अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला शुक्रवार से लागू हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से बने सामान के आयात को लेकर 60 देशों पर कार्रवाई की है। अमेरिका ने इन देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। वहीं बाकी 43 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका ने यह कार्रवाई ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत की है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत कई देशों को 10% टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने सामान पर प्रतिबंध लगाया है या ऐसा करने की दिशा में कदम उठाए हैं। सेक्शन 301 क्या है, जिसके तहत अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाया सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 का एक प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर किसी देश की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी कारोबार या उद्योगों के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या नुकसानदायक मानी जाएं, तो वह उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस कार्रवाई में अतिरिक्त टैरिफ लगाना, आयात पर प्रतिबंध लगाना या दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। जांच की जिम्मेदारी अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की होती है। जांच के दौरान संबंधित देश से जवाब मांगा जाता है और जरूरत पड़ने पर बातचीत भी की जाती है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की मंजूरी से कार्रवाई लागू होती है। भारत के किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में अतिरिक्त 10% टैरिफ से उन सेक्टरों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अधिक है। इनमें टेक्सटाइल और गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर उत्पाद, कृषि एवं फूड प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग आइटम शामिल हैं। अतिरिक्त टैरिफ लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे खरीदार दूसरे देशों के विकल्प तलाश सकते हैं या भारतीय निर्यातकों पर कीमत घटाने का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर ऑर्डर, मुनाफे और प्रतिस्पर्धा पर पड़ने की आशंका है। फोर्स्ड लेबर क्या है, जिस पर अमेरिका सख्ती कर रहा है फोर्स्ड लेबर का मतलब ऐसी मजदूरी से है, जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराया जाए। इसमें धमकी, कर्ज, हिंसा, दस्तावेज जब्त करना, वेतन रोकना या नौकरी छोड़ने की आजादी न देना जैसी परिस्थितियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है। अमेरिका का कहना है कि अगर किसी देश से आयात होने वाला सामान फोर्स्ड लेबर से जुड़ा पाया जाता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आयात प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य कंपनियों पर दबाव बनाना है कि उनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल न हो। पहले भी कई देशों और उद्योगों पर हो चुकी है कार्रवाई अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में फोर्स्ड लेबर के मुद्दे पर कई देशों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। खासतौर पर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कॉटन, टमाटर, सोलर पैनल और उनसे जुड़े उत्पादों पर कड़े आयात प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके अलावा समुद्री खाद्य, पाम ऑयल, रबर, कोको, टेक्सटाइल और खनन जैसे उद्योग भी अमेरिकी जांच के दायरे में रहे हैं। भारत को कैसे मिली राहत अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में भारत पर 12.5% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि श्रम मानकों पर अमेरिका के साथ हुई बातचीत और भारत की ओर से किए गए नीति बदलाव के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया। फेडरल नोट में कहा गया है कि जून में प्रस्तावित टैरिफ घोषित होने के बाद भारत ने 14 जून को अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन किया। इसके तहत फोर्स्ड लेबर से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया। इसी बदलाव को टैरिफ तय करते समय ध्यान में रखा गया।
Gift Nifty Indictor: भारतीय बाजार आज 24, जुलाई को एक और कमजोर सेशन के लिए तैयार हैं। गिफ्ट निफ्टी पर ग्लोबल इक्विटी में बिकवाली और तेल की कीमतों में तेज गिरावट का असर देखने को मिल रहा है। निफ्टी 50 की परफॉर्मेंस का शुरुआती इंडिकेटर, गिफ्ट निफ्टी सुबह 8 बजे 23,656.50 के लेवल के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोज 23,873.60 से 205 पॉइंट्स नीचे है।
बता दें कि गुरुवार को, बेंचमार्क में लगातार चौथे सेशन में गिरावट जारी रही, जो 6 जून के बाद से उनकी सबसे लंबी गिरावट का सिलसिला था, क्योंकि ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतों ने सेंटिमेंट पर असर डाला। निफ्टी 50 126.65 पॉइंट्स या 0.53% गिरकर 23,869.60 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 363.66 पॉइंट्स या 0.47% गिरकर 76,391.39 पर आ गया।
शुक्रवार को एशियाई मार्केट भी नीचे ट्रेड कर रहे थे, पिछले सेशन से हो रही गिरावट जारी रही क्योंकि तेल की ज़्यादा कीमतों और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बिकवाली के एक और दौर ने महंगाई और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाले इन्वेस्टमेंट के आउटलुक को लेकर चिंता बढ़ा दी। जापान का निक्केई 225 2.46 परसेंट गिरा, साउथ कोरिया का कोस्पी 3.04 परसेंट गिरा, ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 0.57 परसेंट गिरा और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.01 परसेंट फिसला।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच तेल की कीमतों में तेज़ी आने से गुरुवार को U.S. इक्विटीज़ तेज़ी से नीचे बंद हुईं, जबकि इन्वेस्टर्स दुनिया की दो सबसे बड़ी कंपनियों की तिमाही कमाई का अंदाज़ा लगा रहे थे। अल्फाबेट के नतीजों ने बढ़ते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खर्च को लेकर चिंता बढ़ा दी।
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 506.93 पॉइंट्स या 0.97 परसेंट गिरकर 51,711.65 पर आ गया। S&P 500 1.21 परसेंट गिरकर 7,408.30 पर आ गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 2.15 परसेंट गिरकर 25,137.69 पर आ गया। टेक्नोलॉजी-हैवी इंडेक्स पर अल्फाबेट में 7 परसेंट और टेस्ला में 14 परसेंट की गिरावट का असर पड़ा, जो उनकी अर्निंग्स रिपोर्ट के बाद आई।
रेड सी में टैंकरों पर हूथी हमलों के बाद मिडिल ईस्ट संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा था, जबकि प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले बढ़ाने की धमकी दी थी। ग्लोबल बेंचमार्क गुरुवार को दो महीने में पहली बार $100 के निशान से ऊपर चढ़ गया और इस हफ्ते इसमें लगभग 14 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट $92 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था।
ट्रंप ने रेड सी में जहाजों पर और हमले होने पर ईरान और हूथी दोनों के लिए “बड़ी मिलिट्री सज़ा” की चेतावनी दी और एक्सियोस को बताया कि वह ईरान पर “बड़े हमले” पर विचार कर रहे हैं।
तेल बाज़ार रूस के ब्लैक सी कोस्ट पर कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम टर्मिनल पर हुए हमलों से भी जूझ रहा है, जो कज़ाकिस्तान का ज़्यादातर क्रूड एक्सपोर्ट करता है। मिडिल ईस्ट में महीनों से चल रहे संघर्ष के कारण ग्लोबल इन्वेंटरी कम हो गई है, जिससे सप्लाई कम होने और बड़े पैमाने पर आर्थिक झटके का खतरा बढ़ गया है।
इस महीने तेल की कीमतों में तेज़ी आई है क्योंकि फ़ारस की खाड़ी में US और ईरान के बीच दुश्मनी बढ़ गई है, जिससे होर्मुज़ स्ट्रेट से ट्रैफ़िक में रुकावट आई है और क्रूड ऑयल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस के फ्लो पर असर पड़ा है। रेड सी में ईरान-समर्थित हूथी मिलिटेंट्स द्वारा सऊदी अरब के टैंकरों पर पहले हमलों ने पूरे इलाके में सप्लाई में बड़े पैमाने पर रुकावटों को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
निफ्टी- बैंक निफ्टी के लिए क्या होगा आज आउटलुक
आज बैंक निफ्टी के आउटलुक पर बात करते हुए एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बैंक निफ्टी के नेगेटिव बायस के साथ ट्रेड करने की उम्मीद है, जिससे हाल के सेशन में देखी गई लगातार कमजोरी और बढ़ेगी। इंडेक्स अपने मुख्य रेजिस्टेंस लेवल से नीचे बना हुआ है और अपने 200-दिन के EMA (56,495) से थोड़ा ऊपर बना हुआ है, जिससे पता चलता है कि बेयर्स शॉर्ट-टर्म ट्रेंड पर मजबूती से कंट्रोल में हैं। टेक्निकल नजरिए से, 56,800–56,900 ज़ोन तुरंत रेजिस्टेंस है, इसके बाद 57,200–57,300 ज़ोन और ऊपर है।
नीचे की तरफ, 56,400–56,300 ज़ोन तुरंत सपोर्ट बना हुआ है, जो पिछले सेशन में मजबूत बना हुआ था। इस लेवल से नीचे एक बड़ा ब्रेक सेलिंग प्रेशर बढ़ सकता है और इंडेक्स 56,000–55,800 सपोर्ट ज़ोन की ओर खिंच सकता है। कुल मिलाकर, शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक बेयरिश बना हुआ है, इंडेक्स के शॉर्ट-टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर में काफ़ी सुधार लाने और मोमेंटम को बुल्स के पक्ष में करने के लिए 57,000 मार्क से ऊपर लगातार मूव जरूरी होगा।
पीएल कैपिटल के हेड एडवाइजरी विक्रम कासट ने कहा, “तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर चढ़ने और जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने के कारण बाज़ार फिर से साफ़ तौर पर रिस्क-ऑफ मोड में आ गए हैं। मज़बूत कॉर्पोरेट फंडामेंटल्स पर सख्त फाइनेंशियल हालात और बढ़ते रिस्क से बचने की प्रवृत्ति का असर पड़ सकता है। निफ्टी के लिए, 23,600 एक मुख्य सपोर्ट लेवल बना हुआ है, जबकि 24,000 तुरंत रेजिस्टेंस है।”
Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
Real Estate Stocks : पिछले महीने निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा है। इसमें 10.8% की बढ़त हुई और इसने बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया। मजबूत बिक्री,नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी पाइपलाइन और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट साइकल के बने रहने की उम्मीदों के चलते इन्वेस्टर्स लिस्टेड डेवलपर्स में रुचि ले रहे हैं। इसके चलते इस सेक्टर में अच्छी तेजी आई है।
निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने इस अवधि में दूसरे सेक्टर इंडेक्सों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी दौरान,निफ्टी IT इंडेक्स में 3.6% की बढ़त हुई,जबकि बैंकिंग,फाइनेंशियल सर्विस और अधिकांश दूसरे सेक्टर में मामूली बढ़त हुई या फिर उनमें सुस्ती रही। निफ्टी रियल्टी की यह बढ़त व्यापक रही जिसमें लोढ़ा डेवलपर्स,गोदरेज प्रॉपर्टीज़,प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स,ब्रिगेड एंटरप्राइजेज,ओबेरॉय रियल्टी,फीनिक्स मिल्स और अनंत राज जैसे शेयरों की अहम भूमिका रही।
मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अक्षय शेट्टी का कहना है कि यह तेजी किसी एक वजह से नहीं,बल्कि बेहतर मैक्रो स्थितियों और कंपनियों के मज़बूत होते फंडामेंटल्स के मिले-जुले असर से आ रही है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार से जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है। साथ ही,बड़े लिस्टेड डेवलपर्स लगातार अच्छी प्री-सेल्स,मजबूत बिज़नेस डेवलपमेंट और लॉन्च की मजबूत पाइपलाइन की जानकारी दे रहे हैं,जिससे यह भरोसा मजबूत होता है कि रेजिडेंशियल रियल एस्टेट का साइकिल कायम है।
उन्होंने बताया कि 2026 की पहली छमाही में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशकों ने लगभग 4.3-4.4 अरब डॉलर निवेश किया जो सालाना आधार पर 23-25% की बढ़ोतरी दिखाता है। कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ लगभग 18% रही,जबकि हाउसिंग लोन में सालाना आधार पर लगभग 11% की बढ़ोतरी देखने को मिली जिससे मांग में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।
ब्याज दरों के कम रहने की उम्मीद से भी लोगों का भरोसा बढ़ा है। RBI का रेपो रेट 5.25% है और होम लोन की दरें लगभग 7.1% से शुरू हो रही हैं, जिससे घर खरीदना आसान हो गया है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की AVP और रिसर्च एनालिस्ट स्नेहा पोद्दार ने कहा कि यह तेजी रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में आए स्ट्रक्चरल सुधारों को दिखाती है। हाउसिंग सेक्टर की स्थिति अच्छी बनी हुई है। डिमांड अपने पीक लेवल से थोड़ी कम हुई है,लेकिन सप्लाई पर कंट्रोल रहा है,जिससे इन्वेंट्री का बहुत ज्यादा स्टॉक जमा नहीं हुआ है। लिस्टेड डेवलपर्स ने पिछले चार-पांच सालों में अपना कर्ज काफी कम किया है,जिससे कैश जेनरेशन बेहतर हुआ है और उनकी बैलेंस शीट मज़बूत हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन की वजह से बड़े ब्रांडेड डेवलपर्स लगातार मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं। साथ ही,प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में मजबूत डिमांड और बेहतर बैलेंस शीट की वजह से डेवलपर्स जमीन के बड़े सौदे कर रहे हैं और नए इलाकों में अपना कारोबार फैला रहे हैं।
कहां करें निवेश?
पिछले महीने में हुई जबरदस्त बढ़त के बावजूद,एनालिस्ट्स का कहना है कि निवेशकों को इस सेक्टर में अच्छे रिटर्न के लिए अब चुनिंदा क्विलिटी शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए। लिस्टेड कंपनियों में एनालिस्ट्स अब मजबूत बैलेंस शीट और समय पर काम पूरा करने की क्षमता वाले बड़े डेवलपर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अक्षय शेट्टी को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में काम करने के तरीके,अच्छे कलेक्शन,प्रीमियम लॉन्च और सोच-समझकर होने वाले कैपिटल एलोकेशन के कारण लोढ़ा डेवलपर्स सबसे ज्यादा पसंद है। इसके अलावी उनको गोदरेज प्रॉपर्टीज भी पसंद है। उनका मानना है कि कंपनी को मज़बूत बिज़नेस डेवलपमेंट पाइपलाइन और एसेट-लाइट विस्तार की रणनीति क फायदा मिलेगा। अनंत राज भी उनकी फेवरिट लिस्ट में शामिल है। उनका कहना है कि इस कंपनी को रियल एस्टेट बिजनेस के साथ-साथ बढ़ते डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म का भी फायदा मिलेगा।
स्नेहा पोद्दार ने कहा कि ने कहा कि मोतीलाल ओसवाल की पसंदीदा कंपनियों में लोढ़ा डेवलपर्स,DLF और गोदरेज प्रॉपर्टीज शामिल हैं,क्योंकि इनके पास अच्छा फ्री कैश फ्लो,प्रीमियम प्रोजेक्ट पाइपलाइन और काम करने की मजबूत क्षमता है।
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कनाडा के एडमिंटन शहर में पंजाबी युवती की लिव-इन पार्टनर ने हत्या कर दी। झगड़े के दौरान लिव-इन पार्टनर ने उसका गला घोंटा। कॉल के बाद मौके पर पहुंची पुलिस उसे अस्पताल लेकर गई। यहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी लिव-इन पार्टनर को गिरफ्तार कर लिया है। मृतका की पहचान दमनप्रीत कौर (23) के तौर पर हुई है। वह लुधियाना के समराला की रहने वाली थी। वहीं आरोपी रितेश (22) दिल्ली का रहने वाला है। उस पर सेकेंड डिग्री मर्डर के जार्ज लगाए गए हैं। परिवार ने 5 साल पहले कर्ज लेकर दमनप्रीत को कनाडा भेजा था। अब सिलसिलेवार पूरा मामला पढ़िए… पढ़ाई के दौरान युवक से हुई मुलाकात
दमनप्रीत कौर करीब 5 साल पहले स्टडी वीजा पर कनाडा गई थी। वहीं पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात रितेश से हुई। दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में वे लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। हालांकि, दोनों कब से साथ रह रहे थे, इसकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। 3 दिन इलाज के बाद अस्पताल में तोड़ा था दम
9 जुलाई की शाम 6 बजकर 44 मिनट पर एडमिंटन पुलिस को दक्षिण-पूर्वी शहर के सिल्वरबेरी इलाके में स्थित एक मकान से इमरजेंसी फोन आया। जब पुलिस और पैरामेडिकल टीम वहां पहुंची तो उन्हें दमनप्रीत बेहोशी की हालत में मिली पुलिस ने दमनप्रीत को तुरंत स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां 12 जुलाई को उसने अंतिम सांस ली। 14 जुलाई को मेडिकल एग्जामिनर द्वारा की गई पोस्टमॉर्टम जांच में यह साफ हो गया कि दमनप्रीत की मौत प्राकृतिक नहीं बल्कि गला घोंटने के कारण हुई थी। 22 जुलाई को आरोपी को अरेस्ट कर चार्ज लगाए
एडमिंटर पुलिस सर्विस की होमिसाइड यूनिट ने 22 जुलाई को आरोपी रितेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि यह मामला घरेलू हिंसा या पार्टनर हिंसा (इंटिमेट पार्टनर होमीसाइड) का है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में किसी अन्य संदिग्ध की तलाश नहीं कर रहे हैं। कोर्ट की आगामी सुनवाइयों में आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी 23 जुलाई को साझा की। दोनों के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ, इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। डेडबॉडी पंजाब लाई जाएगी
दमनप्रीत कौर एडमिंटन में रहती थी। वह पढ़ाई के बाद अब नौकरी कर रही थी। कनाडाई मीडिया के अनुसार, दमनप्रीत के शव को भारत में उनके परिवार के पास भेजने और अंतिम संस्कार के कागजी कार्यों का खर्च उठाने के लिए एक गो-फंड-मी अभियान भी शुरू किया गया है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। शव कब भारत पहुंचेगा, अभी इसकी कोई तारीख तय नहीं है। बताया जा रहा है कि रितेश भी पढ़ाई के बाद यहां जॉब कर रहा था। वहीं, अब तक भारत सरकार या भारतीय दूतावास की ओर से परिवार को किसी तरह की सहायता नहीं मिली है। ————– ये खबर भी पढ़ें… कनाडा में पंजाबी युवक की गोलियां मारकर हत्या, ऑफिस में घुसकर फायरिंग की कनाडा में ऑफिस में काम कर रहे पंजाबी युवक की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। हमलावर सरे के 76 एवेन्यू बिल्डिंग की दूसरी मंजिल में घुसे और लॉबी से निकल रहे युवक पर फायरिंग कर दी। फायरिंग के कारण आसपास बैठे लोग घबरा गए और उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन किया। (पढ़ें पूरी खबर)
US Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत 17 देशों पर टैरिफ का नया बम फोड़ा है। जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर सख्ती बरतते हुए अमेरिकी प्रशासन ने विभिन्न देशों से आने वाले सामानों पर 10% से 12.5% तक आयात शुल्क लगाने की घोषणा की है। इस फैसले के तहत भारत से होन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर सबसे बड़ा हमला करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “तैयारी पूरी है, अब सिर्फ फैसला लेना बाकी है।” ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त दर्द नहीं झेला है। ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने भी तुरंत जवाब दिया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे इसकी “और भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने का रास्ता बातचीत है, नए हमले नहीं। इधर, ब्रिटेन ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है। ब्रिटिश सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर उसकी सेना देश की सुरक्षा के लिए तैयार है। इससे पहले ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने ब्रिटेन के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया तो उन्हें भी निशाना बनाया जा सकता है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. सऊदी के दो जहाजों पर हमला: यमन के हूती विद्रोहियों ने रेड सी में सऊदी अरब के दो तेल टैंकर एन्सेलिया और लैला पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। संगठन का कहना है कि दोनों जहाजों में आग लग गई। 2. हूती विद्रोहियों के डर से 10 जहाजों ने रास्ता बदला: बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पार करने की कोशिश कर रहे कम से कम 10 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। अब ये जहाज अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा सफर तय कर रहे हैं। 3. ब्रिटेन ने अमेरिका को सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की मंजूरी दी: ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने ईरान के खिलाफ अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य अड्डों के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है। हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया और ग्लॉस्टरशायर का फेयरफोर्ड एयरबेस अमेरिकी विमानों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहेंगे। 4. भारत की अब तक 26,000 उड़ानें रद्द: अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण 20 जुलाई तक भारतीय एयरलाइंस को करीब 26 हजार अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इसके अलावा कई उड़ानों का रास्ता बदला गया और उनमें देरी भी हुई। 5. ट्रम्प का 95 अरब डॉलर का रक्षा बजट पास: ट्रम्प को ईरान युद्ध के बीच बड़ी राजनीतिक जीत मिली है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 95 अरब डॉलर का रक्षा बजट प्रस्ताव 216-214 वोटों से मंजूर कर दिया।अब इसे मंजूरी के लिए सीनेट में जाएगा। इससे ईरान युद्ध और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के लिए अतिरिक्त फंड मिलेगा। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…


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दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स की चिंताओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी है। उन्होंने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि असफल हो जाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन चीटिंग या छल करना बिल्कुल गलत है। सचिन तेंदुलकर ने सभी पक्षों से शांति, आपसी सम्मान और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
सचिन तेंदुलकर ने छात्रों की पीड़ा पर जताई चिंता
सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मेरे पिता प्रोफेसर थे। उन्होंने मुझे बचपन से सिखाया था कि असफल होना गलत नहीं है, लेकिन नकल करना गलत है। कभी भी शॉर्टकट का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि समाज के जिम्मेदार लोगों का कर्तव्य है कि वे सही मूल्यों को बढ़ावा दें। अगर मेहनत से ज्यादा नतीजों को महत्व दिया जाएगा, तो लोग योग्यता के बजाय शॉर्टकट अपनाने लगेंगे। सचिन ने कहा कि छात्रों की निराशा समझी जा सकती है, क्योंकि उन्हें लग रहा है कि उनकी मेहनत का सही फल नहीं मिला।
पेपर लीक के बाद बढ़ा विरोध
नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक होने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा दोबारा परीक्षा कराने के फैसले के बाद देशभर में विरोध शुरू हो गया। इसी दौरान इस मामले को लेकर 20 से ज्यादा छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं का भी जिक्र हुआ। इस माहौल में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला और संगठन ने शांतिपूर्ण धरना शुरू किया। नीट पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। वहीं, केंद्र सरकार ने कहा है कि, पेपर लीक के दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सचिन ने युवाओं का हौसला बढ़ाने की अपील की
सचिन तेंदुलकर ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि छात्रों को दोबारा ऐसी निराशा का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा, “भारत के युवा सपनों और ऊर्जा से भरे हुए हैं। वही देश का भविष्य हैं। माता-पिता, शिक्षक, दोस्त, परिवार, स्कूल और प्रशासन—सभी की जिम्मेदारी है कि युवाओं का हौसला बढ़ाएं और उन्हें सही दिशा दें।” उन्होंने कहा कि ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जहां मेहनत का सम्मान हो, ईमानदारी को बढ़ावा मिले और योग्यता के आधार पर सफलता मिले। सचिन ने भरोसा जताया कि सभी मिलकर ऐसा समाधान निकालेंगे, जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा और उनका विश्वास बना रहेगा।
Velora Impact Q1 Results: वेलोरा इम्पैक्ट लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। पहले इसका नाम प्रतीक्षा केमिकल्स लिमिटेड था। कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में कारोबार और मुनाफे, दोनों में बढ़त दर्ज की है। कंपनी का कहना है कि बेहतर बिजनेस परफॉर्मेंस और ऑपरेशनल एफिशिएंसी का फायदा नतीजों में दिखा है।
जून 2026 तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹141.92 करोड़ रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में यह ₹1.17 करोड़ था। यानी कंपनी की आय में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।
EBITDA और मुनाफा भी बढ़ा
कंपनी का EBITDA ₹7.98 करोड़ रहा। वहीं, टैक्स से पहले का मुनाफा (PBT) ₹7.90 करोड़ दर्ज किया गया। तिमाही के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट भी ₹7.90 करोड़ रहा। कंपनी का कहना है कि बेहतर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस और बिजनेस में तेजी की वजह से मुनाफे में बड़ा सुधार देखने को मिला।
अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का बेसिक और डाइल्यूटेड अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ₹14.19 रहा। यह प्रति शेयर कमाई में अच्छी बढ़त को दिखाता है।
मैनेजमेंट ने क्या कहा?
कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुमित हरजीभाई गोल ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रैटेजी की सफलता को दिखाते हैं। उनके मुताबिक, कंपनी बिजनेस को और मजबूत करने, नए अवसरों का फायदा उठाने और शेयरधारकों के लिए लंबे समय तक वैल्यू बनाने पर फोकस कर रही है।
वेलोरा इम्पैक्ट का बिजनेस क्या है
वेलोरा इम्पैक्ट लिमिटेड स्पेशियलिटी केमिकल्स सेक्टर की कंपनी है। कंपनी मुख्य रूप से कलर पिगमेंट बनाती है। इसके प्रमुख उत्पादों में पिगमेंट ग्रीन 7, कॉपर फ्थैलोसाइनिन ग्रीन क्रूड और दूसरे ब्लू व ग्रीन पिगमेंट शामिल हैं। इन पिगमेंट्स का इस्तेमाल कई उद्योगों में होता है। इनमें पेंट, प्रिंटिंग इंक, प्लास्टिक, ग्लास, सिंथेटिक फाइबर, सिरेमिक, टेक्सटाइल, कॉस्मेटिक्स और कलर्ड सीमेंट जैसे सेक्टर शामिल हैं।
कंपनी अपने प्रोडक्ट्स की सप्लाई भारत के साथ-साथ दूसरे देशों में भी करती है। हाल ही में कंपनी ने अपना नाम बदलकर वेलोरा इम्पैक्ट लिमिटेड रखा है। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव उसके नए बिजनेस विजन, बढ़ते कारोबार और भविष्य की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को ध्यान में रखकर किया गया है।
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भारत ने पहले टी-20 में जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। हरारे में जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 125 रन बनाए। जवाब में भारत ने 13.2वें ओवर में 3 विकेट खोकर टारगेट हासिल कर लिया। भारत के इस जीत के हीरो वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने 15 साल 118 दिन की उम्र में अर्धशतक जड़कर इतिहास रच दिया। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारत की पहली जीत भी रही।
वैभव ने इंटरनेशल क्रिकेट में बनाया ये रिकॉर्ड
भारत के धाकड़ बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने महज 15 साल 118 दिन की उम्र में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का नया रिकॉर्ड बना दिया। उन्होंने नेपाल के कुशल मल्ला का रिकॉर्ड तोड़ दिया। इससे पहले कुशल मल्ला ने 15 साल 340 दिन की उम्र में 8 फरवरी 2020 को अमेरिका के खिलाफ वनडे मैच में 50 रन बनाकर यह उपलब्धि हासिल की थी।
ज़िम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में वैभव ने भारत की ओर से पारी की शुरुआत की। हरारे स्पोर्ट्स क्लब में 126 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन की शानदार पारी खेली। इस दौरान उन्होंने केवल 18 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। वैभव ने अपनी विस्फोटक पारी में 4 चौके और 4 छक्के लगाए। साथ ही उन्होंने ईशान किशन के साथ दूसरे विकेट के लिए 21 गेंदों में 45 रन की तेज साझेदारी भी की।
263 के स्ट्राइक रेट से बनाए रन
जिम्बाब्वे के गेंदबाजों को वैभव ने पहले ही ओवर से आड़े हाथ लेना शुरू कर दिया। वैभव सूर्यवंशी ने 18 गेंदों में ताबड़तोड़ अंदाज में अर्धशतक जड़ने का काम किया। वैभव सूर्यवंशी ने 4 चौके और 4 छक्के की मदद से 18 गेंदों में 50 रनों की पारी खेली। उनकी इस धुआंधार पारी का स्ट्राइक रेट 263.16 का रहा।
सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड भी टूटा
इस उपलब्धि के साथ वैभव ने इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड सचिन तेंदुलकर के नाम था। सचिन ने 16 साल 213 दिन की उम्र में नवंबर 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट में 59 रन बनाए थे। टी20 क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले खिलाड़ियों की सूची में अब वैभव पहले स्थान पर हैं। उनके बाद जिब्राल्टर के लुइस ब्रूस का नाम आता है, जिन्होंने 16 साल 56 दिन की उम्र में 20 अगस्त 2021 को माल्टा के खिलाफ 60 रन की पारी खेली थी।

