Defence Stocks: रिलायंस, टाटा से अदाणी तक… विदेशी दिग्गजों के साथ मिलकर हथियार बनाएंगी ये 5 भारतीय कंपनियां

Defence Stocks: दुनिया में तनाव बढ़ रहा है। युद्ध और टकराव की वजह से सप्लाई चेन पर भी असर पड़ रहा है। ऐसे में भारत अब अपने डिफेंस प्रोडक्शन को तेजी से बढ़ा रहा है। सरकार की Make in India नीति के तहत विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी पर जोर है। मकसद साफ है। एडवांस टेक्नोलॉजी और हथियारों का उत्पादन भारत में हो।

रक्षा खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर

SIPRI के मुताबिक, 2025 में भारत का रक्षा खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया। भारत अब दुनिया का पांचवां सबसे ज्यादा रक्षा खर्च करने वाला देश है। वहीं, 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया। इसमें निजी कंपनियों की हिस्सेदारी 24% रही।

हाल ही में Tata Advanced Systems ने Javelin Joint Venture के साथ MoU किया है। इसके तहत भारत में Javelin एंटी-टैंक मिसाइलों का उत्पादन करने की संभावना तलाशी जाएगी।

2026 में ऐसी कई बड़ी साझेदारियां हुई हैं। आइए 5 अहम डिफेंस पार्टनरशिप पर नजर डालते हैं।

भारतीय कंपनीग्लोबल पार्टनरकिस टेक्नोलॉजी पर काम
2026 में क्या हुआ?

Reliance Industries

Rolls-Royceफाइटर जेट इंजन
साझेदारी के लिए Statement of Intent

Tata Advanced Systems

Lockheed Martin / RaytheonJavelin एंटी-टैंक मिसाइलMoU साइन
Bharat Electronics

Safran ElectronicsHAMMER स्मार्ट हथियार
50:50 JV समझौता

Adani DefenceLeonardoमिलिट्री हेलीकॉप्टर
इंडस्ट्रियल फ्रेमवर्क एग्रीमेंट

Paras DefenceTandem DefenseGuardian-1 काउंटर-ड्रोन सिस्टम
एक्सक्लूसिव IP लाइसेंस

Reliance Industries और Rolls-Royce: फाइटर जेट इंजन

रिलायंस इंडस्ट्रीज और Rolls-Royce ने अगस्त में एक बड़ी साझेदारी का इरादा जताया था। दोनों कंपनियां भारत के AMCA फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए कॉम्बैट इंजन बनाने की संभावनाएं तलाशेंगी।

योजना सिर्फ इंजन बनाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां भारत में Aerospace Gas Turbine Complex बनाने की संभावना भी देख रही हैं।

यहां पावर और प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी पर काम हो सकता है। अगर यह साझेदारी आगे बढ़ती है, तो भारत को एयरो-इंजन टेक्नोलॉजी में मदद मिल सकती है।

Tata Advanced Systems और Javelin: एंटी-टैंक मिसाइल

Tata Advanced Systems ने Javelin Joint Venture के साथ MoU साइन किया है। इस जॉइंट वेंचर में Raytheon और Lockheed Martin शामिल हैं। दोनों कंपनियां भारत में Javelin All Up Round यानी AUR का को-प्रोडक्शन करने की संभावना तलाशेंगी।

भारत में मिसाइल की फाइनल असेंबली और इंटीग्रेशन की सुविधा बनाई जा सकती है। कुछ पार्ट्स का उत्पादन भी देश में हो सकता है। भारत ने अमेरिका से Javelin एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम खरीदने पर भी सहमति जताई है।

BEL और Safran: HAMMER स्मार्ट हथियार

Bharat Electronics यानी BEL और Safran Electronics & Defense ने फरवरी में Joint Venture Agreement साइन किया था।

दोनों कंपनियां भारत में HAMMER प्रिसिजन-गाइडेड हथियार बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। इसका इस्तेमाल हवा से जमीन पर हमला करने के लिए किया जाता है। दोनों की 50:50 हिस्सेदारी वाली जॉइंट वेंचर कंपनी बनाने की योजना है।

HAMMER का उत्पादन भारत में लाने के लिए मास्टर प्रोडक्शन एग्रीमेंट किया जाएगा। मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, मेंटेनेंस और रिपेयर के लिए एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनाया जा सकता है।

Adani Defence और Leonardo: हेलीकॉप्टर

Adani Defence & Aerospace ने इटली की कंपनी Leonardo के साथ फरवरी में MoU साइन किया था। दोनों कंपनियां भारत में हेलीकॉप्टर बनाने का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना चाहती हैं। शुरुआत में फोकस मिलिट्री हेलीकॉप्टरों पर रहेगा।

आगे चलकर इसका इस्तेमाल सिविल मार्केट के लिए भी हो सकता है। भारत को Leonardo की ग्लोबल सप्लाई चेन से जोड़ने की भी योजना है।

Paras Defence और Tandem Defense: काउंटर-ड्रोन सिस्टम

पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज ने Tandem Defense के साथ एक एक्सक्लूसिव IP लाइसेंस एग्रीमेंट किया है। ये अमेरिकी कंपनी Autonomous Power Corporation की सब्सिडियरी है। इस समझौते से Paras Defence को Guardian-1 Interceptor टेक्नोलॉजी के भारत में प्रोडक्शन और कमर्शियल इस्तेमाल का विशेष अधिकार मिलेगा।

Guardian-1 एक हाई-स्पीड काउंटर-ड्रोन सिस्टम है। यह बैटरी से चलता है। इसे छोटे और कम लागत वाले हवाई खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है।

ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से काउंटर-ड्रोन सिस्टम की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, Guardian-1 को अभी भारतीय सेना ने शामिल करने के लिए नहीं चुना है।

एथर एनर्जी ने टेस्ला और BYD को पीछे छोड़ा, इस साल शेयर 130% उछला; आगे और तेजी की उम्मीद

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Defense export : डिफेंस सेक्टर को बड़ी राहत, आसान हुए डिफेंस ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस के नियम

Defense export : रक्षा मंत्रालय का एक्सपोर्ट के नियमों को आसान करने का फैसला लिया है। डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए SOP ( स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) आसान किया गया है। डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस नियम भी आसान किए गए हैं। अब तीन अलग-अलग ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की जगह एक OGEL होगा। ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस की अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल की गई है। OGEL का दायरा 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक किया गया है।

इससे बार-बार एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन की जरूरत घटेगी। इंटरनेशनल टेंडर में एक्सपोर्ट प्रक्रिया आसान होगी। लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट वाली कंपनियों को राहत मिलेगी। बता दें किडिफेंस प्रोडक्शन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड पर है। डिफेंस एक्सपोर्ट ₹38,424 करोड़ के रिकॉर्ड पर है। रक्षा मंत्रालय को भरोसा है कि इस कदम से डिफेंस प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट दोनों बढ़ेंगे।

सरकार ने भारतीय डिफेंस कंपनियों के लिए अपने उत्पाद विदेशों में बेचना आसान बनाने के लिए ये कदम उठाए गए हैं। इसके तहत निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है और’ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस'(OGEL) फ्रेमवर्क का दायरा बढ़ाया गया है।

संशोधित डिफेंस एक्सपोर्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत,ज्यादातर मामलों में गैर-घातक डिफेंस प्रोडक्ट के निर्यात के लिए अब संबंधित पक्षों से सलाह-मशविरा करने की जरूरत नहीं होगी,जबकि संवेदनशील देशों के लिए सुरक्षा उपाय लागू रहेंगे। इंटरनेशनल टेंडर और एग्ज़िबिशन के लिए सभी तरह के सामान के एक्सपोर्ट पर कंसल्टेशन की जरूरत भी खत्म कर दी गई है। उम्मीद है कि इस कदम से भारतीय कंपनियों को विदेशों में मिलने वाले मौकों पर तेजी से काम करने और बिना किसी अतिरिक्त कानूनी बाधा के अपने प्रोडक्ट को प्रदर्शित करने में मदद मिलेगी।

OGEL फ्रेमवर्क में और भी बड़े बदलाव किए गए हैं। OGEL एक स्थायी,एक बार मिलने वाला एक्सपोर्ट ऑथराइज़ेशन होगा। यह एक्सपोर्टर्स को हर शिपमेंट के लिए अलग-अलग मंजूरी लेने के बजाय,खास डिफेंस आइटम के कई कंसाइनमेंट के लिए खुद मंजूरी जेनरेट करने की सुविधा देगा। सरकार ने बड़े प्लेटफॉर्म और इक्विपमेंट,पार्ट्स और कंपोनेंट्स और कंपनी के अंदर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से जुड़े तीन मौजूदा OGEL SOPs को मिलाकर एक ही फ्रेमवर्क बना दिया है।

खास बात यह है कि OGELकी वैलिडिटी दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। इससे रिन्यूअल और उससे जुड़े कंप्लायंस की बार-बार जरूरत कम हो गई है। इसके दायरे को भी 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक कर दिया गया है। इसमें सिर्फ वे देश शामिल नहीं है जो नेगेटिव या सेंसिटिव लिस्ट में हैं और जिन पर UN सिक्योरिटी काउंसिल ने प्रतिबंध या हथियारों की रोक लगा रखी है।

 

Trading Plan : बाजार में आज बेहद छोटी सी रेंज में कारोबार, जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

हिंदुस्तान कॉपर के शेयर में OFS के बाद फिर आ सकती है तेजी, आनंद राठी ने ₹715 का टारगेट दिया

सरकारी कंपनी Hindustan Copper के शेयर में मंगलवार को काफी दबाव देखने को मिला है। इसकी बड़ी वजह सरकार की हिस्सेदारी बिक्री यानी OFS है। इसके बावजूद घरेलू ब्रोकरेज फर्म Anand Rathi ने शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹715 का टारगेट प्राइस दिया है। यह मंगलवार के बंद भाव से 34.65% अधिक है। OFS की वजह से स्टॉक 7.45% गिरकर 531.40 रुपये पर बंद हुआ।

Anand Rathi Institutional Equities के वाइस प्रेसिडेंट पार्थिव झोंसा का मानना है कि कंपनी के फंडामेंटल मजबूत हैं। बढ़ता प्रोडक्शन, कॉपर की ऊंची कीमत और कमाई में सुधार की उम्मीद शेयर को सपोर्ट कर सकती है।

OFS के बाद दबाव कम हो सकता है

झोंसा के मुताबिक, OFS के बाद कुछ समय तक शेयर में दबाव रह सकता है। लेकिन अगले कुछ महीनों में ₹490-500 के स्तर से रिकवरी देखने को मिल सकती है।

उनका कहना है कि सरकार की हिस्सेदारी बिक्री से कंपनी के फंडामेंटल नहीं बदले हैं। कारोबार की बुनियाद अब भी मजबूत है। इसलिए OFS को कंपनी की कमाई या ऑपरेशन में बदलाव के तौर पर नहीं देखना चाहिए।

कॉपर प्रोडक्शन-प्राइस बनेगा बड़ा ट्रिगर

Anand Rathi के मुताबिक, आगे शेयर के लिए सबसे बड़ा ट्रिगर प्रोडक्शन वॉल्यूम होगा। Hindustan Copper की कमाई पर कॉपर की कीमत का सीधा असर पड़ता है। कॉपर की कीमत मजबूत रहने से कंपनी की कमाई को सपोर्ट मिल सकता है।

इसके अलावा रुपये में कमजोरी भी कंपनी के लिए फायदेमंद हो सकती है। यही वजह है कि ब्रोकरेज को आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई में अच्छी बढ़त की उम्मीद है।

वैल्यूएशन पर क्या कहना है?

Hindustan Copper अभी दो साल के फॉरवर्ड EV/EBITDA के आधार पर करीब 16-18 गुना पर ट्रेड कर रहा है। यह वैल्यूएशन पहली नजर में ज्यादा लग सकती है।

लेकिन Anand Rathi का कहना है कि दुनियाभर की कॉपर माइनिंग कंपनियां भी कॉपर के मजबूत लॉन्ग टर्म आउटलुक की वजह से ऊंची वैल्यूएशन पर कारोबार कर रही हैं।

सरकार की हिस्सेदारी बड़ी चिंता नहीं

झोंसा को सरकार की बची हुई हिस्सेदारी से ज्यादा परेशानी नहीं दिखती। पूरे OFS के बाद भी सरकार के पास Hindustan Copper की 60% से ज्यादा हिस्सेदारी रहेगी।

वहीं पब्लिक फ्लोट बढ़ने से शेयर में लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है। ज्यादा निवेशकों के लिए शेयर में ट्रेडिंग और निवेश करना आसान होगा।

DRDO Missile: सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी, इन 7 डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नजर

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पावर सेक्टर में 2030 के बाद SCADA इंपोर्ट बंद होगा, देश में बनाने की तैयारी; इन स्टॉक्स पर रखें नजर

सरकार ने पावर सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले SCADA सिस्टम का आयात 2030 के बाद बंद करने का फैसला किया है। लक्ष्य 2028-29 तक इसका स्वदेशी विकल्प तैयार करना है। अभी इन सिस्टम में लोकल कंटेंट 20% से भी कम है। सरकार इसे बढ़ाना चाहती है।

आप SCADA को पावर ग्रिड का कंट्रोल सिस्टम समझ सकते हैं। इससे पावर प्लांट, सब-स्टेशन और ग्रिड की रियल टाइम निगरानी होती है। जरूरत पड़ने पर कई इक्विपमेंट को दूर से कंट्रोल भी किया जा सकता है।

स्वदेशीकरण क्यों जरूरी हुआ?

यह पूरा मामला सिर्फ मेक इन इंडिया तक सीमित नहीं है। इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी भी बड़ी वजह है। अभी SCADA के कई अहम सॉफ्टवेयर और कंपोनेंट विदेशों से आते हैं। ऐसे में अपडेट, तकनीकी मदद और साइबर सिक्योरिटी सपोर्ट के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता रहती है।

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान यह चिंता और बढ़ी। पावर मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मई 2025 में 8-10 दिनों के दौरान भारत के पावर सिस्टम पर करीब 2 लाख साइबर अटैक की कोशिशें हुई थीं। ऐसे में सरकार चाहती है कि देश के पावर ग्रिड को चलाने वाली अहम टेक्नोलॉजी पर भारत का अपना नियंत्रण हो।

2028-29 तक तैयार होगा स्वदेशी सिस्टम

CEA ने SCADA के स्वदेशीकरण के लिए रोडमैप तैयार किया है। इसमें 38 सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 25 हार्डवेयर कंपोनेंट शामिल हैं।

सरकार National SCADA Mission या एक स्पेशल वर्किंग ग्रुप बनाने पर भी विचार कर रही है। इसमें Power Grid, GRID-India और घरेलू टेक्नोलॉजी कंपनियों को साथ लाया जा सकता है।

किन स्टॉक्स पर नजर रखें?

शेयर बाजार में इस थीम का सबसे सीधा नाम Power Grid है। प्रस्तावित मॉडल में कंपनी का नाम सीधे आया है। उसके पास ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA का अनुभव भी है।

इसके अलावा Siemens, Hitachi Energy India, GE Vernova T&D और ABB India जैसी कंपनियां भी ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA के कारोबार में हैं। स्वदेशी सिस्टम के विकास और पुराने सिस्टम के अपग्रेड से इन्हें अवसर मिल सकते हैं। TCS जैसी IT कंपनियों के लिए भी सॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और सिस्टम इंटीग्रेशन का मौका बन सकता है।

कंपनीसंभावित फायदा
Power Grid
SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और इंटीग्रेशन

Siemens
SCADA और एनर्जी मैनेजमेंट

Hitachi Energy India
ग्रिड ऑटोमेशन और SCADA

GE Vernova T&D Indiaट्रांसमिशन और ग्रिड ऑटोमेशन
ABB Indiaपावर ऑटोमेशन और डिजिटल ग्रिड
TCSसॉफ्टवेयर, साइबर सिक्योरिटी और इंटीग्रेशन

निवेशकों के लिए क्या अहम?

अभी इसे सीधे खरीदने का संकेत मानना ठीक नहीं है। असली फायदा तब साफ होगा जब सरकार कंपनियों का चयन करेगी और SCADA के अलग-अलग हिस्सों के लिए ऑर्डर जारी होंगे। फिलहाल Power Grid समेत SCADA, ग्रिड ऑटोमेशन और साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी कंपनियों पर नजर रखी जा सकती है।

सीधी बात है। सरकार अब पावर ग्रिड की अहम टेक्नोलॉजी पर विदेशी निर्भरता घटाना चाहती है। Operation Sindoor के दौरान सामने आए साइबर खतरे ने इस जरूरत को और गंभीर बना दिया। इससे आने वाले वर्षों में पावर और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए बड़ा घरेलू बाजार बन सकता है।

DRDO Missile: सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी, इन 7 डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

DRDO Missile: सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी, इन 7 डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नजर

DRDO Missile: भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए 25 अगस्त का दिन अहम रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की डेवलप सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम्स की टेक्नोलॉजी भारतीय कंपनियों को ट्रांसफर करने को मंजूरी दे दी। इससे देश में मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ाने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाने का रास्ता खुलेगा।

इसका फायदा सिर्फ मिसाइल बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉन्चर, गाइडेंस सिस्टम और दूसरे उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी नए ऑर्डर मिल सकते हैं। हालांकि, हर कंपनी को टेक्नोलॉजी या ऑर्डर मिलेगा, यह अभी तय नहीं है। कंपनियों को योग्यता और दूसरी जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी।

Bharat Dynamics

इस खबर से सबसे सीधा जुड़ा नाम सरकारी डिफेंस कंपनी भारत डायनेमिक्स यानी BDL है। कंपनी पहले से DRDO की कई मिसाइलों का उत्पादन करती है। आकाश, नाग, अस्त्र और MRSAM जैसी मिसाइल प्रणालियों से इसका कारोबार जुड़ा है।

देश में मिसाइल उत्पादन बढ़ता है तो BDL को नए ऑर्डर मिलने का फायदा हो सकता है। कंपनी के पास पहले से जरूरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और अनुभव भी है। हालांकि, निजी कंपनियों की एंट्री से आगे प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

Bharat Electronics

सरकारी कंपनी BEL सिर्फ मिसाइल नहीं बनाती। मिसाइल सिस्टम में रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंट्रोल सिस्टम भी जरूरी होते हैं। इस हिस्से में BEL की मजबूत मौजूदगी है।

आकाश और MRSAM जैसे सिस्टम में कंपनी की अहम भूमिका है। इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने के साथ रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मांग बढ़ी तो BEL को भी फायदा मिल सकता है।

L&T

प्राइवेट सेक्टर में L&T बड़ा नाम है। कंपनी मिसाइल सिस्टम, लॉन्चर, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े काम करती है। आकाश मिसाइल के लिए भी कंपनी कई अहम हिस्सों का उत्पादन कर चुकी है।

सरकार अगर प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाती है तो L&T मजबूत दावेदार हो सकती है। कंपनी के पास बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट संभालने का अनुभव और क्षमता दोनों हैं।

Bharat Forge

भारत फोर्ज का डिफेंस कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। Kalyani Strategic Systems के जरिए कंपनी हथियार, गोला-बारूद, एयर डिफेंस और दूसरे डिफेंस सिस्टम पर काम करती है।

मिसाइल और एयर डिफेंस का उत्पादन बढ़ा तो कंपनी को नए मौके मिल सकते हैं। इसे सीधे मिसाइल कंपनी की बजाय बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्ले के तौर पर देखना बेहतर होगा।

Solar Industries

प्राइवेट सेक्टर की Solar Industries डिफेंस में प्रोपेलेंट, विस्फोटक और दूसरे हाई-एनर्जी मटेरियल बनाती है। कंपनी ब्रह्मोस मिसाइल के लिए प्रोपेलेंट से जुड़े काम में भी रही है।

मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ेगा तो उनके लिए जरूरी सामग्री की मांग भी बढ़ सकती है। इसलिए Solar को मिसाइल सप्लाई चेन के एक अहम खिलाड़ी के तौर पर देखा जा सकता है।

Data Patterns

डेटा पैटर्न्स डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स पर काम करती है। कंपनी रडार, गाइडेंस सिस्टम, टेस्टिंग सिस्टम और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाती है।

मिसाइलों में लगे सीकर और गाइडेंस सिस्टम काफी अहम होते हैं। इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने पर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मांग बढ़ सकती है।

Astra Microwave

Astra Microwave रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम बनाती है। मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम में इनकी अहम भूमिका होती है।

इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने का फायदा सीधे न सही, लेकिन डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग के जरिए कंपनी को मिल सकता है।

एक नजर में

कंपनीमुख्य फायदा
भारत डायनेमिक्समिसाइल उत्पादन
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स
रडार और इलेक्ट्रॉनिक्स

L&T
मिसाइल और एयर डिफेंस

भारत फोर्जडिफेंस मैन्युफैक्चरिंग
Solar Industriesप्रोपेलेंट और विस्फोटक
Data Patternsमिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स
Astra Microwaveरडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी

निवेशकों के लिए जरूरी बात

अभी इसे सीधे शेयर खरीदने का संकेत नहीं मानना चाहिए। सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी है। आगे कंपनियों का चयन होगा। फिर प्रोडक्शन और ऑर्डर की तस्वीर साफ होगी।

फिलहाल BDL, BEL, L&T, भारत फोर्ज, Solar Industries, Data Patterns और Astra Microwave पर नजर रखी जा सकती है। असली फायदा किसे मिलेगा, यह आने वाले ऑर्डर और उनके असर से कंपनी की कमाई पर पता चलेगा।

Market Mantra : कंप्लीट सर्किल के गुरमीत चड्ढा से जाने, किन सेक्टर्स और शेयरों पर फोकस करना बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अपोलो माइक्रो सिस्टम्स ने नई डिफेंस कंपनी में 34% हिस्सेदारी खरीदी, वैज्ञानिक वीके सारस्वत करेंगे अगुवाई

Apollo Micro Systems: डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर की कंपनी Apollo Micro Systems ने नई रक्षा तकनीक कंपनी ShauryAstra Defence Systems में 34% हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी ने इसके लिए ₹34,000 का निवेश किया है। ShauryAstra का फोकस ऐसी रक्षा तकनीकों पर रहेगा, जिनकी जरूरत भारतीय सेना को है, लेकिन अभी उनके स्वदेशी समाधान उपलब्ध नहीं हैं।

ShauryAstra में 34% हिस्सेदारी

Apollo Micro Systems ने ShauryAstra के 3,400 इक्विटी शेयर खरीदे हैं। इनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है। इस निवेश के बाद ShauryAstra में Apollo Micro Systems की हिस्सेदारी 34% हो गई है।

ShauryAstra को 21 अगस्त 2026 को शामिल किया गया था। अब यह Apollo Micro Systems की एसोसिएट कंपनी बन गई है।

डॉ. वी.के. सारस्वत का मिलेगा अनुभव

नई कंपनी का वैज्ञानिक नेतृत्व डॉ. वी.के. सारस्वत करेंगे। वह DRDO के पूर्व महानिदेशक और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के पूर्व सचिव रह चुके हैं। वह रक्षा मंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे हैं।

डॉ. सारस्वत भारत के कई बड़े रक्षा कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं। इनमें पृथ्वी, धनुष, प्रहार और अग्नि-5 मिसाइल कार्यक्रम शामिल हैं। वह भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम, तेजस और INS अरिहंत से भी जुड़े रहे हैं।

फोकस होगा अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीक पर

ShauryAstra संपूर्ण हथियार प्रणालियों, लंबी दूरी की प्रणालियों और मानव रहित प्लेटफॉर्म्स पर काम करेगी। कंपनी का फोकस एडवांस्ड डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने पर रहेगा।

खास बात यह है कि कंपनी सिर्फ मौजूदा जरूरतों पर काम नहीं करेगी। वह भविष्य के युद्धक्षेत्र में आने वाली तकनीकी जरूरतों और संभावित कमियों की भी पहचान करेगी।

Apollo की मौजूदा क्षमता का मिलेगा फायदा

Apollo Micro Systems पिछले चार दशक से डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में है। कंपनी मिशन-क्रिटिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स, रग्ड कंप्यूटिंग, फ्यूज, एक्ट्यूएटर्स और वेपन इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करती है।

ShauryAstra रिसर्च और सिस्टम डिजाइन पर ज्यादा फोकस करेगी। वहीं Apollo Group की इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता का इस्तेमाल उत्पादन के लिए किया जा सकेगा।

कंपनी का लक्ष्य क्या है?

Apollo Micro Systems अब सिर्फ कंपोनेंट और सबसिस्टम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी संपूर्ण स्वदेशी हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म्स के विकास में बड़ी भूमिका बनाना चाहती है।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बी. करुणाकर रेड्डी के मुताबिक ShauryAstra इसी दिशा में अगला कदम है। यह पहल भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के मुताबिक भी है।

Apollo Micro Systems के शेयर NSE पर 0.14% गिरकर ₹384 प्रति शेयर पर बंद हुए।

Hyundai Motor India पर नोमुरा बुलिश, दोहराई ‘बाय’ रेटिंग; कहा- नई लॉन्चिंग्स से वॉल्यूम को मिलेगा बूस्ट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Top Stock Picks : केमिकल और सीडीएमओ स्पेस में काफी अच्छे निवेश के मौके, ये तीन ऑटो शेयर करेंगे कमाल

Top Stock Picks : शुक्रवार को दोपहर के कारोबार में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट देखने के मिल रही है। सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा गिरा है और निफ्टी 24,550 के आस-पास बना हुआ। फिलहाल सेंसेक्स 505.76 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 78,449 पर और निफ्टी 100.05 अंक या 0.41 प्रतिशत गिरकर 24,535.95 पर आ गया है। । सेक्टर के हिसाब से प्राइवेट बैंकों में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.90 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। जबकि बैंक निफ्टी में 0.62 प्रतिशत की गिरावट आई है। बाजार की कमजोरी के बावजूद IT और ऑटो शेयरों में तेजी बनी हुई है। वहीं, वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX 2.63 फीसदी बढ़ा है।

ऐसे में टेक्नो फंडा नजरिए के साथ बाजार पर बात करते हुए जेएम फाइनेंशियल्स के PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा की बाजार में क्रूड की वोलेटिलिटी और जियोपॉलिटिकल अनसर्टेनिटी का असर देखने को मिल रहा है। लेकिन उसके बावजूद भी हमारे बाजार ने एक बहुत ही बढ़िया मजबूती दिखाई है। ब्रॉड बेस मार्केट में अप्रैल महीने से अभी तक जिस तरह की रिकवरी देखने को मिली है वह इस बात का क्लियर रिफ्लेक्शन है कि अब कहीं ना कहीं बाजार इस अनसर्टेनिटी को पचाने की क्षमता दिखाना शुरू कर चुका है।

ये सिर्फ सेंटीमेंटल रिकवरी नहीं है। सभी सेक्टरों के पहली तिमाही के नतीजे अच्छे रहे हैं। कई तिमाहियों के बाद हमें इस तरह के उत्साहजनक आंकड़ें देखने को नजर आ रहे हैं। खासतौर पर स्माल कैप ने सबसे ज्यादा सरप्राइज किया है। यहां पर हमें 28% तक की टॉप लाइन एबिट और पैट ग्रोथ देखने को नजर आई है। अभी तक जो रिजल्ट्स उनको देखते हुए बाजार का ट्रेंड साफतौर पर काफी स्ट्रांग है।

ऐसे में अगर हम थीम स्पेसिफिक बात करें तो पूरा ईएमएस स्पेस ही काफी अच्छा लग रहा है। इस सेक्टर के लिए सेमीकॉन 2.0 और सरकारी प्रोत्साहन काफी पॉजिटव फैक्टर है। ऐसे में हमें आगे सिरमा और एवलॉन जैसी कंपनियों में इसका काफी पॉजिटिव असर देखने को मिल सकता है। केन्स (Kynes Tech) जैसा शेयर भी बड़े करेक्शन के बाद तेजी के लिए तैयार दिख रहा है।

इसके अलावा स्पेशलिटी केमिकल और सीडीएमओ स्पेस में भी काफी अच्छे निवेश के मौके दिख रहे हैं। नवीन फ्लोरिन, न्यूलैंड लैब्स और डीवीज लैब जैसी कंपनियों ने जिस तरह के स्ट्रांग टॉप लाइन ग्रोथ और प्रॉफिट ग्रोथ दिखाए हैं, उनको देखकर लगता है कि मार्केट इनको लगातार रिवॉर्ड करता हुआ नजर आएगा।

आशीष चतुरमोहता को इनके अलवा डिफेंस में भी अच्छे मौके दिख रहे हैं। डिफेंस के दिग्गज प्लेयर्स अब तक थोड़े साइडवेज थे। अब ये भी तेजी पकड़ते दिख रहे हैं। डिफेंस कंपनियों की एग्जीक्यूशन कैपेबिलिटी इंप्रूव होती हुई नजर आ सकती है और जिसका बेनिफिट एचएल जैसे स्टॉक में भी देखने को नजर आ सकता है।

टू व्हीलर स्पेस पर अपनी राय रखते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि पहली तिमाही में अक्रॉस द बोर्ड पैसेंजर व्हीकल,कमर्शियल व्हीकल,टू व्हीलर,इलेक्ट्रिक व्हीकल इन सबके नंबर्स बहुत ही ज्यादा अच्छे आए। इनमें डबल डिजिट और किसी-किसी सेगमेंट में तो 20% की भी ग्रोथ देखने को मिली है। अब तो फेस्टिव सीजन भी आने वाला है। ऐसे में नंबर्स यहां से और बढ़ते हुए नजर आ सकते हैं। इसका बहुत अच्छा फायदा M&M, TVS मोटर्स और एथर एनर्जी को हो सकता है। वैसे तो पूरी थीम ही काफी अच्छी लग रही। लेकिन ये तीन शेयर खास हैं, क्योंकि इन्होंने लगातार मार्केट शेयर गेन किया है और नई कैटेगरी क्रिएट करके वहां पर मार्केट लीडर बने हैं।

एसयूवी ईवी सेगमेंट में पैसेंजर व्हीकल की बात करें तो महिंद्रा एंड महिंद्रा लगातार लीड बनाए हुए है। टू व्हीलर की बात करें तो TVS मोटर्स टू व्हीलर में तो अच्छा कर ही रहा है, ईवी सेगमेंट के अंदर भी इसका लगभग 25% का मार्केट शेयर हो गया है। इसी तरह एथर एनर्जी जो कि एक नया खलाड़ी था, पहली बार प्रॉफिटेबल हुआ है। कंपनी का कहना है अब उसकी प्रॉब्लम डिमांड नहीं है। डिमांड तो काफी ज्यादा आ रही। मेन प्रॉब्लम सप्लाई साइड से है। इसका मतलब उनको कैपेसिटी और बढ़ानी पड़ेगी। ऐसे में हमें लगता है यह कंपनी भी बहुत स्ट्रांग टर्न अराउंड फेस में एंटर हो रही है। ऐसे में इस समय ऑटो स्पेस और ऑटो एंसिलरी का स्पेस काफी प्रॉमिसिंग दिख रहा है।

 

Market View : ऑटो और ऑटो एंसिलियरी का फ्यूचर अच्छा, आईटी सेक्टर को लेकर रहें सतर्क-हेमंत कानावाला

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

मुनाफा डबल और ₹14.40 का डिविडेंड, दोहरे सपोर्ट पर 14% चढ़ा शिपिंग शेयर

GE Shipping Share Price: शिपिंग और ऑयलफील्ड सर्विसेज प्रोवाइडर ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी (जीई शिपिंग कंपनी) के शेयरों में आज खरीदारी का जोरदार रुझान दिखा। जून तिमाही में मुनाफे में ढाई गुना से अधिक उछाल और शानदार डिविडेंड के ऐलान ने इसके शेयरों को ऐसा सपोर्ट किया कि यह 14% से अधिक उछल पड़ा। ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली के चलते भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन निचले स्तर पर खरीदारी के चलते भाव अब भी मजबूत बने हुए हैं। फिलहाल BSE पर यह 3.27% की बढ़त के साथ ₹1,441.90 पर है। इंट्रा-डे में यह 14.57% चढ़कर ₹1,599.75 तक पहुंच गया था।

Great Eastern Shipping Company की कैसी रही जून तिमाही

चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी का शुद्ध मुनाफा कंसालिडेटेड लेवल पर 159.43% उछलकर ₹1308.84 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 66.91% चढ़कर ₹2005.36 हो गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी की सेहत तेजी से मजबूत हुई। सालाना आधार पर जून तिमाही में इसका ईबीआईटीडीए ₹642.8 करोड़ से ₹1,337.7 करोड़ पर पहुंच गया तो ईबीआईटीडीए मार्जिन 53.5% से बढ़कर 66.7% पर पहुंच गया। सेगमेंटवाइज बात करें तो कंपनी का शिपिंग रेवेन्यू सालाना आधार पर 90.20% बढ़कर ₹1890.97 करोड़ और ऑफशोर सर्विसेज से रेवेन्यू 18.87% बढ़कर ₹406.02 करोड़ पर पहुंच गया।

नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने डिविडेंड का भी ऐलान किया है। ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी हर शेयर पर ₹14.40 का अंतरिम डिविडेंड बांटने वाली है, जिसका रिकॉर्ड डेट 7 अगस्त फिक्स किया गया है जिसे 27 अगस्त या इसके बाद शेयरहोल्डर्स के खाते में क्रेडिट किया जाएगा।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी के शेयरों ने निवेशकों की कम समय में ही ताबड़तोड़ कमाई कराई है। पिछले साल 6 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह ₹914.65 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचले स्तर है। इस निचले स्तर से यह 9 महीने में यह 96.58% उछलकर 19 मई 2026 को ₹1,798.00 पर पहुंच गया जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

देश में सुस्त पड़ी गोल्ड की डिमांड लेकिन, खर्च पहुंचा ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड हाई पर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market view :ऑप्शन राइटर्स 3:00-3:10 बजे से पहले पोजिशन कवर करने पर फोकस करें, आज इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

Market view : पिछले कई दिनों की तेजी के बाद बाजार में अब थोड़ा ठहराव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निफ्टी और बैंक निफ्टी का आगे की चाल पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24736-24778/24809 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24858-24897/24934 पर है। इसके लिए पहला बेस 24489-24551 पर और बड़ा बेस 24419-24457 पर है। आज की पूरी कमेंट्री निफ्टी फ्यूचर्स के भाव पर आधारित है।

कल लॉन्ग पोजिशन कैरी करने की सलाह सही साबित हुई। FIIs की कैश में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इंडेक्स में शॉर्ट कवरिंग हुई। नेट शॉर्ट घटकर अब 1.50 लाख पर आ गया है। 24800 पहली बाधा है। 24950-25000 पर ऑप्शन बाधा है। 24600-24500 पर पुट राइटिंग का सपोर्ट है। बेस-1 तक किसी भी गिरावट में खरीदारी की रणनीति काम करेगी। 24736 पहली रुकावट है, इसके बाद 24778-24809 का जोन मुमकिन है। 24809 के ऊपर टिकने पर रजिस्टेंस-2 तक स्विंग की उम्मीद है। ऑप्शन राइटर्स 3:00-3:10 बजे से पहले पोजिशन कवर करने पर ध्यान दें।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 58097-58221 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 58389-58486/58571 पर है। इसके लिए पहला बेस 57523-57610 पर और बड़ा बेस 57210-57331 पर है। बैंक निफ्टी में तेजी बरकरार है। लेकिन 58000 बड़ा ऑप्शन बाधा है। RBI पॉलिसी से पहले बैंक निफ्टी की चाल अहम रहेगी। बेस-1 तक किसी भी गिरावट में खरीदारी की रणनीति काम करेगी। रेजिस्टेंस-1 पर मुनाफावसूली और सौदों पर नजर रखें। रेजिस्टेंस-1 के ऊपर टिकने पर रेजिस्टेंस-2 तक स्विंग की उम्मीद है।

Trading Plan : पिछले कुछ सेशन में आई एकतरफा तेजी के बाद अब थोड़ा करेक्शन मुमकिन, जानिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं मंत्री फिनमार्ट (Mantri FinMart) के अरुण कुमार मंत्री। इनकी आज नेशनल एल्युमीनियम में 365 रुपए के आसपास, 359 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ,377 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह है। HONASA में भी इनकी 458 रुपए के आसपास, 452 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ,475 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह है।

बाजार की सोमवार की चाल पर एक नजर

भारतीय इक्विटी मार्केट में 3 अगस्त को लगातार चौथे सेशन में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 24,700 के ऊपर बंद हुआ। मीडिया स्टॉक्स को छोड़कर,सभी सेक्टर्स में हुई खरीदारी की वजह से बाजार में तेजी आई

ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी बढ़कर 78,639.03 पर और निफ्टी 390.70 अंक या 1.60 फीसदी बढ़कर 24,774.30 पर सेटल हुआ था।

ब्रॉडर मार्केट में भी अच्छी खरीदारी आई। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.2% की बढ़त देखने को मिली।

निफ्टी 50 स्टॉक्स की बात करें तो इंटरग्लोब एविएशन,TCS,इंफोसिस,श्रीराम फाइनेंस और ग्रासिम इंडस्ट्रीज टॉप गेनर्स रहे,जबकि सन फार्मा,अपोलो हॉस्पिटल्स,मारुति सुजुकी,ONGC और टेक महिंद्रा टॉप लूजर्स रहे।

निफ्टी मीडिया को छोड़कर सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर बंद हुए। निफ्टी IT इंडेक्स में सबसे अधिक बढ़त रही। यह 3% से ज्यादा की बढ़त लेकर बंद हुआ था।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।