RBI का बड़ा फैसला: लोन की EMI चूकने पर नियम बदले, जानिए बैंक क्या कर सकते हैं और क्या नहीं

RBI loan recovery rules: अगर आपने पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन की EMI नहीं चुकाई है, तो भी बैंक आपका मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट लॉक नहीं कर सकेंगे। RBI ने साफ कर दिया है कि ऐसा सिर्फ उसी स्थिति में हो सकता है, जब उसी डिवाइस को खरीदने के लिए बैंक ने लोन दिया हो। इसमें भी कुछ शर्तें रहेंगी।

बैंकों और रिकवरी एजेंटों की सख्त वसूली, उत्पीड़न और ग्राहकों के डेटा के गलत इस्तेमाल की शिकायतों के बाद RBI ने यह फैसला लिया है। RBI ने 6 अगस्त 2026 को नए नियम जारी किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

कब लॉक हो सकता है डिवाइस?

अगर बैंक ने उसी मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप की खरीद के लिए लोन दिया है, तभी उस पर पाबंदी लगाई जा सकती है। लेकिन यह भी तुरंत नहीं होगा।

RBI के मुताबिक, पहले बैंक को नोटिस देना होगा। अगर नोटिस के बाद भी 30 दिन तक किस्त नहीं चुकाई जाती, तभी सीमित पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। पूरी तरह लॉक करने की कार्रवाई 60 दिन बाद ही हो सकेगी और वह भी तभी, जब इसकी शर्त लोन एग्रीमेंट में हो।

जरूरी सुविधाएं बंद नहीं होंगी

बैंक किसी भी हाल में इनकमिंग कॉल, SMS और इमरजेंसी SOS जैसी जरूरी सुविधाएं बंद नहीं कर सकेंगे। यानी जरूरत पड़ने पर आप इनका इस्तेमाल करते रहेंगे।

रिकवरी एजेंट नहीं कर सकेंगे परेशान

RBI ने रिकवरी एजेंटों के लिए भी सख्त नियम बनाए हैं। वे गाली-गलौज नहीं कर सकते। धमकी नहीं दे सकते। सोशल मीडिया पर बदनाम नहीं कर सकते। रिश्तेदारों, दोस्तों या सहकर्मियों पर दबाव डालने के लिए संपर्क भी नहीं कर सकते।

निजी डेटा भी रहेगा सुरक्षित

बैंक या उनकी थर्ड पार्टी एजेंसियां आपके फोन का निजी डेटा नहीं देख सकेंगी। कॉन्टैक्ट्स, SMS, कॉल लॉग, फोटो और लोकेशन हिस्ट्री जैसी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी हालत में लोन वसूली के लिए नहीं किया जा सकेगा।

इसका मतलब क्या है?

इन नियमों का मतलब यह नहीं है कि लोन माफ हो गया। EMI नहीं चुकाने पर ब्याज लगेगा, क्रेडिट स्कोर खराब होगा और बैंक कानूनी तरीके से वसूली कर सकेंगे। लेकिन अब वे ग्राहकों को डराने या उनकी निजी डिवाइस और डेटा का गलत इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Nifty Outlook: 10 अगस्त को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र भी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निफ्टी 50 शुरुआती गिरावट से उबरने की कोशिश जरूर करता दिखा, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी। आखिर में इंडेक्स 65 अंक यानी 0.3% गिरकर 24,570 पर बंद हुआ। कमजोर वैश्विक संकेतों और हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली का असर बाजार पर दिखा।

अब सोमवार, 10 अगस्त से शुरू हो रहे हफ्ते में निफ्टी की चाल कैसी रहेगी? कौन से लेवल अहम रहेंगे? इसे एक्सपर्ट्स से समझेंगे। लेकिन, पहले जान लेते हैं कि शुक्रवार को बाजार में क्या खास हुआ था।

किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?

निफ्टी 50 में Grasim, TCS और Hindalco सबसे ज्यादा चढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं Bajaj Finance, Bajaj Finserv और Trent में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो, आईटी और PSU बैंक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। वहीं फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और केमिकल सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। Nifty Midcap 100 में 0.22% की बढ़त रही। Nifty Smallcap 100 0.05% फिसल गया।

अगले हफ्ते किन ट्रिगर्स पर रहेगी नजर?

Motilal Oswal के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका का कहना है कि अगले हफ्ते भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। इसकी वजह मजबूत घरेलू आर्थिक संकेत, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और तिमाही नतीजों का अंतिम दौर हो सकता है। हालांकि, शेयरों में खबरों के आधार पर शेयरों में हलचल बनी रह सकती है।

 

इन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

अगले हफ्ते निवेशकों की नजर कई अहम घरेलू और वैश्विक आंकड़ों पर रहेगी। इनमें भारत के CPI और WPI महंगाई के आंकड़े, जून तिमाही के नतीजे अहम रहेंगे। साथ ही, अमेरिका के CPI और PPI महंगाई के आंकड़े, OPEC की मासिक ऑयल मार्केट रिपोर्ट और चीन के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन व रिटेल सेल्स के आंकड़े भी आएंगे।

निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी का रुझान फिलहाल कमजोर जरूर है। हालांकि, इंडेक्स 24,400-24,300 के अहम सपोर्ट जोन के ऊपर बना हुआ है। यह स्तर पहले रेजिस्टेंस था और अब सपोर्ट की तरह काम कर रहा है। उनके मुताबिक, अगर निफ्टी इस स्तर तक फिसलता है तो यह खरीदारी का मौका हो सकता है। वहीं, ट्रेंड बदलने के लिए 24,700 के ऊपर निकलना जरूरी होगा।

Angel One के हितेश राठी के अनुसार, निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 24,450-24,350 के बीच है। इसके नीचे 24,000 बड़ा सपोर्ट रहेगा। वहीं, ऊपर की ओर 24,650-24,750 पहला रेजिस्टेंस और 24,800-24,850 अगला अहम स्तर होगा।

HDFC Securities के नंदीश शाह का कहना है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों से निफ्टी 24,400-24,700 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इंडेक्स अभी भी अपने सभी प्रमुख मूविंग एवरेज के ऊपर है, इसलिए लंबी अवधि का ट्रेंड अब भी सकारात्मक बना हुआ है। उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 24,770 और 25,000 रेजिस्टेंस रहेंगे। वहीं, गिरावट पर 24,430-24,380 का दायरा सपोर्ट देगा।

बैंक निफ्टी पर क्या राय है?

 

SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक, पिछले पांच कारोबारी सत्रों से बैंक निफ्टी 58,248-57,353 के दायरे में कारोबार कर रहा है। इसके बावजूद इंडेक्स अभी भी अपने 20-डे EMA के ऊपर बना हुआ है।

उनके मुताबिक, ऊपर की ओर 58,200-58,300 का दायरा अहम रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर बैंक निफ्टी 58,700 और फिर 59,100 तक जा सकता है। वहीं, नीचे की ओर 57,300-57,200 का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।

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बैंक ने अचानक क्यों रिजेक्ट कर दिया लोन? जानिए राजेश की इस एक भूल ने कैसे बिगाड़ा CIBIL का खेल!

Checking Credit Report Benefits: राजेश एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं और सालों से अपनी हर ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का बिल बिल्कुल समय पर भरते आए थे। उन्हें पूरा यकीन था कि उनका क्रेडिट स्कोर शानदार होगा। लेकिन जब वे अपने सपनों का घर खरीदने के लिए होम लोन अप्लाई करने बैंक पहुंचे, तो बैंक अफसर ने उनका आवेदन रिजेक्ट कर दिया।

वजह थी उनकी क्रेडिट रिपोर्ट में एक ऐसा लोन ‘एक्टिव’ दिख रहा था, जिसे वे सालों पहले बंद कर चुके थे। साथ ही, एक ऐसे अनजान क्रेडिट कार्ड की जानकारी दर्ज थी, जिसके लिए उन्होंने कभी अप्लाई ही नहीं किया था।

राजेश की तरह ज्यादातर लोग क्रेडिट रिपोर्ट को तभी याद करते हैं जब उन्हें किसी लोन या नए क्रेडिट कार्ड की जरूरत होती है। लेकिन समय-समय पर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जांच न करना आपको भारी मुसीबत और वित्तीय नुकसान में डाल सकता है।

साल में कम से कम एक बार जरूर करें ‘फाइनेंशियल चेकअप’

बहुत से लोग सोचते हैं कि जब उन्होंने कोई ईएमआई मिस नहीं की है, तो रिपोर्ट देखने की क्या जरूरत? लेकिन जैसे हम अपनी सेहत के लिए रूटीन बॉडी चेकअप कराते हैं, वैसे ही साल में कम से कम एक बार अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करना बेहद जरूरी है। इससे यह पक्का होता है कि आपकी लोन हिस्ट्री और पर्सनल डिटेल्स सही तरीके से दर्ज हो रही हैं।

बड़ा लोन लेने से कुछ महीने पहले रिपोर्ट देखना क्यों है जरूरी?

अगर आप आने वाले कुछ महीनों में होम लोन, कार लोन या कोई बड़ा पर्सनल लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन करने से ठीक पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर खंगालें। अगर रिपोर्ट में कोई गड़बड़ी या गलत एंट्री पाई जाती है, तो उसे ठीक कराने में कुछ हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लगता है। लोन रिजेक्ट होने के बाद दौड़-भाग करने से बेहतर है कि आप पहले ही सतर्क रहें।

क्रेडिट रिपोर्ट में हो सकती हैं मानवीय और तकनीकी गलतियां

क्रेडिट रिपोर्ट पूरी तरह से गलतियों से मुक्त नहीं होती। कई बार बंद किए जा चुके लोन अकाउंट भी सिस्टम में ‘एक्टिव’ दिखाई देते हैं। समय पर चुकाई गई ईएमआई ‘डिलीटेड’ या ‘लेट पेमेंट’ के रूप में दर्ज हो जाती है। नाम या पैन कार्ड की स्पेलिंग मिस्टेक या आइडेंटिफिकेशन एरर की वजह से किसी और का लोन आपके नाम पर लिंक हो जाता है।

अनजान लोन या क्रेडिट कार्ड: कैसे करें फ्रॉड की पहचान

अगर अपनी क्रेडिट रिपोर्ट चेक करते समय आपको कोई ऐसा क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट दिखाई दे जिसके लिए आपने कभी अप्लाई ही नहीं किया था, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यह आइडेंटिटी थेफ्ट या जालसाजी का संकेत हो सकता है। समय रहते शिकायत करने से आप किसी बड़े फ्रॉड का शिकार होने से बच सकते हैं।

सिर्फ 3 अंकों के क्रेडिट स्कोर पर न अटके रहें

ज्यादातर लोग सिर्फ अपना 3-अंकों का CIBIL/क्रेडिट स्कोर देखकर खुश या दुखी हो जाते हैं। लेकिन बैंक और वित्तीय संस्थान सिर्फ स्कोर ही नहीं, बल्कि पूरी रिपोर्ट की बारीकियों को देखते हैं:

  • आपके नाम पर कितने एक्टिव लोन चल रहे हैं?
  • आपने हाल में कितनी बार लोन के लिए इन्क्वायरी की है?
  • आपकी पुरानी रीपेमेंट हिस्ट्री कैसी रही है?

केवल रिपोर्ट देखने से नहीं सुधरेगा स्कोर, करने होंगे ये बदलाव

क्रेडिट रिपोर्ट सिर्फ एक आईना है। सिर्फ रिपोर्ट चेक करने से आपका क्रेडिट स्कोर नहीं बढ़ेगा। स्कोर बढ़ाने और बनाए रखने का असली तरीका आपकी वित्तीय आदतें हैं यानी समय पर ईएमआई भरना, क्रेडिट लिमिट का संतुलित इस्तेमाल करना और गैर-जरूरी लोन लेने से बचना। नियमित रिपोर्ट चेक करने का काम सिर्फ इतना है कि यह आपकी अच्छी आदतों पर कोई गलत दाग नहीं लगने देती।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Chemical Stocks: धमाकेदार रिजल्ट लेकिन मोतीलाल ओसवाल की सेल रेटिंग, 16% टूटेगा यह शेयर, आपके पास है?

Deepak Nitrite Share Price: दिग्गज केमिकल कंपनी दीपक नाइट्राइट के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में में कंपनी ने ऑपरेटिंग लेवल पर धमाकेदार परफॉरमेंस दिखाया और इसका ईबीआईटीडीए ढाई गुना से अधिक बढ़ गया। शेयरों की बात करें तो अपनी 6 अगस्त की रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इसकी सेल रेटिंग को बरकरार रखा है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 7 अगस्त को बीएसई पर यह 2.62% की बढ़त के साथ ₹1,795.50 पर बंद हुआ है।

किस भाव तक टूट सकता है Deepak Nitrite का शेयर

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि दीपक नाइट्राइट का ऑपरेटिंग परफॉरमेंस कम बेस के चलते जून तिमाही में सालाना आधार पर उम्मीद से बेहतर रहा। जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कंपनी का ईबीआईटीडीए कंसालिडेटेड लेवल पर 2.8 गुना बढ़कर ₹189.6 करोड़ से ₹540.2 करोड़ और मार्जिन 10.0% से 21.0% पर पहुंच गया। इसके ईबीआईटीडीए को फोनॉलिक सेगमेंट में सालाना आधार पर 3.5 गुना और एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स सेगमेंट में 89% की ईबीआईटी ग्रोथ से सपोर्ट मिला। इसे बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज के साथ-साथ बेहतर फिनॉल और बेंजीन स्प्रेड्स से सपोर्ट मिला।

आगे को लेकर ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इंडस्ट्री के सामने आने वाली शॉर्ट-टर्म चुनौतियों और बदलते जियोपॉलिटिकल हालात कंपनी की परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं, लेकिन इसका कुल असर सीमित रहेगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक लगातार प्रोसेस में सुधार, बैकवर्ड इंटीग्रेशन से मिलने वाले फायदे, मैन्युफैक्चरिंग की बेहतर क्षमता, लागत को सही ढंग से कंट्रोल करना, घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट में ग्राहकों की बढ़ती इंक्वायरी और नए प्रोडक्ट्स का कमर्शियलाइजेशन से इसे सपोर्ट मिलेगा।

जून तिमाही के बेहतर मार्जिन को ध्यान में रखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने वित्त वर्ष 2026-28 में इसके रेवेन्यू के 13%, शुद्ध मुनाफे के 24% और ईबीआईटीडीए के 22% के सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। हालांकि वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई के मुकाबले कंपनी ने इसका भाव 24 गुना पर फिक्स किया है, जिससे इसका टारगेट प्राइस ₹1500 बन रहा है। ब्रोकरेज फर्म ने इसे फिर से सेल रेटिंग दी है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

दीपक नाइट्राइट के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 24 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹1,904.50 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 6 महीने में यह 32.77% टूटकर 30 मार्च 2026 को ₹1,280.40 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Kospi Outlook: हाहाकार के बाद अब क्या है दक्षिण कोरियाई बाजार का हाल, कब तक बनेगा विदेशी निवेशकों की पसंद

Kospi Outlook: दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट की भारी उथल-पुथल खत्म होने की संभावना जताई जाने लगी है। रिकॉर्ड बिकवाली के बाद लेवरेज्ड पोजीशन खत्म हो गईं और नियामकीय प्रतिबंधों के चलते तगड़े रिस्क वाले कुछ प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग में भारी गिरावट आई है। बता दें कि पिछले कारोबारी हफ्ते कोस्पी में ऐसी गिरावट आई कि यह टूटकर जून के रिकॉर्ड हाई से गिरकर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। यह जून के हाई से करीब 40% नीचे आ चुका है।

कोस्पी की यह स्थिरता मार्केट में हाहाकार के चलते कुछ पोजिशन को जबरन बंद करने के चलते आई, जिसके बंद होने से बकाया मार्जिन डेट को कम करने में मदद मिली। इसके अलावा कोस्पी को लेवरेज्ड ईटीएफ पर सख्त नियमों के चलते दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और एसके हाइनिक्स से जुड़े प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग और एसेट्स में गिरावट से भी सपोर्ट मिला। इससे संकेत मिल रहा है कि कोरियाई स्टॉक मार्केट में उठा-पटक का दौर अब काफी हद तक गुजर चुका है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का अनुमान है कि डीलेवरेजिंग प्रोसेस अब आधे से अधिक पूरा हो चुका है।

लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी नहीं कर रहे ताबड़तोड़ निवेश

कोस्पी में भारी उठा-पटक के चलते इसे मापने वाला इंडेक्स जून में 96.9 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था जबकि साल 2025 के आखिरी में यह सिर्फ 28.9 पर था। मार्केट में ऐसी हाहाकार मची थी कि मार्केट के 8% गिरने पर एक्सचेंज का 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकने वाला फीचर पिछले महीने रिकॉर्ड चार बार एक्टिव हुआ था। इसके अलावा लगभग आधे ट्रेडिंग दिनों में कोस्पी में कम से कम 5% की तेजी या गिरावट आई। 31 जुलाई को तो कोस्पी में एक ही दिन में रिकॉर्ड 18% की तेजी आई।

अब कोस्पी में स्थिरता आती दिख रही है लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी ताबड़तोड़ निवेश नहीं कर रहे हैं। सिंगापुर में एबेरडीन एशियन इनकम फंड के सीनियर इंवेस्टमेंट डायरेक्टर Isaac Thong का कहना कि विदेशी निवेशकों का रुझान अब पॉजिटिव तो हो रहा है, लेकिन वे अभी पूरी तरह सहज नहीं हैं क्योंकि वोलैटिलिटी अभी भी काफी अधिक है। उनका कहना है अगर रिटर्न की गुंजाइश इतनी अधिक हो जाए कि रिस्क लेने को वाजिब बना लसके तो मार्केट को लेकर नजरिया और पॉजिटिव हो सकता है।

शेयर मार्केट की हाहाकार और सख्त नियमों के चलते कई रिटेल इंवेस्टर्स को अपनी पोजिशंस बंद करनी पड़ी। कोरिया फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार खुदरा निवेशकों के खातों से जून में करीब 1 लाख करोड़ वान (करीब ₹6760 करोड़) और जुलाई में 99.3 हजार करोड़ वान (करीब $6710 करोड़) की पोजिशन जबरन बंद कर दी हई। ये इस साल के दो सबसे बड़े मंथली आंकड़े थे। अब स्थिति में थोड़ा सुधार है और शेयरों की खरीदारी के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्जिन लोन का आउटस्टैंडिंग बैलेंस भी 4 अगस्त तक घटकर इस साल के रिकॉर्ड निचले स्तर 27.4 लाख करोड़ वान (करीब ₹1.85 लाख करोड़) रह गया।

अब सवाल उठता है कि क्या खुदरा निवेशकों की जगह विदेशी निवेशक लेंगे। इसे लेकर दुबई की अर्केवियम कैपिटल (Arkevium Capital) के सीआईओ Maxence Visseau का मानना है कि ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें भरोसा होना चाहिए मार्केट में प्राइस डिस्कवरी मैकेनिज्म यानी सही कीमत तय होने की प्रक्रिया फिर से सामान्य तरीके से काम कर रही है।

किस लेवल तक चढ़ सकता है Kospi?

ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद अब कोरियाई मार्केट कुछ मायने में सस्ता दिख रहा है। कोस्पी फिलहाल अपने 12 महीने के फारवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले 5.1 गुना के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है लेकिन विदेशी निवेशकों को यह आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

सिंगापुर में टेम्पलटन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की फंड मैनेजर यिपिंग लियाओ का कहना है कि गिरावट के बाद सैमसंग और हाइनिक्स काफी सस्ते हो चुके हैं और इनके मुनाफे का आउटलुक भी मजबूत है लेकिन भारी उतार-चढ़ाव के बाद निवेशक काफी सतर्क हो चुके हैं। उनका कहना है कि भारी उठा-पटक की वजह से मार्केट में दोबारा ताबड़तोड़ खरीदारी का माहौल नहीं बन रहा है बल्कि धीरे-धीरे खरीदारी हो रही है।

ग्लोबल फंड्स ने कोरियाई शेयरों से अपनी निकासी धीमी कर दी है, लेकिन वे अभी भी बेच रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार जून में रिकॉर्ड $30 अरब निकालने के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई में $6.2 अरब और अगस्त में अब तक $4.3 अरब के शेयर बेचे हैं।

हालांकि कुछ एनालिस्ट्स बुलिश हैं। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने इस हफ्ते कोस्पी के लिए फिर से 12 महीने का टारगेट 12,000 फिक्स किया है, जो शुक्रवार की क्लोजिंग से लगभग 90% अधिक है। पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग टेलीविजन पर एक इंटरव्यू में इन्वेस्टमेंट बैंक के चीफ एशिया पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने कहा था कि अगर उतार-चढ़ाव कम हो जाता है, तो फंडामेंटल्स फिर से असरदार हो जाएंगी।

मैथ्यूज इंटरनेशनल कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर और पोर्टफोलियो मैनेजर शॉन टेलर का कहना है कि फंडामेंटल्स बहुत मजबूत हैं और हाल के नतीजे से ये साबित भी होता है। हालांकि शॉन का कहना है कि उनका मार्केट में लेवरेज और पोजिशनिंग बहुत अधिक बढ़ गई थी, तो अभी एक और महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

दक्षिण कोरिया का जलवा, अमेरिका से जापान तक ट्रेडर्स की वॉचलिस्ट में, पहली बार देख रहे Kospi का चार्ट

Risks of MTF: ₹12000 करोड़ की सीख, दक्षिण कोरिया में हाहाकार के पांच सबक

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

EPF vs PPF: रिटायरमेंट फंड के लिए कौन सा ऑप्शन है नंबर-1? जानिए किसमें मिलेगा ज्यादा फायदा

EPF vs PPF Retirement Planning: जब भी नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट प्लानिंग की बात आती है, तो दो नाम सबसे पहले सामने आते हैं एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)। दोनों ही योजनाएं सरकार द्वारा समर्थित हैं, लंबी अवधि की बचत के लिए हैं और टैक्स छूट का फायदा भी देती हैं। यही वजह है कि इन दोनों में से किसी एक को चुनना काफी उलझन भरा काम लगता है।

हालांकि, वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि यह ‘EPF बनाम PPF’ की जंग नहीं है। दोनों स्कीम्स के अपने अलग-अलग फायदे और उद्देश्य हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एक सैलरीड कर्मचारी को किसे पहले चुनना चाहिए।

EPF: ऑटोमैटिक बचत और एंप्लॉयर का योगदान

अगर आप किसी ऐसी कंपनी या संस्थान में काम करते हैं जो EPF के तहत कवर है, तो आपके वेतन से हर महीने अपने आप ईपीएफ में कटौती होती है। ईपीएफ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जितना योगदान आपकी बेसिक सैलरी से कटता है, उतना ही हिस्सा आपकी कंपनी भी जमा करती है। यह एक ऐसा एक्स्ट्रा फायदा है जो आपको PPF में नहीं मिलता।

बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के आपकी सैलरी से हर महीने पैसे कटकर जमा होते रहते हैं, जिससे करियर के अंत तक एक बड़ा फंड तैयार हो जाता है। इसीलिए ज्यादातर फाइनेंशियल प्लानर्स सुझाव देते हैं कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए EPF को हमेशा पहली प्राथमिकता बनाना चाहिए।

PPF: फ्लेक्सिबिलिटी और अतिरिक्त बचत का जरिया

पीपीएफ किसी कंपनी या नौकरी से बंधा हुआ नहीं होता। इसे कोई भी नागरिक अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस में जाकर खुलवा सकता है। इसमें आप अपनी सुविधा और बजट के हिसाब से न्यूनतम और अधिकतम सीमा के दायरे में सालाना निवेश कर सकते हैं।

अगर आप जॉब बदलते हैं या कुछ समय का ब्रेक लेते हैं, तब भी आपका PPF अकाउंट बिना किसी रुकावट के चलता रहता है क्योंकि यह पूरी तरह आपका पर्सनल अकाउंट है। साथ ही आप EPF के अलावा अपनी रिटायरमेंट या किसी अन्य लंबे लक्ष्य के लिए अतिरिक्त बचत करना चाहते हैं, तो पीपीएफ सबसे सुरक्षित विकल्प बनता है।

लिक्विडिटी और निकासी

दोनों ही योजनाएं रोजमर्रा के खर्चों या बार-बार पैसे निकालने के लिए नहीं बनाई गई हैं।

EPF निकासी: ईपीएफ से पैसे निकालने के नियम आपकी नौकरी की स्थिति और विशिष्ट जरूरतों जैसे- घर खरीदना, बीमारी, शादी से जुड़े होते हैं।

PPF लॉक-इन: पीपीएफ का लॉक-इन पीरियड 15 साल का होता है, हालांकि कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी और लोन की सुविधा मिलती है।

दोनों में से किसे चुनें?

एक वेतनभोगी कर्मचारी के लिए सही रणनीति यह है कि दोनों को एक-दूसरे का प्रतिस्पर्धी मानने के बजाय पूरक के रूप में इस्तेमाल किया जाए:

ईपीएफ को बनने दें बुनियाद: चूंकि ईपीएफ में कंपनी का भी योगदान मिलता है, इसलिए अपनी नौकरी के दौरान ईपीएफ अंशदान को बिना किसी रुकावट के जारी रहने दें यह आपकी रिटायरमेंट की मुख्य नींव है।

पीपीएफ को बनाएं बैकअप शील्ड: अगर ईपीएफ में कटौती के बाद भी आपके बजट में और बचत की गुंजाइश है, तो अतिरिक्त सरप्लस पैसे को पीपीएफ में निवेश करें। इससे आपका एसेट एलोकेशन मजबूत होगा और पोर्टफोलियो सुरक्षित रहेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Milky Mist IPO: 7 बातें, ₹1533 करोड़ के इश्यू में निवेश से पहले जानना है जरूरी

Milky Mist IPO: डेयरी प्रोडक्ट्स कंपनी मिल्की मिस्ट का कारोबार देश भर में फैला हुआ है। अब यह स्टॉक मार्केट में भी लिस्टिंग की तैयारी में है, जिसका ₹1533 करोड़ का आईपीओ मंगलवार 11 अगस्त को सब्सक्रिप्शन को खुलेगा। ग्रे मार्केट में इसके शेयरों की स्थिति तगड़ी दिख रही है और कंपनी की कारोबारी सेहत लगातार मजबूत हो रही है। यहां इस आईपीओ से जुड़ी 7 अहम बातें बताई जा रही है, जिसे जान लें और फिर आईपीओ में निवेश से जुड़ा फैसला लें।

1. प्राइस बैंड और लॉट साइज

आईपीओ खुलने के बाद मिल्की मिस्ट के ₹1,553 करोड़ के आईपीओ में ₹133-₹140 के प्राइस बैंड और 107 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकेंगे।

2. अहम डेट्स

मिल्की मिस्ट का आईपीओ 11 अगस्त को खुलेगा और 13 अगस्त को बंद होगा। आईपीओ के तहत शेयरों का अलॉटमेंट 14 अगस्त को फाइनल होगा। आईपीओ की सफलता के बाद फिर शेयरों की बीएसई और एनएसई पर 18 अगस्त को एंट्री होगी।

3. ग्रे मार्केट में स्थिति यानी GMP

ग्रे मार्केट में मिल्की मिस्ट के शेयर आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से ₹27 यानी 19.29% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल के आधार पर ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

4. आईपीओ में कितने शेयर होंगे जारी

मिल्की मिस्ट के आईपीओ के तहत ₹1,428 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले 89,28,570 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री होगी। ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिए इसके प्रमोटर्स सतीशकुमार टी और अनीत एस अपनी हिस्सेदारी हल्की करेंगे।

5. रजिस्ट्रार

मिल्की मिस्ट के आईपीओ का रजिस्ट्रार केफिनटेक है यानी कि शेयरों का अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद इसकी साइट पर स्टेटस देख सकेंगे कि मिल्की मिस्ट के आईपीओ के तहत कितने शेयर मिले। इसके अलावा बीएसई की साइट पर भी स्टेटस देख सकेंगे।

6. कैसे होगा आईपीओ के पैसों का इस्तेमाल?

ऑफर फॉर सेल का पैसा शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर यानी प्रमोटर्स को मिलेगा। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹496.86 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹469.24 करोड़ पेरुंदुरई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के विस्तार और मॉडर्नाइजेशन, ₹155.31 करोड़ विसि कूलर्स, आइस क्रीम फ्रीजर्स और चॉकलेट कूलर्स और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

7. कंपनी के बारे में

मिल्की मिस्ट डेयरी फूड देश की सबसे तेज बढ़ रही पैकेज्ड फूड कंपनियों में है, जिसका फोकस प्रीमियम वैल्यू-एडेड डेयरी प्रोडक्ट्स पर है। यह अपने मुख्य ब्रांड मिल्की मिस्ट समेत स्मार्टशेफ, कैपेला, मिस्टी लाइट, ब्रियास और असल जैसे सब-ब्रांड्स के तहत चीज, पनीर, मक्खन, दही, घी, योगर्ट, आइसक्रीम, यूएचटी प्रोडक्ट्स, फ्रोजन फूड्स, रेडी-टू-ईट (RTE), रेडी-टू-कुक (RTC) फूड्स और चॉकलेट्स जैसे कई तरह के प्रोडक्ट्स बनाती और बेचती है। कंपनी फार्म-टू-कंज्यूमर इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल पर काम करती है, जिसमें किसानों से सीधे दूध लेकर यह एडवांस्ड ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं में इसकी प्रोसेसिंग करती है। अपने खुद के कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और मल्टी-चैनल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के जरिए इसके ग्राहक देश भर में हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 155% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹127.01 करोड़ और टोटल इनकम 31% के सीएजीआर से ₹3,145.01 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 के आखिरी में कंपनी पर ₹1,671.85 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹333.55 करोड़ पड़े थे।

लेट एंट्री लेकिन बने मार्केट लीडर, इन पांच ने खास तरीके से बदला मार्केट का मूड

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Clek Vacancy 2026: 1538 बैकलॉग क्लर्क पदों पर भर्ती के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें आवेदन करने की लास्ट डेट

SBI Clek Vacancy 2026: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने क्लेरिकल कैडर में 1,538 जूनियर एसोसिएट्स (कस्टमर सपोर्ट और सेल्स) की भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह भर्ती अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए रिजर्व बैकलॉग वैकेंसी के लिए एक स्पेशल ड्राइव के तौर पर की जा रही है। पंजीकरण प्रक्रिया 7 अगस्त, 2026 से शुरू हो गई है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 27 अगस्त, 2026 तक अपने एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं। उम्मीदवार सिर्फ एक राज्य या केंद्र शासित प्रदेश (UT) में भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।

एसबीआई क्लर्क बैकलॉग पद कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हुए हैं। एसबीआई ने 207 एससी, 1,219 एसटी और 112 ओबीसी पद अधिसूचित किए हैं, जिससे कुल पदों की संख्या 1,538 हो गई है। भर्ती के जरिए चयनित उम्मीदवारों को उसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पोस्ट किया जाएगा जिसके लिए उन्होंने आवेदन किया था।

एसबीआई क्लर्क भर्ती 2026: कौन अप्लाई कर सकता है?

1 अप्रैल, 2026 को कैंडिडेट्स की उम्र 20 से 28 साल के बीच होनी चाहिए। उनका जन्म 2 अप्रैल, 1998 और 1 अप्रैल, 2006 के बीच हुआ होना चाहिए, दोनों तारीखें शामिल हैं।

कैंडिडेट्स के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी सब्जेक्ट में ग्रेजुएशन की डिग्री या सेंट्रल गवर्नमेंट द्वारा मान्यता प्राप्त बराबर की क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। जो लोग ग्रेजुएशन के आखिरी साल या सेमेस्टर में हैं, वे भी प्रोविजनल तौर पर अप्लाई कर सकते हैं, बशर्ते वे 31 दिसंबर, 2026 तक अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर लें।

कैंडिडेट्स को अपने चुने हुए राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की बताई गई लोकल भाषा को पढ़ना, लिखना, बोलना और समझना भी आना चाहिए।

एसबीआई क्लर्क भर्ती 2026: चयन प्रक्रिया

एसबीआई क्लर्क भर्ती 2026 के तहत उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में होगा।

  • प्रीलिमिनरी एग्जाम
  • मेन एग्जाम
  • लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट (LLPT), जहां लागू हो

प्रीलिमिनरी एग्जाम 100 मार्क्स का होगा और एक घंटे का होगा। इसमें तीन सेक्शन होंगे:

इंग्लिश लैंग्वेज : 30 सवाल

न्यूमेरिकल एबिलिटी : 35 सवाल

रीजनिंग एबिलिटी : 35 सवाल

हर सेक्शन के लिए 20 मिनट का अलग-अलग टाइम होगा। हर गलत जवाब के लिए कैंडिडेट्स को एक सवाल के लिए दिए गए मार्क्स का एक-चौथाई हिस्सा काट लिया जाएगा।

मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किए गए कैंडिडेट्स 200 मार्क्स के 190 सवालों के पेपर में शामिल होंगे। एग्ज़ाम का कुल समय 2 घंटे 40 मिनट होगा।

मुख्य परीक्षा में जनरल/फाइनेंशियल अवेयरनेस, जनरल इंग्लिश, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड, और रीज़निंग एबिलिटी और कंप्यूटर एप्टीट्यूड शामिल होंगे। हर गलत जवाब के लिए एक सवाल के लिए दिए गए मार्क्स का एक-चौथाई हिस्सा काट लिया जाएगा।

प्राथमिक परीक्षा में मिले अंक मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़े जाएंगे। फाइनल मेरिट लिस्ट मुख्य परीक्षा में मिले मार्क्स के आधार पर तैयार की जाएगी, जो जहां भी लागू हो, ज़रूरी लोकल लैंग्वेज टेस्ट के अधीन होगी।

लोकल लैंग्वेज टेस्ट

जिन कैंडिडेट्स ने क्लास 10 या क्लास 12 में बताई गई लोकल लैंग्वेज पढ़ी है और संबंधित मार्कशीट या सर्टिफिकेट दिखा सकते हैं, उन्हें लैंग्वेज टेस्ट नहीं देना होगा।

दूसरे प्रोविजनली चुने गए कैंडिडेट्स को बैंक जॉइन करने से पहले लोकल लैंग्वेज प्रोफिशिएंसी टेस्ट पास करना होगा। जो कैंडिडेट्स टेस्ट में फेल हो जाएंगे, उन्हें अपॉइंटमेंट नहीं दिया जाएगा।

SBI क्लर्क भर्ती 2026 के लिए अप्लाई कैसे करें

कैंडिडेट्स SBI करियर पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। एप्लीकेशन प्रोसेस में रजिस्ट्रेशन, पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स भरना, जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करना और लागू फीस देना शामिल है।

एप्लीकेंट्स को एक वैलिड ईमेल ID और मोबाइल नंबर की ज़रूरत होगी जो रिक्रूटमेंट प्रोसेस पूरा होने तक एक्टिव रहना चाहिए।

कैंडिडेट्स को एप्लीकेशन शुरू करने से पहले अपनी फोटो, सिग्नेचर, बाएं अंगूठे का निशान और हाथ से लिखा हुआ डिक्लेरेशन की स्कैन्ड कॉपी भी तैयार रखनी चाहिए।

फॉर्म जमा करने और पेमेंट पूरा करने के बाद, कैंडिडेट को सिस्टम से मिले एप्लीकेशन फॉर्म और ई-रसीद को भविष्य के लिए डाउनलोड करके सेव कर लेना चाहिए।

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Gold Outlook: सोने में अगली तेजी में Gen Z का होगा बड़ा हाथ, जानिए WGC की रिपोर्ट क्या कहती है

Gold Outlook: गोल्ड के साथ रिश्ता बदल रहा है। इसमें जेनजी का बड़ा हाथ है। इस बारे में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की नई रिपोर्ट में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इंडिया में गोल्ड में अगली बड़ी तेजी में सिर्फ ज्वेलरी की खरीदारी नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल फाइनेंस और न्यू-एज इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का हाथ होगा।

गोल्ड में निवेश के तरीके में आ रहा है बदलाव

WGC की स्वर्णिम उड़ान 20247 में कई दिलचस्प बातें बताई गई हैं। यह रिपोर्ट तब आई है, जब सोने की कीमतों में पिछले कुछ सालों में बड़ी तेजी से लोगों की खरीदारी की आदत में बदलाव आ रहा है। हालांकि, अब भी भारत में लोग ज्वेलरी पर काफी पैसे खर्च कर रहे हैं।

भारत में लोगों के पास 31000 टन सोना

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों के पास 31,000 टन सोना है। इसकी कीमत करीब 315 लाख करोड़ रुपये (3.4 ट्रिलियन डॉलर) है। इसमें से ज्यादातर सोना घरों में बेकार पड़ा है। इस वजह से भारत में यह सबसे ज्यादा अंडरयूटिलाइज्ड एसेट है। हालांकि, इसके पीछे सोने को लेकर लोगों की पारंपरिक सोच है।

Gen Z गोल्ड को अलग नजरिए से देख रहे

WGC के मुताबिक, 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग सोने को सिर्फ विरासत में मिले एसेट के रूप में नहीं देखते हैं। उनका जोर सोने की लिक्विडिटी और डिजिटल एक्सेस जैसी चीजों पर भी है। यही वजह है कि सिर्फ फिजिकल ज्वेलरी के बजाय वे डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी आधारित इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

ज्वेलर्स युवा खरीदारों को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश करने से पहले ऑनलाइन रिसर्च करते हैं। इस वजह से ज्वेलर्स इन नए कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 2035 तक जेनजी की कंज्यूमर स्पेंडिंग करीब 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसका असर भविष्य में इंडिया के गोल्ड मार्केट पर दिखेगा।

फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बना रहा गोल्ड

डब्ल्यूजीसी के मुताबिक, इंडिया में गोल्ड की डिमांड अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित रहने वाली नहीं है। गोल्ड अब फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है। इसमें गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रिसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स, डिजिटल गोल्ड और बुलियन बैंकिंग का बड़ा हाथ हो सकता है। इस इंटिग्रेशन से घरों में पड़ा सोना भी इकोनॉमी का हिस्सा बन सकता है।

कश्मीरी पंडितों को फिर आतंकी धमकी! LeT से जुड़े टेरर ग्रुप ने जारी की हिट लिस्ट, घाटी के बाहर भी हमले की चेतावनी

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन ने कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को धमकी दी है। सीएनएन-न्यूज18 के मनोज गुप्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक नया धमकी भरा नोट जारी किया है, जिसमें कुछ कर्मचारियों की निजी जानकारी साझा की गई है। साथ ही, कश्मीर घाटी और जम्मू में उन्हें निशाना बनाकर हमले करने की चेतावनी दी गई है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी यूएलसी को भारतीय खुफिया एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा का एक छद्म संगठन मानती हैं। यूएलसी ने कश्मीरी पंडित अधिकारियों की एक कथित ‘हिट लिस्ट’ जारी की है। इसमें छह सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर शामिल हैं।

यह धमकी खास तौर पर उन कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी गई है, जो सरकारी रोजगार योजनाओं के तहत काम कर रहे हैं। संगठन ने यह भी धमकी दी है कि अगर आतंकियों और उनके समर्थकों की संपत्तियों को जब्त या कुर्क किया गया, तो सुरक्षा बलों और प्रशासन के खिलाफ कड़ी जवाबी कार्रवाई की जाएगी।

‘हिट लिस्ट’ में कश्मीरी पंडित कर्मचारी

धमकी भरे नोट में दावा किया गया है कि संगठन सरकारी विभागों पर नजर रख रहा है। इनमें खास तौर पर राजस्व विभाग शामिल है, जहां सरकारी पैकेज के तहत कई कश्मीरी पंडित कर्मचारी तैनात हैं। नोट में छह कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर भी दिए गए हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस तरह निजी जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद कर्मचारियों में डर पैदा करना और उन्हें संभावित टारगेट के रूप में पहचानना हो सकता है। हालांकि, सीएनएन-न्यूज18 ने सुरक्षा कारणों से धमकी में शामिल कर्मचारियों के नाम और उनके संपर्क नंबर सार्वजनिक नहीं किए हैं।

घाटी से जम्मू जाने पर भी हमले की धमकी

संगठन ने कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे कश्मीर घाटी से जम्मू चले भी जाते हैं, तो वे पूरी तरह सुरक्षित नहीं होंगे। धमकी में कहा गया है कि उन्हें कश्मीर के बाहर भी निशाना बनाया जा सकता है। संगठन ने प्रवासी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए दी जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का भी विरोध किया है। इनमें घर से काम करने और दूर रहकर काम करने जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। संगठन ने ऐसी सुविधाएं जारी रखने पर भी धमकी दी है।

एलजी, डीजीपी और केंद्र को खुली चेतावनी

धमकी भरे नोट में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी), पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और दिल्ली में मौजूद अधिकारियों को भी चेतावनी दी गई है। संगठन ने दावा किया है कि भविष्य में होने वाले हमलों के दौरान वह लोगों के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं करेगा। नोट के एक अन्य हिस्से में स्थानीय पुलिस को लेकर भी धमकी दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि 90 प्रतिशत से ज्यादा स्थानीय पुलिसकर्मी स्थानीय इलाकों में ही रहते और आते-जाते हैं। संगठन ने इसी आधार पर पुलिसकर्मियों पर कहीं भी और कभी भी हमले का खतरा बताया है।

लश्कर ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए करता है काम: खुफिया सूत्र

भारत के वरिष्ठ खुफिया सूत्रों ने सीएनएन-न्यूज18 को बताया कि लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन कई बार अलग-अलग नामों से बने ‘शैडो फ्रंट’ के जरिए काम करते हैं। इनमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ), यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) और पीपुल्स एंटी-फासिस्ट फ्रंट (पीएएफएफ) जैसे नाम शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन संगठनों का इस्तेमाल खास तौर पर आम लोगों और धार्मिक समुदायों के खिलाफ होने वाले हमलों की जिम्मेदारी लेने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य इन हमलों को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बजाय किसी स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध के रूप में पेश करना हो सकता है। खुफिया सूत्रों का कहना है कि ऐसे प्रॉक्सी संगठनों के जरिए आतंकी संगठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जांच और आतंकवाद के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश भी करते हैं। इनमें फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध शामिल हैं।

कर्मचारियों का डेटा जारी करना सोची-समझी साजिश

खुफिया जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत भर्ती किए गए कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर और उनकी तैनाती की जगहों की जानकारी सार्वजनिक करना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस जानकारी का इस्तेमाल इन कर्मचारियों को डराने या उन्हें निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि ‘हाइब्रिड आतंकियों’ द्वारा की जाने वाली लक्षित हत्याओं में छोटे और आसानी से छिपाए जा सकने वाले हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इनमें पिस्तौल और रिवॉल्वर जैसे हथियार शामिल हैं। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, हाइब्रिड आतंकी ऐसे लोग होते हैं जो सामान्य नागरिकों की तरह अपनी नौकरी और रोजमर्रा की जिंदगी जीते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। ऐसे लोगों का इस्तेमाल खास लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई

सरकारी कर्मचारियों को मिल रही धमकियों और आतंकवादियों की मदद करने वालों की संपत्ति जब्त किए जाने के बाद सामने आई धमकियों को देखते हुए सुरक्षा बलों ने प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके रहने की जगहों के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सुरक्षित रास्ते तय कर रही हैं। इसके साथ ही, कर्मचारियों की निजी जानकारी ऑनलाइन साझा करने वाले आतंकी गुटों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान भी तेज किए गए हैं। इन अभियानों का मकसद ऐसे आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करना है।