India Net Zero Portal: क्लाइमेट चेंज पर भारत का बड़ा एक्शन, अब नेट जीरो टारगेट्स की होगी सार्वजनिक निगरानी! जानें कैसे काम करेगा नया पोर्टल

India Net Zero Portal: केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने विश्व ओजोन दिवस 2026 के मौके पर मुंबई में भारत का नेट जीरो पोर्टल और राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) डैशबोर्ड लॉन्च किया है। ये दोनों डिजिटल इनिशिएटिव्स देश में लिए जा रहे क्लाइमेट एक्शंस में ट्रांसपेरेंसी, कोऑर्डिनेशन के साथ इसे एविंडेस आधारित बनाने में खास भूमिका निभाएंगी।

आपको बता दें कि नेट जीरो पोर्टल अलग अलग संस्थाओं की ओर से वॉलेंट्री लिए गए नेट जीरो संकल्पों को दर्ज करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच प्रदान देगा। इसके अलावा NAPCC डैशबोर्ड जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय मिशनों की प्रगति की निगरानी करेगा।

नेट जीरो पोर्टल बताएगा कि क्लाइेट ऐक्शन में कितना हो रहा काम

नेट जीरो पोर्टल विभिन्न क्षेत्रों की भारतीय संस्थाओं द्वारा स्वैच्छिक पंजीकरण और नेट जीरो प्रतिबद्धताओं के डिस्क्लोजर के लिए एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसपर मौजूद संस्थाएं अपने ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन की जानकारी दे सकती हैं, अपने नेट जीरो टारगेट्स का ऐलान करने के अलावा एनुअल रिपोर्ट अपडेट्स भी दे सकती हैं।

कंपनियों को अपने सीधे (Scope 1) और अप्रत्यक्ष (Scope 2) उत्सर्जन का ब्योरा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं सप्लाई चेन से जुड़े (Scope 3) उत्सर्जन की जानकारी देना पूरी तरह से उनकी मर्जी पर निर्भर होगा। कंपनियां इस पोर्टल पर यह भी बता सकती हैं कि वे नेट जीरो का लक्ष्य कैसे हासिल करेंगी। इसमें साफ-सुथरी ऊर्जा को अपनाना, ऊर्जा की बचत, नई तकनीकों का इस्तेमाल और कार्बन हटाने जैसे उपाय शामिल हैं।

जो भी कंपनियां अपने नेट जीरो लक्ष्य सफलतापूर्वक घोषित करेंगी, उन्हें पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक तौर पर एकनॉलेजमेंट दिया जाएगा।

सबके लिए उपलब्ध रहेगा डेटा

कंपनियों की इन घोषणाओं को आम जनता भी देख सकेगी। इससे देश में जलवायु सुधार के लिए हो रहे कामों का एक बड़ा और पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार होगा। इस पोर्टल को [https://netzeroindia.moef.gov.in/](https://netzeroindia.moef.gov.in/) पर एक्सेस किया जा सकता है।

NAPCC डैशबोर्ड: एक ही जगह दिखेगा सरकारी मिशनों का पूरा रिपोर्ट कार्ड

राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना यानी NAPCC डैशबोर्ड के जरिए सरकार के अलग-अलग जलवायु मिशनों की प्रगति को एक जगह ट्रैक किया जा सकेगा। यह डैशबोर्ड जलवायु परिवर्तन से जुड़े राष्ट्रीय मिशनों के आंकड़ों को एक साथ लाएगा जिससे संबंधित मंत्रालयों और विभागों को उनकी प्रगति पर निगरानी रखना आसान हो जाएगा। इस डैशबोर्ड से अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। साथ ही यह समझने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में कितना काम हुआ है और कहां सुधार की जरूरत है. यह पहल भारत के घरेलू प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए जलवायु वादों से जोड़ने में भी मदद करेगी। इस डैशबोर्ड को  (https://napccindia.moef.gov.in/](https://napccindia.moef.gov.in/) पर देखा जा सकता है।

सरकार की इस पहल का सीधा मकसद टेक्नोलॉजी के जरिए कामकाज में पारदर्शिता लाना और देश को कम-कार्बन वाले भविष्य की ओर ले जाना है, ताकि इस बदलाव में हर किसी की भागीदारी तय की जा सके।

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UP Smart Schools: एक ओर यूपी के 14,429 सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाने का ऐलान, दूसरी ओर नोएडा के स्कूल की CJP ऑडिट पर बवाल

UP smart schools: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद के तहत 14,429 सरकारी प्राइमरी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूलों’ के तौर पर विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। यह फैसला लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। इस योजना के तहत, राज्य के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए चुने गए स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास शुरू की जाएंगी। इन स्कूलों के छात्रों को स्मार्ट क्लास, ICT लैब, डिजिटल किताबें और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा मिलेगी। टेक्नोलॉजी-आधारित लर्निंग सिस्टम के तहत शिक्षक टैबलेट का भी इस्तेमाल करेंगे।

300 करोड़ रुपये मंज़ूर

योगी सरकार ने इस पहल के लिए 300 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। स्मार्ट क्लास लगाने के लिए ‘श्री ट्रॉन इंडिया लिमिटेड’ को लागू करने वाली एजेंसी के तौर पर चुना है। इंस्टॉलेशन का काम कॉम्पिटिटिव टेंडरिंग (प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया) के जरिए किया जाएगा। प्रस्तावित दर 2,07,910 रुपये प्रति स्कूल तय की गई है, जिसमें सैनिटेशन चार्ज और GST शामिल हैं। अगर टेंडर प्रक्रिया में दर कम आती है, तो सरकार 300 करोड़ रुपये की सीमा के भीतर बची हुई रकम का इस्तेमाल और स्कूलों को कवर करने के लिए कर सकती है।

1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा

राज्य में पहले से ही 32,000 से ज़्यादा स्कूलों में स्मार्ट क्लास चल रही हैं। 15,000 से ज्यादा स्कूलों में ICT लैब की सुविधा भी है। जबकि 1,129 स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा दी गई है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में 2.61 लाख से अधिक शिक्षकों को टैबलेट भी उपलब्ध कराए हैं। उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास 2021 में शुरू हुई थीं। जबकि इनका औपचारिक संचालन 2022-23 शैक्षणिक सत्र से शुरू हुआ।

नई स्मार्ट स्कूल योजना सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की पहुंच को और बढ़ाएगी। सरकार छात्रों की संख्या और एनरोलमेंट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट क्लास और ICT लैब सुविधाओं का विस्तार करेगी। इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों के बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा उपलब्ध कराना है।

CJP ने नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को नोएडा में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर दिया। इसके तहत संगठन ने युवाओं से अपने आसपास के स्कूलों का निरीक्षण करने और शिक्षण सुविधाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करने की अपील की। CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने कहा कि 15 अगस्त से जारी इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को अपने क्षेत्र में स्कूलों की स्थिति और वहां दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

दास ने पत्रकारों से कहा, “आज हम ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत एक स्कूल का ऑडिट करने के लिए नोएडा आए हैं। हम देखना चाहते हैं कि यहां बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं। चूंकि, नोएडा उत्तर प्रदेश के बेहतर जिलों में से एक है, इसलिए उम्मीद की जाती है कि यहां के स्कूलों की स्थिति अच्छी होगी।” उन्होंने कहा कि जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए उत्तर प्रदेश के युवाओं को भी आगे आकर अपने आसपास के स्कूलों में दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए।

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इससे पहले, दास ने X पर एक पोस्ट में कहा था कि वह अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कथित तौर पर प्रताड़ित किए गए और अनुचित तरीके से जेल में डाले गए लोगों के परिजन और मित्रों से मुलाकात करेंगे। दास ने कहा था कि संविधान उचित वेतन की मांग करने और अमानवीय रूप से लंबी पाली के खिलाफ प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करता है।

UPI पर फीस से ट्रेडर्स को लग सकता है बड़ा झटका! नितिन कामथ ने समझा दिया पूरा गणित

UPI MDR Impact on Broking: 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर लागू होने जा रहे 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) ने जहां बैंकों की बल्ले-बल्ले कर दी है, वहीं देश के स्टॉक ब्रोकिंग कंपनियों की नींद उड़ा दी है।

देश के प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर जेरोधा के संस्थापक नितिन कामथ ने इस नए नियम पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि अगर ब्रोकिंग के लिए यूपीआई फीस की सीमा तय नहीं की गई, तो ब्रोकर्स को बिना किसी कमाई के करोड़ों रुपये का नुकसान होगा। इसका सीधा असर आम निवेशकों पर पड़ सकता है और फ्री इक्विटी डिलीवरी का दौर खत्म हो सकता है।

ई-कॉमर्स और ब्रोकिंग में अंतर: ‘पैसा आया, लेकिन सौदा नहीं हुआ’

यूपीआई पर फीस लगाने का स्वागत करते हुए नितिन कामथ ने माना कि इससे मार्केट में गूगलपे और फोनपे के 95% एकाधिकार को चुनौती मिलेगी। लेकिन उन्होंने ब्रोकिंग बिजनेस के एक अनोखे पहलू की तरफ ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया की, जब आप यूपीआई से पेमेंट करते हैं, तो कोई सामान खरीदते हैं जिससे कंपनी को कमाई होती है। वहीं जब कोई ग्राहक अपने ट्रेडिंग अकाउंट में यूपीआई से पैसा ट्रांसफर करता है, तो इसकी कोई गारंटी नहीं होती कि वह शेयर खरीदेगा या ट्रेड करेगा।

नियम के मुताबिक ब्रोकर यह यूपीआई फीस ग्राहक से नहीं वसूल सकते। ऐसे में अगर ग्राहक सिर्फ पैसा ट्रांसफर करके छोड़ दे, तो भी ब्रोकर को अपनी जेब से बैंक/एनपीसीआई को फीस देनी ही पड़ेगी। यानी बिना किसी ट्रेड या सौदे के ही ब्रोकर को नुकसान उठाना पड़ेगा।

एक उदाहरण से समझें ₹2 करोड़ का ‘फ्री-फंड’ फटका

नितिन कामथ ने इस गणित को बेहद आसान उदाहरण से समझाया है। मान लीजिए 10,000 ग्राहक एक महीने में 50-50 बार अपने ट्रेडिंग अकाउंट में ₹2 लाख यूपीआई से ट्रांसफर करते हैं। ये ग्राहक पूरे महीने में एक भी शेयर नहीं खरीदते या बेचते यानी ब्रोकर को ₹1 की ब्रोकरेज नहीं मिली।

नए MDR नियमों के तहत, बिना एक भी रुपये की कमाई के, ब्रोकर को सिर्फ इस फंड ट्रांसफर के बदले करीब ₹2 करोड़ का यूपीआई चार्ज अपनी जेब से चुकाना पड़ेगा।

सेबी के नियम से ‘दोहरी मार’

ब्रोकर्स के लिए मुश्किलें सिर्फ यूपीआई फीस तक सीमित नहीं हैं, सेबी का क्वार्टरली सेटलमेंट नियम इस आग में घी का काम कर रहा है। सेबी के मुताबिक, अगर ग्राहक का पैसा ट्रेडिंग अकाउंट में बिना इस्तेमाल के पड़ा है, तो ब्रोकर को हर महीने या तिमाही में वह पैसा वापस ग्राहक के बैंक खाते में भेजना अनिवार्य है। पैसा बैंक में जाने के बाद, 50% से ज्यादा ग्राहक उस पैसे को फिर से यूपीआई के जरिए ट्रेडिंग अकाउंट में डालते हैं।

सेबी के नियम के कारण ब्रोकर को पहले पैसा वापस भेजना पड़ता है और जब ग्राहक उसे फिर से ब्रोकिंग अकाउंट में लाता है, तो ब्रोकर को फिर से उस पर यूपीआई चार्ज (MDR) देना पड़ता है बिना किसी नए सौदे या कमाई के।

क्या बंद हो जाएगी फ्री शेयर डिलीवरी?

वर्तमान में जेरोधा, एंजेल वन जैसे ब्रोकर्स इक्विटी डिलीवरी (लॉन्ग टर्म शेयर खरीद) पर शून्य रुपये ब्रोकरेज लेते हैं। कामथ ने साफ चेतावनी दी है की, ‘अगर हर यूपीआई ट्रांसफर पर हमारी जेब से बेवजह पैसे कटते रहे चाहे ग्राहक ट्रेड करे या न करे तो हम इस नुकसान को अनिश्चित काल के लिए नहीं सह सकते।’ इसका सीधा संकेत है कि अगर नियम में संशोधन नहीं हुआ, तो ब्रोकर्स को मजबूरी में फ्री डिलीवरी ट्रेडिंग पर ब्रोकरेज चार्ज लगाना पड़ सकता है। ट्रेडिंग अकाउंट में फंड ऐड करने पर अलग से फीस वसूलनी पड़ सकती है।

ब्रोकर्स की क्या है मांग?

ब्रोकिंग सेक्टर यूपीआई फीस का पूरी तरह विरोध नहीं कर रहा है, बल्कि इसके लिए एक व्यावहारिक कैप तय करने की मांग कर रहा है। एनपीसीआई के मौजूदा प्रस्ताव में प्रति ट्रांजेक्शन अधिकतम ₹300 तक का कैप रखा गया है। शेयर बाजार के हाई-वॉल्यूम नेचर को देखते हुए MDR दर 0.02% और अधिकतम कैप ₹5 या ₹10 प्रति ट्रांजेक्शन तय किया जाए।

MDR Charges Row: 96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क! वित्त मंत्रालय ने बताया- UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?

UPI Charges Row: सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 से बड़े व्यापारी भुगतान के लिए UPI लेनदेन पर नई शुल्क व्यवस्था लागू करने की घोषणा कर दी है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। जबकि 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। हालांकि, भुगतान करने वाले ग्राहकों को यह शुल्क नहीं देना होगा। सरकार का कहना है कि इसका बोझ दुकानदार या व्यापारी को उठाना पड़ेगा।

दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पीयर-टू-पीयर (P2M) यूपीआई भुगतान पर किसी भी राशि के लिए कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा 2,000 रुपये तक के छोटे व्यापारी लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MCR) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले किसी व्यापारी से लिया जाता है।

96% मर्चेंट पेमेंट पर नहीं लगेगा कोई शुल्क!

सरकार के मुताबिक, व्यक्तियों से व्यापारियों को होने वाले कुल पी2एम लेनदेन की मात्रा में 2,000 रुपये से कम राशि वाले लेनदेन 95 प्रतिशत से भी अधिक हैं। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा, “96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी रकम की परवाह किए बिना शुल्क से मुक्त रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे व्यापारियों के लिए Zero-MDR व्यवस्था के तहत आने वाले ट्रांजैक्शन पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा।”

मंत्रालय के मुताबिक, इसका मतलब है कि लगभग 96 प्रतिशत Person-to-Merchant (P2M) ट्रांजैक्शन पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा। MDR केवल निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा, “यह शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम लेनदेन पर ही 0.4 प्रतिशत की दर से लागू होगा।”

यहां लगेगा 5 रुपये का शुल्क

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती के कच्चे माल जैसे जरूरी और कम मार्जिन वाले सेक्टर में 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का एक समान शुल्क लगेगा। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण सेवाओं की लागत को विश्वसनीय बनाए रखना है। इन कैटेगरी की हिस्सेदारी पी2एम लेनदेन की मात्रा में करीब 17 प्रतिशत है। जबकि लेनदेन के मूल्य में लगभग 46 प्रतिशत है।

यही समान शुल्क व्यवस्था सरकारी उपयोगिता बिलों (बिजली, पानी और पाइप वाली गैस) के भुगतान तथा स्कूल फीस और विश्वविद्यालय शुल्क जैसे शैक्षणिक भुगतान पर भी लागू होगी। हालांकि 2,000 रुपये तक के ऐसे भुगतान इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।

अधिकतम सीमा ₹300 होगी

म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और शेयर ब्रोकर एवं डीलर के जरिए किए गए पेमेंट पर 0.02% का MDR लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी। सरकार ने कहा है कि UPI ऐप प्रोवाइडर्स को डिजिटल प्लेटफॉर्म फीस या छिपे हुए चार्ज लगाने की इजाजत नहीं होगी। बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि मर्चेंट इस नई फीस का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, पर्सनल UPI ट्रांजैक्शन के लिए मुफ्त ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई मासिक कोटा या सीमा नहीं होगी।

छोटे व्यापारियों को राहत!

यूपीआई क्यूआर कोड के जरिएहर महीने एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत शून्य एमडीआर का लाभ लेते रहेंगे। यदि कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का मासिक लेनदेन करता है, तो उसे सामान्य पी2एम कैटेगरी में रखा जाएगा। सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था से केवल करीब चार प्रतिशत व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे। इसकी वजह है कि अधिकांश लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं।

ऑटोपे पर कोई MDR नहीं

नया MDR नियम सिर्फ उन UPI ​​पेमेंट पर लागू होगा जो सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से मर्चेंट के अकाउंट में किए जाते हैं। RuPay क्रेडिट कार्ड या पहले से मंजूर ‘क्रेडिट लाइन’ का इस्तेमाल करके UPI से किए गए पेमेंट के लिए अलग नियम होंगे। वहीं, यूटिलिटी बिल, OTT सब्सक्रिप्शन और रेगुलर इन्वेस्टमेंट के लिए ऑटोमेटेड बार-बार होने वाले पेमेंट जैसे UPI मैंडेट या ‘ऑटोपे पर कोई MDR नहीं लगेगा।

2020 से लागू है MDR चार्ज

MDR चार्ज व्यवस्था जनवरी, 2020 से लागू थी। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना था। हालांकि, बैंक और फिनटेक कंपनियां इसे टिकाऊ नहीं बताते हुए शुल्क फिर से लागू करने की लंबे समय से मांग कर रही थीं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) भी पहले सरकार से इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह कर चुके हैं।

MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं

वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि MDR को टैक्स या सरकार/NPCI द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं समझना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, यह राशि पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल विभिन्न पक्षों, जैसे बैंकों और पेमेंट ऐप प्रोवाइडर्स के बीच वितरित की जाती है। मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य UPI सिस्टम के संचालन और उसके लगातार विस्तार को समर्थन देना है।

UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने की कोशिश

मंत्रालय के मुताबिक, यह व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 के तहत ‘यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी’ में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लाई गई है। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम की स्थिरता और विस्तार सुनिश्चित करना है। साथ ही आम लोगों और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क से बचाना है।

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UPI ट्रांजैक्शन पर कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं लगेगा?  

  • 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर कोई एमडीआर नहीं लगाया जाएगा।
  • 2,000 रुपये से अधिक के ग्राहक-से-व्यापारी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा।
  • 3,000 रुपये की खरीदारी पर 0.4 प्रतिशत की दर से व्यापारी द्वारा जमाकर्ता बैंक को 12 रुपये का शुल्क देना होगा।
  • यह कमीशन बैंकों सहित पूरे पेमेंट इकोसिस्टम के पार्टनर्स के बीच बांटा जाएगा।
  • लेनदेन मूल्य की परवाह किए बिना व्यक्तियों के बीच होने वाले (पी2पी) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
  • ₹75,000 और उससे ज्यादा के बड़े पेमेंट के लिए MDR की सीमा हर ट्रांजैक्शन पर अधिक से अधिक ₹300 तय की जाएगी।
  • टेलीकॉम, इंश्योरेंस और फ्यूल जैसे जरूरी सेक्टर के लिए हर ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ़्लैट MDR लागू होगा।
  • म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर को किए जाने वाले भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये की सीमा के साथ 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा।
  • प्रति माह एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए सभी लेनदेन पर अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर की सुविधा मिलेगी।
  • UPI ऐप सेवाओं पर स्टेज फीस या किसी भी तरह के छिपे हुए शुल्क लगाने पर रोक होगी।
  • बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी यूपीआई भुगतान के लिए उपभोक्ताओं पर एमडीआर शुल्क का बोझ न डालें।
  • व्यक्तियों के लिए मुफ्त यूपीआई लेनदेन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा की सीमा नहीं होगी।
  • बैंकों और NPCI की ओर से लागू की गई रोजाना ट्रांज़ैक्शन की सीमाएं कैटेगरी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख के दायरे में रहेंगी।
  • कुल एमडीआर कलेक्शन के पांच प्रतिशत योगदान के साथ छोटे व्यापारियों द्वारा यूपीआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कोष स्थापित किया जाएगा।
  • एमडीआर लागू होने से केवल चार प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन ही प्रभावित होंगे।
  • नया एमडीआर ढांचा 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होगा।

UPI पर फीस से किसकी भरेगी तिजोरी? PhonePe, GPay और बैंकों में कैसे बंटेगा हिस्सा, जानें

UPI MDR Charges: नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन (P2M) पर 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का ऐलान कर दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस नई फीस से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा, ऐप्स को या फिर बैंकों को?

देश के UPI मार्केट पर Google Pay और PhonePe का एकछत्र राज है। करीब 90% UPI पेमेंट इन्हीं दो ऐप्स के माध्यम से की जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस नई व्यवस्था में असली बाजी बैंकों के हाथ लगी है। आइए आपको बताते हैं कि हर ट्रांजेक्शन पर कटने वाले इस पैसे का बंटवारा कैसे होगा और आम जनता व दुकानदारों पर इसका क्या असर पड़ेगा।

किसे मिलेगा कितना हिस्सा?

NPCI द्वारा तय किए गए रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल के अनुसार, कुल 0.40% MDR चार्ज का 70% हिस्सा अकेले बैंकिंग सेक्टर की जेब में जाएगा।

इश्यूइंग बैंक (40% हिस्सा): सबसे बड़ा फायदा उस बैंक को होगा जिसमें ग्राहक (पैसे भेजने वाले) का खाता है। कुल फीस का 40% सीधे इस बैंक को मिलेगा।

एक्वायर्ड बैंक (30% हिस्सा): दूसरा बड़ा हिस्सा दुकानदार का अकाउंट संभालने वाले बैंक को मिलेगा, जिसे 30% शेयर दिया जाएगा।

UPI ऐप्स (20% हिस्सा): फोनपे, गूगलपे और पेटीएम जैसे थर्ड-पार्र्टी ऐप्स को कुल फीस का केवल 20% हिस्सा ही मिलेगा।

स्पॉन्सर बैंक (10% हिस्सा): बाकी बचा 10% उन पार्टनर बैंकों के पास जाएगा जो इन UPI ऐप्स को बैकएंड सपोर्ट मुहैया कराते हैं।

₹10,000 के पेमेंट पर किसका कितना फायदा?

अगर आप किसी मर्चेंट को ₹10,000 का ऑनलाइन भुगतान करते हैं, तो 0.40% के हिसाब से कुल ₹40 का MDR कटेगा। इस ₹40 का बंटवारा इस प्रकार होगा:

₹10,000 के पेमेंट पर किसका कितना फायदा?

आम जनता और मर्चेंट्स पर क्या होगा असर?

आम UPI यूजर्स पर इस फीस का कोई असर नहीं पड़ेगा। एनपीसीआई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बैंक या मर्चेंट यह शुल्क ग्राहक से नहीं वसूल सकते। इसके अलावा ऐप्स पर किसी भी तरह का अलग ‘प्लेटफॉर्म चार्ज’ लगाने की मनाही है। नियमों के मुताबिक, यह शुल्क पूरी तरह से मर्चेंट्स को उठाना होगा।

पेट्रोल, ट्रेन टिकट, मोबाइल रिचार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसी जरूरी सेवाओं के लिए केवल ₹5 का फ्लैट चार्ज लगेगा। वहीं कैपिटल मार्केट यानी शेयर बाजार के लेन-देन पर यह दर मात्र 0.02% रखी गई है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

साल 2020 से शून्य-MDR मॉडल पर चल रहे UPI इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। बजट में सरकार की तरफ से मिली सीमित सब्सिडी के बाद, इस फीस से होने वाली कमाई का इस्तेमाल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, सर्वर क्षमता बढ़ाने और साइबर फ्रॉड रोकने में किया जाएगा।

Stocks to Watch : 16 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, फिनटेक स्टॉक्स पर भी खास नजर

Stocks to Watch: बुधवार, 16 सितंबर को शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रहेंगे। Bharat Forge से लेकर BHEL और Sonata Software तक कई कंपनियों ने अहम कारोबारी अपडेट दिए हैं। वहीं, UPI पर MDR लागू होने के बाद Paytm, Pine Labs और MobiKwik जैसे फिनटेक स्टॉक्स भी नजर में रहेंगे। आइए जानते हैं 16 सितंबर को किन 13 शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी।

Bharat Forge

डिफेंस और ऑटो सेक्टर की कंपनी Bharat Forge ने RTX की Pratt & Whitney Canada के साथ हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियां DRDO के HALE UAV प्रोग्राम में एडवांस्ड टर्बोप्रॉप इंजन के इस्तेमाल की संभावना तलाशेंगी।

Sonata Software

आईटी सेक्टर की कंपनी Sonata Software ने Amazon Web Services (AWS) के साथ पांच साल का Strategic Collaboration Agreement किया है। कंपनी की घरेलू इकाई Sonata Information Technology Limited इस समझौते पर काम करेगी।

BHEL

सरकारी पावर और इंजीनियरिंग कंपनी BHEL ने Titagarh Rail Systems के साथ ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट किया है। यह JV Vande Bharat Sleeper Trainsets की व्यापक मेंटेनेंस का काम करेगा। दोनों कंपनियां इन ट्रेनों की 35 साल तक देखरेख करेंगी।

Groww

फिनटेक कंपनी Groww की पैरेंट कंपनी Billionbrains Garage Ventures में ब्लॉक डील की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक Peak XV Partners Investments VI-1 और Sequoia Capital Global Growth Fund III – U.S./India Annex Fund अपने शेयर बेच सकते हैं। इस डील के लिए ₹191.45 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस बताया गया है।

Vedanta

माइनिंग सेक्टर की कंपनी Vedanta 18 सितंबर को कमेटी ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक करेगी। इसमें Non-Convertible Debentures यानी NCDs जारी करने के प्रस्ताव पर विचार होगा। कंपनी इन NCDs को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जारी करने की तैयारी कर रही है।

NBCC

सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी NBCC (India) को करीब ₹144.98 करोड़ के नए वर्क ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डर की वैल्यू में GST शामिल नहीं है। कंपनी को NEEPCO, SAIL, ED और Damodar Valley Corporation से ये काम मिले हैं।

Blue Star

होम अप्लायंस सेक्टर की कंपनी Blue Star ने बताया कि Oman की W.J. Towell & Co LLC ने Dubai Court of Appeal का रुख किया है। कंपनी ने आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को रद्द करने की मांग की है। इस अवॉर्ड में Blue Star के खिलाफ किए गए सभी दावों को खारिज कर दिया गया था।

Tata Communications

टेलीकॉम सेक्टर की कंपनी Tata Communications की कनाडा स्थित सब्सिडियरी TC Canada और Canada Revenue Agency के बीच एक समझौते पर सहमति बनी है। यह समझौता टैक्स दावों से जुड़ा है। ये दावे TC Canada की इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन सर्विसेज से हुई आय से संबंधित हैं।

GMR Airports

एयरपोर्ट सेक्टर की कंपनी GMR Airports ने अगस्त में अपने एयरपोर्ट पोर्टफोलियो में 94 लाख पैसेंजर मूवमेंट दर्ज किए। वित्त वर्ष 2027 में अब तक पैसेंजर ट्रैफिक 4.897 करोड़ हो गया है। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 0.4% ज्यादा है।

Aurobindo Pharma

फार्मा सेक्टर की कंपनी Aurobindo Pharma ने बताया कि US FDA ने उसकी API मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निरीक्षण पूरा कर लिया है। यह यूनिट उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी Apitoria Pharma की है। यूनिट-II तेलंगाना में स्थित है।

VIP Industries

लगेज सेक्टर की कंपनी VIP Industries 18 सितंबर को बोर्ड बैठक करेगी। इसमें फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। कंपनी इक्विटी शेयर, डेट सिक्योरिटीज, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, ADRs, GDRs, FCCBs, वारंट और अन्य सिक्योरिटीज जारी करने पर विचार कर सकती है।

Purple Style Labs

फैशन और ई-कॉमर्स सेक्टर की कंपनी Purple Style Labs ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी PSL Retail में ₹420 करोड़ निवेश को मंजूरी दी है। यह निवेश राइट्स इश्यू के जरिए किया जाएगा। Purple Style Labs, Pernia’s Pop-Up Shop की पैरेंट कंपनी है।

India Pesticides

एग्रोकेमिकल सेक्टर की कंपनी India Pesticides को इंटरनेशनल मार्केट में अपने दो पेस्टिसाइड प्रोडक्ट्स के लिए रेगुलेटरी मंजूरी मिली है। कंपनी को ब्रिटेन में एक कीटनाशक के लिए Technical Equivalence अप्रूवल मिला है। वहीं अर्जेंटीना में एक हर्बीसाइड के लिए रजिस्ट्रेशन मिला है।

Fintech Stocks

सरकार की ओर से UPI पर 0.40% MDR तय किया है। इसके बाद Paytm, Pine Labs और MobiKwik जैसे फिनटेक स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर रहेगी। नए MDR स्ट्रक्चर का डिजिटल पेमेंट कंपनियों और उनके रेवेन्यू मॉडल पर असर दिख सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI Payment Rules : आम यूजर के लिए UPI रहेगा फ्री, किन ट्रांजेक्शन पर लगेगा चार्ज, जान लीजिए सरकार के नए नियम

UPI Payment Rules : आम यूजर के लिए UPI रहेगा फ्री, किन ट्रांजेक्शन पर लगेगा चार्ज, जान लीजिए सरकार के नए नियम

MDR Charges on UPI payment

UPI से पैसे भेजने वालों के लिए बड़ी राहत है। नए पेमेंट फ्रेमवर्क के मुताबिक एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे ट्रांजैक्शन की रकम कितनी भी हो। यानी दोस्तों, परिवार या किसी दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसे भेजना पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

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नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आम व्यक्ति का P2P UPI भुगतान मुफ्त बना रहेगा। बदलाव मुख्य रूप से कुछ बड़े Merchant Payments पर MDR से जुड़ा है। इसलिए अगर आप रोजमर्रा में दोस्त, परिवार या किसी व्यक्ति को UPI से पैसे भेजते हैं, तो आपको इस बदलाव से सीधे तौर पर कोई नया शुल्क नहीं देना होगा। 

 

हालांकि, दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले कुछ बड़े UPI भुगतान (P2M) पर Merchant Discount Rate यानी MDR लागू होगा। ₹2,000 से ज्यादा के कुछ Merchant Transactions पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा।

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₹2,000 से ज्यादा के हर UPI पेमेंट पर ग्राहक को चार्ज नहीं देना होगा

 

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। MDR मुख्य रूप से Merchant और Payment Ecosystem के बीच लगने वाला शुल्क है। इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक के UPI ऐप से ₹2,000 से ज्यादा भुगतान करने पर उसके खाते से अलग से 0.4 प्रतिशत काट लिया जाएगा।

 

सरकार ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी MDR की लागत ग्राहक से न वसूलें।

 

P2P UPI पेमेंट हमेशा फ्री रहेगा

 

अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को UPI से पैसे भेजते हैं, तो उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

 

  • ₹500 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • ₹2,000 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • ₹10,000 भेजें — कोई चार्ज नहीं
  • इससे भी ज्यादा रकम भेजें — P2P UPI पर कोई चार्ज नहीं

 

P2P ट्रांजैक्शन UPI के कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का करीब 37 प्रतिशत और कुल वैल्यू का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा हैं।

 

दुकानदार को ₹2,000 से ज्यादा देने पर क्या बदलेगा?

 

Person-to-Merchant यानी P2M ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से ज्यादा के कुछ भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा।

 

यह शुल्क पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग हिस्सेदारों, जैसे बैंक और ऐप प्रोवाइडर के बीच साझा किया जाएगा।

 

₹75,000 या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

 

उदाहरण से समझिए

 

अगर किसी पात्र Merchant Transaction की रकम ₹10,000 है, तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से MDR ₹40 होगा।

 

वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा की रकम पर 0.4 प्रतिशत की गणना ₹300 से ज्यादा होने पर भी MDR ₹300 तक सीमित रहेगा।

 

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और पेट्रोल जैसे क्षेत्रों के लिए अलग नियम

 

कुछ जरूरी सेवाओं और क्षेत्रों में ₹2,000 से ज्यादा के UPI Merchant Payments पर फ्लैट ₹5 MDR लागू होगा।

 

इनमें शामिल हैं:

 

  • रेलवे
  • टेलीकॉम
  • इंश्योरेंस
  • ईंधन/फ्यूल
  • कृषि से जुड़े इनपुट

 

  • इन क्षेत्रों के ट्रांजैक्शन UPI के P2M भुगतान में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं।
  • म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार से जुड़े भुगतान पर भी MDR
  • म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉक ब्रोकर और डीलर्स से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR लागू होगा।
  • इसका अधिकतम शुल्क ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

 

छोटे दुकानदारों को राहत

 

छोटे व्यापारियों के लिए भी व्यवस्था में राहत रखी गई है। P2PM कैटेगरी में ऐसे छोटे व्यापारी जो UPI QR Code के जरिए महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए सभी ट्रांजैक्शन पर अनिवार्य Zero MDR जारी रहेगा।

इसका मतलब छोटे दुकानदारों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का दबाव नहीं पड़ेगा।

 

UPI ऐप अलग से Platform Fee नहीं लगा सकेंगे

 

नए नियमों में UPI ऐप प्रोवाइडर्स को अलग से Platform Fee या Hidden Charges लगाने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी MDR का खर्च सीधे ग्राहक से न वसूलें। यानी ग्राहक को दुकान पर UPI से भुगतान करते समय अलग से कोई छिपा हुआ UPI चार्ज नहीं लगाया जाना चाहिए।

 

UPI इस्तेमाल करने वालों के लिए कोई Monthly Limit नहीं

 

आम यूजर्स के लिए मुफ्त UPI ट्रांजैक्शन की संख्या पर कोई मासिक कोटा या वॉल्यूम लिमिट नहीं होगी। यानी ऐसा नहीं है कि महीने में एक निश्चित संख्या में मुफ्त UPI भुगतान करने के बाद हर ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगने लगेगा।

Daily UPI Limit और चार्ज अलग-अलग चीजें हैं

 

बैंक और NPCI अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से UPI की दैनिक सीमा तय करते हैं। यह सीमा आम तौर पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक हो सकती है। लेकिन इसे UPI शुल्क नहीं समझना चाहिए। यह सीमा मुख्य रूप से सुरक्षा और रिस्क मैनेजमेंट के लिए होती है।

 

आम यूजर के लिए सबसे जरूरी 5 बातें

 

1. व्यक्ति से व्यक्ति UPI: किसी भी रकम पर मुफ्त रहेगा।

2. Merchant को भुगतान: ₹2,000 से ज्यादा के कुछ पात्र P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा।

3. ₹75,000 या उससे ज्यादा: MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक रहेगा।

4. छोटे दुकानदार: महीने में ₹1 लाख तक UPI QR से प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लिए Zero MDR जारी रहेगा।

5. ग्राहक से Hidden Charge: UPI ऐप या व्यापारी द्वारा MDR को अलग से ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी।

UPI MDR Charge: क्या OTT सब्सक्रिप्शन, SIP का ऑटोपे महंगा होगा? शेयर मार्केट, इंश्योरेंस से पेट्रोल तक… कितना चार्ज लगेगा? समझिए सभी नियम

UPI MDR Charge: UPI पेमेंट पर हर जगह एक जैसा MDR नहीं लगेगा। अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। कैपिटल मार्केट, इंश्योरेंस, पेट्रोल पंप, सरकारी बिल और एजुकेशन पेमेंट के लिए अलग MDR स्ट्रक्चर है।

इनमें कई जगह ₹2,000 तक के पेमेंट पर MDR नहीं है। वहीं बड़े पेमेंट के लिए फ्लैट फीस या अधिकतम सीमा वाला सिस्टम रखा गया है। NCPI ने बताया है कि किस सेक्टर में कितना MDR रहेगा।

ऑटोपे वाले UPI पेमेंट पर चार्ज नहीं लगेगा

UPI के चुनिंदा पेमेंट पर MDR लागू होने से उन लोगों को चिंता करने की जरूरत नहीं, जो ऑटोपे से पेमेंट करते हैं। इनमें Netflix, Amazon Prime जैसे OTT सब्सक्रिप्शन शामिल हैं। बिजली-पानी के बिल और म्यूचुअल फंड SIP भी इसी तरह ऑटोमैटिक कटते हैं।

NPCI ने अपने FAQ में यह बात साफ की है कि UPI ऑटोपे पर तय MDR चार्ज नहीं लगेगा।

कैपिटल मार्केट पेमेंट पर कितना MDR?

कैपिटल मार्केट से जुड़े UPI पेमेंट पर 0.02% MDR लगेगा। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन है।

यह नियम रेगुलेटेड कैपिटल मार्केट संस्थाओं से जुड़े पेमेंट पर लागू होगा। इसमें एसेट मैनेजमेंट कंपनियां यानी म्यूचुअल फंड की AMC, SEBI रजिस्टर्ड स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज डीलर और इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म शामिल हैं। UPI से डेट इंस्ट्रूमेंट खरीदने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने और ब्रोकर वॉलेट में पैसा डालने जैसे पेमेंट भी इसमें शामिल हैं।

इंश्योरेंस प्रीमियम पर क्या चार्ज लगेगा?

इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए भी अलग MDR रखा गया है। ₹2,000 से ज्यादा के प्रीमियम पेमेंट पर 0.04% या ₹5 का फ्लैट MDR लागू होगा।

यानी इस कैटेगरी में ज्यादा रकम के पेमेंट पर सामान्य तरीके से MDR बढ़ता नहीं जाएगा। बड़े प्रीमियम का पेमेंट करने वालों के लिए यह व्यवस्था ज्यादा काम की हो सकती है। खास बात यह है कि साल में एक या दो बार प्रीमियम भरने वाले ग्राहकों के बड़े पेमेंट पर ज्यादा प्रतिशत के हिसाब से फीस नहीं बढ़ेगी।

पेट्रोल पंप पर UPI पेमेंट का नियम

पेट्रोल पंप पर ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। यानी पेट्रोल की रकम बढ़ने के साथ MDR भी उसी अनुपात में नहीं बढ़ेगा।

वहीं ₹2,000 तक के फ्यूल पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। इसका मतलब छोटे पेट्रोल-डीजल पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा।

बिजली-पानी के बिल पर कितना MDR?

बिजली, पानी और पाइप्ड नेचुरल गैस जैसे यूटिलिटी पेमेंट के लिए भी अलग व्यवस्था है। ₹2,000 से ज्यादा के यूटिलिटी पेमेंट पर ₹5 प्रति ट्रांजैक्शन का MDR रखा गया है। ₹2,000 तक के पेमेंट पर MDR नहीं लगेगा।

इसमें बिजली के बिल, नगर निकाय के पानी के शुल्क और पाइप्ड नेचुरल गैस के पेमेंट शामिल हैं। इस व्यवस्था का मकसद सरकारी बोर्ड और नगर निकायों के लिए डिजिटल बिल कलेक्शन को सस्ता रखना है।

स्कूल-कॉलेज की फीस पर क्या नियम है?

एजुकेशन पेमेंट को भी अलग कैटेगरी में रखा गया है। इसमें स्कूल की फीस, यूनिवर्सिटी की टर्म फीस और संस्थानों की एंट्रेंस एग्जाम फीस शामिल हैं। ₹2,000 तक के एजुकेशन पेमेंट पर MDR पूरी तरह फ्री रहेगा। ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट के लिए फ्लैट फीस या कैप वाली व्यवस्था का फायदा मिलेगा।

इससे बड़े एजुकेशन पेमेंट पर ज्यादा प्रतिशत के हिसाब से फीस लगने का बोझ कम होगा। स्कूल, कॉलेज और स्टूडेंट्स बड़ी फीस का पेमेंट भी डिजिटल तरीके से कर सकेंगे।

अलग-अलग सेक्टर के लिए अलग MDR क्यों?

NCPI का कहना है कि UPI पर हर तरह के पेमेंट का पैटर्न एक जैसा नहीं है। कहीं छोटे-छोटे पेमेंट होते हैं। वहीं कैपिटल मार्केट, इंश्योरेंस और एजुकेशन में एक बार में बड़ी रकम का पेमेंट हो सकता है।

इसी वजह से इन सेक्टर के लिए अलग MDR स्ट्रक्चर रखा गया है। कहीं प्रतिशत के हिसाब से MDR है। वहीं कुछ जगह फ्लैट फीस या अधिकतम सीमा तय की गई है। इससे बड़े पेमेंट पर MDR का खर्च नियंत्रित रखने की कोशिश की गई है।

UPI पर ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर दुविधा में हैं? तो यहां जानें अपने हर सवाल का पूरा जवाब

UPI पर ट्रांजेक्शन चार्ज को लेकर दुविधा में हैं? तो यहां जानें अपने हर सवाल का पूरा जवाब

यूपीआई से पेमेंट करने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। आगे यूपीआई से पेमेंट फ्री नहीं रहेगा। हालांकि, 2000 रुपये तक के पेमेंट को फीस से राहत दी गई है। इससे ज्यादा अमाउंट के पेमेंट पर एमडीआर लागू होगा। हालांकि, यह 15 अक्तूबर से लागू होगा। सवाल है कि 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर एमडीआर कितना होगा?

सबसे पहले यह जान लेना जरूरी है कि एमडीआर यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या है। MDR वह कमीशन है, जिसका पेमेंट मर्चेंट बैंक को करते हैं। यह पेमेंट बैंक को डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के एवज में किया जाता है। काफी समय से यूपीआई पर फीस लगाने की चर्चा चल रही थी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले कहा था कि यूपीआई हमेशा के लिए फ्री नहीं रह सकता है। उन्होंने कहा था कि इस पर कॉस्ट आती है और किसी न किसी को यह कॉस्ट उठाना पड़ता है।

यूपीआई पर एमडीआर चार्ज को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल चल रहे हैं। इसकी वजह यह है कि आज हर आदमी 1 रुपये से लेकर हजारों रुपये तक के पेमेंट के लिए रोजाना यूपीआई का इस्तेमाल करता है। आम लोग सब्जी, फल, ग्रॉसरी जैसी रोजमर्रा की चीजों का पेमेंट भी यूपीआई से करते हैं। आइए कुछ जरूरी सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

क्या आम आदमी को UPI से पेमेंट के लिए कोई चार्ज देना होगा?

इस सवाल का जवाब है ना। यूपीआई की सर्विस कंज्यूमर्स के लिए फ्री बनी रहेगी। कंज्यूमर्स पहले की तरह से बगैर किसी चार्ज यूपीआआई के जरिए पेमेंट करते रहेंगे। आम आदमी को यूपीआई से पेमेंट के लिए फीस की चिंता करने की जरूरत नहीं है। एमडीआर पॉलिसी में यह कहा गया है कि यूपीआई सभी लोगों के लिए फ्री बना रहेगा।

क्या एक व्यक्ति अगर किसी दोस्त या रिश्तेदार को यूपीआई से पैसे ट्रांसफर करना चाहता है तो उसे चार्ज देना होगा?

इस सवाल का जवाब भी ना है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को होने वाले ट्रांजेक्शन को P2P कहते हैं। पी2पी ट्रांजेक्शन आगे भी पूरी तरह से फ्री बना रहेगा। आपको परिवार के किसी सदस्य, रिश्तेदार या दोस्त को यूपीआई के जरिए पैसे ट्रांसफर करने के लिए किसी तरह की फीस नहीं चुकानी होगी। आप किसी भी अमाउंट को बैगर किसी फीस दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर सकेंगे।

क्या UPI ऐप अपने प्लेटफॉर्म के जरिए होने वाले पेमेंट के लिए फीस लेंगे?

इस सवाल का जवाब भी नहीं है। यूपीआई ऐप यूपीआई के जरिए होने वाले पेमेंट के लिए प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल सहित किसी तरह की फीस कंज्यूमर्स से नहीं वसूलेंगे। यूपीआई ऐप को यूपीआई ट्रांजेक्शन पर किसी तरह की फीस वसूलने की इजाजत नहीं दी गई है।

चूंकि मर्चेंट्स को 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर चार्ज चुकाना होगा तो वे क्या वे चीजों के ज्यादा दाम वसूलेंगे?

इसका जवाब भी नहीं है। दरअसल, बाजार के समीकरण और अब तक का ट्रेंड यह बताता है कि मर्चेंट्स अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए नॉमिनल डिजिटल प्रोसेसिंग कॉस्ट का बोझ खुद उठाते हैं। चूंकि, यूपीआई पर लगने वाला एमडीआर चार्ज क्रेडिट कार्ड फीस से काफी कम है, जिससे मर्चेंट्स के इस चार्ज को ग्राहकों से वसूलने की उम्मीद नहीं है। ऐसा करने पर उनकी सेल्स पर असर पड़ेगा। इसका मतलब है कि आम लोगों को पहले की तरह यूपीआई से सिर्फ उतना है पैसा चुकाना होगा, जितनी उस चीज की कीमत होगी।

मर्चेंट को कितना एमडीआर चुकाना होगा?

NPCI यानी नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन के मुताबिक, 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट्स को 0.4 फीसदी एमडीआर चुकाना होगा। हालांकि, 75,000 रुपये या इससे ज्यादा के पेमेंट पर फीस यानी एमडीआर की 300 रुपये की सीमा लागू होगी।

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उदाहरण से ऐसे समझें कितना होगा एमडीआर

मान लीजिए आपने किसी दुकान पर ₹3,000 का UPI पेमेंट किया। इस रकम पर 0.40% MDR लगेगा। ₹3,000 का 0.40% ₹12 होता है। यानी मर्चेंट को इस ट्रांजैक्शन पर ₹12 MDR देना होगा। अब ₹50,000 का पेमेंट लेते हैं। इसका 0.40% ₹200 होता है। यानी ₹50,000 के UPI पेमेंट पर मर्चेंट को MDR ₹200 चुकाना होगा।

2000, 3000, 50000 से लेकर 75000 रुपये तक के UPI पेमेंट पर कितना लगेगा MDR, यहां जानिए पूरा कैलकुलेशन

UPI पेमेंट पर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर अब तस्वीर साफ है, जो 15 अक्टूबर से लागू होने वाली है। इसका हिसाब पेमेंट की रकम के आधार पर होगा। ₹2,000 तक के ट्रांजैक्शन पर कोई MDR नहीं लगेगा। इसके ऊपर 0.40% की दर से MDR की गणना होगी। हालांकि, बड़े पेमेंट पर इसकी अधिकतम सीमा भी तय है।

सरकार ने साफ किया है कि MDR ग्राहक को नहीं देना होगा। इसका भुगतान मर्चेंट यानी दुकानदार करेगा। यह रकम मर्चेंट के बैंक को मिलेगी। इसलिए ग्राहक के खाते से पेमेंट की रकम के अलावा MDR की रकम अलग से नहीं कटेगी।

किस पेमेंट पर कितना लगेगा MDR

मर्चेंट को दी गई रकमMDR प्रतिशतMDR की रकम
₹2,000कोई MDR नहीं₹0
₹3,0000.40%₹12
₹50,0000.40%₹200
₹75,000 से ज्यादाअधिकतम ₹300₹300

₹3,000 के पेमेंट पर कितना MDR?

मान लीजिए आपने किसी दुकान पर ₹3,000 का UPI पेमेंट किया। इस रकम पर 0.40% MDR लगेगा। ₹3,000 का 0.40% ₹12 होता है। यानी मर्चेंट को इस ट्रांजैक्शन पर ₹12 MDR देना होगा।

अब ₹50,000 का पेमेंट लेते हैं। इसका 0.40% ₹200 होता है। यानी ₹50,000 के UPI पेमेंट पर मर्चेंट का MDR ₹200 होगा।

₹75,000 के बाद क्या होगा?

यहां एक जरूरी बात है। बड़े पेमेंट पर MDR की एक अधिकतम सीमा रखी गई है। ₹75,000 और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर MDR ₹300 फिक्स रहेगा। इसके बाद पेमेंट की रकम बढ़ने पर भी MDR ₹300 से ज्यादा नहीं होगा।

इसे ₹1 लाख के पेमेंट से समझिए। ₹1 लाख का 0.40% ₹400 होता है। लेकिन यहां ₹300 की अधिकतम सीमा लागू होगी। इसलिए मर्चेंट को ₹400 नहीं, बल्कि ₹300 MDR देना होगा।

₹2,000 के पेमेंट पर कोई MDR नहीं

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर MDR शून्य रहेगा। यानी ₹2,000 के पेमेंट पर मर्चेंट को कोई MDR नहीं देना होगा।

इसके बाद ₹3,000 पर ₹12 और ₹50,000 पर ₹200 MDR होगा। वहीं ₹75,000 या उससे ज्यादा के पेमेंट पर MDR ₹300 पर रुक जाएगा।

UPI MDR Fees: ₹2000 से ऊपर के पेमेंट पर 0.40% MDR लगेगा, हर ट्रांजैक्शन पर ₹300 की लिमिट रहेगी