Rohullah Mehdi Arrested: रोहुल्लाह मेहदी मुंबई ड्रग्स केस में गिरफ्तार, शाहिद कपूर की फिल्म ‘देवा’ में आ चुके हैं नजर

Rohullah Mehdi Arrested: सोशल मीडिया के ज़रिए चल रहे कथित ड्रग्स नेटवर्क के मामले में मुंबई के मीरा रोड इलाके के काशीमीरा में एक्टर और मॉडल रोहुल्लाह मेहदी को गिरफ़्तार किया गया है। काशीमीरा पुलिस क्राइम ब्रांच ने लगभग 5.60 लाख रुपये कीमत की 28 ग्राम MD ड्रग्स जब्त की और दो लोगों को गिरफ़्तार किया। FIR नंबर 437/2026 के मुताबिक, मेहदी को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

पुलिस ने बताया कि उन्हें स्नैपचैट, वॉट्सऐप और दूसरे सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिए MD ड्रग्स बेचे जाने की जानकारी मिली थी। इस जानकारी के आधार पर, अधिकारियों ने एक नकली ग्राहक का इस्तेमाल करके जाल बिछाया। कासिफ़ नाम के एक व्यक्ति को 28 ग्राम MD की डिलीवरी के लिए दहिसर चेक नाका इलाके में ठाकुर मॉल के पास बुलाया गया। पुलिस ने उसे कथित ड्रग डील के दौरान पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान, उसने कथित तौर पर मेहदी का नाम लिया।

जानकारी मिलने पर पुलिस ने मलाड में एक स्टूडियो के बाहर से मेहदी को गिरफ़्तार किया, जहां वह शूटिंग कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, मेहदी मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बडगाम ज़िले का रहने वाला है और मुंबई के गोरेगांव में रह रहा था। उसने शाहिद कपूर के साथ फ़िल्म ‘देवा’ में काम किया है और कई वेब सीरीज़ में भी नज़र आया है।

गिरफ़्तारी के बाद मेहदी को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। पुलिस अब कथित ड्रग नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेहदी ने किसे ड्रग्स सप्लाई किए होंगे। वे यह भी जांच कर रहे हैं कि क्या फ़िल्म इंडस्ट्री के और लोग भी इस मामले से जुड़े हैं।

यह ऑपरेशन DCP ज़ोन-1 राहुल चव्हाण की देखरेख में काशिमीरा पुलिस टीम ने चलाया। पुलिस ने कहा कि जांच चल रही है और और भी नाम सामने आ सकते हैं।

PPF vs NSC: ₹10 लाख के निवेश पर कहां मिलेगा ज्यादा रिटर्न? समझिए 5 साल का पूरा गणित और टैक्स कैलकुलेशन

PPF vs NSC Investment Return Comparison: अगर आपके पास ₹10 लाख हैं और आप उसे अगले 5 सालों के लिए सरकारी गारंटी वाली स्कीम में बिना किसी रिस्क के जमा करना चाहते हैं, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सबसे बेहतरीन जरिया हैं।

स्मॉल सेविंग्स में दो सबसे पसंदीदा विकल्प पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) हैं। चालू वित्त वर्ष (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) के लिए सरकार ने पीपीएफ की ब्याज दर 7.1% और एनएससी की ब्याज दर 7.7% पर बरकरार रखी है।

अगर आप ₹10 लाख का निवेश करते हैं, तो 5 साल में कहां ज्यादा फायदा मिलेगा? जानिए पूरी कैलकुलेशन।

₹10 लाख के निवेश पर 5 साल की कैलकुलेशन

अगर हम दोनों स्कीम्स में ₹10 लाख के कॉर्पस पर 5 साल के ग्रोथ की तुलना करें, तो आंकड़े इस प्रकार हैं:

PPF कैलकुलेशन (7.1% ब्याज): ₹10 लाख की जमा राशि 5 साल में 7.1% सालाना ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर लगभग ₹14,09,120 हो जाएगी। इसमें आपको 5 साल में करीब ₹4,09,120 का प्री-टैक्स ब्याज मिलेगा।

NSC कैलकुलेशन (7.7% ब्याज): ₹10 लाख का निवेश 5 साल में 7.7% की चक्रवृद्वि ब्याज दर के हिसाब से बढ़कर ₹14,49,030 हो जाएगा। यानी 5 साल में करीब ₹4,49,030 का प्री-टैक्स मुनाफा होगा।

ध्यान रहे कि पीपीएफ में एक वित्त वर्ष में अधिकतम ₹1.5 लाख ही जमा करने की इजाजत है। इसलिए ₹10 लाख का यह आंकड़ा तुलनात्मक गणना के लिए 7.1% ब्याज के आधार पर दर्शाया गया है। NSC में निवेश की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती।

प्री-टैक्स रिटर्न में NSC आगे, लेकिन टैक्स का पेंच समझें

कागजों पर 5 साल में NSC, PPF की तुलना में सीधे तौर पर ₹39,910 का ज्यादा रिटर्न देता दिख रहा है। लेकिन असली गणित टैक्स Slab के बाद बदलता है:

PPF पर EEE स्टेटस: पीपीएफ पूरी तरह से ‘EEE’ कैटगरी में आता है। यानी जमा राशि, मिला हुआ ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट तीनों पूरी तरह से टैक्स-फ्री होते हैं।

NSC पर टैक्स नियम: एनएससी से मिलने वाला ब्याज आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होता है। हालांकि, पहले 4 सालों के री-इन्वेस्टेड इंटरेस्ट पर सेक्शन 80C के तहत छूट क्लेम की जा सकती है, लेकिन आखिरी साल का ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल रहता है। Higher Tax Slab वाले निवेशकों के लिए NSC का नेट रिटर्न कम हो सकता है।

मैच्योरिटी और लिक्विडिटी में कौन सा बेहतर?

NSC (5 साल का लॉक-इन): एनएससी की मैच्योरिटी ठीक 5 साल में पूरी हो जाती है। इसके अलावा, इसमें निवेश करते ही ब्याज दर पूरे 5 साल के लिए लॉक हो जाती है, जो मार्केट में ब्याज दरें घटने पर भी नहीं बदलती।

PPF (15 साल का लॉक-इन): पीपीएफ मूल रूप से 15 साल की लंबी अवधि की स्कीम है। हालांकि, इसमें 7वें साल से आंशिक निकासी और तीसरे साल से लोन की सुविधा मिलती है। पीपीएफ की ब्याज दरों की समीक्षा सरकार हर तिमाही करती है।

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

PPF vs NSC: ₹10 लाख निवेश की तुलना

आपके लिए कौन सा विकल्प है बेस्ट?

अगर आपकी प्राथमिकता 5 साल की फिक्स्ड अवधि, गारंटीड रिटर्न और ज्यादा ब्याज दर है और आप लोअर टैक्स स्लैब में आते हैं तो NSC आपके लिए बेस्ट है। दूसरी ओर, अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि के लिए पूरी तरह से टैक्स-फ्री फंड बनाना है, तो PPF से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अपने वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करके दोनों स्कीम्स का सही अनुपात में इस्तेमाल करना चाहिए।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Lalithaa Jewellery Listing: 66 गुना सब्सक्राइब आईपीओ, ₹201 के शेयर चमकाएंगे पोर्टफोलियो या रेड लिस्ट?

Lalithaa Jewellery Listing: आईपीओ को 66 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की ज्वैलरी रिटेल कंपनी ललिता ज्लैवरी मार्ट के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर शानदार संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹72 यानी 35.82% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 24 अगस्त को करीब 36% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹201 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार एमयूएफजी की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

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रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

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Lalithaa Jewellery IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

ललिता ज्वैलरी का ₹1,700 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 66.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 153.80 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 78.17 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.51 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 9.10 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹1,200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹5 की फेस वैल्यू वाले 2,48,75,621 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर किरण कुमार जैन को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1,033.23 करोड़ 10 नए स्टोर्स के सेटअप और बाकी आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Lalithaa Jewellery के बारे में

ललिता ज्वैलरी का कारोबार दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूती से फैला हुआ है। यह सोने, चांदी, हीरे इत्यादि के गहने बनाती है। ललिता ज्वैलरी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 67% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹1,009.82 करोड़ और टोटल इनकम 22% के सीएजीआर से ₹25,039.80 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,604.14 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,679.74 करोड़ पड़े थे।

आईपीओ को लेकर क्या था ब्रोकरेजेज का रुझान

एसबीआई सिक्योरिटीज ने ललिता ज्वैलरी आईपीओ को न्यूट्रल रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने कहा था कि वह अभी की बजाय लिस्टिंग के बाद कुछ तिमाही तक कंपनी के परफॉरमेंस को ट्रैक करेगी। आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से कंपनी की वैल्यू वित्त वर्ष 2026 की कमाई के मुकाबले 11.1 गुना पर थी जोकि ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इंडस्ट्री पियर्स के हिसाब से है। हालांकि हेजिंग पॉलिसी नहीं होने को एक रिस्क बताया था। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक गोल्ड के भाव स्थिर होने पर कंपनी का मार्जिन कम हो सकता है।

एक और ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने ललिता ज्वैलरी को सब्सक्राइब रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने लिस्टिंग गेन के साथ-साथ रिस्क उठा सकने वाले निवेशकों को लॉन्ग टर्म के लिए पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कल्याण ज्लैवर्स (Kalyan Jewellers) और टाइटन (Titan) जैसे दिग्गजों के मुकाबले P/E बेसिस पर यह आईपीओ 75% डिस्काउंट पर है। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्म ने ₹1066 करोड़ के जीएसटी विवाद और प्रमोटर से जुड़े मामले को अहम रिस्क के तौर पर जिक्र किया है लेकिन यह भी कहा कि टैक्स से जुड़े पुराने मामले काफी हद तक सुलझ चुके हैं।

Horizon Industrial Parks लगातार घाटे में, अब ग्रे मार्केट से लिस्टिंग को लेकर मिल रहे ये संकेत

Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा शेयर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Horizon Industrial Parks लगातार घाटे में, अब ग्रे मार्केट में ऐसी है शेयरों की हालत

Horizon Industrial Parks Listing: इनकम में उछाल के बावजूद लगातार घाटे में चल रही होरीजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स का आईपीओ दो गुना से कम सब्सक्राइब हो पाया। ग्रे मार्केट से भी इसके शेयरों की ढाई फीसदी प्रीमियम पर ही लिस्टिंग के संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹1.5 यानी 2.50% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को करीब 2.5% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। इसके शेयर कल 24 अगस्त को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे।

हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹60 के भाव पर जारी हुए हैं। एंप्लॉयीज को हर शेयर पर ₹5 का डिस्काउंट मिला है। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Horizon Industrial Parks चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

https://ipostatus.kfintech.com/, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट आईपीओ पर क्लिक करके Horizon Industrial Parks चुनें।

एप्लीकेशन नंबर, डीमैट अकाउंट या पैन में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

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शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Horizon Industrial Parks IPO को मिला था सुस्त रिस्पांस

होरिजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स का ₹2,600 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। यह इश्यू ओवरऑल 1.52 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 1.94 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 1.03 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 1.02 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 1.64 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 43,34,09,090 नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹2,250.00 कंपनी और इसकी पूर्ण मालिकाना हक वाली कुछ सब्सिडरीज का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Horizon Industrial Parks के बारे में

जीएलएल रिपोर्ट के मुताबिक नेटवर्क के हिसाब से ब्लैकस्टोन के निवेश वाली होरीजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स देश की सबसे बड़ी इंडस्ट्रियल और लॉजिस्टिक्स इंफ्रा डेवलपर है। कंपनी के आईपीओ ड्राफ्ट के मुताबिक इसके पास देश के 10 बड़े शहरों में कुल 5.80 स्क्वेयर फीट में फैले हुए 45 लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल एसेट्स हैं। यह बड़ी-बड़ी कंपनियों के लिए बड़े और नए जमाने के हिसाब से वेयरहाउसेज और इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज बनाती है और फिर उन्हें किराए पर देती है।

इसके पास मुख्य रूप से तीन एसेट्स हैं- ई-कॉमर्स, एफएमसीजी, रिटेल और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के इस्तेमाल के लिए फुलफिलमेंट सेंटर्स (वेयरहाउसिंग); मैन्युफैक्चरिंग, ईवी, रिन्यूएबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो इत्यादि के लिए इंडस्ट्रियल फैसिलिटीज; और लास्ट-माइल डिलीवरी के लिए इन-सिटी सेंटर्स जिनका इस्तेमाल डार्क स्टोर्स, फार्मा, क्लाउड किचन, रिटेल और सर्विस बिजनेस में होता है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो पिछले तीन वित्त वर्षों से इनकम में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद इसका घाटा लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024 में इसे ₹162.21 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था जोकि वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर ₹178.78 करोड़ और वित्त वर्ष 2026 में ₹203.65 करोड़ पर पहुंच गया तो दूसरी तरफ इस दौरान कंपनी की टोटल इनकम सालाना करीब 77% की रफ्तार यानी सीएजीआर से बढ़कर ₹767.84 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹6,884.34 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹3,214.54 करोड़ पड़े थे।

Lalithaa Jewellery Listing: 66 गुना सब्सक्राइब आईपीओ, ₹201 के शेयर चमकाएंगे पोर्टफोलियो या रेड लिस्ट?

Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा शेयर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अब नहीं मिलेगा LPG गैस सिलेंडर! सरकार का बड़ा आदेश- PNG कनेक्शन लेना जरूरी, वरना कट जाएगा कनेक्शन

LPG Control Order 2026 Rules: भारत सरकार ने देश में रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश जारी कर एलपीजी सिलेंडरों की जगह पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ावा देने को कहा है। इसके पीछे कई वजह आपूर्ति व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाना है।

नए ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2026’ और ‘नैचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत अब उन इलाकों में जहां पीएनजी पाइपलाइन उपलब्ध है, वहां एक साथ एलपीजी और पीएनजी दोनों कनेक्शन रखना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। यानी आप अब LPG सिलेंडर नहीं यूज कार पाएंगे।

PNG लेना अनिवार्य, वरना कट जाएगा LPG सिलेंडर कनेक्शन

पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल की ओर से राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र के मुताबिक, सरकार ने एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट होने के नियमों को सख्त कर दिया है। जिन सोसायटियों या इलाकों में पीएनजी नेटवर्क पहुंच चुका है, वहां के उपभोक्ताओं को नोटिस दिया जाएगा। अगर तय नोटिस मिलने के बावजूद कोई उपभोक्ता पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसका LPG सिलेंडर कनेक्शन अपने आप रद्द कर दिया जाएगा।

मिडिल ईस्ट संकट और भारत का बड़ा सबक

सरकार द्वारा पीएनजी पर अचानक इतना जोर देने की सबसे बड़ी वजह हालिया पश्चिम एशिया संकट और ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में हुआ व्यवधान है। भारत अपनी घरेलू रसोई गैस (LPG) की जरूरतों के लिए काफी हद तक कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों पर निर्भर है। मिडिल ईस्ट जंग के कारण एलपीजी सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी।

आयातित एलपीजी की तुलना में घरेलू पीएनजी सप्लाई ज्यादा सुरक्षित और मजबूत साबित हुई क्योंकि इसे घरेलू प्राकृतिक गैस का प्राथमिकता आवंटन मिलता है। पीएनजी से अंतरराष्ट्रीय युद्ध और लॉजिस्टिक्स रुकावटों का असर नहीं पड़ता।

हर जिले में बनेगी ‘PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी’

पीएनजी कनेक्शन की प्रक्रिया को तेजी से लागू करने के लिए सरकार ने विशेष प्रशासनिक ढांचा तैयार किया है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को हर क्षेत्र में ‘पीएनजी कोऑर्डिनेशन कमेटी’ (PCC) गठित करने का निर्देश दिया गया है।

राज्यों से कहा गया है कि वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) स्तर के अधिकारी को जिले का नोडल ऑफिसर बनाएं जो आरडब्ल्यूए (RWA) और सोसायटियों से परमिशन और राइट ऑफ वे दिलाने में मदद करेंगे।

पीएनजी अपनाने के 4 बड़े फायदे

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पीएनजी में शिफ्ट होने से आम जनता और देश दोनों को सीधा फायदा होगा:

सस्ता और सुविधाजनक: पीएनजी सिलेंडर के मुकाबले ज्यादा सस्ती, सुरक्षित और बिना रिफिलिंग के 24×7 मिलने वाली रसोई गैस है।

सिलेंडर बुकिंग का झंझट खत्म: उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुक करने या डिलीवरी का इंतजार करने से मुक्ति मिलेगी।

लॉजिस्टिक्स का बोझ कम: सड़कों पर सिलेंडरों के परिवहन और भारी-भरकम गाड़ियों का बोझ कम होगा।

इन्फ्रास्ट्रक्चर का सही इस्तेमाल: सरकारी और प्राइवेट कंपनियों द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने में किए गए अरबों रुपये के निवेश का सही उपयोग हो सकेगा।

Video: दलीप ट्रॉफी डेब्यू पर फ्लॉप रहे वैभव सूर्यवंशी, ईस्ट जोन के वाइस-कैप्टन 8 रन पर लौटे पवेलियन

Vaibhav Sooryavanshi: महज 15 साल की उम्र में क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने वाले वैभव सूर्यवंशी के लिए रेड बॉल क्रिकेट की शुरुआत अच्छी नहीं रही। दलीप ट्रॉफी 2026 में ईस्ट जोन के वाइस-कैप्टन वैभव सूर्यवंशी दिलीप ट्रॉफी के अपने पहले मैच में बड़ी पारी नहीं खेल सके। रविवार को बेंगलुरु में नॉर्थ-ईस्ट जोन के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने अभिमन्यु ईश्वरन के साथ पारी की शुरुआत की। लेकिन वह ज्यादा देर तक मैदान पर टिक नहीं पाए। वैभव सिर्फ 6 गेंदों पर 8 रन बनाकर आउट हो गए। उन्होंने शुरुआत में दो चौके लगाए, लेकिन 8 रन के स्कोर पर आउट होकर वापस लौट गए।

कैसी थी वैभव की पारी

15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने आउट होने से पहले कुछ अच्छे शॉट लगाए, लेकिन उनकी पारी ज्यादा देर नहीं चल सकी। पेसर बिश्वोर्जित कोंथौजम ने उन्हें आउट किया। वैभव ने शुरुआत में कुछ गेंदों को संभलकर खेला और फिर एक अच्छी लेंथ की गेंद पर डीप मिड-विकेट की ओर चौका लगाया। लेकिन, दूसरे ओवर में ही उनकी पारी खत्म हो गई। कोंथौजम की ऑफ स्टंप गेंद पर वैभव सूर्यवंशी ने एक्स्ट्रा कवर की दिशा में अच्छा शॉट खेला। इसके बाद गेंदबाज ने अपनी रणनीति बदली और ओवर की आखिरी गेंद थोड़ी छोटी और बाहर की ओर रखी। वैभव ने गेंद को पॉइंट की तरफ खेलने की कोशिश की, लेकिन उनका शॉट सही नहीं लगा और गली में कैच हो गया। इस तरह उनकी पारी 8 रन पर खत्म हो गई।

 

वैभव आईपीएल से चर्चा में

वैभव सूर्यवंशी ने अपनी पारी की शुरुआत से ही तेज बल्लेबाजी करने की कोशिश की और बाउंड्री लगाने का मौका तलाशते रहे। लेकिन, नॉर्थ ईस्ट जोन के गेंदबाजों को पिच से मदद मिल रही थी और गेंद दोनों तरफ घूम रही थी। ऐसे में वैभव का आक्रामक अंदाज इस बार उनके लिए भारी पड़ गया। ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन की टीम में तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी भी शामिल हैं। वैभव सूर्यवंशी IPL में अपने शानदार प्रदर्शन और भारत के लिए T20I डेब्यू के बाद लगातार चर्चा में रहे हैं। इस युवा बल्लेबाज ने कई बार बताया है कि वह रेड-बॉल क्रिकेट खेलना चाहते हैं। उनका लक्ष्य भविष्य में भारतीय टेस्ट टीम का हिस्सा बनना है और इसके लिए वह लंबे फॉर्मेट में खुद को साबित करना चाहते हैं।

Tempsens Instruments IPO: लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे के संकेत, ग्रे मार्केट में 107% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है शेयर

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) का ₹650 करोड़ का IPO 20 अगस्त को खुला था। अभी तक यह 21.69 गुना भर चुका है। इसमें 24 अगस्त को भी पैसे लगाए जा सकेंगे। उसके बाद अलॉटमेंट 25 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 28 अगस्त को लिस्ट हो सकते हैं। स्टॉक मार्केट में कंपनी की शुरुआत धांसू रहने के संकेत हैं। ग्रे मार्केट में शेयर 107 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। मतलब कि IPO निवेशकों को तगड़ा मुनाफा हो सकता है।

लेकिन ऐसा जरूरी नहीं कि ग्रे मार्केट के संकेत लिस्टिंग डे पर सच हो जाएं। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं। Tempsens Instruments IPO के लिए प्राइस बैंड ₹285-₹300 प्रति शेयर और लॉट साइज 50 शेयर है। IPO में ₹95 करोड़ के 32 लाख नए शेयर जारी हो रहे हैं। साथ ही प्रमोटर्स और मौजूदा शेयरहोल्डर्स की ओर से ₹555 करोड़ के 1.85 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल है।

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) लिमिटेड एक थर्मल इंजीनियरिंग कंपनी और खास तरह के केबल बनाने वाली कंपनी है। यह कस्टमाइज्ड टेंपरेचर सेंसिंग सॉल्यूशंस, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और खास तरह के केबल की डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का काम करती है। कंपनी के प्रोडक्ट एक्सपोर्ट भी होते हैं। कंपनी कॉन्टैक्ट और नॉन कॉन्टैक्ट टेंपरेचर सेंसर बनाती है।

किस कैटेगरी में अब तक कितना सब्सक्रिप्शन

IPO में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा अभी तक 3.31 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 52.98 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 18.73 गुना और कर्मचारियों के लिए रिजर्व हिस्सा 28.93 गुना भर चुका है। IPO के लिए ICICI Securities Ltd और JM Financial बु​क रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है।

Skyways Air Services IPO: ₹583 करोड़ के इश्यू के​ लिए ₹131-₹138 है प्राइस बैंड, 24 अगस्त से लगा सकेंगे पैसे

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल सॉल्यूशंस को लेकर पूंजीगत खर्च के लिए, कर्ज चुकाने के लिए और आम कॉरपोरेट कामों के लिए करेगी। IPO की ओपनिंग से पहले कंपनी ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹194.55 करोड़ जुटाए। IPO में ₹1.5 करोड़ के शेयर कंपनी के कर्मचारियों के लिए रिजर्व हैं। बाकी ​बचे हिस्से में से 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

Tempsens Instruments की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 19 प्रतिशत बढ़कर ₹455.86 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹71 करोड़ रहा। ​एक साल पहले रेवेन्यू ₹382.47 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹62.56 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 के दौरान टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स पर ₹77.95 करोड़ की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold vs Inflation: 46 साल के आंकड़ों से मिला जवाब, गोल्ड में निवेश महंगाई से लड़ाई में कितना कारगर

Gold vs Inflation: गोल्ड के भाव एक बार फिर तेजी से ऊपर चढ़ने लगे हैं। 24 कैरट की शुद्धता वाला 10 ग्राम गोल्ड अब करीब ₹1.64 लाख के भाव पर पहुंच गया है जबकि कुछ ही दिन पहले यह लगभग ₹1.59 लाख में मिल रहा था। हालांकि गोल्ड के भाव में इस तेजी के चलते ही इसमें निवेशकों का रुझान दिखता है बल्कि इसे बड़े पैमाने पर महंगाई की रफ्तार से बचाव के तौर पर देखा जाता है। अब सवाल ये उठता है कि क्या सोना वाकई लॉन्ग टर्म में महंगाई से लड़ाई में अच्छा हथियार साबित हुआ है और अगर हां तो कितना। इसे लेकर फंड्सइंडिया की वेल्थ कंवर्जेशंस अगस्त 2026 रिपोर्ट के डेटा से सामने आया है कि जैसे-जैसे गोल्ड रखने की अवधि यानी होल्डिंग पीरियड बढ़ती है, महंगाई से आगे रहने में इसकी रफ्तार अधिक स्थिर हो जाती है।

Gold vs Inflation: अलग-अलग टाइमफ्रेम में कैसी रही भिड़ंत

फंड्सइंडिया ने साल 1995 और साल 2025 के बीच अलग-अलग इन्वेस्टमेंट पीरियड में सोने से मिलने वाले रिटर्न और महंगाई की तुलना की। इसमें गोल्ड के रिटर्न और महंगाई के बीच सालाना औसत अंतर को मापा गया। इस डेटा के मुताबिक एक साल में दोनों के बीच किसकी रफ्तार अधिक रही, यह इस बात पर काफी निर्भर है कि गोल्ड की खरीदारी कब हुई। औसतन गोल्ड ने एक साल में इनफ्लेशन को करीब 4 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ दिया। हालांकि एक साल में ही खरीदारी के अलग-अलग समय के हिसाब से ही गोल्ड ने इनफ्लेशन को 24 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पछाड़ दिया तो कुछ अवधि में 28 पर्सेंटेज प्वाइंट्स तक पिछड़ गई।

अब अगर पांच साल में बात करें तो गोल्ड ने महंगाई की रफ्तार यानी इनफ्लेशन को औसतन सालाना 5 पर्सेंटेज प्वाइंट्स से पीछे छोड़ा तो 10,15 और 20 साल की अवधि में भी ऐसी ही स्थिति रही। इसका मतलब है कि कम समय में जरूरी नहीं है कि गोल्ड इनफ्लेशन को पछाड़ दे लेकिन लंबे समय में यह अब तक आगे ही साबित हुआ है।

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हर साल लगातार नहीं बढ़ी गोल्ड की चमक

लॉन्ग टर्म में गोल्ड ने शानदार रिटर्न दिया है और महंगाई को मात दी है लेकिन इसकी चमक लगातार हर साल नहीं बढ़ी है। इसे लेकर फंड्सइंडिया ने 1980 से लेकर अब तक गोल्ड ने कितना रिटर्न दिया, एक और एनालिसिस की। इसमें सामने आया कि इसमें जोरदार तेजी के दौर भी आए हैं तो लॉन्ग टर्म तक सुस्त रिटर्न के दौर भी रहे हैं। रोलिंग-रिटर्न डेटा के मुताबिक अलग-अलग पीरियड में गोल्ड का औसतन सालाना रिटर्न करीब 10% रहा है लेकिन शॉर्ट टर्म में रिटर्न इस बात पर बहुत निर्भर रहा कि निवेशक ने किस समय सोना खरीदा था। कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि इनफ्लेशन हेज यानी महंगाई के खिलाफ हथियार होने का मतलब ये नहीं है कि जब भी महंगाई बढ़ेगी, सोने की कीमत भी उसी समय बढ़ेगी या सोना हर साल महंगाई से ज्यादा रिटर्न देगा या सोने की कीमत हमेशा ऊपर ही जाएगी।

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Skyways Air Services IPO: ₹583 करोड़ के इश्यू के​ लिए ₹131-₹138 है प्राइस बैंड, 24 अगस्त से लगा सकेंगे पैसे

मेनबोर्ड सेगमेंट में स्काईवेज एयर सर्विसेज का IPO 24 अगस्त को खुलने वाला है। कंपनी का इरादा ₹582.80 करोड़ जुटाने का है। इस इश्यू में ₹398.80 करोड़ के 2.89 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹184 करोड़ के 1.33 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर यशपाल शर्मा, तरुण शर्मा और निवेशक हिमांशु छाबड़ा, रोहित सहगल शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। IPO में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹131-₹138 प्रति शेयर है। लॉट साइज 100 शेयर है।

इश्यू की क्लोजिंग 27 अगस्त को होगी। इसके बाद अलॉटमेंट 28 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 1 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। IPO के लिए होलानी कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, शैनोन एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड और दौलत फिनसर्व प्राइवेट लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है।

क्या करती है Skyways Air Services

स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड (SASL) एक जानी-मानी लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी है। एक फ्रेट फॉरवर्डिंग कंपनी लॉजिस्टिक्स मैनेजर की तरह काम करती है। ऐसी कंपनी आमतौर पर खुद माल को एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जाती, बल्कि ग्राहक की ओर से माल ढोने की जगह (शिपमेंट स्पेस) बुक करती है, सीमा शुल्क की प्रक्रिया संभालती है और अलग-अलग परिवहन कंपनियों के जरिए माल को हवाई, समुद्री, सड़क या रेल मार्ग से पहुंचाने की व्यवस्था करती है।

SASL लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई तरह की सेवाएं देती है, जैसे कि एयर और ओशन फ्रेट फॉरवर्डिंग, ट्रकिंग, कस्टम्स ब्रोकिंग, वेयरहाउसिंग, टेक्नोलॉजी पर बेस्ड एक्सप्रेस कार्गो और पार्सल डिलीवरी, और अन्य वैल्यू-एडेड सेवाएं। कंपनी की बाजार में मजबूत स्थिति और ग्लोबल कनेक्टिविटी है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

SASL अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल अपना और अपनी सब्सिडियरी Forin Container Line Pvt.Ltd. का कर्ज चुकाने के लिए, वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। इस पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

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कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹174.54 करोड़ जुटाए। BSE पर अपलोड किए गए ​सर्कुलर के मुताबिक, SASL ने ₹138 प्रति शेयर के भाव पर 17 एंकर इनवेस्टर्स को 1.26 करोड़ शेयर एलोकेट किए। एंकर बुक में नोमुरा सिंगापुर, सिटी ग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरिशस, होलानी वेंचर कैपिटल फंड-I, इंडसइंड जनरल इंश्योरेंस और ASAS ग्लोबल फंड जैसे दिग्गजों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया म्यूचुअल फंड और टॉरस एसेट मैनेजमेंट ने 6 स्कीम्स के जरिए निवेश किया। उन्हें ₹69.69 करोड़ के 50.5 लाख शेयर अलॉट किए गए।

कंपनी की वित्तीय सेहत

SASL का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 25 प्रतिशत बढ़कर ₹2,839.67 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹63.52 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹2,270.99 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹48.14 करोड़ रहा था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹624 करोड़ की उधारी थी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 26.81 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।