SIP या Lump Sum? जानें कहां मिलेगा सबसे ज्यादा रिटर्न! रिटायरमेंट के लिए एक्सपर्ट्स ने बताए ये धांसू फंड्स!

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ने म्यूचुअल फंड के निवेशकों को अपने इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पर दोबारा विचार करने को मजबूर कर दिया है। इसकी वजह यह है कि सिप के कई निवेशकों की शिकायत है कि पिछले दो साल में सिप से लगातार निवेश करने के बावजूद उनका पैसा ज्यादा नहीं बढ़ा है। कई इनवेस्टर्स तो सिप बंद करने के बारे में सोचने लगे हैं। सवाल है कि क्या सिप की जगह एकमुश्त निवेश करने से ज्यादा रिटर्न मिलेगा?

एकमुश्त और सिप दोनों तरीके निवेश के लिए सही

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश के दोनों ही तरीके ठीक हैं। दोनों में कौन सा तरीका ज्यादा सही है, यह निवेशक के रिस्क लेने की क्षमता और निवेश करने की कपैसिटी पर निर्भर करता है। जो निवेशक एक बार में बड़े अमाउंट का निवेश नहीं कर सकते, उनके लिए सिप हमेशा निवेश का ज्यादा सुविधाजनक तरीका है। आज सिप के रास्ते म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीमों में काफी ज्यादा पैसा आ रहा है। इनमें से कई निवेशकों के लिए एकमुश्त निवेश करना मुश्किल हो सकता है।

एकमुश्त निवेश के लिए बड़ा फंड जरूरी है

एकमुश्त निवेश के लिए बड़ा अमाउंट जरूरी है। अगर किसी के पास बोनस या किसी दूसरे तरीके से बड़ा फंड आया है तो वह एकमुश्त निवेश म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में कर सकता है। एकमुश्त निवेश करना तब फायदेमंद होता है, जब बाजार में स्टैबिलिटी होती है या बाजार चढ़ रहा होता है। ऐसा होने पर निवेशक को अपने पैसे पर अच्छा रिटर्न मिलता है। लेकिन, उतार-चढ़ाव वाले बाजार में एकमुश्त निवेश करना रिस्की हो सकता है।

रिटायरमेंट के लिए मल्टी एसेट फंड में निवेश समझदारी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति रिटायरमेंट के लिए म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में आज निवेश करना चाहता है तो वह मल्टी एसेट फंड में निवेश कर सकता है। इसकी वजह यह है कि यह स्कीम कई तरह के एसेट्स में निवेश करती है। यह एक तरह की हाइब्रिड स्कीम है। यह इक्विटी, डेट और कमोडिटी खासकर गोल्ड और सिल्वर में निवेश करती है। लंबी अवधि में हर एसेट में निवेश से अच्छा रिटर्न मिलता है। इस फंड के लिए हर एसेट में कम से कम 10 फीसदी निवेश करना जरूरी है।

मल्टी एसेट फंड में डायवर्सिफिकेशन का फायदा 

मल्टी एसेट फंड में निवेश करना का दूसरा फायदा यह है कि इससे डायवर्सिफिकेशन का मकसद पूरा हो जाता है। डायवर्सिफिकेशन से निवेश से जुड़ा रिस्क कम हो जाता है। इसकी वजह है कि आम तौर पर हर एसेट क्लास में एक साल साथ गिरावट नहीं आती है।

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एक एसेट का रिटर्न कमजोर होने पर दूसरे का रिटर्न अच्छा रहता है

कई बार इक्विटी मार्केट जब बेयरिश फेज में होता है तो गोल्ड और सिल्वर का प्रदर्शन अच्छा होता है। पिछले दो सालों में निवेशकों को शेयर बाजार से ज्यादा रिटर्न नहीं मिला है, लेकिन गोल्ड और सिल्वर ने बहुत अच्छे रिटर्न दिए हैं। ऐसे पीरियड में मल्टी एसेट फंड का प्रदर्शन अच्छा रहता है।

क्या हमारी नौकरियां ले सकता है AI? जानें 5 ऐसी फील्ड जहां इंसानों की काबीलियत का मुकाबला नहीं कर सकेगा एआई

आज के दौर में छोटे-बड़े पदों पर काम कर रहे कामगारों को एक सवाल सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है। एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या हमारी नौकरियां ले सकता है? कहने को यह सिर्फ मशीन है, लेकिन एंट्री लेवल कर्मचारियों से लेकर सीईओ तक इसके खौफ में जी रहे हैं। आए दिन मल्टीनेशनल कंपनियों द्वारा बड़ी संख्या में लोगों की छंटनी की खबरें आ रही हैं। ऐसे में ये सोचना लाजिमी है कि क्या एआई की वजह से इंसानों के काम करने के विकल्प सीमित होंगे या खतरा उतना बड़ा भी नहीं है, जितना इसका खौफ बन गया है? इस विषय पर बीबीसी हिंदी एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई सिर्फ नौकरियां खत्म नहीं करेगा, बल्कि नई नौकरियां पैदा भी करेगा। जनवरी 2026 में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एआई के कारण लाखों नई नौकरियां बनी हैं। कोई 12वीं छात्र एआई से जुड़े क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है, तो इसके लिए सही कोर्स चुनना होगा। आइए जानें 5 ऐसे करियर विकल्प जहां एआई इंसानों का बाल भी बांका नहीं कर सकता है।

क्या होता है एआई?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन या कंप्यूटर की ऐसी क्षमता, जिससे ऐसा लगे कि वो इंसानों की तरह ही सोचने-समझने के काबिल है।” वह कहते हैं रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल हो रहे कंप्यूटर-मोबाइल एप्लिकेशन के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काम कर रहा है।

एआई के पांच टॉप कोर्स

दिल्ली में टेक पॉलिसी फोकस्ड थिंकटैंक इसिया सेंटर की डायरेक्टर और जानी-मानी एआई एक्सपर्ट मेघना बल कहती हैं, ”एआई उन लोगों के लिए खतरा नहीं है, जो खुद को अपडेट रखते हैं। बल्कि यह उनके लिए मौका है।” मेघना के मुताबिक एआई से संबंधित कुछ बेसिक स्तर के कोर्स सभी को करने चाहिए। सरकार के स्वयं पोर्टल के जरिए कई कोर्स फ्री में किए जा सकते हैं। लेकिन इस फील्ड में करियर बनाने में ये 5 कोर्स आपके काम आएंगे।

एमबीए/पीजी डिप्लोमा इन एआई एंड बिजनेस एनालिटिक्स : आईआईएम, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, और अपग्रैड, या ग्रेट लर्निंग जैसी एडुटेक कंपनियों के साथ जुड़कर ये कोर्स किया जा सकता है। इसकी फीस करीब ढाई से सात लाख रुपये तक हो सकती है। कोर्स करने के बाद संभावित सैलरी छह से बीस लाख रुपये के बीच हो सकती है।

एआई सर्टिफिकेट प्रोग्राम (ऑनलाइन): ये ऑनलाइन एडुटेक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। इसकी फीस डेढ़ लाख रुपये के आसपास है। ये उनके लिए है, जो एकदम शुरुआती चरण में हैं और एआई की बुनियादी समझ बनाना चाहते हैं। इस कोर्स के बाद सालाना 10 लाख तक सैलरी मिल सकती है।

एमसीए/एम टेक इन एआई एंड मशीन लर्निंग : आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और कई दूसरे प्रमुख विश्वविद्यालय से ये कोर्स किया जा सकता है। इसके अलावा आईआईटी में एआई से जुड़े कई क्रैश कोर्स भी उपलब्ध हैं। मास्टर्स की फीस सालाना एक लाख से दस लाख के बीच हो सकती है। इसे करने के बाद अनुमानित सैलरी 22 लाख रुपए हो सकती है।

बीएससी/बीटेक इन एआई एंड डेटा साइंस : दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी, सेंट जेवियर्स कॉलेज, एनआईटी जैसे बड़े संस्थानों से ये कोर्स किया जा सकता है। पूरे प्रोग्राम की फीस एक लाख से बीस लाख रुपए के बीच हो सकती है। संभावित सैलरी 6 से 18 लाख रुपये तक जा सकती है।

एआई बूटकैंप और इंडस्ट्री प्रोग्राम : आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे और कई बड़े निजी संस्थान में ये कोर्स उपलब्ध है। इसकी फीस करीब 1 लाख से साढ़े तीन लाख रुपये हो सकती है। कोर्स के बाद संभावित पैकेज 6 से 18 लाख रुपए या उससे ज्यादा हो सकता है।

हेल्थ, सीए, कानून के पेशे में कम होगा एआई का असर

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का खतरा उन पेशों पर कम होगा, जहां इंसानी कनेक्ट की जरूरत होगी। मेघना बल कहती हैं, “नर्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, टीचर के काम एआई नहीं कर पाएगा। इन कामों के लिए इंसान ही चाहिए। लोग सिर्फ ऑटोमेटेड जवाबों से संतुष्ट नहीं होंगे।”

इसके अलावा क्रिएटिव डायरेक्टर्स, लेखक या कॉन्टेंट स्ट्रैटेजिस्ट के काम में एआई मददगार हो सकता है, लेकिन इनकी जगह नहीं ले पाएगा। प्रोफेसर आकाश सिन्हा चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, नर्स, एआई इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, वकील के करियर को एआई से सुरक्षित मानते हैं। लेकिन इसमें अपनी विशेषज्ञता कायम रखनी होगी। ये करियर विकल्प पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन आप खुद एआई टूल का इस्तेमाल करना सीखें, ताकि काम जल्दी कर सकें।

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Honasa Consumer Q1 Results: ममाअर्थ की पैरेंट कंपनी का मुनाफा 118% उछला, रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर

Honasa Consumer Q1 Results: FMCG कंपनी Honasa Consumer ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे दर्ज किए हैं। Mamaearth की पैरेंट कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 118.4% बढ़कर ₹90.2 करोड़ हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में यह ₹41.3 करोड़ था।

कंपनी का रेवेन्यू भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह 27% बढ़कर ₹756 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले यह ₹595.2 करोड़ था। कंपनी ने पहली बार 11.5% का PAT मार्जिन हासिल किया। Honasa Consumer का EBITDA बढ़कर ₹110.1 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹45.7 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 7.68% से बढ़कर 14.57% हो गया।

दो प्रोडक्ट का दमदार प्रदर्शन

Honasa Consumer ने बताया कि उसकी फोकस कैटेगरी में 35% से ज्यादा ग्रोथ दर्ज हुई। Mamaearth की ग्रोथ हाई-टीन्स में रही। Rice Dewy Bright Face Wash कंपनी का सबसे ज्यादा बिकने वाला फेस क्लींजर बन गया। वहीं Rosemary हेयर रेंज का सालाना रेवेन्यू ₹100 करोड़ के पार पहुंच गया।

The Derma Co. ने भी बड़ा मुकाम हासिल किया। इस ब्रांड का सालाना नेट सेल्स वैल्यू ₹1,000 करोड़ के पार पहुंच गया। कंपनी का दावा है कि पिछले 10 साल में वह भारत की पहली FMCG कंपनी बनी है, जिसने दो ₹1,000 करोड़ के ब्रांड खड़े किए हैं।

नए ब्रांड और ऑफलाइन कारोबार भी बढ़ा

Honasa Consumer के नए ब्रांड्स में 40% से ज्यादा ग्रोथ रही। BTM Ventures का सालाना रेवेन्यू ₹150 करोड़ के पार पहुंच गया। यह अब दक्षिण भारत से बाहर महाराष्ट्र और दूसरे बाजारों में भी विस्तार कर रहा है।

ऑफलाइन कारोबार भी मजबूत रहा। जनरल ट्रेड और मॉडर्न ट्रेड, दोनों में 40% से ज्यादा की बढ़त दर्ज हुई। कंपनी की पहुंच अब करीब 3 लाख FMCG रिटेल आउटलेट तक हो गई है। Honasa ने इसी तिमाही में FIKN नाम से फ्रेगरेंस कैटेगरी में भी एंट्री की है।

आगे क्या है कंपनी का प्लान?

चेयरमैन और CEO वरुण आलाघ ने कहा कि कंपनी की ग्रोथ अब सिर्फ एक ब्रांड पर निर्भर नहीं है। अलग-अलग ब्रांड और कैटेगरी से मजबूत मांग मिल रही है। कंपनी आगे भी नए प्रोडक्ट, डिजिटल विस्तार और ऑफलाइन नेटवर्क पर फोकस रखेगी।

Honasa Consumer का शेयर गुरुवार को 2.48% बढ़कर ₹479 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 67.98% का रिटर्न दिया है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kangana Ranaut: कंगना रनौत बोलीं जंतर-मंतर पर जमा भीड़ में ‘शबाना आजमी जैसे’ लोग थे, ‘ये Gen Z कैसे हो सकते हैं?’

Kangana Ranaut: जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के बारे में की गई अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना झेलने के बाद, कंगना रनौत ने अपने विवादित “जेनरेशन गटर” वाले बयान पर एक और स्पष्टीकरण दिया है। एक्टर और बीजेपी सांसद ने जोर देकर कहा कि उन्होंने किसी पूरी पीढ़ी को निशाना नहीं बनाया था और कहा कि उनकी टिप्पणी केवल प्रदर्शनकारियों के एक खास वर्ग के लिए थी, जिन्हें उन्होंने प्रदर्शन के वीडियो में देखा था।

गुरुवार को इंस्टाग्राम स्टोरीज पर एक वीडियो शेयर करते हुए कंगना ने सवाल किया कि इस भीड़ को आम तौर पर ‘जेन जेड’ (Gen Z) का विरोध प्रदर्शन क्यों कहा जा रहा है और तर्क दिया कि असल में देश की युवा आबादी का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही इसमें शामिल हुआ था।

कंगना ने ‘जेन ज़ेड प्रोटेस्ट’ लेबल पर सवाल उठाए

अपने वीडियो में कंगना ने इस बात को चुनौती दी कि यह प्रदर्शन पूरे भारत के युवाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने जेन ज़ेड आबादी का अनुमान लगभग 30 से 35 करोड़ लगाया और इस संख्या की तुलना जंतर-मंतर पर जमा हुए लोगों की संख्या से की। उन्होंने कहा, “पूरे देश के युवा? अगर आप सिर्फ जेन जेड की बात करते हैं, तो लगभग 30-35 करोड़ के पास इनकी आबादी होने वाली है।”

कंगना ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन में लगभग 10,000 लोग मौजूद थे और इस सभा में विभिन्न आयु वर्ग के लोग शामिल थे। दिग्गज अभिनेत्री शबाना आज़मी का जिक्र करते हुए, जो मार्च में शामिल हुई थीं, उन्होंने कहा, “जो जंतर-मंतर है वहाँ पर 10,000 लोग एक साथ आए थे जिनमें से आधे से ज्यादा लोग शबाना आज़मी जैसे थे, आपने देखा कि हर तरह के आयु वर्ग के लोग घूम रहे थे।”

इसके बाद उन्होंने दावा किया कि सभा में केवल लगभग 2,000 लोग ही जेनरेशन Z से थे और सवाल किया कि इस विरोध प्रदर्शन को पूरी पीढ़ी का प्रतिनिधि क्यों बताया जा रहा है। कंगना ने कहा कि “अगर हम युवाओं की बात करते हैं, जेन ज़ेड की हम विशेष रूप से बात करते हैं तो लग भाग वाह 2000 जेन ज़ेड पर, तो कैसे ये लोग इसको जेन ज़ेड विरोध कह रहे हैं? क्या पूरे देश की जेन ज़ेड विरोध कर रहे हैं?”

‘मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती’

कंगना ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनकी पिछली टिप्पणियां खास तौर पर उन लोगों के बारे में थीं, जिन्हें उन्होंने विरोध प्रदर्शन में देखा था, न कि सभी युवा भारतीयों के बारे में। उन्होंने कहा, “यहां जो भीड़ जमा हुई थी, मैंने खास तौर पर उन्हीं के बारे में कहा था।” इसके बाद एक्ट्रेस ने उन लोगों को “खुली चुनौती” दी जो उन पर पूरी पीढ़ी का अपमान करने का आरोप लगा रहे थे।

उन्होंने कहा, “मैं आपको खुली चुनौती देती हूं, मेरा कोई ऐसा खास बयान बताइए जिसमें मैंने पूरी पीढ़ी को शामिल किया हो? मेरे साथ इस तरह का फालतू एजेंडा मत चलाइए!” कंगना ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि वह युवाओं के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा, “मैं युवा-विरोधी नहीं हो सकती क्योंकि मैं खुद युवा हूं।”

कंगना ने पहले क्या कहा था

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कंगना ने विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी और प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की। उन्होंने कहा था, “मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी एक जगह इतनी बदसूरती नहीं देखी। Gen Z के विरोध प्रदर्शनों की ये रील्स देखकर उल्टी आती है।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह से वे बात करते हैं और जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं… मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी भी हर फ्रेम में सब कुछ इतना अजीब और भद्दा एक साथ नहीं देखा… मैं उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहती हूँ। उनमें से कुछ के पास सिस्टम को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छे नहीं हैं…”

उनकी इन बातों पर लोगों ने नाराज़गी जताई और आलोचकों ने उन पर युवा प्रदर्शनकारियों के बारे में सामान्य और तीखी टिप्पणी करने का आरोप लगाया। कंगना पहले ही अपनी ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी पर सफाई दे चुकी थीं। आलोचना के बाद, कंगना ने ANI को बताया था कि उनका मकसद विरोध प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों के बारे में कोई सामान्य टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने कहा कि वह “कुछ लोगों या कुछ महिलाओं” के बारे में बात कर रही थीं।

अपनी टिप्पणी के एक और विवादित हिस्से पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग खुद को कॉकरोच कहते हैं, और हम कहते हैं कि कॉकरोच गटर से निकलते हैं, तो इसमें क्या गलत है?” कंगना ने आगे कहा कि अगर कोई खुद को कॉकरोच बताता है, तो उन्हें उन्हें गटर से जोड़ने में कोई विरोधाभास नहीं दिखता।

उन्होंने कहा, “मैं खुद को कॉकरोच बिल्कुल नहीं मानती। अगर कोई कहे कि मैं गटर में रहती हूँ, तो मैं इससे इनकार करूँगी। लेकिन अगर कोई खुद को कॉकरोच कहता है, तो ज़ाहिर है कि वह गटर में ही रहेगा और कहां रहेगा?” उन्होंने फिर कहा, “लेकिन यह कहना कि मैं सभी युवाओं की बात कर रही थी, बिल्कुल गलत है।”

शबाना आज़मी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं

शबाना आज़मी उन लोगों में शामिल थीं, जो 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। 75 वर्षीय अभिनेत्री ने मार्च की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए, जिनमें उन्हें ट्रक में यात्रा करते और प्रदर्शनकारियों के साथ बैरिकेड पार करते हुए देखा जा सकता है।

प्रदर्शन के दौरान अभिनेता प्रकाश राज भी उनके साथ दिखे

कंगना का ताज़ा बयान उनकी पहले दी गई सफाई को ही और मज़बूत करता है। उनका कहना है कि उनकी बातों की आलोचना करते हुए, एक खास ग्रुप पर की गई टिप्पणी को गलत तरीके से देश की पूरी ‘जेन ज़ी’ (Gen Z) आबादी पर हमले के तौर पर पेश किया गया है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए क्या ₹1 करोड़ का फंड काफी है? एक्सपर्ट से समझें महंगाई और रिटर्न का पूरा गणित

Retirement Planning Calculation: भारतीय निवेशकों के बीच सालों से ₹1 करोड़ को रिटायरमेंट का एक मैजिक नंबर माना जाता रहा है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि एक बार बैंक खाते या म्यूचुअल फंड में ₹1 करोड़ आ गए, तो उनका बुढ़ापा आराम से कट जाएगा। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में यह सोच बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

किसी व्यक्ति के लिए ₹1 करोड़ का कॉर्पस काफी हो सकता है, तो किसी के लिए ₹5 करोड़ भी कम पड़ सकते हैं। आपका रिटायरमेंट फंड कितना होना चाहिए, यह किसी राउंड फिगर पर नहीं बल्कि आपकी मासिक खर्चों, महंगाई दर, रिटायरमेंट की उम्र और लाइफ एक्सपेक्टेंसी पर निर्भर करता है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग का पूरा गणित।

क्यों फेल हो सकता है ₹1 करोड़ का ‘मैजिक नंबर’?

वाइज फिनसर्व के ग्रुप सीईओ और सीआईओ अजय कुमार यादव के अनुसार, ₹1 करोड़ की समस्या यह नहीं है कि यह छोटा अमाउंट है, बल्कि समस्या यह है कि यह नंबर आपके भविष्य की जीवनशैली के खर्चों को नहीं दर्शाता।

मान लीजिए कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र में रिटायर होता है और 90 साल की उम्र (30 साल का रिटायरमेंट) तक का प्लान बनाता है। अगर ₹1 करोड़ पर 7% सालाना रिटर्न मिले, तो व्यक्ति हर महीने ₹66,500 की फिक्स्ड पेंशन ले सकता है।

अगर महंगाई दर केवल 5% सालाना भी मान ली जाए, तो आज का ₹66,500 का खर्च 10 साल बाद बढ़कर ₹1.08 लाख और 20 साल बाद ₹1.76 लाख प्रति माह हो जाएगा। यानी आपके पैसे की क्रय शक्ति तेजी से घटेगी और कुछ ही सालों में ₹1 करोड़ का फंड खत्म हो जाएगा।

इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न का असली गणित

अगर आपका पोर्टफोलियो 7% का रिटर्न देता है और महंगाई दर 5% रहती है, तो आपका वास्तविक या इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न केवल 2% ही रह जाता है। इस 2% वास्तविक रिटर्न के हिसाब से देखें, तो ₹1 करोड़ का फंड 30 सालों के लिए केवल ₹37,000 प्रति माह की ही परचेजिंग पावर दे पाएगा।

अगर कोई व्यक्ति हर महीने ₹1 लाख निकालना चाहता है और वह महंगाई को अनदेखा करता है, तो उसका ₹1 करोड़ का कॉर्पस 12.5 साल में खत्म होगा। लेकिन अगर महंगाई जोड़ दी जाए, तो यह फंड मात्र 9.1 साल यानी करीब 69 साल की उम्र तक में ही पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

आपको रिटायरमेंट के लिए असल में कितने पैसों की जरूरत है?

रिटायरमेंट कॉर्पस की गणना हमेशा उल्टे क्रम से करनी चाहिए। मान लीजिए एक 40 वर्षीय व्यक्ति का आज का मासिक खर्च ₹1 लाख है और वह 60 साल में रिटायर होना चाहता है। 6% महंगाई दर पर 60 साल की उम्र में वही जीवनशैली बनाए रखने के लिए उसे प्रति माह ₹3.21 लाख यानी साल के करीब ₹38.49 लाख की आवश्यकता होगी।

कितना कॉर्पस चाहिए होगा?

बिना महंगाई एडजस्टमेंट (7% रिटर्न पर) 60 साल की उम्र में कम से कम ₹4.82 करोड़ का फंड चाहिए। 5% पोस्ट-रिटायरमेंट महंगाई जोड़ने पर यही फंड बढ़कर ₹8.68 करोड़ हो जाता है।

क्या है 30X रिटायरमेंट रूल?

ट्रैक (Trackk) के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते और अजय कुमार यादव के अनुसार, 30X रूल एक अच्छा शुरुआती अनुमान हो सकता है:

नियम: अपने रिटायरमेंट के पहले साल के कुल अनुमानित खर्च को 30 से गुणा कर दें।

उदाहरण: अगर रिटायरमेंट के पहले साल का खर्च ₹38.49 लाख है, तो ₹38.49 लाख × 30 = लगभग ₹11.55 करोड़ का कॉर्पस चाहिए।

यह बड़ा फंड आपको शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, मेडिकल इमरजेंसी और लंबी उम्र जीने के जोखिम से सुरक्षा का बड़ा कवर देता है।

महंगाई के अलावा इन 3 बातों का रखें खास ध्यान

लाइफ एक्सपेक्टेंसी: अब औसतन लोग लंबा जीवन जी रहे हैं। अपनी वित्तीय योजना 75 या 80 साल के बजाय कम से कम 90 साल की उम्र मानकर बनाएं।

हेल्थकेयर कॉस्ट: इलाज का खर्च आम महंगाई की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ता है। इसके लिए रिटायरमेंट फंड से अलग एक समर्पित मेडिकल एंड इमरजेंसी रिजर्व बनाएं।

कैश फ्लो पर ध्यान दें, गोल नंबर पर नहीं: ₹1 करोड़ या ₹5 करोड़ जैसे गोल नंबरों के पीछे भागने के बजाय यह तय करें कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितना कैश फ्लो चाहिए और आपका घर कहां मेट्रो शहर या टियर-2 शहर है।

आपके लिए क्या है सही रिटायरमेंट नंबर?

भारतीय निवेशकों के लिए कोई एक फिक्स्ड रिटायरमेंट नंबर नहीं हो सकता। ₹1 करोड़ एक शुरुआत का पड़ाव तो हो सकता है, लेकिन यह पूरा रिटायरमेंट प्लान नहीं है। आपका सही नंबर वह है जो आपकी जीवनशैली, स्वास्थ्य जरूरतों, पेंशन/रेंटल इनकम और महंगाई को जोड़कर तैयार होता है ताकि रिटायरमेंट के बाद आपके पैसे कभी खत्म न हों।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

7,000mAh बैटरी वाला Realme 16x 5G भारत में बिक्री के लिए उपलब्ध, देखें कीमत और ऑफर

अगर आप नया स्मार्टफोन लेने की सोच रहे हैं, तो Realme का Realme 16x 5G फोन में भारत में अब खरीदने के लिए उपलब्ध है। इस हैंडसेट में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट, 6.8-इंच की डिस्प्ले, 50MP रियर कैमरा और 8MP सेल्फी कैमरा दिया गया है। इसके अलावा, Realme 16x 5G में 7,000mAh की बैटरी दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

Realme 16x 5G की भारत में कीमत और ऑफर

भारत में Realme 16x 5G के बेस वेरिएंट (4GB RAM और 128GB स्टोरेज) की कीमत ₹25,999 से शुरू होती है। जबकि यह 6GB + 128GB और 6GB + 256GB RAM और स्टोरेज कॉन्फ़िगरेशन में भी उपलब्ध है, जिनकी कीमत क्रमशः ₹27,999 और ₹30,999 है।

बता दें कि Realme 16x 5G को Endurance Brown और Glory White कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है। इसे Flipkart और Realme India की वेबसाइट के जरिए खरीदा जा सकता है।

Realme 16x 5G पर मिल रहे ऑफर्स

पहली सेल के तहत, ग्राहक ₹2,000 की सीधी छूट का फायदा उठा सकते हैं। इससे तीनों वेरिएंट की असल कीमत घटकर क्रमशः ₹23,999, ₹25,999 और ₹28,999 हो जाती है। इसके अलावा, खरीदार क्रेडिट कार्ड EMI ट्रांजैक्शन पर ₹1,000 की छूट या ₹3,000 तक का एक्सचेंज ऑफर भी पा सकते हैं।

इसके साथ ही, कंपनी उन लोगों को 10 महीने तक की नो-कॉस्ट EMI की सुविधा दे रहा है, जो स्मार्टफोन की पूरी कीमत एक बार में नहीं चुकाना चाहते।

Realme 16x 5G के फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

डुअल-सिम (नैनो) वाला Realme 16x 5G, Android 16 पर आधारित Realme UI 7.0 पर चलता है। इसमें 6.8-इंच की HD+ (720×1,570 पिक्सल) LCD स्क्रीन है, जिसका रिफ्रेश रेट 144Hz तक, टच सैंपलिंग रेट 180Hz और ब्राइटनेस 1200 निट्स (HBM) तक है।

इस हैंडसेट में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है, साथ ही इसमें 6GB तक RAM और 256GB तक ऑनबोर्ड स्टोरेज मिलती है। Realme ने इसमें 5,300 sq mm का AirFlow वेपर चैंबर कूलिंग सिस्टम और GT Boost गेमिंग ऑप्टिमाइजेशन इंजन भी दिया है।

कैमरे की बात करें तो Realme 16x 5G में f/1.8 अपर्चर वाला 50MP का रियर कैमरा है। इसमें सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए f/2.0 अपर्चर वाला 8MP का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है।

इसके अलावा, इस हैंडसेट में कनेक्टिविटी के लिए Wi-Fi, 5G, Bluetooth 5.3 और USB Type-C पोर्ट जैसे ऑप्शन मिलते हैं। पावर की बात करें तो, Realme 16x 5G में 7,000mAh की बैटरी है दी गई है, जो 45W फास्ट चार्जिंग, बायपास चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसका साइज 166.47 x 78.23 x 8.88mm और वजन 217g है।

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भारत 2036 तक बन सकता है 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी, करने होंगे ये 20 रिफॉर्म्स

भारत 10 साल में 20 ट्रिलियन (लाख करोड़) डॉलर की इकोनॉमी बन सकता है। लेकिन, इसके लिए रिफॉर्म्स के बड़े कदम उठाने होंगे। इनवेस्टमेंट बैंक इक्विरस के एमडी और चेयरमैन अजय गर्ग ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि 2036 तक 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के लिए भारत को एक साथ 20 रिफॉर्म्स करने होंगे।

गर्ग न कहा, “मेरा मानना है कि एक साथ कुल 20 रिफॉर्म्स करने होंगे। इसकी वजह यह है कि इंडिया की इकोनॉमी 4 ट्रिलियन डॉलर की हो गई है। आज भारत की इकोनॉमी यूरोप के कई देशों की इकोनॉमी से बड़ी है। लेकिन, भारत में प्रति व्यक्ति आय अब भी सिर्फ 3000 डॉलर है।” प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत यूरोपीय देशों से काफी पीछे है।

Equirus एक इनवेस्टमेंट बैंक है, जिसका हेडक्वार्टर मुंबई है। उसने इस हफ्ते एक रिपोर्ट जारी किया है, जिसमें भारत के लिए जरूरी 20 रिफॉर्म्स बताए गए है। इक्विरस का मानना है कि इन रिफॉर्म्स से अगले एक दशक में भारत की जीडीपी बढ़कर करीब पांच गुनी हो जाएगी। इन रिफॉर्म्स के बगैर 20 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में भारत को 21 साल लग जाएंगे।

गर्ग ने कहा कि अगर हर सेक्टर में भारत की ग्रोथ बीते 10 साल जितनी रहती है तो इकोनॉमी के 20 ट्रिलियन डॉलर के लेवल तक पहुंचने में 21 साल लग जाएंगे। लेकिन, जरूरी रिफॉर्म्स करने से यह लेवल 2036 तक हासिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस रोडमैप में डॉलर के मुकाबले रुपये में संभावित मजबूती को ध्यान में नहीं रखा गया है।

इक्विरस की रिपोर्ट में शामिल रिफॉर्म्स में पहले नंबर पर कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट है। गर्ग ने कहा कि भारत में बॉन्ड मार्केट इसके शेयर बाजार के मुकाबले काफी कम विकसित है। इसकी बड़ी वजह बॉन्ड्स से जुड़े टैक्स के नियम हैं। कुछ साल पहले सरकार ने डेट म्यूचुअल फंड्स के टैक्स के नियमों में बदलाव किया। इससे डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश का आकर्षण कम हो गया।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, बॉन्ड्स के टैक्स के नियम भी इक्विटी जैसे होने चाहिए। रिपोर्ट में सर्विसेज पर फोकस बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। इक्विरस का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग से ज्यादा फोकस सर्विसेज पर रखने की जरूरत है। फाइनेंशियल मार्केट्स, ग्लोबल कपैबिलिटी सेंटर्स, टूरिज्म और एजुकेशन ऐसे चार क्षेत्र हैं, जिनमें सबसे ज्यादा रिफॉर्म्स की जरूरत है।

गर्ग ने रेलवे के निजीकरण को भी जरूरी बताया है। उन्होंने टेलीकॉम सेक्टर का उदाहरण दिया। टेलीकॉम सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने के बाद टेलीकॉम सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ। टेलीकॉम सेवाएं पिछले कुछ सालों में आबादी के बड़े हिस्से तक पहुंच गई हैं। साथ ही टैरिफ यानी टेलीकॉम सेवाओं की कीमत में भी बड़ी कमी आई है।

योगी सरकार में राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण को मिली रफ्तार, लाखों मामलों का हुआ निपटारा

योगी सरकार में राजस्व वादों के त्वरित निस्तारण को मिली रफ्तार, लाखों मामलों का हुआ निपटारा

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Yogi Government disposal of revenue cases: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की त्वरित न्याय और जनसमस्याओं के प्रभावी निस्तारण की नीति के तहत राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रक्रिया को लगातार तेज किया जा रहा है। शासन स्तर से की जा रही नियमित मॉनिटरिंग और विशेष अभियानों का असर राजस्व वादों के निस्तारण के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है।

धारा-24 के 39,645 वादों का निस्तारण

सीमांकन/पैमाइश से संबंधित धारा-24 के तहत 31 दिसंबर 2025 तक 28,556 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक 91,472 नए वाद आए, जिनमें से 39,645 वादों का निस्तारण किया गया। वर्तमान में 80,383 वाद विचाराधीन हैं। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या महज 24 है। धारा-24 के तहत सबसे अधिक विचाराधीन वादों वाले जिलों में प्रयागराज, प्रतापगढ़, लखनऊ, अमेठी और मथुरा शामिल हैं।

धारा-34 में विशेष अभियान से 2.21 लाख वाद निस्तारित

नामांतरण/दाखिल-खारिज से संबंधित धारा-34 में भी बड़े स्तर पर निस्तारण किया गया। 31 दिसंबर 2025 तक 48,910 वाद विचाराधीन थे। 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 के बीच 14,70,133 वाद आयोजित हुए, जिनमें से 10,96,814 वादों का निस्तारण किया गया। वहीं, 45 दिन से अधिक अवधि से लंबित नामांतरण वादों के निस्तारण के लिए 15 से 25 जून 2026 तक चलाए गए विशेष अभियान में ही 2,21,667 वादों का निस्तारण किया गया।

भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में भी तेजी

धारा-80 के तहत भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों में 1 जनवरी से 31 जुलाई 2026 तक 28,797 वाद आए, जबकि 49,855 वादों का निस्तारण किया गया। पांच वर्ष से अधिक पुराने लंबित वादों की संख्या शून्य दर्ज की गई है।

पुराने मामलों के निस्तारण पर विशेष जोर

योगी सरकार द्वारा राजस्व न्यायालयों में पुराने और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि विशेष अभियान, नियमित समीक्षा और तकनीक आधारित मॉनिटरिंग के माध्यम से लंबित वादों के निस्तारण की गति बढ़ी है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण, आमजन को समयबद्ध न्याय और राजस्व संबंधी मामलों में पारदर्शी एवं सुगम व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

ChatGPT और Google Gemini ने पार किया 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा, AI की दुनिया में बदल गया मुकाबला

ChatGPT और Google Gemini ने पार किया 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा, AI की दुनिया में बदल गया मुकाबला

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। OpenAI के ChatGPT और Google के Gemini ने 1 अरब यूजर्स का बड़ा आंकड़ा पार कर लिया है। हालांकि, यूजर बेस के मामले में ChatGPT अभी भी आगे है, लेकिन Gemini तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और OpenAI की बढ़त को लगातार कम कर रहा है।

 

ChatGPT और Gemini के 1 अरब यूजर्स

OpenAI और Google दोनों अपने जनरेटिव AI टूल्स के साथ 1 अरब यूजर्स के आंकड़े तक पहुंच चुके हैं। Google के CEO सुंदर पिचाई ने बताया कि Gemini के मासिक यूजर्स की संख्या 1 अरब के पार पहुंच गई है। उन्होंने इसे Google का अब तक का सबसे तेजी से बढ़ने वाला प्रोडक्ट बताया। यह घोषणा OpenAI के उस बयान के कुछ सप्ताह बाद आई है, जिसमें कंपनी ने कहा था कि ChatGPT भी 1 अरब यूजर्स का आंकड़ा पार कर चुका है।

 

हालांकि, दोनों कंपनियां यूजर्स की संख्या को अलग-अलग तरीके और अलग-अलग समय अवधि के आधार पर मापती हैं। इसके बावजूद एक बात स्पष्ट है कि AI असिस्टेंट बेहद तेजी से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं।

 

ChatGPT के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा Gemini

 

Gemini के यूजर्स की संख्या फरवरी में करीब 75 करोड़ थी, जो जुलाई के अंत तक बढ़कर 95 करोड़ हो गई और इसके बाद 1 अरब के आंकड़े को पार कर गई। वहीं, OpenAI ने फरवरी में ChatGPT के 90 करोड़ साप्ताहिक एक्टिव यूजर्स होने की जानकारी दी थी। बाद में कंपनी ने बताया कि ChatGPT के मासिक यूजर्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा हो गई है। हालांकि, OpenAI ने हाल का मासिक यूजर आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है।

 

दोनों कंपनियों द्वारा अलग-अलग टाइमफ्रेम में यूजर डेटा जारी किए जाने के कारण सीधे तौर पर तुलना करना आसान नहीं है। फिर भी मौजूदा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ChatGPT की पहुंच फिलहाल ज्यादा है, जबकि Gemini बेहद तेजी से इस अंतर को कम कर रहा है।

 

Google के इकोसिस्टम से Gemini को बड़ा फायदा

Gemini की तेज ग्रोथ की एक बड़ी वजह Google का विशाल इकोसिस्टम है। Gemini को Android और Google की कई सेवाओं में गहराई से जोड़ा गया है। इसका मतलब है कि ऐसे लोग भी Gemini का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो खास तौर पर किसी AI चैटबॉट की तलाश में नहीं आए थे।

 

Google ने यह भी बताया कि Gemini के 10 करोड़ से ज्यादा एक्टिव iPhone यूजर्स हैं। इससे संकेत मिलता है कि Gemini के कुल यूजर बेस का बड़ा हिस्सा Android से आता है। Google के लिए यह एक महत्वपूर्ण बढ़त है, क्योंकि कंपनी Gemini को लगातार ज्यादा डिवाइस और सेवाओं में शामिल कर रही है।

 

AI हार्डवेयर पर भी OpenAI की नजर

 

OpenAI अब केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं रहना चाहता। कंपनी की AI-स्पेसिफिक हार्डवेयर में भी दिलचस्पी बढ़ती दिखाई दे रही है। इससे भविष्य में ChatGPT के इस्तेमाल का दायरा स्मार्टफोन और कंप्यूटर से आगे बढ़ने की संभावना बन रही है।

 

अब AI की रेस सिर्फ ChatGPT तक सीमित नहीं

 

AI की प्रतिस्पर्धा अब केवल ChatGPT और Gemini तक सीमित नहीं है। पिछले एक साल में इस क्षेत्र में मुकाबला काफी तेज हुआ है। Google का Gemini, Anthropic का Claude, OpenAI का Codex और चीन की कई AI कंपनियों ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है। ChatGPT आज भी AI की दुनिया में सबसे चर्चित नामों में से एक है, लेकिन उसकी बढ़त पहले जितनी सुरक्षित नहीं दिख रही। ChatGPT और Gemini दोनों के 1 अरब यूजर्स के आंकड़े तक पहुंचने के बाद AI की अगली जंग सिर्फ नए यूजर्स जोड़ने की नहीं होगी।

 

अब कंपनियों के सामने यूजर्स को लंबे समय तक अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखना, नए AI फीचर्स पेश करना और इतने बड़े यूजर बेस को मजबूत बिजनेस में बदलना बड़ी चुनौती होगी।