“महिलाएं क्या पहनती हैं, क्या करती हैं…” रक्षा बंधन ऐड को लेकर ट्रोल हो रही कृति सेनन के सपोर्ट में आए राहुल गांधी

Kriti Sanon Controversy: रक्षाबंधन के एक विज्ञापन में कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना कर रहीं कृति सेनन के सपोर्ट में आए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक बयान शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि किसी महिला के कपड़ों और उसकी जीवनशैली को लेकर सोशल मीडिया पर निगरानी या रोक-टोक नहीं की जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने लिखा, “महिलाएं क्या पहनती हैं, क्या करती हैं और कहां जाती हैं – यह उनकी अपनी पसंद है। अपनी आजादी का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं को ट्रोल करना बंद करें।”

आलोचना पर कृति सेनन का जवाब

कृति सेनन ने मंगलवार को ही इस आलोचना का जवाब दिया था। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी महिला के कपड़ों से ही उसकी संस्कृति के प्रति सम्मान को क्यों आंका जाता है।

सेनन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर शेयर किए गए एक नोट में कहा, “संस्कृति और परंपराएं दिल में होती हैं, कपड़ों की नेकलाइन में नहीं!… और हम महिलाओं को यह बताना कब बंद करेंगे कि उन्हें क्या पहनना चाहिए?”

उन्होंने आगे कहा कि एथनिक फैशन में समय के साथ बदलाव आया है, लेकिन जब सांस्कृतिक परंपराओं की बात आती है, तो महिलाओं को अक्सर उनके कपड़ों के आधार पर आंका जाता है।

कृति सेनन की यह प्रतिक्रिया एक ज्वेलरी ब्रांड के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर हुई ऑनलाइन आलोचना के एक दिन बाद आई।

कंगना रनौत ने भी प्रतिक्रिया दी

इस विवाद पर एक्टर और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी प्रतिक्रिया दी और विज्ञापन में सानन की पोशाक की आलोचना की।

विज्ञापन में सानन राखी बांधते हुए आइवरी रंग का ब्रैलेट और स्कर्ट पहने और साथ में केप ओढ़े हुए दिखाई देती हैं। रनौत ने सोशल मीडिया पोस्ट में इस लुक को “जानबूझकर अजीब” बताया।

कृति सेनन ने उस विज्ञापन के बारे में क्या कहा?

विज्ञापन का बचाव करते हुए सेनन ने कहा कि त्योहारों का महत्व कपड़ों के बजाय परंपराओं से जुड़ी भावनाओं और मूल्यों के जरिए समझा जाना चाहिए।

उन्होंने लिखा, “संस्कृति और परंपराएं दिल में होती हैं, कपड़ों के गले के डिजाइन में नहीं!”

सेनन ने अपने परिवार के लिए रक्षाबंधन के महत्व के बारे में भी बताया और कहा कि यह त्योहार भाई-बहनों के बीच सुरक्षा के बंधन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “रक्षाबंधन सुरक्षा का बंधन है। मैं और मेरी बहन एक-दूसरे को राखी बांधते हैं। हम जानते हैं कि हम एक-दूसरे की सुरक्षा वैसे ही कर सकते हैं जैसे कोई भाई करता।”

उन्होंने आगे कहा कि वह और उनकी बहन एक-दूसरे की सेहत, खुशी और लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करते हैं, और यही भावना उनके पालतू जानवरों के लिए भी है।

सेनन ने कहा, “आखिरकार, वे भी परिवार का ही हिस्सा हैं।”

विज्ञापन में सेनन को अपने भाई की कलाई पर राखी बांधते हुए दिखाया गया है, जबकि उनका पालतू कुत्ता उन्हें देख रहा है। बाद में वह कुत्ते के पैर पर भी एक राखी बांधती हैं।

विज्ञापन की आलोचना क्यों हुई?

इस विज्ञापन के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने सेनन के पहनावे की आलोचना करते हुए कहा कि पारंपरिक त्योहार के हिसाब से यह ठीक नहीं था। वहीं, कुछ लोगों ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि विज्ञापन में एक्ट्रेस एक कुत्ते को राखी बांध रही थीं।

इस आलोचना के कारण विज्ञापन का फोकस त्योहार के संदेश से हटकर महिलाओं के पहनावे, सांस्कृतिक परंपराओं और निजी पसंद से जुड़ी व्यापक बहस पर केंद्रित हो गया।

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क्या कोई प्राइवेट कंपनी आपके ITR और EPFO डेटा को एक्सेस कर सकती है? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है

क्या प्राइवेट कंपनियां आपका इनकम टैक्स रिटर्न या प्रोविडेंट फंड रिकॉर्ड एक्सेस कर सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उन आरोपों की जांच करने को कहा है जिनमें यह कहा गया है कि प्राइवेट वेरिफिकेशन कंपनियां लोगों के एंप्लॉयमेंट और फाइनेंशियल जानकारियां एक्सेस कर रही हैं और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रही हैं।

आईटीआर और ईपीएफओ को डेटा को संवेदनशील माना जाता है

सरकार ने एक जनहित याचिका पर यह निर्देश जारी किया है। इस याचिका में कहा गया है कि एक ऐसा कमर्शियल ईकोसिस्टम बना है, जिसमें EPFO/UAN Records और PAN से जुड़े फाइनेंशियल डेटा को प्राइवेट कंपनियां एक्सेस कर रही हैं। ऐसे डेटा को काफी संवेदनशील माना जाता है।

याचिकाकर्ता ने प्राइवेट कंपनियों के डेटा के एक्सेस पर सवाल उठाए हैं

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि किसी कंपनी को ऐसी जानकारियां गैरकानूनी तरीके से एक्सेस करते नहीं पाया है। उसने यह भी नहीं कहा है कि प्राइवेट कंपनियों के पास लोगों के आईटीआर और ईपीएफओ रिकॉर्ड के इस्तेमाल की आजादी है। लेकिन, इस याचिका से एक बड़ा मसले को लेकर सवाल उठे हैं, जो करोड़ों भारतीयों से जुड़ा है।

डेटा एक्सेस के मसले से जुड़े तीन अहम सवाल सामने आए हैं

इस मसले से जुड़े कई सवाल हैं। पहला, सरकारी एजेंसियों के पास लोगों की जो व्यक्तिगत जानकारियां हैं, उनमें से किन जानकारियों का इस्तेमाल प्राइवेट कंपनियां कर सकती हैं? दूसरा, उनके इस्तेमाल का तरीका क्या होगा? तीसरा, क्या वे व्यक्ति विशेष से उसकी इन जानकारियों के इस्तेमाल की इजाजत लेती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत जानकारियों के इस्तेमाल पर चिंता जताई है

सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियों के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। उसने सरकार से इस मामले की जांच करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि सरकार इस समस्या पर लगाम लगाने के तरीके पर विचार कर सकती है। वह इस फील्ड के एक्सपर्ट्स की मदद ले सकती है।

याचिकाकर्ता ने कुछ प्राइवेट सर्विसेज के एडवर्टाइजमेंट पर सवाल उठाए हैं

याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में उन प्राइवेट सर्विसेज का जिक्र किया है, जो कथित रूप से ‘ईपीएफओ पासबुक एपीआई’, ‘फॉर्म26 एपीआई’ और ‘इनकम टैक्स रिटर्न एपीआई’ जैसे प्रो़क्ट्स का विज्ञापन देती हैं। उन्होंने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि ऐसी संवेदनशील जानकारियां कैसे हासिल या वेरिफाय की जा रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय फर्टिलिटी टूरिज्म में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा:ब्रिटेन के 30 परिवारों ने यूरोपीय डोनर चुने, बच्चों का डीएनए तुर्किये व अन्य देशों से मिला

ब्रिटेन से मेडिकल टूरिज्म के तहत उत्तरी साइप्रस में आईवीएफ कराने वाले ब्रिटेन के 30 परिवारों के साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई। आरोप है कि आईवीएफ क्लिनिक ने उनकी पसंद के स्पर्म-एग डोनर इस्तेमाल करने का दावा किया था, लेकिन 11 बच्चों के डीएनए टेस्ट से पता चला कि ये उन स्पर्म-एग डोनर के नहीं हैं, जिसे उनके माता-पिता ने चुना था। आईवीएफ से पैदा इन बच्चों का डीएनए तुर्किये और अरब देशों के लोगों के डीएनए से मिल रहा है, जबकि उनके माता-पिता ने फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड्स, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिम यूरोपीय देशों के पूरी तरह से स्क्रीन किए गए और स्वस्थ डोनर्स को चुना था। बीबीसी की खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, इस अंतरराष्ट्रीय घोटाले के लगभग आधे मामले अकेले ‘डोगस आईवीएफ सेंटर’ से सामने आए हैं। दुनिया के सबसे बड़े स्पर्म बैंक ‘क्रायोस इंटरनेशनल’ ने स्पष्ट किया है कि उसने 2016 में ही डोगस क्लिनिक को ब्लैकलिस्ट कर दिया था और वहां कभी स्पर्म की सप्लाई ही नहीं की। इसके बावजूद क्लिनिक सालों तक क्रायोस के साथ अपने आधिकारिक जुड़ाव का झूठा विज्ञापन देकर संतान चाहने वाले जोड़ों को ठगता रहा। निजी डेटा की अनदेखी – माता-पिता ने डोनर की मेडिकल हिस्ट्री, रूप-रंग, शिक्षा और शौक के आधार पर चयन किया था, ताकि बच्चा 18 साल की उम्र में अपने जैविक मूल को जान सके। फर्जी डोनर के इस्तेमाल से बच्चों के मूलभूत मानवाधिकारों का हनन हुआ है। ब्रिटिश फर्टिलिटी सोसाइटी के अनुसाार, 30 से अधिक बच्चों के मामलों में ऐसा होना एक संगठित आपराधिक नेटवर्क, गंभीर लापरवाही और संस्थागत धोखाधड़ी है। उत्तरी साइप्रस तुर्किये के कब्जे में है और कानून लचर हैं। वैश्विक फर्टिलिटी रिपोर्ट्स और मेडिकल टूरिज्म डेटा के अनुसार, सस्ता होने से हर साल 5-8 हजार विदेशी जोड़े आईवीएफ ट्रीटमेंट के लिए नार्दन साइप्रस आते हैं और पिछले 10 वर्षों में 50,000 से 70,000 विदेशी नागरिकों ने नॉर्दन साइप्रस के क्लिनिकों में आईवीएफ ट्रीटमेंट कराया है। इनमें बड़ी संख्या ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस के लोगों की है। रैचेल का दावा – 13 साल बाद डीएनए टेस्ट से शक पक्का हुआ रिपोर्ट में रैचेल नाम की एक मां का केस बताया गया है। रैचेल ने 2012 में डोगस में करीब 4.43 लाख रु. में आईवीएफ कराया। रैचेल ने क्रायोस वेबसाइट से डेनमार्क के एक डोनर को चुना था। प्रोफाइल में लिखा था कि 18 साल बाद बच्चा चाहे तो डोनर की पहचान जान सकता है। रैचेल का कहना है कि क्लिनिक ने बार-बार मेडिकल रिपोर्ट भेजने से इनकार किया, जिससे शक बढ़ा। अब डीएनए टेस्ट से यह सामने आया कि जोना उनका बायोलॉजिकल बेटा है, लेकिन चुना गया डोनर उसका पिता नहीं है। रैचेल ने कहा कि दुख यह है कि जोना भविष्य में अपने डोनर से संपर्क का मौका खो सकता है।

CM Yogi: योगी सरकार का बड़ा ऐलान, यूपी में 6 महीने में 1 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा अपडेट दिया है। मंगलवार को लखनऊ में अपॉइंटमेंट लेटर वितरण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि सरकार अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देगी। ये नियुक्तियां अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री के बताया, 2017 से अब तक राज्य में 9.3 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी रोजगार मिल चुका है। उन्होंने कहा कि इन भर्तियों में प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और बिना भेदभाव के चयन पर जोर दिया गया है।

6 महीने में मिलेंगे 1 लाख युवाओं को नौकरी

सीएम योगी ने कहा कि, “मैं प्रदेश के युवाओं को आश्वस्त कर रहा हूं कि अगले 6 महीनों में 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। ये नियुक्ति पत्र अलग-अलग चरणों में हर सप्ताह बांटे जाएंगे।” सीएम योगी ने कहा, “उनकी सरकार के कार्यकाल में अब तक उत्तर प्रदेश के 9.30 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखा गया है। इन नियुक्तियों में किसी तरह की अनियमितता या भेदभाव की गुंजाइश नहीं रखी गई है।”

पिछली सरकार पर साधा निशाना

सीएम योगी ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, 2017 से पहले सरकारी भर्तियों में युवाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली लोग पूरे प्रदेश में वसूली करते थे। योगी ने बिना किसी का नाम लिए ‘चाचा-भतीजा’ और ‘पूरा परिवार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पिछली व्यवस्था पर सवाल उठाए।

जीरो टॉलरेंस की नीति पर कर रही काम

उन्होंने कहा कि, ‘उस समय युवा भर्ती के नतीजों का इंतजार करते रह जाते थे और कई मामलों में अदालत को नियुक्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। इससे युवाओं का समय और मेहनत दोनों बर्बाद होते थे।’ मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘इसके लिए युवाओं को नहीं, बल्कि उस समय भर्ती व्यवस्था से जुड़े भ्रष्ट अधिकारियों, बोर्डों, आयोगों और नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि ‘हमारी सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। साथ ही, नकल माफिया और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अब सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि युवाओं को बिना किसी भेदभाव के समय पर नौकरी दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।

Vishal Mega Mart Share Price: गिरते बाजार में हाइपरमार्केट चेन का शेयर 11% भागा, MD गुनेंदर कपूर के रीअपॉइंटमेंट से ​निवेशक खुश

हाइपरमार्केट चेन विशाल मेगा मार्ट के शेयरहोल्डर्स के लिए 24 अगस्त का दिन बेहद अच्छा बीत रहा है। शेयर की कीमत में दिन में 11 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। बीएसई पर भाव 115.40 रुपये के हाई तक गया। कंपनी ने शुक्रवार, 21 अगस्त को बाजार बंद होने के बाद जानकारी दी थी कि उसके मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) गुनेंदर कपूर को अगले 5 सालों के लिए रीअपॉइंट किया गया है। उनका नया कार्यकाल 1 सितंबर 2026 से शुरू होगा और 31 अगस्त 2031 तक रहेगा।

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि कपूर को 27 जून 2024 को 3 साल के लिए विशाल मेगा मार्ट का MD और CEO नियुक्त किया गया था। उनका मौजूदा कार्यकाल 26 जून 2027 को खत्म हो रहा है। उनके रीअपॉइंटमेंट पर अभी शेयरहोल्डर्स की मंजूरी लिया जाना बाकी है।

शेयर एक साल में 25 प्रतिशत गिरा

विशाल मेगा मार्ट दिसंबर 2024 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 8000 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 52900 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक साल में 25 प्रतिशत नीचे आया है। साल 2026 में अब तक यह 16 प्रतिशत की गिरावट देख चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 40.09 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 157.75 रुपये और निचला स्तर 98.70 रुपये है।

Urban Company Share Price: केंट RO हटाएगी Native वॉटर प्योरिफायर की बुराई वाले विज्ञापन, शेयर 7% तक उछला

कंपनी की वित्तीय सेहत

कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,887.31 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 173.19 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 37 लाख रुपये दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026 के दौरान विशाल मेगा मार्ट का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 6,631.38 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 656 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 1.41 करोड़ रुपये रही।

जून तिमाही में विशाल मेगा मार्ट ने 24 नए स्टोर खोले, जिससे इसके कुल स्टोर्स की संख्या 819 हो गई। कंपनी ने अपनी क्विक-कॉमर्स पहल का विस्तार 520 शहरों में 767 स्टोर तक किया है। इसके रजिस्टर्ड यूजर्स की संख्या 1.41 करोड़ है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Urban Company Share Price: केंट RO हटाएगी Native वॉटर प्योरिफायर की बुराई वाले विज्ञापन, शेयर 7% तक उछला

होम सर्विसेज देने वाली अर्बन कंपनी के शेयरों में 24 अगस्त को अच्छी तेजी है। BSE पर शेयर की कीमत शुरुआती कारोबार में पिछले बंद भाव से 6.8 प्रतिशत तक उछलकर 169.45 रुपये के हाई तक गई। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 25900 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इस उछाल की अहम वजह है- कंपनी और केंट RO सिस्टम के बीच हुए विवाद का नतीजा और UBS की ओर से ‘बाय’ रेटिंग के साथ शुरू किया गया कवरेज। दरअसल अर्बन कंपनी ने केंट RO सिस्टम के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि और अपमानजनक प्रचार का केस दायर किया था।

कंपनी का आरोप था कि Kent RO के विज्ञापनों और सोशल मीडिया कंटेंट में उसके ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर्स के बारे में गलत और गुमराह करने वाले दावे किए गए। मुकदमेबाजी के बाद केंट ने कहा है कि वह ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर के बारे में अपमानजनक विज्ञापन हटा लेगी।

Urban Company ने शेयर बाजारों को बताया है कि उसने 11 अगस्त को यह केस दायर किया था। आरोप लगाया कि Kent RO का विज्ञापन कैंपेन उसके ‘Native’ M0, M1, M2, M1 Pro और M2 Pro वॉटर प्योरिफायर की दो साल की फिल्टर लाइफ और दो साल की सर्विस लाइफ वाली खूबियों को निशाना बना रहा है। Kent RO के विज्ञापनों में इन खूबियों को “मार्केटिंग का हथकंडा” बताया गया और दावा किया गया कि ग्राहकों के लिए ‘Native’ वॉटर प्योरिफायर का इस्तेमाल असुरक्षित और जोखिम भरा है।

12 अगस्त को हुई हाई कोर्ट में सुनवाई

इस मामले की सुनवाई 12 अगस्त को हाई कोर्ट में हुई। Kent RO से कहा गया कि वह 15 दिनों के अंदर विवादास्पद विज्ञापन और सोशल मीडिया कंटेंट हटा ले। इसके बाद Kent RO ने कहा कि वह केस से जुड़े विज्ञापनों को हटा लेगी और ऐसे ही या मिलते-जुलते दावे करने वाले दूसरे विज्ञापन या प्रमोशनल कंटेंट नहीं चलाएगी।

अर्बन कंपनी भारत, UAE, सिंगापुर और सऊदी अरब में एक मल्टी कैटेगरी होम सर्विस प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करती है। इसके प्लेटफॉर्म पर क्लीनिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिक वर्क, अप्लायंसेज रिपेयर, ब्यूटी ट्रीटमेंट और मसाज थेरेपी जैसी सर्विसेज मिलती हैं। इसका InstaHelp वर्टिकल बुकिंग के 10-15 मिनट के अंदर सफाई, बर्तन धोने, कपड़े धोने और खाना बनाने के लिए लोग मुहैया कराने जैसी सर्विसेज देता है।

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UBS ने Urban Company पर दी ‘बाय’ रेटिंग

अर्बन कंपनी 17 सितंबर 2025 को ​लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,900.24 करोड़ रुपये का था। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 19.02 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। ब्रोकरेज फर्म UBS ने इस शेयर पर कवरेज शुरू किया है और इसे “बाय” रेटिंग दी है। टारगेट प्राइस 180 रुपये प्रति शेयर रखा है। मॉर्गन स्टेनली ने स्टॉक की रेटिंग को “अंडरवेट” से डबल अपग्रेड कर सीधा “ओवरवेट” कर दिया है। टारगेट प्राइस 128 रुपये से बढ़ाकर 165 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी को कंसोलिडेटेड बेसिस पर 92.12 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। एक साल पहले कंपनी 6.94 करोड़ रुपये के मुनाफे में थी। जून 2026 तिमाही में ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 43.85 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 528.34 करोड़ रुपये रहा।

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Kriti Sanon: क्या वे इसे ईद के एड पर पहनेंगी? रक्षाबंधन के विज्ञापन में ब्रालेट टॉप पहने दिखीं कृति सेनन पर भड़के लोग

Kriti Sanon Rakshabandhan ad: कृति सेनन को रक्षाबंधन के ज्वेलरी विज्ञापन में एक फ्यूजन आउटफिट (जिसमें ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी) पहनने के बाद ऑनलाइन काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। जहां कुछ यूज़र्स ने इस लुक को त्योहार के कैंपेन के लिए गलत बताया, वहीं दूसरों ने एक्ट्रेस का बचाव करते हुए कहा कि महिलाओं को उनके पहनावे के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए।

विज्ञापन में कृति को एक कुत्ते को राखी बांधते हुए भी दिखाया गया है, जो उन पर भौंकता है। त्योहार में पालतू जानवर को शामिल करने का यह आइडिया कुछ लोगों को पसंद नहीं आया, जबकि अन्य लोगों ने उनके आउटफिट पर ध्यान दिया और सवाल उठाया कि क्या यह रक्षाबंधन के लिए सही था।

कृति सेनन को क्यों ट्रोल किया जा रहा है?

ऐड के ऑनलाइन शेयर होने के बाद कृति की ड्रेस चर्चा का मुख्य विषय बन गई। कुछ यूजर्स को लगा कि रक्षाबंधन से जुड़े कैंपेन के लिए उनका ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज कुछ ज्यादा ही रिवीलिंग था, जबकि दूसरों का कहना था कि यह आलोचना असल में महिला के कपड़ों पर रोक-टोक करने जैसा है।

एक और व्यक्ति ने ‘आदिपुरुष’ की एक्ट्रेस के खिलाफ शिकायत की मांग की। उन्होंने कहा, “भाई-बहन के त्योहार राखी को गलत तरीके से दिखाने और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए @kritisanon के खिलाफ BNS की धारा 299 के तहत FIR दर्ज की जानी चाहिए—इसमें विजुअल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने वाले जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्यों के लिए 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।”

एक और यूजर ने कहा, “लड़के ने पूरे पारंपरिक कपड़े क्यों पहने हैं?? उसे भी जिम वेस्ट पहननी चाहिए थी। लोग मौके के हिसाब से कपड़े पहनते हैं, यह तो आम समझ की बात है। यह रक्षाबंधन है किसी की प्राइवेट पार्टी नहीं।” कुछ आलोचनाओं में धर्म का मुद्दा भी उठाया गया। यूजर्स ने सवाल किया कि क्या ईद या क्रिसमस जैसे त्योहारों पर भी ऐसे कपड़ों को स्वीकार किया जाता।

कृति सेनन के फैन्स उनके समर्थन में आए

हर कोई इस आलोचना से सहमत नहीं था। कई यूजर्स कृति के बचाव में भी उतरे और कहा कि उनकी ड्रेस पारंपरिक त्योहारों के कपड़ों का एक आधुनिक रूप थी, न कि कुछ अनुचित। एक यूजर ने लिखा, “हर कोई कृति सेनन को इस GIVA ऐड के लिए ट्रोल कर रहा है और कह रहा है कि उन्होंने ‘बिकिनी’ पहनी है। क्या सच में? नहीं। उन्होंने कुछ भी गलत या अश्लील नहीं पहना है। हो सकता है कि उनका पहनावा ‘शालीनता’ की आपकी परिभाषा में फिट न बैठता हो। मैं भी अपने भाई के सामने ऐसे कपड़े पहन सकती हूं। जो लोग फिल्मों में उनके बिकिनी सीन पर तालियां बजाते थे, वही अब उनके कपड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। औरतों को हर हाल में जज किया जाता है। ट्रोलर्स, अपनी जिंदगी पर ध्यान दो।”

एक और यूजर ने कहा, “मजेदार बात है कि जब औरतों के कपड़ों की बात आती है, तो लोग अचानक शालीनता के ठेकेदार बन जाते हैं। अगर आपको उनका पहनावा पसंद नहीं है, तो आगे बढ़ जाइए। किसी और की पसंद पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है।”

तीसरे यूजर ने लिखा, “कृति सेनन के राखी ऐड पर क्लीवेज दिखाने और कुत्ते को राखी बांधने को लेकर हंगामा मच गया। आलोचकों ने त्योहार के दौरान उनके ‘अश्लील’ कपड़ों पर सवाल उठाए और पालतू कुत्ते को राखी बांधने पर आपत्ति जताई, इसे गलत बताया!! ये तो ‘मोरल पुलिस’ वाली बात हो गई!”

रक्षा बंधन 2026, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। यह हिंदू त्योहार भाई-बहन के रिश्ते का जश्न मनाता है। इस मौके पर बहनें पारंपरिक रूप से अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सलामती की दुआ करती हैं, जबकि भाई अक्सर बदले में तोहफे देते हैं।

कृति सेनन की फिल्में

कृति सेनन को हाल ही में होमी अदजानिया की फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था, जो 19 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फ़िल्म में उनके साथ शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना भी हैं और यह 14 अगस्त से नेटफ़्लिक्स पर स्ट्रीम होने लगी है।

Urban Company का Kent RO पर मानहानि केस, हाई कोर्ट में विज्ञापन हटाने पर बनी बात

Urban Company ने Kent RO Systems के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि और ब्रांड को बदनाम करने का मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि Kent RO ने अपने विज्ञापनों और सोशल मीडिया पोस्ट में उसके Native वॉटर प्यूरीफायर को लेकर गलत और भ्रामक दावे किए।

कंपनी ने रविवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह मुकदमा 11 अगस्त 2026 को दायर किया गया था।

किस बात पर हुआ विवाद?

Urban Company का कहना है कि Kent RO की विज्ञापन मुहिम में उसके Native M0, M1, M2, M1 Pro और M2 Pro वॉटर प्यूरीफायर के दो साल की फिल्टर लाइफ और दो साल तक सर्विसिंग की जरूरत नहीं वाले फीचर को निशाना बनाया गया।

कंपनी के मुताबिक Kent RO ने इन दावों को ‘मार्केटिंग गिमिक’ बताया और कहा कि Native वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करना उपभोक्ताओं के लिए ‘असुरक्षित’ और ‘जोखिम भरा’ है।

Kent RO ने क्या कहा?

मामले की सुनवाई 12 अगस्त को दिल्ली हाई कोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान Kent RO ने अदालत से कहा कि वह विवादित विज्ञापन हटा देगा। साथ ही भविष्य में ऐसे विज्ञापन या प्रचार सामग्री भी नहीं चलाएगा, जिसमें दो साल की फिल्टर लाइफ या दो साल तक बिना सर्विसिंग वाले फीचर को लेकर Urban Company के खिलाफ इसी तरह के दावे किए जाएं।

Urban Company के मुताबिक अदालत ने Kent RO को 12 अगस्त से 15 दिनों के भीतर विवादित विज्ञापन और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश 12 अगस्त को पारित हुआ था, जबकि इसे 22 अगस्त को हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।

दोनों कंपनियों के बीच और भी कानूनी मामले

Urban Company ने बताया कि दोनों कंपनियों के बीच अन्य कानूनी मामले अभी भी अदालत में लंबित हैं। इनमें Kent RO की ओर से दायर पेटेंट उल्लंघन का मुकदमा, उस पेटेंट को चुनौती देने वाला Urban Company का जवाबी दावा और Kent RO के खिलाफ दायर टॉर्टियस इंटरफेरेंस का मामला शामिल है।

शेयरों में कैसी रही चाल?

Urban Company का शेयर शुक्रवार को 8.19% चढ़कर ₹157.41 पर बंद हुआ था। इस साल अब तक शेयर करीब 20% चढ़ चुका है। वहीं पिछले 12 महीनों में इसमें करीब 6% की गिरावट रही है।

FSSAI का बड़ा एक्शन: दिल्ली की कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड, दमन की कंपनी के सभी घी की बिक्री पर रोक

FSSAI का बड़ा एक्शन: दिल्ली की कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड, दमन की कंपनी के सभी घी की बिक्री पर रोक

खाद्य सुरक्षा नियामक FSSAI ने गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है। वहीं दमन की SDP Industries Pvt Ltd को अपने सभी तरह के घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया है।

FSSAI ने रविवार को सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि दोनों कंपनियों के खिलाफ जांच में गंभीर गड़बड़ियां सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।

30 दिन के लिए लाइसेंस सस्पेंड

नई दिल्ली की Marche Retail Pvt Ltd के परिसर में निरीक्षण के दौरान कई गंभीर कमियां मिलीं। जांच में डिजाइन, ऑपरेशनल कंट्रोल, साफ-सफाई, कर्मचारियों की व्यक्तिगत स्वच्छता, फूड हैंडलर ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने में खामियां पाई गईं।

इसके बाद FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस 30 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया। कंपनी को इस दौरान सभी खाद्य कारोबार रोकने और कमियां दूर करने का निर्देश दिया गया है।

SDP Industries के सभी घी पर रोक

दमन की SDP Industries Pvt Ltd के खिलाफ FSSAI ने घी में मिलावट की आशंका के चलते प्रतिबंध आदेश जारी किया है।

जांच में कंपनी के Shraddha, Shree Saras और Gokul ब्रांड के कई घी उत्पाद तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। लैब जांच में घी के नमूनों में A-sitosterol मिला, जो घी में नहीं होना चाहिए। साथ ही फैटी एसिड की संरचना भी तय मानकों से अलग पाई गई।

FSSAI के मुताबिक इससे वनस्पति या दूसरे बाहरी फैट की मिलावट का संकेत मिला। कंपनी को अपने अधिकृत परिसर से बने, स्टोर किए गए या बेचे जाने वाले सभी घी की बिक्री तुरंत रोकने का आदेश दिया गया है।

हाल में कई बड़ी कंपनियों पर भी कार्रवाई

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब FSSAI ने हाल के महीनों में 150 से ज्यादा नोटिस जारी किए हैं। इनमें Nestle India, PepsiCo, Coca-Cola India, Abbott India, Red Bull India, Danone India, Mondelez India, Ferrero India समेत कई बड़े ब्रांड शामिल हैं।

ये नोटिस भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं।

Amazon, Flipkart और Domino’s भी कार्रवाई की जद में

FSSAI ने बताया कि Amazon और Flipkart को भी कुल 12 नोटिस जारी किए गए हैं। Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किया गया है।

इसके अलावा KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee समेत 30 से ज्यादा फूड सर्विस कंपनियों को भी नोटिस मिले हैं। नियामक ने Domino’s के पांच लाइसेंस भी सस्पेंड किए हैं। FSSAI का कहना है कि नोटिस मिलने के बाद कई कंपनियों ने सुधारात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

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Home Loan: सस्ता लोन पड़ न जाए महंगा! होम लोन लेने से पहले इन 6 पॉइंट्स में समझ लें प्रोसेसिंग फीस और हिडन चार्जेस का पूरा गणित

Home Loan Hidden Charges: नया घर खरीदने के लिए होम लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ बैंक की ब्याज दरों की तुलना करते हैं। लेकिन सच यह है कि लोन लेने का कुल खर्च सिर्फ ब्याज तक सीमित नहीं होता।

बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां (HFCs) आपकी लोन एप्लिकेशन की जांच और प्रोसेसिंग के नाम पर एक अच्छी-खासी रकम ‘प्रोसेसिंग फीस’ और अन्य चार्जेस के रूप में वसूलती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक, लोन लेने से पहले इन सभी खर्चों को समझना बेहद जरूरी है, ताकि बाद में कोई छिपा हुआ खर्च आपकी जेब पर भारी न पड़े।

1. क्या होती है होम लोन प्रोसेसिंग फीस?

प्रोसेसिंग फीस वह प्रशासनिक शुल्क है, जो बैंक आपके लोन आवेदन की क्रेडिट जांच, दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और अन्य कागजी कार्रवाई के लिए लेता है। यह फीस हर बैंक में अलग-अलग होती है। कुछ बैंक एक तय राशि वसूलते हैं, तो कुछ लोन राशि का 0.25% से लेकर 2% तक चार्ज करते हैं। त्योहारों या विशेष स्कीम के दौरान बैंक इस फीस पर पूरी या आंशिक छूट भी देते हैं।

2. लोन रिजेक्ट होने पर क्या प्रोसेसिंग फीस वापस मिलती है?

अक्सर लोग मान लेते हैं कि अगर लोन मंजूर नहीं हुआ, तो बैंक फीस वापस कर देगा लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, बैंकों को आवेदन के समय ही साफ-साफ बताना होगा कि लोन रिजेक्ट या डिसबर्स न होने की स्थिति में प्रोसेसिंग फीस का कितना हिस्सा रिफंडेबल है। एप्लिकेशन फीस देने से पहले बैंक अधिकारी से रिफंड पॉलिसी लिखित में जरूर समझ लें।

3. प्रोसेसिंग फीस के अलावा ये ‘अतिरिक्त खर्च’ भी समझें

केवल प्रोसेसिंग फीस देखकर किसी लोन को सस्ता न समझें। इसके साथ कई अन्य अपफ्रंट खर्च भी जुड़ते हैं:

लीगल और टाइटिल फीस: प्रॉपर्टी के मालिकाना हक और कानूनी जांच के लिए।

टेक्निकल और वैल्युएशन चार्ज: प्रॉपर्टी की बाजार में सही कीमत और निर्माण की गुणवत्ता जांचने के लिए।

डॉक्यूमेंटेशन फीस: एग्रीमेंट और स्टांप ड्यूटी से जुड़े खर्च।

इस बात का ध्यान दें कि जिस बैंक की प्रोसेसिंग फीस कम दिख रही हो, हो सकता है कि उसके लीगल या टेक्निकल चार्जेस दूसरे बैंकों से ज्यादा हों!

4. केवल ब्याज दर नहीं, ‘ऑल-इन कॉस्ट’ की तुलना करें

दो बैंकों के लोन की तुलना करते समय सिर्फ विज्ञापनों में दिख रही ब्याज दर न देखें।RBI के आदेशानुसार, बैंक को लोन एग्रीमेंट से पहले ग्राहक को ‘की फैक्ट्स स्टेटमेंट’ (KFS) देना अनिवार्य है। इसमें लोन की असली कुल लागत यानी Annual Percentage Rate (APR) लिखा होता है। स्मार्ट तरीका ये है कि दो लोन की तुलना करते समय ब्याज दर + प्रोसेसिंग फीस + अन्य सभी चार्ज को जोड़कर ही फैसला लें।

5. क्या प्रोसेसिंग फीस कम या माफ कराई जा सकती है?

जी हां! बैंक अक्सर ग्राहकों के क्रेडिट प्रोफाइल के आधार पर फीस में मोलभाव की गुंजाइश रखते हैं। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है और आपकी जॉब प्रोफाइल स्थिर है, तो आप बैंक से फीस माफ करने या घटाने की मांग कर सकते हैं। बैंक प्रतिनिधि या एजेंट द्वारा दी गई किसी भी छूट या छूट के मौखिक वादे पर भरोसा न करें, इसे आधिकारिक ईमेल या लेटर हेड पर लिखित रूप में ही लें।

6. पेमेंट करने से पहले एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें

आवेदन जमा करने से पहले बैंक से फीस की पूरी सूची मांगें। अगर लोन मंजूर होने के बाद कोई ऐसा चार्ज जोड़ा जाता है जिसका खुलासा पहले नहीं किया गया था, तो आप बैंक से जवाब मांग सकते हैं। RBI के नियमों के अनुसार, बिना पूर्व जानकारी के ग्राहकों पर नए चार्ज थोपना अनुचित व्यापार प्रथा के अंतर्गत आता है।

Home Loan: एक नजर में होम लोन के प्रमुख चार्जेस की लिस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।