हिमालय के ग्लेशियरों पर अब सिर्फ बढ़ते तापमान का खतरा नहीं है। हवा में मौजूद कालिख और धूल भी बर्फ के पिघलने की रफ्तार बढ़ा रही है। गाड़ियों, कोयला बिजलीघरों, फैक्ट्रियों, ईंट भट्ठों, घरों के चूल्हों और जंगलों व खेतों में लगने वाली आग से निकलने वाले कण हवा के साथ ऊंचे पहाड़ों तक पहुंचते हैं और ग्लेशियरों की सफेद सतह पर जम जाते हैं। बर्फ पर जमी कालिख सूरज की गर्मी ज्यादा सोखती है। इससे बर्फ जल्दी पिघलने लगती है। इससे ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ सकती है। वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए बढ़ रही है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के साथ प्रदूषण का यह असर ग्लेशियरों को कमजोर और अस्थिर कर सकता है। नेपाल इसका चिंताजनक उदाहरण है। यहां हाल में ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक बाढ़ आई और भारी नुकसान हुआ। इस घटना की सटीक वजह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि बढ़ता तापमान और ग्लेशियरों पर जमा प्रदूषण ऐसे हादसों का जोखिम बढ़ा सकते हैं। सफेद बर्फ पर कालिख पड़ते ही पिघलना क्यों बढ़ जाता है? साफ बर्फ सूरज की करीब 90% रोशनी वापस अंतरिक्ष में भेज देती है। इसलिए वह सूरज की गर्मी का बड़ा हिस्सा सोखने से बच जाती है। जब बर्फ पर कालिख यानी ब्लैक कार्बन जमती है तो उसकी सफेदी कम हो जाती है। सतह सूरज की ज्यादा ऊर्जा सोखने लगती है और तेजी से गर्म होती है। इससे बर्फ के पिघलने की रफ्तार भी बढ़ जाती है। एक मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, 2007 से 2016 के बीच हिमालय में ग्लेशियरों के कुल बर्फ नुकसान में दक्षिण एशिया से आया ब्लैक कार्बन एक-तिहाई तक जिम्मेदार हो सकता है। यानी ग्लेशियरों पर असर सिर्फ बढ़ते तापमान का नहीं है। बर्फ पर जम रही कालिख भी उसके गर्म होने और पिघलने में भूमिका निभा रही है। पाकिस्तान से उठी कालिख भी हिमालय तक पहुंच रही सैटेलाइट डेटा के अध्ययन से पता चला है कि पाकिस्तान के औद्योगिक मैदानी इलाकों से निकलने वाला ब्लैक कार्बन और खनिज धूल हवा के साथ ऊंचे हिमालयी ग्लेशियरों तक पहुंच सकता है। ये महीन कण ग्लेशियर की सतह पर जमते हैं और बर्फ को गहरा कर देते हैं। इससे सूरज की ज्यादा ऊर्जा सोखी जाती है और पिघलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। तेजी से पिघलने वाला पानी ग्लेशियर की दरारों के रास्ते अंदर भी जा सकता है। इससे बर्फ के भीतर पानी के रास्ते बन सकते हैं और ग्लेशियर की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। अगर कमजोर ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आता है तो फ्लैश फ्लड यानी अचानक तेज बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। प्रदूषण सिर्फ बर्फ को काला नहीं करता ब्लैक कार्बन का असर ग्लेशियर की सतह तक सीमित नहीं है। हवा में मौजूद कालिख सूरज की गर्मी सोखकर पहाड़ों के ऊपर के वातावरण को गर्म कर सकती है और बादलों के बनने के तरीके को भी प्रभावित कर सकती है। इससे कुछ इलाकों में बर्फबारी कम होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में ग्लेशियर पर दोहरा दबाव पड़ता है। एक तरफ पुरानी बर्फ तेजी से पिघलती है और दूसरी तरफ उसकी भरपाई के लिए नई बर्फ कम मिल सकती है। कालिख के बड़े स्रोत कौन से हैं? दक्षिण एशिया में ब्लैक कार्बन के प्रमुख स्रोतों में पेट्रोल-डीजल वाहन, कोयला आधारित बिजलीघर और उद्योग, ईंट भट्ठे, लकड़ी और ठोस ईंधन से चलने वाले पारंपरिक चूल्हे, जंगलों की आग और फसल जलाना शामिल हैं। इनसे निकले महीन कण हवाओं के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं। यानी ग्लेशियर से हजारों किलोमीटर दूर पैदा हुआ प्रदूषण भी हिमालय की बर्फ तक पहुंच सकता है। अच्छी खबर: कालिख कम करने का असर जल्दी दिखता है ब्लैक कार्बन के मामले में राहत की एक वजह भी है। कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले यह वातावरण में बहुत कम समय तक रहता है। आमतौर पर कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक। इसलिए इसके उत्सर्जन में कमी लाने पर असर जल्दी दिखाई दे सकता है। इसका एक उदाहरण 2020 का कोविड लॉकडाउन है। 2023 में प्रकाशित एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने उस दौरान हुए प्रदूषण में कमी का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि प्रदूषण घटने से हिमालय की बर्फ ज्यादा चमकीली हुई और उसके पिघलने की दर 40% तक कम हो गई। इससे पता चलता है कि वाहनों, उद्योगों और दूसरे स्रोतों से निकलने वाली कालिख को कम करके ग्लेशियरों पर पड़ने वाला दबाव कुछ हद तक जल्दी घटाया जा सकता है। हिमालय का संकट सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं हिमालय के ग्लेशियर भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया के लिए बेहद अहम हैं। इनसे निकलने वाला पानी कई बड़ी नदियों के प्रवाह में योगदान देता है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से कुछ समय के लिए नदियों में पानी बढ़ सकता है, लेकिन लंबे समय तक यही रफ्तार बनी रही तो ग्लेशियरों में जमा बर्फ घटती जाएगी। इससे भविष्य में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ग्लेशियरों के पास बनी झीलों के फटने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसी बाढ़ कुछ ही समय में निचले इलाकों में भारी तबाही ला सकती है। —————— यह खबर भी पढ़ें… हिमालय में 7 मिनट में तबाही, चीन की तैयारी नाकाम:पिछली बार झील फटी थी, इस बार ग्लेशियर ही टूट गया 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा पर हिमालय की एक घाटी में ऐसी तबाही आई, जिसमें 1200 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हैरानी की बात ये थी कि चीन इस इलाके में ऐसी आपदा से निपटने की तैयारी पहले ही कर चुका था। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय परिवारों के लिए सितंबर का वीजा बुलेटिन राहत लेकर आया है। परिवार-आधारित कई श्रेणियों में ग्रीन कार्ड मिलने की तारीखें काफी आगे बढ़ी हैं। हालांकि, EB-1 श्रेणी में खास बदलाव नहीं हुआ है। EB-1 श्रेणी में असाधारण प्रतिभा वाले लोग, बेहतरीन प्रोफेसर-रिसर्चर और एमएनसी के कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। भारत के लिए सितंबर में इसकी फाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 है। सितंबर का वीजा बुलेटिन मौजूदा वित्त वर्ष का आखिरी बुलेटिन है। अमेरिका का वित्त वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है। नए वार्षिक वीजा नंबर 1 अक्टूबर से उपलब्ध होंगे।
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अमेरिका में स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीय परिवारों के लिए सितंबर का वीजा बुलेटिन राहत लेकर आया है। परिवार-आधारित कई श्रेणियों में ग्रीन कार्ड मिलने की तारीखें काफी आगे बढ़ी हैं। हालांकि, EB-1 श्रेणी में खास बदलाव नहीं हुआ है। EB-1 श्रेणी में असाधारण प्रतिभा वाले लोग, बेहतरीन प्रोफेसर-रिसर्चर और एमएनसी के कुछ वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। भारत के लिए सितंबर में इसकी फाइनल एक्शन डेट 15 अक्टूबर 2022 है। सितंबर का वीजा बुलेटिन मौजूदा वित्त वर्ष का आखिरी बुलेटिन है। अमेरिका का वित्त वर्ष 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक चलता है। नए वार्षिक वीजा नंबर 1 अक्टूबर से उपलब्ध होंगे। F-1 में 13 महीने की बढ़त सितंबर वीजा बुलेटिन में भारत और चीन के लिए F-1 श्रेणी की फाइनल एक्शन डेट 15 दिसंबर 2018 से बढ़कर 22 जनवरी 2020 हो गई है। यह श्रेणी अमेरिकी नागरिकों के अविवाहित वयस्क बेटे-बेटियों के लिए है। F-2B में करीब 20 महीने की राहत ग्रीन कार्ड धारकों के अविवाहित वयस्क बेटे-बेटियों के लिए F-2B की तारीख 1 जनवरी 2018 से बढ़कर 22 अगस्त 2019 हो गई है। यानी एक महीने में करीब 20 महीने की बढ़त मिली है। F-3 में करीब 29 महीने की बढ़त अमेरिकी नागरिकों के विवाहित बेटे-बेटियों के लिए F-3 की फाइनल एक्शन डेट 15 मई 2012 से बढ़कर 22 अक्टूबर 2014 हो गई है। इसमें करीब 29 महीने की बढ़त हुई है। F-2A में एक महीने की बढ़त ग्रीन कार्ड धारकों के पति-पत्नी और नाबालिग बच्चों के लिए F-2A की तारीख 22 जुलाई 2026 से बढ़कर 22 अगस्त 2026 हो गई है। वित्त वर्ष 2026 में परिवार आधारित इमिग्रेशन की कुल सीमा 2.26 लाख और रोजगार आधारित इमिग्रेशन की सीमा 1,86,317 है। प्रति देश 7% यानी 28,862 वीजा की सीमा है। कुल मिलाकर इस महीने परिवार आधारित ग्रीन कार्ड की कई श्रेणियों में अच्छी प्रगति हुई है, जबकि EB-1 में कोई बदलाव नहीं हुआ। अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश इससे पहले अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया थआ, जिसमें पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है। भारतीय H-1B वीजाधारकों के लिए यह प्रस्ताव क्यों अहम है? यह प्रस्ताव भारतीयों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका में H-1B वीजा पर काम करने वाले लोगों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है। फिलहाल रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड पर हर देश के लिए एक तय सीमा (पर-कंट्री कैप) लागू है। इसी वजह से हजारों भारतीयों को ग्रीन कार्ड मिलने में कई-कई साल लग जाते हैं। अगर यह विधेयक कानून बन जाता है, तो पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे पात्र H-1B वीजाधारकों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने का एक नया विकल्प मिल जाएगा।

श्री राम जन्मभूमि मंदिर में हालिया चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में संचालन व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मणिरामदास छावनी में महंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है।
लड़ाकू विमान के पायलट के रूप में वायुसेना में 39 वर्षों की बेदाग सेवा देने वाले जितेंद्र मिश्रा 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान वेस्टर्न कमांड के चीफ रहे हैं और कारगिल युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वायुसेना में विषम परिस्थितियों का मुकाबला करने के बाद अब अयोध्या में उनकी दूसरी पारी शुरू हो रही है, जहाँ उनके सामने चुनौतियों का नया मैदान तैयार है।
प्रमुख चुनौतियाँ और नया प्रशासनिक खाका
वित्तीय पारदर्शिता व सुरक्षा : मई माह में सामने आए दान और चढ़ावे में हेराफेरी के मामले के बाद ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। नए CEO का पहला ध्येय मंदिर के आर्थिक लेखा-जोखा को पूरी तरह डिजिटल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाना होगा।
जनता और श्रद्धालुओं का विश्वास: हालिया विवाद से ट्रस्ट की साख पर पड़े प्रभाव को मिटाना और देश-विदेश के रामभक्तों के बीच पारदर्शिता का भरोसा बहाल करना सबसे प्राथमिक कार्य है।
भीड़, सुरक्षा व वीआईपी प्रबंधन: अयोध्या में हर दिन उमड़ते लाखों श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन, सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी प्रोटोकॉल के बीच तालमेल बिठाना एक बड़ी प्रशासनिक परीक्षा होगी।
प्रशासनिक अनुशासन व जवाबदेही : अब तक राम मंदिर से जुड़े फैसले ट्रस्टियों के स्तर पर लिए जाते थे। सीईओ की नियुक्ति से दैनिक प्रबंधन, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और विभागीय समन्वय में सीधी जवाबदेही तय होगी।
रामलला के दर्शन और ट्रस्ट सदस्यों के साथ पहली औपचारिक मुलाकात के बाद जितेंद्र मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वे पहले पूरी कार्यप्रणाली और व्यवस्था की बारीकियों को गहराई से समझेंगे, जिसके बाद प्रशासनिक कमान पूर्ण रूप से संभालेंगे। सैन्य अनुशासन और दूरदर्शिता के बल पर राम मंदिर के इस नए प्रशासनिक अध्याय से व्यवस्था में बड़े सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
नेपाल बाढ़ को लेकर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें 12 जून को एक पादरी नेपाल में बाढ़, आग या राजनीतिक संकट की भविष्यवाणी कर रहा है। नेपाल 26 अगस्त को आई बाढ़ के बाद अभी भी बेहाल है।

एक 23 साल का युवा, जिसने अकेले अपने कस्बे और शहर की सफाई करने का फैसला किया था, आज पटवाई की तस्वीर ही बदल चुका है!
हाथों में सफाई का सामान लेकर आकाश यादव अपने दोस्तों के साथ निकल पड़ते हैं और घंटों सार्वजनिक जगहों की सफाई करते हैं। उन्होंने कई गंगा घाट साफ किए, एक टन कचरा निकला और हज़ार पेड़ भी लगाए हैं।
जिस काम को कभी लोग बेकार समझते थे, आज उसी काम के लिए उनकी हर तरफ तारीफ हो रही है। उन्होंने लोगों की सोच भी बदल दी है।
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The Better India Hindi ने आपको आकाश यादव की कहानी से परिचित कराया। जिसकी वजह से आज उनकी और उनकी टीम की पहल को देशभर में पहचान मिल रही है। लोग उनसे जुड़ रहे हैं, उनके काम के बारे में जान रहे हैं, उन्हें नए सुझाव दे रहे हैं और इस शानदार पहल के लिए उनकी सराहना कर रहे हैं।
हमारा वीडियो आने के बाद, आकाश और उनकी टीम को The Times of India द्वारा आयोजित UP Creators Summit & Awards 2026 में Civic Awareness Creator of the Year कैटेगरी के लिए नॉमिनेट किया गया।
हाल ही में उन्हें प्रधानमंत्री ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहा, जिससे देश के युवाओं को भी कुछ अच्छा करने की प्रेरणा मिली है।
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यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा की। जेलेंस्की ने युद्ध समाप्त कराने की भारत की कोशिशों के लिए आभार जताते हुए कहा कि 'शांति की जरूरत है' और यह भारत की स्पष्ट स्थिति है।
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जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उन्होंने जयशंकर के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “हम भारत के उस प्रयास के लिए आभारी हैं, जिसके जरिए वह रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस अन्यायपूर्ण युद्ध को समाप्त करना चाहता है।”
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कहा कि यह समय युद्ध का नहीं होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि दुनिया के अन्य मजबूत देश भी स्पष्ट रुख अपनाएंगे कि यह युद्ध समाप्त होना चाहिए और एक भरोसेमंद एवं स्थायी शांति जरूरी है।
काला सागर और नागरिक जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा
जेलेंस्की के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच काला सागर और वहां नागरिक जहाजों के लिए पैदा हो रहे खतरे पर भी बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि उन क्षेत्रों तक खाद्य आपूर्ति को रोकना स्वीकार्य नहीं है, जहां लोग समुद्री मार्गों पर निर्भर हैं। उन्होंने रूस पर यूक्रेन के बंदरगाहों, अनाज गलियारे और आपूर्ति को बाधित करने का आरोप लगाया। जेलेंस्की के अनुसार, ऐसी कार्रवाइयों से वैश्विक संबंधों में भी बड़ी अस्थिरता पैदा हो रही है।
जयशंकर ने कहा- युद्ध खत्म करने में भारत मदद के लिए तैयार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी कहा कि उनकी जेलेंस्की के साथ बातचीत का केंद्र चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के तरीकों पर रहा।
इससे पहले कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ पत्रकारों से बातचीत में जयशंकर ने कहा कि अगर भारत किसी भी तरीके से मदद कर सकता है तो वह इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “अगर भारत किसी भी तरह मदद कर सकता है, तो हम वहां हैं।”
जयशंकर इस समय यूक्रेन के आधिकारिक दौरे पर हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान वह अपने यूक्रेनी समकक्ष एंड्री सिबिहा और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री रadoslaw Sikorski के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे।
जेलेंस्की ने रूस के ड्रोन हमलों का भी किया जिक्र
जेलेंस्की ने कहा कि जयशंकर की यात्रा के दौरान भी रूस ने ‘शाहेद’ ड्रोन से हमले किए। उन्होंने दावा किया कि इन ड्रोनों के निर्माण में ईरान की सहायता का इस्तेमाल हुआ है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यूक्रेन की लड़ाकू विमानन क्षमता के कारण भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा। भारत लंबे समय से रूस-यूक्रेन युद्ध को बातचीत और कूटनीति के जरिए समाप्त करने तथा क्षेत्र में शांति कायम करने की वकालत करता रहा है।
'भारत एक वैश्विक महाशक्ति', यूक्रेन ने PM मोदी की तारीफ में पढ़े कसीदे
यूक्रेन ने भारत को ‘वैश्विक महाशक्ति’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने अंतहीन युद्ध को खत्म कर शांति की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। कीव में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भारत की भूमिका की सराहना की।
जयशंकर की कीव यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है। यह पहली बार है जब भारत के किसी विदेश मंत्री ने यूक्रेन की ऐसी समर्पित द्विपक्षीय यात्रा की है। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
यूक्रेन ने भारत को बताया वैश्विक महाशक्ति
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बैठक के बाद भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि भारत एक वैश्विक शक्ति है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का भी स्वागत किया, जिसमें युद्ध को अनिश्चितकाल तक जारी रखने के बजाय इसे समाप्त करने और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई गई थी।
सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन कूटनीति के लिए तैयार है। दोनों देशों के बीच बातचीत में काला सागर में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा की जरूरत पर भी चर्चा हुई।
रूसी हमलों के बीच जयशंकर का कीव दौरा
जयशंकर की यूक्रेन यात्रा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन के शहरों, बंदरगाहों और वाणिज्यिक समुद्री परिवहन मार्गों पर रूसी मिसाइल हमले लगातार जारी हैं।
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने जयशंकर की यात्रा को बहादुरी भरा कदम बताते हुए कहा कि यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में हमले बढ़ रहे हैं।
बैठक में दोनों देशों ने मौजूदा सुरक्षा स्थिति के अलावा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा की।
Infrastructure से लेकर Pharma और Technology तक सहयोग
भारत और यूक्रेन ने अपने द्विपक्षीय सहयोग के कई क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, फार्मास्युटिकल सेक्टर, तकनीकी नवाचार और डिजिटलाइजेशन प्रमुख हैं।
यूक्रेन के विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देश अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए पारस्परिक लाभ वाली नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं। दोनों पक्षों ने अगली Intergovernmental Commission Meeting आयोजित करने पर भी काम करने की सहमति जताई है, ताकि संभावनाओं को ठोस और दोनों देशों के लिए लाभकारी परियोजनाओं में बदला जा सके।
I met with India’s Minister of External Affairs @DrSJaishankar. We discussed important issues. We are grateful to India for its commitment to ending this unjust war – Russia’s war against Ukraine. This certainly must not be a time of war. Peace is needed. This is India’s clear… pic.twitter.com/ZJ4IRP7Qpx
— Volodymyr Zelenskyy / Володимир Зеленський (@ZelenskyyUa) September 3, 2026
PM मोदी ने पुतिन से क्या कहा था?
इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया था।
पीएम मोदी ने कहा था कि भारत शांति हासिल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। उन्होंने कहा कि युद्ध में बीतने वाला हर दिन मानवता को पीछे धकेलता है, जबकि शांति की दिशा में उठाया गया हर कदम नई उम्मीद और उत्साह पैदा करता है।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि 'हमें अंतहीन युद्ध से निकलकर युद्ध के अंत की ओर बढ़ना होगा।' उनके मुताबिक मानवता के कल्याण के लिए ऐसा करना जरूरी है।
यूक्रेन के लिए भारत की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
भारत लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकालने की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली ने लगातार यह संदेश दिया है कि युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है और शांति के लिए सभी पक्षों के बीच बातचीत जरूरी है।
ऐसे में यूक्रेन की ओर से भारत को 'वैश्विक महाशक्ति' बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी के शांति संबंधी संदेश का स्वागत किया जाना भारत की कूटनीतिक भूमिका के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जयशंकर की कीव यात्रा से भारत-यूक्रेन संबंधों में व्यापार, तकनीक, फार्मा, इंफ्रास्ट्रक्चर और रणनीतिक सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद भी बढ़ी है।
Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।
इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।
क्या है पूरा विवाद?
राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।
‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’
Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।
रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”
टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?
राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।
टाटा का बयान
हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।
टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार
लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।
विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

कान्हा की नगरी मथुरा इन दिनों पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूबी हुई है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूर्व से पहले शहर की धड़कनों में भक्ति का उल्लास और गहरा होता जा रहा है। मंदिरों की भव्य सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और गलियों-चौराहों पर गूंजते राधे-कृष्णा के जयकारों के बीच आज श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली भव्य शोभायात्रा ने पूरे वातावरण को कृष्णमय कर दिया।
शोभायात्रा में ब्रज की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं को मनोहारी छटा दिखाई दी, मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु और स्थानीय लोग देर तक कलाकारों की प्रस्तुतियों में रमते रहे। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े तो मानो ब्रज की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत सड़कों पर जीवंत हो उठी।
ढोल-मृदंग की थाप, लोक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन और कलाकारों के मनमोहक नृत्य ने शोभायात्रा में चार चांद लगा दिए। संगीत की लय बढ़ी तो श्रद्धालुओं के कदम भी थिरकने लगे। कोई हाथ उठाकर जयकारे लगा रहा था तो कोई कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच भक्ति में झूमता नजर आया। पूरे मार्ग पर बार-बार 'राधे-राधे' और 'श्रीकृष्ण' के जयघोष गूंजते रहे।
सड़कें बनीं ब्रज संस्कृति का मंच
श्रीकृष्ण जन्मस्थान से आगे बढ़ी शोभायात्रा के दौरान ब्रज की समृद्ध लोक परंपराओं की विविध झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे कलाकारों की प्रस्तुतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। लोक संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने न केवल श्रद्धालुओं का मनोरंजन किया, बल्कि ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा।
जगह-जगह लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत किया। श्रद्धालु कलाकारों की प्रस्तुतियों को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनता दिखाई दिया। भक्ति और संस्कृति के इस मिलन ने शोभायात्रा को महज धार्मिक आयोजन न रहकर ब्रज की जीवंत विरासत का उत्सव बना दिया।
जन्माष्टमी के लिए सज रही कृष्ण की नगरी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर मथुरा-वृंदावन में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। देश-दुनिया से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है। प्रमुख मंदिरों, बाजारों और मार्गों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है। रात होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से नहाए शहर का दृश्य देखते ही बन रहा है।
हर तरफ कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर उत्सुकता है, मंदिरों में विशेष आयोजन की तैयारियां चल रही हैं तो बाजार भी श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सजकर तैयार हैं। कृष्ण भक्ति के गीतों और जयकारों से शहर का माहौल लगातार भक्तिमय होता जा रहा है।
मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन अलर्ट
इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वृंदावन पहुंचने का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के आगमन और जन्माष्टमी पर्व को देखते हुए प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि जन्माष्टमी के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और पर्व शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो।
हर ओर बस कृष्ण भक्ति का रंग
मथुरा में जन्माष्टमी का उल्लास अब केवल मंदिरों की चौखट तक सीमित नहीं है। शहर की गलियों से लेकर प्रमुख मार्गों तक हर जगह कृष्ण भक्ति की छटा दिखाई दे रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान से निकली श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा ने इस उत्साह को नई ऊंचाई दे दी।
ब्रज की लोक संस्कृति से सजे कलाकार, ढोल-मृदंग की थाप पर थिरकते श्रद्धालु और गूंजते जयकारों के बीच ऐसा लगा मानो पूरी मथुरा नगरी स्वयं कान्हा के स्वागत में निकल पड़ी हो। जन्माष्टमी से पहले ही कान्हा की नगरी में उत्सव का रंग गहरा हो चुका है, हर ओर भक्ति है, हर कदम पर उल्लास है और हर जुबां पर बस एक ही नाम है..श्रीकृष्णा, श्रीकृष्णा।
100 से ज्यादा ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का ब्रिटेन पहुंचने पर स्वागत किया। वे तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में गुरुवार को लंदन पहुंचे हैं। भागवत का दौरा संगठन की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियानों का हिस्सा है। इस दौरे के तहत वे अमेरिका और कनाडा भी जा चुके हैं। ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने गुरुवार को संसद में लिखित सवाल का जवाब देते हुए कहा कि भागवत की यात्रा देश के इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करती है। दरअसल, ब्रिटिश-भारतीय सांसद नादिया व्हिटोम ने पिछले हफ्ते संसद में सवाल पूछा था कि कि क्या इस दौरे की पूरी समीक्षा नियमों के तहत की गई है मंत्री ने कहा- सभी लोगों को इमिग्रेशन नियम पूरे करने होंगे
मंत्री डैन जार्विस ने जवाब दिया कि गृह मंत्रालय व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। हालांकि, मंत्रालय खतरों की पूरी श्रेणी से निपटने और हिंसा व व्यक्तियों तथा समुदायों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, “ब्रिटेन में प्रवेश की मांग करने वाले सभी लोगों को इमिग्रेशन नियमों की शर्तें पूरी करनी होंगी।” 2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था। 2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था। —————————– ये खबर भी पढ़ें… न्यूयॉर्क में भागवत बोले- भारत के DNA में एकता-विविधता:हम अलग होकर भी एकदूसरे से जुड़े, गलत सोच इंसान को जानवरों के करीब ले जाती है RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में 29 अगस्त करीब 42 मिनट स्पीच दी। पूरी खबर पढ़ें…





