मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम-युवा) इसी संकल्प को साकार करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। अमेठी जिले के जगापुर क्षेत्र की रहने वाली रूपाली देवी की सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही समय पर मिला आर्थिक सहयोग छोटे व्यवसायों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
ग्राम पंचायत से मिली जानकारी, खुला कारोबार विस्तार का रास्ता
रूपाली देवी बताती हैं कि उनके परिवार में कुल छह सदस्य हैं। परिवार लंबे समय से ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ा था और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखता था लेकिन सीमित संसाधनों और पूंजी की कमी के कारण कारोबार का विस्तार संभव नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम-युवा) की जानकारी मिली। योजना के बारे में विस्तार से जानने के बाद उन्होंने आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक औपचारिकताओं में लगभग दो से तीन महीने का समय लगा। इसके बाद जनवरी 2026 में बैंक के माध्यम से उन्हें 5 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ, जिसने उनके पारिवारिक व्यवसाय को नई दिशा देने का काम किया।
5 लाख रुपए के ऋण से मिला कारोबार को नया विस्तार
ऋण प्राप्त होने के बाद परिवार ने अपने ऑटोमोबाइल व्यवसाय को नए स्तर पर विकसित करने की योजना बनाई। प्राप्त धनराशि से आवश्यक उपकरण, मशीनें और ऑटो पार्ट्स की उपलब्धता सुनिश्चित की गई तथा उनके पारिवारिक व्यवसाय ‘परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज’ को व्यवस्थित रूप से विकसित किया गया। वर्तमान में गैरेज का संचालन रूपाली देवी और उनके पति परमजीत द्वारा किया जा रहा है। यहां दोपहिया वाहनों की सर्विसिंग, मरम्मत और ऑटो पार्ट्स की बिक्री की जाती है। बेहतर सुविधाओं और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के कारण क्षेत्र में उनकी पहचान लगातार मजबूत हुई है।
कुछ ही महीनों में कारोबार ने पकड़ी रफ्तार
रूपाली देवी बताती हैं कि ऋण मिलने के बाद कारोबार में तेजी से वृद्धि हुई। पहले जहां सीमित संसाधनों के कारण व्यवसाय का दायरा छोटा था, वहीं अब ग्राहकों की संख्या और काम दोनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब ‘परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज’ का मासिक टर्नओवर लगभग 2 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और कारोबार को आगे बढ़ाने का आत्मविश्वास भी मिला है।
स्वरोजगार ने बढ़ाया आत्मविश्वास, परिवार को मिली नई पहचान
रूपाली देवी का कहना है कि सीएम-युवा योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता उनके परिवार के लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं थी। इस सहयोग ने न केवल कारोबार को विस्तार दिया, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर भी प्रदान किया। उनका मानना है कि यदि युवाओं और छोटे उद्यमियों को सही समय पर वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपने सपनों को आसानी से साकार कर सकते हैं। आज उनका परिवार आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन को मिल रही मजबूती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार और अवसर सृजित करने वाला बनाना है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान इसी सोच को धरातल पर उतार रहा है। रूपाली देवी और उनका परिवार इस बात का उदाहरण हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे तो वे केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बनती हैं।
सीएम-युवा योजना से खुल रहे स्वरोजगार के नए द्वार
मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत युवाओं को बिना गारंटी ऋण, प्रशिक्षण और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। रूपाली देवी और उनके परिवार की यह सफलता कहानी बताती है कि मेहनत, संकल्प और सरकारी सहयोग मिल जाए तो आत्मनिर्भरता का सपना साकार किया जा सकता है।
दुनिया ने Dimple में देखा कि वो क्या नहीं कर सकती थी।
लेकिन उसकी बहन ने देखा कि वो कितना प्यार कर सकती थी।
Dimple को Down syndrome था।
वो देर से बोलना सीख पाई और बहुत से लोग उसकी बात समझ नहीं पाते थे।
लेकिन उसकी बहन उसकी छोटी-छोटी आवाज़ों और चेहरे के भाव तक समझ जाती थी।
कभी-कभी तो जानबूझकर नाराज़ होने का नाटक करती,
सिर्फ इसलिए कि Dimple उसे गले लगाए और प्यार से चूमे।
आज Dimple इस दुनिया में नहीं है।
और सबसे बड़ा अफसोस ये है कि उसकी बहन उसे आखिरी बार देख भी नहीं पाई।
लेकिन शायद कुछ रिश्तों को आखिरी मुलाकात की जरूरत नहीं होती।
क्योंकि कुछ लोग शब्दों से नहीं,
दिल से समझे जाते हैं।
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Nepal Tibet border floods: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब एक और प्रलयंकारी प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडरा रहा है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है कि सीमा के ऊपरी हिस्से में चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर बनी एक 'बैरियर लेक' (प्राकृतिक बांध से बनी झील) अगले 72 घंटों में टूट सकती है। इस झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी पहले से ही ओवरफ्लो हो रहा है और आने वाले दिनों में 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी आने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों और राहत कार्यों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ में 350 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने के बाद अब एक नई और बड़ी आपदा ने दस्तक दे दी है। चीनी अधिकारियों ने अलर्ट जारी करते हुए बताया कि हिमालयी सीमा के ऊपरी इलाके में स्थित एक अस्थिर 'बैरियर लेक' भारी दबाव के कारण अगले तीन दिनों में कभी भी फट सकती है। ALSO READ: Nepal Flash Flood : नेपाल बाढ़ में मची तबाही की पूरी कहानी, तस्वीरों में देखें सैलाब का खौफनाक मंजर
30 लाख क्यूबिक मीटर पानी का खतरा
चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, यह झील चोचेन खोला (Chhochen Khola) और पुरेपु सांगपो (Purepu Tsangpo) नदियों के संगम पर स्थित है। वर्तमान में झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है और यह ओवरफ्लो हो रही है। मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण अगले 72 घंटों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी समाने का अनुमान है। यदि झील का प्राकृतिक बांध टूटता है, तो नेपाल के निचले इलाकों में एक बार फिर 2025 जैसी भीषण तबाही मच सकती है। ALSO READ: Nepal flash flood : नेपाल में तबाही, अपनों की तलाश के बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव की आंखों से छलके आंसू
कहां है बैरियर लेक?
यह प्राकृतिक झील तिब्बत-नेपाल सीमा के ऊपरी हिस्से में चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर स्थित है। यह स्थान चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में जिइरोंग (Gyirong) काउंटी के उत्तर-पूर्व में पड़ता है, जो नीचे की ओर नेपाल की सीमाओं और नदियों से जुड़ता है। हाल ही में हुए भारी भूस्खलन के कारण पहाड़ों से गिरी मिट्टी, चट्टानों और मलबे ने नदियों के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया, जिससे यह अस्थायी 'बैरियर लेक' बन गई। इस झील में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है और यह ओवरफ्लो हो रही है। ALSO READ: तिब्बत में टूटा ग्लेशियर का 'थूथन', नेपाल में हाहाकार, 30 फीट ऊंची प्रलयंकारी बाढ़ का खौफनाक सच
अब तक 350 से ज्यादा मौतें
सीमावर्ती इलाकों में हाल ही में हुए भूस्खलन और फ्लैश फ्लड ने पहले ही भीषण तबाही मचाई है। मरने वालों का आंकड़ा 350 से ज्यादा हो गया है, जबकि 1500 से ज्यादा अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तिब्बत की ओर से कम से कम 558 लोग लापता हैं, जबकि नेपाल सीमा की तरफ 100 चीनी नागरिकों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं। इस आपदा में 30 से ज्यादा देशों के लोग लापता हैं। भारत के ही 300 लोग लापता हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार 21 लोगों को बचा लिया गया है। नेपाल में राहत-बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। भारत से भी नेपाल को राहत सामग्री पहुंचाई गई है।
नेपाल में क्यों आई आपदा?
नेपाल और तिब्बत के इस सीमावर्ती क्षेत्र में आई प्रलयकारी आपदा कोई अचानक घटी अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्र के तेजी से बदलते और अस्थिर होते पर्यावरण का परिणाम है। ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी ग्लेशियरों का निकला हिस्सा (Glacier Snout) तेजी से कमजोर हो रहा है। ग्लेशियर के एक बड़े हिस्से के टूटने और अचानक गिरने से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा कंपन पैदा हुआ, जिसने आसपास की पहाड़ियों को अस्थिर कर दिया और भारी भूस्खलन को जन्म दिया। अगस्त 2025 में भी अत्यधिक तापमान के कारण तिब्बत में एक ग्लेशियल झील फटने (GLOF) से भारी तबाही हुई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी और मुख्य पुल बह गए थे। यह मौजूदा आपदा भी उसी सिलसिले की एक कड़ी है।
Only the day before I would be surprised with a passenger ride in a prototype of Bentley’s new electric SUV, I just so happened to be engaged in a conversation about why an EV would be so well suited to this brand in particular. Yes, as we’ve said in the past, EVs are perfect for luxury applications – smooth, silent and effortless as they are. But the other realisation we made was that Bentley, despite leaning into sportiness as one of its core brand pillars, has never been a slave to weight loss. Even its lightest car in 85 years – the new, stripped-down Supersports – is but one kilogram shy of two tonnes! And yet its cars have always managed to deliver the comfort expected of a super-luxury vehicle, and somehow also the poise and agility of a sports tourer. A tricky balance indeed.
Reining in 2.5-tonne-plus vehicles, then, isn’t so much a challenge for Bentley’s chassis engineers as it is standard operating procedure. And thus, when the time came to create the brand’s first EV – a five-metre SUV no less – weight management was the last thing on their minds. Being a luxury EV with the full technological might of the Volkswagen Group behind its development, it would be all too easy to just squeeze out a bunch of eye-watering performance figures and leave it at that. But Bentley engineers say that won’t necessarily be the case, and certainly not the focus. The focus, instead, was on making the Torcal walk the razor-thin line between sport and luxury that every one of their cars is required to.
The Torcal prototype rolls silently into view at the driveway of our hotel in Monterey, California shrouded as it is in its crystalline camouflage – a motif we’ll revisit later. It hides the details well enough, but what’s clear is that this a tall and squared-off SUV, much like the Bentayga, and though aerodynamics will no doubt have been a consideration, that Bentley boldness is recognisable in its bluff front fascia. It’s actually a little smaller than a Bentayga, but the smaller front overhangs tell me they’re making good use of its wheelbase.
We’re ushered quickly into the cabin, which too is wrapped up from floor to headliner, and quickly given a brief before prying eyes can come in for a closer look. There’s stuff we’re told about that I can’t reveal today, but I’m hurriedly making notes all the same. But then Torcal product line director Martin Page presses the start button, and my brain does a somersault. “It’s… idling?” I mutter, as he cracks a smile from the driver’s seat.
Digital meets analogue
Yes, they’ve given the Torcal the sound of a V8, the most enduring engine layout the brand has used in its century of making cars. And while this is hardly the first EV to mimic an engine, there’s a mesmerising authenticity to it that I’ve never experienced from a synthetised setup before. I’d go as far as saying sounds better – more layered and full-bodied than the twin-turbo 4.0-litre you’ll find in the Continental range, and we’re still at a standstill. It’s uncanny.
As we move off, the sound swells, ebbs and flows with an almost flawed resonance that fills up the cabin. It’s not loud or overwhelming; but it’s ever present, though I’m told it can be switched off if not desired. I’m told the car is in ‘Bentley’ mode – the middle ground, as we know from existing models – and once on the move, the sound fades into the background.
The story behind the V8 sound is almost as fascinating as the sound itself. Any other brand would record one of its V8 engines, play the recording through the speakers and call it a day. But in keeping with Bentley’s history of doing things painstakingly by hand, they recorded the sound and got an orchestra to recreate it with live instruments. What I’m listening to is a mix of drums, viola and bass guitar – every beat and note fed into a machine and algorithmically meted back out in proportion with the torque demand. Moving up to Sport mode suitably increases the volume and even alters the pitch slightly, but what doesn’t change is the genuine feeling that somewhere up front, an old-school, hairy-chested V8 is thumping away to move us forward.
The crystal method
The over-engineering doesn’t stop there, however; Bentley’s handcrafted approach extends to the graphics of the Torcal – both physical and digital. The diamond motif has long been a part of the Bentley brand, and you’ll see it everywhere from its cars’ grille mesh patterns, to stitching, to upholstery quilting. Something catches my eye from under the sheet that covers the rear doors, which I carefully lift up to catch a sneak peek.
It’s ambient lighting, shimmering, moving as it cascades across a soft Merino wool door card. The idea was to simulate light flowing through crystal, and though it’s probably a simulated effect, it is incredibly convincing, and oddly relaxing to stare at. Curiously, it’s blue, and we’re in Sport mode, Bentley having chosen to buck the trend of equating ‘Sport’ with ‘red’.
But as Martin cycles back and forth through the modes of the ‘Curation Engine’ – a luxurious way to say ‘drive mode selector’ – I notice something else. The graphics on the curved touchscreen – also with a crystalline theme – are slick and incredibly sharp, in a way I haven’t seen in any Bentley before. Credit to the new-gen PPE (Premium Platform Electric) and its E&E architecture the Torcal shares with the electric Cayenne, I suppose.
I then glance at the digital speedo, which shows a digital number encased in a ring of crystal, which again hides a fascinating story. This seemingly innocuous graphical element is not the result of Adobe After Effects or, god forbid, generative AI. Bentley commissioned Cumbria Crystal to make a cut crystal tube and then shone light through it from various angles. This was filmed and then programmed to play back in sync with the car’s speed, so what you’re seeing is high-res footage of real light passing through real glass, moving in a circle as the car goes faster. But what is luxury, if not unnecessary excess?
Effortless heft
My mind circles back to my conversation from the previous evening, however, as we approach the Freeway. Bentley hasn’t revealed power and torque figures yet, describing them only as ‘ample’, and that’s clear as we break off the on-ramp and merge into the swarm of American commuters hurrying to work. The seat-of-the-pants sensation is one of power that feels effortless, if not hurried, if that makes sense, which is in line with any of the V8 hybrid cars Bentley also sells.
Bentley also hasn’t revealed the kerb weight figure, but going by other EVs of this size and nature, my guess puts it well past 2.5 tonnes and closer to 2.7 or 2.8. Not that you can tell from inside, where there’s a composure that feels truest to the contemporary range of Bentley models. The Torcal uses two-chamber air suspension, adaptive dampers and active anti-roll bars to control its immense mass, and I suspect a bit of magic too, because here too, they’ve managed to find a balance. I noticed the prototype was riding on 22-inch wheels with supercar-like 315-section rear tyres, and road noise is kept incredibly well in check.
The ride is hefty but not harsh like some sports SUVs, comfortable but not floaty like some outright luxury SUVs. It stays steady on the Freeway, and as we get back to the narrower roads that snake around Pebble Beach, it stomps out imperfections with authority. As Martin takes the opportunity to lean it into some curvier bits of road, I sense a bit of give and roll, but not too much. I’m told they could have erased it entirely, but that would feel too unnatural.
And that sums up the Torcal nicely. It feels ‘natural’, and even from this short passenger ride, a great exercise in manufacturing analogue authenticity from what is a very digital set of tools. When advancing beyond the realm of mundane transportation and into more desirable applications – luxury, or performance, for instance, of which Bentleys have to do both – an EV has to be more convincing. So far, ballistic numbers have been that route for most, but there is an increasing effort to build tangible character into these cars that must be applauded. The Torcal feels like one of the best examples of this yet, and though far from the finished product, it’s a promising sign that Bentley is on the right track with its first EV.
Maharashtra Language Controversy: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को घोषणा की कि राज्य सरकार के भाषा संबंधी आदेश को लेकर हो रहे विरोध और राजनीतिक विवाद के बीच, ऑटो-रिक्शा और कैब ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि अगले एक साल तक ड्राइवरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, ताकि उन्हें मराठी का कामकाजी ज्ञान हासिल करने के लिए समय मिल सके।
फडणवीस ने कहा, “मैंने कैब और ऑटो ड्राइवरों से मुलाकात की। वे सभी इस बात से सहमत हैं कि हर किसी को मराठी आनी चाहिए, लेकिन उन्होंने कहा कि इस पेशे में अलग-अलग उम्र के लोग हैं और उनके लिए जल्दी मराठी सीखना मुश्किल है। उन्होंने एक योजना तैयार की है और इसके लिए एक साल का समय मांगा है। हालांकि, राज्य सरकार ने यह मांग मान ली है। इस साल कोई कार्रवाई नहीं होगी।”
बता दें कि यह घोषणा महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के उस बयान के कुछ दिनों बाद की गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो ड्राइवर मराठी का कामकाजी ज्ञान दिखाने में विफल रहेंगे, उनके ऑथराइजेशन बैज सस्पेंड किए जा सकते हैं।
मराठी भाषा को लेकर बढ़ा विवाद
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर सख्ती के बीच मुंबई के कुछ ऑटो ड्राइवर बिहार और उत्तर प्रदेश लौटने लगे हैं। वहीं, पुणे में कुछ ड्राइवर RTO की कार्रवाई से बचने के लिए यात्रियों से बातचीत के दौरान सतर्कता बरत रहे हैं।
मराठी से जुड़ा नया नियम क्या है?
सरनाईक ने कहा था कि अगर ड्राइवर को मराठी की कामकाजी जानकारी नहीं है, तो उसका ड्राइवर बैज शुरू में एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा। इस महीने की शुरुआत में बदले गए नियमों के मुताबिक, अगर ड्राइवर उस समय में भाषा नहीं सीख पाता है, तो बैज रद्द करने से पहले उसे तीन महीने का और समय दिया जाएगा।
मंत्री ने यह भी कहा था कि जो ड्राइवर चार महीने बाद भी मराठी नहीं सीख पाते हैं, वे असल में यह दिखा रहे होंगे कि उन्हें “भाषा से प्यार नहीं है” और उन्हें मराठी पहचान की जरूरत नहीं है।
इस बीच, सरनाईक ने मंगलवार को आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता मुंबई और ठाणे में “मराठी-हिंदी” विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए।
बता दें कि भाषा से जुड़े इस नियम की वजह से दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों के बीच भी तनाव पैदा हो गया है। सोमवार को मुंबई के कांदिवली इलाके में चार ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों ने कथित तौर पर मराठी बोलने वाले एक ड्राइवर के साथ मारपीट की, क्योंकि उसने मराठी भाषा की जानकारी की अनिवार्यता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार कर दिया था।
यह घटना उस समय हुई, जब बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा ड्राइवर MG रोड पर सरकार की मराठी भाषा संबंधी अनिवार्यता के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने दूसरे ऑटो ड्राइवरों से भी अपने वाहन चलाना बंद करने को कहा।
सरकार के इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। चार कैब ड्राइवरों ने एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब ड्राइवरों के लिए काम चलाने लायक मराठी जानना जरूरी किए जाने वाले नियम पर रोक लगाने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 12 अगस्त को जारी सरकारी नोटिफिकेशन से लाखों “गरीब और प्रवासी” ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कोर्ट से इस नियम को लागू करने पर फिलहाल रोक लगाने की मांग की है।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि देश में आम लोगों और चुनिंदा अरबपतियों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। राहुल गांधी ने किसानों, नौकरीपेशा लोगों और गरीब छात्रों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों के प्रति अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यदि कोई किसान 50 हजार रुपये नहीं चुका पाता है तो उसकी जमीन नीलाम कर दी जाती है। वहीं, कोई वेतनभोगी व्यक्ति एक भी ईएमआई चूक जाए तो बैंक उसके घर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि गरीब छात्रों के लिए शिक्षा ऋण हासिल करना भी मुश्किल है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इसके विपरीत चुनिंदा ‘दोस्तों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति की तरह है और वे जितना चाहें पैसा निकाल सकते हैं तथा अपनी सुविधा के अनुसार उसे वापस कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना दी हैं—एक मुट्ठीभर अरबपतियों के लिए और दूसरी बाकी सभी लोगों के लिए।
राहुल गांधी के बयान के बीच मीडिया कारोबारी और जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा से जुड़ा व्यक्तिगत दिवाला मामला भी चर्चा में है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) ने सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब ₹22,006.57 करोड़ के स्वीकृत कर्ज दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। इसका मतलब है कि स्वीकृत दावों की तुलना में कर्जदाताओं को करीब 0.03 प्रतिशत की वसूली होगी।
हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे सुभाष चंद्रा द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिए गए कर्ज नहीं थे। चंद्रा के अनुसार, उन्होंने विभिन्न कंपनियों के कर्ज के लिए पर्सनल गारंटर के तौर पर गारंटी दी थी। उनके मुताबिक, जिन संस्थाओं के कर्ज की उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी, वे करीब ₹45,000 करोड़ की बकाया राशि में से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान कर चुकी हैं।
80.81 प्रतिशत वोट से पास हुआ था प्लान
NCLT के सामने पेश की गई पुनर्भुगतान योजना को नवंबर 2024 में हुई लेनदारों की बैठक में 80.814 प्रतिशत वोटिंग शेयर का समर्थन मिला था। यह IBC के तहत जरूरी तीन-चौथाई सीमा से अधिक था। कुछ प्रमुख कर्जदाताओं ने योजना का विरोध किया था, जिनमें LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और Union Bank शामिल थे।
मामले में मूल दो सदस्यीय NCLT पीठ के बीच मतभेद के बाद तीसरे सदस्य के रूप में Nilesh Sharma को शामिल किया गया। उन्होंने योजना को मंजूरी देने के पक्ष में फैसला दिया। NCLT ने कहा कि विरोध करने वाले कर्जदाताओं के पास 20 प्रतिशत से कम वोटिंग शेयर था और व्यक्तिगत संपत्ति के मूल्यांकन को देखते हुए योजना को खारिज करने पर बेहतर वसूली की संभावना नहीं दिखती थी।
NCLT – “नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल”
किसान 50 हज़ार न चुकाए तो ज़मीन नीलाम हो जाती है। Salaried एक EMI न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता।
मगर, चुनिंदा “मित्रों” के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है – कितना भी… https://t.co/hFjtqdUimv
22 हजार करोड़ के दावे पर सिर्फ 6.5 करोड़ का भुगतान
NCLT के फैसले के अनुसार, स्वीकृत योजना में ₹22,006.57 करोड़ के दावों के मुकाबले ₹6.5 करोड़ का भुगतान होगा। इस आधार पर कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत का ‘हेयरकट’ स्वीकार करना पड़ेगा। आसान भाषा में कहें तो प्रत्येक ₹100 के दावे पर करीब तीन पैसे की वसूली होगी।
ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि योजना मंजूर होने के बाद वह IBC की धारा 115 के तहत सभी संबंधित कर्जदाताओं पर बाध्यकारी होगी, चाहे उन्होंने योजना के पक्ष में मतदान किया हो या विरोध में।
राहुल गांधी के बयान से फिर गरम हुई बहस
सुभाष चंद्रा मामले में NCLT के फैसले और राहुल गांधी के बयान के बाद बैंक कर्ज, कॉरपोरेट देनदारी, व्यक्तिगत गारंटी और दिवाला समाधान प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। हालांकि, सुभाष चंद्रा का मामला एक व्यक्तिगत गारंटर की दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़ा है और इसे सीधे तौर पर उनके द्वारा स्वयं लिए गए ₹22,006 करोड़ के कर्ज के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
भारत में E20 पेट्रोल को लेकर बहस के बीच पुराने गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल उपलब्ध कराने पर विचार हो रहा है। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर संजय खन्ना ने गुरुवार को यह जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि E20 को हटाकर दोबारा E10 लागू करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
E10 और E20 में क्या अंतर है?
E10 पेट्रोल में 10% इथेनॉल और 90% पेट्रोल होता है। वहीं E20 में 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है। E20 को लेकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता रही है। इसमें माइलेज, फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स और मरम्मत से जुड़े सवाल उठे हैं।
पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पर विचार
ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL के मुताबिक, पुरानी गाड़ियों के लिए अलग से E10 उपलब्ध कराने का विकल्प देखा जा रहा है। संजय खन्ना ने कहा कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर से E10 की सप्लाई करना संभव है। हालांकि, E10 और E20 को एक साथ उपलब्ध कराने के तरीके पर अभी चर्चा चल रही है।
E10 की सप्लाई में क्या दिक्कत है?
ऑयल मार्केटिंग कंपनी BPCL को E10 की सप्लाई में कोई बड़ी लॉजिस्टिक दिक्कत नजर नहीं आती। लेकिन अगर E10 और E20 दोनों को एक साथ बेचना है, तो अलग ग्रेड के पेट्रोल की सप्लाई संभालनी होगी। इसी वजह से सरकार और कंपनियां इसके तौर-तरीकों पर काम कर रही हैं।
E20 को वापस लेने का प्लान नहीं
सरकार पहले ही कह चुकी है कि E20 से वापस E10 या E0 पर जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को राज्यसभा में कहा था कि देशभर के एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर E0, E10 और E20 की अलग-अलग सप्लाई रखने से लॉजिस्टिक्स और स्टोरेज की लागत बढ़ेगी।
हालांकि, BPCL के ताजा बयान से साफ है कि E10 को E20 के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि पुरानी गाड़ियों के लिए एक अलग विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
E10 की मांग क्यों उठी?
E20 को लेकर पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता बढ़ी है। लोगों का कहना है कि ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल से माइलेज पर असर पड़ सकता है। कुछ पुरानी गाड़ियों में फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स की अनुकूलता को लेकर भी सवाल हैं।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी 17 अगस्त को एक लेख में सुझाव दिया था कि पुरानी गाड़ियों के मालिकों की परेशानी दूर करने के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 के साथ E20 भी उपलब्ध कराया जा सकता है।
E20 की शुरुआत कैसे हुई?
केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से ऑयल कंपनियों को 20% तक इथेनॉल मिला पेट्रोल बेचने का निर्देश दिया था। इस पेट्रोल का न्यूनतम Research Octane Number यानी RON 95 होना भी जरूरी किया गया। इसके बाद पुरानी गाड़ियों के मालिकों में माइलेज और गाड़ी की सेहत को लेकर चिंता बढ़ी।
फिलहाल तस्वीर यही है कि E20 की व्यवस्था जारी रहेगी। पुरानी गाड़ियों के लिए E10 उपलब्ध कराने का विकल्प जरूर सरकार और ऑयल कंपनियों की चर्चा में है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में लगातार दूसरे गिरावट आई। इसकी कीमत 800 रुपये गिरकर 1,65,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। इसकी कीमत 2,50,500 रुपये प्रति किलग्राम पर बनी रही। हालांकि, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। इस मौके पर गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का पड़ा असर
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। बीते दो दिनों में सोने की कीमतें 1,400 रुपये गिर चुकी है। 25 अगस्त को सोने का भाव 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।
बुलियन मार्केट की नजरें फेड चेयरमैन की स्पीच पर
बुलियन मार्केट की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह जैक्सन होल में 28 अगस्त को यह स्पीच देने वाले हैं। इससे फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर फेड की पॉलिसी का असर पहले डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा। फिर सोने कीमतों पर पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट
27 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में गिरावट दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.12 फीसदी गिरकर 4,588 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 0.11 फीसदी की कमजोरी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतें अब भी 87 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर बातचीत के बावजूद ब्रेंट क्रूड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।
इस हफ्ते की शुरुआत में तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंचा था सोना
इस हफ्ते की शुरुआत में सोने की कीमतें तीन महीने के सबसे लेवल पर पहुंच गई थीं। इस तेजी में डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड का हाथ था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम का ऐलान किया था। लेकिन, इससे बॉन्ड यील्ड में तेजी पर थोड़े समय के लिए लगाम लगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड चेयरमैन वॉर्श शुक्रवार को अपने भाषण में फिर से इनफ्लेशन कंट्रोल पर फोकस बढ़ा सकते हैं।
Rakhi Bandhne Ke Niyam: रक्षा बंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सावन माह की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व भाई-बहन के अटूट रिश्ते, भरोसे और प्रेम का प्रतीक है। बहनें इस दिन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भगवान से उनके लिए लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संपन्नता का आशीर्वाद मांगती हैं। इस रक्षा सूत्र के बदले भाई अपने बहन की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं।
इस दिन भाई और बहन को राखी बांधते समय कुछ बातों को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए। माना जाता है कि राखी बांधते समय सही दिशा और विधि का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऐसा करने से भाई-बहन के रिश्ते में मिठास बनी रहती है। साथ ही, जीवन में सकारात्मकता और खुशहाली आती है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राखी बांधते समय भाई और बहन दोनों की दिशा का ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है :
भाई का मुख : राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ज्योतिष और वास्तु दोनों ही शास्त्रों में इस दिशा को शुभ माना गया है। माना जाता है कि सही दिशा का ध्यान रखते हुए रक्षा बंधन करने पर जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। यह बात ध्यान रखनी बहुत जरूरी है कि राखी बांधते समय गलती से भी भाई का चेहरा दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए। यह दिशा यम और पितरों की होती है।
बहन का मुख : भाई का मुख पूर्व या उत्तर में होने पर बहन का मुख अपने आप पश्चिम या दक्षिण दिशा की ओर होगा। इस विधि से राखी बांधना शास्त्र सम्मत और सकारात्मक माना जाता है।
राखी बांधने के मुख्य नियम
सिर पर कपड़ा रखें : भाई को नंगे सिर राखी नहीं बंधवानी चाहिए। राखी बंधवाते समय सिर पर रुमाल या कोई कपड़ा अवश्य रखें।
अक्षत और तिलक : सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम/रोली का तिलक लगाएं और उस पर अक्षत (चावल) लगाएं। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों।
दाहिने हाथ की कलाई : राखी हमेशा भाई की दाहिनी कलाई पर ही बांधी जानी चाहिए।
तीन गांठें लगाएं : राखी बांधते समय उसमें 3 गांठें लगाना शुभ माना जाता है। ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु, महेश यानी त्रिदेव का प्रतीक मानी जाती हैं।
आरती उतारें : राखी बांधने के बाद भाई की आरती उतारें, उसका मुंह मीठा कराएं और भाई अपनी बहन के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ले या उससे छोटी बहन को आशीर्वाद व उपहार दे।
भद्रा काल और राहूकाल का ध्यान : भद्रा काल और राहूकाल में राखी बांधना वर्जित माना जाता है, इसलिए हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधें।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ और मलबे के सैलाब ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर/बर्फ-चट्टान के खिसकने से आई फ्लैश फ्लड ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। सड़कों, घरों और बुनियादी ढांचे पर बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है।
प्रारंभिक सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक लेंडे नदी में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से मलबे वाली बाढ़ आई, जिसने नदी के आसपास बड़े क्षेत्र को प्रभावित किया। बाढ़ और मलबे के तेज बहाव से नेपाल की करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
तिब्बत के गिरोंग काउंटी में बाढ़ ने गिरोंग बंदरगाह को प्रभावित किया। ड्रोन तस्वीरों में कई इमारतें मलबे में दबी दिखाई दीं। शिगात्से क्षेत्र में बाढ़ के कारण सड़कें, संचार व्यवस्था और बिजली की लाइनें प्रभावित हुईं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में मुश्किलें बढ़ीं। इतनी बड़ी तबाही की आशंका की जानकारी ना नेपाल और ना ही चीन की तरफ से दी जा सकी थी। नेपाल और चीन के बीच मौसम संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था होने के बावजूद, इस हालिया घटना के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं मिली थी। नेपाल के जल और मौसम विज्ञान विभाग ने यह जानकारी दी। हालांकि नेपाल में मौजूद चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन वायरल ख़बरों का खंडन किया जिनमें दावा किया जा रहा है कि चीन ने नेपाल को हादसे के पारे में पूर्व चेतावनी नहीं दी जिसकी वजह से नेपाल में इतनी तबाही मची।
1500 से ज्यादा लोग लापता
तबाही के बाद 1500 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। लापता भारतीयों में बड़ी संख्या कैलास-मानसरोवर तीर्थयात्रियों की बताई जा रही है। परिजनों में अपनों की सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भारत में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा
नेपाल में आई बाढ़ के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। दोनों राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए भारत में एनडीआरएफ की 20 टीमों को तैनात किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
नेपाल में आई इस भयावह आपदा ने 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई विनाशकारी बाढ़ की यादें ताजा कर दी हैं।