Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजार के लिए अच्छे संकेत दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में 80 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी है। FIIs की कैश में बिकवाली हुई है, लेकिन वायदा में बड़ी कवरिंग नजर आई है। अमेरिकी बाजार में भी कल जोरदार रिकवरी दिखी। डाओ में 550 प्वाइंट से ज्यादा का उछाल दिखा। नैस्डैक और S&P में भी बढ़त रही। एशियाई बाजारों में भी रौनक दिख रही है। क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब दिख रहा है। US बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

गुरुवार को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में तेजी आई। जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की घोषणा के बाद ऑटो, IT, प्राइवेट बैंकों और रिलायंस इंडस्ट्रीज में जोरदार खरीदारी के चलते निफ्टी और सेंसेक्स, दोनों में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1,533.72 अंक यानी 2.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 374.65 अंक यानी 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ।

SEBI ने CAS में किए बड़े बदलाव, एक्सपायरी पर VWAP से होगा सेटलमेंट

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में बड़े बदलाव किए है। एक्सपायरी के दिन CAS के बजाए पुराने VWAP सिस्टम से सेटलमेंट होगा। CAS की टाइमिंग बदली गई है। अब CAS 3.30 बजे से 10 मिनट का होगा। यह फैसला 7 दिसंबर से लागू होगा।

टेक महिंद्रा के नतीजे अनुमान के मुताबिक, Q2 में 0.9% रही विप्रो की IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ

टेक महिंद्रा के दूसरी तिमाही के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे है। इसके मुनाफे में 7 परसेंट तो रेवेन्यू में 3 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। विप्रो के Q2 रिजल्ट भी उम्मीद के करीब रहे हैं। इसकी CC रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ 0.9% रही है। हालांकि Q3 में इसके माइनस 1.5% से 0.5% की रेंज में रहने का अनुमान किया गया है। वहीं, परसिस्टेंट सिस्टम का मुनाफा 27 परसेंट गिरा है। लेकिन CC रेवेन्यू ग्रोथ 7.8% रही है।

एंजेव वन का Q2 मुनाफा 44.7% बढ़ा, रेवेन्यू फ्लैट

दूसरी तिमाही में एंजेव वन के मुनाफे में तिमाही आधार पर 45 परसेंट का उछाल आया है। लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। मार्जिन में 1060 Bps का तगड़ा उछाल देखने को मिला है। वहीं L&T FINANCE का Q2 मुनाफा 33 परसेंट बढ़ा है। इसे मजबूत रिटले ग्रोथ और NII में उछाल से बूस्ट मिला है।

JIO के IPO पर बोले आकाश अंबानी

JIO के IPO पर आकाश अंबानी ने कहा कि देश को डिजिटल सर्विस से कनेक्ट करना Jio का मिशन है। भारत में विकसित टेक्नोलॉजी का दूसरे देशों में इस्तेमाल होगा। IPO पर ईशा अंबानी ने कहा कि लॉन्ग टर्म प्लानिंग, स्केल और एग्जीक्यूशन पर फोकस है। यह आईपीओ 21 अक्टूबर से खुलेगा। इसकी प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर है।

चीनी 21 सेंट के पार

सप्लाई की चिंता से इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इसका भाव 21 सेंट प्रति पाउंड के साथ करीब 2 सालों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। ब्राजील में क्रशिंग में देरी और भारत में कमजोर मॉनसून से उत्पादन गिरने की आशंका से इसके भाव में तेजी आई है।

एशियन करेंसी

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अधिकांश एशियाई मुद्राओं में कमजोरी आई है, जिसमें दक्षिण कोरियाई वॉन और फिलीपीन पेसो सबसे ज्यादा गिरे हैं। इंडोनेशियाई रुपिया में 0.20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन 0.36 प्रतिशत और फिलीपीन पेसो 0.23 प्रतिशत कमजोर हुए हैं। जापानी येन में 0.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं थाई बाह्ट और सिंगापुर डॉलर में 0.05-0.05 प्रतिशत की कमी आई है। मलेशियाई रिंगित और चीनी रेनमिनबी में भी मामूली गिरावट देखी गई है। ये 0.02 प्रतिशत और 0.018 प्रतिशत नीचे आए हैं। इसके विपरीत, ताइवान डॉलर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.05 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। यह 9 लिस्टेड एशियाई मुद्राओं में एकमात्र ऐसी मुद्रा है जिसमें तेजी आई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बिकवाली का सिलसिला जारी रखा और 15 अक्टूबर को लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और इस दौरान 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

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सचाई झुठलाने की सरकारी कोशिश

क्या दिल्ली में 10 अक्टूबर को मेट्रो की सेवा नहीं बंद थी? क्या मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट की परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए थे? क्या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जिन परीक्षाओं का आयोजन कराती है उनमें से पिछले नौ साल में किसी परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए हैं? राजधानी दिल्ली में या दूसरे भी किसी शहर में किसी भी नागरिक से ये सवाल पूछेंगे तो उसका जवाब यही होगा कि मेट्रो बंद थी और पेपर लीक हुए हैं। दिल्ली और एनसीआर में रहने वाला हर व्यक्ति निजी अनुभव से जानता है कि मेट्रो की सेवा बंद थी। जहां तक इंटरनेट सेवा की बात है तो उस पर तो एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट गुरुवार, 15 अक्टूबर को ही छपी है, जिसके मुताबिक पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर सैनिक तानाशाही वाला देश म्यांमार है। सो, मेट्रो बंद थी और इंटरनेट भी बंद थे।

परंतु दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। उसने कहा है कि सिर्फ 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद किया गया था। यानी मेट्रो की सेवा सीमित की गई थी। सोचें, कितना आसान है सरकार के लिए यह कह देना! 45 मेट्रो स्टेशनों पर लोग अंदर नहीं जा सकते थे और न बाहर निकल सकते थे। फिर यह सेवा सीमित करना कैसे हुआ? जिन लोगों को इन 45 मेट्रो स्टेशनों पर ट्रेन पकड़नी थी या इन स्टेशनों पर उतरना था उनके लिए तो मेट्रो बंद ही हुई न! सो, लाखों लोगों के लिए मेट्रो की सेवा बंद थी। सरकार एक तकनीकी टर्म का इस्तेमाल करके अदालत को बता रही है कि उसने अदालत की अवमानना नहीं की है। वास्तव में 10 और 11 अक्टूबर को कई इलाकों में मेट्रो बंद थी और ऐसा नहीं था कि मेट्रो ने स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद की तो यात्रियों के लिए कोई और बंदोबस्त किया। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए कोई फीडर बस सेवा नहीं चलाई गई थी। इसलिए यह कहना सरासर गलत है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। यह हलफनामा देकर झूठ बोलना है।

ऐसे ही एक रिपोर्ट आई है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने शिक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने कहा है कि 2017 में एनटीए के गठन के बाद से आज तक कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। यह झूठ नहीं, बल्कि सफेद झूठ है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने एनटीए ने कहा कि कुछ अनियमितता का शिकायत हुई है लेकिन पेपर लीक नहीं हुआ है। सवाल है कि तीन मई 2026 को हुई नीट की परीक्षा को क्यों रद्द किया गया? सात मई को पेपर लीक होने की खबर आई और 12 मई को एनटीए ने परीक्षा रद्द दी, जिसका आयोजन 21 जून को किया गया। एनटीए और शिक्षा मंत्रालय दोनों की ओर से कई बार कहा गया कि पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हुई है। इस बार तो किसी और धांधली या अनियमितता की खबर भी नहीं थी। इसी तरह 2024 के नीट की परीक्षा पेपर लीक और धांधली दोनों कारणों से प्रभावित हुई थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई जगह परीक्षा रद्द की गई। उसके बाद पेपर लीक रोकने का एक कानून बना। जिस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने कानून बनाया उसमें अनियमितता को ‘पेपर लीक केस’ के तौर पर दर्ज किया गया। सोचें, नीट परीक्षा को लेकर 356 केस दर्ज हैं, जेईई मेन्स के 31, यूजीसी नेट के 26 और सीयूईटी यूजी के 14 केस दर्ज हैं। पर एनटीए कह रहा है कि सब कुछ ठीक है!

आंदोलन की जीत के बाद नागरिक हार क्यों जाता है?

उस छात्र की स्थिति सोचिए जिसकी परीक्षा रद्द हुई। उसका भविष्य अधर में है। वह अगली परीक्षा की तैयारी करे या अदालत के फैसले का इंतजार? उसके परिवार ने कोचिंग पर जो पैसा खर्च किया, उसका क्या होगा? एक वर्ष की पढ़ाई, मेहनत और अवसर का हिसाब कौन देगा? कानून कहता है कि दोषी को पांच से दस वर्ष की सजा होगी। मगर दोषी कब पकड़ा जाएगा? मुकदमा कब पूरा होगा? और तब तक छात्र को क्या राहत मिलेगी?

भारत में परीक्षा सुधार का कानून इसी विरोधाभास का एक उदाहरण है। सरकार कानून बनाती है। सजा बढ़ाती है। समयसीमा तय करती है। घोषणा होती है कि अब परीक्षा में धांधली करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मगर जिस नौजवान की परीक्षा रद्द हुई है, उसके जीवन का एक वर्ष कौन लौटाएगा?

2024 में सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कानून बना। यह 21 जून 2024 से लागू हुआ। इसमें दोषियों के लिए तीन से पांच वर्ष तक की कैद का प्रावधान था। मगर मई 2026 में नीट परीक्षा कथित प्रश्नपत्र लीक के बाद रद्द करनी पड़ी। परीक्षा दोबारा आयोजित हुई।

इसके बाद कानून में संशोधन किया गया। 31 जुलाई को मंजूरी मिले संशोधनों में सजा बढ़ाकर पांच से दस वर्ष कर दी गई। जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समयसीमा भी तय हुई। मगर पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने एक महत्वपूर्ण कमी बताई। यदि दो महीने में जांच पूरी नहीं होती तो क्या होगा, इसका कानून में कोई अतिरिक्त प्रावधान नहीं है।

यानी समयसीमा है, मगर उसे तोड़ने का परिणाम तय नहीं है।

अब उस छात्र की स्थिति सोचिए जिसकी परीक्षा रद्द हुई। उसका भविष्य अधर में है। वह अगली परीक्षा की तैयारी करे या अदालत के फैसले का इंतजार? उसके परिवार ने कोचिंग पर जो पैसा खर्च किया, उसका क्या होगा? एक वर्ष की पढ़ाई, मेहनत और अवसर का हिसाब कौन देगा?

कानून कहता है कि दोषी को पांच से दस वर्ष की सजा होगी। मगर दोषी कब पकड़ा जाएगा? मुकदमा कब पूरा होगा? और तब तक छात्र को क्या राहत मिलेगी?

इन प्रश्नों का उत्तर सजा बढ़ाने से नहीं मिलता। 28 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि राधाकृष्णन समिति की 46 प्रमुख सिफारिशों में से 35 लागू की जा चुकी हैं। विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित की जा रही हैं। नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले के लिए एक विशेष अदालत पहले ही निर्धारित हो चुकी थी। मगर 27 जुलाई को उसकी पहली सुनवाई स्थगित करनी पड़ी।

क्यों?

क्योंकि सीबीआई की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। एक तरफ सरकार की घोषणा कि 46 में से 35 सिफारिशें लागू हो चुकी हैं। दूसरी तरफ विशेष अदालत की पहली सुनवाई में ही जांच एजेंसी अनुपस्थित।

यही घोषणा और क्रियान्वयन के बीच का अंतर है।

सरकार कानून बनाकर बता सकती है कि उसने क्या किया। मगर नागरिक जानना चाहता है कि उस कानून से उसके जीवन में क्या बदला। सजा बढ़ाना सरकार का फैसला है। समय पर न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी। दोनों को एक समझ लेना ही लोकतांत्रिक जवाबदेही की सबसे बड़ी भूलों में एक है। इस पूरे मामले में समय और सार्वजनिक ध्यान की अपनी राजनीति है।

इस्तीफा एक घटना है। नया कानून एक घटना है। सजा बढ़ाना एक घटना है। ये सब तत्काल दिखाई देते हैं। इनकी तारीख होती है, घोषणा होती है और खबर बनती है।

मगर कानून का लागू होना एक प्रक्रिया है। वह अलग-अलग दफ्तरों, अदालतों, जांच एजेंसियों और अधिकारियों के बीच महीनों तक चलती है।

घटना का श्रेय किसी एक मंत्री या सरकार को मिल सकता है। प्रक्रिया की जिम्मेदारी अनेक अधिकारियों में बंट जाती है। मीडिया के लिए भी घटना आसान है। मंत्री ने इस्तीफा दिया, खबर बन गई। सरकार ने मांग स्वीकार की, खबर बन गई। अदालत ने आदेश दिया, खबर बन गई।

उसके बाद मीडिया दूसरे मुद्दे की ओर बढ़ जाता है। पाठक और दर्शक भी मान लेते हैं कि मामला समाप्त हो गया। जबकि नागरिक के लिए असली काम तब शुरू होता है।

मुआवजे का आदेश हुआ, मगर पैसा कब मिला? मुकदमा दर्ज हुआ, मगर जांच कब पूरी हुई? परीक्षा सुधार की घोषणा हुई, मगर अगली परीक्षा में क्या बदला? मतदाता सूची में सुधार का आश्वासन मिला, मगर मतदान से पहले कितने नाम वापस जुड़े?

इन प्रश्नों पर लगातार निगरानी रखने वाला कौन है? हर नई विफलता को एक नया घोटाला या नया विवाद मान लिया जाता है। उसे पहले किए गए वादे की अधूरी जिम्मेदारी से नहीं जोड़ा जाता। इस तरह सरकार बार-बार जवाब देने का दावा कर सकती है, जबकि उसके पुराने जवाबों का परिणाम सामने नहीं आया होता।

जॉर्ज ऑरवेल ने अपने प्रसिद्ध निबंध ‘पॉलिटिक्स एंड द इंग्लिश लैंग्वेज’ में राजनीतिक भाषा की इसी प्रवृत्ति की आलोचना की थी। उनके अनुसार राजनीतिक भाषा का इस्तेमाल अक्सर ऐसी चीजों को ठोस और वास्तविक दिखाने के लिए होता है जिनमें वास्तविकता बहुत कम होती है।

ऑरवेल की यह कसौटी आज भी उपयोगी है।

सरकारी घोषणाएं हमेशा झूठी नहीं होतीं। मंत्री और अधिकारी अपने आश्वासनों के प्रति ईमानदार भी हो सकते हैं। मगर ईमानदार आश्वासन भी तब तक नागरिक के लिए उपयोगी नहीं है जब तक उसे जांचा और लागू न कराया जा सके। सीजेपी की मुआवजे की मांग स्वीकार करते समय संबंधित मंत्री ने परिवारों को लागू नियमों के अंतर्गत अधिकतम संभव सहायता देने का वादा किया था। शब्दों पर गौर कीजिए।

अधिकतम। संभव। लागू नियमों के अंतर्गत।

हर शब्द उचित लग सकता है। मगर इन्हें जोड़ने पर भी यह पता नहीं चलता कि किस परिवार को कितनी रकम मिलेगी, किस तारीख तक मिलेगी और किस अधिकारी की जिम्मेदारी होगी। इसी तरह सरकारी भाषा में कुछ शब्द बार-बार आते हैं। प्रक्रिया शुरू हो गई है। योजना लागू है। मामला विचाराधीन है। सिफारिशें स्वीकार कर ली गई हैं। कार्यान्वयन जारी है।

इनका वास्तविक अर्थ क्या है?

नागरिक किस दफ्तर में जाकर जांच कर सकता है कि काम हुआ या नहीं? किस रजिस्टर में जिम्मेदार अधिकारी का नाम दर्ज है? किस समयसीमा को पार करने पर कार्रवाई होगी?

अदालत बना देना पर्याप्त नहीं है। उसमें न्यायाधीश भी होना चाहिए। सुनवाई होनी चाहिए। फैसला होना चाहिए।

कानून में समयसीमा लिख देना पर्याप्त नहीं है। उसे तोड़ने पर परिणाम भी होना चाहिए।

और अधिकार घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है। नागरिक को उसका इस्तेमाल करने का व्यावहारिक रास्ता भी मिलना चाहिए।

इसी बिंदु पर फिर जंतर मंतर और कॉकरोच जनता पार्टी की कहानी सामने आती है।

इस पार्टी की शुरुआत एक मजाक से हुई थी। 15 मई को भारत के मुख्य न्यायाधीश ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी फर्जी डिग्रियों वाले लोगों के संदर्भ में थी।

मगर टिप्पणी ने बेरोजगार युवाओं के बीच तीखी प्रतिक्रिया पैदा की। अगले दिन पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने इसी अपमानजनक शब्द को अपनाकर कॉकरोच जनता पार्टी बना दी।

कुछ ही दिनों में संगठन ने लाखों लोगों के जुड़ने का दावा किया। जिस शब्द से अपमान का बोध हुआ था, वही विरोध की पहचान बन गया। ऑरवेल ने अपने एक अन्य निबंध ‘फनी, बट नॉट वल्गर’ में लिखा था कि हर मजाक एक छोटी क्रांति होता है।

इस अर्थ में कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत दिलचस्प थी। सत्ता और प्रतिष्ठान की भाषा में जो शब्द तिरस्कार का प्रतीक था, युवाओं ने उसी को अपने संगठन का नाम बना लिया।

यह सत्ता के प्रति सम्मान दिखाने की अनिवार्यता को अस्वीकार करने का तरीका था।

ऐसा व्यंग्य लोगों को तेजी से जोड़ सकता है। वह अपमान को सामूहिक प्रतिरोध में बदल सकता है। मगर मजाक और आंदोलन की सीमाएं अलग हैं।

मजाक माचिस की तीली है। वह एक क्षण में अंधेरा दूर कर सकती है। मगर तीली बुझ जाने के बाद रोशनी बनाए रखने के लिए स्थायी व्यवस्था चाहिए।

सीजेपी के सामने भी यही चुनौती है। संगठन ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी बनाई है। अगस्त से उसकी राष्ट्रीय टीम भी काम कर रही है। अभिजीत दीपके राष्ट्रीय संयोजक हैं।अब तक संगठन की कार्यशैली में कुछ महत्वपूर्ण बातें दिखाई देती हैं।

वह सरकार के वादों की निगरानी करता है। समयसीमा तय करता है। जरूरत पड़ने पर फिर आंदोलन की चेतावनी देता है। सर्वोच्च न्यायालय में मामले उठाता है। 12 अगस्त को संगठन की संरचना और आगे की कार्ययोजना पर विचार करने के लिए स्वयंसेवकों की बैठक बुलाई गई थी। मगर दो स्थानों से बैठक हटानी पड़ी। दीपके ने आरोप लगाया कि इसके पीछे सत्तारूढ़ पार्टी का दबाव था।

यह घटनाक्रम बताता है कि सड़क पर भीड़ जुटा लेना और उस भीड़ को स्थायी संगठन में बदलना अलग-अलग काम हैं। किसी आंदोलन के सामने सफलता के बाद कई रास्ते होते हैं।

वह राजनीतिक पार्टी बनकर चुनाव लड़ सकता है, जैसा नेपाल में आंदोलन की ऊर्जा चुनावी राजनीति में पहुंची।

वह सूचना अधिकार आंदोलन की तरह स्थायी नागरिक अभियान बना सकता है। वह अदालतों, जनसुनवाई और सरकारी फैसलों की लगातार निगरानी करने वाला संगठन बन सकता है। या फिर कुछ दिनों की सुर्खियों और भीड़ के बाद समाप्त हो सकता है।

आखिरी रास्ता सत्ता के लिए सबसे सुविधाजनक है।

समय बीतने के साथ आंदोलनकारी अपने जीवन में लौट जाते हैं। छात्र पढ़ाई में लग जाते हैं। मजदूर काम पर लौट जाते हैं। परिवार अपनी जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाते हैं।

सरकार वहीं रहती है। दफ्तर वहीं रहते हैं। फाइलें चलती रहती हैं। और आंदोलन का दबाव धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।

सीजेपी ने अब तक दबाव, निगरानी और न्यायालय का रास्ता चुना है। मगर वह अभी ऐसी स्थायी प्रक्रिया नहीं बना सकी है जिसका उपयोग उससे असंबद्ध कोई भी नागरिक अपने अधिकार के लिए कर सके। सूचना अधिकार आंदोलन की सबसे बड़ी सीख यही है।

केवल समर्थक जुटाना पर्याप्त नहीं है। सबूत संभालने होंगे। मांगों को स्पष्ट करना होगा। कानून के प्रस्तावित प्रावधानों की जांच करनी होगी। सरकारी निर्णयों का लगातार पीछा करना होगा।

और एक प्रश्न का उत्तर भी देना होगा। आंदोलन की ओर से फैसला कौन करेगा? 25 जुलाई को सीजेपी का समझौता उसके संस्थापक और दो प्रवक्ताओं ने किया था। संगठन से लाखों लोगों के जुड़ने का दावा था। मगर उन लाखों लोगों ने अपने प्रतिनिधियों को औपचारिक रूप से नहीं चुना था।

समझौता हुआ और उसी दोपहर आंदोलन समाप्त कर दिया गया। यह अपने आप में कोई आरोप नहीं है। हर आंदोलन में किसी को बातचीत करनी होती है। किसी को सरकार का प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार करना होता है। किसी को समझौते पर सहमति देनी होती है।

मगर प्रश्न यह है कि उसे यह अधिकार किसने दिया और उसकी सीमा क्या है?

अगली बार जब सरकार कोई समझौता पेश करेगी तो संगठन की ओर से कौन निर्णय करेगा? किन मांगों पर समझौता किया जा सकता है? किन मांगों पर नहीं? और यदि आंदोलनकारी अपने प्रतिनिधियों के फैसले से असहमत हों तो क्या व्यवस्था होगी?

सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर होना लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का प्रमाण नहीं है।

सड़क पर हजारों लोगों का मौजूद होना भी अपने आप में संगठन के नेतृत्व को हर निर्णय का अधिकार नहीं देता।

किसी भीड़ को राजनीतिक समुदाय बनने के लिए असहमति व्यक्त करने का अधिकार और उसका व्यावहारिक तरीका चाहिए।

यही संगठन और भीड़ का अंतर है। इसका एक दूसरा पहलू भी है। आंदोलन में लंबे समय तक कौन रह सकता है? अखिल भारतीय छात्र संघ की अध्यक्ष नेहा बोरा ने जंतर मंतर पर 23 दिन का अनशन किया।

मगर हर छात्र ऐसा नहीं कर सकता।

किसी को परीक्षा देनी है। किसी को नौकरी तलाशनी है। किसी को परिवार चलाना है। किसी की रोज की कमाई बंद हो जाएगी। किसी के घर में उसकी देखभाल पर निर्भर लोग हैं।

इसलिए आंदोलन में लंबे समय तक उपस्थित रहने की क्षमता भी सबकी बराबर नहीं होती।

जो लगातार धरने पर रह सकते हैं, संगठन के निर्णयों में उनका प्रभाव बढ़ सकता है। मगर जो घर लौटने के लिए मजबूर हैं, उनकी जरूरतें और राय भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

लोकतांत्रिक आंदोलन को यह असमानता समझनी होगी।

आंदोलन की असली परीक्षा उसके समझौते से लाभ पाने वाले नागरिक के जीवन में होती है।

मान लीजिए किसी छात्र की परीक्षा रद्द हुई है। उसे यह जानने से क्या राहत मिलेगी कि प्रश्नपत्र लीक करने वालों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है और पांच वर्ष बाद उन्हें सजा हो सकती है?

उसकी जरूरत तत्काल है। उसे अगली परीक्षा की तारीख चाहिए। दोबारा परीक्षा देने की फीस और खर्च के बारे में स्पष्ट निर्णय चाहिए। विवादित परिणाम के खिलाफ अपील का अधिकार चाहिए। और ऐसा प्रशासनिक तंत्र चाहिए जो उसके आवेदन पर समय रहते फैसला कर सके।

परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था को ये व्यवस्थाएं सार्वजनिक करनी चाहिए।

मंत्रालय को इनके लिए धन उपलब्ध कराना चाहिए।

परीक्षा रद्द होने की पूरी कीमत छात्र और उसके परिवार पर नहीं डाली जा सकती। इसी तरह प्रश्नपत्र लीक रोकने के लिए केवल महंगी तकनीक खरीद लेना पर्याप्त नहीं है। पहले यह पता चलना चाहिए कि प्रश्नपत्र तक अनधिकृत पहुंच कहां से मिली। निगरानी कहां विफल हुई। किस अधिकारी या ठेकेदार की जिम्मेदारी थी।

प्रश्नपत्रों के हस्तांतरण का रिकॉर्ड होना चाहिए। संवेदनशील सामग्री तक किसकी पहुंच थी, इसका हिसाब होना चाहिए। अनुबंधों में जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। और जांच करने वाली संस्था को संबंधित सबूतों तक पहुंच मिलनी चाहिए।

यह तकनीक से अधिक प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न है। संसाधन कहां खर्च किए जाएं, किसे अधिकार मिले और गलती होने पर किसे जवाब देना पड़े, यही असली फैसले हैं।

अब मतदाता का उदाहरण लीजिए। जिस नागरिक का नाम मतदाता सूची से कट गया है, उसके लिए समयसीमा मतदान का दिन है। यदि चुनाव हो जाने के बाद उसका नाम वापस जुड़ता है तो वह अधिकार किस काम का?

उसे यह जानने का अधिकार चाहिए कि नाम क्यों काटा गया। किस आधार पर काटा गया। किस अधिकारी ने निर्णय लिया। उसे व्यक्तिगत रूप से सहायता मिलनी चाहिए। आपत्ति दर्ज कराने की सुलभ व्यवस्था होनी चाहिए। और विवादित मामलों के निपटारे के लिए पर्याप्त कर्मचारी होने चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण यह कि फैसला मतदान से पहले हो। मौजूदा अपील व्यवस्था को इसी कसौटी पर परखना चाहिए। क्या वह चुनाव से पहले गलती सुधार सकती है?

यदि नहीं, तो किसी अतिरिक्त समीक्षा व्यवस्था के लिए कानूनी अधिकार, पर्याप्त धन और फैसलों को लागू कराने की क्षमता सुनिश्चित करनी होगी। क्योंकि मतदान के बाद मिला अनुकूल फैसला नागरिक को उसका खोया हुआ वोट वापस नहीं दिला सकता।

यहां फिर तोकविल की बात याद आती है। उनके अनुसार स्वतंत्र समाज की रक्षा केवल संविधान के शब्द नहीं करते। नागरिकों की आदतें करती हैं। बैठक का विवरण रखना। सरकारी रिकॉर्ड पढ़ना। फैसलों का हिसाब मांगना। एक ही दफ्तर में दूसरी और तीसरी बार जाना। अपने अधिकार के लिए दूसरों के साथ संगठित रहना।

ये काम आकर्षक नहीं हैं। इनमें आंदोलन की उत्तेजना नहीं है। नारे नहीं हैं। मंच नहीं हैं। तत्काल प्रसिद्धि नहीं है। मगर लोकतंत्र की वास्तविक जवाबदेही इन्हीं कामों से बनती है।

भारत जैसे विशाल युवा आबादी वाले लोकतंत्र में खतरा केवल दमन का नहीं है।

एक दूसरा, कहीं अधिक सूक्ष्म खतरा भी है। युवाओं की आवाज बहुत जोर से सुनी जाए, मगर उनके सवालों का जवाब बहुत धीरे दिया जाए। वे यह मान बैठें कि सरकार ने उनकी बात सुन ली, इसलिए उनकी मांग पूरी हो गई।

जबकि सुन लेना और समाधान करना एक ही बात नहीं है। सड़क पर आंदोलन खतरे की घंटी बजा सकता है। मगर जवाबदेही की स्थायी व्यवस्था सड़क पर लगातार भीड़ जुटाकर नहीं चलाई जा सकती। उसके लिए संस्थाओं के भीतर ऐसे नियम और प्रक्रियाएं चाहिए जो बिना आंदोलन के भी काम करें।

राजस्थान की जनसुनवाइयों में मजदूर सरकारी कागज पर दर्ज मजदूरी का हिसाब अपने वास्तविक काम से मिलाते थे। कागज कहता था कि भुगतान हो गया। मजदूर कहता था कि पैसा नहीं मिला।

इस टकराव से एक सिद्धांत निकला था। सरकारी रिकॉर्ड नागरिक की पहुंच में होना चाहिए ताकि वह सरकार के दावे को चुनौती दे सके। आज वही सिद्धांत परीक्षा और मतदाता सूची के मामलों में लागू होना चाहिए।

छात्र परीक्षा का फैसला चुनौती दे सके। उसे कारण बताया जाए। अपील का रास्ता मिले। और फैसला उस समय आए जब उसका भविष्य बचाया जा सकता हो। मतदाता अपना नाम कटने का कारण जान सके। आपत्ति दर्ज करा सके। और चुनाव से पहले गलती सुधरवा सके।

लोकतंत्र की असली परीक्षा यही है।

नागरिक को केवल अधिकार दिया गया है या उस अधिकार को समय रहते इस्तेमाल करने की शक्ति भी दी गई है? क्योंकि अधिकार का अर्थ केवल सरकार की स्वीकृति नहीं है। अधिकार का अर्थ है कि नागरिक सरकार को अपनी जिम्मेदारी पूरी करने के लिए बाध्य कर सके।

और वह भी तब, जब उस जिम्मेदारी का निर्वाह उसके लिए उपयोगी हो। राजस्थान के मजदूरों ने यही रास्ता खोला था। आज के छात्रों और मतदाताओं के सामने भी मूल प्रश्न वही है। क्या वे सरकारी फैसले का कारण जान सकते हैं? क्या वे उस फैसले को चुनौती दे सकते हैं? क्या वे सरकार को उसकी कानूनी जिम्मेदारी याद दिलाकर समय पर राहत हासिल कर सकते हैं?

यदि इसका उत्तर सुनिश्चित नहीं है तो आंदोलन समाप्त हो जाने से कुछ साबित नहीं होता।

जंतर मंतर खाली हो सकता है। प्रदर्शनकारी घर लौट सकते हैं। सरकार घोषणा कर सकती है कि मांगें मान ली गई हैं।

मगर जिस नागरिक की परीक्षा रद्द हुई, जिसकी मजदूरी रुकी है या जिसका वोट कट गया है, उसके लिए आंदोलन की सफलता का फैसला अभी बाकी है। सड़क खाली हो जाने का अर्थ यह नहीं कि काम पूरा हो गया। (समाप्त)

Gold Price Today: नवरात्रि के 6ठे दिन सोने में गिरावट, चांदी का भी हाल बेहाल

देश में सोने की कीमत में 16 अक्टूबर को भी गिरावट है। नवरात्रि के 6ठे दिन की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147580 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 900 रुपये घटी। रुपये में मजबूती और हाजिर मांग कमजोर रहने के कारण ऐसा हुआ। रुपये में मजबूती से डॉलर मूल्य वाली सोने-चांदी जैसी धातुओं का आयात सस्ता हो जाता है, जिससे घरेलू बाजार में उनकी कीमतों पर दबाव पड़ता है।

गुरुवार को रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यह 18 पैसे की बढ़त के साथ 94.99 पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने घरेलू मुद्रा को मजबूती देने के उद्देश्य से बीते वीकेंड कई उपाय किए थे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,152.99 डॉलर प्रति औंस पर है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 147580 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135290 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 135140 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 147430 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147430 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 135140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 147430 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 135140 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली135290147580
मुंबई135140147430
अहमदाबाद135190147480
चेन्नई135140147430
कोलकाता135140147430
हैदराबाद135140147480
जयपुर135290147580
भोपाल135190148300
लखनऊ135290147580
चंडीगढ़135290147580

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चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट बरकरार है। 16 अक्टूबर की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में चांदी की कीमत 6,000 रुपये गिरी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 57.09 डॉलर प्रति औंस है।

Delhi Weather: बारिश के बाद राजधानी ने ली राहत की सांस, AQI सुधरकर 149 पर पहुंचा; तापमान में भी आई गिरावट

Delhi Weather: दिल्ली में बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत देने के साथ-साथ हवा की सेहत में भी सुधार किया है। गुरुवार को हुई बारिश के बाद राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) घटकर 149 पर पहुंच गया। इससे पहले यानी बुधवार को यह 181 दर्ज किया गया था। बारिश के कारण दिन के तापमान में भी गिरावट आई। हालांकि, कई इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक जाम ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के अनुसार, सोमवार को दिल्ली का AQI कुछ समय के लिए सुधरकर 83 पर आ गया था, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है। हालांकि, बाद में यह फिर से मध्यम श्रेणी में आ गया और गुरुवार को गिरकर 149 पर पहुंच गया।

AQI के अलग-अलग स्तरों को इस तरह समझा जा सकता है:

0-50 के AQI को ‘अच्छा’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मॉडरेट’ (मध्यम), 201-300 को ‘खराब’, 301-400 को ‘बहुत खराब’ और 401-500 को ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा जाता है।

बारिश से मिली राहत, दिल्ली के AQI में सुधार

गुरुवार को दिल्ली के कई हिस्सों में बारिश होने से हवा की गुणवत्ता (एयर क्वालिटी) में सुधार आया है। बारिश के कारण तापमान में गिरावट भी आई है। सफदरजंग में अधिकतम तापमान 28.3°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग पांच डिग्री कम है और बुधवार के तापमान के मुकाबले छह डिग्री कम है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच सफदरजंग में 15.9 मिमी बारिश दर्ज की गई। लोधी रोड पर 20 मिमी, रिज में 25.2 मिमी, पालम में 11.2 मिमी और आयानगर में 7.2 मिमी बारिश हुई।

दिल्ली के अन्य मौसम केंद्रों पर भी अधिकतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। पालम में अधिकतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि लोधी रोड में यह 27.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, रिज में अधिकतम तापमान 27.4 डिग्री और आया नगर में 28.4 डिग्री सेल्सियस रहा।

दिन के तापमान में गिरावट के बावजूद, सभी पांचों मौसम केंद्रों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर बना रहा। सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 23.3°C, लोधी रोड पर 22°C और अयानगर में 23.4°C दर्ज किया गया।

दिल्ली भर में जलभराव और ट्रैफिक जाम की खबरें

बारिश से जहां गर्मी से राहत मिली और हवा की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ, वहीं कई जगहों पर जलभराव के कारण लोगों परेशानी उठानी पड़ी। साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था बाधित भी हुई।

जलभराव की शिकायत जखीरा अंडरपास, आश्रम अंडरपास, इंद्रलोक और आजाद मार्केट को जोड़ने वाले अंडरपास, लाजपत नगर फ्लाईओवर और मुनिरका से मिली। वहीं, ITO, आश्रम, कालकाजी मंदिर, ग्रेटर कैलाश, मुनिरका, भैरों मार्ग अंडरपास और मथुरा रोड पर भी ट्रैफिक प्रभावित रहा।

यह भी पढ़ें: Southwest monsoon: 12% कम बारिश के साथ पूरी तरह वापस लौटा दक्षिण पश्चिम मॉनसून, 21 अक्टूबर तक उत्तर पूर्व मॉनसून फिर लाएगा बारिश

रात में सूरज की रोशनी बेचने की तैयारी:भारत की स्काईरूट एयरोस्पेस और अमेरिकी स्टार्टअप का प्रोजेक्ट, विक्रम रॉकेट से भेजे जाएंगे सैटेलाइट

अमेरिकी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल रात में धरती के चुनिंदा स्थानों पर सूरज की रोशनी बेचने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पृथ्वी की कक्षा में बड़े शीशे लगाए जाएंगे। कैलिफोर्निया की यह स्टार्ट-अप भारत की स्काईरूट एयरोस्पेस की मदद से सैटेलाइट लॉन्च करेगी। दोनों कंपनियों के बीच दो लॉन्च का कॉन्ट्रैक्ट हुआ है। इन सैटेलाइट से आपदा प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान के लिए रोशनी दी जा सकेगी। सोलर फार्म में बिजली बनाने का समय भी बढ़ाया जा सकेगा। दो लॉन्च के लिए हुआ कॉन्ट्रैक्ट रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ने हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ दो लॉन्च का समझौता किया है। दोनों लॉन्च विक्रम रॉकेट से किए जाएंगे। कंपनी ने बयान में कहा, “इन लॉन्च से हमें अमेरिका की अन्य तय लॉन्च सेवाओं के साथ पक्का शेड्यूल और क्षमता मिलेगी।” स्काईरूट एयरोस्पेस के CEO पवन चंदाना ने कहा, “रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के साथ साझेदारी को लेकर उत्साहित हैं। यह कंपनी अंतरिक्ष तकनीक के सबसे नए इस्तेमालों में से एक पर काम कर रही है।” उन्होंने कहा, “हम स्काईरूट ए के साथ उनकी धरती पर मांग के मुताबिक सूरज की रोशनी देने की योजना को लॉन्च करने का इंतजार कर रहे हैं।” पांच किलोमीटर के दायरे में दी जा सकेगी रोशनी जुलाई में रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल को फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन FCC से एक प्रदर्शन सैटेलाइट बनाने, लॉन्च करने और चलाने की मंजूरी मिली थी। स्टार्ट-अप का लक्ष्य ऐसी रोशनी देना है, जिसे कभी भी बंद किया जा सके। इसकी चमक को बदला जा सकेगा और यह पांच किलोमीटर के क्षेत्र में फैलेगी। कंपनी के मुताबिक, मांग पर मिलने वाली यह रोशनी दूरदराज के औद्योगिक इलाकों में काम के घंटे बढ़ा सकती है। इससे रक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण ढांचे को रोशन करने में मदद मिल सकती है। कंपनी ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए भी इससे यादगार अनुभव बनाए जा सकते हैं। पहला लॉन्च विक्रम-1 रॉकेट से होगा रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के को-फाउंडर और CEO बेन नोवैक ने कहा, “हम नए लॉन्च प्रोवाइडर स्काईरूट के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं। इससे अंतरिक्ष तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।” इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत पहला लॉन्च विक्रम-1 रॉकेट से होगा। दूसरा लॉन्च स्काईरूट के विकासाधीन विक्रम-1U लॉन्च व्हीकल से किया जाएगा। बयान के मुताबिक, विक्रम-1U में पहले चरण के अतिरिक्त बूस्टर लगाए गए हैं। इसमें बेहतर प्रदर्शन की क्षमता भी है। नोवैक ने कहा, “हमें हाल ही में अपने पहले अंतरिक्ष यान को चलाने के लिए फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन से लाइसेंस मिला है।” उन्होंने कहा, “हम खगोलविदों, स्थानीय समुदायों और नियामकों के साथ काम जारी रखेंगे। इससे बड़े स्तर पर विस्तार की अनुमति हासिल करने में मदद मिलेगी।” 1993 में भी कक्षा से भेजी गई थी सूरज की रोशनी 1993 में रूसी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने 65 फीट लंबा शीशा कक्षा में तैनात किया था। इससे धरती पर सूरज की रोशनी की एक घूमती हुई किरण भेजी गई थी। यह प्रयोग सफल रहा था। हालांकि, पैसों की कमी के कारण इसे बंद कर दिया गया। इस प्रयोग का नाम ज़नाम्या था। रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना को लेकर विवाद भी हुआ है। कई पर्यावरण संगठनों ने FCC से प्रदर्शन सैटेलाइट के लिए दी गई मंजूरी रद्द करने की मांग की है। इन संगठनों का कहना है कि रात में तेज रोशनी वन्यजीवों को परेशान कर सकती है। इससे खगोल विज्ञान से जुड़े अध्ययन प्रभावित हो सकते हैं और इंसानों की जैविक दिनचर्या पर असर पड़ सकता है।

रात में सूरज की रोशनी बेचने की तैयारी:अंतरिक्ष में लगेंगे बड़े शीशे; भारत की स्काईरूट एयरोस्पेस और अमेरिकी स्टार्टअप का प्रोजेक्ट

अमेरिकी स्पेस टेक्नोलॉजी कंपनी रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल रात में धरती के चुनिंदा स्थानों पर सूरज की रोशनी बेचने की तैयारी कर रही है। इसके लिए पृथ्वी की कक्षा में बड़े शीशे लगाए जाएंगे। कैलिफोर्निया की यह स्टार्ट-अप भारत की स्काईरूट एयरोस्पेस की मदद से सैटेलाइट लॉन्च करेगी। दोनों कंपनियों के बीच दो लॉन्च का कॉन्ट्रैक्ट हुआ है। इन सैटेलाइट से आपदा प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान के लिए रोशनी दी जा सकेगी। सोलर फार्म में बिजली बनाने का समय भी बढ़ाया जा सकेगा। दो लॉन्च के लिए हुआ कॉन्ट्रैक्ट रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ने हैदराबाद में स्काईरूट एयरोस्पेस के साथ दो लॉन्च का समझौता किया है। दोनों लॉन्च विक्रम रॉकेट से किए जाएंगे। कंपनी ने बयान में कहा, “इन लॉन्च से हमें अमेरिका की अन्य तय लॉन्च सेवाओं के साथ पक्का शेड्यूल और क्षमता मिलेगी।” स्काईरूट एयरोस्पेस के CEO पवन चंदाना ने कहा, “रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल अंतरिक्ष तकनीक के सबसे नए इस्तेमालों में से एक पर काम कर रही है। हम स्काईरूट ए के साथ उनकी धरती पर मांग के मुताबिक सूरज की रोशनी देने की योजना को लॉन्च करने का इंतजार कर रहे हैं।” पांच किलोमीटर के दायरे में दी जा सकेगी रोशनी जुलाई में रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल को फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन FCC से एक प्रदर्शन सैटेलाइट बनाने, लॉन्च करने और चलाने की मंजूरी मिली थी। स्टार्ट-अप का लक्ष्य ऐसी रोशनी देना है, जिसे कभी भी बंद किया जा सके। इसकी चमक को बदला जा सकेगा और यह पांच किलोमीटर के क्षेत्र में फैलेगी। कंपनी के मुताबिक, मांग पर मिलने वाली यह रोशनी दूरदराज के औद्योगिक इलाकों में काम के घंटे बढ़ा सकती है। इससे रक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण ढांचे को रोशन करने में मदद मिल सकती है। पहला लॉन्च विक्रम-1 रॉकेट से होगा रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के को-फाउंडर और CEO बेन नोवैक ने कहा, “हम नए लॉन्च प्रोवाइडर स्काईरूट के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं। इससे अंतरिक्ष तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।” इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत पहला लॉन्च विक्रम-1 रॉकेट से होगा। दूसरा लॉन्च स्काईरूट के विक्रम-1U लॉन्च व्हीकल से किया जाएगा। विक्रम-1U में पहले चरण के एक्स्ट्रा बूस्टर लगाए गए हैं। नोवैक ने कहा, “हमें हाल ही में अपने पहले अंतरिक्ष यान को चलाने के लिए फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन से लाइसेंस मिला है। हम खगोलविदों, स्थानीय समुदायों और रेगुलेटर्स के साथ काम जारी रखेंगे। इससे बड़े स्तर पर विस्तार की अनुमति हासिल करने में मदद मिलेगी।” 1993 में भी कक्षा से भेजी गई थी सूरज की रोशनी 1993 में रूसी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने 65 फीट लंबा शीशा कक्षा में तैनात किया था। इससे धरती पर सूरज की रोशनी की एक घूमती हुई किरण भेजी गई थी। यह प्रयोग सफल रहा था। हालांकि, पैसों की कमी के कारण इसे बंद कर दिया गया। इस प्रयोग का नाम ज़नाम्या था। रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना को लेकर विवाद भी हुआ है। कई पर्यावरण संगठनों ने FCC से प्रदर्शन सैटेलाइट के लिए दी गई मंजूरी रद्द करने की मांग की है। इन संगठनों का कहना है कि रात में तेज रोशनी वन्यजीवों को परेशान कर सकती है। इससे खगोल विज्ञान से जुड़े अध्ययन प्रभावित हो सकते हैं और इंसानों की जैविक दिनचर्या पर असर पड़ सकता है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब:स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। पढ़ें पूरी खबर…

Angel One Q2 Results: मुनाफा 58% बढ़कर ₹335 करोड़ हुआ, डिविडेंड का भी ऐलान

Angel One Q2 Results: स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी Angel One का सितंबर तिमाही में कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 58.2% बढ़कर 334.9 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 211.7 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। रेवेन्यू भी 17.8% बढ़कर 1,426.9 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल 1,211.7 करोड़ रुपये था।

कंपनी का EBITDA बढ़कर 493.3 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 485.4 करोड़ रुपये था। EBITDA मार्जिन पिछली तिमाही के 34.5% से बढ़कर 45.1% पहुंच गया। इसमें 10.64 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ।

क्लाइंट फंडिंग में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

कंपनी की औसत क्लाइंट फंडिंग बुक वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में रिकॉर्ड 7,450 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। इसमें सालाना आधार पर 40.5% की बढ़ोतरी हुई। सितंबर में रोजाना औसत ऑर्डर बढ़कर 58 लाख हो गए। यह Closing Auction Session (CAS) लागू होने से पहले के स्तर के करीब है। CAS के कारण कुछ समय तक ब्रोकिंग कारोबार प्रभावित हुआ था।

Angel One के ग्रुप CEO अंबरिश खेंगे ने कहा कि बाजार के नियमों में बदलाव के बावजूद कंपनी के ग्राहकों की भागीदारी में सुधार हुआ है। इनमें बैंक फंडिंग के बदले नियम और कैश इक्विटी में CAS की शुरुआत शामिल हैं।

डेरिवेटिव्स और क्रेडिट कारोबार में बढ़त

रिटेल इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर में Angel One की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 0.43 प्रतिशत अंक बढ़कर 22.1% हो गई। वहीं, कमोडिटी टर्नओवर दोगुने से ज्यादा बढ़ा।

कंपनी का क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन भी 51.8% बढ़कर 690 करोड़ रुपये हो गया। सितंबर में ही करीब 280 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड मासिक क्रेडिट डिस्ट्रीब्यूशन हुआ। हालांकि, नए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) रजिस्ट्रेशन सालाना आधार पर 19% घटकर 19 लाख रह गए।

वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का विस्तार

Angel One के वेल्थ मैनेजमेंट कारोबार का AUM सालाना आधार पर 160.5% बढ़कर 16,000 करोड़ रुपये पहुंच गया। सितंबर 2026 तक इस कारोबार के ग्राहकों की संख्या 2,975 से ज्यादा हो गई। कंपनी के एसेट मैनेजमेंट कारोबार का AUM भी 41.3% बढ़कर 570 करोड़ रुपये रहा।

Angel One का डिविडेंड

एंजल वन ने 1.40 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का भी ऐलान किया है। इसके लिए रिकॉर्ड 22 अक्टूबर 2026 तय की है।

नतीजों से पहले BSE पर कंपनी का शेयर 2.13% बढ़कर 312.10 रुपये पर बंद हुआ। इस साल स्टॉक 32.04% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 2.82 हजार करोड़ रुपये है।

IRFC Q2 Results: सरकारी रेल कंपनी को ₹1958 करोड़ का मुनाफा, अब तक के सबसे बड़े डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी का मुनाफा 103% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी IIFL Finance ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 103.7% बढ़कर 766.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 376.3 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 50.2% बढ़कर 2,161 करोड़ रुपये पहुंच गई। ये वो कमाई है, जो कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और उधार पर चुकाए जाने वाले ब्याज के अंतर से होती है। कंपनी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 38% बढ़कर 1.24 लाख करोड़ रुपये हो गया।

गोल्ड लोन कारोबार में 90% की ग्रोथ

IIFL Finance की ग्रोथ में गोल्ड लोन कारोबार की बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट का AUM सालाना आधार पर 90% बढ़कर 65,729 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 13% की बढ़ोतरी हुई। गोल्ड लोन में ग्रॉस NPA 0.90% रहा।

होम लोन का AUM पिछली तिमाही के मुकाबले 4% बढ़कर 43,070 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस सेगमेंट में ग्रॉस NPA घटकर 1.38% रह गया। वहीं, छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले सिक्योर्ड MSME लोन का AUM 11% बढ़कर 11,948 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी बिना गारंटी वाले लोन में अपना जोखिम घटा रही है।

बैड लोन की स्थिति में सुधार

सितंबर तिमाही में IIFL Finance का ग्रॉस NPA 1.5% रहा। यह पिछली तिमाही से 0.07 प्रतिशत अंक कम है। हालांकि, नेट NPA 0.05 प्रतिशत अंक बढ़कर 0.9% हो गया। कंपनी का प्रोविजन कवरेज रेशियो 91% रहा। मतलब कंपनी ने खराब कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए पर्याप्त रकम अलग रखी है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 23.5% और लिक्विडिटी 13,805 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 20.1% रहा।

AI के इस्तेमाल पर जोर

IIFL Finance लोन की जांच, कलेक्शन और ग्राहकों से बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ा रही है। कंपनी के मुताबिक, प्रॉपर्टी के बदले छोटे और मझोले कारोबारियों को दिए जाने वाले लोन के 85% से ज्यादा आवेदनों के क्रेडिट असेसमेंट में AI का इस्तेमाल हो रहा है।

कंपनी ने गोल्ड लोन ब्रांचों में भी AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम अब तक सोने के गहनों की 11 लाख से ज्यादा तस्वीरों का एनालिसिस कर चुका है। कंपनी बैंकिंग पार्टनरशिप बढ़ाकर भी अपना कारोबार मजबूत करना चाहती है।

शेयर में हल्की तेजी

IIFL Finance का शेयर 15 अक्टूबर को NSE पर 0.53% बढ़कर 598 रुपये पर बंद हुआ। आगे कंपनी का फोकस सिक्योर्ड लोन बढ़ाने, खराब कर्ज पर नियंत्रण रखने और बैंकों के साथ साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा।

कंपनी इक्विटी के जरिए नया फंड जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जुलाई 2026 में शेयरधारकों से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Southwest monsoon: 12% कम बारिश के साथ पूरी तरह वापस लौटा दक्षिण पश्चिम मॉनसून, 21 अक्टूबर तक उत्तर पूर्व मॉनसून फिर लाएगा बारिश

Southwest monsoon: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार को कहा कि देश से दक्षिण पश्चिम मॉनसून पूरी तरह वापस चला गया है। मौसम एजेंसी ने इसी दिन दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में उत्तर पूर्वी मॉनसून के आने का भी ऐलान किया। आईएमडी के मुताबिक, उत्तर पूर्व मॉनसून की वजह से तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, कोस्टल आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, साउथ अंदरूनी कर्नाटक, केरल और माहे में बारिश हुई।

उत्तर पूर्व मॉनसून के आने के बाद 21 अक्टूबर तक दक्षिण प्रायद्वीप भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ बारिश का अनुमान है। भारत में दो बड़े मॉनसून सिस्टम होते हैं, जून से सितंबर तक दक्षिण पश्चिम मॉनसून और अक्टूबर से दिसंबर तक उत्तर पूर्व मॉनसून रहता है, जिसे रिट्रीटिंग मॉनसून भी कहा जाता है।

दक्षिण पश्चिम मॉनसून को भारत की खेती और अर्थव्यवस्था के लिए बहुत जरूरी माना जाता है क्योंकि यह सीधे खरीफ फसल के मौसम को प्रभावित करता है। वहीं, उत्तर पूर्व मॉनसून कम आक्रामक होता है, लेकिन यह रबी फसल की पैदावार को सहयोग करने में, खासकर दक्षिण के राज्यों में, एक अहम रोल निभाता है।

आईएमडी ने कहा कि इस साल दक्षिण पश्चिम मॉनसून 759.4 mm बारिश के साथ खत्म हुआ, जो सामान्य औसत 868.6 mm से 12.6% कम था। एजेंसी ने बारिश में कमी के लिए ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में मौजूदा एल नीनो परिस्थिति को जिम्मेदार बताया। यह जून में सामने आया था और लगातार मजबूत होता जा रहा है।

एल नीनो मौसम का एक पैटर्न है जो पैसिफिक रीजन में समुद्र के तापमान और वातावरण परिस्थितियों में बदलाव से जुड़ा है। यह आमतौर पर भारत में मॉनसून की बारिश को कम करता है, जबकि इसका उल्टा फेज, ला नीना, अक्सर दुनिया का तापमान ठंडा करता है और बारिश के पैटर्न पर असर डाल सकता है।

वर्ल्ड मेटियोरोलॉजिकल ऑर्गनाइजेशन (WMO) समेत वैश्विक मौसम एजेंसियों ने अनुमान लगाया है कि मौजूदा एल नीनो प्रभाव दिसंबर 2026 में शिखर पर हो सकता है। यह 1950 में ऑब्जर्वेशन शुरू होने के बाद से अब तक का सबसे मजबूत रिकॉर्ड बन सकता है। ये हालात फरवरी 2027 तक जारी रहने की उम्मीद है।

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