Nestle Controversies: कभी बेबी फूड, कभी किटकैट, कभी मैगी…नेस्ले के लिए नया नहीं है विवादों में घिरना, लंबा है इतिहास

एफएमसीजी कंपनी नेस्ले (Nestle) एक बार फिर विवादों में है। ताजा मामला इसकी भारतीय यूनिट नेस्ले इंडिया से जुड़ा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पाया है कि शिशु पोषण (Infant Nutrition) के 3 उत्पादों में खाद्य सुरक्षा मानकों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया। इसे लेकर FSSAI ने नेस्ले इंडिया लिमिटेड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि कंपनी का कहना है कि वह लागू नियमों का पूरी तरह पालन कर रही है। FSSAI का कहना है कि उसने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध NAN एक्सेला प्रो स्टेज 1, लैक्टोजेन प्रो 1 और एक फॉलो-अप फॉर्मूला की जांच शुरू की है।

नियामक ने NAN एक्सेला प्रो स्टेज-1 में ‘5HMOs’ और ‘व्हे प्रोटीन’ से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई है। वहीं, लैक्टोजेन प्रो 1 में ‘व्हे प्रोटीन’ को आसानी से पचने वाला बताने के दावे पर सवाल उठाया है। इसके अलावा नेस्ले इंडिया के एक फॉलो-अप फॉर्मूला का सैंपल लैब टेस्ट में बायोटिन की मात्रा के मामले में स्टैंडर्ड्स के मुताबिक नहीं पाया गया। नेस्ले इंडिया के ये तीनों प्रोडक्ट प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं। इसलिए FSSAI ने कंपनी के खिलाफ 3 अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। हालांकि नेस्ले इंडिया का कहना कि उसके बच्चों के पोषण वाले प्रोडक्ट सभी लागू नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं।

नेस्ले और विवादों का नाता नया नहीं है। कंपनी भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी पहले भी कई बार विवादों के साए में रह चुकी है। कभी गलत मार्केटिंग प्रैक्टिसेज, कभी प्रोडक्ट की प्राइस फिक्सिंग तो कभी अनहेल्दी प्रोडक्ट्स को लेकर कंपनी आलोचनाएं झेल चुकी है। आइए डालते हैं एक नजर नेस्ले से जुड़े प्रमुख विवादों पर…

बेबी फॉर्मूला मार्केटिंग विवाद

साल 1977 में अमेरिका में नेस्ले को जबरदस्त बॉयकॉट झेलना पड़ा था। वजह थी नेस्ले के ब्रेस्ट मिल्क सब्सटिट्यूट की एग्रेसिव मार्केटिंग। यह मार्केटिंग कुछ इस तरह की गई कि कंपनी पर मांओं को स्तनपान कराने से हतोत्साहित करने और अपने बेबी फॉर्मूले को मां के दूध से ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक यानि हेल्दी बताने का आरोप लग गया। कैंपेनिंग में इस तरह का संकेत दिया गया कि इस फॉर्मूले का इस्तेमाल हेल्थ प्रोफेशनल्स करते हैं। नेस्ले ने मैटरनिटी यूनिट्स में अपने फॉर्मूले के फ्री सैंपल बांटना शुरू किया और सेल्सपर्सन को नर्स के जैसे तैयार करके पेश करने लगी।

हालांकि नेस्ले का बेबी फॉर्मूला, मां के दूध से ज्यादा पौष्टिक है, इस बात का कोई सबूत नहीं था। लेकिन विवाद तो खड़ा हो गया था और 1977 में अमेरिका में नेस्ले का बहिष्कार शुरू हो गया। फिर यह धीरे-धीरे यूरोप में भी फैल गया। बहिष्कार आधिकारिक तौर पर 1984 में बंद हुआ, वह भी तब जब नेस्ले, WHO द्वारा समर्थित इंटरनेशनल मार्केटिंग कोड का पालन करने पर राजी हुई। लेकिन 1989 में बॉयकॉट फिर शुरू हो गया। इसके बाद नेस्ले पर 1990 के दशक में भी पाकिस्तान जैसे विकासशील देशों में इसी तरह की मार्केटिंग प्रैक्टिसेज अपनाने के आरोप लगते रहे।

KitKat: चॉकलेट या वेफर

बात 1998 की है। नेस्ले इंडिया अपनी किटकैट को भारत में वेफर की कैटेगरी में रखना चाहती थी और इसी के हिसाब से 10 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी भरना चाहती थी। लेकिन टैक्स अथॉरिटीज को यह मंजूर न था। उनका मानना था कि किटकैट एक चॉकलेट है और इसलिए इस पर 20 प्रतिशत ड्यूटी लगनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि नेस्ले इंडिया, किटकैट का विज्ञापन तो चॉकलेट के तौर पर कर रही है, लेकिन ड्यूटी वेफर वाली भरना चाहती है। लेकिन नेस्ले भी कहां कम थी। उसने सफाई दी कि वह किटकैट को चॉकलेट बताकर नहीं बेचती, लोग इसे वेफर और चॉकलेट का कॉम्बिनेशन समझकर खरीदते हैं।

टैक्स अथॉरिटी का कहना था कि किटकैट में 68-70 प्रतिशत चॉकलेट मिल्क है, इसलिए इसे चॉकलेट माना जाना चाहिए। उस वक्त सेंट्रल एक्साइज डिपार्टमेंट ने नेस्ले इंडिया पर 24 करोड़ रुपये की ड्यूटी लगाई थी। इसमें किटकैट के कथित मिसक्लासिफिकेशन के लिए 100 प्रतिशत अनिवार्य जुर्माना शामिल था। नेस्ले इंडिया को सेंट्रल एक्साइज एक्ट के सेक्शन 11 AB के प्रावधानों के मुताबिक ब्याज भरने का भी निर्देश दिया गया था।

मामला बढ़ते-बढ़ते ‘कस्टम्स, एक्साइज एंड गोल्ड ट्राइब्यूनल, मुंबई’ में पहुंचा- ‘नेस्ले इंडिया वर्सेज कमिश्नर ऑफ सेंट्रल एक्साइज (एड्ज्यूडिकेशन), मुंबई’। ट्राइब्यूनल को तय करना था कि किटकैट में वेफर पर चॉकलेट की कोटिंग है या चॉकलेट के अंदर वेफर। फैसला नेस्ले के पक्ष में आया, किटकैट को वेफर माना गया और इसे 10 प्रतिशत सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी की कैटेगरी में ही रखा गया।

चॉकलेट प्राइस फिक्सिंग

कनाडा में प्रतिस्पर्धा ब्यूरो ने चॉकलेट की प्राइसिंग के मामले की जांच के लिए 2007 में नेस्ले कनाडा के ऑफिसेज में छापा मारा था। हर्शी कनाडा और मार्स कनाडा के ऑफिस में भी छापे मारे गए थे। आरोप था कि कीमतों को बढ़ाने के लिए नेस्ले के अधिकारियों ने कनाडा में अपने कॉम्पिटीटर्स के साथ मिलीभगत की। कॉम्पिटीटर्स के अधिकारियों ने रेस्टोरेंट, कॉफी की दुकानों और सम्मेलनों में मुलाकात की। यह आरोप भी था कि नेस्ले कनाडा के तत्कालीन सीईओ रॉबर्ट लियोनिडास ने एक बार एक कॉम्पिटीटर को अपनी कंपनी की प्राइसिंग की जानकारी वाला एक लिफाफा दिया था।

2007 में छापेमारी के सार्वजनिक होने के बाद नेस्ले और अन्य कंपनियों के खिलाफ प्राइसिंग के लिए क्लास एक्शन मुकदमे दायर किए गए। नेस्ले ने किसी भी तरह की जिम्मेदारी माने बिना, 90 लाख डॉलर का समझौता किया। इसके बाद भी संयुक्त राज्य अमेरिका में बड़े पैमाने पर क्लास एक्शन मुकदमे चले।

मिल्क प्रोडक्ट विवाद

सितंबर 2008 के आखिर में, हांगकांग सरकार को चीन में बने नेस्ले के दूध के एक प्रोडक्ट में मेलामाइन मिला। किडनी खराब होने से 6 बच्चों की मौत हो गई और 860 अन्य बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। हालांकि नेस्ले ने कहा कि उसके सभी प्रोडक्ट सुरक्षित हैं और उन्हें मेलामाइन-मिलावटी दूध से नहीं बनाया गया है। अक्टूबर 2008 में ताइवान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि चीन में नेस्ले द्वारा बनाए गए 6 तरह के मिल्क पाउडर में मेलामाइन की थोड़ी मात्रा पाई गई है, और उन्हें बाजार से हटा दिया गया।

जब मैगी पर हुआ बड़ा बवाल, हो गई थी बैन

सितंबर 2026 में सामने आया नया वाकया FSSAI और नेस्ले इंडिया के बीच दूसरा बड़ा रेगुलेटरी विवाद है। इससे पहले 2015 में भारत में नेस्ले की मैगी को लेकर एक बड़ा बवाल हुआ था। लेड की ज्यादा मात्रा और लेबलिंग से जुड़ी चिंताओं के कारण नेस्ले इंडिया अपने इंस्टेंट नूडल्स लिए घिरी थी। मई 2015 में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश के फूड सेफ्टी रेगुलेटर्स ने रिपोर्ट दी कि मैगी नूडल्स में मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG) का लेवल बहुत ही हाई है। साथ ही लेड का स्तर, जितनी मात्रा की इजाजत है उससे 17 गुना ज्यादा है। बस फिर क्या था। मैगी के सेहत के लिए हानिकारक होने, खासकर बच्चों की सेहत के लिए हानिकारक होने को लेकर वाद-विवाद होने लगे। देश में और विदेश में कई जांच हुईं। मामले ने इतना तूल पकड़ा कि भारत सरकार ने जून 2015 में मैगी नूडल्स को पूरे देश में बैन कर दिया।

हालांकि नेस्ले हमेशा से यही कहती आई है कि उसके नूडल प्रोडक्ट सुरक्षित हैं। भारत में जब बैन लगा तो मैगी को लगभग 320 करोड़ रुपये का स्टॉक रिकॉल करना पड़ा यानि कि बाजार से वापस मंगाना पड़ा। इतना ही नहीं ऐसी भी खबर आई कि उसने एक सीमेंट फैक्ट्री को स्टॉक जलाने के लिए 20 करोड़ रुपये दिए। मैगी में MSG और लेड, उचित मात्रा से अधिक होने के चलते भारत के कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने नेस्ले इंडिया पर 640 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

अगस्त 2015 में यूएस हेल्थ रेगुलेटर एफडीए ने टेस्ट किए, जिनमें सामने आया कि मैगी में लेड की मात्रा खतरनाक स्तर पर नहीं है। 13 अगस्त 2015 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने देश में मैगी पर लगे बैन को हटा दिया। कोर्ट का कहना था कि बैन लगाते हुए प्रॉपर प्रोसिजर फॉलो नहीं किया गया। इसके अलावा कोर्ट ने भारत में हुए टेस्ट के नतीजों पर भी सवाल खड़े किए, जिसकी वजह थी कि टेस्ट नेशनल एक्रेडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज की अधिकृत लैब्स में नहीं हुए थे। नवंबर 2015 में मैगी की भारतीय बाजारों में फिर वापसी हो गई।

2021 में जब फूड प्रॉडक्ट्स और ड्रिंक्स अनहेल्दी होने पर घिरी

जून 2021 में नेस्ले के फूड प्रोडक्ट्स पर एक बड़ा खुलासा हुआ। कंपनी के एक इंटर्नल डॉक्युमेंट में माना गया कि उसके 60 प्रतिशत से ज्यादा फूड प्रोडक्ट और ड्रिंक्स अनहेल्दी हैं। कंपनी ने यह भी माना है कि इसके कुछ फूड प्रोडक्ट कभी भी हेल्दी नहीं होंगे, फिर चाहे वह कितना भी सुधार क्यों न कर ले। यह बात सामने आते ही नेस्ले की फिर से आलोचना होने लगी। एक प्रेजेंटेशन में कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ स्टार रेटिंग सिस्टम के तहत कंपनी के 37 प्रतिशत प्रोडक्ट्स को ही 3.5 स्टार या इससे ज्यादा की रेटिंग मिली। 3.5 स्टार की रेटिंग ‘रिकग्नाइज्ड डेफिनेशन ऑफ हेल्थ’ मानी जाती है। सामने आया था कि नेस्ले के 60 प्रतिशत फूड प्रोडक्ट इस मानक पर खरे नहीं उतरे।

भगवान जगन्नाथ की तस्वीर वाली पैकेजिंग पर विवाद

जनवरी 2022 में नेस्ले इंडिया को सोशल मीडिया पर ग्राहकों की पुरजोर नाराजगी का सामना करना पड़ा था। कारण था किटकैट के रैपर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की तस्वीरें। यह नया स्टॉक आते ही विवादों में घिर गया। कंपनी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा। नेस्ले इंडिया की सफाई थी कि उसके इस कदम का उद्देश्य केवल भारत के खूबसूरत और दर्शनीय स्थलों को उकेरना था। किटकैट के डिब्बे पर पट्टचित्र के जरिए ओडिशा की संस्कृति को उकेरा गया था।

लेकिन तगड़ी आलोचना को देखते हुए कंपनी ने अपने कदम पर खेद जताया। कहा कि उसने साल 2021 में ही विवादास्पद पैकेजिंग वाली किटकैट के डिब्बों को बाजार से वापस ले लिया था। बाकी बचा हुआ माल भी जल्द ही बाजार से गायब हो गया। इससे पहले अप्रैल 2021 में नेस्ले इंडिया ने किटकैट चॉकलेट के पैकेट पर मणिपुर के कीबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान को मेघालय में दिखाए जाने के लिए माफी मांगी थी। राज्य सरकार के अधिकारियों की आपत्ति के बाद कंपनी ने यह कदम उठाया था।

बेबी फूड में चीनी

अप्रैल 2024 में स्विस NGO ‘पब्लिक आई’ और ‘इंटरनेशनल बेबी फूड एक्शन नेटवर्क’ (IBFAN) की एक जांच से पता चला कि कम और मध्यम आय वाले देशों में बेचे जाने वाले नेस्ले के लोकप्रिय बेबी सीरियल प्रोडक्ट्स और फॉर्मूलाज में यूरोप और अन्य विकसित देशों में बेचे जाने वाले उत्पादों की तुलना में काफी ज्यादा मात्रा में एडेड शुगर है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में जांचे गए सभी सेरेलक बेबी सीरियल प्रोडक्ट्स में एडेड शुगर थी और मात्रा औसतन प्रति सर्विंग लगभग 3 ग्राम थी। वहीं नेस्ले के यूरोपीय बाजार में बिना चीनी वाले शिशु पोषण उत्पाद उपलब्ध थे। विकासशील देशों में नेस्ले के सबसे ज्यादा बिकने वाले बेबी-फूड ब्रांड्स में काफी ज्यादा मात्रा में एडेड शुगर पाई गई, जबकि स्विट्जरलैंड में इसके प्रोडक्ट शुगर-फ्री थे।

नेपाल के इकलौते अरबपति और नूडल किंग पर भारत में बड़ा एक्शन! जानिए FSSAI ने Wai Wai बनाने वाली कंपनी पर क्यों कसा शिकंजा

भारत में फूड सेफ्टी को लेकर चल रही मेगा ड्राइव में एक और बड़ा एक्शन देखने को मिला है और इस बार इसकी जद में नेपाल के एकमात्र अरबपति आ गए हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेपाल के इकलौते अरबपति की कंपनी पर बड़ा एक्शन लिया है। मशहूर वाई-वाई नूडल्स बनाने वाली इस कंपनी की फैक्ट्री में जांच के बाद कुछ प्रोडक्ट्स को बंद करने का आदेश जारी किया गया है। जांच में पाया गया कि यह फैक्ट्री भारत में स्नैक्स बनाने में अनहेल्दी तरीके से जमीन पर गिरे और टूटे हुए नूडल्स का इस्तेमाल कर रही थी।

राजस्थान में कंपनी की फैक्ट्री पर गिरी गाज

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक FSSAI का यह आदेश राजस्थान में सीजी फूड्स इंडिया की फैक्ट्री को जारी किया गया है। आपको बता दें कि यह कंपनी सीजी कॉर्प ग्लोबल का हिस्सा है, जिसके प्रमुख नेपाल के एकमात्र अरबपति बिनोद चौधरी हैं। बिनोद चौधरी को नूडल किंग के उपनाम से भी जाना जाता है। FSSAI की इस जांच का मुख्य फोकस वाई-वाई ब्रांड के तहत बेचे जाने वाले भुजिया के 2 प्रोडक्ट्स पर था। ये भारत में कई कंपनियों द्वारा छोटे पैकेटों में बेची जाने वाली मशहूर फ्राइड स्नैक है।

बिना हीट ट्रीटमेंट फर्श के नूडल्स से बन रही थी भुजिया

FSSAI) ने अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस एक्शन की जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों और जांच करने वालों ने पाया कि फैक्ट्री में बिना किसी हीट ट्रीटमेंट के फर्श से इकट्ठा किए गए टूटे हुए नूडल्स को दोबारा प्रोसेस करके भुजिया बनाई जा रही थी। रॉयटर्स ने इस संबंध में रिएक्शन लेने के लिए जब संपर्क करने की कोशिश की, तो सीजी फूड्स इंडिया की ओर से कोई जवाब नहीं आया। FSSAI के पोस्ट को यहां नीचे देखा जा सकता है।

32000 किलो स्टॉक और एक्सपायर्ड सामान जब्त

कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने फैक्ट्री से 32000 किलोग्राम का स्टॉक जब्त किया है। इसके अलावा, परिसर से 1925 बॉक्स ऐसे तैयार सामान के मिले हैं जिनकी एक्सपायरी डेट निकल चुकी थी। FSSAI ने जानकारी दी है कि संबंधित फूड बिजनेस ऑपरेटर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है और प्रयोगशाला जांच के लिए प्रोडक्स्ट के सैंपल भी लिए गए हैं।

देशव्यापी फूड सेफ्टी ड्राइव का हिस्सा

इस समय देशभर में फूड सेफ्टी को लेकर केंद्र और अलग अलग राज्य सरकारों के अधिकारी अभियान चला रहे हैं। फूड सेफ्टी, स्वच्छता या लेबलिंग में किसी भी कमी के लिए बड़े-छोटे रेस्टोरेंट्स और ब्रांड्स पर काफी कार्रवाई हो रही हैं। हाल के समय में डोमिनोज, पिज्जा हट से लेकर डियाजियो जैसे बड़े ब्रांड्स पर भी सख्त कार्रवाइयां देखने को मिली हैं। इसी कड़ी में पिछले हफ्ते भारतीय अधिकारियों ने मुंबई में एक अवैध नेटवर्क पर भी छापेमारी की थी। वहां पेप्सिको और नेस्ले जैसी दिग्गज कंपनियों के मूल उत्पादों पर फर्जी तरीके से एक्सपायरी डेट और न्यूट्रिशनल जानकारी बदलकर दूसरे देशों में एक्सपोर्ट करने का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया था।

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भारतीय बाजारों ने तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ा, शॉर्ट टर्म में बंपर कमाई के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर

भारतीय बाजारों ने तीन दिन की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया है। सुबह 10 बजे, सेंसेक्स 295.68 अंक या 0.39 प्रतिशत बढ़कर 76,866.03 पर और निफ्टी 86.50 अंक या 0.36 प्रतिशत बढ़कर 24,000.95 पर दिख रहा था। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में अडानी पोर्ट्स,पावर ग्रिड कॉर्प, एक्सिस बैंक, HDFC बैंक और SBI शामिल हैं। जबकि गिरावट वाले शेयरों में टेक महिंद्रा,नेस्ले,बजाज ऑटो,इंफोसिस और सिप्ला शामिल हैं। सेक्टर के हिसाब से देखें तो IT इंडेक्स 1% नीचे दिख रहा। जबकि बैंक,रियल्टी और मेटल इंडेक्स में 1-1% की बढ़त है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स सपाट कारोबार कर रहा है,जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.7% ऊपर है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि US बॉन्ड यील्ड में थोड़ी कमी के कारण आज मार्केट का मूड बेहतर रहने की उम्मीद है। रुपये के नज़रिए से एक बड़ी अच्छी बात यह है कि कंसेशनल स्वैप सुविधा के तहत 136 अरब डॉलर की भारी रकम जुटाई गई है। FCNR(B) स्कीम के तहत जुटाए गए 127 अरब डॉलर की रकम अनुमान से कहीं ज़्यादा है। मार्केट के नज़रिए से इसका मतलब यह है कि रुपया स्थिर होगा,जिससे FIIs का भरोसा बढ़ेगा। ग्रोथ और कमाई की बेहतर संभावनाओं के कारण, US बॉन्ड यील्ड ज़्यादा होने के बावजूद FIIs के भारत में खरीदारी जारी रखने की उम्मीद है। साथ ही,बैंकों द्वारा भारी मात्रा में FCNR(B) फंड जुटाने से उनके NIMs को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। यह बैंकिंग स्टॉक्स के लिए अच्छी बात है।

कल बाज़ार में आई गिरावट की एक दिलचस्प बात यह है कि निफ़्टी में 141 अंकों की गिरावट के बावजूद इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स ने ₹9,500 करोड़ की खरीदारी की। इसमें FII की खरीदारी ₹6,688 करोड़ और DII की खरीदारी ₹2,812 करोड़ रही। साफ है कि ज़्यादातर बिकवाली रिटेल इन्वेस्टर्स,प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ‘बेयर्स'(बाज़ार गिरने की उम्मीद करने वालों) की तरफ से हुई,जिन्होंने बाज़ार की कमज़ोरी का फ़ायदा उठाकर शेयरों की कीमतों को नीचे गिराया। आज इसमें बदलाव की संभावना है।

चॉइस ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का कहना है कि वॉल स्ट्रीट के बढ़त के साथ बंद होने से ग्लोबल संकेत बेहतर हुए हैं। वहीं एशियाई बाज़ारों में राहत की रैली देखी जा रही है और US ट्रेज़री यील्ड में कमी आई है। हालांकि, US-ईरान के बीच तनाव और $95 के आस-पास कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजारों के लिए बड़ जोखिम बनी हुई हैं।

निफ्टी पर रणनीति

सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 23951-24013 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24078-24121/24173 पर है। इसके लिए पहला बेस 23781-23841 पर और बड़ा बेस 23733-23767 पर है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार का कहना है कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस- 57281-57341 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 57640-57780/57910 पर है। इसके लिए पहला बेस 56830-57010 पर और बड़ा बेस 56530-56680 पर है।

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं इक्विनॉक्स रिसर्च एंड एडवाइजर्स (EQUINOX Research & Advisors) के पंकज रांदड़। इनकी अदाणी पोर्ट्स फ्यूचर्स में 1675 रुपए के आसपास, 1658 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ, 1715 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। मुथूट फाइनेंस फ्यूचर्स में भी इनकी 2941 रुपए के ऊपर, 2941 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ,3003 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

Trading Ideas : बाजार में कंसोलीडेशन की उम्मीद, शॉर्ट टर्म में जोरदार कमाई के लिए आज इन शेयरों पर रहे नजर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Weather Forecast: यूपी-बिहार के लिए अगले 24 घंटे होंगे खतरनाक! IMD ने बारिश-तूफान का दिया अलर्ट

Weather Alert: देश के कई इलाकों में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इसके चलते मैदानी क्षेत्रों के साथ-साथ पहाड़ी राज्यों में भी मौसम बदल गया है। मौसम में बदलाव के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। मौसम विभाग ने 23 अगस्त को दिल्ली और बिहार समेत 19 राज्यों में खराब मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया है। कई जगहों पर तेज आंधी के साथ भारी बारिश होने की संभावना है। पूर्वी भारत में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है, वहीं पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण भूस्खलन की आशंका जताई गई है। ऐसे में आईएमडी लोगों को मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इन राज्यों में बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने 23 अगस्त को देश के कई राज्यों में खराब मौसम की संभावना जताई है। यूपी, दिल्ली, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मेघालय, केरल और असम में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। पूर्वी भारत में गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बना हुआ है। इस दौरान कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।

कैसा होगा दिल्ली का मौसम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 23 अगस्त को मौसम का मिजाज बदला हुआ रह सकता है। दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में सुबह से बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने दिन के दौरान बारिश की संभावना जताई है। लेकिन, बारिश के बावजूद लोगों को गर्मी और उमस से पूरी राहत मिलने के आसार नहीं हैं। आज दिल्ली का अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

यूपी-बिहार में होगी तेज बारिश

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में 23 अगस्त को मौसम खराब रहने की संभावना है। यूपी के नोएडा, मेरठ, आगरा, प्रयागराज, गोरखपुर समेत कई इलाकों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। वहीं, बिहार के भी कई जिलों में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की गई है। लखनऊ में तापमान 33 डिग्री और पटना में 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि दोनों शहरों में न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

नेस्ले, पेप्सीको और कोका-कोला पर FSSAI का बड़ा एक्शन, भ्रामक विज्ञापनों के लिए 150 से अधिक कंपनियों को जारी किए नोटिस

Stock Market Updates: सेंसेक्स और निफ्टी फ्लैट, फिर भी निवेशकों ने गंवाए ₹96547 करोड़

शेयर बाजार ने शुक्रवार, 21 अगस्त को फ्लैट कारोबार किया। सेंसेक्स 3.11 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 77,540.83 रुपये पर और निफ्टी 20.1 अंकों की बढ़त के साथ 24,252 पर बंद हुआ। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 96547 करोड़ रुपये घट गया। दिन में सेंसेक्स ने 77,725.67 का हाई और 77,445.86 का लो देखा। निफ्टी 50 दिन में 24,284.05 के हाई और 24,206.80 के लो तक गया। वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी बाजारों में तेज गिरावट के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

गुरुवार, 20 अगस्त को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,92,71,879.619 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को यह घटकर 4,91,75,332.89 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 96,546.729 करोड़ रुपये की कमी।

निफ्टी पर पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, कोटक महिंद्रा बैंक, नेस्ले इंडिया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड टॉप गेनर रहे। वहीं मारुति सुजुकी इंडिया, ट्रेंट, HCL टेक्नोलॉजीस, इंडिगो की पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन और ONGC टॉप लूजर रहे।

गुरुवार को कैसा रहा था कारोबार

गुरुवार को सेंसेक्स 628.04 अंक या 0.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,537.72 पर बंद हुआ था। निफ्टी भी 7 दिन की गिरावट से उबरते हुए 153.55 अंक या 0.64 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,231.85 पर बंद हुआ था। BSE स्मॉलकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.83 प्रतिशत और मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.56 प्रतिशत चढ़ा।

Waterways Leisure Tourism Stock Split: 10 टुकड़ों में टूटेगा यह शेयर, एक सप्ताह में 16% चढ़ा; रिकॉर्ड डेट 25 अगस्त

रुपये में तेजी

शुक्रवार को भारतीय करेंसी रुपया, अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 3 पैसे चढ़कर 95.71 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर रहा। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी से घरेलू मुद्रा को सपोर्ट मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की चुनौती के चलते कमजोर डॉलर का असर कम रहा। रुपया गुरुवार को 1 पैसे की गिरावट के साथ 95.74 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

वैश्विक बाजारों का हाल

एशियाई बाजारों में तेजी है। हेंग सेंग, कॉस्पी, ताइवान वेटेड अच्छी बढ़त में हैं। SET कंपोजिट, जकार्ता कंपोजिट और शंघाई कंपोजिट भी हरे निशान में हैं। वहीं निक्केई 225 में गिरावट है। अमेरिकी बाजार गुरुवार को गिरावट में बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में तेजी है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FMCG Price Hikes: महंगा होगा तेल, साबुन, चॉकलेट? Britannia, Dabur, और HUL समेत छह कंपनियों की ये है तैयारी

FMCG Price Hikes: एफएमसीजी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के भाव बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यह बढ़ोतरी इसी तिमाही में हो सकती है। इसकी वजह ये है कि कमोडिटी की बढ़ती लागत यानी कच्चे माल के महंगे होने और जियो-पॉलिटिकल लेवल पर अनिश्चितताओं के चलते कंपनियों के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां मांग को लेकर अभी भी पॉजिटिव बनी हुई हैं। उनका कहना है कि खपत मजबूत बनी हुई है, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है और रेवेन्यू ग्रोथ में सुधार हो रहा है। इससे पहले जून तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर ने औसतन 2-5% तक भाव बढ़ाए थे।

कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए कुछ चीजों के दाम बढ़ाने के अलावा श्रिंकफ्लेशन का भी सहारा ले रही है। श्रिंकफ्लेशन का मतलब है कि किसी चीज के दाम को स्थिर रखने या हल्के बदलाव के साथ उसके पैकेट का वजन कम कर दिया जाता है। कंपनियों की नजर महंगाई, कच्चे तेल के भाव और मौसम से जुड़े रिस्क जैसे मानसून और अल नीनो (El Nino) पर भी है।

क्या है कंपनियों की तैयारी

दिग्गज बेकरी फूड कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) को इस तिमाही भाव में 1.5-2% बढ़ोतरी की उम्मीद है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ₹5और ₹10 की बिस्किट वाले पैक में श्रिंकफ्लेशन के जरिए किया जा सकता है क्योंकि चीनी और पाम तेल की कीमतें अभी भी ऊंची हैं। कंपनी के एमडी और सीईओ रक्षित हरगवे के मुताबिक जून तिमाही में प्राइसिंग से जुड़ी ग्रोथ मुख्य रूप से श्रिंकफ्लेशन के जरिए आई थी और इसका ओवरऑल असर 1% था लेकिन सितंबर तिमाही में 1.5-2.0% तक अतिरिक्त प्राइसिंग एक्शन देखने को मिल सकता है।

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumer Products) ने जून तिमाही में औसतन लगभग 5% भाव बढ़ाए थे। साथ ही कंपनी ने सितंबर तिमाही में भाव में और बढ़ोतरी की भी बात कही। हालांकि कंपनी कच्चे माल के भाव के रुझान को लेकर ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति का कहना है कि कंपनी के कई कच्चे माल की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी हुई हैं और इसके भाव में बदलाव का असर आमतौर पर 3-4 हफ्ते में दिखाई देता है। फिलहाल कच्चा तेल प्रति बैरल $80-85 के आसपास है और कंपनी का मानना है कि फिलहाल बहुत अधिक प्राइस हाइक की जरूरत नहीं है।

डाबर इंडिया (Dabur India) का मानना है कि इनपुट कॉस्ट यानी कच्चे माल और अन्य खर्च के ऊंचे बने रहने के आसार हैं। ऐसे में कंपनी का कहना है कि मार्जिन को बनाए रखने के लिए वह सोच-समझकर भाव बढ़ाएगी और साथ ही प्रोडक्टिविटी और कॉस्ट एफिशिएंसी पर अधिक ध्यान देगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ​​का कहना है कि ग्रोथ मुख्य रूप से रेवेन्यू और प्राइस से आएगी। अर्निंग्स कॉल में उन्होंने कहा कि महंगाई की वजह से इसका बोझ कंज्यूमर पर डालना पड़ा, वॉल्यूम ग्रोथ के मुकाबले प्राइस ग्रोथ और वैल्यू ग्रोथ ज़्यादा हो रही है और महंगाई बहुत अधिक होने के कारण वॉल्यूम पर दबाव रहेगा।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) सितंबर तिमाही में कई प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ा सकती है, क्योंकि इसे तिमाही आधार पर 2-5% की इनफ्लेशन ग्रोथ की आशंका दिख रही है। कंपनी की सीईओ और एमडी प्रिया नायर का कहना है कि जून तिमाही में कीमतें 2-5% बढ़ाई गई थी और अब बढ़ती लागत को एडजस्ट करने और वॉल्यूम ग्रोथ को बनाए रखने के लिए सितंबर तिमाही में भी कीमतें बढ़ाई जाएगी।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products) के एमडी सुनील डिसूजा ने जरूरत पड़ने पर कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं।

नेस्ले इंडिया (Nestle India) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन और मानसून पर अलनीनो के असर पर नजर बनी हुई है।

IRFC Shares: ₹200 के ऊपर थी तगड़ी डिमांड, अब ₹100 के नीचे नहीं मिल रहे खरीदार! आखिर क्या है चक्कर

Momentum Stocks: नेस्ले ने हिट किया नया हाई, फीनिक्स मिल्स,मंगलम ऑर्गेनिक्स और वायसराय होटल्स को पड़ी तगड़ी मार

Momentum Stocks : एक ऐसे बाज़ार में जहां किन्ही नए ट्रिगर्स की कमी दिख रही है,29 जुलाई को कई शेयरों ने चुपचाप सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसकी वजह रही इनमें आया टेक्निकल ब्रेकआउट,मज़बूत प्राइस एक्शन और लगातार कायम खरीदारी। चुनिंदा स्टॉक्स में तेज़ी का मज़बूत रुझान दिख रहा है और ये अपने अहम शॉर्ट से मीडियम टर्म मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहे हैं,जो शॉर्ट टर्म के लिए पॉजिटिव संकेत है।

Almondz Global के शेयर 15.04% बढ़कर ₹15.07 पर पहुंच गए हैं। यह अपने 30-दिन (₹13.10), 50-दिन (₹13.38) और 150-दिन (₹14.77) के सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से ऊपर ट्रेड कर रहा है,हालांकि यह अभी भी अपने 200-दिन के SMA (₹15.41) से थोड़ा नीचे है, जो इसकी बेहतर होती टेक्निकल पोजीशन का संकेत है।

केन एंटरप्राइजेज का शेयर 10.30% बढ़कर ₹39.50 पर पहुंच गया और अपने 30-दिन (₹35.81), 50-दिन (₹35.08) और 150-दिन (₹38.62) के मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना रहा। हालांकि,यह शेयर अपने 200-दिन के SMA (₹40.77) से थोड़ा नीचे ट्रेड करता रहा,जो एक अहम रेजिस्टेंस लेवल का संकेत है।

Expleo Solutions के शेयर 9.88% बढ़कर ₹893.70 पर पहुंच गए। यह शेयर अपने सभी अहम मूविंग एवरेज जैसे 30-दिन (₹813.31), 50-दिन (₹835.37), 150-दिन (₹842.98) और 200-दिन (₹889.94) के SMA से ऊपर ट्रेड कर रहा है। सभी अहम एवरेज से ऊपर ट्रेड करना मज़बूत अपवर्ड मोमेंटम और पॉज़िटिव लॉन्ग-टर्म टेक्निकल ट्रेंड का संकेत है।

कुछ चुनिंदा स्टॉक्स पर बिकवाली का दबाव दिख रहा है। यह बाज़ार के सतर्क रुख को दर्शाता है। फीनिक्स मिल्स का शेयर 5.14% गिरकर ₹1,906.30 पर आ गया है। यह अपने 30-दिन के SMA (₹2,009.63) से नीचे और 50-दिन के SMA (₹1,908.97) से थोड़ा नीचे फिसल गया। हालांकि,शेयर अपने 150-दिन (₹1,792.18) और 200-दिन (₹1,770.94) के सिंपल मूविंग एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड करता रहा है,जिससे पता चलता है कि हालिया कमजोरी के बावजूद इसका लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

मंगलम ऑर्गेनिक्स का शेयर 3.53% गिरकर ₹524.95 पर आ गया और यह अपने 30-दिन (₹544.17)और 50-दिन (₹535.13)के सिंपल मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है। गिरावट के बावजूद,यह शेयर अपने 150-दिन (₹481.53) और 200-दिन (₹485.54) के मूविंग एवरेज से ऊपर बना हुआ है,जिससे पता चलता है कि इसका लॉन्ग-टर्म ट्रेंड अभी भी बरकरार है।

वायसराय होटल्स के शेयर 3.44% गिरकर ₹127.05 पर आ गए। यह अपने 30-दिन के SMA (₹131.58) से नीचे चला गया,लेकिन अपने 50-दिन (₹107.23), 150-दिन (₹37.29) और 200-दिन (₹28.47) के सिंपल मूविंग एवरेज से काफी ऊपर बना हुआ है। शेयर अभी भी अपने लंबे समय के एवरेज से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा है,जो दिन की गिरावट के बावजूद लॉन्ग टर्म ट्रेंड में मज़बूती को दिखाता है।

इस बीच,कई शेयरों ने 52-हफ्ते का नया उच्चतम स्तर छुआ जो लगातार जारी खरीदारी को दिखाता है। नए एक-साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने वाले प्रमुख शेयरों में रैडिको खेतान,कल्याण ज्वैलर्स,लॉरस लैब्स,डिविस लैब्स,मण्णापुरम फाइनेंस,यूनाइटेड स्पिरिट्स,टीवीएस मोटर,बजाज ऑटो,साई लाइफ साइंसेज, नेस्ले,फेडरल बैंक और टाइटन कंपनी शामिल हैं।

इसके अलावा,आलमंड्ज़ ग्लोबल सिक्योरिटीज,बोहरा इंडस्ट्रीज,गैलेंट इस्पात और सयाजी होटल्स अपने अपर सर्किट पर पहुंच गए,जो ज़बरदस्त खरीदारी और निकट भविष्य में इनमें तेजी बने रहने के संकेत हैं।

 

 

IT Stocks : Infosys और TCS करीब 3% भागे, AI खर्च से जुड़ी चिंताएं कम होने से पूरे सेक्टर में आई हरियाली

Market Outlook : हल्के लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 29 जुलाई को कैसी रह सकती है सेंसेक्स-निफ्टी की चाल

Market Outlook : 28 जुलाई को उतार-चढ़ाव भरे एक्सपायरी सेशन में भारतीय इक्विटी इंडेक्स बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुए। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 69.86 अंक या 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर और निफ्टी 10.60 अंक या 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ। लगभग 1539 शेयरों में बढ़त हुई,2543 शेयरों में गिरावट आई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

TCS सबसे ज़्यादा बढ़त (4.466%) के साथ टॉप गेनर रहा,इसके बाद एटरनल (4.23%), टेक महिंद्रा (3.82%),नेस्ले इंडिया (3%) और सिप्ला (2.5%) रहे। दूसरी ओर, हिंदुस्तान यूनीलीवर (HUL) सबसे ज्यादा गिरावट वाला शेयर रहा। Q1 नतीजों के बाद इसमें 7% की गिरावट आई। इसके बाद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) (-4.24%), कोल इंडिया (-4%),टाटा कंज्यूमर (-2.2%) और NTPC (-2%) रहे।

सेक्टर के हिसाब से मिला-जुला प्रदर्शन रहा। निफ्टी IT सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 3.2% की बढ़त हुई; इसके बाद निफ्टी रियल्टी (2%) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.08%) रहे। निफ्टी ऑटो भी बढ़त के साथ बंद हुआ (0.69%), जबकि निफ्टी फार्मा में 0.2% की बढ़त हुई।

दूसरी ओर,निफ्टी एनर्जी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.7% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी (-1.4%) और निफ्टी पीएसयू बैंक (-0.9%) रहे। निफ्टी मेटल में 0.6% की गिरावट आई,जबकि निफ्टी बैंक 0.58% गिरा। निफ्टी इंफ्रा (-0.5%),निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.4%) और निफ्टी मीडिया (-0.34%) में भी गिरावट रही।

ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.1% की मामूली बढ़त हुई,जबकि निफ्टी स्मॉल कैप 100 इंडेक्स में 0.2% की गिरावट आई।

निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी आज दिन भर एक सीमित दायरे में रहा और मंथली एक्सपायरी के समय आमतौर पर दिखने वाली उतार-चढ़ाव की स्थिति नहीं दिखी। निफ्टी लगातार दूसरे दिन 50EMA के आसपास बंद हुआ,जो ट्रेडर्स के बीच असमंजस की स्थिति को दिखाता है। ऊपरी स्तर पर 24,050 एक मजबूत रेजिस्टेंस बना रहा,जबकि निचले स्तर पर 23,920 के आसपास सपोर्ट देखा गया। अगर इंडेक्स जल्द ही 24,050 के स्तर को पार कर जाता है तो उसे 24,500 की ओर बढ़ने के लिए जरूरी मजबूती मिल सकती है। निचले स्तर पर सपोर्ट 23,800 पर है।

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह ने कहा कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 24120-24150 के जोन में है,जो 100 डे EMA के पास स्थित है। अगर निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है तो यह 24300 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 24450 तक बढ़ सकता है। वहीं,निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23850-23820 के जोन में है।

बैंक निफ्टी व्यू

LKP सिक्योरिटीज के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा का कहना है कि बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर’बेयरिश कैंडलस्टिक’के साथ सेशन खत्म किया,जो थोड़े नेगेटिव टेक्निकल सेटअप का संकेत है। आवरली चार्ट पर,RSI’बेयरिश क्रॉसओवर’में आ गया है और 50 के लेवल से नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि इंडेक्स अपने 20-पीरियड SMA से नीचे बना हुआ है,जो शॉर्ट टर्म के लिए कमजोर मोमेंटम दिखाता है। बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,200 पर है,जबकि 57,300–57,500 का जोन मजबूत रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। जब तक इंडेक्स इस रेंज से बाहर नहीं निकलता,तब तक ट्रेडर्स को सलाह होगी कि वे लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग अप्रोच अपनाएं और एग्रेसिव डायरेक्शनल पोजीशन लेने से बचें।

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में यह नीचे की ओर गया। दिन के दौरान तेजी से हुई रिकवरी ने इंडेक्स को दिन के उच्चतम स्तर की ओर धकेला,लेकिन 57,030–57,060 का जोन एक मज़बूत रेजिस्टेंस के तौर पर उभरा,जिससे फिर से बिकवाली का दबाव बना। आखिर में इंडेक्स 0.58% गिरकर 56,756 पर बंद हुआ।

टेक्निकल तौर पर बैंक निफ्टी ने एक छोटी बॉडी वाली बेयरिश कैंडल बनाई,जिसमें ऊपर की ओर एक लंबी विक (wick) दिखी जो ऊपरी स्तरों पर प्रॉफिट बुकिंग को दिखाती है। इंडेक्स रिलेटिव रोटेशन ग्राफ (RRG) के ‘लैगिंग क्वाड्रेंट’में भी बना हुआ है जो बेंचमार्क की तुलना में कमजोर रिलेटिव स्ट्रेंथ और मोमेंटम को दर्शाता है।

आगे की बात करें तो बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57,200-57,300 के जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57,700 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58,000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की ओर बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56,300-56,200 के जोन में है।

 

Trading Plan : एक्सपायरी के दिन 80 अंकों के छोटे से दायरे में फंसा निफ्टी, जानिए कल के लिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Outlook: बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ हुआ बंद, जानिए 24 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 23 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,900 के नीचे चला गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर और निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ। लगभग 1569 शेयरों में बढ़त हुई,2479 शेयरों में गिरावट आई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज,श्रीराम फाइनेंस,नेस्ले इंडिया,अदाणी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो,एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस,एमएंडएम,टीसीएस और आयशर मोटर्स शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा और केवल कुछ ही इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। गिरावट वाले सेक्टर में निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस,इंफ्रास्ट्रक्चर,पीएसयू बैंक और निफ्टी एनर्जी में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई। अन्य पिछड़ने वाले सेक्टर में निफ्टी मेटल (-0.7%),निफ्टी फार्मा (-0.4%),निफ्टी एफएमसीजी (-0.4%) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.4%) शामिल रहे।

निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 0.7% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी मीडिया में 0.22% की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में और दिक्कत की चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं। ऐसे में महंगाई के जोखिम और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव की आशंका के कारण निवेशकों का उत्साह कमजोर पड़ रहा है।

हाल के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेत बताते हैं कि लंबे समय से चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। इसका संकेत थोक महंगाई और बिजनेस एक्टिविटी में आई सुस्ती से मिलता है।

एनर्जी की ऊंची कीमतों के चलते ग्लोबल ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका और मजबूत हुई है। इससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने इच्छा कमजोर हुई है। आज सभी सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया। हालांकि,मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इससे पता चलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद,निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है,मांग के रुझान अच्छे हैं और भविष्य के प्रदर्शन को लेकर बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिजनेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। अमेरिका और यूरोप से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशक इक्विटी मार्केट में लंबे समय के लिए निवेश करने से घबरा रहे हैं। रुपये समेत प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती निवेशकों को सुरक्षित डॉलर एसेट्स की ओर खींच रही है। हालांकि बाजार’ओवरसोल्ड’जोन में दिख रहा है,फिर भी निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करना चाहिए।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि डेली चार्ट पर निफ्टी ने अपवर्ड कंसोलिडेशन के लेवल को तोड़ दिया है। इससे पता चलता है कि मार्केट में मंदी का रुझान बढ़ रहा है। इसके अलावा,इंडेक्स अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से भी नीचे आ गया है। RSI इंडिकेटर ‘बेयरिश क्रॉसओवर’की स्थिति में है और नीचे की ओर जा रहा है।

मार्केट का सेंटीमेंट नेगेटिव दिख रहा है और आने वाले समय में भी मार्केट में कमजोरी बनी रह सकती है। निचे की तरफ निफ्टी 23,600 या उससे भी नीचे जा सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ अगले कुछ दिनों तक 24,000 का लेवल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है।

 

Markets Trend : क्रूड के 98 डॉलर के पार जाने से सहमा बाजार, जानिए अब क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Trend : 23800 से नीचे जाने पर निफ्टी में आ सकती है बड़ी गिरावट, कमजोर बाजार में भी इन दो शेयरों में हो सकती है कमाई

Market Trend : ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच 23 जुलाई को भारतीय इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं। मेटल शेयरों को छोड़कर बाकी सभी सेक्टर में बिकवाली के कारण निफ्टी 23900 के करीब ट्रेड कर रहा है। निफ्टी पर एटरनल,टाटा कंज्यूमर,ONGC,बजाज ऑटो और कोल इंडिया में बढ़त दिख रही है। जबकि डॉ.रेड्डीज़ लैब्स,इंटरग्लोब एविएशन,इंफोसिस,टाटा स्टील और सिप्ला में गिरावट नजर आ रही है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे हैं।

निफ्टी ट्रेंड

ऐसे में मार्केट ट्रेंड पर बात करते हुए मंत्री फिनमार्ट (Mantri FinMart) के अरुण कुमार मंत्री ने कहा कि कल का सेशन काफी खराब रहा। लेकिन यह बात ध्यान रखने की है कि पिछले दो दिनों की गिरावट में मिड कैप और स्माल कैप का पार्टिसिपेशन नहीं था। छोटे-मझोले शेयरों में काफी अच्छा मोमेटम देखने को मिला था। लेकिन कल की गिरावट में मिड कैप और स्माल कैप में भी प्रेशर देखने को मिला। क्रूड का दाम बढ़ने से बाजार का मूड खराब हुआ है। साथ ही ट्रंप टैरिफ का वापस आना भी मार्केट का सेंटीमेंट खराब कर रहा है। ऐसे में अगर निफ्टी 23,800 के नीचे जाता है तो पोजीशन से निकल जाना चाहिए। जब तक निफ्टी 23,800 के ऊपर है एग्जिट की सलाह नहीं होगी। निफ्टी में 23,800 का स्टॉप लॉस होना चाहिए। उसके नीचे जाने पर ही ट्रेंड क्लियरली नेगेटिव होगा। इसके बाद निफ्टी 23,400 तक फिसल सकता है। अपसाइड में निफ्टी के लिए 24,300-24,250 पर रेजिस्टेंस है। ऐसे में लगता है कि अगले कुछ दिन निफ्टी 23,800-24,300 के दायरे में ट्रेड करता दिख सकता है।

बैंक निफ्टी ट्रेंड

जहां तक बैंक निफ्टी की बात है तो यह थोड़ा ज्यादा वीक है। HDFC बैंक इस कमजोरी को लीड कर रहा है। क्रूड का बढ़ना भी बैंक निफ्टी को काफी परेशान करता दिख रहा है। बैंक निफ्टी के लिए 56,700 के आसपास एक माइनर सपोर्ट है। अगर 56,700 का लेवल टूटता है तो बैंक निफ्टी मार्केट को और नीचे लो जा सकता है। ऐसे में आपको बैंक निफ्टी 56,700 पर स्टॉप लॉस लगाना है। अगर दोनों में से किसी में लॉन्ग पोजीशंस बनानी है तो निफ्टी ज्यादा बेहतर रहेगा।

Top Stock Picks : निफ्टी और बैंक निफ्टी में उछाल पर बिकवाली की रणनीति करेगी काम, आज इन दो शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

अरुण कुमार मंत्री के पसंदीदा शेयर

अरुण कुमार मंत्री का कहना है कि इस समय उनको दो स्टॉक काफी अच्छे लग रहे हैं। दोनों ही काफी अच्छे मोमेंटम है। इनमें से पहला है नेस्ले इंडिया। कल इसका रिजल्ट आया था। रिजल्ट के बाद एक क्लियर ब्रेकआउट है। इसमें डेली चार्ट पर कप एंड हैंडल का ब्रेकआउट देखने को मिला है। इस स्टॉक को 1497 के आसपास खरीदना है। 1472 रुपए का स्टॉप लॉस लगाएं। शॉर्ट टर्म में 1555 रुपए तक के टारगेट मिल सकते हैं। दूसरा स्टॉक थोड़े बड़े टिकट साइज का है। लेकिन इसमें मोमेंटम नजर आ रहा है। यह शेयर है BOSCH जिसमें 41550 रुपए के आसपास, 41020 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 42300 रुपए तक के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। दोनों ही स्टॉक्स आप दो से तीन दिन के लिए बाय करके चल सकते हैं।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।