कच्चे तेल में आएगी गिरावट, सोना और चांदी खरीदने के लिए करें इंतजार : Citi

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Citi के ग्लोबल हेड ऑफ कमोडिटीज मैक्स लेटन का मानना है कि अगले 6 से 12 महीनों तक कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में तनाव कम होना और वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बढ़ना है। वहीं, बैंक का कहना है कि निवेशकों को फिलहाल सोने और चांदी में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि दोनों की कीमतों में अभी और कमजोरी आ सकती है।

कच्चे तेल पर क्यों है दबाव?

मैक्स लेटन का कहना है कि पश्चिम एशिया में हालात पहले से बेहतर हो रहे हैं। अगर ईरान से जुड़ा कोई समझौता होता है, तो बाजार में तेल की सप्लाई और बढ़ सकती है। दूसरी तरफ चीन से मांग कमजोर बनी हुई है। दूसरे देशों का उत्पादन भी बढ़ रहा है। ऐसे में बाजार में जरूरत से ज्यादा कच्चा तेल उपलब्ध हो सकता है।

Citi का अनुमान है कि अगर मौजूदा बातचीत सफल रही, तो साल के आखिर तक Brent Crude की कीमत 60 से 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है। लेटन ने निवेशकों को सलाह दी है कि अगर तेल की कीमतों में तेजी आती है, तो उसे मुनाफावसूली का मौका मानना चाहिए।

गोल्ड और सिल्वर पर क्या राय?

मैक्स लेटन का कहना है कि पिछले 18 से 24 महीनों में सोने की तेज रैली की सबसे बड़ी वजह निवेशकों की मजबूत खरीदारी थी। अब यह रफ्तार धीमी पड़ रही है। ऐसे में अगले कुछ हफ्तों तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

उनके मुताबिक, ऊंची रियल इंटरेस्ट रेट और मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से फिलहाल सोने में कमजोरी रह सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि अगले दो महीनों में अगर कीमतें गिरती हैं, तो वही खरीदारी का बेहतर मौका हो सकता है। Citi को उम्मीद है कि चौथी तिमाही में ब्याज दरों और महंगाई के नरम पड़ने से सोने को फिर सहारा मिल सकता है।

मैक्स लेटन का कहना है कि चांदी भी फिलहाल सोने की दिशा में ही चल सकती है। उनके मुताबिक, हालिया तेजी की बड़ी वजह निवेशकों की खरीदारी थी, न कि औद्योगिक मांग। हालांकि, सोलर जैसे सेक्टरों से लंबी अवधि की मांग मजबूत बनी हुई है। लेकिन मौजूदा ऊंची कीमतों की वजह से दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे शॉर्ट टर्म में चांदी की तेजी सीमित रह सकती है।

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NSE के आईपीओ के बारे में बड़ा अपडेट, अगले महीने मिल सकती है सेबी की मंजूरी

सेबी अगले महीने एनएसई के आईपीओ को मंजूरी दे सकता है। मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों ने यह जानकारी दी है। इसके बाद एनएसई के लिए विदेश में रोड शो करने का रास्ता साफ हो जाएगा। एनएसई का आईपीओ इस साल सितंबर में आ सकता है। यह देश के सबसे बड़े आईपीओ में से एक होगा। इनवेस्टर्स काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं।

अगले महीने मिल सकता है ग्रीन सिग्नल

मर्चेंट बैंकिंग के सूत्रों के मुताबिक, “मौजूदा रफ्तार से इस आईपीओ को अगले महीने ग्रीन सिग्नल मिल जाने की संभावना है। इश्यू से जुड़े सभी सवालों के जवाब दे दिए गए हैं।” सूत्र ने यह नहीं बताया कि किस तरह के सवालों के जवाब दिए गए हैं। लेकिन, उन्होंने कहा कि ज्यादातर समय इसका संबंध डिसक्लोजर के लैंग्वेज से होता है।

17 जुलाई से विदेश में रोड शो का प्लान

एक दूसरे सूत्र ने कहा, “चूंकि को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे बड़े मसलों को पहले से ही आईपीओ से डीलिंक्ड कर दिया गया है और ये सेटलमेंट प्रोसेस में हैं, जिससे अब बड़ा मसला नहीं रह गया है। इसलिए अब सेबी और एक्सचेंज को बाकी चीजों पर फोकस करना है।” सूत्र ने बताया कि घरेलू निवेशकों के लिए रोड शो का प्लान बन चुका है। मर्चेंट बैंकर्स ने विदेशी निवेशकों के लिए 17 जुलाई से रोड शो का प्लान बनाया है। ये रोड शो अमेरिका, यूनाइटेड किंग्डम, हांगकांग और सिंगापुर में होंगे।

सितंबर में आ सकता है आईपीओ

अगर सबकुछ प्लान के हिसाब से चलता है तो एनएसई का आईपीओ सितंबर में आ सकता है। हालांकि, सबकुछ सेबी के ऑब्जर्वेशन लेटर पर निर्भर करता है। NSE ने आईपीओ के एप्रूवल के समय और रोड शो के बारे में कुछ बताने से इनकार कर दिया। मनीकंट्रोल के सवाल के जवाब में एनएसई के प्रवक्ता ने कहा, “कंपनी (NSE) ने सेबी के पास डीआरएचपी फाइल कर दिया है। इस वक्त हम इससे ज्यादा कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं।”

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एक्सचेंज को भी डिसक्लोजर नियमों का पालन करना है जरूरी

सूत्र ने बताया, “एक्सचेंज और सभी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस सेबी के नियम के तहत उन सभी नियमों का पालन करते हैं, जिनका पालन दूसरी कंपनियों को करना पड़ता है।” मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस (MIIs) सेबी के सभी डिसक्लोजर नियमों का पालन करते हैं। इसके बाद भी बीएसई और एमसीएक्स के आईपीओ के रिव्यू में लगा समय एक समान नहीं था। बीएसई ने सेबी के पाश 12 सितंबर, 2016 को डीआरएचपी फाइल किया था। उसे सेबी का ऑब्जर्वेशन 30 दिसंबर, 2016 को मिला था। इसके मुकाबले एमसीएक्स का आईपीओ करीब 7 महीने में एप्रूव्ड हो गया था।

Viral Video: ‘तुम्हारा न्यूमरोलॉजी नंबर क्या है?’ जवाब सुनते ही ओनर ने किराए पर घर देने से किया इनकार

Viral Video: मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में बजट में हर खोजना काफी मुश्किल होता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर मुंबई में किराए पर घर लेने से जुड़ा एक अनोखा मामला चर्चा में है। एक आर्टिस्ट और इन्फ्लुएंसर ने बताया कि, उनकी एक दोस्त को मुंबई में सिर्फ उसके न्यूमरोलॉजी नंबर की वजह से किराए पर घर नहीं मिला। उनकी दोस्त ने एक मकान देखने के लिए मकान मालकिन से मुलाकात की थी, लेकिन बाद में उसे फ्लैट देने से इनकार कर दिया गया। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस वीडियो पर तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं।

फ्लैट देने से किया इनकार

एक आर्टिस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वाग्मिता सिंह का इंस्टाग्राम पर ये वीडियो शेयर किया है। वीडियो में वाग्मिता सिंह ने बताया कि मकान मालकिन ने उनकी दोस्त से पूछा, “तुम्हारा नंबर क्या है?” पहले उनकी दोस्त को लगा कि वह मोबाइल नंबर पूछ रही हैं। लेकिन बाद में मकान मालकिन ने साफ किया कि वह जन्मतिथि के आधार पर निकलने वाले न्यूमरोलॉजी नंबर के बारे में पूछ रही थीं। वाग्मिता सिंह के अनुसार, मकान मालकिन ने फ्लैट और उनकी दोस्त के न्यूमरोलॉजी नंबर की तुलना की।

न्यूमरोलॉजी नंबर अलग थी

उन्होंने कहा कि, फ्लैट का नंबर 4 से जुड़ा है, जबकि उनकी दोस्त का नंबर 7 है। मकान मालकिन का कहना था कि दोनों नंबर एक-दूसरे के अनुकूल नहीं हैं, इसलिए उन्होंने फ्लैट किराए पर देने से इनकार कर दिया। इस घटना पर रिएक्शन देते हुए वाग्मिता सिंह ने कहा कि “मेरे पास इसे बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि इस स्थिति को क्या कहूं।” इसके बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में गुनगुनाया, “इस मेंटल इलनेस को मैं क्या नाम दूँ,” और अपनी हैरानी जाहिर की। इस वीडियो पर लोगों ने कई मजेदार रिएक्शन दिए है।

 

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट

इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी जमकर रिएक्शन दिया है। एक यूजर ने मजाक में लिखा, “लेकिन 4-7 तो बहुत अच्छा कॉम्बो है। आंटी ने एक अच्छा मौका गंवा दिया।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा, “अच्छा लगा कि कुछ लड़कियां सच में न्यूमरोलॉजी समझती हैं। 4 और 7 सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक हैं।” वहीं एक और यूजर ने टिप्पणी की, “इंडिया इवॉल्व हो रहा है, लेकिन पीछे की ओर।”

कल का मौसम 8 जुलाई: इन 19 राज्यों में भारी बारिश और 18 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट, दिल्ली से यूपी-बिहार तक IMD ने जारी की ये चेतावनी

India Weather Forecast for 8th July: देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरी तरह से रफ्तार पकड़ चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून गुजरात के बचे हुए हिस्सों, राजस्थान और हरियाणा के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ चुका है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर मानसून पंजाब, राजस्थान और हरियाणा के शेष हिस्सों को कवर करते हुए पूरे देश में दस्तक दे देगा। मौसम प्रणालियों की बात करें तो पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास के इलाके पर एक वेल-मार्कड लो प्रेशर एरिया सक्रिय है। इसके साथ ही दक्षिण गुजरात से लेकर केंद्रीय केरल तक ऑफ-शोर ट्रफ और राजस्थान से लेकर बांग्लादेश तक सीजनल ट्रफ बनी हुई है। इन मजबूत सिस्टम्स के प्रभाव के चलते बुधवार 8 जुलाई को देश के 19 राज्यों में भारी से अत्यंत भारी बारिश और करीब 18 राज्यों में आंधी-तूफान व आसमानी बिजली का हाई अलर्ट जारी किया गया है।

उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट

मौसम विभाग के मुताबिक 8 जुलाई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर मूसलाधार से अत्यंत मूसलाधार बारिश होने की प्रबल आशंका है। इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

इन 9 राज्यों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक 8 जुलाई को देश के 9 राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। ये अलर्ट नीचे दिए गए राज्यों के लिए जारी किया गया है-

अरुणाचल प्रदेश

असम और मेघालय

तटीय कर्नाटक

दक्षिण आंतरिक कर्नाटक

पूर्वी राजस्थान

गुजरात क्षेत्र

कोंकण और गोवा

मध्य महाराष्ट्र

मध्य प्रदेश

यूपी, दिल्ली-NCR और बिहार समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

8 जुलाई को देश के कई अन्य हिस्सों में भी भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस सूची में नीचे दिए गए राज्य शामिल हैं-

उत्तर प्रदेश (पश्चिमी हिस्सा)

बिहार

हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली

पंजाब

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड

जम्मू-कश्मीर-लद्दाख

पश्चिमी राजस्थान

सौराष्ट्र और कच्छ

विदर्भ (महाराष्ट्र)

केरल और माहे

उत्तरी आंतरिक कर्नाटक

नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा

आंधी-तूफान, बिजली और तेज हवाओं का अलर्ट (18 प्रभावित राज्य)

मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों में तेज हवाओं और गरज-चमक को लेकर भी चेतावनी जारी की है:

1- 50 से 60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्कॉल

गुजरात क्षेत्र, संपूर्ण कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल और तेलंगाना में 50-60 किमी प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से हवाएं चलने और आंधी-तूफान आने की आशंका है।

2- 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी और बिजली

आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड, केरल और माहे, लक्षद्वीप और पूरे राजस्थान में अलग-अलग स्थानों पर 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट है।

3- 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं

बिहार, ओडिशा, संपूर्ण पश्चिम बंगाल और सिक्किम, तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की स्थिति बनी रहेगी।

4- गरज-चमक और बिजली का अलर्ट

अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा और उत्तराखंड में आकाशीय बिजली चमकने और गरज-चमक के साथ सामान्य आंधी आ सकती है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप और तेलंगाना में सतह पर बेहद मजबूत हवाएं चलने का भी अनुमान है।

समुद्री तटीय इलाकों के लिए चेतावनी: मछुआरों को न जाने की सलाह

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में तूफानी मौसम और भारी लहरें उठने की चेतावनी जारी की है:

उत्तरी कोंकण तट: यहां सबसे खतरनाक स्थिति रहने वाली है। यहां 60-70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तूफानी हवाएं 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच सकती हैं।

दक्षिणी कोंकण और गोवा तट: यहां 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक छू सकती हैं।

गुजरात, कर्नाटक और केरल तट: दक्षिण गुजरात, कर्नाटक, केरल के तटों और लक्षद्वीप क्षेत्र में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने के आसार हैं। इससे मौसम खराब रहेगा।

बंगाल की खाड़ी: ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों के साथ-साथ केंद्रीय, उत्तरी और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) चलने की संभावना है। तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में न उतरने की सख्त हिदायत दी गई है।

बारिश से गिरा आंगन का पेड़ और 85 साल के बुजुर्ग एनजी केसरी को बना गया 28 लाख रुपये का मालिक! कैसे लगाएं चंदन का ये बेशकीमती पेड़?

अक्सर आपने सुना होगा कि एक ही रातों-रात किसी की किस्मत बदल गई, बेंगलुरु में ये कहावत सच होती नजर आई है। बेंगलुरु के रहने 85 वर्षीय एन. जी. केसरी की किस्मत रातों-रात बारिश ने बदल दी। बेंगलुरु में जब भी मॉनसून की तेज बारिश होती है, तो ज्यादातर लोग जलभराव, ट्रैफिक जाम और नुकसान की चिंता करने लगते हैं। एन. जी. केसरी के लिए एक तेज तूफान उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी खुशकिस्मती बन गया।

एक बीज ने बदली किस्मत

यह कहानी करीब 40 साल पहले की है। एक दिन तेज हवा और बारिश के बाद एक अनजान बीज उनके घर के आंगन में आकर गिर गया। कुछ समय बाद वहां एक छोटा पौधा उग आया। केसरी ने उसे अपने बगीचे के बाकी पौधों की तरह ही संभाला और उसकी देखभाल की। बाद में उन्हें पता चला कि यह कोई साधारण पौधा नहीं, बल्कि कर्नाटक का बहुमूल्य चंदन का पेड़ है। समय के साथ पेड़ बड़ा और मजबूत होता गया और उसकी मनमोहक खुशबू पूरे इलाके में फैलने लगी।

मल्लेश्वरम के 17वें क्रॉस स्थित उनके घर के आंगन में लगा चंदन का पेड़ करीब 40 साल तक खामोशी से बढ़ता रहा। जब यह पूरी तरह तैयार हुआ, तो इसी एक पेड़ ने उन्हें करीब 28 लाख रुपये की कमाई कराई। यह दिखाता है कि धैर्य और सही देखभाल का फल कितना बड़ा हो सकता है। हालांकि, चंदन के पेड़ की खुशबू और उसकी कीमत ने सिर्फ लोगों का ही नहीं, बल्कि लकड़ी चोरों का भी ध्यान खींचा। बीते कई वर्षों में चोरों ने इस कीमती पेड़ को काटने की कई बार कोशिश की। पेड़ की सुरक्षा के लिए केसरी ने उसके चारों ओर मजबूत लोहे का जाल लगवा दिया और हमेशा उस पर नजर बनाए रखी।

बारिश से गिरा पेड़

इस साल जून के दूसरे सप्ताह में हुई तेज बारिश और आंधी ने चंदन के पेड़ को नुकसान पहुंचा दिया। तेज हवा के कारण पास का एक बड़ा पेड़ उखड़कर सीधे चंदन के पेड़ और उसके चारों ओर लगे लोहे के सुरक्षा जाल पर गिर गया। इससे चंदन का पेड़ भी गिर गया। शुरुआत में यह एक बड़ा नुकसान लगा, लेकिन बाद में यही घटना उनके लिए बड़ी खुशकिस्मती साबित हुई। केसरी ने कोई गलत रास्ता अपनाने के बजाय तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पेड़ का निरीक्षण किया और उसे मैसूरु स्थित सरकारी चंदन डिपो ले जाने की अनुमति दे दी। जांच के बाद पता चला कि चंदन के पेड़ का वजन करीब एक मीट्रिक टन था।

बुजुर्ग के मिले 28 लाख

आखिरकार इस चंदन के पेड़ को कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (केएसडीएल) ने खरीद लिया। इससे एन. जी. केसरी को करीब 28 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ। कई वर्षों तक चंदन के पेड़ की सुरक्षा और देखभाल करने के लिए सरकारी कंपनी ने उन्हें ‘चंदन शिरोमणि’ सम्मान से भी नवाजा। यह अनोखी घटना एक बार फिर बताती है कि कर्नाटक में चंदन की खेती कितनी फायदेमंद हो सकती है। चंदन के पेड़ की गुणवत्ता और उसमें मौजूद तेल की मात्रा के आधार पर उसकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। एक छोटे से पौधे से शुरू हुई यह कहानी आज धैर्य, मेहनत और अच्छी किस्मत की मिसाल बन गई है।

कैसे लगाएं चंदन का बेशकीमती पेड़?

चंदन का पेड़ दुनिया के सबसे कीमती पेड़ों में गिना जाता है। इसकी लकड़ी और तेल का उपयोग इत्र, दवाइयों, पूजा-पाठ और सौंदर्य प्रसाधनों में होता है। अगर आप चंदन का पौधा लगाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाला पौधा किसी प्रमाणित नर्सरी से खरीदें। चंदन का पौधा अच्छी जल निकासी वाली दोमट या हल्की लाल मिट्टी में बेहतर बढ़ता है। इसे ऐसी जगह लगाएं जहां भरपूर धूप आती हो। पौधा लगाने के लिए लगभग 2 से 3 फीट गहरा गड्ढा तैयार करें और उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाकर पौधा लगाएं।

चंदन एक अर्ध-परजीवी (Semi-Parasitic) पौधा है। इसका मतलब है कि इसकी अच्छी वृद्धि के लिए पास में कोई सहायक पौधा, जैसे अरहर, करंज, नीम, बबूल या अन्य उपयुक्त पेड़ होना जरूरी है। चंदन अपनी जड़ों के माध्यम से इन पौधों से कुछ पोषक तत्व प्राप्त करता है। शुरुआती दिनों में नियमित सिंचाई करें, लेकिन पानी का जमाव बिल्कुल न होने दें। समय-समय पर खरपतवार हटाएं और जैविक खाद का इस्तेमाल करें। उचित देखभाल के साथ चंदन का पेड़ धीरे-धीरे मजबूत होता है और कई वर्षों बाद अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी देता है। अगर लंबी अवधि का निवेश करना चाहते हैं, तो चंदन की खेती एक अच्छा विकल्प हो सकती है। हालांकि, इसे लगाने से पहले अपने राज्य के नियमों और चंदन के पेड़ों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी जरूर लें।

₹20 लाख वाली थार लेने की सोच रहे हैं? अपनाएं यह सुपरहिट ’20-4-10′ का फॉर्मूला, जेब पर नहीं पड़ेगा बोझ

Car Buying Tips: आज के समय में ₹20 लाख के बजट में एक से बढ़कर एक बेहतरीन एसयूवी (SUV) और सेडान कारें बाजार में उपलब्ध हैं। थार को लेकर भी आजकल खूब ट्रेंड चल रहा है। SUV खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन बिना प्लानिंग के लिया गया बड़ा कार लोन आपकी मंथली सेविंग्स और जेब का गणित बिगाड़ सकता है।

अगर आप भी ₹20 लाख वाली थार खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का एक सुपरहिट और ग्लोबल नियम आपके बहुत काम आ सकता है। इसे ’20-4-10′ का फॉर्मूला कहा जाता है। आइए समझते हैं कि इस फॉर्मूले के तहत आपको कितनी डाउन पेमेंट करनी चाहिए, लोन कितने साल का होना चाहिए और आपकी EMI कितनी होनी चाहिए।

क्या है कार खरीदने का ’20-4-10′ फॉर्मूला?

यह फाइनेंशियल प्लानिंग का एक ऐसा नियम है जो यह सुनिश्चित करता है कि कार खरीदने के बाद भी आपकी जेब पर अतिरिक्त दबाव न पड़े और आपके अन्य जरूरी वित्तीय लक्ष्य जैसे- घर, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट प्रभावित न हों।

20% डाउन पेमेंट: कार की ऑन-रोड कीमत का कम से कम 20% हिस्सा आपको डाउन पेमेंट के रूप में नकद देना चाहिए।

4 साल का लोन: कार लोन की अवधि अधिकतम 4 साल (48 महीने) होनी चाहिए। लोन जितना लंबा होगा, आप उतना ही ज्यादा ब्याज बैंक को चुकाएंगे।

10% ईएमआई लिमिट: आपकी कार की मासिक EMI और कार का रख-रखाव का खर्च आपकी मंथली इन-हैंड सैलरी के 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।

₹20 लाख की कार का पूरा कैलकुलेशन

आइए मान लेते हैं कि कार की ऑन-रोड कीमत ₹20,00000 है। अब इस पर ’20-4-10′ का नियम लागू करके देखते हैं:

1. डाउन पेमेंट

नियम के मुताबिक, आपको ₹20 लाख का 20% यानी ₹4,00,000 डाउन पेमेंट के रूप में देना चाहिए।

फायदा: इससे आपका लोन अमाउंट छोटा हो जाता है और बैंक से लोन आसानी से और कम ब्याज दर पर मिल जाता है।

2. लोन की रकम

डाउन पेमेंट घटाने के बाद आपका कुल लोन अमाउंट ₹16,00,000 बचेगा।

3. लोन की अवधि और EMI का गणित

मान लेते हैं कि आपको बैंक से 9% की सालाना ब्याज दर पर कार लोन मिल रहा है। अब लोन की अवधि के हिसाब से EMI को समझते हैं:

लोन की अवधि मासिक EMI (अनुमानित) 4 साल में चुकाया गया कुल ब्याज
4 साल (48 महीने)₹39,811₹3,11,000
5 साल (60 महीने)₹33,212₹3,93,000
7 साल (84 महीने)₹25,720₹5,60,000

अगर आप 7 साल के लिए लोन लेते हैं, तो आपकी EMI तो घटकर ₹25,720 हो जाएगी, लेकिन आप बैंक को ₹5.60 लाख सिर्फ ब्याज के रूप में दे देंगे। वहीं 4 साल के लोन में आप करीब ₹2.5 लाख का शुद्ध ब्याज बचा लेंगे।

आपकी सैलरी कितनी होनी चाहिए?

नियम के तीसरे हिस्से ‘10%’ के अनुसार, अगर आपकी कार की EMI करीब ₹40,000 4 साल के लोन के लिए आ रही है, तो आदर्श रूप से आपकी मासिक इन-हैंड सैलरी ₹4 लाख प्रति माह होनी चाहिए।

अगर सैलरी कम है तो क्या करें?

अगर आपकी सैलरी ₹1.5 लाख से ₹2 लाख के बीच है, तो आपके पास दो रास्ते हैं:

डाउन पेमेंट बढ़ाएं: आप 20% की जगह 50% डाउन पेमेंट यानी ₹10 लाख खुद कैश दें, जिससे लोन सिर्फ ₹10 लाख का रह जाएगा और EMI घटकर आपके बजट में आ जाएगी।

लोन की अवधि 5 साल करें: हालांकि 4 साल सबसे बेस्ट है, लेकिन बजट संतुलित करने के लिए आप इसे अधिकतम 5 साल कर सकते हैं, जिससे EMI थोड़ी कम (₹33,212) हो जाएगी।

इन ‘छिपे हुए खर्चों’ को न भूलें

कार की फाइनेंशियल प्लानिंग करते समय सिर्फ EMI पर ध्यान न दें। हर महीने कार पर होने वाले अन्य खर्चों को भी बजट में जोड़ें:

फ्यूल और मेंटेनेंस: पेट्रोल/डीजल/इलेक्ट्रिक का खर्च और हर 6 महीने या सालभर में होने वाली सर्विसिंग।

इंश्योरेंस रिन्यूअल: हर साल कार के इंश्योरेंस का प्रीमियम चुकाना होगा, जो ₹20 लाख की कार के लिए सालाना ₹30,000 से ₹50,000 के बीच हो सकता है।

कुल मिलाकर ₹20 लाख की कार लेना एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है, बशर्ते आप कम से कम ₹4 से ₹5 लाख की डाउन पेमेंट की तैयारी पहले से कर लें और लोन की अवधि को जितना हो सके छोटा रखें।

Railway Job Alert: रेलवे में 4000 से ज्यादा सरकारी नौकरियों का रास्ता साफ, जानिए किस कैटेगरी में सबसे ज्यादा वैकेंसी, क्या है टाइमलाइन?

Railway Job Alert: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भारतीय रेलवे की ओर से एक बहुत बड़ी और खुशखबरी वाली खबर आई है। रेल मंत्रालय ने देश के विभिन्न रेलवे जोनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने और परिचालन दक्षता में सुधार के लिए 4098 तकनीकी पदों पर भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। अधिकारियों के मुताबिक मंत्रालय ने 35 तकनीकी श्रेणियों में खाली पड़े पदों को भरने का फैसला किया है। इनमें से कई पद रेलवे के परिचालन सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन पदों में जूनियर इंजीनियर, डिपो सामग्री अधीक्षक और केमिकल एंड मेटलॉर्जिकल असिस्टेंट शामिल हैं।

किस कैटेगरी में हैं सबसे ज्यादा वैकेंसी? यहाँ देखें आंकड़ा

पीटीआई की रिपोर्टके मुताबिक रेलवे जोनों द्वारा HRMS के माध्यम से भेजी गई रिक्तियों के आकलन के बाद सबसे अधिक पद सुरक्षा और रखरखाव से जुड़ी श्रेणियों में पाए गए हैं। जोनों द्वारा पहचानी गई रिक्तियों का विवरण इस प्रकार हैं-

परमानेंट वे कैटेगरी : सबसे अधिक 845 पद खाली हैं।

वर्क्स कैटेगरी : इसके बाद दूसरे नंबर पर 470 पद हैं।

कैरिज एंड वैगन कैटेगरी : इसमें 450 पद शामिल हैं।

जूनियर इंजीनियर (सिग्नल): इस पद के लिए 197 रिक्तियां स्वीकृत की गई हैं।

जूनियर इंजीनियर (टेलीकम्युनिकेशन): इसके लिए 79 पद निर्धारित किए गए हैं।

21 जुलाई से जारी होगा आधिकारिक नोटिफिकेशन, ये है टाइमलाइन

रेल मंत्रालय द्वारा सभी रेलवे जोनों के महाप्रबंधकों को भेजे गए एक हालिया सर्कुलर में कहा गया है कि जोनों द्वारा हाइलाइट की गई रिक्तियों के आधार पर ही भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

अधिसूचना की तारीख : रेलवे भर्ती बोर्ड बेंगलुरु के अध्यक्ष के साथ परामर्श के बाद मंत्रालय ने एक टाइमलाइन तय की है। इसके तहत नोडल RRB द्वारा 21 जुलाई 2026 से केंद्रीकृत रोजगार अधिसूचना जारी की जाएगी।

जोनों को सख्त निर्देश : जोनल रेलवे को निर्देश दिया गया है कि वे आंतरिक प्रणाली पर अंतिम रिक्ति सूची अपलोड करने से पहले सभी आंतरिक प्रक्रियाओं को पूरा करें। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणियों के लिए निर्धारित आरक्षण मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करना अनिवार्य किया गया है।

पहले ही आ चुकी है 6565 तकनीशियनों की भर्ती

सर्कुलर में यह भी जानकारी दी गई है कि इससे पहले मंत्रालय की मंजूरी के बाद 6565 तकनीशियनों की भर्ती के लिए अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। इसमें नीचे दिए गए पद शामिल थे:

सिग्नल तकनीशियन ग्रेड I: 323 पद

तकनीशियन ग्रेड III: 6242 पद

रेलवे यूनियनों ने फैसले का किया स्वागत, काम का बोझ होगा कम

सुरक्षा श्रेणी के इन महत्वपूर्ण पदों को भरने के मंत्रालय के फैसले पर विभिन्न रेलवे यूनियनों ने गहरी संतुष्टि जताई है। यूनियनों का कहना है कि इस कदम से परिचालन दक्षता में सुधार होगा और वर्तमान में काम कर रहे कर्मचारियों पर से काम का बोझ कम होगा। ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन (AIRF) के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा ने इस फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि ‘करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा-श्रेणी के रिक्त पदों को भरना बेहद आवश्यक कदम है। मैं रेल मंत्रालय के इस फैसले की सराहना करता हूं और उम्मीद करता हूं कि वे परिचालन सुरक्षा पर अपना ध्यान इसी तरह केंद्रित रखेंगे।’

इंडियन रेलवे एसएंडटी मेंटेनर्स यूनियन के महासचिव आलोक चंद्र प्रकाश ने दावा किया कि यह भर्ती प्रक्रिया सिग्नल और टेलीकॉम कर्मचारियों द्वारा किए गए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि, ‘मुझे खुशी है कि रेल मंत्रालय ने हमारे विरोध पर संज्ञान लिया और विभिन्न सुरक्षा-श्रेणियों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का फैसला किया। मुझे उम्मीद है कि मंत्रालय न केवल चरणबद्ध तरीके से सभी खाली पदों को भरेगा बल्कि रेलवे नेटवर्क और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े पैमाने पर हो रहे विस्तार की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए पदों का सृजन भी करेगा।’

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AI Stocks: AI शेयरों में मची बिकवाली, Netweb से Black Box तक 10% टूटे; जानिए क्या है वजह

AI Stocks: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयर मंगलवार को दबाव में रहे। Netweb Technologies, Aeroflex Industries, E2E Networks और Black Box जैसे शेयरों में 10% तक की गिरावट आई। इसकी बड़ी वजह दुनिया भर के टेक शेयरों में आई बिकवाली रही।

दुनिया भर में टेक शेयरों पर दबाव

एशियाई शेयर बाजार लगातार तीन दिन की तेजी के बाद गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों को अब चिंता है कि AI थीम वाली तेज रैली शायद जरूरत से ज्यादा आगे निकल गई है। MSCI Asia Pacific Index कारोबार के दौरान 2.2% तक गिर गया। बाद में निचले स्तर पर खरीदारी आने से गिरावट कुछ कम हुई और इंडेक्स करीब 1.5% नीचे बंद हुआ।

यूरोप के बाजारों में भी मिला-जुला कारोबार रहा। फ्रांस का CAC 40 करीब 1% चढ़ा। वहीं, STOXX Europe 600 Technology Index शुरुआती कारोबार में करीब 2% टूट गया।

चिप कंपनियों में भारी गिरावट

सेमीकंडक्टर सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। ASML Holding, Infineon Technologies, Aixtron और STMicroelectronics के शेयर करीब 5% तक टूट गए। वहीं BE Semiconductor Industries में 4% से ज्यादा की गिरावट आई।

हालांकि, सभी टेक कंपनियों पर दबाव नहीं रहा। SAP का शेयर करीब 2.5% और Amadeus IT Group करीब 2% चढ़ा।

सैमसंग और SK Hynix भी टूटे

दक्षिण कोरिया की Samsung Electronics के शेयर 10% तक गिर गए। जबकि कंपनी ने मुनाफे में 19 गुना बढ़ोतरी की जानकारी दी है।

वहीं SK Hynix के शेयर करीब 6% टूट गए। इसकी वजह से Kospi Index में 5.2% की गिरावट आई। कारोबार के दौरान 8% गिरावट आने पर कुछ समय के लिए ट्रेडिंग भी रोकनी पड़ी।

AI रैली पर क्यों बढ़ी चिंता?

एनालिस्टों का कहना है कि निवेशक अब टेक शेयरों से पैसा निकालकर दूसरे सेक्टरों में लगा रहे हैं। उन्हें डर है कि AI सेक्टर में बढ़ता निवेश, तेज प्रतिस्पर्धा और नई क्षमता (Capacity Expansion) भविष्य में कंपनियों की कमाई पर दबाव डाल सकते हैं।

बाजार अब यह देखना चाहता है कि AI पर हो रहा भारी खर्च वास्तव में कंपनियों के मुनाफे में बदलता है या नहीं। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो मौजूदा ऊंचे वैल्यूएशन को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

माइकल बरी ने भी जताई चिंता

The Big Short नाम से मशहूर निवेशक माइकल बरी (Michael Burry) का भी मानना है कि मेमोरी चिप कंपनियों में आया उछाल ज्यादा समय तक नहीं टिक सकता। उन्होंने बताया कि उन्होंने Micron Technology के शेयरों में शॉर्ट पोजिशन ली है। इसका मतलब कि बरी को भरोसा है कि मेमोरी चिप कंपनियों के स्टॉक गिरने वाले हैं।

उनका कहना है कि दक्षिण कोरिया में चिप उत्पादन पर हो रहा भारी निवेश आने वाले समय में सप्लाई काफी बढ़ा देगा। इससे DRAM चिप्स की मौजूदा कमी अगले साल ही खत्म हो सकती है। फिलहाल Samsung, SK Hynix और Micron मिलकर दुनिया के करीब 90% DRAM बाजार पर कब्जा रखते हैं। लेकिन अगर सप्लाई तेजी से बढ़ी, तो कीमतों और कंपनियों की कमाई दोनों पर दबाव आ सकता है।

* ब्लूमबर्ग से इनपुट के साथ

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SIP Calculator: महीने के 3000 के निवेश से भी 15 लाख का फंड बनाया जा सकता है, यहां समझें पूरा कैलकुलेशन

SIP Calculator: अगर आप हर महीने 3000 रुपये का निवेश सिप से म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में करते हैं तो बड़ा फंड तैयार हो सकता है। यह पैसा आपके बच्चों के हायर एजुकेशन या उनकी शादी-विवाह के काम में आ सकता है। आप चाहें तो इस पैसे का इस्तेमाल रिटायरमेंट बाद के अपने खर्च के लिए भी कर सकते हैं।

निवेश में बरतना होगा अनुशासन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निवेश में सबसे जरूरी अनुशासन है। अगर आप 3000 रुपये से निवेश शुरू करते हैं और करीब 15 साल तक हर महीने निवेश करना जारी रखते हैं तो आप आसानी से 15 लाख रुपये का फंड तैयार कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में निवेश करने पर सालाना कम से कम 12 फीसदी का रिटर्न आराम से मिल जाता है। कई बार इससे ज्यादा यानी 14 फीसदी या 16 फीसदी तक रिटर्न मिल जाता है। लंबी अवधि के निवेश में सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का मिलता है।

लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का ज्यादा फायदा

कंपाउंडिंग का मतलब यह है कि निवेश के रिटर्न पर भी आपको रिटर्न मिलता है। इससे आपका पैसा तेजी से बढ़ता है। कंपाउंडिंग की वजह से छोटे अमाउंट के निवेश से भी लंबी अवधि में आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है। जो इनवेस्टर कंपाउंडिंग के मैजिक को समझ जाते हैं वे निवेश में अनुशासन बनाए रखते हैं। इससे 10-15 साल में उनके लिए आसानी से बड़ा फंड तैयार हो जाता है।

आइए एक टेबल की मदद से समझते हैं कि हर महीने 3000 रुपये के SIP निवेश से 15 लाख रुपये का फंड तैयार होने में कितना समय लगेगा।

अनुमानित सालाना रिटर्न15 लाख का फंड तैयार होने में अनुमानित समय
12%15 साल कुछ महीने
14%14 साल कुछ महीने
16%13 साल कुछ महीने

अगर आप कम समय में बड़ा फंड तैयार करना चाहते हैं तो आप स्टेट-अप स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल कर सकते हैं। स्टेप-अप स्ट्रेटेजी में हर साल सिप का अमाउंट बढ़ा दिया जाता है। इसे एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। मान लीजिए आप निवेश की शुरुआत मंथली 3000 रुपये के निवेश से करते हैं। दूसरे साल आप निवेश का अमाउंट 10 फीसदी बढ़ा देते हैं। तीसरे साल भी आप SIP का अमाउंट 10 फीसदी बढ़ा देते हैं। इस स्ट्रेटेजी से कम समय में आपके लिए काफी बड़ा फंड आसानी से तैयार हो जाता है।

आइए समझते हैं कि स्टेप-अप सिप से 15 लाख रुपये का SIP तैयार करने में कितना समय लगेगा।

सामान्य SIP से 15 लाख10% स्टेप-अप SIP से 15 लाखसमय की बचतअनुमानित सालाना रिटर्न
15 साल कुछ महीने12 साल कुछ महीने3 साल12%
14 साल कुछ महीने11 साल कुछ महीने3 साल14%
13 साल कुछ महीने11 साल कुछ महीने2 साल16%

स्टेप-अप सिप के फायदे

स्टेप-अप सिप में हम देखते हैं कि हर महीने 3000 रुपये के SIP निवेश से 15 लाख रुपये का फंड तैयार होने में कम समय लगता है। चूंकि, आप SIP अमाउंट हर साल सिर्फ 10 फीसदी बढ़ाते हैं, जिससे आपको किसी तरह की दिक्कत नहीं आती है। लेकिन, आपके निवेश की अवधि काफी कम हो जाती है। इसकी वजह कंपाउंडिंग का मैजिक है।

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रिटर्न की गारंटी नहीं

यहां टेबल में 12 फीसदी, 14 फीसदी और 16 फीसदी रिटर्न का अनुमान लगाया गया है। इसका मतलब है कि हम तीन तरह के रिटर्न का अनुमान लगाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड के रिटर्न के बारे में पहले से कुछ कहना मुश्किल है। लेकिन, आम तौर पर यह देखा  गया है कि लंबी अवधि तक निवेश करने पर कम से कम 12 फीसदी का रिटर्न मिल जाता है। ऊपर टेबल में दी गई जानकारी सिर्फ कैलकुलेशन के लिए है।

SIP Investment: म्यूचुअल फंड में ₹10 लाख का फंड बनाना है? जानें हर महीने कितने की करनी होगी SIP

SIP Investment Plan: नौकरीपेशा लोगों और युवाओं के बीच म्यूचुअल फंड में SIP के जरिए निवेश करने का ट्रेड चल रहा है। अगर आपका लक्ष्य भी आने वाले कुछ सालों में ₹10 लाख का फंड तैयार करना है, तो इसके लिए एक सही प्लानिंग और अनुशासन की जरूरत होती है।

एसआईपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आपको एक साथ मोटी रकम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि आप हर महीने एक निश्चित राशि से शुरुआत कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि अलग-अलग समय सीमा के हिसाब से ₹10 लाख का फंड बनाने के लिए आपको हर महीने कितनी एसआईपी करनी होगी।

रिटर्न का अनुमान: 12% का औसत फॉर्मूला

लॉन्ग टर्म में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का औसत सालाना रिटर्न करीब 12% मानकर चला जाता है। हालांकि, बाजार के जोखिमों के कारण यह कम या ज्यादा भी हो सकता है। इसी 12% के अनुमानित रिटर्न के आधार पर जानते हैं ₹10 लाख का फंड बनाने का गणित।

1. 3 साल में ₹10 लाख का फंड

अगर आप बहुत कम समय यानी अगले 3 साल में ही यह लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं, तो आपको भारी-भरकम निवेश करना होगा।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹23,218 महीना

3 साल में कुल निवेश: ₹8.35 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹1.64 लाख

2. 5 साल में ₹10 लाख का फंड

मध्यम अवधि यानी 5 साल के लक्ष्य के लिए निवेश की राशि काफी कम हो जाती है, क्योंकि यहाँ कंपाउंडिंग को थोड़ा और समय मिलता है।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹12,244 महीना

5 साल में कुल निवेश: ₹7.34 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹2.65 लाख

3. 7 साल में ₹10 लाख का फंड

अगर आपके पास 7 साल का समय है, तो आप हर महीने एक सामान्य रकम बचाकर भी इस टारगेट को छू सकते हैं।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹7,500 महीना

7 साल में कुल निवेश: ₹6.30 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹3.70 लाख

4. 10 साल में ₹10 लाख का फंड

लॉन्ग टर्म यानी 10 साल की प्लानिंग करने वालों के लिए यह राह बेहद आसान है। यहाँ आपका ब्याज आपके मूलधन पर भारी पड़ने लगता है।

जरूरी मासिक SIP: करीब ₹4,347 महीना

10 साल में कुल निवेश: ₹5.21 लाख

अनुमानित रिटर्न/ब्याज: ₹4.78 लाख

‘स्टेप-अप SIP’ से काम होगा और आसान

अगर शुरुआत में आपके पास ₹12,000 या ₹7,000 की बड़ी एसआईपी करने का बजट नहीं है, तो निराश होने की जरूरत नहीं है। आप स्टेप-अप एसआईपी का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें आप हर साल अपनी सैलरी बढ़ने के साथ-साथ एसआईपी की रकम को भी 5% या 10% बढ़ा देते हैं।

मान लीजिए आप आज ₹3,000 से शुरुआत करते हैं और हर साल इसमें सिर्फ 10% की बढ़ोतरी करते हैं, तो आप सामान्य एसआईपी के मुकाबले बहुत पहले ही ₹10 लाख का फंड बना लेंगे।

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय इन बातों का रखें ध्यान

1- एसआईपी के शुरुआती 2-3 सालों में फंड छोटा होने के कारण कंपाउंडिंग का जादू स्क्रीन पर तुरंत नहीं दिखता। असली वेल्थ क्रिएशन आखिरी के सालों में होती है जब आपका बेस बड़ा हो जाता है।

2- बाजार में गिरावट आने पर भी अपनी एसआईपी को कभी बंद न करें। मंदी के समय आपको सस्ती NAV पर ज्यादा म्यूचुअल फंड यूनिट्स अलॉट होती हैं, जो बाद में बाजार चढ़ने पर बंपर मुनाफा देती हैं।

3- अपने वित्तीय सलाहकार से बात करके लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप या मिड-कैप फंड्स का एक सही पोर्टफोलियो चुनें।

नोट: यह गणना 12% के अनुमानित सालाना रिटर्न पर आधारित है। म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है, निवेश से पहले स्कीम के दस्तावेज जरूर पढ़ें।

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