पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी ‘सैन्य एयरलिफ्ट’ से मची हलचल

पाकिस्तान को चीन और तुर्की के हथियारों की सप्लाई? 60 घंटे की रहस्यमयी 'सैन्य एयरलिफ्ट' से मची हलचल

South Asia strategic defense

South Asia strategic defense: 18 से 20 अगस्त के बीच पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में देखी गई अभूतपूर्व सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशियाई सामरिक संतुलन पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले स्रोतों (OSINT) और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के अनुसार, चीन (Xi'an Y-20) और तुर्की (Airbus A400M) के भारी सैन्य परिवहन विमानों ने करीब 60 घंटे तक पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेसों पर दर्जनों उड़ानें भरीं और उतरते देखे गए।

 

यह कोई साधारण उड़ानों का अभ्यास नहीं था। रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस (GHQ के पास) और कराची के मस्रूर एयरबेस पर इन विमानों की आपात लैंडिंग ने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों का ध्यान खींचा है। ALSO READ: क्या भारत को घेरने की तैयारी है? पाकिस्तान-तुर्की के ‘मक्का पैक्ट’ से बांग्लादेश का जुड़ना भारत के लिए कितना बड़ा खतरा?

पाकिस्तान की ज़मीन पर क्या उतार रहे हैं चीन और तुर्की?

सैन्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह भारी एयरलिफ्ट सिर्फ नियमित लॉजिस्टिक्स (Routine Logistics) का हिस्सा नहीं हो सकती। इस असामान्य हलचल के पीछे निम्नलिखित सैन्य आपूर्ति की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस उच्च-स्तरीय लॉजिस्टिक ऑपरेशन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण सैन्य सामग्रियों की डिलीवरी शामिल हो सकती है: 

  • सटीक मारक हथियार और उन्नत ड्रोन (UCAVs) : तुर्की के Bayraktar Akinci/TB2 और चीन के Wing Loong III ड्रोनों की नई खेप या उनके महत्वपूर्ण स्पेयर पार्ट्स। 
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) व राडार सिस्टम : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के लड़ाकू विमानों और ग्राउंड-बेस्ड राडार के लिए एडवांस्ड स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) व सिग्नल्स इंटेलिजेंस उपकरण।
  • एयर-डिफेंस और मिसाइल स्पेयर-पार्ट्स : चीन से प्राप्त HQ-16 और HQ-9P मिसाइल रक्षा प्रणालियों के कलपुर्जे या त्वरित रिप्लेसमेंट हार्डवेयर। 
  • 'KAAN' 5th Gen फाइटर जेट कंपोनेंट्स : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट 'KAAN' में पाकिस्तान की साझेदारी के तहत तकनीकी हस्तांतरण।
  • इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) और राडार उपकरण : पाकिस्तान वायु सेना (PAF) के स्टैंड-ऑफ जैमर्स (SOJ) और अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट (AEW&C) के लिए आधुनिक जैमिंग उपकरण। 
  • सटीक मारक हथियार और स्पेयर पार्ट्स : जेएफ-17 ब्लॉक 3 (JF-17 Block 3) और जे-10सीई (J-10CE) फाइटर जेट्स के स्पेयर पार्ट्स व गाइडेड म्यूनिशन्स। ALSO READ: पाकिस्तान ने धोखे से हड़पा था बलूचिस्तान, क्यों कभी पाक सेना के आगे नहीं झुके धुरंधर बलोच? जानिए बलोच संघर्ष की पूरी कहानी

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारतीय रक्षा एजेंसियों के लिए यह त्रिगुट (China-Pakistan-Türkiye Axis) कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसका समय और तीव्रता चिंता का विषय है:

  • त्वरित क्षमता निर्माण (Rapid Capability Replenishment) : किसी संभावित आपात स्थिति के लिए पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों को तेजी से मजबूत करना।
  • त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन : हाल ही में सामने आए तुर्की, पाकिस्तान और रणनीतिक सहयोगियों के बीच बढ़ते सैन्य समन्वय का यह एक व्यावहारिक प्रदर्शन हो सकता है। 
  • 'KAAN' फाइटर जेट प्रोजेक्ट : तुर्की के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में पाकिस्तान की भागीदारी के बाद तकनीकी ट्रांसफर और उपकरणों की आवाजाही। 

South Asia strategic defense

हाल ही में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब द्वारा हस्ताक्षरित 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' के तुरंत बाद इस तरह की भारी सैन्य एयरलिफ्ट का होना संकेत देता है कि क्षेत्र में एक नया सैन्य ब्लॉक आकार ले रहा है। 

 

चीन की तकनीकी व वित्तीय ताकत, तुर्की की आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी और पाकिस्तान का भारत विरोधी एजेंडा—यह त्रिकोण दक्षिण एशिया के सामरिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। भारत की खुफिया एजेंसियां इस 60 घंटे के रहस्यमयी एयरलिफ्ट ऑपरेशन्स के हर विवरण पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

DRDO Missile: सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी, इन 7 डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नजर

DRDO Missile: भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए 25 अगस्त का दिन अहम रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की डेवलप सभी पारंपरिक मिसाइल सिस्टम्स की टेक्नोलॉजी भारतीय कंपनियों को ट्रांसफर करने को मंजूरी दे दी। इससे देश में मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ाने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता घटाने का रास्ता खुलेगा।

इसका फायदा सिर्फ मिसाइल बनाने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉन्चर, गाइडेंस सिस्टम और दूसरे उपकरण बनाने वाली कंपनियों को भी नए ऑर्डर मिल सकते हैं। हालांकि, हर कंपनी को टेक्नोलॉजी या ऑर्डर मिलेगा, यह अभी तय नहीं है। कंपनियों को योग्यता और दूसरी जरूरी शर्तें पूरी करनी होंगी।

Bharat Dynamics

इस खबर से सबसे सीधा जुड़ा नाम सरकारी डिफेंस कंपनी भारत डायनेमिक्स यानी BDL है। कंपनी पहले से DRDO की कई मिसाइलों का उत्पादन करती है। आकाश, नाग, अस्त्र और MRSAM जैसी मिसाइल प्रणालियों से इसका कारोबार जुड़ा है।

देश में मिसाइल उत्पादन बढ़ता है तो BDL को नए ऑर्डर मिलने का फायदा हो सकता है। कंपनी के पास पहले से जरूरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और अनुभव भी है। हालांकि, निजी कंपनियों की एंट्री से आगे प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।

Bharat Electronics

सरकारी कंपनी BEL सिर्फ मिसाइल नहीं बनाती। मिसाइल सिस्टम में रडार, इलेक्ट्रॉनिक्स और कंट्रोल सिस्टम भी जरूरी होते हैं। इस हिस्से में BEL की मजबूत मौजूदगी है।

आकाश और MRSAM जैसे सिस्टम में कंपनी की अहम भूमिका है। इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने के साथ रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मांग बढ़ी तो BEL को भी फायदा मिल सकता है।

L&T

प्राइवेट सेक्टर में L&T बड़ा नाम है। कंपनी मिसाइल सिस्टम, लॉन्चर, रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े काम करती है। आकाश मिसाइल के लिए भी कंपनी कई अहम हिस्सों का उत्पादन कर चुकी है।

सरकार अगर प्राइवेट कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़ाती है तो L&T मजबूत दावेदार हो सकती है। कंपनी के पास बड़े डिफेंस प्रोजेक्ट संभालने का अनुभव और क्षमता दोनों हैं।

Bharat Forge

भारत फोर्ज का डिफेंस कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। Kalyani Strategic Systems के जरिए कंपनी हथियार, गोला-बारूद, एयर डिफेंस और दूसरे डिफेंस सिस्टम पर काम करती है।

मिसाइल और एयर डिफेंस का उत्पादन बढ़ा तो कंपनी को नए मौके मिल सकते हैं। इसे सीधे मिसाइल कंपनी की बजाय बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग प्ले के तौर पर देखना बेहतर होगा।

Solar Industries

प्राइवेट सेक्टर की Solar Industries डिफेंस में प्रोपेलेंट, विस्फोटक और दूसरे हाई-एनर्जी मटेरियल बनाती है। कंपनी ब्रह्मोस मिसाइल के लिए प्रोपेलेंट से जुड़े काम में भी रही है।

मिसाइलों का प्रोडक्शन बढ़ेगा तो उनके लिए जरूरी सामग्री की मांग भी बढ़ सकती है। इसलिए Solar को मिसाइल सप्लाई चेन के एक अहम खिलाड़ी के तौर पर देखा जा सकता है।

Data Patterns

डेटा पैटर्न्स डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स पर काम करती है। कंपनी रडार, गाइडेंस सिस्टम, टेस्टिंग सिस्टम और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाती है।

मिसाइलों में लगे सीकर और गाइडेंस सिस्टम काफी अहम होते हैं। इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने पर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मांग बढ़ सकती है।

Astra Microwave

Astra Microwave रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी सिस्टम बनाती है। मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम में इनकी अहम भूमिका होती है।

इसलिए मिसाइल उत्पादन बढ़ने का फायदा सीधे न सही, लेकिन डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग के जरिए कंपनी को मिल सकता है।

एक नजर में

कंपनीमुख्य फायदा
भारत डायनेमिक्समिसाइल उत्पादन
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स
रडार और इलेक्ट्रॉनिक्स

L&T
मिसाइल और एयर डिफेंस

भारत फोर्जडिफेंस मैन्युफैक्चरिंग
Solar Industriesप्रोपेलेंट और विस्फोटक
Data Patternsमिसाइल इलेक्ट्रॉनिक्स
Astra Microwaveरडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी

निवेशकों के लिए जरूरी बात

अभी इसे सीधे शेयर खरीदने का संकेत नहीं मानना चाहिए। सरकार ने टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को मंजूरी दी है। आगे कंपनियों का चयन होगा। फिर प्रोडक्शन और ऑर्डर की तस्वीर साफ होगी।

फिलहाल BDL, BEL, L&T, भारत फोर्ज, Solar Industries, Data Patterns और Astra Microwave पर नजर रखी जा सकती है। असली फायदा किसे मिलेगा, यह आने वाले ऑर्डर और उनके असर से कंपनी की कमाई पर पता चलेगा।

Market Mantra : कंप्लीट सर्किल के गुरमीत चड्ढा से जाने, किन सेक्टर्स और शेयरों पर फोकस करना बेहतर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

US Stocks में निवेश का सबसे सुनहरा मौका! पराग पारिख ने 90% घटाई एंट्री फीस, जानिए अब कितने में खरीद पाएंगे Apple-Google के शेयर!

US Stock Market: भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश करना अब काफी आसान और किफायती हो गया है। पराग पारिख की GIFT City स्थित इकाई ‘PPFAS GIFT’ ने अपने दो प्रमुख इंटरनेशनल फंड्स में न्यूनतम निवेश सीमा को $5000 से घटाकर सिर्फ $500 कर दिया है।

यानी अब एंट्री टिकट में सीधे 90% की कटौती कर दी गई है, जिससे आम निवेशक भी कम रकम के साथ S&P 500 और Nasdaq 100 जैसे दिग्गजों में पैसा लगा सकेंगे।

₹4.79 लाख नहीं, अब सिर्फ ₹48000 से करें शुरुआत

रुपए और डॉलर के मौजूदा एक्सचेंज रेट (लगभग ₹95.74 प्रति डॉलर) के हिसाब से इस कटौती का सीधा गणित ये है कि, पहले $5000 की न्यूनतम सीमा के कारण निवेशकों को कम से कम ₹4.79 लाख की भारी-भरकम राशि की जरूरत होती थी।अब $500 की नई सीमा लागू होने के बाद आप मात्र ₹48000 से यूएस मार्केट में अपना पोर्टफोलियो शुरू कर सकते हैं।

PPFAS GIFT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस कदम का मकसद छोटे निवेशकों के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग के दरवाजे खोलना है।

किन दो फंड्स में घटा न्यूनतम निवेश?

यह बदलाव PPFAS Alternate Asset Managers IFSC द्वारा GIFT City से ऑफर किए जाने वाले दो आउटबाउंड पैसिव फंड्स पर लागू हुआ है:

Parag Parikh IFSC S&P 500 Fund of Fund: यह फंड अमेरिका की 500 सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों के इंडेक्स (S&P 500) को ट्रैक करने वाले एक्यूपुलेटिंग ETFs और UCITS में निवेश करता है। यह अमेरिकी लार्ज-कैप मार्केट में ब्रॉड एक्सपोजर देता है।

Parag Parikh IFSC Nasdaq 100 Fund of Fund: यह फंड Nasdaq 100 इंडेक्स में पैसिव निवेश की सुविधा देता है। इसमें अमेरिका की टॉप 100 गैर-वित्तीय कंपनियां शामिल हैं, जिनमें टेक्नोलॉजी और टेक-ओरिएंटेड ग्रोथ कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है।

आम निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?

जो निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो का 5% या 10% हिस्सा ही अमेरिकी बाजार में लगाना चाहते थे, उनके लिए ₹4.8 लाख एकमुश्त लगाना काफी मुश्किल था।

अब केवल ₹48000 में निवेशक अपने पोर्टफोलियो को ग्लोबल डाइवर्सिफाई कर सकते हैं। GIFT City के जरिए इन फंड्स में निवेश करने पर भारतीय निवासियों को अलग से किसी विदेशी ब्रोकरेज अकाउंट खोलने का झंझट नहीं रहता।

GIFT City के जरिए कैसे काम करता है निवेश?

गुजरात स्थित GIFT City भारत का पहला इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) है। यहां वित्तीय सेवाएं भारतीय रुपए के बजाय विदेशी मुद्रा (यूएस डॉलर) में ऑफर की जाती हैं। निवासी भारतीय नागरिक लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम(LRS) नियमों के तहत अपनी गाढ़ी कमाई को डॉलर बेस करेंसी वाले इन दोनों फंड्स में पार्क कर सकते हैं।

कम एंट्री टिकट का मतलब जोखिम कम होना नहीं!

न्यूनतम निवेश घटने से फंड में एंट्री आसान हुई है, लेकिन इससे जुड़ा मार्केट रिस्क कम नहीं हुआ है। निवेशकों का रिटर्न अमेरिकी शेयर बाजार के प्रदर्शन के साथ-साथ डॉलर के मुकाबले रुपए की चाल पर निर्भर करेगा। S&P 500 इंडेक्स स्थिर और ब्रॉड मार्केट एक्सपोजर देता है, जबकि Nasdaq 100 इंडेक्स ज्यादा टेक-फोकस्ड होने के कारण ज्यादा वोलेटाइल हो सकता है।

अगर आप अपने निवेश को एपल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल या एनवीडिया जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों में लगाना चाहते थे, तो GIFT City के रास्ते PPFAS का यह फैसला आपके एंट्री बैरियर को 90% तक खत्म कर देता है। हालांकि, किसी भी इंटरनेशनल फंड में दांव लगाने से पहले अपनी रिस्क कैपेसिटी और करेंसी रिस्क का आकलन जरूर कर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कल का मौसम: 26 अगस्त को इन 12 राज्यों में होगी मूसलाधार बारिश! यूपी-बिहार से बंगाल तक आंधी-तूफान का भी अलर्ट

India Weather Update: देश भर के अलग-अलग हिस्सों भारी बारिश और आंधी तूफान के कहर के बीच मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 26 अगस्त के लिए मौसम का ताजा पूर्वानुमान जारी कर दिया है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक देश के 12 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी से मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान समेत कई राज्यों में तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने की भी चेतावनी जारी की गई है। समुद्र तटीय इलाकों में खराब मौसम और तेज हवाओं की स्थिति को देखते हुए मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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उत्तर भारत का मौसम: यूपी, उत्तराखंड और पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में 26 अगस्त को सुपर एक्टिव मानसून का असर साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना है। इसके साथ ही पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में गरज और चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का भी अलर्ट जारी किया गया है।

पश्चिमी भारत से सटे पूर्वी राजस्थान में भी 26 अगस्त को अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, आंधी आने और बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। इससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।

मध्य और पूर्वोत्तर भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और असम-मेघालय समेत इन राज्यों में बरसेगी आफत

मध्य भारत की बात करें तो मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 26 अगस्त को भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों में बारिश के साथ-साथ गर्जना और बिजली चमकने का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी 26 अगस्त को भारी बारिश होने के आसार जताए गए हैं।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में अलग-अलग जगहों पर मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय के साथ-साथ नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज के साथ बिजली चमकने और आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वी भारत: बिहार, झारखंड और बंगाल में भारी बारिश के साथ तेज हवाओं की चेतावनी

पूर्वी भारत के राज्यों के लिए 26 अगस्त का दिन मौसम के लिहाज से काफी संवेदनशील रहने वाला है। बिहार, झारखंड और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कई इलाकों में तेज आंधी और झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

इन राज्यों में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। साथ ही आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे न जाने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलने और तेज बारिश के साथ बिजली चमकने का अनुमान है।

दक्षिण भारत: केरल में भारी बारिश, आंध्र और तमिलनाडु में 50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

दक्षिण भारत में भी मानसून अपना असर दिखाएगा। केरल और माहे में 26 अगस्त को भारी बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही केरल, माहे और लक्षद्वीप क्षेत्र में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक का अलर्ट है।

आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में मौसम अधिक उग्र रह सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने की संभावना है। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अलग-अलग जगहों पर तेज सतही हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान है।

समंदर में रहेगा खराब मौसम, मछुआरों के लिए अलर्ट जारी

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तेज हवाओं और तूफानी मौसम को लेकर चेतावनी जारी की है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों के साथ-साथ पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक के झोंके आने की संभावना है। इसके अलावा कर्नाटक, केरल के तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र से सटे समुद्र में 35 से 45 किमी प्रति घंटे से लेकर 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी मौसम रहने के आसार हैं।

बंगाल की खाड़ी की स्थिति देखें तो मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र, श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और पश्चिम-मध्य व दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जो बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। मौसम विभाग ने इन सभी समुद्री क्षेत्रों में मछुआरों को न जाने की सख्त सलाह दी है।

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Gold- Silver Price Today: सोना ₹1.63 लाख के नीचे, चांदी ₹2600 हुई सस्ती, क्या यह है खरीदारी का सही समय

Gold- Silver Price Today: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मंगलवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 500 रुपये गिरकर 1,62,933 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। 595 लॉट का कारोबार हुआ। जानकारों का मानना ​​है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है।

वहीं फ्यूचर्स ट्रेड में चांदी की कीमतें 903 रुपये गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, क्योंकि ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन कम कर दीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स 903 रुपये या 0.37 प्रतिशत गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,702 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 4,641.42 डॉलर प्रति औंस हो गए।न्यूयॉर्क में चांदी 1.04 प्रतिशत गिरकर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

गिरावट की क्या है वजह 

डॉलर इंडेक्स लगातार तीन सेशन से बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ रही है। महंगाई और बढ़ते अमेरिकी कर्ज की चिंताओं के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड में बिकवाली हुई, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई।

बाजार की नजरें बुधवार को आने वाले US पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर हैं, जो US फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है। साथ ही, शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में चेयरमैन केविन वॉर्श के पहले भाषण पर भी नजरें टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों की चाल के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

क्या है निवेश का सही समय

VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशन्स लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा कि अगस्त में चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। इसकी वजहें हैं – ब्याज दरों को लेकर कम होती उम्मीदें, कमज़ोर USD, कीमती धातुओं की फिर से बढ़ती मांग और सरकारी कर्ज़ व महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं। चांदी को मज़बूत इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे टेक्नोलॉजी सेक्टर से) का भी फ़ायदा मिल रहा है, और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी इसे और सहारा दे रही हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उनके लिए इसे बनाए रखना एक अच्छा फ़ैसला हो सकता है, खासकर अगर यह उनके डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो का हिस्सा है। लेकिन नए निवेशकों के लिए, महीने भर में हुई लगभग 20% की तेज़ी के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। इतनी ज़बरदस्त तेज़ी के बाद एक ही बार में खरीदने के बजाय, डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है।

निवेशकों को तभी बेचने के बारे में सोचना चाहिए जब उनके निवेश का आधार (investment thesis) बदल गया हो या पोर्टफोलियो में चांदी का हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा हो गया हो।

Silver Price Today: खरीदारी से पहले जानें क्या है आज का ताजा भाव, चेक करें 10 प्रमुख शहरों की लिस्ट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Outlook: सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4600 डॉलर के पार, लेकिन क्या यह तेजी जारी रहेगी?

Gold Outlook: गोल्ड की कीमत 4,600 डॉलर के पार हो गई है। मई के बाद पहली बार सोने का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। इसमें अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव का बड़ा हाथ है। अनुमान है कि लंबी अवधि में कर्ज की कॉस्ट कम करने के लिए अमेरिकी सरकार बॉन्ड बाजार में हस्तक्षेप बढ़ा सकती है। इसका असर सोने की कीमतों पर दिखा है।

25 अगस्त यानी मंगलवार को स्पॉट 4,668 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। भारतीय समय के मुताबिक, 4:15 बजे सोने का भाव 4,637 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने के लिए बड़ा एलान किया था। उसने कहा था कि सरकार लंबी अवधि के ज्यादा बॉन्ड बायबैक करेगी।

सरकार के इस कदम का मतलब है कि वह लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड को नियंत्रण में रखेगी। इससे इनवेस्टर्स के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि क्या बॉन्ड मार्केट हाई यील्ड के साथ पूरी तरह से एडजस्ट नहीं होगा और इस एडजस्टमेंट का कुछ असर आखिर में डॉलर पर पड़ेगा? चूंकि गोल्ड के लिए सरकार या करेंसी से जुड़ा कोई रिस्क नहीं है, जिससे आखिर में इससे फायदा होगा।

सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अगस्त को अमेरिकी बाजार के ओपन होने के 20 मिनट के अंदर एक इनवेस्टर ने ऑप्शंस में एक बड़ा सौदा (Trade) किया। इसमें एसपीडीआर गोल्ड शेयर्स ईटीएफ या जीएलडी के 1,16,000 कॉन्ट्रैक्ट्स शामिल थे। ट्रेडर ने 18 सितंबर के 420 डॉलर के कॉल के करीब 1,16,000 कॉन्ट्रैक्ट्स बेचे। इससे 20.2 करोड़ डॉलर का प्रीमियम कलेक्ट हुआ। उसने इस पैसा का इस्तेमाल 430 डॉलर के कॉल के उतने ही कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदने के लिए किया।

इस ट्रांजेक्शन में 5.8 करोड़ डॉलर का नेट क्रेडिट बना। यह दरअसल GLD के शॉर्ट टर्म आउटलुक पर आधारित एक बेयरिश कॉल स्प्रेड था। इसमें ट्रेडर ने 420 डॉलर का कॉल बेचा, जो ट्रेड एग्जिक्यूट होने के समय पहले से मार्केट में थे। इससे इफेक्टिव ब्रेक इवन करीब 425 डॉलर आता है।

इस बड़े पोजीशन से जो संकेत निकलता है उसका मतलब यह नहीं है कि सोना पक्के तौर पर क्रैश की तरफ बढ़ रहा है। इसका मतलब यह है कि लगातार तेजी के बाद ट्रेडर को जीएलडी में गिरावट आने का अनुमान है या कम से कम सितंबर एक्सपायरी तक इसके करीब 425 डॉलर के नीचे जाने का अनुमान है। सीएनबीसी ने अपनी रिपोर्ट में यह मतलब निकाला है।

बाजार तब कंट्रेरियन दांव ऐसे वक्त लगा रहा है, जब गोल्ड में तेजी दिख रही है। गोल्ड में तेजी के लिए अनुकूल स्थिति अभी खत्म नहीं हुई है। बॉन्ड बाजार में जो उथल-पुथल दिख रही है, उससे यील्ड को काबू में रखने और डॉलर पर दबाव के बगैर अपने कर्ज को संभालने की अमेरिकी सरकार की क्षमता पर नए सवाल उठे हैं। इससे एक बार फिर सुरक्षित निवेश के गोल्ड में दिलचस्पी बढ़ी है।

कई एनालिस्ट्स का मानना है कि गोल्ड में आई हालिया तेजी का संबंध डिबेसमेंट ट्रेड (debasement trade) की वापसी से है। इसका मतलब है कि डॉलर से जुड़ी चिंता के चलते गोल्ड को सपोर्ट मिलता रहेगा। लेकिन, इसमें एक बाधा है। इंटरेस्ट रेट्स ज्यादा होने पर सोने जैसा नॉन-यील्डिंग एसेट रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि छोटी अवधि में सोने के आउटलुक के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी! ईरान पर अमेरिका के इस एक फैसले से भारत में पड़ेगी महंगाई की मार?

US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया है।

वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।

सीधे नहीं, ‘चीन फैक्टर’ से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दी

एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।

चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।

क्या रूस से मिलेगा सहारा?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।

महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटका

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।

महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।

ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभाव

भारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।

कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह ‘सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट’ के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।

बिना मेकअप लुक को निखारने का आसान तरीका, बालों में करवाएं ये 5 हेयरकलर!

बालों का रंग बदलते ही पूरा लुक काफी अलग और फ्रेश नजर आ सकता है। इस कारण आजकल कई लोग अपने बालों में नया कलर या हाइलाइट्स करवाना पसंद करते हैं। लेकिन सिर्फ ट्रेंड देखकर कोई भी हेयर कलर चुन लेना सही नहीं होता। जो रंग किसी और पर बहुत खूबसूरत लग रहा है, जरूरी नहीं कि वह आपकी स्किन पर भी उतना ही अच्छा लगे।

हेयर कलर चुनते समय अपनी स्किन की अंडरटोन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। भारतीय स्किन टोन अलग-अलग तरह के होते हैं और इनमें वॉर्म, कूल और न्यूट्रल अंडरटोन भी हो सकती हैं। सही शेड चुनने से चेहरा ज्यादा फ्रेश और निखरा हुआ दिख सकता है।

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कैरामेल ब्राउन (Caramel Brown)

अपने काले या गहरे बालों में हल्का और खूबसूरत बदलाव चाहती हैं, तो कैरामेल ब्राउन एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। इसे पूरे बालों पर लगाने की बजाय हल्के हाइलाइट्स के रूप में भी करवाया जा सकता है। चेहरे के आसपास कैरामेल हाइलाइट्स करवाने से बालों के साथ चेहरा भी ज्यादा निखरा हुआ नजर आ सकता है। धूप में इसका गोल्डन-ब्राउन रंग और ज्यादा उभरकर दिखाई देता है, जिससे बाल चमकदार और स्टाइलिश लगते हैं। यह शेड खासकर वॉर्म अंडरटोन वाली स्किन पर अच्छा लगता है और भारतीय गहरे बालों के साथ भी आसानी से मैच हो जाता है।

मोका ब्राउन (Mocha Brown)

ज्यादा चमकीला या गोल्डन कलर पसंद नहीं है, तो मोका ब्राउन चुन सकती हैं। यह ब्राउन का थोड़ा डार्क, सॉफ्ट और नेचुरल शेड है, जो बालों को बिना ज्यादा लाल या पीला दिखाए एक अच्छा लुक देता है। इससे काले बालों में हल्की डेप्थ और चमक आती है, लेकिन रंग बहुत ज्यादा अलग नजर नहीं आता। कूल या न्यूट्रल अंडरटोन वाली स्किन पर यह शेड खास तौर पर खूबसूरत लग सकता है।

डीप ऑबर्न (Deep Auburn)

बालों में हल्का रेड टच चाहती हैं, लेकिन बहुत चमकीला लाल या कॉपर कलर नहीं चाहतीं, तो डीप ऑबर्न अच्छा रहेगा। इसमें ब्राउन और रेड दोनों रंगों का खूबसूरत ब्लेंड होता है, इसलिए यह बालों को एक साथ नेचुरल और स्टाइलिश लुक देता है। मीडियम से लेकर गहरी स्किन टोन पर इसका डार्क रेड-ब्राउन रंग काफी अच्छा लगता है। भारतीय बालों के गहरे रंग के साथ यह शेड आसानी से घुल-मिल जाता है। धूप में इसके रेड टोन हल्के से उभरते हैं, जिससे बालों में अच्छी चमक दिखाई देती है।

चॉकलेट ब्राउन (Chocolate Brown)

बालों में बदलाव चाहती हैं, लेकिन बहुत ज्यादा एक्सपेरिमेंट नहीं करना चाहतीं, तो चॉकलेट ब्राउन बढ़िया शेड है। इसका रंग काफी हद तक नेचुरल ब्राउन जैसा लगता है, इसलिए यह पहली बार हेयर कलर करवाने वालों के लिए भी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। चॉकलेट ब्राउन बालों को सॉफ्ट, चमकदार और थोड़ा ज्यादा रिच लुक देता है। वॉर्म अंडरटोन वाली स्किन पर इसका गहरा ब्राउन रंग पर अच्छा लगता है और चेहरे को सॉफ्ट लुक दे सकता है। कूल अंडरटोन के लिए ऐसा चॉकलेट ब्राउन चुनना बेहतर हो सकता है, जिसमें गोल्डन टोन कम हो।

बरगंडी (Burgundy)

बालों में थोड़ा बोल्ड लेकिन एलिगेंट चेंज चाहती हैं, तो बरगंडी ट्राई कर सकती हैं। यह गहरे लाल और बैंगनी रंग का खूबसूरत मिक्स होता है, जो बालों को एक अलग और अट्रैक्टिव लुक देता है। भारतीय गहरी और मीडियम स्किन टोन पर यह शेड काफी अच्छा लग सकता है। घर के अंदर बरगंडी बालों का रंग नॉर्मल दिखता है, लेकिन धूप में इसका लाल-बैंगनी रंग साफ दिखाई देता है।

भारतीय हॉकी टीम सिर्फ पाक से बेहतर, श्रीजेश समेत इन दिग्गजों ने की आलोचना

विश्व कप में 51 साल बाद पदक जीतने का सपना लेकर गई भारतीय पुरूष हॉकी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने में भी नाकाम रहने के बाद पूर्व दिग्गजों ने युवा खिलाड़ियों को मौका नहीं देने और उसी कोर ग्रुप के साथ लगातार खेलने पर सवाल उठाये हैं।अर्जेंटीना से 3 -5 से हारने के बाद भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदें भी खत्म हो गई और इससे वे कमजोरियां भी उजागर हुई जो पेरिस ओलंपिक के बाद से लगातार चली आ रही थी।

पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

भारतीय टीम विश्व कप से पहले स्विटजरलैंड में मानसिक दृढता बढाने के लिये बूट कैंप में गई लेकिन टूर्नामेंट में दबाव का सामना नहीं कर सकी। ड्रैग फ्लिकर और कप्तान हरमनप्रीत सिंह पर अधिक निर्भरता का खामियाजा भुगतना पड़ा जबकि वह पूरी तरह फिट नहीं थे। मनप्रीत सिंह और मनदीप सिंह जैसे सीनियर अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके।नतीजा यह हुआ कि अंकतालिका में भारतीय टीम फिलहाल सिर्फ पाकिस्तान से ऊपर है और 8वें स्थान पर है।

पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद संन्यास लेने वाले गोलकीपर पी आर श्रीजेश ने कहा ,‘‘सीनियर खिलाड़ियों के जाने के बाद उनकी जगह कौन लेगा । क्या हमने दूसरी जमात तैयार की है। लॉस एंजिलिस ओलंपिक में दो ही साल बचे हैं और उससे पहले करीब तीस अंतरराष्ट्रीय मैच ही होंगे। क्या ओलंपिक के लिये इससे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। नहीं।’’उन्होंने कहा ,‘‘ विश्व कप की टीम में भी भी वही कोर खिलाड़ी हैं जबकि मनमीत सिंह, आमिर अली, रोशन कुजूर, तालेम प्रियब्रत, रोहित, अर्शदीप जैसे कई प्रतिभाशाली जूनियर इंतजार ही कर रहे हैं।’’

पूर्व ओलंपियन जगबीर सिंह ने कहा कि चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे।उन्होंने कहा ,‘‘ जूनियर खिलाड़ियों को सही समय पर मौके मिलने चाहिये और चयन के कुछ फैसले बेहतर हो सकते थे। तैयारी ओलंपिक से ओलंपिक की होनी चाहिये । कोचिंग स्टाफ ने अनुभव को ही तरजीह दी जो काम नहीं आया। भारत के पास यह सर्वश्रेष्ठ मौका था लेकिन प्रदर्शन में निरंतरता नहीं दिखी। हर दस मिनट में डिफेंस चरमरा रहा था।’’

ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता कप्तान रहे वासुदेवन भास्करन ने कहा ,‘‘ मैने पिछले चार साल में किसी भारतीय फॉरवर्ड को अच्छा खेलते नहीं देखा। बैक पास कहां थे, गोल पर कितने हमले किये और फुल प्रेस जाने के समय मिडफील्ड पूरा खाली छोड़ दिया।’उन्होंने कहा ,‘‘ हमने नये खिलाड़ियों को मौके ही नहीं दिये। नीदरलैंड की पेरिस ओलंपिक टीम के छह स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी विश्व कप टीम में नहीं थे। हम हमदर्दी, पिछले रिकॉर्ड और आंकड़ों पर ही टीम चुन लेते हैं। कम से कम छह जूनियर खिलाड़ियों को प्रो लीग में आजमाना चाहिये था।’’

वहीं एक और दिग्गज परगट सिंह का मानना है कि भारतीय हॉकी का आंतरिक ढांचा इतना कमजोर है कि प्रतिभायें निकलती ही नहीं है।उन्होंने कहा ,‘‘ अच्छी घरेलू स्पर्धायें नहीं होने से हमारे पास अच्छी बेंच स्ट्रेंथ नहीं है। यूरोप में कई डिविजन की लीग होती है जो हमारे यहां नहीं है। पहले बेटन कप, आगा खान कप, बांबे गोल्ड कप, मुरूगप्पा कप, नेहरू हॉकी से अच्छी प्रतिभायें निकलती थी। सारा ढांचा ही खराब कर दिया है। इसके अलावा नये खिलाड़ियों को मौका देना था तो दो साल पहले ही बदलाव की शुरूआत कर देनी चाहिये थी।’’

महिला एशिया कप में नकवी और कैद ट्रॉफी सीजन 2 दोहराने की पूरी संभावना

INDvsPAK

पिछले साल भारत ने पाकिस्तान को एशिया कप फाइनल में 5 वितेट से शिकस्त देकर खिताब अपने नाम किया था लेकिन ट्रॉफी भारत के हिस्से में नहीं आ पाई थी। सेरेमनी में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियाई क्रिकेट परिषद के प्रमुख मोहसिन नकवी को यह ट्रॉफी भारत को सौंपनी थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया क्योंकि भारतीय खिलाड़ियों ने बिगड़े हुए भूराजनैतिक संबंधो के कारण नकवी से ट्रॉफी लेने से मना कर दिया था। इस बात पर नाराज नकवी ट्रॉफी लेकर ही चल दिए थे और आज भी वह ट्रॉफी दुबई के दफ्तर में रखी हुई है। 

ऐसा एक बार फिर हो सकता है क्योंकि भारत को महिला एशिया कप में भी मोहसिन नकवी से ही ट्रॉफी लेनी होगी।नक़वी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख और अपने देश के गृह मंत्री भी हैं। महिला एशिया कप 28 अगस्त से 13 सितंबर तक खेला जाएगा।भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है और लीग चरण का उनका मुकाबला पांच सितंबर को होना है। इसके बाद इन दोनों टीम का मुकाबला फाइनल में हो सकता है और ऐसे में पुरस्कार वितरण का मसला फिर से सुर्खियों में आ सकता है।

अब स्वाभाविक सवाल यह उठता है कि अगर हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम महिला एशिया कप जीत जाती है और नक़वी पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान मंच पर मौजूद होते हैं तो फिर आगे क्या होगा?
क्या भारतीय महिला टीम भी सूर्यकुमार यादव और उनके साथियों की तरह नक़वी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर देगी? इस मामले में बीसीसीआई का रुख अभी स्पष्ट नहीं है।

बोर्ड का यह स्पष्ट मत है कि दोनों टीमों के बीच किसी प्रकार की औपचारिक बातचीत नहीं होगी, लेकिन वह पुरस्कार वितरण समारोह के लिए इंतजार करने की नीति अपनाएगा।पिछले साल की तरह विवाद से बचने का एक तरीका यह हो सकता है कि नकवी स्वयं ट्रॉफी प्रदान नहीं करें और एशियाई क्रिकेट परिषद के किसी अन्य अधिकारी को यह सम्मान प्रदान करने दें।

भारतीय पुरुष टीम के नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार करने के बाद इसे एसीसी के कार्यालय में रखा गया है। नकवी ने बाद में कहा था कि भारत एसीसी कार्यालय में आकर उनसे ट्रॉफी ले सकता है।इस गतिरोध को समाप्त करने का भी प्रयास किया गया जिसमें बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने आईसीसी की बैठक के दौरान नकवी से मुलाकात की।

सैकिया ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच गतिरोध समाप्त हो गया है लेकिन उस समय भी ट्रॉफी का मुद्दा नहीं सुलझ पाया था। इसके बाद नक़वी ने कहा कि भारत को उनसे ही ट्रॉफी लेनी होगी।फिलहाल सभी का ध्यान टूर्नामेंट पर केंद्रित है लेकिन अगर भारत चैंपियन बनता है तो यह मामला फिर से गर्मा सकता है।