Lumino Industries IPO: 27 अगस्त से खुलेगा ₹700 करोड़ का आईपीओ, GMP दे रहा 58% मुनाफे का संकेत

Lumino Industries IPO: कोलकाता की कंडक्टर, पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर बनाने वाली कंपनी Lumino Industries का IPO 27 अगस्त को खुलेगा। कंपनी इस इश्यू से करीब ₹700 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। IPO का प्राइस बैंड ₹78 से ₹82 प्रति शेयर तय किया गया है।

इसमें ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू होगा। वहीं करीब 2.44 करोड़ शेयरों का OFS होगा। IPO 31 अगस्त को बंद होगा।

Lumino Industries IPO की पूरी डिटेल

पैमानाडिटेल
IPO खुलने की तारीख27 अगस्त 2026
IPO बंद होने की तारीख31 अगस्त 2026
फेस वैल्यू
₹5 प्रति इक्विटी शेयर

IPO प्राइस बैंड₹78 से ₹82 प्रति शेयर
इश्यू साइजकरीब ₹700 करोड़
फ्रेश इश्यूकरीब ₹500 करोड़
ऑफर फॉर सेल (OFS)करीब 2,43,90,242 इक्विटी शेयर

Lumino Industries IPO का GMP

ग्रे मार्केट में Lumino Industries के IPO को शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। इनवेस्टरगेन के मुताबिक, Lumino Industries का लेटेस्ट GMP ₹48 है।

यह अपर प्राइस बैंड से 58.54% के लिस्टिंग गेन का संकेत देता है। हालांकि, GMP लिस्टिंग गेन की गारंटी नहीं होता और लगातार बदलता भी रहता है।

प्रमोटर बेचेंगे ₹200 करोड़ के शेयर

IPO में ₹500 करोड़ का फ्रेश इश्यू होगा। इसके अलावा प्रमोटर देवेंद्र गोयल और उनके बेटे जय गोयल ₹200 करोड़ तक के शेयर OFS के जरिए बेचेंगे।

कंपनी ने पहले ₹1,000 करोड़ का IPO लाने की योजना बनाई थी। तब ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹400 करोड़ का OFS प्रस्तावित था। बाद में इश्यू का आकार घटाकर करीब ₹700 करोड़ कर दिया गया।

IPO से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल

Lumino Industries फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में लगाएगी। कंपनी करीब ₹337 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज के भुगतान के लिए करेगी।

जुलाई 2026 तक कंपनी पर कुल ₹1,856.7 करोड़ का कर्ज था। इसके अलावा ₹15 करोड़ मशीनरी और उपकरण खरीदने, सिविल वर्क और मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के विकास पर खर्च किए जाएंगे।

कंपनी का कारोबार क्या है?

Lumino Industries कंडक्टर, पावर केबल और दूसरे स्पेशलाइज्ड इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी के ग्राहक बड़े EPC प्लेयर हैं।

इनमें Kalpataru Projects International, Jackson और R S Infraprojects जैसे नाम शामिल हैं। कंपनी अमेरिका, माली, बुर्किना फासो, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या, घाना, रवांडा और इथियोपिया जैसे देशों में भी अपने प्रोडक्ट बेचती है।

कारोबार का हाल कैसा है?

वित्त वर्ष 2025-26 में Lumino Industries का मुनाफा ₹160 करोड़ रहा। एक साल पहले यह ₹124.6 करोड़ था। यानी मुनाफे में 28.4% की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़ा।

FY26 में रेवेन्यू ₹2,041 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹1,918 करोड़ था। यानी इसमें 6.4% की बढ़ोतरी हुई। FY26 में कंपनी की कुल बिक्री में घरेलू कारोबार की हिस्सेदारी 98% रही। वहीं वित्त वर्ष के अंत में कंपनी की ऑर्डर बुक ₹3,149.8 करोड़ थी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट की ‘डोंट बी शाय’ का 25 सितंबर को प्राइम वीडियो पर होगा ग्लोबल प्रीमियर

प्राइम वीडियो, भारत की सबसे बड़ी एक्सक्लूसिव ओरिजिनल्स स्ट्रीमिंग सर्विस, ने अपनी अपकमिंग प्राइम ओरिजिनल फिल्म ‘डोंट बी शाय’ के वर्ल्डवाइड प्रीमियर की तारीख 25 सितंबर घोषित कर दी है। श्रीति मुखर्जी द्वारा लिखित और निर्देशित इस फिल्म को आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट ने अपने बैनर इंटरनल सनशाइन प्रोडक्शंस के तहत प्रोड्यूस किया है, जबकि ग्रिश्मा शाह और विकेश भूटानी इसके को-प्रोड्यूसर हैं।

यह कमिंग-ऑफ-एज रोमांटिक कॉमेडी चार नए चेहरों आरुषि बजाज, पीयूष खाटी, बियांका अरोड़ा और अंश दुग्गल की कहानी है, जो दोस्ती, पहला प्यार, दिल टूटने, सपनों और एक युवा के तौर पर जिंदगी को समझने की उलझी हुई प्रक्रिया को दिखाते हैं। फिल्म में कुणाल रॉय कपूर, अनुराग बसु, नेहा धूपिया और अंजू अल्वा नाइक भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

प्राइम वीडियो और अमेजन MGM स्टूडियोज इंडिया के ओरिजिनल्स के डायरेक्टर और हेड निखिल माधोक ने कहा, “डोंट बी शाय हमारी सबसे खास फिल्मों में से एक है और हम आखिरकार इसके ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्रीमियर की घोषणा करके बहुत खुश हैं।

यह फिल्म चार शानदार नए कलाकारों आरुषि, अंश, बियांका और पीयूष को पेश करती है, जो अपने किरदारों में एक नई ताजगी और सच्चाई लेकर आए हैं। श्रीति मुखर्जी के निर्देशन और आलिया व शाहीन भट्ट की क्रिएटिव सोच से बनी ‘डोंट बी शाय’ दोस्ती, प्यार और बड़े होने के खूबसूरत लेकिन उलझे सफर का दिल से जश्न मनाती है। हम चाहते हैं कि दर्शक शाय की दुनिया में डूब जाएं।”

आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट, इंटरनल सनशाइन प्रोडक्शंस की को-फाउंडर्स ने एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा, “डोंट बी शाय शुरुआत से ही हमारे लिए बेहद खास रही है और हमें इसे इस तरह आकार लेते देखकर बहुत गर्व हो रहा है। यह फिल्म युवा होने के उस दौर की सच्चाई को दिखाती है—वे दोस्तियां जो आपको बदल देती हैं, पहला प्यार जो आपकी जिंदगी पर असर छोड़ता है, वो दिल टूटना जिसे आप लंबे समय तक याद रखते हैं और धीरे-धीरे यह समझने की कोशिश कि आप असल में कौन हैं।

हमें सबसे ज्यादा खुशी इस शानदार यंग कास्ट को लेकर है। उनकी एनर्जी, कमजोरी और आपसी केमिस्ट्री बेहद खास है और उन्होंने अपने किरदारों में जान डाल दी है। हम इंतजार नहीं कर सकते कि भारत और दुनियाभर के दर्शक शाय से मिलें और उसकी खूबसूरत, थोड़ी उलझी हुई दुनिया का हिस्सा बनें।” ‘डोंट बी शाय’ का प्रीमियर 25 सितंबर 2026 को भारत समेत दुनियाभर के 240 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में सिर्फ प्राइम वीडियो पर होगा। फिल्म हिंदी में अंग्रेजी सबटाइटल्स के साथ स्ट्रीम की जाएगी।

गुरुग्राम में 25 अगस्त को वर्क फ्रॉम की सलाह! भारी बारिश के बाद प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी

Gurugram Weather: सोमवार को दिल्ली-NCR के कई इलाकों में हुई भारी बारिश के कारण गुरुग्राम के कॉरपोरेट ऑफिस, सरकारी और प्राइवेट स्कूलों और संस्थानों को 25 अगस्त को वर्क फ्रॉम होम देने की सलाह दी गई है। यह एडवाइजरी गुरुग्राम जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने 24 अगस्त को जारी की। इसमें बताया गया है कि तेज बारिश के बाद शहर में जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन सकती है।

जिला मजिस्ट्रेट और DDMA के चेयरमैन उत्तम सिंह ने कॉर्पोरेट ऑफिस, सरकारी विभागों और प्राइवेट शिक्षण संस्थानों को सलाह दी है कि वे अपने कर्मचारियों को मंगलवार को ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने के लिए कहें। ताकि बारिश के कारण होने वाली परेशानियों से बचा जा सके।

एडवाइजरी में क्या कहा गया है?

एडवाइजरी में कहा गया है, “गुरुग्राम जिले में 24.08.2026 को हुई भारी बारिश को देखते हुए, जलभराव और ट्रैफिक जाम की संभावना है। इसलिए, जिले के सभी कॉर्पोरेट ऑफिस और सरकारी व प्राइवेट स्कूलों/संस्थानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने कर्मचारियों को 25.08.2026 से ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर से काम) करने के लिए कहें, ताकि ट्रैफिक जाम से बचा जा सके और सिविक एजेंसियां ​​सड़कों और नालियों की मरम्मत का काम आसानी से कर सकें।”

बता दें कि इस कदम का मकसद ट्रैफिक जाम को कम करना और सिविक एजेंसियों को बिना किसी रुकावट के सड़कों और नालियों की मरम्मत और सफाई का काम करने में मदद करना है।

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि यह फैसला भारी बारिश और पूरे जिले में जलभराव व ट्रैफिक जाम की संभावना को देखते हुए लिया गया है।

प्रशासन ने की सहयोगी की अपील

प्रशासन ने सभी कंपनियों और संस्थानों से इस एडवाइजरी में सहयोग करने की अपील की है, ताकि सड़कों और नालियों की मरम्मत व सफाई का काम आसानी से किया जा सके।

दरअसल, गुरुग्राम में हुई जोरदार बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में सड़कें पानी से भर गई हैं। इसके चलते ट्रैफिक की आवाजाही को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। इसी वजह से प्रशासन ने वर्क फ्रॉम होम की सलाह दी है।

दिल्ली-NCR में मौसम का अलर्ट, जानें आपके इलाके का हाल

दिल्ली के कई इलाकों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसमें मध्य दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, पश्चिमी दिल्ली, दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली शामिल हैं। दक्षिणी दिल्ली के कुछ हिस्सों में भी ऑरेंज अलर्ट है।

वहीं, उत्तर दिल्ली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के लिए सोमवार को येलो अलर्ट जारी किया गया है।

दूसरी ओर, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के लिए फिलहाल मौसम विभाग ने कोई चेतावनी जारी नहीं की है।

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CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

Deepak letter to Education Ministers

Deepak letter to the Education Ministers: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने देश और राज्यों में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संबंधित शिक्षा मंत्री को एक पत्र लिखा है। पत्र में आजादी के 80 साल बाद भी स्कूलों में पीने के पानी, शौचालय और डेस्क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर सवाल उठाए गए हैं।

सरकारी स्कूलों की स्थिति चिंताजनक

CJP ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा कि स्वतंत्रता के आठ दशकों बाद भी बच्चे मूलभूत सुविधाओं के बिना पढ़ाई करने को मजबूर हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे बेहद चिंताजनक हैं। बच्चों को सुरक्षित पेयजल, चालू शौचालय, उचित कक्षाएं और बैठने के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।

दीपके के 6 प्रमुख सवाल

  • पिछले पांच वर्षों में राज्य के कितने सरकारी स्कूलों का जीर्णोद्धार (Renovation) किया गया है और कितनों में मरम्मत या पूर्ण सुधार की आवश्यकता है?
  • वर्तमान में शिक्षकों के कितने पद स्वीकृत हैं, कितने भरे गए हैं और कितने पद खाली पड़े हैं?
  • बीते पांच वर्षों में सरकारी स्कूलों के लिए कितना बजट आवंटित किया गया और उसमें से वास्तव में कितना पैसा खर्च हुआ?
  • हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कितने अतिरिक्त सरकारी स्कूलों की आवश्यकता है?
  • सरकारी स्कूल के शिक्षकों को शिक्षण कार्य के अलावा कौन-कौन से गैर-शैक्षणिक (Non-teaching) काम सौंपे गए हैं?
  • कितने सरकारी स्कूलों में वर्तमान में कंप्यूटर, डिजिटल लर्निंग, साफ शौचालय और खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं?

पत्र के अंत में CJP ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी राजनीति या किसी एक सरकार का नहीं है, बल्कि देश के बच्चों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने मांग की कि सरकार इन जानकारियों को सार्वजनिक करे और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

सीजेपी टीम पर राजस्थान में हुआ था हमला

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में 21 अगस्त 2026 को CJP के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर कथित रूप से हमला और पथराव हुआ था। CJP की टीम अपने 'स्कूल ठीक करो' अभियान के तहत इस सरकारी स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंची थी। पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि यह सरकारी स्कूल सालों से एक मवेशी शेड में चलाया जा रहा था। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि स्कूल पहुंचने से पहले ही स्थानीय उपद्रवियों और विरोधियों ने उनकी गाड़ियों पर पथराव किया, गाड़ियों के शीशे तोड़े और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की।

Drishyam: ‘दृश्यम’ के पार्ट 1 और 2 को इन ट्विस्ट- टर्न ने बनाया था धमाकेदार, इस बार क्या होने वाला है खास?

Drishyam: अजय देवगन हिंदी वर्जन वाली ‘दृश्यम’ फ्रैंचाइजी की तीसरी और आखिरी फिल्म में विजय सलगांवकर के रोल में वापसी कर रहे हैं। एक्टर ने तीसरी फिल्म का ऑफिशियल टाइटल ‘दृश्यम द कन्क्लूज़न’ अनाउंस किया है, जो 2 अक्टूबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। ट्विस्ट, राज और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए विजय की सोच-समझकर की गई चालों से भरी दो फिल्मों के बाद, अब ये पार्ट यह दिखाने के लिए तैयार है कि उनकी कहानी का आखिर में क्या अंजाम होता है। लेकिन इससे पहले एक नजर डालते हैं पार्ट वन और टू के उन ट्विस्ट और टर्न पर, जिसके चलते ये सुपरहिट हुई।

‘दृश्यम 1’ के ट्विस्ट और टर्न

अजय देवगन की फिल्म के पार्ट वन में सबसे बड़ा ट्विस्ट होता है, जब पुलिस को लगता है कि उन्होंने सैम की लाश ढूंढ निकाला है। लेकिन खुदाई करने पर वहां से एक कुत्ते का कंकाल मिलता है। इसके बाद आता है फिल्म का आखिरी सीन, जहां असली गेम पता चलता है। विजय सावरकर (अजय देवगन) ने सैम की लाश को ऐसी जगह छुपाया है, जहां पर किसी को शक तक नहीं होता है। दरअसल वह नए बन रहे पुलिस स्टेशन के नीचे उसे दफना देता है, जिसका उद्घाटन खुद आईजी (तबू) करती हैं।

‘दृश्यम 2’ के ट्विस्ट और टर्न

पार्ट 2 में पुलिस स्टेशन की खुदाई करके सैम का असली कंकाल ढूंढ लिया जाता है, जिससे लगता है कि अब विजय पकड़ा जाएगा। लेकिन तभी अदालत में डीएनए (DNA) रिपोर्ट आती है और वह सैम के माता-पिता से नहीं मिलती है। इस सीन के बाद हर कोई हैरान रह जाता है। विजय अपनी इमेजनरी कहानी को पहले ही एक नॉवेल के रूप में छपवा देता है। इतना ही नहीं वह फॉरेंसिक लैब के सुरक्षाकर्मी और श्मशान के रखवाले से यारी-दोस्ती बना लेता है। जैसे ही पुलिस स्टेशन से हड्डियां बरामद कर लैब जाते हैं, विजय वहां जाकर सैम के असली कंकाल को उसी उम्र के एक अन्य मरे हुई लड़के की हड्डियों से बदल देता है। इस तरह अदालत में पुलिस झूठी साबित हो जाती है।

‘दृश्यम द कन्क्लूजन’

अब तीसरे पार्ट में अजय देवगन के 13 साल से दबे राज बाहर आते दिख सकते हैं। हालांकि मेकर्स ने कहानी की भनक अब तक नहीं लगने दी है। लेकिन टाइटल से कयास लगाए जा रहे हैं कि फिल्म का ये लास्ट पार्ट होगा। इसके बाद फिल्म आगे नहीं बढ़ेगी, जिसके चलते इस लास्ट पार्ट में विजय का पूरा चिट्ठा खुलेगा। फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को दस्तक देने वाली है।

टाटा संस की 17 सितंबर को बड़ी बैठक, एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे और नए बॉस पर आएगा बड़ा अपडेट!

Tata Sons Board Meeting: टाटा ग्रुप के मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस की बोर्ड मीटिंग 17 सितंबर 2026 को होने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, भले ही चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल से पीछे हटने का मुद्दा आधिकारिक एजेंडे में सीधे तौर पर शामिल न हो, लेकिन इस बैठक में इस पर गर्मा-गर्मी से चर्चा होने की पूरी संभावना है।

12 अगस्त को चंद्रशेखरन ने तीसरा कार्यकाल न लेने की घोषणा की थी। इसके बाद से ही टाटा ग्रुप के पावर कॉरिडोर में हलचल तेज है। आइए समझते हैं कि 17 सितंबर की इस बैठक में क्या-क्या खास हो सकता है और बोर्ड के भीतर समीकरण कैसे बने हुए हैं।

17 सितंबर की बैठक में क्या होगा खास?

यह बैठक टाटा संस की नियमित तिमाही बोर्ड बैठक है, लेकिन 18 अगस्त को कोरम की कमी के चलते टली टाटा संस की AGM की नई तारीख पर भी इसमें चर्चा होगी।अभी यह साफ नहीं है कि कोई डायरेक्टर औपचारिक रूप से चंद्रशेखरन से अपना फैसला बदलने का अनुरोध करेगा या नहीं। अगर चंद्रशेखरन के फैसले पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव आता है, तो यह बोर्ड के प्रमुख हितधारकों के प्रभाव की असली परीक्षा होगी।

टाटा बोर्ड में दो फाड़: नोएल टाटा बनाम वेणु श्रीनिवासन

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा संस के बोर्ड में दो बड़े दिग्गजों के रुख बिल्कुल अलग रहे हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने ग्रुप की कुछ कंपनियों में नुकसान और कैपिटल एलोकेशन को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने चंद्रशेखरन से टाटा संस की लिस्टिंग (IPO) को लेकर भी स्थिति साफ करने को कहा था।

दूसरी तरफ, टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी और टाटा संस के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन, चंद्रशेखरन को एक और कार्यकाल देने के पक्ष में रहे हैं।

टाटा संस के नियमों के मुताबिक, चेयरमैन की नियुक्ति या री-अपॉइंटमेंट के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा मनोनीत कुल डायरेक्टर्स के बहुमत का समर्थन होना अनिवार्य है।

बोर्ड के बाकी डायरेक्टर्स का क्या है रुख?

टाटा संस के बोर्ड में चंद्रशेखरन, नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन के अलावा तीन और सदस्य हैं सौरभ अग्रवाल, हरीश मनवानी और अनिता जॉर्ज।

सौरभ अग्रवाल: एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं और चंद्रशेखरन की कोर टीम का अहम हिस्सा माने जाते हैं।

हरीश मनवानी व अनिता जॉर्ज: ये दोनों इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स हैं। मनवानी टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (NRC) के चेयरमैन भी हैं।

उत्तराधिकारी की तलाश और ट्रस्ट्स का कानूनी पेच

चंद्रशेखरन के बाद नया चेयरमैन चुनने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। 13 अगस्त को सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने नया चेयरमैन चुनने के लिए एक सिलेक्शन कमेटी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) की बैठकों पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की कार्यवाही के कारण फिलहाल रोक लगी हुई है। चूंकि दोनों मुख्य ट्रस्ट्स को मिलकर कमेटी के सदस्य तय करने होते हैं, इसलिए इस कानूनी पेंच के कारण एजीएम और उत्तराधिकार की प्रक्रिया में मुश्किलें आ रही हैं।

17 सितंबर की बोर्ड बैठक टाटा ग्रुप के आने वाले भविष्य के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है। अगर बोर्ड के सदस्य चंद्रशेखरन को अपना फैसला बदलने के लिए मना लेते हैं तो कहानी बदल सकती है, वरना नए चेयरमैन की तलाश वाली सिलेक्शन कमेटी की राह और तेज हो जाएगी।

LT Foods Share Price: 52 हफ्ते के हाई पर पहुंचा शेयर, जानिए क्या है वजह

LT Foods  Share Price: LT Foods के शेयरों में 24 अगस्त को जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान एक साल की ऊंचाई ₹487 पर पहुंच गए। सोमवार को ट्रेडिंग के पहले हिस्से में 32 मिलियन से ज़्यादा शेयरों का लेन-देन हुआ। यह पिछले 10 दिनों के औसत वॉल्यूम से 86 गुना ज़्यादा है।

LT Foods के शेयर की कीमत इंट्रा-डे ट्रेडिंग में 13% बढ़कर ₹482.85 के 52-हफ़्ते के नए हाई पर पहुंच गए। इस स्टॉक ने 19 सितंबर, 2025 को बने अपने पिछले ₹479.80 के हाई को पार कर लिया। NSE और BSE पर कुल मिलाकर 13.14 मिलियन इक्विटी शेयरों का लेन-देन हुआ, जिससे काउंटर पर औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम 10 गुना से ज़्यादा बढ़ गया। शेयर आज 7.34 फीसदी की बढत के साथ 459 रुपये पर बंद हुआ।

इस साल स्टॉक में यह दूसरी सबसे बड़ी एक-दिन की बढ़त थी, इससे पहले फरवरी में एक सेशन में इसमें 14% की तेज़ी आई थी। कंपनी के शेयरों में इस साल अब तक 25% से ज़्यादा और पिछले 12 महीनों में 13% से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

LT Foods के शेयरों में यह तेजी चावल से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई आम बढ़त के बाद देखी गई। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान KRBL और AWL Agri Business जैसी कंपनियों के शेयरों में क्रमशः 6.39% और 1.63% की बढ़त हुई।

शेयरहोल्डिंग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रमोटरों के पास कंपनी के 51% से ज़्यादा शेयर थे, जबकि पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 29.95% शेयर थे। घरेलू संस्थागत निवेशकों के पास 10.84% ​​और विदेशी संस्थागत निवेशकों के पास 8.21% शेयर थे।

जून 2026 को समाप्त तिमाही के लिए LT Foods का रेवेन्यू 11.56% बढ़कर ₹1,172.08 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹1,050.56 करोड़ था। नेट प्रॉफ़िट 89.67% बढ़कर ₹70.16 करोड़ हो गया, जो पहले ₹36.99 करोड़ था। इस महीने की शुरुआत में रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, इसी अवधि में कुल आय 10.77% बढ़कर ₹1,176.11 करोड़ हो गई, जो पहले ₹1,061.73 करोड़ थी।

गुरुग्राम स्थित FMCG कंपनी मुख्य रूप से चावल का कारोबार करती है और अपने उत्पादों को US, UK और वेस्ट एशिया सहित 85 देशों में एक्सपोर्ट करती है। कंपनी अपना मुख्य चावल ब्रांड ‘दावत’ (Daawat) बनाती है और उसने पहले बताया था कि उसके FY25 के रेवेन्यू का 9% हिस्सा वेस्ट एशिया में एक्सपोर्ट से आया था।

वेस्ट एशियन मार्केट में कंपनी की मौजूदगी ने इस साल की शुरुआत में उसके शेयरों पर खास असर डाला था, जब उस क्षेत्र में चावल के एक्सपोर्ट पर मौजूदा जियोपॉलिटिकल तनाव का कुछ समय के लिए असर पड़ा था।

Apollo Tyres Share Price: ब्रोकरेज ने रेटिंग की अपग्रेड, शेयर 5% चढ़ा, दिया 34% अपसाइड का टारगेट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस साल यह त्योहार खास तौर पर शुभ माना जा रहा है क्योंकि एक ही दिन सात अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। ग्रहों और नक्षत्रों का ऐसा मेल होने की उम्मीद है, जिसका परिणाम बहुत शुभ होगा। इससे भी जरूरी बात यह है कि भद्रा त्योहार पर असर नहीं डालेगी, जिससे बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र धागा बांधने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं

पंचांग के अनुसार, भद्रा गुरुवार, 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 9:27 बजे खत्म होगी। इसलिए, 28 अगस्त को भद्रा नहीं होगी, जिससे परिवार बिना इस रोक के रक्षाबंधन मना सकेंगे। भद्रा को राखी बांधने के लिए अशुभ समय माना जाता है। हालांकि, इस साल यह त्योहार से एक दिन पहले खत्म हो जाएगी।

रक्षाबंधन पर सात शुभ योग

रक्षाबंधन 2026 को खास बनाने के लिए कई अच्छे ज्योतिषीय संयोग बनने की उम्मीद है। इनमें शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ दूसरे शुभ ग्रहों की स्थिति शामिल है।

शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा। ज्योतिष में, यह नक्षत्र वरुण देव से जुड़ा है और राहु इसका स्वामी है। इस दौरान की जाने वाली पूजा, दान और दूसरे आध्यात्मिक कामों का खास महत्व माना जाता है।

कर्क राशि में बृहस्पति का होना भी अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, भद्रा का न होना भी उन वजहों में गिना जा रहा है जो इस दिन को रक्षाबंधन की रस्में करने के लिए ज़्यादा सही बनाती हैं।

सावन पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?

पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9:09 बजे शुरू होने और 28 अगस्त को सुबह करीब 9:48 बजे खत्म होने की उम्मीद है। पूर्णिमा 28 अगस्त को सूर्योदय के समय रहेगी, इसलिए उदया तिथि की परंपरा के अनुसार उसी दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पूर्णिमा का व्रत करने वाले श्रद्धालु 27 अगस्त को उपवास कर सकते हैं, जबकि बहनें 28 अगस्त को राखी बांध सकती हैं।

राखी बांधने का सबसे अच्छा समय

सुबह का मुहूर्त : सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक

शुभ चौघड़िया के आधार पर एक और शुभ समय इस समय रहने की उम्मीद है:

शुभ चौघड़िया : सुबह 11:45 बजे से दोपहर 1:19 बजे तक

राहु काल में राखी बांधने से बचें

राहु काल सुबह 10:11 बजे से 11:45 बजे तक रहने की उम्मीद है। ज्योतिष के हिसाब से समय मानने वाले परिवार इस दौरान राखी बांधने से बच सकते हैं।

पंचांग का समय शहर और कैलेंडर के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए परिवार यह रस्म करने से पहले लोकल मुहूर्त देख सकते हैं।

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iPhone 18 Pro Max में होगा बड़ा अपग्रेड! कीमत से कैमरा-बैटरी तक सब कुछ बदलेगा

Apple के iPhone 18 Pro Max में इस बार कीमत से लेकर कैमरा और बैटरी तक कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। MacRumors की रिपोर्ट के मुताबिक, Apple सितंबर 2026 में इस प्रीमियम फोन को लॉन्च कर सकता है। हालांकि, इसका डिस्प्ले साइज पहले की तरह 6.9 इंच ही रहने की उम्मीद है। वहीं, फोन में Dynamic Island मिलेगा या नहीं, इसे लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

कीमत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है

कीमत में बढ़ोतरी सबसे अहम दावों में से एक है। IDC का कहना है कि iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत $1,399 हो सकती है, जो इसी तरह के iPhone 17 Pro Max से $200 ज्यादा है। अन्य अनुमानों के अनुसार, Pro मॉडल की कीमत में $300 तक की बढ़ोतरी हो सकती है, खासकर ज्यादा स्टोरेज क्षमता वाले मॉडल के मामले में।

यह संभावित बढ़ोतरी महंगे कंपोनेंट्स की वजह से हो सकती है, जिनमें मेमोरी और Apple का आने वाला A20-सीरीज प्रोसेसर शामिल है। माना जा रहा है कि यह प्रोसेसर TSMC की 2nm प्रोसेस पर बनाया जाएगा।

फिलहाल, Apple ने अभी तक iPhone 18 Pro Max की कीमत को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। भारत में इसकी कीमत डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, इंपोर्ट ड्यूटी और स्थानीय टैक्स के हिसाब से अलग हो सकती है।

जाने-पहचाने डिजाइन के साथ, थोड़ा मोटा कैमरा सेक्शन

उम्मीद है कि iPhone 18 Pro Max का डिजाइन काफी हद तक इसके पिछले मॉडल जैसा ही होगा, जिसमें ट्रिपल-कैमरा सेटअप और पीछे की तरफ बड़ा कैमरा मॉड्यूल शामिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फोन थोड़ा मोटा और भारी हो सकता है, शायद बड़ी बैटरी और वेपर-चेंबर कूलिंग सिस्टम लगाने की वजह से।

कुछ लीक हुए डमी यूनिट्स में भी कैमरा मॉड्यूल पहले से ज्यादा मोटा दिखाई दिया है। Apple शायद इस बार फोन के पीछे दिए गए टू-टोन वाले फिनिश को बदलकर ऐसा ग्लास दे सकता है, जो मेटल फ्रेम से ज्यादा मैच करे। इससे फोन का लुक पहले के मुकाबले ज्यादा एक जैसा और स्मूद नजर आ सकता है।

रंगों की बात करें तो Apple dark cherry या deep red कलर ऑप्शन पर भी टेस्टिंग कर रहा है। इसके अलावा, light blue, dark gray और silver कलर भी मिल सकते हैं।

डिस्प्ले में शायद मामूली बदलाव हों

iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच का डिस्प्ले बरकरार रहने की उम्मीद है। यानी स्क्रीन के साइज में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि, Apple इसमें ज्यादा बेहतर और कम पावर इस्तेमाल करने वाली LTPO+ डिस्प्ले टेक्नोलॉजी दे सकता है। कुछ लीक में छोटे Dynamic Island की बात सामने आई है, लेकिन दूसरी रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बदलाव फिलहाल टल भी सकता है।

वहीं, डिस्प्ले के अंदर Face ID सेंसर देने की उम्मीद इस जनरेशन के iPhone से नहीं है। यानी अंडर-डिस्प्ले Face ID के लिए यूजर्स को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

कैमरा और बैटरी पर खास ध्यान

कैमरा से जुड़ी सबसे बड़ी चर्चा वेरिएबल-अपर्चर वाले मेन लेंस की है, जिससे फटोग्राफर्स को एक्सपोजर और बैकग्राउंड ब्लर पर ज्यादा कंट्रोल मिल सकता है। एक रिपोर्ट का दावा है कि यह फीचर सिर्फ Pro Max में हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। कहा जा रहा है कि Apple ज्यादा चौड़े अपर्चर और स्टैक्ड इमेज सेंसर वाले टेलीफोटो कैमरे की भी टेस्टिंग कर रहा है।

बैटरी की बात करें तो, US मॉडल में बैटरी की क्षमता 5,567mAh तक बढ़ सकती है, जबकि iPhone 17 Pro Max में यह 5,088mAh है। अगर इसे ज्यादा पावर-एफिशिएंट नई चिप के साथ जोड़ा जाता है, तो फोन की बैटरी लाइफ पहले से बेहतर हो सकती है।

हालांकि, अभी ये सभी जानकारियां रिपोर्ट्स और लीक्स पर आधारित हैं। Apple की आधिकारिक घोषणा के बाद ही iPhone 18 Pro Max के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स की पूरी तस्वीर साफ होगी।

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नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

नेतन्याहू के लिए ब्रिटेन एक इस्लामी देश क्यों है?

UK Israel relations

UK Israel relations: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने, एक इंटरव्यू में कुछ दिन पूर्व ब्रिटेन का मज़ाक उड़ते हुए उसे “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहा। कहने की आवश्यकता नहीं कि ब्रिटिश सरकार ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए इसे “पूर्णतः अस्वीकार्य” बताया है।

 

इसराइली प्रधानमंत्री इस इंटरव्यू में अपने देश के प्रति ब्रिटेन के रुख की आलोचना कर रहे थे। एक मिलिट्री रेडियो पॉडकास्ट के दौरान दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्हो़ंने कहा, “किसी ने एक बार कहा था कि परमाणु हथियारों वाला पहला इस्लामिक रिपब्लिक, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ग्रेट ब्रिटेन होगा।…हम इसराइली यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरान ऐसा दूसरा देश न बन पाए।” ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने नेतन्याहू की इन टिप्पणियों को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” बताया।

ब्रिटेन में इस्लाम की बढ़ती धाक

नेतन्याहू ने ऐसा करके, अपने आप को पश्चिमी देशों के उन दक्षिणपंथी राजनेताओं और टिप्पणीकारों की पांत से जोड़ लिया है, जिन्होंने आगाह किया था कि बड़े पैमाने पर आप्रवासन (इमिग्रेशन) के कारण ब्रिटेन के कुछ हिस्से इस्लामी कानूनों के दायरे में आ गए हैं। बाद में इन नेताओं और टिप्पणीकारों पर “इस्लामोफोबिया” (इस्लाम-विरोधी होने) के आरोप भी लगे थे। ब्रिटेन उन यूरोपीय देशों में से एक है, जिन्होंने पिछले साल फ़िलिस्तीनी राज्य को मान्यता भी दी थी; इस कदम से स्वाभाविक है कि इसराइल इन देशों से प्रसन्न नहीं है। ALSO READ: स्पेन में मोरक्को से घुसपैठ, यूरोपीय संघ में मचा हड़कंप

 

ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में अपने पूर्ववर्ती कीर स्टारमर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्टारमर, गाज़ा पट्टी में अपना हमला रोकने के लिए इसराइल पर पर्याप्त दबाव बनाने में नाकाम रहे। अपना पद संभालने से कुछ समय पहले, “द गार्डियन” को दिए एक इंटरव्यू में बर्नहम ने कहा कि ग्रेट ब्रिटेन, “वेस्ट बैंक” में स्थित इसराइली बस्तियों से आने वाले सामानों के व्यापार पर रोक लगाने के बारे में गंभीरता से विचार करेगा। “वेस्ट बैंक” जॉर्डन नदी के पश्चिम में स्थित फ़िलिस्तीन का एक क्षेत्र है और 1967 से इसराइली क़ब्ज़े में है, जिसे अंतरराष्ट्रीय क़ानून के अनुसार अवैध माना जात है।

ख़राब होते रिश्ते

ब्रिटेन पारंपरिक रूप से अमेरिका का हमेशा क़रीबी सहयोगी रहा है; इसराइल के साथ उसके रिश्ते तब से ख़राब हुए हैं जब इस साल अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया— इसी के साथ मध्यपूर्व में युद्ध भी छिड़ गया। ग्रेट ब्रिटेन और अमेरिका परमाणु शक्तियां हैं और यह बात भी जग-जाहिर है कि इसराइल के पास भी परमाणु हथियार हैं; हालांकि उसने सार्वजनिक रूप से इसे कभी स्वीकार नहीं किया है। 1998 में पाकिस्तान परमाणु शक्ति वाला पहला इस्लामी देश बना था।  ALSO READ: महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

 

इसराइल उस समय भारत के सहयोग से पाकिस्तानी बम बनने को रोकना चाहता था, पर इंदिरा गांधी इसके लिए तैयार नहीं थीं। अत: नेतन्याहू का इसराइल, अब हर हाल में ईरान को “दूसरी इस्लामी परमाणु शक्ति” बनाने से रोकने के लिए पूर्णत: कटिबद्ध है।

 

नेतन्याहू द्वारा ब्रिटेन को एक “इस्लामिक रिपब्लिक” कहने के पीछे एक दूसर प्रमुख कारण संभवत: यह भी है कि ब्रिटेन में मुस्लिम जनसंख्या न केवल तेज़ी से बढ़ी है और अब भी बढ़ रही है, वहां की सरकारें इसे रोकने के बदले दुम दबाकर “मुस्लिम तुष्टीकरण” नीति की कायल बन गई हैं। ब्रिटेन की सरकारें मुस्लिम प्रवासियों द्वारा वहां की रहन-सहन के नियमों को ठुकराने की ही नहीं, उनका वोट पाने के लिए उनके द्वारा देश के क़ानूनों की अवहेलना के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई करने से बिदकती हैं। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह

ताज़े अनुमानों के अनुसार, ब्रिटेन की मुस्लिम जनसंख्या लगभग 41 लाख है, जो वहां की कुल जनसंख्या के 6.5 प्रतिशत के बराबर है। पाकिस्तानी और बांग्लादेशी सबसे बड़े मुस्लिम समूह हैं। अप्रैल 2026 के एक मत सर्वेक्षण के अनुसार, 25 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम इसराइल विरोधी हमास के प्रबल समर्थक हैं। 45 प्रतिशत का मानना है कि ब्रिटेन के समाचार मीडिया में यहूदियों की धाक चलती है। 16 प्रतिशत ब्रिटिश मुस्लिम सीरिया में यज़ीदियों का नरसंहार करने वाले अल बगदादी के “इस्लामी राज्य” के प्रशंसक हैं और 15 प्रतिशत ओसामा बिन लादेन के अल क़ायदा की यादें अब भी संजोए हुए हैं। ईरान में हर तरह के जन—असंतोष को निर्ममता से कुचलने वाले वहां के तथाकथित “पसदारान” (रिवल्यूशनरी गार्ड) के समर्थकों की संख्या भी कुछ कम नहीं है।

रोज़मर्रा की अविश्वसनीय वास्तविकता

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पॉडकास्ट वाले वक्तव्य से कुछ ही दिन पहले, ब्रिटेन के एक सांसद रूपर्ट लो ने वहां की संसद में एक ऐसा वक्तव्य पढ़ कर सुनाया, जो ब्रिटेन में रोज़मर्रा की एक अविश्सनवीय वास्तविकता है। ब्रिटेन में रहने वाले मुख्यतः पाकिस्तानियों द्वारा, वहां की मूल ईसाई लड़कियों और महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ और बलात्कार के लिए कुख्यात, तथाकथित “ग्रूमिंग गैंग्स” के काले कारनामों का वर्णन करते हुए रूपर्ट लो ने कहा कि उनका वक्तव्य, उनकी खुद की जांच-परख पर आधारित है।

 

उदाहरण के तौर पर, बलात्कार पीड़ित एक लड़की की आपबीती को रूपर्ट लो ने उसी के शब्दों में संसद में सुनाया: “उसने (बलात्कारी ने) जैक डेनियल्स (शराब) की बोतल उठाई, जो अब खाली हो चुकी थी, और उसे ज़बरदस्ती मेरे (गुप्तांग के) अंदर घुसेड़ दिया। बोतल वहीं तोड़ दी। उस समय मैं लगभग 12 साल की थी। लगातार ऐसी टिप्पणियां की जाती थीं कि गोरी लड़कियों—- यानी ईसाई लड़कियों में— नैतिकता की या अच्छे मूल्यों की कमी होती है, जबकि मुस्लिम लड़कियों को गरिमापू्र्ण और उच्च नैतिक स्तर वाला बताया जाता है।”

 

“इस पूरे यौन शोषण के दौरान, देश के अलग अलग हिस्सों में कई पुलिस अधिकारियों ने मेरा बलात्कार किया। ईद और छुट्टियों के दौरान पार्टियां और भी बड़ी हो जाती थीं—हालात और भी बदतर हो जाते थे। पार्टियों में और अधिक हिंसक लोग शामिल हो जाते थे— और अधिक लोग हुए, तो उनकी हवश के लिए और अधिक लड़कियां भी होनी चाहिए! मुझे याद है, एक आदमी ने एक वैन का पिछला दरवाज़ा खोला और मैने देखा कि उसमें 15 से 20 लड़कियां कुत्तों के पिंजरों में बंद थीं।” यह मात्र एक उदाहरण है। ऐसे अनगिनत मामले हैं।

कु्ख्यात “ग्रूमिंग गैंग”

“ग्रूमिंग गैंग” ऐसे लोगों के एक संगठित नेटवर्क को कहते हैं, जो सुनियोजित तरीके से कमज़ोरों-पीड़ितों को—आमतौर पर बच्चों और किशोरवय लड़के-लड़कियों—को बहला-फुसलाकर उनका शोषण करते हैं। उन्हें गंभीर दुर्व्यवहार का शिकार बनाते हैं; इसमें बच्चों का यौन शोषण और मानव तस्करी भी शामिल है। अपने शिकारों को उपहारों, मादक द्रव्यों, शराब आदि के द्वारा ललचाया और पटाया जाता है। घर-परिवार से दूर रखकर, गैंग पर निर्भर बनाकर यौन शोषण सहित उनका हर तरह से दुरुपयोग किया जाता है।

 

ब्रिटिश पुलिस भी मुस्तैदी से काम नहीं करती। 2021 में, ब्रिटिश अख़बार “टाइम्स” की एक जांच से पता चला कि साउथ यॉर्कशायर पुलिस, बच्चों के यौन शोषण से जुड़े संदिग्धों के मामले में नियमित रूप से यह दर्ज नहीं कर रही थी कि शोषण करने वाले किस जाति, धर्म, देश या समुदाय के लोग थे। रॉदरहैम में, पुलिस ने 67 प्रतिशत मामलों में ऐसे विवरण लिखना ज़रूरी ही नहीं समझा। ग्रेटर मैनचेस्टर इलाके में तीन साल की अवधि में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों के 52 प्रतिशत अपराधी “एशियाई” मूल के दर्ज किए गए, जिनमें सबसे बड़ा समूह पाकिस्तानियों का था, जबकि 38 प्रतिशत “श्वेत” (White) यानी गोरे दर्ज किए गए थे। इस रिपोर्ट के अनुसार, मैनचेस्टर की स्थानीय आबादी में 21 प्रतिशत लोग एशियाई मूल के हैं।

पाकिस्तानी लड़कियां भी सुरक्षित नहीं

पाकिस्तानी महिलाओं के एक स्थानीय समूह का कहना था कि पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर और मकान-मालिक पाकिस्तानी लड़कियों को अपनी हवश का निशाना बनाते हैं। लेकिन, इसकी शिकायत करने पर अपनी शादी की संभावनाओं पर असर पड़ने के डर से लड़कियां पुलिस के पास जा कर कोई रिपोर्ट दर्ज करने से कतराती रही हैं।

 

इन सब तथ्यों के प्रकाश में, इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का—भले मज़ाक के ही तौर पर— ब्रिटेन को “इस्लामिक रिपब्लिक ब्रिटेन” कहना क्या सही नहीं है?