कैबिनेट ने सामाजिक सहायता योजना के लिए 53428 करोड़ रुपये किए मंजूर , विकलांग पेंशन में भी हुई बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ‘राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम’ (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक, यानी पांच साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में कार्यक्रम और उसके जुड़ी योजनाओं का नाम बदलना,विकलांग पेंशन के नियमों में बदलाव करना और वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन तथा पारिवारिक लाभ योजनाओं को उनके मौजूदा स्वरूप में जारी रखना शामिल है।

इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “दुनिया के सबसे व्यापक सोशल सिक्योरिटी नेट में से एक का विस्तार किया गया है और इसे 2031 तक बढ़ा दिया गया है। इस विस्तारित सोशल सिक्योरिटी नेट के लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “विकलांग लोगों के लिए, विकलांगता पेंशन पाने की पिछली पात्रता सीमा 80 प्रतिशत विकलांगता थी। अब इस सीमा को घटाकर आधा यानी 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि 40 प्रतिशत विकलांगता वाले लोग भी विकलांग पेंशन पाने के पात्र होंगे।”

विकलांगता पेंशन में बदलाव

सबसे अहम बदलाव विकलांगता पेंशन के नियमों में हुए हैं। इसके तहत 0 से 79 साल की उम्र के लाभार्थियों को हर महीने 375 रुपये और 80 साल या उससे ज़्यादा उम्र के लोगों को 625 रुपये की मदद मिलेगी।

विकलांगता के लिए पात्रता की सीमा (बेंचमार्क) को मौजूदा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दिया जाएगा। न्यूनतम उम्र की शर्त भी हटा दी जाएगी, जिससे विकलांग लोग जन्म से ही इसके लिए पात्र हो सकेंगे।

वृद्धावस्था पेंशन,विधवा पेंशन और फेमिली बेनिफिट योजनाएं बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगी।

कैबिनेट ने कहा कि सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 3.20 करोड़ लाभार्थियों को इसमें शामिल किया जाएगा। विकलांगता पेंशन योजना के तहत संशोधित पात्रता शर्तों, लाभार्थियों की संख्या और सहायता की दर के बारे में विस्तार से बताने वाली गाइडलाइंस तीन महीने के भीतर जारी और लागू की जाएंगी।

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इन योजनाओं के बदलेंगे नाम

नाम बदलने की कवायद के तहत,NSAP अब प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कर दिया जाएगा, जबकि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना बन जाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांग पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना कर दिया जाएगा और राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना का नाम प्रधानमंत्री परिवार लाभ योजना हो जाएगा।

बता दें कि NSAP को 15 अगस्त 1995 को गरीब परिवारों को मदद देने के लिए शुरू किया गया था। यह संविधान के अनुच्छेद 41 (जो राज्य की नीति के निर्देशक सिद्धांतों में से एक है) के तहत केंद्र की ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए किया गया था। इस प्रोग्राम के लिए पूरा पैसा केंद्र सरकार देती है, ताकि पूरे देश में एक जैसी मदद मिल सके।

विकलांग पेंशन में किए गए बदलाव ‘विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016’ के तहत किए गए हैं। यह कानून ‘बेंचमार्क विकलांगता’ को 40 प्रतिशत की सीमा के आधार पर परिभाषित करता है और यह प्रावधान करता है कि विकलांगता से जुड़ी सहायता राशि, अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों के लिए समान योजनाओं के तहत मिलने वाली सहायता से कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए।

 

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रणजी मैच में घरेलू पिच पर सर जड़ेजा ने बल्ले और गेंद से जीता मैन ऑफ द मैच

Ravindra Jadeja

सौराष्ट्र की टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी रविंद्र जड़ेजा ने अपने गृहनगर राजकोट के निरंजन शाह स्टेडियम में पहले शतक लगाकर और फिर 3 विकेट लेकर मैन ऑफ द मैच का अवार्ड पाया। उनके इस प्रदर्शन से सौराष्ट्र छत्तीसगढ़ से मैच ड्रॉ कराने में कामयाब हो पाई।

सौराष्ट्र ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 392 रन बनाए जिसमें रविंद्र जड़ेजा का 209 गेंदों में 7 चौके लगाकर 102 रनों का योगदान था। इसके बाद छत्तीसगढ़ 312 रनों पर सिमट गई। रविंद्र जड़ेजा ने सर्वाधिक 17 ओवरों में सिर्फ 40 रन देकर 3 विकेट लिए। हालांकि यह तीनों विकेट निचले क्रम के थे लेकिन इस प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की टीम सौराष्ट्र पर बढ़त नहीं ले पाई।

भारत के अनुभवी खिलाड़ी रविंद्र जडेजा टेस्ट ऑलराउंडरों की रैंकिंग में शीर्ष पर अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन के बाद दक्षिण अफ्रीका के वियान मुल्डर एक स्थान ऊपर चढ़कर चौथे और साइमन हार्मर पांच पायदान की छलांग लगाकर संयुक्त रूप से 23वें स्थान पर हैं।

जडेजा हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की 2-1 से वनडे सीरीज जीत का हिस्सा थे, जहां उन्होंने दो मैचों में दो विकेट लिए, लेकिन उन्हें बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। रणजी ट्रॉफी इस बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर को अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत के दो टेस्ट मैचों के दौरे से पहले अपनी लाल गेंद की क्रिकेट का फॉर्म हासिल करने का मौका देगी। टेस्ट सीरीज वेलिंग्टन में 19-23 नवंबर तक शुरू होगी, जिसके बाद दूसरा मैच क्राइस्टचर्च में 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक खेला जाएगा।

ऐसा रहा है करियर

टेस्ट क्रिकेट में रविंद्र जड़ेजा की उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।टेस्ट क्रिकेट में उनको कितना मौका मिलता है यह देखने वाली बात होगी।

Bank Holiday: अगले 15 दिनों में 10 दिन बंद रहेंगे बैंक, देखिए RBI की ये पूरी लिस्ट

Bank Holiday October: अगर अक्टूबर के बचे हुए दिनों में बैंक से जुड़ा आपका कोई भी जरूरी काम अटका है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े यानी 15 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक कई दिनों तक बंद रहने वाले हैं।

दुर्गा पूजा, विजयादशमी, लक्ष्मी पूजा और करवा चौथ जैसे बड़े त्योहारों के चलते विभिन्न राज्यों में बैंकों में छुट्टियों की भरमार है। आइए आपको बताते हैं कि अगले 15 दिनों में किस-किस दिन बैंक बंद रहेंगे, ताकि आप अपनी ब्रांच जाने का प्लान पहले से बना सकें।

15 से 30 अक्टूबर 2026: बैंक छुट्टियों की पूरी लिस्ट

17 अक्टूबर (शनिवार): महा सप्तमी- केवल अगरतला में बैंक बंद (नोट: बाकी भारत के लिए यह महीने का तीसरा शनिवार है और बैंक खुले रहेंगे)

18 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश- पूरे देश में बैंक बंद

19 अक्टूबर (सोमवार): महा नवमी / आयुध पूजा- अगरतला, आइजोल, भुवनेश्वर, चेन्नई, गुवाहाटी, इम्फाल, ईटानगर, कोहिमा, कोलकाता, पटना, रांची और शिलांग।

20 अक्टूबर (मंगलवार): विजया दशमी / दशहरा- लगभग पूरे देश में (गंगटोक और इम्फाल को छोड़कर)।

21 अक्टूबर (बुधवार): दुर्गा पूजा / विजया दशमी- अगरतला, बेंगलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम।

22–23 अक्टूबर (गुरुवार – शुक्रवार): दुर्गा पूजा / दसैन- केवल गंगटोक (सिक्किम)।

24 अक्टूबर (शनिवार): चौथा शनिवार- पूरे देश में बैंकों की छुट्टी।

25 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश / लक्ष्मी पूजा- पूरे देश में साप्ताहिक अवकाश (ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लक्ष्मी पूजा का विशेष अवकाश)।

26 अक्टूबर (सोमवार): लक्ष्मी पूजा / एसेशन डे / वाल्मीकि जयंती- अगरतला, चंडीगढ़, जम्मू, शिमला और श्रीनगर।

29 अक्टूबर (गुरुवार): करवा चौथ- केवल शिमला में स्थानीय अवकाश।

ग्राहकों के लिए जरूरी सलाह

त्योहारी सीजन के इन दिनों में लगातार छुट्टियों के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो सकता है। वैसे राहत की बात यह है कि बैंक बंद रहने के बावजूद ऑनलाइन बैंकिंग, UPI, मोबाइल बैंकिंग और ATM सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी। इसलिए, कैश निकालने या पैसों के लेन-देन से जुड़े जरूरी काम डिजिटल माध्यम से आसानी से निपटाए जा सकते हैं।

काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब? PMO तक पहुंची शिकायत, मंडलायुक्त ने बताई सच्चाई

Kashi Vishwanath Temple Gold Controversy: अयोध्या स्थित राम मंदिर से चंदा चोरी के बाद अब वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोप ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मामले में अधिवक्ता नित्यानंद राय ने शिकायत दर्ज कराते हुए दावा किया है कि मंदिर के शिखर पर लगे सोने के कई कलश गायब हो गए हैं। उनका आरोप है कि यह मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है और कथित तौर पर हर दूसरे दिन सोना निकाला जा रहा है। अधिवक्ता ने यह भी दावा किया है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने उनकी शिकायत पर संज्ञान लिया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

29 सितंबर को की थी PMO से शिकायत

वाराणसी के तेलियाबाग निवासी अधिवक्ता नित्यानंद राय ने बताया कि 29 सितंबर को उन्होंने मंडल आयुक्त समेत प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र भेज कर शिकायत की थी। पत्र में उन्‍होंने बताया कि मंदिर के उत्तरी द्वार के ठीक ऊपर दो स्थानों पर स्वर्ण कलश गायब है। उसकी जगह वहां पर कुछ पेंट किया गया है। नित्यानंद राय ने बताया कि यह तकरीबन 2 से लेकर 3 फीट की चौड़ाई का था। पहले भी मंदिर से सोना चांदी की चोरी हो चुकी है, इसलिए इस प्रकरण की गंभीरता से जांच किए जाने की आवश्यकता है। ऐसा पैच करीब दो से तीन जगहों पर है।

श्वेत पत्र जारी करने और वेबसाइट पर जानकारी देने की मांग

अधिवक्ता नित्यानंद राय ने मांग की है कि मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि मंदिर में सोना कब से गायब हो रहा है और अब तक कितनी मात्रा में सोना या चांदी गायब हुआ है, इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए।

उन्होंने मंदिर प्रशासन से इस मामले में श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। साथ ही, मंदिर के अंदर और शिखर पर लगे सोने-चांदी का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की बात कही है। नित्यानंद राय चाहते हैं कि यह जानकारी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाए, ताकि लोग इसे आसानी से देख सकें। शिकायतकर्ता के मुताबिक, मंदिर प्रशासन की ओर से अब तक जो जवाब दिया गया है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं।

ओलावृष्टि में टूटा था कलश का हिस्सा, मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रखा

दूसरी ओर, वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने मंदिर से सोना गायब होने के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने इन खबरों को भ्रामक और बेबुनियाद बताया। मंडलायुक्त के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले ओलावृष्टि के दौरान मंदिर के प्रवेश द्वार के ठीक ऊपर बने गुंबद या कलश का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि टूटे हुए हिस्से को मंदिर प्रशासन ने सुरक्षित रख लिया है।

IIT मद्रास की तकनीकी टीम करेगी सर्वे

मंडलाआयुक्त ने बताया कि गिरा हुआ कलश जिसे विश्वनाथ धाम में सुरक्षित रखा गया है, पुनर्स्थापना के लिए IIT मद्रास से सर्वे कराया गया है। उसकी मदद से जल्द ही फिर से कलश स्थापित कराया जाएगा। बिना किसी तकनीकी परीक्षण के कलश को दोबारा लगाना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं है। इसके लिए IIT मद्रास से संपर्क किया गया है और वहां की टीम प्राथमिक सर्वे का काम कर चुकी है।

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Railway Bonus 2026 : रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, 11.40 लाख कर्मचारियों को फायदा

Railway Bonus 2026 : रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन का बोनस, 11.40 लाख कर्मचारियों को फायदा

Railway Employees Bonus 2026: केंद्र सरकार ने रेलवे कर्मचारियों को त्योहारों से पहले बड़ा तोहफा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) को मंजूरी दी गई है। इस फैसले से करीब 11.40 लाख गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को फायदा होगा। सरकार इस बोनस के भुगतान पर कुल 2,009.61 करोड़ रुपये खर्च करेगी।

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सरकार के मुताबिक, पात्र रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों के वेतन के बराबर बोनस दिया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक पात्र कर्मचारी को अधिकतम 17,951 रुपये मिल सकते हैं। यह बोनस रेलवे कर्मचारियों के बेहतर प्रदर्शन को मान्यता देने और उन्हें रेलवे की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिया जाता है।

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रेलवे कर्मचारियों को कितना मिलेगा बोनस?

 

केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के बाद पात्र रेलवे कर्मचारियों को 78 दिन के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस दिया जाएगा। सरकार ने प्रति कर्मचारी अधिकतम बोनस राशि 17,951 रुपये निर्धारित की है। इस फैसले से लगभग 11,40,770 गैर-राजपत्रित रेलवे कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राशि पात्रता और निर्धारित गणना के आधार पर तय होगी। इसलिए सभी कर्मचारियों को अधिकतम 17,951 रुपये मिलना जरूरी नहीं है।

 

किन रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिन के बोनस का लाभ?

 

सरकार की घोषणा के अनुसार, रेलवे के विभिन्न विभागों और श्रेणियों में काम करने वाले पात्र कर्मचारियों को इस बोनस का लाभ मिलेगा। इनमें शामिल हैं:

 

 

हर साल दुर्गा पूजा और दशहरा से पहले मिलता है बोनस

रेलवे कर्मचारियों को प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस देने की व्यवस्था हर साल की जाती है। आमतौर पर इसका भुगतान दुर्गा पूजा और दशहरा की छुट्टियों से पहले किया जाता है, ताकि त्योहारों के दौरान कर्मचारियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिल सके।

 

यह बोनस रेलवे कर्मचारियों के काम और प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है। रेलवे में ट्रेनों का परिचालन, यात्रियों की आवाजाही, माल ढुलाई, ट्रैक का रखरखाव और सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य कर्मचारियों के सहयोग से पूरे होते हैं। ऐसे में बोनस को कर्मचारियों के योगदान की पहचान के रूप में देखा जाता है।

 

रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में बनाया माल ढुलाई का रिकॉर्ड

 

सरकार के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय रेलवे का प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। इस दौरान रेलवे ने रिकॉर्ड 1,670 मिलियन टन यानी 167 करोड़ टन माल की ढुलाई की। इसके अलावा रेलवे ने लगभग 7.41 अरब यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया।

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माल ढुलाई भारतीय रेलवे की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। कोयला, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने में रेलवे की बड़ी भूमिका है। वहीं, करोड़ों यात्रियों की आवाजाही रेलवे को देश के प्रमुख परिवहन साधनों में शामिल करती है। सरकार ने कर्मचारियों के प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए 78 दिन के बोनस को मंजूरी दी है। इस फैसले से त्योहारों के दौरान लाखों रेलवे कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

मेरठ के चर्चित ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड मामले में दोषी मुस्कान और साहिल को सजा-ए-मौत

मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में दोषी करार दी गयी उसकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को एक स्थानीय अदालत ने फांसी की सजा सुनायी है।

जिला शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया कि जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में बुधवार को सजा पर सुनवाई के बाद दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनायी गयी।

उन्होंने बताया कि गत 30 सितंबर को सौरभ राजपूत हत्याकांड मामले में दोषी करार दिये गये साहिल और मुस्कान जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये अदालत के समक्ष पेश हुए, जिसके बाद सजा पर बहस और दोषियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए सुनवाई हुई।

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चौबे ने बताया कि सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने दोनों से पूछा कि वे सजा के संबंध में कुछ कहना चाहते हैं या नहीं। जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान और साहिल को अलग-अलग पेश किया गया और दोनों ने अपना पक्ष रखा।

वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सुनवाई संक्षिप्त रही। उन्होंने बताया कि अदालत ने दोनों से विभिन्न बिंदुओं पर सवाल किए, जिनमें फॉरेंसिक रिपोर्ट से जुड़े सवाल भी शामिल थे। हालांकि, उन्होंने सवालों का विस्तृत ब्योरा साझा करने से इनकार किया।

अभियोजन के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या मार्च 2025 में की गई थी। आरोप था कि मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति की हत्या की और शव के टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में डालकर उसे सीमेंट से सील कर दिया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में गवाह और साक्ष्य पेश किए और करीब 126 तारीखों तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को दोषी ठहराया था।

Pic Credit : UNI

विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में राजस्थान के प्रो. आशुतोष पारीक

विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में राजस्थान के प्रो. आशुतोष पारीक

Prof Ashutosh Pareek: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के मूल निवासी तथा वर्तमान में वनस्थली विद्यापीठ के फार्मेसी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत प्रो. आशुतोष पारीक को वर्ष 2026 की प्रतिष्ठित एल्सेवियर विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान मिला है। यह उपलब्धि राजस्थान के फार्मास्यूटिकल शोध क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 

फार्माकोलॉजी एवं फार्मेसी क्षेत्र में उनका स्थान 1,66,116 शोधकर्ताओं में 2403वां है। इस आधार पर वे विश्व के लगभग शीर्ष 1.45 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल हैं। भारत स्तर पर भी उनका शोध प्रभाव उल्लेखनीय है। इस क्षेत्र में सूचीबद्ध 371 भारतीय शोधकर्ताओं के तुलनात्मक विश्लेषण में वे प्रति शोधपत्र प्राप्त नॉन-सेल्फ साइटेशन के आधार पर शीर्ष 45 में शामिल हैं।

राजस्थान के 20 वैज्ञानिक इस सूची में

राजस्थान से फार्माकोलॉजी एवं फार्मेसी क्षेत्र में कुल 20 वैज्ञानिक इस सूची में शामिल हुए हैं। इनमें वनस्थली विद्यापीठ के प्रो. पारीक प्रति शोधपत्र 9.02 नॉन-सेल्फ साइटेशन के साथ शीर्ष पांच वैज्ञानिकों में शामिल हैं। राजस्थान से इस सूची में बिट्स पिलानी, वनस्थली विद्यापीठ और सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान जैसे नामी संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं, जो राज्य में फार्मास्यूटिकल एवं स्वास्थ्य विज्ञान शोध की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है।

 

प्रो. पारीक ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, रायला से प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, राजेंद्र मार्ग, भीलवाड़ा से पूर्ण की। आगे की शिक्षा के लिए उन्होंने बी.एन. कॉलेज ऑफ फार्मेसी, उदयपुर से बी.फार्म तथा एम.फार्म (फार्मास्यूटिक्स) किया और दोनों पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त किया। विद्यार्थी जीवन से ही उनमें अध्ययन, अनुशासन और शोध के प्रति विशेष रुचि रही, जिसने आगे चलकर उनके वैज्ञानिक जीवन की दिशा निर्धारित की।

शिक्षा से जुड़े परिवार में पले-बढ़े प्रो. पारीक के पिता देवीलाल पारीक राजस्थान शिक्षा सेवा से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं, जबकि उनकी माता भी राजकीय विद्यालय में गणित शिक्षिका रही हैं। पढ़ाई में उत्कृष्ट रहने के साथ प्रो. पारीक खेलों में भी सक्रिय रहे और कॉलेज के समय सॉफ्टबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व किया।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित

लगभग 18 वर्षों से औषधि विज्ञान, उच्च शिक्षा और शोध से जुड़े प्रो. पारीक के प्रमुख शोध क्षेत्रों में अस्थमा के लिए उन्नत ड्रग-डिलीवरी सिस्टम, न्यूरोफार्माकोलॉजी तथा कैंसर थेरेप्यूटिक्स शामिल हैं। उनके शोध द लैंसेट माइक्रोब सहित कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं।

 

प्रो. पारीक को शोध के विभिन्न चरणों में भारत सरकार की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं डीबीटी, आईसीएमआर तथा डीएसटी-एसईआरबी से यंग साइंटिस्ट इंटरनेशनल ट्रैवल अवॉर्ड भी प्राप्त हुए हैं। उन्होंने अमेरिका में आयोजित अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंटिस्ट्स (एएपीएस) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों पर अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए हैं।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान 

प्रो. पारीक को उनके शोध और नवाचार कार्यों के लिए पूर्व में भी प्रो. एम.एल. श्रॉफ मेमोरियल नेशनल अवॉर्ड, आईपीजीए यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड तथा ज़ी नेशनल अचीवर्स अवॉर्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।

यह वैश्विक सूची अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े प्रो. जॉन पी. ए. आयोनिडिस एवं सहयोगी वैज्ञानिकों द्वारा विकसित मानकीकृत शोध-साइटेशन संकेतकों पर आधारित है और एल्सेवियर डेटा रिपॉजिटरी पर प्रकाशित होती है।

 

यह सूची केवल शोधपत्रों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि शोध के प्रभाव का आकलन करने वाले कई मानकों पर तैयार की जाती है। इसमें शोधपत्रों को प्राप्त उद्धरण, एच-इंडेक्स, सह-लेखन, शोधपत्र में लेखक की भूमिका तथा सेल्फ-साइटेशन जैसे मानकों को शामिल किया जाता है। वर्ष 2026 की सूची स्कोपस के वर्ष 2025 तक के शोध एवं साइटेशन आंकड़ों पर आधारित है। प्रो. पारीक की यह उपलब्धि राजस्थान के वैज्ञानिक एवं औषधि शोध समुदाय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करती है।

Suzlon Energy Share: चार दिन में 12% चढ़ा सुजलॉन, अब भी तूफानी तेजी की उम्मीद; मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 का टारगेट दिया

Suzlon Energy Share: स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच Suzlon Energy के शेयरों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही। यह बीते चार सत्र में 12% चढ़ चुका है। सुजलॉन बुधवार को 1.52% की बढ़त के साथ 40.80 रुपये पर बंद हुआ।

हालांकि, इसके बावजूद शेयर का प्रदर्शन अब तक कमजोर रहा है। पिछले एक साल में इसमें 25% की गिरावट आई है। वहीं, इस साल अब तक शेयर 22% टूट चुका है। पिछले छह महीने में इसमें 17% और एक महीने में 5% की गिरावट दर्ज की गई है।

सुजलॉन पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज  का सुजलॉन पर रुख काफी बुलिश है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने अपनी 12 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में सुजलॉन पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी। साथ ही, 65 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 60% की तेजी का संकेत देता है।

सुजलॉन फिलहाल अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर के करीब है। मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन के शेयरों में संभावित तेजी की पांच बड़ी वजहें बताई हैं।

1. गिरावट के बाद शेयर का वैल्यूएशन आकर्षक

Suzlon Energy के शेयर में पिछले तीन महीनों में करीब 31% की गिरावट आई है। Motilal Oswal का मानना है कि इतनी गिरावट के बाद शेयर का वैल्यूएशन आकर्षक हो गया है। कंपनी की कमाई को लेकर भी तस्वीर पहले से बेहतर दिख रही है।

2. मजबूत ऑर्डर बुक से मिलेगा सहारा

जून तिमाही के अंत में Suzlon Energy के पास 5.9 GW के ऑर्डर थे। Motilal Oswal के मुताबिक, यह ऑर्डर बुक वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक कंपनी की डिलीवरी के अनुमान को पूरा सपोर्ट देती है।

3. देश में बढ़ रही है विंड पावर की क्षमता

भारत में चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 3 GW विंड पावर क्षमता जोड़ी गई। Motilal Oswal के मुताबिक, पिछले रुझानों को देखें तो दूसरी छमाही में इंस्टॉलेशन पहली छमाही से करीब 1.5 गुना रह सकता है। विंड पावर क्षमता बढ़ने से Suzlon जैसी कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

4. शाम को बिजली की ज्यादा मांग से फायदा

देश में बिजली की मांग बढ़ रही है। खासकर शाम के समय पीक डिमांड ज्यादा रहती है। Motilal Oswal के मुताबिक, इससे विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिल सकता है।  इसका फायदा Suzlon को भी मिलने की उम्मीद है।

5. नए कारोबार से बढ़ेगी कमाई की उम्मीद

Motilal Oswal के मुताबिक, Suzlon का DevCo मॉडल तेजी से आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष की शुरुआत के चार महीनों में इस मॉडल के तहत 600 MW से ज्यादा के ऑर्डर मिले हैं। ये कंपनी के कुल ऑर्डर का करीब 60% हैं। कंपनी विदेशों में भी कारोबार बढ़ाने के मौके तलाश रही है। ब्रोकरेज के मुताबिक, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी संभावनाएं हैं।

Suzlon Energy पर एनालिस्टों की क्या राय है?

Suzlon Energy को कवर करने वाले 12 एनालिस्ट में से 10 ने शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग दी है। दो एनालिस्ट ने इसे ‘Hold’ रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने शेयर बेचने की सलाह नहीं दी है। सभी एनालिस्ट के टारगेट प्राइस के औसत के हिसाब से शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 67% की तेजी की संभावना है।

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फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की ट्रैफिक अवेयरनेस शॉर्ट फिल्मों की पुलिस अधिकारियों ने की सराहना

फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की ट्रैफिक अवेयरनेस शॉर्ट फिल्मों की पुलिस अधिकारियों ने की सराहना

traffic awareness short films: सिनेमा की असली ताकत सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना नहीं, बल्कि उनकी सोच को प्रभावित करना और समाज को बेहतर दिशा देना भी है। इसी उद्देश्य को अपनी रचनात्मकता का आधार बनाकर सामाजिक सरोकारों पर प्रभावी शॉर्ट फिल्में बनाने वाले फिल्ममेकर आलोक बाजपेयी की फ़िल्म निर्माण शैली को इंदौर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने खूब सराहा।

 

यातायात जागरूकता पर केंद्रित बाजपेयी की दो शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) के विद्यार्थियों, कलाकारों और अन्य गणमान्य नागरिकों के समक्ष किया गया। फिल्मों की प्रस्तुति, संदेश देने के नए अंदाज़ और मनोरंजन के साथ जागरूकता पैदा करने की शैली ने उपस्थित दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर (हेडक्वार्टर एवं क्राइम) राजेश कुमार सिंह, डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम एवं ट्रैफिक) राजेश कुमार त्रिपाठी तथा यातायात थाना प्रभारी अरविंद सिंह डांगी ने फिल्मों की सराहना की।

 

अधिकारियों ने बाजपेयी की फिल्मों को प्रभावी, अभिनव और कम समय में सटीक एवं गहरा संदेश देने वाली प्रस्तुतियां बताया। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि ये फिल्में अपनी बात मनोरंजक और अलग अंदाज में रखती हैं, जिससे उनका संदेश दर्शकों के मन में ठहरने की क्षमता रखता है। अधिकारियों ने आलोक बाजपेयी को इसी तरह की सामाजिक संदेशपरक फिल्मों का निर्माण जारी रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

जब कहानी छोटी हो, लेकिन उसका असर बड़ा हो!

आज के तेज़ रफ्तार डिजिटल दौर में, जहां दर्शकों का ध्यान कुछ ही पलों में दूसरी ओर चला जाता है, वहां शॉर्ट फिल्में सामाजिक जागरूकता का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। आलोक बाजपेयी की फिल्में इसी संभावना को सामने रखती हैं—जहां सीमित समय में मनोरंजन, संवेदना और सामाजिक संदेश को एक साथ पिरोने का प्रयास किया गया है।

 

यातायात जागरूकता जैसे विषय पर रचनात्मक सिनेमा का यह प्रयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि सड़क सुरक्षा का संदेश केवल नियमों की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार का हिस्सा बने।

फ़िल्ममेकर के रूप में आलोक बाजपेयी की रचनात्मक सोच का मूल उद्देश्य स्पष्ट है—संदेश ऐसा हो जो केवल सुनाई न दे, बल्कि याद भी रहे। पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बाजपेयी से इसी तरह की समाजोपयोगी शॉर्ट फ़िल्मों का निर्माण जारी रखने का आग्रह किया। 

बिहार नाव हादसा: लापता लोगों की तलाश जारी

वैशाली जिले में गंगा नदी में नाव पलटने से कम से कम 13 बच्चों की मौत की घटना के एक दिन बाद बुधवार को लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने बताया कि हादसे में जिन बच्चों की मौत हुई उनकी उम्र 15 वर्ष से कम थी। नाव पर 20 से अधिक लोग सवार थे।

उन्होंने ने बताया कि मृतकों में नौ लड़कियां और चार लड़के शामिल हैं। बुधवार को अब तक कोई और शव बरामद नहीं हुआ है।

यह हादसा मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे उस समय हुआ जब रामपुर श्यामचंद गांव के निवासी नदी के पार एक गांव में भोज में शामिल होने जा रहे थे।

सिंह ने  राहत और बचाव अभियान अब भी जारी है। छह लोगों को बचा लिया गया है।’’

जिलाधिकारी ने कहा, ‘‘मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं और अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। नाव जिसके नाम पर पंजीकृत है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि सूर्यास्त के बाद नावों के परिचालन पर रोक लगाने के जिला प्रशासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यह हादसा हुआ।

सिंह ने कहा, “नाव के मालिक, संचालक और ऐसी घटनाओं को रोकने एवं निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हमें बताया गया है कि यह नाव पहले भी परिचालित होती रही थी। इस लापरवाही से सख्ती से निपटा जाएगा।”

नावों की कमी होने संबंधी दावों को खारिज करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि यदि नाव या संपर्क सड़क की मांग की जाती है, तो प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा, क्योंकि यह एक अस्थायी जल क्षेत्र है।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की आठ नौकाएं काम कर रही हैं। प्रशासन इलाके में एसडीआरएफ के दो स्थानीय केंद्र स्थापित करने की भी योजना बना रहा है।

मृतकों की पहचान मीरा कुमारी, निशु कुमारी, अनीशा कुमारी, सुनीता कुमारी, आर्यन कुमार, मोहन कुमार, अमृता कुमारी, अंकिता कुमारी, पिंकी कुमारी, नमन कुमार, सिकी कुमारी, भोनू कुमारी और सोनम कुमारी के रूप में हुई है।

अधिकारियों ने बताया कि सूचना के अनुसार हादसे में एक ही परिवार के सात बच्चों की मौत हुई है।

इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में जिलाधिकारी फूट-फूटकर रो रही एक महिला को गले लगाकर सांत्वना देती नजर आ रही हैं।

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राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के उपनिरीक्षक जय दीप नारायण सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि क्षतिग्रस्त नाव को नदी से निकाल लिया गया है और तलाश अभियान जारी है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रत्येक मृतक के परिजन को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक सतीश कुमार यादव और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधान परिषद सदस्य अशरफ अंसारी समेत कई स्थानीय नेता घटनास्थल पर पहुंचे और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री और क्षेत्र के लोकसभा सांसद चिराग पासवान ने भी एनएमसीएच पहुंचकर हादसे में बचाए गए लोगों से मुलाकात की।

पासवान ने संवाददाताओं से कहा, “मैं कल रात से ही जिला प्रशासन के संपर्क में हूं। मैं शोकसंतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा हूं। इन लोगों ने मुझे वह सब कुछ बनाया है, जो मैं आज हूं। जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, मैं यहां रहूंगा।”

उन्होंने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता एवं राघोपुर के विधायक तेजस्वी यादव ने मंगलवार रात एक वीडियो संदेश में कहा था कि वह नयी दिल्ली से लौटने के बाद अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे।

वह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में विपक्ष के प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली गए थे।

हादसे के बाद गांव के लोगों ने प्रशास पर आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

स्थानीय निवासी रवि कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘नाव की हालत जर्जर थी। हमने कई बार इसे बदलने की मांग की थी, लेकिन हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।’’

राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन ने हादसे में मारे गए प्रत्येक बच्चे के परिजन को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि उपलब्ध कराई है। इसके अतिरिक्त, कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत प्रत्येक मृतक के परिवार को तीन-तीन हजार रुपये तथा मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत मृतकों के अभिभावकों को 20-20 हजार रुपये दिए गए हैं।

Pic Credit : UNI