बुलेट ट्रेन से जुड़ेगी काशी नगरी, साढ़े तीन घंटे में पूरा होगा दिल्ली का सफर : वैष्णव

बुलेट ट्रेन से जुड़ेगी काशी नगरी, साढ़े तीन घंटे में पूरा होगा दिल्ली का सफर : वैष्णव

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को काशीवासियों को ऐतिहासिक सौगात देते हुए बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर को मंजूरी मिलने की बड़ी घोषणा की है। वाराणसी कैंट स्टेशन पर नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन और 10 नई मेमू रेल सेवाओं के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय रेल तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही है। समारोह में रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में रेलवे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की सुरक्षित सवारी बन चुकी है और आज की यह शुरुआत पूरे पूर्वांचल के लिए विकास का एक नया अध्याय है।

बुलेट ट्रेन से जुड़ेंगे पूर्वांचल और उत्तर भारत के प्रमुख शहर 

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर को केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गई है। इस नए हाई स्पीड कॉरिडोर के जरिए दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज को एक साथ जोड़ा जाएगा, जिसका विस्तार आगे पटना, सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक होगा। यह पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत के नौजवानों और कारीगरों द्वारा बनाया जाएगा। बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का सफर महज 3 घंटे 33 मिनट में पूरा हो सकेगा। वहीं दिल्ली से कानपुर 1 घंटे 45 मिनट, दिल्ली से लखनऊ की दूरी 2 घंटे 12 मिनट और वाराणसी से लखनऊ की दूरी महज 1 घंटे 21 मिनट रह जाएगी। दिल्ली से आगरा का सफर 59 मिनट में पूरा होगा, जबकि काशी से पटना का सफर भी मात्र एक घंटे का रह जाएगा।

18 गुना बढ़ा उत्तर प्रदेश का रेल बजट 

रेल मंत्री ने रेलवे बजट के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब कई देशों से बड़े इस विशाल प्रदेश को मात्र एक हजार करोड़ रुपये का रेलवे बजट मिलता था। यह दो लड़कों का उत्तर प्रदेश के साथ भारी अन्याय था। उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार आने के बाद प्रदेश के रेल बजट में 18 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, नौजवानों और व्यापारियों के हित के लिए केवल भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की सरकार ही काम कर सकती है।

विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी की है वंदे भारत की तारीफ

देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की खूबियों का जिक्र करते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इसमें यात्रियों के साथ साथ स्टाफ का भी पूरा ध्यान रखा गया है। ट्रेन में रात भर काम करने वाले स्टाफ के लिए अलग बर्थ और लोको पायलट के लिए अंदर टॉयलेट की विशेष व्यवस्था की गई है। यात्रियों के लिए मिडिल और अपर बर्थ पर चढ़ने वाली सीढ़ियों को नए तरीके से डिजाइन किया गया है ताकि फिसलने की समस्या खत्म हो सके। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी से कोलकाता के बीच चलने वाली वंदे भारत की तारीफ विदेशी मीडिया संस्थान के पत्रकारों ने भी की है। यह नई वंदे भारत स्लीपर वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, अलीगढ़ और गाजियाबाद होते हुए नई दिल्ली तक का आरामदायक सफर तय करेगी।

दैनिक यात्रियों के लिए 10 नई मेमू सेवाएं 

रेल मंत्री ने बताया कि शहर के विस्तार को देखते हुए 10 नई मेमू सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें से आठ सेवाएं बनारस शहर, बनारस सिटी, बनारस कैंट, बनारस स्टेशन, भुल्लनपुर, हरदत्तपुर और राजातालाब के बीच चलेंगी। वहीं दो सेवाएं प्रयागराज रामबाग, झूंसी, हंडिया खास, ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह और राजातालाब होते हुए बनारस को जोड़ेंगी। बनारस सिटी से राजातालाब तक महीने भर की यात्रा के लिए एमएसटी मात्र 95 रुपये में उपलब्ध होगा। वहीं, काशी से प्रयागराज रामबाग तक की यात्रा का एमएसटी मात्र 220 रुपये में बनेगा, जिससे प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक राहत मिलेगी।

बांग्लादेश में भारत के ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध:विपक्षी नेता बोले- देश की जमीन भारत को नहीं देंगे; गंगा जल समझौते का भी विरोध

बांग्लादेश में भारत के ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध हो रहा है। विपक्षी नेता नाहिद इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में एक रैली के दौरान आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार बांग्लादेश में भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की जमीन भारत को नहीं दी जाएगी। ट्रांजिट कॉरिडोर का मतलब एक देश की जमीन और सड़क का इस्तेमाल करके दूसरे देश के किसी हिस्से तक सामान पहुंचाना है। इससे दूरी और सामान पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। नाहिद ने गंगा जल समझौते को लेकर भी सरकार से सख्त रुख अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर समझौते को नए सिरे से करते समय बांग्लादेश के हितों का ध्यान नहीं रखा गया, तो लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतरेंगे। जापान दौरे के बाद क्यों उठा कॉरिडोर का मुद्दा? दरअसल, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 26 से 29 अक्टूबर तक जापान के दौरे पर थे। इस दौरान जापान और बांग्लादेश के बीच बंगाल की खाड़ी के आसपास व्यापार और आवाजाही बढ़ाने पर सहमति बनी। जापान बांग्लादेश में मातरबाड़ी नाम का एक बड़ा बंदरगाह भी बना रहा है। इसके जरिए समुद्र के रास्ते सामान लाने-ले जाने की सुविधा बढ़ेगी। जापान की एक योजना के मुताबिक, इस बंदरगाह को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए बांग्लादेश के रास्ते सड़क और दूसरे संपर्क मार्गों का इस्तेमाल होगा। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाना आसान हो सकता है। साथ ही भारत का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों तक बढ़ सकता है। इसी योजना को लेकर नाहिद इस्लाम ने विरोध जताया है।
जापान दौरे में भारत को लेकर कोई बात नहीं हुई बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के जापान दौरे में भारत या किसी दूसरे देश को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक कबीर ने पत्रकारों से कहा कि जापान के साथ बातचीत सिर्फ बांग्लादेश और जापान के आर्थिक रिश्तों को लेकर हुई थी। कबीर ने कहा कि अगर किसी दूसरे देश से जुड़े मुद्दे पर बात करनी होती, तो उस देश के प्रतिनिधियों को भी बातचीत में शामिल किया जाता। भारत बोला- जापान के साथ पूर्वोत्तर से जुड़े काम बढ़ाएंगे 28 अक्टूबर को भारत ने जापान के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करने की बात कही थी। इसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं। यह बयान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की मुलाकात के कुछ घंटे बाद आया था। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि, जापान के साथ हमारी बहुत मजबूत साझेदारी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और जापान से जुड़ी कई योजनाएं हैं। हम इन रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। 12 दिसंबर को खत्म हो रहा है गंगा जल समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह समझौता हुआ था। इसके तहत जनवरी से मई के बीच गंगा के पानी का बंटवारा होता है। यह वह समय होता है, जब नदी में पानी कम रहता है। पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर पानी का बंटवारा किया जाता है। बांग्लादेश चाहता है कि नया समझौता ज्यादा सालों के लिए हो। साथ ही उसमें ऐसी शर्त हो, जिससे सूखे के मौसम में भी उसे पानी का तय हिस्सा मिलता रहे। भारत का कहना है कि पानी के बंटवारे और दोनों देशों के बीच बहने वाली 54 नदियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत संयुक्त नदी आयोग (JRC) के जरिए होती है। इस आयोग की शुरुआत 1972 में हुई थी। इसका काम दोनों देशों के बीच नदियों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सितंबर में बताया था कि गंगा जल समझौते को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है। ——————————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर ईरान ने सैन्य सामान खरीदा: रिपोर्ट- 5000 फर्जी एजेंसियों का नेटवर्क बनाया, चीन-रूस से मंगवाए मिसाइलों के पुर्जे अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। समुद्र में अमेरिकी नाकेबंदी के चलते उसके लिए दूसरे देशों से सैन्य सामान मंगाना भी मुश्किल है। इसके बावजूद ईरान ने हथियारों की सप्लाई जारी रखी। पूरी खबर पढ़ें…

बांग्लादेश में भारत के ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध:विपक्षी नेता बोले- देश की जमीन भारत को नहीं देंगे; गंगा जल समझौते का भी विरोध

बांग्लादेश में भारत के ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध हो रहा है। विपक्षी नेता नाहिद इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में एक रैली के दौरान आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार बांग्लादेश में भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की जमीन भारत को नहीं दी जाएगी। ट्रांजिट कॉरिडोर का मतलब एक देश की जमीन और सड़क का इस्तेमाल करके दूसरे देश के किसी हिस्से तक सामान पहुंचाना है। इससे दूरी और सामान पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। नाहिद ने गंगा जल समझौते को लेकर भी सरकार से सख्त रुख अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर समझौते को नए सिरे से करते समय बांग्लादेश के हितों का ध्यान नहीं रखा गया, तो लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतरेंगे। नाहिद इस्लाम की रैली में भारत विरोधी नारे भी लगे नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नाहिद इस्लाम की अगुआई में तारिक रहमान सरकार के खिलाफ ढाका में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी हुआ प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, बिजली संकट और पेट्रोल-डीजल व गैस की कमी से नाराज थे। उन्होंने गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे भी लगाए। रैली में ‘दिल्ली नहीं, ढाका ढाका’ के नारे लगाए गए। जापान दौरे के बाद क्यों उठा कॉरिडोर का मुद्दा? दरअसल, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 26 से 29 अक्टूबर तक जापान के दौरे पर थे। इस दौरान जापान और बांग्लादेश के बीच बंगाल की खाड़ी के आसपास व्यापार और आवाजाही बढ़ाने पर सहमति बनी। जापान बांग्लादेश में मातरबाड़ी नाम का एक बड़ा बंदरगाह भी बना रहा है। इसके जरिए समुद्र के रास्ते सामान लाने-ले जाने की सुविधा बढ़ेगी। जापान की एक योजना के मुताबिक, इस बंदरगाह को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए बांग्लादेश के रास्ते सड़क और दूसरे संपर्क मार्गों का इस्तेमाल होगा। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाना आसान हो सकता है। साथ ही भारत का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों तक बढ़ सकता है। इसी योजना को लेकर नाहिद इस्लाम ने विरोध जताया है। जापान दौरे में भारत को लेकर कोई बात नहीं हुई बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के जापान दौरे में भारत या किसी दूसरे देश को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक कबीर ने पत्रकारों से कहा कि जापान के साथ बातचीत सिर्फ बांग्लादेश और जापान के आर्थिक रिश्तों को लेकर हुई थी। कबीर ने कहा कि अगर किसी दूसरे देश से जुड़े मुद्दे पर बात करनी होती, तो उस देश के प्रतिनिधियों को भी बातचीत में शामिल किया जाता। भारत बोला- जापान के साथ पूर्वोत्तर से जुड़े काम बढ़ाएंगे 28 अक्टूबर को भारत ने जापान के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करने की बात कही थी। इसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं। यह बयान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की मुलाकात के कुछ घंटे बाद आया था। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि, जापान के साथ हमारी बहुत मजबूत साझेदारी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और जापान से जुड़ी कई योजनाएं हैं। हम इन रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। 12 दिसंबर को खत्म हो रहा है गंगा जल समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह समझौता हुआ था। इसके तहत जनवरी से मई के बीच गंगा के पानी का बंटवारा होता है। यह वह समय होता है, जब नदी में पानी कम रहता है। पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर पानी का बंटवारा किया जाता है। बांग्लादेश चाहता है कि नया समझौता ज्यादा सालों के लिए हो। साथ ही उसमें ऐसी शर्त हो, जिससे सूखे के मौसम में भी उसे पानी का तय हिस्सा मिलता रहे। भारत का कहना है कि पानी के बंटवारे और दोनों देशों के बीच बहने वाली 54 नदियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत संयुक्त नदी आयोग (JRC) के जरिए होती है। इस आयोग की शुरुआत 1972 में हुई थी। इसका काम दोनों देशों के बीच नदियों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सितंबर में बताया था कि गंगा जल समझौते को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है। ——————————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर ईरान ने सैन्य सामान खरीदा: रिपोर्ट- 5000 फर्जी एजेंसियों का नेटवर्क बनाया, चीन-रूस से मंगवाए मिसाइलों के पुर्जे अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। समुद्र में अमेरिकी नाकेबंदी के चलते उसके लिए दूसरे देशों से सैन्य सामान मंगाना भी मुश्किल है। इसके बावजूद ईरान ने हथियारों की सप्लाई जारी रखी। पूरी खबर पढ़ें…

दीपोत्सव से पहले चमकी रामनगरी, 90% होटल-होमस्टे फुल, श्रद्धालुओं के स्वागत को अयोध्या तैयार

दीपोत्सव से पहले चमकी रामनगरी, 90% होटल-होमस्टे फुल, श्रद्धालुओं के स्वागत को अयोध्या तैयार

Ayodhya News

Ayodhya Deepotsav 2026: दीपोत्सव के भव्य और दिव्य आयोजन से पहले ही प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में पर्यटन कारोबार को पंख लग गए हैं। 7 नवंबर को होने वाले मुख्य दीपोत्सव कार्यक्रम और नवनिर्मित मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। भारी भीड़ के चलते रामनगरी के होटल, गेस्ट हाउस और होमस्टे में 90 प्रतिशत कमरे पहले से ही बुक हो चुके हैं।

​पर्यटन में भारी उछाल

अयोध्या धाम में स्थित 1500 से अधिक होटलों, धर्मशालाओं और होमस्टे में से अधिकांश में 4 से 8 नवंबर तक के सभी कमरे पूरी तरह आरक्षित हो चुके हैं। कुछ लोकप्रिय होमस्टे में तो 2 से 10 नवंबर तक की एडवांस बुकिंग है।

इस बार 10वें दीपोत्सव में गृहमंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जहां वे पहली बार नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला के दर्शन करेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कई अन्य मंत्री भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे। 

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​तैयारियों का अंतिम दौर

सरयू के घाटों को जगमगाने, रामपथ की सजावट और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं। अयोध्या के स्थानीय व्यापारियों और पर्यटन कारोबारियों को इस ऐतिहासिक दीपोत्सव से रिकॉर्ड कमाई और बड़े व्यापार की उम्मीद है।

विपक्ष का जन महाभियोग टला

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग का विपक्ष का कार्यक्रम शुक्रवार को नहीं हो सका। अब यह कार्यक्रम शनिवार, 31 अक्टूबर को होगा। शुक्रवार को बारिश की वजह से विपक्ष को अपना यह कार्यक्रम टालना पड़ा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इसकी जानकारी दी। असल में विपक्षी पार्टियों को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास 10, राजाजी मार्ग पर ‘सड़क पर संसद’ कार्यक्रम करना था। लेकिन वहां बारिश से बचाव का कोई इंतजाम नहीं किया गया था।

बारिश की वजह से जन महाभियोग कार्यक्रम टलने की जानकारी देने के लिए शुक्रवार को दोपहर में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने कहा, ‘हमने आज का कार्यक्रम बारिश के कारण कल करने का फैसला किया है। उसके बाद अगले दिन हम रामलीला मैदान पर मार्च करेंगे। हमने इसमें राजनीतिक, छात्र संगठनों और सभी लोगों से आने की अपील है’। इससे पहले भी राहुल गांधी ने एक वीडियो बना कर छात्रों, युवाओं से रामलीला मैदान पहुंचने की अपील की थी।

कांग्रेस के जानकार नेताओं का कहना है कि राहुल इसे सिर्फ विपक्ष की रैली नहीं बनाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि यह आम लोगों का प्रोटेस्ट बने। हालांकि राहुल गांधी इस रैली को बार बार मार्च कह रहे हैं, जबकि पुलिस ने कांग्रेस को रैली की इजाजत दी है और साफ तौर पर कहा है कि कोई मार्च नहीं होगा। जानकार सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी रैली से पहले या बाद में लाल किले की तरफ या कहीं और मार्च कर सकते हैं।

बहरहाल, एक नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली से पहले शुक्रवार को विपक्षी नेताओं की एक अहम बैठक भी हुई। इसमें समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा, ‘पूरा विपक्ष जो लड़ाई लड़ रहा है उसे देश के लोग अब समझ गए हैं। वे समर्थन कर रहे हैं। यूपी में एमएलसी चुनाव में यह भाजपा को अहसास कराया कि वे कितना पीछे हैं। जो सीट वो जीते हैं वो जुगाड़ बेईमानी से जीते हैं। सभी सीटों पर पढ़े लिखे लोगों ने सपा को मजबूत किया’।

तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, ‘मैं सिर्फ एक बात कहना चाहता हूं। हम सभी इस लड़ाई में साथ हैं। यह राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी लड़ाई है। हम सब मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे’। इस बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई ने शुक्रवार को फिर कांग्रेस से एक नवंबर की प्रस्तावित रैली स्थगित करने की अपील की है। इस बार सीटीआई ने सोनिया गांधी को पत्र लिखा। व्यापारियों के इस संगठन ने इससे पहले राहुल गांधी को तीन बार चिट्ठी लिखी और रैली को 10 नवंबर तक स्थगित करने या बुराड़ी ग्राउंड में करने की अपील की। लेकिन राहुल ने उनकी मांग ठुकरा दी।

2029 में जीतेंगे हम ही!

Lok sabha election

यों सवाल बेमानी है। इसलिए क्योंकि मोटामोटी घर-घर वोट चोरी का मामला पहुंच चुका है। बावजूद इसके चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के कारण राज्यों से गड़बड़ियों की जितनी तरह की, जैसी खबरें आई हैं, उससे सचमुच यह पल्ले नहीं पड़ता है कि मोदी-शाह आखिर कितने दशक और चुनाव जीतते जाने, दिल्ली के शासक बने रहने का रोडमैप बनाए हुए हैं? मैं नहीं मानता कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपना बुरा समय आया मान रहे हैं। उनमें अभी भी समय को मनमाफिक मोड़ने का अहंकार है।

तभी तो भारत का प्रधानमंत्री विधान परिषदों की मामूली 28 सीटों के चुनाव नतीजों पर तुरंत टिप्पणी करने दौड़ पड़ता है। विधान परिषद के मामूली चुनाव हुए और नतीजे आते ही नरेंद्र मोदी ने लिखा—“Guess how many seats Congress won?” बाद में नागपुर की एक सीट कांग्रेस ने जीती, तो शुरुआती “एक भी सीट नहीं” वाली खबर अंतिम नतीजा नहीं रही।

कांग्रेस को चिढ़ाने की इतनी जल्दी क्यों? इसलिए कि चुनाव अब चुनाव भर नहीं है। हर चुनाव से नरेंद्र मोदी को अपने अजेय होने के प्रमाण देने हैं। इसलिए हर विपक्षी हार विपक्ष के सवालों को झूठा साबित करने का मौका। कांग्रेस कहती है कागज के मतपत्रों से चुनाव कराओ तो जवाब है- लो, विधान परिषद के चुनाव बैलेट पेपर से हुए, बताएं कांग्रेस कितनी सीट जीती? मानो मतदाता सूची, SIR, Form 6, ECINet, EVM पर लगे आरोपों और विधान परिषद का सीमित निर्वाचन सब एक ही सवाल हों।

जबकि पिछले एक महीने में सवाल दूसरे थे। खुद दो चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, की फाइलों पर आपत्तियों की खबरें अभी भी प्रामाणिक मानी जा रही हैं। तभी सवाल उठा कि तीन सदस्यीय आयोग में फैसले कैसे हो रहे हैं? Form 6 में declaration किसने और किस अधिकार से जोड़ा? ECINet में electoral-roll database का “gradual centralisation” क्यों हो रहा है? जमीन पर कानून से अधिकार पाए ERO को पूरा access क्यों नहीं है? मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की digital credentials किस-किसके पास हैं? विपक्ष ने इन्हीं सवालों को “वोट चोरी” बनाया। आरोप अपनी जगह, मगर सवाल तो चुनाव आयोग के अपने कागजों से भी निकले थे।

प्रधानमंत्री ने इनका क्या जवाब दिया?

22 अक्टूबर को मोदी बोले तो कांग्रेस के लिए “noise” था। राहुल गांधी पर “failed product” को बार-बार launch करने का तंज था। कांग्रेस “parasite” थी। “दिमागी नक्सलों” ने कांग्रेस की सोचने की क्षमता खत्म कर दी थी। दुनिया “new order” की तलाश में है और कुछ लोग भारत में “disorder” पैदा करना चाहते हैं। यहां तक कहा कि कांग्रेस इतना “noise” पैदा करती है कि सरकार की कमियां बताने वाले ईमानदार आलोचकों की आवाज भी उसमें दब जाती है।

यानी सवाल था- मतदाता सूची के डेटाबेस का नियंत्रण किसके पास है?

जवाब- कांग्रेस ‘शोर’ करती है।

सवाल था- Form 6 किसने बदला?

जवाब- नाकाम उत्पाद (failed product- राहुल के लिए)।

सवाल था- दो चुनाव आयुक्तों को बार-बार फाइल पर आपत्ति क्यों लिखनी पड़ी?

जवाब- दिमागी नक्सल और परजीवी (parasite)।

और इस सप्ताह मतपत्र से हुए विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस हारी तो प्रधानमंत्री का सवाल- बताओ कितनी सीटें जीतीं?

उनकी देखादेखी मुख्यमंत्री और नेता सभी अपने-अपने हुंकारे मारने लगे। और बुधवार को तो भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन खुद दिल्ली की सड़क पर उतर गए। मैंने कभी नहीं सुना। स्वतंत्र भारत की राजनीति में ऐसा कोई दूसरा उदाहरण मुझे याद नहीं है कि विपक्ष सरकार-विरोधी रैली की तैयारी करे और सत्तासीन पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष उसके जवाब में चांदनी चौक के व्यापारियों के बीच जुलूस निकाले, “लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ।” भाजपा ने इसे विपक्ष के “वोट चोरी” और एसआईआर विरोधी अभियान का जवाब बनाया। ऐसी पदयात्राएं पांच नवंबर तक देश के दूसरे हिस्सों में भी करने की योजना है।

गौर करें, नारा किसका है, “लोकतंत्र बचाओ”!

जबकि सत्ता में नरेंद्र मोदी हैं। गृह मंत्रालय अमित शाह के पास है। संसद में एनडीए का बहुमत। दिल्ली में भाजपा की सरकार। चुनाव आयोग पर विपक्ष का आरोप है कि वह सत्ता के साथ है। और लोकतंत्र बचाने सड़क पर कौन निकला हुआ है? सत्तारूढ़ भाजपा! और इसी के बूते 2029 में पक्की जीत होने का अहंकार भी है।

सोचें, याद करें ऐसी सत्ता (इंदिरा से लेकर वाजपेयी, डॉ. मनमोहन सिंह तक) कब हुई, जिसे अपने भविष्य पर इतना भरोसा हुआ, जितना मोदी, शाह, नितिन नबीन को है। 2029 में जीतेंगे हमीं!

होर्मुज में 27 भारतीयों वाले जहाज पर हमला:इंजन रूम में लगी आग; एक दिन पहले भी भारतीय क्रू वाले जहाज पर हमला हुआ था

होर्मुज में शुक्रवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों वाले तेल टैंकर एमटी लुईस 1 पर हमला हुआ। पनामा के झंडे वाले इस टैंकर पर दो लिम्पेट माइंस लगाई गई थीं। धमाके की वजह से इंजन रूम में आग लग गई और जहाज कुछ समय के लिए बंद हो गया। लेकिन क्रू ने आग बुझा दी। इस घटना से एक दिन पहले लाइबेरिया के झंडे वाले बहुत बड़े कच्चे तेल के टैंकर एमटी अरजाना पर भी हमला हुआ था। एमटी अरजाना में दो भारतीय नागरिक सवार थे। भारत के केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बयान जारी कर कहा कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और किसी को चोट नहीं लगी है। पहली बार लिम्पेट माइंस का इस्तेमाल रॉयटर्स के मुताबिक, फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद यह होर्मुज में लिम्पेट माइंस के सफल इस्तेमाल की पहली घटना है। यह हमला होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर जारी हमलों की कड़ी का हिस्सा है। फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध बढ़ने के बाद इन हमलों में तेजी आई है। ब्रिटिश नौसेना की एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, हमला ओमान के खासाब से 46 किलोमीटर दूर में हुआ। अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर हमले की तैयारी अमेरिका और इजराइल 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले करने की योजना बना रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, दोनों देश छोटी लेकिन तेज सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। इसमें ईरान के ऊर्जा ठिकानों, परमाणु केंद्रों और मिसाइलों व ड्रोन के भंडार को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, ट्रम्प अभी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का फैसला भी ले सकते हैं। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी ईरान ने गुरुवार को बताया था कि उसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पत्र मिला है, लेकिन उसने अभी जवाब नहीं दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, इस पत्र का मकसद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता फिर शुरू करना था। ईरान ने अमेरिका के सामने रखी अपनी 7 शर्तें पूरी करने की मांग दोहराई है। दूसरी ओर, ट्रम्प ने कहा कि वेंस ने ईरान से शांति वार्ता के लिए नहीं, बल्कि मेडिकल सामान पहुंचाने के मामले में संपर्क किया था। ट्रम्प के मुताबिक, ईरान ने बीमार लोगों के लिए मेडिकल सामान और दूसरी जरूरी चीजों की मदद मांगी थी। वेंस ने इस बारे में उनसे राय ली थी और उन्होंने मदद की इजाजत दे दी। —————————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका- मिडटर्म चुनाव की अर्ली वोटिंग, रिपब्लिकन पार्टी पीछे: अब तक 4 करोड़ ने वोट डाला; ट्रम्प ने 30 राज्यों की वोटर लिस्ट मंगवाई अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले ही अर्ली वोटिंग शुरू हो गई है। अब तक करीब 4 करोड़ लोग वोट डाल चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…

होर्मुज में 27 भारतीयों वाले जहाज पर हमला:इंजन रूम में लगी आग; एक दिन पहले भी भारतीय क्रू वाले जहाज पर हमला हुआ था

होर्मुज में शुक्रवार को 27 भारतीय क्रू सदस्यों वाले तेल टैंकर एमटी लुईस 1 पर हमला हुआ। पनामा के झंडे वाले इस टैंकर पर दो लिम्पेट माइंस लगाई गई थीं। धमाके की वजह से इंजन रूम में आग लग गई और जहाज कुछ समय के लिए बंद हो गया। लेकिन क्रू ने आग बुझा दी। इस घटना से एक दिन पहले लाइबेरिया के झंडे वाले बहुत बड़े कच्चे तेल के टैंकर एमटी अरजाना पर भी हमला हुआ था। एमटी अरजाना में दो भारतीय नागरिक सवार थे। भारत के केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बयान जारी कर कहा कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और किसी को चोट नहीं लगी है। पहली बार लिम्पेट माइंस का इस्तेमाल रॉयटर्स के मुताबिक, फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद यह होर्मुज में लिम्पेट माइंस के सफल इस्तेमाल की पहली घटना है। यह हमला होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर जारी हमलों की कड़ी का हिस्सा है। फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध बढ़ने के बाद इन हमलों में तेजी आई है। ब्रिटिश नौसेना की एजेंसी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अनुसार, हमला ओमान के खासाब से 46 किलोमीटर दूर में हुआ। अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर हमले की तैयारी अमेरिका और इजराइल 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले करने की योजना बना रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, दोनों देश छोटी लेकिन तेज सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। इसमें ईरान के ऊर्जा ठिकानों, परमाणु केंद्रों और मिसाइलों व ड्रोन के भंडार को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि, ट्रम्प अभी सैन्य कार्रवाई नहीं करने का फैसला भी ले सकते हैं। अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की कोशिशें भी जारी ईरान ने गुरुवार को बताया था कि उसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का पत्र मिला है, लेकिन उसने अभी जवाब नहीं दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, इस पत्र का मकसद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता फिर शुरू करना था। ईरान ने अमेरिका के सामने रखी अपनी 7 शर्तें पूरी करने की मांग दोहराई है। दूसरी ओर, ट्रम्प ने कहा कि वेंस ने ईरान से शांति वार्ता के लिए नहीं, बल्कि मेडिकल सामान पहुंचाने के मामले में संपर्क किया था। ट्रम्प के मुताबिक, ईरान ने बीमार लोगों के लिए मेडिकल सामान और दूसरी जरूरी चीजों की मदद मांगी थी। वेंस ने इस बारे में उनसे राय ली थी और उन्होंने मदद की इजाजत दे दी। —————————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका- मिडटर्म चुनाव की अर्ली वोटिंग, रिपब्लिकन पार्टी पीछे: अब तक 4 करोड़ ने वोट डाला; ट्रम्प ने 30 राज्यों की वोटर लिस्ट मंगवाई अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले ही अर्ली वोटिंग शुरू हो गई है। अब तक करीब 4 करोड़ लोग वोट डाल चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…

पुतिन की यूरोप को चेतावनी- रूस से टकराव महंगा पड़ेगा:बोले- बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही न रोकें, वरना होर्मुज जैसे हालात बनेंगे

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को चेतावनी दी है कि रूस से टकराव बढ़ाना उनके लिए महंगा पड़ सकता है। मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा, अगर बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की गई, तो वहां भी होर्मुज जैसे हालात बन सकते हैं। पुतिन ने कहा कि रूस यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर कोई देश उससे टकराव करता है तो उसे इसके नतीजों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तनाव बहुत ज्यादा बढ़ा तो किसी की जीत नहीं होगी। बाल्टिक सागर को लेकर क्यों नाराज हैं पुतिन पुतिन ने फिनलैंड और नॉर्वे के PM से बातचीत का बचाव किया पुतिन ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे से फोन पर हुई बातचीत का भी बचाव किया। दोनों नेताओं ने इसी हफ्ते उनसे बात की थी। यूरोप के कुछ नेताओं ने रूस से बातचीत करने के उनके फैसले की आलोचना की थी। पुतिन ने कहा कि रूस और यूरोपीय देशों के बीच रिश्ते सुधारने के लिए बातचीत जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मॉस्को यूरोप के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिशों के लिए तैयार है। यूरोप और रूस के बीच क्यों छिड़ा विवाद 1. समुद्र में रूसी जहाजों की नाकाबंदी पश्चिम के प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस बिना सही कागजात और पुरानी जहाजों से बाल्टिक सागर के रास्ते तेल बेचता है। यूरोपीय देश इन जहाजों को पर्यावरण और सुरक्षा का हवाला देकर समुद्र में रोकने और जांचने की कोशिश कर रहे हैं। रूस इसे अपने व्यापार पर सीधा हमला मान रहा है। 2. बाल्टिक सागर पर नाटों की निगरानी फिनलैंड और स्वीडन के नाटो में शामिल होने से बाल्टिक सागर के लगभग 90% किनारे नाटो देशों के नियंत्रण में आ चुके हैं। रूस को डर है कि उसके मुख्य समुद्री रास्तों (सेंट पीटर्सबर्ग और कलिनिनग्राद) को यूरोपीय देश कभी भी पूरी तरह बंद कर सकते हैं। 3. कूटनीतिक बातचीत पर यूरोपीय संघ में फूट फिनलैंड और नॉर्वे के नेताओं ने हाल ही में पुतिन से सीधी फोन पर बातचीत की थी। पोलैंड और कुछ यूरोपीय देशों ने इस बातचीत का विरोध किया। उनका मानना है कि युद्ध के दौरान पुतिन से बात करने से यूरोप की एकजुटता कमजोर पड़ती है। 4. समुद्र के नीचे जासूसी का डर यूक्रेन जंग के दौरान बाल्टिक सागर के नीचे बिछी इंटरनेट केबल और गैस पाइपलाइनों को कई बार नुकसान पहुंचा है। इसके बाद रूस और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। दोनों एक-दूसरे पर जासूसी और जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं। इससे इस इलाके में सैन्य तनाव भी बढ़ता जा रहा है। बाल्टिक सागर बंद होने का दुनिया पर असर, 4 पॉइंट्स में… 1. नाकाबंदी हुई तो दुनियाभर में ईंधन महंगा होगा बाल्टिक सागर से होकर दुनिया के बाज़ारों में रूस का लगभग 40% समुद्री तेल हर साल लगभग 5 लाख 70 हजार करोड़ रुपए गुजरता है। अगर इस रास्ते पर कोई नाकाबंदी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के दाम तुरंत 690 रुपय से ₹1,300 प्रति बैरल तक बढ़ सकते हैं। 2. माल ढुलाई की कीमतें बढ़ने का असर भारत तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से माल ढुलाई महंगी हो जाती है। इसका असर केवल यूरोप में ही नहीं, बल्कि भारत तक खाद्य पदार्थों, फर्टिलाइजर और रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर पड़ता है। 3. शिपिंग इश्योरेंस महंगा होगा अगर बाल्टिक सागर में तनाव के चलते सुरक्षा जांच सख्त होती है या रास्ते ब्लॉक होते हैं, तो व्यापारी जहाजों को लंबे और महंगे रास्तों जैसे आर्कटिक या अन्य लंबे समुद्री मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इससे सामान पहुंचने में देरी होगी और शिपिंग इंश्योरेंस महंगा हो जाएगा। 4. बाल्टिक सागर में पर्यावरण का बड़ा खतरा असर यूरोपीय देशों का कहना है कि रूस जिन पुराने जहाजों का इस्तेमाल कर रहा है, बाल्टिक सागर जैसे पतले और उथले समुद्री रास्ते में उनके टकराने या तेल का रिसाव होने का भारी खतरा है। ऐसा होने पर पूरे क्षेत्र का समुद्री इकोसिस्टम तबाह हो सकता है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… सर्बिया में छात्र संगठनों ने चुनाव जीता:पुतिन समर्थक PM पद के उम्मीदवार वुचिच हारे; देश में 2 साल से प्रदर्शन चल रहे सर्बिया में छात्र संगठनों के गठबंधन ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने चुनाव जीत लिया है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के करीबी पूर्व राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

बांग्लादेश में साजिश रचकर गिराई गई थी हसीना सरकार:2 दिन पहले यूनूस से छात्रों ने संपर्क किया; विदेशी न्यूज एजेंसी के पत्रकार ने मदद की

बांग्लादेश में साजिश के तहत शेख हसीना की सरकार गिराई गई थी। उनके खिलाफ चल रहे आंदोलन के दौरान ही छात्र नेताओं ने इस बात पर चर्चा शुरू कर दी थी कि उनके बाद देश की कमान कौन संभालेगा। यह दावा अंतरिम सरकार के सलाहकार रहे मोहम्मद यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने किया है। आलम ने सोशल मीडिया पर लिखा कि छात्रों ने यूनुस से संपर्क करने में फ्रांस की न्यूज एजेंसी AFP के पत्रकार कादरुद्दीन शिशिर की मदद ली थी। वे चाहते थे कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार चलाएं। 5 अगस्त 2024 को हसीना ने बांग्लादेश छोड़ा था। इसके दो दिन पहले ही यूनुस और छात्रों के बीच बातचीत हुई थी। सुरक्षा एजेंसियों को बातचीत की जानकारी ही नहीं थी शफीकुल आलम के मुताबिक, छात्र नेताओं को यूनुस तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक भरोसेमंद व्यक्ति की जरूरत थी। ऐसे में AFP की ढाका स्थित फैक्ट-चेकिंग टीम के तत्कालीन संपादक कादरुद्दीन शिशिर ने दोनों पक्षों के बीच संपर्क कराने में मदद की। आलम ने दावा किया कि सुरक्षा एजेंसियों को इस बातचीत की जानकारी नहीं थी। अगर अधिकारियों को इसका पता चल जाता तो शिशिर और AFP की पूरी टीम को खतरा हो सकता था। आलम ने बातचीत का पूरा ब्योरा नहीं दिया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि शिशिर की भूमिका केवल शुरुआती बातचीत कराने तक सीमित थी या उन्होंने आगे की बातचीत में भी हिस्सा लिया था। छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल नाहिद इस्लाम ने उन्हें अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव दिया था। बाद में यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। हसीना सरकार के खिलाफ कैसे शुरू हुआ था आंदोलन? बांग्लादेश में 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। वहां सरकारी नौकरियों में 1971 के मुक्ति संग्राम में लड़ने वालों के परिवारों के लिए 30% तक सीटें आरक्षित थीं। छात्रों का कहना था कि इससे आम युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने के मौके कम हो रहे हैं। वे चाहते थे कि भर्ती में परीक्षा और योग्यता के आधार पर ज्यादा नौकरियां मिलें। इसी मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में बदल गया। सरकार की कार्रवाई में बड़ी संख्या में लोग मारे गए। संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक, जुलाई और अगस्त 2024 के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई। यूनुस की अंतरिम सरकार के बाद सत्ता में आए तारिक रहमान यूनुस की अंतरिम सरकार का काम चुनाव कराकर सत्ता चुनी हुई सरकार को सौंपना था। इसके लिए 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव हुए, जिसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत हासिल की। पार्टी ने संसद की 300 में से 209 सीटें जीतीं। इसके बाद 17 फरवरी 2026 को तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनके सत्ता संभालने के साथ ही यूनुस की अंतरिम सरकार का कार्यकाल खत्म हो गया। अब देश लौटना चाहती हैं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 19 अक्टूबर 2026 को कहा था कि वे दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि, बांग्लादेश की मौजूदा तारिक रहमान सरकार उन्हें गिरफ्तार कर सकती है, मार सकती है या टॉर्चर कर सकती है, लेकिन वे इन खतरों से नहीं डरतीं। हसीना ने कहा कि खतरा कितना भी हो, उन्हें इसकी परवाह नहीं है और उन्हें अपने देश लौटना ही है। रहमान की सरकार कई बार प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी तारिक रहमान की सरकार शेख हसीना को बांग्लादेश वापस भेजने की मांग कई बार उठा चुकी है। इस मुद्दे का असर बांग्लादेश और भारत के रिश्तों पर भी पड़ा है। भारत ने पिछले महीने हुए BRICS समिट में तारिक रहमान को शामिल होने का न्योता दिया था। इसके अलावा, फरवरी से ही भारत की ओर से उन्हें अलग से भारत आने का निमंत्रण दिया गया था। हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद से तारिक रहमान ने भारत का दौरा नहीं किया है। हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। ——————————- यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के करीब जा रहे मालदीव राष्ट्रपति, विपक्ष ने चेताया: कहा- भारत को खतरा लगा तो नतीजा भुगतना पड़ेगा; मुइज्जू ने PAK से 20 समझौते किए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के पाकिस्तान से बढ़ते रिश्तों पर देश में विरोध शुरू हो गया है। मुइज्जू 20 से 22 अक्टूबर तक पाकिस्तान के दौरे पर थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यापार, रक्षा और समुद्री सुरक्षा समेत 20 समझौते हुए। पूरी खबर पढ़ें…