अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को पत्र लिखकर बोइंग विमान खरीदने के फैसले के लिए धन्यवाद दिया है। बांग्लादेश PM तारिक रहमान के नाम से 31 अगस्त को लिखी इस चिट्ठी में ट्रम्प ने लिखा, प्रिय प्रधानमंत्री, मुझे बोइंग विमान खरीदने से संबंधित आपकी चिट्ठी मिली। मैं इस फैसले की बहुत तारीफ करता हूं। बोइंग आपको निराश नहीं करेगा और मैं भी इसे नहीं भूलूंगा। मैं आपसे मिलने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका से 25 बोइंग प्लेन खरीदने की तैयारी में बांग्लादेश बांग्लादेश के पास अभी 14 बोइंग प्लेन हैं। बांग्लादेश ने अप्रैल 2026 में 14 नए बोइंग विमान का ऑर्डर भी दिया था। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने 30 अगस्त को बताया था कि ट्रम्प और रहमान के बीच बोइंग विमानों को लेकर बड़ी डील हुई है। इसके तहत बांग्लादेश 25 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी में है। अमेरिकी टैरिफ से राहत पाने के लिए डील हुई बांग्लादेश की बोइंग खरीद सिर्फ अपनी एयरलाइन का बेड़ा बढ़ाने की योजना नहीं है। इसका एक बड़ा मकसद अमेरिका के साथ व्यापार घाटा कम करना और अमेरिकी टैरिफ में राहत पाना भी है। इसी वजह से बोइंग विमान खरीदने का मुद्दा दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों से भी जुड़ गया है। जब अमेरिका ने बांग्लादेश के सामान पर 37% टैरिफ लगाने की बात कही, तो बांग्लादेश ने अमेरिका से ज्यादा सामान खरीदने की कोशिश शुरू की। इसी दौरान बोइंग से 25 विमान खरीदने की बात सामने आई। बाद में बांग्लादेश ने बोइंग के 14 विमानों का सौदा पक्का किया। इसकी कीमत करीब 3.7 अरब डॉलर है। इसमें 8 बोइंग 787-10, 2 बोइंग 787-9 और 4 बोइंग 737-8 MAX विमान शामिल हैं। पहला विमान नवंबर 2031 में मिलने की उम्मीद है। इस सौदे में अमेरिका का एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक भी मदद करेगा। बैंक लोन की व्यवस्था करेगा और बांग्लादेश सरकार इस लोन की गारंटी देगी। ट्रम्प के दौर में हुईं बड़ी बोइंग डील ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में बांग्लादेश के अलावा कम से कम 6 देशों ने अमेरिका से बोइंग के विमान खरीदने का ऐलान किया है। 1. सऊदी अरब: मई 2025 में ट्रम्प की सऊदी अरब यात्रा के दौरान सऊदी कंपनी एविलीज ने बोइंग के 20 विमान खरीदने का पक्का ऑर्डर दिया। कंपनी ने 10 और विमान खरीदने का विकल्प भी रखा। 2. कतर: मई 2025 में ट्रम्प की कतर यात्रा के दौरान कतर एयरवेज और बोइंग के बीच 210 विमानों तक का समझौता हुआ। व्हाइट हाउस ने इसे दोनों देशों के बीच बड़े आर्थिक समझौतों का हिस्सा बताया। 3. इंडोनेशिया: जुलाई 2025 में अमेरिका से 50 बोइंग विमान खरीदने का वादा किया। इसके बदले अमेरिका ने इंडोनेशियाई सामान पर टैरिफ में कटौती की। 4. जापान: जुलाई 2025 में अमेरिका-जापान व्यापार समझौते के तहत जापान ने 100 प्लेन खरीदने की बात कही। इनमें बोइंग विमान शामिल हैं। 5. चीन: मई 2026 में ट्रम्प ने कहा कि चीन 200 बोइंग विमान खरीदने की तैयारी कर रहा है। बाद में बोइंग ने भी इसकी पुष्टि की। 6. साउथ कोरिया: अगस्त 2025 में साउथ कोरिया ने 103 बोइंग विमान खरीदने का ऐलान किया। इसके बाद ट्रम्प ने उन पर लगा 25% टैरिफ घटाकर 10% कर दिया। ट्रम्प बोइंग विमान खरीदने पर क्यों जोर देते हैं अमेरिका में बड़े यात्री विमान बनाने वाली मुख्य कंपनी बोइंग ही है। वहां दूसरी विमान कंपनियां भी हैं, लेकिन वे ज्यादातर सैन्य या छोटे विमानों के कारोबार में हैं। बड़े यात्री विमानों के मामले में बोइंग ही अमेरिका की बड़ी कंपनी है और उसका सबसे बड़ा मुकाबला यूरोप की एयरबस से है। ट्रम्प की व्यापार नीति का सबसे बड़ा मकसद ही यही है कि दूसरे देश अमेरिका से ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदें। इससे अमेरिका का व्यापार घाटा कम हो सकता है और अमेरिकी कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं। यहां बोइंग बहुत काम आती है, क्योंकि एक यात्री विमान की कीमत ही करोड़ों डॉलर होती है। अगर कोई देश 50, 100 या 200 विमान खरीदने का सौदा करता है तो अमेरिका से होने वाली खरीद का आंकड़ा एक झटके में अरबों डॉलर बढ़ जाता है। इसका फायदा सिर्फ बोइंग को नहीं मिलता। इनके निर्माण से वहां की फैक्ट्रियों, इंजीनियरों और दूसरे कामगारों को रोजगार मिलता है। उदाहरण के लिए, व्हाइट हाउस ने दक्षिण कोरिया की 103 बोइंग विमानों की डील को करीब 36.2 अरब डॉलर का बताया और कहा कि इससे अमेरिका में करीब 1.35 लाख नौकरियों को मदद मिलेगी। ——————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है। पूरी खबर पढ़ें…
Gold Prices Today Fall: भारतीय वायदा बाजार पर सोने की कीमतों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। 24 अगस्त को ₹1,63,229 प्रति 10 ग्राम के अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंचने के बाद, MCX पर सोना अब तक ₹10,700 से ज्यादा टूटकर ₹1,52,514 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) में भी सोना $4,734 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर से गिरकर लगभग $4,420 प्रति औंस पर पहुंच गया है। महज एक सत्र में MCX पर सोना करीब ₹1,900 और COMEX पर $75 तक फिसल गया।
सोने की कीमतों में गिरावट के 4 मुख्य कारण
1. अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका: जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख ने सोने के बाजार को प्रभावित किया है। फेड द्वारा सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना से निवेशक अब सोने से पैसा निकालकर अन्य सुरक्षित और ब्याज देने वाले विकल्पों में लगा रहे हैं।
2. मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल: ब्याज दरें बढ़ने के संकेतों से अमेरिकी डॉलर (USD) मजबूत हुआ है और ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी हुई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सोने की मांग घट जाती है।
3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और महंगाई की चिंता: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करने से बच रहे हैं, जिससे सोने पर दबाव बना हुआ है।
4. घरेलू मांग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर: आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटी एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जरूरत न होने पर सोना न खरीदने की अपील का असर घरेलू सेंटीमेंट पर पड़ा है। इससे भारतीय बाजार में त्योहारी सीजन से पहले ज्वैलरी और रिटेल मांग में थोड़ी सुस्ती की आशंका है।
अगस्त का प्रदर्शन और सितंबर के लिए आउटलुक
ऑगमोंट बुलियन की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने में सोने ने 9.4% और चांदी ने 15% का मजबूत रिटर्न दिया, जो इस साल का सबसे मजबूत मासिक प्रदर्शन था। ऐसे में बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस हफ्ते जारी होने वाले अमेरिकी लेबर मार्केट डेटा सोने की अगली चाल तय करेंगे। अगर डेटा मजबूत आता है तो डॉलर और मजबूत होगा, जिससे सोने में गिरावट जारी रह सकती है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Crude Oil Price: क्रूट ऑयल की कीमतें फिर से चढ़ने लगी हैं। इसकी वजह मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव है। करीब एक महीने बाद अमेरिका के हमले और ईरान के जवाबी हमले की खबर है। ब्रिटिश मेरिटाइम एजेंसी यूनाइटेड किंग्डम मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक ट्रैंकर पर हमले की खबर दी है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जोरदार हमले की धमकी दी है। इससे ब्रेंट क्रूड का प्राइस 1 सितंबर को 92 डॉलर के पार चला गया।
शेयरों पर दिखा क्रूड में उछाल का असर
क्रूड में उछाल का असर शेयर बाजारों पर दिखा। क्रूड ऑयल का इस्तेमाल करने वाली कई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। इनमें पेंट बनाने वाली कंपनियां, एयरलाइंस कंपनियां और टायर कंपनियां शामिल थी। कच्चे तेल की कीमतों के लगातार ऊंचे लेवल पर बने रहने से इन कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका असर उनके मार्जिन पर पड़ता है।
एशियन पेंट्स का शेयर 3.42 फीसदी गिरा
Asian Paints के शेयरों में 1 सितंबर को बड़ी गिरावट दिखी। यह शेयर 3.42 फीसदी गिरकर 2,562 पर बंद हुआ। बर्जर पेंट्स का शेयर भी 1.28 फीसदी गिरकर 491.40 रुपये पर बंद हुआ। JSW Dulux का शेयर 0.46 फीसदी गिरा। Shalimar Paints का शेयर 1.05 फीसदी फिसला।
इंडिगो के शेयर में आई 3.77 फीसदी गिरावट
इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.77 फीसदी गिरकर 5,036 रुपये पर बंद हुआ। स्पाइसजेट का शेयर 3.20 फीसदी की कमजोरी के साथ 9.99 रुपये पर क्लोज हुआ। एयरलाइंस कंपनियों की कुल ऑपरेशन कॉस्ट में एटीएफ की बड़ी हिस्सेदारी होती है। क्रूड ऑयल महंगा होने पर एटीएफ की कीमतें भी बढ़ जाती है। इससे एयरलाइंस कंपनियों का कुल खर्च बढ़ता है।
टायर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव
टायर बनाने वाली कंपनियों में जेके टायर, गुडईयर इंडिया, सीएट के शेयरों में गिरावट आई। गुडईयर का शेयर 0.65 फीसदी गिरकर 738 रुपये पर बंद हुआ। Ceat का शेयर 0.058 फीसदी गिरकर 3,417 पर बंद हुआ। जेके टायर का शेयर 1.41 फीसदी गिरकर 373 रुपये पर बंद हुआ। टायर बनाने में क्रूड ऑयल का इस्तेमाल होता है।
IOCL, HPCL, BPCL के शेयर भी फिसले
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भी 1 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का शेयर 1.89 फीसदी गिरकर 136.50 रुपये पर बंद हुआ। बीपीसीएल का शेयर 2.38 फीसदी फिसला। HPCL का शेयर भी 0.93 फीसदी की गिरावट के साथ 362.35 रुपये पर क्लोज हुआ। कच्चा तेल महंगा होने से इन कंपनियों की कॉस्ट बढ़ जाती है।
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ONGC, Oil India के शेयरों में उछाल
तेल का उत्पादन करने वाली ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। ONGC का शेयर 2.02 फीसदी चढ़कर 236.49 रुपये पर बंद हुआ। Oil India का शेयर 1.31 फीसदी चढ़कर 489.50 रुपये पर पहुंच गया। क्रूड महंगा होने से अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा होता है।
GDP Growth: इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अच्छा रहा है। जून तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ 7.8 फीसदी रही। यह एनालिस्ट्स और इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा है। खास बात यह है कि जून तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ तब 7.8 फीसदी रही, जब वैश्विक स्थितियां काफी चैलेंजिंग थीं।
मार्च तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी
इस साल मार्च तिमाही में भारत में जीडीपी ग्रोथ 8.6 फीसदी थी। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन (MoSPI) ने 31 अगस्त को जून तिमाही के जीडीपी के डेटा जारी किए। जीडीपी की ग्रोथ अनुमान से ज्यादा रही। मनीकंट्रोल के पोल में इकोनॉमिस्ट्स ने जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था।
जून तिमाही में जीवीए 8.2 फीसदी रहा
जून तिमाही में ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) 8.2 फीसदी रहा। मार्च तिमाही में यह 8.7 फीसदी था। जीवीए का मतलब इकोनॉमी में उत्पादित गुड्स और सर्विसेज की कुल वैल्यू से है। इसमें नेट इनडायरेक्ट टैक्स शामिल नहीं होता है। जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के शानदार प्रदर्शन में सर्विसेज और इनवेस्टमेंट का बड़ा हाथ है।
पहली तिमाही में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ सबसे ज्यादा
जून तिमाही में सर्विसेज का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इसकी ग्रोथ 10 फीसदी रही। एक साल पहले की समान अवधि में सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ 8 फीसदी थी। मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 9.2 फीसदी रही। कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ 7.7 फीसदी रही। ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन और ब्रॉडकास्टिंग से संबंधित सर्विसेज सेगमेंट की ग्रोथ 8.5 फीसदी रही।
पहली तीमाही में मध्यपूर्व में लड़ाई का असर इकोनॉमी पर
जून तिमाही का मतलब अप्रैल, मई और जून के महीनों से है। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को लड़ाई शुरू हुई थी। जून तिमाही में ज्यादातर समय ईरान को अमेरिकी हमले का सामना करना पड़ा। ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए।
क्रूड ऑयल की कीमतें काफी समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहीं
इस दौरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से क्रूड ऑयल सहित दूसरी कमोडिटीज की सप्लाई पर काफी ज्यादा असर पड़ा। क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गईं। लेकिन, सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर जारी रखने से आर्थिक गतिविधियों को काफी सपोर्ट मिला।
प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा
जून तिमाही में प्राइवेट फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 7.1 फीसदी बढ़ा। इससे परिवारों में होने वाली खपत का पता चलता है। ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 11.9 फीसदी बढ़ा, जबकि सरकार का फाइनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर 4.3 फीसदी बढ़ा। जून तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के डेटा ऐसे वक्त आए हैं, जब इनफ्लशन से जुड़े रिस्क बढ़ रहा है।
FY27 में 5 फीसदी रह सकता है रिटेल इनफ्लेशन
पिछले हफ्ते मनीकंट्रोल के पोल में शामिल इकोनॉमिस्ट्स का यह मानना था कि FY27 में रिटेल इनफ्लेशन 5 फीसदी रह सकता है। इसकी रेंज 4.7 से 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया। इसकी कई वजहें हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई हैं। देश में मानसून की बारिश एक समान नहीं रही है। इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा।
Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचा तो कच्चा तेल उबल पड़ा। इसकी आंच में एशियाई मार्केट झुलस गया और घरेलू मार्केट में भी बिकवाली की आंधी चलने लगी। इस दबाव में सेंसेक्स 513 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का दबाव तेज रहा लेकिन मिडकैप में रिकवरी दिखी। निफ्टी स्मॉलकैप 100 शुरुआती कारोबार में करीब आधे फीसदी की गिरावट से उबरते हुए अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए लेकिन निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी से अधिक टूट गया।
सेक्टरवाइज मार्केट को आज प्राइवेट बैंकों और फार्मा कंपनियों ने संभालने की काफी कोशिश की लेकिन मेटल और एफएमसीजी का दबाव अधिक भारी पड़ गया। आईटी सेक्टर ने रिकवरी की काफी कोशिश की लेकिन 1% से अधिक गिरावट से उबरते हुए इसकी गिरावट आधे फीसदी से थोड़ी कम रह ही गई। वहीं निफ्टी प्राइवेट में करीब 1% तो निफ्टी फार्मा में आधे फीसदी से अधिक की बढ़त रही तो निफ्टी मेटल करीब ढाई फीसदी और निफ्टी एफएमसीजी डेढ़ फीसदी से अधिक नीचे आ गया। इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।
अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 31 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 307.24 प्वाइंट्स यानी 0.40% की फिसलन के साथ 76,957.27 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 95.25 प्वाइंट्स यानी 0.39% की कमजोरी के साथ 24,080.40 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 513.19 प्वाइंट्स फिसलकर 76,751.32 और निफ्टी 182.05 प्वाइंट्स गिरकर 23,993.60 तक आ गया था।
निवेशकों के ₹3.79 लाख करोड़ स्वाहा
एक कारोबारी दिन पहले यानी 28 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,94,12,415.27 करोड़ था। आज यानी 31 अगस्त 2026 को यह घटकर ₹4,90,33,359.29 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹379,055.98 करोड़ की गिरावट आई है।
Sensex के 10 स्टॉक्स ग्रीन
सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ 10 ही आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ अदाणी पोर्ट्स, आईटीसी और एयरटेल में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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इन चार वजहों से आज मार्केट में कोहराम
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इस्ट जोन बनाम सेंट्रल जोन की दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल मैच में वैभव सूर्यवंशी भले ही 8 रनों से शतक चूक गए हों लेकिन उन्होंने दलीप ट्रॉफी में सबसे अर्धशतक जमा कर सबसे कम उम्र में यह कारनमा किया। वैभव सूर्यवंशी ने 15 साल 157 दिनों में दिलीप ट्रॉफी में अर्धशतक जड़ा इससे पहले उनसे युवा सिर्फ लक्ष्मण सिंह थे जिन्होंने 16 साल 23 दिनों में अर्धशतक जमाया था।
Another day, another record for Vaibhav Sooryavanshi. He has now become the youngest player to score a fifty in the Duleep Trophy. Destined for greatness. pic.twitter.com/WYV9c7YE6Q
— R A T N I S H (@LoyalSachinFan) August 31, 2026
लाल गेंद के टूर्नामेंट दिलीप ट्रॉफी में वैभव सफेद गेंद की तरह ही खेले और उन्होंने 81 गेंदों में खेली 92 रनों की पारी में 7 चौके और छक्के लगाए। इससे पहले ईस्ट जोन के उपकप्तान वैभव सूर्यंवशी ने दलीप ट्रॉफी क्वार्टरफाइनल में नॉर्थ इस्ट जोन के खिलाफ 4 गेंदों में 2 विकेट चटकाए थे । उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के किशन को 25 रनों पर और इमलिवती को 4 रनों पर आउट किया था।
15 साल के इस खिलाड़ी के लिए यह सीज़न शानदार रहा है। इस उभरते हुए बल्लेबाज ने इंग्लैंड में तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 14, 13 और 15 रन बनाए। इनमें से दो पारियों में सूर्यवंशी जोफ्रा आर्चर की शॉर्ट गेंद पर आउट हुए। इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपने डेब्यू में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के बाद, सूर्यवंशी ने ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ में प्रभावित किया। वहाँ उन्होंने कई मैचों में जीत दिलाने वाला प्रदर्शन किया और ‘प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़’ चुने गए।
92 पे कौन छक्का मारने जाता है वैभव सूर्यवंशी?
खैर अगली बार!!!!
लॉफ्टेड स्ट्रेट ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव, कवर ड्राइव, शॉट खेलने की कोशिश और चूकना, एज, कभी-कभार फॉरवर्ड डिफेंस या लाइन के अंदर खेलना। जब वैभव सूर्यवंशी क्रीज़ पर हों, तो आप कोई भी गेंद मिस नहीं कर सकते। टीवी पर नजर…— Abanish Sinha (@abanish_Bihar) August 31, 2026
हालांकि इस 15 वर्षीय खिलाड़ी ने बिहार के लिए आठ प्रथम श्रेणी मैचों की 12 पारियों 17 से अधिक के औसत से रन बनाए हैं जो कि आकर्षक नहीं हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 93 रन है।ईस्ट ज़ोन ने एक मज़बूत टीम चुनी है जिसमें कई अनुभवी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी शामिल हैं। चुने गए प्रमुख खिलाड़ियों में भारत के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी, बंगाल के कप्तान अभिमन्यु ईश्वरन, तेज़ गेंदबाज़ मुकेश कुमार, ऑलराउंडर शाहबाज़ अहमद और विकेटकीपर-बल्लेबाज़ कुमार कुशाग्र शामिल हैं।
KPSC Exam Scam: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद उन्हें फर्स्ट एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आवास पर उनके सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि बाद में उन्हें परप्पना अग्रहारा जेल ले जाया गया। सूत्रों के अनुसार, जज ने निर्देश दिया कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी गंगवार को सोमवार 31 को अदालत में पेश किया जाए।
सीआईडी उनकी हिरासत की मांग कर सकती है। इससे पहले सीआईडी अधिकारियों ने शुक्रवार और शनिवार को गंगवार से पूछताछ की। वह जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए जारी नोटिस के जवाब में पहुंचे थे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गंगवार से पूछताछ इसलिए की जा रही थी क्योंकि वह फरवरी 2024 से मार्च 2026 तक कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) पद पर तैनात थे।
MSME के डायरेक्टर पद पर थे तैनात
उन्होंने बताया कि जांच में सहयोग नहीं करने के आरोप में उन्हें हिरासत में लिया गया। 2016 बैच के आईएएस अधिकारी गंगवार फिलहाल उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) के निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। सीआईडी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है। इसमें परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और ओएमआर शीट के रखरखाव तथा इसमें शामिल अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
ED रेड के निशाने पर आए IAS
सूत्रों के अनुसार, सीआईडी आगे की जांच के लिए गंगवार को संबंधित अदालत में पेश कर उनकी हिरासत की मांग कर सकती है। हाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से केपीएससी में कथित अनियमितताओं के संबंध में छापेमारी किए जाने के बाद अधिकारी के पता-ठिकाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।
इसके बाद राज्य के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा था कि गंगवार ने उन्हें सूचित किया था कि वह अपने पिता की तबीयत से जुड़ी आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश स्थित अपने पैतृक गांव गए थे। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने भी इस अधिकारी से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया था। अधिकारियों के अनुसार, केपीएससी से जुड़ी अनियमितताओं के मामले में सीआईडी और ईडी द्वारा अलग-अलग जांच की जा रही है।
भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं की जांच तेज
KPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर CID की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। इसी क्रम में गंगवार से भी दो दिनों तक पूछताछ की गई।
अब उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित अनियमितताओं में उनकी क्या भूमिका थी और परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। फिलहाल IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार न्यायिक हिरासत में हैं। फिलहाल, मामले की जांच CID के स्तर पर जारी है।
Mohan Bhagwat Canada Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में आयोजित ‘हिंदू विश्व बंधु-एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदू पहचान, विविधता, एकता और भारत की सभ्यतागत सोच पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द को किसी एक भाषा, पूजा पद्धति या जीवनशैली तक सीमित नहीं किया जा सकता। हिंदू विचारधारा की मूल भावना अलग-अलग विविधताओं को स्वीकार करने और उनमें मौजूद एकता को पहचानने की है।
मोहन भागवत ने आगे कहा कि हिंदू की पहचान किसी खास भाषा, पूजा के तरीके या जीवन जीने की शैली से तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि हिंदू विचार सभी को स्वीकार करने और सभी का सम्मान करने की भावना पर आधारित है।
उन्होंने कहा, “जब मैं हिंदू कहता हूं तो हिंदू शब्द को किसी विशेष भाषा, किसी विशेष पूजा या किसी विशेष जीवनशैली से परिभाषित नहीं किया जा सकता।” भागवत ने जोर देकर कहा कि हिंदू विचारधारा में ‘सबका सम्मान और सबकी स्वीकृति’ का भाव है।
‘विविधता स्वाभाविक है, एकता वास्तविकता’
RSS प्रमुख ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि देश में जाति, पंथ और भाषाओं की अनेकता हमेशा से रही है। उनके मुताबिक, अलग-अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन एकता मूल वास्तविकता है।
उन्होंने कहा, “कई जातियां हैं, कई पंथ हैं, कई भाषाएं हैं। सब कुछ अनेक है। विविधता स्वाभाविक है, जबकि एकता वास्तविकता है।” भागवत ने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यतागत सोच यह सिखाती है कि विविधता को एकता के लिए खतरा नहीं माना जाना चाहिए। बल्कि उसका सम्मान और संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विविधता एकता की अभिव्यक्ति है। यही विविधता समाज को सुंदर बनाती है।
‘हिंदू जागे तो दुनिया जागेगी’
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में सेवा और मानवता की भावना को भी हिंदू विचार से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा जरूरतमंदों की मदद करने की रही है और कई बार भारत ने बिना मांगे भी दूसरों की सहायता की है। उन्होंने कहा, “जब भी दुनिया में कहीं भारत से मदद मांगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मांगे भी मदद का हाथ बढ़ाया। यही भारत की परंपरा और उसका डीएनए है।”
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि आपने यह बात सुनी होगी कि अगर हिंदू जागता है तो दुनिया जागती है। भागवत ने कहा कि हिंदू आध्यात्मिक परंपरा लोगों को विविधता के भीतर एकता देखने की सीख देती है। इसमें केवल मनुष्यों ही नहीं। बल्कि जीव-जंतुओं और निर्जीव प्रकृति के साथ भी जुड़ाव की भावना पर जोर दिया जाता है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ का किया जिक्र
RSS प्रमुख ने अपने भाषण में भारत की प्राचीन अवधारणा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे पूरी दुनिया को एक परिवार मानने वाली सोच बताया। उन्होंने कहा कि खुले विचारों वाले और ज्ञान रखने वाले लोग इस विचार को स्वीकार करते हैं कि पूरी पृथ्वी एक परिवार है। भागवत के मुताबिक, इंसानों के बीच बाहरी रूप-रंग को लेकर भले ही अंतर दिखाई दे। लेकिन मूल रूप से सभी एक हैं। इसी सोच से दूसरों की सेवा करने का दायित्व पैदा होता है। उन्होंने कहा, “दूसरों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है। हमने यह ज्ञान प्राप्त किया है, जो हमें स्थायी खुशी और संतुष्टि देता है।”
‘भारत विश्वगुरु बना, महाशक्ति बनकर नहीं’
मोहन भागवत ने भारत के वैश्विक प्रभाव की तुलना केवल सैन्य या आर्थिक ताकत से करने के बजाय सेवा और मानवीय मूल्यों से की। उन्होंने कहा कि भारत ने दुनिया पर अपना प्रभाव किसी सुपरपावर के रूप में नहीं बनाया, बल्कि अपने चरित्र और दुनिया की सेवा के कारण ‘विश्वगुरु’ बना। उन्होंने कहा, “कोई भारत को सुपरपावर कह सकता है, लेकिन भारत सुपरपावर नहीं था। उसने दुनिया की सेवा की और अपने चरित्र के कारण ‘विश्वगुरु’ बना, ‘महाशक्ति’ नहीं।”
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का उदाहरण
भागवत ने भारत की शरण देने की परंपरा को समझाने के लिए इतिहास के कई उदाहरण दिए। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलिश शरणार्थियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब पोलैंड के लोग युद्ध और संकट के कारण परेशान थे, तब जामनगर के महाराजा ने उन्हें शरण और सुरक्षा दी। उन्हें तब तक संरक्षण दिया गया, जब तक वे सुरक्षित रूप से अपने देश लौटने की स्थिति में नहीं आ गए।
न्होंने भारत की हालिया मानवीय सहायता का भी उदाहरण दिया। भागवत ने मध्य-पूर्व के एक युद्ध क्षेत्र से भारतीय नागरिकों की निकासी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सैन्य विमानों ने न केवल भारतीयों बल्कि सात अन्य देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला।
US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने एक बार फिर से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान पर जमकर बमबारी की है। अमेरिका ने ईरान के लारक द्वीप (Larak Island) पर हमला कर वहां मौजूद दो मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया है। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। यह करीब एक महीने में अमेरिका की ईरान के खिलाफ पहली मिलिट्री एक्शन है।
इस हमले से फरवरी से रुक-रुक कर चल रही लड़ाई में आई शांति टूट गई है। ईरान ने इसे जानलेवा हमला बताते हुए बदला लेने की घोषणा की है। इससे एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी हमले को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह जुलाई के अंत के बाद ईरान पर अमेरिका का पहला बड़ा हमला है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कमांडर टिम हॉकिन्स ने CBS News को बताया कि IRGC की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। BBC के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने देखा था कि ईरानी बल होर्मुज जलडमरूमध्य में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें (Sea Mines) लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे।
लारक द्वीप पर क्यों हुआ हमला?
लारक द्वीप ईरान के महत्वपूर्ण बंदरगाह बंदर अब्बास के बिल्कुल करीब स्थित है। यह रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य के बीचों-बीच आता है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान फिलहाल इस इलाके से गुजरने वाले टैंकरों को लारक द्वीप के पास से होकर जाने और जांच कराने के लिए मजबूर कर रहा है।
कुछ जहाजों से कथित तौर पर 20 लाख डॉलर तक का शुल्क लिए जाने की बात भी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान की ओर से समुद्री सुरंगें बिछाने की तैयारी को देखते हुए लारक द्वीप पर मौजूद लॉन्चरों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने दी बदले की धमकी
ईरानी सेना IRGC ने अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की है। इसे ट्रंप प्रशासन की बड़ी रणनीतिक और घातक गलती बताया। IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेब्बी ने कहा कि इस गलत आकलन की कीमत अमेरिका को आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर चुकानी पड़ेगी। ईरान की IRGC से जुड़े तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, लारक द्वीप पर हमला ड्रोन के जरिए किया गया। एजेंसी ने दावा किया कि हमले में दो लोगों की मौत हुई है। जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया।
जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमला
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, IRGC ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों किंग हुसैन और अल-अजराक को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। IRGC का दावा है कि इन हमलों में अमेरिकी ठिकानों के तकनीकी ढांचे, रखरखाव सुविधाओं और लड़ाकू विमानों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहां भारी नुकसान हुआ है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने देश के हवाई क्षेत्र में घुसी आठ मिसाइलों को रोक लिया है। जॉर्डन की सरकारी न्यूज एजेंसी पेट्रा के अनुसार, सेना के प्रवक्ता ने बताया कि ये मिसाइलें सोमवार तड़के देश के हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई थीं।
ट्रंप ने दी थी समुद्री सुरंगों पर चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों को या तो नष्ट कर दिया गया है या हटा दिया गया है। ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने दोबारा किसी जहाज या नाव के जरिए नई सुरंगें बिछाने की कोशिश की तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि, ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ट्रंप के इस दावे को ‘प्रचार और भ्रम फैलाने वाली बात’ बताया है।
ईरान पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिका ने 24 अगस्त को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का ऐलान किया था। इनका उद्देश्य ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अलग-थलग करना तथा उसके सहयोगी देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंधों का दबाव बढ़ाना है। ईरानी अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने इन प्रतिबंधों को पहले से जारी अमेरिकी आर्थिक दबाव का ही विस्तार बताया है। ईरान का आरोप है कि अमेरिका सैन्य संघर्ष में असफल रहने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल इस्तेमाल होने वाले तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का करीब 20% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था। इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह का सैन्य टकराव या समुद्री ट्रैफिक में रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
छह महीने से जारी है ईरान युद्ध
अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाया था। इस संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री ट्रैफिक लगभग बंद हो गया था।
अब लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और उसके बाद जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी जवाबी कार्रवाई ने इस लंबे संघर्ष को एक बार फिर गंभीर मोड़ पर ला दिया है। सबसे बड़ी टेंशन यह है कि होर्मुज में फिर से सैन्य टकराव बढ़ा तो इसका सीधा असर दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया। जुलाई के के बाद ईरान पर यह पहला अमेरिकी हमला है। अमेरिकी सेना ने बताया कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जवान होर्मुज स्ट्रेट में रॉकेट और समुद्री बारूदी सुरंगें लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे, तभी अमेरिकी सेना ने कार्रवाई की। ईरान के सेमी-ऑफिशियल मीडिया ने लारक द्वीप के पास धमाकों की आवाज सुनाई देने की जानकारी दी। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका ने द्वीप पर ड्रोन से हमला किया। ईरानी सेना ने बताया कि हमले में उनके कई सैनिक और नागरिक मारे गए हैं। कई घायल हैं। ईरान ने हमले का जवाब देने और जिम्मेदार लोगों को सजा देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी सेना ने हाल ही में हटाई थीं बारूदी सुरंगें अमेरिकी सेना ने पिछले हफ्ते होर्मुज स्ट्रेट के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का काम पूरा किया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कहा था कि अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मौजूद सभी सुरंगों को हटा दिया गया या निष्क्रिय कर दिया गया है। ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई जहाज या नाव होर्मुज स्ट्रेट में नई समुद्री सुरंगें बिछाने की कोशिश करेगी, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए क्यों अहम? होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच का प्रमुख समुद्री रास्ता है। दुनिया के तेल और गैस कारोबार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। संघर्ष से पहले दुनिया में इस्तेमाल होने वाले करीब पांचवें हिस्से के तेल की आवाजाही इसी रास्ते से होती थी। यही वजह है कि होर्मुज में तनाव बढ़ने या जहाजों की आवाजाही रुकने से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच यहां बढ़ती सैन्य गतिविधि को इसी कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर माना जा रहा है। फरवरी से जारी है अमेरिका-इजराइल और ईरान का युद्ध अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों पर हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। संघर्ष को अब छह महीने से ज्यादा हो चुके हैं और हाल के हफ्तों में स्थिति गतिरोध जैसी बनी हुई है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के अलावा लेबनान में इजराइली हमलों से भी भारी नुकसान हुआ है। इन हमलों में हजारों लोगों की मौत और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की जानकारी है। होर्मुज को अमेरिका का इलाका बता चुके हैं ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपतिट्रम्प होर्मुज स्ट्रेट को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी नया अमेरिकी इलाका बता चुके हैं। 18 अगस्त को उन्होंने पहली बार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी। इसके बाद उन्होंने 23 अगस्त को ट्रुथ सोशल पर दोबारा ऐसी तस्वीर शेयर की, जिसमें होर्मुज को अमेरिकी इलाके के तौर पर दिखाया गया। जंग के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज जंग शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी। ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है। ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… ईरान होर्मुज में जहाजों से टोल वसूलेगा, संसद की मंजूरी ईरान की संसद ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल यानी टैक्स या फीस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिन देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, उनसे समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

