अंग्रेजों ने भारत से लूटे 200 ट्रिलियन डॉलर! कभी दुनिया की 27% GDP था भारत, जानिए यहां से कितना लेकर गए

भारत और 15 अगस्त को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। देश को 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। लेकिन आजादी मिलने के बाद देश को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा था। आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में थी। अंग्रेजों ने करीब 200 साल तक भारत के संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल अपने लिए किया। वहीं करीब 200 साल के ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के संसाधनों और संपदा का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ब्रिटेन के हितों के लिए किया गया।

न्यूज 18 के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों के पुराने आकलनों के मुताबिक, 1765 से 1938 के बीच ब्रिटिश क्राउन और ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत से करीब 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति बाहर ले गई। लंबे समय तक चले इस आर्थिक शोषण का असर भारत की आर्थिक स्थिति पर पड़ा और आजादी के समय देश को कई बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

नेहरू के सामने बड़ी समस्या

1947 के बाद पीएम जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालना, उद्योगों को बढ़ावा देना और देश में बुनियादी ढांचे का विकास करना था। लगभग दो शताब्दियों के औपनिवेशिक शासन के बाद भारत को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार को लंबे समय तक बड़े स्तर पर काम करना पड़ा।

करीब 200 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति गई बाहर

पुराने अनुमानों को अगर आज की आर्थिक स्थिति के हिसाब से देखा जाए और उनमें महंगाई, निवेश पर मिलने वाले रिटर्न और मौजूदा बाजार मूल्य को शामिल किया जाए, तो भारत से बाहर गई संपत्ति की अनुमानित कीमत 2026 में करीब 200 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ये आंकड़ा बताते हैं कि ब्रिटिश शासन में भारत की संपदा बाहर जाती रही, जिससे आजादी के समय देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हो गई।

‘काउंसिल बिल्स’ बड़ा तरीका

भारत से पैसा बाहर ले जाने का एक बड़ा तरीका ‘काउंसिल बिल्स’ व्यवस्था थी। 1765 से पहले ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से कपड़ा, मसाले और शोरा खरीदने के लिए ब्रिटेन से लाया गया सोना-चांदी इस्तेमाल करती थी। लेकिन बंगाल में टैक्स वसूलने का अधिकार मिलने के बाद कंपनी ने तरीका बदल दिया। इसके बाद भारत से मिले टैक्स के पैसे से ही भारतीय सामान खरीदा जाने लगा और इस तरह भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन पहुंचने लगा।

  1. टैक्स वसूली: भारतीय किसानों और व्यापारियों से सीधे टैक्स लिया जाता था।
  2. टैक्स से खरीदारी: ब्रिटिश सरकार टैक्स से जुटाए गए राजस्व का करीब एक-तिहाई हिस्सा भारतीय सामान खरीदने में इस्तेमाल करती थी, जिसे बाद में ब्रिटेन भेज दिया जाता था।
  3. बिना असली भुगतान: भारतीयों को उनके ही टैक्स के पैसे से भुगतान किया जाता था, जिससे ब्रिटेन को भारत का कीमती सामान लगभग मुफ्त में मिलता था।

GDP में आई गिरावट

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया। 1700 के आसपास भारत का वैश्विक GDP में हिस्सा करीब 27% बताया जाता है, लेकिन 1947 तक यह घटकर 3% से भी कम रह गया। ब्रिटिश नीतियों का असर भारत के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा। भारतीय कपड़ों पर ब्रिटेन में भारी टैक्स लगाया गया, जबकि ब्रिटिश सामान भारत में आसानी से बिकने लगा। इससे ढाका, मुर्शिदाबाद और सूरत जैसे पुराने औद्योगिक केंद्रों को बड़ा नुकसान हुआ। काम कम होने के बाद कई कारीगर और बुनकर खेती पर निर्भर हो गए और भारत धीरे-धीरे तैयार सामान के बजाय कपास, अफीम और नील जैसी कच्ची उपज के निर्यातक देश के रूप में बदल गया।

दूसरे विश्व युद्ध में हुआ नुकसान

1858 के बाद भी भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा ब्रिटिश सरकार से जुड़े खर्चों पर ही लगाया जाता रहा। ‘होम चार्ज’ के तहत भारतीय करदाताओं के पैसों से ब्रिटिश अधिकारियों की पेंशन, रेलवे निवेश पर ब्याज और विदेशों में ब्रिटिश सेना के अभियानों का खर्च उठाया जाता था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान यह आर्थिक दबाव और बढ़ गया। युद्ध के खर्च और कर्ज का असर भारत में महंगाई और खाद्य संकट के रूप में दिखाई दिया। लंबे समय तक चले इस आर्थिक बोझ के कारण 1947 में आजादी मिलने तक भारत की अर्थव्यवस्था बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुकी थी।

आज दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत

आजादी के समय भारत की नई सरकार के सामने पैसों और संसाधनों की बड़ी कमी थी। देश में गरीबी और खाद्य संकट गंभीर था, उद्योग कमजोर हो चुके थे और विभाजन के बाद बड़ी संख्या में आए शरणार्थियों के पुनर्वास की जिम्मेदारी भी सरकार पर थी। सीमित सरकारी खजाने के बावजूद सड़कों, बिजली, सिंचाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं के विकास पर काम शुरू करना पड़ा। लेकिन, आजादी के बाद के दशकों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रगति की और आज वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। देश अब लंबे समय के विकास लक्ष्यों पर ध्यान देते हुए अपनी आर्थिक ताकत को और बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

PM Modi Achievements: ‘डिफेंस प्रोडक्शन 4 गुना, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 7 गुना…’, PM मोदी ने 12 साल की यात्रा का किया जिक्र

PM Modi Achievements: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से अपनी सरकार के पिछले 12 साल के कामकाज और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की तरक्की 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प और सामर्थ्य से संभव हुई है।

इस दौरान पीएम मोदी ने पिछले 12 साल में अलग-अलग क्षेत्रों में हुई प्रगति के आंकड़े भी बताए। उन्होंने कहा, “पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ा है। खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन 5 गुना बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ी है। मोबाइल फोन का उत्पादन 33 फीसदी बढ़ा है और डिजिटल ट्रांजैक्शन में 100 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने आगे कहा: “कोई देश तब महान बनता है और अपने लक्ष्य हासिल करता है जब वह अपने सपनों, अपने संकल्प और अपनी अंदरूनी ताकत के दम पर आगे बढ़ता है। अब छोटे सपनों से काम नहीं चलेगा। हमें बड़े सपने देखने होंगे, क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को बड़ा करते हैं और हमारे नजरिए का दायरा बढ़ाते हैं। हमारा संकल्प अडिग होना चाहिए। जब हमारा संकल्प पक्का होता है, तो मुश्किलों और आपदाओं के बीच भी आगे बढ़ने का रास्ता बनाने की क्षमता अपने आप पैदा हो जाती है…”

प्रधानमंत्री ने भारत की तेजी से हो रही तरक्की के बारे में बताते हुए कहा: “2014 से पहले, यानी 12 साल पहले, हमारे देश में सिर्फ 70 शहरों में ही पाइप से गैस पहुंचाने की सुविधा थी। इन 12 सालों में हमने इस संख्या को 70 शहरों से बढ़ाकर 700 शहर कर दिया है। इसी को तेज़ी और विस्तार कहते हैं। 2014 से पहले, पाइप वाली गैस मुश्किल से 20-22 लाख घरों तक पहुंचती थी। आज, लगभग 1.75 करोड़ घरों तक पाइप वाली गैस पहुंचाने का काम चल रहा है। बारह साल पहले, देश की सोलर एनर्जी क्षमता सिर्फ 2 GW थी। सिर्फ 2 GW। आज यह 160 GW है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे समुद्री क्षेत्र के 99 फीसदी हिस्से को नो-गो एरिया घोषित कर दिया गया था। इस सोच की वजह से हमने खुद ही समुद्र में खोज और संसाधनों की तलाश का काम रोक रखा था। यह हमारी सोच की कमी थी। हमने तय किया कि ऐसा अब नहीं चल सकता। इसलिए जिस 99 फीसदी हिस्से को पहले नो-गो एरिया कहा गया था, उसे अब खोज और काम के लिए खोल दिया गया है।”

पीएम मोदी ने अंत कहा, “हमने PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की। और यह खुशी की बात है कि इतने कम समय में 50 लाख परिवार अब सोलर एनर्जी का इस्तेमाल कर रहे हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि हमारे रेलवे सिस्टम का इलेक्ट्रिफिकेशन 1925 में शुरू हुआ था। लेकिन 1925 से 2014 तक, यानी 90 सालों में, रेलवे नेटवर्क का सिर्फ 30 प्रतिशत हिस्सा ही इलेक्ट्रिफाई हो पाया था। यानी 90 सालों में सिर्फ 30 प्रतिशत। हमारी रफ्तार देखिए। अपने लक्ष्यों को पाने का हमारा संकल्प देखिए। हमने पिछले एक दशक में 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा कर लिया है।”

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लाल किले से 75 मिनट बोले PM मोदी, 4 साल में सबसे छोटा रहा भाषण, जानें किन बड़े मुद्दों पर किया फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित किया। यह उनका लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस भाषण था। करीब 75 मिनट के संबोधन में उन्होंने भारत के विकास, आत्मनिर्भरता, युवाओं, तकनीक और देश के भविष्य को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने देशवासियों से बड़े लक्ष्य तय करने और मिलकर भारत को आगे बढ़ाने की अपील की।

75 मिनट का रहा भाषण

इस साल पीएम मोदी का भाषण 75 मिनट का रहा। 2025 में उन्होंने 103 मिनट का भाषण दिया था, जो उनका अब तक का सबसे लंबा संबोधन था। 2024 में उनका भाषण 98 मिनट और 2016 में 96 मिनट का रहा था। वहीं 2017 में उन्होंने 56 मिनट का सबसे छोटा भाषण दिया था। पीएम मोदी ने 2014 में पहली बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर भाषण दिया था। तब उनका संबोधन 65 मिनट का था। इसके बाद 2015 में 88, 2018 में 83, 2019 में करीब 92 और 2020 में 90 मिनट का भाषण रहा। 2021 में 88, 2022 में 74 और 2023 में 90 मिनट तक उन्होंने देश को संबोधित किया।

लगातार 13वीं बार लाल किले से संबोधन

2026 में पीएम मोदी ने लगातार 13वीं बार लाल किले से स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित किया। पिछले साल लगातार 12 बार भाषण देने के बाद वह इंदिरा गांधी से आगे निकल गए थे। अब वह इस मामले में केवल जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं। नेहरू ने लगातार 17 बार लाल किले से भाषण दिया था।

वंदे मातरम् और तिरंगे का जिक्र

पीएम मोदी ने भाषण की शुरुआत वंदे मातरम् और तिरंगे के जिक्र से की। उन्होंने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को नमन किया। उन्होंने कहा कि आजादी के लिए अपना जीवन देने वाले वीरों को देश हमेशा याद रखेगा।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

पीएम मोदी ने कहा कि भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहिए। देश ने 2047 तक विकसित भारत बनने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि यह सपना तभी पूरा होगा, जब सरकार के साथ देश के नागरिक भी इसमें अपनी भूमिका निभाएंगे।

12 साल की उपलब्धियों का जिक्र

प्रधानमंत्री ने अपने 12 साल के कार्यकाल में हुए बदलावों की भी बात की। उन्होंने कहा कि करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, रेलवे और खादी जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ोतरी हुई है। डिजिटल लेन-देन और सौर ऊर्जा में भी देश ने तेजी से प्रगति की है।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत को जरूरी बताते हुए मेक इन इंडिया, स्वदेशी और लोकल फॉर लोकल पर जोर दिया। उन्होंने सेमीकंडक्टर, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत को मजबूत बनाने की बात कही।

सप्तधारा और युवाओं पर फोकस

प्रधानमंत्री ने विकास के लिए सप्तधारा का जिक्र किया। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, तकनीक, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर शामिल हैं। उन्होंने युवाओं को देश की बड़ी ताकत बताया। छात्रों के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग देने का ऐलान किया। साथ ही एक करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य भी बताया। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति विकसित भारत बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में था भारत, 12 साल में इस कैटेगरी से निकलकर बना सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था: PM मोदी

भारत को कभी ‘फ्रेजाइल फाइव’ में गिना जाता था। लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ‘फ्रेजाइल फाइव’ से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था में बदल गया है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कही। ‘फ्रेजाइल फाइव’ वैश्विक वित्तीय और आर्थिक जगत में इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द है, जिसका अर्थ है ”5 नाजुक या कमजोर अर्थव्यवस्थाएं।” इनमें भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्किये को रखा गया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 में आजादी के बाद भारत के बड़े सपने थे, लेकिन प्रगति अक्सर उस गति से कम रही, जिसे हासिल करने की देश की आकांक्षा थी। आज भारत अभूतपूर्व गति और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और अब कोई भी ताकत 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प को नहीं रोक सकती। भारत का 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का बड़ा सपना है, जो 140 करोड़ भारतीयों की ताकत और संकल्प से साकार होगा।

उन्होंने कहा, ”जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला राष्ट्र एक विकसित देश बनने का लक्ष्य निर्धारित करता है, तो यह दुनिया को एक शक्तिशाली संदेश देता है और इससे दुनिया का भारत को देखने का नजरिया भी बदल रहा है।” यह भी कहा कि कोई भी देश तब महान बनता है जब वह अपनी उपलब्धियां हासिल करता है। भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे बढ़ने के बजाय बड़े सपने देखने होंगे और ऊंचे संकल्प लेने होंगे। बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और संकल्प दृढ़ होने पर कठिनाइयों व आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप सामने आता है।

रक्षा उत्पादन 4 गुना, डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा

पिछले 12 वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों पर रोशनी डालते हुए पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा उत्पादन 4 गुना बढ़ गया है, इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग 7 गुना बढ़ गई है, आधुनिक रेलवे कोच के उत्पादन में 21 गुना वृद्धि हुई है, इंटरनेट यूजर्स की संख्या 4 गुना बढ़ गई है और डिजिटल लेनदेन 100 गुना बढ़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के करोड़ों नागरिकों ने, चाहे वे दलित हों, पीड़ित हों, वंचित हों, आदिवासी हों, गांव या शहर में रहने वाले हों, गरीब या मध्यम वर्ग के हों और देश के किसी भी हिस्से से आते हों, एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगदान दिया है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि इतने कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।

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दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। दुनिया में बहुत कुछ सस्ता और जल्दी मिल सकता है, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। अपने हितों की सुरक्षा भारत को खुद करनी होगी और इसी उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है। पीएम ने यह भी कहा कि देश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत ने पहले ही 3 सेमीकंडक्टर प्लांट्स में उत्पादन शुरू कर दिया है, और आने वाले वर्षों में 5 से 8 और प्लांट स्थापित होने की उम्मीद है।

7 नई अमृत भारत एक्सप्रेस को रेलवे ने दी मंजूरी! इन शहरों को जोड़ेंगी ट्रेनें, देखें पूरी रूट लिस्ट

भारतीय रेलवे ने देश में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सात नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चलाने की मंजूरी दी है। इन ट्रेनों का मुख्य उद्देश्य कम और मध्यम आय वाले यात्रियों को कम किराए में आरामदायक सफर की सुविधा देना है। इन ट्रेनों का किराया प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में कम रखा जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लंबी दूरी की यात्रा आसानी से कर सकें।

नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के कई शहरों को आपस में जोड़ेंगी। इन ट्रेनों के कई रूट लंबी दूरी के होंगे और रास्ते में कई प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव दिया जाएगा। प्रस्तावित सात ट्रेनों और उनके निर्धारित स्टॉप की जानकारी इस प्रकार है:

धनबाद-कोयंबटूर अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने धनबाद और कोयंबटूर के बीच नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को मंजूरी दे दी है। इस ट्रेन के नंबर 22363/22364 होंगे। यह ट्रेन झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कई प्रमुख शहरों को जोड़ेगी।

धनबाद से चलने वाली यह ट्रेन गोमो, पारसनाथ, हजारीबाग रोड, कोडरमा, गया, अनुग्रह नारायण रोड, डेहरी ऑन सोन, सासाराम, भभुआ रोड, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, मिर्जापुर और प्रयागराज छिवकी जैसे स्टेशनों पर रुकेगी।

इसके बाद ट्रेन कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंद्रपुर, बल्हारशाह, सिरपुर कागजनगर, मंचेरियल, पेद्दापल्ली, वारंगल, महबूबाबाद, खम्मम और विजयवाड़ा होते हुए आगे बढ़ेगी।

दक्षिण भारत में इसके ठहराव ओंगोल, नेल्लोर, गुडूर, रेनिगुंटा, तिरुत्तानी, काटपाडी, जोलारपेट्टई, सलेम, इरोड और तिरुपुर में होंगे। इसके बाद ट्रेन अपने अंतिम गंतव्य कोयंबटूर पहुंचेगी।

प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने प्रयागराज और लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को भी मंजूरी दे दी है। इस ट्रेन के नंबर 20436/20435 होंगे। यह ट्रेन सप्ताह में एक दिन चलेगी और रास्ते में प्रयागराज, सतना, जबलपुर, इटारसी, भुसावल और कल्याण स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ेगी।

सूबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस

रेल मंत्रालय ने सूबेदारगंज और लोकमान्य तिलक टर्मिनस के बीच नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को मंजूरी दे दी है। इस ट्रेन के नंबर 14121/14122 होंगे और यह सप्ताह में एक दिन चलेगी।

यह ट्रेन सूबेदारगंज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, भरुआ सुमेरपुर, रागौल, बांदा, चित्रकूटधाम कर्वी, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, खंडवा, भुसावल, नासिक रोड, कल्याण और ठाणे स्टेशनों पर रुकेगी। इस ट्रेन के शुरू होने से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच सफर करने वाले यात्रियों को काफी सुविधा मिलेगी।

गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर और दिल्ली के बीच भी नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने को मंजूरी दी है। इस ट्रेन के नंबर 15095/15096 होंगे और यह सप्ताह में एक दिन चलेगी।

गोरखपुर से दिल्ली के बीच चलने वाली यह ट्रेन गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बुढ़वल, सीतापुर, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद और दिल्ली स्टेशनों पर रुकेगी। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को दिल्ली आने-जाने के लिए एक और सुविधाजनक रेल सेवा मिल सकेगी।

प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस

रेलवे बोर्ड ने प्रयागराज और उधना के बीच भी एक नई अमृत भारत एक्सप्रेस चलाने की मंजूरी दी है। इस ट्रेन के नंबर 20437/20438 होंगे और यह भी सप्ताह में एक दिन चलेगी।

यह ट्रेन प्रयागराज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, इटावा, टूंडला, ईदगाह आगरा, बयाना, हिंडौन सिटी, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, कोटा, रामगंज मंडी, भवानी मंडी, रतलाम, वडोदरा और उधना स्टेशनों पर रुकेगी। इससे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई शहरों के बीच रेल यात्रा आसान होगी।

गोरखपुर-बांद्रा अमृत भारत एक्सप्रेस

एक अन्य  साप्ताहिक ट्रेन गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 15085/15086) है।

ट्रेन गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा किला, बयाना, गंगापुर सिटी, कोटा, भवानी मंडी, शामगढ़, रतलाम, वडोदरा, सूरत, वलसाड, वापी, पालघर, बोरीवली और बांद्रा टर्मिनस पर रुकेगी।

चरलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस

सातवीं ट्रेन चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22075/22076) है।

यह प्रस्तावित सर्विस चार्लापल्ली, काज़ीपेट, पेड्डापल्ली, मंचिरयाल, बल्हारशाह, चंद्रपुर, नागपुर, बैतूल, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, पोखरायां, कानपुर सेंट्रल, ऐशबाग, लखनऊ सिटी, गोमतीनगर, बाराबंकी, गोंडा और गोरखपुर में रुकेगी।

Delhi Traffic Advisory 15 August: 15 अगस्त को लाल किले के आसपास कई रास्ते बंद, निकलने से पहले देखें पूरी एडवाइजरी

Delhi Traffic Advisory 15 August: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 15 अगस्त को लाल किले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे। वहीं, समारोह स्थल के आस-पास की कई सड़कें सुबह 4 बजे से 10 बजे तक आम ट्रैफिक के लिए बंद रहेंगी और प्रभावित रास्तों पर सिर्फ खास पहचान वाले वाहनों को ही आने-जाने की इजाजत होगी।

एडवाइजरी में यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ते, मालवाहक वाहनों और बसों पर पाबंदियां, और शहर के मुख्य इलाकों की ओर जाने वाली सेवाओं के लिए डायवर्जन की जानकारी भी दी गई है। इसके अलावा, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और ISBT कश्मीरी गेट जाने वाले यात्रियों से अपील की गई है कि वे पहले से अपने सफर का प्लान बना लें और तय किए गए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।

बंद रहेंगी ये सड़कें

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, 15 अगस्त को सुबह 4 बजे से 10 बजे तक कई प्रमुख सड़कें आम लोगों के लिए बंद रहेंगी। इनमें शामिल हैं:

  • नेताजी सुभाष मार्ग — दिल्ली गेट से चट्टा रेल चौक तक
  • लोथियन रोड — GPO दिल्ली से चट्टा रेल चौक तक
  • एसपी मुखर्जी मार्ग — एचसी सेन मार्ग से यमुना बाजार चौक तक
  • चांदनी चौक रोड — फाउंटेन चौक से लाल किले तक
  • निषाद राज मार्ग — रिंग रोड से नेताजी सुभाष मार्ग तक
  • एस्प्लेनेड रोड और नेताजी सुभाष मार्ग से जुड़ी इसकी लिंक रोड
  • रिंग रोड — राजघाट से ISBT तक

इन रास्तों से भी बचने की सलाह

जिन गाड़ियों पर पार्किंग लेबल नहीं हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वे पाबंदी वाले समय के दौरान C-हेक्सागन इंडिया गेट, कॉपरनिकस मार्ग, मंडी हाउस, सिकंदरा रोड, तिलक मार्ग, मथुरा रोड, BSZ मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, J L नेहरू मार्ग, और निज़ामुद्दीन खट्टा व ISBT कश्मीरी गेट के बीच रिंग रोड और आउटर रिंग रोड के हिस्सों पर जाने से बचें।

उत्तर-दक्षिण दिशा में जाने के लिए ये रास्ते अपनाएं

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने उत्तर से दक्षिण और दक्षिण से उत्तर जाने वाले लोगों के लिए कई वैकल्पिक रास्ते बताए हैं। इनमें अरविंदो मार्ग, सफदरजंग रोड, कमाल अतातुर्क मार्ग, कौटिल्य मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, पार्क स्ट्रीट, मंदिर मार्ग, पंचकुइयां रोड और रानी झांसी रोड शामिल हैं।

इसके अलावा लोग कनॉट प्लेस, मिंटो रोड, भवभूति मार्ग, अजमेरी गेट, श्रद्धानंद मार्ग, लाहौरी गेट चौक, नया बाजार, पीली कोठी और एसपी मुखर्जी मार्ग के रास्ते भी आ-जा सकते हैं।

यमुना पार करने के लिए निजामुद्दीन ब्रिज, पुस्ता रोड, जीटी रोड और युधिष्ठिर सेतु का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पूर्व-पश्चिम दिशा में जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते

पूर्व से पश्चिम और पश्चिम से पूर्व जाने वाले लोगों के लिए NH-24/NH-9, निजामुद्दीन खट्टा, बारापुल्ला रोड, DND, रिंग रोड, भैरों रोड और मथुरा रोड समेत अन्य जुड़े हुए रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा विकास मार्ग, आईपी मार्ग, डीडीयू मार्ग और मिंटो रोड भी वैकल्पिक रास्ते के तौर पर उपलब्ध रहेंगे।

DND-NH-24-युधिष्ठिर सेतु-सिग्नेचर ब्रिज-वजीराबाद ब्रिज वाला कॉरिडोर भी खुला रहेगा।

हालांकि, ओल्ड आयरन ब्रिज और गीता कॉलोनी ब्रिज से शांति वन की तरफ जाने वाला रास्ता बंद रहेगा।

मालवाहक वाहनों और बसों पर भी रहेगी रोक

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, 14 अगस्त की आधी रात से 15 अगस्त की सुबह 11 बजे तक निजामुद्दीन खट्टा और वजीराबाद ब्रिज के बीच माल ढोने वाले वाहनों को चलने की इजाजत नहीं होगी। इस दौरान महाराणा प्रताप ISBT और सराय काले खां ISBT के बीच दूसरे राज्यों से आने-जाने वाली बसों को भी चलने की इजाजत नहीं होगी।

साथ ही, 14 अगस्त की आधी रात से 15 अगस्त की सुबह 11 बजे तक ISBT कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन खट्टा के बीच रिंग रोड पर लोकल सिटी बसें (DTC बसों सहित) नहीं चलेंगी।

इसके अलावा, लोथियन रोड, नेताजी सुभाष मार्ग, एस पी मुखर्जी मार्ग, विकास मार्ग, मथुरा रोड और C-हेक्सागन व सेंट्रल दिल्ली के आस-पास की सड़कों समेत कई सड़कों पर दूसरे शहरों से आने वाली बसों और DTC बसों के लिए पाबंदियां होंगी।

इन रास्तों से डायवर्ट होंगी बसें

गाजियाबाद से दिल्ली आने वाली दूसरे राज्यों की बसें ISBT कश्मीरी गेट में घुसने से पहले भोपुरा चुंगी रोड और वजीराबाद रोड का इस्तेमाल करेंगी। धौला कुआं से आने वाली बसों का रूट रिंग रोड, पंजाबी बाग, आजादपुर और चांदनी राम अखाड़ा की तरफ डायवर्ट किया जाएगा। वहीं, फरीदाबाद से आने वाली बसें सराय काले खां पर अपनी यात्रा खत्म कर सकती हैं या ISBT कश्मीरी गेट की तरफ जाने के लिए दूसरे रास्तों का इस्तेमाल कर सकती हैं। पुलिस ने कहा कि JPN हॉस्पिटल जाने-आने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि वे आखिरी समय में होने वाली परेशानी से बचने के लिए जल्दी निकलें और कहा है कि जरूरी जगहों पर जानकारी देने वाले साइनबोर्ड लगाए जाएंगे। 15 अगस्त को सुबह 5 बजे से लेकर ट्रैफिक डायवर्जन हटने तक, गोखले मार्ग, घाटा मस्जिद, यमुना बाजार, दिल्ली गेट और छट्टा रेल चौक पर DTC की रिकवरी वैन तैनात रहेंगी। वहीं, आजादी के दिन कार्यक्रम स्थल पर जाने वाले लोगों से यह भी कहा गया है कि वे कैमरा, दूरबीन, रिमोट-कंट्रोल कार की चाबियां, छाता, हैंडबैग, ब्रीफकेस, ट्रांजिस्टर, सिगरेट लाइटर, टिफिन बॉक्स और पानी की बोतलें साथ न लाएं।

कुल मिलाकर, 15 अगस्त को दिल्ली के कई हिस्सों में सड़कें बंद रहेंगी, रूट डायवर्ट किए जाएंगे और बसों की आवाजाही पर भी रोक रहेगी। इसका सबसे ज्यादा असर लाल किले और सेंट्रल दिल्ली के आसपास के इलाकों में देखने को मिलेगा। हालांकि, यात्रियों के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध रहेंगे और सुबह 11 बजे के बाद ट्रैफिक व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है।

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लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस पर चढ़ा Sprite का रंग, पहली बार किसी ब्रांड के नाम से चलेगी ट्रेन

Lucknow-Delhi Tejas Express: लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ के बीच चलने वाली तेजस एक्सप्रेस अब करीब तीन महीने के लिए ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से जानी जाएगी। यह ट्रेन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा संचालित की जाती है। इसे भारत की पहली ‘प्राइवेटली ब्रांडेड’ ट्रेन बताया जा रहा है।

‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट में रेलवे सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि IRCTC ने ट्रेन की ब्रांडिंग और विज्ञापन के अधिकार M/s स्प्राइट को छह महीने की अवधि के लिए दिए हैं। इसके अनुसार, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे से कहा गया है कि वह 19 अगस्त और 11 नवंबर, 2026 के बीच ट्रेन 82501/82502 को ‘Sprite’ Tejas Express के रूप में घोषित करे।

खबरों के अनुसार, ट्रेन की ब्रांडिंग का यह अधिकार Letter of Acceptance (LOA) के जरिए दिया गया है। रेलवे सूत्रों ने बुधवार को बताया कि दोनों दिशाओं में यात्रा के दौरान इस प्राइवेट ट्रेन को उसके शुरुआती स्टेशन और रास्ते में आने वाले स्टेशनों पर ‘Sprite’ Tejas Express के नाम से अनाउंस किया जाएगा।

किसी ब्रांड के नाम पर रखी जाने वाली पहली ट्रेन

यह पहली बार है जब किसी ट्रेन का नाम किसी ब्रांड के नाम पर रखा जा रहा है। रिपोर्ट में बताए गए रेलवे के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भले ही लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को प्राइवेट ट्रेन कहा जाता है, लेकिन IRCTC रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे ट्रैक और स्टेशन) के इस्तेमाल के लिए इंडियन रेलवे को पेमेंट करती है।

हालांकि, ब्रांडिंग का यह तरीका इंडियन रेलवे द्वारा ट्रेनों के रेगुलर ऑपरेशन से अलग है।

इस एडवरटाइजिंग मॉडल के तहत, प्राइवेट कंपनियां ट्रेन के बाहरी हिस्से और दूसरी तय जगहों पर अपने ब्रांड दिखा सकती हैं, जबकि रेलवे नेटवर्क जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता रहता है। यानी ट्रेन पर ब्रांड का नाम और विज्ञापन तो नजर आएगा, लेकिन इसका संचालन रेलवे के मौजूदा नेटवर्क के जरिए ही होगा।

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस के बारे में सब कुछ

देश की पहली निजी ट्रेन के तौर पर लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस को 3 दिसंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

IRCTC द्वारा चलाई जाने वाली यह ट्रेन पूरी तरह से AC है और इसमें यात्रियों को कई आधुनिक सुविधाएं दी जाती हैं। इनमें ट्रेन के अंदर खाने-पीने की बेहतर सुविधा और मनोरंजन के लिए इंफोटेनमेंट सिस्टम शामिल हैं।

IRCTC इस ट्रेन में ग्रुप बुकिंग की सुविधा भी देता है। यानी कॉर्पोरेट मीटिंग, शादी या किसी अन्य कार्यक्रम के लिए यात्री पूरी AC चेयर कार कोच भी बुक कर सकते हैं। एक कोच में 78 सीटें होती हैं।

Sprite के साथ हुई नई ब्रांडिंग डील से इस सर्विस में एक नया कमर्शियल पहलू जुड़ गया है, जिससे यह देश की पहली ऐसी ट्रेन बन गई है जो विज्ञापन व्यवस्था के तहत आधिकारिक तौर पर किसी कमर्शियल ब्रांड का नाम इस्तेमाल कर रही है।

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भारत 2036 तक बन सकता है 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी, करने होंगे ये 20 रिफॉर्म्स

भारत 10 साल में 20 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर की इकोनॉमी बन सकता है। लेकिन, इसके लिए रिफॉर्म्स के बड़े कदम उठाने होंगे। इनवेस्टमेंट बैंक इक्विरस के एमडी और चेयरमैन अजय गर्ग ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि 2036 तक 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के लिए भारत को एक साथ 20 रिफॉर्म्स करने होंगे।

गर्ग न कहा, “मेरा मानना है कि एक साथ कुल 20 रिफॉर्म्स करने होंगे। इसकी वजह यह है कि इंडिया की इकोनॉमी 4 ट्रिलियन डॉलर की हो गई है। आज भारत की इकोनॉमी यूरोप के कई देशों की इकोनॉमी से बड़ी है। लेकिन, भारत में प्रति व्यक्ति आय अब भी सिर्फ 3000 डॉलर है।” प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत यूरोपीय देशों से काफी पीछे है।

Equirus एक इनवेस्टमेंट बैंक है, जिसका हेडक्वार्टर मुंबई है। उसने इस हफ्ते एक रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें भारत के लिए जरूरी 20 रिफॉर्म्स बताए गए है। इक्विरस का मानना है कि इन रिफॉर्म्स से अगले एक दशक में भारत की जीडीपी बढ़कर करीब पांच गुनी हो जाएगी। इन रिफॉर्म्स के बगैर 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में भारत को 21 साल लग जाएंगे।

गर्ग ने कहा कि अगर हर सेक्टर में भारत की ग्रोथ बीते 10 साल जितनी रहती है तो इकोनॉमी के 20 ट्रिलियन डॉलर के लेवल तक पहुंचने में 21 साल लग जाएंगे। लेकिन, जरूरी रिफॉर्म्स करने से यह लेवल 2036 तक हासिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस रोडमैप में डॉलर के मुकाबले रुपये में संभावित मजबूती को ध्यान में नहीं रखा गया है।

इक्विरस की रिपोर्ट में शामिल रिफॉर्म्स में पहले नंबर पर कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट है। गर्ग ने कहा कि भारत में बॉन्ड मार्केट इसके शेयर बाजार के मुकाबले काफी कम विकसित है। इसकी बड़ी वजह बॉन्ड्स से जुड़े टैक्स के नियम हैं। कुछ साल पहले सरकार ने डेट म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियमों में बदलाव किया। इससे डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश का आकर्षण कम हो गया।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, बॉन्ड्स के टैक्स के नियम भी इक्विटी जैसे होने चाहिए। रिपोर्ट में सर्विसेज पर फोकस बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। इक्विरस का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग से ज्यादा फोकस सर्विसेज पर रखने की जरूरत है। फाइनेंशियल मार्केट्स, ग्लोबल कपैबिलिटी सेंटर्स, टूरिज्म और एजुकेशन ऐसे चार क्षेत्र हैं, जिनमें सबसे ज्यादा रिफॉर्म्स की जरूरत है।

गर्ग ने रेलवे के निजीकरण को भी जरूरी बताया है। उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर का उदाहरण दिया। टेलीकॉम सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने के बाद टेलीकॉम सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। टेलीकॉम सेवाएं पिछले कुछ सालों में आबादी के बड़े हिस्से तक पहुंच गई हैं। साथ ही टैरिफ यानी टेलीकॉम सेवाओं की कीमत में भी बड़ी कमी आई है।

ट्रेन टिकट के लिए नहीं झेलनी होगी परेशानी! नया सिस्टम करेगा मिनटों में लाखों बुकिंग एक साथ

रेलवे में रोजाना बड़ी संख्या में पैसेंजर सफर करते हैं और त्योहारों, छुट्टियों या छुट्टी के सीजन में टिकटों की मांग और भी बढ़ जाती है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने के साथ रेलवे के पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर भी लगातार प्रेशर बढ़ रहा है। इसी बढ़ते ट्रैफिक और पैसेंजर की जरूरत को देखते हुए रेलवे अपने पुराने पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रहा है।

नया सिस्टम पहले के मुकाबले ज्यादा क्षमता वाला होगा और एक समय में बड़ी संख्या में पैसेंजर की टिकट बुकिंग को संभाल सकेगा। इससे खासकर टिकट बुकिंग के बिजी टाइम में सिस्टम पर पड़ने वाला प्रेशर कम करने और पैसेंजर को बेहतर एक्सपीरियंस देने में मदद मिल सकती है।

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ऑनलाइन टिकट बुकिंग

रेलवे के पुराने ‘पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम’ (PRS) पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग बढ़ने की वजह से लगातार दबाव पड़ रहा है। जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक हुए। यानी करीब 89 फीसदी बुकिंग डिजिटल तरीके से हुई। जुलाई 2026 तक कुल टिकट बुकिंग में ऑनलाइन भागीदारी करीब 89.84 फीसदी पहुंच गई थी। इसके लिए रेलवे का ऐसा सिस्टम जरुरी हो गया है, जो एक साथ ज्यादा पैसेंजर की बुकिंग और पूछताछ देख सके।

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम प्रोसेस

रेलवे ने नए पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम पर जाने की प्रोसेस शुरू कर दी है। अगस्त 2026 से इस चेंज को आगे बढ़ाया जा रहा है और नई IRCTC बीटा वेबसाइट भी इसी चेंज का हिस्सा है। पुराने सिस्टम से नए सिस्टम पर जाने के लिए रेलवे धीरे-धीरे इसकी टेस्टिंग कर रहा है।

फास्ट तत्काल बुकिंग

नए सिस्टम का असर तत्काल टिकट बुकिंग में भी देखने को मिल रहा है। IRCTC की बीटा वेबसाइट शुरू होने के बाद कम समय में पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग में सुधार किया गया। तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। वहीं पांच मिनट और 30 मिनट में पूरी होने वाली बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई।

पीआरएस ऑपरेशन

पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) रेलवे की टिकट व्यवस्था का एक अहम भाग है। इसी के जरिए टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन के साथ सीट मिलने की जानकारी, वेटिंग लिस्ट, आरएसी, रिजर्वेशन चार्ट और पैसेंजर की पूछताछ जैसे काम संभाले जाते हैं। रेलवे के रिजर्वेशन काउंटर से लेकर IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, रेलवन ऐप और ऑथोराइज्ड एजेंट भी इसी सिस्टम से जुड़े हैं।

पैसेंजर को फायदा

नए सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा आम पैसेंजर को मिलेगा। तत्काल टिकट के समय जब बहुत सारे लोग एक साथ बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तब ज्यादा कपैसिटी वाला सिस्टम काफी मददगार हो सकता है। इससे टिकट बुक करने, सीट की जानकारी लेने और दूसरी सर्विस का उपयोग करने में आसानी हो सकती है।

मॉडर्न टेक्नोलॉजी

नया पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम मॉडर्न टेक्निक को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें एआई, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया जा सकता है।