मंगलुरु के छात्रों ने बनाई AI-पावर्ड ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक कार, जो खुद पहचानती है रास्ता

जहां टेस्ला जैसी ग्लोबल कंपनियां ऑटोनॉमस व्हीकल टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही हैं, वहीं मंगलुरु के मुक्का में स्थित श्रीनिवास यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (SUIET) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के स्टूडेंट्स और फैकल्टी की एक टीम ने बहुत कम लागत में अपनी AI-पावर्ड सेल्फ-ड्राइविंग इलेक्ट्रिक गाड़ी ‘श्री-वाहन’ बनाई है।

इस गाड़ी को आधिकारिक तौर पर 23 जुलाई, 2026 को पेश किया गया था। यह सिर्फ़ स्टूडेंट्स का एक प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि एक काम करने वाला प्रोटोटाइप है जिसे आगे चलकर असल दुनिया में इस्तेमाल के लिए विकसित किया जा सकता है।

टीम ने इस वाहन को पूरी तरह से नए सिरे से बनाने के बजाय एक मौजूदा कार को मॉडिफाई किया और उसे इलेक्ट्रिक और AI-आधारित ऑटोनॉमस व्हीकल में बदल दिया। इस पूरे प्रोटोटाइप को तैयार करने में टीम को करीब छह महीने लगे और इसकी लागत लगभग 4-5 लाख रुपये आई।

यह सड़क को कैसे “देखता” है

यह वाहन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ LiDAR, कैमरा-बेस्ड विजन सिस्टम, GPS नेविगेशन, अल्ट्रासोनिक सेंसर, ओडोमेट्री, विजुअल SLAM और सेंसर फ्यूजन टेक्नोलॉजी से चलती है। ये सभी तकनीकें मिलकर गाड़ी को बिना ड्राइवर के पहले से तय रास्ते पर सुरक्षित रूप से चलने में मदद करते हैं।

अगर रास्ते में कोई व्यक्ति या रुकावट आती है, तो सेंसर उसे पहचान लेते हैं और गाड़ी अपने-आप रुक जाती है। ऑपरेटर गाड़ी में लगे कैमरे से उस पर नजर रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उसे दूर से कंट्रोल भी कर सकते हैं। इसके अलावा, गाड़ी में AI असिस्टेंट सिस्टम भी लगा है।

स्पीड और रेंज

टेस्टिंग के दौरान सुरक्षा के लिए, ऑटोनॉमस मोड में गाड़ी की स्पीड 5 km/h तक सीमित रखी गई है। मैनुअल मोड में यह 20 से 28 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकता है। इसमें 5 किलोवाट की लिथियम-आयन बैटरी लगी है, जो एक बार फुल चार्ज होने पर 15 से 22 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है।

यह गाड़ी लगभग 360 kg का भार उठा सकती है, यानी इसमें छह लोग बैठ सकते हैं या इतना ही वजन का सामान ले जाया जा सकता है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि जरूरत पड़ने पर इसे एम्बुलेंस में भी बदला जा सके।

इसका इस्तेमाल कहां-कहां हो सकता है

इस गाड़ी को कई संभावित कामों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है: जैसे कि एजुकेशनल कैंपस में छात्रों को लाना-ले जाना, इंडस्ट्रियल इलाकों में स्टाफ को पहुंचाना, अस्पतालों में मरीजों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना, एम्बुलेंस के तौर पर इस्तेमाल होना, मिलिट्री इलाकों में ज्यादा जोखिम वाले जोन तक जरूरी सामान पहुंचाना और रिमोट-कंट्रोल से होने वाले डिफेंस ऑपरेशन में मदद करना।

आगे क्या होगा?

अभी यह गाड़ी सिर्फ पहले से मैप किए गए रास्तों पर ही चलती है। अगले चरण में, टीम का प्लान है कि इसमें बिना मैप वाले इलाकों में भी खुद चलने की क्षमता जोड़ी जाए और ज्यादा क्षमता वाली बैटरी लगाई जाए, ताकि इसे पूरी तरह काम करने वाली एम्बुलेंस बनाया जा सके।

इसके अलावा, संस्थान का मकसद भारतीय सड़कों के हिसाब से एक ऑटोनॉमस ड्राइविंग सिस्टम बनाना और आगे चलकर इस टेक्नोलॉजी को कमर्शियलाइज करना भी है।

‘श्री-वहन’ यह दिखाता है कि मौजूदा तकनीक का इस्तेमाल करके पुराने वाहनों को कम लागत वाले AI-संचालित ऑटोनॉमस वाहनों में बदला जा सकता है। यह उपलब्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब टेस्ला जैसी वैश्विक कंपनियां भी बड़े बजट के साथ इसी तरह की तकनीक विकसित करने पर काम कर रही हैं।

इस प्रोजेटक्ट से छात्रों का क्या है फायदा?

यह प्रोजेक्ट छात्रों की रिसर्च करने की क्षमता को दिखाता है, उन्हें प्रैक्टिकल अनुभव के साथ सीखने का मौका देता है और भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजी विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रोजेक्ट में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर विश्वास सी. शेट्टी ने मार्गदर्शन किया, जबकि रिसर्च एसोसिएट विशाख मेनन ने रिसर्च और डेवलपमेंट का नेतृत्व किया। श्रेयस, अद्वितीय, उज्ज्वल, अक्षय, मंजूनाथ और प्रख्यात जैसे छात्रों ने इस प्रोजेक्ट में अहम योगदान दिया।

श्रीनिवास यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. ए. श्रीनिवास राव के अनुसार, इस तरह के रिसर्च छात्रों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का सामना करने का आत्मविश्वास देते हैं और साथ ही समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Akanksha Puri: आकांक्षा पुरी ने खोली बॉलीवुड एक्टर्स की पोल, बोलीं- स्टार्स को प्रोटेस्ट में जाने के लिए मिल रहे पैसे, मुझे भी हुए थे ऑफर

Akanksha Puri: टीवी एक्ट्रेस आकांक्षा पुरी ने बॉलीवुड स्टार्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके कलीग्स को चल रहे विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा बनने के बदले पैसे की पेशकश की जा रही है। गुरुवार को एक्ट्रेस ने IANS से ​​बात करते हुए कहा कि वह चाहती हैं कि लोग “सही बात” का समर्थन करें और “मार्केटिंग” से ऊपर उठें।

उन्होंने IANS से ​​कहा, “मैं बस यही चाहती हूं कि लोग सही बात का समर्थन करें। इसे मार्केटिंग का हिस्सा न बनाएं। इसके लिए पैसे न कमाएं। और अपनी ही रोजी-रोटी पर लात न मारें। सही बात का समर्थन करें। सही लोगों का समर्थन करें। मैं और खुलकर क्या कह सकती हूं? मुझे लगता है कि जो लोग मेरे साथ हैं – एक्टर्स, कंटेंट क्रिएटर्स – वे सभी जानते हैं कि बहुत से लोग और बहुत सी पार्टियां हमसे संपर्क कर रही हैं ताकि इसे मार्केटिंग का हिस्सा बनाया जा सके, लोगों की नज़र में आया जा सके और रैली में जाया जा सके।”

एक्ट्रेस ने कहा कि मैं इस बकवास का हिस्सा नहीं बनना चाहती। मैं सही चीज का साथ देना चाहती हूं। इसके लिए, चाहे मैं वहां मौजूद रहूं या नहीं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जब भी किसी को जरूरत होती है, मैं उनके साथ खड़ी होती हूं। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि वे भारत का भविष्य हैं। वे छात्र हैं। और उनके साथ ऐसा होते देखना… जब मैंने वे विज़ुअल्स देखे, तो वे बहुत परेशान करने वाले थे। इसलिए मेरी गुज़ारिश है कि उनकी बात सुनी जाए और उन्हें सपोर्ट किया जाए।

18 जुलाई की सुबह, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन स्थल से सोनम वांगचुक को ज़बरदस्ती हटा दिया, जिसके बाद विरोध प्रदर्शन और तेज़ हो गया। वांगचुक 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। अधिकारियों ने उनकी बिगड़ती सेहत, डॉक्टरी सलाह और दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। सोनम वांगचुक प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग करते हुए भूख हड़ताल पर थे।

भारतीय ODI और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल उतरे छात्रों के समर्थन में

Shubhman Gill

भारतीय एकदिवसीय और टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने अपनी इंस्टा पोस्ट के जरिए नीट पेपर लीक पर जंतर मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है। पिछले साल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारत के कप्तान शुभमन गिल ने टीम इंडिया की बागडोर टेस्ट और एकदिवसीय प्रारुप में थामी थी।

गिल ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए एक संदेश में कहा कि युवा पीढ़ी को सीखने, सपने देखने और देश के भविष्य को आकार देने के लिए हर मौका मिलना चाहिए।

गिल ने लिखा, ‘‘एक युवा भारतीय के रूप में मेरा मानना है कि हमारी पीढ़ी को सीखने, सपने देखने और उस भविष्य को बनाने के लिए हर अवसर मिलना चाहिए जिसकी हम सभी आकांक्षा रखते हैं। ’’छब्बीस साल के गिल ने कहा कि वह उन युवाओं का सम्मान करते हैं, जिन्होंने पूरे देश में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाने का रास्ता चुना है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हर उस युवा के लिए बहुत सम्मान है जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास रखता है। ’’किसी विशेष प्रदर्शन या राजनीतिक मुद्दे का उल्लेख किए बिना गिल ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और छात्रों की चिंताओं से निपटने के दौरान सहानुभूति रखने की अपील की।

उन्होंने लिखा, ‘‘शिक्षा में हमारे देश के भविष्य को आकार देने की ताकत है। मुझे उम्मीद है कि हम संवेदनशीलता, आपसी सम्मान और हर छात्र के सर्वश्रेष्ठ हित को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ेंगे। ’’गिल ने लिखा, ‘‘भारत के भविष्य के लिए। ’’

रामदेव अग्रवाल ने कहा-बाजार के लिए ऑयल और रुपया बड़े रिस्क, यह शेयरों में निवेश बढ़ाने का सही समय

शेयर बाजारों के लिए यह हफ्ता अच्छा नहीं रहा। आज यानी 24 जुलाई को लगातार पांचवें दिन शेयर बाजारों में गिरावट दिख रही है। बाजार की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल से बातचीत की। उन्होंने बताया कि अभी बाजार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज क्या है।

जियोपॉलिटिकल टेंशन बाजार की सबसे बड़ी चिंता

अग्रवाल ने कहा कि बाजार के लिए अब सबसे बड़ी चिंता वैल्यूएशन नहीं बल्कि जियोपॉलिटिकल स्थितियां हैं। मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतें चढ़ रही हैं। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। रुपये में कमजोरी जब तक जारी रहेगी तब तक विदेशी निवेशकों के भारत लौटने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि अभी स्थिति अनिश्चित दिख रही है, जिससे विदेशी निवेशक खरीदारी में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे।

मार्केट करेक्शन का असर लंबी अवधि के निवेश पर नहीं पड़ेगा

बाजार में हालिया गिरावट के बारे में उन्होंने कहा कि इसका असर लंबी अवधि के निवेशकों की खरीदारी पर नहीं पड़ेगा। दरअसल, यह अच्छी क्वालिटी के शेयरों को खरीदने या उनमें निवेश बढ़ाने का मौका है। इसकी वजह यह है कि इंडिया की ग्रोथ स्टोरी पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा है। अब भी भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ दुनिया के कई बड़े देशों की ग्रोथ से ज्यादा है।

क्रूड 100 के पार जाने पर बाजार पर दबाव बढ़ेगा

उन्होंने कहा, “बाजार एक दिशा में नहीं चलता है। शेयरों पर अच्छे और बुरे दोनों वजहों का असर पड़ता है। सही तरीका यह है कि करेक्शंस के बाद शेयर की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव होने पर लंबी अवधि में अच्छे प्रदर्शन की संभावना वाली कंपनियों के शेयरों में निवेश बढ़ाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर को पार कर जाती है तो बाजार पर दबाव बढ़ जाएगा।

देश के एक्सटर्नल अकाउंट पर भी दबाव बढ़ रहा

अग्रवाल ने कहा कि महंगे क्रूड से करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने और विदशी निवेश कमजोर रहने से भारत के एक्सटर्नल अकाउंट पर दबाव बढ़ सकता है। पहले से ही करेंट अकाउंट का बड़ा घाटा दिख रहा है। अब तो कैपिटल अकाउंट में भी घाटा दिखने लगा है। इसका खराब असर मार्केट के मनोविज्ञान पर पड़ेगा। उनका मानना है कि बाजार में कई आईपीओ आने वाले हैं, इससे भी विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली दिख सकती है।

बड़े आईपीओ में निवेश के लिए शेयर बेच सकते हैं FIIs

उन्होंने कहा, “Zepto, jio और NSE जैसे आईपीओ आने वाले हैं। इनमें विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी दिख सकती है। ऐसे में उन्हें इसके लिए अपने पोर्टफोलियो में जगह बनानी होगी। इसका मतलब है कि वे अपने पोर्टफोलियो के कुछ शेयर बेच सकते हैं।” उन्होंने कहा कि इससे बाजार पर दबाव बढ़ जाएगा। पहले से ही क्रूड में उछाल से बाजार पर दबाव दिख रहा है।

भारत के लिए बेहतर हो रही हैं स्थितियां 

अग्रवाल ने कहा कि भारतीय बाजार के लिए स्थितियां बेहतर होती दिख रही हैं। उन्होने कहा, “मानसून में इम्प्रूवमेंट है। अर्निंग्स ग्रोथ अच्छी दिख रही है। रुपये में स्थिरता है। हालांकि, हमें रुपये पर नजर बनाए रखनी होगी। उधर, दुनियाभर में AI स्टोरी कमजोर होती दिख रही है।” उन्होंने कहा कि भारत की इकोनॉमी अच्छी है, जिससे वैश्विक अनिश्चितता पर इसका असर कम पड़ेगा। अगर जियोपॉटिलिक्स को छोड़ दिया जाए तो भारत असल में अच्छी स्थिति में है।

लंदन के लग्जरी होटल में 29 साल के सऊदी प्रिंस की मौत के पीछे क्या घातक कॉकटेल था? जांच में सामने आई ये बात

यूनाइटेड किंगडम में हुई एक अदालती जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय सऊदी प्रिंस अब्दुल्लाह बिन फहद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत लंदन के एक लग्जरी होटल में शराब, पार्टी ड्रग और एंटी-एंजाइटी दवाइयों के एक जानलेवा और घातक कॉकटेल के सेवन से हुई थी। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंस अब्दुल्लाह का शव पिछले साल 25 नवंबर को केंसिंग्टन स्थित पांच सितारा मैरियट होटल में उनके कमरे के बाथरूम के फर्श पर पड़ा मिला था। एक क्लीनर जब उनके बंद कमरे में आया तो प्रिंस की संदिग्ध मौत की जानकारी सामने आई। पैरामेडिक्स द्वारा उन्हें बचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद मौके पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।

होटल में अकेले लौटे थे प्रिंस

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस 19 नवंबर को एक हफ्ते के लिए इस 5-स्टार होटल में चेक-इन हुए थे। मौत से ठीक एक रात पहले सीसीटीवी फुटेज में उन्हें आखिरी बार देखा गया था, जब वे सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले थे और फिर अकेले ही होटल वापस लौट आए थे। जांचकर्ताओं के लिए यह सीसीटीवी फुटेज बेहद अहम सबूत साबित हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि घटना के वक्त उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और मामले में किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता नहीं थी।

जांच में क्या निकला? शराब, GHB और जैनैक्स का ‘जानलेवा कॉकटेल’

इनर वेस्ट लंदन कॉरोनर्स कोर्ट में हुई जांच के बाद असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन इस नतीजे पर पहुंचे कि प्रिंस की मौत मल्टी-ड्रग इंजेशन यानी एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों और दवाओं के सेवन से हुई है। उन्होंने इसे दुर्घटनाजन्य मौत का मामला करार दिया। इसका मतलब है कि यह मौत अनजाने में हुई एक दुर्घटना थी। टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में प्रिंस के खून में अल्कोहल का कंसंट्रेशन 222 mg प्रति 100 ml पाया गया, जो इंग्लैंड में ड्रिंक-एंड-ड्राइव की कानूनी सीमा से करीब तीन गुना अधिक था। विशेषज्ञों ने अदालत को बताया कि सिर्फ शराब का इतना स्तर ही किसी इंसान को कोमा में भेजने के लिए काफी था।

जांचकर्ताओं को उनके शरीर में गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूटाइरेट (GHB – जिसे आमतौर पर पार्टी ड्रग कहा जाता है) का संभावित रूप से जानलेवा स्तर मिला। इसके अलावा गांजा, जैनैक्स और दूसरे एंटी-एंजाइटी दवाओं के अंश भी मिले। पोस्ट-मॉर्टम जांच में पाया गया कि प्रिंस को कोई पुरानी या गंभीर बीमारी नहीं थी। मेडिकल साक्ष्यों ने निष्कर्ष निकाला कि शराब और कई दवाओं के इस घातक कॉकटेल ने कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर किया, जिससे उनकी मौत हो गई।

नशे की लत से जूझ रहे थे सऊदी प्रिंस

सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों से पता चला कि मौत से पहले प्रिंस अब्दुल्लाह शराब के अत्यधिक सेवन और जैनैक्स दवा पर निर्भरता की समस्या से जूझ रहे थे। द टेलीग्राफ के मुताबिक उन्हें पिछले साल अगस्त में रोहैम्पटन के प्रायरी क्लीनिक में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शराब, बेंजोडायजेपाइन और प्रेगाबालिन से डिटॉक्सिफिकेशन का इलाज कराया था। प्रायरी क्लीनिक छोड़ने के बाद, उन्होंने मर्सियासाइड के रेनफोर्ड हॉल क्लीनिक में रेसेपरेट्री ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कराया और अक्टूबर में वहां से डिस्चार्ज हुए थे।

कंसलटेंट मनोचिकित्सक डॉ. विक्टोरिया चमोरो ने अदालत को बताया कि प्रिंस को एंजाइटी के लक्षणों के साथ भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्होंने इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दी थी। डिस्चार्ज के समय उन्हें आत्महत्या के जोखिम वाला नहीं माना गया था, हालांकि बाद में वे निर्धारित ऑनलाइन फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में शामिल नहीं हुए थे।

न आत्महत्या का सबूत, न ही किसी साजिश का अंदेशा

असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन ने कहा कि ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे यह लगे कि प्रिंस अब्दुल्लाह अपनी जान खुद लेना चाहते थे। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक कॉरोनर ने नोट किया कि प्रिंस ने कभी खुदकुशी के विचार व्यक्त नहीं किए थे, होटल के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ऐसा कोई सबूत मिला जो यह दर्शाता हो कि उनकी मौत से पहले वहां कोई और व्यक्ति मौजूद था। अकेले होटल लौटने की सीसीटीवी फुटेज ने भी किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।

सऊदी शाही दरबार ने कुछ दिनों बाद की थी मौत की घोषणा

सऊदी रॉयल कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर 2 दिसंबर को प्रिंस अब्दुल्लाह के निधन की सार्वजनिक घोषणा की थी। सऊदी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रिंस के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजकुमारों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।

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Market Mantra : AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे,कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे दिखेगी अच्छी तेजी – कैलाश कुलकर्णी

Market Mantra : इस समय बाजार एक दोराहे पर खड़ा है। कच्चा तेल है जिसने बाजार की सांस फूला रखी है। वहीं अबतक आए नतीजे हैं मिलेजुले होने के बाद कमेंट्री के फ्रंट पर अच्छे हैं। IT,बैंक और कंज्यूमर कंपनियां सब आगे की अच्छी राह की बात कर रही हैं। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर आगे क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं। HSBC MF के CEO कैलाश कुलकर्णी (Kailash Kulkarni)।

कैलाश कुलकर्णी की राय

कैलाश कुलकर्णी का कहना है कि जियोपॉलिटिकल हालात के चलते बाजार में काफी ज्यादा अनिश्चितता है। पिछले कुछ सालों में भारतीय निवेशक मैच्योर हुए हैं। इसके चलते भारतीय निवेशकों की तरफ से पैनिक बिकवाली नहीं हुई है। निवेशकों अभी वेट एंड वॉच मोड में ही रहना चाहिए। भारतीय इकोनॉमी के हालात काफी बेहतर है।

डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना पैसा

उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों का पैसा डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना है। निवेशक लार्जकैप की बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप में पैसे डाल रहे हैं। फ्लैक्सीकैप कैटेगरी में काफी निवेश आ रहा है। मिडकैप की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ा है। इनमें रिटर्न भी अच्छे मिले हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है। PLI और चीन+1 के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होगा। देश के 8-10 राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है।

AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन ज्यादा

कैलाश कुलकर्णी ने आगे कहा कि AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे दिख रहे हैं। IT कंपनियों पर अंडरवेट नजरिया है। BFSI फंड में कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस है। कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे अच्छी तेजी दिखेगी। फार्मा शेयरों पर वेट एंड वॉच का नजरिया है।

Market Mantra : कैलाश कुलकर्णी के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है

 

Top Stock Picks : बाजार में वेट एंड वॉच मोड में रहें, किसी गिरावट में इन फार्मा और डिफेंस शेयरों में करें खरीदारी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पहली जीत पाने में 8 मैच लग गए कप्तान श्रेयस अय्यर को, दिया यह बयान

भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए कप्तानी एक दिवास्वप्न की जगह एक दुस्वपन की तरह आई। यरोप के दौरे पर वह पहले ऐसे भारतीय टी-20 अंतरराष्ट्रीय कप्तान बने जिसे पहले 7 मैचों के बाद भी जीत का स्वाद नहीं मिला। लेकिन अफ्रीका महाद्वीप जाते साथ ही उनका स्वागत जीत के साथ हुआ। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी 20 में गुरूवार को जीत हासिल करने के बाद कहा कि पहली जीत हासिल कर अच्छा लगा।

अय्यर ने मैच के बाद कहा, ”हमारे खिलाड़ियों ने बहुत शानदार प्रदर्शन किया था। रणनीति को बहुत अच्छे ढंग से अमली जामा पहनाया। और बतौर कप्तान मुझे पहली जीत मिली। विकेट में बाउंस थी, मयंक ने हमें बेहतरीन शुरुआत दिलाई और विपक्षी बल्लेबाज़ों को अधिक रूम नहीं दिया। जैसा कि मैंने कहा कि निर्भीक युवा बल्लेबाज़ (वैभव सूर्यवंशी) ने बेहतरीन बल्लेबाज़ी की। वह पहले भी यहां खेल चुके हैं और अंडर-19 विश्व कप फ़ाइनल में भी उन्होंने 175 रनों की पारी खेली थी।

भारत ने 8 ओवर रहते जिम्बाब्वे के खिलाफ जीता पहला T20I मैच

मयंक यादव और प्रिंस यादव (दो-दो विकेट) की शानदार गेंदबाजी के बाद युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी (50) के तूफानी अर्धतक की बदौलत भारत ने जिम्बाब्वे को पहले टी 20 में गुरूवार को सात विकेट से हराकर श्रेयस अय्यर को उनकी कप्तानी में पहली जीत का स्वाद दे दिया।

भारत ने जिम्बाब्वे को सात विकेट पर 125 रन पर रोकने के बाद 13.2 ओवर में तीन विकेट पर 126 रन बनाकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली। श्रेयस अय्यर की अपनी कप्तानी में छह टी 20 मैचों में लगातार हार के बाद यह पहली जीत है। इस जीत के सूत्रधार रहे वैभव सूर्यवंशी और मयंक यादव। मयंक यादव ने चार ओवर में मात्र 18 रन देते हुए दो अहम विकेट निकाले और ज़िम्बाब्वे को 125 के एक छोटे स्कोर पर रोकने में अहम भूमिक निभाई। सूर्यवंशी ने 19 गेंदों पर 50 रनों की पारी खेली और ज़िम्बाब्वे को मुक़ाबले में उम्मीद पाने का भी मौक़ा नहीं दिया।

सूर्यवंशी ने मात्र 19 गेंदों में चार चौकों और चार छक्कों की मदद से 50 रन की आतिशी पारी खेलकर भारत की जीत का मार्ग प्रशस्त किया। ईशान किशन ने 24 गेंदों में तीन चौकों और दो छक्कों की मदद से 35 रन बनाकर भारत की जीत में योगदान दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर ने 24 गेंदों में नाबाद 28 और तिलक वर्मा ने नाबाद छह रन बनाये।

बिना कदम थकाए जन्नत का करें दीदार, जहां हिमालय पर गाड़ी से पहुंच सकते हैं आप!

अगर आप पहाड़ों (mountain) की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, लेकिन लंबी ट्रेकिंग (trekking) और मुश्किल रास्तों से बचना चाहते हैं, तो हिमालय गांव (Himalayan village) आपके लिए बेहतरीन ऑप्शन हो सकते हैं। यहां आप सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचकर ऊंचे पहाड़, ठंडी हवा, शांत माहौल और अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती का भरपूर आनंद ले सकते हैं:

Zuluk village (जुलुक गांव का शांत और खूबसूरत नजारा)

Full view of Zuluk Village from top of Silk Route Sikkim 21616058 Stock Photo at Vecteezy

सिक्किम (Sikkim) का जुलुक गांव समुद्र तल से करीब 9,400 फीट की ऊंचाई पर है। भारत-चीन (India-China) बॉर्डर के पास बसे इस गांव तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यहां की घुमावदार सड़कें, बादलों से घिरी पहाड़ियां और शांत वातावरण इसे ऑफबीट ट्रैवल (offbeat travel) पसंद करने वालों के लिए खास बनाते हैं।

Silk Route (सिल्क रूट का यूनिक एक्सपीरियंस)

Kalimpong to Zuluk Cycling adventure with cycling in India

जुलुक (Zuluk) सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक ओल्ड सिल्क रूट (Old Silk Route) का हिस्सा होने के कारण भी मशहूर है। यहां आने वाले टूरिस्ट शानदार व्यू पॉइंट्स (viewpoint) के साथ-साथ इस ऐट्रेड रुट की झलक भी देख सकते हैं। भीड़भाड़ से दूर सुकून भरी छुट्टियां (holiday) बिताने के लिए यह शानदार जगह है।

Nako Village (नाको गांव में मिलेगा हिमालय का अलग रूप)

Nako Village, Himachal Pradesh Stock Image - Image of autumn, background: 202877089

हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के किन्नौर जिले में नाको गांव लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है। स्पीति घाटी के नजदीक यह गांव अपनी बौद्ध संस्कृति, शांत माहौल और खूबसूरत पहाड़ी नजारों के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचते ही बदलता प्राकृतिक दृश्य ट्रैवलर को अलग ही एक्सपीरियंस देता है।

adventure and tranquility (एडवेंचर और सुकून का परफेक्ट कॉम्बिनेशन)

Nako Lake reflection in Kinnaur, Himachal

नाको (Nako) की खासियत इसकी अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती और शांत वातावरण है। यहां भूरे पहाड़, साफ आसमान, ठंडी हवा और लोकल कल्चर मिलकर ऐसा एक्सपीरियंस देते हैं, जो शहर की भागदौड़ से पूरी तरह अलग होता है। अगर आप ऑफबीट ट्रिप (offbeat trip), नेचर और फोटोग्राफी (photography) के शौकीन हैं, तो जुलुक और नाको दोनों गांव आपकी ट्रैवल लिस्ट (travel list) में जरूर होने चाहिए।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 7वें वेतन आयोग के गठन को दी मंजूरी, जानिए कर्मचारियों-पेंशनर्स को क्या होगा फायदा, 8वें पे कमीशन पर कैसा असर

वेतन आयोग Update: पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 7वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों के वेतन ढांचे, महंगाई भत्ते (DA), पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस कदम से लाखों कार्यरत कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व भत्तों के भविष्य के पुनरीक्षण का रास्ता साफ हो गया है।

पूर्व केंद्रीय आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाले इस चार सदस्यीय पैनल को 6 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए कहा गया है। राज्य सरकार जरूरत पड़ने पर इस समय सीमा को आगे बढ़ा सकती है।

क्या होता है वेतन आयोग?

वेतन आयोग सरकार द्वारा गठित एक समिति होती है, जिसका मुख्य काम यह जांचना होता है कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में संशोधन की जरूरत है या नहीं। यह आयोग महंगाई, आर्थिक स्थिति, वित्तीय क्षमता और सार्वजनिक प्रशासन की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर मौजूदा वेतन ढांचे की समीक्षा करता है। समीक्षा के आधार पर आयोग पे-स्केल, भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा लाभों में बदलाव की सिफारिश करता है। केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए केंद्रीय वेतन आयोग का गठन करती है, जबकि राज्य सरकारें अपने स्वयं के आयोग का गठन करती हैं और उनकी सिफारिशों को लागू करने का निर्णय स्वतंत्र रूप से लेती हैं।

पश्चिम बंगाल का 7वां वेतन आयोग किन विषयों की जांच करेगा?

आयोग को दिए गए संदर्भ शर्तों के तहत राज्य सरकार के कर्मचारियों के मुआवजे और सेवा ढांचे की व्यापक समीक्षा करने का अधिकार दिया गया है। यह पैनल यहां नीचे दिए गए विषयों की जांच करेगा-

मूल वेतन (Basic Pay), महंगाई भत्ता (DA), विशेष और अन्य भत्ते।

यात्रा भत्ता, पेंशन लाभ, पदोन्नति नीतियां और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ।

आयोग से एक ऐसे परिलब्धि ढांचे का सुझाव देने को कहा गया है जो सरकारी सेवा में प्रतिभाओं को आकर्षित करने और बनाए रखने के साथ-साथ दक्षता, जवाबदेही और कार्य-जीवन संतुलन को बढ़ावा दे सके। नए वेतन ढांचे के तहत मौजूदा कर्मचारियों के वेतन निर्धारण और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन संशोधन के तरीकों की सिफारिश करना भी इसमें शामिल है।

महंगाई भत्ता (DA) की समीक्षा क्यों है खास?

महंगाई भत्ता (DA) सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए दिया जाने वाला जीवन-यापन समायोजन भत्ता है। यह बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में तय होता है और समय-समय पर संशोधित किया जाता है। आयोग को मौजूदा डीए ढांचे की समीक्षा करने और प्रस्तावित वेतन ढांचे के तहत एक उपयुक्त फॉर्मूले की सिफारिश करने का काम सौंपा गया है। यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि उसकी योजना एक बार में बड़ी वृद्धि करने की बजाय राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच के डीए अंतर को धीरे-धीरे कम करने की है।

क्या कर्मचारियों की सैलरी तुरंत बढ़ जाएगी?

नहीं, इस चरण में तुरंत सैलरी नहीं बढ़ेगी। वेतन आयोग का गठन होते ही स्वचालित रूप से वेतन या पेंशन में वृद्धि नहीं होती है। पैनल पहले मौजूदा वेतन ढांचे का अध्ययन करेगा, जरूरत के हिसाब से स्टेकहोल्डर्स से परामर्श करेगा और अपनी सिफारिशें सौंपेगा। रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य सरकार यह तय करेगी कि सिफारिशों को पूरी तरह स्वीकार किया जाए, उनमें संशोधन किया जाए या उन्हें चरणों में लागू किया जाए। यह पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वेतन, भत्तों या पेंशन में कोई संशोधन लागू होगा।

पेंशनभोगियों के लिए क्या हैं संकेत?

यह समीक्षा केवल कार्यरत कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। आयोग से मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन को संशोधित करने की विधि की सिफारिश करने और मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ योजनाओं और चिकित्सा लाभों सहित सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों की जांच करने को कहा गया है। अगर सरकार पैनल की सिफारिशों को स्वीकार करती है तो कार्यरत कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों दोनों के कुल मुआवजे और पेंशन लाभों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

क्या 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का पड़ेगा असर?

राज्य सरकार के संकल्पमें कहा गया है कि आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करते समय 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर भारत सरकार के निर्णय को ध्यान में रख सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य सरकार स्वचालित रूप से केंद्र के वेतन ढांचे को पूरी तरह अपनाएगी। राज्य वेतन आयोग स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और उनकी सिफारिशें राज्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करती हैं।

आगे क्या होगा?

आयोग को गठन के 6 महीने के भीतर जितनी जल्दी हो सके अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। सिफारिशें प्रस्तुत होने के बाद, राज्य सरकार उन्हें लागू करने पर अंतिम फैसला लेने से पहले उनका गहराई से अध्ययन करेगी।

Minnu PM Joshy UPSC story: 21 में शादी, 23 में बच्चा और 32 में यूपीएससी, आसान नहीं थी पुलिस क्लर्क से आईएएस बनने की कहानी

Minnu PM Joshy UPSC story: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से प्रशासनिक सेवा के लिए आयोजित परीक्षा को देश की सबसे मुश्किल और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिना जाता है। सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की तैयारी करने वाले परीक्षार्थी कई मुश्किलों को पार करते हुए अपनी मंजिल हासिल कर पाते हैं। ये सफर किसी भी प्रतियोगी के लिए आसान बिलकुल नहीं होता है। इसलिए मंजिल पर सिर्फ वही पहुंचते हैं, जो निरंतर प्रयास करते रहते हैं। ऐसा ही एक नाम है मिन्नू पीएम जोशी का।

आईएएस ऑफिसर मिन्नू पीएम जोशी के लिए, इस सफर में परिवार की जिम्मेदारियों, फुल-टाइम सरकारी नौकरी और मां बनने के बीच बैलेंस बनाना शामिल था। 6 असफल कोशिशों के बावजूद वह न रुकीं, न थकीं। अंतत: 32 साल की उम्र में वह यूपीएससी की सीएसई में अपनी सफलता का परचम लहराने सफल रहीं। मिन्नू पीएम जोशी ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 150 हासिल की और अपने स्वर्गीय पिता के साथ शेयर किया हुआ सपना पूरा किया।

केरल के पठानमथिट्टा की रहने वाली मिन्नू की कहानी लगन और पक्के इरादे की एक मिसाल बन गई है। कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के बावजूद, वह भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के अपने लक्ष्य के प्रति डटी रहीं।

पिता के सपने को बनाया अपना लक्ष्य

मिन्नू पीएम जोशी ने अपने पुलिस ऑफिसर पिता को तब खो दिया था जब वह स्कूल में थीं। उनकी मौत का परिवार पर गहरा असर पड़ा। 2012 में, वह डाई-इन-हार्नेस स्कीम के तहत पुलिस डिपार्टमेंट में क्लर्क के तौर पर भर्ती हुईं। इस योजना के तहत मृत सरकारी कर्मचारियों के योग्य आश्रितों को नौकरी दी जाती है। अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए उन्होंने केरल यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री में मास्टर डिग्री पूरी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता को हमेशा उम्मीद थी कि वह एक सिविल सर्वेंट बनेंगी, एक सपना जो बाद में उनका अपना सपना बन गया।

मिन्नू ने 21 साल की उम्र में इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) के एक अधिकारी जोशी डीजे से शादी की। वह 23 साल की उम्र में मां बन गईं, जिससे एक सरकारी कर्मचारी के तौर पर उनकी भूमिका में परिवार की जिम्मेदारियां भी जुड़ गईं। इस वजह से उनकी यूपीएससी की तैयारी में देरी हुई, लेकिन उन्होंने अपने सपने को नहीं छोड़ा।

मिन्नू पीएम जोशी का यूपीएससी सफर

उन्होंने 26 साल की उम्र में सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी, उन्होंने ठान लिया था कि वह सिर्फ अपने गुजरे हुए पिता की जगह सरकारी सेवा में जाने के बजाय अपनी उपलब्धियों के आधार पर एक पहचान बनाएंगी।

उन्होंने एक डिसिप्लिन्ड रूटीन को फॉलो किया। वह सुबह शंकर लाइब्रेरी में अखबार, खासकर द हिंदू, पढ़ती थीं, और बाद में गाइडेंस के लिए शंकर आईएएस एकेडमी में एडमिशन ले लिया। वह दिन में ऑफिस के काम और रात में पढ़ाई के बीच बैलेंस बनाती थीं और साथ ही अपने परिवार का भी ध्यान रखती थीं। छह कोशिशों के बाद, मिन्नू ने 32 साल की उम्र में यूपीएससी परीक्षा में एआईआर 150 हासिल की।

मिन्नू पीएम जोशी पर एक नजर

होमटाउन : पठानमथिट्टा, केरल

एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : बायोकेमिस्ट्री में मास्टर्स, केरल यूनिवर्सिटी

सरकारी नौकरी : केरल पुलिस डिपार्टमेंट में क्लर्क (2012)

शादी हुई : 21 साल में

मां बनीं : 23 साल में

यूपीएससी की तैयारी शुरू की : 26 साल

यूपीएससी की कोशिशें : 6

यूपीएससी रैंक : AIR 150

यूपीएससी पास किया : 32 साल में

मिन्नू पीएम जोशी की मौजूदा पोस्टिंग

खबरों के मुताबिक, IAS मिन्नू पीएम जोशी अभी असिस्टेंट कलेक्टर, भटकुली-तिवसा सब-डिवीजन, अमरावती, महाराष्ट्र में काम कर रही हैं। पुलिस डिपार्टमेंट के क्लर्क से आईएएस अधिकारी बनने का उनका सफर सालों की लगातार कोशिशों को दिखाता है, जिसमें उन्होंने प्रोफेशनल जिम्मेदारियों के साथ फैमिली लाइफ और एकेडमिक तैयारी को बैलेंस किया है।

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