पेरू में टूरिस्ट प्लेन क्रैश, क्रू समेत 13 की मौत:2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स देखने गए थे; मरने वालों की पहचान नहीं हो सकी

पेरू के नाज्का शहर के बाहर शनिवार को पर्यटकों को ले जा रहा एक छोटा प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लेन ने पास के इका शहर से उड़ान भरी थी। नाज्का लाइन्स के पास पहुंचने के बाद प्लेन खेत में जाकर गिरा। इसमें आग लग गई। प्लेन में 2 पायलट्स के अलावा 11 पर्यटक थे। हादसे के बाद प्लेन के मलबे के पास जले हुए शव बिखरे पड़े थे। दरअसल, 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स को पूरी तरह से केवल प्लेन या व्यूइंग टावर से ही देखा जा सकता है। इसलिए प्लेन पर्यटकों को लेकर निकला था। मरने वाले कहां से थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पेरू प्लेन हादसे के बाद खेत में बिखरे शव… 14 साल से सीनिक फ्लाइट्स ऑर्गनाइज कर रही थी कपंनी जो प्लेन हादसे का शिकार हुआ, उसे पेरू की कंपनी ‘एरोडियाना’ ऑपरेट कर रही थी। एयरलाइन की वेबसाइट के मुताबिक, वह पिछले 14 साल से सेसना ग्रैंड कारवां प्लेन का इस्तेमाल करके नाज्का लाइन्स के ऊपर सीनिक फ्लाइट्स (नजारे दिखाने वाली उड़ानें) की सुविधा दे रहे हैं। हादसे की जांच की जा रही है। एरोडियाना ने कोई कमेंट नहीं दिया। पेरू के मूल निवासियों ने बनाईं थीं नाज्का लाइन्स पेरू की राजधानी लीमा से लगभग 400 किमी दक्षिण में पेरू के नाज्का और पाल्पा रेगिस्तान में कुछ आकृतियां बनी हैं। माना जाता है कि इन्हें 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच नाज्का सभ्यता के लोगों ने बनाया। रेगिस्तान की गहरे रंग की पत्थरीली सतह हटाकर नीचे की हल्की मिट्टी को दिखाया गया, जिससे ये आकृतियां बन गईं। कई आकृतियां 100 से 300 मीटर और उससे भी बड़ी हैं। कुछ सीधी रेखाएं कई किलोमीटर तक जाती हैं। इन्हें क्यों बनाया गया, यह आज भी रहस्य है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये धार्मिक अनुष्ठान, वॉटर सोर्स, अंतरिक्ष की गणनाओं या फिर संस्कृति से जुड़ी हो सकती हैं। यहां बहुत कम बारिश और शुष्क जलवायु होने के कारण ये आकृतियां करीब 2,000 साल से सुरक्षित बनी हुई हैं।

पेरू में टूरिस्ट प्लेन क्रैश, क्रू समेत 13 की मौत:2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स देखने गए थे; मरने वालों की पहचान नहीं हो सकी

पेरू के नाज्का शहर के बाहर शनिवार को पर्यटकों को ले जा रहा एक छोटा प्लेन क्रैश हो गया। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। एजेंसी रिपोर्ट्स के मुताबिक प्लेन ने पास के इका शहर से उड़ान भरी थी। नाज्का लाइन्स के पास पहुंचने के बाद प्लेन खेत में जाकर गिरा। इसमें आग लग गई। प्लेन में 2 पायलट्स के अलावा 11 पर्यटक थे। हादसे के बाद प्लेन के मलबे के पास जले हुए शव बिखरे पड़े थे। दरअसल, 2000 साल पुरानी नाज्का लाइन्स को पूरी तरह से केवल प्लेन या व्यूइंग टावर से ही देखा जा सकता है। इसलिए प्लेन पर्यटकों को लेकर निकला था। मरने वाले कहां से थे, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। पेरू प्लेन हादसे के बाद खेत में बिखरे शव… 14 साल से सीनिक फ्लाइट्स ऑर्गनाइज कर रही थी कपंनी जो प्लेन हादसे का शिकार हुआ, उसे पेरू की कंपनी ‘एरोडियाना’ ऑपरेट कर रही थी। एयरलाइन की वेबसाइट के मुताबिक, वह पिछले 14 साल से सेसना ग्रैंड कारवां प्लेन का इस्तेमाल करके नाज्का लाइन्स के ऊपर सीनिक फ्लाइट्स (नजारे दिखाने वाली उड़ानें) की सुविधा दे रहे हैं। हादसे की जांच की जा रही है। एरोडियाना ने कोई कमेंट नहीं दिया। पेरू के मूल निवासियों ने बनाईं थीं नाज्का लाइन्स पेरू की राजधानी लीमा से लगभग 400 किमी दक्षिण में पेरू के नाज्का और पाल्पा रेगिस्तान में कुछ आकृतियां बनी हैं। माना जाता है कि इन्हें 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच नाज्का सभ्यता के लोगों ने बनाया। रेगिस्तान की गहरे रंग की पत्थरीली सतह हटाकर नीचे की हल्की मिट्टी को दिखाया गया, जिससे ये आकृतियां बन गईं। कई आकृतियां 100 से 300 मीटर और उससे भी बड़ी हैं। कुछ सीधी रेखाएं कई किलोमीटर तक जाती हैं। इन्हें क्यों बनाया गया, यह आज भी रहस्य है। वैज्ञानिकों के अनुसार ये धार्मिक अनुष्ठान, वॉटर सोर्स, अंतरिक्ष की गणनाओं या फिर संस्कृति से जुड़ी हो सकती हैं। यहां बहुत कम बारिश और शुष्क जलवायु होने के कारण ये आकृतियां करीब 2,000 साल से सुरक्षित बनी हुई हैं। नाज्का में पहले भी हो चुके हैं हादसे पिछले कुछ दशकों में इस मशहूर हैरिटेज साइट पर विमान दुर्घटना का यह पहला मामला नहीं है।

Renault Group India CEO Stephane Deblaise on response to Duster and future plans

Renault Group India CEO Stephane Deblaise

Renault Group India CEO Stephane Deblaise took charge of the company in September last year, and since then, the carmaker has been busy expanding and refreshing its India line-up. In this interview, Deblaise talks about the response to the new Renault Duster and the possibility of a more affordable automatic variant, the company’s upcoming product plans, progress on the Bridger compact SUV concept, and how Renault plans to strengthen its position in the Indian market.

On the response to the 1.0-litre Duster

It’s still early, so we don’t know the exact response, but it’s a key part of our phased strategy, which was to first focus on the 160hp DCT that is the high-end version in the ICE car. And then we want to introduce the 100hp, the more ‘regular’ car, which is less expensive. That Rs 10.5 lakh price is very, very good for people who want to enter the B+ SUV segment, and it has very good fuel efficiency. Moreover, the Duster is a very good car, and people are loyal to good cars, so we are expecting the Duster to do well on the whole.

On the slow rate of Duster bookings and deliveries

So, at Renault, we don’t overstate or overpromise. We won’t say we have 60,000 people waiting and, after that, you would discover that we did not do 60,000 deliveries. Some people do that; we don’t. We are very serious and would prefer to focus on one (variant), and then another, and a third, so in this way people keep speaking about it. For the hybrid, we were not ready; that’s why it is coming later, but with the 160hp and 100hp Duster, we wanted to focus first on the high-end and then the lower version. You know, we were in a little bit of a hibernation, and you can’t go from that to summer in one day. I think it’s good to build up step by step. 

On the possibility of a 1.0-litre automatic

I am not saying what gearbox or even the engine, but what I can say is that very soon we will introduce a new, less expensive version with an automatic. It was not planned at the beginning, but since we launched the new Duster, we have been having a lot of queries about this from customers. Plus, if you look at the pricing of all the models and variants we currently have, there is a gap between the manual variants and the first automatic version. 

On the rest of the Renault portfolio

I arrived in India on the 1st of September, and on the 16th of October I went to Paris to validate our India plan, and all the programmes that we decided to pursue were validated. Then, as you know, we communicated this in April this year. The programmes are completely running as per our expectations and on time. On the Renault Group Entry Platform (RGEP), we have made many modifications and carried out re-engineering to bring in new engines, new equipment and other things that you have requested. They are now finally coming. Next year will be a blowout of new products. 

On the brand’s new design centre in India

The India R&D centre is playing a very big role in our local as well as global plans. When I arrived, I was requested to bring together the three entities we had, which were all separate: one dedicated to sales, one to engineering, and one dedicated to manufacturing, which was along with Nissan. Now we have all three together under one leadership – mine – and this helps a lot because communication is easier and quicker, and this is improving our agility and our ability to see and respond to the market much better. This is why we will now deliver exactly what the market needs and is asking for.

On the development of the Bridger concept

This is a very important topic. It’s my project, and I am working very hard on this with our whole team. We have three meetings per week about the project, and in the coming weeks, there is a very important milestone. But I am happy to say that everything is going nicely and is on track, so I am satisfied with our progress. 

Nirmal Purja: कौन थे निर्मल पुर्जा…जिनकी PoK में हुई मौत! 6 महीने में दुनिया की 14 सबसे ऊंची चोटियां फतह कर रचा था इतिहास

नेपाल के प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा, जिन्हें लोग ‘निम्सदाई’ के नाम से भी जानते थे, की पाकिस्तान में स्थित दुनिया की 12वीं सबसे ऊंची चोटी ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन (बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरना) की चपेट में आने से मौत हो गई। इसकी जानकारी उनकी एडवेंचर कंपनी और अन्य लोगों ने इंस्टाग्राम पर साझा की।

शुक्रवार को ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन होने के बाद निर्मल पुर्जा और पांच अन्य पर्वतारोही लापता हो गए थे। इसके बाद लगातार उनकी तलाश की जा रही थी। इस दुखद हादसे से कुछ घंटे पहले निर्मल पुर्जा ने भारत के पत्रकार विष्णु सोम को एक वॉयस मैसेज भी भेजा था। माना जा रहा है कि यह उनका आखिरी संदेश था।

कंपनी ने पोस्ट कर दी जानकारी 

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट जारी कर उनकी मौत की पुष्टि की। कंपनी ने कहा कि ब्रॉड पीक पर हुए हिमस्खलन के बाद निर्मल पुर्जा का निधन हो गया। साथ ही अभियान में शामिल अन्य सदस्य भी इस हादसे में जीवित नहीं बच सके। कंपनी ने अपने संदेश में कहा कि यह सभी के लिए बेहद दुखद क्षण है। उन्होंने केवल निर्मल पुर्जा ही नहीं, बल्कि इस हादसे में जान गंवाने वाले उनके साथी पर्वतारोहियों और गाइड पुर बहादुर गुरुंग और निमा शेरपा को भी श्रद्धांजलि दी।कंपनी ने कहा कि उनकी संवेदनाएं सभी मृतकों के परिवार, दोस्तों और करीबियों के साथ हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस कठिन समय में परिवारों की निजता का सम्मान किया जाए।

ब्रॉड पीक में हुई मौत

ब्रॉड पीक काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। यह पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान और चीन के शिनजियांग क्षेत्र की सीमा के पास स्थित है। यह चोटी के2 पर्वत के बेहद करीब है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन ब्रॉड पीक के सामान्य वेस्ट रिज मार्ग पर हुआ। उस समय पर्वतारोही करीब 21,600 से 21,850 फीट की ऊंचाई पर मौजूद थे, जहां अचानक बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया।

निर्मल पुर्जा की एडवेंचर कंपनी एलीट एक्सपेड ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि दुनिया ने पर्वतारोहण के सबसे महान पर्वतारोहियों में से एक को खो दिया है। कंपनी के अनुसार, निर्मल पुर्जा अपने साहस, विनम्र स्वभाव और मजबूत इरादों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने अपने काम और उपलब्धियों से दुनिया भर के लाखों लोगों को बड़े सपने देखने और खुद पर भरोसा रखने की प्रेरणा दी। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा का मानना था कि इंसान अपनी सोच से कहीं ज्यादा बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है। यही सोच उन्होंने अपने जीवन और अभियानों के जरिए लोगों तक पहुंचाई और अनगिनत लोगों को अपने लक्ष्य पूरे करने के लिए प्रेरित किया।

पोस्ट में यह भी कहा गया कि एलीट एक्सपेड, निम्सदाई फाउंडेशन, स्काईडाइव निम्सदाई और निम्सदाई स्टोर जैसी संस्थाओं को आगे बढ़ाने में उनकी दूरदृष्टि, नेतृत्व और मजबूत संकल्प की सबसे बड़ी भूमिका रही। कंपनी ने कहा कि निर्मल पुर्जा की विरासत हमेशा उन लोगों के जरिए जीवित रहेगी, जिनकी जिंदगी उन्होंने बदली और जिन्हें अपने सपनों को पूरा करने का हौसला दिया।

रचा था ये इतिहास

निर्मल पुर्जा पहले ब्रिटेन की ब्रिगेड ऑफ गोरखा और रॉयल मरीन की स्पेशल बोट सर्विस (एसबीएस) में भी सेवाएं दे चुके थे। सेना से अलग होने के बाद उन्होंने पूरी तरह पर्वतारोहण को अपना करियर बनाया और दुनिया भर में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। साल 2019 में उन्होंने अपने ‘प्रोजेक्ट पॉसिबल’ अभियान के तहत केवल 6 महीने और 6 दिन में 8,000 मीटर से ऊंची दुनिया की सभी 14 चोटियों पर चढ़ाई पूरी कर इतिहास रच दिया। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके बाद साल 2021 में निर्मल पुर्जा उन 10 नेपाली पर्वतारोहियों की टीम का हिस्सा भी रहे, जिसने पहली बार सर्दियों के मौसम में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के2 पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की थी।

योगी सरकार की गो संरक्षण नीति से निकला गो सेवा के साथ रोजगार का नया रास्ता

Yogi Janata darshan

Yogi government cow conservation policy: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गो संरक्षण नीति ने उत्तर प्रदेश में गो सेवा को रोजगार और उद्यमिता के नए मॉडल में बदल दिया है। यह व्यवस्था अब स्वरोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों के कारोबार का मजबूत आधार बन रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से बड़े उद्यमी, इंजीनियर, सामाजिक संस्थाएं व अन्य लोग भी गो संरक्षण के क्षेत्र में उतर कर देसी गायों पर आधारित उत्पादों के जरिए नई आर्थिक संभावनाएं तैयार कर रहे हैं। यही कारण है कि प्रदेश में गो सेवा के साथ रोजगार का नया रास्ता खुला है।

 

प्रदेश में देसी गायों के पंचगव्य, आयुर्वेदिक औषधियों, जैविक उत्पादों और पारंपरिक खाद्य सामग्री की मांग लगातार बढ़ी है। इन उत्पादों का बाजार अब केवल अपने प्रदेश या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, दुबई और यूरोप के कई देशों तक फैल चुका है। गो आधारित उद्योगों के विस्तार से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत तैयार हुए हैं।

योगी सरकार की नीति से बदली तस्वीर

उत्तर प्रदेश में गो संरक्षण को लेकर सरकार की नीति ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। गोवंश संरक्षण को जैविक खेती, स्वरोजगार, महिला सशक्तीकरण, ग्रामीण उद्योग और स्वदेशी उत्पादों से जोड़ने का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। देसी नस्ल की गायों पर आधारित मॉडल में दूध, घी, गोमूत्र अर्क, पंचगव्य औषधियां, जैविक खाद, हर्बल उत्पाद और अन्य वैल्यू एडेड वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ावा मिला है। इससे गोशालाएं केवल आश्रय स्थल नहीं रहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधि के केंद्र के रूप में भी उभर रही हैं।

 

बदलती उपभोक्ता पसंद और प्राकृतिक उत्पादों की मांग ने भी इस क्षेत्र को नई ताकत दी है। A2 दूध, बिलौना घी और पंचगव्य आधारित उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता ने उद्यमियों को आकर्षित किया है। कई संस्थाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंच बन रही है। इससे उत्तर प्रदेश के गो आधारित उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने लगे हैं।

सीएम योगी की प्रेरणा से सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने गाजियाबाद में चुना नया रास्ता

करीब डेढ़ दशक तक विदेशी कंपनियों के लिए काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर असीम रावत ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से गो संरक्षण के क्षेत्र में कदम रखा। गाजियाबाद स्थित उनकी संस्था ‘हेता ऑर्गेनिक’ आज देसी गायों के संरक्षण के साथ करीब 10 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार कर रही है। यह संस्था केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वृद्ध गोवंश को भी आश्रय देती है और उनकी नियमित देखभाल करती है।

 

यहां देशी गायों के दूध से 150 से अधिक प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इनमें A2 बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, पंचगव्य घृत, देसी गाय का दूध, कुकीज, लड्डू, शतधौत घृत, हेल्दी मिठाइयां, स्नैक्स, हर्बल चाय, पेय पदार्थ तथा स्किन और हेयर केयर उत्पाद शामिल हैं। असीम रावत का उदाहरण बताता है कि योगी सरकार की प्रेरणा और नीति-समर्थन से गो संरक्षण को आधुनिक प्रबंधन और बाजार के साथ जोड़कर बड़े कारोबार में बदला जा सकता है।

वाराणसी में सुरभि शोध संस्थान बना गो सेवा और आजीविका का केंद्र

वाराणसी स्थित सुरभि शोध संस्थान भी इस दिशा में बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। कारोबारी एवं समाजसेवी सूर्यकांत जालान की गोशालाएं लखनऊ, वाराणसी, मीरजापुर, दिल्ली सहित कई स्थानों पर संचालित हैं। यहां 28,000 से अधिक गोवंश हैं। यहां गोबर और गोमूत्र का उपयोग जैविक खेती और विभिन्न उत्पादों के निर्माण में किया जाता है।

 

संस्थान ने एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है। यहां काम करने वाले लोग गो आश्रय स्थलों में रहकर गो सेवा के साथ अपनी आजीविका भी चला रहे हैं। यह मॉडल बताता है कि गो संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ बड़े पैमाने पर रोजगार और उत्पादन से भी जोड़ा जा सकता है।

बुलंदशहर के पर्यावरण इंजीनियर ने खड़ा किया सफल मॉडल

बुलंदशहर निवासी पर्यावरण इंजीनियर पराग गौड़ भी गो संरक्षण के क्षेत्र में सफल उद्यमी के रूप में उभरे हैं। लगभग 70 देसी गायों के माध्यम से वे दूध, घी, विशेष प्रकार के च्यवनप्राश समेत अन्य उत्पाद तैयार करते हैं। उनका सालाना कारोबार करीब सवा करोड़ रुपये का है। इस उद्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार भी पैदा हुआ है और गो आधारित उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। यह मॉडल इस बात का उदाहरण है कि गो सेवा, स्वदेशी परंपरा और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ जोड़कर आर्थिक सफलता हासिल की जा सकती है।

योगी सरकार का जोर देसी नस्ल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार उन्नत और उच्च उत्पादकता वाली देसी नस्ल की गायों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रोत्साहन दे रही है। उनका कहना है कि गो संरक्षण को आजीविका, जैविक/प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर राज्य में नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। इससे गो सेवा के साथ रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुल रहे हैं।

VIDEO: आखिर कैफे और शॉपिंग पर इतना क्यों खर्च कर रहे GenZ? बेंगलुरु की महिला के वीडियो ने छेड़ी बहस

बेंगलुरु की एक कंटेंट क्रिएटर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। कंटेंट क्रिएटर ने सोशल मीडिया पर युवाओं की खर्च करने की आदतों को लेकर एक पोस्ट किया है। इस पोस्ट में उन्होंने कहा कि, आज कई युवा अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बेहतर लाइफस्टाइल, महंगी चीजों और आरामदायक लाइफस्टाइल पर खर्च कर रहे हैं। वह अपने सेविंग और भविष्य की वित्तीय योजना पर उतना ध्यान नहीं दे रहे हैं। बेंगलुरु में रहने वाली कंटेंट क्रिएटर सिमरिधि मखीजा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। उनके इस पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

उन्होंने बताया कि, शहर में रहने के दौरान उन्होंने लोगों की कुछ ऐसी खर्च करने की आदतें देखीं, जिन्हें समझना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने ये भी कहा कि कई लोग इन खर्चों को आसानी से अफोर्ड कर सकते हैं। वीडियो में मखीजा ने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि लोग एक बार कैफे जाने पर करीब 5,000 रुपये कैसे खर्च कर देते हैं। इसी तरह, जब लगभग आधे किराए में अच्छा घर मिल सकता है, तो हर महीने 40,000 रुपये किराया क्यों देते हैं। इसके अलावा, एक ही शॉपिंग ट्रिप में 20,000 रुपये खर्च करना भी मेरी समझ से बाहर है।”

अच्छी कमाई का मतलब ज्यादा खर्च नहीं

सिमरिधि मखीजा ने कहा कि, अच्छी कमाई होने का मतलब ये नहीं है कि हर जगह खुलकर खर्च किया जाए। उनके मुताबिक, करियर की शुरुआत में युवाओं को सादा जीवन अपनाना चाहिए, केवल जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करना चाहिए और अपनी बची हुई आय का बड़ा हिस्सा बचत या निवेश में लगाना चाहिए। उनका कहना है कि भविष्य को देखते हुए आर्थिक सुरक्षा पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। मखीजा ने ये भी कहा कि कई लोग जैसे-जैसे ज्यादा कमाने लगते हैं, वैसे-वैसे उनके खर्च भी बढ़ जाते हैं।

 

लोगों ने दिया रिएक्शन

उनके अनुसार, बढ़ी हुई आय का मतलब ये नहीं होना चाहिए कि लाइफस्टाइल पर भी उतना ही ज्यादा पैसा खर्च किया जाए। खासकर नौकरी या करियर के शुरुआती वर्षों में युवाओं को फिजूल खर्च से बचकर अपनी कमाई का बेहतर इस्तेमाल बचत और भविष्य की योजना बनाने में करना चाहिए। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। कुछ यूजर्स ने कहा कि कम उम्र से बचत करने की आदत भविष्य में आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है। वहीं, कई लोगों का मानना था कि सिर्फ खर्च कम करने पर ध्यान देने के बजाय अपनी कमाई बढ़ाने की कोशिश करना ज्यादा जरूरी है।

लोगों ने दी ये सलाह

एक यूजर ने लिखा, “मेरे हिसाब से तरीका बिल्कुल अलग होना चाहिए। 20 की उम्र में कमाई बढ़ाने पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए। 30 की उम्र में कमाई, निवेश और संपत्ति बनाने के बीच संतुलन रखना चाहिए। वहीं, 40 की उम्र में अपनी बनाई हुई संपत्ति को सुरक्षित रखने और बढ़ाने पर फोकस होना चाहिए।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “20 की उम्र में सिर्फ पैसे बचाने पर ज्यादा ध्यान मत दीजिए। अपनी कमाई को कई गुना बढ़ाने की कोशिश कीजिए। अगर आपकी इनकम 10 गुना बढ़ती है, तो खर्च दोगुना होने से कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी। बहुत ज्यादा सादगी से जीने के बजाय अपने पैसे का आनंद भी लेना चाहिए, क्योंकि आखिर मेहनत करके कमाने का मकसद भी वही है।”

Royal Enfield की जुलाई 2026 में 34% बढ़ी बिक्री, बेची 1.18 लाख बाइक

अगर आप Royal Enfield के फैन हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने जुलाई 2026 में शानदार बिक्री दर्ज की है। इस दौरान Royal Enfield की कुल मोटरसाइकिल बिक्री 34% बढ़कर 1,18,232 यूनिट पर पहुंच गई। इस शानदार प्रदर्शन में सबसे बड़ा योगदान घरेलू बाजार का रहा, जबकि विदेशों में भी कंपनी की बिक्री में हल्की बढ़त देखने को मिली।

बता दें कि जुलाई 2026 में भारत में Royal Enfield की 1,05,317 मोटरसाइकिलें बिकीं, जबकि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 76,254 यूनिट था। वहीं, कंपनी का एक्सपोर्ट भी बढ़कर 12,915 यूनिट हो गया, जो जुलाई 2025 में 11,791 यूनिट था। इन आंकड़ों से साफ है कि भारतीय बाजार में Royal Enfield की बाइक्स की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। साथ ही, विदेशी बाजारों में भी कंपनी अपनी पकड़ धीरे-धीरे मजबूत कर रही है।

अगर चालू वित्त वर्ष में अब तक की बात करें, तो Royal Enfield ने कुल 4,48,659 मोटरसाइकिलें बेची हैं। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में बिके 3,53,573 यूनिट के मुकाबले 27% ज्यादा है। वहीं, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच घरेलू बाजार में कंपनी की बिक्री बढ़कर 4,06,491 यूनिट हो गई। हालांकि, इस दौरान एक्सपोर्ट 42,168 यूनिट रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 48,540 यूनिट के मुकाबले कम है।

कंपनी ने क्या कहा?

सेल्स अपडेट के साथ-साथ, Royal Enfield ने बताया कि उसका Flying Flea इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ब्रांड बेंगलुरु में अपना दायरा बढ़ा रहा है। जयनगर में अपना पहला स्टोर खोलने के बाद, ब्रांड ने 10 नए सेल्स और सर्विस टचपॉइंट्स जोड़े हैं। यह विस्तार ‘Flying Flea C6’ में बढ़ती दिलचस्पी को दिखाता है और संकेत देता है कि Flying Flea अपने इलेक्ट्रिक बिजनेस को शहर के बड़े कस्टमर बेस के लिए तैयार कर रही है।

इसके अलावा, कंपनी ने 2026 Classic 350 में भी कुछ अपडेट्स किए हैं, जिनमें असिस्ट और स्लिपर क्लच और USB टाइप-C फास्ट चार्जिंग पोर्ट शामिल हैं। ये ऐसे बदलाव हैं जो कागज पर भले ही छोटे लगें, लेकिन रोजाना के इस्तेमाल में अक्सर मायने रखते हैं, खासकर उन राइडर्स के लिए जो ट्रैफिक में या रोजाना आने-जाने में लंबा समय बिताते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर, कंपनी ने कहा कि वह आंध्र प्रदेश में अपने 1,225 करोड़ रुपये के ग्रीनफील्ड प्लांट के पहले चरण पर काम आगे बढ़ा रही है। पूरी तरह चालू होने पर, इस फैसिलिटी से सालाना 450,000 मोटरसाइकिल तक की कैपेसिटी जुड़ने की उम्मीद है, और इसे FY2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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Google Pay-PhonePe पर UPI Autopay कैसे करें सेट? यहां देखें पूरा प्रोसेस स्टेप बाय स्टेप

आज के समय में लोग कई तरह की सब्सक्रिप्शन सर्विस का इस्तेमाल करते हैं, जिनके लिए हर महीने या सालाना पेमेंट करना पड़ता है। लेकिन इन सभी सेवाओं की पेमेंट डेट याद रखना और उनका हिसाब रखना अक्सर मुश्किल हो जाता है। कई बार तो ऐसा भी होता है कि यूजर किसी सब्सक्रिप्शन का पेमेंट करना भूल जाते हैं, जिसकी वजह से उनकी सर्विस बंद या कैंसिल हो जाती है। इसी परेशानी को आसान बनाने के लिए साल 2020 में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI Autopay सुविधा शुरू की थी। इसके जरिए, आप अपनी पसंद के किसी भी UPI ऐप का इस्तेमाल करके मोबाइल बिल, बिजली बिल, EMI पेमेंट, OTT सब्सक्रिप्शन, इंश्योरेंस प्रीमियम और म्यूचुअल फंड जैसे बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए ई-मैंडेट (e-mandate) चालू कर सकते हैं।

यहां UPI ऑटोपे मैंडेट और बार-बार होने वाले पेमेंट (Recurring Payments) के बारे में वे सभी बातें बताई गई हैं, जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है। इसमें इनके फायदे और Google Pay व PhonePe का इस्तेमाल करके इन्हें सेट अप करने का तरीका भी शामिल है।

ग्राहकों और व्यापारियों के लिए UPI Autopay सेट करने के फायदे

बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए UPI Autopay मैंडेट सेट करने के कई फायदे हैं। अगर आप ग्राहक हैं, तो ऑटोपे सेट करने से आप लेट फीस और पेनल्टी से बच सकते हैं, क्योंकि यह आपकी ओर से समय पर पेमेंट कर देता है। इसी तरह, यह बार-बार होने वाले पेमेंट करने का एक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीका है, जिसमें आपको हर महीने या साल मैन्युअल रूप से पेमेंट करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि तय समय पर पेमेंट अपने आप हो जाता है।

वहीं, व्यापारियों (Merchants) के लिए भी यह सुविधा फायदेमंद है, क्योंकि इससे समय पर भुगतान मिलने में आसानी होती है और ग्राहकों के साथ पेमेंट का मैनेजमेंट बेहतर हो जाता है।

बता दें कि UPI, यूजर्स को क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस के लिए 1,00,000 रुपये तक की लिमिट के साथ ऑटो-पे सेट करने की सुविधा देता है। आप सीधे UPI ऐप में Autopay को आसानी से बदल सकते हैं, रद्द कर सकते हैं, रोक सकते हैं या दोबारा शुरू कर सकते हैं। आप लंबी लाइनों में लगने के बजाय हर महीने या साल सीधे ऑनलाइन पेमेंट भी कर सकते हैं। खास बात यह है कि Autopay सेट करने के लिए किसी तरह के दस्तावेज या कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं होती।

इसके अलावा, Autopay पेमेंट होने से कम से कम 24 घंटे पहले आपको प्री-डेबिट नोटिफिकेशन (PDN) मिल जाता है, जिससे आपको पहले ही जानकारी मिल जाती है कि आपके खाते से पेमेंट कटने वाला है।

अगर आप कोई मर्चेंट (व्यापारी) हैं, तो Autopay को इंटीग्रेट करने से ग्राहकों से समय पर भुगतान मिलना आसान हो जाता है। इससे आप ग्राहकों को बेहतर सर्विस दे सकते हैं, उनकी संतुष्टि बढ़ा सकते हैं और लंबे समय तक उनका भरोसा बनाए रख सकते हैं।

Google Pay पर बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए Autopay Mandate कैसे सेट करें

  • अपने फोन पर Google Pay खोलें।
  • स्क्रीन के ऊपर दाईं ओर दिखाई दे रही अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें।
  • अब, उस सेक्शन को खोलने के लिए ‘Autopay’ बटन पर क्लिक करें।
  • यहां आपको अलग-अलग सर्विस के लिए आए हुए Autopay Mandate दिखाई देंगे। किसी खास सर्विस के लिए Autopay चालू करने के लिए Pending सेक्शन में जाएं और संबंधित मैंडेट को चुनें।
  • इसके बाद Accept बटन पर टैप करें, ताकि Autopay सेट हो जाए।
  • अगर आप किसी रिक्वेस्ट किए गए मैंडेट के लिए Autopay सेट नहीं करना चाहते हैं, तो आप ‘Decline’ भी चुन सकते हैं।
  • आखिर में अपनी पसंद की पुष्टि करने के लिए UPI PIN दर्ज करें।
  • इसके बाद आपका Autopay Mandate एक्टिव हो जाएगा।

PhonePe पर बार-बार होने वाले पेमेंट के लिए Autopay Mandate कैसे सेट करें

  • अपने स्मार्टफोन पर PhonePe ऐप खोलें।
  • इसके बाद, स्क्रीन के ऊपर बाईं ओर अपनी प्रोफाइल फोटो पर टैप करें।
  • नीचे स्क्रॉल करके ‘Payment Settings’ सेक्शन पर जाएं।
  • अब, ‘Autopay’ बटन पर टैप करें।
  • इसके बाद एक नया पेज खुलेगा। यहां आपको वह Mandate चुनना होगा, जिसके लिए आप Autopay चालू करना चाहते हैं।
  • Autopay रिक्वेस्ट को स्वीकार करने के बाद ऐप आपसे पुष्टि के लिए UPI PIN दर्ज करने को कहेगा।
  • UPI PIN डालते ही आपका PhonePe Autopay Mandate एक्टिव हो जाएगा और आगे के पेमेंट तय समय पर अपने आप हो जाएंगे।

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July 2026 car sales: Tata holds slim lead over Mahindra

July 2026 car sales: Tata holds slim lead over Mahindra

July 2026 was a strong month for India’s passenger vehicle industry, with most carmakers reporting healthy month-on-month gains. Maruti Suzuki strengthened its lead at the top, with domestic passenger vehicle sales approaching the 2 lakh-unit mark, while Tata Motors retained second place, narrowly ahead of Mahindra. Hyundai rebounded strongly from a fire disruption at a supplier that affected June production to remain fourth, with Toyota rounding out the top five in the monthly sales.

July 2026 carmaker-wise sales in India

Carmaker

July 2026 sales

June 2026 sales

MoM change (%)

July 2025 sales

YoY change (%)

Maruti Suzuki

1,96,203

1,47,187

33.30

1,37,776

42.41

Tata

62,611

62,076

0.86

39,521

58.42

Mahindra

60,048

60,393

-0.57

49,871

20.41

Hyundai

54,210

39,635

36.77

43,966

23.30

Toyota

30,516

28,441

7.30

29,159

4.65

Kia

28,200

24,552

14.86

22,135

27.40

MG

8,158

7,568

7.80

6,687

22

Nissan

4,518

3,006

50.30

1,421

218

Maruti Suzuki July 2026 sales

Sales: 196,203 units, Change: 42.4 percent YoY

Maruti Suzuki retained its position as India’s largest carmaker in July, with domestic passenger vehicle sales rising to 196,203 units from 147,187 units in June. Utility vehicles, including the Brezza, Ertiga, e Vitara, Fronx, Grand Vitara, Invicto, Jimny, Victoris and XL6, contributed 78,851 units, while the compact and mid-size segment, led by the Baleno, Swift, Dzire and WagonR, remained the company’s largest volume driver with 90,822 units. Mini cars, comprising the Alto and S-Presso, added another 12,634 units.

Tata Motors July 2026 sales

Sales: 62,611 units, Change: 58 percent YoY

Tata Motors sold 62,611 passenger vehicles in the domestic market in July, marginally higher than the 62,076 units recorded in June, despite temporary production disruptions at its Sanand plant due to heavy rainfall and flooding. The Punch recorded its highest-ever monthly sales, reinforcing its position as one of the company’s best-selling SUVs, while Tata’s EV portfolio crossed 15,000 monthly wholesales for the first time.

Mahindra July 2026 sales

Sales: 60,048 units, Change: 20 percent YoY

Mahindra sold 60,048 SUVs in the domestic market in July, almost unchanged from the 60,393 units it sold in June. The expected launch of the updated Scorpio N in August could help boost sales and provide fresh momentum as the company heads into the festive season.

Hyundai July 2026 sales

Sales: 54,210 units, Change: 23.3 percent YoY

Hyundai recorded its highest-ever domestic sales for the month of July, selling 54,210 units, a sharp recovery from 39,635 units in June after a fire at a supplier’s facility disrupted production. The Creta led the growth with 18,088 units, its best monthly performance in CY26, while the i20 also posted its highest monthly sales in CY26 at 6,738 units, highlighting renewed momentum across both Hyundai’s SUV and hatchback portfolios.

Toyota July 2026 sales

Sales: 30,516 units, Change: 5 percent YoY

Toyota Kirloskar Motor reported domestic sales of 30,516 units in July, up from 28,441 units in June, with the Innova Hycross, Urban Cruiser Hyryder and Glanza continuing to drive volumes. Cumulative domestic dispatches for the January-July period rose 13 percent year-on-year to 233,854 units, while sales during the first four months of FY2027 (April-July) increased 8 percent to 128,746 units.

Kia July 2026 sales

Sales: 28,200 units, Change: 27.4 percent YoY

Kia recorded its highest-ever July wholesale volume, dispatching 28,200 units, up from 24,552 units in June. The Seltos remained Kia’s best-selling model, averaging more than 10,000 units a month since the start of the year, while the recently launched Syros EV has also garnered strong initial bookings.

MG July 2026 sales

Sales: 8,158 units, Change: 22 percent YoY

JSW MG Motor India recorded its highest-ever monthly wholesales for the second consecutive month in July, dispatching 8,158 units, up from 7,568 units in June. Electric vehicles accounted for more than 80 percent of total volumes, marking their strongest monthly performance yet.

Nissan July 2026 sales

Sales: 4,518 units, Change: 218 percent YoY

Nissan continued its growth momentum in July, with domestic wholesales rising 50 percent month-on-month to 4,518 units from 3,006 units in June. The increase was supported by the start of customer deliveries of the all-new Tekton, which commenced on July 20 after its debut on July 9, expanding Nissan’s India portfolio to three models alongside the Magnite and Gravite.

ITR: 31 जुलाई तक फाइल किए गए करीब 6 करोड़ रिटर्न, इनकम के ट्रेंड में दिखा दिलचस्प बदलाव

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख तक कुल 5.9 लाख रिटर्न फाइल हुए। आईटीआर फॉर्म-1 और आईटीआर फॉर्म-2 से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। फाइल कुल रिटर्न की संख्या की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 1 अगस्त को दी है।

आईटीआर-3 और ITR-4 फॉर्म वाले टैक्सपेयर्स के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की 31 जुलाई की अंतिम तारीख उन टैक्सपेयर्स के लिए थी, जिनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं है। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी बिजनेस और प्रोफेशनल इनकम है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 अगस्त है। आईटीआर-1 का इस्तेमाल ऐसे रेजिडेंट इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स करते हैं, जिनकी कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपये तक होती है। उनकी इनकम में सैलरी, एक घर से इनकम और 5,000 रुपये तक की एग्रीकल्चर इनकम शामिल हो सकती है।

अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स की इनकम का स्रोत सिर्फ सैलरी नहीं

ITR फॉर्म 2 उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है, लेकिन कैपिटल गेंस से इनकम है। टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स के डेटा के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में टैक्स फाइलिंग का पैटर्न बदला है। अब ज्यादा टैक्सपेयर्स सैलरी के अलावा इनकम के दूसरे स्रोतों की भी रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

कैपिटल गेंस दिखाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़ी

इस साल रिटर्न फाइल कर चुके टैक्सपेयर्स में से सिर्फ 42 फीसदी ने सैलरी को इनकम का मुख्य स्रोत दिखाया है। AY2022-23 में यह संख्या 82 फीसदी थी। टैक्सपेयर्स के इनकम में कैपिटल गेंस बड़ा स्रोत के रूप में सामने आया है। कैपिटल गेंस से इनकम वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी इस साल 39 फीसदी पहुंच गई। AY2022-23 में यह सिर्फ 9 फीसदी थी।

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 26 फीसदी

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़कर 26 फीसदी पहुंच गई है। AY2022-23 में यह सिर्फ 4 फीसदी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सेल्फ-एंप्लॉयमेंट वाले लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न फाइल कर रहे हैं। यह ट्रेंड हर उम्र वर्ग के टैक्सपेयर्स में देखने को मिला है। सीनियर सिटीजंस में ऑनलाइन रिटर्न फाइल करे वाले लोगों की संख्या बढ़कर 53 फीसदी हो गई है।

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होम लोन, कार लोन सहित दूसरी जरूरतों की वजह से ज्यादा लोग फाइल कर रहे रिटर्न

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसलिए भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग रिटर्न फाइल कर रहे हैं, क्योंकि अब होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न मांगा जा रहा है। अब रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रह गया है। टैक्सपेयर्स इसे गंभीरता से ले रहे हैं। सरकार ने रिटर्न फाइल प्रोसेस को पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है। इसका फायदा भी मिल रहा है।