हवाई जहाज को टक्कर देगी चीन की ट्रेन! फ्लाइंग ट्रेन ने मचाया तहलका

चीन तेज रफ्तार वाली ट्रेनों के मामले में लगातार नई टेक्निक पर काम कर रहा है। देश में पहले से ही शंघाई मैग्लेव जैसी तेज ट्रेन चलती है, जो करीब 460 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ती है। अब साइंटिस्ट इससे भी ज्यादा तेज ट्रेन बनाने की तैयारी में जुटे हैं। इसी कड़ी में एक ऐसी ‘फ्लाइंग ट्रेन’ पर काम किया जा रहा है, जिसे फ्यूचर की बेहद तेज ट्रेन कहा जा रहा है।

इस ट्रेन का शुरुआती ट्रायल भी किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि टेस्टिंग के दौरान इसकी स्पीड लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। यानी इसकी स्पीड शंघाई मैग्लेव से काफी ज्यादा है। इतनी हाई स्पीड वाली ट्रैन से कम टाइम में लंबी दुरी तय की जा सकती है। यह टेक्निक अभी टेस्टिंग में है और इसे पैसेंजर के लिए शुरू करने में समय लग सकता है। यदि आगे के ट्रायल सफल रहते हैं, तो आने वाले समय में ट्रेन से ट्रैवल करने का एक्सपीरियंस बदल सकता है।

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एरोप्लेन जैसी स्पीड

चीन के साइंटिस्ट ऐसी ट्रेन तैयार करने में जुटे हैं, जिसे ‘फ्लाइंग ट्रेन’ कहा जा रहा है। यह आम ट्रेन से काफी अलग होगी और खास टेक्निक की मदद से पटरी के ऊपर चलेगी। शुरुआती टेस्टिंग में इस ट्रेन की करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड है। इतनी तेज स्पीड के कारण यह ट्रेन फ्यूचर में एयर ट्रैवल का एक ऑप्शन बन सकती है।

 

 

बिना पहिये चलेगी ट्रेन

इस ट्रेन को तेज रफ्तार देने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक यानी मैग्नेटिक फाॅर्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इस टेक्निक में ट्रेन के पहिए सीधे पटरी के कॉन्टैक्ट में नहीं आते, बल्कि मैग्नेटिक फाॅर्स से ट्रेन पटरी के ऊपर थोड़ी दूरी पर आगे बढ़ती है। इससे पहिए और पटरी के बीच फ्रिक्शन काफी कम हो जाता है। फ्रिक्शन कम होने पर ट्रेन को ज्यादा तेज स्पीड से चलाना आसान होता है।

हवा नहीं रोकेगी रफ्तार

800 किलोमीटर प्रति घंटे जैसी हाई स्पीड पर ट्रेन के सामने हवा का दबाव एक बड़ी समस्या बन सकता है। इसी वजह से इस ट्रेन के लिए खास ट्यूब या सुरंग तैयार की जा रही है। इस ट्यूब के अंदर से पंप की मदद से हवा को बाहर निकाला जाएगा, जिससे ट्रेन को कम हवा वाले वातावरण में चलने में मदद मिलेगी। हवा का दबाव कम होने से ट्रेन के लिए तेज रफ्तार हासिल करना आसान हो सकता है और सफर के दौरान एनर्जी की बचत भी हो सकती है। चीन के हुबेई में साइंटिस्ट ने करीब एक किलोमीटर लंबे ट्रैक पर इस टेक्निक का टेस्ट किया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रायल में ट्रेन ने सिर्फ 5.3 सेकंड में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। अब साइंटिस्ट इस टेक्निक को और बेहतर बनाने और फ्यूचर में इसकी स्पीड को 1000 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

 

 

टेस्टिंग के लिए तैयार

इस फ्यूचर ट्रेन पर चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (CASIC) काम कर रहा है। इतनी हाई स्पीड वाली ट्रेन के लिए ट्रैक और ट्यूब को स्टैंडर्ड रेलवे ट्रैक की तुलना में कहीं ज्यादा सटीक बनाना जरूरी है। टेस्टिंग के लिए तैयार किए गए करीब एक किलोमीटर लंबे कंक्रीट और स्टील ट्रैक में अलाइनमेंट को सिर्फ 0.5 मिलीमीटर तक रखने की बात कही गई है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती ट्रायल में है टेक्निक सफल हुई तो लंबी दूरी की जर्नी कम टाइम में पूरी हो सकती है।

वंदेभारत में अब आसानी से मिलेगी कन्फर्म सीट! रेलवे ने इस व्यस्त रूट पर 8 से बढ़ाकर कर दिए 16 डिब्बे

केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को कहा कि एर्नाकुलम-KSR बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस अब आठ की जगह 16 कोच के साथ चलेगी, जिससे इसकी बैठने की क्षमता दोगुनी होकर 1,128 हो जाएगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री गोपी ने रेलवे अधिकारियों और अन्य जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी में एर्नाकुलम जंक्शन पर 16-कोच वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

गोपी ने कहा कि ओणम के यात्रा सीजन को देखते हुए रेलवे ने तुरंत ट्रेन की क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया है। उन्होंने इसके लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से एर्नाकुलम और बेंगलुरु के बीच इस व्यस्त रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को काफी राहत मिलेगी।

उन्होंने कहा कि जिस सर्विस में पहले 530 यात्रियों के बैठने की क्षमता थी, उसमें अब 1,128 सीटें होंगी।

गोपी ने आगे बताया कि क्षमता में यह बढ़ोतरी एक खास दिन पर हो रही है, क्योंकि यह मलयालम कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत का दिन है।

रेलवे मैनेजर ने दी जानकारी

तिरुवनंतपुरम डिविजनल रेलवे मैनेजर दिव्याकांत चंद्राकर ने कहा कि ओणम के मौसम में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए रेक (ट्रेन के डिब्बों) को बढ़ाकर 16 कोच करने का फैसला लिया गया।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई वंदे भारत सेवा में लगभग 150% ऑक्यूपेंसी (सीटों का भरा होना) देखी जा रही है, जबकि केरल को मंगलुरु और कोझिकोड से जोड़ने वाली दो अन्य वंदे भारत सेवाओं में लगभग 170% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई है।

चंद्रकार ने आगे कहा कि 16-कोच वाली ट्रेन यात्रियों को ज्यादा सीटें, बेहतर सुविधाएं और बेहतर कनेक्टिविटी देगी। उन्होंने यह भी कहा कि एर्नाकुलम जंक्शन रेलवे स्टेशन के रीडेवलपमेंट का काम भी तेजी से चल रहा है और इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस कार्यक्रम में एर्नाकुलम के सांसद हिबी ईडन, सांसद हारिस बीरन, विधायक टीजे विनोद, वार्ड पार्षद, डिविजनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी और जोनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी के सदस्य, रेलवे अधिकारी, मीडिया कर्मी और यात्री भी मौजूद रहे।

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अब Uber ऐप पर भी बुक होंगी ट्रेन टिकटें, कंपनी ने ixigo के साथ मिलाया हाथ, जानिए कैसे काम करेगा नया फीचर

उबर ने 18 अगस्त को ixigo के साथ साझेदारी कर अपने ऐप पर ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू करने का ऐलान किया। अब यूजर्स उबर ऐप के जरिए ट्रेन टिकट बुक कर सकेंगे, अपना पीएनआर स्टेटस देख सकेंगे और ट्रेन यात्रा से पहले या बाद की अपनी आने-जाने की जरूरत को उबर की कैब सेवा से जोड़ सकेंगे। कंपनी के मुताबिक, यह सुविधा भारत में उबर की इंटरसिटी यात्रा सेवाओं को बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है। ट्रेन टिकट बुकिंग शुरू होने के साथ उबर अपने लंबी दूरी की यात्रा से जुड़े विकल्पों को और बढ़ा रही है। इस सुविधा में ixigo की ट्रेन टिकट बुकिंग तकनीक और टिकट बुक करने के बाद मिलने वाली सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया है। इससे यात्रियों को एक ही ऐप के जरिए अपनी यात्रा के अलग-अलग हिस्सों की योजना बनाने में आसानी होगी।

ऐप से टिकट होगी बुक

भारत में लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन आज भी लोगों की पहली पसंद में शामिल है। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 741 करोड़ यात्रियों को ट्रेन से सफर कराया। ऐसे में उबर ने ट्रेन यात्रा को आसान बनाने के लिए अपने ऐप में टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की है। उबर इंडिया और दक्षिण एशिया में बिजनेस डेवलपमेंट के डायरेक्टर अर्नब कुमार ने कहा कि भारत में ट्रेन से सफर करना लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की यात्रा सिर्फ ट्रेन में बैठने से शुरू नहीं होती, बल्कि स्टेशन तक पहुंचने और मंजिल पर उतरने के बाद भी उन्हें आने-जाने की जरूरत होती है। अब उबर ऐप के जरिए यात्री एक ही जगह से ट्रेन टिकट बुक कर सकेंगे, पीएनआर स्टेटस देख सकेंगे और रेलवे स्टेशन तक आने-जाने के लिए उबर की कैब भी बुक कर सकेंगे।

स्टेशन पर पिकअप और ड्रॉप-ऑफ  की भी मिलेगी सुविधा 

इस नई सुविधा से रेलवे स्टेशनों पर उबर की सेवाएं भी और मजबूत होंगी। कंपनी ने बताया कि अहमदाबाद से लेकर सिकंदराबाद और हावड़ा जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उबर के पिकअप और ड्रॉप-ऑफ जोन उपलब्ध हैं। आने वाले समय में देश के कई और बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी ऐसे खास पिकअप और ड्रॉप-ऑफ जोन बनाए जाएंगे। ixigoके ग्रुप सीईओ आलोक बाजपेयी और ग्रुप को-सीईओ रजनीश कुमार ने कहा कि ट्रेन टिकट बुकिंग के मामले में ixigoदेश की बड़ी ऑनलाइन ट्रैवल कंपनियों में शामिल है। कंपनी का लक्ष्य रेल यात्रा को यात्रियों के लिए आसान, भरोसेमंद और तनाव से दूर बनाना है। उन्होंने कहा कि उबर के साथ साझेदारी से यह सुविधा ट्रेन यात्रा से आगे बढ़ेगी और यात्री अपने घर से लेकर अंतिम मंजिल तक की पूरी यात्रा की योजना आसानी से बना सकेंगे।

किस रूट पर चलती है देश की इकलौती वंदे भारत स्लीपर ट्रेन? जानिए टाइमिंग, किराया और लग्जरी सुविधाएं

Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे की सबसे खास वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर यात्रियों में जबरदस्त क्रेज है। अगर आप भी इस हाई-स्पीड और लग्जरी स्लीपर ट्रेन में सफर का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो आपको बता दें कि, फिलहाल पूरे देश में सिर्फ एक ही रूट पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ऑपरेशनल है।

यह नई नवेली ट्रेन पूर्वी भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ते हुए पश्चिम बंगाल के हावड़ा जंक्शन से असम के कामाख्या जंक्शन, गुवाहाटी के बीच दौड़ती है। आइए आपको बताते हैं कि आप इसे कहां से पकड़ सकते हैं, इसका शेड्यूल और कितना है किराया।

कहां से कहां के लिए पकड़ सकते हैं वंदे भारत स्लीपर ट्रेन?

देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (ट्रेन नंबर 27575 / 27576) हावड़ा से कामाख्या के बीच 968 किलोमीटर की दूरी महज 14 घंटे में तय करती है। अगर आप कोलकाता या उत्तर बंगाल के आसपास रहते हैं, तो आप इसे बांडेल जंक्शन, नवद्वीप धाम, कटवा, अजीमगंज, न्यू फरक्का, मालदा टाउन, न्यू जलपाईगुड़ी (NJP), और न्यू कूचबिहार स्टेशनों से पकड़ सकते हैं।

टाइमिंग और शेड्यूल

यह ट्रेन हफ्ते में 6 दिन चलती है और रातभर के सफर में आपको आपकी मंजिल तक पहुंचा देती है:

हावड़ा ➔ कामाख्या (ट्रेन 27575): हावड़ा से शाम 06:20 PM पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 08:20 AM पर कामाख्या पहुंचती है (गुरुवार को छोड़कर)।

कामाख्या ➔ हावड़ा (ट्रेन 27576): कामाख्या से शाम 06:15 PM पर रवाना होकर अगले दिन सुबह 08:15 AM पर हावड़ा पहुंचती है (बुधवार को छोड़कर)।

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ट्रेन में क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी?

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को प्रीमियम एयरलाइन जैसा अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। आपकी यात्रा को बेहद आसान और आरामदायक बनाने के लिए इसमें कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं:

हाईटेक सस्पेंशन सिस्टम: ट्रेन में विशेष कपलर और सस्पेंशन सिस्टम दिया गया है, जिससे हाई-स्पीड में भी झटके महसूस नहीं होते और रात में नींद में कोई खलल नहीं पड़ता।

एक्स्ट्रा कुशनिंग वाली बर्थ: इसके 3-टियर, 2-टियर और फर्स्ट एसी कोचों की बर्थ में अतिरिक्त फोम और कुशनिंग का इस्तेमाल किया गया है, जो नॉर्मल ट्रेनों से काफी ज्यादा आरामदायक हैं।

सेंसर वाले ऑटोमैटिक दरवाजे: कोच के एंट्री गेट और इंटर-कोच दरवाजे ऑटोमैटिक सेंसर आधारित हैं।

मॉड्यूलर बायो-टॉयलेट और शॉवर: फर्स्ट एसी में गर्म पानी के शॉवर की सुविधा और सभी कोचों में एंटी-बैक्टीरियल मॉड्यूलर टॉयलेट दिए गए हैं।

रीडिंग लाइट्स और चार्जिंग प्वाइंट: हर बर्थ पर पर्सनल मोबाइल/लैपटॉप चार्जिंग सॉकेट और नाइट रीडिंग लाइट की सुविधा है।

इन्फोटेनमेंट और वाई-फाई: यात्रा के दौरान मनोरंजन के लिए वाई-फाई और डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन मौजूद हैं।

कितना है किराया?

आपको बता दें कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कोई भी स्लीपर या फिर जनरल कोच नहीं होता है। इसमें एसी- 3, एसी-2 और एसी फर्स्ट क्लास की सीटें है। इस लग्जरी ट्रेन का बेस फेयर कोच की कैटेगरी के हिसाब से ये है:

  • AC 3-Tier: ₹2,299 से शुरू
  • AC 2-Tier: ₹2,970 से शुरू
  • AC First Class: ₹3,640 से शुरू

हावड़ा-कामाख्या वंदे भारत स्लीपर ट्रेन न केवल यात्रा के समय को कम करती है, बल्कि यात्रियों को होटल जैसी सुख-सुविधाएं और सुरक्षा भी प्रदान करती है। जल्द ही भारतीय रेलवे अन्य रूटों पर भी दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू करने की तैयारी में है।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जल्द आ रही हैं 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें! अब रात का सफर होगा और आरामदायक

Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे और ज्यादा वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करके अपने प्रीमियम लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। लॉन्च के बाद से अभी तक वंदे भारत एक्सप्रेस ज्यादातर दिन में चलने वाली चेयर कार ट्रेन के तौर पर संचालित होती रही है, लेकिन लंबे समय से यात्री रात के सफर के लिए इसके स्लीपर वर्जन की मांग कर रहे थे। वहीं, अब यात्रियों की इस मांग को पूरा करने के लिए चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 24 कोच होंगे। उम्मीद है कि नए ट्रेनसेट से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ेगी और पूरे भारत में लंबी दूरी के और रूट पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने में मदद मिलेगी।

यह कदम भारतीय रेलवे की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसका मकसद रात भर और इंटरसिटी यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज, ज्यादा आरामदायक और आधुनिक यात्रा के विकल्प देना है। इस प्रस्तावित विस्तार के साथ, उम्मीद है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें देश के प्रीमियम रेल यात्रा सेगमेंट में बड़ी भूमिका निभाएंगी।

ICF के जनरल मैनेजर मनीष अग्रवाल के अनुसार, देश में बनी 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के लिए प्रोडक्शन ड्रॉइंग पूरी हो गई हैं। इन डिजाइनों में कोच का स्ट्रक्चर, कोच को जोड़ने वाले सिस्टम और उनके नीचे लगाए जाने वाले उपकरण शामिल हैं।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के बारे में मुख्य बातें

  • 50 ट्रेनसेट की योजना: ICF चेन्नई 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी।
  • हर ट्रेन में 24 कोच: आने वाले ट्रेनसेट में 24 कोच होंगे, जबकि अभी चल रही स्लीपर ट्रेन में 16 कोच हैं।
  • ज्यादा यात्री क्षमता: उम्मीद है कि 24 कोच वाली ट्रेन में 16 कोच वाली ट्रेन के मुकाबले लगभग 1.5 गुना ज्यादा यात्री यात्रा कर सकेंगे।
  • प्रोडक्शन के लिए डिजाइन तैयार: कोच के स्ट्रक्चर, कोच कनेक्शन और अंडरफ्रेम इक्विपमेंट से जुड़े डिजाइन पूरे हो चुके हैं।
  • और रूटों पर चलने की उम्मीद: अतिरिक्त ट्रेनसेट से रेलवे को लंबी दूरी के और रूटों पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने पर विचार करने में मदद मिलेगी।
  • लंबी यात्राओं के लिए डिजाइन: स्लीपर सुविधा का मकसद रात भर और लंबी दूरी की यात्रा के लिए तेज़ और ज्यादा आरामदायक विकल्प देना है।
  • कोच की संख्या अभी तय नहीं: भारतीय रेलवे ने अभी तक कोच की अंतिम संख्या के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, हालांकि खबरों के मुताबिक 24-कोच वाली ट्रेनसेट में 17 AC 3-टियर कोच, पांच AC 2-टियर कोच, एक AC फर्स्ट क्लास कोच और एक पैंट्री कार हो सकती है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी

अभी देश में चलने वाली वंदे भारत स्लीपर सर्विस हावड़ा और कामाख्या के बीच चलती है। मौजूदा ट्रेन में 11 थर्ड AC कोच, चार सेकंड AC कोच और एक फर्स्ट AC कोच है।

24 कोच वाली प्रस्तावित ट्रेनों से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। हालांकि, रेलवे ने अभी तक इन नई ट्रेनों में कोच के अंतिम कॉम्बिनेशन की घोषणा नहीं की है।

बता दें कि यह कदम लंबी दूरी के यात्रियों के लिए तेज और ज्यादा आरामदायक ट्रेनें उपलब्ध कराने की रेलवे की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

अमृत ​​भारत एक्सप्रेस 3.0 के बारे में भी अपडेट आया है

ICF ने अगली पीढ़ी की अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के बारे में भी जानकारी दी है। उम्मीद है कि अमृत भारत 3.0 में AC, जनरल और स्लीपर क्लास के कोच होंगे। इससे यात्रियों को बेहतर आराम के साथ यात्रा का एक और सस्ता विकल्प मिलेगा।

हालांकि, अभी चल रही अमृत भारत ट्रेनों में मुख्य रूप से जनरल और स्लीपर कोच हैं। अगली पीढ़ी की ट्रेनों में AC कोच जोड़ने से और भी ज्यादा यात्री इन ट्रेनों का फायदा उठा सकेंगे। ICF में हो रही ताजा गतिविधियों से पता चलता है कि वंदे भारत स्लीपर और अगली पीढ़ी की अमृत भारत ट्रेनों के प्रोडक्शन की प्लानिंग आगे बढ़ रही है।

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भारत के इन 5 राज्यों में बढ़ रहा इंसान और हाथी टकराव! WII ने मैप किए 5 राज्यों के बड़े हॉटस्पॉट्स

भारत में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और प्रोजेक्ट एलिफेंट डिवीजन ने देश के 5 प्रमुख राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख हॉटस्पॉट्स को मैप किया है। WII की इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है जहां जोखिम सबसे अधिक है, ताकि संरक्षण और सुरक्षा प्रयासों को सही दिशा में फोकस किया जा सके।

रिसर्चर्स ने इन राज्यों के लंबे समय के डेटा की स्टडी की है। इनमें से कुछ आंकड़े साल 2000 तक पुराने हैं। इस पूरी सीरीज में ओडिशा की रिपोर्ट सबसे डिटेल है। 128 पन्नों की इस रिपोर्ट में कई सालों के डेटा का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट का लक्ष्य उन स्थानों और दोहराए जाने वाले पैटर्न की पहचान करना है जहां हाथियों और इंसानों का आमना-सामना सबसे ज्यादा होता है।

इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं हाथी?

रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष की मुख्य वजह उनके प्राकृतिक आवासों (हाथी पर्यावास) और इंसानी गतिविधियों के बीच बढ़ता ओवरलैप है। जंगल लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में बंटते जा रहे हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाली सड़कें और रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक रास्तों को काटती हैं। इसके अलावा बिजली की बाड़ और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर भी हाथियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। जंगलों के करीब गांवों और इंसानी बस्तियों के विस्तार ने लोगों और हाथियों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है।

एलिफेंट कॉरिडोर के आसपास भी मुश्किलें

हाथियों को भोजन और पानी की तलाश के साथ-साथ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। जब हाथियों के ये पारंपरिक कॉरिडोर या रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करते हैं। ये वैकल्पिक रास्ते अक्सर खेतों, गांवों या बस्तियों से होकर गुजरते हैं। हाथियों के इस मूवमेंट से फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। इंसानों से मुठभेड़ का खतरा बढ़ जाता है और कई बार इंसानों व हाथियों दोनों को अपनी जान गंवानी पड़ती है या गंभीर चोटों का सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने हॉटस्पॉट आधारित समाधान की उठाई मांग

WII की यह रिपोर्ट अधिकारियों को उन संवेदनशील क्षेत्रों की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी जहां तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन हॉटस्पॉट्स में बेहतर अर्ली-वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) लागू की जानी चाहिए। सुरक्षित रेलवे और सड़क योजनाएं बनाना, वन विभागों द्वारा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना और हाथियों के गलियारों को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

संकट से निपटने के लिए बचाव रणनीति की जरूरत

यह रिपोर्ट सिर्फ अतीत में हुए संघर्षों का रिकॉर्ड भर नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि संघर्ष कहां, कब और किन कारणों से हो रहे हैं। यह डेटा अधिकारियों को घटनाओं के होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें पहले से रोकने में मदद कर सकता है। भारत के लिए यह चुनौती बिल्कुल स्पष्ट है कि हाथियों की रक्षा करने का सीधा मतलब उन प्राकृतिक भू-भागों और रास्तों की सुरक्षा करना है, जिनका उपयोग हाथी अपनी आवाजाही के लिए करते हैं।

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दुश्मन के बंकर, एयर डिफेंस सिस्टम के लिए काल है भारत का पहला स्वदेशी ‘दिव्यास्त्र Mk3’ ड्रोन! लखनऊ की कंपनी ने रचा इतिहास

Divyastra Mk3: भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल की है। 11 अगस्त 2026 को देश में बने Divyastra Mk3 ने पहली बार उड़ान भरी। यह एक बिना पायलट वाला जेट-पावर्ड ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ है। जिसे लंबे समय तक हवा में रहकर निगरानी और तय लक्ष्य पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस एयरक्राफ्ट ने उत्तर प्रदेश में एक तय टेस्टिंग एयरस्ट्रिप से उड़ान भरी और इसे भारत में बने जेट इंजन से पावर मिली। लखनऊ की डिफेंस स्टार्टअप कंपनी ‘Kawa UAV Pvt. Ltd.’ (HoverIt) द्वारा विकसित इस प्लेटफॉर्म को कॉन्सेप्ट से उड़ान तक पहुंचने में आठ महीने से भी कम समय लगा।

बता दें कि ‘Divyastra Mk3’ को टर्बोजेट इंजन से पावर मिलती है, जिसे पूरी तरह से भारतीय प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी कंपनी ‘DG प्रोपल्शन’ ने बनाया है। कंपनी के अनुसार, ट्रायल के दौरान इंजन ने सभी तय ऑपरेशनल पैरामीटर्स (कामकाज के मानकों) को पूरा किया है।

यह पहली उड़ान भारत के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह पहली बार है जब देश में डिजाइन, विकसित और तैयार किया गया जेट इंजन से चलने वाला लोइटरिंग म्यूनिशन पूरी तरह स्वदेशी पावरप्लांट के साथ आसमान में उड़ा है।

जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2026 की शुरुआत में हुई थी और महज कुछ महीनों में अगस्त में इसकी पहली उड़ान सफलतापूर्वक पूरी हुई। खास बात यह है कि इसे तैयार करने में न तो विदेश से आयात किए गए जेट इंजन का इस्तेमाल किया गया और न ही जरूरी तकनीक के लिए विदेशी सिस्टम पर निर्भरता रही।

कंपनी ने दी जानकारी

HoverIt ने X पर एक पोस्ट में इस प्लेटफॉर्म को “भारत का पहला स्वदेशी जेट इंजन से चलने वाला लोइटरिंग म्यूनिशन” बताया, जो सफलतापूर्वक उड़ान भर सकता है। कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि इसमें भारतीय एयरफ्रेम, भारतीय जेट इंजन, स्वदेशी तकनीक और भारतीय फायरपावर का इस्तेमाल किया गया है।

कंपनी ने कहा, “इसमें कोई इम्पोर्टेड जेट इंजन नहीं। कोई विदेशी क्रिटिकल सब-सिस्टम नहीं। भारत में बना। भारत में उड़ाया गया।”

(HoverIt) के को-फाउंडर्स ने कहा, “यह सिर्फ एक टेस्ट फ्लाइट नहीं है – यह इरादे का इजहार है। भारत ने बड़े पैमाने पर और तेजी से यह साबित कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं के भीतर ही जेट-पावर्ड प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम की कल्पना, इंजीनियरिंग और उड़ान को अंजाम दे सकता है। ‘Divyastra Mk3’ ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जीता-जागता उदाहरण है।”

यह उपलब्धि ऐसे समय में मिली है जब भारत प्रिसिजन स्ट्राइक और ऑटोनॉमस एयर सिस्टम में अपनी घरेलू क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इससे स्वदेशी एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म और प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने में भारतीय प्राइवेट-सेक्टर की डिफेंस कंपनियों की बढ़ती भूमिका भी उजागर होती है।

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Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट, 30 मीटर नीचे बन रहा BKC स्टेशन, सूरत स्टेशन ने लिया भव्य आकार

Bullet Train Update: भारत की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) तेजी से आकार ले रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में इस 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट के दो सबसे चुनौतीपूर्ण स्टेशनों मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) और गुजरात के सूरत स्टेशन पर काम महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। BKC टर्मिनल हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के दक्षिणी शुरुआती पॉइंट के तौर पर काम करेगा। बीकेसी (BKC) स्टेशन जमीन से लगभग 30 मीटर गहराई में बनाया जा रहा है।

BKC में देश के सबसे महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण अंडरग्राउंड रेलवे स्टेशनों में से एक तैयार किया जा रहा है। यह पूरे प्रोजेक्ट का सबसे मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यहां खुदाई और नींव (फाउंडेशन) का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है, जिससे स्टेशन के निर्माण में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल हुआ है। वहीं, सूरत स्टेशन का ढांचा और छत का काम पूरा हो चुका है। अब वहां फिनिशिंग का काम बुलेट ट्रेन की रफ्तार से चल रहा है।

क्यों अहम है BKC स्टेशन?

News18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई का BKC स्टेशन इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनल होगा। इसे जमीन से करीब 30 मीटर नीचे बनाया जा रहा है। यही वजह है कि इसे पूरी परियोजना के सबसे जटिल निर्माण कार्यों में शामिल किया गया है। स्टेशन के लिए खुदाई और फाउंडेशन से जुड़े प्रमुख काम अब अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। अंडरग्राउंड स्टेशन होने के कारण यहां निर्माण के दौरान इंजीनियरिंग, सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। BKC स्टेशन तैयार होने के बाद मुंबई से बुलेट ट्रेन सेवा शुरू करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सूरत स्टेशन का स्ट्रक्चर तैयार, अब इंटीरियर का काम जारी

गुजरात के सूरत में बुलेट ट्रेन स्टेशन का निर्माण भी तेजी से आगे बढ़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेशन का मुख्य स्ट्रक्चरल फ्रेम और रूफिंग का काम पूरा हो चुका है। अब यहां फर्श, क्लैडिंग और सीलिंग लगाने समेत अन्य इंटीरियर फिनिशिंग का काम चल रहा है। सूरत स्टेशन का डिजाइन भी खास तरीके से तैयार किया गया है। इसकी वास्तुकला में सूरत की पहचान यानी हीरा काटने और पॉलिश करने के उद्योग से प्रेरणा ली गई है। स्टेशन की डिजाइन के जरिए शहर की कारोबारी और औद्योगिक पहचान को दर्शाने की कोशिश की गई है।

508 किमी लंबा होगा पूरा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भारत की पहली हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट है। करीब 508 किलोमीटर लंबी यह समर्पित रेल लाइन मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगी। यह कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इसके रास्ते में कई प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी शहर इससे जुड़ेंगे।

इस कॉरिडोर पर कुल 12 स्टेशन होंगे

मुंबई (BKC)

ठाणे

विरार

बोइसर

वापी

बिलिमोरा

सूरत

भरूच

वडोदरा

आनंद

अहमदाबाद

साबरमती

320 km प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने की उम्मीद है। इस रफ्तार से मुंबई से अहमदाबाद के बीच करीब 508 किलोमीटर की दूरी लगभग 2 घंटे में तय की जा सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक, पूरी लाइन तैयार होने से पहले इसके कुछ हिस्सों पर चरणबद्ध तरीके से सेवा शुरू की जा सकती है। यानी यात्रियों को पूरे कॉरिडोर के पूरा होने का इंतजार जरूरी नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट की आधारशिला सितंबर 2017 में रखी गई थी। इसके साथ ही भारत के हाई-स्पीड रेल युग की शुरुआत हुई।

हर स्टेशन की डिजाइन में दिखेगी शहर की पहचान

इस प्रोजेक्ट से जुड़े रेलवे अधिकारियों ने बताया कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के स्टेशनों को केवल परिवहन केंद्र के रूप में नहीं। बल्कि संबंधित शहर की पहचान से जोड़कर तैयार किया जा रहा है। स्टेशनों में आधुनिक वास्तुकला, यात्रियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं और अलग-अलग परिवहन माध्यमों से कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया है। साबरमती स्टेशन को विशेष रूप से एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बुलेट ट्रेन के साथ मेट्रो, BRTS और सामान्य रेलवे को जोड़ा जाएगा। स्टेशन के आसपास के क्षेत्र का विकास ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के सिद्धांतों के आधार पर किए जाने की योजना है।

कब शुरू होगी देश की पहली बुलेट ट्रेन?

बुलेट ट्रेन से सफर करने का सपना देख रहे लोगों को अभी करीब एक साल तक इंतजार करना पड़ेगा। भारत की पहली हाई-स्पीड रेल सर्विस अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए केवल स्टेशन और ट्रैक ही नहीं, बल्कि ट्रेनों के रखरखाव की अत्याधुनिक व्यवस्था भी तैयार की जा रही है। इस रेलवे कॉरिडोर पर हाई-स्पीड ट्रेनों की नियमित जांच, मरम्मत और रखरखाव के लिए तीन अत्याधुनिक रोलिंग स्टॉक डिपो बनाए जा रहे हैं। इनमें एक महाराष्ट्र के ठाणे और दो गुजरात के सूरत और साबरमती में होंगे।

ठाणे डिपो में पहली बार इस्तेमाल होंगी ये टेक्नोलॉजी

मुंबई कॉरिडोर का दक्षिणी टर्मिनस होने के कारण ठाणे का रोलिंग स्टॉक डिपो बेहद महत्वपूर्ण होगा। इसे अत्याधुनिक मशीनरी से लैस किया जा रहा है। न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, यहां कुछ ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा जिन्हें भारत में पहली बार इस्तेमाल किए जाने की योजना है। डिपो में हाई-स्पीड ट्रेन सेट की जांच और रखरखाव किया जाएगा। ताकि ट्रेनें नियमित सेवा के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

साबरमती डिपो में छोटी-बड़ी मरम्मत की पूरी व्यवस्था

गुजरात के साबरमती डिपो में ट्रेनों की छोटी और बड़ी दोनों तरह की मरम्मत की सुविधा होगी। यहां इमरजेंसी रिपेयर एरिया, पहियों की री-प्रोफाइलिंग के लिए उपकरण, कोच बॉडी की मरम्मत और बोगी वर्कशॉप बनाई जाएंगी। ट्रेनों की नियमित जांच के लिए विशेष ट्रैक और इंस्पेक्शन रोड भी तैयार किए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन की नियमित सफाई के लिए ट्रेन-वॉशिंग प्लांट भी लगाए जाएंगे।

पर्यावरण का भी रखा जा रहा ध्यान

बुलेट ट्रेन के रखरखाव केंद्रों को तैयार करते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा रहा है। डिपो में वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट और ग्राउंडवॉटर रिचार्ज सिस्टम लगाए जाएंगे। ट्रेन धोने में इस्तेमाल होने वाले पानी को अधिक से अधिक दोबारा इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी, जिससे पानी की खपत कम की जा सके।

जापान में ट्रेनिंग ले रहे रेलवे कर्मचारी

बुलेट ट्रेन के संचालन और रखरखाव के लिए भारतीय कर्मचारियों को विशेष ट्रेनिंग दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों को जापान में सीधे ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इन कर्मचारियों को जापान की प्रसिद्ध शिंकानसेन हाई-स्पीड रेल सिस्टम के संचालन और रखरखाव से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई है। इस तरह मुंबई से अहमदाबाद तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी केवल ट्रैक और स्टेशनों तक सीमित नहीं है। स्टेशन, डिपो, रखरखाव व्यवस्था, कर्मचारियों की ट्रेनिंग और आधुनिक यात्री सुविधाओं पर एक साथ काम किया जा रहा है।

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Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में अशोकधाम मंदिर में भगदड़! 7 लोगों की मौत, बिजली का तार गिरने से एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर 17 अगस्त की सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में सभी महिलाएं होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के वक्त मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 50 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मौजूद थे।  बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया। इससे लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

लखीसराय के DM शैलेंद्र कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सुबह करीब 6.30-6.45 बजे दो ट्रेनें आईं, जिससे भीड़ और बढ़ गई। हमने भीड़ का अंदाजा लगाते हुए इंतजाम किए थे। फिर हमें पता चला कि भीड़ की वजह से एक तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। हमने तुरंत 10-15 लोगों को यहां भेजा।”

7 लोगों की मौत की पुष्टि

मंदिर में हुए हादसे पर SDPO शिवम कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “सात लोगों की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया और लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हम पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सही वजह बता पाएंगे।” घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। उनका इलाज जारी है।

बिजली के खंभे की अफवाह से मची भगदड़?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा अशोक धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हुआ। बताया जा रहा है कि रात के दौरान इस रास्ते पर एक बिजली का खंभा गिर गया था। सोमवार सुबह भीड़ के बीच अचानक यह अफवाह फैल गई कि गिरे हुए बिजली के खंभे में करंट दौड़ रहा है।

इस खबर से श्रद्धालुओं में घबराहट फैल गई और लोग अचानक इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते रास्ते पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और दूसरे श्रद्धालुओं ने भीड़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों की मदद करने की कोशिश की।

सभी घायल महिलाएं, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के महिला होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और चिकित्सा व्यवस्था में जुट गईं।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्वास्थ्य विभाग और राहत-बचाव दलों को भी घटनास्थल पर लगाया गया है। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़

सोमवार को सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी होने के कारण अशोक धाम मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। भारी भीड़ के बीच बिजली के खंभे को लेकर फैली अफवाह ने अचानक लोगों में डर पैदा कर दिया। इस दौरान देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। बिहार प्रशासन की ओर से फिलहाल घटना की डिटेल्स जांच की जा रही है। हादसे के सही कारण और मृतकों एवं घायलों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

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Dividend Stocks: RVNL और HUDCO समेत 4 सरकारी कंपनियां दे रहीं डिविडेंड का तोहफा, जानिए रिकॉर्ड डेट समेत पूरी डिटेल

Dividend Stocks: अगले हफ्ते डिविडेंड पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। HUDCO, NBCC, RVNL और Mazagon Dock Shipbuilders समेत चार सरकारी कंपनियां 17 से 20 अगस्त के बीच एक्स-डिविडेंड होने जा रही हैं। इन चारों कंपनियों ने जून तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे भी जारी किए हैं। कहीं मुनाफे में मजबूत बढ़ोतरी हुई है तो कहीं रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रदर्शन ने निवेशकों का ध्यान खींचा है।

HUDCO

सरकारी हाउसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी HUDCO 17 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ने ₹1.50 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है।

इस सरकारी कंपनी का जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 35% बढ़कर ₹851 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 26.6% बढ़कर ₹3,717 करोड़ पहुंच गया। बेहतर लोन ग्रोथ और मजबूत एसेट क्वालिटी ने कंपनी के नतीजों को सहारा दिया।

NBCC

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC (India) भी 17 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ₹0.15 प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड दे रही है।

NBCC का जून तिमाही में नेट प्रॉफिट 17.2% बढ़कर ₹154.83 करोड़ रहा। हालांकि, रेवेन्यू 5.6% घटकर ₹2,259.53 करोड़ पर आ गया। इसके बावजूद कंपनी का मजबूत ऑर्डर बुक आगे के कारोबार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

RVNL

सरकारी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RVNL 18 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी ने ₹0.71 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

इस सरकारी कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 18.5% बढ़कर ₹159 करोड़ हो गया। वहीं, रेवेन्यू 10.6% बढ़कर ₹4,321 करोड़ पहुंच गया। EBITDA में भी मजबूत बढ़त दर्ज हुई, जिससे ऑपरेटिंग प्रदर्शन बेहतर रहा।

Mazagon Dock Shipbuilders

सरकारी डिफेंस शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders 20 अगस्त को एक्स-डिविडेंड होगी। कंपनी अपने शेयरधारकों को ₹4.62 प्रति शेयर फाइनल डिविडेंड देगी।

जून तिमाही में मझगांव डॉक का नेट प्रॉफिट 21.5% बढ़कर ₹549.41 करोड़ रहा। वहीं, रेवेन्यू 12.1% बढ़कर ₹2,942.70 करोड़ हो गया। EBITDA में करीब 48% की बढ़त और बेहतर मार्जिन ने तिमाही प्रदर्शन को मजबूत बनाया।

एक नजर में पूरी लिस्ट

कंपनीडिविडेंडEx-Date
HUDCO₹1.5017 अगस्त
NBCC₹0.1517 अगस्त
RVNL₹0.7118 अगस्त
Mazagon Dock₹4.6220 अगस्त

डिविडेंड पाने के लिए क्या करना होगा?

डिविडेंड का फायदा लेने के लिए निवेशकों के पास Ex-Date से पहले संबंधित कंपनी के शेयर डीमैट खाते में होने चाहिए। भारत में T+1 सेटलमेंट नियम लागू है, इसलिए एक्स-डेट वाले दिन शेयर खरीदने पर डिविडेंड का लाभ नहीं मिलेगा। आपको एक दिन पहले ही शेयर खरीदना होगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।