कैब ड्राइवर को फोन पर अंग्रेजी बोलते देख पैसेंजर हुआ शॉक, बाद में सच्चाई ने खोला राज

आजकल AI रोजाना की जिंदगी का हिस्सा बन गया है, जो लोगों को ऑफिस के काम से लेकर नई स्किल्स सीखने तक में मदद करता है। लेकिन कभी-कभी AI का इस्तेमाल ऐसे मौकों पर भी देखने को मिलता है, जिसकी हम उम्मीद नहीं करते।

ऐसा ही कुछ दिल्ली में सुबह के समय कैब से सफर कर रहे मैनेजमेंट कंसल्टेंट तुषार जेजानी के साथ हुआ। उन्होंने देखा कि उनका कैब ड्राइवर फोन पर अंग्रेजी में बात कर रहा था। शुरुआत में यह देखकर उन्हें लगा कि आखिर फोन पर क्या हो रहा है।

लेकिन जब जेजानी ने ड्राइवर से एक साधारण सा सवाल पूछा, तो उन्हें ऐसी बात पता चली जिसकी उन्होंने उम्मीद नहीं की थी। जिसके बाद एक आम कैब यात्रा सीखने, टेक्नोलॉजी और मेहनत से जुड़ी ऐसी कहानी बन गई, जिसने सफर खत्म होने के बाद भी उन्हें काफी समय तक प्रेरित किया।

जेजानी ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा, “सुबह 4:13 बजे, नई दिल्ली। एक ऐसी कैब यात्रा जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगा।”

उन्होंने आगे बताया, “मेरा ड्राइवर अपने फोन पर अंग्रेजी में बात कर रहा था, अपनी सुबह की दिनचर्या और यात्रा की लोकेशन बता रहा था। मैं थोड़ा घबरा गया और ध्यान से सुनने लगा क्योंकि एक पल के लिए मुझे लगा कि वह हमारी लोकेशन और जानकारी किसी और के साथ साझा कर रहा है। तभी उसने देखा कि मैं असहज महसूस कर रहा हूं। उसने बातचीत शुरू कर दी।”

ड्राइवर ने फिर पूछा, “सर, आप कहां जा रहे हैं?”

जेजानी ने जवाब दिया, “मैं बैंगलोर जा रहा हूं।”

इसके बाद ड्राइवर ने पूछा कि वह वहां काम के सिलसिले में जा रहे हैं या निजी काम से?

जेजानी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हमेशा काम के लिए।”

दोनों के बीच करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। ड्राइवर अंग्रेजी में बात कर रहा था, जबकि जेजानी उसे हिंदी में जवाब दे रहे थे। हालांकि, जेजानी के मन में अभी भी यह सवाल था कि ड्राइवर फोन पर आखिर किससे बात कर रहा था। आखिरकार उन्होंने सीधे उससे पूछ ही लिया।

तभी ड्राइवर ने जेजानी को बताया कि वह फोन पर किसी और से बात नहीं कर रहा था। बल्कि वह ChatGPT का इस्तेमाल करके अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस कर रहा था।

ड्राइवर ने कहा, “नहीं भैया, फोन पर नहीं। मैं ChatGPT पर अंग्रेजी बोलने की प्रैक्टिस कर रहा था। अभी मैं फर्राटे से अंग्रेजी नहीं बोल पाता। मेरी अभी बेटी हुई है। उसके लिए सीख रहा हूं। जब बड़ी होगी, तो उसे भी सिखाऊंगा।”

इस पल को याद करते हुए जेजानी ने लिखा, “सुबह 5 बजे उस लगभग खाली सड़क पर मुझे एक बात समझ आई। वह सिर्फ अंग्रेजी नहीं सीख रहा था। वह चुपचाप अपनी बेटी के लिए जिंदगी में एक नई शुरुआत की तैयारी कर रहा था। मुझे नहीं पता कि AI किन-किन नौकरियों की जगह लेगा। लेकिन यह जरूर है कि AI ने भारतीय समाज के हर वर्ग के लोगों तक टेक्नोलॉजी की पहुंच आसान कर दी है।”

इस घटना ने जेजानी को यह सोचने पर भी मजबूर किया कि कैसे टेक्नोलॉजी ने सीखने की राह में आने वाली कुछ रुकावटों को कम किया है। उन्होंने लिखा, “कोई कोचिंग क्लास नहीं। कोई गेटकीपर नहीं। बस सीखने की इच्छा और AI वाला एक स्मार्टफोन। पिछले साल की इस कैब यात्रा को याद करते हुए जेजानी ने AI में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने अंत में लिखा, “क्या सफर था और क्या जबरदस्त सीख मिली। सीखते रहो, सीखते रहो और सीखते रहो।”

सोशल मीडिया पर लोगों के रिएक्शन

इस पोस्ट के बाद LinkedIn पर AI, सीखने और टेक्नोलॉजी तक पहुंच के बारे में बड़ी चर्चा शुरू हो गई।

एक यूजर ने कमेंट किया, “ड्राइवर की कहानी दिखाती है कि जिज्ञासा, इरादा और टेक्नोलॉजी तक पहुंच नए रास्ते खोल सकती है, चाहे कोई कहीं से भी शुरुआत करे। सीखने के लिए क्लासरूम की जरूरत नहीं होती; कभी-कभी, बस एक स्मार्टफोन और खुद को बेहतर बनाते रहने की इच्छा ही काफी होती है।”

एक और यूजर ने कहा, “कभी-कभी AI का सबसे असरदार इस्तेमाल ऑफिस या स्टार्टअप में नहीं, बल्कि ऐसी रोजमर्रा की जिंदगी में देखने को मिलता है।”

एक यूजर ने लिखा, “AI का सबसे बड़ा असर शायद ऑटोमेशन नहीं, बल्कि आम लोगों को उन टूल्स तक पहुंच देना हो सकता है, जो पहले मुश्किल से ही मिल पाते थे।”

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Rare Earth Magnet Scheme: ₹7280 करोड़ की सरकारी योजना, L&T और कोल इंडिया समेत 20 कंपनियों ने बोली लगाई

Rare Earth Magnet Scheme: सरकार की ₹7,280 करोड़ की रेयर अर्थ मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग योजना को कंपनियों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। Larsen & Toubro (L&T), Coal India, ReNew, Attero Recycling और Lohum Magnets & Energy Solutions समेत 20 कंपनियों ने इस योजना के लिए बोली लगाई है।

भारी उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। तकनीकी बोलियां 13 अगस्त को खोली गईं। आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त थी।

कौन-कौन सी कंपनियां दौड़ में हैं?

इस योजना में भारतीय कंपनियों के साथ विदेशी कंपनियों ने भी हिस्सा लिया है। इनमें NEO Performance Materials (Singapore) और जापान की Proterial की भारतीय इकाई Proterial India भी शामिल हैं।

इसके अलावा 20 Microns, N.A.N. Magnetech, PrNd Metal and Magnets, Prozeal Green Energy और Ramp Metals & Minerals जैसी कंपनियों ने भी बोली लगाई है।

सरकार की योजना क्या है?

सरकार इस योजना के तहत भारत में हर साल 6,000 मीट्रिक टन सिंटर्ड NdFeB रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट बनाने की क्षमता चाहती है। इस बंटवारा 5 कंपनियों के बीच किया जाएगा। हर कंपनी को अधिकतम 1,200 मीट्रिक टन सालाना क्षमता मिल सकती है।

केंद्रीय कैबिनेट ने नवंबर 2025 में इस योजना को मंजूरी दी थी। योजना की अवधि 7 साल होगी। इसमें पहले 2 साल फैक्ट्री लगाने के लिए होंगे। इसके बाद 5 साल तक बिक्री के आधार पर इंसेंटिव मिलेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट इतने अहम क्यों हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, विंड टरबाइन, हाई-एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस सिस्टम में होता है। सरकार का लक्ष्य भारत में NdPr ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करना है।

चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी

इस सेक्टर में चीन का दबदबा है। भारत अभी रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। साल 2025 में चीन के एक्सपोर्ट प्रतिबंधों से सप्लाई प्रभावित हुई थी। इससे कई उद्योगों में कमी देखने को मिली। सरकार अब घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करना और सप्लाई को सुरक्षित बनाना चाहती है।

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को ₹652 करोड़ मुनाफा, 10 लाख से ज्यादा AC बेचे

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rhetan TMT Q1 Results: टीएमटी स्टील बार कंपनी को ₹3.16 करोड़ का मुनाफा, क्षमता बढ़ाने पर बड़ा दांव

Rhetan TMT Q1 Results: अहमदाबाद की टीएमटी स्टील बार बनाने वाली कंपनी Rhetan TMT Ltd ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मुनाफे में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 315.7% बढ़कर ₹3.16 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹76 लाख था। हालांकि, ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹5.04 करोड़ से घटकर ₹4.06 करोड़ रहा।

EBITDA और PBT में भी बड़ी बढ़त

Rhetan TMT का EBITDA 195.5% बढ़कर ₹3.79 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹1.28 करोड़ था। वहीं, टैक्स से पहले मुनाफा (PBT) 335.5% बढ़कर ₹3.31 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹0.76 करोड़ था। कंपनी की प्रति शेयर आय (EPS) भी बढ़कर ₹0.04 हो गई।

मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रही कंपनी

कंपनी अब कड़ी प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 45,000 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 75,000 मीट्रिक टन कर रही है। मैनेजिंग डायरेक्टर शालिन शाह ने कहा कि इससे कंपनी को TMT स्टील सेगमेंट में नए अवसरों का फायदा उठाने में मदद मिलेगी।

कंपनी का कहना है कि वह क्षमता बढ़ाने, प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर जोर देने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने के जरिए लंबे समय की ग्रोथ पर फोकस बनाए रखेगी।

सोलर प्रोजेक्ट और नए सर्टिफिकेशन का फायदा

Rhetan TMT ने अपने 1 मेगावाट कैप्टिव सोलर पावर प्रोजेक्ट की टेस्टिंग और कमीशनिंग पूरी कर ली है। जल्द ही इससे कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इससे ऊर्जा लागत कम करने और ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

कंपनी को Fe500D, Fe550 और Fe550D TMT बार्स के लिए BIS सर्टिफिकेशन भी मिल गया है। इससे वह सरकारी और PSU इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है।

Sahana Systems को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला, CEL के साथ 10 साल की डील

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Indian carmakers had flagged concerns about E20 fuel contamination: Reuters

Indian carmakers had flagged concerns about E20 fuel contamination: Reuters
Indian carmakers had flagged concerns about E20 fuel contamination: Reuters

Earlier this month, several media reports said the Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) had urged the government to introduce mandatory chloride limits in fuel standards after high levels of chloride and moisture were found in E20 petrol. SIAM later withdrew the communication, saying some of the figures mentioned in it needed further verification.

The government has been trying to address growing concerns around E20 with support from the industry. Oil marketing companies (OMCs) have rejected claims of widespread E20 fuel contamination after conducting tests across the country. Brands such as Toyota, Maruti Suzuki and Hero MotoCorp have also publicly backed the E20 programme.

However, separate communications between industry executives investigated by Reuters show that earlier, Maruti Suzuki, Tata Motors and Mahindra had privately raised concerns about contamination in E20. The data compiled by these carmakers was the most extensive fuel testing since E20 was officially rolled out nationwide last year. Their emails reveal that the carmakers were concerned about contaminants such as chloride and moisture in the fuel, which they said were affecting vehicles, even as they publicly supported the government’s E20 rollout.

Data flags high chloride contamination, moisture content

The data reviewed by Reuters shows that the three automobile manufacturers had carried out detailed testing by collecting more than 250 fuel samples from petrol pumps across 21 states and Union Territories over a year. The tests found high chloride levels in many samples from 18 states, along with high moisture content. Interestingly, the emails reviewed by Reuters did not raise any concerns about the authenticity of the data. 

StateNumber of samplesChloride (ppm)
Uttar Pradesh361.2-175
Maharashtra3110-357
Delhi/NCR281.4-420
Tamil Nadu271.3-24.0
Kerala241.0-2.2
Punjab201.9-110
Karnataka151- 2.2
Rajasthan146.0-570
Madhya Pradesh114.1-550

Source: SIAM via Reuters.

The data showed chloride levels of 6 to 570 parts per million (ppm) in Rajasthan, 1.4 to 420ppm in New Delhi and 10 to 357ppm in Maharashtra. The government’s permissible limit is 3ppm.

High chloride levels in the fuel can corrode vehicle components, while high moisture content can cause a vehicle to stop working immediately after refuelling, SIAM had stated earlier. In group emails exchanged between Maruti, Tata, Mahindra and SIAM, a senior Maruti executive raised concerns about the high chloride readings and said the matter had even been privately discussed with the Ministry of Petroleum on July 26.

Moisture levels found 333 percent above limit

Additionally, the same data showed moisture levels of up to 13,000ppm in Andhra Pradesh and 12,500ppm in Uttar Pradesh, against the government’s permissible limit of 3,000ppm. The exact cause of the contamination is not known. However, SIAM said in its now-withdrawn letter that it had seen an increase in chloride levels since E20 was introduced and asked the government to direct OMCs to identify the root cause.

When asked about the private emails, SIAM told Reuters that the data was meant only for internal circulation, discussion and validation, and had been collected by a very small number of automakers. SIAM added that the communication was withdrawn because the testing basis and sample size were not enough to support firm conclusions and that it had been sent accidentally. The organisation stated further that it plans to conduct a proper scientific study.

As for the high moisture levels, SIAM’s letter said the cause could be poor maintenance of underground storage tanks and pipelines at petrol pumps.

Carmakers raise concerns over vehicle failures

In a July 26 email, a senior Maruti official said that current fuel injectors can tolerate a maximum chloride level of 1ppm, and keeping it below 1ppm in E20 would be in accordance with international standards and discussions with the petroleum ministry. Same is in line with discussion held with the petroleum ministry, he stated.

Meanwhile, a senior Mahindra official wrote that organic chloride was responsible for the rapid vehicle failures in recent times and could damage engines just within 200km. The executive said that most cases reported immediately after refuelling were due to organic chloride and added that Mahindra had “strong evidences” from fuel samples collected at retail outlets. Mahindra later said the conclusions drawn from its executive’s emails were “completely baseless and incorrect”. The company said the industry data was limited and preliminary and that it did not see any issues with E20. 

What does the government say?

The Ministry of Petroleum and Natural Gas did not respond to requests for comment made by Reuters. Petroleum Minister Hardeep Singh Puri said on Friday that OMCs had started “rigorous testing” at retail outlets to check for contamination two weeks before SIAM’s letter was received. According to Puri, only four cases of contamination had been found. OMCs, as mentioned earlier, said that their extensive testing had found no reason for alarm over fuel contamination.

भारत से सीमा विवाद के बीच नेपाल का बड़ा कबूलनामा! क्या गायब हो गए 210 साल पुरानी सुगौली संधि के असली कागज?

India-Nepal Sugauli Treaty: भारत और नेपाल के बीच जारी सीमा विवाद के बीच नेपाल सरकार की ओर से एक हैरान करने वाला कबूलनामा सामने आया है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद में स्वीकार किया है कि सरकार को इस बात की पक्की जानकारी नहीं है कि उसके पास 1816 की ऐतिहासिक सुगौली संधि और 1950 की नेपाल-भारत संधि के मूल दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। ब्रिटिश भारत के साथ नेपाल की सीमा तय करने वाली यह संधि दोनों देशों के सीमांकन का मुख्य आधार रही है।

नेपाल की प्रतिनिधि सभा में एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार के पास 1816 की संधि से जुड़े दस्तावेजों के रिकॉर्ड तो मौजूद हैं, लेकिन उनमें से कोई आधिकारिक मूल संधि पत्र है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

नेपाल की संसद में विदेश मंत्री बोले- नेशनल आर्काइव्स में हैं रिकॉर्ड, पर मूल दस्तावेज स्पष्ट नहीं

विदेश मंत्री खनाल ने स्पष्ट किया कि वैसे तो देश के नेशनल आर्काइव्स में कुछ कागजात संरक्षित हैं लेकिन तमाम सरकारी विभागों में की गई व्यापक खोजबीन के बाद भी हस्ताक्षर युक्त स्पष्ट और मूल संधि पत्र का पता नहीं चल सका है। संसद में बोलते हुए खनाल ने कहा कि नेपाल सरकार के पास इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है कि हमारे पास आधिकारिक संधि दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। रिकॉर्ड दिखाते हैं कि कुछ संधियों से संबंधित दस्तावेज नेशनल आर्काइव्स में रखे गए हैं। लेकिन क्या वे वास्तव में आधिकारिक और मूल संधियां हैं, इसे लेकर हमारे पास स्पष्ट जानकारी नहीं है।

आपको बता दें कि 1814-1816 के एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद नेपाल साम्राज्य और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1816 में सुगौली की संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस संधि ने नेपाल के क्षेत्र को काफी हद तक कम कर दिया था और इसकी आधुनिक सीमाओं की रूपरेखा तय की थी।

लिपुलेख दर्रे पर भारत-चीन व्यापार और नए विवाद की वजह

नेपाल सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच व्यापार फिर से शुरू होने को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नेपाल ने इस व्यापार मार्ग का विरोध करते हुए दावा किया है कि लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा उसके क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

मौजूदा सीमा विवाद मुख्य रूप से काली (या महाकाली) नदी की व्याख्या पर केंद्रित है, जिसे 1816 की सुगौली संधि ने नेपाल की पश्चिमी सीमा के रूप में स्थापित किया था। नेपाल का तर्क है कि इस नदी का उद्गम लिंपियाधुरा से होता है। इस व्याख्या के आधार पर लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा नदी के पूर्व में स्थित हैं और इसलिए वे नेपाल का हिस्सा हैं।

भारत ने नेपाल के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र लंबे समय से उसके प्रशासनिक नियंत्रण में रहा है। भारत ने अपने रुख के समर्थन में ऐतिहासिक रिकॉर्ड और नक्शों का भी हवाला दिया है।

गायब दस्तावेजों की पुरानी पहेली: 1950 की संधि के कागजात भी नदारद

मूल संधियों के गायब होने या न मिलने की यह अनिश्चितता नई नहीं है। साल 2016 में भी नेपाल को तब मुश्किलों का सामना करना पड़ा था जब दोनों देशों के बीच बने प्रबुद्ध व्यक्ति समूह द्वारा 1950 की नेपाल-भारत शांति और मित्रता संधि की समीक्षा या उसे बदलने पर विचार किया जा रहा था। उस समय भी नेपाल सरकार 1950 की संधि की मूल प्रति खोजने में असमर्थ रही थी।

द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद हुई एक संसदीय जांच में सरकारी दफ्तरों, अभिलेखागारों, संग्रहालयों और दूसरे भंडारों में काफी तलाशी ली गई थी, लेकिन सुगौली संधि और 1950 की संधि की मूल प्रतियां नहीं मिल सकी थीं।

इसके बाद साल 2019 में तत्कालीन विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने भी स्वीकार किया था कि नेपाल के पास दोनों समझौतों की प्रतियां (कॉपी) तो हैं लेकिन वे मूल प्रतियां हैं या नहीं, यह स्थापित नहीं किया जा सका है। तब ज्ञावली ने कहा था कि हमारे पास दोनों संधियां मौजूद हैं, लेकिन हमें फोरेंसिक रूप से यह सत्यापित करना होगा कि ये प्रतियां ओरिजनल हैं या नहीं।

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Gold Silver Rates Today: दिल्ली में सोने में 7 सत्रों से जारी तेजी थमी, चांदी ₹6000 फिसली

Gold Silver Rates Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में बीते सात सत्रों से सोने में जारी तेजी पर गुरुवार को ब्रेक लग गया। सोने का भाव 2,800 रुपये गिरकर 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी में 6000 रुपये की गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में गिरावट आई।

विदेश में सोने और चांदी में गिरावट 

दिल्ली सर्राफा बाजार में गुरुवार को चांदी 6000 रुपये गिरकर 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बुलियन में कमजोरी का असर भारत में इनकी कीमतों पर पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.43 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,389.67 डॉलर प्रति औंस था। स्पॉट सिल्वर भी हल्की कमजोरी के साथ 65.03 डॉलर प्रति औंस था।

बीते सात सत्रों मे सोने में आई थी ₹12400 की तेजी

इससे पहले सोना बीते 7 सत्रों से लगातार चढ़ रहा था। इससे इसकी कीमतें 4400 डॉलर प्रति औंस के पार चली गई थी। दिल्ली में भी बीते सात सत्रों में सोना 12,400 रुपये चढ़ा था। चांदी में भी इस दौरान अच्छी तेजी आई थी। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक है। देश और विदेश में मुनाफावसूली का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा है।

क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर रहने से महंगाई बढ़ने का डर

अमेरिका में 12 अगस्त को इनफ्लेशन के डेटा आए, जो उम्मीद के मुताबिक रहे। इससे फेडरल रिजर्व के सितंबर की पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की संभावना कम हुई है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक फीकी पड़ जाती है। हालांकि, क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर हैं। ब्रेंट क्रूड अब भी करीब 87 डॉलर प्रति बैरल पर है।

अमेरिका-ईरान के बीच समझौते के संकेत नहीं 

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इससे क्रूड की कीमतें नीचे नहीं आ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स का आवागमन नाममात्र का हो रहा है। अगर क्रूड लंबे समय तक हाई लेवल पर बना रहता है तो महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ जाएगा। फिर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने की संभावना बढ़ जाएगी। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा।

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी को ₹652 करोड़ मुनाफा, 10 लाख से ज्यादा AC बेचे

LG Electronics India Q1 Results: इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी LG Electronics India ने जून तिमाही में मजबूत नतीजे दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 27.2% बढ़कर ₹652.8 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹513.2 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी 15.5% बढ़कर ₹7,233.3 करोड़ पहुंच गया। एक साल पहले यह ₹6,262.9 करोड़ था। यानी कमाई और मुनाफा दोनों में अच्छी बढ़त दिखी।

ऑपरेटिंग कमाई भी मजबूत रही

LG Electronics India का EBITDA 26.2% बढ़कर ₹904.2 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹716.2 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 11.4% से बढ़कर 12.5% हो गया। यानी कंपनी पहले से बेहतर कमाई कर रही है।

AC की बिक्री ने बढ़ाया भरोसा

एयर कंडीशनर की मजबूत मांग कंपनी के लिए बड़ा सहारा बनी। साल 2026 की पहली तिमाही में LG ने 10 लाख से ज्यादा AC बेचे। अब कंपनी को पूरे साल में 20 लाख से ज्यादा यूनिट बेचने की उम्मीद है।

कंपनी के डायरेक्टर और को-चीफ सेल्स एंड मार्केटिंग ऑफिसर संजय चिटकारा ने कहा कि डीलरों के पास स्टॉक अब सामान्य स्तर पर है। रिटेलर भी त्योहारी सीजन की तैयारी में जुट गए हैं। अगर मांग ऐसे ही बनी रही, तो कंपनी अपने सालाना अनुमान से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

LG Electronics India के शेयर

LG Electronics का शेयर गुरुवार को 1580 रुपये पर लगभग फ्लैट बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक ने 4.55% का रिटर्न दिया है। वहीं 1 साल के दौरान इसमें करीब 6% की गिरावट आई है। कंपनी का मार्केट कैप 1.07 लाख करोड़ रुपये है।

LG Electronics India का कारोबार

LG Electronics India, LG Electronics की सब्सिडियरी है। कंपनी भारत में टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, एयर कंडीशनर, IT प्रोडक्ट्स और व्हीकल सॉल्यूशंस बनाती और बेचती है। यह एक्सपोर्ट बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है।

Honasa Consumer Q1 Results: ममाअर्थ की पैरेंट कंपनी का मुनाफा 118% उछला, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sahana Systems को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला, CEL के साथ 10 साल की डील

Sahana Systems Defence Deal: IT और डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी Sahana Systems Ltd की सब्सिडियरी Sahana Defence Ltd को बड़ा डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने भारत सरकार के मिनी रत्न Central Electronics Limited (CEL) के साथ लंबी अवधि का समझौता किया है। यह डील सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हुई है।

समझौते के तहत उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में CEL के परिसर में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) इक्विपमेंट और वेपन पेरिफेरी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाई जाएगी और उसका संचालन भी किया जाएगा।

10 साल की होगी डील

यह कॉन्ट्रैक्ट शुरुआती तौर पर 10 साल के लिए है। अगर सबकुछ ठीक रहा, तो कॉन्ट्रैक्ट 5 साल और बढ़ाया जा सकता है।

Sahana Defence इस फैसिलिटी को बनाने, चलाने, मेंटेनेंस करने, मार्केटिंग करने और यहां बने प्रोडक्ट्स को कमर्शियल स्तर पर बाजार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संभालेगी।

क्या बनेगा इस फैसिलिटी में?

नई यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और हथियारों से जुड़े पेरिफेरी इक्विपमेंट बनाए जाएंगे। इसका मकसद भारत में ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करना और रणनीतिक तकनीकों में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।

कंपनी का कहना है कि CEL के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर वह डिफेंस सेक्टर के लिए मजबूत मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करेगी।

कंपनी ने क्या कहा?

Sahana Systems के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर प्रतीक काकड़िया ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी के लिए बड़ा मील का पत्थर है। उनके मुताबिक, इससे डिफेंस कारोबार में लंबे समय तक रेवेन्यू की बेहतर दृश्यता मिलेगी और भविष्य की ग्रोथ को मजबूत आधार मिलेगा।

Sahana Systems क्या काम करती है?

साल 2013 में स्थापित Sahana Systems का मुख्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, IoT, ब्लॉकचेन, बिजनेस इंटेलिजेंस और IT आउटसोर्सिंग जैसी तकनीकी सेवाएं देती है।

इसके अलावा कंपनी डिफेंसटेक, फिनटेक, हेल्थटेक और एडुटेक सेक्टर में भी काम करती है। Sahana Systems का दावा है कि वह सरकारी संस्थानों, रक्षा संगठनों और वित्तीय संस्थानों के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।

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भारतीय नौसेना का किलर ड्रोन प्लान, वॉरशिप से 1000 किमी दूर से ही दुश्मन का जहाज होगा तबाह! समझिए कैसे करेगा काम

लाल सागर में हाल के दिनों में हुए ड्रोन हमलों के बाद दुनियाभर की नौसेनाएं अपनी बेड़े की सुरक्षा और हमला करने की क्षमताओं की समीक्षा कर रही हैं। इसी बीच भारतीय नौसेना ने भी अपनी युद्धक क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना पर काम शुरू कर दिया है। नौसेना अपने युद्धपोतों के लिए 1000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाले शिप-लॉन्च्ड लॉइटरिंग म्यूनिशंस हासिल करने की योजना बना रही है। इस कदम से नौसेना को नौसैनिक चुनौतियों से निपटने और तटीय इलाकों में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की जबरदस्त क्षमता हासिल हो जाएगी।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय ने इन मध्यम दूरी के ड्रोनों की जरूरतों को हरी झंडी दे दी है। आपको बता दें कि 1000 किलोमीटर की विशाल रेंज से भारतीय नौसेना के सर्फेस फ्लीट की परिचालन पहुंच काफी हद तक बढ़ जाएगी। इसके जरिए भारतीय युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक इलाकों में तैनात रहकर परिचालन कर सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस क्षमता की बदौलत भारतीय युद्धपोत दुश्मन की तटीय मिसाइलों की पहुंच से काफी बाहर रहते हुए भी दुश्मन के तटीय और जमीनी ठिकानों पर विनाशकारी हमला कर पाएंगे।

हवा में 9 घंटे की स्टेमिना और 200 नॉट्स से अधिक गोता लगाने की रफ्तार

भारतीय नौसेना ऐसे स्वदेशी लॉइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम की तलाश में है जो हवा में 9 घंटे तक लगातार मंडरा सकें। लक्ष्य की पहचान होने पर ये ड्रोन 200 नॉट्स से अधिक की रफ्तार से दुश्मन पर सीधे गोता लगाकर हमला कर सकेंगे। इन किलर ड्रोनों में दिन और रात दोनों समय काम करने वाले इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सीकर लगे होंगे ताकि दिन हो या रात दुश्मन की पहचान कर उसे तबाह किया जा सके। नौसेना की शर्त है कि ये हथियार वन मीटर से कम सर्कुलर एरर प्रोबेबल के साथ अचूक और सटीक हमला करने में सक्षम होने चाहिए।

सबसे खास विशेषता यह है कि ये ड्रोन ऐसे कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम करेंगे जहां सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नल को जाम कर दिया गया हो, स्पूफ किया गया हो या उनका सिग्नल पूरी तरह बंद कर दिया गया हो।

ऑपरेटर एक साथ नियंत्रित करेगा 10 ड्रोन

रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रणाली को इस तरह से डिजाइन किया जाना जरूरी है कि जहाज पर मौजूद सिर्फ एक ऑपरेटर एक मॉड्यूलर कंट्रोल कंसोल के जरिए एक साथ 10 ड्रोनों को नियंत्रित कर सके। हवा में उड़ रहे इन ड्रोनों का नियंत्रण एक जहाज से दूसरे जहाज या फिर जमीन पर बने स्टेशन के बीच भी आसानी से स्थानांतरित किया जा सकेगा।

मौसम की मार झेलने की क्षमता और 20 साल तक लाइफ

नौसेना ने इन प्रणालियों के लिए बहुत ही कड़े पर्यावरणीय मानक तय किए हैं। वेंडरों को यह साबित करना होगा कि ये ड्रोन बेहद कठिन मौसमी परिस्थितियों में भी काम कर सकते हैं ताकि 50 नॉट्स की तेज हवाओं और 95% की नमी के स्तर के दौरान भी इन्हें लॉन्च किया जा सके। ड्रोन के क्रिटिकल कंपोनेंट की लाइफ पर भी कम से कम 10 सालों की गारंटी होनी चाहिए, जिसे जरूरत पड़ने पर 20 सालों तक बढ़ाया जा सके।

बाय इंडियन कैटिगरी के तहत होगी खरीद, बढ़ेगी स्वदेशी ताकत

रक्षा मंत्रालय इन प्रणालियों को बाय इंडियन-आईडीडीएम (Buy Indian-IDDM – Indigenously Designed, Developed and Manufactured) कैटिगरी के तहत खरीदने की योजना बना रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इंडिजिनस इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट और देश के अंदर ही मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है।

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