Gold Price Today: सोना हुआ और महंगा, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक बढ़कर इस हाई पर पहुंचा भाव

देश में 13 अगस्त को सोने की कीमत में तेजी है। राजधानी दिल्ली में सुबह के वक्त 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 155020 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। मुंबई में कीमत बढ़कर 154870 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। अन्य शहरों में भी ​सोने के भाव में इजाफा हुआ है। वैश्विक बाजारों में तेजी और सराफा की मांग के कारण सोने की कीमतों में वृद्धि है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और डॉलर में स्थिरता का भी कीमती धातुओं को सपोर्ट मिला।

वैश्विक बाजारों में हाजिर सोना 4,412.63 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है। निवेशक अमेरिका के महंगाई के आंकड़े आने का इंतजार कर रहे हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 155020 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142110 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 141960 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 154870 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 154920 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 154870 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 141960 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली142110155020
मुंबई141960154870
अहमदाबाद142010154920
चेन्नई142010154920
कोलकाता141960154870
हैदराबाद141960154870
जयपुर142110155020
भोपाल142010154920
लखनऊ142110155020
चंडीगढ़142110155020

हाल ही में मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की ‘एच1 2026 प्रेशियस मेटल्स रिपोर्ट’ में कहा गया कि सोने की कीमतों और भू-राजनीतिक संघर्षों के बीच पारंपरिक संबंध बदल रहा है। महंगाई, ब्याज दरें और मौद्रिक नीति सराफा कीमतों को प्रभावित करने वाले अधिक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वर्ष की पहली छमाही में यह स्पष्ट हुआ कि केवल भू-राजनीतिक जोखिम सोने में तेजी बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। बाजार अब केवल भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि यह देख रहा है कि उनका महंगाई, ब्याज दरों और मौद्रिक नीति से जुड़ी अपेक्षाओं पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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चांदी की कीमत

सोने से उलट दूसरी कीमती धातु चांदी की कीमत में गिरावट दिख रही है। 13 अगस्त की सुबह कीमत गिरकर 254900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 66.23 डॉलर प्रति औंस पर है।

Viral Post: साल में 1 करोड़ से ज्यादा कमाने के बाद भी नहीं मिल रही खुशी! टेक प्रोफेशनल ने बताया क्यों

एक टेक प्रोफेशनल का सैलरी को लेकर किया गया पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में है। 14 साल के करियर में 14,300 रुपये की शुरुआती सैलरी से 1.05 करोड़ रुपये सालाना कमाने तक टेक प्रोफेशनल ने अपनी कमाई में बड़ा बदलाव देखा। दिलचस्प बात ये है कि करोड़ों की कमाई के बावजूद वह अपनी सबसे खुशहाल सैलरी 20 हजार रुपये महीना मानते हैं। टेक प्रोफेशनल ने बताया कि, टियर-3 कॉलेज से पढ़ाई के बाद पहली नौकरी पाना आसान नहीं था। उनकी सैलरी जब 14,300 रुपये से बढ़कर 20,000 रुपये महीना हुई, तो उन्हें जितनी खुशी मिली, उतनी बाद में मिलने वाली बड़ी सैलरी बढ़ोतरी से भी नहीं मिली। सोशल मीडिया पर ये काफी वायरल हो रहा है।

14,300 रुपये थी शुरुआती सैलरी

Reddit पर शेयर की गई पोस्ट में टेक प्रोफेशनल ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद किया। 2012 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद इस टेक प्रोफेशनल को पहली नौकरी पाने में करीब छह महीने लग गए। उनकी शुरुआती मासिक सैलरी 14,300 रुपये थी, जो पहले बढ़कर 20,000 रुपये, फिर 32,000 रुपये और 60,000 रुपये हो गई। बेंगलुरु जाने के बाद उनकी सालाना सैलरी 13 लाख रुपये पहुंची और धीरे-धीरे बढ़कर 25 लाख, 40 लाख, 60 लाख, 80 लाख और आखिर में 1.05 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने बताया कि उनके पास 50 लाख रुपये से ज्यादा के ESOPs भी हैं, लेकिन उनका मानना है कि जब तक उन्हें इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, तब तक उन्हें संपत्ति नहीं माना जा सकता।

ज्यादा खुशी 20 हजार सैलरी में थी

आज उनकी कमाई 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है, लेकिन उनके लिए सबसे खास सैलरी 20 हजार रुपये महीना रही। उन्होंने बताया कि 14,300 रुपये से बढ़कर 20,000 रुपये होने पर उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। इस बढ़ोतरी के बाद उन्होंने पब्लिक बस से सफर करना छोड़ दिया और अपनी पसंद की “ड्रीम बाइक” खरीदी। उन्होंने ये भी बताया कि अपने 13 साल के करियर में उन्हें सिर्फ एक बार प्रमोशन मिला। उनके मुताबिक, ज्यादा सैलरी बढ़ने के साथ उनकी लाइफस्टाइल में भी बदलाव आया। अपने अनुभव के आधार पर इस टेक प्रोफेशनल ने कहा, “प्रमोशन के लिए किसी कंपनी के साथ मत रहो, यह इसके लायक नहीं है।”

निवेश करने में होती है मदद

उनका मानना है कि एक तय स्तर तक पहुंचने के बाद सैलरी बढ़ने का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर कम पड़ता है। उन्होंने कहा, “जब आपकी सालाना कमाई करीब 25-30 लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है, तो इसके बाद मिलने वाली हर अतिरिक्त बढ़ोतरी आपकी लाइफस्टाइल से ज्यादा आपके निवेश को बेहतर बनाने में मदद करती है। कम से कम, मेरे मामले में ऐसा ही हुआ है।” उन्होंने कहा, “मानसिक तनाव सच है, लेकिन ज्यादा सैलरी मिलने से यह कुछ कम हो जाता है।”

खुद का कुछ करना चाहते हैं

इस टेक प्रोफेशनल ने माना कि, अच्छी कमाई के बावजूद वह अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने लिखा, “मुझे एहसास हुआ है कि अब मैं ज्यादा सैलरी के पीछे नहीं भाग रहा हूं। मैं आजादी के पीछे भाग रहा हूं।” उनका कहना है कि किसी दूसरी कंपनी में ज्यादा सैलरी के लिए काम करने के बजाय वह खुद की बनाई किसी चीज से हर महीने 1 लाख रुपये कमाना पसंद करेंगे। अच्छी कमाई के बावजूद यह टेक प्रोफेशनल सादा जीवन जीते हैं। वह 10 साल पुरानी कार चलाते हैं और बेंगलुरु में अपार्टमेंट के बजाय विला कम्युनिटी में प्लॉट खरीदा है। उनकी कमाई रियल एस्टेट, शेयर, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो और कमर्शियल प्रॉपर्टी में लगी है।

इस टेक प्रोफेशनल के फाइनेंशियल सफर में नुकसान भी शामिल रहा है। उन्होंने बताया कि क्रिप्टो ट्रेडिंग में उन्हें करीब 20-25 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उनके लिए अब मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं है। उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए नहीं है कि मुझे पैसे से नफरत है, बल्कि इसलिए कि मैं 60 साल की उम्र में पीछे मुड़कर यह नहीं सोचना चाहता कि अगर मैंने सच में कोशिश की होती तो क्या होता।”

नौकरी के साथ-साथ उन्होंने छोटे प्रोडक्ट और माइक्रो-SaaS प्रोजेक्ट्स पर भी काम शुरू किया है। फिलहाल उनके प्रोजेक्ट्स के कोई यूजर नहीं हैं, लेकिन वह मार्केटिंग सीख रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि आगे चलकर इनसे हर महीने 1,000-2,000 डॉलर की कमाई हो सकेगी। अगर ऐसा होता है, तो वह नौकरी छोड़ने या कुछ महीनों का ब्रेक लेने पर विचार कर सकते हैं।

Delhi 2047 का मास्टर प्लान पास, DDA के पुराने मकानों को मिलेगी नई जिंदगी! मेट्रो, सड़क सब पर असर

Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के विकास को लेकर दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने कई बड़े फैसले लिए हैं। DDA की बैठक में Master Plan for Delhi-2047 को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता दिल्ली के उपराज्यपाल और DDA के चेयरमैन सरदार तरनजीत सिंह संधू ने की। अब इस प्लान को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को भेजा जाएगा।

दिल्ली का विकास कैसे होगा?

Master Plan 2047 में दिल्ली के आने वाले वर्षों के विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें आवास, रोजगार, ट्रांसपोर्ट, पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहेगा। बढ़ती आबादी को देखते हुए शहर के विकास को एक साथ कई क्षेत्रों से जोड़ने की कोशिश की गई है।

इसमें पुराने इलाकों को बेहतर बनाने, ऐतिहासिक जगहों को बचाने और लोगों को बेहतर सुविधाएं देने पर भी ध्यान दिया गया है। प्लान तैयार करने से पहले दिल्ली सरकार, MCD, NDMC, DJB, DMRC, NCRTC और RWAs समेत कई संस्थाओं से चर्चा की गई थी।

पुराने DDA मकानों का पुनर्निर्माण आसान होगा

DDA ने पुराने दो मंजिला मकानों के पुनर्निर्माण के लिए एक समान नीति को भी मंजूरी दी है। इसका फायदा 50 साल से ज्यादा पुराने उन DDA मकानों को मिलेगा, जो अब जर्जर या कमजोर हो चुके हैं।

पहले ऐसे बने-बनाए मकानों के पुनर्विकास के लिए एक समान नियम नहीं थे। अब इन मकानों को खाली रिहायशी प्लॉट की तरह रीडेवपलमेंट का अधिकार मिलेगा। हालांकि, इसके लिए FAR, ग्राउंड कवरेज, ऊंचाई, फायर सेफ्टी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी जैसे नियमों का पालन करना होगा।

रिठाला-कुंडली मेट्रो को भी बढ़ावा

DDA ने नरेला सब-सिटी में रिठाला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर के डिपो के लिए 19.63 हेक्टेयर जमीन का लैंड यूज बदलने को मंजूरी दी है। जमीन का इस्तेमाल अब ट्रांसपोर्टेशन के लिए किया जा सकेगा।

रिठाला से कुंडली तक मेट्रो विस्तार से नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली, रोहिणी और नरेला की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इससे हरियाणा के कुंडली तक पहुंच भी आसान होगी। DDA को उम्मीद है कि इससे नरेला में आवास, रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और दूसरे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

बिल्डिंग परमिशन में भी राहत

DDA ने Unified Building Bye-Laws यानी UBBL-2016 में बदलाव को मंजूरी दी है। इसका मकसद बिल्डिंग प्लान की मंजूरी को आसान बनाना है।

अब बिल्डिंग परमिट के लिए DPCC, Chief Inspector of Factories, Delhi Jal Board और Forest Department से पहले NOC लेने की जरूरत को हटाने का प्रावधान किया गया है। इससे प्रोजेक्ट की मंजूरी में लगने वाला समय कम हो सकता है।

कई जमीनों के लैंड यूज में बदलाव

DDA ने रोशनपुरा में 7,978 वर्ग मीटर जमीन का लैंड यूज बदलने को भी मंजूरी दी है। यहां Veterinary Council of India का मुख्यालय बनाया जाना है। सरोजिनी नगर के पास 24,400 वर्ग मीटर जमीन को ट्रांसपोर्टेशन से रेजिडेंशियल में बदलने का प्रस्ताव भी मंजूर हुआ है।

इसके अलावा Copernicus Lane में तीन प्लॉट का लैंड यूज रेजिडेंशियल से पब्लिक और सेमी-पब्लिक करने की मंजूरी दी गई। यहां भारतीय विद्या भवन अपनी उच्च शिक्षा और रिसर्च गतिविधियों का विस्तार करना चाहता है।

DDA ने मंगोलपुरी और केशोपुर के कुछ इंडस्ट्रियल एरिया को डी-नोटिफाई करने का फैसला भी लिया। वहीं, Gazipur में Waste-to-Energy प्लांट के लिए जमीन का लैंड यूज कमर्शियल से यूटिलिटी करने को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ग्रीन एरिया बढ़ाने के लिए भी जमीन के इस्तेमाल में बदलाव किया गया है।

PPF Calulator: हर साल PPF में ₹1.5 लाख डालने पर कितना पैसा मिलेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Charlie Munger Investment Tips: निवेश करने में चार्ली मुंगेर के ये 4 सिद्धांत रखें याद, कभी नहीं डूबेगा पैसा

Charlie Munger Investment Tips: चार्ली मुंगेर को निवेश की गजब की समझ थी। वह वॉरेन बफे के करीबी दोस्त और बर्कशायर हैथवे के को-फाउंडर थे। नवंबर 2023 में मुंगेर का निधन हो गया। बफे भी निवेश की उनकी समझ के कायल थे। बफे खुद एक दिग्गज इनवेस्टर्स हैं। उन्होंने शेयरों में निवेश से अकूत दौलत कमाई है। बफे ने बताया था कि उन्होंने मुंगेर से कई चीजें सीखी हैं।

शेयरों में निवेश के चार बुनियादी सिद्धांत

मुंगेर निवेश में चार बुनियादी बातों पर काफी जोर देते थे। उनका मानना था कि हर व्यक्ति को निवेश में इन चार बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। कुछ साल पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में इन चार सिद्धांतों के बारे में विस्तार से बताया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये चारों निवेश के बुनियादी सिद्धांत है, जिनके बारे में शेयरों में निवेश करने वाले हर व्यक्ति को जानना चाहिए।

उसी कंपनी में निवेश जिसके बिजनेस को आप समझते हैं

मुंगेर ने कहा था कि निवेश का पहला सिद्धांत यह है कि आप जिस कंपनी में निवेश कर रहे हैं, उसके बिजनेस की समझ आपको होनी चाहिए। यह सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है। कई लोग किसी दोस्त और रिश्तेदार के कहने पर शेयरों में निवेश करते हैं। उन्हें इस बात की पूरी समझ नहीं होती कि वे जिस कंपनी के शेयर में निवेश कर रहे हैं, उसका बिजनेस क्या है। फिर निवेश में नुकसान होने पर वे दोस्त और रिश्तेदार को जिम्मेदार मानते हैं।

निवेश से पहले कंपनी की इंट्रिन्सिक वैल्यू जान लें

दूसरे सिद्धांत के बारे में बताते हुए मुंगेर ने कहा था कि निवेश से पहले कंपनी की इंट्रिन्सिक वैल्यू के बारे में जानना बहुत जरूरी है। Intrinsic Value का मतलब कंपनी के असल वर्थ से है। यह वैल्यू कंपनी की फाइनेंशियल ताकत, अर्निंग्स और फ्यूचर कैश फ्लो पर आधारित होती है। यह कंपनी के शेयर के प्राइस से अलग है।

अच्छी मैनेजमेंट वाली कंपनियों की ग्रोथ तेज होती है

तीसरे सिद्धांत में मुंगेर ने कंपनी के मैनेजमेंट पर फोकस करने को कहा था। उनका कहना था कि आप जिस कंपनी के शेयर में निवेश करने जा रहे हैं, उसके मैनेजमेंट के बारे में आपको जरूर पहले पता कर लेना चाहिए। अच्छे मैनेजमेंट वाली कंपनियों की ग्रोथ ज्यादा होती है। ऐसी कंपनियों में मार्केट लीडर बनने की क्षमता होती है।

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शेयर को कम कीमत पर खरीदने से ज्यादा मुनाफा कमाने की गुंजाइश 

मुंगेर का चौथा सिद्धांत यह था कि आपको किसी शेयर में सही कीमत पर निवेश करना चाहिए। कई लोग किसी कंपनी के शेयर को तब खरीद लेते हैं, जब उसका प्राइस 52 हफ्ते के हाई पर होता है या शेयर पहले ही काफी चढ़ चुका होता है। मुंगेर ने कहा था कि किसी शेयर की खरीद कीमत जितनी कम होगी, उससे मुनाफा कमाने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। इसलिए किसी शेयर को खरीदने से पहले यह देख लेना जरूरी है कि कही आप उसे ज्यादा कीमत पर तो नहीं खरीद रहे हैं।

PPF Calulator: हर साल PPF में ₹1.5 लाख डालने पर कितना पैसा मिलेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF Calulator: अगर आप हर साल ₹1.5 लाख कहीं ऐसी जगह लगाना चाहते हैं, जहां पैसा सुरक्षित रहे और धीरे-धीरे बढ़ता भी रहे, तो PPF एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें शेयर बाजार जैसा उतार-चढ़ाव नहीं होता। सरकार की गारंटी रहती है। साथ ही, लंबे समय तक पैसा छोड़ने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। फिलहाल PPF पर 7.1% सालाना ब्याज है। सरकार इसे समय-समय पर घटा या बढ़ा सकती है।

अगर आप हर साल PPF में पूरे ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो 15 साल बाद आपके पास कितने पैसे होंगे? अगर यही निवेश 20 या 25 साल तक चलता रहे तो रकम कहां पहुंच जाएगी? आइए इसका पूरा हिसाब समझते हैं।

15 साल में करीब ₹41 लाख

PPF की सामान्य अवधि 15 साल होती है। इस दौरान अगर आप हर साल ₹1.5 लाख जमा करते हैं, तो अपनी जेब से कुल ₹22.50 लाख डालेंगे।

अब इसमें ब्याज जुड़ता जाएगा। 7.1% की दर को मानकर चलें तो 15 साल बाद रकम करीब ₹40.68 लाख हो सकती है। यानी ₹22.50 लाख आपने जमा किए और करीब ₹18.18 लाख ब्याज से जुड़ गए। यहीं से PPF की असली ताकत समझ आती है।

20 साल में रकम करीब ₹67 लाख

15 साल पूरे होने के बाद PPF को आगे भी जारी रखा जा सकता है। इसे 5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है। अब मान लीजिए आप 20 साल तक हर साल ₹1.5 लाख डालते रहे। तब आपकी कुल जमा रकम ₹30 लाख होगी।

7.1% की दर को पूरे समय समान मानें तो 20 साल बाद यह रकम करीब ₹66.58 लाख हो सकती है। यानी आपकी जमा रकम ₹30 लाख है, लेकिन ब्याज से करीब ₹36.58 लाख और जुड़ सकते हैं।

25 साल में ₹1 करोड़ से ज्यादा

अब सबसे दिलचस्प हिसाब 25 साल का है। हर साल ₹1.5 लाख के हिसाब से 25 साल में आप कुल ₹37.50 लाख जमा करेंगे। लेकिन अगर 7.1% ब्याज दर पूरी अवधि में बनी रहती है, तो रकम करीब ₹1.03 करोड़ तक पहुंच सकती है।

यानी आपने ₹37.50 लाख लगाए और करीब ₹65.58 लाख ब्याज से जुड़ गए। कुल रकम ₹1 करोड़ के पार निकल जाती है। इसी वजह से लंबी अवधि के निवेश में सिर्फ यह देखना ठीक नहीं होता कि आपने कितना पैसा जमा किया है। यह भी देखना चाहिए कि उस पैसे को बढ़ने के लिए कितना समय मिला।

15, 20 और 25 साल का पूरा हिसाब

अवधिहर साल जमाआपकी कुल जमा रकमअनुमानित ब्याजकुल रकम
15 साल₹1.50 लाख₹22.50 लाख₹18.18 लाख₹40.68 लाख
20 साल₹1.50 लाख₹30 लाख₹36.58 लाख₹66.58 लाख
25 साल₹1.50 लाख₹37.50 लाख₹65.58 लाख₹1.03 करोड़

नोट : ये आंकड़े 7.1% ब्याज दर को पूरे 15, 20 या 25 साल तक समान मानकर निकाले गए हैं। असल में PPF की ब्याज दर बदल सकती है। इसलिए भविष्य में मिलने वाली रकम भी अलग हो सकती है।

पैसा कब जमा करना बेहतर है?

PPF में ब्याज का कैलकुलेशन महीने की 5 तारीख से महीने के अंत तक खाते में मौजूद सबसे कम रकम के आधार पर होती है। इसलिए अगर आप साल की पूरी ₹1.5 लाख की रकम एक साथ जमा करने की सोच रहे हैं, तो महीने की 5 तारीख से पहले जमा करना फायदेमंद हो सकता है।

अगर हर साल पैसा एक साथ जमा करना मुश्किल है, तो पूरे साल में भी किस्तों में रकम जमा की जा सकती है। लेकिन सालाना ₹1.5 लाख की सीमा का ध्यान रखना जरूरी है।

PPF निवेश में किन बातों का ध्यान रखें?

  • PPF में कुछ शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। लेकिन इसे सेविंग अकाउंट की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
  • ब्याज दर हमेशा एक जैसी नहीं रहती। PPF की ब्याज दर सरकार तय करती है। भविष्य में यह बढ़ या घट सकती है।
  • हर साल निवेश जारी रखें। अकाउंट को चालू रखने के लिए हर वित्त वर्ष कम से कम ₹500 जमा करना जरूरी है।
  • नॉमिनी जरूर जोड़ें। इससे खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में रकम के क्लेम की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
  • PPF सुरक्षित निवेश है, लेकिन हर वित्तीय लक्ष्य के लिए अकेला PPF पर्याप्त नहीं। अपनी जरूरत और जोखिम के हिसाब से दूसरे निवेश विकल्प भी रखें।

2026 में EPFO के 5 बड़े अपडेट: ऑटो-ट्रांसफर से लेकर UPI-ATM तक, जानिए क्या-क्या बदला

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया इस्तीफा, क्या आप जानते हैं कि उनकी 5 साल की कमाई कितनी थी?

N Chandrasekaran Remuneration: टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने आज अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये भी बात सामने आ रही है कि उन्होंने एक और कार्यकाल के लिए कोई डिमांड नहीं की है। इन खबरों के बीच अब उनकी सैलरी और कम्पेनसेशन के आंकड़े चर्चा में आ गए हैं। मनीकंट्रोल के आंकड़ों के मुताबिक, ‘चंद्रा’ के नाम से मशहूर चंद्रशेखरन को पिछले 5 सालों में टाटा संस से कुल ₹685 करोड़ का कम्पेनसेशन मिला है।

वित्त वर्ष 2025-26 में उन्हें कुल ₹158.6 करोड़ का रेमुनरेशन मिला। यह FY22 के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा पैकेज है, जब से कंपनी ने अपने शीर्ष अधिकारियों की सैलरी के आंकड़े सार्वजनिक करना शुरू किया था।

सैलरी का 88% हिस्सा सिर्फ कमीशन!

चंद्रशेखरन की भारी-भरकम कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा उनकी फिक्स्ड सैलरी का नहीं, बल्कि कंपनी के प्रदर्शन से मिलने वाले कमीशन का है। FY26 की उनकी कुल कमाई ₹158.6 करोड़ रही जिसमें ₹140.7 करोड़ कमीशन रहा जो कुल पैकेज का लगभग 88.7% है। उनकी फिक्स्ड सैलरी ₹17.9 करोड़ थी। चंद्रशेखरन को मिला यह पैकेज टाटा संस द्वारा अपने सभी डायरेक्टर्स को दी गई कुल सैलरी का 80 प्रतिशत हिस्सा है। FY25 में उनका कुल कम्पेनसेशन ₹155 करोड़ और FY24 में ₹134.8 करोड़ रहा था।

देश के सबसे टॉप कॉर्पोरेट दिग्गजों में शामिल थे चंद्रशेखरन

भारत के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव्स से अगर तुलना करें, तो चंद्रशेखरन टॉप पायदान पर खड़े नजर आते हैं:

सी विजयकुमार (HCL Tech CEO): वित्त वर्ष 2026 में ₹176 करोड़ के पैकेज के साथ देश के सबसे महंगे एग्जीक्यूटिव माने जाते हैं।

एन चंद्रशेखरन (Tata Sons Chairman): FY26 में ₹158.6 करोड़ के पैकेज के साथ दूसरे बड़े स्थान पर हैं।

संदीप कालरा (Persistent Systems CEO): FY25 में इनका पैकेज ₹148 करोड़ था, जो चंद्रशेखरन की FY26 की कमाई से कम है।

पवन मुंजाल (Hero MotoCorp): FY26 में ₹122 करोड़ के पैकेज के साथ ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले अधिकारी रहे।

AGM में डायरेक्ट्रिशिप पर वोटिंग से पहले बड़ा घटनाक्रम

चंद्रशेखरन की सैलरी और इस्तीफे के ये आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब अगस्त के मध्य में टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) आयोजित होने वाली है। वैसे चेयरमैन के रूप में उनका 5 साल का कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन रोटेशन नियमों के तहत उन्हें बोर्ड में अपनी डायरेक्टर की सीट बरकरार रखने के लिए शेयरधारकों के बहुमत की मंजूरी की आवश्यकता थी। इसी बीच उनके इस्तीफे और कार्यकाल पूरा कर हटने के फैसले ने सबको चौंका दिया है।

CFO सौरभ अग्रवाल दूसरे सबसे महंगे अधिकारी

टाटा संस के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल कंपनी में दूसरे सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टॉप मैनेजर रहे। उनकी FY26 में कुल आय ₹34 करोड़ रही जिसमें कमीशन का हिस्सा ₹26 करोड़ था।

चंद्रशेखरन और सौरभ अग्रवाल के अलावा बोर्ड के अन्य 7 सदस्यों में से किसी को भी रेगुलर रेमुनरेशन नहीं मिला। हालांकि, 6 सदस्यों को ₹1 से ₹3 करोड़ का कमीशन मिला, जबकि TVS मोटर्स के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन इकलौते ऐसे बोर्ड मेंबर रहे जिन्होंने न तो कोई सैलरी ली और न ही कमीशन।

खुलने वाला है बड़ा मौका! ब्लैकस्टोन के निवेश वाली कंपनी का ₹2,600 करोड़ का आईपीओ जल्द, जानिए डेट्स और पूरी डिटेल

Horizon Industrial Parks IPO Details: ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट फर्म ब्लैकस्टोन समर्थित भारत की सबसे बड़ी औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा ऑपरेटर ‘होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क’ ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास अपना रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है। इसके साथ ही कंपनी ने ऐलान किया है कि उसका ₹2,600 करोड़ का आईपीओ आगामी 17 अगस्त को दलाल स्ट्रीट पर उतरेगा।

यह अगले हफ्ते खुलने वाला चौथा मेनबोर्ड का आईपीओ होगा। इससे पहले ललिता ज्वैलरी मार्ट, सनशाइन पिक्चर्स और शंखेश ज्वैलर्स के आईपीओ भी कतार में हैं।

आईपीओ की महत्वपूर्ण तारीखें

  • एंकर बुक: 14 अगस्त 2026
  • आईपीओ ओपनिंग डेट: 17 अगस्त 2026
  • आईपीओ क्लोजिंग डेट: 19 अगस्त 2026
  • शेयर अलॉटमेंट फाइनल होना: 20 अगस्त 2026
  • शेयरों की लिस्टिंग: 24 अगस्त 2026

प्राइस बैंड की घोषणा 12 अगस्त को की जाएगी। इस आईपीओ में कोई भी ऑफर-फॉर-सेल (OFS) कंपोनेंट नहीं है, यानी पूरा इश्यू पूरी तरह से फ्रेश इश्यू है।

इश्यू साइज और रिजर्वेशन

कंपनी ने कर्मचारियों के लिए ₹5 करोड़ तक के शेयर आरक्षित किए हैं। इसके अलावा नेट इश्यू का स्ट्रक्चर इस तरह रहेगा:

  • संस्थागत निवेशक (QIB): अधिकतम 75 प्रतिशत हिस्सा
  • गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 15 प्रतिशत हिस्सा
  • रिटेल निवेशक: शेष 10 प्रतिशत हिस्सा

कंपनी का बिजनेस और प्रमोटर होल्डिंग

हॉरिजन इंडस्ट्रियल पार्क देश के प्रमुख कंजम्पशन और इंडस्ट्रियल हब (जैसे- दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, अहमदाबाद और नागपुर) में 45 संपत्तियों के जरिए 58.58 मिलियन वर्ग फीट में फैला हुआ मजबूत नेटवर्क प्रदान करता है।

इसकी प्रमोटर फर्म ब्लैकस्टोन अपनी तीन सहयोगी संस्थाओं के माध्यम से कंपनी में 88.74% हिस्सेदारी रखती है। इसके अलावा राधाकिसन दमानी, 360 ONE और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस जैसे पब्लिक शेयरधारकों की इसमें 11.26% हिस्सेदारी है।

फंड का इस्तेमाल कैसे होगा?

कंपनी इस आईपीओ के जरिए जुटाए गए पैसों का मुख्य रूप से कर्ज चुकाने के लिए इस्तेमाल करेगी। नेट इश्यू से मिलने वाले फंड में से ₹2,250 करोड़ का उपयोग कंपनी अपने कंसोलिडेटेड बकाया कर्ज (जो कि कुल ₹6,884.3 करोड़ है) को चुकाने में करेगी। बाकी बची हुई रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट कामकाज के लिए किया जाएगा।

फाइनेंशियल परफॉर्मेंस

वित्तीय मोर्चे पर बात करें तो हॉरिजन इंडस्ट्रियल पार्क अभी एक घाटे में चल रही कंपनी है और इसका घाटा बढ़ रहा है। मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कंपनी का शुद्ध घाटा बढ़कर ₹203.6 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹178.7 करोड़ था। हालांकि, इसी अवधि के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 77.1% उछलकर ₹691.4 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹390.3 करोड़ था।

इस आईपीओ के प्रबंधन के लिए कंपनी ने जेएम फाइनेंशियल, एक्सिस कैपिटल, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स और 360 ONE WAM को मर्चेंट बैंकर नियुक्त किया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: इंट्रा-डे में आज कहां बनेगा प्रॉफिट? दो लिस्टिंग और L&T, Manappuram समेत इन स्टॉक्स पर फोकस

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 45.50 प्वाइंट्स यानी 0.19% की बढ़त के साथ 24,561.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 11 अगस्त को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 388.19 प्वाइंट्स यानी 0.49% की गिरावट के साथ 78,154.25 और निफ्टी 112.10 प्वाइंट्स यानी 0.46% की फिसलन के साथ 24,471.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

आज इन कंपनियों के नतीजे होंगे पेश

टाटा मोटर्स, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), अरविंद, एस्ट्रल, आदित्य इन्फोटेक, EID पैरी इंडिया, EMS, GMR एयरपोर्ट्स, इंडिक्यूब स्पेस, IRCTC, ज्योति लैब्स, नेशनल फर्टिलाइजर्स, पेट्रोनेट एलएनजी, एसकेएफ इंडिया, सन टीवी नेटवर्क, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स, VIP इंडस्ट्रीज, वीके टेक वाबाग और यात्रा ऑनलाइन आज कारोबारी नतीजे पेश करेंगी।

इन कंपनियों के रिजल्ट पेश

Bata India Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर बाटा इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 23.04% उछलकर ₹63.98 करोड़ और रेवेन्यू 3.9% बढ़कर ₹978.9 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही बोर्ड ने हर शेयर पर ₹25 के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है।

Manappuram Finance Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर मणप्पुरम फाइनेंस का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 4 गुना से अधिक बढ़कर ₹138.4 करोड़ से ₹584.6 करोड़ और NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 28.1% बढ़कर ₹1,723.7 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स पर इमपेयरमेंट 60.6% घटकर ₹225.5 करोड़ पर आ गया।

RHI Magnesita India Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर आरएचआई मैग्नेसिटा इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 83.2% उछलकर ₹64.6 करोड़ और रेवेन्यू 5.6% बढ़कर ₹1,014 करोड़ पर पहुंच गया।

Tribhovandas Bhimji Zaveri Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर त्रिभोवनदास भीमजी जावेरी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 50.8% उछलकर ₹33.92 करोड़ और रेवेन्यू 34.8% बढ़कर ₹840.97 करोड़ पर पहुंच गया।

PI Industries Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर पीआई इंडस्ट्रीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 39% घटकर ₹244.2 करोड़ और रेवेन्यू 10.4% फिसलकर ₹1,702.3 करोड़ पर आ गया।

Linde India Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर लिंडे इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 2.4% घटकर ₹104.6 करोड़ पर आ गया लेकिन इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 21.6% फिसलकर ₹694.4 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही बोर्ड ने विकास डोकनिया को सीएफओ बनाया है जोकि 15 सितंबर से प्रभावी होगा।

Landmark Cars Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर लैंडमार्क कार्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 110.5% उछलकर ₹14.5 करोड़ और रेवेन्यू 22.7% बढ़कर ₹1,302.4 करोड़ पर पहुंच गया।

JSW Dulux Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर जेएसडब्ल्यू ड्यूलक्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 12.4% गिरकर ₹79.7 करोड़ और रेवेन्यू 2.8% फिसलकर ₹965 करोड़ पर आ गया।

Stocks To Watch: इन स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Tenneco Clean Air India

सीएनबीसी-टीवी18 की सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट के मुताबिक टेनेको क्लीन एयर इंडिया की प्रमोटर एंटिटी टेनेको मॉरीशस ब्लॉक डील्स के जरिए अपनी 8% हिस्सेदारी बेच सकती है जिसमें 2% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी शामिल है। इसका फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹515 और बेस ऑफर साइज ₹1663 करोड़ है।

Zydus Lifesciences

जाइडस लाइफसाइंसेज की सब्सिडियरी सेंटिनल थेरेप्यूटिक्स और मेरेओ बायोफार्मा ग्रुप पीएलसी ने AATD-LD के लिए एल्वेलेस्टैट (Alvelestat) के अमेरिकी कमर्शियलाइजेशन और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग राइट्स के लिए एक ऑप्शन और लाइसेंस एग्रीमेंट किया है। एल्वेलेस्टैट एक न्यूट्रोफिल इलास्टेस इनहिबिटर है, जिसके फेज 3 ट्रायल की तैयारी चल रही है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह फेफड़ों की रेयर और तेजी से बढ़ने वाली जेनेटिक बीमारी के लिए पहला ओरल ट्रीटमेंट होगा। इस ऑप्शन और लाइसेंस एग्रीमेंट के तहत सेंटिनल को अमेरिका में AATD-LD के लिए एल्वेलेस्टैट को कमर्शियलाइज करने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस राइट्स मिलेगा, जबकि मेरेओ के पास बाकी दुनिया में कमर्शियल राइट्स बने रहेंगे।

BEML

बीईएमएल को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) के फ्यूजलेज एयरोस्ट्रक्चर के निर्माण और सप्लाई के लिए ₹184.25 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

HG Infra Engineering

एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग को राजस्थान सरकार से पीएम सेतु के कंपोनेंट-1 के तहत आईटीआई भिवाड़ी क्लस्टर के O&M (ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट) के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) मिला है। ₹241 करोड़ की अनुमानित लागत में इसकी हिस्सेदारी 17.10% है।

Larsen and Toubro (L&T)

एलएंडटी ने अपनी सब्सिडियरी Vyoma.AI के साथ एक बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट किया है। इसके तहत यह अपना डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विस बिजनेस ₹1,400 करोड़ में व्योमा को गोइंग-कंसर्न बेसिस पर स्लंप सेल के जरिए ट्रांसफर करेगी।

KFin Technologies

केफिन टेक ने वित्तीय संस्थानों की बेहतरीन फर्जीवाड़े को गलत तरीके से सही मान लेना या सही सिग्नेचर को भी गलत तरीके से रिजेक्ट करने जैसी ऑपरेशनल खामियों को दूर करने के लिए एक एजेंटिक एआई सॉल्यूशन Klarity लॉन्च किया है।

Diamond Power Infrastructure

डायमंड पावर इंफ्रा को को राजेश पावर सर्विसेज से कुल ₹195.48 करोड़ के दो ऑर्डर मिले हैं। इसके तहत कंपनी को गुजरात में SDMF (स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड) स्कीम और सिस्टम इंप्रूवमेंट (अर्बन अंडरग्राउंड) प्रोग्राम के तहत PGVCL (पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड) के प्रोजेक्ट्स के लिए 11 kV मीडियम वोल्टेज (MV) अंडरग्राउंड पावर केबल की सप्लाई करना है। इस पर कंपनी को 12 महीनों में काम पूरा करना है।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Metropolis Healthcare

प्रमोटर एंटिटी डुरू शाह फैमिली ट्रस्ट और मेट्ज एडवाइजरी ने मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के 10.5-10.5 लाख शेयर कुल ₹118.44 करोड़ में ₹564 के भाव पर बेचे। ये शेयर कुल मिलाकर कंपनी में 1.01% हिस्सेदारी के बराबर थे। इनमें से आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड ने ₹59.16 करोड़ में 10.49 लाख शेयर, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर ने कुल ₹59.26 करोड़ में 5.25-5.25 लाख शेयर खरीदे। जून 2026 तक आदित्य बिड़ला सन लाइफ फ्लेक्सी कैप फंड के पास मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर में पहले से ही 1.95% हिस्सेदारी थी।

Univastu India

टौरस म्यूचुअल फंड ने हर शेयर ₹130 के भाव पर ₹4.9 करोड़ में यूनिवास्तु इंडिया के 3.77 लाख शेयर (0.99% हिस्सेदारी) खरीदी।

Rolex Rings

जर्मन इन्वेस्टमेंट फर्म बायर्नइन्वेस्ट ने ईआरआई बायर्नइन्वेस्ट फोंड्स एक्टियन एशियन की तरफ से ₹15.33 करोड़ में हर शेयर ₹170.59 के भाव पर ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी रोलेक्स रिंग्स के 8.98 लाख शेयर खरीदे।

RPP Infra Projects

चेन्नई की कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी दीवा प्रोजेक्ट्स ने आरपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के 8.48 लाख शेयर (1.71% हिस्सेदारी) ₹4.99 करोड़ में ₹58.90 के भाव पर हासिल किए। वहीं प्रमोटर अरुल सुंदरम नित्या ने ₹58.74 के भाव पर 5.13 लाख शेयर ₹3.01 करोड़ में तो पी अरुल सुंदरम ने ₹59.21 के भाव पर 3.59 लाख शेयर ₹2.13 करोड़ में बेचे। प्रमोटर्स ने कुल मिलाकर 1.76% होल्डिंग के बराबर शेयर बेचे।

लिस्टिंग

एर्डी इंडस्ट्रीज के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे तो जीवी इलेक्ट्रिकल्स की आज बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

CAMS, KPIT टेक्नोलॉजीज, NHPC, ASM टेक्नोलॉजीज, धुनसेरी टी एंड इंडस्ट्रीज, गैब्रिएल इंडिया, गुजरात कंटेनर्स, एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल एंड प्रूडेंशियल इन्वेस्टमेंट कंपनी, KCP, नीलमलाई एग्रो इंडस्ट्रीज, संडूर मैंगनीज एंड आयरन ओर्स, नर्मदा जिलेटिन्स, यूनिपार्ट्स इंडिया, वैभव ग्लोबल और वोइथ पेपर फैब्रिक्स इंडिया के शेयर आज एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो नेशनल हाईवेज इंफ्रा ट्रस्ट के इनकम डिस्ट्रीब्यूशन की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

एसएआईएल और बंधन बैंक में आज एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Price Today: दो दिनो में ₹10100 चढ़ा सोना, चांदी भी महंगी, चेक करें 10 शहरों में 24 से 18 कैरट के लेटेस्ट भाव

Gold Rate Today in India: कच्चे तेल में उछाल के बावजूद मजबूत डिमांड के चलते सोने-चांदी की चमक आज बढ़ी है। गोल्ड की बात करें तो एक दिन की गिरावट के बाद लगातार दो दिनों में 10 ग्राम 24 कैरट वाला गोल्ड ₹1860 और 22 कैरट वाला ₹1710 सस्ता हुआ है तो 9 अगस्त की एक दिन की स्थिरता से पहले लगातार चार दिनों में 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹8350 और 22 कैरट वाला ₹7650 महंगा हुआ था। 10 अगस्त को 24 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹380 और 22 कैरट वाला ₹350 सस्ता हुआ था। आज की बात करें तो राजधानी दिल्ली में आज 24 कैरट और 22 कैरट वाला 10 ग्राम गोल्ड ₹10 महंगा हुआ है। चांदी की बात करें तो आज इसकी भी चमक बढ़ी है। लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन यह महंगी हुई है और इन दो दिनो में एक किलो चांदी ₹10100 ऊपर चढ़ी है।

सिटीवाइज गोल्ड के भाव

देश के 10 बड़े शहरों में 18 कैरट, 22 कैरट और 24 कैरट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत क्या है, आइए जानते हैं…

शहर 24 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 22 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव 18 कैरट 10 ग्राम गोल्ड भाव
दिल्ली₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
मुंबई₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
कोलकाता₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
चेन्नई₹1,54,380₹1,41,510₹1,19,310
बेंगलुरू₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
हैदराबाद₹1,53,830₹1,41,010₹1,15,380
लखनऊ₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
पटना₹1,53,880₹1,41,060₹1,15,430
जयपुर₹1,53,980₹1,41,160₹1,15,530
अहमदाबाद₹1,53,880₹1,41,060₹1,15,430

तीन दिनों की स्थिरता के बाद लगातार दूसरे दिन चढ़ी चांदी

चांदी की बात करें तो लगातार तीन दिनों की स्थिरता के बाद आज लगातार दूसरे दिन इसके भाव बढ़े है। इन दो दिनों में एक किलो चांदी ₹10,100 महंगी हुई है। आज दिल्ली में एक किलो चांदी ₹100 चढ़कर ₹2,55,100 के भाव में बिक रही है। बाकी अहम महानगरों की बात करें तो मुंबई और कोलकाता में भी यह इसी भाव पर बिक रही है। हालांकि चेन्नई में एक किलो चांदी का भाव ₹2,60,100 है यानी कि चारों बड़े महानगरों में सबसे महंगी चांदी चेन्नई में बिक रही है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के ईबीजी कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक शॉर्ट टर्म में सोने-चांदी की चमक बढ़ सकती है। प्रमण का मानना है कि 10 ग्राम सोना ₹1.57 और 1 किलो चांदी ₹2.80 लाख का हो सकता है। लेमन मार्केट डेस्क के रिसर्च हेड गौरव गर्ग का कहना है कि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सोने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं और इस कारण सोने की चमक बढ़ रही है तो चांदी में भी इनवेस्टमेंट और इंडस्ट्रियल डिमांड स्ट्रॉन्ग है। अमेरिका में इनफ्लेशन के आंकड़े 12 अगस्त को आएंगे।

भारतीय घरों में दुनिया के टॉप 10 सेंट्रल बैंकों के कुल रिजर्व से भी ज्यादा सोना! 

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स्कूल टीचर जेब में ₹10000 लेकर दिल्ली आया, खड़ी कर दी ₹80000 करोड़ की कंपनी; जानिए हैवेल्स के मालिक की पूरी कहानी

Havells India Success Story: 1958 की बात है। पंजाब का एक 21 साल का स्कूल टीचर नौकरी छोड़कर दिल्ली पहुंचा। जेब में सिर्फ 10,000 रुपये थे। कोई बड़ा कारोबारी परिवार नहीं था। इंजीनियरिंग की डिग्री भी नहीं थी। लेकिन बिजली के सामान के कारोबार की थोड़ी समझ थी और अपना कारोबार खड़ा करने का इरादा था।

उस युवक का नाम था कीमत राय गुप्ता। दिल्ली के पुराने इलाके भागीरथ पैलेस में उन्होंने बिजली के सामान की ट्रेडिंग शुरू की। छह दशक से ज्यादा समय बाद उसी छोटे कारोबार का नाम Havells India है। आज कंपनी की मार्केट वैल्यू करीब 80,000 करोड़ रुपये है और इसके प्रोडक्ट 70 से ज्यादा देशों में पहुंचते हैं।

लेकिन 10,000 रुपये से 80,000 करोड़ रुपये तक का यह सफर सीधी लाइन में नहीं चला। इसमें कई ऐसे फैसले आए, जिन्होंने कंपनी की दिशा बदल दी।

भागीरथ पैलेस से शुरुआत

कीमत राय गुप्ता का जन्म 1937 में मालेरकोटला में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बजाय उन्होंने कारोबार का रास्ता चुना और 1958 में दिल्ली आ गए। उन्होंने भागीरथ पैलेस में Guptaji & Company शुरू की।

उस समय भागीरथ पैलेस बिजली के सामान के बड़े थोक बाजार के रूप में जाना जाता था। गुप्ता ने शुरुआत में केबल, वायर, स्विचगियर और दूसरे इलेक्ट्रिकल सामान की ट्रेडिंग की।

कारोबार छोटा था, लेकिन यहां उन्होंने एक ऐसी चीज सीखी जो आगे चलकर बहुत काम आई। उन्हें समझ आने लगा कि ग्राहक सिर्फ सस्ता सामान नहीं चाहता। उसे सही समय पर सामान चाहिए। भरोसेमंद सप्लायर चाहिए। और सबसे जरूरी, लगातार अच्छी सर्विस चाहिए। यही तजुर्बा आगे Havells की नींव बना।

Havells ब्रांड ₹7 लाख में खरीदा

कहानी में बड़ा मोड़ 1971 में आया। गुप्ता ने करीब 7 लाख रुपये में Havells ब्रांड खरीद लिया। उस समय यह कोई बड़ा और चमकदार ब्रांड नहीं था। कारोबार संघर्ष कर रहा था। लेकिन गुप्ता को इस नाम की पहचान पहले से थी। उन्होंने ब्रांड को खत्म करने के बजाय उसी नाम के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।

यहीं से उनका नजरिया बदल गया। अब मकसद सिर्फ दूसरे निर्माताओं का सामान खरीदकर बेचना नहीं था। वह अपना सामान बनाना चाहते थे। अपना ब्रांड खड़ा करना चाहते थे। यह फैसला छोटा दिख सकता है, लेकिन Havells की पूरी कहानी में यही सबसे अहम मोड़ था।

ट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक

गुप्ता ने धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग में पैसा लगाना शुरू किया। 1976 में दिल्ली के कीर्ति नगर में Havells का पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगा। यहां रीवायरेबल स्विच और चेंजओवर स्विच बनाए जाते थे।

अब कंपनी सिर्फ बाजार में मौजूद दूसरे ब्रांडों पर निर्भर नहीं थी। उसके पास अपना उत्पादन था। इसका मतलब था कि कंपनी प्रोडक्ट की क्वालिटी, उपलब्धता और डिजाइन पर ज्यादा नियंत्रण रख सकती थी। आगे चलकर Havells ने एनर्जी मीटर और दूसरे इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स में भी कदम बढ़ाया। कंपनी धीरे-धीरे ट्रेडर से निर्माता बनने लगी।

कंपनी बनी, फिर शेयर बाजार पहुंची

8 अगस्त 1983 को Havells India की स्थापना हुई। अगले दशक में कंपनी का कारोबार और विस्तार बढ़ता गया। दिसंबर 1993 में कंपनी का पब्लिक इश्यू आया और इसके शेयर शेयर बाजार में लिस्ट हुए।

यह कंपनी के लिए बड़ा बदलाव था। अब Havells सिर्फ एक परिवार का कारोबार नहीं था। इसमें पब्लिक शेयरहोल्डर्स भी थे। कंपनी के पास आगे विस्तार के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता भी खुल गया। इसी दौर में Havells ने दूसरी कंपनियों और ब्रांड्स को अपने साथ जोड़ना शुरू किया।

दूसरी कंपनियां खरीदीं, कारोबार बढ़ाया

Havells ने Towers and Transformers जैसे कारोबारों का अधिग्रहण किया। रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी ने एक घाटे में चल रहे कारोबार को भी अपने साथ जोड़ने के बाद करीब एक साल में मुनाफे में ला दिया।

इसके बाद Standard Electricals और Crabtree India जैसे नाम भी Havells के पोर्टफोलियो में आए। यहां कंपनी की रणनीति साफ दिखाई देने लगी थी। सिर्फ अपना कारोबार बढ़ाना लक्ष्य नहीं था। अलग-अलग प्रोडक्ट, ब्रांड और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को एक साथ जोड़ना था।

बेटे ने संभाली कमान

कीमत राय गुप्ता के बेटे अनिल राय गुप्ता 1992 में Havells से जुड़े। आगे चलकर उनके नेतृत्व में कंपनी का फोकस आम ग्राहक तक और ज्यादा पहुंच बनाने पर गया।

Havells ने पंखे, लाइटिंग, मॉड्यूलर स्विच, वॉटर हीटर और घरेलू उपकरणों जैसे प्रोडक्ट्स में विस्तार किया। कंपनी अब सिर्फ इलेक्ट्रिकल सामान बनाने वाली कंपनी नहीं रह गई थी। वह धीरे-धीरे घरों में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स का ब्रांड बन रही थी। यही बदलाव आगे की ग्रोथ का बड़ा आधार बना।

फिर आया सबसे बड़ा दांव

साल 2007 में Havells ने एक बड़ा फैसला लिया। कंपनी ने यूरोप की बड़ी लाइटिंग कंपनी Sylvania Lighting International को करीब 227.5 मिलियन यूरो में खरीद लिया। उस समय यह सौदा करीब 1,400 करोड़ रुपये का था।

इस अधिग्रहण से Havells को तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में बड़ा नेटवर्क मिल गया। स्थापित ब्रांड और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भी मिला। लेकिन यह दांव उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रहा।

विदेशी कारोबार बना चुनौती

2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस ने हालात बदल दिए। करेंसी में उतार-चढ़ाव हुआ। Sylvania के कारोबार को संभालना भी आसान नहीं रहा। अधिग्रहण से मिलने वाले फायदे के बजाय कंपनी पर दबाव बढ़ने लगा।

Havells ने यहां एक और अहम फैसला लिया। उसने सिर्फ इसलिए कारोबार पकड़े नहीं रखा कि उसके लिए बड़ी रकम खर्च हो चुकी थी। 2016 में Havells ने अपने लाइटिंग बिजनेस में 80% हिस्सेदारी Shanghai Feilo Acoustics को बेच दी। यह फैसला बताता है कि कंपनी के लिए विस्तार से ज्यादा जरूरी पूंजी और मैनेजमेंट का सही इस्तेमाल था।

Lloyd ने बदल दिया गेम

इसके बाद Havells ने भारत के कंज्यूमर मार्केट पर और ज्यादा ध्यान लगाया। 2017 में कंपनी ने Lloyd Electric & Engineering का कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कारोबार करीब 1,600 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर खरीदा।

Lloyd के साथ Havells को एयर कंडीशनर, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और टेलीविजन जैसे बड़े कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट में सीधी एंट्री मिली। यह अधिग्रहण भी कंपनी की रणनीति का हिस्सा था। Havells पारंपरिक इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स से आगे बढ़कर घर के बड़े अप्लायंसेज तक पहुंचना चाहती थी।

₹10,000 से ₹80,000 करोड़ तक

कीमत राय गुप्ता का निधन नवंबर 2014 में 77 साल की उम्र में हुआ। तब तक उनका छोटा सा कारोबार एक बड़ी लिस्टेड कंपनी बन चुका था। आज Havells का कारोबार केबल और वायर, स्विचगियर, पंखे, लाइटिंग, एयर कंडीशनर, वॉटर हीटर और घरेलू उपकरणों तक फैला है। कंपनी के पोर्टफोलियो में Havells, Lloyd, Crabtree और Standard जैसे ब्रांड हैं।

11 अगस्त 2026 को Havells का शेयर करीब 1,278 रुपये पर बंद हुआ। और कंपनी का मार्केट कैप करीब 80,123 करोड़ रुपये था। यानी जिस कारोबार की शुरुआत एक युवा ने दिल्ली के थोक बाजार में 10,000 रुपये से की थी, वह करीब 68 साल बाद 80,000 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुका है।

इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात सिर्फ रकम नहीं है। असली कहानी उन फैसलों की है जो सही समय पर लिए गए। पहले ट्रेडिंग छोड़ी और मैन्युफैक्चरिंग में आए। फिर अपना ब्रांड बनाया। जरूरत पड़ी तो दूसरी कंपनियां खरीदीं। विदेशी दांव फंसा तो उससे बाहर निकल गए। और फिर भारतीय कंज्यूमर मार्केट पर फोकस कर दिया।

यही वजह है कि Havells की कहानी सिर्फ एक इलेक्ट्रिकल कंपनी के बनने की कहानी नहीं है। यह समय के साथ बिजनेस मॉडल बदलने की कहानी भी है।

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