बुलेट ट्रेन से जुड़ेगी काशी नगरी, साढ़े तीन घंटे में पूरा होगा दिल्ली का सफर : वैष्णव

बुलेट ट्रेन से जुड़ेगी काशी नगरी, साढ़े तीन घंटे में पूरा होगा दिल्ली का सफर : वैष्णव

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को काशीवासियों को ऐतिहासिक सौगात देते हुए बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर को मंजूरी मिलने की बड़ी घोषणा की है। वाराणसी कैंट स्टेशन पर नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन और 10 नई मेमू रेल सेवाओं के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि भारतीय रेल तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रही है। समारोह में रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में रेलवे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की सुरक्षित सवारी बन चुकी है और आज की यह शुरुआत पूरे पूर्वांचल के लिए विकास का एक नया अध्याय है।

बुलेट ट्रेन से जुड़ेंगे पूर्वांचल और उत्तर भारत के प्रमुख शहर 

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि बुलेट ट्रेन के नॉर्थ कॉरिडोर को केंद्र सरकार की स्वीकृति मिल गई है। इस नए हाई स्पीड कॉरिडोर के जरिए दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज को एक साथ जोड़ा जाएगा, जिसका विस्तार आगे पटना, सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक होगा। यह पूरी तरह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत के नौजवानों और कारीगरों द्वारा बनाया जाएगा। बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का सफर महज 3 घंटे 33 मिनट में पूरा हो सकेगा। वहीं दिल्ली से कानपुर 1 घंटे 45 मिनट, दिल्ली से लखनऊ की दूरी 2 घंटे 12 मिनट और वाराणसी से लखनऊ की दूरी महज 1 घंटे 21 मिनट रह जाएगी। दिल्ली से आगरा का सफर 59 मिनट में पूरा होगा, जबकि काशी से पटना का सफर भी मात्र एक घंटे का रह जाएगा।

18 गुना बढ़ा उत्तर प्रदेश का रेल बजट 

रेल मंत्री ने रेलवे बजट के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब कई देशों से बड़े इस विशाल प्रदेश को मात्र एक हजार करोड़ रुपये का रेलवे बजट मिलता था। यह दो लड़कों का उत्तर प्रदेश के साथ भारी अन्याय था। उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार आने के बाद प्रदेश के रेल बजट में 18 गुना की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है और यह बढ़कर 20 हजार करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, नौजवानों और व्यापारियों के हित के लिए केवल भारतीय जनता पार्टी और एनडीए की सरकार ही काम कर सकती है।

विदेशी मीडिया संस्थानों ने भी की है वंदे भारत की तारीफ

देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की खूबियों का जिक्र करते हुए रेल मंत्री ने बताया कि इसमें यात्रियों के साथ साथ स्टाफ का भी पूरा ध्यान रखा गया है। ट्रेन में रात भर काम करने वाले स्टाफ के लिए अलग बर्थ और लोको पायलट के लिए अंदर टॉयलेट की विशेष व्यवस्था की गई है। यात्रियों के लिए मिडिल और अपर बर्थ पर चढ़ने वाली सीढ़ियों को नए तरीके से डिजाइन किया गया है ताकि फिसलने की समस्या खत्म हो सके। उन्होंने बताया कि गुवाहाटी से कोलकाता के बीच चलने वाली वंदे भारत की तारीफ विदेशी मीडिया संस्थान के पत्रकारों ने भी की है। यह नई वंदे भारत स्लीपर वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, अलीगढ़ और गाजियाबाद होते हुए नई दिल्ली तक का आरामदायक सफर तय करेगी।

दैनिक यात्रियों के लिए 10 नई मेमू सेवाएं 

रेल मंत्री ने बताया कि शहर के विस्तार को देखते हुए 10 नई मेमू सेवाएं शुरू की गई हैं। इनमें से आठ सेवाएं बनारस शहर, बनारस सिटी, बनारस कैंट, बनारस स्टेशन, भुल्लनपुर, हरदत्तपुर और राजातालाब के बीच चलेंगी। वहीं दो सेवाएं प्रयागराज रामबाग, झूंसी, हंडिया खास, ज्ञानपुर रोड, माधोसिंह और राजातालाब होते हुए बनारस को जोड़ेंगी। बनारस सिटी से राजातालाब तक महीने भर की यात्रा के लिए एमएसटी मात्र 95 रुपये में उपलब्ध होगा। वहीं, काशी से प्रयागराज रामबाग तक की यात्रा का एमएसटी मात्र 220 रुपये में बनेगा, जिससे प्रयागराज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक राहत मिलेगी।

Bengaluru-Mumbai Vande Bharat: नवंबर में लॉन्च हो सकती है बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन! घंटे से कम में तय होगी दूरी, रूट और स्टॉपेज के बारे में आई ये जानकारी

Bengaluru-Mumbai Vande Bharat Sleeper train Launch Date: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बीच रेल से सफर करने वाले यात्रियों के लिए गुड न्यूज है। दोनों प्रमुख शहरों के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन नवंबर 2026 में शुरू होने की संभावना है। यह देश की दूसरी ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ हो सकती है। इस ट्रेन के शुरू होने से दक्षिण भारत के प्रमुख शहर बेंगलुरु और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बीच रेल कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि नई ट्रेन से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय 20 घंटे से कम होने की संभावना जताई गई है। जबकि वर्तमान में इस दूरी को तय करने में ट्रेनों को लगभग 22 से 24 घंटे या उससे अधिक समय लगता है।

देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2026 में पहली ‘वंदे भारत स्लीपर ट्रेन’ को हरी झंडी दिखाई थी, जो हावड़ा और कामाख्या (गुवाहाटी) के बीच चलती है। इसने इन दोनों शहरों के बीच यात्रा के समय को 6 घंटे तक कम कर दिया है

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने The Indian Express को बताया कि बेंगलुरु से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), मुंबई के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अगले महीने शुरू हो सकती है।

रेलवे अधिकारी के मुताबिक, ट्रेन की पहली यानी उद्घाटन यात्रा बेंगलुरु से शुरू होगी। हालांकि, यात्रियों को ध्यान देना चाहिए कि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी शुरुआत संभावित है। अंतिम तारीख, नियमित परिचालन और समय-सारणी की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना होगा।

नवंबर में शुरू होने की संभावना, बेंगलुरु से होगी पहली यात्रा

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर रेलवे की तैयारी चर्चा में है। इस ट्रेन का उद्देश्य लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज, सुविधाजनक और आरामदायक रेल सेवा उपलब्ध कराना है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मई में बेंगलुरु और मुंबई के बीच नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू करने की घोषणा की थी। अब रेलवे अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, ट्रेन नवंबर में शुरू हो सकती है।

बेंगलुरु रेलवे स्टेशन दक्षिण पश्चिम रेलवे (South Western Railway) जोन के अंतर्गत आता है। जबकि मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मध्य रेलवे (Central Railway) के प्रशासनिक क्षेत्र में है। ऐसे में यह ट्रेन दोनों प्रमुख रेलवे जोन के बीच संपर्क को भी बेहतर बनाएगी। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नियमित सेवाएं किस तारीख से शुरू होंगी। साथ ही ट्रेन सप्ताह में कितने दिन चलेगी इसके बारे में भी अभी डिटेल्स आना बाकी है।

बेंगलुरु से मुंबई तक कौन-सा होगा ट्रेन का रूट?

प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बेंगलुरु से मुंबई के बीच कलबुर्गी के रास्ते चलेगी। इस रूट पर कई प्रमुख स्टेशनों को शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। ट्रेन के प्रस्तावित प्रमुख स्टॉपेज इस प्रकार हैं:-

– बेंगलुरु

– कलबुर्गी

– सोलापुर

– पुणे

– कल्याण

– छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), मुंबई

इन इलाकों को होगा फायदा

इस रूट से कर्नाटक, महाराष्ट्र और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। खासकर बेंगलुरु, कलबुर्गी, सोलापुर, पुणे और मुंबई के बीच आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन उपयोगी हो सकती है। खास बात यह है कि ये स्टॉपेज उपलब्ध रिपोर्ट में बताए गए संभावित ठहराव हैं। अंतिम ठहरावों और टाइमटेबल की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी।

24 घंटे की जगह 20 घंटे से कम में पूरा हो सकता है सफर

बेंगलुरु और मुंबई के बीच रेल यात्रा का समय कम करना इस ट्रेन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। फिलहाल इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों से सफर करने में लगभग 22 घंटे से लेकर 24 घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है। प्रस्तावित वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस से यह यात्रा 20 घंटे से कम में पूरी होने की उम्मीद है।

इससे यात्रियों को मौजूदा सेवाओं की तुलना में समय की बचत हो सकती है। हालांकि, वास्तविक यात्रा अवधि ट्रेन के अंतिम रूट, ठहराव, परिचालन गति और रेलवे द्वारा जारी समय-सारणी पर निर्भर करेगी। यह ट्रेन खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जो काम, कारोबार, शिक्षा या परिवार से जुड़े कारणों से नियमित रूप से दोनों शहरों के बीच यात्रा करते हैं।

ट्रेन में होंगे 16 कोच, 823 यात्रियों के सफर की क्षमता

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होने की जानकारी दी गई है। इनमें अलग-अलग कैटेगरी के स्लीपर कोच शामिल होंगे, ताकि यात्री अपनी जरूरत के हिसाब से यात्रा का विकल्प चुन सकें

  • कुल कोच: 16 (11 कोच 3-टियर; 4 कोच 2-टियर; 1 कोच 1st AC)
  • यात्री क्षमता: 823 (3-टियर: 611 + 2-टियर: 188 + 1st AC: 24)
  • थर्ड एसी के सबसे अधिक कोच रखे गए हैं।
  • सेकंड एसी और फर्स्ट एसी के विकल्प उन यात्रियों के लिए होंगे, जो अधिक आरामदायक यात्रा पसंद करते हैं।
  • 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की डिजाइन स्पीड तय है।
  • प्रस्तावित ट्रेन सेमी-हाई-स्पीड कैटेगरी की होगी। इसकी डिजाइन गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा तक बताई गई है।

हालांकि, डिजाइन स्पीड और वास्तविक रफ्तार में अंतर होता है। ट्रेन कितनी तेज चलेगी, यह ट्रैक की स्थिति, सिग्नलिंग व्यवस्था, सुरक्षा मानकों, निर्धारित ठहराव और रेलवे की परिचालन योजना पर निर्भर करेगा। इसलिए 180 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति का अर्थ यह नहीं है कि ट्रेन पूरे बेंगलुरु-मुंबई रूट पर इसी रफ्तार से चलेगी। इसका वास्तविक फायदा यात्रा के कुल समय और परिचालन व्यवस्था से तय होगा।

यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक स्लीपर सुविधाएं

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लंबी दूरी की रात की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें यात्रियों के आराम और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जानकारी दी गई है:

1. बेहतर कुशनिंग वाली बर्थ: ट्रेन में एर्गोनॉमिक तरीके से डिजाइन की गई बर्थ होंगी। बेहतर कुशनिंग से लंबी यात्रा के दौरान आराम बढ़ाने में मदद मिलेगी।

2. ऑटोमैटिक दरवाजे: ट्रेन में स्वचालित दरवाजों की सुविधा होगी। इससे कोचों के बीच आवाजाही को व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

3. बेहतर सस्पेंशन: उन्नत सस्पेंशन सिस्टम और शोर कम करने वाली तकनीक से यात्रा के दौरान झटकों और आवाज के प्रभाव को कम करने का लक्ष्य है।

4. कवच सुरक्षा प्रणाली: ट्रेन में कवच और आपातकालीन टॉक-बैक सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल होने की जानकारी दी गई है। कवच भारतीय रेलवे की स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जबकि टॉक-बैक सिस्टम के जरिए आपात स्थिति में यात्री संबंधित रेल कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।

5. बेहतर साफ-सफाई: ट्रेन में स्वच्छता बनाए रखने के लिए डिसइन्फेक्टेंट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

6. आधुनिक ड्राइवर केबिन: ट्रेन के ड्राइवर केबिन में उन्नत नियंत्रण और सुरक्षा प्रणालियां होंगी, जिनका उद्देश्य परिचालन को बेहतर बनाना है।

7. एयरोडायनामिक डिजाइन: ट्रेन का बाहरी डिजाइन हवा के प्रतिरोध को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें स्वचालित बाहरी यात्री दरवाजों की सुविधा भी बताई गई है।

क्या होगा किराया? 

बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के किराए को लेकर फिलहाल उपलब्ध जानकारी में कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं दिया गया है। इसलिए थर्ड एसी, सेकंड एसी और फर्स्ट एसी का किराया अभी निश्चित रूप से बताना सही नहीं होगा। रेलवे की ओर से किराया, टिकट बुकिंग की तारीख, नियमित परिचालन और ट्रेन के समय की घोषणा होने के बाद यात्रियों को पूरी जानकारी मिल सकेगी।

बेंगलुरु-मुंबई रेल कनेक्टिविटी को कैसे मिलेगा फायदा?

बेंगलुरु और मुंबई दोनों देश के प्रमुख आर्थिक और व्यावसायिक केंद्र हैं। बेंगलुरु इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और उद्योगों के लिए जाना जाता है। जबकि मुंबई वित्तीय सेवाओं, कारोबार और मनोरंजन उद्योग का बड़ा केंद्र है। दोनों शहरों के बीच तेज और आरामदायक रेल सेवा शुरू होने से कारोबारियों, नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

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अधिकारियों ने कहा कि कलबुर्गी, सोलापुर और पुणे जैसे शहरों के यात्रियों के लिए भी यह सेवा महत्वपूर्ण हो सकती है। बशर्ते फाइनल टाइम टेबल और ठहराव उनकी यात्रा की जरूरतों के अनुकूल हों। स्लीपर ट्रेन होने के कारण यह सेवा लंबी दूरी के यात्रियों को रात में सफर करने और अगले दिन अपने गंतव्य पर पहुंचने का विकल्प भी दे सकती है।