Amazon दे रहा Galaxy S26 Ultra पर शानदार छूट, मिलेगा ₹37,000 से ज्यादा का फायदा! जानें कीमत

अगर आप एक ऐसा फोन खरीदने की सोच रहे हैं, जो प्रीमियम भी हो और आपके बजट में भी हो तो यह आर्टिकल आपको जरूर पढ़नी चाहिए। दरअसल, Amazon पर Samsung Galaxy S26 Ultra 5G (12GB RAM + 256GB स्टोरेज) को ऑफर के तहत 87,400 रुपये की प्रभावी कीमत में खरीदा जा सकता है। इसमें मौजूदा डिस्काउंट के साथ योग्य स्मार्टफोन एक्सचेंज और कैशबैक ऑफर का फायदा शामिल है। फिलहाल यह स्मार्टफोन Amazon पर 1,24,999 रुपये में लिस्टेड है, जबकि इसकी MRP 1,69,999 रुपये है।

₹87,400 की कीमत कैसे पाएं

Samsung Galaxy S26 Ultra 5G की कीमत 87,400 रुपये तक लाने के लिए आपको Amazon पर मिल रहे अलग-अलग ऑफर्स का फायदा एक साथ उठाना होगा।

अगर आपके पास अच्छी कंडीशन में Apple iPhone 16 (128GB) है, तो उसे एक्सचेंज करने पर 31,350 रुपये तक का एक्सचेंज वैल्यू मिल सकता है। इसके अलावा, एलिजिबल क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने पर 6,249 रुपये तक का Amazon Pay Balance कैशबैक भी मिल सकता है।

इन दोनों ऑफर्स का फायदा लेने के बाद Samsung Galaxy S26 Ultra 5G की प्रभावी कीमत 87,400 रुपये तक आ जाती है।

EMI और दूसरे ऑफर

ग्राहक एलिजिबल कार्ड पर 18 महीने के लिए ₹6,944 प्रति महीने से शुरू होने वाली ‘नो कॉस्ट EMI’ का विकल्प भी चुन सकते हैं। चुने गए बैंक और पेमेंट के तरीके के आधार पर पेमेंट से जुड़े अतिरिक्त ऑफर भी मिल सकते हैं।

Samsung Galaxy S26 Ultra के फीचर्स

Samsung Galaxy S26 Ultra में 200MP का प्राइमरी कैमरा दिया गया है। फोन में Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर, 5,000mAh की बैटरी, 12GB RAM और 256GB स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा, फोन में Samsung के AI-powered फीचर्स भी दिए गए हैं। इनमें Photo Assist, Creative Studio और Built-in Privacy Display जैसे फीचर्स शामिल हैं।

ध्यान रखने वाली बातें

₹87,400 की कीमत एक ‘इफेक्टिव प्राइस’ (असरदार कीमत) है और यह ज्यादा से ज्यादा एक्सचेंज वैल्यू और कैशबैक ऑफर का फायदा उठाने के बाद ही मिलती है। एक्सचेंज की रकम पुराने डिवाइस की हालत और पिकअप के समय सफल वेरिफिकेशन पर निर्भर करती है, जबकि कैशबैक के लिए संबंधित कार्ड की शर्तें और नियम लागू होते हैं।

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Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के इन इलाकों में बदल जाएगी तस्वीर, 200 वर्ग किमी में नया शहर बसाने की तैयारी

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) मास्टर प्लान दिल्ली-2047 (MPD-2047) के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों के विकास को लेकर बड़ा प्लान तैयार किया गया है। MPD-2047 के तहत दिल्ली के बाहरी इलाकों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। लैंड पूलिंग के जरिए यहां व्यवस्थित तरीके से विकास किया जाएगा। इस इलाके में करीब 600 किलोमीटर लंबी नई सड़कें बनाने की योजना है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) विकसित करेगा। यह योजना विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है।

जानें इस विकास मॉडल के बारे में

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के आसपास घने और मिश्रित तरीके से विकास को बढ़ावा देने की योजना है। यहां सस्ते घरों के साथ दुकानों, दफ्तरों, संस्थानों, लॉजिस्टिक्स और गोदामों जैसी सुविधाओं को विकसित किया जा सकेगा। MPD-2047 में अलग-अलग विकास मॉडल रखे गए हैं, जिससे जरूरत के अनुसार इलाकों को विकसित किया जा सकेगा।

MPD-2047 के जरिए होगा विकास

दिल्ली-2047 मास्टर प्लान के तहत राजधानी के बाहरी इलाकों में विकास को गति देने की तैयारी है। इसके लिए करीब 200 वर्ग किलोमीटर के अर्बन एक्सटेंशन क्षेत्र में लैंड पूलिंग व्यवस्था को मजबूत किया गया है। योजना का उद्देश्य इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ व्यवस्थित विकास करना है। इसके तहत करीब 600 किलोमीटर का नया सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना है, जिससे लैंड पूलिंग वाले इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। MPD-2047 में जमीन मालिकों की सुविधा के लिए अलग-अलग विकास मॉडल हैं। इससे जमीन के मालिक अपनी सुविधा के अनुसार योजना में शामिल हो सकेंगे और इलाकों में जरूरी सुविधाएं समय पर तैयार करने में मदद मिलेगी। वहीं, DDA सड़क, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करेगा।

बेहतर आवास के साथ मिलेगी अच्छी सुविधा

MPD-2047 में शहर के विकास को पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुविधाओं पर आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। 30 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी सड़कों को DDA की ओर से विकसित किया जाएगा। नए शहरी क्षेत्रों में सिर्फ घर ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि स्कूल, अस्पताल, पार्क, हरित क्षेत्र, बाजार और दूसरी जरूरी सार्वजनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर आवास के साथ अच्छी और सुविधाजनक जीवनशैली देना है।

20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत

दिल्ली के बाहरी इलाकों में निजी जमीन को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए 2018 में लैंड पूलिंग पॉलिसी शुरू की गई थी। इसमें जमीन मालिक अपनी इच्छा से योजना में शामिल हो सकते हैं और DDA की भूमिका एक मददगार संस्था के तौर पर रहती है। अब MPD-2047 के तहत इस व्यवस्था को और आसान बनाने की तैयारी है। जमीन मालिक कंसोर्टियम के जरिए जमीन को एक साथ लाकर विकास कर सकते हैं। इसके अलावा टाउन प्लानिंग जैसे विकल्प भी दिए गए हैं, जिसमें कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी।

नए इलाकों में घरों को किया जाएगा विकसित

MPD-2047 के तहत नए इलाकों में घरों के साथ लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। सड़क की चौड़ाई के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में दुकान, छोटे कारोबार और दूसरी सेवाओं की अनुमति दी जा सकेगी। वहीं, UER-II के आसपास सस्ते घरों के साथ बाजार, संस्थान, लॉजिस्टिक्स और गोदाम बनाने की योजना है। इससे इन क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

जुलाई 2026 तक मिले इतने आवेदन

लैंड पूलिंग पॉलिसी को तेजी से लागू करने के लिए दिल्ली डेवलपमेंट एक्ट, 1957 में जरूरी बदलाव किए जाएंगे। यह योजना छह प्लानिंग जोन K-I, L, N, P-II, P-I का हिस्सा और J के 105 गांवों में लागू है, जिन्हें 138 सेक्टर में बांटा गया है। जुलाई 2026 तक इस योजना के तहत 7,615 से ज्यादा आवेदन मिल चुके थे और 7,885 हेक्टेयर से अधिक जमीन पूल की जा चुकी थी। 16 सेक्टर में तय लक्ष्य के 70 फीसदी से ज्यादा जमीन इकट्ठा हो चुकी है, जिसके बाद DDA ने वहां कंसोर्टियम बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्लानिंग जोन P-II का सेक्टर 8B लैंड पूलिंग योजना में आगे बढ़ने वाला पहला सेक्टर बन गया है। गाड़ी खसरो और इब्राहिम पुर गांवों में आने वाले इस सेक्टर में 70 फीसदी से ज्यादा जमीन एक साथ पूल हो चुकी है, इसलिए अब यहां विकास कार्य शुरू किए जा सकते हैं। इसके अलावा आठ अन्य सेक्टरों के जमीन मालिकों ने भी DDA को कंसोर्टियम बनाने की जानकारी दी है, जिससे योजना को जमीन पर लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

MPD-2047 के तहत लैंड पूलिंग के जरिए दिल्ली के बाहरी इलाकों को बेहतर तरीके से विकसित करने की योजना है। इन क्षेत्रों में सड़क और दूसरी जरूरी सुविधाओं के साथ घर, रोजगार के अवसर, सार्वजनिक सुविधाएं और हरित क्षेत्र भी तैयार किए जाएंगे।

10 इंच की जगह 7 इंच का पिज्जा भेजना पड़ा भारी, ग्राहक की शिकायत पर मिला 10,520 रुपये का मुआवजा

सोचिए, आपने अपनी पसंद का पिज्जा ऑर्डर किया हो, उसकी पूरी कीमत चुकाई हो और डिलीवरी का इंतजार भी किया हो। लेकिन जब डिब्बा खुले तो सामने आया पिज्जा उम्मीद से काफी छोटा हो। उत्तराखंड के एक ग्राहक के साथ कुछ ऐसा ही हुआ, जब उसने 10 इंच का पिज्जा मंगाया, लेकिन उसे कथित तौर पर 7 इंच का पिज्जा मिला। आमतौर पर ऐसी स्थिति में लोग शिकायत करके या रिफंड मांगकर मामला खत्म कर देते हैं। लेकिन इस ग्राहक ने इसे सिर्फ छोटी सी गलती मानकर छोड़ने के बजाय अपनी शिकायत को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

उसने पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर मामला उठाया और जब बात नहीं बनी तो उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। मामला वहां पहुंचने के बाद सिर्फ पिज्जा के साइज का विवाद नहीं रहा, बल्कि ग्राहक के अधिकार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दी गई जानकारी के मुताबिक सामान मिलने की जिम्मेदारी का सवाल भी बन गया। अब इस मामले में आयोग का फैसला चर्चा में है।

रिफंड नहीं मिला तो बढ़ाया मामला

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहक ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म से दो पिज्जा ऑर्डर किए थे। इनकी कुल कीमत ₹505 थी और ऐप पर पिज्जा का साइज 10 इंच बताया गया था। डिलीवरी मिलने के बाद ग्राहक ने पिज्जा का साइज देखा तो उसे वह काफी छोटा लगा। उसका आरोप था कि पिज्जा सिर्फ 7 इंच का था। उसने तुरंत ऐप के ग्राहक सहायता केंद्र पर शिकायत की और रिफंड की मांग की। शिकायत के बावजूद जब मामला हल नहीं हुआ, तो उसने आगे शिकायत करने का फैसला किया।

हेल्पलाइन से लेकर उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा

ग्राहक ने पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद उसने सीपीजीआरएएमएस के जरिए भी शिकायत की और संबंधित पक्षों को कानूनी नोटिस भेजा।

जब इन कोशिशों के बाद भी रिफंड नहीं मिला, तो उसने हरिद्वार जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मामला दर्ज करा दिया।

डिलीवरी प्लेटफॉर्म ने दी ये दलील

सुनवाई के दौरान ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ने कहा कि वह सिर्फ ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच एक माध्यम है। कंपनी के मुताबिक, पिज्जा बनाने, पैक करने और बेचने की जिम्मेदारी उसकी नहीं है।वहीं, संबंधित रेस्टोरेंट ने मामले में अपना जवाब दाखिल नहीं किया। इसके बाद आयोग ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की।

आयोग ने कंपनी की दलील नहीं मानी

आयोग ने शिकायतकर्ता और डिलीवरी प्लेटफॉर्म की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और हलफनामों की जांच की। इसमें पाया गया कि ग्राहक को मिला पिज्जा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बताए गए साइज से अलग था। आयोग ने यह भी माना कि शिकायत करने के बाद ग्राहक को रिफंड नहीं दिया गया। डिलीवरी प्लेटफॉर्म का यह कहना कि वह सिर्फ एक माध्यम है, आयोग को स्वीकार नहीं हुआ।

आयोग के अनुसार, ग्राहक का ऑर्डर स्वीकार करने, रेस्टोरेंट से तालमेल करने और उसे ग्राहक तक पहुंचाने में प्लेटफॉर्म की महत्वपूर्ण भूमिका थी। इसलिए वह पूरी सेवा प्रक्रिया का हिस्सा है।

3 इंच छोटे पिज्जा को माना सेवा में कमी

आयोग ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जिस साइज का पिज्जा दिखाया गया था, ग्राहक को उसके मुताबिक पिज्जा नहीं मिला। 10 इंच की जगह 7 इंच का पिज्जा देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना गया। मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता और सदस्य डॉ. अमरेश रावत व रंजना गोयल ने की।

₹505 के ऑर्डर पर मिलेंगे ₹10,520

ग्राहक ने पिज्जा के लिए ₹505 और ₹15 डिलीवरी शुल्क का भुगतान किया था। लेकिन आयोग के आदेश के बाद उसे सिर्फ पिज्जा की रकम वापस नहीं मिलेगी। आयोग ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म और रेस्टोरेंट को संयुक्त रूप से ₹10,520 देने का आदेश दिया है। यह रकम 45 दिनों के भीतर देनी होगी।

इसमें ₹520 पिज्जा और डिलीवरी शुल्क के लिए, ₹5,000 मानसिक और शारीरिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर और ₹5,000 मुकदमे के खर्च के रूप में शामिल हैं।

यानी 10 इंच के पिज्जा की जगह 7 इंच का पिज्जा मिलने से शुरू हुआ विवाद आखिरकार ग्राहक को मूल ऑर्डर की कीमत से 20 गुना से भी ज्यादा रकम मिलने के आदेश तक पहुंच गया।

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शेयर बाजार के आने वाले हैं अच्छे दिन, एक्सपर्ट ने बताई इसकी तीन बड़ी वजहें

शेयर बाजारों का बुरा दौर खत्म हो चुका है। अब बाजार के अच्छे दिन शुरू होने जा रहे है। अल्फएक्युरेट एडवाइजर्स राजेश कोठारी का ऐसा मानना है। उनका कहना है कि भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थितियां अनुकूल दिख रही हैं। क्रेडिट ग्रोथ, कंजम्प्शन और कैपिटल एक्सपेंडिचर्स से अगले 6 से 12 महीनों में बाजार को बड़ा सपोर्ट मिलेगा।

बाजार में तेजी के लिए ये तीन चीजें जरूरी

कोठारी की इस उम्मीद की वजह यह है कि जब ये तीनों चीजें एक साथ होती हैं तो कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी रहती है। बीते एक-दो साल में शेयर बाजारों की कमजोरी में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ का बड़ा हाथ है। हालांकि, अब स्थिति बदलती दिख रही है। जून तिमाही में अर्निंग्स ग्रोथ में काफी इम्प्रूवमेंट दिखा है।

बाजार में तेजी के लिए दूसरी स्थितियां भी अनुकूल 

सीएनबीसी-टीवी18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा, “जब कभी क्रेडिट, कंजम्प्शन और कैपेक्स की ग्रोथ एक साथ दिखती है तो कंपनियों की अर्निंग्स में इम्प्रूवमेंट आता है।” हालांकि, शेयर बाजार का प्रदर्शन आगे बेहतर रहने की उनकी उम्मीद के पीछे सिर्फ एक यही वजह नहीं है।

क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने से बाजार को मिलेगा सपोर्ट 

उन्होंने कहा कि बीते एक साल में बाजार पर दबाव बढ़ाने वाली स्थितियों में अब बदलाव आ रहा है। इधर, वैल्यूएशन सही लेवल पर दिख रहा है। क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल 9-10 फीसदी थी, जो अब करीब 18 फीसदी पर आ गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि क्रेडिट साइकिल रफ्तार पकड़ रही है।

कंजम्प्शन पर बीते 4 सालों से दबाव दिख रहा था

कोठारी ने कहा कि कोविड के बाद से कंजम्प्शन बीते करीब 4 साल से दबाव में रहा है। अब स्थिति बदल रही है। कई कंज्यूमर कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे काफी बेहतर रहे हैं। कंजम्प्शन बढ़ने का सीधा संबंध कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ से है। इससे कंपनियों का अर्निंग्स साइकिल को लेकर भरोसा बढ़ता है।

कई बिल्डिंग मैटेरियल्स की मांग स्ट्रॉन्ग रहने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ रहा है। उनका संकेत खासकर बिल्डिंग मैटेरियल्स पर था। हालांकि, वह अभी भी रियल एस्टेट को लेकर सावधानी बरतने के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगले दो से तीन साल में टाइल्स, सैनटरीवेयर, वायर्स और केबल्स की डिमांड स्ट्रॉन्ग रह सकती है। पिछले कुछ सालों में शुरू हुए रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स अब पूरे होने के करीब हैं।

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स का रिटर्न निगेटिव 

बीते एक साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। इस दौरान निफ्टी और सेंसेक्स दोनों का रिटर्न निगेटिव रहा है। निफ्टी में इस दौरान 2.49 फीसदी की गिरावट आई है। सेंसेक्स इस दौरान 4.63 फीसदी गिरा है। बाजार को इस दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ ने माहौल खराब किया। फिर, इस साल फरवरी के आखिर में अमरिका और ईरान में लड़ाई शुरू होने से क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं।

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UPSC CSE Mains 2026: सीएसई उम्मीदवार 31 अगस्त से प्रश्नपत्र को दे सकेंगे चुनौती, 4 सितंबर तक खुला रहेगा क्यूपीआरईपी पोर्टल

UPSC CSE Mains 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सर्विसेज मुख्य परीक्षा 2026 का आयोजन कर रहा है। 21 अगस्त से शुरू हुई यह परीक्षा 22 और 23 अगस्त के अलावा 29 और 30 अगस्त को भी होगी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए यह अहम अपडेट है। यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 में शामिल कैंडिडेट परीक्षा के किसी प्रश्नपत्र या सवाल को चुनौती देना चाहते हैं, तो आयोग ने उसके लिए शेड्यूल निर्धारित कर दिया है।

आयोग ने घोषणा की है कि यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 में शामिल उम्मीदवार एक खास क्वेश्चन पेपर रिप्रेजेंटेशन पोर्टल (QPReP) के जरिए अपनी शिकायतें दे सकते हैं। यह पोर्टल 31 अगस्त से 4 सितंबर तक पांच दिनों के लिए उपलब्ध रहेगा। इस दौरान, कैंडिडेट्स सिविल सर्विसेज (मेन) एग्जामिनेशन 2026 के सवालों या प्रश्नपत्र से जुड़ी अपनी चिंताएं दे सकते हैं। यूपीएससी सीएसई मेन्स 2026 परीक्षा का आयोजन 2 चरणों में किया जाएगा। परीक्षा 21, 22 और 23 अगस्त को होगी, जबकि बाकी पेपर 29 और 30 अगस्त 2026 को आयोजित किए जाएंगे। परीक्षा खत्म होने के तुरंत बाद उम्मीदवार प्रश्नपत्रों की समीक्षा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।

आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों को अपनी शिकायतें देने के लिए सिर्फ क्यूपीआरईपी पोर्टल का इस्तेमाल करना होगा। ईमेल, पोस्ट या किसी और तरीके से भेजी गई रिक्वेस्ट, या 4 सितंबर के बाद जमा की गई रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं की जाएंगी। कैंडिडेट्स यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए क्यूपीआरईपी पोर्टल एक्सेस कर सकते हैं। कैंडिडेट्स को सलाह दी जाती है कि वे पांच दिन का समय ध्यान से नोट कर लें और अगर जरूरी हो तो डेडलाइन से पहले अपना रिप्रेजेंटेशन जमा कर दें।

आयोग ने सभी अभ्यर्थियों से कहा है कि अगर उन्हें किसी प्रश्न या प्रश्नपत्र को लेकर कोई रिप्रजेंटेशन देना है, तो वे आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पोर्टल खुलने के बाद तय 5 दिन की अवधि के भीतर ही अपनी आपत्ति दर्ज करें। इससे आयोग समय पर सभी रिप्रजेंटेशन का रिव्यू कर सकेगा और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।

Sainik School Vacancy 2026: संबलपुर सैनिक स्कूल में टीचिंग-नॉन टीचिंग स्टाफ की भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, आधिकारिक वेबसाइट पर देखें जानकारी

Rahul Dravid ने वैभव सूर्यवंशी को दी बड़ी सलाह, बोले- जल्दबाजी न करें

भारत के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। आईपीएल में बेहरतरीन प्रदर्शन के बाद उनको भारत के टी20 टीम में शामिल किया गया। वहीं हाल ही में पूर्व भारतीय क्रिकेटर राहुल द्रविड़ ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के खेल को लेकर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि वैभव का घरेलू क्रिकेट में सफेद और लाल गेंद दोनों फॉर्मेट में खेलना अच्छी बात है। द्रविड़ ने कहा कि, इतनी कम उम्र में मिले इस मौके का सही इस्तेमाल करने के लिए वैभव को अपने करियर में बैलेंस बनाए रखना चाहिए। इससे उसे लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिल सकती है।

दिलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन वैभव

15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने IPL में शानदार प्रदर्शन के बाद जून में इंग्लैंड के खिलाफ T20 इंटरनेशनल डेब्यू किया था। अब वह दिलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन के लिए खेलेंगे और रेड-बॉल क्रिकेट में अपना हुनर दिखाएंगे। हालांकि, रणजी ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। उन्होंने तीन मैचों की 12 पारियों में 17.25 की औसत से रन बनाए। अंडर-19 टीम की जिम्मेदारियों के कारण वह घरेलू क्रिकेट में लगातार नहीं खेल पाए थे।

वैभव को दी ये सलाह

क्रिकइन्फो से बातचीत में राहुल द्रविड़ ने कहा, “मुझे लगता है कि करियर में हमेशा संतुलन बनाए रखना जरूरी है। यह अच्छी बात है कि वैभव को IPL के जरिए भारत में व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलने का अनुभव मिल रहा है। साथ ही, उसके पास भारतीय घरेलू क्रिकेट में लौटकर रेड-बॉल क्रिकेट खेलने और अपने इस करियर को आगे बढ़ाने का भी पूरा समय है।” उन्होंने आगे कहा, “हम सभी चाहते हैं कि टेस्ट क्रिकेट मजबूत रहे और आगे बढ़ता रहे। इसके लिए वैभव जैसे खिलाड़ियों की जरूरत है, जो उम्मीद है कि आने वाले समय में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में खेल सकें।”

ज्यादा रेड-बॉल क्रिकेट खेलने का मौका मिलना चाहिए

राहुल द्रविड़ ने IPL 2025 में राजस्थान रॉयल्स के साथ वैभव सूर्यवंशी के साथ काम किया था। द्रविड़ का माना कि, रेड-बॉल क्रिकेट में लगातार खेलने से वैभव का अनुभव और खेल बेहतर होगा। द्रविड़ ने कहा, “अच्छी बात यह है कि वैभव के पास अभी काफी समय है और उसे अनुभव हासिल करने के लिए ज्यादा रेड-बॉल क्रिकेट खेलने का मौका मिलेगा। उसने अब तक व्हाइट-बॉल क्रिकेट की तुलना में रेड-बॉल क्रिकेट कम खेला है। वह अभी सिर्फ 15 साल का है, इसलिए उसे समय देने और धैर्य रखने की जरूरत है। उसने शुरुआत में ही काफी सफलता हासिल की है, लेकिन करियर में उतार-चढ़ाव आना सामान्य है। ऐसे में लोगों को उसके साथ धैर्य रखना चाहिए।”

Poonam Dhillon: CINTAA विवाद के बीच डेंगू के कारण पूनम ढिल्लों अस्पताल में भर्ती, जानें एक्ट्रेस का हेल्थ अपडेट

Poonam Dhillon: पूनम ढिल्लों का अभी मुंबई में इलाज चल रहा है। यह सब ‘सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन’ (CINTAA) में चल रहे तनाव के बीच हो रहा है, जिसकी वह प्रेसिडेंट हैं। यह फ़िल्म संस्था अंदरूनी विवाद में फंसी हुई है। डेंगू होने के बाद पूनम ढिल्लों को लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पत्रकार विक्की लालवानी के अनुसार, वह कई दिनों से अस्पताल में हैं और अब ठीक हो रही हैं।

पूनम ढिल्लों अस्पताल में भर्ती

सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए लालवानी ने लिखा, “पूनम ढिल्लों को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सीनियर एक्ट्रेस को डेंगू हुआ है और वह पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में हैं। आज सुबह जब मैंने उन्हें मैसेज किया, तो उन्होंने बताया कि वह ठीक हो रही हैं। उनके पूरी तरह ठीक होने की प्रार्थना कर रहा हूं और उम्मीद है कि वह जल्द ही घर लौट आएंगी।”

ढिल्लों को अस्पताल में तब भर्ती कराया गया है जब CINTAA अंदरूनी विवाद का सामना कर रही है। हाल ही में, एसोसिएशन की जनरल सेक्रेटरी उपासना सिंह ने ढिल्लों पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ढिल्लों और वाइस प्रेसिडेंट पद्मिनी कोल्हापुरे पर आरोप लगाया कि वे संगठन को तानाशाही तरीके से चला रही हैं।

एक पॉडकास्ट में बात करते हुए, सिंह ने दावा किया कि कई सदस्यों ने कमेटी से इस्तीफ़ा दे दिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जो लोग ढिल्लों और उनके ग्रुप से असहमत थे, उन्हें ‘शो-कॉज़ नोटिस’ भेजे जा रहे थे।

इस्तीफ़ा देने वाले आठ सदस्य हैं – हेमंत पांडे, मुकेश ऋषि, साहिला चड्ढा, हेता परमार, पुनीत इस्सर, विंदू दारा सिंह, विकास वर्मा और दीपक पाराशर। उन्होंने अपने इस्तीफ़े CINTAA की जनरल सेक्रेटरी उपासना सिंह को सौंपे। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि पूनम ढिल्लों, पद्मिनी कोल्हापुरे और एग्जीक्यूटिव कमेटी के कुछ सदस्यों ने अहम फ़ैसलों पर अपना नियंत्रण बढ़ा लिया है।

1958 में बनी यह संस्था भारत के मुंबई में स्थित फ़िल्म और टेलीविज़न एक्टर्स और परफ़ॉर्मर्स के लिए एक आधिकारिक ट्रेड यूनियन है, जो इंडियन ट्रेड यूनियन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है। उपासना सिंह ने ANI को बताया कि CINTAA के 11 सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया है, जिनमें से आठ एग्जीक्यूटिव कमेटी के चुने हुए सदस्य थे। सिंह के अनुसार, इन आठ सदस्यों ने अपने इस्तीफ़े के साथ अलग-अलग शिकायतें भी सौंपीं, जिनमें उन मुद्दों का ज़िक्र था जिन्हें उन्होंने उठाया था।

सिंह ने कहा, “हमारे 11 सदस्यों में से आठ चुने हुए सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया है और मुझे अपने इस्तीफ़े सौंप दिए हैं। उन्होंने अपनी शिकायतें भी सौंपी हैं, जिनमें कहा गया है कि पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों अपने पदों का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।”

सिंह ने आगे सवाल उठाया कि CINTAA के आधिकारिक कामों के लिए पर्सनल ईमेल अकाउंट का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन के आधिकारिक ईमेल सिस्टम का इस्तेमाल करने से यह पक्का होगा कि बातचीत पारदर्शी रहे और ज़रूरत पड़ने पर संगठन के पास रिकॉर्ड उपलब्ध हों।

पूनम ढिल्लों की प्रतिक्रिया

इस बीच, पूनम ढिल्लों ने पहले ETimes के साथ बातचीत में इस विवाद पर बात की थी। उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई झगड़ा नहीं करना चाहतीं। ढिल्लों ने ETimes से कहा, “मैं किसी भी तरह की कीचड़ उछालने वाली हरकत में शामिल नहीं होना चाहती क्योंकि यह बहुत घटिया बात है। इनमें से ज़्यादातर आरोप उस व्यक्ति की सोच और निराशा को दिखाते हैं जो उससे ज़्यादा अहमियत चाहता था जितनी उसे मिली। हमने हमेशा, हर मंच पर, उपासना सिंह को जनरल सेक्रेटरी के तौर पर पेश किया है।”

8th Pay Commission Updates: पे रिवीजन के बाद कितनी हो जाएगी एएसओ, इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स की सैलरी?

8th Pay Commission Updates: केंद्र सरकार के लाखों एंप्लॉयीज और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग पर लगी हैं। आयोग के सदस्य अभी देश के अलग-अलग शहरों में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों और यूनियंस लीडर्स से मुलकात कर रहे हैं। इस महीने के आखिर में आयोग के सदस्य जयपुर जाने वाले हैं। उसके बाद उनका कार्यक्रम चेन्नई और पुद्दुचेरी जाने का है। दिल्ली, कोलकाता सहित कई बड़े शहरों में वे पहले ही एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों की राय जान चुके हैं।

सैलरी में होने वाली वृद्धि फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि फिटमेंट फैक्टर कितना रहता है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। लेकिन, इस बार एंप्लॉयीज यूनियंस ने काफी ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग 8वें वेतन आयोग से की है। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी उतनी ज्यादा बढ़ेगी।

इस बार एंप्लॉयीज यूनियंस ने ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग की है

इस बार नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने 4.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाॉयीज फेडरेशन (AIDEF) ने भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। एंप्लॉयीज यूनियंस में फिटमेंट फैक्टर को लेकर एक राय नहीं है।

एएसओ, इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स की सैलरी में बदलाव

सवाल है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद असिस्टेंस सेक्शन अफसर (ASO), इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स जैसे एंप्लॉयीज की सैलरी कितनी बढ़ जाएगी? ये एंप्लॉयीज अभी लेवल 5 और लेवल 6 पे ग्रेड के तहत आते हैं। लेवल 5 के एंप्लॉयीज का बेसिक पे अभी 29,200 रुपये है। लेवल 6 का 35,400 रुपये है।

इस बार फिटमेंट फैक्टर 2 से 2.5 रहने की उम्मीद 

अगर केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद फिटमेंट फैक्टर 2 रखती है तो लेवल 5 के तहत आने वाले एंप्लॉयीज का बेसिक पे बढ़कर 58,400 रुपये हो जाएगा। फिटमेंट फैक्टर 2.25 होने पर बेसिक बढ़कर 65,700 रुपये हो जाएगा। इसी तरह अगर फिटमेंट फैक्टर 2 रहता है तो लेवल 6 के तहत आने वाले एंप्लॉयीज का बेसिक पे बढ़कर 70,800 रुपये हो जाएगा। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.25 रहता है तो यह 79,650 रुपये हो जाएगा।

18 महीने में देनी है वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट

जानकारों का कहना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर से 2 से 2.5 के बीच रह सकता है। इसका मतलब है कि एएसओ, इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स जैसे एंप्लॉयीज का बेसिक पे कम से कम दोगुना हो जाएगा। इसी हिसाब से उनकी ग्रॉस सेलरी में भी वृद्धि होगी। हालांकि, सैलरी रिवीजन में अभी समय लगेगा। 8वें वेतन आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है।

अगले साल के आखिर तक आयोग की सिफारिशें लागू होने की उम्मीद

आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था। इस हिसाब से आयोग अगले साल मई-जून तक अपनी रिपोर्ट दे सकता है। उसके बाद सरकार उस पर विचार करेगी। इसका मतलब है कि अगले साल के आखिर तक केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी में रिवीजन लागू हो जाएगा।

अस्पताल में मरीज सो रहे थे, तभी कैंपस में आ गया तेंदुआ, CCTV फुटेज देख सहमे लोग

Darjeeling Leopard: पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग हिल स्टेशनों में खूबसूरत वादियों से घिरा हुई है। दार्जिलिंग भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक हिल डेस्टिनेशन्स में से एक है। वहीं इन दिनों दार्जिलिंग का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दार्जिलिंग सदर अस्पताल के पास एक बड़ा तेंदुआ अस्पताल परिसर में घुस आया था। नाइट ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और हेल्थ वर्कर अचानक आए तेंदुए को देखकर डर गए। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई।

CCTV में रिकॉर्ड हुई घटना

दार्जिलिंग सदर अस्पताल में रात के वक्त एक तेंदुआ अस्पताल परिसर में आ गया। उस समय अस्पताल में मरीज सो रहे थे और नाइट ड्यूटी पर कर्मचारी मौजूद थे। बताया जा रहा कि, तेंदुआ काफी बड़ा था और कुछ देर तक अस्पताल के कैंपस में घूमता रहा। अचानक तेंदुए के पहुंचने से अस्पताल के कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया। अस्पताल परिसर में तेंदुए के घूमने की पूरी घटना CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में तेंदुआ देर रात कैंपस के अंदर बिना किसी जल्दबाजी के घूमता नजर आया।

तेंदुआ देख घबरा गए स्वास्थ्यकर्मी

अस्पताल के अंदर जंगली जानवर को देखकर नाइट ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी घबरा गए और सभी सतर्क हो गए। स्थानीय लोगों और अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि हाल के दिनों में अस्पताल परिसर में तेंदुए के इस तरह आने की कोई दूसरी घटना सामने नहीं आई है। उनके लिए भी यह घटना काफी हैरान करने वाली रही। अस्पताल के आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है।

नौकरी का रिजेक्शन मिला तो उम्मीदवार ने कंपनी को ही कर दिया रिजेक्ट, जवाब हुआ वायरल

Apple Layoffs: iPhone मेकर ने फिर की छंटनी, 200 लोगों की नौकरी पर खतरा; इस बार कौन सी टीम्स प्रभावित

आईफोन मेकर एपल इंक अपने सिरी डिजिटल असिस्टेंट और विजन प्रो हेडसेट से जुड़ी टीमों में नौकरियां कम कर रही है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि Apple अपनी ‘इंटेलिजेंट सिस्टम्स एक्सपीरियंस’ टीम के कर्मचारियों की भी छंटनी कर रही है। यह टीम सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग विभाग का हिस्सा है और डिवाइसेज के कुछ AI फीचर्स की जिम्मेदारी इस पर है।

बदलावों के तहत, कंपनी Vision Pro के लिए गेमिंग पर फोकस्ड टीम को काफी हद तक शट डाउन कर रही है और डिवाइस के लिए इमर्सिव वीडियो कंटेंट बनाने वाली यूनिट का साइज भी घटा रही है। कुल मिलाकर, इस जॉब कट से 200 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। Vision Pro विभाग से लगभग 100 पद खत्म किए गए हैं। Siri व सॉफ्टवेयर टीमों से भी 100 पद हटाए गए हैं।

लॉन्च के समय से ही इमर्सिव वीडियो Vision Pro की बिक्री का एक मुख्य आकर्षण रहा है। लेकिन हर 3D वीडियो बनाने के लिए Apple कर्मचारियों और कॉन्ट्रैक्टर्स की कई टीमों की जरूरत होती है। इमर्सिव वीडियो सीरीज के एक एपिसोड को शूट करने में कई मिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है। Vision Pro के एक्टिव यूजर्स की कम संख्या को देखते हुए, इन खर्चों ने बिजनेस पर दबाव डाला है।

किस टीम में किस तरह की रीस्ट्रक्चरिंग

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Siri में बदलाव, इस असिस्टेंट के आने वाले AI-इनफ्यूज्ड वर्जन से जुड़े हैं। इस बदलाव के लिए जरूरी विशेषज्ञता में बदलाव की जरूरत है, जिसके कारण कंपनी को कुछ मौजूदा भूमिकाओं को खत्म करना पड़ा। साथ ही रिसोर्सेज को को फिर से एलोकेट करना पड़ा और अपडेटेड Siri को सपोर्ट करने वाली नई भूमिकाएं क्रिएट करनी पड़ीं।

‘इंटेलिजेंट सिस्टम्स एक्सपीरियंस’ टीम में बदलाव AI-संचालित क्षमताओं पर काम को फिर से व्यवस्थित करने के प्रयास को दर्शाते हैं। जैसे-जैसे और अधिक ग्रुप्स की ओर से ऐप्स, फीचर्स और सर्विसेज में AI फंक्शन लाए जा रहे हैं, Apple प्राथमिकताओं के अनुरूप टीमों को फिर से व्यवस्थित कर रही है। इस रीस्ट्रक्चरिंग से कुछ मौजूदा पद खत्म होंगे और नई भूमिकाएं क्रिएट होंगी।

Vision Pro में बदलावों के बारे में कर्मचारियों को बताया गया है कि यह ग्राहकों द्वारा डिवाइस के इस्तेमाल के तरीके के आधार पर प्राथमिकताओं को फिर से व्यवस्थित करने और भविष्य के अन्य उत्पादों की ओर रिसोर्सेज को बेहतर ढंग से निर्देशित करने का प्रयास है।

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Vision Pro और visionOS ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं हो रहा बंद

Apple इमर्सिव वीडियो को पूरी तरह से बंद नहीं कर रही है। कंपनी की योजना है कि वह खुद कम संख्या में वीडियो बनाएगी। साथ ही थर्ड-पार्टी कंपनियों को इस डिवाइस के लिए कंटेंट बनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी। कंपनी ने कर्मचारियों से कहा है कि Vision Pro और इसका visionOS ऑपरेटिंग सिस्टम बंद नहीं होने वाला है। ब्लूमबर्ग न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 2028 के आखिर तक एक नया Vision Pro मॉडल लॉन्च करने पर भी विचार कर रही है।

एक बयान में एपल ने माना कि वह कुछ टीमों को फिर से व्यवस्थित कर रही है ताकि अपने यूजर्स को बेहतरीन अनुभव देने के लिए बिजनेस को आगे बढ़ा सके। कंपनी के मुताबिक, “हालांकि इस बदलाव के तहत हम नए जॉब रोल क्रिएट करेंगे, लेकिन इसका असर कुछ मौजूदा रोल्स पर भी पड़ेगा। हम इन टीम मेंबर्स के योगदान के लिए आभारी हैं और इस बदलाव के दौरान उनकी मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसमें Apple में अन्य भूमिकाओं के लिए आवेदन करने के अवसर भी शामिल हैं।”