रोजर फेडरर ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस टूर्नामेंट में वापसी के सवाल पर क्या कहा

Roger Federer

रोजर फ़ेडरर इस हफ़्ते यूएस ओपन में लौट रहे हैं। स्विस टेनिस स्टार मंगलवार को फ़्लशिंग मीडोज़ में एक मैत्री मैच के लिए लौट रहे हैं। इस मैच में उनके साथ ओलंपिक चैंपियन आंद्रे अगासी और यूएस ओपन विजेता एंडी रॉडिक और जॉन मैकेनरो भी शामिल होंगे।

2022 में रिटायर होने से पहले 2019 में यूएस ओपन में आखिरी बार खेलने वाले 45 साल के फ़ेडरर की न्यूयॉर्क में यह वापसी सुखद होगी। लेकिन उन्होंने साफ़ किया कि आर्थर ऐश स्टेडियम में यह सिर्फ़ एक दोस्ताना मैच है।

प्रोफ़ेशनल गेम में वापसी के बारे में पूछे जाने पर फ़ेडरर ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं।” “पूछने के लिए धन्यवाद। मुझे पक्का नहीं था कि यह सवाल पूछा जाएगा, लेकिन मुझे खुशी है कि आपने पूछा ताकि अगर किसी को ऐसा लगा हो, तो मैं साफ़ कर सकूँ। वैसे भी, आपको डोपिंग पूल में शामिल होना पड़ता है। इसमें बहुत सारी रुकावटें हैं। मैं बहुत व्यस्त हूँ।

“मुझे एग्ज़िबिशन मैच खेलने के लिए भी मुश्किल से समय मिल पाता है, तो टूर के बारे में सोचिए, और शरीर अब साथ नहीं देता। लेकिन मैं जैसा महसूस कर रहा हूँ, उससे बहुत खुश हूँ। अब मैं बस एक फ़ैन हूँ और मैच देखने का मज़ा ले रहा हूँ।”

फेडरर ने 24 वर्षों में 1500 से अधिक मैच खेले हैं, हालांकि पिछले तीन साल उनके टेनिस जीवन के लिये काफी संघर्षपूर्ण साबित हुये। फेडरर ने 2003 में सिर्फ 21 साल की उम्र में विंबलडन के रूप में अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता था जबकि आखिरी बार उन्होंने 2021 के फ्रेंच ओपन में हिस्सा लिया था, जहां वह तीसरे राउंड की जीत के बाद रिटायर हो गए थे। इसके बाद से वह लगातार कोर्ट में वापसी का प्रयास कर रहे थे।

पिछले कुछ वर्षों में, फेडरर ने पुरुष एकल टेनिस में कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। फेडरर ने 20 ग्रैंड स्लैम जीते हैं और 103 करियर एटीपी खिताब हासिल किए हैं। 2018 में फेडरर को 36 साल की उम्र में सबसे उम्रदराज होने के बावजूद विश्व नंबर 1 बनने का गौरव हासिल हुआ। स्विस आइकन ने अपने करियर में 223 युगल मैच खेले हैं। फेडरर ने 2018 में ऑस्ट्रेलियन ओपन में अपना आखिरी ग्रैंड स्लैम खिताब जीता था. इसके बाद वह 2019 के विंबलडन के फाइनल में पहुंचे थे, जहां एक रोमांचक मुकाबले में नोवाक जोकोविच ने उन्हें शिकस्त दी थी।

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

H-1B वीजा पर US का नया प्लान, भारत पर क्या होगा असर?

डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने अत्यधिक कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए नए H-1B वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर से अधिक की फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) की ओर से जारी प्रस्ताव के तहत यह फीस बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर की जा सकती है। सोमवार को Federal Register में प्रकाशित नोटिस के मुताबिक, यह फीस उन सभी H-1B वीजा कैप-सब्जेक्ट आवेदनों पर लागू होगी, जिनमें एडवांस्ड डिग्री यानी उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध छूट वाली श्रेणी भी शामिल है।

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H-1B फीस बढ़ाने का नया प्रस्ताव

 

DHS का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब H-1B वीजा फीस को लेकर अमेरिकी अदालतों में कानूनी विवाद चल रहा है। करीब एक महीने पहले एक संघीय अपीलीय अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जिला जज के उस आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी, जिसने ट्रंप प्रशासन की 1 लाख डॉलर H-1B फीस लगाने की योजना को पलट दिया था।

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सितंबर 2025 में ट्रंप ने एक व्यापक घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत H-1B वीजा पर सालाना 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रावधान किया गया था। इसी दौरान अमीर लोगों के लिए अमेरिकी नागरिकता की राह के तौर पर 10 लाख डॉलर के ‘गोल्ड कार्ड’ वीजा की योजना भी पेश की गई थी।

 

हालांकि, बाद में एक संघीय अदालत ने 1 लाख डॉलर की H-1B फीस को रद्द कर दिया था। वहीं, ‘गोल्ड कार्ड’ कार्यक्रम एक अलग पहल है।

 

भारतीय प्रोफेशनल्स पर सबसे ज्यादा असर की आशंका

नई प्रस्तावित फीस का सबसे ज्यादा असर भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि H-1B वीजा धारकों में भारतीय नागरिकों की संख्या काफी बड़ी है। H-1B वीजा मुख्य रूप से ऐसे विशेषज्ञ पेशों (Specialty Occupations) के लिए जारी किया जाता है, जिनमें आमतौर पर कम से कम स्नातक डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता की आवश्यकता होती है।

 

यह वीजा लंबे समय से अमेरिका की टेक्नोलॉजी कंपनियों और IT सर्विसेज कंपनियों के लिए विदेशी कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने का प्रमुख माध्यम रहा है। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि कुछ कंपनियां H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम लागत वाले विदेशी श्रमिकों तक पहुंच बनाने के लिए करती हैं।

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H-1B वीजा के लिए होता है लॉटरी सिस्टम

 

परंपरागत रूप से जब H-1B वीजा के लिए आवेदन वार्षिक सीमा से अधिक हो जाते थे, तो कैप-सब्जेक्ट वीजा आवेदनों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता था। हालांकि, हाल के वर्षों में H-1B वीजा चयन प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं।

 

Amazon, Infosys और TCS समेत ये कंपनियां बड़ी नियोक्ता

H-1B कार्यक्रम के तहत Amazon लगातार सबसे बड़े नियोक्ताओं में शामिल रही है। इसके अलावा Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Microsoft और Google जैसी कंपनियां भी H-1B वीजा के प्रमुख नियोक्ताओं में शामिल हैं। अमेरिका का California राज्य भी H-1B मंजूरियों के मामले में प्रमुख राज्यों में बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह राज्य में टेक्नोलॉजी कंपनियों की भारी मौजूदगी है।

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नए प्रस्ताव को अंतिम रूप मिलने पर अमेरिका में काम करने की योजना बना रहे विदेशी कुशल कर्मचारियों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत में बड़ा इजाफा हो सकता है। भारतीय IT प्रोफेशनल्स और अमेरिकी टेक कंपनियां इस प्रस्ताव से सबसे ज्यादा प्रभावित पक्षों में शामिल हो सकती हैं।

चुनाव से पहले UP में बड़ा सुरक्षा अलर्ट, अखिलेश-मायावती समेत 52 दिग्गजों को मिली बुलेटप्रूफ जैकेट

चुनाव से पहले UP में बड़ा सुरक्षा अलर्ट, अखिलेश-मायावती समेत 52 दिग्गजों को मिली बुलेटप्रूफ जैकेट

​UP Elections 2027 Bulletproof Jacket Security

UP Elections 2027 Bulletproof Jacket Security: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं की सुरक्षा को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। गृह मंत्रालय की सलाह पर यूपी के सुरक्षा मुख्यालय ने राज्य के 52 प्रमुख नेताओं को करीब 1.5 लाख रुपए की कीमत वाली हाई-टेक बुलेटप्रूफ जैकेट मुहैया कराई हैं।

 

प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब अलग-अलग सुरक्षा श्रेणी (Y से Z+ तक) वाले नेताओं को सुरक्षा घेरे के साथ बुलेटप्रूफ जैकेट भी दी गई है। बताया जा रहा है कि सुरक्षा अलर्ट के चलते राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। 

​फैसले से जुड़ी मुख्य बातें

  • ​दो चरणों में वितरण : सुरक्षा मुख्यालय ने पहले चरण में 8 और दूसरे चरण में 44 नेताओं को जैकेट सौंपी, जिससे कुल संख्या 52 हो गई है।
  • ​विपक्ष और सहयोगियों पर भी भरोसा : सुरक्षा केवल सत्ता पक्ष तक सीमित नहीं है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ-साथ भाजपा व उसके सहयोगी दलों के नेताओं को भी यह कवर मिला है।

इन नेताओं को मिली बुलेटप्रूफ जैकेट

अखिलेश यादव और मायावती के अलावा कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', संजय निषाद, ओपी राजभर, रामपुर से विधायक आकाश सक्सेना, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, संगीत सोम और सुरेश राणा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इस सुरक्षा व्यवस्था में योगी सरकार के 11 कैबिनेट मंत्रियों को भी  शामिल किया गया है।

 

​गौरतलब है कि वर्तमान में UP के लगभग 98 नेताओं को विभिन्न श्रेणियों की सुरक्षा (Y, X, Z, Z+) प्राप्त है, जिसमें अब इस जैकेट को अनिवार्य सुरक्षा उपकरण के रूप में जोड़ा गया है।

यूपी विधानसभा चुनाव कब होंगे?

उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा का कार्यकाल मई 2027 में समाप्त हो रहा है। नियमानुसार, अगले यानी 19वीं विधानसभा के चुनाव फरवरी- मार्च 2027 के दौरान आयोजित होने प्रस्तावित हैं। चुनाव की घोषणा जनवरी 2027 की शुरुआत में हो सकती है। यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं।

वर्तमान में सत्तारूढ़ भाजपा के पास 257 सीटें हैं, जबकि उसके सहयोगी दलों- अपना दल (सोनेलाल) 13, राष्ट्रीय लोक दल (RLD) 9,  सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) 6, निषाद पार्टी के पास 5 सीटें हैं। दूसरी ओर मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी के पास वर्तमान में 100 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस के पास 2 सीटें हैं। शेष सीटें निर्दलीय और अन्य दलों के पास हैं। 

Skoda planning to export Kylaq to Europe powered by 1.5 TSI engine

skoda kylaq next to ceo klaus zellmer

Skoda is considering exporting the made-in-India Kylaq to the European market as a crossover alternative to the Fabia hatchback. Launched here at the tail-end of 2024, the Kylaq is the third Skoda model to come out of Skoda-VW’s ‘India 2.0’ strategy and the Czech carmaker’s smallest SUV to date. While the Kylaq is designed specifically for the Indian market, Skoda feels the compact SUV carries enough pedigree and appeal for European customers.

Autocar India’s recent Pune to Prague drive, a 19,000km cross continent drive that covered several European countries, including the Czech Republic, the brand’s home country, established the Kylaq as a product that could blend in well in some of Skoda’s key markets. “We’re looking into a possibility or an opportunity to bring Kylaq to Europe, but there are a lot of barriers, a lot of homologation questions,” Skoda CEO Klaus Zellmer told us after the conclusion of the cross-continent Kylaq road trip.

1.0 TSI or 1.5 TSI for the Euro-spec Kylaq?

We reported about Kylaq’s export plans to Europe in June 2026 issue of the Autocar India magazine.

In India, the Kylaq is powered solely by the locally manufactured 115hp 1.0-litre 3-cyl direct-injection turbo-petrol engine (1.0 TSI), which can be had with either a 6-speed manual or 6-speed automatic. For Europe, however, Skoda might equip the Kylaq with the 1.5-litre 4-cyl direct-injection turbo-petrol mill (1.5 TSI) seen in the Slavia and Kushaq, paired to a 7-speed DCT.

The 1.5 TSI engine is used in Skoda’s other models and is already Euro 7 compliant making it the logical choice for export markets. However, from a cost perspective the 1.0 TSI is more attractive as it is a three-cylinder unit and is locally produced. However, the 1.0 TSI does not meet Euro 7 standards and upgrading it to the latest emission standards will call for significant upfront investment which will impact the overall cost of the Kylaq for exports.

If Skoda decides on the 1.5 TSI the export version of the Kylaq, it will likely be in a lower 115hp state of tune to help meet the Euro 7 targets. In fact, the Kylaq 1.5 TSI could be offered in two states of tune for the European market, but its not clear what the other power output of the engine would be.

Beyond emission regulations, the Kylaq would have to meet Europe’s safety, security and other homologation requirements that would again add to the cost of the vehicle.

India-EU FTA and weak rupee helps Kylaq’s export business case

The incoming India-EU FTA, in conjunction with the depreciating rupee against the euro, makes a strong case for exporting the Kylaq to Europe. Piyush Arora, the MD of Skoda Auto Volkswagen India Private Limited (SAVWIPL), said that the India-EU FTA will “open up opportunities” for SAVWIPL across all of its business verticals, including CBU imports, components, fully developing new models for India, and exporting cars to the European market.

A final decision has not been taken. However, a European programme would mark a significant step for Skoda Auto Volkswagen India by moving the country’s role beyond developing and manufacturing vehicles for India and other emerging markets to supplying a product to the carmaker’s home region.

With inputs from Hormazd Sorabjee

क्या सच में ‘अलविदा’ कह रहा है OnePlus? आपके फोन के अपडेट्स और वारंटी पर आया बड़ा अपडेट

OnePlus Mobile Shutdown Truth

OnePlus Mobile Shutdown Truth: यदि आप भी सोशल मीडिया पर यह देखकर घबरा रहे हैं कि “OnePlus मोबाइल बंद हो रहा है”, तो थोड़ा ठहरिए! टेक वर्ल्ड में किसी समय 'फ्लैगशिप किलर' के नाम से मशहूर इस ब्रांड को लेकर इंटरनेट पर लगातार कयासबाजी का दौर जारी है। 
 

वनप्लस ब्रांड को लेकर ऐसी खबरें क्यों फैल रही हैं, कंपनी का आधिकारिक रुख क्या है और जिन लोगों के पास पहले से OnePlus के फोन हैं, उनके साथ आगे क्या होगा? आइए इस पूरे घटनाक्रम की परतें खोलते हैं। 

क्यों फैलीं OnePlus बंद होने की अफवाहें? 3 मुख्य कारण 

बिना आग के धुआं नहीं उठता, OnePlus के बंद होने या भारत छोड़ने की अफवाहों के पीछे कुछ प्रमुख बाजार और रणनीतिक बदलाव जिम्मेदार हैं: 
 

1. Oppo के साथ गहरा रीस्ट्रक्चरिंग (Merge) : वनप्लस की पैरेंट कंपनी BBK Electronics और Oppo ने लागत घटाने के लिए अपने रिसर्च (R&D) और मैन्युफैक्चरिंग को मिला दिया है। इसके तहत OxygenOS को ColorOS के ढांचे के साथ इंटीग्रेट किया जा रहा है। 
 

2. ऑफलाइन स्टोर्स के साथ विवाद : भारत में कई बड़े रिटेल चेन्स (जैसे दक्षिण भारत और गुजरात के रिटेल असोसिएशन) के साथ मार्जिन और वॉरंटी के मुद्दों को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद कुछ ऑफलाइन दुकानों पर वनप्लस के फोन बिकना बंद हुए और कंपनी ऑनलाइन-फर्स्ट मॉडल पर शिफ्ट हुई। 
 

3. ग्लोबल मार्केट्स में बदलाव : अमेरिका और यूरोप जैसे कुछ चुनिंदा विदेशी बाजारों में सप्लाई चेन और सर्टिफिकेशन में हुई देरी के चलते नए मॉडल्स की बिक्री धीमी पड़ी, जिसे लोगों ने कंपनी की पूर्ण विदाई समझ लिया। 

कंपनी का आधिकारिक पक्ष : क्या सच में बंद हो रहा है OnePlus?

उत्तर है : नहीं। 

 

OnePlus India के बिजनेस वीपी (Vice President) और शीर्ष अधिकारियों ने इन अफवाहों को पूरी तरह से “निराधार और भ्रामक” करार दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत वनप्लस का सबसे बड़ा और मजबूत बाजार है। 

 

कंपनी का आधिकारिक संदेश : “वनप्लस का काम पहले की तरह सामान्य रूप से चल रहा है। हम भारत में नए स्मार्टफोन लॉन्च करने, आफ्टर-सेल्स सर्विस देने और सॉफ्टवेयर अपडेट जारी रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” 

जिनके पास पहले से OnePlus फोन है, उनका क्या होगा?

यदि आप OnePlus 11, 12, 13 या Nord सीरीज़ का कोई भी स्मार्टफोन इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको घबराने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है। आपकी स्थिति पर ये 3 बातें लागू होती हैं:

  • सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट्स : कंपनी के तय वादे के अनुसार आपके फोन को नियमित Android Updates और Security Patches मिलते रहेंगे। OxygenOS/ColorOS इंटीग्रेशन के बावजूद मौजूदा फोन्स का सपोर्ट सिस्टम जारी रहेगा।
  • वॉरंटी और सर्विस सेंटर : यदि आपका फोन वॉरंटी पीरियड में है, तो अधिकृत OnePlus और Oppo सर्विस सेंटर्स पर आपको फ्री सर्विस और पार्ट्स मिलते रहेंगे।
  • पार्ट्स और रिपेयर : कंपनी कानूनन और पॉलिसी के हिसाब से अपने बेचे गए हैंडसेट के स्पेयर पार्ट्स (जैसे स्क्रीन, बैटरी, मदरबोर्ड) सर्विस नेटवर्क में उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। 

क्या आपको नया OnePlus फोन खरीदना चाहिए?

OnePlus कहीं बंद नहीं हो रहा है, यह सिर्फ Oppo के साथ मिलकर एक नए और कुशल स्वरूप (Restructuring) में ढल रहा है। सोशल मीडिया पर फैल रही 'ब्रांड शटडाउन' की खबरें महज क्लिकबैट और अफवाहें हैं। यदि आप नया फोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो बिना झिझक वारंटी और ऑफिशियल सपोर्ट के साथ वनप्लस फोन खरीद सकते हैं।

MoRTH proposes mandatory V2V communication systems from October 2028

Vehicle-to-Vehicle communication

The Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) has proposed making Vehicle-to-Vehicle (V2V) communication systems mandatory on all newly manufactured vehicles from October 1, 2028. According to the draft notification, the mandate will apply to L-, M- and N-category vehicles, which include two-wheelers, passenger vehicles and commercial vehicles. The proposal seeks to amend the Central Motor Vehicles Rules (CMVR), 1989.

  • AIS-230 standard introduced for V2V systems
  • Will use On-Board Units operating between 5.875GHz-5.925GHz
  • Public consultation open for 30 days

MoRTH proposes phased rollout of Vehicle-to-Vehicle communication systems

MoRTH’s draft notification proposes a phased rollout of V2V communication systems. Manufacturers voluntarily offering the technology from October 1, 2027, will have to ensure they comply with AIS-230, the new Automotive Industry Standard for V2V communication systems. If approved in its current form, the fitment of V2V communication systems will become mandatory for all newly manufactured L-, M- and N-category vehicles from October 1, 2028.

The Automotive Industry Standard lays down the minimum technical, functional, performance, environmental and cybersecurity requirements for V2V communication systems. These include radio performance, receiver sensitivity and selectivity, Global Navigation Satellite System (GNSS) and positioning requirements, electrical and power-supply requirements, electromagnetic interference and compatibility, cybersecurity and communication security, and performance requirements for road safety applications.

Furthermore, the standard specifies the use of factory-fitted On-Board Units (OBUs) based on Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) technology operating in the 5.875GHz to 5.925GHz frequency band. The Department of Telecommunications exempted the use of this spectrum from licensing requirements through a notification issued on June 10, 2026.

The standard also defines safety applications such as Emergency Brake Alert, Forward Collision Warning, Wrong-way Driving Alert and Emergency Vehicle Alert, enabling vehicles to exchange real-time information and warn drivers of potential hazards. The draft notification has been opened for public consultation for 30 days, following which the ministry will review the comments received before issuing the final notification.

What is Vehicle-to-Vehicle (V2V) communication?

The technology enables vehicles equipped with V2V communication systems to wirelessly exchange real-time information such as speed, position, direction and acceleration. While conventional Advanced Driver Assistance Systems (ADAS) rely on cameras, radars, other onboard sensors and driver inputs, V2V allows vehicles to communicate directly with one another using Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) technology.

This enables quicker detection of potential hazards that may not yet be visible to the driver and, according to the ministry, “is therefore expected to complement ADAS and support proactive accident prevention, connected mobility and future intelligent transport applications.” The ministry also says the technology can provide warnings for situations involving sudden braking, forward-collision risks, unsafe lane changes and approaching emergency vehicles.

Challenges on the implementation of V2V communication systems

While the proposal marks a major step towards introducing V2V communication systems in India, it’s not without challenges. Automakers not only need to integrate and validate these systems across various models in their line-up but also ensure they work as intended between vehicles made by different manufacturers.

In terms of costs, earlier estimates had suggested the On-Board Units (OBUs) could add around Rs 5,000 to Rs 7,000 to the cost of each vehicle, although the latest draft notification doesn’t explore the cost angle of integrating V2V technology. With connected-vehicle technologies, there will also be a need for robust cybersecurity measures, while importance must also be given to other factors such as data protection and user privacy.

When first announcing plans to introduce V2V technology earlier this year, Union Road Transport and Highways Minister Nitin Gadkari said that it would allow drivers to “talk to each other like pilots.” However, despite being under development globally for more than two decades, widespread adoption of the technology remains limited.

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Kashmir Security Alert: कुलगाम और अनंतनाग आतंकी हमलों के बाद पूरे कश्मीर में हाई अलर्ट, IGP ने दिए सख्त निर्देश

कश्मीर के कुलगाम और अनंतनाग में हाल ही में हुए आतंकी हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। इसी को लेकर सोमवार को कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) वी.के. बिरदी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाईलेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन तेज करने और पूरी घाटी में सुरक्षा कड़ी रखने के निर्देश दिए। बैठक में मौजूदा सुरक्षा स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। साथ ही कुलगाम और अनंतनाग में हाल में हुए आतंकी हमलों पर भी चर्चा की गई।

आईजीपी ने अधिकारियों से कहा कि सभी जरूरी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई जाए और हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाए, ताकि शांति भंग करने या आम लोगों को नुकसान पहुंचाने की किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।

हुई हाई लेवल मीटिंग

सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने घाटी में सामने आ रही नई सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की। साथ ही इन खतरों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए अपनाए जा रहे सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा की गई। आईजीपी वी.के. बिरदी ने अधिकारियों को मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा करने और उसे और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बदलते हालात को देखते हुए आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन और तेज किया जाए तथा नई रणनीतियों के साथ कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि घाटी में सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और लगातार सतर्कता बेहद जरूरी है। इससे किसी भी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सकेगा।

हाईवे, रेलवे और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा बढ़ाई जाएगी

सुरक्षा समीक्षा बैठक में कश्मीर के नेशनल हाईवे, रेलवे ट्रैक और रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि संवेदनशील स्थानों और जिलों की सीमाओं पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जाए। साथ ही चेकपोस्ट और जांच व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि किसी भी सुरक्षा चूक को रोका जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई हो सके। बैठक में महत्वपूर्ण सरकारी ढांचे और संवेदनशील लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। पुलिस ने कहा कि घाटी में शांति और लोगों की सुरक्षा बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

यह सुरक्षा समीक्षा कुलगाम में हुए आतंकी हमले, जिसमें दो मजदूरों की मौत हो गई थी और अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना के कुछ दिन बाद की गई है। इन हमलों के बाद पूरे कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है और निगरानी भी बढ़ा दी है। पुलिस का कहना है कि घाटी में हाल की आतंकी गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा की जा रही है। साथ ही एहतियात के तौर पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी आतंकी साजिश को समय रहते नाकाम किया जा सके।

Delhi Lakshmi Yojana: हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500! 2 मिनट में समझें अप्लाई करने का पूरा प्रोसेस

Delhi Laxmi Yojna Registration Process: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ की शुरुआत की है। योजना के तहत परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला सदस्य को ₹2,500 प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लक्ष्मी योजना का आधिकारिक पोर्टल लॉन्च कर दिया है, जिस पर आवेदन मिलने भी शुरू हो चुके हैं। योजना शुरू होने के महज दो दिनों के भीतर ही 1.47 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। सरकार ने इसके लिए ₹5,100 करोड़ का बजट आवंटित किया है। आइए आपको बताते हैं इस योजना का लाभ उठाने के लिए कौन पात्र है, किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी और ऑनलाइन आवेदन कैसे करना है।

एक साथ खाते में नहीं आएंगे ₹2,500

दिल्ली लक्ष्मी योजना एक अनोखी हाइब्रिड कैश-ट्रांसफर और सेविंग्स स्कीम है, जिसमें महिलाओं के लिए दो विकल्प दिए गए हैं:

विकल्प 1 (कैश + एफडी): ₹1,000 की राशि सीधे लाभार्थी महिला के बैंक खाते में भेजी जाएगी, जबकि शेष ₹1,500 की राशि को सरकार द्वारा ‘फिक्स्ड डिपॉजिट’ (FD) में निवेश किया जाएगा।

विकल्प 2 (पूरी एफडी): लाभार्थी चाहें तो पूरे ₹2,500 को फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने का विकल्प चुन सकती हैं।

इस FD पर 3 साल का लॉक-इन पीरियड लागू होगा, जिस पर राज्य सरकार सॉवरेन गारंटी प्रदान करेगी।

कौन कर सकता है आवेदन?

योजना का लाभ लेने के लिए महिला आवेदकों को ये शर्तें पूरी करनी होंगी:

  • परिवार की प्रमुख: आवेदक महिला परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: महिला की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • पारिवारिक आय: परिवार की कुल वार्षिक आय ₹2.5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • दिल्ली का निवासी होना: आवेदक, उसका पति या उसके माता-पिता कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली के निवासी हों।
  • वोटर आईडी: आवेदक दिल्ली की पंजीकृत मतदाता होनी चाहिए।
  • बिजली खपत: पिछले 1 वर्ष के दौरान परिवार की वार्षिक बिजली खपत 2,400 यूनिट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

किन्हें नहीं मिलेगा लाभ?

  1. जो परिवार इनकम टैक्स पेयर हैं या जीएसटी (GST) फाइल करते हैं।
  2. परिवार में कोई सदस्य सरकारी नौकरी, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या लोकल बॉडी में स्थायी/संविदा कर्मचारी है।
  3. जिनके पास चार पहिया वाहन है।
  4. आवेदक महिला के 3 से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए।
  5. आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग योजना के लिए पात्र नहीं होंगे।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

पहचान व पते का प्रमाण: वोटर आईडी कार्ड (दिल्ली) और आधार कार्ड।

पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर: आवेदक की स्पष्ट फोटो और सिग्नेचर।

सांसद या विधायक का सिफारिश पत्र: क्षेत्र के सांसद (MP) या विधायक (MLA) का हस्ताक्षरित सिफारिश/समर्थन पत्र।

पते/बिजली खपत का प्रमाण: बिजली का बिल या गैस कनेक्शन का बिल।

उम्र का प्रमाण (कोई भी एक): जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, वोटर आईडी या आधार कार्ड।

बैंक खाता विवरण: डीबीटी के माध्यम से राशि प्राप्त करने के लिए बैंक पासबुक की कॉपी।

ऑनलाइन आवेदन का स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

पात्र महिलाएं घर बैठे नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके रजिस्ट्रेशन कर सकती हैं:

स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट https://dly.delhi.gov.in पर जाएं और ‘Apply for Scheme’ के बाद ‘Register Now’ पर क्लिक करें।

स्टेप 2: अपनी व्यक्तिगत जानकारी और बेसिक विवरण दर्ज करें।

स्टेप 3: परिवार के सभी सदस्यों का ब्योरा सही-सही भरें।

स्टेप 4: पैसे ट्रांसफर के लिए अपना चालू बैंक खाता दर्ज करें।

स्टेप 5: मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेजों को निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें।

स्टेप 6: फॉर्म का प्रीव्यू ध्यान से जांचें और फाइनल सबमिट करें।

स्टेप 7: क्षेत्रीय MP या MLA द्वारा हस्ताक्षरित अनुशंसा की प्रति अपलोड करें।

स्टेप 8: आवेदन पूरा होने के बाद पावती रसीद डाउनलोड करके भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

Traffic Diversion: सावन का पहला सोमवार कल, कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली समेत यूपी में ट्रैफिक डायवर्जन, CCTV-ड्रोन से होगी निगरानी

हिंदू धर्म के पवित्र त्योहार सावन के महीने की शुरुआत हो गई है। सावन के महीने में सोमवार को भगवान शिव की पूजा होती है। वहीं सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। सावन के पहले सोमवार और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई जगह ट्रैफिक ट्रैफिक डायवर्जन किए गए हैं। वहीं लोगों की सुविधा के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि कांवड़ियों और आम लोगों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।

सावन के पहले सोमवार पर शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद रहती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भीड़ कम होने के समय मंदिर आने और पुलिस व सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

इन जगहों पर किया गया डायवर्जन

कांवड़ यात्रा और सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कई राज्यों में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में कुछ रास्तों पर वाहनों का रूट बदला गया है, जबकि कांवड़ियों के लिए कई मार्ग रिजर्व किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से यात्रा से पहले स्थानीय ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी है। वहीं, मेरठ सहित कई जिलों में भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ समय के लिए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला भी लिया गया है।

सीसीटीवी से की जाएगी निगरानी

सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। बड़े शिव मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और विशेष सुरक्षा टीमों की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है। हाल ही में मिली सुरक्षा संबंधी सूचनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में प्रशासन और पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।