8वीं के छात्र ने पढ़ाई के बहाने लिया फोन और उड़ा दिए 42K, कहानी जानकर हर कोई रह गया हैरान

पढ़ाई के लिए बच्चों का माता-पिता का मोबाइल इस्तेमाल करना आम बात है। लेकिन एक परिवार के साथ ऐसा मामला सामने आया जिसने सभी को हैरान कर दिया। आठवीं कक्षा के छात्र ने पढ़ाई करने की बजाय Roblox गेम में 42 हजार रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए। जब परिवार को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से मदद मांगी। सोशल मीडिया पर अब ये मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल व ऑनलाइन पेमेंट की सुरक्षा को लेकर अपनी राय दे रहे हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

ये मामला Reddit पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो गया। इस घटना ने बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल, सेव किए गए पेमेंट विकल्प और इन-ऐप खरीदारी की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी। लड़के के भाई ने Reddit के r/RobloxSupport कम्युनिटी में “Brother spent ₹42K on Roblox without permission” टाइटल से पोस्ट शेयर किया। उसके अनुसार, छात्र ने पढ़ाई करने के बहाने अपने पिता का फोन लिया था। लेकिन पढ़ाई की जगह उसने Roblox गेम में लॉग इन कर Robux खरीदने पर हजारों रुपये खर्च कर दिए। परिवार को इस बात की जानकारी तब हुई, जब सभी ट्रांजैक्शन पूरे हो चुके थे।

खर्च कर दिए 42,000 रुपये

पोस्ट में यूजर ने लिखा, “मैं इस समय एक बड़ी परेशानी में हूं। कल मेरा छोटा भाई, जो आठवीं कक्षा में पढ़ता है, पढ़ाई के लिए पापा का फोन लेकर गया था। लेकिन उसने Roblox खेलना शुरू कर दिया और गलती से Robux खरीदने में करीब 42,000 रुपये खर्च कर दिए। अब वह लगभग सभी Robux इस्तेमाल कर चुका है और उसके अकाउंट में सिर्फ करीब 100 Robux ही बचे हैं।” परिवार के लिए ये सिर्फ गेम पर पैसे खर्च होने का मामला नहीं था, क्योंकि उस समय उन्हें पैसों की सख्त जरूरत थी।

भाई ने मांगी सलाह

इसी वजह से ये घटना उनके लिए और भी बड़ी परेशानी बन गई। इसके बाद छात्र के भाई ने सोशल मीडिया पर लोगों से सलाह मांगी कि क्या इन खरीदारी को रद्द कराया जा सकता है या खर्च हुए पैसे वापस मिलने की कोई संभावना है। अपनी पोस्ट में यूजर ने लिखा, “कृपया कोई मेरी मदद करें। क्या ऐसा कोई तरीका है, जिससे हमारे पैसे वापस मिल सकें? हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही अच्छी नहीं है। मेरे पापा के पास लोन चुकाने और मेरे भाई की स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं हैं।” यूजर ने बताया कि इस अचानक हुए खर्च ने परिवार की आर्थिक परेशानी और बढ़ा दी है।

अपने दावे के समर्थन में यूजर ने खरीदारी का एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया। इसमें करीब 2,000 रुपये के कई ट्रांजैक्शन दिखाई दे रहे थे, जिनका कुल खर्च 42,647 रुपये बताया गया।

लोगों ने दी ये सलाह

पोस्ट वायरल होने के बाद Reddit पर लोगों ने कई तरह की सलाह दी। कुछ यूजर्स ने परिवार की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई, जबकि कई लोगों ने कहा कि बच्चों की पहुंच वाले फोन में पेमेंट डिटेल्स सेव रखना जोखिम भरा हो सकता है। एक यूजर ने लिखा, “अपने बैंक से संपर्क करें और इन ट्रांजैक्शन के लिए चार्जबैक की मांग करें। हो सकता है आपके भाई का Roblox अकाउंट बंद हो जाए, लेकिन इससे उसे बिना अनुमति किसी और के पैसे इस्तेमाल न करने की सीख मिलेगी।”

एक अन्य यूज़र ने लिखा, “यह घटना बच्चों को पैसों की अहमियत समझाने का मौका है। साथ ही माता-पिता को भी अपने कार्ड या पेमेंट डिटेल्स ऐसे डिवाइस में सेव नहीं रखनी चाहिए, जिन्हें बच्चे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।” वहीं एक और यूजर ने सलाह दी, “Roblox सपोर्ट से संपर्क करें। हालांकि, ऐसा करने पर आपके भाई का अकाउंट बैन भी हो सकता है।”

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

सिर्फ ब्रेड पकौड़ा और गुलाब जामुन बेचकर लाखों की कमाई! वायरल हुई सड़क किनारे की इस दुकान की कहानी

सोशल मीडिया पर इन दिनों सड़क किनारे लगी एक छोटी-सी ब्रेड पकौड़ा और गुलाब जामुन की दुकान काफी वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति ने दुकानदार की संभावित कमाई का अनुमान शेयर किया। दुकान पर सिर्फ ब्रेड पकौड़ा और गुलाब जामुन मिलते हैं, लेकिन फिर भी यहां हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि सीमित सामान बेचने के बावजूद इस स्टॉल का कारोबार काफी अच्छा चलता है। सोशल मीडिया पर कई यूजर इस छोटे से बिजनेस की सफलता और संभावित कमाई को देखकर हैरानी जता रहे हैं।

कितनी होती है कमाई

सोशल मीडिया पर ये पोस्ट X यूजर अंकित पांडे ने शेयर की। उन्होंने लिखा, “यह सड़क किनारे ब्रेड पकौड़ा बेचने वाला 10 साल का कॉर्पोरेट अनुभव रखने वाले कई लोगों से भी ज्यादा कमाई करता है।” अंकित पांडे ने बताया कि सफर के दौरान वह एक ब्रेड पकौड़ा नाम के एक छोटे से स्टॉल पर पहुंचे। अंकित ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यात्रा के दौरान मैं मनोज ब्रेड पकौड़ा नाम की एक छोटी-सी सड़क किनारे की दुकान पर रुका। यहां न कोई आलीशान इंटीरियर था, न एयर कंडीशनिंग और न ही महंगी ब्रांडिंग। इसके बावजूद स्वादिष्ट खाने और ग्राहकों की लगातार भीड़ ने मेरा ध्यान खींच लिया।”

एक दिन में आते हैं 400 कस्टमर

उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने दुकानदार से पूछा, “भैया, आपके पास रोज कितने ग्राहक आते हैं?” इस पर दुकानदार ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “करीब 400।” पांडे के मुताबिक, ज्यादातर ग्राहक एक ब्रेड पकौड़ा और एक गुलाब जामुन का ऑर्डर करते हैं। कस्टमर की संख्या जानने के बाद अंकित ने स्टॉल की संभावित रोजाना बिक्री का अनुमान लगाया। उन्होंने लिखा, “अब एक आसान हिसाब लगाते हैं। ब्रेड पकौड़े की कीमत 15 रुपये और गुलाब जामुन की कीमत भी 15 रुपये है। यानी एक ग्राहक का औसत बिल 30 रुपये हुआ। अगर रोज करीब 400 ग्राहक आते हैं, तो 400 × 30 के हिसाब से दुकान की दैनिक बिक्री लगभग 12,000 रुपये बैठती है।”

दुकानदार की होती है अच्छी बचत

अंकित पांडे ने साफ किया कि कमाई का ये अनुमान दुकानदार की दी गई जानकारी पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनके मुताबिक, रोज के खर्च निकालने के बाद भी दुकानदार की अच्छी बचत हो जाती है। अंकित ने बताया कि दुकानदार के मुताबिक, कमाई का सही हिसाब लगाने से पहले कच्चा सामान, तेल, गैस, किराया और रोजमर्रा के दूसरे खर्चों को अलग किया जाता है। इन सभी खर्चों के बाद भी दुकानदार का दावा है कि उसकी कुल कमाई का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा बचत के रूप में रह जाता है। लेकिन इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

अपना अनुमान साझा करते हुए अंकित पांडे ने लिखा, “इस हिसाब से रोज करीब 8,400 रुपये की बचत होती है। यानी महीने में लगभग 2.5 लाख रुपये और सालभर में करीब 30 लाख रुपये। ये सभी आंकड़े मनोज द्वारा मेरे साथ साझा की गई जानकारी के आधार पर लगाए गए अनुमान हैं।”

वायरल हुआ पोस्ट

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने कहा कि अच्छी क्वालिटी, सही कीमत और ग्राहकों के भरोसे के दम पर छोटे कारोबार भी शानदार कमाई कर सकते हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह कारोबार कमाई वाला जरूर है, लेकिन इसे सफल बनाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।” वहीं, दूसरे यूजर ने टिप्पणी की, “लगातार अच्छी क्वालिटी और एक जैसा स्वाद ही असली सफलता और कमाई की सबसे बड़ी वजह है।”

Viral Post: कंपनी हर क्लिक और कीबोर्ड के हर बटन दबाने पर रखती है नजर, सीक्रेट एक्सेल शीट में सब हो रहा रिकॉर्ड? कर्मचारी के दावे ने मचाया बवाल

सोशल मीडिया पर एक कंपनी की कथित कर्मचारी निगरानी से जुड़ी एक्सेल शीट तेजी से वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर किए पोस्ट में व्यक्ति ने दावा किया कि, इस शीट के जरिए कर्मचारियों के काम करने के घंटे, कंप्यूटर गतिविधि और माउस जिगलर जैसे टूल के इस्तेमाल तक पर नजर रखी जा रही थी। एक्स (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने इसका स्क्रीनशॉट शेयर किया। स्क्रीनशॉट सामने आने के बाद से वर्कप्लेस प्राइवेसी और कर्मचारियों की निगरानी को लेकर इंटरनेट पर नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर ये तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

X यूजर lolhith07 एक्स पर यूजर ने इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लिखा, “किसी ने रेडिट पर बताया कि उसकी कंपनी इस तरह कर्मचारियों पर नजर रख रही है।” लेकिन, स्प्रेडशीट के असली होने की इंडिपेंडेंटली पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा, जिसके बाद कई लोगों ने कंपनियों की कर्मचारी निगरानी प्रणाली और वर्कप्लेस प्राइवेसी को लेकर सवाल उठाए।

शेयर किया स्क्रीनशॉट

वायरल स्क्रीनशॉट में “June 2026″ नाम की एक एक्सेल शीट दिखाई दे रही है। इसमें दावा किया गया है कि एक कर्मचारी की रोजाना की कामकाजी गतिविधियों को अलग-अलग मानकों के आधार पर रिकॉर्ड किया जा रहा था। शीट में प्रोडक्टिव घंटे, सिस्टम से दूर रहने का समय (AAFS), लंबे समय तक कीबोर्ड इस्तेमाल, जिगलर डिटेक्शन, संदिग्ध माउस मूवमेंट और MS Teams कॉल के गलत इस्तेमाल जैसे कई कॉलम शामिल दिखाई दे रहे हैं।”

प्रोडक्टिविटी की करते हैं निगरानी

वायरल स्प्रेडशीट में कर्मचारी की रोजाना की प्रोडक्टिविटी का भी रिकॉर्ड दिखाई दे रहा था। स्क्रीनशॉट के अनुसार, 10 जून को 7.93 घंटे, 11 जून को 7.01 घंटे और 12 जून को 7.32 घंटे की प्रोडक्टिव एक्टिविटी दर्ज की गई थी। इसके अलावा भी कई दिनों के आंकड़े शीट में मौजूद थे। इस पोस्ट पर चर्चा तब और बढ़ गई, जब रेडिट पर इसे शेयर करने वाले व्यक्ति ने बताया कि उनके मुताबिक यह डैशबोर्ड कर्मचारियों की किन-किन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

रेडिट पर शेयर किया पोस्ट

रेडिट पर पोस्ट शेयर करने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि, “जो लोग ऐसे डैशबोर्ड बनाते हैं, वे भी जानते हैं कि ये किसी कर्मचारी के असली काम का सही आकलन नहीं करते। मैनेजमेंट ज्ञान और सोच पर आधारित काम को नहीं माप सकता, इसलिए वह केवल कीबोर्ड की गतिविधि जैसी चीजों को ही मापता है। यहां ‘प्रोडक्टिव घंटे’ का मतलब सिर्फ अलग-अलग विंडो में होने वाले इनपुट इवेंट्स से है। अगर कोई अनुभवी कर्मचारी दो घंटे तक किसी बड़े आर्किटेक्चर या समाधान के बारे में सोच रहा हो, तो सिस्टम उसे भी निष्क्रिय मान लेता है। यह तरीका पूरी तरह गलत है।”

लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की खूब प्रतिक्रियाएं सामने आईं। एक यूजर ने लिखा, “कंपनियां ऐसे निगरानी वाले टूल्स पर करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही हैं, लेकिन कर्मचारियों की खुशी और उनका मनोबल बढ़ाने पर ध्यान नहीं देतीं। साल में कुछ बार पिज्जा खिलाकर उन्हें खुश करने की कोशिश की जाती है, जबकि असली जरूरत बेहतर कार्य माहौल बनाने की है।”

एक अन्य यूजर ने दावा किया कि वायरल स्प्रेडशीट में दिखाई गई निगरानी सिर्फ शुरुआती स्तर की है। उसने लिखा कि, “कई कंपनियों में इससे कहीं ज्यादा एडवांस मॉनिटरिंग की जाती है, जिसमें स्क्रीन रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कीस्ट्रोक लॉगिंग, लोकेशन हिस्ट्री, आईपी और नेटवर्क की जानकारी, इस्तेमाल किए गए एप्लिकेशन और देखी गई वेबसाइटों तक का रिकॉर्ड रखा जा सकता है।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “कुछ डॉक्टर माउस जिगलर का इस्तेमाल इसलिए करते थे, ताकि मरीजों के रिकॉर्ड बार-बार लॉक न हों और सिस्टम उन्हें अपने आप लॉग आउट न कर दे। साथ ही उसने हैरानी जताई कि आखिर यह कैसे पता लगाया गया कि माउस जिगलर का इस्तेमाल किया जा रहा था।”

₹1.6 लाख सैलरी पर ₹1.85 लाख EMI! F&O ट्रेडिंग के चक्कर में लगा ₹60 लाख का चूना, चौंका देगी आईटी प्रोफेशनल की ये स्टोरी

Trading Loss Loan Trap: शेयर बाजार में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में रातों-रात अमीर बनने की चाहत कई लोगों के लिए बर्बादी का कारण बन रही है। मुंबई के एक 35 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल की आपबीती सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर तेजी से वायरल हो रही है। MNC में मैनेजर के पद पर कार्यरत इस शख्स ने ट्रेडिंग में लगभग ₹80 लाख गंवा दिए हैं और अब वह ₹60 लाख के भारी-भरकम कर्ज के तले दब चुका है।

हालत यह है कि उसकी महीने की टेक-होम सैलरी ₹1.6 लाख है, जबकि बैंक और डिजिटल लोन ऐप्स की ईएमआई ही ₹1.85 लाख बनती है। सोशल मीडिया पर यूजर ने अपना दर्द शेयर करते हुए इस संकट से निकलने के रास्ते पूछे हैं।

कैजुअल ट्रेडिंग से शुरू हुआ सफर, ऐसे बना ₹60 लाख का कर्ज

रेडिट यूजर (gaushi1614) ने अपनी पोस्ट में बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान उसने स्टॉक मार्केट और F&O ट्रेडिंग में कदम रखा था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे यह एक गंभीर लत बन गई। पुराने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश में वह और अधिक ट्रेडिंग करने लगा, जिससे स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई। ₹80 लाख गंवाने के बाद अब उस पर ₹60 लाख का बकाया कर्ज है।

  • दो पर्सनल लोन
  • डिजिटल लेंडिंग ऐप्स और NBFCs के लोन
  • ₹7 लाख से अधिक का बकाया क्रेडिट कार्ड बिल शामिल है।

घर चलाने के पैसे नहीं, परिवार से छिपा रखी है बर्बादी की कहानी

आईटी मैनेजर का कहना है कि उसकी प्राथमिकता किसी तरह अपनी मासिक ईएमआई का बोझ ₹1.85 लाख से घटाकर ₹1.2 से ₹1.3 लाख के स्तर पर लाना है, ताकि वह अपने परिवार के दैनिक खर्च संभाल सके और धीरे-धीरे पूरे कर्ज का भुगतान कर सके। यूजर ने बताया कि नए लोन लेने और क्रेडिट कार्ड का भारी इस्तेमाल करने के कारण बैंक अब उसे लोन कंसोलिडेशन या रीस्ट्रक्चरिंग की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस व्यक्ति की पत्नी और बच्चों को इस भारी कर्ज की भनक तक नहीं है। उसे डर है कि रिकवरी एजेंटों के घर आने पर उसके परिवार को सच पता चल जाएगा। हालांकि, उसने दावा किया है कि उसने अब तक एक भी ईएमआई बाउंस नहीं होने दी है, लेकिन अब स्थिति असहनीय हो गई है।

रेडिट यूजर्स ने दी काम की सलाह: ऐसे निकल सकते हैं कर्ज के जाल से

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और वित्तीय विशेषज्ञों ने इस परेशानी से उबरने के लिए व्यावहारिक और कड़े सुझाव दिए हैं:

1- सबसे महंगे कर्ज पहले चुकाएं

यूजर्स ने सलाह दी है कि क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन ऐप पर 36% से 42% तक का सालाना ब्याज लगता है। सबसे पहले संपत्ति जैसे- कार, ज्वेलरी बेचकर या रिश्तेदारों से बिना ब्याज की मदद लेकर इन हाई-इंटरेस्ट लोन का निपटारा करना चाहिए।

2- F&O ट्रेडिंग अकाउंट पूरी तरह बंद करें

ट्रेडिंग की लत आसानी से नहीं छूटती। इसके लिए डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट को स्थायी रूप से बंद कर देना चाहिए और कुछ समय के लिए हर तरह के निवेश से दूरी बना लेनी चाहिए।

3. पत्नी और परिवार से सच साझा करें

अकेले इतने बड़े मानसिक तनाव को झेलना मुश्किल है। रिकवरी एजेंटों के दबाव से पहले पत्नी को स्थिति के बारे में ईमानदारी से बताना चाहिए ताकि वे मिलकर जीवनशैली के खर्चों में कटौती कर सकें।

4. सिक्योर लोन या मोर्टगेज लोन का विकल्प

अगर घर या अन्य कोई संपत्ति है, तो हाई-कॉस्ट पर्सनल लोन को चुकाने के लिए कम ब्याज दर वाले लोन का विकल्प चुना जा सकता है, जिससे ईएमआई आधी हो सकती है।

Desperately need advice – 60L debt due to trading losses and I don’t know how to get out

by

u/gaushi1614 in

IndianStockMarket

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

रांची JPSC-JSSC धांधली, वांगचुक की अपील पर देवेन्द्र ने तोड़ा अनशन, जानिए कौन हैं छात्र नेता महतो

Devendra Nath Mahato Protest

Devendra Nath Mahato Protest: राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और धांधली के खिलाफ पिछले चार दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत और उनकी अपील के बाद देवेंद्र ने अन्न-जल ग्रहण किया। हालांकि, अनशन समाप्त होने के बावजूद छात्रों का आंदोलन जारी है। इस बीच, खबर है कि सीजेपी नेता अभिजीत दीपके भी रांची पहुंचने वाले हैं। 

 

झारखंड की राजधानी रांची में राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षा प्रणालियों में धांधली और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन उग्र रूप ले चुका है। बुधवार को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण व सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्र महतो से बात की। वार्ता के दौरान वांगचुक ने आंदोलन के मुद्दों पर चर्चा की और देवेंद्र की लगातार गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उनसे अनशन वापस लेने का आग्रह किया। 

 

सोनम वांगचुक की अपील और छात्रों के भारी दबाव के बाद देवेंद्र महतो ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। लगातार चार दिनों के उपवास के कारण उनकी स्थिति बिगड़ रही थी। रांची सदर अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल काफी घट गया था, साथ ही वे गंभीर डिहाइड्रेशन और थकान से जूझ रहे थे। ALSO READ: CJP Protest : हिंसा करने वालों पर दिल्ली पुलिस का एक्शन, रद्द हो सकते हैं पासपोर्ट, CCTV से हो रही पहचान, सीजेपी का कल देशभर में आंदोलन का ऐलान

विवाद का पूरा घटनाक्रम

इस पूरे आंदोलन की शुरुआत बीती 2 जुलाई को जेपीएससी 14वीं की प्रारंभिक परीक्षा (PT) का परिणाम आने के बाद हुई। मुख्य परीक्षा के लिए कुल 2204 अभ्यर्थियों को योग्य घोषित किया गया था और परीक्षा की तिथि 18 से 20 जुलाई तय की गई थी। लेकिन परिणाम जारी होते ही धांधली के आरोप लगने शुरू हो गए। रिजल्ट में कैटेगरी-वाइज कट-ऑफ जारी नहीं किया गया। इसके अलावा जारी परिणाम पत्र पर जेपीएससी अध्यक्ष, सचिव या किसी सदस्य के हस्ताक्षर नहीं थे।

क्या है छात्रों की मांग? 

सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी की OMR शीट वायरल हुई, जिसमें केवल 48 प्रश्न हल करने के बावजूद उसे मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया था। व्यापक विरोध के बाद मुख्य परीक्षा को तो रद्द कर दिया गया, लेकिन छात्र इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। अभ्यर्थियों का सीधा आरोप है कि पेपर लीक किए गए और सीटें बेची गईं। छात्रों ने सीआईडी (CID) जांच को नकारते हुए पूरे मामले की जांच ईडी (ED) या सीबीआई (CBI) से कराने की मांग की है। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

आंदोलन का बढ़ता दायरा, दीपके भी जाएंगे रांची

झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) से जुड़े देवेंद्र महतो ने 25 जुलाई को मोराबादी मैदान में गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना शुरू किया था। शुरुआती दिनों में कम संख्या के बावजूद सोशल मीडिया के जरिए छात्रों का भारी समर्थन मिला। खबर है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके भी आंदोलनकारियों को समर्थन देने के लिए रांची जाएंगे। 

कौन हैं छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो?

झारखंड के छात्र आंदोलनों का एक प्रमुख चेहरा बन चुके देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्षों और सार्वजनिक मुद्दों से भरा रहा है। देवेंद्र रांची जिले के राहे प्रखंड स्थित कापीडीह गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता विशंभर महतो एक सेवानिवृत्त सरकारी शिक्षक हैं। देवेंद्र ने साल 2006 में मैट्रिक, 2008 में साइंस से इंटरमीडिएट, 2017 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातक और बाद में कुरमाली भाषा में स्नातकोत्तर (PG) व B.Ed की डिग्री हासिल की। 

 

कॉलेज के दिनों से ही छात्र हित के मुद्दों पर मुखर रहे महतो ने 2015 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार की नियोजन नीति का विरोध किया। 2016 में छात्रवृत्ति में कटौती के खिलाफ सड़क पर उतरे।

 

छात्र आंदोलनों के कारण जेल में रहने के बावजूद उन्होंने रांची सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा और 1.48 लाख वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। सिल्ली विधानसभा सीट से JLKM प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर 44 हजार वोट प्राप्त किए और पुनः तीसरे स्थान पर रहे। छात्रों की मांगों को लेकर लगातार आंदोलनरत रहने के कारण देवेंद्र महतो पर वर्तमान में 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

दतिया में हार के बाद भाजपा की जिला कार्यकारिणी भंग होना क्या नरोत्तम मिश्रा की दतिया राजनीति के अंत का संकेत?

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद अब एक्शन का दौर शुरु हो गया है। पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने दतिया की जिला कार्यकारिणी, मंडल और मोर्चा इकाइयों को भंग कर दिया। इसके साथ ही चुनावी हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया। नतीजों के बाद यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व ने चुनाव परिणाम को गंभीरता से लिया गया है और पूरे चुनाव के दौरान जिस भितरघात की चर्चा थी उस पर अब पार्टी एक्शन मोड में है।

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दतिया भाजपा जिला कार्यकारिणी पर एक तरह से नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का कब्जा था, इसका बडा कारण है कि नरोत्तम मिश्रा का लगातार 15 साल तक दतिया से विधायक रहना। इसके साथ नरोत्तम मिश्रा की गिनती मध्यप्रदेश भाजपा के उन दिग्गज नेताओं में होती थी  जिनका प्रभाव सरकार से लेकर संगठन तक में था। 
 

शहर में हार के बाद पार्षदों पर एक्शन की तैयारी-दतिया भाजपा जिला कार्यकारिणी के भंग किए जाने के बाद अब पार्टी उन पार्षदों के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई कर सकती है, जिन्होंने चुनाव में पार्टी के विरोध में काम किया है। पार्टी सूत्र बताते है कि  ऐसे करीब एक दर्जन पार्षदों की पहचान की गई है जिनकी गतिविधियां चुनाव में पार्टी के विरोध में रही और उन्होंने वोटिंग के दिन खुलकर पार्टी का विरोध किया। इन पार्षदों को पार्टी नेतृत्व सीधे बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

बताया जा रहा है कि पार्टी के पार्षदों ने पार्टी के विरोध में काम किया, यहीं कारण रहा है कि दतिया शहर में भाजपा को अब तक की सबसे करारी हार का सामना करना पड़ा। आंकड़े बताते है कि भाजपा दतिया मंडल में साढ़े पांच हजार वोटों से  पीछे रही, वहीं पूरे दतिया शह में भाजपा करीब 11 हजार वोटों से कांग्रेस से पीछे  रही गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव की वोटिंग के दिन पुलिस ने नरोत्तम मिश्रा समर्थक 4 पार्षदों को उनके घरों में  नजरबंद कर दिया था। 

 

क्या नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पार्टी कर पाएगी कार्रवाई?-दतिया उपचुनाव में हार की समीक्षा को लेकर मंगलवार को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास पर पार्टी की बड़ी बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजदूगी में हुई बैठक में हार के कारणों की विस्तार से समीक्षा की गई। बताया जा रहा है कि बैठक में शामिल सरकार के मंत्री, जिन्होंने दतिया उपचुनाव में मंडल जिताने की जिम्मेदारी दी गई थी उन्होने खुलकर नरोत्तम मिश्रा पर पार्टी के विरोध में काम करने के आरोप लगाए। 
 

भाजपा से जुड़े सूत्र बताते है कि नरोत्तम मिश्रा की चुनाव में भूमिका को लेकर प्रदेश नेतृत्व एक रिपोर्ट तैयार करके पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को भेज रहा है। सूत्र बताते  है कि पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा पर कार्रवाई का फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। दरअसल दतिया उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को लगभग 6,016 मतों के अंतर से पराजित किया। अब इस हार का पूरा ठीकरा नरोत्तम मिश्रा पर फूटता हुआ दिख रहा है। यहीं कारण है कि पहले उनके समर्थक दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह सहित पूरी कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया। 

 

दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण भितरघात को माना जा रहा है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने शहर में हंगाम और प्रदर्शन किया,  उसने पार्टी को शहर में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा। वहीं बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनावी नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।  दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया।

श्रीलंकाई स्पिनर्स के लिए राहुल बनेंगे द्रविड़, अभ्यास का वीडियो हुआ वायरल

INDvsSL भले ही श्रीलंका ने अपनी टीम की घोषणा नहीं की हो लेकिन 15 अगस्त से शुरु हो रहे पहले टेस्ट में भारत को स्पिन के मुफीद पिच ही मिलनी है। ऐसे में भारत का पूरा ध्यान स्पिन को खेलने पर है। स्पिन के खिलाफ भारत की बल्लेबाजी की धुरी चेतेश्वर पुजारा रहते थे अब वह केएल राहुल हो गए हैं क्योंकि वह इस क्रम के सबसे अनुभवी बल्लेबाज हैं। अगर भारत को स्पिन के खिलाफ थोड़ी भी उम्मीद लगानी है तो केएल राहुल को राहुल द्रविड़ की तरह खेलना होगा।

अभ्यास सत्र में केएल राहुल ने राहुल द्रविड़ की तरह खेलना शुरु भी कर दिया है। केएल राहुल ने स्पिन गेंदबाजी के लिए विशेष अभ्यास सत्र में खुरदुरी पिच पर समय बिताया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में अंदर स्पिन करती हुई गेंद पर राहुल अपना विकेट बचाने में कामयाब हुए। इस वीडियो जैसा अगर राहुल खेल गए तो वह श्रीलंका के खिलाफ सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बनकर उभरेंगे।

इसके अलावा केएल राहुल अपनी फिटनेस पर भी ध्यान दे रहे हैं। मैच में ऐसा मौका आ सकता है जब ऋषभ पंत चोटिल हों और उनकी जगह केएल राहुल को कीपिंग करनी पड़ जाए।

केएल राहुल भले ही भारत के सबसे अनुभवी बल्लेबाज हों लेकिन दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू धरती पर उनका बल्ला खामोश रहा है। उन्होंने 4 पारियों में सिर्फ 68 रन बनाए जिसमें से 39 उनका सर्वाधिक स्कोर था। 3 बार उनका विकेट स्पिनर्स ने लिया। हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ खेला गया टेस्ट मैच जो विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में शामिल नहीं था उसमें केएल राहुल ने शतक जरूर जमाया लेकिन वह काफी पहले ही आउट हो गए थे जिसके खिलाफ अफगानिस्तानी कप्तान ने रिव्यू नहीं लिया।

Jharkhand Student Protest: झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ कहे जाने वाले छात्र नेता देवेंद्र महतो कौन हैं? रांची के Gen-Z प्रोटेस्ट का बने चेहरा

Who is Devendra Nath Mahto: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं परीक्षा JPSC, JSSC-CGL और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में सैकड़ों छात्रों का प्रदर्शन लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच और भर्ती एजेंसियों में सुधार की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से एक स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो इस Gen-Z आंदोलन के प्रमुख चेहरा हैं।

उन्हें झारखंड के विरोध प्रदर्शन का ‘सोनम वांगचुक’ कहा जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में रविवार रात (2 अगस्त) को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वहीं, Gen Z प्रदर्शनकारी 29 जुलाई से स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। उन्हें पूरे देश से समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग शहरों से लोग ऑनलाइन डिलीवरी ऐप के जरिए प्रदर्शन स्थल पर खाने की चीजें उपलब्ध करा रहे हैं।

भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध

महतो और छात्र झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में भारी अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। वह CBI और ED से जांच की मांग कर रहे हैं। महतो ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को तब तक रद्द करने की मांग की है जब तक कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित न हो जाए।

महतो ने अपना अनशन तोड़ा

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चार दिन बाद मंगलवार को अपना अनशन समाप्त कर दिया है। महतो ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की अपील पर अपनी भूख हड़ताल के दौरान पानी पिया। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने महतो से बातचीत की और उनका हाल चाल-जाना। महतो JPSC, JSSC-CGL और दूसरी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, “हम 25 जुलाई से सत्याग्रह कर रहे हैं। मैं 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठा हूं। मैं बहुत थक गया था। यह एक नाजुक समय था… यहां 26 सालों से पेपर लीक हो रहे हैं… कल डॉक्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर मैंने पानी नहीं पिया, तो मुझे अस्पताल में भर्ती होना पड़ेगा।”

इस दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा, “कृपया थोड़ा पानी पी लीजिए, यह आत्महत्या जैसा है… आपको कुछ समय चाहिए, लेकिन इसमें 2-3 हफ्ते भी लग सकते हैं और मुझे उम्मीद है कि सरकार बात समझेगी और सही फैसला लेगी।”

महतो ने रविवार रात करीब 10 बजे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन स्थल पर भूख हड़ताल शुरू की। इसमें 14वीं जेपीएससी परीक्षा, जेएसएससी-सीजीएल और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई तथा ईडी से जांच कराने की मांग की गई। अपनी भूख हड़ताल शुरू करने से पहले, उन्होंने कहा कि कथित अनियमितता के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों का लापरवाही वाला रवैया छात्रों, युवाओं और अभ्यर्थियों का मनोबल तोड़ रहा है।

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे से गांव के रहने वाले छात्र नेता हैं। उन्होंने रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा प्राप्त करने से पहले बुंडू में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। संस्कृत के साथ-साथ कुर्माली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं में पोस्ट-ग्रेजुएट महतो के पास हजारीबाग से बैचलर ऑफ एजुकेशन (B.Ed.) की डिग्री भी है।

महतो ने साल 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में तमार निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ा था। वह 2015 से छात्र सक्रियता में शामिल रहे हैं। उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीतियों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया है। रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का भी समर्थन मिला। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्होंने महतो और अन्य छात्र नेताओं के साथ वीडियो कॉल की थी।

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उन्होंने अपने हालिया X पोस्ट में लिखा, “यह संघर्ष, जो 5 जुलाई को शुरू हुआ था और 25 जुलाई से जारी दिन-रात का सत्याग्रह अब एक मुश्किल दौर में पहुंच गया है। शरीर में कमजोरी है, लेकिन छात्रों को न्याय दिलाने का संकल्प पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है।” उन्होंने समर्थकों से आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवा उम्मीदवारों के भविष्य के लिए है।

NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान वांगचुक की भूख हड़ताल

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने NEET विरोध प्रदर्शन को सुर्खियों में ला दिया, जिसने इस महीने की शुरुआत में पूरे देश में हलचल मचा दी थी। जहां एक तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्ट’ के नेताओं की अगुवाई में छात्र 6 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे थे, वहीं वांगचुक 28 जून को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।

उनके शामिल होने से इस आंदोलन को काफी सपोर्ट मिला। देश भर के छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल होने लगे। उन्होंने 23 जुलाई, 2026 की देर रात अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म की, जब उन्हें केंद्र सरकार से परीक्षा में व्यापक सुधारों के बारे में आधिकारिक लिखित आश्वासन मिला। उन्होंने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सूप पीकर अपना अनशन तोड़ा। वांगचुक का वजन लगभग 11 किलो कम हो गया। उनकी भूख हड़ताल बेकार नहीं गई, क्योंकि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य मांग 25 जुलाई को पूरी हो गई।

झारखंड में छात्रों का विरोध प्रदर्शन

25 जुलाई से हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। विभिन्न सरकारी परीक्षाओं विशेष रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन जवाबदेही, पारदर्शी भर्ती और शिक्षा सुधारों की मांग करते हुए पूरे राज्य में फैल गया है, जिसका केंद्र रांची है।

इसकी शुरुआत JPSC सिविल सेवा परीक्षा में OMR शीट के साथ छेड़छाड़ और पेपर लीक की खबरों के बाद हुई। झारखंड में छात्र राज्य में परीक्षा से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं को लेकर नाराज हैं। वे 2024 झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और हाई कोर्ट के दखल के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित करने के फ़ैसले पर जवाब मांग रहे हैं।

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इस साल की शुरुआत में झारखंड आबकारी कांस्टेबल प्रतियोगी परीक्षा (JECCE) में लीक हुए पेपर सेट को याद करने के लिए प्रति व्यक्ति ₹15 लाख तक का भुगतान करते हुए पकड़े जाने के बाद 159 उम्मीदवारों और रैकेट के 5 सरगनाओं को अरेस्ट किया गया था। इसके अलावा, कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में JAC क्लास 10 बोर्ड परीक्षा (2025) के साइंस और हिंदी के पेपर भी परीक्षा से पहले या एग्जाम के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हो ग। इसके कारण परीक्षाएं रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी।

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Dubai Blast: जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में 20 मिनट में 7 धमाके, आसमान में उठा धुएं का गुबार, देखें वीडियो

Dubai Blast: दुबई के जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया में बुधवार सुबह धमाकों की खबर से हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर सामने आए कई वीडियो में आसमान में घना धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमीराती अधिकारियों ने बताया कि 20 मिनट के अंदर कम से कम सात धमाके हुए। हालांकि, इस घटना की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

बता दें कि ये धमाके दक्षिणी दुबई में जेबेल अली पोर्ट और इंडस्ट्रियल एरिया के पास हुए, जो संयुक्त अरब अमीरात में लॉजिस्टिक्स और ईंधन का एक अहम केंद्र है। हालांकि, अधिकारियों ने हताहतों या नुकसान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धमाकों और उसके बाद लगी आग के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे थे। इसके बाद अमीराती अधिकारियों ने घटना की रिकॉर्डिंग करने वाले दो लोगों को हिरासत में लिया।

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि ये धमाके यमन से दागी गई मिसाइल के हमले के कारण हुए, जबकि अमीराती मीडिया ने पुष्टि की कि कई धमाकों की आवाज सुनी गई थी, लेकिन कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया।

इस बीच, स्थानीय मीडिया के अनुसार, NASA की थर्मल इमेजिंग में जेबेल अली पोर्ट के पास एक गोदाम में आग लगने का पता चला है। यह इलाका ईंधन जमा करने और उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजने के काम आता है। इससे धमाकों के बाद लगी बड़ी आग की खबरों को और बल मिला है।

लगभग उसी समय, यमन की राजधानी सना में भी धमाकों की खबरें आईं। कुछ खबरों में इन आवाजों को हवाई हमलों का नतीजा बताया गया, जबकि अन्य में कहा गया कि यमन के इलाके से मिसाइलें दागी गई थीं, जिससे घटनाओं के क्रम को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई।

कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि यमन के हूथी विद्रोहियों ने जेबेल अली इंडस्ट्रियल एरिया को निशाना बनाया हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों ने इलाके में कई जगह आग, आसमान तक उठते धुएं के गुबार और लगातार हो रहे धमाकों की जानकारी दी है।

हालांकि, इस घटना की जिम्मेदारी को लेकर अमीराती अधिकारियों या हूतियों की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि यह घटनाक्रम ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच सामने आया है, जिससे रणनीतिक रूप से अहम खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट बना हुआ है और टकराव जारी है।

वहीं, UAE के अधिकारियों ने अभी तक धमाकों की वजह के बारे में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है और न ही इस बात की पुष्टि की है कि यह घटना किसी हमले का नतीजा थी।

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AI की मदद से भरा ITR, फिर आया इनकम टैक्स नोटिस! CA की पोस्ट ने मचाई हलचल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सोशल मीडिया पोस्ट ने नई चर्चा शुरू कर दी है। पोस्ट में दावा किया गया कि एक व्यक्ति ने AI की मदद से अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल किया, लेकिन बाद में उसे इनकम टैक्स विभाग की ओर से नोटिस मिल गया।

X यूजर और चार्टर्ड अकाउंटेंट बताए जा रहे @carajendra89 ने इस मामले को शेयर करते हुए लिखा, “AI से ITR फाइल करने के नतीजे आने शुरू हो गए हैं।” हालांकि, इस बातचीत में कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

ITR नोटिस मिलने के बाद मांगी टैक्स एक्सपर्ट की मदद

वायरल पोस्ट में एक बातचीत का स्क्रीनशॉट शेयर किया गया था, जिसमें एक व्यक्ति टैक्स नोटिस मिलने के बाद विशेषज्ञ की मदद मांग रहा था। उस मैसेज में लिखा था कि उसने AI की सहायता से अपना ITR दाखिल किया था और अब उसे इनकम टैक्स नोटिस मिला है। वह इस मामले को समझने और समाधान के लिए किसी टैक्स एक्सपर्ट से जुड़ना चाहता था।

इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल उठने लगा कि क्या टैक्स जैसे महत्वपूर्ण मामलों में पूरी तरह AI पर भरोसा करना सही है?

लोगों ने AI के इस्तेमाल पर दी अलग-अलग राय

पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो गुटों में बंट गए। कुछ लोगों ने कहा कि AI एक उपयोगी टूल है, लेकिन इसका इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए। एक यूजर ने सलाह दी कि लोगों को समझना होगा कि AI का इस्तेमाल कहां करना चाहिए और कहां नहीं। खासकर ITR जैसे वित्तीय मामलों में पूरी तरह AI पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।

कुछ लोगों ने कहा- आसान ITR के लिए AI काफी है

वहीं, कई यूजर्स ने AI का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि सामान्य टैक्स मामलों में AI काफी मददगार साबित हो सकता है। एक यूजर ने बताया कि व्यक्तिगत ITR-1 और ITR-2 जैसे रिटर्न उन्होंने AI की मदद से सफलतापूर्वक फाइल किए हैं। उनके मुताबिक, AI की सहायता से न सिर्फ काम आसान हुआ बल्कि टैक्स प्रक्रिया को समझने का मौका भी मिला।

क्या AI भविष्य में CA की जगह ले सकता है?

कुछ लोगों ने इस बहस को भविष्य की टैक्स व्यवस्था से जोड़ दिया। एक यूजर ने कहा कि आने वाले समय में AI कई ऐसे काम कर सकता है, जिन्हें आज टैक्स प्रोफेशनल संभालते हैं। हालांकि, कई लोगों का मानना था कि AI जानकारी देने और प्रक्रिया आसान बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन जटिल टैक्स मामलों में विशेषज्ञ की सलाह अभी भी जरूरी हो सकती है।

CA ने बताया- युवाओं को सावधान रहने की जरूरत

कुछ टैक्स प्रोफेशनल्स का कहना था कि ऐसे मामलों को सामने लाना जरूरी है, ताकि खासकर युवा और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग सावधानी बरतें। एक यूजर ने कहा कि सिर्फ तकनीक की जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि हर वित्तीय काम बिना विशेषज्ञ सलाह के किया जा सकता है। टैक्स नियमों की बारीकियां समझना भी उतना ही जरूरी है।

एक ही AI से गलती भी सुधारी जा सकती है

वहीं, कुछ लोगों ने यह तर्क भी दिया कि अगर AI की मदद से कोई गलती हुई है तो उसी तकनीक की मदद से उसे ठीक भी किया जा सकता है। एक यूजर ने सुझाव दिया कि AI का इस्तेमाल रिटर्न में सुधार करने और सही तरीके से दोबारा सबमिट करने के लिए किया जा सकता है।

AI बनाम एक्सपर्ट की बहस फिर तेज

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या AI टैक्स जैसे संवेदनशील कामों के लिए पर्याप्त है या फिर विशेषज्ञों की जरूरत बनी रहेगी। जहां एक तरफ लोग AI को समय बचाने वाला और आसान विकल्प मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग वित्तीय मामलों में सावधानी और विशेषज्ञ सलाह को जरूरी बता रहे हैं।

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