Asian Market Today: एशिया बाजारों में गिरावट, AI पर खर्च को लेकर बढ़ी चिंता, निक्केई 1% टूटा,

Asian Market Today: एशियाई शेयर बाजार गिरावट के साथ खुले। इसकी वजह वॉल स्ट्रीट पर हुई बिकवाली रही। जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर खर्च में तेज़ी के लंबे समय तक बने रहने को लेकर नए शक के कारण हुई थी। शुरुआती कारोबार में MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.1% नीचे आ गया। जापान में, निक्केई (Nikkei) बाजार खुलने पर 1% से ज़्यादा गिरा, लेकिन बाद में नुकसान कम हुआ और यह 0.58% नीचे कारोबार कर रहा था, जबकि टोपिक्स (Topix) में लगभग 0.15% की गिरावट थी। हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.1% की मामूली बढ़त हुई।

दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार बंद रहने के कारण इस सत्र में शामिल नहीं हुए। कोरियाई अल्फाबेट के निर्माण की याद में मनाए जाने वाले ‘हंगुल दिवस’ के कारण कोस्पी बंद था, जबकि ताइवान अपने राष्ट्रीय दिवस के कारण बंद था।

जापानी येन 0.1% कमजोर होकर 158.06 प्रति डॉलर पर आ गया, और ऑफशोर युआन 6.7034 पर लगभग स्थिर रहा।

गुरुवार की बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों पर पड़ा। नैस्डैक 100 में 1.4% की गिरावट आई, जो सात हफ्तों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट थी, जबकि अमेरिकी चिपमेकर्स का इंडेक्स 3.4% गिर गया। S&P 500 में 0.5% की गिरावट आई। हालांकि, नुकसान सीमित रहा। S&P 500 की दो-तिहाई से ज़्यादा कंपनियों के शेयरों में बढ़त हुई, स्मॉल-कैप शेयरों में कोई खास हलचल नहीं हुई, और निवेशकों ने डिफेंसिव सेक्टर (सुरक्षित माने जाने वाले सेक्टर) का रुख किया।

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के कारण यह गिरावट आई। रिपोर्ट में कहा गया है कि OpenAI का सालाना रेवेन्यू उसके पहले बताए गए स्तर से 20 अरब डॉलर कम है, और ChatGPT बनाने वाली कंपनी लगभग 50 अरब डॉलर के रेवेन्यू की राह पर है।

गुरुवार को यूएस लेबर सचिव के अनुसार यूएस लेबर डिपॉर्टमेंट ने कई सक्रिय संघीय जांचों का हवाला देते हुए माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को अपने परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से निलंबित कर दिया। विभाग ने यह भी कहा कि वह कॉग्निजेंट, इंफोसिस, कैपजेमिनी, विप्रो, टीसीएस और एचसीएलटेक जैसी कंपनियों से नए आवेदन न तो स्वीकार करेगा और न ही उन पर कोई कार्रवाई करेगा।

आईटी इंडस्ट्री की संस्था नैसकॉम ने कहा कि भारतीय कंपनियों ने H-1B वीज़ा पर अपनी निर्भरता कम कर दी है और अमेरिका में स्थानीय स्तर पर लोगों को नौकरी पर रखने का काम लगातार बढ़ाया है। संस्था ने यह भी कहा कि बहुत कम कर्मचारी PERM प्रक्रिया के ज़रिए H-1B स्टेटस से स्थायी निवासी (परमानेंट रेजिडेंसी) बनते हैं।

गुरुवार को US ट्रेजरी बॉन्ड में तेज़ी आई, क्योंकि 30 साल के बॉन्ड की नीलामी में मज़बूत मांग के कारण लॉन्ग-टर्म बॉन्ड यील्ड (लंबे समय के बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) उन ऊंचे स्तरों से नीचे आ गई, जो दो दशकों से ज़्यादा समय में नहीं देखे गए थे। यह तेज़ी तब और बढ़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वह ईरान पर दोबारा हमला नहीं करेंगे।

इसके बावजूद, लंबे समय के डेट (कर्ज़) में महीनों से जारी बिकवाली की मुख्य वजह यह डर रहा है कि ईरान युद्ध से ऊर्जा की कीमतें और महंगाई ज़्यादा बनी रहेगी, साथ ही सरकार की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, US फेडरल रिज़र्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने कहा कि महंगाई को काबू में करने के लिए शायद ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की ज़रूरत होगी।

ट्रंप के वादे से ईरान के साथ नए टकराव का डर कम हुआ, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.5% गिरकर लगभग $103.80 प्रति बैरल पर आ गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी 0.5% की गिरावट आई और यह लगभग $91.05 पर आ गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अमेरिका ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS, विप्रो, इंफोसिस को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया, H-1B के दुरुपयोग का आरोप

ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, TCS और इंफोसिस समेत कई टेक कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने इन कंपनियों को एक इमिग्रेशन प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। प्रशासन का आरोप है कि इन कंपनियों ने वर्कर वीजा सिस्टम का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल किया।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को वॉशिंगटन में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से अमेरिका में किसी कंपनी ने इस सिस्टम का माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा गलत इस्तेमाल नहीं किया है।

Infosys, Wipro और HCL भी कार्रवाई के दायरे में

अमेरिकी श्रम सचिव Keith Sonderling ने बताया कि Microsoft के अलावा कई दूसरी टेक कंपनियों पर भी कार्रवाई हुई है। इनमें Cognizant Technology Solutions, Infosys, TCS, Wipro, HCL Technologies और Capgemini शामिल हैं।

Sonderling ने कहा कि इस मामले में कई संघीय जांच चल रही हैं। जिस प्रोग्राम पर कार्रवाई हुई है, वह अमेरिकी कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करने में मदद करता है।

ट्रंप प्रशासन क्यों सख्त हुआ?

ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इमिग्रेशन सिस्टम पर सख्ती की बात करता रहा है। अब कानूनी और गैर-कानूनी दोनों रास्तों से होने वाले प्रवासन पर कार्रवाई बढ़ाई जा रही है।

H-1B वीजा प्रोग्राम भी लंबे समय से ट्रंप के समर्थकों के निशाने पर है। उनका कहना है कि इस प्रोग्राम से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं।

ट्रंप समर्थक यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि H-1B सिस्टम में बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल होता है। इसी वजह से यह प्रोग्राम अमेरिकी इमिग्रेशन पॉलिसी की बहस में लगातार बना हुआ है।

कंपनियों के लिए क्या मतलब है?

इस फैसले से सबसे बड़ी चिंता विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में लंबे समय तक रखने की प्रक्रिया को लेकर है। ग्रीन कार्ड स्पॉन्सरिंग पर असर पड़ने से कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों की लॉन्ग टर्म प्लानिंग मुश्किल हो सकती है।

इसका असर खासकर उन भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ सकता है, जिनका अमेरिकी कारोबार बड़ा है और जो बड़ी संख्या में भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को अमेरिका में भेजती हैं। हालांकि, इस फैसले का वास्तविक वित्तीय असर कितना होगा, यह आगे होने वाली संघीय जांच और सरकार के अगले कदमों पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

TCS Q2 Results: प्रॉफिट 4% बढ़कर ₹13884 करोड़, प्रति शेयर 12 रुपये डिविडेंड का ऐलान

TCS Q2 Results: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट तिमाही दर तिमाही आधार पर 4 फीसदी बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद नतीजों का ऐलान किया। कंपनी के शेयर पर नतीजों का असर 9 अक्तूबर यानी बुधवार को दिखेगा।

सितंबर तिमाही में कॉन्स्टैंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ 0.5 फीसदी

टीसीएस के सितंबर तिमाही के नतीजे एनालिस्ट्स के अनुमान से थोड़े कमजोर रहे। कंपनी की कॉन्स्टैंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ 0.5 फीसदी रही। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने इसके 0.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। सितंबर तिमाही में 13,884 करोड़ का प्रॉफिट जून तिमाही के 13,349 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

दूसरी तिमाही में रेवेन्यू एनालिस्ट्स के अनुमान से थोड़ा कम 

लेकिन तुलना के लिए बेस तिमाही का प्रॉफिट 13,849 करोड़ रुपये है, क्योंकि इसमें वन-टाइम का 668 करोड़ रुपये का एक्सेप्शनल आइटम शामिल है, जिसकी वजह एक लीगल क्लेम का सेटलमेंट है। सितंबर तिमाही में टीसीएस का रेवेन्यू 73,188 करोड़ रुपये रहा। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने इसके 73,225 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था।

टैक्स से पहले अर्निंग्स (EBIT) 17,553 करोड़ रुपये

तिमाही दर तिमाही आधार पर सितंबर तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 1.3 फीसदी ज्यादा रही। डॉलर में कंपनी का रेवेन्यू 764.2 करोड़ डॉलर रहा। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में 765.7 करोड़ डॉलर के अनुमान के करीब है। सितंबर तिमाही में कंपनी की इंटरेस्ट और टैक्स से पहले अर्निंग्स (EBIT) 17,553 करोड़ रुपये रही। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में 17,738 करोड़ के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है।

EBIT मार्जिन 24 फीसदी पर स्थिर रहा

सितंबर तिमाही में कंपनी का EBIT मार्जिन 24 फीसदी पर स्थिर रहा। जून तिमाही में भी यह इतना ही था। सितंबर तिमाही में कंपनी को 9.6 अरब डॉलर की डील मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कंपनी का रेवेन्यू 3 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। अब कंपनी के कुल रेवेन्य में इसकी हिस्सेदारी 10 फीसदी से ज्यादा हो गई है।

पोर्शे से डील से एआई वर्टिकल को मजबूती मिलेगी

टीसीएस ने पोर्शे के साथ एक बड़ी डील की है। इसके तहत वह पोर्शे की मैनेजमेंट एंड आईटी कंसल्टिंग सब्सिडियरी MHP का 100 फीसदी अधिग्रहण करेगी। इस डील की वैल्यू 32 करोड़ यूरो होगी। पोर्शे और टीसीएस ने 1.5 अरब यूरो की एक पांच साल की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की है। इससे टीसीएस को अपने एआई वर्टिकल के विस्तार में मदद मिलेगी।

प्रति शेयर 12 रुपये डिविडेंड का ऐलान 

टीसीएस ने प्रति शेयर 12 रुपये डिविडेंड का ऐलान किया है। इसके लिए कंपनी ने रिकॉर्ड डेट 14 अक्तूबर, 2026 तय की है। कंपनी शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड का पेमेंट 30 अक्तूबर, 2026 को करेगी। 8 अक्तूबर को टीसीएस के शेयर 0.16 फीसदी गिरकर 2,077 रुपये पर बंद हुए। इस साल कंपनी का शेयर 35 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

फॉर्म-6 में हुए अवैध बदलाव, ज्ञानेश कुमार ने किया पद का दुरुपयोग : राहुल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पद का दुरुपयोग कर भारतीय जनता पार्टी की मदद की है।

श्री गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया एक्स पर कहा “अब यह स्पष्ट हो गया है कि श्री ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में अवैध और एकतरफा बदलाव किया है और यह बदलाव स्पष्ट रूप से भाजपा की मदद के लिए किया गया। यह उनके पद के दुरुपयोग का एक और प्रमाण है। इस मामले की साजिश में शामिल सभी लोगों को ‘वोट चोरी’ के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।”

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन फॉर्म-6 में अवैध बदलाव की बात चुनाव आयोग के अपने आयुक्तों ने भी दर्ज की है। उन्होंने कहा कि यह भी सामने आना चाहिए कि चुनाव आयोग में किसके आदेश पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से यह बदलाव कराया । श्री गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार और इस मामले में शामिल अन्य सभी लोगों को लोकतंत्र पर किए गए इस कथित आपराधिक प्रहार के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।

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श्री गांधी ने अपने पोस्ट में 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पष्टीकरण भी साझा किया है जिसमें कहा गया था कि एसआईआर की अवधि के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा है। आयोग ने कहा था कि गैर-एसआईआर अवधि में नियमों के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिका पर कोई एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि वह मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े अहम फैसले, मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा एकतरफा लिये जाने के आरोपों पर पहले चुनाव आयोग और अन्य प्रतिवादियों का पक्ष सुनेगा।

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शेयर बाजारों में तेजी जारी, ट्रेंट का शेयर 13 फीसदी उछाल

घरेलू शेयर बाजारों में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन तेजी देखी गयी और इस दौरान टाटा समूह की फैशन और लाइफस्टाइल रिटेल कंपनी ट्रेंट का शेयर 13 प्रतिशत के करीब उछल गया।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स सुबह 126 अंक ऊपर 72,508 अंक पर खुला। इसके बाद इसका ग्राफ लगातार ऊपर की ओर बढ़ता रहा। बंद होने से पहले एक हजार अंक तक उछलने के बाद अंत में यह 685.34 अंक (0.95 प्रतिशत) चढ़कर 73,067.81 अंक पर बंद हुआ।

ट्रेंट ने सोमवार को शेयर बाजारों को दिये गये अपडेट में बताया था कि गत 30 सितंबर को समाप्त दूसरी तिमाही में उसका राजस्व 23 प्रतिशत बढ़कर 5,788 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इससे आज उसका शेयर 12.78 प्रतिशत चढ़कर 2,904 रुपये पर बंद हुआ।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक 220.35 अंक यानी 0.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,776.10 अंक पर पहुंच गया। सोमवार को भी दोनों सूचकांक हरे निशान में रहे थे।

वृहत बाजार में भी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 1.23 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 1.08 प्रतिशत मजबूत हुआ।

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सेक्टर आधारित समूहों में रसायन फार्मा, तेल एवं गैस, स्वास्थ्य, एफएमसीजी और वित्तीय कंपनियों के समूहों के सूचकांक एक से दो प्रतिशत तक चढ़ गए। आईटी और रियल्टी सेक्टरों में गिरावट रही।

एनएसई में जिन 3,695 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 2,453 के शेयरों में तेजी और 1,125 में गिरावट रही। अन्य 117 कंपनियों के शेयर अंततः अपरिवर्तित बंद हुए।

सेंसेक्स की कंपनियों में ट्रेंट की 12.78 प्रतिशत की तेजी के बाद कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 3.59 प्रतिशत की बढ़त में रहा। हिंदुस्तान यूनीलिवर का शेयर 2.83 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 2.77, इंडिगो का 2.23, इटरनल का 2.08, एशियन पेंट्स का 2.03 और एक्सिस बैंक का 2.01 प्रतिशत चढ़ गया।

भारती एयरटेल में 1.49 प्रतिशत और सन फार्मा में 1.07 प्रतिशत की तेजी रही। एलएंडटी, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, मारुति सुजुकी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व, अडानी पोर्ट्स और टाटा स्टील के शेयर भी हरे निशान में रहे।

टेक महिंद्रा का शेयर 2.30 प्रतिशत टूट गया। टाइटन में 1.30 फीसदी और बजाज फाइनेंस में 0.95 फीसदी की गिरावट रही। आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंफोसिस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टीसीएस के शेयर भी नीचे बंद हुए।

वैश्विक स्तर पर एशिया में जापान का निक्केई 1.05 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग एक प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.31 प्रतिशत ऊपर रहा। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में जर्मनी का डैक्स 0.56 फीसदी और ब्रिटेन का एफटीएसई 0.25 प्रतिशत ऊपर रहा।

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चार दिन की गिरावट से उबरा शेयर बाजार

विदेशों से मिले सकारात्मक संकेतों के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में चार दिन के बाद तेजी लौट आई और प्रमुख सूचकांक 0.6 प्रतिशत ऊपर बंद हुए।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 472.77 अंक (0.66 प्रतिशत) ऊपर 72,382.47 अंक पर बंद हुआ। यह सुबह 431 अंक चढ़कर 72,340.95 अंक पर खुला था और कुछ ही देर में 722 अंक की बढ़त में पहुंच गया। हालांकि दोपहर बाद तक यह 71,840.18 अंक तक लुढ़क भी गया। इस प्रकार सूचकांक में 791 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक भी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त में 22,555.75 अंक पर बंद हुआ। लगातार चार दिन की गिरावट के बाद बाजार में तेजी लौटी है।

एफएमसीजी और टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूहों में अधिक लिवाली देखी गई। निफ्टी एफएमसीजी 1.80 प्रतिशत मजबूत बंद हुआ। टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद समूह के सूचकांक में 1.53 फीसदी और मीडिया समूह में 0.92 फीसदी की तेजी रही। बैंकिंग, वित्त, रियल्टी और तेल एवं गैस समूहों के सूचकांक भी ऊपर रहे। स्वास्थ्य और फार्मा समूहों से सूचकांक टूट गए।

वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों से घरेलू बाजार में निवेश धारणा मजबूत हुई। वृहत बाजार में भी बिकवाली की जोर रहा। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.42 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.47 प्रतिशत की बढ़त में रहा।

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एनएसई में जिन 3,706 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 1,844 के शेयर लाल निशान में और 1,745 के हरे निशान में रहे। अन्य 117 कंपनियों के शेयर अपरिवर्तित रहे।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 20 में तेजी रही। आईटीसी का शेयर 4.49 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। इटरनल के शेयर में 2.50 फीसदी, भारती एयरटेल में 2.38, बजाज फाइनेंस में 2.28, अडानी पोर्ट्स में 2.13 और आईसीआईसीआई बैंक में 2.11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1.72 फीसदी, एलएंडटी का 1.48, एनटीपीसी का 1.45, टाइटन का 1.43, टीसीएस का 1.40, मारुति सुजुकी का 1.07 और पावरग्रिड का शेयर 0.92 प्रतिशत चढ़ा। बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर भी हरे निशान में रहे।

एचसीएल टेक्नोलॉजीज में 3.69 प्रतिशत की गिरावट रही। एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.99 प्रतिशत, सन फार्मा का 1.55, इंफोसिस का 1.50 और एशियन पेंट्स का 1.43 प्रतिशत टूट गया। ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक और टाटा स्टील के शेयर भी लाल निशान में रहे।

वैश्विक स्तर पर एशिया में जापान का निक्केई 2.40 प्रतिशत, चीन का शंघाई कंपोजिट 0.31 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग 0.28 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुआ। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में ब्रिटेन का एफटीएसई 0.52 फीसदी और जर्मनी का डैक्स 0.25 फीसदी ऊपर था।

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वोटर काटने में फॉर्म सात से भी धांधली

नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बहाने वास्तविक मतदाताओं के नाम काटने के मामले में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कठघरे में खड़ा कर रहे राहुल गांधी ने कुछ नए आरोप लगाए हैं। उन्होंने नए मतदाताओं के नाम जोड़ने वाले फॉर्म छह में बदलाव को लेकर पहली बार टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस का नाम लिया। राहुल ने कहा कि टीसीएस को किसने आदेश दिया? टीसीएस में किसने बदलाव के आदेश पर दस्तखत किए? राहुल ने इसके अलावा फॉर्म सात का दुरुपयोग कर कर्नाटक में बड़ी संख्या में नाम काटे जाने के मुद्दा भी उठाया।

राहुल गांधी ने गुरुवार को फॉर्म छह के बाद अब कर्नाटक में फॉर्म सात के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया है। उन्होंने दावा किया है कि कर्नाटक में एक झटके में 15 हजार लोगों के नाम काट दिए गए। राहुल ने गुरुवार की शाम को एक सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि नाम काटने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म सात से एक झटके में कर्नाटक में 15 हजार लोगों के नाम काट दिए गए। राहुल ने यह भी दावा किया कि सुनियोजित तरीके से एससी, एसटी, मुस्लिम,और ओबीसी समाज के लोगों के नाम काटे गए हैं। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने की मांग की है और आरोप लगाया है कि सेंट्रलाइज्ड तरीके से और कंप्यूटर के जरिए भाजपा थोक में फॉर्म सात भर कर मतदाताओं के नाम कटवा रही है।

इससे पहले राहुल गांधी ने गुरुवार की सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिख कर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि फॉर्म छह में अवैध तरीके से बदलाव किया गया। राहुल ने पूछा, ‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टीसीएस को बदलाव करने का आदेश किसने दिया और कंपनी में इसे किसने मंजूरी दी’? उन्होंने आगे पूछा, ‘क्या टीसीएस पर कोई दबाव था’? राहुल के इस आरोप को आगे बढ़ाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीवी श्रीनिवास ने कहा कि कंप्यूटर अपने आप कोई काम नहीं कर सकता है। उसे कमांड देनी पड़ती है। गौरतलब है कि तकनीकी सलाह और सहयोग के लिए चुनाव आयोग ने टीसीएस की सेवाएं ली हैं।

गौरतलब है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट में बताया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में फॉर्म छह में अतिरिक्त जानकारी मांगने और एसआईआर से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम बदले बिना फॉर्म में नया हिस्सा जोड़ा गया। दोनों आयुक्तों का कहना था कि कानून में बदलाव का अधिकार संसद को है। इस विवाद के बाद आयोग ने कुछ बदलाव किए हैं। जिन राज्यों में एसआईआर खत्म हो गई है वहां चुनाव आयोग ने फॉर्म छह में मांगी जा रही अतिरिक्त जानकारी का कॉलम हटा दिया है।

शेयर बाजारों में तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा

घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को तेजी लौट आई और बीएसई का सेंसेक्स 299 अंक ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स में सुबह से ही तेजी रही। यह 119 अंक ऊपर 74,648 अंक पर खुला और पूरे दिन हरे निशान में रहा। अंत में यह 299.17 अंक (0.40 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 74,828.25 अंक पर रहा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी-50 सूचकांक का ग्राफ भी लगभग ऐसा ही रही। यह 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत चढ़कर 23,446.80 अंक पर बंद हुआ। मंगलवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट रही थी।

वृहत बाजार में भी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.57 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.89 प्रतिशत मजबूत हुआ।

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सेक्टर आधारित सूचकांकों में निफ्टी आईटी 0.87 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.50 प्रतिशत गिर गया। धातु समूह के सूचकांक में 2.40 प्रतिशत, एफएमसीजी में 1.32 प्रतिशत और रियल्टी में 1.10 प्रतिशत की तेजी रही। फार्मा, वित्त, बैंकिंग, स्वास्थ्य, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और तेल एवं गैस समूहों के सूचकांक भी ऊपर बंद हुए।

सेंसेक्स की कंपनियों में टाटा स्टील का शेयर सबसे अधिक सवा तीन प्रतिशत और बजाज फाइनेंस का तीन प्रतिशत चढ़ गया। आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावरग्रिड, एलएंडटी, बजाज फिनसर्व, सन फार्मा और अडानी पोर्ट्स से शेयर एक से दो प्रतिशत तक की तेजी में रहे। हिंदुस्तान यूनीलिवर, भारती एयरटेल, भारतीय स्टेट बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स और टेक महिंद्रा के शेयर भी हरे निशान में रहे।

आईटी सेक्टर में गिरावट रही। एचसीएल टेक्नोलॉजीज और इंफोसिस के शेयर एक प्रतिशत से अधिक गिर गये। टीसीएस, टाइटन और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर भी नुकसान में रहे।

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शुरुआती तेजी के बाद 330 अंक लुढ़का सेंसेक्स

घरेलू शेयर बाजारों में शुरुआती तेजी खोते हुए प्रमुख सूचकांक गिरावट में बंद हुए और बीएसई का सेंसेक्स 330 अंक रहा।

सेंसेक्स 42 अंक ऊपर 74,901.50 अंक पर खुला और ऊपर 75,038.93 अंक तक गया। हालांकि पहले घंटे के कारोबार के बाद बिकवाली शुरू हो गयी। अंत में यह 329.91 अंक (0.44 प्रतिशत) गिरकर 74,529.08 अंक पर रहा।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 85.30 अंक यानी 0.36 प्रतिशत फिसलकर 23,329 अंक पर बंद हुआ। पिछले कारोबारी दिवस पर दोनों प्रमुख सूचकांक ऊपर रहे थे।

वृहत बाजार में भी बिकवाली हावी रही। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.01 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.23 प्रतिशत फिसल गया।

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सेक्टर आधारित सूचकांकों में मीडिया, रियल्टी, धातु और रसायन समूहों में तेजी रही। वहीं, आईटी, एफएमसीजी, बैंकिंग, वित्त, ऑटो, फार्मा, स्वास्थ्य, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और तेल एवं गैस समूहों के सूचकांकों में गिरावट रही।

सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फिनसर्व का शेयर डेढ़ फीसदी से अधिक टूट गया। ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, टीसीएस और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर एक से डेढ़ फीसदी टूट गए।

भारतीय स्टेट बैंक, इंफोसिस, एलएंडटी, आईटीसी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, हिंदुस्तान यूनीलिवर, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, टेक महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर भी लाल निशान में रहे।

इटरनल का शेयर करीब दो प्रतिशत और इंडिगो का डेढ़ फीसदी से ज्यादा चढ़ा। टाइटन और टाटा स्टील में भी तेजी देखी गई।

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शेयर बाजार की सीमाएं

वित्तीय संपत्तियों में निवेश करवाना सरकारों की नीति रही है। इससे शेयर सूचकांक उछले और अर्थव्यवस्था चमकती दिखी। लेकिन इसकी कीमत उन निवेशकों ने चुकाई, जो उस चमक से चकाचौंध होकर उस ओर खिंचते चले गए।

कोरोना काल के समय से भारत में शेयर बाजार में आए उछाल को लेकर धारणा बनी है कि वहां जिन लोगों ने निवेश किया, उनकी चांदी हो गई। लेकिन एक वित्तीय अखबार के ताजा विश्लेषण के मुताबिक यह बात सभी निवेशकों के मामले में सच नहीं है। पिछले 3-5 साल के इंडेक्स में बहुत से शेयरों ने फिक्स्ड डिपॉजिट और पोस्ट ऑफिस में जमा रकम से कम या उसके बराबर रिटर्न ही दिया है। मतलब यह कि सूचकांक में दिखी तेजी कुछ चुनिंदा शेयरों और सेक्टर्स तक सीमित रही, जबकि बाकी शेयर उनसे काफी पीछे रहे। रिलायंस, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस जैसे कुछ भारी-भरकम शेयरों में निवेश से मिला रिटर्न भी कम रहा। इससे “बड़ा शेयर, सुरक्षित मुनाफा” की धारणा भी टूटी। 2,867 स्टॉक्स के इस अध्ययन से यह तस्वीर उभरी कि उपरोक्त तीन साल की अवधि में लगभग 43 प्रतिशत निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ा, जिनमें तकरीबन 11 प्रतिशत की तो 50 प्रतिशत से अधिक रकम डूब गई।

लगभग 21 प्रतिशत निवेशकों को 100 फीसदी से ज्यादा फायदा हुआ। 12 प्रतिशत निवेशकों को 50 से 100 फीसदी तक, जबकि तकरीबन 23 फीसदी निवेशकों को 50 फीसदी तक लाभ हुआ। इस दरम्यान बैंक एफडी में 6.5 फीसदी की ब्याज दर पर निवेश से 21.34 फीसदी और पॉस्ट ऑफिस में सात प्रतिशत की दर पर निवेश से कुल रिटर्न 21.56 प्रतिशत हासिल हुआ। वैसे इस विश्लेषण की दलील यह नहीं है कि एफडी में निवेश शेयरों से बेहतर है। संदेश सिर्फ यह है कि शेयर मार्केट हर हाल में ऊंचे रिटर्न की गारंटी नहीं है। इस वित्तीय कारोबार में लाभ दरअसल उनको ही ज्यादा मिलता है, जो इस कारोबार की पूरी जानकारी रखते हों और ऊंचा दांव खेलने में सक्षम हों। पहले सामने आए अध्ययनों से यह साफ हो चुका है कि पैसा ज्यादातर छोटे निवेशक ही गंवाते हैं। अर्थव्यवस्था के उत्तरोत्तर वित्तीयकरण के साथ वित्तीय संपत्तियों में निवेश करवाना सरकारों की नीति रही है। इससे शेयर सूचकांक उछले हैं और अर्थव्यवस्था चमकती दिखी है। लेकिन इसकी कीमत उन निवेशकों ने चुकाई है, जो उस चमक से चकाचौंध होकर उस ओर खिंचते चले गए।