Q2 Results This Week: वेदांता, सुजलॉन से टाटा स्टील तक… इस हफ्ते 250 से ज्यादा कंपनियों के आएंगे रिजल्ट

Q2 Results This Week: शेयर बाजार में 26 अक्टूबर से शुरू हो रहे नए हफ्ते में 250 से ज्यादा कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं। इनमें कई दिग्गज कंपनियां भी शामिल हैं।

दिवाली से पहले निवेशकों की नजर खास तौर पर L&T, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसी कंपनियों पर रहेगी। इसके अलावा बजाज ऑटो, वेदांता, टाटा स्टील, कोल इंडिया और पेटीएम समेत कई कंपनियां भी अपने नतीजे घोषित करेंगी। आइए जानते हैं कि किस दिन किन बड़ी कंपनियों के नतीजे आएंगे।

सोमवार, 26 अक्टूबर: टाटा कंज्यूमर और पेटीएम

हफ्ते की शुरुआत Tata Consumer Products और Paytm जैसी कंपनियों के नतीजों से होगी। इसके अलावा ITC Hotels, Mankind Pharma, Bank of Maharashtra, REC, Sona BLW, Ather Energy और APL Apollo Tubes भी अपने सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगे। निवेशकों की नजर इन कंपनियों की कमाई और कारोबारी प्रदर्शन पर रहेगी।

मंगलवार, 27 अक्टूबर: L&T, मारुति और टाटा स्टील

मंगलवार को कई बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की L&T),ऑटो सेक्टर की Maruti Suzuki और Bajaj Auto के नतीजों पर खास नजर रहेगी। इसके अलावा Tata Steel, Vedanta Iron & Steel, SAIL, Mazagon Dock Shipbuilders, Tata Capital, SBI Life Insurance और Waaree Energies भी नतीजे घोषित करेंगी। Cipla, ACC और PG Electroplast के नतीजे भी इसी दिन आएंगे।

बुधवार, 28 अक्टूबर: HUL, हीरो मोटोकॉर्प और अदाणी ग्रुप

बुधवार को FMCG सेक्टर की Hindustan Unilever, ऑटो सेक्टर की Hero MotoCorp और Hyundai Motor India के नतीजे आने वाले हैं। इसके अलावा Adani Enterprises, Adani Ports, Bandhan Bank, Pidilite Industries, PNB Housing Finance, PVR Inox, TVS Motor और United Spirits भी अपने नतीजे घोषित करेंगी। Meesho और Info Edge के नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।

गुरुवार, 29 अक्टूबर: एशियन पेंट्स, ट्रेंट और सुजलॉन

गुरुवार को Asian Paints, Trent और Suzlon Energy के नतीजे खास रहेंगे। इसके अलावा Coal India, Ambuja Cements, Blue Star, Godrej Consumer Products, IndiGo, Laurus Labs, Motilal Oswal Financial Services और Pine Labs भी अपने सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी। Titagarh Rail, Praj Industries, V-Guard और Welspun Corp के नतीजे भी इसी दिन आएंगे।

शुक्रवार, 30 अक्टूबर: सन फार्मा, BEL और NTPC ग्रीन

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन Sun Pharma, Bharat Electronics (BEL), Bank of Baroda, GAIL, Indian Oil Corporation और Dixon Technologies के नतीजे आने वाले हैं। इसके अलावा Aditya Birla Capital, Delhivery, LIC Housing Finance, Max Healthcare, NTPC Green Energy, SJVN, Sun TV, Varun Beverages और Phoenix Mills भी सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी।

निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह हफ्ता?

एक ही हफ्ते में ऑटो, बैंकिंग, FMCG, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर की कई बड़ी कंपनियों के नतीजे आने वाले हैं। इन नतीजों से कंपनियों की बिक्री, मुनाफे और आगे के कारोबार की स्थिति का संकेत मिलेगा। खास तौर पर कच्चे माल की लागत, मांग और मार्जिन में बदलाव पर बाजार की नजर रहेगी।

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IPO News: इस साल सरकार तीन कंपनियों के आईपीओ लाएगी, दूसरा पब्लिक InvIT भी आएगा

IPO News: सरकार इस वित्त वर्ष में अपनी तीन कंपनियों को शेयर बाजार में लिस्ट करने की तैयारी कर रही है। इनमें इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी (IIFCL), महानदी कोलफील्ड्स (MCL) और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (SECL) शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार दूसरा पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) भी लॉन्च करेगी। इसके जरिए सरकारी संपत्तियों से पैसा जुटाया जाएगा। इस रकम का इस्तेमाल नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जा सकेगा।

निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने Moneycontrol को बताया कि तीनों कंपनियां शेयर बाजार में उतरने के लिए तैयार हैं। Mahanadi Coalfields का ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) पहले ही दाखिल हो चुका है। बाकी दो कंपनियों की लिस्टिंग की तैयारियां चल रही हैं।

IIFCL: इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को देती है कर्ज

IIFCL की स्थापना 2006 में हुई थी। यह पूरी तरह सरकार के मालिकाना हक वाली कंपनी है। इसका काम सड़क, बिजली और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) समेत कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए लंबे समय का कर्ज देना है।

मार्च 2026 तक कंपनी की कुल संपत्ति ₹98,481 करोड़ थी। इसकी नेटवर्थ ₹17,898 करोड़ और इंफ्रास्ट्रक्चर लोन बुक ₹81,714 करोड़ रही। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर ₹1,379 करोड़ रह गया। पिछले साल यह ₹2,165 करोड़ था।

विदेशी मुद्रा लेनदेन से हुए नुकसान और नेट इंटरेस्ट मार्जिन में कमी का असर मुनाफे पर पड़ा। दूसरी ओर, कंपनी का ग्रॉस NPA घटकर 0.40% रह गया, जो पिछले साल 1.11% था। IIFCL के IPO में सरकार अपनी हिस्सेदारी के कुछ शेयर बेच सकती है। इसके साथ नए शेयर भी जारी किए जा सकते हैं।

Mahanadi Coalfields: एक साल में कमाए ₹10,698 करोड़

महानदी कोलफीडल्ड्स ओडिशा में कारोबार करती है। यह कोल इंडिया की सहायक कंपनी है और इसकी सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी भी है। वित्त वर्ष 2026 में इसने 218.31 मिलियन टन कोयले का प्रोडक्शन किया। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹30,550 करोड़ और नेट प्रॉफिट लगभग ₹10,698 करोड़ रहा।

इसके IPO में Coal India अपनी 10% हिस्सेदारी बेचेगी। इसके लिए 66.18 करोड़ शेयर ऑफर किए जाएंगे। यह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। यानी इस बिक्री से मिलने वाला पैसा Mahanadi Coalfields को नहीं, बल्कि Coal India को मिलेगा।

South Eastern Coalfields की भी होगी लिस्टिंग

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कोयले का उत्पादन करती है। यह भी कोल इंडिया की सहायक कंपनी है। वित्त वर्ष 2026 में इसने 176.29 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। यह कोल इंडिया के कुल उत्पादन का करीब 23% था। कंपनी का नेट प्रॉफिट लगभग ₹4,755 करोड़ रहा।

इसके प्रमुख खदान क्षेत्रों में गेवर, कुसमुंडा और दीपका शामिल हैं। कोल इंडिया ने इसकी लिस्टिंग की तैयारी शुरू कर दी है और सलाहकार भी नियुक्त किए हैं।

इन दोनों सहायक कंपनियों की लिस्टिंग से निवेशकों को कोल इंडिया के शेयर के अलावा उसकी अलग-अलग कंपनियों में निवेश का विकल्प मिलेगा। इससे बाजार में उनके कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन की अलग पहचान बनेगी।

दूसरा पब्लिक InvIT भी लाएगी सरकार

सरकार वित्त वर्ष 2027 में दूसरा पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvIT) लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के कुछ हिस्सों की पहचान की गई है। इन सड़कों से भविष्य में होने वाली कमाई के आधार पर निवेशकों को सिक्योरिटीज जारी की जाएंगी।

इस तरीके से सरकार को मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर संपत्तियों को सीधे बेचे बिना उनसे पैसा जुटाने का मौका मिलता है। इनसे भविष्य में होने वाली कमाई के आधार पर निवेश जुटाया जाता है। फिर इस रकम का इस्तेमाल नई सड़कें और दूसरी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं बनाने में किया जा सकता है। इसे कैपिटल रीसाइक्लिंग कहा जाता है।

मार्च 2026 में सरकार के पहले पब्लिक InvIT से करीब ₹9,200 करोड़ जुटाए गए थे। चावला के मुताबिक, हाल के समय में इस निवेश विकल्प का रिटर्न 10 साल के सरकारी बॉन्ड से करीब दो प्रतिशत अंक ज्यादा रहा है।

सरकार को उम्मीद है कि दूसरा InvIT सफल रहा, तो इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पैसा जुटाने का यह तरीका आगे भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। फिलहाल सरकार की प्राथमिकता इन तीनों कंपनियों की लिस्टिंग और दूसरे पब्लिक InvIT को लॉन्च करने की तैयारी पूरी करना है।

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FPI Selling: विदेशी निवेशकों की अंधाधुंध बिकवाली जारी, अक्टूबर में ₹48056 करोड़ निकाले

FPI Selling: विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अक्टूबर में अब तक उन्होंने ₹48,056 करोड़ की बिकवाली की है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मिडिल ईस्ट में तनाव, महंगाई की चिंता और कंपनियों के कमजोर नतीजे इसकी बड़ी वजह हैं। हालांकि, पिछले हफ्ते बिकवाली का दबाव कुछ कम हुआ। विदेशी निवेशक दो कारोबारी दिनों में शुद्ध खरीदार भी बने।

2026 में निकासी ₹3 लाख करोड़ के पार

सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयरों से ₹35,861 करोड़ निकाले थे। इससे पहले जुलाई में ₹20,200 करोड़ और अगस्त में ₹29,631 करोड़ का निवेश किया था। अक्टूबर की निकासी के बाद 2026 में अब तक कुल निकासी ₹3.08 लाख करोड़ पहुंच गई है। यह पूरे 2025 में निकाले गए ₹1.66 लाख करोड़ से काफी ज्यादा है।

कच्चे तेल और महंगाई की चिंता

Choice Wealth के धीरज गौर के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मिडिल ईस्ट का तनाव बिकवाली की बड़ी वजह हैं। तेल की कीमत करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। कंपनियों के नतीजों और महंगाई को लेकर चिंता भी बनी हुई है। इसके अलावा, ₹30,213 करोड़ के Jio Platforms IPO ने बाजार की नकदी को कुछ समय के लिए अपनी ओर खींचा।

MIRA Money के आनंद के. राठी ने कहा कि तेल और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की कमाई पर दबाव डाल सकती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें भी विदेशी निवेशकों को वहां निवेश के लिए आकर्षित कर रही हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों और SIP के निवेश से बाजार को सहारा मिल रहा है।

पिछले हफ्ते बिकवाली में कमी

Geojit Investments के वीके विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट, रुपये में मजबूती और बड़े शेयरों के आकर्षक वैल्यूएशन से बिकवाली कम हुई। अमेरिका की 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.36% से घटकर करीब 5% रह गई।

आने वाले हफ्ते में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के ब्याज दर संबंधी फैसले अहम होंगे। अमेरिका की GDP, ब्रेंट क्रूड की कीमतें, वैश्विक संघर्ष और कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Swiggy Share Target: स्विगी के शेयरों में 127% तेजी की उम्मीद, ICICI Securities ने ₹400 का टारगेट दिया

Swiggy Share Target: ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स कंपनी Swiggy के शेयर पर ICICI Securities ने खरीदारी की राय दी है। हालांकि, ब्रोकरेज ने टारगेट ₹520 से घटाकर ₹400 कर दिया है। ₹176 के मौजूदा भाव के मुकाबले यह करीब 127% की संभावित तेजी दिखाता है।

फूड डिलीवरी कारोबार में सुधार

Swiggy का रेवेन्यू दूसरी तिमाही में तिमाही आधार पर 11.1% बढ़कर ₹7,571 करोड़ हो गया। सालाना आधार पर इसमें 36.1% की बढ़ोतरी हुई।

हालांकि, कंपनी को ₹922 करोड़ का नेट लॉस हुआ। फूड डिलीवरी कारोबार में मार्जिन बेहतर हुआ है। इसका एडजस्टेड EBITDA मार्जिन पिछली तिमाही के 3.1% से बढ़कर 3.4% हो गया। ICICI Securities को उम्मीद है कि आने वाली तिमाहियों में इसमें और सुधार हो सकता है।

Instamart पर नजर

Swiggy के क्विक कॉमर्स कारोबार Instamart की ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) दूसरी तिमाही में 16.7% बढ़कर ₹9,230 करोड़ हो गई। सालाना आधार पर इसमें 31.4% की बढ़ोतरी हुई। y

कंपनी ने इस दौरान 69 नए स्टोर जोड़े। सितंबर के अंत तक 133 शहरों में इसके 1,240 स्टोर हो गए थे। हालांकि, इस कारोबार में अभी घाटा हो रहा है। ब्रोकरेज का मानना है कि छूट कम करने और लागत पर नियंत्रण से दूसरी छमाही में मार्जिन सुधर सकता है।

₹400 का टारगेट क्यों दिया?

ICICI Securities ने Swiggy पर BUY रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस ₹520 से घटाकर ₹400 कर दिया है।

ब्रोकरेज ने पूंजी की लागत के अनुमान में बढ़ोतरी और संभावित शेयरों की संख्या को इसकी वजह बताया है। अब कंपनी के लिए फूड डिलीवरी कारोबार में ग्रोथ बनाए रखना और Instamart के घाटे को कम करना अहम होगा।

स्विगी के शेयरों का हाल

स्विगी का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 16.75% की भारी गिरावट के साथ 175 रुपये पर बंद हुआ। निवेशकों ने उम्मीद के मुताबिक नतीजे न रहने पर जमकर बिकवाली की।

पिछले 6 महीने में स्टॉक 38.50% टूटा है। वहीं 1 साल में 58.65% क्रैश हो चुका है। कंपनी का मार्केट कैप भी घटकर 40.42 हजार करोड़ रुपये पर आ गया है।

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