पाकिस्तान पर अटैक हुआ तो सऊदी-तुर्किये हमला करेंगे? नए ‘इस्लामिक NATO’ का भारत के लिए क्या मायने है?

Saudi Arabia-Turkey-Pakistan Mecca Alliance: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मक्का डील के तहत इनमें से किसी एक भी देश पर किये गए हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ‘मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिशें शुरू कर दी है। उन्होंने इस समझौते को ‘इस्लामिक NATO’ करार दिया। साथ ही भारत और इजरायल की तरफ से पैदा की गई चुनौतियों से निपटने का आग्रह किया।

एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी युवराज (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई एक बैठक के दौरान ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ पर हस्ताक्षर किए। संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हुए इस समझौते का मकसद किसी भी तरह के हमले के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है।

एक देश पर हमले को तीनों पर हमला माना जाएगा

बयान के अनुसार, “इसमें यह भी तय किया गया कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी हुआ कोई भी सशस्त्र हमला, उन सभी पर हमला माना जाएगा।” बयान में कहा गया है कि इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बेहतर बनाने की बात भी शामिल है। बयान में कहा गया है, “यह समझौता एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की दिशा में अपनी सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा क्षेत्र और उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए तीनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।”

यह समझौता पाकिस्तान (जो परमाणु हथियारों से लैस एकमात्र मुस्लिम देश है), सऊदी अरब (जो इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों का केंद्र और दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है) और तुर्की (जो नाटो का सदस्य है) को एक साथ जोड़ता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है। इसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य भी शामिल हैं, जिसके कारण खाड़ी देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग मजबूत करना पड़ा है। शहबाज शरीफ ने अप्रैल में सऊदी अरब का दौरा किया था, जिस दौरान उन्होंने वहां के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत की थी।

तुर्किये और इजरायल में बढ़ा तनाव

हाल के महीनों में तुर्किये और इजरायल के बीच तनाव बढ़ा है। पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें यह संकल्प लिया गया था कि उन दोनों में से किसी भी देश पर हमले को दोनों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा। रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने संयुक्त ट्रेनिंग, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों में मदद के लिए सैन्य कर्मियों और विमानों को तैनात किया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत संबंध पर आधारित है जो उन्हें आपस में जोड़ते हैं। साथ ही यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर भी आधारित है। शुक्रवार को हुई बैठक के दौरान, तीनों पक्षों ने अपने संबंधों की समीक्षा की और पारस्परिक हित के कई मुद्दों पर चर्चा की।

क्या बोले एक्सपर्ट?

पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते से पश्चिम एशिया में अमेरिका की रणनीतिक भूमिका काफी कम हो सकती है। रक्षा विश्लेषक और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के एक पूर्व प्रमुख के बेटे अब्दुल्ला हमीद गुल ने कहा कि यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को सुरक्षा मुहैया कराने की अमेरिका की क्षमता को लेकर क्षेत्र में शंकाएं बढ़ रही हैं।

गुल ने कहा, “खाड़ी देशों में अमेरिका के 27 सैन्य अड्डे थे। उनमें से 17 को अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ईरान ने तबाह कर दिया। इससे क्षेत्र में ये सवाल उठने लगे कि क्या अमेरिकी वाकई उनकी रक्षा कर सकते हैं। इसी वजह से ऐसे समझौते करने की जरूरत पड़ी।” गुल ने कहा कि इस समझौते के साथ ही क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका बहुत कम या कहें कि खत्म सी हो जाएगी। गुल ने कहा, “कतर और कुवैत भी जल्द ही पाकिस्तान के साथ इसी तरह के समझौतों में शामिल होंगे।”

उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों को आभास हो गया था कि ईरान के बजाय इजरायल उनके लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी कर सकता है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी ने कहा कि इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को लेकर धारणा बदल दी है। वहीं, रिटायर्ड ब्रिगेडियर फारूक हमीद ने कहा कि इस समझौते में यह प्रावधान है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। लिहाजा पाकिस्तान और भारत के बीच भविष्य में किसी तरह के संघर्ष के विरुद्ध यह प्रावधान ‘निवारक’ के रूप में काम करेगा।गठजोड़ से नई दिल्ली की बढ़ेगी टेंशन?

मक्का ज्वाइंट डिफेंस एग्रीमेंट के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने एक-दूसरे की सुरक्षा को लेकर सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यही प्रावधान इस समझौते की तुलना NATO के Article 5 से किए जाने की सबसे बड़ी वजह है। NATO के Article 5 के तहत किसी सदस्य देश पर सशस्त्र हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। इसके सदस्य देश सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देने की प्रतिबद्धता जताते हैं।

पाकिस्तान ने उठाया आतंकवाद का मुद्दा

समझौते पर हस्ताक्षर के अगले ही दिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अपने देश को आतंकवाद से पीड़ित राष्ट्र के रूप में पेश करने की कोशिश की। उन्होंने कथित तौर पर ‘Islamic NATO’ से उन चुनौतियों से निपटने की अपील, जिन्हें उन्होंने भारत और इजरायल से जुड़ा बताया। पाकिस्तान की इस बयानबाजी को खास तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच लंबे समय से सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा संबंधी मुद्दों पर तनाव बना रहा है।

एक पर हमला तो तीनों आएंगे साथ?

मक्का में हुए इस संयुक्त रक्षा समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा सामूहिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता है। यानी अगर समझौते के तहत किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक विश्लेषक इसे NATO मॉडल से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, केवल इस प्रावधान के आधार पर इसे NATO का सीधा विकल्प मानना सही नहीं होगा। NATO एक व्यापक, संस्थागत और दशकों पुराना सैन्य गठबंधन है। जबकि पाकिस्तान-सऊदी अरब और तुर्किये के बीच यह समझौता तीन देशों की रक्षा साझेदारी पर आधारित है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह एग्रीमेंट?

नई दिल्ली के लिए इस समझौते का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इसमें पाकिस्तान और सऊदी अरब दोनों शामिल हैं। साथ ही तुर्किये भी पाकिस्तान के साथ करीबी रक्षा संबंध रखता है। भारत की चिंता का एक पहलू यह हो सकता है कि पाकिस्तान भविष्य में क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी सुरक्षा चिंताओं को सामूहिक रक्षा के मुद्दे के रूप में पेश करने की कोशिश करे।

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खासकर तब, जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री भारत और इजरायल को कथित चुनौतियों से जोड़ रहे हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस नए डिफेंस डील का इस्तेमाल पाकिस्तान अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए करेगा?

क्या भारत के खिलाफ बनेगा सैन्य मोर्चा?

फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि यह समझौता सीधे तौर पर भारत के खिलाफ बनाया गया सैन्य गठबंधन है। समझौते का घोषित आधार तीनों देशों के बीच सामूहिक रक्षा और सुरक्षा सहयोग है। लेकिन पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा भारत और इजरायल का नाम लेकर बयान देना निश्चित रूप से इस घटनाक्रम को नई दिल्ली के लिए अधिक संवेदनशील बना देता है। भारत के लिए अब सबसे अहम सवाल यह होगा कि यह समझौता केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित रहता है या भविष्य में इसे किसी व्यापक राजनीतिक-सैन्य गठबंधन का रूप दिया जाता है।

Market Outlook: 5 दिनों में 20% तक चढ़े ये स्मॉलकैप स्टॉक्स, Nifty के लिए ये है सपोर्ट-रेजिस्टेंस

Market Outlook: 7 अगस्त को समाप्त हुए पिछले कारोबारी हफ्ते निफ्टी 50 की तुलना में ब्रोडर मार्केट यानी मिडकैप और स्मॉलकैप के इंडेक्सेज में अधिक तेजी आई। निफ्टी 50 पिछले कारोबारी हफ्ते 0.8% मजबूत हुआ तो निफ्टी मिडकैप में 0.9% और निफ्टी स्मॉलकैप में 2.7% की बढ़त आई। हालांकि उतार-चढ़ाव के बावजूद अर्निंग्स सेशन के दौरान इंडिविजुअल स्टॉक्स में तेजी से निफ्टी को सपोर्ट मिला। पिछले कारोबारी हफ्ते सेंसेक्स (Sensex) 404.53 प्वाइंट्स यानी 0.51% की बढ़त के साथ 78,499.17 तो निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 187.05 प्वाइंट्स यानी 0.76% के उछाल के साथ 24,570.65 पर बंद हुआ था।

बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में ₹7 लाख करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी हुई। विदेशी निवेशकों का रुझान पॉजिटिव बना रहा और लगातार दूसरे हफ्ते नेट खरीदारी की। पिछले कारोबारी हफ्ते उन्होंने ₹2,887.69 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की तो डीआईआई ने ₹7,767.37 करोड़ की नेट खरीदारी की।

सेक्टरवाइज पिछले कारोबारी हफ्ते सेक्टरवाइज मिला-जुला माहौल रहा। निफ्टी पीएसयू बैंक में सबसे अधिक 5% की तेजी आईतो जुलाई में अच्छी बिक्री के चलते निफ्टी ऑटो 3% मजबूत हुआ। अच्छे नतीजों पर निफ्टी आईटी में 2.7% की तेजी आई तो निफ्टी एफएमसीजी 0.6% और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.5% मजबूत हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया में सबसे अधिक 4% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी कैपिटल मार्केट्स में 2% और निफ्टी रियल्टी में 1.7% की गिरावट आई।

Nifty के Midcap और Smallcap इंडेक्सेज को किन स्टॉक्स से सपोर्ट

केईआई इंडस्ट्रीज, जुबिलेंट फूडवर्क्स, एक्साइड इंडस्ट्रीज, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी, एपीएल अपोलो ट्यूब्स, पेटीएम और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के सपोर्ट से निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1% की बढ़त हुई। हालांकि ब्लू स्टार, बीएसई, यूपीएल, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, ऑयल इंडिया और वोल्टास में गिरावट से इसे झटका लगा। वहीं दूसरी तरफ न्यूलैंड लेबोरेटरीज, देवयानी इंटरनेशनल, एथर एनर्जी, टाटा टेक्नोलॉजीज, वेल्सपन कॉर्प, पाइन लैब्स, अर्बन कंपनी और रेडिंगटन के शेयरों में 10-20% की बढ़ोतरी हुई और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इनके दम पर ढाई फीसदी से अधिक मजबूत हुआ। हालांकि इसे नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, फर्स्टसोर्स सॉल्यूशंस, नारायण हृदयालय, इन्वेंटुरस नॉलेज सॉल्यूशंस, स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण में गिरावट से झटका भी लगा।

किस तरफ बढ़ रहा मार्केट?

एंजेल वन के इक्विटी एंड डेरिवेटिव्स टेक्निकल एनालिस्ट हितेश राठी का कहना है कि निफ्टी के लिए अभी 24450–24350 सपोर्ट लेवल की तरह काम कर रहा है। इसके बाद 24 हजार का लेवल मनोवैज्ञानिक तौर पर सपोर्ट है। वहीं ऊपर की तरफ निफ्टी को 24650-24750 के लेवल पर रेजिस्टेंस झेलना पड़ सकता है, जिसके बाद 24800-24850 पर रेजिस्टेंस है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज का डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह का कहना है कि तीन कारोबारी दिनों से निफ्टी 24400 और 24700 के बीच कंसालिडेट हो रहा है और डेली बेसिस पर यह लोअर हाई और हायर लो बना रहा है। नंदीश के मुताबिक मुख्य रुझान अभी भी बुलिश है क्योंकि यह सभी अहम मूविंग एवरेजेज के ऊपर बना हुआ है। नंदीश के मुताबिक ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए 24,770 और 25,000 अहम रेजिस्टेंस लेवल्स हैं तो नीचे की तरफ 24,430–23,380 सपोर्ट जोन है।

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Shakeel Noorani: रेप केस में डायरेक्टर शकील नूरानी गिरफ्तार, एक्ट्रेस का आरोप है कि उन्होंने नशीली चीज खिलाकर धमकाया

Shakeel Noorani: ‘जोरू का गुलाम’ और ‘बड़े दिल वाला’ जैसी फ़िल्मों के लिए मशहूर अनुभवी फ़िल्ममेकर शकील नूरानी गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। एक 33 वर्षीय अभिनेत्री द्वारा बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराने के बाद मुंबई में इस निर्देशक को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

73 वर्षीय नूरानी को मालवानी पुलिस ने 8 अगस्त की सुबह गिरफ़्तार किया। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 64(2)(M), 123, 351(2) और 88 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, एक्ट्रेस की नूरानी से पहली मुलाकात 2016 में लोखंडवाला में एक अवॉर्ड इवेंट में हुई थी। ‘मिड-डे’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक्ट्रेस का कहना है कि फिल्ममेकर ने उनसे एक आने वाली फिल्म के बारे में बात की और काम के सिलसिले में उनसे संपर्क करने को कहा।

बाद में, वह स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए मालवानी में उनके घर गईं। अपनी FIR में एक्ट्रेस ने दावा किया कि नूरानी ने उन्हें एक ड्रिंक दी, जिसके बाद वह बेहोश हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्हें होश आया तो नूरानी ने उन्हें अपने फोन पर एक वीडियो दिखाया। उनकी शिकायत के मुताबिक, नूरानी ने धमकी दी कि अगर वह पुलिस के पास गईं या अपने परिवार को बताया, तो वह उस वीडियो को शेयर कर देंगे।

एक्ट्रेस ने आगे आरोप लगाया कि नूरानी ने उस वीडियो का इस्तेमाल करके उसे धमकाया और कई बार उसका यौन शोषण किया। उसने यह भी दावा किया कि कथित यौन संबंधों के बाद नूरानी ने उसे बार-बार गर्भनिरोधक गोलियां दीं। नूरानी के वकील, एडवोकेट विकास सिंह गोअर ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि फिल्ममेकर को झूठे मामले में फंसाया गया है।

मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा, “एक्ट्रेस के लगाए गए आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है और जांच चल रही है। जब तक दोषी साबित न हो जाए, नूरानी को निर्दोष माना जाएगा। गिरफ्तारी के बाद, नूरानी को बोरीवली हॉलिडे कोर्ट ले जाया गया। पुलिस ने आरोपों की जांच करने वीडियो को बरामद और उसकी जांच करने और यह पता लगाने के लिए कि क्या ऐसी घटनाएं अन्य जगहों पर भी हुई हैं, उनकी कस्टडी की मांग की।

अदालत ने नूरानी को 12 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया। शकील नूरानी ने ‘बड़े दिलवाला’ (1999), ‘जोरू का गुलाम’ (2000) और ‘एसिड ऑफ लव’ (2005) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। ‘जोरू का गुलाम’ में गोविंदा और ट्विंकल खन्ना ने काम किया था।

FPI की खरीद जारी, अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयरों में लगाए ₹12921 करोड़

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया। बेहतर होती मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता की वजह से FPI के लिए भारतीय बाजार आकर्षक बना हुआ है।

इससे पहले जुलाई में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। इसके पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली की थी।

इससे पहले फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब तक भारतीय शेयर बाजार में ₹2.41 लाख करोड़ की बिक्री कर चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने ₹1.66 लाख करोड़ की सेलिंग की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में FPI का रुख बदलने के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और रुपये की स्थिरता जैसे कारक प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बेहतर ग्रोथ और महंगाई संबंधी अनुमान से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का कहना है कि भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण आगे विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है। हाल की खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा सेकेंडरी मार्केट के जरिए आया है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल IPO तक सीमित नहीं है, बल्कि लिस्टेड भारतीय कंपनियों में भी बढ़ रही है।

सेंसेक्स की टॉप 10 कंपनियों में से 4 का मार्केट कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा, SBI को सबसे ज्यादा फायदा

जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का मानना है कि FPI की खरीदारी में एक महत्वपूर्ण रुझान यह है कि वे ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय डेट या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है। अगस्त में अब तक उन्होंने बॉन्ड बाजार में जनरल रूट के तहत ₹622 करोड़ का निवेश किया है।

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Rajeev Thakkar: ‘AUM को कोसना बंद कीजिए…’, कमजोर रिटर्न पर बोले राजीव ठक्कर, याद दिलाया ₹100 करोड़ वाले फंड का किस्सा

PPFAS Flexi Cap Fund Underperformance: जब भी कोई बड़ा म्यूचुअल फंड प्लान हाल के दिनों में कमजोर प्रदर्शन करती है, तो अक्सर उसके विशालकाय फंड साइज या AUM को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन देश के सबसे लोकप्रिय फंड्स में से एक PPFAS Mutual Fund के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव ठक्कर इस दलील से इत्तेफाक नहीं रखते।

निवेशकों को लिखे अपने मैसेज में राजीव ठक्कर ने कहा, ‘जो लोग शॉर्ट टर्म में हमारी स्कीम के कमजोर प्रदर्शन का कारण हमारे बड़े AUM को मानते हैं, वे हम पर ‘कुछ ज्यादा ही मेहरबान’ हो रहे हैं।’

आइए आपको बताते हैं कि ₹1.43 लाख करोड़ के बड़े फंड को संभालने वाले फंड मैनेजर ने स्कीम के अंडरपरफॉर्मेंस, बाजार के रुख और 2007 के उस दौर के बारे में क्या-क्या बातें कही हैं।

जब ₹100 करोड़ के PMS में भी झेलना पड़ा था बड़ा अंडरपरफॉर्मेंस

राजीव ठक्कर ने अपने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि किसी फंड का साइज छोटा या बड़ा होना उसके प्रदर्शन की इकलौती वजह नहीं होता। उन्होंने बताया, ‘मैंने साल 2007 में PMS में महज ₹100 करोड़ से थोड़े अधिक के AUM बेस पर आज से भी बड़े अंडरपरफॉर्मेंस का दौर देखा और संभाला है।’

उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म में फंड का रिटर्न कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किन शेयरों में निवेश किया है और वे उस समय बाजार के ट्रेंड में हैं या नहीं।

कैसा रहा है हालिया प्रदर्शन?

राजीव ठक्कर देश की सबसे बड़ी फ्लेक्सी कैप स्कीम PPFAS Flexi Cap Fund का प्रबंधन करते हैं, जिसका कुल AUM करीब ₹1.43 लाख करोड़ पहुंच चुका है। पिछले एक साल में इस फंड ने लगभग 0.4% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में इसी कैटेगिरी का औसत रिटर्न लगभग 7% रहा है। बाजार में चल रहे कंसोलिडेशन और कुछ सेक्टर्स में आई तेज गिरावट का असर इस फंड पर भी देखने को मिला है।

आउट ऑफ फेवर सेक्टर्स में खरीदारी: क्यों बिगड़ता है शॉर्ट टर्म रिटर्न?

अंडरपरफॉर्मेंस के कारणों पर बात करते हुए ठक्कर ने अपनी निवेश शैली पर प्रकाश डाला:

बाजार के रुझान से अलग सोच: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड अक्सर उन सेक्टर्स या शेयरों में खरीदारी करता है जो उस समय बाजार की पसंद नहीं होते या डिस्काउंट पर मिल रहे होते हैं।

शॉर्ट टर्म में अस्थिरता: जब फंड ऐसे सेक्टर्स में पैसा लगाता है जो फिलहाल बाजार की रेस में पीछे हैं, तो 3 महीने, 1 साल या उससे अधिक समय के लिए पोर्टफोलियो के रिटर्न कमजोर दिख सकते हैं।

‘ट्रेंड’ के पीछे न भागना: उन्होंने साफ किया कि फंड सिर्फ इसलिए किसी लोकप्रिय शेयर या सेक्टर में पैसा नहीं लगाएगा क्योंकि वह उस समय काफी चल रहा है। फंड का पूरा फोकस केवल रिस्क-रिवॉर्ड के आधार पर सही वैल्यू तलाशने पर रहता है।

निवेशकों के लिए राजीव ठक्कर का संदेश

राजीव ठक्कर के मुताबिक, अगर आपने किसी फंड को उसकी लंबी अवधि की रणनीति को देखकर चुना है, तो शॉर्ट टर्म में कमजोर रिटर्न मिलने पर किसी आसान बहाने की तलाश करने के बजाय धैर्य बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

उनका मानना है कि मौजूदा अंडरपरफॉर्मेंस का दौर न तो समय के लिहाज से बहुत लंबा है और न ही नुकसान के आंकड़े के हिसाब से कोई अभूतपूर्व घटना है। लंबी अवधि में प्रक्रिया और रिस्क मैनेजमेंट ही निवेशकों के लिए सही वैल्यू जनरेट करता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Yash: ‘मेरे साथ रहना मुश्किल है…’, शूटिंग के दौरान साथ देने के लिए यश ने पत्नी राधिका पंडित को कहा ‘थैंक्यू’

Yash: यश ने ‘टॉक्सिक’ पर काम करने के दौरान अपनी पत्नी राधिका पंडित से मिले सपोर्ट के बारे में बात की। एक्टर ने गीतू मोहनदास के डायरेक्शन में बनी इस फ़िल्म को अपने करियर के सबसे मुश्किल प्रोजेक्ट्स में से एक बताया। शनिवार को बेंगलुरु में फ़िल्म के ट्रेलर लॉन्च के मौके पर, एक्टर ने लंबे समय तक चली शूटिंग, कई तरह के लुक्स और इस प्रोजेक्ट के लिए की गई शारीरिक मेहनत के बारे में खुलकर बात की।

‘टॉक्सिक’ में लीड रोल निभाने वाले यश ने बताया कि इस फ़िल्म के लिए उन्हें अपने फ़िज़िकल लुक पर काफ़ी समय देना पड़ा और कहानी के अलग-अलग हिस्सों के लिए अपना लुक बदलना पड़ा। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में साथ देने के लिए राधिका का शुक्रिया अदा किया।

यश ने कहा, “मैं अपनी पत्नी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं। मेरे साथ किसी भी तरह से जुड़े रहना आसान नहीं है। मेरे साथ रहना मुश्किल है। यह फ़िल्म बहुत मुश्किल थी और मैंने अपनी कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर काम किया। मेरे 2-3 अलग-अलग लुक थे और इसमें बहुत समय लगा। वह मेरे लिए बहुत बड़ा सहारा रही हैं।”

‘टॉक्सिक’ फ़िल्म महीनों से चर्चा में है; इसके टीज़र और गानों से यश के किरदार और फ़िल्म के डार्क माहौल की झलक मिलती है। कियारा आडवाणी, जो सर्कस आर्टिस्ट नादिया का रोल कर रही हैं, उन्हें ‘तबाही’ गाने में यश के साथ इंटीमेट सीन करने की वजह से ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना भी करना पड़ा है।

इसी इवेंट में, यश ने लॉन्च के दौरान कियारा के सीन पर हो रही आलोचना पर बात की। रोल के प्रति उनकी लगन की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि एक्टर्स को ऑनलाइन लोगों के रिएक्शन की चिंता करने के बजाय अपनी पसंद पर अडिग रहना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा, “एक एक्टर के तौर पर आपको जिन मुश्किलों से गुज़रना पड़ता है, अफ़सोस की बात है कि लोग उनकी परवाह नहीं करते। आप जिस चीज़ में यकीन रखते हैं, वही करें; लोग उसे सराहेंगे और उसकी तारीफ़ करेंगे। बस बात इतनी है कि हम अपने समय से थोड़ा आगे चल रहे हैं।”

‘टॉक्सिक’ को गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है। इस एक्शन थ्रिलर फ़िल्म की शूटिंग इंग्लिश और कन्नड़ भाषाओं में हुई है और इसे हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम वर्जन में भी रिलीज़ किया जाएगा। नयनतारा, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और हुमा कुरैशी भी इसकी कास्ट का हिस्सा हैं। यह फ़िल्म 26 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

Chemical Stocks: धमाकेदार रिजल्ट लेकिन मोतीलाल ओसवाल की सेल रेटिंग, 16% टूटेगा यह शेयर, आपके पास है?

Deepak Nitrite Share Price: दिग्गज केमिकल कंपनी दीपक नाइट्राइट के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में में कंपनी ने ऑपरेटिंग लेवल पर धमाकेदार परफॉरमेंस दिखाया और इसका ईबीआईटीडीए ढाई गुना से अधिक बढ़ गया। शेयरों की बात करें तो अपनी 6 अगस्त की रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इसकी सेल रेटिंग को बरकरार रखा है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 7 अगस्त को बीएसई पर यह 2.62% की बढ़त के साथ ₹1,795.50 पर बंद हुआ है।

किस भाव तक टूट सकता है Deepak Nitrite का शेयर

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि दीपक नाइट्राइट का ऑपरेटिंग परफॉरमेंस कम बेस के चलते जून तिमाही में सालाना आधार पर उम्मीद से बेहतर रहा। जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कंपनी का ईबीआईटीडीए कंसालिडेटेड लेवल पर 2.8 गुना बढ़कर ₹189.6 करोड़ से ₹540.2 करोड़ और मार्जिन 10.0% से 21.0% पर पहुंच गया। इसके ईबीआईटीडीए को फोनॉलिक सेगमेंट में सालाना आधार पर 3.5 गुना और एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स सेगमेंट में 89% की ईबीआईटी ग्रोथ से सपोर्ट मिला। इसे बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज के साथ-साथ बेहतर फिनॉल और बेंजीन स्प्रेड्स से सपोर्ट मिला।

आगे को लेकर ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इंडस्ट्री के सामने आने वाली शॉर्ट-टर्म चुनौतियों और बदलते जियोपॉलिटिकल हालात कंपनी की परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं, लेकिन इसका कुल असर सीमित रहेगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक लगातार प्रोसेस में सुधार, बैकवर्ड इंटीग्रेशन से मिलने वाले फायदे, मैन्युफैक्चरिंग की बेहतर क्षमता, लागत को सही ढंग से कंट्रोल करना, घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट में ग्राहकों की बढ़ती इंक्वायरी और नए प्रोडक्ट्स का कमर्शियलाइजेशन से इसे सपोर्ट मिलेगा।

जून तिमाही के बेहतर मार्जिन को ध्यान में रखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने वित्त वर्ष 2026-28 में इसके रेवेन्यू के 13%, शुद्ध मुनाफे के 24% और ईबीआईटीडीए के 22% के सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। हालांकि वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई के मुकाबले कंपनी ने इसका भाव 24 गुना पर फिक्स किया है, जिससे इसका टारगेट प्राइस ₹1500 बन रहा है। ब्रोकरेज फर्म ने इसे फिर से सेल रेटिंग दी है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

दीपक नाइट्राइट के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 24 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹1,904.50 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 6 महीने में यह 32.77% टूटकर 30 मार्च 2026 को ₹1,280.40 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Video: नाई की दुकान से इंटरनेट तक… Techie ने 90s के गानों वाला ऐसा डिजिटल अड्डा बनाया कि Paytm फाउंडर भी तारीफ करने लगे

आज के दौर में जब हेयरकट के साथ प्रीमियम सैलून, हेयर स्पा और महंगे हेयर ट्रीटमेंट आम हो गए हैं, वहीं इंटरनेट पर एक छोटे से डिजिटल प्रयोग ने लोगों को पुराने दिनों की याद दिला दी है। टेक प्रोफेशनल यश भारद्वाज ने एक ऐसा अनोखा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसने सोशल मीडिया यूजर्स के बीच पुरानी यादों का पिटारा खोल दिया। यह पहल उस दौर की झलक दिखाती है, जब मोहल्ले की छोटी-सी नाई की दुकान सिर्फ बाल कटवाने की जगह नहीं होती थी, बल्कि वहां बैठकर गाने सुनना और आसपास के लोगों से बातचीत करना भी अनुभव का हिस्सा हुआ करता था। आज की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच 90s की ऐसी यादों को डिजिटल अंदाज में दोबारा सामने लाने की कोशिश लोगों को काफी पसंद आ रही है।

आखिर इस वेबसाइट में ऐसा क्या खास है, जिसने इंटरनेट यूजर्स को पुराने जमाने में पहुंचा दिया? यही वजह है कि यह अनोखा प्रयोग तेजी से चर्चा में आ गया है।

Yash Bhardwaj ने बनाया Salon.wtf

डेवलपर यश भारद्वाज ने इस प्रोजेक्ट को Salon.wtf नाम दिया है। वेबसाइट पर ऐसे गानों का संग्रह उपलब्ध है, जो पुराने भारतीय बार्बरशॉप की याद दिलाते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने प्रोजेक्ट को साझा करते हुए लिखा कि यह वेबसाइट उस दौर की याद दिलाती है, जब लोग महंगे सैलून के बजाय ‘सैलून’ या मोहल्ले की नाई की दुकान पर जाते थे और करीब ₹20 में साधारण हेयरकट के साथ ऐसे गाने सुनते थे, जो माहौल को खास बना देते थे।

इंटरनेट यूजर्स बोले- ‘इसने तो पुराना जमाना याद दिला दिया’

वेबसाइट सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट उन्हें ऐसे समय में वापस ले गया, जब इंटरनेट और प्रीमियम सैलून रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं थे। एक यूजर ने इसे इंटरनेट पर इंसानी रचनात्मकता का शानदार उदाहरण बताया और कहा कि ऐसी चीजें इंटरनेट की असली खूबसूरती दिखाती हैं।

वेबसाइट में गाने इस्तेमाल करने पर उठा कॉपीराइट सवाल

प्रोजेक्ट को लेकर सिर्फ तारीफ ही नहीं हुई, बल्कि इसके कानूनी पहलू पर भी सवाल उठे। एक यूजर ने, जो खुद कुछ इसी तरह के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था, भारद्वाज से पूछा कि ऑनलाइन संगीत इस्तेमाल करते समय कॉपीराइट से जुड़ी किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस पर भारद्वाज ने बताया कि वेबसाइट अपने सर्वर पर गाने स्टोर नहीं करती।

‘गाने मेरे सर्वर पर नहीं हैं’

भारद्वाज के अनुसार, वेबसाइट YouTube की मौजूदा प्लेबैक व्यवस्था का इस्तेमाल करती है। उन्होंने बताया कि वीडियो और frame को वेबसाइट के इंटरफेस में छिपाकर केवल ऑडियो अनुभव रखा गया है। उनके मुताबिक, गाने YouTube के माध्यम से ही चल रहे हैं और उन्होंने मूल प्लेयर को अपने तरीके से पेश किया है। हालांकि, किसी वेबसाइट का इस तरह का संगीत उपयोग वास्तव में कानूनी रूप से अनुमत है या नहीं, यह संबंधित प्लेटफॉर्म की शर्तों और लागू कॉपीराइट कानूनों पर निर्भर कर सकता है।

Paytm के संस्थापक भी हुए पुराने दिनों के फैन

वेबसाइट की लोकप्रियता बढ़ने के साथ यह पोस्ट Paytm के संस्थापक विजय शेखर शर्मा तक भी पहुंच गई। उन्होंने X पर इस प्रोजेक्ट को साझा किया और इसकी तारीफ की। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को भारत की पुरानी मोहल्ला बार्बरशॉप और उस दौर के संगीत से जुड़ी यादों को फिर से जीवंत करने वाली कोशिश के तौर पर सराहा।

एक वेबसाइट ने खोल दिया यादों का पिटारा

Salon.wtf की खासियत सिर्फ पुराने गाने नहीं हैं। इसकी लोकप्रियता इस बात को दिखाती है कि तकनीक के जरिए पुरानी यादों को किस तरह नए अंदाज में पेश किया जा सकता है। जहां आज लोग हेयरकट के लिए चमकदार सैलून और डिजिटल अपॉइंटमेंट पसंद करते हैं, वहीं यह छोटा-सा इंटरनेट प्रोजेक्ट लोगों को उस दौर में वापस ले जा रहा है, जब ₹20 का हेयरकट, रेडियो पर बजता गाना और मोहल्ले की नाई की दुकान ही एक अलग तरह का अनुभव हुआ करता था।

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Lift Karadey Shoot: एक पैसा नहीं हुआ था खर्च, जब अदनान सामी के ‘लिफ्ट करा दे’ गाने में गोविंदा ना रिहर्सल हो गए थे शामिल

Lift Karadey Shoot: अदनान सामी का गाना ‘लिफ्ट करा दे’ उनके सबसे मशहूर पॉप गानों में से एक बन गया है। लेकिन शुरुआत में उनके म्यूज़िक लेबल को इस पर ज़्यादा भरोसा नहीं था। सिंगर ने बताया है कि मैग्नासाउंड ने इस गाने को “सड़क छाप” कहा, सवाल उठाया कि कई सफल गानों के बाद वह ऐसा गाना क्यों बनाना चाहते हैं, और आखिर में इसके म्यूज़िक वीडियो के लिए पैसे देने से मना कर दिया।

अदनान सामी ने ज़ूम के साथ हाल ही में हुए एक इंटरव्यू में यह कहानी शेयर की और बताया कि लेबल के मन में उनके अगले गाने के लिए कुछ और ही सोच थी। ‘कभी तो नज़र मिलाओ’ और ‘बरसात’ के हिट होने के बाद, मैग्नासाउंड चाहता था कि वह एक और रोमांटिक गाना बनाएं। लेकिन सामी के मन में कुछ और ही प्लान था।

उन्होंने ‘लिफ्ट करा दे’ गाने का सुझाव दिया, जो एक मज़ेदार और जोशीला गाना था, लेकिन उस समय लेबल ने उनके लिए जो इमेज सोची थी, यह गाना उससे मेल नहीं खाता था। इस आइडिया को सपोर्ट करने के बजाय, टीम ने सवाल किया कि वह उन “क्लासी” गानों से क्यों दूर जाना चाहते थे, जो वह पहले ही गा चुके थे।

उन्होंने याद करते हुए कहा, “तब सबने मेरी तरफ देखा और कहा, ‘तुम क्या बात कर रहे हो?’ मैंने कहा, ‘लिफ्ट करा दे’ एक अच्छा, जोश भरा गाना है।” उन्होंने कहा, “तुम क्या कह रहे हो? यह तो बिल्कुल सड़कछाप गाना है। ‘कभी तो नज़र मिलाओ’ और ‘भीगी-भीगी रातों में’ (बरसात) जैसे शानदार गाने कहाँ, और यह गाना कहां?” मैंने कहा, “मेरी बात सुनो। मैं हर तरह के गाने बनाता और गाता हूं।”

यह असहमति लगभग छह महीने तक चलती रही। अदनान सामी ने बताया कि मैग्नासाउंड को यकीन था कि यह गाना नहीं चलेगा और वे इसके वीडियो पर पैसे खर्च नहीं करना चाहते थे। ऐसे में सामी और उनकी टीम के पास काम करने के लिए बहुत कम साधन थे। उन्होंने ‘लिफ्ट करा दे’ का वीडियो ‘गुरिल्ला फ़ॉर्मेट’ में शूट करने का फ़ैसला किया, यानी बिना किसी बड़े बजट या मंज़ूरी के सड़कों पर जाकर शूटिंग की, जबकि आम तौर पर म्यूज़िक वीडियो के लिए ये चीज़ें ज़रूरी होती हैं।

अदनान ने आगे कहा, “यह बहस लगभग छह महीने तक चली और वे बिल्कुल भी सहमत नहीं थे। उन्हें लगा कि यह गाना नहीं चलेगा और वे इसमें कोई पैसा नहीं लगाना चाहते थे। हमने सचमुच गुरिल्ला फ़ॉर्मेट में वीडियो शूट किया। गुरिल्ला फ़िल्ममेकिंग का मतलब है कि आप बिना किसी बजट और बिना किसी मंज़ूरी के सड़कों पर जाकर शूटिंग करते हैं। हमने इसी तरह वीडियो शूट किया।”

‘लिफ़्ट करा दे’ को बाद में 2000 के दशक की शुरुआत के लोकप्रिय भारतीय पॉप गानों में से एक के तौर पर याद किया गया। इस गाने को सामी ने कंपोज़ किया और गाया था, जबकि इसके बोल रियाज़-उर-रहमान सागर ने लिखे थे।

इस म्यूज़िक वीडियो में गोविंदा भी एक कैमियो रोल में नज़र आए थे। अदनान सामी ने बताया है कि एक्टर ने बिना किसी रिहर्सल के ही शूट में हिस्सा लिया था और अपने कपड़े भी नहीं बदले थे, जिससे वीडियो में उनकी मौजूदगी एक यादगार हिस्सा बन गई।

Air India टर्बुलेंस मामले में बड़ी खबर, विमान का एक पायलट डोप टेस्ट में पॉजिटिव, क्या हुआ था फुकेत-दिल्ली एयर इंडिया फ्लाइट में?

Air India Pilot News: एयर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में 4 अगस्त को हुई गंभीर टर्बुलेंस की घटना अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। The Times of India ने कई सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस एयर इंडिया विमान को उड़ाने वाले कैप्टन का पोस्ट-फ्लाइट डोप टेस्ट कथित तौर पर साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए पॉजिटिव आया है। हालांकि, इस दावे की अभी Air India ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद पायलटों का डोप टेस्ट किया गया था। लेकिन Air India का कहना है कि इस टेस्ट के नतीजे अभी उसे उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसलिए एयरलाइन फिलहाल यह बताने की स्थिति में नहीं है कि टेस्ट का परिणाम वास्तव में क्या रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि 4 अगस्त को टर्बुलेंस का सामना करने और अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिरने के बाद फ्लाइट के कैप्टन का डोप टेस्ट (नशीले पदार्थों की जांच) पॉजिटिव आया है।

Air India ने क्या कहा?

एयर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन को जानकारी है कि लागू नियमों और प्रोटोकॉल के तहत फ्लाइट के बाद पायलटों की स्क्रीनिंग की गई थी। हालांकि, टेस्ट के परिणाम एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके क्रू सदस्यों का नियमित रूप से ड्रग टेस्ट किया जाता है। यह प्रक्रिया किसी एक स्पेशल फ्लाइट या दुर्घटना जैसी घटना से जरूरी तौर पर जुड़ी नहीं होती। Air India के मुताबिक, वह नागरिक उड्डयन नियमों के तहत अपने क्रू की नियमित ड्रग टेस्टिंग कराती है। टाटा ग्रुप की एयरलाइन ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के साथ जांच में पूरा सहयोग जारी रखेगी।

एयरलाइन ने कहा, “एयर इंडिया किसी खास फ़्लाइट या ऑपरेशनल घटना से अलग, सिविल एविएशन नियमों का पालन करते हुए क्रू सदस्यों का नियमित ड्रग टेस्ट करती है। हम ज़रूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग करना जारी रखेंगे।” डोप टेस्ट का यह नतीजा ऐसे समय में आया है जब एविएशन अधिकारी 4 अगस्त की टर्बुलेंस की घटना की जांच कर रहे हैं। इस घटना के दौरान फ्लाइट अचानक लगभग 300 फीट नीचे गिर गया था, जिससे यात्री और क्रू सदस्य घायल हो गए थे।

आखिर 4 अगस्त को Phuket-Delhi फ्लाइट में हुआ क्या था?

नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने बताया कि फुकेत से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान में मंगलवार 4 अगस्त को चार से पांच मिनट तक हवा में तेज टर्बुलेंस हुई, जिसमें चालक दल के कुछ सदस्यों को रीढ़ और गर्दन में चोटें आईं। उन्होंने बताया कि हवा में अचानक आई टर्बुलेंस के कारण विमान करीब 300 फुट नीचे चला गया। इस घटना में चालक दल के चार सदस्यों समेत कम से कम 17 लोग घायल हो गए। उन्होंने बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस पूरे मामले की जांच कर रहा है।

नायडू ने राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि विमान को करीब पांच मिनट तक हवा में टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, “विमान को इसके बाद भी करीब एक घंटे तक उड़ान भरनी थी। इस दौरान चालक दल के सदस्यों ने यात्रियों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई। यह बहुत बहादुरी का काम था… मैं उनके साहस के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।” चोटों की गंभीरता के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि चालक दल के दो सदस्यों को रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और गर्दन के पास चोटें आई हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है।

13 यात्रियों को कराया गया भर्ती

विमान में 137 यात्री और चालक दल के आठ सदस्य सवार थे। मंगलवार को घटना के बाद 13 यात्रियों और चालक दल के चार सदस्यों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। Air India ने एक बयान में कहा, “चार अगस्त को फुकेत से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के विमान AI2379 से जुड़ी घटना के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए सभी 13 यात्रियों को पांच अगस्त को दोपहर 3:30 बजे तक अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।”

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बयान में आगे कहा गया, “चालक दल के चार सदस्य अब भी डॉक्टरों की निगरानी में हैं। उनका इलाज जारी है।’’ एयर इंडिया ने कहा कि उसकी टीम अस्पतालों में मौजूद हैं और प्रभावित लोगों के संपर्क में हैं।