
नीले ड्रम हत्याकांड के फैसले ने दो परिवारों को अलग-अलग भावनाओं के बीच खड़ा कर दिया। एक तरफ बेटे को खो चुके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बंधी, तो दूसरी ओर बेटी को मृत्युदंड मिलने की खबर ने उसके माता-पिता को भीतर तक झकझोर दिया। कभी अपनी बेटी को पुलिस के हवाले कर उसके लिए सख्त सजा की मांग करने वाले माता-पिता आज उसी बेटी से मिलने की इच्छा जता रहे हैं। हालांकि, उनका कहना है कि वे कानूनी लड़ाई में आगे पैरवी नहीं करेंगे।
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मेरठ के चर्चित सौरव हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद भावनाओं का एक ऐसा पक्ष सामने आया है, जहां न्याय, पछतावा, पारिवारिक रिश्ते और एक मासूम बच्ची का भविष्य आपस में उलझे नजर आ रहें हैं। मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड सुनाए जाने की खबर ने जहां सौरव के परिजनों को सुकून दिया, वहीं मुस्कान के मायके में मातम का माहौल दिखाई दिया।
मुस्कान का परिवार टीवी पर फैसले की जानकारी ले रहा था,लेकिन जेसे ही बेटी की सजा को सुना तो जन्मदाता माता-पिता की आंखें उस समय नम हो गईं। परिवार के मुताबिक, छह साल की मासूम बच्ची भी अपनी मां को फांसी की सजा मिलने की बात सुनकर रो पड़ी। एक तरफ बेटी के को खुद पुलिस को सौंपने के बाद रिश्ता खत्म करना तो दूसरी तरफ माता-पिता का फांसी की सजा सुनते ही भावनात्मक रिश्ता सामने आ गया। तमाम शिकायतों और आरोपों के बावजूद बेटी की तड़प मां-बाप में आज साफतौर पर दिखाई देने लगी।
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बेटी को पुलिस के हवाले किया, अब मां का मन मिलने को बेचैन
मुस्कान के पिता प्रमोद और मां कविता रस्तोगी का कहना है कि सौरव की हत्या के बाद बेटी की बात सुनकर उन्होंने खद उसे पुलिस क़ सौंप दिया था। दामाद सौरव को वह बेटे की तरह मानते थे, जिसके चलते हत्या के मामले मुस्कान के लिए खुद फांसी की मांग की थी।
लेकिन अब अदालत से मृत्युदंड का फैसला आने के बाद जन्म देने माता-पिता का प्यार जाग उठा है। मां कविता का कहना है कि मां का दिल आखिर मां का ही होता है। बेटी से मिलने की इच्छा उन्हें लंबे समय से बेचैन कर रही थी, लेकिन परिवार और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए वे अब तक जेल में उससे मिलने नहीं गए।
परिवार ने फैसला सुनाए जाने के बाद अब मुस्कान से मुलाकात करने की इच्छा जताई है। उनके मुताबिक, वे जेल जाकर बेटी से मिलेंगे। हालांकि, यह मुलाकात उनके लिए भावनात्मक रूप से कितनी कठिन होगी, इसका अंदाजा उनके बयानों से लगाया जा सकता है।
‘नाती को ददिहाल नहीं भेजेंगे, उसकी मां की छवि से उसे भी ठेस पहुंचेगी’
इस पूरे मामले में सबसे संवेदनशील सवाल मुस्कान की छह साल की बेटी के भविष्य का है। बच्ची की परवरिश और उसके पारिवारिक अधिकारों को लेकर दोनों पक्षों के बीच भावनात्मक खींचतान दिखाई दे रही है।
मुस्कान के पिता प्रमोद ने स्पष्ट कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी नातिन को सौरव के परिवार को नहीं सौंपेंगे। उनका आरोप है कि जब सौरव विदेश में रहता था और उनकी बेटी किराये के मकान में अकेली रह रही थी, तब ससुराल पक्ष ने उसकी स्थिति जानने की पर्याप्त कोशिश नहीं की। अब बच्ची को अपने पास रखने की मांग उठ रही है।
प्रमोद को आशंका है कि मुस्कान की पहचान और उस पर लगे आरोपों का सीधा असर बच्ची के साथ होने वाले व्यवहार पर भी पड़ सकता है। उनका कहना है कि बच्ची को मां के अपराधों की छाया में नहीं जीना चाहिए और उसे ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां उसे अपनापन और सम्मान मिले। हालांकि, बच्ची के भविष्य का फैसला केवल भावनात्मक आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके हित और कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। आखिर इस पूरे घटनाक्रम में मासू बच्ची का कोई दोष नहीं है।
परिवार को थी उम्रकैद की उम्मीद, मृत्युदंड से टूटा हौसला
मुस्कान के पिता का कहना है कि परिवार को उम्मीद थी कि अदालत दो परिवारों और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उम्रकैद की सजा सुना सकती है। लेकिन मृत्युदंड के फैसले ने उन्हें अंदर तक तोड़कर रख दिया।
उनका कहना है कि पिता की बीमारी, आर्थिक परेशानियों और लंबे समय से बंद पड़ी दुकान ने परिवार को कमजोर कर दिया है। ऐसे में उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए जरूरी आर्थिक साधन जुटाना उनके लिए संभव नही है। परिवार ने फिलहाल स्पष्ट किया है कि वह मुस्कान की सजा कम कराने के लिए हाईकोर्ट में पैरवी नहीं करेगा। हालांकि, जेल में उससे मिलने की इच्छा उन्होंने जरूर जताई है।
इस विरोधाभास में एक परिवार की बेबसी दिखाई देती है। जिन माता-पिता ने कभी बेटी के लिए सख्त सजा की मांग की थी, वे आज उससे मिलने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन उसे कानूनी राहत दिलाने के लिए आगे बढ़ने की स्थिति में खुद को सक्षम नहीं मानते।
‘साहिल की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी’
मुस्कान के माता-पिता का मानना है कि इस हत्याकांड में साहिल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। परिवार का आरोप है कि साहिल नशे का आदी था और मुस्कान का पति सौरव विदेश से पैसा भेजता था, इन पैसों का इस्तेमाल साहिल नशे के लिए करता था। उनका दावा है कि धीरे-धीरे मुस्कान भी नशे की गिरफ्त में आ गई थी।
प्रमोद का कहना है कि उन्होंने पुलिस से दोनों के नशे की आदतों की जांच और आवश्यक परीक्षण कराने की मांग की थी, लेकिन उनके मुताबिक इस मांग पर ध्यान नहीं दिया गया।
मुस्कान की मां का आरोप है कि साहिल ने उनकी बेटी को अपने प्रभाव में ले लिया था। परिवार यह भी दावा है कि साहिल के घर की दीवारों पर बने कुछ चित्र देखकर उन्हें काला जादू जानने की बात सामने आ रही थी। उन्होंने संदेह व्यक्त किया है कि उनकी बेटी को मानसिक रूप से प्रभावित किया गया।
‘मुख्य भूमिका साहिल की थी’, मां ने बेटी का पक्ष रखा
कविता रस्तोगी का कहना है कि समाज में उनकी बेटी को ही सबसे अधिक दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार साहिल की भूमिका और उसके प्रभाव को भी समझा जाना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कोई व्यक्ति अपने ही पति की हत्या करने और शव के टुकड़े करने जैसा कदम कैसे उठा सकता है। उनका मानना है कि इस मामले के पीछे साहिल की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
परिवार यह भी स्वीकार करता है कि मुस्कान का साहिल से संबंध रखना एक बड़ी गलती थी। प्रमोद के मुताबिक, सौरव साहिल को पसंद नहीं करता था और उसने मुस्कान से उससे दूरी बनाने के लिए कहा भी था। परिवार का मानना है कि यदि उस समय रिश्तों में अधिक सख्ती हुई होती, तो शायद परिस्थितियां आज बदली हुई दिखाई देती।
ससुराल से रिश्तों में तनाव का भी किया जिक्र
मुस्कान की मां ने सौरव की मां रेनू के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें कीं। उनका आरोप है कि मुस्कान और उसके ससुराल के बीच रिश्ते सहज नहीं थे और परिवार के भीतर कई बातों को लेकर तनाव रहता था।
कविता का कहना है कि उनकी बेटी अपने मायके से संबंध बनाए रखना चाहती थी, लेकिन सौरव.की मां नही चाहती थी वह मायके से संबंध रखें। उनके मुताबिक, इन्हीं परिस्थितियों के बीच मुस्कान को किराये के मकान में रहना पड़ा।
पिता की मानसिक स्थिति बिगड़ी, आत्महत्या की कोशिश का दावा
सौरव की मौत के बाद मुस्कान के मायके में भी मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव का असर पड़ा। कविता ने बताया कि घटना के बाद परिवार सामान्य जीवन नहीं जी पाया। उनके अनुसार, प्रमोद इस सदमे से इतने परेशान हो गए थे कि उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश की थी। परिवार का कहना है कि इस संबंध में चिकित्सकीय दस्तावेज भी मौजूद हैं। मां का यह बयान उस पीड़ा की बताता है कि अपराध के बाद केवल पीड़ित परिवार तक सीमित नहीं रहती। आरोपी के परिजन भी सामाजिक सवालों, मानसिक दबाव और टूटते रिश्तों से जूझते हैं।
भाई ने भी बनाई दूरी, मां के सामने रिश्तों का संकट
कविता के मुताबिक, मुस्कान का भाई अब उससे कोई संबंध नहीं रखना चाहता। मां का कहना है कि बेटे के फैसले के सामने वह भी असहाय हैं।
एक ओर बेटी से मिलने की इच्छा है, दूसरी ओर परिवार के बाकी सदस्यों की भावनाएं और भविष्य की चिंता हैं। मां के लिए यह स्थिति और कठिन है, क्योंकि बेटी से दूरी उन्हें दुख दे रही है, लेकिन उससे जुड़े घटनाक्रम ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।
अब परिवार जेल जाकर मुस्कान से मिलने की तैयारी कर रहा है। यह मुलाकात वर्षों के रिश्ते, गहरे दुख, नाराजगी और ममता के बीच कैसी होगी, इसका जवाब शायद केवल वही माता-पिता दे पाएंगे, जो इस समय इन तमाम भावनाओं से गुजर रहे हैं।
एक फैसले के बाद कई सवाल, सबसे बड़ा सवाल मासूम के भविष्य का
नीले ड्रम हत्याकांड का फैसला कानूनी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन इस घटना से जुड़े परिवारों की पीड़ा अदालत के निर्णय के साथ समाप्त नहीं हो जाती। सौरव के परिजन अपने बेटे को खोने का दर्द लेकर जी रहे हैं। मुस्कान के माता-पिता बेटी को मिली सजा और उससे जुड़े आरोपों के बीच उलझे हैं। वहीं, छह साल की बच्ची के सामने ऐसा पारिवारिक संकट है, जिसे समझने और उससे उबरने में उसे लंबा समय लग सकता है।
मुस्कान के माता-पिता का कहना है कि वे बेटी से मिलने जेल जाएंगे, लेकिन फिलहाल उसकी सजा के खिलाफ कानूनी लड़ाई नहीं लड़ेंगे। उनके बयानों में नाराजगी भी है, बेटी के लिए ममता भी और अपने परिवार के बिखरने का दर्द भी।
एक मां-बाप के लिए बेटी से मुंह मोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन उसके किए कृत्य और उसके प्रति ममता के बीच संतुलन बनाना बहुत कठिन होता है। मेरठ के इस चर्चित मामले में अब अदालत के फैसले के साथ-साथ परिवारों के टूटे रिश्तों और एक बच्ची के भविष्य पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।