Salman Khan: ‘बेडरूम की बातें वहीं तक रहनी चाहिए लिविंग रूम में नहीं आनी चाहिए’, अपनी लव लाइफ को छिपाकर रखने पर बोले सलमान खान

Salman Khan: ‘कॉफी विद करण’ सीजन 9 के पहले एपिसोड में करण जौहर ने एक मजेदार किस्सा याद किया। इसमें आमिर खान ने कहा था कि वे सलमान खान के हाथ-पैर बांधकर उनकी शादी करवा देंगे, जबकि सलमान खान ने कहा था कि वे आमिर के हाथ-पैर बांध देंगे ताकि वे दोबारा शादी न कर सकें! हाल ही में आमिर खान ने गौरी स्प्राट से शादी की है, जो उनकी तीसरी शादी है।

सलमान ने क्या कहा

करण जौहर ने सलमान से शादी के बारे में पूछा और फिर वही सवाल दोहराया, ‘क्या आप अभी भी वर्जिन हैं?’ इस पर सलमान हंस पड़े और कहा कि उन्होंने वह बात इसलिए कही थी क्योंकि वे अपनी डेटिंग लाइफ या रिश्तों के बारे में बात नहीं करना चाहते थे। एक्टर ने कहा, “क्योंकि आप लोग बार-बार कहते रहते हैं कि ‘आप फलां इंसान को डेट कर रहे हैं’… और आपको कभी पता नहीं होता कि वही इंसान आपकी जिंदगी में हमेशा के लिए रहने वाला है या नहीं। फिर वह इंसान किसी और से शादी कर लेता है। 15-16 साल की उम्र से ही मेरे मन में यही बात रही है।”

‘मैं किसी और को दोष नहीं दे सकता’

सलमान ने आगे बताया कि उनके पिता सलीम खान ने उन्हें सलाह दी थी कि बेडरूम की बातें बेडरूम तक ही सीमित रखें, उन्हें लिविंग रूम (बाहर) तक न लाएं। एक्टर ने कहा- “मुझे नहीं लगता कि लोग मेरे साथ नहीं रहना चाहते। आगे चलकर मेरे भी बच्चे होंगे। मुझे किसी ने रोका भी नहीं है। कोई यह शिकायत नहीं कर सकता कि ‘मैं यह चाहता था, लेकिन पूरी दुनिया मेरे खिलाफ हो गई और इसी वजह से मुझे कोई पार्टनर नहीं मिल पाया।’ मैं इसके लिए किसी और को दोष नहीं दे सकता।”

1990 के दशक के आखिर में ऐश्वर्या राय के साथ सलमान के रिश्ते ने मीडिया का काफी ध्यान खींचा था। दोनों की मुलाकात ‘हम दिल दे चुके सनम’ के सेट पर हुई थी। वे कुछ सालों तक रिलेशनशिप में रहे, लेकिन 2002 में उनका बहुत बुरा ब्रेकअप हो गया। इससे पहले अपने करियर की शुरुआत में एक टीवी विज्ञापन की शूटिंग के दौरान सलमान की मुलाकात संगीता बिजलानी से हुई थी और वे उन्हें भी डेट कर चुके हैं। वे लगभग एक दशक तक साथ रहे और शादी करने की योजना भी बनाई थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना रिश्ता खत्म कर लिया।

बाद में सलमान का नाम कैटरीना कैफ के साथ जुड़ा, जिनके साथ उनकी ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन काफी करीबी बॉन्डिंग थी। हालांकि उन्होंने कभी खुलकर अपने रिश्ते की पुष्टि नहीं की। माना जाता है कि अलग होने से पहले वे कई सालों तक साथ रहे थे। फिलहाल ऐसी चर्चा है कि अभिनेता रोमानियाई अभिनेत्री और टीवी प्रेजेंटर यूलिया वंतूर को डेट कर रहे हैं। दोनों को अक्सर एक साथ देखा जाता है और हाल ही में यूलिया ने सलमान की फिल्म ‘सिकंदर’ के एक गाने में अपनी आवाज दी है।

ट्रम्प को जिताने पिछले चुनाव से ज्यादा खर्च रहे मस्क:रिपब्लिकन पार्टी को ₹2,600 करोड़ चंदा दिया, यह मिडटर्म इलेक्शन के इतिहास में सबसे ज्यादा

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क ने जुलाई से अब तक रिपब्लिकन पार्टी को 276 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,600 करोड़ रुपए से ज्यादा चंदा दिया है। मस्क यह पैसा अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों की मदद के लिए खर्च कर रहे हैं। इतना पैसा अब तक किसी शख्स ने मिडटर्म चुनाव में खर्च नहीं किया। यह रकम इतनी बड़ी है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन वाले संगठन ने उस तिमाही में अपने सभी चंदा देने वालों से मिलकर भी इससे कम पैसा जुटाया। 2024 के चुनाव से भी ज्यादा पैसा खर्च कर रहे मस्क मस्क ने 2025-26 में अब तक रिपब्लिकन पार्टी को करीब 366 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रुपए) दिए हैं। यह रकम 2024 के चुनाव में दिए गए उनके करीब 290 मिलियन डॉलर (करीब 2800 करोड़ रुपए) से काफी ज्यादा है। हालांकि, मस्क ने दोनों चुनावों के दौरान कुछ ऐसे चंदे भी दिए हैं, जिनकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। मस्क के नए खर्च से मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को आर्थिक बढ़त मिली है। इसके मुकाबले डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई भी अरबपति चंदा देने वाला व्यक्ति मस्क जितना पैसा खर्च नहीं कर रहा है। मस्क के चंदे से यह भी साफ हुआ है कि वे अमेरिकी राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहना चाहते हैं। मई 2025 में उन्होंने कहा था कि भविष्य में वे राजनीतिक खर्च काफी कम कर देंगे। ट्रम्प की मस्क से फिर नजदीकी बढ़ी मस्क के पास कई बड़ी कंपनियां हैं, जिनमें से कुछ को अमेरिकी सरकार से बड़े ठेके भी मिले हैं। पिछले साल ट्रम्प के साथ विवाद के बाद से मस्क ने अपने राजनीतिक कामकाज को लेकर काफी कम सार्वजनिक बयान दिए थे। हालांकि, अब दोनों के रिश्ते फिर सुधरते दिख रहे हैं। पिछले दो हफ्तों में दोनों तीन कार्यक्रमों में साथ दिखाई दिए और एक-दूसरे की तारीफ भी की। मस्क के इतना पैसा खर्च करने से जाहिर है कि वे दक्षिणपंथी राजनीति के साथ अपनी भागीदारी बनाए रखना चाहते हैं। 3,000 लोगों की टीम घर-घर जाकर वोट मांग रही रिपब्लिकन पार्टी को ज्यादातर चंदा मस्क के बनाए राजनीतिक संगठन अमेरिका PAC के जरिए मिलता है। यह संगठन रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करता है। अमेरिका PAC के प्रवक्ता एंड्रयू रोमियो ने कहा कि अगर नवंबर में डेमोक्रेटिक पार्टी चुनाव जीत जाती है, तो अमेरिका के कम्युनिष्ट, वोक और बिना सीमा वाला देश बनने का खतरा है। उन्होंने कहा कि मस्क के बड़े निवेश से रिपब्लिकन पार्टी को अपना पक्ष लोगों तक पहुंचाने का मौका मिला है, ताकि वह चुनाव में इतिहास के रुझान को बदलने की कोशिश कर सके। मस्क सिर्फ बेहिसाब पैसा खर्च नहीं, बल्कि उनकी टीम के 3000 लोग घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। वे उन मतदाताओं को वोट डालने के लिए तैयार कर रहे हैं, जो आमतौर पर चुनाव में कम हिस्सा लेते हैं। टेक्सास में सबसे बड़ा दांव, एक उम्मीदवार पर ₹1500 करोड़ खर्च मस्क के चुनावी अभियान का सबसे दिलचस्प हिस्सा टेक्सास का सीनेट चुनाव है। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन के समर्थन में करीब 1500 करोड़ रुपए के विज्ञापन अभियान की शुरुआत हुई है। मस्क के लिए टेक्सास का चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि वे राज्य की राजधानी ऑस्टिन में रहते हैं और यहां उनका बड़ा कारोबारी निवेश है। उनकी टीम सिर्फ टीवी विज्ञापनों के जरिए प्रचार नहीं कर रही, बल्कि घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क भी कर रही है। प्रचारक लोगों के दरवाजों पर पर्चे लगा रहे हैं। इन पर्चों में दावा किया जा रहा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता पूरे अमेरिका में चुनाव जीत रहे हैं और टेक्सास में भी ऐसा हो सकता है। ट्रांसजेंडर और समाजवाद के खिलाफ टार्गेटेड विज्ञापन मस्क का चुनावी संगठन ट्रांसजेंडर और समाजवाद के मुद्दों पर ज्यादा जोर दे रहा है। मस्क की अपनी ट्रांसजेंडर बेटी के साथ अनबन रही है। मस्क ने कहा था कि बेटी के साथ हुए मतभेदों का असर उनकी राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी पर भी पड़ा। अब उनका संगठन इसी मुद्दे पर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवारों को घेर रहा है। एक विज्ञापन में मेकअप लगाए एक व्यक्ति को दिखाया गया है। इसमें कहा गया है- उन्होंने तो वोटिंग करने की ठान ली है। क्या आप वोट डालने जा रहे हैं? इस विज्ञापन के जरिए लोगों से कहा जाता है कि वे घर पर न बैठें और कट्टरपंथियों को चुनाव जीतने का मौका न दें। एक और वीडियो में डेमोक्रेटिक नेताओं को मुस्कुराते हुए दिखाया है। इसमें यह कहा जा रहा है कि वे इसलिए खुश हैं क्योंकि ‘क्रिस्टोफर’ ने वोट डालने का कोई प्लान अभी तक नहीं बनाया है। इसमें भी यही मैसेज है कि अगर रिपब्लिकन समर्थक वोट डालने नहीं गए, तो डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को इसका फायदा मिल सकता है। मस्क के प्रचार का तरीका बदला 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मस्क ट्रम्प के समर्थन में खुलकर प्रचार कर रहे थे। वे चुनावी रैलियों में शामिल होते थे, सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट करते थे और वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए 10 लाख डॉलर देने जैसी योजना भी चलाते थे। 2026 के मिडटर्म चुनाव में उनका तरीका बदल गया है। इस बार वे खुद सामने आकर प्रचार करने के बजाय पर्दे के पीछे रहकर काम कर रहे हैं। अब उन्होंने प्रचार की जिम्मेदारी अपने संगठन और सलाहकारों को सौंप दी है। सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रियता पहले के मुकाबले काफी कम है।

बेंगलुरु में Urban Company की सर्विस पर विवाद, पत्नी की अंगूठी चोरी होने के आरोप पर कंपनी का आया जवाब

ऑनलाइन ऐप से घर की सफाई के लिए प्रोफेशनल बुलाना आजकल आम बात है, लेकिन अगर इसी दौरान घर से कोई कीमती सामान गायब हो जाए तो भरोसे पर सवाल उठना लाजिमी है। बेंगलुरु के एक विज्ञापन पेशेवर ने Urban Company की क्लीनिंग सर्विस को लेकर ऐसा ही आरोप लगाया है। उनका दावा है कि घर की सफाई के दौरान उनकी पत्नी की शादी की सोने की अंगूठी गायब हो गई। मामला तब और चर्चा में आ गया, जब उन्होंने बताया कि पुलिस ने अंगूठी शहर से करीब 100 किलोमीटर दूर से बरामद की। इस घटना के बाद कंपनी की ग्राहक सेवा और ऑनलाइन बुकिंग वाली घरेलू सेवाओं की जवाबदेही पर बहस छिड़ गई है।

प्रीमियम क्लीनिंग सर्विस बुक की, फिर गायब हुई अंगूठी

बेंगलुरु के विज्ञापन पेशेवर शुभम मजूमदार ने LinkedIn पर अपना अनुभव साझा किया। उनके मुताबिक, उन्होंने Urban Company की InstaHelp सेवा के तहत घर की सफाई के लिए ‘Gold Expert’ कैटेगरी बुक की थी। इसी दौरान उनकी पत्नी की शादी की सोने की अंगूठी गायब हो गई।

मजूमदार ने आरोप लगाया कि सर्विस के लिए आए कर्मचारी ने अंगूठी चुराई। हालांकि, यह उनका आरोप है और मामले में किसी की दोषसिद्धि की जानकारी सामने नहीं आई है।

कंपनी से शिकायत की, लेकिन जवाब से नहीं हुए संतुष्ट

मजूमदार के मुताबिक, उन्होंने अंगूठी गायब होने की जानकारी तुरंत ऐप के जरिए कंपनी को दी। ग्राहक सहायता टीम ने उन्हें बताया कि कंपनी की रिकवरी टीम मामले की जांच करेगी और इसमें चार से पांच दिन लग सकते हैं।

उनका दावा है कि एक दिन बीतने के बाद भी कोई खास प्रगति नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने कंपनी के शिकायत अधिकारी से संपर्क कर मामले की जानकारी और संबंधित कर्मचारी का विवरण मांगा। लेकिन मजूमदार के अनुसार, उन्हें संतोषजनक जवाब मिलने के बजाय सामान्य तरह का संदेश मिला।

उन्होंने बताया कि कंपनी की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह भी दी गई, जबकि वह पहले ही पुलिस से संपर्क कर चुके थे।

100 किलोमीटर दूर से मिली अंगूठी, Uber भी करनी पड़ी बुक

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात अंगूठी की बरामदगी को लेकर सामने आई। मजूमदार ने दावा किया कि पुलिस ने अंगूठी बेंगलुरु से करीब 100 किलोमीटर दूर एक जगह से बरामद की। उनके मुताबिक, पुलिस को वहां तक पहुंचाने के लिए उन्हें इंटरसिटी Uber बुक करनी पड़ी।

शिकायत के बीच आया सर्विस रेटिंग का मैसेज

मजूमदार ने कंपनी के ऑटोमेटेड मैसेज के स्क्रीनशॉट भी साझा किए। उनका कहना था कि अंगूठी गायब होने की शिकायत के बीच कंपनी ने उनसे सर्विस को रेट करने और रिव्यू देने के लिए संदेश भेज दिया। इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई।

Urban Company ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए उनसे रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर निजी संदेश में साझा करने को कहा, ताकि मामले की जांच की जा सके। इस पर मजूमदार ने सवाल उठाया कि जब शिकायत पहले से दर्ज है, तो दोबारा जानकारी क्यों मांगी जा रही है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस घटना के बाद कुछ लोगों ने कंपनी की ग्राहक सेवा पर सवाल उठाए, जबकि कुछ यूजर्स ने ग्राहकों को कीमती सामान सुरक्षित रखने की सलाह दी। फिलहाल, यह मामला घरेलू सेवाओं में भरोसे, सुरक्षा और कंपनियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा में है।

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Amitabh Bachchan: दिल्ली HC ने अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स मामले में दिया बड़ा निर्देश, कहा- व्यक्तिगत रूप से पेश हों एक्टर

Amitabh Bachchan: अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़े मामले में एक नया मोड़ आया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बिग बी से कहा है कि अगर वह इस केस को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें खुद कोर्ट में पेश होना होगा। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की बेंच ने अमिताभ बच्चन और दूसरे पक्षों को 16 नवंबर तक अपना समझौता फाइनल करने का समय दिया है।

यह निर्देश तब दिया गया जब उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे कुछ प्रतिवादियों (डिफेंडेंट्स) के साथ किसी समझौते पर पहुंच गए हैं। 2022 में कोर्ट ने एक ‘एक्स-पार्टे’ (एकतरफा) आदेश के जरिए अमिताभ बच्चन के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की थी। उनके वकील ने जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए और समय मांगा था, लेकिन अब कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगर समझौता फाइनल नहीं होता है और अमिताभ बच्चन केस को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें खुद कोर्ट में पेश होना होगा।

HT की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- “समय दे दिया गया है। मामले को 16.11.2026 को लिस्ट किया जाए। अगर समझौता नहीं होता है या समझौता अधूरा रहता है और वादी किसी भी दावे या मुद्दे पर मुकदमा आगे बढ़ाना चाहता है तो उसे सुनवाई की अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा। इससे कोर्ट को ‘कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर, 1908’ के ‘ऑर्डर X नियम 2’ और ‘ऑर्डर V नियम 3’, तथा ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023’ की धारा 168 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।”

बिग बी के पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) के मामले के बारे में

2022 में, मशहूर वकील हरीश साल्वे ने बच्चन की ओर से हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने अपने नाम, तस्वीर, आवाज़ और व्यक्तित्व से जुड़ी विशेषताओं की सुरक्षा की मांग की थी। जस्टिस नवीन चावला ने कहा, “वादी को अपूरणीय नुकसान और क्षति होने की संभावना है। कुछ गतिविधियां उन्हें बदनाम भी कर सकती हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए एकतरफा अंतरिम आदेश (ex parte ad interim order) पारित किया जाता है।”

जस्टिस चावला ने आगे कहा-“इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि वादी (बच्चन) एक मशहूर हस्ती हैं और कई विज्ञापनों में भी दिखाई देते हैं। वादी इस बात से नाराज हैं कि प्रतिवादी उनकी अनुमति या अधिकार के बिना अपने सामान और सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए उनकी सेलिब्रिटी हैसियत का इस्तेमाल कर रहे हैं। शिकायत पर विचार करने के बाद मेरी राय है कि प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला बनता है और सुविधा का संतुलन भी उनके पक्ष में है।”

मुकदमे में कहा गया था कि मोबाइल एप्लिकेशन डेवलपर्स अमिताभ बच्चन के नाम का इस्तेमाल गैर-कानूनी तरीके से लॉटरी चलाने के लिए कर रहे थे, जबकि अन्य लोग उनकी तस्वीर वाली टी-शर्ट बेच रहे हैं।

अमिताभ बच्चन के बारे में और जानकारी

अमिताभ बच्चन ने 1969 में ‘सात हिंदुस्तानी’ फिल्म से एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा, जिसमें उन्होंने कवि अनवर अली की भूमिका निभाई थी। इसके बाद के वर्षों में वे ‘रेशमा और शेरा’, ‘परवाना’, ‘संयोग’ और ‘बंसी बिरजू’ जैसी फिल्मों में नजर आए, जिनमें से कई व्यावसायिक रूप से असफल रहीं। ‘आनंद’ (1971) और ‘बॉम्बे टू गोवा’ (1972) में उनके अभिनय ने उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया जिन पर नजर रखी जानी चाहिए।

Netflix Layoffs: OTT प्लेटफॉर्म में फिर होगी छंटनी! 5% कर्मचारियों की जा सकती है नौकरी

नेटफ्लिक्स (Netflix) में एक बार फिर छंटनी होने जा रही है। इस बार लगभग 5 प्रतिशत कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है। इसकी घोषणा अगले हफ्ते तक हो सकती है। यह बात पक न्यूज (Puck News) की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से कही गई है। पिछले साल के आखिर में नेटफ्लिक्स के पास लगभग 16,000 फुल-टाइम कर्मचारी थे। कंपनी एक ऑन डिमांड ओवर द टॉप स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म है। सब्सक्रिप्शन के जरिए इस प्लेटफॉर्म पर टीवी शो, फिल्म, डॉक्युमेंट्री, गेम्स, एनीमे, गेम्स आदि का मजा लिया जा सकता है।

स्ट्रीमिंग मार्केट में कॉम्पिटीशन तेजी से बढ़ रहा है। मीडिया कंपनियां कंसोलिडेटेड हो रही हैं और यूट्यूब (YouTube) व्यूअरशिप और विज्ञापन पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा हासिल कर रहा है। नेटफ्लिक्स अपने रेवेन्यू के सोर्स बढ़ाने के लिए सब्सक्रिप्शन बिजनेस से आगे बढ़कर विज्ञापन, लाइव प्रोग्रामिंग और गेमिंग में भी निवेश कर रही है।

2022 में निकाले थे सैकड़ों कर्मचारी

इससे पहले नेटफ्लिक्स ने साल 2022 में बड़े पैमाने पर छंटनी की थी। उस वक्त कंपनी ने धीमी ग्रोथ और सब्सक्राइबर घटने के कारण सैकड़ों नौकरियां खत्म कर दी थीं। एक दशक से ज्यादा समय में पहली बार नेटफ्लिक्स के ग्राहकों में भारी गिरावट देखी गई थी।

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Amazon ने लगभग 1000 लोगों को निकाला

ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन ने भी एक बार फिर छंटनी की है। हाल ही में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी ने कुछ नौकरियां कम की हैं, खासकर अपनी ‘स्टोर्स’ यूनिट में। यह यूनिट मुख्य ई-कॉमर्स वेबसाइट को देखती है। इंटरनल स्लैक चैनल से सामने आया है कि कस्टमर सर्विस और सेलिंग पार्टनर सर्विसेज समेत स्टोर्स के कई डिवीजन पर छंटनी का असर पड़ा है। हो सकता है कि एमेजॉन की दूसरी यूनिट्स के कर्मचारी भी इस जॉब कट से प्रभावित हुए हों।

नौकरी गंवाने वालों में अमेरिका, भारत और यूके के कर्मचारी शामिल हैं। इस बार एमेजॉन द्वारा निकाले गए व्हाइट-कॉलर कर्मचारियों की संख्या 1,000 से कम बताई जा रही है। पिछले साल कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी की थी और 30,000 नौकरियां कम की थीं। यह सिलसिला इस साल जनवरी तक चला था।

दिल्ली प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, मेट्रो चलने पर नहीं लगाई जाएगी पूरी रोक, कहा- सेवाएं बंद करने के बजाय रेगुलेट करें

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि 10 अक्टूबर को CJP के विरोध प्रदर्शन के कारण दिल्ली मेट्रो और राजधानी आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक न लगे। क्योंकि सब कुछ पूरी तरह से ठप नहीं कर सकते।

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस बागची और वी. मोहना की बेंच ने केंद्र से कहा कि यात्रियों को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। इसी कारण से सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलने दिया जाए। बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि पूरी तरह रोक लगाने और सेवाओं को नियंत्रित तरीके से चलने देने में फर्क है।

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की बात पर ध्यान दिया कि वे अधिकारियों से रोक पर फिर से विचार करने और मेट्रो ट्रेनों व अन्य रेलवे सेवाओं को उचित रूप से नियंत्रित तरीके से चलने देने के लिए कहेंगे ताकि आम जनता को कोई असुविधा न हो और आनुपातिकता के सिद्धांत का ध्यान रखा जा सके।

उन्होंने कहा कि हम यह साफ करते हैं कि मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाएगी।” बेंच ने आगे कहा, “हम निर्देश देते हैं कि मेट्रो ट्रेनों और अन्य रेलवे सेवाओं की उचित रूप से नियंत्रित तरीके से आवाजाही के बारे में अधिकारियों द्वारा लिए गए सोच-समझकर किए गए फैसले का उचित प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि आम जनता को होने वाली असुविधा कम से कम हो।”

बेंच ने ये भी कहा कि दिल्ली में ट्रैफिक की आवाजाही के संबंध में भी इसी तरह के विज्ञापन जारी किए जाने चाहिए। बेंच ने कहा कि सड़कों पर बैरिकेडिंग के मामले पर भी फिर से विचार किया जाना चाहिए और वैकल्पिक रास्तों का उचित प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।

बता दें कि  दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन होने वाला है। प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कई ट्रेनों को रद्द करने का सरकार ने फैसला किया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका को दाखिल किया गया था। CPI(M) के महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद एमए बेबी ने याचिका दाखिल कर कोर्ट से इस फैसले में दखल देने को कहा गया था। प्रदर्शन मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया (SIR) और चुनाव आयोग के खिलाफ किया जाने वाला है। इसके चलते दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को पत्र लिखकर 57 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री और एग्जिट गेट बंद रखने का ऐलान किया था। यह बंद  9 अक्टूबर की रात 9 बजे से शुरू होकर हालात सामान्य होने तक जारी रखने के लिए कहा गया है।

25 लाख सालाना कमाने वाला शख्स अब बेच रहा ऑनलाइन प्रोडक्ट, कमल टोलानी ने बताया बिजनेस का पहला महीने का हिसाब

₹25 लाख सालाना की नौकरी, तय सैलरी और कॉरपोरेट की सुरक्षित जिंदगी को छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन कमल टोलानी ने नौकरी की सुरक्षा के बजाय अपने दम पर कुछ बनाने का रास्ता चुना। उन्होंने करीब एक महीने पहले अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर ई-कॉमर्स बिजनेस की शुरुआत की। अब अपने नए सफर का पहला महीना पूरा होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कमाई के आंकड़े शेयर किए हैं। कमल ने बताया कि Amazon, Meesho और Flipkart जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके बिजनेस का प्रदर्शन कैसा रहा।

दिलचस्प बात यह है कि पहले महीने में उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा Amazon से आया, जबकि Flipkart पर उन्हें कोई कमाई नहीं हुई। उनकी कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक तरफ उन्होंने लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़ी, वहीं दूसरी ओर अब बिजनेस की अनिश्चित दुनिया में अपने फैसले को आजमा रहे हैं।

नौकरी की फिक्स सैलरी से सीधे बिजनेस की अनिश्चितता तक

कमल ने Instagram पर बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। पहले हर महीने एक तय सैलरी मिलती थी और कॉरपोरेट जॉब की अपनी सुरक्षा थी। अब उनका पूरा ध्यान प्रोडक्ट, ऑर्डर, विज्ञापन, रिटर्न और ग्राहकों से जुड़ी दूसरी जिम्मेदारियों पर है। उन्होंने माना कि नए सफर में उनसे गलतियां भी हुईं, लेकिन इसी दौरान उन्हें काफी कुछ सीखने को भी मिला।

Amazon, Meesho और Flipkart पर आजमाई किस्मत

कमल ने अपने वीडियो में बताया कि ई-कॉमर्स के पहले 30 दिनों में उन्होंने Amazon, Meesho और Flipkart पर बिक्री की कोशिश की। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्लेटफॉर्म से उन्हें कितनी कमाई हुई। उनके मुताबिक, पिछले 30 दिनों में Meesho से ₹3,200 की कमाई हुई, जबकि Flipkart से कोई कमाई नहीं हुई। दूसरी ओर, Amazon से उन्हें ₹45,382 की बिक्री हासिल हुई।इस तरह उनके साझा किए आंकड़ों के अनुसार, तीनों प्लेटफॉर्म से कुल कमाई ₹48,582 रही।

₹25 लाख की नौकरी के मुकाबले पहला महीना कैसा रहा?

कमल की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसी सवाल को लेकर चर्चा शुरू कर दी। कुछ लोगों ने उनके नए सफर की तारीफ की और उन्हें आगे के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं, कुछ यूजर्स का कहना था कि ₹25 लाख सालाना नौकरी छोड़ना सही फैसला नहीं था और बिजनेस को उस स्तर की कमाई तक पहुंचने में काफी समय लग सकता है।

आखिर क्यों छोड़ दी इतनी अच्छी नौकरी?

कमल ने इससे पहले अपनी एक पोस्ट में इस फैसले की वजह बताई थी। उनके अनुसार, अच्छी सैलरी और नौकरी की सुरक्षा के बावजूद उनके मन में अपना कुछ शुरू करने का विचार लगातार चल रहा था। उन्होंने माना कि उन्हें खुद नहीं पता कि यह फैसला आगे कहां लेकर जाएगा। बिजनेस सफल होगा या नहीं, यह भी तय नहीं है। लेकिन वह इस सफर में मिलने वाली अनिश्चितता, असफलताओं, छोटी सफलताओं और रोजमर्रा के अनुभवों को लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं।

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NMC Advertising Guidelines for Doctors: खुद को नं. 1 या ‘गारंटीड इलाज’ का दावा नहीं कर सकेंगे डॉक्टर, एनएमसी ने जारी की गाइडलाइन

NMC Advertising Guidelines for Doctors: एआई और सोशल मीडिया के दौर में यह समझना बहुत मुश्किल है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ? खासतौर से खुद को नंबर 1 बताने वाले डॉक्टर या ‘गारंटीड इलाज’ का दावा करने वाले अस्पतालों को देखते हुए यह और भी मुश्किल हो जाता है। इस समस्या की गंभीरता को समझते नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अस्पतालों और डॉक्टरों के विज्ञापनों के संबंध में गाइडलाइन जारी की है। एनएमसी की इन सख्त दिशा-निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

एनएमसी के नए नियमों के दायरे में अखबार-होर्डिंग और इंस्टाग्राम-यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। बहुत से डॉक्टर या अस्पताल अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर्स या पेड रिव्यू का सहारा लेते हैं। एनएमसी की नई गाइडलाइन के बाद इन सभी तौर-तरीकों पर रोक लगा दी गई है।

एनएमसी की नई गाइडलाइन

एनएमसी के नए नियमों के अनुसार, इलाज से पहले और बाद की तस्वीरें (Before-After Photos) दिखाने या फर्जी लाइक्स और व्यूज के जरिए अपना विज्ञापन करने वालों पर कमीशन की नजर रहेगी। एनएमसी के नियमों का उल्लंघन करने पर डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन निलंबित होने के साथ-साथ भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार के इस कदम से हेल्थ सर्विस के क्षेत्र में पारदर्शिता और भरोसे का माहौल तैयार होगा।

एनएमसी रखेगी ‘गारंटीड इलाज’ का दावा करने वालों पर नजर

नेशनल मेडिकल कमीशन की नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब कोई भी डॉक्टर या हॉस्पिटल अपने प्रचार के लिए ‘100% सफलता’, ‘गारंटीड इलाज’, ‘चमत्कारी इलाज’, ‘दर्द रहित इलाज’ और ‘नंबर-1 स्पेशलिस्ट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इसके अलावा ‘सबसे अच्छा’ या ‘सबसे भरोसेमंद’ जैसे दावों पर भी रोक लगा दी गई है, जब तक कि उन्हें किसी ठोस और निष्पक्ष तरीके से साबित न किया जा सके।

मरीजों के रिव्यू और सेलिब्रिटी प्रचार पर पाबंदी

डॉक्टर अपने प्रचार के लिए मरीजों की सिफारिशों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं, मरीजों से सोशल मीडिया पर रिव्यू मांगने की भी अनुमति नहीं होगी। अपनी सेवाओं का प्रचार करने के लिए किसी सेलिब्रिटी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या तीसरे व्यक्ति का सहारा लेने पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है। ऐसा करने वाले डॉक्टरों या अस्पतालों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

रेफरल फीस और डर पैदा करने वाले विज्ञापनों पर रोक

हॉस्पिटल और डॉक्टर अब फ्री इलाज, कैशबैक, डिस्काउंट, या कूपन का प्रचार नहीं कर सकेंगे। ऐसा करने पर रोक लगा दी गई है। कमीशनखोरी, रेफरल फीस और डर पैदा करके इलाज बेचने वाले विज्ञापनों को भी अवैध करार दिया गया है। हालांकि, डॉक्टर आम जनता को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य अभियानों और शैक्षणिक चर्चाओं में हिस्सा ले सकते हैं।

नियम टूटने पर होगी सख्त कार्रवाई

नेशनल मेडिकल कमीशन ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों और हॉस्पिटल के खिलाफ चेतावनी, सुधार के निर्देश, भारी जुर्माने और रजिस्ट्रेशन का निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि डॉक्टर इस कार्रवाई के खिलाफ 60 दिनों के अंदर NMC के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड में अपील कर सकते हैं।

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शिंदे जितना तो पीएम से कोई नहीं मिलता

कैबिनेट की बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के मंत्री भी उनसे उतना नहीं मिलते हैं, जितना महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मिलते हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों के अलावा व्यक्तिगत रूप से भी शिंदे अक्सर प्रधानमंत्री से मिलते रहते हैं। पिछले तीन महीने में कम से कम दो बार दिल्ली में वे प्रधानमंत्री मोदी से मिले हैं। दोनों मुलाकातें एक एक घंटे की रहीं। अभी छह अक्टूबर को वे मोदी से मिले। इससे पहले सात अगस्त को भी उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री से हुई थी। छह अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के एक दिन बात सात अक्टूबर को देश के सभी प्रमुख अखबारों में शिंदे और उनकी पार्टी की ओर से पहले पन्ने पर पूरे पेज का विज्ञापन छपवाया गया।

शिंदे और उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे करने के मौके पर विज्ञापन छपवाया। इससे पहले 17 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर भी शिंदे ने पूरे पन्ने का विज्ञापन छपवाया था। यह बड़ी हैरानी की बात है और खुद शिंदे की पार्टी के नेता भी हैरानी जाहिर करते हैं कि शिंदे यह उम्मीद कर रहे हैं कि मोदी उनको महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनवा देंगे। यह भी कहा जा रहा है कि वे वे अभी तक इस सदमे से उबरे नहीं हैं कि माझी लड़की बहिन योजना चला कर उन्होंने एनडीए सरकार की वापसी सुनिश्चित की थी और फिर भी मुख्यमंत्री नहीं बन सके।

अशोक मित्तल ने भी पूरे पन्ने का विज्ञापन दिया

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे करने पर पूरे पेज का विज्ञापन छपवा कर बधाई देने वाले दूसरे नेता अशोक मित्तल हैं। पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक और हाल ही में आम आदमी पार्टी से पाला बदल कर भाजपा में शामिल हुए मित्तल ने देश के कई प्रमुख अंग्रेजी अखबारों में विज्ञापन दिया है। गौरतलब है कि मित्तल जब तक आप में थे, तब तक अपना फिरोजशाह रोड का बंगला अरविंद केजरीवाल को रहने के लिए दिया था।

फिर एक दिन उनके यहां केंद्रीय एजेंसी, ईडी का छापा पड़ा और अचानक केजरीवाल से उनका मोहभंग हो गया। वे पाला बदल कर भाजपा में चले गए। उनके साथ आप के 10 में से सात राज्यसभा सांसद भाजपा में गए हैं। हालांकि उसके बाद भी उनकी समस्या समाप्त नहीं हुई हैं। अब पंजाब में आए दिन कुछ न कुछ होता रह रहा है। पिछले दिनों उनके लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में एक छात्रा से बलात्कार की अफवाह उड़ी, जो दंगों में बदल गई। 10 दिन तक यूनिवर्सिटी बंद करनी पड़ी। मित्तल के करीबी राज्य सरकार पर दोष डाल रहे हैं।