धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा : CM योगी

धन के लिए धर्म नहीं त्यागूंगा, छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा : CM योगी

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘याद रखना, एक संन्यासी के जीवन का ध्येय ही होना चाहिए कि धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा। धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा और छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा।’ उन्होंने कहा कि देश और धर्म के लिए किया गया हर त्याग महान है। शांति के समय धर्म का स्वरूप संयम, सौहार्द और लोककल्याण है, लेकिन राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर संघर्ष के लिए भी तैयार रहना चाहिए। भारत सेवाश्रम संघ ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों, आदर्शों और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। राष्ट्रोन्नति को आत्मोन्नति का माध्यम बनाकर संस्था ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्र जागरण और लोककल्याण से जोड़ा है।

 

मुख्यमंत्री योगी बुधवार को वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी प्रणवानंद महाराज के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर आरती की। मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना भी की। संघ के प्रधान सचिव स्वामी विश्वात्मानंद ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1926 में स्थापित काशी शाखा ने सेवा और राष्ट्र जागरण की अपनी परंपरा के सौ वर्ष पूरे किए हैं। यह संस्था भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक देशों में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

आपसी बंटवारे से विदेशी आक्रांताओं को मिला अवसर

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब राष्ट्र संकट में होता है तो उसकी आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत भी संकट में पड़ जाती है। उन्होंने सवाल किया कि विदेशी आक्रांता सफल नहीं होते तो क्या काशी विश्वनाथ मंदिर को अपवित्र और क्षतिग्रस्त करने का दुस्साहस होता। क्या राम जन्मभूमि पर पांच सौ वर्षों तक गुलामी का कलंक रहता या श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ऐसा संकट खड़ा होता। उन्होंने कहा कि आपसी बंटवारे का दुष्परिणाम देश को भुगतना पड़ा। इसी पाप के परिमार्जन के लिए संतों ने आध्यात्मिक साधना को राष्ट्रीय जागरण का माध्यम बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसी राष्ट्रीय चेतना और संकल्प का परिणाम है।

गोरक्षपीठ में स्वामी प्रणवानंद को मिली थी दीक्षा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद महाराज का गोरक्षपीठ से गहरा संबंध रहा है। वर्ष 1912-13 में वह गोरखपुर पहुंचे और सिद्ध योगी बाबा गंभीरनाथ के सानिध्य में साधना की। उन्होंने स्वामी प्रणवानंद के बचपन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि लगभग 12-13 वर्ष की आयु में वह अपने शिक्षक के साथ गुरु की खोज में गोरखपुर पहुंचे थे। बाबा गंभीरनाथ ने उन्हें देखकर जन्म से सिद्ध योगी बताया था। साधना के दौरान वह तीन घंटे तक अखंड समाधि में रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर से प्राप्त आध्यात्मिक प्रेरणा को स्वामी प्रणवानंद ने पूरे देश में राष्ट्र जागरण का माध्यम बनाया। इसी ऐतिहासिक संबंध के कारण भारत सेवाश्रम संघ से उनका विशेष लगाव है।

स्वाधीनता और हिंदू जागरण में संघ का योगदान

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वर्ष 1926 में स्वामी प्रणवानंद ने काशी शाखा की स्थापना की थी। देश की पराधीनता के समय वह स्वाधीनता और हिंदू जागरण की अलख जगाते रहे। आज भारत सेवाश्रम संघ देश के साथ दुनिया के अनेक देशों में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि संघ ने राष्ट्रवाद को जीवन का ध्येय बनाया। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कांग्रेस की तुष्टीकरण नीति के विरुद्ध नए राजनीतिक संगठन के निर्माण की प्रेरणा भी स्वामी प्रणवानंद से मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि संघ के संन्यासियों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। यही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।

100 परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

शताब्दी समारोह में भारत सेवाश्रम संघ की ओर से 100 परिवारों को सिलाई मशीनें प्रदान की गईं। मुख्यमंत्री योगी ने स्वयं पांच परिवारों को सिलाई मशीनें सौंपीं। उन्होंने कहा कि संघ का यह प्रयास सौ परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत की संकल्पना है। उन्होंने प्रयागराज कुंभ में संघ की अन्नक्षेत्र सेवा और देशभर में संचालित लोककल्याणकारी गतिविधियों की भी सराहना की। कहा कि शांति के समय सेवा और लोककल्याण के माध्यम से समाज को समर्थ बनाना ही आध्यात्मिक साधना की सार्थकता है।

धर्म को मानवता और अध्यात्म को सेवा से जोड़ा : स्वामी विश्वात्मानंद

भारत सेवाश्रम संघ के प्रधान सचिव स्वामी विश्वात्मानंद ने कहा कि काशी शाखा की स्थापना धर्म को मानवता, अध्यात्म को सेवा और तीर्थ को राष्ट्रीय जागरण से जोड़ने के संकल्प के साथ हुई थी। संघ पीड़ितों की सहायता, तीर्थयात्रियों की सेवा, चिकित्सा, शिक्षा, जनजाति कल्याण और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। विकसित भारत के निर्माण के लिए शिक्षित, चरित्रवान और संवेदनशील समाज आवश्यक है।

 

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद : समारोह में वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल, राज्यमंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, हंसराज विश्वकर्मा, महापौर अशोक तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी, डॉ. अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, त्रिभुवन राम, सुनील पटेल तथा भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी विश्वात्मानंद, स्वामी धनेशानंद, स्वामी अम्बरीशानंद और स्वामी आत्मज्ञानानंद सहित देश-विदेश से आए संन्यासी और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

रोबोट ने कर दिया ऐसा गंदा काम, करना पड़ा गिरफ्तार, जानिए क्या है पूरा मामला?

एक रोबोट ने ऐसा गंदा काम कर दिया है की उसे गिरफ्तार करना पड़ा गया। रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीक इंसानों की मदद के लिए बनाई गई हैं। लेकिन अब एक रोबोट को लेकर जो खबर सामने आ रही है वो हैरान करनी वाली तो है ही और आपको ये सोचने पर मजबूर भी कर सकती है कि एक रोबोट आपकी मदद करने के अलावा आपके लिए और आपके परिवार के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है अगर वो आपके कंट्रोल से बाहर हो गया तो।

ये मामला जर्मनी के कोलोन शहर का है जहां एक रोबोट पर 16 साल की लड़की को गलत तरीके से छूने और आपत्तिजनक हरकतें करने का आरोप लगा गया है। रोबोट की हरकत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और रोबोट को जब्त कर लिया है और उसे नियंत्रित करने वाले दो युवकों की भूमिका की जांच की जा रही है। दोनों युवकों पर फिलहाल कोई आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन उन्हें संदिग्ध माना जा रहा है।

मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर रोबोट की इस हरकतो को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि रोबोट को रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा था या उसके प्रोग्रामिंग में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी. इन सब सवालों के जवाब पाने के लिए पुलिस जांच में जुट गई है।

लड़की के पास कैसे पहुंचा रोबोट, फिर क्या हुआ?

पुलिस को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह घटना 10 अक्टूबर की देर रात कोलोन में एक फास्ट-फूड रेस्तरां के बाहर हुई। जहां 16 साल की एक लड़की अपनी दो सहेलियों के साथ वहां मौजूद थी। इसी दौरान वहां करीब 120 सेंटीमीटर यानी 1.2 मीटर लंबा लाल और सुनहरे रंग का एक रोबोट उस 16 साल की लड़की के पास पहुंचा। रोबोट ने लड़की के पास जाकर उसके प्राइवेट पार्ट को छुआ और उसके साथ आपत्तिजनक हरकतें कीं इस घटना के दौरान रोबोट को कंट्रोल कर रहे दो युवकों पर वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर इस पूरी घचना को लाइव दिखाने का भी आरोप लगाया गया है।

रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर रोबोट को कौन कंट्रोल कर रहा था या रोबोट ने ये हरकत खुद कर डाली। पुलिस का भी मुख्य सवाल यही है कि रोबोट की गतिविधियों को कौन नियंत्रित कर रहा था। कोलोन पुलिस के मुताबिक, रोबोट का मालिक 16 साल का है, जबकि उसके साथ मौजूद दूसरा युवक 19 साल का बताया जा रहा है। दोनों युवकों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। फिलहाल उनके खिलाफ आरोप तय नहीं किए गए हैं।

पुलिस ने रोबोट को जब्त कर लिया है, लेकिन रोबोट को जब्त करना इस बात का सबूत नहीं है कि उसने खुद फैसले लेकर ये हरकतें कीं। जांच पूरी होने के बाद ही ये साफ होगा कि घटना के दौरान तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया गया था और इसमें किसकी क्या भूमिका थी।

जब सामने आई रोबोट की तस्वीर

रोबोट की तस्वीर को भी पुलिस ने साझा किया जिसमें देखा जा सकता है कि रोबोट सफेद टैंक टॉप, काले ट्रैक पैंट, चश्मा और गले में सोने जैसी चेन पहने हुई है। रोबोट की लांबई करीब 120 सेंटीमीटर बताई जा रही है।

पुलिस ने बताया कि घटना के बाद रोबोट एक कार की डिक्की में मिला था। अधिकारियों ने उसे वहीं से जब्त किया। इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों के मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिए, ताकि घटना से संबंधित वीडियो और अन्य डिजिटल जानकारी की जांच करने में मदद मिल सके।

क्या रोबोट खुद ले सकता है ऐसे फैसले?

इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि क्या रोबोट खुद ऐसी हरकत करने के बारे में खुद से फैसला ले सकता है? क्या मशीन अपने आप ऐसी हरकत कर सकती है या इसके पीछे किसी व्यक्ति का कंट्रोल हो सकता है?

आज कई तरह के रोबोट बनाए जा रहे हैं। कुछ रोबोट सेंसर और सॉफ्टवेयर की मदद से अपने आसपास की चीजों को पहचानकर काम कर सकते हैं। वहीं, कुछ को रिमोट से नियंत्रित किया जाता है और कुछ में पहले से तय गतिविधियां प्रोग्राम की जाती हैं। आज जमाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीकों से लैस रोबोट्स के इस्तेमाल की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में रोबोट द्वारा ऐसी हरकत ने दुनिया डरा दिया है। हालांकि, किसी रोबोट की क्षमताएं उसके डिजाइन, सॉफ्टवेयर और कंट्रोल सिस्टम पर निर्भर करती हैं। इसलिए बिना जांच के अभी से ये मान लेना ठीक नहीं होगा कि रोबोट ने अपनी मर्जी से ऐसी हरकत को अंजाम दिया।

रोबोट की इस हरकत पर चर्चा के दौरान सवाल तकनीकी खराबी का उठ रहा है। कई बार किसी मशीन या रोबोट में खराबी आने से वो उस तरह से काम नहीं करता है जिस तरह से उसको प्रोग्राम किया गया होता है। इस रोबोट में खराबी थी या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है इस पर भी पुलिस जांच कर रही है।

क्या एक रोबोट के खिलाफ अपराध का मामला बन सकता है? पुलिस ने जांच के लिए रोबोट को जब्त ज़रूर किया है, लेकिन उसे आरोपी नहीं बनाया गया है। जांच का मकसद यह पता लगाना है कि घटना कैसे हुई और इसे नियंत्रित करने वाले लोगों की इसमें क्या भूमिका थी।

फिलहाल दोनों युवक जांच के दायरे में हैं और उन पर आरोप साबित नहीं हुए हैं। इसलिए इसे रोबोट द्वारा किया गया अपराध कहना गलत होगा। यह मामला सार्वजनिक स्थानों पर AI और रोबोट्स के सुरक्षित उपयोग और उनकी जवाबदेही तय करने की ज़रूरत को रेखांकित करता है।

रोबोट की इस हरकत की वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है । वायरल वीडियो में एक रोबोट लड़की की तरफ बढ़ता है, एक महिला को धक्का देता और दूसरों को गले लगाता दिख रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर इसका मज़ाक उड़ाने और वीडियो शेयर करने वालों को चेतावनी दी है, क्योंकि इससे पीड़ितों पर बुरा असर पड़ सकता है।

अयोध्या से चुनाव लड़ने के चैलेंज पर गरमाई राजनीति, सपा मुखिया अखिलेश यादव पर भड़के साधु-संत

अयोध्या से चुनाव लड़ने के चैलेंज पर गरमाई राजनीति, सपा मुखिया अखिलेश यादव पर भड़के साधु-संत

CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती को लेकर जुबानी जंग अयोध्या के संत समाज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संतों ने सपा प्रमुख के रुख पर गहरा रोष जताते हुए 1990 में हुई कारसेवा और गोलीकांड की घटना का जिक्र किया और कहा कि कारसेवकों पर हुई उस कार्रवाई का दाग कभी नहीं धुल सकता।

 

संतों ने अखिलेश यादव को चुनौती दी कि यदि वे वास्तव में साहसी हैं, तो अयोध्या की बात छोड़कर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि निर्माण का खुलकर समर्थन करें। संतों ने सीएम योगी को राष्ट्रवाद और सनातन का गौरव बताते हुए उनकी नेतृत्व क्षमता की सराहना की।

… तो पीछे हटे सपा प्रमुख

अयोध्या के आचार्य मंदिर के महंत विवेक आचार्य ने सपा की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए कहा कि 1990 के कारसेवा गोलीकांड का कलंक सपा से कभी मिट नहीं सकता। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव की चुनौती को तत्काल स्वीकार कर लिया, तो अखिलेश जी खुद पीछे हट गए। अखिलेश अयोध्या आकर चुनाव लड़कर देख लें, संत समाज और जनता उन्हें जवाब दे देगी।

 

तपस्वी छावनी के स्वामी परमहंस ने तंज कसते हुए कहा कि सीएम योगी द्वारा चुनौती स्वीकार करते ही अखिलेश यादव की राजनीतिक हवा निकल गई। उन्होंने कहा कि अखिलेश उत्तर प्रदेश में कहीं से भी चुनाव लड़ लें, जनता के सामने उनकी जमानत तक जब्त हो जाएगी।

मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि निर्माण का करें ऐलान

हनुमान किला (13 भाई त्यागी) के महंत परशुराम दास ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव केवल राम मंदिर के नाम पर बयानबाजी करते हैं। अगर उनमें वास्तव में नैतिक साहस है, तो वे मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण का खुलकर समर्थन और घोषणा करें। पूरा संत समाज उनके साथ खड़ा रहेगा, लेकिन वोटों के ध्रुवीकरण के चलते वे ऐसा कभी नहीं करेंगे।

 

जानकी घाट के लोकनाथ बाबा ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, तो वे रिकॉर्ड मतों से विजय प्राप्त करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक खास वोट बैंक के दबाव में सपा प्रमुख रामलला के दर्शन करने नहीं आते, जबकि दरगाहों पर चादर चढ़ाते हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषक डॉ. समरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन के पूरे इतिहास में समाजवादी पार्टी की भूमिका हमेशा नकारात्मक रही है। आज जब अयोध्या में ऐतिहासिक विकास कार्य हो चुके हैं, तब भी सपा केवल कमियां तलाशने का काम कर रही है। आगामी विधानसभा चुनावों में राज्य की जनता इसका करारा जवाब देगी।

अंकिता भंडारी के माता-पिता से मिले राहुल गांधी, प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला प्रदर्शनकारियों को बताया ‘शेरनी’

अंकिता भंडारी के माता-पिता से मिले राहुल गांधी, प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला प्रदर्शनकारियों को बताया 'शेरनी'

rahul gandhi

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की। राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी मौजूद थीं। अंकिता भंडारी के माता पिता दिल्ली के इंडिया गेट के बाहर धरने पर बैठे हैं। अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि दुष्यंत कुमार को जेल में होना चाहिए। मैं माननीय राष्ट्रपति से गुज़ारिश करता हूं कि जब तक CBI की जांच पूरी न हो जाए, तब तक दुष्यंत कुमार को गवर्नर न बनाया जाए। इससे पहले राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने एक युवा महिला के हाथ अपने आसपास खड़े साथी प्रदर्शनकारियों के कंधों पर रखवाए।

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इसके बाद उन्होंने दूसरे प्रदर्शनकारियों से भी ऐसा ही करने को कहा। सभी प्रदर्शनकारी एक-दूसरे के कंधों पर हाथ रखकर एकजुट होकर खड़े हो गए। इसके बाद माइक पर लौटते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ‘ये हिन्दुस्तान है।’ उन्होंने प्रदर्शनकारियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यहां किसी धर्म, जाति या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है, बल्कि सभी एक आवाज बनकर विरोध कर रहे हैं।

 

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‘यह भारत की आवाज है, इसके खिलाफ खड़े मत होइए’

राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए कहा, “अमित शाह जी, इसे अच्छी तरह देख लीजिए। यहां कोई हिंदू नहीं है, कोई मुस्लिम नहीं है, कोई किसी खास जाति का नहीं है। यहां कोई महिला या पुरुष नहीं है। यहां एक आवाज है, एक विरोध प्रदर्शन है। यह भारत की आवाज है और आप इस आवाज के खिलाफ खड़े हैं। प्रधानमंत्री भी इस आवाज के खिलाफ खड़े हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि उनकी सलाह है कि इस आवाज के खिलाफ खड़े न हों, क्योंकि कोई भी इसके सामने टिक नहीं सकता।

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दिल्ली पुलिस से बोले- ‘दिल से, प्यार से’

प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी छात्रों से प्रदर्शन के दौरान वीडियो रिकॉर्ड करने और सबूत उन्हें भेजने को कहा है। राहुल गांधी ने कहा, “जब यह पूरा मामला समाप्त होगा, तब हम इन सभी सबूतों का इस्तेमाल करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन लोगों को सजा मिलनी चाहिए, उन्हें सजा मिले। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ज्ञानेश कुमार, अमित शाह से लेकर उस कांस्टेबल तक की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जो हमारे बच्चों पर हाथ उठा रहा है।” उन्होंने प्रदर्शन में शामिल युवाओं से पूछा, “क्या कोई डर रहा है?” इस पर प्रदर्शनकारियों ने जवाब दिया, “नहीं, सर।”

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राहुल गांधी ने महिला प्रदर्शनकारी को बताया ‘हमारी शेरनी’

इससे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने एक महिला प्रदर्शनकारी का परिचय कराते हुए उसे ‘हमारी शेरनी’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला के साथ मारपीट की गई, लेकिन इसके बावजूद उसने अपना हौसला नहीं खोया। राहुल गांधी ने कहा, “उसे पीटा गया, लेकिन वह डरी नहीं। उसके दिल में कोई नफरत नहीं थी।” राहुल गांधी के इस संबोधन में प्रदर्शनकारियों की एकजुटता, कथित पुलिस कार्रवाई और विरोध के दौरान सामने आए आरोप प्रमुख मुद्दे रहे।

1 बाइक और 50 चालान! 3.22 लाख रुपये का बकाया देख उड़ गए गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस के भी होश

Gurugram Traffic Challan: गुरुग्राम में ट्रैफिक पुलिस ने एक ऐसी बाइक के खिलाफ ऐक्शन लिया है, जिस पर 1-2 नहीं बल्कि 50 चालान बकाया थे, वहीं जब इस बाइक पर जुर्माने की रकम निकाली गई तो खुद अधिकारी भी उसे जानकर हैरान रह गए। दरअसल इस बाइक पर कुल 3.22  लाख रुपए की जुर्माने की रकम पेंडिंग निकली, जिसके बाद CRPF चौक के पास चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के दौरान विभाग ने इस बाइक को जब्त कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, बाइक पर ज्यादातर चालान बिना हेलमेट गाड़ी चलाने, वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) नहीं होने और नंबर प्लेट के बिना बाइक चलाने जैसे उल्लंघनों के लिए काटे गए थे। इसके अलावा भी ट्रैफिक नियमों से जुड़े कई उल्लंघन सामने आए।

जानकारी के अनुसार, CRPF चौक पर तैनात जोनल अधिकारी ASI संदीप अपनी टीम के साथ नियमित वाहन जांच कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बाइक को रुकवाया और चालक से गाड़ी के दस्तावेज दिखाने को कहा। हालांकि, बाइक सवार कोई भी दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने बाइक को जब्त कर लिया।

वहीं, जांच करने पर पुलिस को पता चला कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अलग-अलग प्रावधानों के तहत उस मोटरसाइकिल पर 50 चालान बकाया थे, जिनका कुल जुर्माना 3,22,500 रुपये था।

ट्रैफिक पुलिस के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, “बकाया चालानों की वजह से नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ने मोटरसाइकिल को जब्त कर लिया और उसे तय पार्किंग जगह पर खड़ा कर दिया।”

हालांकि, पुलिस ने अभी यह जानकारी नहीं दी है कि बाइक पर ये 50 चालान कितने समय के दौरान काटे गए थे।

काया चालान नहीं भरे तो होगी कार्रवाई, गुरुग्राम पुलिस चला रही विशेष अभियान

बता दें कि गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ खास अभियान चला रही है। इन अभियानों के तहत, उन वाहन मालिकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है, जिन्होंने लंबे समय से अपने बकाया चालान का भुगतान नहीं किया है।

पुलिस ने बताया कि वाहन चालकों को उनके बकाया चालान के बारे में भी जानकारी दी जा रही है और उन्हें समय पर बकाया राशि का भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

गुरुग्राम पुलिस की वाहन चालकों को सलाह

गुरुग्राम पुलिस के प्रवक्ता ने वाहन चालकों से अपील की कि वे ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करें और वैध बीमा और PUC सर्टिफिकेट समेत गाड़ी से जुड़े जरूरी दस्तावेजों को अपडेट रखें।

प्रवक्ता ने कहा कि वाहन चालकों से बकाया चालान समय पर भरने का भी आग्रह किया गया, क्योंकि वाहन चालकों और सड़क का इस्तेमाल करने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी है।

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3% Chance of Survival से Comeback तक | Sahil Jadhav की Inspiring Story | Calisthenics Coach

3% Chance of Survival से Comeback तक | Sahil Jadhav की Inspiring Story | Calisthenics Coach

#एक वक्त था जब भारी वजन उठाना साहिल की ताकत थी। आज एक कदम उठाना भी उनकी सबसे बड़ी जीत है।
16 मई 2025 को एक गलत लैंडिंग ने साहिल की जिंदगी बदल दी।
गर्दन के नीचे का पूरा शरीर पैरालाइज्ड हो गया। डॉक्टरों ने बचने की सिर्फ 3% उम्मीद बताई। 9 महीने ICU, वेंटिलेटर और रिहैब में गुजारने के बाद साहिल आज फिर खड़े होने और चलने की कोशिश कर रहे हैं।
जिंदगी ने उन्हें शून्य पर ला खड़ा किया।
लेकिन उन्होंने शून्य से शुरुआत करना सीख लिया। कभी-कभी Comeback का मतलब पहले जैसा बनना नहीं होता… बल्कि फिर से शुरुआत करने की हिम्मत रखना होता है।

@jdication

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3% Chance of Survival से Comeback तक | Sahil Jadhav की Inspiring Story | Calisthenics Coach | Mumbai

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Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना गिरा, चांदी एक दिन में ₹5000 फिसली

दिल्ली सर्राफा बाजार में 14 अक्तूबर को सोने और चांदी दोनों में गिरावट आई। रुपये में मजबूती ने सोने और चांदी पर दबाव बढ़ाया। सोना 1,800 रुपये गिरकर 1,50,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन ने यह बताया।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिली। इसकी कीमत 5000 रुपये गिरकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। रुपये में बुधवार को भी मजबूती दिखी। यह 19 पैसे की मजबूती के साथ 95.17 के लेवल पर आ गया। यह रुपये में मजबूती का लगातार चौथा दिन था। आरबीआई ने फॉरेक्स मार्केट में स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शंस रोकने के लिए कदम उठाए हैं, जिससे रुपये में तेजी आई है।

रुपये में मजबूती का पड़ा असर 

ट्रेडर्स ने बताया कि रुपये में मजबूती से सोने का इंपोर्ट सस्ता हो जाता है। इसका असर सोने की घरेलू कीमतों पर पड़ता है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के कमजोर संकेतों और रुपये में मजबूती से घरेलू बाजार में सोने में गिरावट आई।

सोने में ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं

स्मार्टवेल्थ डॉट एआई के फाउंडर पंकज सिंह ने कहा कि भारत में त्योहारी मांग और चीन की लगातार खरीदारी से सोने में ज्यादा गिरावट आने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में सावधानी बरतने की सलाह है। करेंसी में उतार-चढ़ाव का असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। इसका असर भारत में सोने के निवेशकों के रिटर्न पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने में नरमी

आनंदराठी शेयर में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में नरमी दिखी। इसकी कीमत 4,150 डॉलर प्रति औंस के नीचे चली गई, जो इस हफ्ते सोने का सबसे कम भाव है। उन्होंने कहा कि करीब बीते दो हफ्तों से सोने की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं। डॉलर 18 महीनों के हाई लेवल से नीचे आया है। इसके बावजूद यह मजबूत बना हुआ है।

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चांदी 59 डॉलर से नीचे आई 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 0.49 फीसदी गिरकर 4,140 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। सिल्वर में तो एक फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। यह 58.49 डॉलर प्रति औंस पर था। इससे पहले 27 जुलाई को चांदी का भाव 58.40 डॉलर प्रति औंस था। मार्केट की नजरें फेडरल रिजर्व की मीटिंग पर लगी हैं, जो इस महीने के आखिर में होने वाली है।

सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

सपा को बड़ा झटका, यूपी चुनाव से पहले तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल

Samajwadi Party Rebel MLAs: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले अमेठी में सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। अमेठी जनपद के गौरीगंज स्थित मंगलम भवन के सामने मैदान में आयोजित एक विशाल राजनीतिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी (सपा) के तीन बागी विधायकों ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा की विधिवत सदस्यता ग्रहण कर ली है। अमेठी के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब एक साथ इतनी भारी संख्या में दिग्गज नेताओं ने दल-बदल किया है।

​समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी

​भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और अमेठी की पूर्व सांसद स्मृति ईरानी मंगलवार को पहली बार अमेठी पहुंचीं। उनकी अगुवाई और मौजूदगी में यह बड़ा राजनीतिक फेरबदल हुआ। इस दौरान मुख्य रूप से पंकज चौधरी (भाजपा प्रदेश अध्यक्ष), ​अमरपाल मौर्य (पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष), ​दारा सिंह चौहान (यूपी सरकार के मंत्री) तथा कई अन्य सांसद, विधायक और स्थानीय वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। 

कौन हैं भाजपा में शामिल होने वाले सपा विधायक?

  • ​राकेश प्रताप सिंह : गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र से तीन बार के सपा विधायक। पार्टी विरोधी गतिविधियों और रामचरितमानस विवाद के बाद सपा ने इन्हें निष्कासित कर दिया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने खुलकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी का समर्थन किया था और गौरीगंज से अयोध्या तक राम मंदिर पदयात्रा भी निकाली थी।
  • ​अभय सिंह (अभय प्रताप सिंह) : गोसाईगंज (अयोध्या) से विधायक हैं। उन्होंने अपनी पत्नी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य सरिता सिंह और पिता भगवान बख्श सिंह समेत भारी संख्या में समर्थकों के साथ भाजपा की सदस्यता ली।
  • ​विनोद चतुर्वेदी : जालौन के कालपी विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक, जो अपने कई समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हुए।

​क्या कहा राकेश प्रताप सिंह ने?

​सपा से निष्कासित और गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने पर स्पष्ट कहा कि वे ‘राष्ट्र और राम’ के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इन तीनों ही विधायकों ने पहले राज्यसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी लाइन से हटकर क्रॉस वोटिंग करते हुए भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया था।

​राजनीतिक समीकरण और आगे की राह

​यह पूरा घटनाक्रम अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीतकर सदन पहुंचे इन तीनों कद्दावर विधायकों का पार्टी छोड़कर भाजपा में जाना, समाजवादी पार्टी के लिए एक तगड़ा झटका है। वहीं, आगामी 2027 के चुनावों से पहले इस बड़े फेरबदल से भाजपा की ज़मीनी पकड़ कितनी मजबूत होती है, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल अमेठी का यह सियासी घटनाक्रम राज्य की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

Tata Technologies Q2 Results: टाटा ग्रुप की कंपनी का मुनाफा घटा, शेयरों पर रहेगी नजर

Tata Technologies Q2 Results: टाटा ग्रुप की कपंनी Tata Technologies के लिए सितंबर तिमाही में तस्वीर मिली-जुली रही। कंपनी का मुनाफा घटा, लेकिन रेवेन्यू में अच्छी बढ़ोतरी हुई। बुधवार 14 अक्टूबर को जारी नतीजों के मुताबिक, कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 5.2% गिरकर 171.4 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह 180.8 करोड़ रुपये था।

दूसरी ओर, कंपनी का रेवेन्यू 28.4% बढ़कर 1,698.8 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल यह 1,323.3 करोड़ रुपये था। ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस भी बेहतर रही। EBIT 25.3% बढ़कर 238.7 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि, EBIT मार्जिन 14.4% से घटकर 14.1% रह गया।

EBITDA बढ़ा, लेकिन मुनाफा अनुमान से कम

टाटा टेक्नोलॉजीज का EBITDA सालाना आधार पर 31.5% बढ़कर 273.3 करोड़ रुपये हो गया। EBITDA मार्जिन भी 15.7% से बढ़कर 16.1% पहुंच गया। रेवेन्यू और ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस तीन ब्रोकरेज के अनुमान से बेहतर रहे। हालांकि, नेट प्रॉफिट 200 करोड़ रुपये के अनुमान से काफी कम रहा।

कंपनी के सर्विस सेगमेंट का रेवेन्यू 33.9% बढ़कर 1,355.7 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस से रेवेन्यू 10.5% बढ़कर 343.1 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के CEO वॉरेन हैरिस ने कहा कि मजबूत मांग और नए प्रोग्राम शुरू होने से पूरे वित्त वर्ष में दोहरे अंकों की ग्रोथ की उम्मीद है।

टाटा टेक्नोलॉजीज को नए ऑटोमोटिव प्रोजेक्ट

तिमाही के दौरान Tata Technologies को एक बड़ी यूरोपीय लग्जरी कार कंपनी से 138 मिलियन डॉलर का प्रोजेक्ट मिला। इसके तहत कंपनी दो व्हीकल प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट और इंजीनियरिंग से जुड़े काम करेगी।

इसके अलावा, उत्तर अमेरिका की एक कमर्शियल गाड़ी बनाने वाली कंपनी ने नए व्हीकल प्लेटफॉर्म के डेवलपमेंट की जिम्मेदारी दी है। कंपनी को ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े दूसरे प्रोजेक्ट भी मिले।

कर्मचारियों की संख्या बढ़ी, शेयर में तेजी

सितंबर के अंत में Tata Technologies में 12,895 कर्मचारी थे। एक साल पहले इनकी संख्या 12,402 थी। तिमाही में कंपनी का फ्री कैश फ्लो 223.5 करोड़ रुपये रहा। सितंबर के अंत में कंपनी के पास 107.8 मिलियन डॉलर का कैश और कैश इक्विवेलेंट्स था।

नतीजों से पहले बुधवार को कंपनी का शेयर 0.5% बढ़कर 747.25 रुपये पर बंद हुआ। साल 2026 में अब तक शेयर करीब 16% चढ़ चुका है।

HDB Financial Q2 Results: मुनाफा 34% बढ़ा, NPA में भी सुधार; डिविडेंड का ऐलान

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।