VIDEO: भारत में 30% और स्वीडन में 35% टैक्स देकर क्या मिलता है? युवती ने वीडियो में बताया दोनों देशों में क्या-क्या मिलती है सरकार सुविधा

स्वीडन में रहने वाली भारतीय मूल की एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। भारतीय मूल के एक एचआर प्रोफेशनल ने वहां के टैक्स सिस्टम और लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं की तुलना भारत से की है। वीडियो में उसने बताया कि, वहां लोग 30 से 35 प्रतिशत तक टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त शिक्षा और कई दूसरी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद भारत और स्वीडन के टैक्स सिस्टम और सरकारी सुविधाओं को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई है।

एचआर प्रोफेशनल और डिजिटल क्रिएटर कृतिका साकोरिया हाल ही में स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर में रहने गई हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि वहां 30 से 35 प्रतिशत तक इनकम टैक्स देना पड़ता है। इसके बदले लोगों को इतनी अच्छी सरकारी सुविधाएं मिलती हैं।

सरकार कैसे कर रहे पैसों का इस्तेमाल

वीडियो में कृतिका ने लिखा, “30 प्रतिशत टैक्स देना पहली नजर में बहुत ज्यादा लगता है, लेकिन जब आपको रोजमर्रा की जिंदगी में मिलने वाली सुविधाएं दिखाई देती हैं, तब इसकी अहमियत समझ आती है।” उन्होंने अपने वीडियो के कैप्शन में लिखा कि टैक्स को सिर्फ उसकी दर से नहीं, बल्कि उसके बदले मिलने वाली सरकारी सुविधाओं के आधार पर भी देखा जाना चाहिए। इस वीडियो पर उन्होंने लिखा, ‘भारत में 30% टैक्स देने के बाद’ वहीं कुछ देर बाद लिखा, स्वीडन में 35% टैक्स देने के बाद’।

कृतिका ने कहा, “हर देश की अपनी व्यवस्था होती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि टैक्स के बदले लोगों को क्या मिलता है? टैक्स सिर्फ पैसे देने का नाम नहीं है, बल्कि यह भी मायने रखता है कि सरकार उन पैसों का इस्तेमाल समाज के लिए किस तरह करती है।”

 

क्या-क्या मिलती है सुविधाएं

कृतिका ने अपनी पोस्ट में लिखा, “स्वीडन में टैक्स देने के बाद मुझे ऐसी कई सुविधाएं मिलती हैं, जो मेरी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर और आसान बनाती हैं।” कमेंट सेक्शन में लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कृतिका ने बताया कि स्वीडन में टैक्स देने वालों को कई तरह की सुविधाएं मिलती हैं। इनमें कम खर्च में स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त शिक्षा, माता-पिता के लिए सवेतन अवकाश, सामाजिक सुरक्षा, बच्चों के लिए आर्थिक सहायता, साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थान, बेहतर सड़कें और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वहां लोगों को काम और निजी जीवन के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखने का अवसर मिलता है।

लोगों ने किया कमेंट

इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत के टैक्स सिस्टम और सरकारी सुविधाओं को लेकर जमकर अपनी राय दी। कई यूजर्स ने कृतिका की बात से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “कुछ लोग भारत की मौजूदा व्यवस्था का बचाव करने में लगे रहते हैं, लेकिन जब तक कमियां स्वीकार नहीं की जाएंगी, बदलाव संभव नहीं है।” एक यूजर ने लिखा, “अगर वहां बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, तो वहीं रहो और वापस मत आना।” वहीं एक और यूजर ने लिखा, “सिर्फ 30 प्रतिशत नहीं, जीएसटी, सेस और दूसरे टैक्स जोड़ने के बाद लोगों पर टैक्स का बोझ और बढ़ जाता है।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “आयकर के अलावा कैपिटल गेन टैक्स, कारों पर टैक्स और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स भी देना पड़ता है।” सोशल मीडिया पर लोगों ने कई तरह से कमेंट किए हैं।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

दतिया उपचुनाव में सीट बचाने में सफल रही कांग्रेस, भितरघात ने बीजेपी का हार की लिखी पटकथा

प्रतिष्ठा की लड़ाई वाले दतिया उपचुनाव में कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई है। उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6016 वोटों से हरा दिया है। अगर 2023 के विधानसभा चुनाव की बात करें तब कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने बीजेपी उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से चुनाव हराया था। ऐसे में भाजपा ने पिछले चुनाव की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया वहीं इस बार उपचुनाव में बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा को जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया था लेकिन पार्टी को फिर भी हार का सामना करना पड़ा, हलांकि हार का अंतर जरूर कुछ कम हो गया और कांग्रेस अपनी सीट बचाने में सफल हो गई।

दतिया विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार का बड़ा कारण पार्टी में जमकर भितरघात होना रहा। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटने के बाद दतिया की सड़कों पर जिस तरह से उनके समर्थकों ने बवाल काटा, उसने उपचुनाव में बीजेपी की हार की पटकथा लिखना शुरु कर दिया था। इसके बाद बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की नामांकन रैली में जिस तरह से मंच पर नरोत्तम मिश्रा रोएं और पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने जिस तरह से टिकट कटने को लेकर पार्टी नेतृ्व्य पर इशारों ही इशारों में सवाल उठाए, उसका खामियाजा पार्टी  को चुनाव में उठाना पड़ा।

चुनाव परिणाम के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को नरोत्तम मिश्रा के पोलिंग बूथ के साथ दतिया भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह के पोलिंग बूथ पर भी कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा, यह इस बात का साफ इशारा है कि चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के खिलाफ जमकर भितरघात हुआ।

चुनाव नतीजों के बाद भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने कहा कि जो भितराघाती है और जो भाजपा को मां कहते है और फिर ऐसा मजाक करते है, उनको  सोचना  चाहिए। आशुतोष तिवारी ने हार की समीक्षा करने की बात कही।

दतिया से खुलकर टिकट की दावेदारी करने वाले नरोत्तम मिश्रा के रोने का वीडियो जिस तरह से वोटिंग के ठीक पहले सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के द्वारा वायरल किया गया और चुनाव में ‘बीजेपी को सबक सिखाने’ और ‘दादा के आंसुओं का बदला लेने’ के कमेंट किए गए उसने चुनाव में बीजेपी को हराने का काम किया।  

दतिया में पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के साथ बीजेपी के जिला पदाधिकारी अलग-थलग दिखाई पड़े और उन्होंने एक तरह से पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के विरोध में काम किया और अपने घर बैठ गए। दतिया बीजेपी जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारी के साथ बीजेपी के पार्षद एक तरह से पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नदारद रहे। दतिया के शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की निष्क्रियता और अंदरूनी असंतोष की चर्चा लगातार होती रही। जिसका असर मतदान पर भी पड़ा और 2023 के तुलना में करीब 9 फीसदी कम मतदान हुआ।

वहीं चुनावी नतीजों में जिस तरह बीजेपी को शहर की पोलिंग बूथ पर हार का सामना करना पड़ा इससे साफ है कि व्यापारियों  और शहर में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने आशुतोष तिवारी की जगह कांग्रेस के लिए मतदान किया और शहर में कांग्रेस प्रत्याशी धनश्याम सिंह को ऐसी लीड मिली जिसको अंत में बसई में अच्छा प्रदर्शन करके भी बीजेपी नहीं पाट पाई।

राजनीतिक विश्लेषक इस बात को साफ तौर पर मानते है कि दतिया विधानसभा चुनाव के परिणाम जिस तरह से आए वह पार्टी के लिए आत्मचिंतन का विषय है। अगर बीजेपी समय रहते भितरघात पर काबू कर लेती और तो नतीजे बीजेपी के पक्ष में बेहतर हो सकते थे। बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी जिस तरह से चुनाव में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाह का बूथ हार गए, उसके एक नहीं कई सियासी मायने है। दतिया में भाजपा की हार सिर्फ पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी की हार नहीं बल्कि जिला भाजपा भाजपा संगठन के भितरघात का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है।

इसके साथ दतिया उपचुनाव के नतीजे यह भी बताते है कि बीजेपी को शहर में हार का सामना करना पड़ा, जबकि शहरी वोटर्स बीजेपी का कोर वोटर्स माना जाता है, ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है। जबकि ग्रामीण इलाकों में बीजेपी ने बेहतर प्रदर्शन किया और उन पोलिंग बूथ पर बीजपी को जीत हासिल हई जो वह लगातार हारती आ रही थी। इसके साथ ही बसई मंडल जहां पर भाजपा पिछला चुनाव हार गई थी वहां पर इस पर 3 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की। गौरतलब है कि बसई में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभा हुई थी और अब चुनाव नतीजे बताते है कि बसई ने भाजपा का साथ दिया। 

Viral Video: गुरुग्राम में अकेले रहने का क्या है खर्च? 15000 किराया, 6800 राशन, 21 साल की चाहत का मंथली बजट वायरल

मेट्रो शहरों में अकेले रहना सुनने में जितना आसान और मजेदार लगता है, महीने के अंत में आने वाले बिल अक्सर होश भी उड़ा देते हैं। किराए से लेकर बिजली बिल, राशन, आवाजाही और लाइफस्टाइल के खर्चों को संभालते-संभालते अक्सर यंग प्रोफेश्नल्स यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि एक महीने का कितना खर्च वाजिब है? ऐसे में गुरुग्राम जैसे महंगे शहरों में बढ़ती लिविंग कॉस्ट के बीच एक 21 साल की युवती ने सोशल मीडिया पर अपना मंथली बजट शेयर किया है। चाहत यादव नाम की इस लड़की का जुलाई महीने का बजट बता रहा है कि उन्होंने इस महीने कुल 43096 रुपये खर्च किए।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया खर्चों का पूरा ब्रेकडाउन

चाहत यादव ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में चाहत ने महीने का पूरा बजट बताने की बताया एक-एक खर्चे का डिटेल में ब्रेकडाउन ही दे दिया। सबसे बड़ा खर्च मकान का किराया रहा। गुरुग्राम में एक फुली फर्निश्ड 1RK अपार्टमेंट के लिए चाहत ने महीने के 15000 रुपये दिए। बजट का दूसरा बड़ा हिस्सा खरीदारी में गया जिस पर 12805 रुपये खर्च हुए। ग्रॉसरी, ऑनलाइन फूड ऑर्डर और रोज की जरूरतों की चीजों पर 6879 रुपये खर्च हुए। स्कूटी के फ्यूल और रिपेयरिंग पर जुलाई में 2142 रुपये लगे।

 

महीने का बिजली बिल 2000 रुपये आया। चाहत ने जिम और दूसरी सर्विस मेंबरशिप के लिए 1800 रुपये का पेमेंट किया। इसके अलावा दोस्तों के साथ बाहर जाने और आउटिंग्स पर 2470 रुपये खर्च हुए। इन सभी खर्चों को जोड़कर जुलाई महीने का कुल खर्च 43096 रुपये बैठता है। चाहत ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में यह भी स्पष्ट किया कि इसमें उनका इन्वेस्टमेंट शामिल नहीं है। वीडियो के अंत में उसने अपने फॉलोअर्स से सवाल पूछा कि क्या मुझे इस खर्च को लेकर चिंतित होना चाहिए, या यह ठीक है?

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस: लोगों ने दिए तरह-तरह के रिएक्शन

चाहत के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की तरफ से ढेरों प्रतिक्रियाएं आईं। कई लोगों ने कहा कि गुरुग्राम जैसे शहर में अकेले रहने पर इतना खर्च होना बेहद सामान्य बात है। एक यूजर ने लिखा कि चिंता की कोई बात नहीं है, अगर आप कमा रहे हैं और अकेले रह रहे हैं तो यह काफी नॉर्मल है। दूसरे यूजर ने कहा कि यहां 40-50 हजार खर्च होना आम बात है, कोई चिंता की बात नहीं।

एक दूसरे यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा कि इस रील को देखने के बाद मुझे बेंगलुरु ज्यादा सस्ता लग रहा है। एक यूजर ने कमेंट किया कि यह बिल्कुल सच है और यह तो केवल बेसिक लाइफस्टाइल का खर्च है। अगर आप वीकेंड पार्टियां करते हैं या घूमते हैं, तो खर्च और ज्यादा होगा। गुरुग्राम में अकेले रहना काफी महंगा है।

हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी ध्यान दिलाया कि व्यक्तिगत लाइफस्टाइल के विकल्पों के आधार पर मासिक खर्च में बड़ा अंतर आ सकता है। बार-बार बाहर जाने, यात्रा करने, खरीदारी और प्रीमियम सेवाओं का इस्तेमाल करने से कुल बजट तेजी से बढ़ सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

VIDEO: काजू कतली में निकला जंग लगा पिन! 3 साल की बच्ची को खिलाने से पहले खुली बड़ी लापरवाही

Viral Video: मुंबई में एक व्यक्ति के साथ मिठाई खरीदने के बाद एक चौंकाने वाली घटना हुई है। व्यक्ति ने मुंबई के एक दुकान से काजू कतली खरीदी थी। दुकान से खरीदी गई काजू कतली के अंदर एक जंग लगा हुआ मेटल पिन मिला। व्यक्ति के अनुसार, वह ये मिठाई अपनी तीन साल की बेटी को देने ही वाला था, तभी उसकी नजर उस पिन पर पड़ गई। इसके बाद उसने पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इंस्टाग्राम पर प्रणय पलव ने इस घटना से जुड़ी कई पोस्ट शेयर कीं। अपनी पहली पोस्ट में उन्होंने बताया कि, 29 जुलाई की शाम उन्होंने तिवारी ब्रदर्स से 500-500 ग्राम काजू कतली और मोतीचूर के लड्डू खरीदे थे।

किस्मत अच्छी थी की पिन देख लिया

पोस्ट में उन्होंने लिखा, “जब मैं अपनी 3 साल की बेटी को मिठाई खिलाने वाला था, तभी मुझे कुछ अजीब दिखाई दिया। ध्यान से देखने पर पता चला कि काजू कतली के एक टुकड़े के अंदर जंग लगा हुआ मेटल पिन फंसा हुआ था।” इसके बाद उन्होंने दुकान की सुरक्षा और साफ-सफाई के मानकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “ये सिर्फ किस्मत थी कि मैंने मिठाई खाने से पहले ही उस पिन को देख लिया। अगर ऐसा नहीं होता, तो इसका अंजाम बहुत गंभीर हो सकता था।”

 

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की घटना दुकान के गुणवत्ता और साफ-सफाई के मानकों पर सवाल खड़े करती है। उनके मुताबिक, “ग्राहक इस भरोसे के साथ मिठाइयां खरीदते हैं कि उन्हें सुरक्षित और साफ तरीके से तैयार किया गया है, खासकर जब उन्हें परिवार और छोटे बच्चों को खिलाना हो।”

खराब स्थिती में था किचन

प्रणय ने सोशल मीडिया पर कुछ और वीडियो भी शेयर किए, जिनमें वह मिठाई की दुकान के कर्मचारियों से इस मामले पर बात करते नजर आए। एक वीडियो में उन्होंने काजू कतली का डिब्बा खुलवाया और मिठाई के अंदर से मेटल पिन निकालकर दिखाया। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों से खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर सवाल किए। वीडियो में उन्होंने दुकान के किचन की स्थिति भी दिखाई और आरोप लगाया कि वहां सफाई के उचित इंतजाम नहीं थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि किचन के अंदर ही वॉशरूम बना हुआ था।

 

यूजर्स ने किया कमेंट

इस घटना के बाद एक बार फिर राज्य में रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों में खाद्य सुरक्षा, साफ-सफाई और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। इस मामले पर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। एक यूजर ने लिखा, “हे भगवान! मिठाई तो ठीक है, लेकिन किचन की हालत और उसमें मिला स्टेपलर पिन देखकर लगता है कि घर पर ही मिठाई बनाना ज्यादा सुरक्षित है।” एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “यकीन नहीं हो रहा कि इतनी कीमत चुकाने के बाद भी ऐसी साफ-सफाई देखने को मिल रही है। तिवारी से ऐसी उम्मीद नहीं थी।”

एक अन्य यूजर ने कहा, “हम अच्छे खाने की उम्मीद में रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानों पर जाते हैं, लेकिन अंदर किचन में क्या हो रहा है, इसकी हमें कोई जानकारी नहीं होती।”

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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विदेश में पढ़ाई के खर्चे पर अभिजीत दीपके ने बताया सच, कहा अब लोन चुकाना है

Abhijeet Deepke

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्चे को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी बोस्टन यूनिवर्सिटी में एमएस (पब्लिक रिलेशंस) की डिग्री स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से पूरी हुई। उन्होंने स्कॉलरशिप दस्तावेज भी सार्वजनिक रूप से दिखाने की पेशकश की है।

अभिजीत दीपके ने पत्रकार बरखा दत्त को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं बोस्टन यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप प्राप्त की थी और बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया था, जिसे मुझे अभी चुकाना है।” उन्होंने डीन स्कॉलरशिप का दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें प्रति सेमेस्टर 12,500 डॉलर की स्कॉलरशिप दी, जो तीन सेमेस्टर के लिए कुल 37,500 डॉलर (लगभग 30 लाख रुपये से अधिक) बनी।
 
विवाद की शुरुआत : विवाद तब शुरू हुआ जब सूरत के आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने अभिजीत दीपके के पिता भगवानराव दीपके (महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर) की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग की। तिवारी ने सवाल उठाया कि मासिक वेतन लगभग 60-65 हजार रुपए वाले रिटायर्ड कर्मचारी ने अमेरिका जैसी महंगी पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया। उन्होंने चुनाव आयोग, इनकम टैक्स विभाग और महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर जांच की अपील की थी।

अभिजीत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि वे अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर चुनौती दी, “मैं अपना स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन लेटर दिखाने को तैयार हूं। क्या सम्राट अपना डिग्री दिखाएंगे?” कितना खर्च आया पढ़ाई पर? अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के मास्टर कोर्स पर ट्यूशन फीस, रहन-सहन, स्वास्थ्य बीमा आदि मिलाकर कुल खर्च 30 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है। अभिजीत की स्कॉलरशिप ने काफी हिस्सा कवर किया, जबकि बाकी लोन से पूरा हुआ। उनके पिता ने पहले भी लोन लेकर बेटे को पढ़ाने की बात कही थी।

CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल : अभिजीत दीपके ने पुणे से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद वे अमेरिका गए और हाल ही में जून 2026 में भारत लौटकर बड़े प्रदर्शन आंदोलन का नेतृत्व किया। CJP की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं, जिस पर उन्होंने क्राउडफंडिंग और पूर्ण पारदर्शिता का वादा किया है।यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग दीपके के जवाब और RTI कार्यकर्ता के सवालों पर अपनी राय रख रहे हैं। अभिजीत दीपके की स्पष्टता ने कई सवालों के जवाब दिए हैं, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। अभिजीत दीपके ने बयान दिया है कि पढ़ाई का खर्च स्कॉलरशिप और लोन से हुआ। अब लोन चुकाना है।

बता दें कि अभिजीत दीपके कॉकरोच पार्टी बनाकर चर्चा में आए थे। पार्टी बनाने के बाद उन्‍होंने दिल्‍ली के जंतर मंतर में प्रोटेस्‍ट किया। बाद में ये प्रोटेस्‍ट जेंनजी प्रोटेस्‍ट बन गया। जिसका असर यह हुआ कि नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफा देना पडा। 

‘IIT सिर्फ एक टैग है…’, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले सालाना 95 लाख की कमाई करने का किया दावा, सैलरी का स्क्रीनशॉट वायरल

भारत में IIT की डिग्री को लंबे समय से सबसे कीमती एकेडमिक क्वालिफिकेशन में से एक माना जाता रहा है। हालांकि, इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले एक व्यक्ति की वायरल पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि कॉलेज पूरा किए बिना ही वे सालाना 95 लाख रुपये से ज़्यादा कमाते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या अब बड़े एजुकेशनल टैग के बजाय स्किल्स और अनुभव ज़्यादा मायने रखते हैं।

यह बहस तब शुरू हुई जब ग्रोथ मार्केटर लावण्या जैन ने दावा किया कि वे सालाना 1,00,000 डॉलर (लगभग 95 लाख रुपये) से ज़्यादा कमाते हैं, जबकि उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री कभी पूरी नहीं की। अपने दावे को साबित करने के लिए, जैन ने कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए। इनमें 3.74 लाख रुपये और 1.12 लाख रुपये की सैलरी क्रेडिट होती दिख रही थी, यानी उनके अकाउंट में कुल मिलाकर लगभग 4.86 लाख रुपये जमा हुए थे।

जैन के अनुसार, उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपना बैचलर ऑफ़ टेक्नोलॉजी (BTech) प्रोग्राम आखिरी सेमेस्टर के दौरान छोड़ दिया था। इस फ़ैसले को वे अब अपनी ज़िंदगी के सबसे अच्छे फ़ैसलों में से एक मानते हैं।

उन्होंने लिखा, “मैं IIT से भी नहीं हूं। असल में, मैंने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन्स इंजीनियरिंग में अपनी B.Tech की पढ़ाई आखिरी सेमेस्टर में ही छोड़ दी थी। मुझे लगता है कि यह मेरी ज़िंदगी के सबसे अच्छे फैसलों में से एक था।” जैन ने आगे कहा कि वे अभी एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर सिर्फ़ पार्ट-टाइम काम करके अपने पुराने कॉलेज के सबसे ज़्यादा प्लेसमेंट पैकेज से भी ज़्यादा कमा रहे हैं।

उन्होंने कहा, “मैं अपने कॉलेज के सबसे ज़्यादा प्लेसमेंट पैकेज (100k USD) से भी ज़्यादा कमा रहा हूं, और वह भी एक कॉन्ट्रैक्टर के तौर पर पार्ट-टाइम काम करके।” अपनी मुख्य कमाई के अलावा, जैन ने यह भी बताया कि उन्होंने कई पैसिव इनकम के ज़रीये बनाए हैं जो उनकी कुल कमाई को काफ़ी बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, “मेरे पास पैसिव इनकम के 5 ज़रीये हैं, और मेरी मुख्य कमाई मेरे सभी खर्चों को पूरा करती है (और वैसे, मैं काफ़ी खर्च करता हूं)।”

उनके लिंक्डइन प्रोफ़ाइल पर मौजूद जानकारी के अनुसार, जैन ने Runable, Kairos Computer और Fold जैसे स्टार्टअप्स में ग्रोथ मार्केटिंग और गो-टू-मार्केट (GTM) भूमिकाओं में काम किया है। उनके करियर का सफ़र स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक बड़े ट्रेंड को दिखाता है, जहां कई एम्प्लॉयर अब सिर्फ़ एकेडमिक डिग्री के बजाय स्किल्स, काम करने के तरीके और मापने योग्य बिज़नेस इम्पैक्ट को ज़्यादा अहमियत दे रहे हैं।

अपनी कमाई के बारे में बताने के बावजूद, जैन ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी पोस्ट का मकसद अपनी आर्थिक सफलता का दिखावा करना नहीं था। इसके बजाय, उन्होंने कहा कि इसका मकसद उस आम धारणा को चुनौती देना था कि सिर्फ़ IIT की डिग्री ही करियर में सफलता की गारंटी देती है।

सांप को जैन साध्‍वियों ने सुनाया णमोकार मंत्र, कहा— मुक्‍त हो जाओ, अब किसी को मत डसना’, फन फैलाकर बैठे रहे नागराज

Jain Sadhvis

ललितपुर में रविवार सुबह से एक अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दिगंबर जैन आर्यिका एक ब्लैक कोबरा के सामने नमोकार मंत्र का जाप करती दिख रही हैं। लगभग तीन मिनट तक नागराज भी फन फैलाकर शांत मुद्रा में उनके सामने बैठे रहे और मंत्र सुनते रहे।

साथ में मौजूद शिष्य ने अपने मोबाइल फोन में पूरे वाकिया को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। पूरा किस्सा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पूरी घटना मड़ावरा तहसील क्षेत्र स्थित अतिशय क्षेत्र गिरार की है।

सड़क पर बैठे इस जहरीले सांप को देखकर जैन साध्वियों रुक गई और उसके समझाने लगी। इस दौरान साध्वियों ने कहा कि हम तुम्हें णमोकार मंत्र सुनाते हैं। इस सुनने के बाद अब किसी को डंसना नहीं। बहुत लंबी यात्रा कर लिए अब किसी को परेशान नहीं करना। इस दौरान एक साध्वी सर्प के नजदीक बैठ गई और उसे समझाने लगी।

शांति से मंत्र सुनता रहे नागराज : जैन साध्वी जब इस मंत्र को सुना रहीं थी उस दौरान सर्प फन फैलाकर पूरे मंत्र को सुनता रहा। साध्वियों का मंत्र सुनने के बाद सांप शांत हो गया। इस दौरान साध्वी ने कहा कि हम तुम्हे मार नहीं रहे हैं। बल्कि आशीर्वाद दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो को देखकर लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं।

शिष्य ने वीडियो किया रिकॉर्ड : सांप को देखने के बाद मौके पर साध्वियां वहीं रुक गईं। आर्यिका मां विदुषश्री माताजी ने शांत भाव से नमोकार मंत्र का जाप करना शुरू किया। उनके साथ में मौजूद शिष्य पंकज जैन ने पूरे घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। रिकॉर्ड करने के बाद उसने वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। 

काशी विश्वनाथ धाम में VIP दर्शन के नाम पर ठगी, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वापस दिलाए पैसे

varansi : cheating on the name of vip darshan

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषकर सावन के सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। आस्था, श्रद्धा और भक्ति के इस महासंगम के बीच कुछ असामाजिक तत्व श्रद्धालुओं की भावनाओं का फायदा उठाकर ठगी करने से भी नहीं चूक रहे हैं।

 

ऐसा ही एक मामला सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में सामने आया, जहां मैसूर से दर्शन करने आई एक महिला श्रद्धालु से आसानी के साथ वीआईपी दर्शन कराने का झांसा देकर एक ठग ने 4 हजार रुपये की ठगी कर ली। महिला ने आराम से जल्दी दर्शन मिलने की उम्मीद में रकम दे दी, लेकिन कुछ ही देर में उसे एहसास हुआ कि उसे दर्शन के नाम पर ठगा गया है।

 

भगवान के नाम पर ठगी का यह दृश्य जैसे ही ड्यूटी पर मौजूद एक पुलिसकर्मी की नजर में पहुंचा तो हड़कंप मच गया। उसने तत्काल प्रभाव से थाना सिगरा को सूचना दी। जानकारी मिलते ही इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा अपनी टीम के साथ श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे और पीड़ित महिला से पूरी जानकारी ली। इसके बाद आसपास के स्थानीय व्यापारियों और लोगों से पूछताछ की गई।

 

जांच के दौरान लोगों ने बताया कि ठगी करने वाले व्यक्ति का नाम बसंत पांडे है, जो चेतगंज क्षेत्र का निवासी है। आरोप है कि वह मैसूर से आई महिला सहित अन्य चार श्रद्धालुओं को भी शीघ्र दर्शन कराने का लालच देकर पैसे ऐंठने का प्रयास कर रहा था।

 

पुलिस टीम के पहुंचने की भनक लगते ही बसंत पांडे गेट नंबर-4 की ओर से भागने लगा, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। पुलिस की तत्परता से पीड़ित महिला के 4 हजार रुपये तत्काल ऑनलाइन वापस कराए गए, जिससे श्रद्धालु ने राहत की सांस ली।

 

आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं 

सावन के पहले सोमवार पर, जब श्री काशी विश्वनाथ धाम में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा हुआ था, तब पुलिस की इस संवेदनशील और तुरंत कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

पुलिस टीम की इस सराहनीय कार्यशैली की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। महिला श्रद्धालु को ऑनलाइन पैसे वापस दिलवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग वाराणसी पुलिस की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं। वहीं कर्नाटक (मैसूर) से आई महिला उत्तर प्रदेश राज्य की उज्ज्वल छवि को लेकर अपने प्रदेश वापस लौटेगी।

 

पुलिस-प्रशासन और मंदिर कमेटी ने श्रृद्धालुओं से अपील

पुलिस-प्रशासन और मंदिर कमेटी ने श्रृद्धालुओं से अपील की है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाला कोई भी भक्त किसी भी अनजान व्यक्ति, दलाल या तथाकथित वीआईपी दर्शन कराने का दावा करने वाले लोगों के झांसे में न आएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों या प्रशासन को दें, ताकि आस्था के इस पावन पर्व की गरिमा बनी रहे।

Kangana Ranaut: क्या कंगना रनौत ने सोनाक्षी सिन्हा पर तंज कसा? एक्ट्रेस की ‘पॉकेटमार’ वाली कमेंट ने मचाई खलबली

Kangana Ranaut: एक्टर और BJP सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा में हैं। इसकी वजह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक स्क्रीनशॉट है, जिसने ऑनलाइन काफी बहस छेड़ दी है। इस तस्वीर में कंगना को एक इंस्टाग्राम पोस्ट लाइक करते हुए दिखाया गया है, जिसमें हालिया विरोध प्रदर्शनों पर एक अज्ञात एक्ट्रेस के ओवररिएक्ट करने की आलोचना की गई थी। हालांकि, ‘क्वीन’ फिल्म की एक्ट्रेस ने इस पोस्ट से किसी भी तरह के जुड़ाव से साफ इनकार किया है और स्क्रीनशॉट को मनगढ़ंत बताया है।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह स्क्रीनशॉट फैला। कई लोगों का दावा था कि कंगना ने उस पोस्ट को सपोर्ट किया है, जिसमें एक एक्ट्रेस पर निशाना साधा गया था—आरोप था कि वह एक विरोध प्रदर्शन के दौरान तो बोलती है, लेकिन दूसरे पर चुप रहती है।

कंगना ने तुरंत स्थिति साफ करते हुए कहा कि वह तथाकथित “लाइक” उनके अकाउंट से कभी नहीं किया गया था। एक्ट्रेस ने क्रिप्टिक अंदाज़ में अपनी बात साफ़ की। वायरल हो रहे दावे को खारिज करते हुए, कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर कड़े शब्दों में एक मैसेज भी पोस्ट किया। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी बातों से जल्द ही नई अटकलें शुरू हो गईं।

कंगना ने अपने नोट में लिखा कि वह किसी को भी ‘बॉडी-शेम’ करने में यकीन नहीं रखतीं, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने “एक एक्ट्रेस” को देखा है, जिसके स्टाइल और पब्लिक अपीयरेंस में ज़बरदस्त बदलाव आया है। उन्होंने उस एक्ट्रेस का नाम लिए बिना कहा कि वह अब “जेबकतरे की तरह कपड़े पहनती और बात करती है” और हाल के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान “गटरछाप व्यवहार” को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया।

कंगना ने आगे कहा कि एक्ट्रेस के फ़ैशन से उनके पर्सनल रिश्ते की हालत का पता चलता है और ऐसा लगता है कि उनमें पहले जैसी ग्रेस (अदा) नहीं रही। अपनी बात को व्यंग्य के साथ खत्म करते हुए, कंगना ने ज़रूरत पड़ने पर उनकी स्टाइलिंग में मदद करने की पेशकश भी की। इतनी तीखी बातें कहने के बावजूद, कंगना ने उस व्यक्ति का नाम नहीं बताया जिसके बारे में वह बात कर रही थीं।

हालांकि इंस्टाग्राम स्टोरी में किसी का नाम नहीं लिया गया था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को यह अंदाज़ा लगाने में ज़्यादा समय नहीं लगा कि यह किसके बारे में कहा गया है। इंटरनेट पर कुछ लोगों ने कंगना की बातों को एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा से जोड़ा; कई यूज़र्स का कहना था कि कंगना का बताया हुलिया सोनाक्षी के हालिया पब्लिक अपीयरेंस से मेल खाता है। हालाँकि, ये सिर्फ़ सोशल मीडिया के अंदाज़े हैं और कंगना ने खुद इस बात की न तो पुष्टि की है और न ही इससे इनकार किया है कि उनकी बातें सोनाक्षी के बारे में थीं।

इसी तरह, सोनाक्षी ने वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट, कंगना की सफाई या पोस्ट को लेकर हो रही अटकलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक्ट्रेस की पहचान के बारे में कोई पुष्टि नहीं। फिलहाल, यह चर्चा मुख्य रूप से ऑनलाइन अटकलों तक ही सीमित है। हालांकि कंगना ने साफ तौर पर ओरिजिनल इंस्टाग्राम पोस्ट को लाइक करने से इनकार किया है, लेकिन उनके बाद के बयान ने बहस की एक नई लहर पैदा कर दी है, और यूज़र्स इसके अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं।

चूंकि न तो कंगना और न ही सोनाक्षी ने सीधे तौर पर उन अटकलों पर बात की है जिनमें दोनों को जोड़ा जा रहा है, इसलिए इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि एक्टर का वह रहस्यमयी मैसेज किसके लिए था। हालांकि, सोशल मीडिया पर यह बातचीत ज़ोर पकड़ रही है, जहां फैंस और आलोचक कंगना की पोस्ट की हर लाइन का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं।

घर ढूंढ़ने निकला शख्स रह गया हैरान, गुरुग्राम में 3BHK का किराया जान उड़ जाएंगे होश

गुरुग्राम में घर किराए पर लेना अब पहले जितना आसान या किफायती नहीं रह गया है। शहर के कई इलाकों में किराए लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए मनपसंद बजट में घर ढूंढ़ना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। हाल ही में इसी मुद्दे ने तब लोगों का ध्यान खींचा, जब एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर अपना अनुभव साझा किया। घर की तलाश के दौरान उसे बार-बार एक ही सलाह मिली बजट बढ़ाइए। इसके बाद उसने सवाल उठाया कि क्या अब शहर में महंगा किराया ही नई सामान्य स्थिति बन चुका है। उसकी पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और सैकड़ों लोगों ने अपने अनुभव साझा किए।

किसी ने बढ़ते किराए को जिम्मेदार ठहराया तो किसी ने ब्रोकरों के रवैये पर सवाल उठाए। यह चर्चा अब सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी नहीं, बल्कि गुरुग्राम में तेजी से बदलते रेंटल मार्केट और बढ़ती महंगाई पर बड़ी बहस का रूप ले चुकी है।

पोस्ट ने छेड़ दी बड़ी बहस

Reddit के r/gurgaon समुदाय में शेयर की गई पोस्ट ने देखते ही देखते लोगों का ध्यान खींच लिया। कई यूजर्स ने माना कि वे भी घर खोजते समय इसी तरह के अनुभव से गुजर चुके हैं। चर्चा धीरे-धीरे केवल किराए तक सीमित नहीं रही, बल्कि गुरुग्राम में तेजी से बढ़ती महंगाई और रहने की लागत पर भी सवाल उठने लगे।

हर घर के साथ जुड़ जाता है ‘बस ₹5,000 और’

पोस्ट लिखने वाले यूजर ने बताया कि गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड पर करीब 1,700 वर्गफुट का 3BHK फ्लैट ₹50,000 से अधिक में मिल रहा है, जबकि शहर के कई प्रमुख सेक्टरों में ₹60,000 या उससे ज्यादा किराया सामान्य हो चुका है। उनका कहना था कि हर बार ब्रोकर सिर्फ इतना कहते हैं, “बस ₹5,000 और बढ़ा दीजिए।”

किराया ही नहीं, सालाना खर्च भी बढ़ रहा

यूजर ने हिसाब लगाते हुए बताया कि ₹50,000 मासिक किराए का मतलब सालभर में ₹6 लाख से ज्यादा खर्च है। यदि मेंटेनेंस, बिजली और अन्य शुल्क जोड़ दिए जाएं, तो यह रकम आसानी से ₹7 लाख के पार पहुंच जाती है। ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।

क्या सैलरी इतनी तेजी से बढ़ी है?

यूजर ने सवाल उठाया कि जब वेतन में इतनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं हुई, तो आखिर आम परिवार इतने महंगे किराए को कैसे वहन करें? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या लोग वास्तव में इतनी रकम चुका रहे हैं, या फिर मकान मालिकों और ब्रोकरों ने हर समस्या का समाधान सिर्फ “बजट बढ़ाइए” बना दिया है।

दूसरे यूजर्स ने भी साझा किए अपने अनुभव

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा कि 2BHK की तलाश में जब उसने ₹45,000 का बजट बताया, तो ब्रोकर ने साफ कह दिया कि उसकी जरूरतें और बजट मेल नहीं खाते। वहीं एक अन्य यूजर ने बताया कि ऑनलाइन कई 3BHK फ्लैट ₹90,000 से लेकर ₹1.5 लाख प्रति माह तक में सूचीबद्ध हैं।

लोगों ने सुझाए दूसरे विकल्प

कई Reddit यूजर्स ने सलाह दी कि अगर बजट सीमित है, तो गुरुग्राम के प्रीमियम इलाकों से बाहर घर तलाशना बेहतर रहेगा। कुछ लोगों ने नोएडा जैसे एनसीआर शहरों का भी सुझाव दिया, जहां समान सुविधाओं वाले फ्लैट अपेक्षाकृत कम किराए में मिल सकते हैं।

बदलती सोच या बढ़ता दबाव?

यह चर्चा सिर्फ एक व्यक्ति के घर खोजने की कहानी नहीं रही, बल्कि इसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि क्या गुरुग्राम में “अफोर्डेबल रेंट” की परिभाषा बदल चुकी है। बढ़ते किराए और स्थिर आय के बीच यह बहस अब शहर के हजारों किरायेदारों की साझा चिंता बनती दिखाई दे रही है।