New Tax Regime : न्यू टैक्स रिजीम चुनने से पहले सैलरी की इन 8 बातों का रखें ध्यान, वरना बढ़ सकती है टैक्स देनदारी

New Tax Regime : नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) को अपनाने वाले नौकरीपेशा लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है। इसकी वजह कम टैक्स रेट और आसान नियम हैं।

लेकिन सिर्फ कम टैक्स स्लैब देखकर फैसला करना सही नहीं है। आपकी सैलरी का स्ट्रक्चर, टैक्स बचाने वाले निवेश, छूट (Exemptions) और वित्तीय जिम्मेदारियां तय करती हैं कि आपके लिए कौन-सी टैक्स व्यवस्था बेहतर रहेगी।

आइए जानते हैं कि नई टैक्स रिजीम को चुनने से पहले आपको किन 8 बातों का ध्यान रखना चाहिए।

1. HRA का फायदा मिलेगा या नहीं?

अगर आप किराए के घर में रहते हैं और House Rent Allowance (HRA) का फायदा लेते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। नई टैक्स व्यवस्था में HRA की छूट नहीं मिलती।

2. LTA का इस्तेमाल करते हैं?

अगर आप नियमित रूप से Leave Travel Allowance (LTA) का क्लेम करते हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था चुनने पर यह टैक्स छूट खत्म हो जाएगी।

3. 80C में निवेश

अगर आप EPF, PPF, ELSS, लाइफ इंश्योरेंस, टैक्स सेविंग FD, बच्चों की ट्यूशन फीस, होम लोन या फिर सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था में इन पर टैक्स छूट मिलती है। नई व्यवस्था में यह लाभ नहीं मिलता।

4. NPS का नियम अलग है

अगर आपके NPS में कंपनी भी योगदान देती है, तो उसके योगदान पर मिलने वाली टैक्स छूट नई टैक्स व्यवस्था में भी जारी रहती है। लेकिन आपके अपने योगदान पर अतिरिक्त छूट नहीं मिलती।

5. होम लोन है तो हिसाब जरूर लगाएं

अगर आपने खुद रहने के लिए घर खरीदा है और उस पर होम लोन चल रहा है, तो पुरानी व्यवस्था में मूलधन और ब्याज दोनों पर टैक्स छूट मिल सकती है। नई व्यवस्था में यह फायदा नहीं मिलता।

5. सैलरी अलाउंस भी देखें

बच्चों की शिक्षा, हॉस्टल, ट्रांसपोर्ट जैसे कई अलाउंस पुरानी व्यवस्था में टैक्स बचाने में मदद करते हैं। नई व्यवस्था में इनमें से ज्यादातर छूट खत्म हो जाती हैं।

6. Flexible Benefit Plan (FBP)

कई कंपनियां भोजन, फोन, इंटरनेट, किताबें, प्रोफेशनल सब्सक्रिप्शन और दूसरे खर्चों का रीइंबर्समेंट देती हैं। इनका टैक्स नियम हर मामले में अलग हो सकता है। इसलिए अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को ध्यान से समझें।

7. प्रोफेशनल टैक्स

कुछ राज्यों में कर्मचारियों से प्रोफेशनल टैक्स लिया जाता है। पुरानी टैक्स व्यवस्था में इसकी कटौती का लाभ मिलता है, जबकि नई व्यवस्था में आमतौर पर यह सुविधा नहीं होती।

8. रिटायरमेंट बेनिफिट

EPF, NPS और सुपरएन्युएशन फंड में कंपनी के योगदान पर तय सीमा तक टैक्स राहत मिलती है। अगर यह सीमा पार होती है, तो अतिरिक्त रकम पर टैक्स देना पड़ सकता है। यह नियम दोनों व्यवस्थाओं में लागू होता है।

किसके लिए कौन-सी व्यवस्था बेहतर?

अगर आप HRA लेते हैं, होम लोन चुका रहे हैं, 80C में अच्छा निवेश करते हैं, LTA और दूसरी टैक्स छूट का फायदा उठाते हैं, तो पुरानी टैक्स व्यवस्था अब भी ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।

वहीं, अगर आपकी सैलरी सीधी-सादी है, HRA नहीं मिलता, होम लोन नहीं है और टैक्स बचाने वाले निवेश कम हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था बेहतर विकल्प साबित हो सकती है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

IMD Heavy Rain Alert: इन 23 राज्यों में भारी बारिश, 16 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट, यूपी समेत पूरे देश में 13 जुलाई तक ऐसा रहेगा मौसम

India Weather Update: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश में मॉनसून के तेजी से आगे बढ़ने के साथ ही भारी बारिश और आंधी-तूफान को लेकर एक बड़ा और विस्तृत अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 7 जुलाई गुजरात के बचे हुए हिस्सों और राजस्थान व हरियाणा के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ चुका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर मॉनसून के उत्तरी अरब सागर, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बाकी हिस्सों को कवर करते हुए पूरे देश में दस्तक देने के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल बनी हुई हैं। इस बीच उत्तर छत्तीसगढ़ और उसके आसपास सक्रिय रहा डिप्रेशन अब कमजोर होकर पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर एक वेल-मार्कड लो प्रेशर एरिया के रूप में बना हुआ है। यह सिस्टम धीरे-धीरे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ेगा, जिससे देश के बड़े हिस्से में 13 जुलाई तक मूसलाधार बारिश, आकाशीय बिजली गिरने और आंधी-तूफान का दौर जारी रहेगा।

इन राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार कुछ राज्यों में आज आफत की बारिश हो सकती है। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 8 जुलाई को जबकि कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात राज्य में आज अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। इसके साथ ही दक्षिण भारत के केरल और कर्नाटक में भी आज अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

देश भर के राज्यों का विस्तृत और क्षेत्रीय पूर्वानुमान

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी, दिल्ली-NCR और पंजाब-हरियाणा का हाल

  • उत्तर प्रदेश: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 7 से 10 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी और कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 11 से 13 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधि तेजी से बढ़ेगी जहां 11 और 12 जुलाई को बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा 7 जुलाई को पश्चिमी यूपी में 40-50 किमी प्रति घंटे और पूर्वी यूपी में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली चमकने का अलर्ट है।
  • दिल्ली, हरियाणा और पंजाब: दिल्ली-NCR, हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब में 7 से 9 जुलाई के बीच व्यापक रूप से बारिश होगी। इन क्षेत्रों में 7-9 जुलाई और फिर 11-12 जुलाई को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। 10 से 13 जुलाई के बीच यहां छिटपुट बारिश दर्ज की जा सकती है।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख: जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगित-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद में 7 से 12 जुलाई के बीच व्यापक बारिश होगी जबकि 13 जुलाई को छिटपुट बारिश के आसार हैं। यहां 7 और 8 जुलाई को भारी बारिश और आकाशीय बिजली कड़कने के साथ ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।
  • हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड: दोनों पहाड़ी राज्यों में 7 से 13 जुलाई तक लगातार व्यापक बारिश का दौर जारी रहेगा। हिमाचल और उत्तराखंड में 7 जुलाई को बहुत भारी बारिश, जबकि 8 से 13 जुलाई के दौरान अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है।
  • राजस्थान: पूर्वी राजस्थान में 8-9 जुलाई को व्यापक और बहुत भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी राजस्थान में 7 से 13 जुलाई तक छिटपुट से लेकर भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। इस दौरान राजस्थान के दोनों हिस्सों में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी

मध्य प्रदेश: पश्चिमी मध्य प्रदेश में 7 से 9 जुलाई तक और पूर्वी मध्य प्रदेश में 7 से 11 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी। दोनों हिस्सों में 7 से 9 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। इसके बाद 10 से 12 जुलाई को भी पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश जारी रहेगी।

छत्तीसगढ़ और विदर्भ: छत्तीसगढ़ में 7 और 13 जुलाई को व्यापक बारिश होगी और 7 जुलाई को भारी बारिश का अलर्ट है। विदर्भ में 7 से 9 जुलाई और फिर 13 जुलाई को व्यापक बारिश होगी जहां 7 जुलाई को बहुत भारी और 8 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। इन सभी क्षेत्रों में 7 जुलाई को बिजली चमकने की आशंका है।

पूर्वी भारत: बिहार और झारखंड में आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बरसात

बिहार: बिहार में 7 और 10 जुलाई को व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना है जबकि 10 जुलाई को राज्य के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 7, 8 और 11 जुलाई को भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 8 से 13 जुलाई के दौरान बिहार में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली गिरने की भी चेतावनी है।

झारखंड: झारखंड में 7-8 जुलाई और 10-13 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होने का अनुमान है। 7 जुलाई को यहां भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही 7 से 11 जुलाई तक राज्य में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और वज्रपात का येलो अलर्ट रहेगा।

पश्चिम बंगाल और ओडिशा: उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 7 से 13 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का दौर लगातार जारी रहेगा जिसमें 8 जुलाई को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है। गांगेय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी 13 जुलाई तक गरज-चमक और 30-50 किमी प्रति घंटे की तेज हवाओं के साथ भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

अंडमान और निकोबार: यहां 11 से 13 जुलाई के बीच भारी बारिश होगी, जबकि 7 से 9 जुलाई के दौरान तेज सतही हवाएं (30-40 किमी प्रति घंटे) चलेंगी।

पूर्वोत्तर भारत: असम और अरुणाचल में आफत बनेगी बारिश

अरुणाचल प्रदेश: यहां 7 से 11 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी जिसमें 7 से 10 जुलाई के दौरान बहुत भारी बारिश और 11 जुलाई को भारी बारिश होने का अनुमान है।

असम और मेघालय: इन राज्यों में 7 से 12 जुलाई तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। मौसम विभाग ने 7 से 9 जुलाई के बीच बहुत भारी बारिश और 10 से 13 जुलाई के बीच भारी बारिश की आशंका जताई है।

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: इन चारों राज्यों में 7 से 13 जुलाई तक व्यापक बारिश होने और 7 से 10 जुलाई के बीच अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है।

पश्चिमी भारत: कोंकण और गुजरात में 70 किमी की रफ्तार से तूफानी हवाएं

कोंकण और गोवा: यहां 7 से 13 जुलाई तक लगातार व्यापक से बहुत व्यापक बारिश होगी। 7 जुलाई को अत्यंत भारी और 8 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। साथ ही 7 जुलाई को 50-60 किमी प्रति घंटे (झोंके 70 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से भयानक आंधी-तूफान आ सकता है।

गुजरात क्षेत्र: गुजरात में 7 से 9 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश होगी जिसमें 7 जुलाई को अत्यंत भारी और 8 जुलाई को बहुत भारी बारिश की संभावना है। गुजरात क्षेत्र में 7 से 9 जुलाई के बीच 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से थंडरस्कॉल चलने की चेतावनी है।

मध्य महाराष्ट्र और मारथवाड़ा: मध्य महाराष्ट्र में 7-8 जुलाई को भारी से अत्यंत भारी बारिश और आकाशीय बिजली चमकने का अलर्ट है।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत: केरल और कर्नाटक में मूसलाधार बारिश का कहर

कर्नाटक: तटीय कर्नाटक में 7 से 13 जुलाई तक भारी बारिश होगी जिसमें 7 जुलाई को अत्यंत भारी और 8 जुलाई को बहुत भारी बारिश का अलर्ट है। तटीय और आंतरिक कर्नाटक में 7-8 जुलाई को 50-60 किमी प्रति घंटे (झोंके 70 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार से तूफानी आंधी चलने और 7 से 13 जुलाई तक बेहद मजबूत सतही हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

केरल और लक्षद्वीप: केरल में 7 से 11 जुलाई तक व्यापक बारिश होगी जिसमें आज (7 जुलाई) अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका है। केरल, लक्षद्वीप और तटीय आंध्र प्रदेश में 7 से 9 जुलाई के दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली चमकने के साथ मजबूत सतही हवाएं चलने का अनुमान है।

तेलंगाना और तमिल नाडु: तेलंगाना में 7-8 जुलाई को 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से थंडरस्कॉल और 7 से 10 जुलाई तक तेज सतही हवाएं चलने का अलर्ट है। तमिल नाडु, पुडुचेरी और कराइकल में 8-9 जुलाई को तेज आंधी-तूफान आने की आशंका व्यक्त की गई है।

मौसम विभाग की सलाह: भारी बारिश, वज्रपात (आकाशीय बिजली) और 70 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाओं को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने, कमजोर संरचनाओं के पास न जाने और यात्रा के दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

जेफरीज ने बताई NSE की एक खास खूबी, 4% टूट गए BSE और MCX के शेयर

BSE-MCX Shares vs NSE IPO: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने आईपीओ की तैयारियों में जुटी एनएसई को अधिक डाईवर्सिफाइड कह दिया तो बीएसई और एमसीएक्स के शेयर 4% तक टूट गए। तेज गिरावट के साथ ये निफ्टी कैपिटल मार्केट्स इंडेक्स के टॉप लूजर बन गए जो खुद 2% कमजोर हुआ है। बता दें कि एनएसई ने बाजार नियामक सेबी के पास ₹30 हजार करोड़ के रिकॉर्डतोड़ आईपीओ का ड्राफ्ट दाखिल किया है। इस ड्राफ्ट ने लिस्टेड मार्केट में हलचल बढ़ा दी है। यह इश्यू पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का होगा। अभी देश में सबसे बड़ा आईपीओ लाने का रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया का है जिसने ₹27858 करोड़ का आईपीओ सालव 2024 में पेश किया था।

NSE को लेकर क्या कहना है Jefferies का

जेफरीज का कहना है कि एनएसई का प्रोडक्ट मिक्स बीएसई और एमसीएक्स की तुलना में अधिक डाईवर्सिफाईड है जिसमें से इंडेक्स ऑप्शंस और कमोडिटी एफएंडओ को छोड़ अधिकतर सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी 90% से अधिक है। जेफरीज ने जिक्र किया है कि एनएसई ने वैश्विक पियर्स की तुलना में अपना एक टेक प्रोडक्ट सुईट बनाया है और यह कमोडिटीज बिजनेस में विस्तार कर रही है। एनएसई के क्लियरिंग कॉरपोरेशन की कैश मार्केट में 88% और एफएंडओ मार्केट में 91% हिस्सेदारी है। एनएसई के पास टेक्नोलॉजी और डेटा ऑफरिंग्स का एक सुईट है जिसकी वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू में 13% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक ओवरऑल इंडियन एक्सचेंज का 70% रेवेवन्यू एनएसई का है। इसके पोर्टफोलियो में इक्विटी कैश, इंडेक्स ऑप्शंस, सिंगल स्टॉक ऑप्शंस, इक्विटी फ्यूचर्स, कमोडिटी एफएंडओ, बॉन्ड्स और करेंसी डेरिवेटिव्स हैं।

कंपनी के सेहत की बात करें तो जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि कोलोकेशन और डार्क फाइबर केस से जुड़े प्रोविजंस में ₹1390 करोड़ और टीएपी मामले में ₹670 करोड़ के पेमेंट्स ने मिलकर एनएसई के वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के ऑपरेशनल ईबीआईटीडीए पर दबाव डाला। जेफरीज के मुताबिक सेबी सेटलमेंट फीस एक बार का होता है तो इसे निकालने पर देखें तो एनएसई का नॉर्मलाइज्ड ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए मार्जिन 76-77% पर काफी हद तक स्थिर है।

Options कितनी कमाऊ है एक्सचेंजेज के लिए?

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि वित्त वर्ष 2020-26 के बीच इक्विटी ऑप्शंस सालाना 56% की रफ्तार से बढ़ा जबकि कैश मार्केट टर्नओवर इस दौरन 19% की ही रफ्तार से बढ़ा। ऑप्शंस प्रीमियम का एवरेज डेली टर्नओवर (ADTO) वित्त वर्ष 2026 में डेली कैश मार्केट मार्केट टर्नओवर का 70% रहा। इस प्रकार इंडियन एक्सचेंजेज पर ऑपरेटिंग रेवेन्यू की 70% हिस्सेदारी है। जेफरीज के मुताबिक यह एक्सचेंजों के रेवेन्यू को मार्केट परफॉरमेंस साइकिल से जोड़ता है क्योंकि ऑप्शन ट्रेडिंग प्राइस की बजाय वोलेटिलिटी से अधिक जुड़ी है। अमेरिका से तुलना करें तो भारत में ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के ट्रेड्स अधिक हैं लेकिन प्रीमियम पांचवा हिस्सा।

Rentomojo IPO के प्रस्ताव को SEBI से मिली मंजूरी, लेकिन NLCT में याचिका ने बनाई डगर कठिन

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SIP Returns: एक जैसा SIP इन्वेस्टमेंट, फिर भी ₹2.85 करोड़ का अंतर! जानिए म्यूचुअल फंड में ‘रिटर्न की टाइमिंग’ का पूरा खेल

Same SIP Different Returns: म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू करने वाले नए निवेशकों के मन में अक्सर एक सवाल आता है कि ‘क्या मेरी SIP वाकई काम कर रही है?’ निवेश के शुरुआती दो-तीन सालों में जब बाजार में उतार-चढ़ाव होता है, तो पोर्टफोलियो में कोई जादुई ग्रोथ नहीं दिखती। ऐसे में लोग मान लेते हैं कि कंपाउंडिंग की बातें सिर्फ कागजी हैं।

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप गलत हैं। SIP के शुरुआती साल दौलत बनाने के नहीं, बल्कि एक बड़ा बेस तैयार करने के होते हैं। आइए एडेलवाइस एसेट मैनेजमेंट के हेड निरंजन अवस्थी के इनपुट्स के साथ एक दिलचस्प उदाहरण से समझते हैं कि कैसे एक ही रकम की SIP करने के बावजूद दो लोगों के रिटर्न में ₹2.85 करोड़ का भारी अंतर आ सकता है।

एक जैसा निवेश, फिर भी रिटर्न में जमीन-आसमान का अंतर

मान लेते हैं कि दो अलग-अलग निवेशक A और B हैं। दोनों ही हर महीने ₹50,000 की SIP पूरे 20 साल के लिए करते हैं। दोनों का कुल निवेश बराबर है, लेकिन उन्हें मिलने वाले मार्केट रिटर्न की टाइमिंग अलग-अलग है:

निवेशक A (शुरुआत में बंपर रिटर्न): इसे शुरुआती 5 सालों में 24% का सालाना रिटर्न मिलता है, और आखिरी के 15 सालों में 12% का सालाना रिटर्न मिलता है।

निवेशक B (आखिरी सालों में बंपर रिटर्न): इसके साथ स्थिति बिल्कुल उल्टी है। इसे पहले 15 सालों तक 12% का सालाना रिटर्न मिलता है, लेकिन आखिरी के 5 सालों में 24% का तगड़ा सालाना रिटर्न मिलता है।

हैरान करने वाला नतीजा

20 साल पूरे होने पर निवेशक B का कुल फंड ₹8.77 करोड़ हो जाता है, जबकि निवेशक A का फंड सिर्फ ₹5.92 करोड़ ही रह जाता है। दोनों ने हर महीने एक बराबर पैसा जमा किया, लेकिन रिटर्न की टाइमिंग के फेर के कारण दोनों के बीच ₹2.85 करोड़ का बड़ा फासला आ गया।

अगर यही SIP छोटी रकम यानी ₹10,000 महीना की भी होती, तब भी आखिरी सालों में बड़ा रिटर्न पाने वाला निवेशक करीब ₹57 लाख ज्यादा कमा लेता।

आखिर ऐसा क्यों होता है?

आम तौर पर लोग सोचते हैं कि शुरुआत में ज्यादा रिटर्न मिलने पर पैसा बढ़ने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, इसलिए फंड बड़ा होना चाहिए। एकमुश्त निवेश में यह बात सही हो सकती है, लेकिन SIP का नियम अलग है।

जब आप SIP शुरू करते हैं, तो पहले कुछ सालों में आपका कुल जमा फंड बहुत छोटा होता है। अगर उस समय बाजार 24% की रफ्तार से भागता भी है, तो वह छोटी रकम पर ही काम करेगा।

15 साल तक लगातार निवेश करने के बाद आपका फंड बहुत बड़ा हो जाता है। अब इस बड़े फंड पर जब आखिरी सालों में 24% का रिटर्न मिलता है, तो रुपयों के मामले में होने वाला मुनाफा बहुत विशाल होता है।

इस पर निरंजन अवस्थी ने कहा कि, ‘शुरुआती साल अमीर बनने के लिए नहीं, बल्कि अलग-अलग कीमतों पर म्यूचुअल फंड यूनिट्स इकट्ठा करने और एक मजबूत बेस बनाने के लिए होते हैं। असली वेल्थ क्रिएशन बाद में होती है। निवेश में धैर्य रखना कोई मजबूरी नहीं, बल्कि इसकी सबसे बड़ी खूबी है।’

लॉन्ग टर्म SIP में निवेशक कहां करते हैं गलती?

सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग अपनी लॉन्ग टर्म SIP का मूल्यांकन बहुत जल्दी यानी 2-3 साल में ही करने लगते हैं। शुरुआत में आपकी अधिकांश किस्तें हाल ही में बाजार में गई होती हैं, इसलिए कंपाउंडिंग का जादू तुरंत स्क्रीन पर रिफ्लेक्ट नहीं होता। जैसे-जैसे समय बीतता है, वैसे-वैसे आपकी पुरानी यूनिट्स पर मिलने वाला ब्याज आपके फंड को रॉकेट की तरह आगे बढ़ाता है।

क्या हमें शुरुआत में खराब रिटर्न की दुआ करनी चाहिए?

बिल्कुल नहीं, इस उदाहरण का मकसद यह समझाना नहीं है कि शुरुआत में बाजार खराब चले तो अच्छा है। बाजार कब ऊपर जाएगा और कब नीचे, यह किसी के हाथ में नहीं है। मुख्य सीख यह है कि शुरुआती 2-3 साल का धीमा सफर यह तय नहीं करता कि आपकी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी फेल हो गई है।

गुरुग्राम में लोगों ने लाइन लगाकर एक हफ्ते में ही खरीद लिए ₹18 करोड़ के 832 घर! ओबेरॉय ग्रुप ने कैसे किया ये, जानें इनसाइड स्टोरी

कुल मिलाकर अगर आपकी SIP को अभी सिर्फ 2 या 3 साल ही हुए हैं और रिटर्न मामूली दिख रहा है, तो भरोसा मत खोइए। यह फेज सिर्फ अनुशासन के साथ बाजार में टिके रहने और ज्यादा से ज्यादा यूनिट्स बटोरने का है। कंपाउंडिंग पहले दिन से काम करती है, लेकिन उसका असली और बड़ा असर तभी दिखाई देता है जब आपके पास एक बड़ा इन्वेस्टमेंट बेस तैयार हो जाता है।

Mumbai Rains Tracker: मुंबई में बरस रही आफत, लोनावाला में 2 दिन में ही महीने भर की बारिश! पवई में 7 फीट का मगरमच्छ भी आया बाहर

Mumbai Rains Update: महाराष्ट्र में मॉनसून की भारी बारिश का कहर लगातार जारी है। सोमवार को हुई मूसलाधार बरसात ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया और राज्य भर में परिवहन व्यवस्था को ठप कर दिया। कई क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं और भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। इससे लोगों और यात्रियों के सामने बड़े संकट खड़े हो गए हैं। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार के लिए मुंबई में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और भारी बारिश की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक मुंबई में अगले दो से तीन दिनों के भीतर ही पूरे महीने की औसत बारिश होने की संभावना है।

लोनावाला में 2 दिन में 1290 mm बारिश, बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

मौसम विभाग (IMD) के नाउकास्ट के मुताबिक मशहूर हिल स्टेशन लोनावाला में पिछले 48 घंटों में चौंकाने वाली रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। लोनावाला में महज दो दिनों के भीतर ही रिकॉर्ड 1290 मिमी बारिश दर्ज की गई। यहां 5 जुलाई को 670 मिमी और अगले दिन 6 जुलाई को 620 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग का कहना है कि इस हिल स्टेशन ने सिर्फ दो दिनों में लगभग दो महीने के बराबर की बारिश दर्ज की है।

पवई झील के पास रिहायशी इलाके में घुसा 7 फीट का मगरमच्छ

भारी बारिश के बीच मुंबई के पवई झील के पास स्थित मोरारजी नगर में एक दरगाह के पास करीब सात फीट लंबा मगरमच्छ देखा गया। इससे स्थानीय निवासियों में भारी हड़कंप और दहशत मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग और एक बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मगरमच्छ को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया। पकड़े गए मगरमच्छ की फिलहाल मेडिकल जांच की जा रही है और स्वास्थ्य जांच पूरी होने के बाद उसे वापस उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

हादसों में गई कई जान, मानखुर्द में गिरी 4 मंजिला इमारत

मुंबई में खराब और भीषण मौसम के कारण कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। मानखुर्द इलाके में एक चार मंजिला इमारत ढह गई। इसके मलबे में दबने से छह लोगों की मौत हो गई। पूरे शहर में पेड़ गिरने से संबंधित 200 से अधिक घटनाएं सामने आईं हैं। इनमें दो लोगों की जान चली गई। अगर पिछले पांच दिनों की बात करें तो मुंबई में काफी भारी बारिश हुई है। पुराने मुंबई के कोलाबा क्षेत्र में पहले ही अपनी मासिक औसत 744.2 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। सांताक्रूज वेधशाला ने 805.6 मिमी बारिश दर्ज की है। ये जुलाई महीने की कुल औसत बारिश का लगभग 94 प्रतिशत है।

मुंबई एक्सप्रेसवे पर बंद हुआ था ट्रैफिक, अब लिंक रोड बहाल

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) के मुताबिक लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन होने की वजह से सोमवार को पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे और पुराने पुणे-मुंबई हाईवे दोनों पर यातायात को सस्पेंड कर दिया गया था। बाद में सड़कों से मलबे को साफ करने के बाद अधिकारियों ने ‘पुणे-मुंबई कनेक्टिंग लिंक रोड’ पर वाहनों की आवाजाही को दोबारा बहाल कर दिया है। इसके बावजूद मूसलाधार बारिश के चलते मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) में भारी जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है।

ठाणे, कल्याण समेत उत्तरी उपनगरों में हाई अलर्ट

मौसम विभाग के ताजा नाउकास्ट के अनुसार, मुंबई महानगरीय क्षेत्र (MMR) के उत्तरी हिस्सों के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया है। कांदिवली, बोरीवली, वसई, विरार, ठाणे और कल्याण में तेज हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मुंबई के इन उत्तरी उपनगरों में भारी बौछारें तेज होने के कारण निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की आशंका जताई गई है। इससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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Video: हार्ट अटैक के बाद एम्बुलेंस वालों ने मांगे 15 हजार रुपये, फिर Blinkit ने किया ऐसा काम

मेडिकल इमरजेंसी में सबसे बड़ी जरूरत होती है समय पर इलाज और अस्पताल तक जल्दी पहुंचना। लेकिन कई बार एम्बुलेंस की उपलब्धता और उसका भारी किराया मरीज के परिवार के लिए नई परेशानी खड़ी कर देता है। हाल ही में गुरुग्राम की एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपना ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने हजारों लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने बताया कि एक आपात स्थिति के दौरान उन्हें ऐसी सेवा मिली, जिसने न सिर्फ समय बचाया बल्कि आर्थिक बोझ भी कम कर दिया। उनका वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और लोग इस पहल की जमकर तारीफ करने लगे।

कई यूजर्स ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय पर मिली मदद ने मुश्किल घड़ी में बड़ी राहत दी। इस घटना ने एक बार फिर इमरजेंसी सेवाओं की अहमियत और उनकी पहुंच को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

एम्बुलेंस के लिए मांगे गए 10 से 15 हजार रुपये

कंटेंट क्रिएटर कोमल खंडेलवाल के मुताबिक, बुजुर्ग महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी था। लेकिन जब उन्होंने अलग-अलग एम्बुलेंस सेवाओं से संपर्क किया तो 10 हजार से 15 हजार रुपये तक का किराया बताया गया।

ऐसे मुश्किल समय में परिवार के सामने इलाज के साथ-साथ एम्बुलेंस का खर्च भी बड़ी चिंता बन गया।

तभी सामने आया Blinkit का फ्री एम्बुलेंस विकल्प

इसी दौरान किसी ने सुझाव दिया कि Blinkit के जरिए एम्बुलेंस बुक की जा सकती है। परिवार ने तुरंत इस सेवा का इस्तेमाल किया और कुछ ही समय में एम्बुलेंस मौके पर पहुंच गई।

कोमल ने बताया कि इस सेवा के लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लिया गया, जिससे समय पर मरीज को अस्पताल पहुंचाने में मदद मिली।

यह किसी फाइव स्टार एम्बुलेंस से कम नहीं थी’

वीडियो में कोमल ने एम्बुलेंस की सुविधाओं की भी तारीफ की। उनके मुताबिक इसमें मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, जरूरी मेडिकल उपकरण, दवाइयां और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ मौजूद था।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में इसे “फाइव स्टार एम्बुलेंस” तक कह दिया।

Blinkit से की खास अपील

कोमल ने वीडियो में Blinkit का धन्यवाद करते हुए कहा कि कंपनी को यह सेवा हमेशा मुफ्त रखनी चाहिए।

उनका कहना था कि हर व्यक्ति के पास अचानक मेडिकल इमरजेंसी में हजारों रुपये खर्च करने की क्षमता नहीं होती। अगर किसी के पास पैसे न हों, तो सिर्फ इसी वजह से उसकी जान खतरे में नहीं पड़नी चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने की जमकर तारीफ

वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए।

एक यूजर ने लिखा कि Blinkit की यह पहल शानदार है और जरूरतमंद लोगों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकती है।

एक अन्य यूजर ने बताया कि उन्होंने सड़क हादसे में घायल एक व्यक्ति के लिए Blinkit से एम्बुलेंस बुक की थी, जो बिना किसी शुल्क के बहुत जल्दी पहुंच गई।

वहीं एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि सुबह 5 बजे दवा ऑर्डर करने के बाद Blinkit की ओर से डॉक्टर का कॉल आया, जिसने उनकी तबीयत के बारे में जानकारी ली। इस पहल को भी लोगों ने काफी सराहा।

कुछ लोगों ने सरकार से भी उठाए सवाल

जहां बड़ी संख्या में लोगों ने Blinkit की तारीफ की, वहीं कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि ऐसी बुनियादी सुविधाएं निजी कंपनियों के बजाय सरकार की ओर से आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए।

उनका कहना था कि इमरजेंसी एम्बुलेंस जैसी सेवाएं हर नागरिक तक सुलभ और किफायती होना जरूरी है।

Blinkit ने भी दिया जवाब

वीडियो पर मिली तारीफ के बाद Blinkit ने भी कमेंट सेक्शन में प्रतिक्रिया दी और दिल वाले इमोजी के साथ यूजर्स का आभार जताया।

इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि सही समय पर मिली मदद किसी की जिंदगी बचाने में कितनी अहम भूमिका निभा सकती है।

13 हजार डॉलर में ‘बॉडी काउंट रीसेट’? वायरल दावे की सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान

Stock Market Crash: डे-हाई से Sensex में 350 अंकों की गिरावट, 4 वजहों से Nifty आया 24450 के नीचे

Stock Market Crash: निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन आज मार्केट में शुरुआती कारोबार में अच्छी रौनक दिखी। घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज उछल पड़े। सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स से अधिक उछल पड़ा था तो निफ्टी भी 24500 के पार चला गया लेकिन फिर इंट्रा-डे हाई से सेंसेक्स 350 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24450 के नीचे तक आ गया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर मार्केट में आज शुरुआती कारोबार से ही दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 में आधे फीसदी के करीब गिरावट है तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे फीसदी से अधिक गिरावट है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो 01:39 PM पर सेंसेक्स 31.33 यानी 0.04% की गिरावट के साथ 78,253.74 और निफ्टी 8.70 यानी 0.04% की फिसलन के साथ 24,421.65 पर है।

Stock Market Crash: ये है वजह

मुनाफावसूली

निवेशकों ने लगातार पांचवे दिन मार्केट में रौनक का फायदा उठाया और ऊपरी स्तर पर मुनाफावसूली की जिससे मार्केट नीचे आया। चार दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी 2.4% मजबूत हुआ और यह करीब 10 हफ्ते के हाई लेवल पर बंद हुआ था।

Nifty की वीकली एक्सपायरी

आज निफ्टी के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की वीकली एक्सपायरी है तो इसका भी असर आज मार्केट पर दिखा।

मेटल और रियल्टी शेयरों में गिरावट

मार्केट पर आज मेटल और रियल्टी शेयरों ने काफी दबाव बनाया। मेटल शेयरों के निफ्टी इंडेक्स निफ्टी में 1% से अधिक तो निफ्टी रियल्टी में डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट आई। इसके अलावा हल्की ही सही लेकिन सरकारी और प्राइवेट बैंकों के शेयरों ने भी मार्केट पर दबाव बनाया है जिनके निफ्टी इंडेक्स लाल हैं। हालांकि आईटी सेक्टर मार्केट को ऊपर लाने की पूरी कोशिश कर रहा जिससे मार्केट की गिरावट सीमित हो जा रही है। निफ्टी आईटी में ढाई फीसदी से अधिक तेजी है।

अमेरिका-ईरान तनाव

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ। इसे लेकर ईरानी स्टेट मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक यह टैंकर अमेरिकी नौसेना के सपोर्ट से ओमान के समुद्री रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहा था, जिसने ईरानी अधिकारियों की बार-बार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज किया था जिसके बाद इसे निशाना बनाया गया।

टेक्निकल आउटलुक

जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स का कहना है कि एक कारोबारी दिन पहले 24400 के ऊपर निफ्टी के क्लोज होने से 24800-25250 की तरफ इसके बढ़ने का माहौल और सुधरा। हालांकि उन्होंने इस बात को लेकर भी सतर्क किया है कि 24600 के लेवल पर मार्केट को कुछ रिजेक्शन भी झेलना पड़ सकता है। आनंद के मुताबिक 24360 के सपोर्ट पर मार्केट 24600 की तरफ बढ़ सकता है।

Iran-US Tension: ‘बात नहीं मानी तो भुगतना होगा अंजाम’, ईरान ने बताया ओमान तट के पास तेल टैंकर पर क्यों दागी मिसाइल!

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नौकरी छूटने पर सरकार देगी 3 महीने तक 50% सैलरी, अब जून 2027 तक बढ़ी यह स्कीम

ESIC Unemployment Benefit Scheme: प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने अपनी बेहद लोकप्रिय बेरोजगारी भत्ता योजना यानी ‘अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना’ (ABVKY) को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है।

ESIC की 198वीं बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद, अब यह स्कीम 1 जुलाई 2026 से 30 जून 2027 तक लागू रहेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर ईएसआई (ESI) के दायरे में आने वाले किसी कर्मचारी की नौकरी अनजाने में या जबरन छूट जाती है, तो सरकार उसे नए रोजगार की तलाश के दौरान वित्तीय सहायता देना जारी रखेगी। आइए जानते हैं कि यह स्कीम क्या है, इसमें कितना पैसा मिलता है और कौन-कौन इसके लिए क्लेम कर सकता है।

क्या है अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY)?

इस योजना की शुरुआत साल 2018 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की गई थी। तब से लेकर अब तक इसे कई बार बढ़ाया जा चुका है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन नौकरीपेशा लोगों को अस्थायी वित्तीय राहत देना है, जो अचानक बेरोजगार हो जाते हैं। इसके जरिए मिलने वाली आर्थिक मदद से कर्मचारी नए काम की तलाश के दौरान अपने बुनियादी खर्चों को आसानी से पूरा कर सकते हैं।

इस स्कीम के तहत कितना और क्या फायदा मिलता है?

अगर आप इस योजना के तहत पात्र पाए जाते हैं, तो आपको ये लाभ मिलेंगे:

50% कैश मुआवजा: बेरोजगारी की अवधि के दौरान आपको अपनी औसत दैनिक मजदूरी का 50% हिस्सा नकद मुआवजे के रूप में दिया जाता है।

90 दिनों तक का भत्ता: यह वित्तीय लाभ बेरोजगारी के दौरान अधिकतम 90 दिनों के लिए देय होता है।

सीधे बैंक खाते में पैसा: क्लेम मंजूर होने के बाद भत्ते की पूरी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।

कौन कर सकता है 90 दिनों के भत्ते का क्लेम?

इस बेरोजगारी भत्ते का लाभ उठाने के लिए कर्मचारी को ESIC की इन शर्तों को पूरा करना होगा:

  1. कर्मचारी अनिवार्य रूप से कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योजना के तहत कवर होना चाहिए।
  2. नौकरी छूटने से पहले की निर्धारित योगदान अवधि के दौरान कर्मचारी का ESI अंशदान जमा होना चाहिए।
  3. सबसे जरूरी शर्त यह है कि नौकरी अनैच्छिक रूप से छूटी हो। उदाहरण के लिए कंपनी या कंपनी का यूनिट बंद हो जाना, छंटनी होना, या किसी गैर-रोजगार जनित चोट के कारण स्थायी दिव्यांगता आना।

किन्हें नहीं मिलेगा इस योजना का लाभ?

इन परिस्थितियों में कर्मचारी बेरोजगारी भत्ते के लिए क्लेम नहीं कर सकते हैं:

  • अगर कर्मचारी ने खुद अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया हो।
  • कर्मचारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली हो।
  • कार्यस्थल पर किसी गलत व्यवहार या दुराचार के कारण नौकरी से बर्खास्त किया गया हो।
  • किसी अवैध हड़ताल में शामिल होने के कारण नौकरी चली गई हो।

बेरोजगारी भत्ते के लिए कैसे करें आवेदन?

पात्र कर्मचारी इस योजना का लाभ लेने के लिए ESIC द्वारा निर्धारित फॉर्मेट में आवेदन फॉर्म भरकर अपने जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा कर सकते हैं। ESIC के अधिकारियों द्वारा दावे की जांच और वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद, बेरोजगारी भत्ता सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक खाते में भेज दिया जाता है।

ESIC ने अपनी 198वीं बैठक में यह साफ किया कि इस योजना को जून 2027 तक केवल इसलिए बढ़ाया गया है ताकि प्राइवेट सेक्टर के श्रमिकों को रोजगार बदलने या अचानक संकट आने पर एक मजबूत इनकम सपोर्ट मिल सके।

तूफान में गिरा आंगन का पेड़, 85 साल के बुजुर्ग को बना गया लाखों का मालिक

तेज बारिश और आंधी के बाद पेड़ों का गिरना आमतौर पर नुकसान की खबर लेकर आता है, लेकिन बेंगलुरु के 85 वर्षीय एनजी केसरी की कहानी बिल्कुल अलग है। उनके घर के आंगन में करीब 40 साल से खड़ा एक चंदन का पेड़ तूफान में गिर गया, जो पहली नजर में एक बड़ी क्षति लग रही थी। लेकिन यही पेड़ बाद में उनके लिए किस्मत बदलने वाला साबित हुआ। वर्षों तक प्यार और जिम्मेदारी से इस पेड़ की देखभाल करने वाले केसरी को इसके बदले करीब 28 लाख रुपये मिले।

इतना ही नहीं, पेड़ के संरक्षण और नियमों का पालन करने के लिए उन्हें राज्य स्तर पर सम्मान भी मिला। यह कहानी बताती है कि प्रकृति की देखभाल और धैर्य का फल कई बार बेहद खास तरीके से मिलता है।

अपने आप उगा था चंदन का पौधा, प्यार से बनाया पेड़

करीब चार दशक पहले केसरी के घर के आंगन में चंदन का एक छोटा-सा पौधा अपने आप उग आया था। उन्होंने उसे हटाने के बजाय उसकी देखभाल करने का फैसला किया।

धीरे-धीरे वह छोटा पौधा एक विशाल चंदन के पेड़ में बदल गया। पेड़ की खुशबू आसपास के लोगों का ध्यान खींचने लगी और उसकी कीमत बढ़ने के साथ खतरा भी बढ़ गया।

चोरों से बचाने के लिए लगाया लोहे का सुरक्षा घेरा

चंदन की लकड़ी की कीमत और मांग को देखते हुए पेड़ पर तस्करों और लकड़ी चोरों की नजर पड़ने लगी। केसरी ने पेड़ की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर मजबूत लोहे का घेरा लगवा दिया।

उन्होंने कई वर्षों तक अपनी मेहनत और सतर्कता से इस अनमोल पेड़ को सुरक्षित रखा।

तूफान ने गिराया पेड़, लेकिन केसरी ने नहीं तोड़ा नियम

जून में भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान पास का एक बड़ा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आकर चंदन का पेड़ भी जमीन पर आ गया।

इतना कीमती पेड़ मिलने के बाद भी केसरी ने खुद उसे बेचने या काटने की कोशिश नहीं की। उन्होंने तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी और सभी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा किया।

एक टन वजन वाली चंदन की लकड़ी बनी बड़ी कमाई

वन विभाग की जांच के बाद पता चला कि गिरे हुए चंदन के पेड़ का वजन करीब एक टन था। इसके बाद लकड़ी को सरकारी चंदन डिपो, मैसूर भेजा गया। बाद में इसे कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) ने खरीदा, जो चंदन आधारित उत्पादों के लिए जानी जाती है।

इस बिक्री से केसरी को करीब 28 लाख रुपये की राशि मिली।

पैसों के साथ मिला बड़ा सम्मान

केसरी के लिए यह सिर्फ आर्थिक लाभ नहीं था। चंदन के पेड़ को इतने लंबे समय तक सुरक्षित रखने और संरक्षण के प्रति उनकी जिम्मेदारी को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने उन्हें ‘चंदन शिरोमणि’ पुरस्कार से सम्मानित किया।

धैर्य और संरक्षण की मिसाल बनी कहानी

एनजी केसरी की कहानी बताती है कि प्रकृति की देखभाल और धैर्य का फल कभी-कभी अप्रत्याशित रूप से मिलता है। जिस पेड़ के गिरने को शुरुआत में नुकसान माना जा रहा था, वही पेड़ वर्षों की मेहनत के बाद उनके लिए सम्मान और बड़ी उपलब्धि लेकर आया।

13 हजार डॉलर में ‘बॉडी काउंट रीसेट’? वायरल दावे की सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान

ब्रह्मोस डील, सबांग पोर्ट और IIM कैंपस… PM Modi की इंडोनेशिया यात्रा की 20 बड़ी उपलब्धियां ये रहीं

PM Modi Indonesia visit 20 outcomes list: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया की राजकीय यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद ऐतिहासिक साबित हुई है। जकार्ता में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों देशों ने आपसी द्विपक्षीय सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें क्रिटिकल मिनरल्स, टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, दवाएं और समुद्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

वार्ता के बाद पीएम मोदी ने अपने बयान में कहा कि साल 2018 में हमने जो व्यापक रणनीतिक साझेदारी बनाई थी वह आज एक नई उड़ान भर रही है। हम विकास, सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने पूरे भरोसे के साथ कहा कि आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक स्वर्ण अध्याय शुरू हो रहा है।

रक्षा, डिजिटल पेमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े मील के पत्थर

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल द्वारा साझा किए गए आधिकारिक विवरण और पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक इस यात्रा के दौरान कई बड़े और रणनीतिक ऐलान किए गए हैं।

सबांग पोर्ट का संयुक्त विकास: दोनों देश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबांग पोर्ट का संयुक्त रूप से विकास करने पर सहमत हुए हैं। ये स्ट्रेट ऑफ मक्का के ठीक सामने स्थित है और भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से महज 100 मील की दूरी पर है।

UPI और डिजिटल पेमेंट इंटीग्रेशन: भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI अब इंडोनेशिया के भुगतान सिस्टम के साथ इंटिग्रेट होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्रा दोनों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

ब्लू इकोनॉमी और समुद्री व्यापार: दोनों पक्षों ने ब्लू इकोनॉमी, समुद्री व्यापार और बंदरगाह विकास के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का निर्णय लिया है।

वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा: दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा की, जहां पीएम मोदी ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए टू-स्टेट सॉल्यूशन और दीर्घकालिक शांति का समर्थन किया।

पीएम मोदी की यात्रा के 20 टॉप आउटकम

यहां दोनों देशों के बीच हुए उन 20 महत्वपूर्ण समझौतों और निर्णयों की पूरी सूची दी गई है, जो इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियां बनकर सामने आई हैं:

1- स्टील सप्लाई चेन और मिनरल्स सहयोग

समझौता: स्टील सप्लाई चेन के मिनरल्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग के लिए दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है।

मायने: यह खनिज और खनन क्षेत्र में आपसी निवेश को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एडवांस्ड एक्सट्रैक्शन और प्रोसेसिंग तकनीकों तक पहुंच में सुधार होगा, संयुक्त अध्ययनों व परियोजनाओं को प्रोत्साहन मिलेगा और क्रिटिकल मिनरल सप्लाई चेन मजबूत होगी।

2- समुद्री सुरक्षा सहयोग का विस्तार

समझौता: मैरीटाइम सेफ्टी एंड सिक्योरिटी कोऑपरेशन पर MoU और इम्प्लीमेंटेशन अरेंजमेंट का विस्तार किया गया है।

मायने: इससे दोनों देशों के तटरक्षक बलों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस, सर्च एंड रेस्क्यू और क्षमता निर्माण में तालमेल बढ़ेगा जिससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को बढ़ावा मिलेगा।

3- रेयर अर्थ मैग्नेट्स का विकास

समझौता: भारत के NFTDC, मिडवेस्ट लिमिटेड और इंडोनेशिया के PT PERMINAS के बीच रेयर अर्थ मैग्नेट्स के विकास को लेकर MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं।

मायने: यह कदम रेयर अर्थ्स (दुर्लभ तत्वों) और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आपसी सहयोग को आगे बढ़ाएगा। इससे इस क्षेत्र की वैश्विक सप्लाय चेन में विविधता आएगी और अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी।

4- ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम पर सहयोग

समझौता: इंडोनेशियाई सेना को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति और इस पर सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच आधिकारिक सहमति बनी है।

मायने: यह रक्षा समझौता भारतीय रक्षा उद्योग की क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को बल मिलेगा और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण के साथ-साथ नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

5- एयर-टू-एयर मिसाइल सहयोग

समझौता: हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ है। इसके तहत इंडोनेशिया भारत की अस्त्र मिसाइलों का आयात करेगा।

मायने: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस भारतीय मिसाइल की अचूक सफलता को देखते हुए इंडोनेशियाई सेना ने इसे खरीदने का फैसला लिया है। यह समझौता भारत के रक्षा निर्यात और मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के संकल्प को गति देगा, जिससे भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

6- स्टेनलेस-स्टील स्लैब विनिर्माण के लिए संयुक्त उद्यम

समझौता: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया और इंडोनेशिया की पीटी क्रकाटाऊ स्टील के बीच इंडोनेशिया में स्टेनलेस-स्टील स्लैब विनिर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए एक रणनीतिक संयुक्त उद्यम का गठन किया गया है।

मायने: यह साझा उत्पादन और आधुनिक तकनीक तक पहुंच को आगे बढ़ाएगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और यह ‘विकसित भारत’ के औद्योगिक लक्ष्यों में योगदान देगा।

7- अंतरिक्ष सहयोग समझौते का विस्तार

समझौता: शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष के अन्वेषण और उपयोग में सहयोग पर चल रहे फ्रेमवर्क समझौते का विस्तार किया गया है।

मायने: यह कदम दोनों देशों के बीच संयुक्त अनुसंधान, प्रौद्योगिकी साझाकरण और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे भारत और इंडोनेशिया की तीन दशक पुरानी अंतरिक्ष साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।

8- प्रंबानन मंदिर परिसर का संरक्षण और जीर्णोद्धार

समझौता: ऐतिहासिक प्रंबानन मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए भारत की तरफ से सहायता प्रदान की जाएगी।

मायने: विकास भी, विरासत भी के दृष्टिकोण के तहत, यह दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को आगे बढ़ाता है और हेरिटेज कंजर्वेशन में भारत की वैश्विक विशेषज्ञता को प्रदर्शित करता है।

9- कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग

समझौता: कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मायने: यह टिकाऊ कृषि, फसलों और कृषि मशीनरी के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाएगा, जिससे किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने वाले संयुक्त अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

10- चिकित्सा उत्पाद विनियमन में सहयोग

समझौता: भारत के CDSCO और इंडोनेशिया के BPOM के बीच चिकित्सा उत्पाद विनियमन के क्षेत्र में सहयोग के लिए MoU हुआ है।

मायने: यह वैश्विक नियामक मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर ज्ञान के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा, जिससे भारतीय चिकित्सा उत्पादों पर भरोसा बढ़ेगा और इंडोनेशियाई बाजार में भारतीय दवाओं व उत्पादों की पहुंच आसान होगी।

11- आपदा प्रबंधन में आपसी सहयोग

समझौता: भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और इंडोनेशिया की नेशनल एजेंसी फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के बीच MoU हुआ है।

मायने: इससे रक्षा एक्सचेंजों, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग में आपसी समन्वय बेहतर होगा। यह समझौता आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान, शुरुआती चेतावनी और जोखिम मूल्यांकन के लिए तकनीक-आधारित ऐप्लिकेशंस के उपयोग को बढ़ावा देगा।

12- दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और सेवाओं में साझेदारी

समझौता: दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन हुआ है।

मायने: यह कदम वायरलेस और क्वांटम सिस्टम सहित उन्नत टेलीकॉम तकनीकों तक पहुंच में सुधार करेगा और दोनों देशों के बीच संयुक्त नवाचार और प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को भी मजबूती प्रदान करेगा।

13- अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग

समझौता: रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कोऑपरेशन पर दोनों देशों के बीच MoU हुआ है।

मायने: यह प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को सक्षम बनाकर भारत के इनोवेशन इकोसिस्टम को सुदृढ़ करेगा, जिससे ‘स्टार्टअप इंडिया मिशन’ सहित दोनों देशों के स्टार्टअप और नवाचार इकोसिस्टम को गति मिलेगी।

14- स्वास्थ्य कार्यबल सहयोग

समझौता: हेल्थ कार्यबल सहयोग पर कार्यान्वयन व्यवस्था लागू की गई है।

मायने: यह स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए फेलोशिप कार्यक्रमों की सुविधा देगा और योग्य भारतीय स्वास्थ्य पेशेवरों को इंडोनेशिया में काम करने के अवसर व विशिष्ट चिकित्सा क्षेत्रों में व्यावहारिक नैदानिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

15- समुद्री सुरक्षा के लिए इन्फोसेंटर में तैनाती

समझौता: भारत के IFC-IOR में एक इंडोनेशियाई संपर्क अधिकारी की तैनाती की जाएगी।

मायने: यह रणनीतिक कदम वास्तविक समय में समुद्री सूचनाओं के साझाकरण को बढ़ाएगा, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूती मिलेगी।

16- इंडोनेशिया को उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के बीजों की आपूर्ति

समझौता: भारत द्वारा इंडोनेशिया को 100 टन उच्च गुणवत्ता वाले ‘DWR 162’ गेहूं के बीजों की आपूर्ति की जाएगी।

मायने: यह कदम इंडोनेशिया और पूरे ग्लोबल साउथ की खाद्य सुरक्षा का मजबूती से समर्थन करता है और कृषि क्षेत्र में दोनों देशों के व्यापक जुड़ाव को दर्शाता है।

17- टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष

समझौता: ‘टैगोर-देवान्तारा सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति वर्ष’ के आयोजन की आधिकारिक घोषणा की गई है।

मायने: यह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर और इंडोनेशिया के की हजार देवान्तारा के साझा शैक्षिक दृष्टिकोण का उत्सव मनाता है। रवींद्रनाथ टैगोर की 1927 की इंडोनेशिया यात्रा के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में साल भर चलने वाले संयुक्त सांस्कृतिक, शैक्षिक और जन-दर-जन संपर्क कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी।

18- इंडोनेशिया में IIM बैंगलोर का नया कैंपस

समझौता: इंडोनेशिया के सिंघासारी SEZ में भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर के एक ब्रांच कैंपस की स्थापना की जाएगी।

मायने: यह वैश्विक स्तर पर भारत की शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है और दुनिया भर में एक ‘नॉलेज हब’ के रूप में भारत की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा।

19- डिजिटल कॉमर्स और पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सहयोग

समझौता: भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और इंडोनेशिया ओपन नेटवर्क (ION) के बीच सहयोग पर सहमति बनी है।

मायने: यह डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा, जिससे भारत के ONDC आर्किटेक्चर पर आधारित यह मॉडल आम लोगों के लिए डिजिटल सेवाओं को अधिक सुलभ, कुशल और समावेशी बनाएगा।

20- निर्वाचन आयोगों के बीच ऐतिहासिक समझौता

समझौता: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और इंडोनेशिया के सामान्य चुनाव आयोग (KPU) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

मायने: यह दोनों बड़े लोकतांत्रिक देशों के चुनाव निकायों के बीच ज्ञान, अनुभवों और सर्वोत्तम चुनावी प्रथाओं को साझा करने की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे मानव संसाधन विकास और कुशल प्रशासनिक प्रथाओं के लिए तकनीक के उपयोग को आगे बढ़ाया जाएगा।

इंडोनेशिया में रक्षा, शिक्षा और आर्थिक सहयोग के इन तमाम ऐतिहासिक मील के पत्थरों को स्थापित करने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यापार और सुरक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए अपने तीन देशों के इस दौरे के अगले चरणों के तहत ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के लिए रवाना होंगे।