Dividend Stock: बुलेट बाइक वाली कंपनी देगी ₹82 का डिविडेंड, 31 जुलाई से पहले बन जाएं शेयरहोल्डर

बुलेट बाइक बनाने वाली रॉयल एनफील्ड ​की पेरेंट कंपनी आयशर मोटर्स (Eicher Motors) अपने शेयरहोल्डर्स को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 82 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने जा रही है। इसकी सिफारिश कंपनी के बोर्ड ने मई महीने में की थी। डिविडेंड को लेकर शेयरहोल्डर्स की पात्रता तय करने के लिए रिकॉर्ड डेट 31 जुलाई 2026 है। इस तारीख तक जिन शेयरधारकों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

इसका मतलब यह हुआ कि अगर डिविडेंड पाना चाहते हैं लेकिन आयशर मोटर्स के शेयरहोल्डर नहीं हैं तो 30 जुलाई को ट्रेडिंग खत्म होने से पहले शेयर खरीदने होंगे। फाइनल डिविडेंड पर 20 अगस्त को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट 30 दिनों के अंदर किया जाएगा।

आयशर मोटर्स ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 70 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। कंपनी कमर्शियल व्हीकल्स भी बनाती है। यह वित्त वर्ष 2001-02 से लगातार डिविडेंड बांट रही है।

Eicher Motors का शेयर एक साल में 39 प्रतिशत मजबूत

आयशर मोटर्स का शेयर शुक्रवार, 24 जुलाई को BSE पर 7628.40 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक साल में 39 प्रतिशत मजबूत हुआ है। वहीं 3 साल में 130 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 49.02 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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29 जुलाई को जारी होंगे जून तिमाही के नतीजे

आयशर मोटर्स के अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे 29 जुलाई को जारी होंगे। दिन में बोर्ड मीटिंग में इन पर चर्चा की जाएगी और मंजूरी दी जाएगी। उसके बाद वित्तीय नतीजों को रिलीज किया जाएगा। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में आयशर मोटर्स का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 11.58 प्रतिशत बढ़कर 1,519.95 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 1,362.15 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6,080.09 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 5,241.11 करोड़ रुपये था।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में, आयशर मोटर्स का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 16.5 प्रतिशत बढ़कर 5,515.23 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 23,407.56 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कितने पढ़े-लिखे हैं देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी? जानिए उनकी पढ़ाई और पूरा राजनीतिक सफर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। वे कई बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं और केंद्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

कितने पढ़े लिखे हैं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की आधिकारिक संसदीय प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (बीए) की पढ़ाई की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बल्ली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। उन्होंने वर्ष 1983 में अपनी बीए की पढ़ाई पूरी की थी। हालांकि प्रह्लाद जोशी ने कला (आर्ट्स) विषय से पढ़ाई की है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक जीवन और संसदीय कामकाज का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जब केंद्र सरकार कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए कई सुधारों पर काम कर रही है।

इस कॉलेज से की है पढ़ाई

प्रह्लाद जोशी ने अपनी स्कूली शिक्षा कर्नाटक के हुब्बल्ली में पूरी की। इसके बाद उन्होंने के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की। यह कॉलेज कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से संबद्ध है। कर्नाटक विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1949 में हुई थी और यहां से कई प्रमुख राजनेता, अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग पढ़ाई कर चुके हैं। 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा जिले में जन्मे प्रह्लाद जोशी ने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़कर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

2004 से हैं लगातार सांसद

प्रह्लाद जोशी वर्ष 2004 से लगातार कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अब तक पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। अपने लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने कई संसदीय समितियों में काम किया है और केंद्र सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी संभाली है। उन्हें ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है, जब कथित नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले के बाद मंत्रालय लगातार सवालों के घेरे में है। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों ने बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाने और व्यापक परीक्षा सुधारों की मांग उठाई। छात्रों के आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने उनकी कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया है। साथ ही, सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर सख्ती बढ़ाने के लिए ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ संसद में लाने की तैयारी भी की जा रही है।

Dharmendra Pradhan: प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की कमान, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मंजूर कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है। बता दें कि, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने फैसला किया है कि प्रह्लाद जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद हैं। वह अभी उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हैं। इसके अलावा वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे बड़े छात्र आंदोलन का कथित तौर पर राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा फायदा उठाने से रोकने के लिए लिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मोदी सरकार में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री का लगातार हो रहे सड़क विरोध और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच पद छोड़ना बेहद कम देखने को मिलता है।

प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बीच होने वाली तीसरे दौर की बातचीत से कुछ घंटे पहले आया। बैठक से पहले सीजेपी नेताओं ने साफ कहा था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे बड़ी मांग है और इस पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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एसटीएफ और बागपत पुलिस की मुठभेड़ में 50 हजार का इनामी बदमाश विपुल उर्फ खूनी ढेर

Criminal with Rs 50000 bounty killed in encounter with STF and Baghpat police

उत्तर प्रदेश एसटीएफ फील्ड यूनिट मेरठ और बागपत पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में शनिवार को सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के दौरान 50 हजार रुपए का इनामी बदमाश विपुल उर्फ खूनी पुत्र नेत्रपाल सिंह, निवासी ग्राम भभीसा, थाना कांधला, जनपद शामली घायल हो गया। पुलिस उसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले गई, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक मुठभेड़ स्थल से दो पिस्टल (.32 बोर), भारी मात्रा में खोखा एवं कारतूस तथा एक अपाचे मोटरसाइकिल बरामद की गई है।

 

पुलिस का दावा है कि विपुल उर्फ खूनी शातिर अपराधी था और कुख्यात सुशील मूंछ गैंग का सक्रिय सदस्य एवं शार्प शूटर था। उसके विरुद्ध हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, गैंगस्टर, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, रंगदारी समेत तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमे शामली, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, दिल्ली और अन्य स्थानों के विभिन्न थानों में दर्ज थे।

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पुलिस के अनुसार वर्ष 2014 में उसने एलम क्षेत्र में चर्चित बदमाश भीम भभीसा की हत्या के मामले में भी भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वर्ष 2017 में सहारनपुर जनपद के मानपुर गांव में वाहन लूट के बाद पुलिस को सूचना देने के संदेह में तत्कालीन महिला प्रधान की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया था।

 

पुलिस के अनुसार 14 जुलाई 2014 को ग्राम भभीसा निवासी पवन की हत्या के मामले (थाना कांधला) में भी वह आरोपी था। यह मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था। पुलिस का कहना है कि जमानत पर बाहर आने के बाद वह अदालत में पेश नहीं हो रहा था और उसके खिलाफ वारंट जारी थे।

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पुलिस के अनुसार हाल ही में उसने इसी मुकदमे के वादी अशोक पुत्र सुखबीर से मुकदमे में हुए खर्च की रकम मांगते हुए जान से मारने की धमकी दी थी। इस संबंध में थाना कांधला में वर्ष 2026 में बीएनएस की धारा 308(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मामले में शामली पुलिस द्वारा उस पर 50000 रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

 

पुलिस के मुताबिक विपुल उर्फ खूनी के विरुद्ध वर्ष 2005 से 2026 तक हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, डकैती, गैंगस्टर, रंगदारी, आर्म्स एक्ट, एनडीपीएस एक्ट सहित कुल 38 आपराधिक मुकदमे विभिन्न जनपदों में दर्ज थे। पुलिस का कहना है कि उसकी मृत्यु के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक कुख्यात अपराधी का अध्याय समाप्त हुआ है। मुठभेड़ के संबंध में पुलिस द्वारा अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

33.4 लाख के 1 BHK सरकारी फ्लैट की बुकिंग सिर्फ 50k में! DDA की इस धांसू स्कीम में 2-3 बीएचके का भी ऑप्शन

दिल्ली में अपना घर खरीदने का सपना देखने वाले लाखों लोगों के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने ‘कर्मजीवी आवास योजना 2026’ शुरू की है। इस योजना का मकसद सरकारी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त कर्मियों और विभिन्न पेशों से जुड़े लोगों को रियायती दर पर तैयार फ्लैट उपलब्ध कराना है। सबसे बड़ी बात यह है कि योजना के तहत सभी श्रेणियों के फ्लैटों पर 25 फीसदी की सीधी छूट दी जा रही है। ये सभी फ्लैट दिल्ली के नरेला स्थित पॉकेट-11, सेक्टर ए1-ए4 में बने हैं और पूरी तरह तैयार हैं, यानी खरीदते ही इनमें रहने की सुविधा मिलेगी।

जानें कब शुरु होगा रजिस्ट्रेशन 

योजना की शुरुआत 24 जुलाई 2026 से हो चुकी है। इसी दिन से पंजीकरण भी शुरू हो गया है। फ्लैटों की बुकिंग 15 अगस्त 2026 दोपहर 12 बजे से ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come First Serve) के आधार पर शुरू होगी। योजना 30 अक्टूबर 2026 तक या सभी फ्लैट बिकने तक चलेगी।इस योजना के तहत कुल 1,224 फ्लैट बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

जानें कितनी होगी फ्लैट की कीमत

इनमें 384 एक बेडरूम (1-बीएचके), 432 दो बेडरूम (2-बीएचके) और 408 तीन बेडरूम (3-बीएचके) फ्लैट शामिल हैं। 25 फीसदी छूट के बाद 1-बीएचके फ्लैट की कीमत लगभग 33.40 लाख से 33.66 लाख रुपये, 2-बीएचके की कीमत 75.55 लाख से 83.58 लाख रुपये और 3-बीएचके की कीमत 1.06 करोड़ से 1.19 करोड़ रुपये के बीच होगी। हालांकि अंतिम कीमत फ्लैट के क्षेत्रफल के अनुसार तय होगी।

इस इलाके में बन हैं फ्लैट

योजना की एक और खासियत इसकी लोकेशन है। नरेला का यह इलाका तेजी से विकसित हो रहा है। यहां से प्रस्तावित रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर का मेट्रो स्टेशन करीब 1.5 किलोमीटर दूर होगा। प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) स्टेशन भी करीब 1.9 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा यूईआर-1, यूईआर-2 और जीटी करनाल रोड जैसी प्रमुख सड़कें भी पास हैं। आसपास शिक्षा केंद्र, खेल परिसर और हरियाली की अच्छी व्यवस्था है, जिससे यह इलाका भविष्य में और अधिक आकर्षक माना जा रहा है।

किन्हें मिलेगा फायदा

यह योजना सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी, सेवानिवृत्त कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारी, सरकारी विश्वविद्यालयों और अस्पतालों के कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा डॉक्टर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, शिक्षक, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और निजी क्षेत्र के पेशेवर भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। आवेदन के समय संबंधित नौकरी या पेशे से जुड़े दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा।

आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होगा। इच्छुक लोगों को डीडीए के आवास पोर्टल पर जाकर पंजीकरण करना होगा। इसके लिए 2,500 रुपये का गैर-वापसी योग्य पंजीकरण शुल्क देना होगा। जो लोग पहले से डीडीए आवास पोर्टल पर पंजीकृत हैं, उन्हें दोबारा शुल्क नहीं देना पड़ेगा। फ्लैट चुनने के बाद आवेदक को ऑनलाइन भुगतान के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा। इस दौरान चुना गया फ्लैट किसी दूसरे व्यक्ति के लिए उपलब्ध नहीं रहेगा।

बुकिंग के लिए इतनी जमा करानी होगी राशि

बुकिंग के लिए भी अलग-अलग राशि तय की गई है। 3-बीएचके फ्लैट के लिए 10 लाख रुपये, 2-बीएचके के लिए 4 लाख रुपये और 1-बीएचके के लिए 50 हजार रुपये जमा करने होंगे। यह राशि फ्लैट की कुल कीमत में समायोजित कर दी जाएगी। लेकिन यदि आवेदक बाद में फ्लैट छोड़ता है या तय समय पर बाकी भुगतान नहीं करता, तो यह राशि जब्त हो सकती है। डीडीए के अनुसार, बुकिंग के बाद डिमांड-कम-अलॉटमेंट लेटर जारी किया जाएगा। इसके बाद फ्लैट की बाकी कीमत 60 दिनों के भीतर जमा करनी होगी। जरूरत पड़ने पर 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी, लेकिन उस पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। तय समय के बाद भुगतान नहीं करने पर फ्लैट का आवंटन रद्द किया जा सकता है।

योजना में दिव्यांग (पीडब्ल्यूबीडी) आवेदकों के लिए विशेष सुविधा भी दी गई है। उन्हें फ्लैट की कीमत पर 5 प्रतिशत तक की छूट (अधिकतम 1 लाख रुपये) मिलेगी। साथ ही वे पूरी राशि एक साथ देने के बजाय 15 साल की आसान किस्तों में भी भुगतान कर सकते हैं। डीडीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि फ्लैट केवल रिहायशी उपयोग के लिए होंगे। कब्जा मिलने के बाद फ्लैट मालिकों को संबंधित रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) का सदस्य बनना होगा और रखरखाव शुल्क भी देना होगा। फ्लैट का स्वामित्व पूरी प्रक्रिया पूरी होने और कन्वेयंस डीड बनने के बाद ही मिलेगा।

कुल मिलाकर, डीडीए कर्मजीवी आवास योजना 2026 उन लोगों के लिए बड़ा अवसर है जो दिल्ली में अपना घर खरीदना चाहते हैं। 25 प्रतिशत की छूट, तैयार फ्लैट, बेहतर कनेक्टिविटी और पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया इस योजना को खास बनाती है। खासकर सरकारी कर्मचारियों, पेशेवरों और सेवानिवृत्त लोगों के लिए यह कम कीमत में दिल्ली में घर खरीदने का एक अच्छा मौका माना जा रहा है।

Chaturmaas 2026 Upay: चतुर्मास में तुलसी के ये 5 उपाय बढ़ाएंगे जीवन में धन-धान्य, जानें कब और कैसे करें पूजा

Chaturmaas 2026 Upay: देवशयनी एकादशी के दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु चार माह के शयन के लिए पाताल लोक प्रस्थान करते हैं। इसलिए आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। ये चार माह जब भगवान विष्णु शयन करते हैं, उसे ही चतुर्मास कहते हैं। यह अवधि सावन, भादों, आश्विन और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक रहती है। इन चार महीनों के दौरान हिंदू धर्म में मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। चतुर्मास के दौरान तुलसी के कुछ उपाय करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है और उन्हें विष्णुप्रिया कहा जाता है। इसलिए माना जाता है कि आज के दिन तुलसी के 5 उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा घर-परिवार पर बनी रहती है और सुख-समृद्धि आती है।

तुलसी नामाष्टक का पाठ करें : चतुर्मास में तुलसी के पौधे के सामने तुलसी नामाष्टक का 108 बार जाप करने से आर्थिक तंगी और कर्जों से मुक्ति मिलती है। तुलसी माता के 8 नाम वृंदा, वृंदानी, श्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, कृष्णजीवनी और तुलसी का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है।

तुलसी माता का करें श्रृंगार : चतुर्मास के दौरान तुलसी माता को 16 श्रृंगार का सामान अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। तुलसी माता की कृपा से जीवन में आर्थिक संपन्नता आती है।

तुलसी पर जलाएं दीपक : तुलसी के पास दीपक जलाने से करियर और व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के साथ मां लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। मान्यता है कि इस दिन 11, 21 या 51 दीपक जलाने चाहिए। भक्ति भाव के साथ तुलसी चालीसा का पाठ करना चाहिए।

भगवान विष्णु को अर्पित करें तुलसी दल : भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु को भोग लगाते समय तुलसी दल जरूर शामिल करें। लेकिन एकादशी के दिन तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए, पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले तोड़ लें।

तुलसी की करें परिक्रमा : तुलसी पूजन के बाद परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करते समय ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भाग्य का साथ मिलता है। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है।

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब आगे क्या? सोमवार को बड़ा कदम उठा सकती है सरकार, फुल डिटेल जानिए

नीट पेपर लीक विवाद को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि ये लोकतंत्र की जीत है। वहीं शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने जहां राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। वहीं इस बड़े घटनाक्रम के साथ ही दो एक सवाल तेजी से तैरने लगे हैं कि अब सरकार का अगला कदम क्या होगा। केंद्र सरकार सोमवार 27 जुलाई को एक और बड़े कदम की ओर बढ़ती दिख रही है।

ये विधेयक लाने की तैयारी

जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार ने ‘सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ लाने का प्रस्ताव रखा है। इस नए कानून का मकसद संगठित तरीके से पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम 7 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार यह विधेयक 27 जुलाई को संसद में पेश कर सकती है।

विधेयक में कड़ी सजा का प्रवधान 

विधेयक के मसौदे में पेपर लीक कराने या सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के लिए 5 से 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा पेपर लीक के मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। वहीं, इस कानून के तहत दर्ज मामलों का ट्रायल चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर पूरा करने का भी प्रस्ताव है।

बनाए जाएंगे फास्ट-ट्रैक कोर्ट

प्रस्तावित विधेयक में यह भी कहा गया है कि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेपर लीक और परीक्षा में नकल जैसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं, ताकि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा हो सके। इसके अलावा, सरकार विशेष जांच इकाइयां (स्पेशलाइज्ड एनफोर्समेंट यूनिट्स) बनाने का भी प्रस्ताव लेकर आई है। इनके तहत केंद्र सरकार पेपर लीक मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित कर सकेगी, जो इन मामलों की पूरी जांच की जिम्मेदारी संभालेगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात एक वीडियो संदेश जारी कर इस कदम की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द संसद से पास कराने की कोशिश करेगी। हालांकि, उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग पर कोई टिप्पणी नहीं की।

मंत्रिमंडल को दी गई जानकारी

सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई से जुड़े नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। सूत्रों ने बताया कि संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस मसौदे को मंजूरी दी गई। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य मौजूदा नियमों की तुलना में पेपर लीक में शामिल लोगों के लिए और कड़ी सजा का प्रावधान करना है। इससे पहले गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश में कहा था कि सरकार अगले सप्ताह संसद में ऐसा विधेयक पेश करेगी, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रावधान होंगे।

H1B Visa Fee: अमेरिका जाने वाले भारतीयों को बड़ी राहत! H-1B वीजा पर ट्रंप के ₹95 लाख की फीस पर कोर्ट ने दिया बड़ा झटका

US Court Blocks Trump H-1B Visa Fee: अमेरिका में रहने के लिए जारी होने वाले H-1B वीजा पर एक बड़ी राहत वाली खबर आई है। एक संघीय अपील अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने नए H-1B वीजा पर करीब 95 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस लगाने वाले आदेश पर रोक हटाने से साफ इनकार कर दिया है।

बोस्टन स्थित ‘फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स’ की तीन जजों की पीठ ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें इस फीस को गैर-कानूनी करार दिया गया था। अदालत के इस फैसले से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी टेक कंपनियों को बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने क्यों लगाई $100,000 की वीजा फीस पर रोक?

यूएस डिस्ट्रिक्ट जज लियो टी. सोरोकिन ने 8 जून 2026 के अपने आदेश में कहा था कि ट्रंप प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी फीस वसूलना एक तरह का ‘अवैध टैक्स’ है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति या कार्यपालिका को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं दिया है।

20 डेमोक्रेटिक शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर इस याचिका में तर्क दिया गया कि राष्ट्रपति ने संसद से कानून पास कराने के बजाय सिर्फ एक राष्ट्रपति घोषणापत्र के जरिए इस फीस को लागू कर अपने अधिकारों का अतिक्रमण किया है।

अपील अदालत ने 1989 के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर सरकार नागरिकों या कंपनियों पर कोई बड़ा वित्तीय बोझ (टैक्स या फीस) डालती है, तो उसके लिए संसद की स्पष्ट मंजूरी अनिवार्य है। ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि उनके पास इसकी कानूनी मंजूरी थी।

क्या था ट्रंप प्रशासन का तर्क और फैसला?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सितंबर 2025 में एक प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन के जरिए $100,000 की H-1B वीजा फीस लगाने का ऐलान किया था। प्रशासन का कहना था कि अमेरिकी कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए H-1B वीजा कार्यक्रम का गलत इस्तेमाल करती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छिन जाती हैं। सरकार के मुताबिक, इस भारी फीस का मकसद कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करने से हतोत्साहित करना था।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स और टेक कंपनियों के लिए राहत क्यों?

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को आईटी, इंजीनियरिंग और विज्ञान जैसे विशेष क्षेत्रों में विदेशी कुशल पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। अमेरिका हर साल कुल 85,000 H-1B वीजा करीब 65,000 रेगुलर कोटा और 20,000 अमेरिका से मास्टर डिग्री हासिल करने वालों के लिए जारी करता है। इस कोटे का बड़ा हिस्सा भारत और चीन के पेशेवरों को मिलता है।

इस नए नियम से पहले, अमेरिकी कंपनियों को एक H-1B कर्मचारी को स्पॉन्सर करने के लिए औसतन $2,000 से $5,000 (लगभग 1.6 लाख से 4.1 लाख रुपये) ही देने पड़ते थे। $100,000 की फीस लागू होने से कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाओं को बुलाना बेहद खर्चीला हो जाता।

आगे क्या होगा?

अपील अदालत का यह स्टे खारिज होने का मतलब है कि जब तक इस पूरे मामले की अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रंप प्रशासन $100,000 की इस बढ़ी हुई फीस को लागू नहीं कर सकता है। यानी फिलहाल पुरानी फीस प्रक्रिया के तहत ही H-1B वीजा आवेदन स्वीकार किए जाएंगे।

PMS के नए नियमों से जुड़े सेबी के प्रस्ताव में क्या है, इसके लागू होने के बाद क्या बदलाव आएगा?

सेबी पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशंस, 2020 में बदलाव की तैयारी में है। रेगुलेटर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को देखते हुए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आज की जरूरतों को ध्यान में रख बदलना चाहता है। इस बारे में सेबी ने कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया है। इस पर 13 अगस्त तक राय मांगी गई है।

पीएमएस के एयूएम में तेज उछाल

पिछले कुछ सालों में पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज रही है। 31 मई, 2026 को पीएमएस का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 42.61 लाख करोड़ रुपये हो गया। अप्रैल 2019 में यह 18.07 लाख करोड़ रुपये था। पोर्टफोलियो मैनेजर्स की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 2020 में यह संख्या 226 थी, जो अब बढ़कर 515 हो गई है। पीएमएस क्लाइंट्स की संख्या बढ़कर 2.19 लाख हो गई है।

एसेट्स के  निवेश के विकल्प बढ़ेंगे

सेबी ने कहा है कि पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ और इस प्रोडक्ट में इनवेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए इससे जुड़े नियमों पर पुनर्विचार जरूर हो गया है। सबसे बड़ा प्रस्ताव पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए निवेश के विकल्पों का विस्तार है। सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजर्स को ‘लिस्ट होने वाले’ सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत देने का प्रस्ताव दिया है।

विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत

सेबी के प्रस्ताव में कहा गया है कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स को क्लाइंट्स के एसेट का 10 फीसदी इनवेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत मिलनी चाहिए। इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजर्स क्लाइंट्स के एसेट्स को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे। विदेशी सिक्योरिटीज में विदेश में लिस्टेड शेयर्स, लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज, ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स आदि शामिल होंगे।

विदेश में निवेश FEMA के नियमों के तहत 

पीएमएस के फंड मैनेजर्स को FEMA के नियमों के तहत विदेश में निवेश की इजाजत होगी। फंड मैनेजर्स को विदेश में निवेश से पहले क्लाइंट्स की सहमति हासिल करनी होगी। सेबी का मानना है कि पीएमएस के नए नियमों के लागू होने के बाद निवेश के लिहाज से म्यूचुअल फंड्स और उसके बीच का फर्क कम हो जाएगा।

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मिनिमम निवेश 50 लाख से घटकर 25 लाख होगा

सेबी के कंसल्टेशन पेपर में म्यूचुअल फंड-ओनली पीएमएस (MF-PMS) कैटेगरी शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इससे अमीर निवेशकों की पहुंच प्रोफेशनली मैनेज्ड पोर्टफोलियो तक बढ़ेगी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत फंड मैनेजर्स को म्यूचुअल फंड्स, ईटीएफ और स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड में निवेश की इजाजत होगी। सेबी ने इस कैटेगरी के लिए मिनिमम निवेश को 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख करने का प्रस्ताव पेश किया है।