Physicswallah Share Price: एडटेक कंपनी का शेयर 5% तक उछला, लेंडिंग बिजनेस पर एक अपडेट के बाद बढ़ी खरीद

एडटेक प्लेटफॉर्म फिजिक्सवाला के शेयर में 5 अक्टूबर को दिन में 5.5 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर 126.80 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 36500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। कंपनी ने 4 अक्टूबर को अपनी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेगमेंट की लेंडिंग स्ट्रैटेजी को रीस्ट्रक्चर करने और डायरेक्ट लेंडिंग से हटने की घोषणा की। कंपनी अपने 100 प्रतिशत मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी FinZ Finance Private Limited के जरिए यह कारोबार करती है।

एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया कि FinZ Finance ने RBI-रजिस्टर्ड NBFC ऑक्सिलो फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड के साथ 95.79 करोड़ रुपये के लोन पोर्टफोलियो की बिक्री, ट्रांसफर और असाइनमेंट के लिए एक एग्रीमेंट किया है। ऑपरेशनल ट्रांजीशन प्रक्रिया 60 दिनों के अंदर पूरी होने की उम्मीद है।

चूंकि FinZ Finance का मुख्य काम लोन देना है, इसलिए इस प्रस्तावित ट्रांजेक्शन से इसके लोन देने के कामकाज में काफी कमी आएगी और उम्मीद है कि इससे इसके लोन देने के कामकाज आंशिक रूप से या धीरे-धीरे बंद हो जाएंगे। इस कदम का मकसद कंपनी को अपने मुख्य बिजनेस पर फोकस करने में मदद करना है।

शेयर 6 महीनों में 40 प्रतिशत मजबूत

फिजिक्सवाला के शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। यह BSE 500 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी की शुरुआत 2016 में एक YouTube चैनल के तौर पर हुई थी। कंपनी नवंबर 2025 में लिस्ट हुई थी। IPO 3480 करोड़ रुपये का था। शेयर 6 महीनों में लगभग 40 प्रतिशत चढ़ा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 71.27 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 162.05 रुपये और एडजस्टेड लो 77.75 रुपये है।

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सितंबर महीने में ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने फिजिक्सवाला के शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग के साथ कवरेज शुरू किया था। टारगेट प्राइस 200 रुपये प्रति शेयर रखा था। वहीं बुल केस में टारगेट प्राइस 220 रुपये प्रति शेयर दिया था। बेयर केस सिनेरियो में मोतीलाल ओसवाल ने 110 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया। ब्रोकरेज ने कंपनी के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ना, ऑफलाइन कामकाज और सेंटर्स के इस्तेमाल में कमजोरी, फैकल्टी के ज्यादा संख्या में नौकरी छोड़ने से छात्रों के नतीजों और ब्रांड की इमेज पर असर; कोचिंग संस्थानों, विज्ञापन या डेटा प्राइवेसी से जुड़े नियमों में प्रतिकूल बदलावों को मुख्य जोखिमों में शामिल किया है।

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Maxivision Super Specialty Eye Hospitals ला रही है IPO, ड्राफ्ट किया जमा; क्वाड्रिआ कैपिटल का भी लगा है पैसा

मैक्सीविजन सुपर स्पेशिएलिटी आई हॉस्पिटल्स (Maxivision Super Specialty Eye Hospitals) ने अपने IPO के लिए कॉन्फिडेंशियल तरीके से ड्राफ्ट जमा किया है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह बात एक अखबार के विज्ञापन से सामने आई है। इस IPO में नए शेयर तो जारी होंगे ही, साथ ही कंपनी के मौजूदा निवेशकों की ओर से ऑफर फॉर सेल भी रहेगा। कंपनी में क्वाड्रिआ कैपिटल का भी पैसा लगा हुआ है।

कॉन्फिडेंशियल रूट कंपनियों को लिस्टिंग पर अंतिम फैसले पर पहुंचने तक गोपनीयता की सुविधा देता है। अगर जरूरी हो तो वे बाद में बाजार की स्थितियों के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा किए बिना ड्राफ्ट को वापस भी ले सकती हैं। कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग कंपनियों को सेंसिटिव बिजनेस डिटेल्स या फाइनेंशियल मेट्रिक्स और रिस्क्स को गोपनीय रखने की इजाजत देती है, खासकर कॉम्पिटीटर्स से। दूसरी ओर स्टैंडर्ड DRHP (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) फाइलिंग के बाद एक पब्लिक डॉक्युमेंट बन जाता है।

IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल हैं मर्चेंट बैंकर

रॉयटर्स ने जुलाई में रिपोर्ट दी थी कि मैक्सीविजन सुपर स्पेशिएलिटी आई हॉस्पिटल्स ने IPO के लिए ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल को बैंकर के तौर पर नियुक्त किया है। 1996 में शुरू हुई यह हॉस्पिटल चेन 6 राज्यों में 90 से ज्यादा सेंटर चलाती है। ग्रैंड व्यू रिसर्च के अनुसार, भारत का आई-केयर मार्केट 2033 तक 31.2 अरब डॉलर का बन जाने का अनुमान है।

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इसी महीने आ सकता है Jio IPO

Jio Platforms के IPO को लेकर कंपनी की अंदरूनी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मनीकंट्रोल को मामले से जुड़े लोगों से पता चला है कि विदेशी निवेशकों से भी कंपनी को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। IPO 21 से 23 अक्टूबर के बीच खुल सकता है। एंकर बुक 19 अक्टूबर को खुलने की उम्मीद है। वहीं, शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को हो सकती है। हालांकि, बाजार की स्थिति को देखते हुए तारीखों में बदलाव भी हो सकता है। Jio Platforms ने इस साल जून में SEBI के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा किया था। इसके बाद SEBI ने अगस्त में IPO को मंजूरी दी। यह पब्लिक इश्यू लगभग 37,700 करोड़ रुपये का रह सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Anubhav Sinha: अनुभव सिन्हा का मिडिल एज इश्क है लखनऊ…, खाने की खुशबू बार-बार बुला लेती है शहर

Anubhav Sinha: फिल्ममेकर अनुभव सिन्हा का लखनऊ के लिए प्यार इस बात से पता चलता है कि ‘मुल्क’ (2018) की शूटिंग के बाद से उन्होंने इस शहर में तीन और फिल्में शूट की हैं – जिनमें डायरेक्टर के तौर पर ‘आर्टिकल 15’ (2019) और ‘थप्पड़’ (2020) शामिल हैं और दो फिल्में प्रोड्यूसर के तौर पर की हैं।

लखनऊ के अपने हालिया दौरे पर, ‘अस्सी’ (Assi) फिल्म के डायरेक्टर ने कहा कि “लखनऊ में कुछ तो ऐसा है, जो मुझे यहां खींच लाता है। ‘मुल्क’ की शूटिंग से पहले, मैं यहां सिर्फ दो बार आया था – वो भी ‘तुम बिन’ (2021) और उसके सीक्वल के प्रमोशन के लिए और तब से एक फिल्ममेकर के तौर पर छह फिल्में कर चुका हूं, जिसमें मेरी लेटेस्ट प्रोडक्शन फिल्म भी शामिल है।”

‘शहर ने मुझे बहुत प्यार दिया है’

फिल्ममेकर ने कहा कि “लखनऊ मेरा मिडिल एज लव है! अगर मैं इसे बांटकर देखूं तो बनारस वो जगह है जहां मैंने अपना बचपन बिताया, अलीगढ़ कॉलेज वाले दिन प्यार है और मुंबई ने मुझे इतना कुछ दिया है, जो मेरी सोच से भी परे है। अब लखनऊ है, जहां मैं काम के सिलसिले में आया था और इससे प्यार हो गया। फिर शूटिंग, इवेंट्स और प्रमोशन के लिए बार-बार आता रहा। यह शहर मुझे इतना प्यार देता है जिसे मापा नहीं जा सकता। अब मेरे इतने दोस्त और शुभचिंतक हैं कि मुझे अपनी यात्रा को सीक्रेट रखना पड़ता है।

“जब मैं लखनऊ से निकलता हूं, तो मिठाइयों से लेकर मूंगबड़ी, अचार और न जाने क्या-क्या लेकर जाता हूं! ऐसा लगता है जैसे कोई दामाद जा रहा हो… इस बार मैं 10 किलो खाने-पीने का सामान लेकर गया। पुरानी दिल्ली (Old City) की साबिर की फिरनी से लेकर नैमतखाना के खट्टे-मीठे करेले तक।”

‘बेहतरीन खाना’

खाने के शौकीन अनुभव ने कहा कि “शानदार खाने की चाहत और हेल्दी लाइफस्टाइल के बीच बैलेंस बनाना मुश्किल होता है, इसलिए जब मुझे मौका मिलता है तो मैं इसका पूरा मजा लेता हूं और फिर डाइट और वर्कआउट से उसे बैलेंस करता हूं।” लखनऊ में बहुत बढ़िया खाना मिलता है। मुझे लगता है कि वहां के लोगों को भी शायद पता नहीं है कि ऐसी जगहों पर कितना शानदार खाना मिलता ,है जो कोई विज्ञापन नहीं करतीं और जहां पारंपरिक घरों में खाना परोसा जाता है। और ऐसा सिर्फ नॉन-वेज खाने के लिए नहीं है… वहां बहुत बढ़िया वेज खाना भी मिलता है! भारत में अमृतसर, वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ जैसे कुछ शहर हैं, जहां जाने के लिए मुझे एक महीने पहले से तैयारी करनी पड़ती है।”

उन्होंने ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ फिल्म की शूटिंग भी की है, जो अभी रिलीज नहीं हुई है। इसके अलावा एक एंथोलॉजी फिल्म को प्रोड्यूस किया है, जिसे हंसल मेहता, सुधीर मिश्रा और उन्होंने खुद शूट किया था और वे अपनी मौजूदा फिल्म पर भी काम कर रहे हैं। अपनी जर्नी के दौरान उन्होंने कैंट में गायत्री स्वीट्स के समोसे, अमीनाबाद में नेतराम की कचौड़ी और खानसामों द्वारा खास तौर पर तैयार किए गए लजीज व्यंजनों का मजा लिया।

न्यूजलेटर लिखकर महिला ने खड़ा किया 2.5 करोड़ का कारोबार, फिर भी इसे बताती हैं ‘साइड हसल’; जानिए क्यों

एक छोटा सा आइडिया कब बड़ा बिजनेस बन जाए, यह कहना मुश्किल है। सैन फ्रांसिस्को की फ्रीलांस राइटर एमी सुटो ने भी शायद नहीं सोचा था कि लेखकों की मदद के लिए शुरू किया गया उनका साधारण न्यूजलेटर एक दिन करोड़ों रुपये की कमाई करने लगेगा। जून 2023 में उन्होंने लेखकों के साथ पेड काम के मौके, करियर टिप्स और राइटिंग से जुड़ी उपयोगी जानकारी शेयर करने के लिए Substack शुरू किया था। शुरुआत में यह सिर्फ दूसरे राइटर्स की मदद करने की कोशिश थी, लेकिन धीरे-धीरे पाठकों की संख्या बढ़ती गई और प्लेटफॉर्म का दायरा भी बड़ा होता गया। आज इस न्यूजलेटर से 58 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इसमें जॉब बोर्ड, राइटिंग रिसोर्स और राइटर्स की कम्युनिटी जैसी सुविधाएं भी हैं।

खास बात यह है कि इस बिजनेस को बढ़ाने के लिए एमी ने बड़े विज्ञापन खर्च का सहारा नहीं लिया। लगातार उपयोगी कंटेंट और सही ऑडियंस ने इस छोटे आइडिया को एक कमाई वाले साइड बिजनेस में बदल दिया।

लेखकों की मदद के लिए शुरू किया था न्यूजलेटर

एमी सुटो ने जून 2023 में अपना Substack न्यूजलेटर शुरू किया था। शुरुआत में उनका मकसद कोई बड़ा बिजनेस खड़ा करना नहीं था। वह अपने जैसे दूसरे लेखकों के साथ राइटिंग के मौके और काम से जुड़ी जानकारी शेयर करना चाहती थीं।

फ्रीलांस राइटर के तौर पर काम करते हुए सुटो से अक्सर दूसरे लेखक पूछते थे कि उन्हें पेड राइटिंग प्रोजेक्ट कहां से मिलते हैं। इसी जरूरत को देखते हुए उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का फैसला किया, जहां लेखकों को काम के अवसर आसानी से मिल सकें।

पेरिस के कैफे में आया बड़ा आइडिया

इस बिजनेस को आगे बढ़ाने वाला एक अहम मोड़ पेरिस में आया। एक कैफे में काम करते समय सुटो को महसूस हुआ कि उनके पास इतने प्रोजेक्ट आ रहे हैं कि वह सभी काम खुद नहीं कर सकतीं।

दूसरी तरफ क्लाइंट्स नए लेखकों के लिए उनसे संपर्क कर रहे थे। सुटो के पास इन कामों को लेने का समय नहीं था, लेकिन वह दूसरे लेखकों को इन अवसरों से जोड़ सकती थीं। यहीं से ‘Make Writing Your Job’ का आइडिया सामने आया।

2024 में जॉब बोर्ड ने बदली तस्वीर

शुरुआत में न्यूजलेटर पर राइटिंग टिप्स और करियर से जुड़ी जानकारी साझा की जाती थी। इसके बाद 2024 में सुटो ने पेड जॉब बोर्ड शुरू किया।

पहले इसमें ऐसे काम शामिल किए जाते थे, जिन्हें सुटो खुद नहीं कर पा रही थीं। बाद में उन्होंने अपने पति काइल कॉर्ड्स के साथ मिलकर इंटरनेट पर अलग-अलग जगहों से राइटिंग जॉब तलाशना शुरू किया और उन्हें सब्सक्राइबर्स तक पहुंचाया।

सिर्फ नौकरी नहीं, राइटर्स के लिए पूरा प्लेटफॉर्म

समय के साथ यह न्यूजलेटर सिर्फ जॉब लिस्ट तक सीमित नहीं रहा। इसमें राइटिंग से जुड़े मुफ्त संसाधन, लेखकों के इंटरव्यू और ‘The Guest Stack’ जैसी सीरीज भी जोड़ी गईं।

इससे पाठकों को नौकरी तलाशने के साथ-साथ नई चीजें सीखने और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अनुभव जानने का मौका मिलने लगा।

बिना बड़े विज्ञापन खर्च के बढ़ी पहुंच

सुटो ने न्यूजलेटर की ग्रोथ के लिए लगातार कंटेंट पर ध्यान दिया। वह शुरुआत से हर सप्ताह नया न्यूजलेटर प्रकाशित करती रहीं। इसके अलावा LinkedIn, Threads और Substack Notes जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए नए पाठकों तक पहुंच बनाई।

खास बात यह है कि Business Insider के अनुसार, सुटो और उनके पति ने विज्ञापन पर 100 डॉलर से भी कम खर्च किया।

58 हजार सब्सक्राइबर्स और करोड़ों की कमाई

आज इस प्लेटफॉर्म से 58 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। कमाई के लिए अलग-अलग मेंबरशिप प्लान रखे गए हैं। स्टैंडर्ड प्लान 19 डॉलर प्रति महीने का है, जबकि फाउंडिंग मेंबरशिप 550 डॉलर सालाना की है। 2025 के मध्य तक बिजनेस की सालाना कमाई छह अंकों तक पहुंच गई थी। इसके बाद रेवेन्यू दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा। अब यह वेंचर 2.63 लाख डॉलर यानी करीब 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना ग्रॉस रिकरिंग रेवेन्यू कमा रहा है।

 

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Kuku IPO: मुनाफे में आई कुकू, छह गुना उछकर रेवेन्यू पहुंचा ₹1484 करोड़ पर

Kuku IPO: आईपीओ लाने की तैयारियों में जुटी डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी कुकू टेक्नोलॉजीज के लिए पिछला वित्त वर्ष 2026 धमाकेदार रहा। माइक्रोड्रामा ऐप कुकू टीवी (Kuku TV) और ऑडियो स्टोरीटेलिंग प्लेटफॉर्म कुकू एफएम (Kuku FM) वित्त वर्ष 2026 में मुनाफे में आ गई और इसका ऑपरेटिंग रेवेन्यू छह गुना बढ़ गया। Entrackr के मुताबिक कंपनी के लेटेस्ट अनाउंसमेंट के हिसाब से FY26 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर ₹241.5 करोड़ से बढ़कर ₹1484.2 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का मार्केटिंग और विज्ञापनों पर खर्च भी करीब चार गुना बढ़कर ₹1105.1 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी ₹152.6 करोड़ के शुद्ध घाटे से ₹182.7 करोड़ के शुद्ध मुनाफे में पहुंच गई। हालांकि इस मुनाफे में ₹98.2 करोड़ का डिफर्ड टैक्स क्रेडिट है। FY26 में कंपनी का PBT (प्रॉफिट बिफोर टैक्स) ₹88.6 करोड़ रहा।

Kuku IPO: क्या है प्लान?

सबसे पहले मनीकंट्रोल ने जून में जानकारी दी थी कि कुकू का रेवेन्यू ₹1400 के पार हो गया और यह जानकारी इसके गोपनीय तरीके से दाखिल किए गए आईपीओ के ड्राफ्ट से सामने आई थी कुकू की योजना ₹15000 करोड़ के वैल्युएशन पर ₹2500-₹3500 करोड़ का आईपीओ लाने की है। इस आईपीओ के तहत नये शेयर जारी हो सकते हैं और ऑफर फॉर सेल के जरिए भी शेयरों की बिक्री हो सकती है। पिछले महीने मनीकंट्रोल ने जानकारी दी थी कि कंपनी को आईपीओ के लिए सेबी से मंजूरी मिल चुकी है।

Kuku की कैसे हुई कमाई और कहां हुआ खर्च

FY26 के कुकू के रेवेन्यू में ₹1475.4 करोड़ का हिस्सा सब्सक्रिप्शन का रहा। वर्चुअल कॉइन के जरिए कंटेंट अनलॉक करने यानी पे-पर-पीस पर्चेज से इसकी ₹6.9 करोड़ कमाई हुई तो विज्ञापनों से ₹1.9 करोड़। इसके ऑपरेटिंग रेवेन्यू में ₹1463.6 करोड़ यानी 99% हिस्सेदारी भारत की रही जबकि इंटरनेशनल बिजनेस से ₹20.5 करोड़ आए। कुकू की ऑपरेशनल कॉस्ट वित्त वर्ष 2026 में सालाना ₹8.7 करोड़ से तेजी से बढ़कर ₹96.3 करोड़ पर हो गया। इस दौरान एंप्लॉयीज बेनेफिट्स भी 24% उछलकर ₹74.1 करोड़ पर पहुंच गया। कुकू का टोटल एक्सपेंसेज तो 3.5 गुना बढ़कर ₹411 करोड़ से ₹1421.8 करोड़ पर पहुंच गया।

साल 2018 में शुरू हुआ था कुकू

कुकू को साल 2018 में लालचंद बिसू, विकास गोयल और विनोद वीना ने शुरू किया था। पिछले साल 2025 के अक्टूबर में $8.5 करोड़ की फंडिंग में इसकी वैल्यूएशन $50 करोड़ आंकी गई थी जोकि सितंबर 2023 में $17.7 करोड़ के वैल्यूएशन से लगभग तीन गुना अधिक थी। कुकू सब्सक्रिप्शन-बेस्ड माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म कुकू टीवी और स्टोरीज (StoRizz), ऑडियो स्टोरीटेलिंग प्लेटफॉर्म कुकू एफएम (Kuku FM) और माइक्रो-लर्निंग प्लेटफॉर्म गुरू (Guru) चलाती है। इसके अलावा कंपनी के पास क्यूरेटेड मूवी कंटेंट ऐप फिल्मी (Filmy) और फ्री माइक्रो-ड्रामा ऐप फ्रीड्रामा (FreeDrama) भी हैं।

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हर तरफ अमित शाह का जलवा

थोड़े दिन पहले तक हर जगह अमित शाह को खोजा जा रहा था। उनकी राजनीतिक गतिविधियां शिथिल हो गई थीं। परदे के पीछे से कुछ काम कर रहे थे तो वह अलग बात है। उसकी जानकारी लोगों को नहीं मिल रही थी। लेकिन अब हर तरफ अमित शाह ही दिखाई दे रहे हैं। वे ऐसे काम भी कर रहे हैं, जो पहले प्रधानमंत्री करते थे। यह भी कह सकते हैं कि जो काम करने का विशेषाधिकार प्रधानमंत्री का था वह भी अमित शाह कर रहे हैं। बिगबैंग के साथ अमित शाह की वापसी 13 और 14 सितंबर को महाराष्ट्र से हुई। उनके दो दिन के दौरे में खूब राजनीति हुई। उसके बाद 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के रोज वडनगर में जो कार्यक्रम हुए उसके बाद से लगातार अमित शाह का कोई न कोई कार्यक्रम हो रहा है। मुंबई से लेकर दिल्ली, नोएडा और पंजाब तक हर तरफ वे दिखाई दे रहे हैं।

दिल्ली में अमित शाह ने मंगलवार को 19 सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें एक परियोजना पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाले बारापुला रोड की भी थी। इसके उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर मंगलवार को अखबारों में जो विज्ञापन छपा उसमें ऊपर एक कोने में प्रधानमंत्री की तस्वीर थी और अमित शाह की बड़ी आदमकद तस्वीर लगी थी। ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सरकारी विज्ञापनों में सिर्फ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तस्वीर छपेगी। हालांकि सरकारें कोई न कोई लूपहोल निकाल कर दूसरे नेताओं की भी तस्वीरें छापती हैं।

लेकिन दिल्ली के इस विज्ञापन में दिखा कि पूरा कार्यक्रम अमित शाह था। उद्घाटन के बाद बुधवार के अखबारों में जो तस्वीरें हैं वो बिल्कुल उस तरह की हैं, जैसी प्रधानमंत्री मोदी की होती हैं। वे पुल या फ्लाईओवर का उद्घाटन करने के बाद जैसे उस पर चलते हैं और हाथ हिलाते हैं वैसे अमित शाह कर रहे थे। सोचें, राजधानी दिल्ली में इतने बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट का उद्घाटन था वह प्रधानमंत्री की बजाय गृह मंत्री अमित शाह ने किया!

इससे ठीक पहले नोएडा की तस्वीरें आई थीं। उत्तर प्रदेश के इंटरनेशनल ट्रेड शो का उद्घाटन अमित शाह ने किया था। कुछ दिन पहले पूछा जा रहा था कि अमित शाह उत्तर प्रदेश से क्यों दूर हैं और उनके योगी आदित्यनाथ के साथ विवाद की खबरें चल रही थीं। लेकिन शाह ने ट्रेड शो का उद्घाटन किया, योगी आदित्यनाथ की तारीफ की और अगले चुनाव में जीत का दावा किया। बहरहाल, दिल्ली के बाद अमित शाह का मुकाम पंजाब था।

वे बुधवार, 30 सितंबर को पंजाब के जालंधर पहुंचे, जहां उन्होंने एक बड़ी रैली को संबोधित किया। भाजपा ने इस रैली में एक लाख लोगों को जुटाने का दावा किया था। हालांकि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हुए हंगामे और विवाद का असर रैली पर दिखा। फिर भी पंजाब के चुनाव से पहले अमित शाह की जालंधर रैली का बड़ा मतलब है। दोआबा के इस इलाके को साधने के लिए ही कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी भी जालंधर गए थे। अमित शाह ने भाजपा की नशामुक्त पंजाब रैली का समापन किया है। सो, अमित शाह न सिर्फ पूरी तरह से कमान में दिख रहे हैं, बल्कि हर तरफ दिखाई भी दे रहे हैं।

अब बेबी फूड को लेकर तुकाराम मुंढे का बड़ा ऐक्शन, महाराष्ट्र FDA ने इन चीजों पर लगाया बैन

मुंबई। महाराष्ट्र में छोटे बच्चों के फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड को लेकर अब नियम सख्त हो गए हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने मंगलवार को आदेश जारी किया। जिसका मकसद बच्चों के खाने की क्वालिटी बेहतर रखना और माता-पिता को सही जानकारी देना है। इसके लिए FDA ने बेबी फूड की पैकेजिंग, विज्ञापन और प्रमोशन को लेकर कई नियम बनाए हैं।

लेबल से लेकर खराब प्रोडक्ट तक जारी हुए नए नियम

  • पैकेट पर “जरूरी सूचना: मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा है” लिखना होगा और छह महीने के बाद ही ऊपरी खाना देने की जानकारी देनी होगी।
  • पैकेट पर बच्चों या महिलाओं की तस्वीर नहीं लगा सकेंगे। साथ ही ‘ह्यूमनाइज्ड’, ‘मैटरनाइज्ड’, ‘कम्प्लीट फूड’ और ‘हेल्थ फूड’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी नहीं होगा।
  • पैकेट पर बच्चे को दूध पिलाने से जुड़ी जरूरी जानकारी भी साफ तौर पर देनी होगी।
  • बच्चे में साइड इफेक्ट दिखने पर हॉस्पिटल और डॉक्टरों को जानकारी देनी होगी और गंभीर मामले में कंपनी को 48 घंटे में रिपोर्ट करनी होगी।
  • कंपनियों को हर बैच का रिकॉर्ड रखना होगा और खराब प्रोडक्ट की पहचान कर उसे बाजार से वापस लेना होगा।

नए नियमों के तहत फॉर्मूला मिल्क और बेबी फूड के प्रमोशन पर रोक रहेगी। कंपनियां इनके विज्ञापन, फ्री सैंपल, गिफ्ट, कूपन या कैशबैक नहीं दे सकेंगी। सोशल मीडिया और इन्फ्लुएंसर के जरिए भी प्रमोशन की परमिशन नहीं होगी। साथ ही मेडिकल कार्यक्रम या रिसर्च के नाम पर डॉक्टरों और हॉस्पिटल्स को स्पॉन्सरशिप, गिफ्ट या दूसरी सुविधाएं देने पर भी रोक रहेगी।

नियम तोड़ने पर भरना होगा इतना जुर्माना

  • गलत विज्ञापन या बिना लाइसेंस काम करने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
  • घटिया क्वालिटी का खाना बेचने पर 5 लाख रुपये तक और गलत जानकारी के साथ प्रोडक्ट बेचने पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • ‘नो एडेड शुगर’ जैसे दावों और प्रिजर्वेटिव, कलर व फ्लेवर के इस्तेमाल में भी तय नियमों का पालन करना होगा।

लागू होंगे नियम, नहीं माने तो कार्रवाई

FDA के नए नियम फॉर्मूला मिल्क, फॉलो-अप फॉर्मूला, बेबी फूड और फीडिंग बॉटल समेत बच्चों के कई प्रोडक्ट्स पर लागू होंगे। इन नियमों में कंपनियों के साथ इंपोर्टर, डिस्ट्रीब्यूटर, दुकानदार, फार्मेसी, अस्पताल सप्लायर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भी आएंगे। तुकाराम मुंढे ने कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। इसलिए माता-पिता को प्रोडक्ट की सही जानकारी और साफ लेबल मिलना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने फूड सेफ्टी को लेकर दूसरी कार्रवाई भी की है। बुलढाणा के खामगांव में करीब 3.51 करोड़ रुपये का रिफाइंड सोयाबीन तेल जब्त किया गया। वहीं मुंबई-नासिक रूट पर पालघर से कसारा घाट के बीच करीब 1.26 करोड़ रुपये का प्रतिबंधित गुटखा भी पकड़ा गया।

कानपुर में 96 करोड़ की लागत से तैयार हुआ पहला कन्वेंशन सेंटर, लेदर और टेक्सटाइल हब को मिला नया मंच, जानिए खासियतें

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी कानपुर के उद्यमियों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। शहर में पहला भव्य कन्वेंशन सेंटर बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है, जो यहां के औद्योगिक कारोबार को एक नई वैश्विक पहचान देने जा रहा है। 96.10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह कन्वेंशन सेंटर महज एक भव्य इमारत नहीं है, बल्कि कानपुर के लेदर, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और प्लास्टिक जैसे तमाम बड़े उद्योगों के लिए व्यापार विस्तार का एक नया और विशाल प्लेटफॉर्म साबित होगा।

अब तक कानपुर में ऐसी किसी आधुनिक संरचना का अभाव था, जहां बड़े स्तर के ट्रेड फेयर, एक्सपो, प्रोडक्ट लॉन्च, बिजनेस कॉन्फ्रेंस और B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) मीटिंग्स का आयोजन एक साथ किया जा सके। इसके चलते स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पादों की नुमाइिश लगाने या विदेशी खरीदारों से बैठक करने के लिए दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। अब इस कन्वेंशन सेंटर के शुरू होने से कानपुर के व्यापारियों को देश-विदेश के सप्लायरों, डीलरों, निवेशकों और खरीदारों को सीधे अपने ही शहर में आमंत्रित करने का शानदार मौका मिलेगा।

एक्सपो से लेकर B2B मीटिंग तक, कानपुर बनेगा नया बिजनेस डेस्टिनेशन

कानपुर की पहचान लंबे समय से मैन्युफैक्चरिंग और प्रोडक्शन के एक मजबूत केंद्र के रूप में रही है, लेकिन बड़े व्यावसायिक आयोजनों के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी हमेशा खटकती थी। यह नया कन्वेंशन सेंटर इसी कमी को हमेशा के लिए दूर करने का काम करेगा।

इस सेंटर में अब लेदर फेयर, फुटवियर एक्सपो, टेक्सटाइल शो, इंजीनियरिंग व मशीनरी प्रदर्शनी, स्टार्टअप इवेंट्स, निवेशक सम्मेलन और कॉर्पोरेट B2B मीटिंग्स का आसानी से संचालन किया जा सकेगा। इससे एक ही छत के नीचे उत्पादों के प्रदर्शन, खरीदारों से संवाद और मौके पर ही कारोबारी सौदे फाइनल करने का पूरा सिस्टम काम करेगा। विशेष रूप से निर्यात आधारित (एक्सपोर्ट ओरिएंटेड) उद्योगों के लिए यह व्यवस्था कारगर साबित होगी, क्योंकि विदेशी बायर्स अब सीधे कानपुर आकर उत्पादों की गुणवत्ता देख सकेंगे और नए ऑर्डर दे सकेंगे।

होटल से लेकर ट्रांसपोर्ट तक, पूरे सर्विस सेक्टर को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ

कन्वेंशन सेंटर का सकारात्मक प्रभाव केवल एक्सपो लगाने वाले उद्योगपतियों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका बड़ा आर्थिक लाभ शहर के पूरे सर्विस सेक्टर को मिलेगा। जब देश और दुनिया भर से खरीदार, उद्यमी और व्यापारी आयोजनों में शामिल होने कानपुर आएंगे, तो शहर के होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी और ट्रांसपोर्ट सेवाओं की मांग में भारी उछाल आएगा।

इसके साथ ही इवेंट मैनेजमेंट, प्रिंटिंग, विज्ञापन और स्थानीय खान-पान से जुड़ी गतिविधियों को भी अतिरिक्त काम मिलेगा। यह कन्वेंशन सेंटर एक तरफ जहां स्थानीय उद्योगों को सीधा बाजार उपलब्ध कराएगा, वहीं दूसरी तरफ अप्रत्यक्ष रूप से कानपुर की पूरी अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को मजबूत गति प्रदान करेगा।

औद्योगिक विकास का मील का पत्थर: जानिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की राय

काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट के वाइस चेयरमैन मुख्तारुल अमीन ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह कन्वेंशन सेंटर कानपुर की औद्योगिक ग्रोथ के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानपुर में विभिन्न क्षेत्रों के उद्योग बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं, लेकिन अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विदेशी खरीदारों से सीधे संवाद के लिए शहर में ऐसी आधुनिक सुविधा नहीं थी। अब कन्वेंशन सेंटर शुरू होने से उद्योगों को अपने ही घर में एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय मंच मिल गया है।

कानपुर मंडल के मंडलायुक्त एवं डायरेक्टर ऑफ इंडस्ट्रीज विजयंत पांडियन ने बताया कि कन्वेंशन सेंटर के बन जाने से शहर में बड़े एक्सपो और बिजनेस मीट आयोजित करने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने कहा कि शहर को लंबे समय से इस तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर की दरकार थी। हालांकि सेंटर के निर्माण के बाद इसके संचालन की प्रक्रियाओं में थोड़ा समय लगा, लेकिन अब इसके शुरू होने से उद्यमियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी बड़ा फायदा मिलेगा और दूसरे बड़े शहरों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है कानपुर का कन्वेंशन सेंटर

96.10 करोड़ रुपये की परियोजना लागत से तैयार यह कन्वेंशन सेंटर विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस है। इसमें प्रदर्शनियों के लिए 16000 वर्गफुट और 12000 वर्गफुट के दो विशाल प्रदर्शनी हॉल बनाए गए हैं। इसके अलावा 300 लोगों की क्षमता वाला एक कॉन्फ्रेंस हॉल और 100-100 लोगों की क्षमता वाले 3 अलग-अलग मीटिंग रूम तैयार किए गए हैं।

बाहर से आने वाले विशेष मेहमानों और कारोबारियों के ठहरने के लिए परिसर में ही 6 अतिथि कमरे और 2 लग्जरी सुइट डेवलप किए गए हैं। खान-पान की बेहतरीन व्यवस्था के लिए 8,000 वर्गफुट में फैला एक बड़ा फूड कोर्ट बनाया गया है, जबकि वाहनों की सुविधा के लिए 68 गाड़ियों की क्षमता वाली कवर्ड पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। एक्सपो, ट्रेड फेयर, बिजनेस मीटिंग, कॉन्फ्रेंस और प्रोडक्ट लॉन्च जैसे बड़े आयोजनों के लिए अब यह केंद्र कानपुर की नई पहचान बनने जा रहा है।

(कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट)

Sanjay Gupta: एंटी-स्मोकिंग विज्ञापनों का क्या? संजय गुप्ता ने रणबीर कपूर, रणवीर सिंह से लेकर विक्की कौशल के स्मोकिंग वाले पोस्टर्स पर उठाए सवाल

Sanjay Gupta: फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने बॉलीवुड में हीरो की ऑन-स्क्रीन इमेज और खासकर पोस्टर्स में स्मोकिंग के लगातार इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। रविवार को डायरेक्टर ने संदीप रेड्डी वांगा की ‘एनिमल’ में रणबीर कपूर, आदित्य धर की ‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह और संजय लीला भंसाली की ‘लव एंड वॉर’ में विक्की कौशल के पोस्टर्स शेयर किए, जिनमें तीनों एक्टर्स अपने-अपने लुक्स में स्मोकिंग करते हुए दिख रहे हैं।

X पर उन्होंने क्या कहा

संजय ने रविवार को X पर तीनों एक्टर्स का एक कोलाज शेयर किया। उनकी पोस्ट में उन एंटी-स्मोकिंग मैसेज पर सवाल उठाया गया, जो दर्शकों को थिएटर में फिल्मों से पहले और फिल्म के दौरान दिखाए जाते हैं, जबकि पोस्टर्स पर स्मोकिंग की इजाजत होती है। उन्होंने पूछा, “जब फिल्मों के पोस्टर्स ऐसे होते हैं तो फिल्मों से पहले और बीच में दिखाए जाने वाले उन बुरे एंटी-स्मोकिंग रील्स का क्या मतलब है, जिन्हें हमें झेलना पड़ता है?”

इस पोस्ट के बाद कमेंट्स में चर्चा शुरू हो गई। एक यूजर ने गुप्ता की 2002 की फिल्म ‘कांटे’ का जिक्र किया और फिल्म के एक गाने की ओर इशारा किया, जिसमें स्मोकिंग का जिक्र है। यूजर ने लिखा, “हैरानी की बात है कि यह बात ‘कांटे’ फिल्म के डायरेक्टर कह रहे हैं, जिसकी एक फिल्म में गाना है – ‘सिगरेट के धुएं का छल्ला बनाकर, कॉलर को थोड़ा सा ऊपर चढ़ाकर’… कितनी अजीब बात है।”

उन्होंने सीधे उस कमेंट का जवाब देते हुए कहा कि उस समय स्मोकिंग से जुड़े नियम और लोगों तक पहुंचाए जाने वाले मैसेज अलग थे। उन्होंने लिखा, “तब स्मोकिंग न करने वाले विज्ञापन नहीं होते थे, जीनियस।”

इंटरनेट पर चर्चा हो गई शुरू

कई अन्य यूजर्स भी चर्चा में शामिल हुए और फिल्मों में स्मोकिंग के इस्तेमाल को लेकर फिल्ममेकर की चिंता से सहमत दिखे। एक व्यक्ति ने इस स्थिति की तुलना स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखते समय दर्शकों को दिखाई जाने वाली वॉर्निंग से की और लिखा, “यह एक मजाक है, यह नेटफ्लिक्स और एप्पल पर शो देखने और शराब पीने के बारे में वॉर्निंग मिलने जैसा है।”

एक अन्य यूजर ने भारतीय सिनेमा में सिगरेट और मर्दानगी के बीच बार-बार दिखाए जाने वाले संबंध पर सवाल उठाया। कमेंट में लिखा था, “क्योंकि इन लोगों को लगता है कि सिगरेट ही वो चीज है जो किसी आदमी को मर्दाना दिखाती है। यह क्रिएटिविटी की कमी है। भारत की सभी फिल्म इंडस्ट्रीज ‘मर्दानगी की चापलूसी’ का शिकार हैं। कंटेंट, कहानी और क्रिएटिविटी भाड़ में जाए।” एक और यूजर ने उनकी बात का समर्थन करते हुए लिखा, “पूरी तरह सहमत हूं, बिल्कुल सही बात है।”

CBFC के नए नियम

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब फिल्मों में नशीले पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर नियम कड़े किए जा रहे हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने स्क्रीन पर क्या दिखाया जा सकता है और कुछ विषयों को कैसे दिखाया जाना चाहिए, इसके लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर को सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत इन नए नियमों की घोषणा की। इन नियमों के तहत, नशीले पदार्थों को दिखाने वाली फिल्मों में ड्रग्स के ख़िलाफ चेतावनी दिखाना जरूरी कर दिया गया है। साथ ही, हिंसा, संवेदनशील विषयों और ऐसे कंटेंट पर पाबंदियों को भी दोहराया गया है, जो दूसरे देशों के साथ भारत के रिश्तों पर असर डाल सकते हैं। ये बदलाव केंद्र सरकार द्वारा 18 सदस्यों वाले नए बोर्ड के साथ CBFC के पुनर्गठन के साथ ही किए गए हैं।

सबसे बड़े बदलावों में से एक है उन फिल्मों के लिए जरूरी चेतावनी का नियम, जिनमें नशीले पदार्थों या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी को दिखाया जाता है। ऐसे दृश्यों में अब स्क्रीन पर यह संदेश दिखाना होग-: “अवैध नशीले पदार्थ सेहत को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”

कोई कानून से ऊपर नहीं… सेलिब्रिटी और स्टार्स के लिए FDA चीफ तुकाराम मुंढे ने फिर कह दी सीरियस बात

22 सितंबर को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मशहूर फिल्म आर्टिस्ट की जिम्मेदारी पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि पॉपुलर आर्टिस्ट का युवाओं की सोच पर गहरा असर होता है। उनके मुताबिक, एक सच्चे स्टार को समाज में अच्छी सोच और पॉजिटिविटी फैलाने की कोशिश करनी चाहिए।

तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया पर रखा अपना पक्ष

राष्ट्रपति की अपील के बाद तुकाराम मुंडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि आर्टिस्ट का लोगों पर असर होना अच्छी बात है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह कानून का उल्लंघन करें। उन्होंने आर्टिस्ट से कहा कि उन्हें अपने प्रभाव का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए और ऐसे उत्पादों या आदतों का प्रचार नहीं करना चाहिए, जो लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

महाराष्ट्र में जारी हो चुके हैं नोटिस

मुंडे ने बताया कि महाराष्ट्र में FDA पहले ही कुछ ऐसे आर्टिस्ट को नोटिस जारी कर चुका है। उन्होंने बताया कि जब किसी पॉपुलर चेहरे का इस्तेमाल खाने-पीने या दूसरे उत्पादों के प्रचार के लिए किया जाता है, तो उसके स्वास्थ्य से जुड़े असर को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

महाराष्ट्र FDA ने अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किए थे। आर्टिस्ट ने विमल इलायची का विज्ञापन किया था। FDA का कहना था कि यह विज्ञापन प्रतिबंधित विमल पान मसाला के सरोगेट प्रमोशन का है। जिसके कारण आर्टिस्ट के विज्ञापन को लेकर कार्रवाई की गई थी।

मुंडे ने कहा कि किसी आर्टिस्ट की पॉपुलैरिटी उसे कानून से ऊपर नहीं बनाती। उनके मुताबिक, कलाकारों को भी दूसरे लोगों की तरह कानून का पालन करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि उनके प्रचार का लोगों की पसंद और आदतों पर असर पड़ सकता है। खासकर खाने-पीने की चीजों के प्रचार में लोगों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।