
Nepal Tibet border floods: नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भीषण विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब एक और प्रलयंकारी प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडरा रहा है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने चेतावनी जारी की है कि सीमा के ऊपरी हिस्से में चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर बनी एक 'बैरियर लेक' (प्राकृतिक बांध से बनी झील) अगले 72 घंटों में टूट सकती है। इस झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी पहले से ही ओवरफ्लो हो रहा है और आने वाले दिनों में 30 लाख क्यूबिक मीटर अतिरिक्त पानी आने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों और राहत कार्यों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ में 350 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के लापता होने के बाद अब एक नई और बड़ी आपदा ने दस्तक दे दी है। चीनी अधिकारियों ने अलर्ट जारी करते हुए बताया कि हिमालयी सीमा के ऊपरी इलाके में स्थित एक अस्थिर 'बैरियर लेक' भारी दबाव के कारण अगले तीन दिनों में कभी भी फट सकती है। ALSO READ: Nepal Flash Flood : नेपाल बाढ़ में मची तबाही की पूरी कहानी, तस्वीरों में देखें सैलाब का खौफनाक मंजर
30 लाख क्यूबिक मीटर पानी का खतरा
चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, यह झील चोचेन खोला (Chhochen Khola) और पुरेपु सांगपो (Purepu Tsangpo) नदियों के संगम पर स्थित है। वर्तमान में झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है और यह ओवरफ्लो हो रही है। मौसम की प्रतिकूल स्थिति के कारण अगले 72 घंटों में इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर और पानी समाने का अनुमान है। यदि झील का प्राकृतिक बांध टूटता है, तो नेपाल के निचले इलाकों में एक बार फिर 2025 जैसी भीषण तबाही मच सकती है। ALSO READ: Nepal flash flood : नेपाल में तबाही, अपनों की तलाश के बीच सद्गुरु जग्गी वासुदेव की आंखों से छलके आंसू
कहां है बैरियर लेक?
यह प्राकृतिक झील तिब्बत-नेपाल सीमा के ऊपरी हिस्से में चोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम पर स्थित है। यह स्थान चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में जिइरोंग (Gyirong) काउंटी के उत्तर-पूर्व में पड़ता है, जो नीचे की ओर नेपाल की सीमाओं और नदियों से जुड़ता है। हाल ही में हुए भारी भूस्खलन के कारण पहाड़ों से गिरी मिट्टी, चट्टानों और मलबे ने नदियों के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया, जिससे यह अस्थायी 'बैरियर लेक' बन गई। इस झील में पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है और यह ओवरफ्लो हो रही है। ALSO READ: तिब्बत में टूटा ग्लेशियर का 'थूथन', नेपाल में हाहाकार, 30 फीट ऊंची प्रलयंकारी बाढ़ का खौफनाक सच
अब तक 350 से ज्यादा मौतें
सीमावर्ती इलाकों में हाल ही में हुए भूस्खलन और फ्लैश फ्लड ने पहले ही भीषण तबाही मचाई है। मरने वालों का आंकड़ा 350 से ज्यादा हो गया है, जबकि 1500 से ज्यादा अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तिब्बत की ओर से कम से कम 558 लोग लापता हैं, जबकि नेपाल सीमा की तरफ 100 चीनी नागरिकों समेत सैकड़ों लोग लापता हैं। इस आपदा में 30 से ज्यादा देशों के लोग लापता हैं। भारत के ही 300 लोग लापता हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार 21 लोगों को बचा लिया गया है। नेपाल में राहत-बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। भारत से भी नेपाल को राहत सामग्री पहुंचाई गई है।
नेपाल में क्यों आई आपदा?
नेपाल और तिब्बत के इस सीमावर्ती क्षेत्र में आई प्रलयकारी आपदा कोई अचानक घटी अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह हिमालयी क्षेत्र के तेजी से बदलते और अस्थिर होते पर्यावरण का परिणाम है। ग्लोबल वॉर्मिंग और बढ़ते तापमान के कारण हिमालयी ग्लेशियरों का निकला हिस्सा (Glacier Snout) तेजी से कमजोर हो रहा है। ग्लेशियर के एक बड़े हिस्से के टूटने और अचानक गिरने से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा कंपन पैदा हुआ, जिसने आसपास की पहाड़ियों को अस्थिर कर दिया और भारी भूस्खलन को जन्म दिया। अगस्त 2025 में भी अत्यधिक तापमान के कारण तिब्बत में एक ग्लेशियल झील फटने (GLOF) से भारी तबाही हुई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी और मुख्य पुल बह गए थे। यह मौजूदा आपदा भी उसी सिलसिले की एक कड़ी है।


