-अरबों रुपये आखिर कहां जाते हैं? क्या यह पैसा किसी बैंक में रखा रहता है या कहीं और निवेश होता है? कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) आपके इस पैसे को सुरक्षित रखने और उस पर शानदार रिटर्न (जैसे हालिया 8.25% ब्याज) देने के लिए क्या रणनीति अपनाता है, आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
EPFO आपके पैसे का क्या करता है?
EPFO कोई साधारण बैंक नहीं है, बल्कि भारत के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक बड़ा वैधानिक निकाय है। कर्मचारियों के इस विशाल फंड के प्रबंधन की जिम्मेदारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) के पास होती है। बोर्ड के तय नियमों और सुरक्षा मानकों के तहत इस पैसे को देश के अलग-अलग वित्तीय और सरकारी साधनों में निवेश किया जाता है। इस निवेश से होने वाली कमाई से ही आपके पीएफ खाते में हर साल ब्याज का पैसा भेजा जाता है।
कहां-कहां होता है पीएफ का निवेश?
सरकार के तय दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ईपीएफओ निवेशकों के पैसे की सुरक्षा और बेहतर रिटर्न के बीच संतुलन बनाने के लिए फंड को दो मुख्य हिस्सों में बांटता है:
- सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स: लगभग 85% तक
- इक्विटी यानी शेयर बाजार (Equity – ETFs): 15% तक
| पोर्टफोलियो श्रेणी | संभावित आवंटन % | मुख्य साधन |
| सरकारी प्रतिभूतियां (G-Secs) | 45% – 65% | केंद्र सरकार के बॉन्ड्स, स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs) |
| कॉरपोरेट बॉन्ड्स व डेट | 20% – 45% | PSUs, सरकारी वित्तीय संस्थानों व सुरक्षित कॉरपोरेट बॉन्ड्स |
| इक्विटी (शेयर बाजार) | 5% – 15% | केवल इंडेक्स आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs – Nifty 50, Sensex) |
| शॉर्ट-टर्म डेट/मनी मार्केट | 0% – 5% | लिक्विडिटी और तात्कालिक नकदी प्रबंधन के लिए ट्राइ-पार्टी रेपो (TREPS) |
85% पैसा जाता है पूरी तरह सुरक्षित सरकारी डेट में
ईपीएफओ अपने पास आने वाले कुल फंड का करीब 85 हिस्सा ऐसी जगहों पर लगाता है जहां डूबने का जोखिम न के बराबर होता है:
सरकारी बॉन्ड्स और स्टेट डेवलपमेंट लोन: ईपीएफओ का एक बहुत बड़ा हिस्सा केंद्र और राज्य सरकारों की विकास योजनाओं के बॉन्ड्स में लगा होता है। इससे देश का बुनियादी ढांचा (सड़कें, बिजली, रेलवे) मजबूत होता है और पीएफ के लिए तयशुदा रिटर्न सुनिश्चित होता है।
PSU के कॉरपोरेट बॉन्ड्स: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य महारत्न कंपनियों के सुरक्षित डेट सिक्योरिटीज में भी यह पैसा निवेश किया जाता है।
15% हिस्सा शेयर बाजार में: क्या आपका पैसा जोखिम में है?
साल 2015 से पहले ईपीएफओ शेयर बाजार में निवेश नहीं करता था। लेकिन कम ब्याज दरों की चुनौती से निपटने और रिटर्न बढ़ाने के लिए सरकार ने अगस्त 2015 से इक्विटी में 5% से 15% तक निवेश करने की अनुमति दी।
सीधे शेयरों की खरीद नहीं: ईपीएफओ कभी भी किसी कंपनी विशेष के शेयर सीधे बाजार से नहीं खरीदता।
केवल इंडेक्स ETFs का सहारा: यह निवेश केवल BSE Sensex और NSE Nifty-50 जैसे शीर्ष सूचकांकों को ट्रैक करने वाले ETFs के जरिए किया जाता है, जिससे जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
ईपीएफओ कैसे तय करता है आपका सालाना ब्याज?
वित्तीय वर्ष के दौरान डेट बॉन्ड्स से मिलने वाला तय ब्याज और इक्विटी (ETFs) की बिक्री से हुआ मुनाफा जोड़ा जाता है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर ब्याज दर का प्रस्ताव तैयार करता है। वित्त मंत्रालय की मुहर लगने के बाद तय ब्याज दर कर्मचारियों के पीएफ खातों में क्रेडिट कर दी जाती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ग्वालियर में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात हुए ट्रक हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत ही हृदयविदारक है। दुःख की इस घड़ी में राज्य सरकार सभी प्रभावित परिवारों के साथ है। मुख्यमंत्री ने सभी मृतकों के परिजनों के प्रति आत्मीय संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘एक्स’ पर कहा कि राज्य शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 2-2 लाख रूपये और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। सभी घायलों का नि:शुल्क उपचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवार ग्वालियर, शिवपुरी और श्योपुर से हैं। मंत्रीद्वय एदल सिंह कंषाना और राकेश शुक्ला को यथाशीघ्र ग्वालियर पहुंचने के निर्देश भी दिए हैं।
ग्वालियर में हुए ट्रक हादसे में श्रद्धालुओं की मृत्यु का समाचार अत्यंत हृदयविदारक है। इस दुःख की घड़ी में राज्य सरकार सभी प्रभावित परिवारों के साथ है। सभी मृतकों के परिजनों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। राज्य शासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 2-2 लाख रूपये और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। सभी घायलों का नि:शुल्क उपचार किया जाएगा। प्रभावित परिवार ग्वालियर, शिवपुरी और श्योपुर से हैं। मंत्रीद्वय श्री @Aidalsinghkbjp जी और @RakeshShukla_12 जी को ग्वालियर पहुंचने के निर्देश भी दिए हैं। बाबा महाकाल से प्रार्थना है कि दिवंगतों को अपने श्रीचरणों में स्थान दें, शोकाकुल परिजनों को यह गहन दुःख सहन करने की शक्ति एवं घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। ॐ शांति!
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) October 18, 2026
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगतों को अपने श्रीचरणों में स्थान देने एवं शोकाकुल परिजनों को यह गहन दुःख सहन करने की शक्ति देने एवं घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की प्रार्थना की है।
LPG Price 18 October 2026: हर महीने की तरह अक्टूबर में भी एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों को लेकर लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है। त्योहारों के सीजन में रसोई का खर्च पहले से ही बढ़ जाता है, ऐसे में गैस सिलेंडर के दाम आम परिवारों के बजट को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए कमर्शियल सिलेंडर की कीमतें कारोबार के खर्च से सीधे जुड़ी होती हैं। 18 अक्टूबर 2026 को घरेलू गैस सिलेंडर बुक कराने की तैयारी कर रहे हैं, तो अपने शहर का ताजा रेट जानना आपके लिए जरूरी है।
इस महीने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं हुआ है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और पटना समेत दूसरे शहरों में आज गैस सिलेंडर किस कीमत पर मिल रहा है? आइए, शहरवार रेट पर नजर डालते हैं।
दिल्ली में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमत कितनी है?
राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के लिए 942 रुपये देने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,810 रुपये है। यानी घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है, लेकिन कमर्शियल गैस का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को बढ़ी हुई कीमतों के हिसाब से अपना बजट तैयार करना पड़ सकता है।
आपके शहर में कितने रुपये का मिल रहा LPG सिलेंडर?
गैस सिलेंडर की कीमत हर शहर में एक जैसी नहीं होती। स्थानीय टैक्स और अन्य खर्चों के कारण इनके दाम में अंतर देखने को मिलता है। नीचे प्रमुख शहरों में 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें दी गई हैं।
- दिल्ली: 942 रुपये
- मुंबई: 941.50 रुपये
- कोलकाता: 968 रुपये
- चेन्नई: 957.50 रुपये
- नोएडा: 939.50 रुपये
- गुरुग्राम: 950.50 रुपये
- लखनऊ: 979.50 रुपये
- जयपुर: 945.50 रुपये
- पटना: 1,031.50 रुपये
- हैदराबाद: 994 रुपये
इन आंकड़ों पर नजर डालें तो सूची में पटना में घरेलू सिलेंडर की कीमत सबसे ज्यादा, जबकि नोएडा में सबसे कम है। हालांकि, बुकिंग से पहले अपने स्थानीय गैस वितरक से मौजूदा कीमत की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
आखिर क्यों अलग-अलग होते हैं गैस सिलेंडर के दाम?
एलपीजी की कीमतें केवल घरेलू मांग और आपूर्ति से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी इन पर असर डालती है। इसके अलावा, स्थानीय करों और वितरण से जुड़े खर्चों के कारण अलग-अलग शहरों में अंतिम कीमत अलग हो सकती है।
तेल विपणन कंपनियां घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों की समय-समय पर समीक्षा करती हैं। आम तौर पर हर महीने की शुरुआत में कीमतों में बदलाव की घोषणा पर नजर रहती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर महीने दाम बदलना जरूरी है।
घरेलू ग्राहकों को राहत
घरेलू सिलेंडर की कीमत स्थिर रहने से फिलहाल परिवारों के रसोई बजट पर कोई नया सीधा असर नहीं पड़ा है। दूसरी तरफ, कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट संचालकों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर कारोबार के मुनाफे और आगे चलकर कुछ खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
इसलिए गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर जांचें। खासकर कारोबारियों के लिए कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों पर नजर रखना जरूरी है, ताकि महीने के खर्च का सही हिसाब रखा जा सके।


