SGB Redemption Price 2026: गोल्ड बॉन्ड का धमाल, RBI ने 200% ऊपर किया प्री-रिडेम्प्शन प्राइस फिक्स, लेकिन…

SGB Redemption Price 2026: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Sovereign Gold Bond 2021-22 Series VII के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की कीमत प्रति यूनिट ₹14,167 तय की है। निवेशक 2 नवंबर 2026 से इस सीरीज के बॉन्ड को समय से पहले भुना सकेंगे। आरबीआई ने प्री-मेच्योर रिडेम्पशन के लिए जो भाव तय किया है, उसके हिसाब से निवेशकों को शुरुआती निवेश के मुकाबले 200% से अधिक का रिटर्न मिलेगा।

₹4,715 से बढ़कर ₹14,167 हुई कीमत

आरबीआई ने SGB 2021-22 Series VII के प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की कीमत प्रति ग्राम ₹14,167 तय की है। यह कीमत तीन कारोबारी दिनों 28, 29 और 30 अक्टूबर 2026 को 999 शुद्धता वाले सोने के क्लोजिंग प्राइस के औसत के आधार पर निकाली गई है। इसके लिए आधार IBJA (इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन) के पब्लिश्ड प्राइस को बनाया गया है। अब निवेश की बात करें तो सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की इस सीरीज के लिए इश्यू प्राइस ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल पेमेंट करने वाले निवेशकों के लिए प्रति ग्राम ₹4,715 तो ऑफलाइन निवेशकों के लिए प्रति ग्राम ₹4,765 थी।

निवेश पर 200.47% का रिटर्न, ब्याज एक्स्ट्रा

अगर किसी निवेशक ने ऑनलाइन तरीके से इस बॉन्ड सीरीज में ₹1 लाख का निवेश किया था, तो उस समय उसे लगभग 21.21 ग्राम सोने के बराबर बॉन्ड मिला होगा। अब ₹14,167 प्रति ग्राम के रिडेम्पशन भाव पर इसकी वैल्यू करीब ₹3 लाख हो जाएगी। इस तरह निवेशकों को प्रति ग्राम ₹9,452 का मुनाफा होगा। इश्यू प्राइस के मुकाबले यह लगभग 200.47% का एब्सोल्यूट रिटर्न है। इसमें बॉन्ड पर मिलने वाला सालाना ब्याज शामिल नहीं है यानी ब्याज को जोड़ने पर कुल रिटर्न और अधिक होगा। एसजीबी में शुरुआती निवेश पर सालाना 2.5% की दर से हर छह महीने पर ब्याज मिलता है।

टैक्स देनदारी

एसजीबी के टैक्स नियमों में 1 अप्रैल 2026 से बदलाव हुआ है। अब कैपिटल गेन टैक्स से छूट केवल उन्हीं निवेशकों को मिल रही है, जिन्होंने बॉन्ड सीधे आरबीआई से खरीदा था और उसे मैच्योरिटी तक अपने पास रखा है। हालांकि आरबीआई से बॉन्ड खरीदने के बावजूद प्रीमैच्योर रिडेम्पशन पर मिलने वाला कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में आएगा। इसके अलावा सेकेंडरी मार्केट से बॉन्ड खरीदने वाले निवेशकों को भी मैच्योरिटी पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। इसके अलावा ब्याज भी टैक्सेबल है।

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