नेपाल के प्रधानमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट में दखल का आरोप:3 जजों पर इस्तीफे का दवाब बना रहे बालेन शाह; अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर सुप्रीम कोर्ट को अपने पक्ष में करने की कोशिश के आरोप लगे हैं। तीन अंतरराष्ट्रीय संगठनों एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट्स (ICJ) ने संयुक्त बयान जारी कर यह आरोप लगाए हैं। संगठनों का कहना कि सरकार तीन वरिष्ठ न्यायाधीशों पर इस्तीफा देने का दबाव बना रही है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है। संगठनों का कहना है कि सरकार का मकसद सुप्रीम कोर्ट की संरचना बदलना है। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं जिनसे अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो सकती है और संवैधानिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है। मुख्य न्यायधीश की नियुक्ति को लेकर भी विवाद बयान में मनोज कुमार शर्मा को नेपाल का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। शर्मा उस समय वरिष्ठता क्रम में चौथे स्थान पर थे। उनसे सीनियर तीन न्यायाधीश को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी वजह से विवाद शुरू हुआ। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को ही मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया गया और मनोज शर्मा को तब यह पद दिया गया जब उनसे सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल मौजूद थे। इसके अलावा संगठन का आरोप है कि मनोज कुमार शर्मा के खिलाफ मिली शिकायतों की भी खुली और निष्पक्ष जांच नहीं की गई। संसदीय सुनवाई समिति को शर्मा के खिलाफ कुल 16 शिकायतें मिली थीं। हालांकि ये शिकायतें गोपनीय रखी गई और मीडिया के सामने पेश नहीं की गईं। बिना सबूत के जजों पर इस्तीफे का दबाव बयान में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में शर्मा से तीन सीनियर जस्टिस सपना प्रधान मल्ला, कुमार रेग्मी और हरि फुयाल पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया जा रहा है। संगठनों का कहना है कि अब तक इन तीनों के खिलाफ ऐसा कोई सार्वजनिक आरोप या ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि उन्होंने कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी गलती की है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि नेपाल के संविधान के मुताबिक, किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होते ही उसे तुरंत निलंबित कर दिया जाता है। अगर सुप्रीम कोर्ट के तीनों वरिष्ठ न्यायाधीशों को एक साथ निलंबित किया गया तो अदालत की संरचना और कामकाज पर बड़ा असर पड़ेगा। यह ऐसे समय में होगा, जब सुप्रीम कोर्ट सरकार के कई अहम फैसलों और संवैधानिक मामलों की सुनवाई कर रही है। संगठनों का कहना है कि अगर बिना ठोस संवैधानिक आधार के महाभियोग का इस्तेमाल किया गया तो इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार अदालत की संरचना बदलकर लंबित मामलों के फैसलों को प्रभावित करना चाहती है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जनता का भरोसा भी कमजोर हो सकता है। संवैधानिक परिषद में बदलाव पर आपत्ति जताई इन संगठनों ने मई 2026 में संवैधानिक परिषद अधिनियम में अध्यादेश के जरिए किए गए संशोधन पर भी आपत्ति जताई है। नेपाल में संवैधानिक परिषद एक अहम संस्था है। यही परिषद मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयोग, मानवाधिकार आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों के प्रमुखों की नियुक्ति के लिए नामों की सिफारिश करती है। विवाद इस बात पर है कि बालेन शाह सरकार ने मई 2026 में संसद से कानून पारित कराने के बजाय अध्यादेश के जरिए परिषद के काम करने के नियम बदल दिए। पहले बैठक के लिए ज्यादा सदस्यों की मौजूदगी जरूरी थी। नियुक्तियों पर व्यापक सहमति या पूरे परिषद के बहुमत की जरूरत पड़ती थी। अब संशोधन के बाद कम सदस्यों की मौजूदगी में भी बैठक हो सकती है। इतना ही नहीं बैठक में मौजूद सदस्यों के साधारण बहुमत से फैसला लिया जा सकता है। —————————— नेपाल से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

हिमाचल प्रदेश में दर्दनाक हादसा: चलती गाड़ी पर गिरा पहाड़ का हिस्सा, 13 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। उदयपुर-पांगी रोड पर भूस्खलन के दौरान पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर एक चलती टाटा सूमो पर गिर पड़े। इस हादसे में 6 महीने के एक मासूम बच्चे समेत 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोग किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, टाटा सूमो में कुल 15 लोग सवार थे। यह गाड़ी कुल्लू से किल्लर जा रही थी। रास्ते में भूस्खलन संभावित क्षेत्र काडू नाला के पास अचानक पहाड़ी से भारी चट्टानें गाड़ी पर आ गिरीं, जिससे वाहन पूरी तरह दब गया।

हादसे के बाद गाड़ी के पिछले हिस्से में आग भी लग गई। आसपास मौजूद लोगों और सेना के जवानों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और राहत कार्य शुरू किया। घटना के वीडियो में गाड़ी पूरी तरह क्षतिग्रस्त और आग की लपटों में घिरी हुई दिखाई दे रही है।

हादसे में 13 लोगों की मौत, दो ने कूदकर बचाई जान

भरमौर के विधायक जनक राज ने बताया कि टाटा सूमो में कुल 15 लोग सवार थे। इनमें से 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग हादसे से कुछ पल पहले गाड़ी से कूद गए, जिससे उनकी जान बच गई। उन्होंने चंबा और लाहौल-स्पीति के जिला प्रशासन से राहत और बचाव कार्य तेज करने की अपील की। लाहौल-स्पीति की उपायुक्त किरण बडाना ने भी इस हादसे में 13 लोगों की मौत की पुष्टि की है।

शुरुआती जानकारी के अनुसार, खराब मौसम की वजह से उदयपुर-किल्लर सड़क एक दिन पहले बंद कर दी गई थी, जिससे कई यात्री टिंडी में रुक गए थे। शुक्रवार को सड़क खुलने के बाद सभी लोग पांगी के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में यह दर्दनाक हादसा हो गया। फिलहाल मृतकों की पहचान की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

पुलिस ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही बचाव दल को तुरंत मौके पर भेज दिया गया। राहत और बचाव का काम लगातार जारी है और प्रशासन पूरे हालात पर नजर बनाए हुए है। किल्लर-उदयपुर सड़क दूर-दराज के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरती है। मानसून के दौरान इस रास्ते पर अक्सर भूस्खलन और पहाड़ों से पत्थर गिरने का खतरा बना रहता है। यह हादसा ऐसे समय हुआ है, जब हिमाचल प्रदेश में लगातार भारी बारिश हो रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 23 से 26 जुलाई तक कई जिलों के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, 27 जुलाई से मानसून और ज्यादा सक्रिय होने की संभावना है, जिसके चलते 29 जुलाई तक राज्य के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम में पहाड़ी और जोखिम वाले रास्तों पर बेवजह यात्रा करने से बचें, क्योंकि लगातार बारिश से भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा काफी बढ़ गया है।

Tata Consumer Q1 Results: प्रॉफिट 28 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये, रेवेन्यू 12% बढ़ा

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने 24 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 27.8 फीसदी बढ़कर 427 करोड़ रुपये हा। इस दौरान रेवेन्यू करीब 12 फीसदी बढ़ा। कंपनी के प्रॉफिट और रेवेन्यू दोनों ही एनालिस्ट्स के अनुमान से ज्यादा रहे। कंपनी का शेयर 24 जुलाई को 1.42 फीसदी चढ़कर 1,092 रुपये पर बंद हुआ।

रेवेन्यू 11.9 फीसदी बढ़कर 5348 करोड़ रुपये रहा

Tata Consumer Products का रेवेन्यू जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 11.9 फीसदी बढ़कर 5,348.8 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,778.9 करोड़ रुपये था। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने रेवेन्यू 5,340 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। EBITDA जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 19.9 फीसदी बढ़कर 724 करोड़ रुपये रहा।

EBITDA मार्जिन जून तिमाही में 13.5 फीसदी पहुंच गया

कंपनी का EBITDA मार्जिन जून तिमाही में बढ़कर 13.5 फीसदी हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.7 फीसदी था। यह सीएनबीसी-टीवी8 के पोल में एनालिस्ट्स के 13.6 फीसदी के अनुमान से थोड़ा कम है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स टाटा समूह की कंपनी है। यह नमक, चाय, कॉफी सहित कई तरह के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स बनाती है।

भारत में कंपनी के ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन भी अच्छा रहा

टाटा कंज्यूमर के एमडी एवं सीईओ सुनील डिसूजा ने कहा, “एक बार फिर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ डबल डिजिट में रही। इसमें वॉल्यूम ग्रोथ का बड़ा हाथ है। इससे कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट ग्रोथ 29 फीसदी पहुंच गई। इंडिया में ब्रांडेड बिजनेस का प्रदर्शन अच्छा रहा। कंपनी की ग्रोथ बिनजेस की ग्रोथ भी स्ट्रॉन्ग रही।” कंपनी के इंडिया बिजनेस का रेवेन्यू 13 फीसदी बढ़कर 3,540 करोड़ रुपये रहा।

चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही

जून तिमाही में भारत में कंपनी के चाय बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 2 फीसदी रही, जबकि रेवेन्यू कम रहा। कंपनी ने कहा है कि कंपनी ने चाय की कीमतों में कमी का फायदा ग्राहकों को दिया। नमक से रेवेन्यू 7 फीसदी बढ़ा। कॉफी बिजनेस की रेवेन्यू ग्रोथ 24 फीसदी रही। कंपनी के रेडी-टू-ड्रिंक बिजनेस की वॉल्यूम ग्रोथ 35 फीसदी रही।

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट 

24 जुलाई को शेयर बाजारों पर दबाव देखने को मिला। इस हफ्ते लगातार पांचवें दिन बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स गिरकर बंद हुए। निफ्टी 0.43 फीसदी यानी 102 अंक गिरकर 23,767 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.43 फीसदी यानी 331 अंक की कमजोरी के साथ 76,059 पर क्लोज हुआ। बैंक निफ्टी में 0.18 फीसदी की तेजी रही।

Market outlook : लाल निशान में बंद हुआ बाजार, जानिए 27 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market outlook :24 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स कमजोरी के साथ बंद हुए और निफ्टी 23,800 के नीचे चला गया। मार्केट बंद होने पर सेंसेक्स 331.62 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंक या 0.43 प्रतिशत गिरकर 23,767.45 पर बंद हुआ। लगभग 2050 शेयरों में बढ़त हुई,1961 शेयरों में गिरावट आई और 196 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस,एटरनल, M&M, श्रीराम फाइनेंस और भारती एयरटेल शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में HCL टेक्नोलॉजीज,विप्रो,सिप्ला,ITC और HDFC लाइफ शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस मिली-जुली रही। निफ्टी मीडिया सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी IT (0.8% ऊपर),निफ्टी PSU बैंक (0.5% ऊपर)और निफ्टी बैंक (0.18% ऊपर)रहे।

दूसरी ओर निफ्टी ऑटो सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.10% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी मेटल (0.55% नीचे),निफ्टी एनर्जी (0.57% नीचे),निफ्टी रियल्टी (0.55% नीचे),निफ्टी ऑयल एंड गैस (0.46% नीचे),निफ्टी फार्मा (0.4% नीचे) और निफ्टी इंफ्रा (0.4% नीचे) रहे।

ब्रॉडर मार्केट भी अपने इंट्राडे निचले स्तरों से सुधरे। निफ्टी मिडकैप 100 बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च,विनोद नायर ने कहा कि आने वाले समय में मार्केट का सेंटीमेंट खराब रह सकता है। तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहने से मेन मैक्रो-इकोनॉमिक इंडिकेटर्स और ग्रोथ पर बुरा असर पड़ सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें संकट के समय के अपने पीक से काफी नीचे होने के बावजूद US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 52-हफ्ते के हाई पर पहुंच गए हैं। यह बॉन्ड मार्केट की उन चिंताओं को दिखाता है जो एनर्जी से जुड़ी महंगाई के जोखिम,मजबूत लेबर मार्केट की स्थिति और फेड के लगातार सख़्त रुख (hawkish stance) से जुड़ी हैं।

इन वजहों से सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ गई है। इंपोर्ट पर वॉशिंगटन के नए टैरिफ ने एक्सपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टेक्नोलॉजी इंटेसिव मार्केट पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है,क्योंकि ग्रोथ पर ऊंची दरों का दबाव है और निवेशक दूसरे उभरते हुए मार्केट की ओर रुख करके जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि अच्छे वैल्यूएशन और क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों के चलते बैंक निफ्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।

निफ्टी का आउटलुक

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च सुदीप शाह का कहना है कि आगे निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 23650-23600 के जोन में दिख रहा है। अगर निफ्टी इस जोन के नीचे टिकता है,तो इसमें और गिरावट आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 23450 और फिर 23300 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ,निफ्टी के लिए तकाल रेजिस्टेंस 23950-24000 के जोन में है,जो 50-दिन के EMA के साथ मेल खाता है।

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बैंक निफ्टी का आउटलुक

सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी में भी निफ्टी जैसी ही शुरुआती कमजोरी दिखी। यह निचले स्तर पर खुला और नीचे की ओर गया,लेकिन फिर इंट्राडे के निचले स्तरों से तेज रिकवरी हुई जिससे नुकसान की भरपाई हो गई। इस रिकवरी की वजह से डेली चार्ट पर एक बड़ी बुलिश कैंडल बनी और इंडेक्स ने अपना 200-डे का EMA फिर से हासिल कर लिया,जो ट्रेडर्स के लिए एक अहम लॉन्ग-टर्म सपोर्ट लेवल है।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57100-57200 जोन में है। अगर यह इस जोन के ऊपर टिकता है तो बैंक निफ्टी अपनी रिकवरी को 57600 और उसके बाद शॉर्ट टर्म में 58000 तक बढ़ा सकता है। नीचे की तरफ,बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56300-56200 जोन में है।

 

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Stock Market Fall: सेंसेक्स 332 अंक गिरकर बंद; लगातार 5वें दिन लाल, निवेशकों के ₹91511 करोड़ स्वाहा

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार, 24 जुलाई को लगातार 5वें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। दिन में सेंसेक्स ने 917 अंकों की तगड़ी मार झेली और 75,474.43 के लो तक चला गया। निफ्टी भी 263 अंक तक टूटकर 23,606.30 के लो तक गया। हालांकि बाद में रिकवरी हुई। सेंसेक्स 331.62 अंकों की गिरावट के साथ 76,059.77 पर और निफ्टी 102.15 अंकों की गिरावट के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ।

इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 91,510.68 करोड़ रुपये घट गया। गुरुवार, 23 जुलाई को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,76,60,985.926 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट बंद होने पर यह घटकर 4,75,69,475.24 करोड़ रुपये हो गया।

NSE पर एचसीएल टेक्नोलोजिज, सिप्ला, विप्रो, आईटीसी, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी टॉप गेनर्स रहे। वहीं इटर्नल, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, बजाज ऑटो टॉप लूजर्स रहे।

एक दिन पहले कैसी रही थी चाल

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल के दाम में उछाल से गुरुवार को सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 पर बंद हुआ था। निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,869.60 अंक पर बंद हुआ था।

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रुपये की चाल

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे मजबूत होकर 96.51 पर पहुंच गया। बाद में यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 96.55 (अस्थायी) पर बंद हुआ। खबरों के मुताबिक, इसमें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की संभावित दखलंदाजी का भी हाथ रहा, जिसके जरिए कच्चे तेल की कीमत में उछाल के बीच रुपये में और गिरावट को रोकने की कोशिश की गई। इसके अलावा कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी घरेलू करेंसी को कुछ सहारा दिया। रुपया गुरुवार को 20 पैसे की गिरावट के साथ 96.73 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 6 प्रतिशत लुढ़क गया। जापान का निक्केई 225, चीन का एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग भी गिरावट में हैं। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे।

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Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर 56 साल बाद एक साथ 3 राजयोगों का बना दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चारों वेदों और महाभारत के रचयिता ऋषि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही, इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा लोग अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और उनका आभार जताते हैं।

माना जाता है कि इस दिन जो लोग अपने माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों को अपना गुरु मानकर उनका सम्मान करते हैं, उन्हें सद्गति प्राप्त होती है। इस दिन अपने गुरु के पास जाकर उनके चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। इस बार गुरु पूर्णिमा पर ग्रहों का बहुत अद्भुत और शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ऐसा संयोग 56 वर्षों में पहली बार देखने को मिल रहा है। आइए जानें इस दिन की विशेष पूजा विधि, मुहूर्त और इस दिन बन रहे 3 राजयोगों के बारे में

गुरु पूर्णिमा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से होगी। इसका समापन 29 जुलाई को रात 08:05 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा।

सत्यनारायण व्रत और गुरु पूजन का समय

29 जुलाई को सुबह 05:41 बजे से लेकर प्रातः 09:47 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा। इस दौरान आप सत्यनारायण भगवान की कथा और अपने गुरु का पूजन कर सकते हैं।

56 साल बाद बन रहे हैं 3 राजयोग

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार गुरु पूर्णिमा पर एक साथ 3 राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन बुधादित्य राजयोग, शश महापुरुष और हंस राजयोग बन रहा है। बुधादित्य राजयोग सूर्य और बुध की युति से बनता है, जो बौद्धिक क्षमता, करियर और मान-सम्मान में वृद्धि करेगा। वहीं, इस दिन ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण शश राजयोग जैसे शक्तिशाली योग भी बन रहे हैं।

गुरु पूर्णिमा पूजा मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:17 से 04:59 बजे तक

प्रातःकाल पूजा का श्रेष्ठ समय : सुबह 05:41 से 09:05 बजे तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:43 से 03:37 बजे तक

सांध्यकाल मुहूर्त : शाम 07:14 से रात 08:17 बजे तक

राहुकाल : दोपहर 12:27 PM से 02:08 PM बजे तक

पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और गुरु/महर्षि वेदव्यास जी का ध्यान करके व्रत/पूजन का संकल्प लें।

महर्षि वेदव्यास जी (आदि गुरु) के चित्र या मूर्ति पर रोली, चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें।

अपने प्रत्यक्ष गुरुजनों का आशीर्वाद लें, वस्त्र/फल/दक्षिणा भेंट करें और उनका पूजन करें।

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Rising Bharat Summit: जैकी भगनानी से शादी के बाद रकुल प्रीत सिंह की लाइफ में नहीं आया कोई फर्क, बोलीं- ‘नहीं हुआ खास बदलाव’

Rising Bharat Summit: शुक्रवार को बेंगलुरु में हुए News18 राइजिंग भारत समिट में रकुल प्रीत सिंह ने प्रोड्यूसर-एक्टर जैकी भगनानी से शादी के बाद की ज़िंदगी के बारे में बात की। एक्ट्रेस ने कहा कि उनका रिश्ता शादीशुदा जिंदगी में इतनी आसानी से बदल गया है कि उन्हें कोई खास फर्क महसूस नहीं होता।

इस इवेंट में बातचीत के दौरान, रकुल ने पिछले कुछ सालों के अपने सफर को याद किया और बताया कि कैसे शादी ने उनके रिश्ते की नींव को बदले बिना उनकी ज़िंदगी में एक नया अध्याय जोड़ा है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह सिर्फ़ एक एक्टर से एंटरप्रेन्योर और अब एक पत्नी बनने के सफ़र से गुज़री हैं, तो रकुल हंसीं और बोलीं, “मैं सोच रही थी कि एंटरप्रेन्योर के बाद क्या आता है! ओह हां, पत्नी।”

यह पूछे जाने पर कि शादीशुदा ज़िंदगी अब तक कैसी रही है, एक्ट्रेस ने कहा कि वह और जैकी इस नए दौर में आसानी से ढल गए हैं। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है – नो नजर -अभी सिर्फ़ ढाई साल ही हुए हैं, लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि हमें कोई फ़र्क महसूस नहीं होता। हम दोनों ज़िंदगी के इस दौर में बहुत आसानी से ढल गए हैं। यह बहुत अच्छा लग रहा है।”

बातचीत के दौरान, रकुल से यह भी पूछा गया कि क्या किसी फ़िल्मी परिवार में शादी करने से उनके क्रिएटिव फ़ैसलों या एक एक्टर के तौर पर चुने गए प्रोजेक्ट्स पर कोई असर पड़ा है। एक्ट्रेस ने तुरंत साफ़ किया कि उनका रिश्ता हमेशा दो लोगों के बीच रहा है, न कि उनके प्रोफेशन के आधार पर। शुरू में, जब हमने डेटिंग शुरू की, तो बात हमेशा दो लोगों के बीच की थी। ऐसा नहीं था कि ‘अरे, वह फ़िल्म इंडस्ट्री से हैं, इसलिए वह अपने-आप मेरे प्रोफेशन को समझ लेंगे।

उन्होंने कहा कि यह कपल अपने करियर की वजह से नहीं, बल्कि ज़िंदगी के प्रति एक जैसी सोच की वजह से एक-दूसरे से जुड़ा। “हम सच में एक-दूसरे के साथ घुल-मिल गए क्योंकि हम अंदर से काफ़ी एक जैसे हैं, खासकर जब बात हमारे लाइफ़स्टाइल और वैल्यूज़ की आती है।”

रकुल ने आगे बताया कि वह और जैकी दोनों ही अपने प्रोफेशनल फ़ैसले आज़ादी से लेते हैं और एक-दूसरे के करियर से जुड़े मामलों में दखल नहीं देते।

Raksha Bandhan Essay: राखी पर्व पर हिन्दी निबंध: वर्तमान समय में रक्षा बंधन का त्योहार

A photo related to the festival of Rakhi, a symbol of the sacred bond of love between siblings. The image includes a caption for an essay on Raksha Bandhan

Rakhi, Raksha Bandhan Festival Essay: रक्षा बंधन केवल रेशम के धागों और मिठाइयों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस गहरी जड़ से जुड़ा है जो रिश्तों की पवित्रता, समर्पण और सुरक्षा का पाठ पढ़ाती है। पौराणिक काल से लेकर आज तक इस त्योहार की मूल आत्मा वही है- भाई और बहन के बीच निस्वार्थ प्रेम। परंतु समय के बदलाव के साथ-साथ वर्तमान दौर में रक्षा बंधन को मनाने के तरीकों, इसके अर्थ और इसके सामाजिक विस्तार में काफी नयापन आया है।ALSO READ: Essay on Friendship Day: फ्रेंडशिप डे: दोस्ती के अटूट बंधन का खूबसूरत पर्व, पढ़ें हिन्दी में रोचक निबंध

 

  • प्रस्तावना
  • वर्तमान समय में रक्षा बंधन का महत्व
  • आधुनिक युग में रक्षा बंधन
  • सामाजिक संदेश
  • उपसंहार

 

प्रस्तावना

रक्षा बंधन भारत के प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को दर्शाता है, जिसमें रिश्तों को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। यह केवल भाई-बहन के रिश्ते का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान, कर्तव्य और सुरक्षा का प्रतीक भी है। बदलते समय के साथ रक्षा बंधन का स्वरूप भले ही आधुनिक हुआ हो, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी पहले जैसी ही पवित्र और मजबूत है।

 

वर्तमान समय में रक्षा बंधन का महत्व

आज के व्यस्त जीवन और भागदौड़ भरे समय में परिवार के सभी सदस्य एक साथ कम ही मिल पाते हैं। ऐसे में रक्षा बंधन का त्योहार परिवार को जोड़ने का एक सुंदर अवसर बनकर आता है। इस दिन भाई-बहन चाहे कितनी भी दूर क्यों न हों, वे एक-दूसरे से मिलने या ऑनलाइन माध्यम से अपनी शुभकामनाएं साझा करने का प्रयास करते हैं। इससे रिश्तों में अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव बना रहता है।

 

आज रक्षा बंधन केवल एक पारिवारिक त्योहार नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव का भी प्रतीक बन गया है। कई स्थानों पर बहनें सैनिकों, पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों और समाज की सेवा करने वाले लोगों को भी राखी बांधकर उनके प्रति सम्मान और विश्वास व्यक्त करती हैं। इससे यह संदेश मिलता है कि रक्षा का संबंध केवल परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ा हुआ है।

 

आधुनिक युग में रक्षा बंधन

तकनीक के विकास ने इस पर्व को और अधिक सहज बना दिया है। जो भाई-बहन विदेश या दूसरे शहरों में रहते हैं, वे ऑनलाइन राखी भेजते हैं, वीडियो कॉल के माध्यम से त्योहार मनाते हैं और डिजिटल उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। ई-कॉमर्स और ऑनलाइन सेवाओं ने भी इस पर्व को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लोग इको-फ्रेंडली राखियों का उपयोग करने लगे हैं। बीज वाली राखियां, हस्तनिर्मित राखियां और प्राकृतिक सामग्री से बनी राखियां पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश देती हैं। साथ ही, प्लास्टिक के उपयोग से बचने की प्रेरणा भी मिलती है।

 

सामाजिक संदेश

रक्षा बंधन हमें केवल भाई-बहन के रिश्ते की याद नहीं दिलाता, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों का संदेश भी देता है। आज समाज में यह आवश्यक है कि रक्षा का अर्थ केवल सुरक्षा देने का वादा न होकर, महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी हो। यही इस पर्व की आधुनिक और व्यापक सोच है।

 

उपसंहार

रक्षा बंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो प्रेम, विश्वास, अपनापन और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करता है। आधुनिक समय में इसके मनाने के तरीके भले बदल गए हों, लेकिन इसकी आत्मा आज भी वही है- रिश्तों को सहेजना और उन्हें सम्मान देना। यदि हम इस त्योहार के मूल संदेश को अपने जीवन में अपनाएं, तो परिवार के साथ-साथ समाज में भी प्रेम, एकता और सद्भाव का वातावरण मजबूत होगा। इसलिए रक्षा बंधन केवल एक धार्मिक या पारिवारिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का जीवंत उत्सव है।

 

आज बदलते समय के साथ रक्षा बंधन का स्वरूप और भी व्यापक हो गया है। आज यह त्योहार केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है, बल्कि गुरु-शिष्य, मित्र, सैनिकों, समाजसेवियों और मानवता के प्रति सम्मान और विश्वास का प्रतीक भी बन चुका है। आधुनिक युग में ऑनलाइन राखी, वीडियो कॉल और डिजिटल उपहारों ने इस पर्व को वैश्विक पहचान दिलाई है, जबकि इको-फ्रेंडली राखियों का चलन पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है।

 

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भारतीय Gen-Z ने मेलोनी से की पीएम मोदी की शिकायत, छात्र बोले, मोदीजी को समझाओ न प्‍लीज

Gen-Z protest

नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और नतीजों को लेकर सड़कों पर उतरे Gen-Z छात्रों ने अब विरोध का एक बेहद अनूठा और रचनात्मक 'डिजिटल' रास्ता खोज निकाला है। अपनी बात सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाने के लिए छात्रों ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट का रुख कर लिया है।

सोशल मीडिया पर लोकप्रिय 'Melodi' (मोदी + मेलोनी) ट्रेंड का सहारा लेते हुए भारतीय युवाओं ने मेलोनी के पोस्ट्स के कमेंट सेक्शन को अपने तीखे व्यंग्य, मजेदार रील्स और गुहार से पाट दिया है। कुल मिलाकर छात्रों ने मेलोनी से पीएम मोदी की शिकायत कर डाली। सड़कों पर बैनर-पोस्टर लहराने के साथ-साथ यह डिजिटल विरोध अब इंटरनेट पर ज़बरदस्त सुर्खियां बटोर रहा है।

मेलोनी के कमेंट सेक्शन में पहुंचे 'नीट एस्पिरेंट्स'
जब इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर तस्वीरें शेयर कीं, तो उन्हें अंदाज़ा भी नहीं रहा होगा कि भारत के लाखों मेडिकल छात्र वहां अपनी फरियाद और मोदी जी की शिकायत लेकर पहुंच जाएंगे।

इंटरनेट पर एक्टिव Gen-Z छात्रों ने मेलोनी और पीएम मोदी की ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग पर चुटकी लेते हुए कमेंट्स की बाढ़ ला दी। छात्रों का कहना है कि “जब हमारी बात सीधे नहीं सुनी जा रही, तो क्यों न 'इंटरनेशनल इन्फ्लुएंस' का इस्तेमाल किया जाए!”

‘मैम, जरा बोलिए ना’: मेलोनी के अकाउंट पर दिखे ये मजेदार कमेंट्स
मेलोनी के इंस्टाग्राम पोस्ट के नीचे भारतीय छात्रों के कमेंट्स पढ़कर कोई भी अपनी हंसी नहीं रोक पा रहा है। कुछ सबसे ज्यादा वायरल और ट्रेंडिंग कमेंट्स हैं:

'मेलाडी' बॉन्ड का वास्ता: “मेलोनी मैम, आपकी और हमारे पीएम की दोस्ती बहुत अच्छी है। प्लीज उनसे बोलिए न कि नीट (NEET) के छात्रों का दुख समझें और री-एग्जाम करवाएं!” और पेपर लीक रूकवाए। अपने बॉयफ्रेंड से कहो, बच्‍चों की बातें सुन लें। मोदी अच्‍छा आदमी नहीं है, इन्‍हें छोड दो। आप बोलो तो आपकी तो मोदी जी सुन लेंगे।

पंचायत स्टाइल में गुहार: मैम! हमारे वाले पीएम सर आपकी बात तो पक्का सुनेंगे। एक बार बस बोल दीजिए कि NTA की जांच बिठाई जाए।”

'रिलेशनशिप' वाला तंज: मैम, सच्चा दोस्त वही होता है जो सही समय पर सही सलाह दे। आप ही हमारे पीएम को समझाइए कि 720 में से 720 नंबर बांटना कितना अजीब है!”

इटैलियन पिज्जा और चाय का तंज: अगली बार जब आप चाय-पिज्जा पर मिलें, तो प्लीज हमारी नीट की मार्कशीट भी टेबल पर रख दीजिएगा!

देसी अंदाज: मैम, भाभी जी समझकर आपसे हक से कह रहे हैं… NTA का कुछ करवाइए, यहां बच्चे डिप्रेशन में हैं! Gen-Z छात्रों के इस कदम ने यह साफ कर दिया है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी मांगों को रखने के लिए सिर्फ नारेबाजी पर निर्भर नहीं है। डार्क ह्यूमर और पॉप-कल्चर रेफरेंस का सहारा लेकर वे गंभीर से गंभीर मुद्दे को ट्रेंडिंग टॉपिक बनाने का हुनर रखते हैं।

सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह का 'मीम प्रोटेस्ट' अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों का ध्यान खींचता है और यह बिना किसी हिंसा या तोड़फोड़ के अपनी बात को पुरजोर तरीके से दुनिया के सामने रखने का एक नया तरीका बन चुका है।

50MP कैमरा के साथ iQOO का नया 5G फोन लॉन्च, 6500mAh बैटरी और 44W फास्ट चार्जिंग से होगा लैस

अगर आप कम कीमत में एक स्मार्टफोन लेना चाहते हैं तो, iQOO ने भारत में आधिकारिक तौर पर iQOO Z11 Lite 5G लॉन्च कर दिया है। Vivo के इस सब-ब्रांड ने अपने इस नए फोन में MediaTek Dimensity 6300 प्रोसेसर, 6500mAh की बैटरी और 120Hz डिस्प्ले दिया है। साथ ही इंट्रोडक्टरी ऑफर्स के साथ इसकी शुरुआती कीमत 18,000 रुपये से कम रखी है। अब आइए iQOO Z11 Lite 5G के फीचर्स, स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में डिटेल में जानते हैं।

iQOO Z11 Lite के स्पेसिफिकेशन्स

चीन की स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी iQOO ने Z11 Lite में 6.74-इंच का HD+ IPS LCD डिस्प्ले दिया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 1,200 निट्स तक की हाई ब्राइटनेस के साथ आएगा। स्क्रीन में सेल्फी कैमरे के लिए वॉटरड्रॉप नॉच है, और फोन की मोटाई 8.4mm है और वजन 209 ग्राम है।

यह हैंडसेट MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट पर चलता है, जिसमें LPDDR4X RAM और UFS 2.2 स्टोरेज दिया गया है। iQOO के अनुसार, AnTuTu बेंचमार्क पर इस फोन का स्कोर 5,79,000 से ज्यादा है।

सॉफ्टवेयर की बात करें तो, यह डिवाइस Android 16 पर आधारित OriginOS 6 के साथ आता है। चीनी टेक कंपनी ने इस फोन में दो साल के Android OS अपग्रेड और चार साल के सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है। इसके अलावा, इसमें AI फीचर्स भी शामिल हैं, जैसे AI क्रिएशन, AI कैप्शन्स और Google Gemini इंटीग्रेशन।

पावर देखें तो, Z11 Lite में 44W फासस्ट चार्जिंग के साथ 6500mAh की बैटरी दी गई है। iQOO का कहना है कि सिर्फ 10 मिनट की चार्जिंग से 8 घंटे तक कॉलिंग या 7 घंटे से ज्यादा समय तक ऑनलाइन वीडियो देखा जा सकता है। यह फोन वायर्ड रिवर्स चार्जिंग और बायपास चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है।

कैमरे की बात करें तो, इस फोन के रियर में 50MP का Sony मेन कैमरा और एक सेकेंडरी सेंसर है, जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है।

इस डिवाइस में धूल और पानी की छींटों से बचाव के लिए IP65 रेटिंग के साथ-साथ मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी और SGS 5-स्टार ड्रॉप रेजिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी मिलता है।

भारत में iQOO Z11 Lite की कीमत, रंग और उपलब्धता

iQOO Z11 Lite 5G के 4GB + 128GB वेरिएंट की शुरुआती कीमत ₹19,499 है, जबकि 6GB + 128GB मॉडल की कीमत ₹21,499 और 6GB + 256GB वर्शन की कीमत ₹24,499 है। वहीं, 1,500 रुपये के एलिजिबल बैंक ऑफर के साथ, इस फोन की शुरुआती कीमत घटकर ₹17,999 हो जाती है।

यह स्मार्टफोन 30 जुलाई से Amazon, iQOO इंडिया की वेबसाइट और अधिकृत रिटेल स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। इच्छुक ग्राहक Solar Flame और Midnight Blue के कलर ऑप्शन में इसे चुन सकते हैं।

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