राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार निलंबित

राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही पर योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 4 तहसीलदार और 1 नायब तहसीलदार निलंबित

 

योगी सरकार ने प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण में लापरवाही और हीलाहवाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है। सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व परिषद ने  इन पांचों को निलंबित करने के साथ अनुशासनिक कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। समीक्षा के दौरान सीएम ने अधिकारियों को राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिये थे। उन्होंने कहा था कि वादों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसी के बाद राजस्व परिषद ने बड़ी कार्रवाई की है।

 

तहसीलदार पवन कुमार, अतुल हर्ष, हरेराम यादव, आनन्द ओझा और नायब तहसीलदार विवेक कुमार पर गिरी गाज

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की न्यायालयवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा की गई। समीक्षा में कई अधिकारियों के स्तर पर लंबित मामलों के निस्तारण की गति संतोषजनक नहीं मिली। शासन की प्राथमिकता के बावजूद मामलों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही सामने आने के बाद परिषद ने चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को निलंबित कर दिया है, जिसमें तहसीलदार पवन कुमार सिंह, तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार, पट्टी, जनपद प्रतापगढ़ और वर्तमान में तहसीलदार प्रयागराज, तहसीलदार अतुल हर्ष, तहसील बलिया, तहसीलदार हरेराम यादव तत्कालीन नायब तहसीलदार, तहसील धनघटा और वर्तमान में तहसीलदार गोण्डा, तहसीलदार आनन्द ओझा, तहसील खलीलाबाद, संतकबीर नगर तथा नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह, तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ आदि शामिल हैं।

 

लगातार जारी रहेगी कार्रवाई, बर्दाश्त नहीं की जाएगी शिथिलता

राजस्व परिषद सचिव ने बताया कि पांचों अधिकारियों के निलंबन के साथ ही नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही भी संस्थित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। संबंधित प्रकरणों में जिम्मेदारी तय की जाएगी और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित होगी। यह कार्रवाई कोई एकबारगी कदम नहीं है। लंबित राजस्व वादों के निस्तारण की निगरानी लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों के कामकाज की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी और जहां भी निर्धारित समय सीमा के भीतर मामलों के निस्तारण में लापरवाही या उदासीनता सामने आएगी, वहां नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। परिषद ने साफ किया है कि राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी, ताकि प्रदेश के किसानों एवं आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं सुलभ न्याय उपलब्ध हो सके।
 

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई, बांदा में एसटीएफ ने एक साथ सबको दबोचा

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बड़ी कार्रवाई, बांदा में एसटीएफ ने एक साथ सबको दबोचा

 

 

योगी सरकार उत्तर प्रदेश में अवैध कोडीन कफ सिरप कारोबार और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में यूपी एसटीएफ ने अंतरराज्यीय स्तर पर अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए बांदा जिले में चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ की टीम ने इनके कब्जे से करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की 30 हजार शीशियां अवैध कोडीन कफ सिरप बरामद की हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बांदा निवासी धीरेन्द्र कुमार, अतर्रा निवासी प्रवीण कुमार उर्फ लकी और रोहित पांडेय, हापुड़ निवासी शेखर सिंह के रूप में हुई है।

 

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे पर घेराबंदी कर पकड़ा गिरोह

एसटीएफ को सूचना मिली थी कि अंतरराज्यीय गिरोह दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ से अवैध कोडीन कफ सिरप की खेप लाकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में सप्लाई कर रहा है। इस पर गुरुवार को एसटीएफ फील्ड इकाई प्रयागराज की टीम बांदा में मौजूद थी। 

 

इसी दौरान सूचना मिली कि कुछ लोग डीसीएम में अवैध कोडीन कफ सिरप लेकर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के रास्ते बिसंडा बाईपास से अतर्रा, बांदा की ओर जाने वाले हैं। टीम ने बिसंडा-अतर्रा मार्ग पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के उत्तरी गोल चौराहे के पास डीसीएम के आगे चल रही लाल रंग की टाटा नेक्सॉन कार और डीसीएम को रोककर तलाशी ली। तलाशी में दोनों वाहनों से भारी मात्रा में अवैध कोडीन कफ सिरप की शीशियां बरामद हुई और मौके से चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

 

मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में सप्लाई

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका एक सक्रिय गिरोह है, जो नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी करता है। गिरोह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसकी सप्लाई करता था।

 

वाहन चालक को मिलता था इनाम

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य दिल्ली के द्वारका स्थित एक फार्मा प्रतिष्ठान से सिरप लेकर आते थे फिर बांदा, अतर्रा, चित्रकूट और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में मेडिकल स्टोर के बजाय नशे के कारोबार में इसकी सप्लाई करते थे। गिरोह सिरप की रैपर बदलकर उसे महंगे दामों पर बेचता था। इससे होने वाले फायदे को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। वाहन चालक को खेप सुरक्षित पहुंचाने के बदले अलग से 25 हजार रुपये इनाम दिए जाते थे। 

 

फर्जी जीएसटी बिल से तैयार किए जा रहे थे कागजात

एसटीएफ की पूछताछ में गिरोह के कारोबार का एक और अहम पहलू सामने आया। आरोपियों के अनुसार कोडीन कफ सिरप की सप्लाई और बिक्री से संबंधित जीएसटी इनवॉइस और बिलों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें हमीरपुर स्थित एक मेडिकल एजेंसी के नाम से तैयार किया जाता था। दस्तावेजों में ऐसी फर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसे वाणिज्य कर विभाग द्वारा निष्प्रयोज्य/बोगस फर्म घोषित किया जा चुका है। इन कागजात की आड़ में कोडीन सिरप का अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था।

 

बॉक्स

80 लाख की हेरोइन बरामद, तस्कर गिरफ्तार

एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) वाराणसी यूनिट ने सोनभद्र के करमा थाना क्षेत्र से मादक पदार्थ तस्कर हिमांशु गौतम को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से करीब 80 लाख रुपये कीमत की हेरोइन बरामद की गई। आरोपी ने बताया कि वह छोटी पुड़िया बनाकर हेरोइन की सप्लाई करने का काम करता आ रहा है। पुलिस मामले की अन्य पहलुओं पर जांच कर रही है।

LPG Price 4 September: बढ़ गए रसोई गैस के दाम? दिल्ली से मुंबई तक जानें LPG का रेट

LPG Price 4 September: रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में किसी भी तरह का बदलाव का असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। एलपीजी की कीमत बढ़ने से घर से साथ होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार के लागत भी प्रभावित होती है। सिलेंडर महंगा होने पर खर्च बढ़ जाता है। वहीं दाम कम होने पर लोगों को थोड़ी राहत मिलती है। घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए रेट जारी हो गए हैं। ऐसे में अगर आप भी सिलेंडर भरवाने की तैयारी कर रहे हैं, तो पहले अपने शहर में लागू कीमत जरूर जान लें।

सितंबर में तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में बदलाव किया है, वहीं घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत फिलहाल स्थिर है। अब घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडर अलग-अलग शहरों में किस कीमत पर मिल रहे हैं? प्रमुख शहरों के 4 सितंबर 2026 के ताजा LPG रेट यहां देख सकते हैं।

आज कितने बढ़े दाम

4 सितंबर को घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 14.2 किलो वाले LPG सिलेंडर के रेट में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,747.50 रुपये में मिल रहा है। कोलकाता में घरेलू सिलेंडर 968 रुपये और कमर्शियल 2,882 रुपये का है। इसलिए ग्राहकों को आज भी अपने शहर में लागू पुराने रेट पर ही सिलेंडर मिलेगा। वहीं हर शहर की घरेलू गैस सिलेंडर में बदलाव हो सकता है। आज सिलेंडर बुक करने से पहले अपने शहर का रेट जरूर चेक कर लें

शहर का नामघरेलू एलपीजी की कीमत (14.2 किलो)कमर्शियल एलपीजी की कीमत (19 किलो)
दिल्ली942.00 रुपए2747.50 रुपए
मुंबई941.50 रुपए2,701.00 रुपए
कोलकाता968.00 रुपए2,882.00 रुपए
चेन्नई957.50 रुपए2,915.50 रुपए
बेंगलुरु944.50 रुपए2,8230.50 रुपए
पटना1,031.50 रुपए3,027.50 रुपए
भोपाल947.50 रुपए2,752.50 रुपए
देहरादून961.00 रुपए2,800.00 रुपए
चंडीगढ़951.50 रुपए2,769.50 रुपए

पटना में सबसे मंहगा

LPG सिलेंडर के दाम शहर के हिसाब से अलग-अलग हैं। पटना में घरेलू और कमर्शियल दोनों सिलेंडर सबसे महंगे हैं। यहां 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर 1,031.50 रुपये और 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर 3,027.50 रुपये में मिल रहा है। वहीं मुंबई में दोनों सिलेंडर सबसे सस्ते हैं। मुंबई में घरेलू सिलेंडर 941.50 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 2,701 रुपये का है। यानी पटना के मुकाबले मुंबई में घरेलू सिलेंडर 90 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर 326.50 रुपये सस्ता है।

Petrol- Diesel Price Today: 4 सितंबर को कितने बदले पेट्रोल-डीजल के दाम? जानें अपने शहर का नया रेट

ISRO EOS-05 Launch: अंतरिक्ष में भारत की नई छलांग, जानिए EOS-05 में क्या है खास

ISRO EOS-05 Launch: अंतरिक्ष में भारत की नई छलांग, जानिए EOS-05 में क्या है खास

isro eos-05 launch

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 उपग्रह का प्रक्षेपण किया गया। यह मिशन इसलिए खास है क्योंकि EOS-05 भारत का पहला ऐसा अत्याधुनिक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है, जिसे जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग के लिए विकसित किया गया है। 

क्या है EOS-05?

EOS-05 एक अत्याधुनिक Earth Observation Satellite है। इसका मुख्य काम अंतरिक्ष से पृथ्वी की सतह की निगरानी और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें उपलब्ध कराना है। ISRO के मुताबिक, यह भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है जो जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी का अवलोकन करेगा।

 

आमतौर पर पृथ्वी अवलोकन के लिए इस्तेमाल होने वाले कई उपग्रह लोअर ऑर्बिट में चक्कर लगाते हैं। EOS-05 का जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग करना भारत की सैटेलाइट इमेजिंग क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण तकनीकी कदम माना जा रहा है।

 

GSLV-F17 ने दिया मिशन को अंजाम

EOS-05 को अंतरिक्ष में पहुंचाने के लिए ISRO ने अपने Geosynchronous Satellite Launch Vehicle यानी GSLV-F17 का इस्तेमाल किया। यह GSLV की 19वीं उड़ान है। रॉकेट ने EOS-05 को निर्धारित सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित किया।

 

क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

 

EOS-05 भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमता को एक नई दिशा देता है। अंतरिक्ष से मिलने वाली तस्वीरों और आंकड़ों का इस्तेमाल पृथ्वी की सतह और बदलती परिस्थितियों की निगरानी जैसे कार्यों में किया जा सकता है। जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग की क्षमता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस तरह की कक्षा में उपग्रह पृथ्वी के एक बड़े क्षेत्र पर लगातार निगरानी रखने में उपयोगी हो सकता है। इससे बड़े इलाके की निगरानी और समय-समय पर होने वाले बदलावों का अध्ययन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

 

isro eos-05

भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमता

EOS-05 मिशन भारत के बढ़ते Earth Observation और अंतरिक्ष-आधारित निगरानी ढांचे का एक और अहम हिस्सा है। इससे पहले भी ISRO ने EOS सीरीज के कई उपग्रहों के जरिए पृथ्वी के संसाधनों, मौसम, पर्यावरण और अन्य गतिविधियों से जुड़े आंकड़े जुटाने की क्षमता विकसित की है। EOS-05 की खास ऑर्बिटल इमेजिंग क्षमता इस दिशा में एक नई तकनीकी उपलब्धि है। ISRO के लिए यह मिशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग के क्षेत्र में भारत की पहली उपलब्धि है।

 

इस मिशन के साथ ISRO ने पृथ्वी अवलोकन के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं का विस्तार किया है। खास तौर पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से इमेजिंग की क्षमता EOS-05 को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि बनाती है।

Stocks to Watch: 4 सितंबर को Gland Pharma, RVNL, Avalon Tech, Coal India समेत ये शेयर फोकस में, 4 कंपनियां होंगी लि​स्ट

शुक्रवार, 4 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा क्योंकि तेज हलचल देखने को मिल सकती है। इनमें ग्लैंड फार्मा, रेल विकास निगम, पावर ग्रिड, सिप्ला, स्टरलाइट टेक, धूत ट्रांसमिशन जैसे नाम प्रमुख हैं। वजह हैं- तिमाही नतीजे, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, एग्रीमेंट आदि। इसके अलावा शुक्रवार को मेनबोर्ड और SME सेगमेंट में 2-2 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 40 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। कुछ शेयर एक्स-बोनस और एक्स-स्प्लिट ट्रेड भी करेंगे। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज के नतीजे

धूत ट्रांसमिशन

5 सितंबर को ये कंपनी जारी करेगी तिमाही नतीजे

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Indian Energy Exchange: अगस्त महीने में बिजली का ट्रेडेड वॉल्यूम सालाना आधार पर 20.2% बढ़कर 13.94 BU हो गया। रियल-टाइम इलेक्ट्रिसिटी मार्केट वॉल्यूम 10.6% बढ़कर 5.6 BU हो गया। ‘डे-अहेड कंटीजेंसी’ और ‘टर्म-अहेड मार्केट’ का ट्रेडेड वॉल्यूम 111.3% उछलकर 1,765 MU हो गया।

Gland Pharma: CNBC-TV18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि फोसुन फार्मा इंडस्ट्रियल ब्लॉक डील के जरिए 5% इक्विटी हिस्सेदारी बेच सकती है। इस ऑफर का साइज 2,279.5 करोड़ रुपये रह सकता है। फ्लोर प्राइस 2,763 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

Rail Vikas Nigam: कंपनी ईस्ट कोस्ट रेलवे के 404.88 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है।

Power Grid Corporation of India: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) बेसिस पर एक इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम बनाने के लिए 1,152.49 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) मिला है। यह गुजरात के लकाडिया REZ-फेज II (7,500 MW) में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से बिजली को जोड़ने के लिए है। इस प्रोजेक्ट में गुजरात में एक नया 765/400 kV लकाडिया-II सबस्टेशन बनाना शामिल है।

Welspun Investments and Commercials: बोर्ड ने सब्सिडियरी, विश्वकर्मा रियल्टी में 1,285 करोड़ रुपये तक का फंड लगाने की मंजूरी दी है। यह फंड 75 करोड़ तक कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (CCDs) और 53.50 करोड़ तक ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (OCDs) के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

इसके अलावा, बोर्ड ने विश्वकर्मा रियल्टी द्वारा प्रमोटर ग्रुप की कंपनी इंडिवारा रियल्टी में फंड लगाने की भी मंजूरी दी है। यह फंड 100 करोड़ तक OCDs के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगाया जाएगा। इनकी कुल वैल्यू 1,000 करोड़ रुपये तक होगी और इन्हें एक या ज्यादा किश्तों में जारी किया जाएगा।

Shanthi Gears: कंपनी के बोर्ड ने साईं कृष्णा अल्लूरी को तुरंत प्रभाव से कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) नियुक्त किया है। इसके साथ ही, सुकांत कुमार पाणिग्रही अब कंपनी के अंतरिम CFO नहीं रहे।

Avalon Technologies: EMS कंपनी एवलॉन टेक्नोलॉजीज और यूरोप की नामी इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी जोलनर इलेक्ट्रॉनिक AG ने भारत में PCBA, बॉक्स-बिल्ड और सिस्टम-इंटीग्रेशन मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक जॉइंट वेंचर (JV) बनाने की घोषणा की है।

Cipla: कंपनी की सब्सिडियरी इनवेजेन फार्मास्यूटिकल्स इंक. ने अमेरिका में QL2107 (जो कीट्रूडा/pembrolizumab का बायोसिमिलर है) के एक्सक्लूसिव लाइसेंसिंग और सप्लाई के लिए Qilu फार्मास्युटिकल कंपनी के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है। इस एग्रीमेंट के तहत Qilu पर प्रोडक्ट के डेवलपमेंट, रेगुलेटरी रजिस्ट्रेशन और सप्लाई की जिम्मेदारी होगी, जबकि सिप्ला USA इंक. तय इलाके में अपनी मजबूत कमर्शियल मौजूदगी का फायदा उठाकर इस एसेट को कमर्शियलाइज करने की जिम्मेदारी संभालेगी।

WeWork India Management: कंपनी के बोर्ड ने कर्नाटक में 10 MWp का कैप्टिव सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।

Max Healthcare Institute: बोर्ड ने सब्सिडियरी कलिंगा हॉस्पिटल में राइट्स बेसिस पर इक्विटी शेयरों के सब्सक्रिप्शन के जरिए लगभग 87.87 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है।

Sterlite Technologies: ऑप्टिकल फाइबर केबल और कनेक्टिविटी सॉल्यूशंस की ग्लोबल मांग को देखते हुए कंपनी के बोर्ड ने मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 3,000 करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) को मंजूरी दी है।

Bharat Forge: सब्सिडियरी कंपनी, कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स (KSSL) ने FN ब्राउनिंग ग्रुप की सब्सिडियरी FN हर्स्टल के साथ एक MoU साइन किया है। इसका मकसद छोटे हथियारों, इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम्स और काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) सॉल्यूशंस की लोकल मैन्युफैक्चरिंग करना है।

RBL Bank: बैंक को दिल्ली के असिस्टेंट कमिश्नर से एक कारण बताओ नोटिस मिला है। इसमें वित्त वर्ष 2022-23 के लिए लागू ब्याज और पेनल्टी समेत कुल 164.13 करोड़ रुपये के GST की डिमांड की गई है।

Market Trend : बाजार पर तेजड़ियों की पकड़ ढ़ीली, कमजोर बाजार में भी इस कैपिटल मार्केट शेयर में दिख रहा दम

बल्क और ब्लॉक डील्स

Meesho: SVF II मीरकाट (DE) LLC ने कंपनी में 8 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1,650.4 करोड़ में बेचे हैं। पूरी 1.73% हिस्सेदारी वैश्विक और घरेलू निवेशकों ने खरीदी।

Clean Max Enviro Energy Solutions: DSDG होल्डिंग ApS ने 16.33 लाख शेयर ₹199.3 करोड़ में बेचे हैं। सभी शेयर बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने खरीदे, जिनमें SBI लाइफ इंश्योरेंस, महिंद्रा मैन्युलाइफ म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, DSP इंडिया फंड और व्हाइटओक कैपिटल MF शामिल हैं।

Updater Services: SIS लिमिटेड ने और 10.12 लाख शेयर ₹23.76 करोड़ में खरीदे हैं।

Advit Jewels: Taurus Mutual Fund Flexicap Share Multi Cap ने 4.82 लाख शेयर 11.63 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रमेश सवालराम सरावगी ने 5 लाख शेयर 12.14 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Bulkcorp International: Chanakya Opportunities Fund I ने अतिरिक्त 1.08 लाख शेयर 81.63 लाख रुपये में खरीदे हैं। Care Wealth Advisors LLP ने अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है। 91,200 शेयर 68.94 लाख रुपये में बेचे गऐ।

Knowledge Realty Trust: मीरा गोयल ने IIFL मैनेजमेंट सर्विसेज से 28.31 लाख यूनिट ₹31 करोड़ में खरीदी हैं।

KSR Footwear: Alpa Wealth Creator ने 3.38 लाख शेयर 1.06 करोड़ रुपये में बेचे हैं। रानू परवाल HUF ने 1.5 लाख शेयर 46.8 लाख रुपये में और इंद्रा इनवेस्टमेंट ने 1.5 लाख शेयर 47.38 लाख रुपये में खरीदे हैं।

मेनबोर्ड लिस्टिंग

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन

प्रायोरिटी ज्वेल्स

SME लिस्टिंग

पलक टेक्नोलॉजीज

कंप्लीट स्पोर्ट्स एंड मैनेजमेंट इंडिया

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

कोल इंडिया

ऑयल इंडिया

ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन

अरविंद

BMW इंडस्ट्रीज

क्लीन साइंस एंड टेक्नोलॉजी

एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स

कैपरी ग्लोबल कैपिटल

फिनोलेक्स केबल्स

फेडरल-मोगुल गोएट्ज (इंडिया)

AIA इंजीनियरिंग

हाईटेक कॉर्पोरेशन

इंडिगो पेंट्स

गल्फ ऑयल लुब्रिकेंट्स इंडिया

सिटाडेल रियल्टी एंड डेवलपर्स

मैक ट्रैवल सॉल्यूशंस

फिनोटेक्स केमिकल

जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

हिकल

जैगसनपाल फार्मास्यूटिकल्स

माज्दा

पारादीप फॉस्फेट्स

परमेश्वर मेटल

नाहर कैपिटल एंड फाइनेंशियल सर्विसेज

नाहर पॉलीफिल्म

नाहर स्पिनिंग मिल्स

मेट्रो ब्रांड्स

OM इंफ्रा

पैनासोनिक एनर्जी इंडिया कंपनी

POCL एंटरप्राइजेज

प्रीवेस्ट डेनप्रो

SKP सिक्योरिटीज

SP अपैरल्स

संधू फार्मास्यूटिकल्स

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लैंड एंड एसेट्स

शिल्पा मेडिकेयर

स्पेशियलिटी रेस्टोरेंट्स

स्पोर्टकिंग इंडिया

सूरज प्रोडक्ट्स

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स

स्टोव क्राफ्ट

सुप्रिया लाइफसाइंस

Promoter Holding: इन 10 मिडकैप शेयरों में प्रमोटर्स ने हिस्सेदारी घटाई, जानिए 1 महीने में कैसा रहा रिटर्न

स्प्लिट के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

इंटीग्रेटेड प्रोटीन्स

TCC कॉन्सेप्ट

ये शेयर करेंगे एक्स-बोनस ट्रेड

जोंजुआ ओवरसीज

बाय-बैक के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करने वाले स्टॉक्स

PVR INOX

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

threat after nepal disaster in india

प्रभाकर मणि तिवारी

भारत में खासकर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बनने वाली पनबिजली परियोजनाएं, इनके तहत बनने वाले बांध और सुरंगों से पैदा होने वाले खतरे अक्सर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। लेकिन अब नेपाल के भयावह हादसे में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। उनको आशंका है कि जम्मू-कश्मीर के अलावा उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कभी भी नेपाल जैसे हादसे का खतरा मंडरा रहा है। ALSO READ: जलवायु न्याय की मांग कर रहा है आपदा प्रभावित नेपाल

 

हाल के वर्षों में इन राज्यों में भूस्खलन और सुरंग धंसने की अलग-अलग घटनाओं में कई लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ों की कटाई करके ऐसी परियोजनाएं बनाने का काम जारी है। इनमें खासकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है।

 

अरुणाचल का संकट

चीन सरकार अरुणाचल प्रदेश से सटे इलाके में एक विशालकाय बांध बना रही है। बीते साल इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। करीब डेढ़ सौ अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना के वर्ष 2033 तक पूरा होने का लक्ष्य है। विशेषज्ञ इसे वाटर बम बताते हैं। लेकिन भूवैज्ञानिकों की असली चिंता इस परियोजना का आकार नहीं बल्कि इसकी लोकेशन है। यह मेडॉग परियोजना उस फॉल्ट जोन के पास स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इसकी वजह से यह इलाका भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील है। बीते साल भी तिब्बत के शिगात्से इलाके में रिक्टर स्केल पर 7.1 की तीव्रता वाले एक भूकंप के कारण वहां 120  से ज्यादा लोगों की मौत के अलावा कुछ बांधों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई थी।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाले बांध को भूकंपरोधी तकनीक से बनाने के बावजूद किसी बड़े भूकंप की स्थिति में जमीन धंसने और चट्टानों के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे बांध पर तो खास असर नहीं होगा। लेकिन नदी के निचले हिस्से में स्थित भारतीय इलाकों को नेपाल जैसी आपदा झेलनी पड़ सकती है। इससे नदी का बहाव बदल सकता है। इससे पहले भी ऐसी कुछ घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2000 में तिब्बत में एक बांध टूटने से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बाढ़ आ गई थी। इससे पहले वर्ष 2017 में अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी का पानी अचानक काला पड़ गया था। तब इसके लिए तिब्बत में खनन गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया गया था। यही सियांग नदी असम में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है।

 

विशेषज्ञों ने चेताया है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाला विशालकाय बांध पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर तबाही ला सकता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

भारत की जवाबी रणनीति

इसके असर की काट के लिए भारत सरकार ने भी राज्य के अपर सियांग में 11 हजार मेगावाट क्षमता वाली एक बहुउद्देशीय परियोजना बनाने का फैसला किया है। लेकिन स्थानीय लोग और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो जाएगा। अरुणाचल प्रदेश में आधा दर्जन पनबिजली परियोजनाएं चल रही हैं जबकि करीब तीन दर्जन छोटी-बड़ी परियोजनाओं का काम चल रहा है। इनमें दिबांग, अपर सियांग, लोअर सुबनसिरी और इटालीन जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार ने 2025-35 को 'पनबिजली का दशक' घोषित किया है।

 

भूवैज्ञानिकों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में हिमालय की संरचना भी उस नेपाल-तिब्बत सीमा जैसी है जो हाल में प्राकृतिक हादसे का शिकार हुआ है। खासकर इटालीन परियोजना तो भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील इलाके में है। वहां ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा भी बना हुआ है।

 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने देश भर में ऐसे 195 ग्लेशियल झीलों की पहचान की है जिनके फटने से बाढ़ आने का खतरा है। किसी ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील को रोकने वाली बर्फ, चट्टान या मलबे जैसी प्राकृतिक दीवार के अचानक टूटने के बाद आने वाली बाढ़ को 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' या 'ग्लोफ' कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 32 झीलें अकेले अरुणाचल में ही हैं।

 

क्या है विशेषज्ञों का आकलन?

पूर्वोत्तर के मशहूर भूवैज्ञानिक डा. प्रमोद चंद्र सरमा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हिमालय प्राकृतिक रूप से एक नाजुक पर्वतीय प्रणाली है।इसका पूर्वी क्षेत्र अभी युवा है। इस इलाके में हमेशा भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बना रहता है। जलवायु परिवर्तन इस खतरे को और बढ़ा रहा है। इसके साथ ही पनबिजली परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बनने वाले बांधों ने इस जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है।”

 

पर्यावरणविद डीके अपांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “राज्य में प्रस्तावित तमाम बड़ी परियोजनाएं भूकंप के लिहाज बेहद संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं। चीनी बांध परियोजना ने प्राकृतिक विपदा के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।”

 

सियांग बहुउद्देशीय परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे सियांग इंडीजीनस फार्म्स फोरम (एसआईएफएफ)  के प्रमुख जेजांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “अपर सियांग इलाका चीनी सीमा से सटा है। इसका निर्माण पूरा होने पर यहां भी नेपाल जैसा हादसा होने का खतरा बढ़ जाएगा।” ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या हैं बचाव के उपाय?

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अर्ली-वार्निंग सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ऐसे हादसे के बारे में समय रहते जानकारी मिल सके। इसके साथ ही इलाके में मौसम और हिमालय की ऊंचाई पर बने ग्लेशियरों और झीलों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी का तंत्र विकसित करना होगा।

 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताते हैं, “सरकार अर्ली वार्निंग सिस्टम पर काम कर रही है। पहले चरण में 46 बेहद संवेदनशील बांधों में से 40 में यह प्रणाली लागू की जा चुकी है। चरणबद्ध तरीके से दूसरी परियोजनाओं में भी इसे लागू किया जाएगा।

 

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 में कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बीते करीब तीन दशकों के दौरान कार्बन का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले दो देशों, भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल के ग्लेशियरों में जमा बर्फ की मात्रा एक-तिहाई कम हो गई है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इसे ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है कि भौगोलिक रूप से अस्थिर हिमालयी क्षेत्र में सियांग और उसके जैसे बड़े बांधों का निर्माण उचित है या नहीं?

नेपाल बाढ़- 5300 से ज्यादा अब भी लापता:1259 की मौत, 12 हजार को बचाया; भारत ने मदद की एक और खेप भेजी

नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ की तबाही के 10 दिन बाद भी 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है। संकट के बीच भारत ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री की एक और खेप भेजी है। गुरुवार रात दो C-130J विमानों से 21.5 टन मानवीय सहायता काठमांडू पहुंची। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में 21,402 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। ये टीमें खोज, बचाव, राहत वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में लगी हैं। नेपाल आपदा से जुड़ी 5 तस्वीरें… चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शवों की बरामदगी का अभियान जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव मिले हैं, जबकि अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं। नेपाल बाढ़ से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6 performance comparison

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6 performance comparison
Toyota Ebella vs Mahindra BE 6

Earlier in 2026, Toyota launched the Urban Cruiser Ebella, its first EV for India. The Ebella competes in the popular electric midsize SUV segment that includes models such as the Mahindra BE 6. First introduced in 2024, the BE 6 was updated in 2026, with ‘Sporteq’ added to its name, along with changes to the feature list and a variant rejig. Here, we’ve tested and compared the real-world performance of the Urban Cruiser Ebella and the BE 6 to determine which one is quicker.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Specifications 

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Specifications 

Specifications

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

Battery capacity (kWh)

61

79

Electric motor setup

Single, front-mounted

Single motor, rear-mounted

Power (hp)

174

286

Torque (Nm)

193

380

Kerb weight (kg)

1,815

2,115

Power-to-weight (hp/tonne)

95.86

135.22

Torque-to-weight (Nm/tonne)

106.33

179.67

Gearbox

Single-speed automatic

Single-speed automatic

ARAI range (km)

543

708

The Urban Cruiser Ebella is powered by a 61kWh battery pack paired with a front-mounted motor. Meanwhile, the larger BE 6’s 79kWh battery pack is mated to a rear-mounted motor. The BE 6 comes across as the more powerful one on paper, with higher power-to-weight and torque-to-weight ratios, but the Ebella is 300kg lighter.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Acceleration  

More powerful BE 6 takes the lead here by a fair margin

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Acceleration (in seconds)

 

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

0-20kph

1.75

1.37

0-40kph

3.32

2.69

0-60kph

4.93

4.00

0-80kph

6.95

5.38

0-100kph

9.65

7.14

0-120kph

13.18

9.48

The BE 6’s more powerful motor helps it get off the line quickly. The Ebella trails behind and fails to catch up while the BE 6 extends its lead to 2.51 seconds at 100kph. Interestingly, the BE 6’s 0-120kph time is even quicker than that of the Ebella’s 0-100kph time. The Mahindra EV’s higher weight doesn’t stop it from outperforming the Toyota. Though both models deliver power in a progressive manner, the Ebella’s much lower torque output is a reason why it is much slower than the BE 6.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Rolling acceleration 

Ebella is not too far behind in rolling acceleration

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Rolling acceleration (in seconds)

 

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

20-80kph (in kickdown)

5.27

4.03

40-100kph (in kickdown)

6.39

4.46

The BE 6 outperforms the Ebella in rolling acceleration as well. It completed the 20-80kph and 40-100kph tests faster by 1.24 and 1.93 seconds, respectively. However, the gap between the two isn’t as much as it was in acceleration tests from a standstill.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Prices 

Ebella more affordable by up to Rs 3.35 lakh

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Prices 

 

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

Price range (in Rs lakh)

23.60

24.45-26.95* (79kWh)

*BE 6 Sporteq price

As far as price is concerned, the Ebella is available in a single fully loaded trim for Rs 23.6 lakh. On the other hand, the BE6 offers its largest 79kWh battery pack on a few trims. Depending on the trim chosen, the BE 6 is priced up to Rs 3.35 lakh higher than the Ebella.

Autocar India’s testing standards

Before conducting our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations and ensure that the car is charged to 100 percent. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

All prices are ex-showroom, India.

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

Top News 4 September: देशभर में जन्माष्टमी की धूम, ISRO का EOS-05 लॉन्च, क्रूड 100 डॉलर के करीब

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Top News 4 September : देशभर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम, इसरों ने अंतरिक्ष में ईओएस-05 उपग्रह प्रक्षेपित किया। इंडियन बास्केट में क्रूड फिर 100 डॉलर के करीब पहुंचा। नेपाल भीषण बाढ़ के बाद भूकंप से थर्राया। अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को अनोख चुनौती। 4 सितंबर की बड़ी खबरें :   

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम 

देशभर में जन्माष्‍टमी पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। मथुरा, वृंदावन समेत देशभर के कृष्ण मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़। शुक्रवार मध्यरात्रि 12 बजे होने वाले कृष्ण जन्मोत्सव की सभी तैयारियां हो चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी। ALSO READ: कान्हा की नगरी में गूंजा कृष्ण नाम, जन्मभूमि से निकली भव्य श्रीकृष्णोत्सव शोभायात्रा, भक्तों का उमड़ा सैलाब

 

इसरो ने अंतरिक्ष में भेजा ईओएस-05 उपग्रह

इसरो ने ईओएस-05 उपग्रह का आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण किया। जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट के माध्यम से प्रक्षेपित उपग्रह भारत का पहला अत्याधुनिक भू-तुल्यकालिक इमेजिंग सैटेलाइट है।

 

क्रूड फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब

अमेरिका और ईरान के बीच जंग से तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती नजर आ रही है। इंडियन बास्केट में आज कच्चे तेल के दाम 99.35 डॉलर प्रति बैरल हो गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 91.92 डॉलर प्रति बैरल है। 

 

नेपाल में भूकंप

नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियर आपदा के बाद आई विनाशकारी बाढ़ के बीच गुरुवार को तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के जोशीमठ से करीब 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में था। भूकंप के बाद फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

 

अभिजीत दीपके की पीएम मोदी को चुनौती

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखी चुनौती दी है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई के रिकॉर्ड पर हाल ही में शुरू हुए विवाद के बाद दीपके ने पीएम मोदी से कहा कि चलिए दोनों अपनी-अपनी डिग्री सार्वजनिक करते हैं। ALSO READ: अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा…

Gold Price Today: जन्माष्टमी पर सोना हुआ महंगा, चांदी को भी लगे पंख; चेक करें नए रेट

4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस मौके पर देश में सोने की कीमत में गिरावट पर ब्रेक लग गया है। जन्माष्टमी की सुबह ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 155510 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। मुंबई में कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,443.93 डॉलर प्रति औंस पर है। नए भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

गोल्डमैन सैक्स ने इस साल के अंत तक सोने की कीमतें 4,900 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। उसका कहना है कि कई देशों के केंद्रीय बैंक 2026 में हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद रहे हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 155510 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 142410 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 142410 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 155360 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 142410 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली142560155510
मुंबई142410155360
अहमदाबाद142460155410
चेन्नई142410155360
कोलकाता142410155360
हैदराबाद142410155360
जयपुर142560155510
भोपाल142460155410
लखनऊ142560155510
चंडीगढ़142560155510

चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमत में भी तेजी लौटी है। 4 सितंबर की सुबह चांदी बढ़कर 250100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 65.77 डॉलर प्रति औंस है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में सोना 3,400 रुपये तक और चांदी 5000 रुपये चढ़ी थी। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।