जल्द ही अदाणी एयरपोर्ट और GMR ग्रुप  भी उड़ा सकेंगे अपने यात्री जहाज, सरकार नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी में

जल्द ही आपको अदाणी एयरपोर्ट और GMR ग्रुप की एयरलाइन में उड़ने का मौका मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक सरकार नई एयरलाइंस के लिए एंट्री नियम आसान करने की तैयारी कर रही है। रॉयटर के हवाले से बड़ी खबर आई है कि अदाणी ग्रुप का एयरलाइंस शुरू करने पर विचार कर रही है। नई एयरलाइंस के लिए आसान एंट्री नियम संभव है। इस से अदाणी एयरपोर्ट और GMR के लिए एयरलाइंस कारोबार में एंट्री का रास्ता खुल सकता है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार एयरक्राफ्ट रूल्स और DGCA नियमों में बदलाव करने की तैयारी में। इससे अदाणी एयरपोर्ट और GMR ग्रुप जैसे एयरपोर्ट ऑपरेटर भी अपनी एयरलाइन शुरू कर सकेंगे। अगले एक महीने में नियमों में बदलाव संभव है। एयरलाइन बिजनेस क्रॉस-ओनरशिप नियमों की समीक्षा की जा सकती है। कम से कम 20 एयरक्राफ्ट की शर्त की भी समीक्षा होगी।

सूत्रों के मुताबिक कैपिटल रिक्वायरमेंट और पायलट हायरिंग नियमों की भी समीक्षा का जा सकती है। हायरिंग से जुड़े नियम भी समीक्षा के दायरे में हैं। इससे अदाणी एयरपोर्ट और GMR के लिए रास्ता खुल सकता है। रॉयटर्स के हवाले से आई खबर में कहा गया है कि अदाणी ग्रुप का एयरलाइंस शुरू करने पर विचार कर रही है। हालांकि कंपनी ने एयरलाइंस शुरू करने पर फिलहाल अंतिम फैसला नहीं लिया है।

गौरतलब है कि भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर है। देश में एयरपोर्ट्स का तेजी से विस्तार हो रहा है और एयरलाइंस ने सैकड़ों नए विमानों के लिए ऑर्डर दिए हैं। इस ग्रोथ के बावजूद,मार्केट पर सिर्फ़ दो कंपनियों इंडिगो और एयर इंडिया का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में क्या भारत को एक तीसरी मजबूत एयरलाइन की जरूरत है,इस बहस ने एक पुराने पॉलिसी से जुड़े सवाल में फिर से दिलचस्पी जगा दी है कि क्या एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की इजाज़त दी जानी चाहिए?

बताते चलें कि भारत का एयरपोर्ट प्राइवेटाइज़ेशन फ़्रेमवर्क इस तरह बनाया गया है कि एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइंस के बीच हितों का टकराव न हो। मौजूदा पॉलिसी के तहत,दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े एयरपोर्ट के ऑपरेटरों पर आम तौर पर किसी एयरलाइन में 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी रखने की अनुमति नहीं है। इस पॉलिसी का मकसद निष्पक्षता बनाए रखना और किसी के साथ खास बर्ताव किए जाने की संभावना को भी रोकना है।

इसके पीछे की वजह साफ है। एयरपोर्ट अहम इंफ़्रास्ट्रक्चर को कंट्रोल करते हैं,जिसमें लैंडिंग और टेक-ऑफ़ स्लॉट,पार्किंग बे,टर्मिनल एक्सेस,ग्राउंड-हैंडलिंग सुविधाएं और एयरपोर्ट चार्ज शामिल हैं। अगर कोई कंपनी एयरपोर्ट के साथ-साथ एयरलाइन की भी मालिक होगी तो दूसरी एयरलाइन कंपनियां यह शिकायत कर सकती हैं कि अब मुकाबला बराबरी का नहीं रहा।

दुनिया के दूसरे देशों की बात करें तो रेगुलेटर्स ने एयरपोर्ट और एयरलाइन की ओनरशिप को लेकर अलग-अलग तरीके अपनाए हैं। कुछ देशों में एयरपोर्ट ऑपरेटर एयरलाइंस में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए कड़े गवर्नेंस रूल्स और स्वतंत्र रेगुलेटर होते हैं जो यह पक्का करते हैं कि एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तक सभी को एक बराबर पहुंच मिले। भारत में आम तौर पर हितों के टकराव को रोकने के लिए दोनों के बीच स्पष्ट अंतर रखने को प्राथमिकता दी गई है।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू एविएशन मार्केट और तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक है। इसे बढ़ती आय,बेहतर रीजनल कनेक्टिविटी और तेजी से हो रहे एयरपोर्ट विस्तार का सपोर्ट मिल रहा है। सरकार एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर में भी भारी निवेश कर रही है। देश में और बड़ी एयरलाइन्स के आने से किराए को लेकर कॉम्पिटिशन बढ़ सकता है, रूट के ऑप्शन बढ़ सकते है,सर्विस क्वालिटी बेहतर हो सकती है और दो बड़ी एयरलाइनों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे छोटे शहरों के साथ कनेक्टिविटी भी बेहतर हो सकती है और भारत के ग्लोबल एविएशन हब बनने के लक्ष्य को भी सपोर्ट मिल सकता है। इसके लिए अब पुरानी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है।

Infosys Q1 Results: इंफोसिस को ₹7769 करोड़ मुनाफा, पर ग्रोथ आउटलुक घटाया; नए CEO का भी ऐलान

Infosys Q1 Results: देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी Infosys ने जून 2026 तिमाही (Q1FY27) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 12% बढ़कर 7,769 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह 6,921 करोड़ रुपये था।

हालांकि कंपनी बाजार के अनुमान पर खरी नहीं उतर सकी। CNBC-TV18 ने 7,903 करोड़ रुपये के मुनाफे का अनुमान लगाया था।

रेवेन्यू में 14% की बढ़ोतरी

जून तिमाही में Infosys का ऑपरेशन से रेवेन्यू 14% बढ़कर 48,211 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 42,279 करोड़ रुपये था। यानी कंपनी ने अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, लेकिन मुनाफा अनुमान से थोड़ा कम रहा।

ग्रोथ आउटलुक में हल्की कटौती

इंफोसिस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने रेवेन्यू ग्रोथ आउटलुक में हल्की कटौती की है। अब कंपनी को उम्मीद है कि पूरे साल कॉस्टेंट करेंसी आधार पर रेवेन्यू 1.5% से 3% के बीच बढ़ेगा। कॉन्सटेंट करेंसी ग्रोथ का मतलब है कि कंपनी की ग्रोथ को विदेशी मुद्रा (Forex) के उतार-चढ़ाव का असर हटाकर मापा जाता है।

इससे पहले कंपनी ने 1.5% से 3.5% ग्रोथ का अनुमान दिया था। बाजार को भी ऊपरी सीमा में 0.5% की कटौती की उम्मीद थी। हालांकि कंपनी ने EBIT मार्जिन का अनुमान 20% से 22% के बीच ही बरकरार रखा है।

जून तिमाही में कैसी रही ग्रोथ?

जून तिमाही में Infosys की कॉन्सटेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ तिमाही आधार पर 1% रही। यह Tech Mahindra (2.6%) से कम रही, लेकिन TCS (0.4%), HCLTech (-0.5%) और Wipro (-1.2%) से बेहतर प्रदर्शन रहा। एनालिस्टों ने करीब 1.8% ग्रोथ का अनुमान लगाया था।

कंपनी के CEO सलिल पारेख ने कहा कि एक बड़े क्लाइंट के फैसले का एकमुश्त असर इस ग्रोथ पर पड़ा।

डॉलर और रुपये में रेवेन्यू

जून तिमाही में Infosys का डॉलर रेवेन्यू 5.08 अरब डॉलर रहा। यह पिछले अनुमान के लगभग मुताबिक है। तिमाही आधार पर डॉलर रेवेन्यू में 0.8% की बढ़ोतरी हुई।

वहीं रुपये में कंपनी का रेवेन्यू 48,211 करोड़ रुपये रहा। यह पिछली तिमाही से 3.9% ज्यादा है, हालांकि बाजार के अनुमान 48,431 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा।

मार्जिन में सुधार

इंफोसिस का EBIT 10,163 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 4.3% ज्यादा है। वहीं EBIT मार्जिन 21.1% रहा। इसमें पिछली तिमाही के मुकाबले 20 बेसिस प्वाइंट का सुधार हुआ। यह बाजार के अनुमान के अनुरूप रहा।

बड़े ऑर्डर और AI का बढ़ता योगदान

जून तिमाही में Infosys को 3.6 अरब डॉलर के बड़े डील मिले। इनमें 61% नए क्लाइंट या नए प्रोजेक्ट से जुड़े थे।

कंपनी ने यह भी बताया कि अब उसकी कुल आय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का योगदान 8.2% तक पहुंच गया है। यह दिखाता है कि AI से जुड़ी सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।

नए CEO की जिम्मेदारी

Infosys ने अशीष कुमार दास को CEO-Designate नियुक्त किया है। वह 1 अप्रैल 2027 से मौजूदा CEO सलिल पारेख की जगह लेंगे। दास तीन दशक से ज्यादा समय से Infosys के साथ जुड़े हैं और फिलहाल कई ग्लोबल बिजनेस वर्टिकल्स की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

कंपनी के चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने कहा कि सलिल पारेख ऐसे समय में CEO बने थे, जब कंपनी कुछ चुनौतियों का सामना कर रही थी। उन्होंने संगठन में स्थिरता और स्पष्ट दिशा देने का काम किया। उन्होंने यह भी बताया कि अशीष कुमार दास फिलहाल अमेरिका में काम कर रहे हैं और नई जिम्मेदारी संभालने के लिए भारत लौटेंगे।

इंफोसिस के शेयरों का हाल

नतीजों से पहले Infosys का शेयर 1,052.90 रुपये पर लगभग सपाट बंद हुआ। हालांकि 2026 में अब तक यह शेयर करीब 35% टूट चुका है।

IndiGo Q1 Results: इंडिगो को ₹382 करोड़ का घाटा, ईरान युद्ध से लगा बड़ा झटका

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाली PM बालेन शाह ने अपना ही नियम क्यों तोड़ा:भारत और चीन के राजदूतों से मुलाकात करेंगे; 3 महीने में ही फैसले से पलटे

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन शाह) पहली बार अपने बनाए नियम से हटकर विदेशी राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने तय किया था कि वह किसी भी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बालेन शाह भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और चीन के राजदूत झांग माओमिंग से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इसे नेपाल की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वह अपने दोनों सबसे बड़े पड़ोसियों के साथ संतुलित रिश्ते बनाए रखना चाहता है। एक ही दिन दोनों देशों के राजदूतों के साथ मीटिंग बालेन शाह नहीं चाहते थे कि भारत या चीन में से किसी को यह लगे कि दूसरे देश को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने दोनों देशों के राजदूतों से एक ही दिन अलग-अलग मुलाकात करने का फैसला किया है। दोनों बैठकें एक के बाद एक होंगी, ताकि दोनों देशों के साथ समान व्यवहार का मैसेज जाए। नेपाल सरकार ने पुष्टि की है कि भारत और चीन के राजदूतों के साथ अलग-अलग बैठकें इसी सप्ताह होंगी। हालांकि, दोनों बैठकों की सटीक तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। नेपाल का विदेश मंत्रालय इन बैठकों की अंतिम तैयारियों में जुटा है। बालेन शाह के पीएम बनने से पहले का नियम क्या था? नेपाल में नई सरकार बनने पर खासकर भारत, चीन और अमेरिका जैसे प्रभावशाली देशों के राजदूत सीधे प्रधानमंत्री के निजी आवास पर जाकर अलग-अलग मुलाकात करते थे। इन बैठकों में विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद नहीं होते थे और न ही इनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड रखा जाता था। नेपाल में लंबे समय से यह परंपरा रही थी कि बड़े देशों के राजदूत जब चाहें प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर लेते थे। इन मुलाकातों का मकसद अक्सर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने से ज्यादा व्यक्तिगत संपर्क मजबूत करना माना जाता था। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हितों का टकराव पैदा होता था और नेपाल के राष्ट्रीय हित प्रभावित होते थे। पीएम बनने के बाद बालेन शाह ने क्या बदलाव किए बालेन शाह ने तय किया कि वह किसी भी विदेशी राजदूत या प्रतिनिधि से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। इसके लिए उन्होंने एक अलग ‘रैंक प्रोटोकॉल’ बनाया था। नए नियम के मुताबिक, वह सिर्फ किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष/प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री स्तर के अधिकारी से ही अकेले व्यक्तिगत बैठक करेंगे। निचले स्तर के अधिकारियों, राजदूतों या उप-मंत्रियों से वे अकेले मिलने के बजाय विदेश मंत्रालय के माध्यम से या फिर ग्रुप मीटिंग के जरिए ही मिलेंगे। उनका मानना था कि विदेश नीति व्यक्तिगत मुलाकातों के बजाय सरकार और विदेश मंत्रालय के तय ढांचे के तहत चलनी चाहिए। उनका मानना था कि कई शक्तिशाली देश सरकारी व्यवस्था को दरकिनार कर सीधे नेपाल के टॉप नेताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश करते रहे हैं। इस फैसले के चलते बालने शाह ने कई बड़े विदेशी प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत मुलाकात करने से इनकार कर दिया। कई विदेशी अधिकारियों से नहीं मिले बालेन भारत- बालेन शाह ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मिलने से इनकार कर दिया। मिस्री प्रधानमंत्री मोदी की ओर से बालेन शाह को भारत आने का औपचारिक न्योता देने काठमांडू आने वाले थे, लेकिन प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय नहीं मिलने के कारण उनका प्रस्तावित दौरा रद्द हो गया। इससे भारत में नाराजगी भी देखी गई। अमेरिका- बालेन ने अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री समीर पॉल कपूर और विशेष दूत सर्जियो गोर को भी अलग से मिलने का समय नहीं दिया। गोर नेपाल आने से पहले भूटान के प्रधानमंत्री और राजा तथा श्रीलंका के राष्ट्रपति से मुलाकात कर चुके थे। चीन- बालेन ने चीन के उप वाणिज्य मंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता यान डोंग से भी मुलाकात नहीं की। वह इसी महीने व्यापार और निवेश से जुड़े उच्चस्तरीय दौरे पर नेपाल आए थे। नोट- हालांकि इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ये सभी घटनाओं की जानकारी रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दी गई हैं। बालेन शाह को अपना फैसला क्यों बदलना पड़ा बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब उन्होंने खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग दिखाया था। इसी सोच के तहत उन्होंने नियम बनाया था कि वह किसी विदेशी राजदूत से अकेले मुलाकात नहीं करेंगे। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदल गए हैं। अब उन्हें समझ आ गया है कि सिर्फ अलग छवि बनाना काफी नहीं है। देश चलाने के लिए पड़ोसी देशों के साथ सीधे बातचीत भी जरूरी होती है। इसी वजह से उन्होंने पहली बार अपना पुराना नियम तोड़ा है। भारत और चीन, दोनों नेपाल के सबसे अहम पड़ोसी हैं। ऐसे में दोनों देशों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखना उनकी सरकार की जरूरत बन गया है। नेपाल के लिए भारत और चीन दोनों क्यों जरूरी हैं? नेपाल की विदेश नीति हमेशा से भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखने पर आधारित रही है। भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच खुली सीमा है, जिससे लाखों नेपाली नागरिक काम, व्यापार और पढ़ाई के लिए आसानी से भारत आते-जाते हैं। दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ पड़ोसी होने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से भी जुड़े हैं। दूसरी ओर, चीन ने पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में सड़क, रेल, ऊर्जा और दूसरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसलिए नेपाल के लिए चीन भी एक अहम आर्थिक और रणनीतिक साझेदार बन गया है। यही वजह है कि काठमांडू किसी एक देश के करीब दिखने के बजाय भारत और चीन, दोनों के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखने की कोशिश करता है।

Nagabandham OTT Release: विराट कर्णा-नभा नटेश स्टारर ‘नागबंधम’ इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देने जा रही दस्तक

Nagabandham OTT Release: ‘नागबंधम’ का निर्देशन अभिषेक नामा ने किया है, जबकि इसे NIK स्टूडियोज़ के बैनर तले किशोर अन्नापुरेड्डी और निशिता ने प्रोड्यूस किया है। इस पौराणिक फैंटेसी एडवेंचर फिल्म में विराट कर्णा, नभा नटेऐश्वर्या मेनन, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, महेश मांजरेकर और ऋषभ साहनी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

प्राइम मेंबर्स ‘नागबंधम’ को 24 जुलाई 2026 से प्राइम वीडियो पर देख सकेंगे। यह फिल्म तेलुगु के साथ-साथ तमिल, मलयालम और कन्नड़ में डब वर्जन में भी उपलब्ध होगी।

प्राइम वीडियो, जो भारत के सबसे पसंदीदा एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स में से एक है, ने आज अपनी नई फिल्म ‘नागबंधम’ के एक्सक्लूसिव ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्रीमियर का ऐलान किया। यह एक भव्य पौराणिक फैंटेसी एडवेंचर फिल्म है, जिसमें प्राचीन कथाओं, रहस्यमयी राज़ और रोमांच से भरे खजाने की तलाश को दिखाया गया है।

फिल्म का निर्देशन अभिषेक नामा ने किया है, जबकि इसे NIK स्टूडियोज़ के बैनर तले किशोर अन्नापुरेड्डी और निशिता नागिरेड्डी ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में विराट कर्णा लीड रोल में नजर आएंगे। उनके साथ नभा नटेश, ऐश्वर्या मेनन, जगपति बाबू, मुरली शर्मा, महेश मांजरेकर और ऋषभ साहनी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। ‘नागबंधम’ 24 जुलाई से प्राइम वीडियो पर एक्सक्लूसिव तौर पर स्ट्रीम होगी। यह फिल्म तेलुगु में उपलब्ध होगी, साथ ही तमिल, मलयालम और कन्नड़ में डब वर्जन में भी देखी जा सकेगी।

‘नागबंधम’ की कहानी रुद्र नाम के एक साधारण गांव के युवक की है, जिसकी जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल जाती है जब उसकी बहन की शादी पर क्रूर खजाना खोजने वाला अब्दाली हमला कर देता है। अब्दाली भारत के प्राचीन विष्णु मंदिरों के नीचे छिपे रहस्यमयी नागबंधम अनुष्ठान की तलाश में है। पवित्र ब्रह्म कमल और एक प्राचीन पांडुलिपि की खोज में, जिसके बारे में माना जाता है कि वह असीम दौलत का राज खोल सकती है, अब्दाली अपने पीछे तबाही छोड़ता चलता है। इसी संघर्ष के बीच रुद्र की मुलाकात रहस्यमयी नागा साधु शिवा से होती है, जो उसे आस्था, त्याग और विश्वासघात से भरे एक खतरनाक सफर पर ले जाते हैं। जैसे-जैसे ताकतवर दुश्मन उसके करीब आते हैं, रुद्र को धर्म की रक्षा करने और उस प्राचीन खजाने को गलत हाथों में जाने से बचाने के लिए आगे आना पड़ता है।

पौराणिक कथाओं, फैंटेसी और एडवेंचर का शानदार मेल ‘नागबंधम’ को एक अलग पहचान देता है। फिल्म में प्राचीन मंदिरों की भव्य वास्तुकला को शानदार विजुअल्स के साथ दोबारा जीवंत किया गया है और इसकी कहानी धर्म की जड़ों से जुड़ी हुई है। जुनैद कुमार और अभे का दमदार म्यूजिक फिल्म के रोमांच को और बढ़ा देता है। पुरानी दंतकथाओं, छिपे खजानों और आस्था से जुड़े सवालों को लेकर आगे बढ़ने वाली यह कहानी दर्शकों को एक बड़े और रोमांचक सफर पर ले जाती है।

IndiGo Q1 Results: इंडिगो को ₹382 करोड़ का घाटा, ईरान युद्ध से लगा बड़ा झटका

IndiGo Q1 Results: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation को जून 2026 तिमाही में 382 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 2,161 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। महंगा जेट फ्यूल, रुपये में कमजोरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव इसका बड़ा कारण रहे।

रेवेन्यू बढ़ा, लेकिन खर्च ज्यादा

जून तिमाही में इंडिगो का रेवेन्यू 20% बढ़कर 24,584 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले यह 20,496 करोड़ रुपये था। लेकिन खर्च 35.1% बढ़ गया। सबसे ज्यादा असर जेट फ्यूल पर पड़ा। विमान ईंधन का खर्च 86% उछलकर 10,830 करोड़ रुपये पहुंच गया। इसी वजह से कंपनी मुनाफे से घाटे में चली गई।

ऑपरेशन में क्या रहा?

जून तिमाही में इंडिगो की क्षमता (ASK) 2.9% बढ़कर 43.5 अरब रही। यात्रियों की संख्या 0.7% बढ़कर 3.13 करोड़ हो गई। वहीं Yield 21.3% बढ़कर 6.04 रुपये रही। हालांकि Load Factor 1.3 प्रतिशत अंक घटकर 83.3% पर आ गया।

30 जून 2026 तक कंपनी के पास 52,885 करोड़ रुपये का कुल कैश था। इसमें 39,039 करोड़ रुपये फ्री कैश और 13,846 करोड़ रुपये प्रतिबंधित (Restricted) कैश शामिल था। यानी नकदी के मोर्चे पर कंपनी की स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में IndiGo ने कहा कि महंगा ईंधन, रुपये की कमजोरी और पश्चिम एशिया का संघर्ष इस तिमाही में मुनाफे पर भारी पड़ा।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल भाटिया ने कहा कि तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। ईंधन की कीमतें ऊंची रहीं और मध्य-पूर्व में उड़ानों पर भी असर पड़ा। इसके बावजूद यात्रियों की मांग मजबूत बनी रही। बेहतर किरायों की वजह से रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी हुई। इस दौरान IndiGo ने 3.13 करोड़ यात्रियों को सफर कराया।

उन्होंने कहा कि कंपनी फिलहाल लागत पर नियंत्रण और क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने पर फोकस कर रही है। हालांकि महंगे ईंधन और रुपये में कमजोरी की वजह से अकेले इस तिमाही में करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।

इंडिगो के लिए आगे क्या?

इंडिगो का कहना है कि भारत और पश्चिम एशिया के बीच यात्रा पर अभी भी असर बना हुआ है। दूसरी तिमाही में मांग भी सामान्य से कमजोर रहने की उम्मीद है। इसलिए Q2FY27 में कंपनी की क्षमता पिछले साल के मुकाबले लगभग बराबर रह सकती है।

हालांकि IndiGo को उम्मीद है कि इसके बाद हालात सुधरेंगे। जैसे-जैसे यात्रा की मांग बढ़ेगी, विमानों का इस्तेमाल भी धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा।

इंडिगो का शेयर गुरुवार को नतीजे आने से पहले 1.70% की गिरावट के साथ 5,030 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 14.70% टूट चुका है।

SRF Share Price : कमजोर गाइडेंस के बाद वायदा के टॉप लूजर में शामिल हुआ शेयर, जानिए अब क्या हो निवेश रणनीति

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में 6 बड़ी खामियां, आखिर कब होगा जरूरी सुधार?

indian education system

cjp protest in delhi: हमारे देश में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए युवाओं को NEET, JEE और UPSC जैसी कठिनतम प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के दौर से गुजरना पड़ता है। इसके विपरीत, देश की नीतियां और भविष्य तय करने वाले राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश के लिए किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता या मानक परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं है। केवल किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़कर कोई भी व्यक्ति नीति-निर्माता बन सकता है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि जहाँ देश के निर्माण में लगे विशेषज्ञों के लिए योग्यता के कड़े पैमाने हैं, वहीं पूरे तंत्र को चलाने वाले वर्ग के लिए ऐसी कोई जवाबदेही तय नहीं है। एक अंगूठा टेक भी शिक्षा मंत्री बन सकता है।

 

1. वर्तमान शिक्षा प्रणाली की मौलिक कमियाँ

स्मृति-केंद्रित मूल्यांकन: हमारी मौजूदा शिक्षा व्यवस्था बुद्धिमत्ता की जगह केवल रटने की क्षमता (Memory) की परीक्षा लेती है। यही कारण है कि अकादमिक स्तर पर गोल्ड मेडल पाने वाले विद्यार्थी भी व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों के सामने कई बार असहाय सिद्ध होते हैं।

 

प्रतिस्पर्धा और महत्वाकांक्षा का दबाव: पारंपरिक शिक्षा बच्चों में सहयोग के स्थान पर तुलना और प्रतिस्पर्धा की भावना भरती है। “प्रथम आने” की यह अंधी दौड़ अंततः मानसिक तनाव, ईर्ष्या और सामाजिक विसंगतियों को जन्म देती है।

 

जीविका बनाम जीवन का बोध: वर्तमान शिक्षा नीति का पूरा जोर केवल इस बात पर है कि “रोटी कैसे कमाई जाए”। यह विद्यार्थी को आजीविका कमाना तो सिखाती है, लेकिन शांत, संतुलित और आनंदपूर्ण जीवन जीने की कला से दूर रखती है।

 

2. स्कूल बनाम कोचिंग: शिक्षा व्यवस्था का दोहरा रवैया

भारत में शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण, ज्ञानवर्धन और प्रतिभा का विकास माना गया था। लेकिन आज की वास्तविक स्थिति यह है कि देश का शिक्षा ढांचा एक ऐसी अंधी दौड़ में बदल चुका है, जहाँ छात्र और अभिभावक दोनों मानसिक, आर्थिक और सामाजिक दबाव तले पिस रहे हैं। 'स्कूल बनाम कोचिंग' की दुविधा और 'आरक्षण-आधारित व्यवस्था' से उपजी हताशा- ये दो ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं, जिन पर व्यापक और बेबाक चर्चा की तत्काल आवश्यकता है।

 

आज के समय में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि बच्चे को अंततः प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग ही जाना है, तो स्कूल प्रणाली का औचित्य क्या रह जाता है?

 

समय और संसाधन की बर्बादी: एक सामान्य विद्यार्थी सुबह 6 से 8 घंटे स्कूल में बिताता है और उसके तुरंत बाद कोचिंग संस्थानों का रुख करता है। इससे न तो उसे स्व-अध्ययन (Self-study) का समय मिलता है और न ही मानसिक विश्राम का।

 

'डमी स्कूल' कल्चर का पनपना: 11वीं और 12वीं कक्षा में प्रवेश लेते ही छात्र 'डमी स्कूलing' का सहारा लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। स्कूल केवल नाममात्र के लिए रह जाते हैं और उनकी पूरी पढ़ाई का केंद्र कोचिंग सेंटर बन जाते हैं। यह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हमारी मुख्यधारा की स्कूली शिक्षा NEET और JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के मापदंडों को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

 

आर्थिक व मानसिक शोषण: अभिभावक स्कूल और कोचिंग दोनों की भारी-भरकम फीस भरते हैं। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब किसी कारणवश बच्चे का चयन नहीं होता, तो परिवार आर्थिक रूप से टूट जाता है और बच्चा भयंकर अवसाद (Depression) या हताशा का शिकार हो जाता है।

 

3. योग्यता, आरक्षण और युवाओं की अनिश्चितता

शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में वर्तमान आरक्षण व्यवस्था ने मेधावी और मेहनती युवाओं के सामने एक अनूठा संकट खड़ा कर दिया है।

 

मेहनत और परिणाम का असंतुलन: जो छात्र दिन-रात एक करके अत्यधिक कठिन परिश्रम करते हैं, उन्हें अक्सर प्रक्रिया के अंत में यह पता चलता है कि कट-ऑफ और सीटों के आरक्षण के कारण उनके सारे प्रयास निष्फल हो गए। यह स्थिति किसी भी युवा के मनोबल को तोड़ने के लिए काफी है।

 

भविष्य के प्रति अनिश्चितता: परीक्षा और नौकरी दोनों स्तरों पर व्याप्त यह व्यवस्था उन बच्चों के लिए अत्यधिक कष्टदायी साबित हो रही है, जो केवल अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं। जब पढ़ाई का पैमाना केवल अंक या ज्ञान न रहकर जातिगत या श्रेणीगत श्रेणियां बन जाता है, तो प्रतिभा पलायन (Brain Drain) और निराशा का जन्म होता है।

 

संवाद का अभाव: इस नीतिगत भेद पर कोई भी राजनीतिक दल या नीति-निर्माता खुलकर बात करने को तैयार नहीं है। सवाल यह है कि यह व्यवस्था कितनी और पीढ़ियों तक इसी रूप में चलती रहेगी और कब तक योग्यता को हाशिये पर रखा जाएगा?

 

4. भौतिकवादी दृष्टिकोण और प्रलोभन की संस्कृति

सफलता की संकीर्ण परिभाषा: बचपन से ही बच्चों के मन में यह विचार गहराई से बिठा दिया जाता है कि पद, ऊँची तनख्वाह, गाड़ी और बंगला ही सफलता के एकमात्र पैमाने हैं।

 

नैतिकता पर हावी पद-लोभ: व्यवस्था बच्चों को 'शांत व गुणी इंसान' या 'वैज्ञानिक' बनने के बजाय 'ऊँची कुर्सी' पाने का प्रलोभन देती है। इस दौड़ में सफलता पाने के साधनों की शुद्धता पीछे छूट जाती है और केवल परिणाम को ही महत्व दिया जाता है।

 

संघर्ष का भाव: यह दृष्टिकोण समाज में एक ऐसा माहौल बनाता है जहाँ हर व्यक्ति दूसरे के खिलाफ संघर्षरत दिखाई देता है, जिससे सहज मैत्री-भाव और सामाजिक सद्भाव समाप्त हो जाता है।

 

5. सामाजिक और वैचारिक विभाजन के केंद्र

संस्थागत सांप्रदायिकता: देश में शिक्षा का ढांचा धार्मिक और सांप्रदायिक आधारों पर बंटा हुआ प्रतीत होता है। विभिन्न धार्मिक व निजी शिक्षण संस्थाएं अपने-अपने एजेंडे के अनुसार पाठ्यक्रम संचालित कर रही हैं, जिससे एकीकृत राष्ट्रीय चेतना का निर्माण बाधित होता है।

 

कैंपस में वैचारिक ध्रुवीकरण: उच्च शिक्षण संस्थान अक्सर वैज्ञानिक शोध और मौलिक चिंतन के केंद्र बनने के बजाय राजनीतिक विचारधाराओं (लेफ्ट और राइट विंग) के टकराव के अड्डे बन जाते हैं। छात्र राष्ट्र निर्माण या नवाचार के बजाय आंदोलनों तक सीमित होकर रह जाते हैं।

 

6. प्राथमिकताओं का विपर्यय और भविष्य की चुनौतियाँ

सकारात्मक प्रेरणा का अभाव: हमारी सामाजिक सोच बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, कलाकार या नेता बनने का दबाव तो देती है, लेकिन उन्हें एक संवेदनशील इंसान, मौलिक साहित्यकार या वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा नहीं देती।

 

वैज्ञानिक सोच बनाम सांस्कृतिक संघर्ष: यदि हम आने वाली पीढ़ियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temperament) का विकास करने में विफल रहे, तो समाज वैचारिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संघर्षों में ही उलझा रहेगा।

 

शिक्षा में क्रांति की जरूरत:

आज़ादी के बाद से शिक्षा नीतियों में अनेक बदलाव हुए, लेकिन वे मुख्य रूप से सतही ही रहे। जब तक हमारी शिक्षा व्यवस्था केवल 'आज्ञाकारी कर्मचारी' बनाने के ढर्रे से बाहर निकलकर संशय, मौलिक सोच, वैज्ञानिक चेतना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा नहीं देती, तब तक एक सशक्त और विवेकशील समाज का निर्माण संभव नहीं है। हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली न तो विद्यार्थी को सर्वांगीण विकास दे पा रही है और न ही उसे निष्पक्ष अवसर की गारंटी दे रही है। यदि हमें देश के युवा धन को अवसाद, पलायन और आंदोलन से बचाना है, तो दो शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव करना होंगे। 

श्रेयस अय्यर ने लगातार 8वां टॉस जीता, जिम्बाब्वे के खिलाफ चुनी गेंदबाजी

INDvsZIM भारत के टी-20 अंतरराष्ट्रीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने आज जिम्बाब्वे के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। यह लगातार 8वां या 7वां टॉस (1 मैच बारिश के कारण रद्द) जो श्रेयस अय्यर ने जीता। हरारे स्पोर्ट्स कल्ब में भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में युवा टीम को उतराने का फैसला किया।

जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने कहा है कि शुरुआत में गेंदबाजों को मदद मिलेगी। भारत के खिलाफ उनका एक बल्लेबाज मिल्टन संबा सीरीज से बाहर हो चुके हैं इस कारण उनको इलोसेंट काइया को मौका दिया है।वहीं भारत का गेंदबाजी क्रम खासा युवा है। इसी तारतम्य में अशोक शर्मा का डेब्यू हुआ है।लेकिन बल्लेबाजी में काफी अनुभवी नाम है।

भारत :श्रेयस अय्यर (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, प्रिंस यादव, मयंक यादव, अशोक शर्मा, रवि बिश्नोई, रिंकू सिंह

जिम्बाब्वे: सिकंदर रजा (कप्तान), ब्रायन बेनेट, रियान बर्ल, तनाका शिवांगा, बेन कुरेन, ब्राड इवांस, वेसले माधेवेरे, टी मारूमनी, वेलिंगटन मसाकाजा, ब्लेसिंग मुजरबानी, रिचर्ड एनगारवा

Market Outlook: बाजार लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ हुआ बंद, जानिए 24 जुलाई को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : 23 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स लगातार चौथे दिन गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 22,900 के नीचे चला गया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 363.66 अंक या 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर और निफ्टी 126.65 अंक या 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 पर बंद हुआ। लगभग 1569 शेयरों में बढ़त हुई,2479 शेयरों में गिरावट आई और 155 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज,श्रीराम फाइनेंस,नेस्ले इंडिया,अदाणी पोर्ट्स और बजाज फाइनेंस शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो,एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस,एमएंडएम,टीसीएस और आयशर मोटर्स शामिल रहे।

सेक्टर के हिसाब से प्रदर्शन काफी हद तक कमजोर रहा और केवल कुछ ही इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए। गिरावट वाले सेक्टर में निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा,जिसमें 1.8% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस,इंफ्रास्ट्रक्चर,पीएसयू बैंक और निफ्टी एनर्जी में 1-1% की गिरावट दर्ज की गई। अन्य पिछड़ने वाले सेक्टर में निफ्टी मेटल (-0.7%),निफ्टी फार्मा (-0.4%),निफ्टी एफएमसीजी (-0.4%) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.4%) शामिल रहे।

निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने अच्छा प्रदर्शन किया और इसमें 0.7% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी मीडिया में 0.22% की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1-1 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में और दिक्कत की चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही हैं। ऐसे में महंगाई के जोखिम और कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव की आशंका के कारण निवेशकों का उत्साह कमजोर पड़ रहा है।

हाल के मैक्रो-इकोनॉमिक संकेत बताते हैं कि लंबे समय से चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। इसका संकेत थोक महंगाई और बिजनेस एक्टिविटी में आई सुस्ती से मिलता है।

एनर्जी की ऊंची कीमतों के चलते ग्लोबल ब्याज दरें ऊंची रहने की आशंका और मजबूत हुई है। इससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने इच्छा कमजोर हुई है। आज सभी सेक्टर में बिकवाली का दबाव देखा गया। हालांकि,मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इससे पता चलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद,निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है,मांग के रुझान अच्छे हैं और भविष्य के प्रदर्शन को लेकर बेहतर संभावनाएं दिख रही हैं।

इक्विरस वेल्थ के MD और बिजनेस हेड अंकुर पुंज का कहना है कि बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है। अमेरिका और यूरोप से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशक इक्विटी मार्केट में लंबे समय के लिए निवेश करने से घबरा रहे हैं। रुपये समेत प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती निवेशकों को सुरक्षित डॉलर एसेट्स की ओर खींच रही है। हालांकि बाजार’ओवरसोल्ड’जोन में दिख रहा है,फिर भी निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए और चुनिंदा शेयरों पर फोकस करना चाहिए।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि डेली चार्ट पर निफ्टी ने अपवर्ड कंसोलिडेशन के लेवल को तोड़ दिया है। इससे पता चलता है कि मार्केट में मंदी का रुझान बढ़ रहा है। इसके अलावा,इंडेक्स अहम शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज से भी नीचे आ गया है। RSI इंडिकेटर ‘बेयरिश क्रॉसओवर’की स्थिति में है और नीचे की ओर जा रहा है।

मार्केट का सेंटीमेंट नेगेटिव दिख रहा है और आने वाले समय में भी मार्केट में कमजोरी बनी रह सकती है। निचे की तरफ निफ्टी 23,600 या उससे भी नीचे जा सकता है। वहीं, ऊपर की तरफ अगले कुछ दिनों तक 24,000 का लेवल रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है।

 

Markets Trend : क्रूड के 98 डॉलर के पार जाने से सहमा बाजार, जानिए अब क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

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₹7.99 लाख की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुई Kia Syros EV, 526km रेंज और लग्जरी फीचर के साथ

Kia Syros EV Launch: अगर आप इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो Kia आपके लिए एक नया और किफायती विकल्प लेकर आया है। दरअसल, कंपनी ने अपनी नई Syros EV को भारत में लॉन्च कर दिया है, जो न सिर्फ Kia की सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार है, बल्कि इसे Battery-as-a-Service (BaaS) मॉडल के साथ भी खरीदा जा सकता है। बता दें कि इस मॉडल की शुरुआती कीमत 7.99 लाख रुपये रखी गई है, जबकि बैटरी की कीमत अलग से फाइनेंस की जाएगी, जिसके लिए ग्राहकों को 3.3 रुपये प्रति किलोमीटर की EMI देनी होगी। इसके अलावा, इस इलेक्ट्रिक SUV की डिलीवरी 30 जुलाई से शुरू होगी।

Kia Syros EV कंपनी की अब तक की सबसे किफायती इलेक्ट्रिक कार है। यह Carens Clavis EV के बाद Kia का दूसरा मास-मार्केट इलेक्ट्रिक मॉडल है। इसकी शुरुआती कीमत 13.49 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) है, जबकि टॉप-स्पेक X-Line ER वेरिएंट की कीमत 19.99 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) तक जाती है।

कंपनी ने Syros EV को अपने मजबूत K1 प्लेटफॉर्म पर तैयार किया है। यह इलेक्ट्रिक SUV ग्राहकों को दो बैटरी पैक विकल्पों के साथ मिलेगी—42 kWh और 51.4 kWh। इन बैटरी ऑप्शन के साथ Kia का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर आकर्षित करना है।

छोटे बैटरी पैक वाला वेरिएंट ARAI-सर्टिफाइड MIDC फुल-साइकिल रेंज में 443 किलोमीटर तक चल सकता है। वहीं, बड़े 51.4 kWh बैटरी पैक वाले मॉडल की रेंज 526 किलोमीटर तक बताई गई है। इसके साथ ही Kia Syros EV अपने सेगमेंट की पहली ऐसी इलेक्ट्रिक SUV बन गई है, जिसने 500 किलोमीटर से ज्यादा की प्रमाणित रेंज का आंकड़ा पार किया है।

इसकी बड़ी बैटरी एक इलेक्ट्रिक मोटर को पावर देती है, जो 171 PS (लगभग 169 bhp) की पावर जेनरेट करती है, जिससे यह SUV 0 से 100 km/h की रफ्तार 8.1 सेकंड में पकड़ लेती है।

Syros EV में 100 kW DC फास्ट चार्जिंग की भी सुविधा है, जिससे बैटरी 39 मिनट में 10% से 80% तक चार्ज हो सकती है। इसमें 10.8 kW का ऑनबोर्ड AC चार्जर भी मिलता है।

फीचर लिस्ट

Syros EV का डिजाइन ICE-पावर्ड Syros जैसा ही है, लेकिन इसमें कुछ खास EV स्टाइलिंग एलिमेंट्स दिए गए हैं। इसके अलावा, इनमें Kia की क्लोज्ड-ऑफ Digital Tiger Face ग्रिल, Ice Cube LED हेडलैंप, Star Map LED DRLs और टेल लैंप, फ्लश-फिटिंग डोर हैंडल्स और 17-इंच के डुअल-टोन एयरो अलॉय व्हील शामिल हैं।

इंटीरियर की बात करें तो, इसके अंदर 30-इंच का पैनोरमिक डिस्प्ले है, जिसमें 12.3-इंच का टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, 12.3-इंच का डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 5-इंच का क्लाइमेट कंट्रोल इंटरफेस शामिल है।

Kia Syros EV के अन्य फीचर्स में डुअल-पेन पैनोरमिक सनरूफ, एम्बिएंट लाइटिंग, फोर-वे पावर ड्राइवर सीट, स्लाइडिंग और रिक्लाइनिंग रियर सीट, वेंटिलेटेड फ्रंट और रियर सीट, आठ-स्पीकर वाला Harman Kardon ऑडियो सिस्टम, वायरलेस Android Auto और Apple CarPlay, वायरलेस फोन चार्जर, 16-लीटर का फ्रंक (फ्रंट ट्रंक), स्मार्ट डैशकैम, 360-डिग्री कैमरा और 16 ऑटोनॉमस फंक्शन वाला लेवल 2 ADAS शामिल हैं।

सेफ्टी फीचर्स

Kia Syros EV में यात्रियों की सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा गया है। इसमें 6 एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), हिल-स्टार्ट असिस्ट, ऑटो होल्ड के साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्किंग ब्रेक, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS), ISOFIX चाइल्ड सीट एंकर जैसे सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं।

इसके अलावा, इसमें ब्लाइंड व्यू मॉनिटर और आगे, पीछे व साइड पार्किंग सेंसर भी मिलते हैं, जो ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा और सुविधा को बेहतर बनाते हैं।

Syros EV की कीमतें (एक्स-शोरूम):

Battery PackVariant
Price

42 kWhHTK₹13.49 lakh
42 kWhHTK+₹14.99 lakh
42 kWhHTX₹15.99 lakh
51.4 kWh (Extended Range)HTK+ ER₹16.99 lakh
51.4 kWh (Extended Range)HTX ER₹17.99 lakh
51.4 kWh (Extended Range)HTX+ ER₹19.49 lakh
51.4 kWh (Extended Range)X-Line ER₹19.99 lakh

ओनरशिप के फायदे

Kia ने Syros EV के साथ ग्राहकों के लिए कई खास फायदे भी पेश किए हैं। कंपनी पहले मालिक को हाई-वोल्टेज बैटरी पर 15 साल की अनलिमिटेड किलोमीटर वारंटी दे रही है। इसके अलावा, कंपनी ने अश्योर्ड बायबैक प्रोग्राम भी शुरू किया है, जिसके तहत तीन साल बाद कार की रीसेल वैल्यू 80% तक मिल सकती है।

वहीं, ग्राहकों को बेहतर चार्जिंग सुविधा देने के लिए Kia के K-Charge नेटवर्क के जरिए 20,300 से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट्स तक पहुंच मिलेगी।

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Commonwealth Games में भारतीय झंडा उठाने से पहले ही पदक पक्का किया लवलीना बोर्गहेन ने

राष्ट्रमंडल खेल 2026 के उद्घाटन समारोह के लिए ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन को क्रमशः भारत का ध्वजवाहक और बैटन वाहक नामित किया गया। लेकिन इसमें से लवलीना बोरगोहेन ने ध्वजवाहक बनने से पहले ही अपना पहला पदक इस राष्ट्रमंडल खेल में पक्का कर लिया है।

खबरों के मुताबिक राष्ट्रमंडल खेल 2026 के 75 किलोग्राम वर्ग में उनको सीधे सेमीफाइनल में जगह मिल गई है। इस हिसाब से वह कमसेकम एक कांस्य पदक जरुर जीतेंगी। अगर वह सेमीफाइनल जीत जाती है तो फिर रजत या स्वर्ण पदक भी जीत सकती है।

दरअसल राष्ट्रमंडल खेल 2026 में  सिर्फ 5 महिला मुक्केबाज महिला खिलाड़ी थी जिसमें से शीर्ष 3 को सेमीफाइनल में सीधे दाखिला मिल गया। इन मुक्केबाज महिला खिलाड़ियों में लवलीना भी शामिल थी।

लंदन ओलंपिक 2012 और रियो ओलंपिक 2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले शिव थापा के बाद ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करने वाली असम की दूसरी मुक्केबाज लवलीना ने तोक्यो में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक पदक जीतने वाली अपने राज्य की पहली खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया था।23 वर्ष की लवलीना को वेल्टरवेट (69 किलो) सेमीफाइनल में तत्कालीन विश्व चैम्पियन तुर्की की बुसेनाज सुरमेनेली ने 5-0 से हराया था। लवलीना विजेंदर सिंह (2008) और एमसी मैरीकॉम (2012) के बाद ओलंपिक पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज बनी थी। 15 साल पहले मुक्केबाजी में करियर शुरू करने वाली लवलीना 2 बार विश्व चैम्पियनशिप कांस्य भी जीत चुकी हैं।