यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा

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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की। जेलेंस्की ने युद्ध समाप्त कराने की भारत की कोशिशों के लिए आभार जताते हुए कहा कि 'शांति की जरूरत है' और यह भारत की स्पष्ट स्थिति है।

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जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जयशंकर के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम भारत के उस प्रयास के लिए आभारी हैं, जिसके जरिए वह रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस अन्यायपूर्ण युद्ध को समाप्त करना चाहता है।”

 

यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि यह समय युद्ध का नहीं होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया के अन्य मजबूत देश भी स्पष्ट रुख अपनाएंगे कि यह युद्ध समाप्त होना चाहिए और एक भरोसेमंद एवं स्थायी शांति जरूरी है।

 

काला सागर और नागरिक जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा

 

जेलेंस्की के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच काला सागर और वहां नागरिक जहाजों के लिए पैदा हो रहे खतरे पर भी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि उन क्षेत्रों तक खाद्य आपूर्ति को रोकना स्वीकार्य नहीं है, जहां लोग समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। उन्होंने रूस पर यूक्रेन के बंदरगाहों, अनाज गलियारे और आपूर्ति को बाधित करने का आरोप लगाया। जेलेंस्की के अनुसार, ऐसी कार्रवाइयों से वैश्विक संबंधों में भी बड़ी अस्थिरता पैदा हो रही है।

 

जयशंकर ने कहा- युद्ध खत्म करने में भारत मदद के लिए तैयार

 

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा कि उनकी जेलेंस्की के साथ बातचीत का केंद्र चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के तरीकों पर रहा।

 

इससे पहले कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा कि अगर भारत किसी भी तरीके से मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “अगर भारत किसी भी तरह मदद कर सकता है, तो हम वहां हैं।”

 

जयशंकर इस समय यूक्रेन के आधिकारिक दौरे पर हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान वह अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री रadoslaw Sikorski के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।

 

जेलेंस्की ने रूस के ड्रोन हमलों का भी किया जिक्र

 

जेलेंस्की ने कहा कि जयशंकर की यात्रा के दौरान भी रूस ने ‘शाहेद’ ड्रोन से हमले किए। उन्होंने दावा किया कि इन ड्रोनों के निर्माण में ईरान की सहायता का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यूक्रेन की लड़ाकू विमानन क्षमता के कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा। भारत लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध को बातचीत और कूटनीति के जरिए समाप्त करने तथा क्षेत्र में शांति कायम करने की वकालत करता रहा है।

 

 

'भारत एक वैश्विक महाशक्ति', यूक्रेन ने PM मोदी की तारीफ में पढ़े कसीदे 

यूक्रेन ने भारत को ‘वैश्विक महाशक्ति’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने अंतहीन युद्ध को खत्म कर शांति की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। कीव में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भारत की भूमिका की सराहना की।

 

जयशंकर की कीव यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है। यह पहली बार है जब भारत के किसी विदेश मंत्री ने यूक्रेन की ऐसी समर्पित द्विपक्षीय यात्रा की है। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

 

यूक्रेन ने भारत को बताया वैश्विक महाशक्ति

 

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बैठक के बाद भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि भारत एक वैश्विक शक्ति है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी स्वागत किया, जिसमें युद्ध को अनिश्चितकाल तक जारी रखने के बजाय इसे समाप्त करने और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई गई थी।

 

सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन कूटनीति के लिए तैयार है। दोनों देशों के बीच बातचीत में काला सागर में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की जरूरत पर भी चर्चा हुई।

 

रूसी हमलों के बीच जयशंकर का कीव दौरा

 

जयशंकर की यूक्रेन यात्रा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन के शहरों, बंदरगाहों और वाणिज्यिक समुद्री परिवहन मार्गों पर रूसी मिसाइल हमले लगातार जारी हैं।

 

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जयशंकर की यात्रा को बहादुरी भरा कदम बताते हुए कहा कि यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में हमले बढ़ रहे हैं।

 

बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति के अलावा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की।

 

Infrastructure से लेकर Pharma और Technology तक सहयोग

 

भारत और यूक्रेन ने अपने द्विपक्षीय सहयोग के कई क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्युटिकल सेक्टर, तकनीकी नवाचार और डिजिटलाइजेशन प्रमुख हैं।

 

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए पारस्परिक लाभ वाली नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। दोनों पक्षों ने अगली Intergovernmental Commission Meeting आयोजित करने पर भी काम करने की सहमति जताई है, ताकि संभावनाओं को ठोस और दोनों देशों के लिए लाभकारी परियोजनाओं में बदला जा सके।

PM मोदी ने पुतिन से क्या कहा था?

 

इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया था।

 

पीएम मोदी ने कहा था कि भारत शांति हासिल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध में बीतने वाला हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई उम्मीद और उत्साह पैदा करता है।

 

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि 'हमें अंतहीन युद्ध से निकलकर युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा।' उनके मुताबिक मानवता के कल्याण के लिए ऐसा करना जरूरी है।

 

यूक्रेन के लिए भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?

 

भारत लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली ने लगातार यह संदेश दिया है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और शांति के लिए सभी पक्षों के बीच बातचीत जरूरी है।

ऐसे में यूक्रेन की ओर से भारत को 'वैश्विक महाशक्ति' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी के शांति संबंधी संदेश का स्वागत किया जाना भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जयशंकर की कीव यात्रा से भारत-यूक्रेन संबंधों में व्यापार, तकनीक, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद भी बढ़ी है।

केन्या के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कामकाज बंद करने का दिया आदेश, 100 साल पुराने कारोबार पर लगाया ब्रेक!

Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।

इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।

क्या है पूरा विवाद?

राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।

‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’

Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।

रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”

टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।

टाटा का बयान

हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।

टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार

लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

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विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

कान्हा की नगरी मथुरा इन दिनों पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूबी हुई है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूर्व से पहले शहर की धड़कनों में भक्ति का उल्लास और गहरा होता जा रहा है। मंदिरों की भव्य सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और गलियों-चौराहों पर गूंजते राधे-कृष्णा के जयकारों के बीच आज श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया।

 

शोभायात्रा में ब्रज की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को मनोहारी छटा दिखाई दी, मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु और स्थानीय लोग देर तक कलाकारों की प्रस्तुतियों में रमते रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े तो मानो ब्रज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत सड़कों पर जीवंत हो उठी।

 

ढोल-मृदंग की थाप, लोक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन और कलाकारों के मनमोहक नृत्य ने शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए। संगीत की लय बढ़ी तो श्रद्धालुओं के कदम भी थिरकने लगे। कोई हाथ उठाकर जयकारे लगा रहा था तो कोई कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच भक्ति में झूमता नजर आया। पूरे मार्ग पर बार-बार 'राधे-राधे' और 'श्रीकृष्ण' के जयघोष गूंजते रहे।

 

सड़कें बनीं ब्रज संस्कृति का मंच

 

श्रीकृष्ण जन्मस्थान से आगे बढ़ी शोभायात्रा के दौरान ब्रज की समृद्ध लोक परंपराओं की विविध झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने न केवल श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा।

 

जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालु कलाकारों की प्रस्तुतियों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनता दिखाई दिया। भक्ति और संस्कृति के इस मिलन ने शोभायात्रा को महज धार्मिक आयोजन न रहकर ब्रज की जीवंत विरासत का उत्सव बना दिया।

 

जन्माष्टमी के लिए सज रही कृष्ण की नगरी

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृंदावन में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। देश-दुनिया से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। प्रमुख मंदिरों, बाजारों और मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। रात होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से नहाए शहर का दृश्य देखते ही बन रहा है।

 

हर तरफ कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर उत्सुकता है, मंदिरों में विशेष आयोजन की तैयारियां चल रही हैं तो बाजार भी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार हैं। कृष्ण भक्ति के गीतों और जयकारों से शहर का माहौल लगातार भक्तिमय होता जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन अलर्ट

 

इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वृंदावन पहुंचने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के आगमन और जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।

 

प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि जन्माष्टमी के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और पर्व शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।

 

हर ओर बस कृष्ण भक्ति का रंग

 

मथुरा में जन्माष्टमी का उल्लास अब केवल मंदिरों की चौखट तक सीमित नहीं है। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मार्गों तक हर जगह कृष्ण भक्ति की छटा दिखाई दे रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा ने इस उत्साह को नई ऊंचाई दे दी।

 

ब्रज की लोक संस्कृति से सजे कलाकार, ढोल-मृदंग की थाप पर थिरकते श्रद्धालु और गूंजते जयकारों के बीच ऐसा लगा मानो पूरी मथुरा नगरी स्वयं कान्हा के स्वागत में निकल पड़ी हो। जन्माष्टमी से पहले ही कान्हा की नगरी में उत्सव का रंग गहरा हो चुका है, हर ओर भक्ति है, हर कदम पर उल्लास है और हर जुबां पर बस एक ही नाम है..श्रीकृष्णा, श्रीकृष्णा।

ब्रिटेन पहुंचे मोहन भागवत, हिंदू संगठनों ने स्वागत किया:सरकार ने संसद में कहा- दौरा इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करता है; पहले उठे थे सवाल

100 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन पहुंचने पर स्वागत किया। वे तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में गुरुवार को लंदन पहुंचे हैं। भागवत का दौरा संगठन की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियानों का हिस्सा है। इस दौरे के तहत वे अमेरिका और कनाडा भी जा चुके हैं। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने गुरुवार को संसद में लिखित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भागवत की यात्रा देश के इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करती है। दरअसल, ब्रिटिश-भारतीय सांसद नादिया व्हिटोम ने पिछले हफ्ते संसद में सवाल पूछा था कि कि क्या इस दौरे की पूरी समीक्षा नियमों के तहत की गई है मंत्री ने कहा- सभी लोगों को इमिग्रेशन नियम पूरे करने होंगे

मंत्री डैन जार्विस ने जवाब दिया कि गृह मंत्रालय व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। हालांकि, मंत्रालय खतरों की पूरी श्रेणी से निपटने और हिंसा व व्यक्तियों तथा समुदायों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “ब्रिटेन में प्रवेश की मांग करने वाले सभी लोगों को इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करनी होंगी।” 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता:हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े, गलत सोच इंसान को जानवरों के करीब ले जाती है RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त करीब 42 मिनट स्पीच दी। पूरी खबर पढ़ें…

‘योगी बाबा आयो है, 1051 करोड़ लायो है’, श्रीकांत शर्मा ने गिनाए ब्रज के विकास कार्य; बोले- जहां कीचड़ था, वहां बनी सड़कें

'योगी बाबा आयो है, 1051 करोड़ लायो है', श्रीकांत शर्मा ने गिनाए ब्रज के विकास कार्य; बोले- जहां कीचड़ था, वहां बनी सड़कें

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गुरुवार को विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक श्रीकांत शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्वागत और अभिनंदन करते हुए 2017 के बाद ब्रज में हुए विकास कार्यों को गिनाया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत ब्रज के अंदाज में करते हुए कहा कि योगी बाबा आयो हैं और 1051 करोड़ लायो हैं। 

 

मथुरा-वृंदावन में पुल और सड़कों का जिक्र

 

भाजपा विधायक श्रीकांत शर्मा कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ब्रज ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में यमुना और गंगा की तरह विकास का प्रवाह लगातार तेज गति से जारी है। वर्ष 2017 से पहले ब्रज की हालत बहुत खराब थी। जहां घुटनों तक कीचड़ होता था, वहां अब खड़ंजा बन गया है। जहां गड्ढे होते थे, वहां इंटरलॉकिंग हो गई है और जहां सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे थे, वहां मजबूत सड़कें बन गई हैं। पहले यमुना पार जाने के लिए ब्रजवासियों के पास एक ही पुल था, लेकिन अब तीन पुल उपलब्ध हैं। मथुरा में लक्ष्मी नगर के पास पुल और वृंदावन में दो पुल बनाए गए हैं।  

 

भाजपा विधायक ने कहा कि पहले मथुरा से वृंदावन जब शाम को आते थे तो 9 बजे के बाद दूधियों से दूध की कैन और साइकिल तक छीन ली जाती थी। अब मथुरा के भूतेश्वर से रंगजी मंदिर तक चौड़ी सड़क बन गई है और रात में दूधिया रोशनी से पूरा मार्ग जगमगाता है। उन्होंने भूतेश्वर से गोवर्धन चौराहा और गोवर्धन होते हुए डींग बॉर्डर तक सड़क निर्माण का भी जिक्र किया। कहा कि 2017 से पहले इन मार्गों पर जगह-जगह बड़े गड्ढे थे और मोटरसाइकिल-साइकिल सवार गिर जाते थे। आज बेहतर सड़कों के कारण आवागमन सुगम हुआ है।

 

यमुना में गिर रहे 36 नालों में से 32 टैप किए जा चुके

श्रीकांत शर्मा ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले मथुरा-वृंदावन के 36 नाले सीधे यमुना में गिरते थे, लेकिन अब इनमें से 32 नाले बंद किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल चार नाले यमुना में गिर रहे हैं और ये चारों भी अक्टूबर तक पूरी तरह टैप कर दिए जाएंगे। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 70 सालों में कुछ नहीं किया, जबकि 2017 से 2022 के बीच 36 में से 32 नालों को बंद किया गया।

 

भाजपा विधायक ने जवाहर बाग का जिक्र करते हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जवाहर बाग पर कब्जे को लेकर हुई घटना कलंक है, जिसे लोगों को समय-समय पर याद दिलाते रहना चाहिए। आज जवाहर बाग को देखकर लोग खुद इसकी बदली तस्वीर देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे ब्रज 84 कोस क्षेत्र में यात्रा के पड़ाव स्थलों को विकसित करने का काम भी किया है।

Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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Gold Price Today: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले सोना ₹3400 महंगा हुआ, चांदी भी ₹5000 उछली

Gold Price Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार, 3 सितंबर को सोने की कीमत में जोरदार तेजी आई। 6 कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोना ₹3,400 उछलकर ₹1,59,500 प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट वाला वाला सोना ₹1,56,100 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

चांदी की कीमत में भी बड़ी तेजी देखने को मिली। चांदी ₹5,000 बढ़कर ₹2,40,500 प्रति किलो पहुंच गई। पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव ₹2,35,500 प्रति किलो था।

क्यों बढ़े सोने-चांदी के दाम?

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमॉन के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड हाल की ऊंचाई से नीचे आई है। इसके अलावा, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। इससे सोने और चांदी को सपोर्ट मिला।

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के निजी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख को लेकर बाजार की धारणा बदली।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। डॉलर कमजोर होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना सस्ता पड़ता है। इससे कीमतों को सहारा मिलता है।

इंटरनेशनल मार्केट में भी तेज उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $55.76 यानी 1.27% बढ़कर $4,443.93 प्रति औंस पहुंच गया। चांदी भी करीब 1% की तेजी के साथ $65.77 प्रति औंस पर पहुंच गई।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद फिर $4,440 के आसपास लौट आया। कमजोर डॉलर ने कीमती धातुओं की कीमतों को सहारा दिया।

Gold Jewellery Price: 18, 14 या 9 कैरेट की ज्वेलरी कितने में बनेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

आगे क्या रहेगा रुख?

अमेरिकी जॉब मार्केट के अहम आंकड़ों से पहले सोने और चांदी की आगे की चाल को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। कमजोर आंकड़े आने पर डॉलर और कमजोर हो सकता है, जिससे सोने को और सपोर्ट मिल सकता है।

वहीं, अगर रोजगार के आंकड़े मजबूत रहे या फेड ने सख्त रुख अपनाया, तो ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में सोने और चांदी पर दबाव आ सकता है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

गोरखपुर में शिक्षक दिवस पर 81 शिक्षकों को सम्मानित करेंगे CM योगी, देखें पूरी डिटेल

गोरखपुर में शिक्षक दिवस पर 81 शिक्षकों को सम्मानित करेंगे CM योगी, देखें पूरी डिटेल

CM Yogi Adityanath

शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में भविष्य की पीढ़ियों को आकार देने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों की भूमिका शिक्षक दिवस पर स्वर्णिम अध्याय में दर्ज हो जाएगी। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विद्यालयों का उचित प्रबंधन, नवाचार और विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने वाले प्रदेश के कुल 81 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित करेंगे।

5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करने का भव्य समारोह गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा। पुरस्कार के लिए चयनित प्रदेशभर के शिक्षकों को विशिष्ट अतिथि की तरह ससम्मान ठहराने की व्यवस्था होटलों में की गई है। 

 

समाज के प्रति शिक्षक के समर्पण को प्रतिष्ठित करने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें कुल मिलाकर 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिन शिक्षकों को चयनित किया गया है उनमें से 5 को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को अच्छे शिक्षण कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है। साथ ही बेहतर ढंग से समाज में शिक्षा की अलख जगाने के उनके प्रयासों को और प्रभावी बनाना है।

 

पुरस्कार राशि के रूप में मिलेंगे 25 हजार रुपये

योगी सरकार, राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह के साथ ही पुरस्कार राशि के रूप में 25 हजार रुपये भी भेंट करेगी। इसके अलावा सम्मानित शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में प्रतिवर्ष 4000 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की सीमा भी दो वर्ष बढ़ जाएगी। 

 

 

बेसिक शिक्षा के इन शिक्षकों को दिया जाएगा राज्य अध्यापक पुरस्कार

1. संगीता शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय धनौली, अकोला, आगरा)

2. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौबारा, गजरौला, अमरोहा)

3. प्रीति मिश्रा (सहायक अध्यापक, पीएम श्री उच्च विद्यालय बेलवा, पयागपुर, बहराइच)

4. सलमा खान (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र, बलरामपुर)

5. उर्मिला देवी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय खेमईपुर, भदोही)

6. रचना कपूर (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली छोइया, हल्दौर, बिजनौर)

7. किरन देवी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अंबियापुर, बदायूं)

8. जूही मलिक (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय स्याना, बुलंदशहर)

9. उषा सिंह (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सैदपुर, शहबादगंज, चंदौली)

10. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अमानाबाद, फर्रुखाबाद)

11. अर्चना पांडेय (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट स्कूल पर्थला खंजरपुर, गौतमबुद्धनगर)

12. ज्योत्स्ना गोस्वामी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ननकागढ़ी, राजापुर, गाजियाबाद)

13. शुचि त्यागी (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पिपलैडा, दहौलाना, हापुड़)

14. विजया अवस्थी (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय मंसूरनगर, पिहानी, हरदोई)

15. पल्लवी चतुर्वेदी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी, हाथरस)

16. प्रीति श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पठाकरका, बंगरा, झांसी)

17. डॉ. सुमनलता यादव (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुंवरपुर बनवारी, छिबरामऊ, कन्नौज)

18. डॉ. कामायनी शर्मा (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय औरोताहरपुर, ककवन, कानपुर नगर)

19. सुमन कुशवाहा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर, नेवादा, कौशाम्बी)

20. प्रीति गुप्ता (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड, बिरधा, ललितपुर)

21. विनीता (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू, गोसाईगंज, लखनऊ)

22. सीमा कुमारी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय महटौली, घिरोर, मैनपुरी)

23. प्रतिभा रानी भारती (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, हर्रा, सरूरपुर, मेरठ)

24. सुनीता रानी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां, भगतपुर, मुरादाबाद)

25. आरती शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुस्तमगढ़, मुज्जफरनगर)

26. वैलेंटिना विक्टर (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अहमदनगर, नगर क्षेत्र, रामपुर)

27. अमिता टंडन (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय राजपुर रानी, श्रावस्ती)

28. मीरा सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह, चोपन, सोनभद्र)

29. प्रीति भारती (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवलगंज, हसनगंज, उन्नाव)

30. नीलम राय (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह, वाराणसी)

31. सय्यदा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु, मरौरी, पीलीभीत)

32. सुनीत मित्र पांडेय (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गोकुला, नवाबगंज, गोंडा)

33. अमर सिंह (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बहरावद, अतरौली, अलीगढ़)

34. राम मिलन गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च विद्यालय, नसीरपुर छितौना, जहांगीरगंज, अम्बेडकरनगर)

35. पंकज कुमार द्विवेदी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, ठेउंगा, सोहावल, अयोध्या)

36. प्रदीप कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरवपुर, कोयलसा, आजमगढ़)

37. अजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इब्राहिमाबाद, मुरली छपरा, बलिया)

38. राहुल कुमार शुक्ल (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बहुता, त्रिवेदीगंज, बाराबंकी)

39. हरिशंकर त्रिपाठी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा, मानिकपुर, चित्रकूट)

40. ओमवीर सिंह (प्रधानाध्यापक, पीएम श्री उच्च प्राथमिक विद्यालय पिदौरा, मरेहरा, एटा)

41. वीरेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय ताखा, इटावा)

42. आनंद कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर, ऐरायां, फतेहपुर)

43. संतोष कुशवाहा (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय मनिहारी, गाजीपुर)

44. नीतिराज सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, चुनकी का डेरा, सुमेरपुर, हमीरपुर)

45. राजेश कुमार उपाध्याय (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारीगांव, घुघली, महराजगंज)

46. संजय कुमार मिश्र (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय गरियांव, मुंगरा बादशाहपुर, जौनपुर)

47. विनीत कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अन्ता, रसूलाबाद, कानपुर देहात)

48. धनंजय प्रताप सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला, कासगंज)

49. प्रमोद कुमार (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रतासिया, बेहजम, लखीमपुर खीरी)

50. नवीन कुमार त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, पीएम श्री कम्पोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव, गोरखपुर)

51. ओमप्रकाश तिवारी (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलखी, कबरई, महोबा)

52. अनिल कुमार मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर, रानीपुर, मऊ)

53. दयानंद मिश्रा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सिद्धि, पहारी, मिर्जापुर)

54. डॉ. देवेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय बरना, प्रतापगढ़)

55. रामलखन मौर्या (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिरसा, प्रतापपुर, प्रयागराज)

56. बृजकिशोर (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय रसूलपुर, गुन्नौर, सम्भल)

57. अरुण कुमार गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय धनौरा, ददरौल, शाहजहांपुर)

58. दिनकर चौहान (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गंगेरू प्रथम, कांधला, शामली)

59. महेश कुमार (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बूड़ा, बर्डपुर, सिद्धार्थनगर)

60. अतुल शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अडावेनिया ग्रांट, एलिया, सीतापुर)

61. सत्येंद्र कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय साढापुर, प्रतापपुर कमैचा, सुल्तानपुर)

 

माध्यमिक विद्यालयों के इन शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार

1. रेनू तोमर (प्रधानाचार्य, जवाहर लाल मेमोरियल गर्ल्स इंटर कॉलेज, गाजियाबाद)

2. डॉ. रमेश प्रताप सिंह (प्रधानाचार्य, उदय प्रताप इंटर कॉलेज, वाराणसी)

3. गिरिजेश कुमार मल्ल (भाषा अध्यापक, श्री गांधी विद्यालय इंटर कालेज, बछरावां, रायबरेली)

4. डॉ. अनुज कुमार अग्रवाल (भाषा अध्यापक, राजकीय इंटर कॉलेज, सलेमपुर, कांठ, मुरादाबाद)

5. महेश्वर प्रसाद त्रिपाठी (भाषा अध्यापक एलपीके इंटर कॉलेज, बसडीला, सरदार नगर, गोरखपुर)

6. अरुण कुमार ओझा (गणित अध्यापक, हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज, संतकबीरनगर)

7. डॉ. गौरव वार्ष्णेय (विज्ञान अध्यापक, जैन इंटर कॉलेज, रामपुर)

8. डॉ. अभिषेक कुमार सिंह (विज्ञान अध्यापक, हीरालाल रामनिवास इंटर कॉलेज, संतकबीरनगर)

9. अमित कुमार शर्मा (विज्ञान अध्यापक, राजकीय इंटर कॉलेज, अनूपपुर, डिबाई, हापुड़)

10. डॉ० हरिश्चन्द्र यादव (मानविकी अध्यापक, विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज, ज्ञानपुर, भदोही)

11. अश्वनी कुमार जैन (मानविकी अध्यापक, श्री महावीर दिगम्बर जैन इंटर कॉलेज, फिरोजाबाद)

12. राजपाल (मानविकी अध्यापक, दरबारी लाल शर्मा इंटर कॉलेज, रिठौरा, बरेली)

13. डॉ. संजय कुमार सिंह (वाणिज्य अध्यापक, श्री गुलाबराय इंटर कॉलेज, बरेली)

14. गुणधर लाल जैन (वाणिज्य अध्यापक, एमडी जैन इंटर कॉलेज, आगरा)

15. प्रकाश नारायण सिंह (कला अध्यापक, बंगाली टोला इंटर कॉलेज, वाराणसी)

 

माध्यमिक विद्यालयों के इन शिक्षकों को मिलेगा मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार

1. डॉ. योगेन्द्र प्रताप सिंह (प्रधानाचार्य, पं. दीनदयाल उपाध्याय सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, लखीमपुर खीरी)

2. विक्रम बहादुर सिंह परिहार (प्रधानाचार्य, ज्वाला देवी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, प्रयागराज)

3. कल्पना सिंह (प्रधानाचार्य, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, झांसी)

4. डॉ. आनन्द कुमार (मानविकी अध्यापक, महर्षि दयानन्द विद्यापीठ इंटरमीडिएट कॉलेज, गोविंदपुरम, गाजियाबाद)

5. विजय पाल (कला अध्यापक, जयनारायण सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, बरेली)

बाढ़ की समस्या का कराएंगे स्थायी समाधान : सीएम योगी

बाढ़ की समस्या का कराएंगे स्थायी समाधान : सीएम योगी

CM Yogi flood problem

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ का स्थायी समाधान कराने के लिए आश्वस्त करते हुए कहा कि मां गंगा के उफान से पानी का फैलाव हो रहा है। इससे फसल का काफी नुकसान हुआ। सरकार ने 9 वर्ष में सैकड़ों करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। जनप्रतिनिधियों के मुताबिक बाढ़ की समस्या का समाधान करने के लिए गंगा नदी की ड्रेजिंग कर उसे चैनलाइज करना होगा। सिल्ट को बाहर तटबंध के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह परियोजना यहां की आवश्यकता है। नदी के चैनलाइज होने से फसल बचेगी और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी। 

 

मुख्यमंत्री ने गुरुवार को हवाई सर्वेक्षण कर फर्रुखाबाद की बाढ़ प्रभावित सदर, कायमगंज व अमृतपुर तहसीलों में बाढ़ के हालात देखे। इसके पश्चात पुलिस लाइन में 1000 परिवारों को बाढ़ राहत सामग्री का वितरण किया गया। मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से कई परिवारों को राहत सामग्री, आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी दी। उन्होंने पीड़ित परिवारों से संवाद कर उनका दुख साझा किया और विश्वास दिलाया कि सरकार हर दुख-दर्द में आपके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने प्रशासन, पीडब्ल्यू समेत संबंधित विभागों को बाढ़ का पानी उतरते ही टूटी सड़कों का तत्काल निर्माण शुरू करने का निर्देश भी दिया। 

बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए किसानों का मांगा साथ

सीएम ने कहा कि प्रशासन ड्रेजिंग का कार्य शुरू करने की तैयारी करें। बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए किसानों का सहयोग मांगते हुए सीएम ने कहा कि इसमें यदि आपकी जमीन आएगी तो उचित मुआवजा मिलेगा। हम फर्रुखाबाद को बाढ़ से मुक्त कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएंगे। उन्होंने बाढ़ से फसल को हुए नुकसान का सर्वे करने का निर्देश दिया और कहा कि यह रिपोर्ट आते ही किसान के खाते में डीबीटी के माध्यम से सहायता धनराशि भेज दी जाएगी।

अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज व अन्य दवाएं उपलब्ध

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सीजन में सांप, बिच्छू व अन्य विषैले कीड़ों का भय रहता है। सरकार ने पहले ही सीएचसी, जिला अस्पतालों आदि में एंटी स्नेक वेनम, एंटी रैबीज व पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था की है। जिन क्षेत्रों में पानी घुस गया है, वहां पशुओं के चारे, वैक्सीन, दवा आदि की भी व्यवस्था है। जनप्रतिनिधि व फील्ड में तैनात टीम लगातार जनसेवा कर रही है।

50 किलो राहत सामग्री किट दे रही सरकार

सीएम ने बताया कि पिछले दिनों लखनऊ में फर्रुखाबाद के विधायकों व जिलाध्यक्ष के साथ बैठक में मैंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की चर्चा की थी। प्रभारी मंत्री को भेजकर राहत कार्यों की निगरानी, समीक्षा व ठोस रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा था। हमारी पूरी संवेदना पीड़ितों के प्रति है। राहत कार्यों के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम, बाढ़ चौकियां व राहत शिविर चल रहे हैं। जिन गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है, वहां प्रभावित परिवारों के लिए शासन ने रहने, भोजन आदि की व्यवस्था कराई है। जो लोग घर में सुरक्षित रह सकते हैं, उन तक 50 किलो राहत सामग्री की किट पहुंचाई जा रही है, जिसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 10 किलो आलू, 2 किलो अरहर दाल, तेल, चना, लाई, मसाला, बाल्टी, बरसाती, डिग्निटी किट समेत 50 आइटम शामिल हैं। 15 दिनों से तीनों विधायक सभी पीड़ितों तक पहुंचकर स्थानीय प्रशासन की मदद से राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं। 

CM Yogi flood problem

हर दुख-दुर्द में साथ खड़ी है सरकार

मुख्यमंत्री ने बाढ़ की विभीषिका से जूझ रही 102 गांवों की जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार हर दुःख-दर्द में साथ खड़ी है। जरूरत के मुताबिक हर मदद पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को पढ़ाने के लिए पहली बार शिक्षक शिविरों व गांवों में जाकर कक्षाएं ले रहे हैं। स्वास्थ्य शिविर, राहत सामग्री समेत सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 

अब बदल चुका है फर्रुखाबाद

सीएम ने कहा कि फर्रुखाबाद बदल चुका है। यहां गंगा एक्सप्रेसवे का लिंक एक्सप्रेसवे आ रहा है और यह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के साथ जुड़ेगा। अब फर्रुखाबाद के पास भी अपना एक्सप्रेसवे होगा। सड़कों के चौड़ीकरण, ओवरब्रिज तथा गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। सड़कें अच्छी होने से बाढ़ के बावजूद कनेक्टिविटी बनी हुई है। 

किसानों के साथ है सरकार

सीएम ने कहा कि फर्रुखाबाद खेती किसानी की बेल्ट है। यहां आलू किसानों की काफी संख्या है। जिन किसानों का आलू कोल्ड स्टोरेज में है, उनके लिए प्रति बोरा धनराशि की व्यवस्था की गई है। डबल इंजन सरकार किसानों के साथ है। 2017 में 275 से 300 रुपये के बीच प्रति क्विंटल गन्ना का दाम मिलता था। आज यह राशि 400 रुपये क्विंटल है। हमने टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर पर्ची, घटतौली आदि से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि का लाभ दिलाने, फसलों की खरीद के साथ ही मक्का के लिए भी क्रय केंद्र स्थापित किए हैं। पेरू की मदद से आगरा में आलू का अंतरराष्ट्रीय केंद्र काम कर रहा है। दुनिया के बाजार की मांग के अनुरूप आलू उपलब्ध करवाना और किसानों को वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ कर उनकी आमदनी कई गुना बढ़ाई गई है।

अब युवाओं की नौकरी से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता

सीएम ने कहा कि पहली बार बिना भेदभाव हर जनपद के युवाओं को सरकारी नौकरी मिल रही है। फर्रुखाबाद के साथ कोई भेदभाव, अन्याय नहीं कर सकता। अब सरकारी नौकरी, ओडीओपी आदि के माध्यम से रोजगार के नए अवसर आ रहे हैं। सुरक्षा के बेहतरीन माहौल के कारण यूपी को सर्वाधिक निवेश प्रस्ताव (50 लाख करोड़) प्राप्त हुए हैं। इस निवेश से युवाओं को रोजगार व सम्मान मिलेगा। 2017 के पहले सैफई सिंडिकेट नौकरी पर हावी था, नौजवान नौकरी से वंचित रहता था। अब युवाओं की नौकरी से कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता। किसी ने कोशिश की तो उसे जेल भेजेंगे और संपत्ति भी जब्त करेंगे। 

बेटियों के पढ़ने से स्वावलंबी होता है समाज

सीएम ने कहा कि उद्योग लगाने वाले युवाओं के लिए सीएम युवा उद्यमी विकास अभियान, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग, गरीब व निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय विद्यालय के साथ ही हर विकास खंड में कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं, जो अब 12वीं तक चल रहे हैं। बेटी जब पढ़ती है तो सिर्फ परिवार नहीं, बल्कि समाज भी स्वावलंबी होता है। अब सीएम कंपोजिट विद्यालय स्वीकृत हो रहे हैं। पहली से 12वीं क्लास तक इंटीग्रेटेड कैंपस में बच्चों के लिए शिक्षा व स्किलिंग की सुविधा है। उनके एंप्लॉयमेंट की व्यवस्था भी होगी। हर जनपद में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल स्किलिंग एंड एंप्लॉयमेंट जोन बनाने की कार्रवाई बढ़ी है। 60 वर्ष से अधिक आयु की सभी माताएं परिवहन निगम की बसों में लोकमाता अहिल्याबाई निशुल्क यात्रा की सुविधा प्राप्त कर रही हैं। स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार मेधावी बेटियों को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत जल्द ही स्कूटी दी जाएंगी। 

गरीबों के हक पर डकैती डलवाता था सैफई सिंडिकेट

सीएम ने 3.52 लाख से अधिक आउटसोर्स कार्मिकों के साथ होने वाले भेदभाव का जिक्र करते हुए नवगठित उप्र आउटसोर्स सेवा निगम के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब कोई भेदभाव, लूट नहीं चलेगी। पहले की सरकार में ज्यादातर आउटसोर्सिंग एजेंसियां सैफई सिंडिकेट की थीं। वे गरीबों के हक पर डकैती डलवाते थे। हमारी सरकार ने कल उस पर ताला लगवा दिया। यह निगम हर कर्मचारी को न्यूनतम मानदेय भी दिलाएगा। जो कर्मचारी पहले 11,000 के बजाय 6 हजार ही पाता था, अब वह भेदभाव का शिकार नहीं होगा। अब न्यूनतम 20,000 मानदेय होगा और यह पैसा सीधे अकाउंट में जाएगा। स्वास्थ्य बीमा, ईपीएफ, घटना-दुर्घटना, बेटी की शादी, बच्चों की उच्च शिक्षा में भी सुरक्षा कवर मिलेगा। शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों आदि को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 

अब जिम्मेदारी लेने वाली सरकार 

सीएम ने कहा कि अच्छी सरकार किसानों, गरीबों, युवाओं, महिलाओं समेत सभी वर्ग के लिए कार्य करती है। अब बाढ़ पीड़ित परिवारों को जमीन का पट्टा, आवास आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले गरीब का घर आग से जलने पर उसे 4 हजार रुपये देकर कहा जाता था कि जाओ, जो करना है, करो। सरकार के इस लापरवाह व्यवहार का दंश गरीब को झेलना पड़ता था। अब डबल इंजन सरकार पूरी जिम्मेदारी लेते हुए गरीब के साथ खड़ी है। 

 

इस अवसर पर सांसद मुकेश राजपूत, विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी, सुनील कुमार शाक्य, नागेंद्र सिंह राठौर, डॉ. सुरभि, विधान परिषद सदस्य प्रांशुदत्त द्विवेदी, जिला पंचायत प्रशासक मोनिका यादव, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू, प्रदेश महामंत्री शंकरलाल लोधी, जिलाध्यक्ष फतेह चंद वर्मा आदि उपस्थित रहे। 

सीएम ने आश्रयहीन परिवारों को दिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा राहत राशि के चेक 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आश्रयहीन परिवारों को भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी दी। मुख्यमंत्री के हाथों सदर तहसील के प्रेमचंद, कुसुम देवी, गिरीश, ज्ञान देवी, मुकेश, रामबरन, रवीश, बृजमोहन, सुआलाल व अरुणेश को भूमि आवंटन के स्वीकृति प्रमाण पत्र व 1.20 लाख की राहत राशि मिली।