Nifty Outlook: दो हफ्तों की गिरावट के बाद क्या अब आएगी रिकवरी? एक्सपर्ट्स ने बताएं अहम लेवल्स

Nifty Outlook: शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद रखने वालों के लिए पिछला हफ्ता भी खास नहीं रहा। निफ्टी लगातार दूसरे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ। हालांकि शुक्रवार को हल्की बढ़त मिली, लेकिन पूरे हफ्ते में इंडेक्स 0.47% टूटकर 24,252 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को क्या हुआ?

निफ्टी 53 अंकों की बढ़त के साथ खुला। लेकिन पूरे दिन बाजार छोटी रेंज में ही घूमता रहा। आखिर में इंडेक्स 20 अंक यानी 0.08% चढ़कर बंद हुआ। क्लोजिंग ऑक्शन में भी 19 अंकों का सहारा मिला।

निफ्टी में Power Grid, HDFC Life और Nestlé सबसे ज्यादा चढ़े। वहीं Trent, Maruti Suzuki और IndiGo सबसे ज्यादा गिरे।

कौन से सेक्टर चमके?

इस बार तस्वीर मिली-जुली रही। मेटल, प्राइवेट बैंक और रियल्टी में खरीदारी दिखी। वहीं ऑटो, मीडिया और आईटी सेक्टर दबाव में रहे।

अच्छी बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 में 0.10% और Nifty Smallcap 100 में 0.69% की बढ़त रही।

अगले हफ्ते क्या रहेगा फोकस?

बाजार जानकारों का कहना है कि अगले हफ्ते निफ्टी एक सीमित दायरे में रह सकता है। दो हफ्तों की गिरावट के बाद हल्की रिकवरी की उम्मीद भी बनी हुई है। इन बातों पर बाजार की नजर रहेगी।

  • मानसून की रफ्तार
  • FII की खरीद-बिक्री
  • कच्चे तेल की कीमत
  • बड़े आर्थिक घटनाक्रम

ब्रोकरेज क्या कह रहे हैं?

HDFC Securities के नागराज शेट्टी का मानना है कि निफ्टी का ट्रेंड अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है। उनके मुताबिक इंडेक्स अगले हफ्ते 24,500 से 24,600 तक जा सकता है। उन्होंने 24,100 को अहम सपोर्ट बताया है।

HDFC Securities के विनय राजानी का कहना है कि निफ्टी अभी 50 और 100 दिन के EMA के ऊपर टिका हुआ है। ये दोनों करीब 24,200 के आसपास हैं। लेकिन इंडेक्स अभी भी 20 दिन के EMA यानी 24,300 और 200 दिन के EMA यानी 24,376 से नीचे है। इसलिए फिलहाल बाजार में साफ दिशा नहीं दिख रही।

उनके मुताबिक अगर निफ्टी 24,000 से नीचे बंद होता है, तो गिरावट बढ़ सकती है। वहीं 24,400 के ऊपर टिकने पर शॉर्ट टर्म में तेजी लौट सकती है।

LKP Securities के रूपक डे भी बाजार को फिलहाल साइडवेज से हल्का पॉजिटिव मानते हैं। उनके मुताबिक 24,200 पहला सपोर्ट है। इसके नीचे फिसलने पर निफ्टी 24,000 तक जा सकता है। वहीं 24,350 पहला रेजिस्टेंस है। इसे पार करने पर 24,500 का रास्ता खुल सकता है।

Bank Nifty के अहम स्तर

Bank Nifty शुक्रवार को करीब 290 अंकों की रेंज में रहा। SBI Securities के सुदीप शाह के मुताबिक 58,200 से 58,300 बड़ा रेजिस्टेंस है। इसके ऊपर निकलने पर इंडेक्स 58,700 और फिर 59,000 तक जा सकता है। नीचे की तरफ 57,300 से 57,200 मजबूत सपोर्ट है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Amagi Media Labs Share Price: ब्लॉक डील में बिके ₹600 करोड़ के शेयर, कीमत 9% तक चढ़ी

अमागी मीडिया लैब्स के शेयरों में 21 अगस्त को दिन में 8.69 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर 627 रुपये के हाई तक गया। ऐसी खबर है कि एक ब्लॉक डील में Trudy Holdings, AVP I Fund और Accel ने कंपनी में 600 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। शेयरों की यह संख्या कंपनी की लगभग 5 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। इस ब्लॉक डील के तहत फ्लोर प्राइस 550 रुपये प्रति शेयर रहा।

अमागी मीडिया लैब्स एक क्लाउड-बेस्ड सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) कंपनी है। यह भारत को लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए एक अहम मार्केट मानती है। कंपनी को उम्मीद है कि आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (AI) उसके अगले ग्रोथ फेज का अहम हिस्सा बनेगा। Amagi ने AI-बेस्ड पहलों में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है और हाल ही में अपने पहले AI कस्टमर की घोषणा की है। यह जेनरेटिव AI इंफ्रास्ट्रक्चर में शुरुआती कदम का संकेत है।

कंपनी को उम्मीद है कि समय के साथ भारत का योगदान काफी बढ़ेगा, क्योंकि क्लाउड का इस्तेमाल और स्ट्रीमिंग की खपत बढ़ रही है, हालांकि US अभी भी उसका सबसे बड़ा मार्केट बना हुआ है। US से अभी Amagi को लगभग 73 प्रतिशत रेवेन्यू मिलता है।

शेयर 3 महीनों में 50 प्रतिशत मजबूत

अमागी मीडिया लैब्स जनवरी 2026 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,788.62 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 13100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 14.92 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 45 प्रतिशत और 3 महीनों में 50 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 726 रुपये और एडजस्टेड लो 310.75 रुपये है।

SBI Cards के शेयर में आएगी 34% तक गिरावट! बर्नस्टीन ने घटाया टारगेट प्राइस

कंपनी की वित्तीय सेहत

अमागी मीडिया लैब्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 275.64 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 22.97 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 949.23 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। शुद्ध मुनाफा 26.45 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Cards के शेयर में आएगी 34% तक गिरावट! बर्नस्टीन ने घटाया टारगेट प्राइस

SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड के शेयरों में 21 अगस्त को गिरावट है। दिन में शेयर की कीमत बीएसई पर पिछले बंद भाव से 1.4 प्रतिशत तक टूटकर 637 रुपये के लो तक गई। दरअसल ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने शेयर के लिए प्राइस टारगेट 610 रुपये से घटाकर 430 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। हालांकि ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग को बरकरार रखा है। नया टारगेट शेयर के पिछले क्लोजिंग प्राइस से 33 प्रतिशत कम है।

बर्नस्टीन का कहना है कि रिवॉल्वर्स लेड क्रेडिट कार्ड मॉडल में बड़ा ढांचागत बदलाव हो रहा है, और इस दबाव के कम होने या पलटने के बहुत कम संकेत हैं। इस मॉडल से अर्थ है एक ऐसा कार्ड बिजनेस, जिसमें ग्राहक बिल का कुछ हिस्सा चुकाकर बाकी रकम को आगे बढ़ाते रहते हैं और कंपनी को उस बकाया रकम पर ब्याज से कमाई होती है। चूंकि SBI Cards पूरी तरह से क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी है, इसलिए उसे इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा है।

बर्नस्टीन को अभी भी रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो में और गिरावट से नुकसान का जोखिम दिख रहा है। इसके कारण क्रेडिट कॉस्ट में सुधार के बावजूद नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और कमाई में बढ़ोतरी पर दबाव बना रह सकता है। ब्रोकरेज ने SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज के लिए अर्निंग्स-प्रति-शेयर (EPS) अनुमानों को घटा दिया है।

SBI Cards का रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो घटकर 2.8 प्रतिशत

SBI कार्ड्स के मामले में रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो जून 2026 तिमाही में घटकर 2.8 प्रतिशत रह गया। बर्नस्टीन का कहना है कि इस गिरावट के कारण प्रति यूनिट खर्च पर होने वाले मुनाफे में भारी कमी आई है। अहम बात यह है कि रिवॉल्वर्स में आई गिरावट की भरपाई EMI लोन में बढ़ोतरी से नहीं हो पाई है। हालांकि SBI कार्ड्स ने कम ऑपरेटिंग खर्चों के जरिए कमाई पर पड़ने वाले असर को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन बर्नस्टीन का कहना है कि अब इसका असर फीस/नॉन-इंटरेस्ट इनकम-टू-स्पेंड्स रेश्यो पर पड़ने लगा है।

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शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत कमजोर

SBI Cards का मार्केट कैप 61400 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 25 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 68.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,040.55 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 664.44 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 19,899.63 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 2,166.71 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

होमवर्क नहीं किया तो टीचर की पिटाई से 6 साल के बच्चे की मौत, CCTV आया सामने

विशाखापत्तनम के एक प्राइवेट स्कूल में 6 साल के बच्चे की मौत से हड़कंप मच गया है। परिवार का आरोप है कि होमवर्क पूरा नहीं करने पर टीचर ने उसे पीटा था। बच्चे की पहचान प्रणय तेजा के तौर पर हुई है।

बताया जा रहा है कि ‘वन टाउन’ इलाके में मौजूद ‘लिटिल गार्डन स्कूल’ में क्लास के दौरान उसकी तबीयत खराब हो गई। बाद में उसे किंग जॉर्ज हॉस्पिटल (KGH) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का आरोप है कि टीचर ने उसकी डंटे से पीटाई की थी, जिसके बाद वह गिर पड़ा था।

फिलहाल, पुलिस और रेवेन्यू अधिकारी मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। उम्मीद है कि पोस्टमार्टम से मौत की सही मेडिकल वजह का पता चल जाएगा।

मौत की खबर मिलने के बाद परिवार के सदस्य और रिश्तेदार अस्पताल में जमा हुए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

परिवार के मुताबिक, प्रणय गुरुवार सुबह घर से निकला था और बिल्कुल ठीक-ठाक लग रहा था। उसके पिता ने बताया कि बच्चे ने ही उस दिन स्कूल जाने की जिद की थी।

बच्चे के पिता ने दी जानकारी

पिता ने दुखद घटना से पहले की बातें बताते हुए कहा, “सुबह करीब 8:00 बजे मेरा बेटा उठा और उसने कहा कि वह स्कूल जाना चाहता है। उसने स्कूल जाने की जिद की।”

परिवार ने शुरू में उसे तुरंत नहीं भेजा, लेकिन परीक्षा पास होने की वजह से वे आखिरकार मान गए।

पिता ने कहा, “हमने सोचा, ‘ठीक है, परीक्षाएं जल्द ही होने वाली हैं, तो उसे जाने देते हैं।’ उसने कहा, ‘ठीक है डैड, मैं जा रहा हूं,’ और स्कूल चला गया।”

स्कूल जाते समय बच्चा ठीक था

परिवार ने बताया कि जब बच्चा घर से निकला था, तो उसमें कोई असामान्य बात नहीं दिखी थी। लेकिन कुछ घंटों बाद उन्हें परेशान करने वाली खबर मिली।

पिता ने बताया कि दोपहर के समय उन्हें एक फोन कॉल आया जिसमें बताया गया कि उनके बेटे के साथ कुछ हुआ है, हालांकि यह कॉल सीधे स्कूल से नहीं आया था।

उन्होंने कहा, “स्कूल से किसी ने मुझे फोन नहीं किया। मेरे जीजाजी के घर के पास काम करने वाले स्थानीय रसोइयों ने फोन करके मुझे जानकारी दी।”

जब बच्चे को किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, तो परिवार को बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है।

CCTV से खुला राज

पिता ने बताया कि बाद में परिवार ने स्कूल के अंदर हुई घटना के बारे में जानकारी मांगी और उन्हें CCTV फुटेज दिखाया गया, जिसमें उनके अनुसार टीचर बच्चे को मारती हुई दिख रही थी।

पिता ने आरोप लगाया, “जब हमने स्कूल में CCTV फुटेज देखी, तो पता चला कि टीचर ने उसे डराया था। उन्होंने उसे डंडे से मारा और सदमे व डर के कारण वह वहीं गिर पड़ा।”

उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टर ने परिवार को जानकारी दी थी कि अस्पताल पहुंचने से कुछ समय पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।

उन्होंने कहा, “डॉक्टर ने हमें बताया कि अस्पताल पहुंचने से आधे घंटे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।”

NDTV को मिली CCTV फुटेज में टीचर बच्चे को मारती हुई दिख रही हैं। कुछ ही पल बाद, बच्चा गिर पड़ता है।

पिता ने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि स्कूल जाने से पहले उनका बेटा बीमार था।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके बेटे को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या थी, तो उन्होंने कहा, “कोई समस्या नहीं थी। वह कल रात खुशी-खुशी खेल रहा था और आज सुबह ठीक-ठाक उठा था। उसे कोई वायरल बुखार या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या नहीं थी।”

परिवार का आरोप है कि बच्चे के साथ मारपीट की यह कोई अकेली घटना नहीं थी। उनका दावा है कि स्कूल में दूसरे बच्चों के साथ भी मारपीट की गई है। परिवार ने कहा कि अगर ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर (RDO) दिलीप चक्रवर्ती भी अस्पताल पहुंचे।

RDO ने कहा, “मुझे इस घटना के बारे में पता चला कि स्कूल से 6 साल के एक बच्चे को मृत अवस्था में KGH लाया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी विभाग घटना के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर रहा है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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Divya Mishra Murder: लखनऊ में दिव्या मिश्रा की हत्या के मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। दरअसल, दिव्या की मौत से पहले उनके पति मानस वाजपेयी ने एक WhatsApp स्टेटस लगाया था, जिसमें उसने ने दावा किया था कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और आरोप लगाया कि उसने उसे धोखा दिया था। मानस ने स्टेटस में यह भी लिखा कि दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा और उनके पति भरत को “सब कुछ पता था।”

बता दें कि मशहूर हिंदी यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन दिव्या को गुरुवार दोपहर गोमती नगर में ICICI बैंक की ब्रांच के बाहर गोली मार दी गई थी, जहां वह काम करती थीं। जिसके बाद उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

‘उसे सब पता है’: स्टेटस में क्या लिखा था

38 वर्षीय मानस, जो SBI में कर्मचारी था उस पर आरोप है कि वह दिव्या के ऑफिस पहुंचा और उसे गोली मार दी। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद वह घर लौटा और अपनी 28 साल की बहन शिवा वाजपेयी (जो मानसिक रूप से बीमार थी) को गोली मारी, और फिर खुद को भी गोली मार ली।

मानस ने अपने WhatsApp स्टेटस में बताया कि उसने अपनी पत्नी को मार दिया है और उस पर धोखा देने का आरोप लगाया। उसने प्रज्ञा और उसके पति का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें “सब पता था।”

खास बात यह है कि यह स्टेटस दिव्या की मौत की खबर आने से पहले शेयर किया गया था।

बहन को ऑफिस के बाहर मारी गई गोली

प्रज्ञा ने दोपहर करीब 1:26 बजे X पर एक पोस्ट कर इस हमले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्हें फोन पर सूचना मिली है कि उनकी बहन को गोमती नगर में गोली मार दी गई है और उनका इलाज लोहिया अस्पताल में चल रहा है। प्रज्ञा ने लोगों से दिव्या के लिए दुआ और प्रार्थना करने की अपील भी की।

बता दें कि प्रज्ञा पहले न्यूज टेलीविजन चैनलों के साथ काम कर चुकी हैं। अब वह अपने YouTube चैनल ‘उल्टा चश्मा’ के लिए जानी जाती हैं, जिसके 85 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

पति-पत्नी एक साल से ज्यादा समय से अलग रह रहे थे

दिव्या और मानस की शादी को 12 साल हो चुके थे, लेकिन वे एक साल से ज्यादा समय से अलग-अलग रह रहे थे। दिव्या ने पिछले साल तलाक के लिए अर्जी भी दी थी।

पुलिस ने बताया कि मानस ने अपनी बहन शिवा की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि उसे लगता था कि उसकी मौत के बाद उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा।

पड़ोसी को मानस मृत अवस्था में मिला

मानस के घर के पास रहने वाले एक दुकानदार ने NDTV को बताया कि वह दोपहर करीब 12:30 बजे घर लौटा था। वह जल्दबाजी में लग रहा था और उसे बहुत पसीना आ रहा था। पड़ोसी ने बताया कि मानस अंदर गया और उसने हनुमान चालीसा बजाई।

इसके बाद जब पड़ोसी ने मानस का WhatsApp स्टेटस देखा, तो वह घर के अंदर गया। वहां उसने मानस को मृत पाया।

हत्याओं के इस घटनाक्रम के बाद जांचकर्ता अब कपल के खराब रिश्तों और मानस के आखिरी WhatsApp स्टेटस में लगाए गए आरोपों से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं।

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SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

SIM Card Rules: 9 से ज्यादा SIM रखने वालों पर कसेगा शिकंजा, 23 अगस्त से लागू होगा नया नियम; जानें क्या बदलेगा

भारत में मोबाइल SIM कार्ड को लेकर नियम और सख्त होने जा रहे हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) अब ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए Digital Intelligence Platform (DIP) का इस्तेमाल करेगा, जो अपने नाम पर निर्धारित अधिकतम संख्या में SIM कार्ड पहले ही ले चुके हैं। ऐसे यूजर्स को अतिरिक्त मोबाइल कनेक्शन लेने से रोका जाएगा।

 

देश के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। वहीं जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में यह सीमा 6 SIM कार्ड की है। सरकार का मुख्य उद्देश्य SIM कार्ड के जरिए होने वाले धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर अपराध पर लगाम लगाना है।

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10वां SIM लेने की कोशिश की तो क्या होगा?

 

एक बार निर्धारित सीमा पूरी होने के बाद टेलीकॉम कंपनियां उसी व्यक्ति के नाम पर नया मोबाइल कनेक्शन जारी नहीं कर सकेंगी। नए सिस्टम के तहत यदि किसी व्यक्ति के नाम पर 9 SIM कार्ड हैं, तो उसकी जानकारी और उपलब्ध होने पर फोटो भी Digital Intelligence Platform (DIP) पर दिखाई देगी। टेलीकॉम कंपनियां नया कनेक्शन देने से पहले यह जांच सकेंगी कि ग्राहक पहले ही तय सीमा तक SIM ले चुका है या नहीं।

 

यह व्यवस्था 23 अगस्त 2026 से लागू होने की योजना है। शुरुआत में टेलीकॉम कंपनियां नए कनेक्शन जारी करने से पहले DIP में उपलब्ध जानकारी के आधार पर क्रॉस-चेक करेंगी। इसके बाद सिस्टम को धीरे-धीरे अधिक ऑटोमेटेड बनाया जाएगा।

 

पहले से लिमिट से ज्यादा SIM हैं तो क्या होगा?

 

नए नियम उन लोगों पर भी लागू होंगे, जिनके नाम पर पहले से तय सीमा से ज्यादा मोबाइल कनेक्शन मौजूद हैं। ऐसे अतिरिक्त SIM कार्ड की पहचान कर उन्हें डिस्कनेक्ट किया जा सकता है। DoT की तकनीक पहले से ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए हासिल किए गए SIM कार्ड या निर्धारित सीमा से ज्यादा कनेक्शन की पहचान करने में सक्षम है।

 

SIM कार्ड के जरिए होने वाले साइबर फ्रॉड पर लगाम

 

सरकार के इस कदम का बड़ा मकसद उन SIM कार्ड के इस्तेमाल को रोकना है, जिनका इस्तेमाल अपराधी दूसरे लोगों की पहचान बनाकर, वित्तीय धोखाधड़ी और साइबर अपराध करने के लिए करते हैं। DIP के जरिए DoT पहले से ही टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों, पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ SIM और टेलीकॉम दुरुपयोग से जुड़ी जानकारी साझा करता है।

 

नवंबर 2026 तक टेलीकॉम कंपनियों को करना होगा सिस्टम तैयार

 

DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को 30 नवंबर 2026 तक रियल-टाइम SIM जांच व्यवस्था लागू करने और अपने सिस्टम को Digital Intelligence Platform के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट करने की समयसीमा दी है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तय सीमा से ज्यादा SIM रखने वाले ग्राहकों की पहचान जल्द हो सके और अतिरिक्त कनेक्शन पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।

 

ASTR भी करेगा फर्जी SIM की पहचान

 

सरकार ने फर्जी दस्तावेजों या निर्धारित सीमा से अधिक संख्या में जारी किए गए SIM कार्ड की पहचान के लिए ASTR नाम का AI आधारित सिस्टम भी तैयार किया है। यह तकनीक संदिग्ध या फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मोबाइल कनेक्शन का पता लगाने में मदद करती है।

 

CNAP से कॉल आने पर दिखेगा नाम

 

SIM कार्ड की संख्या सीमित करने के साथ टेलीकॉम सेक्टर में एक और बड़ा बदलाव Calling Name Presentation (CNAP) के रूप में हो रहा है। CNAP के जरिए जब किसी व्यक्ति के पास कॉल आएगी तो मोबाइल स्क्रीन पर उस नंबर से जुड़ा नाम दिखाई देगा, भले ही वह नंबर कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न हो। CNAP में टेलीकॉम कंपनियों के पास मौजूद KYC जानकारी का इस्तेमाल किया जाएगा, न कि किसी क्राउडसोर्स्ड डेटाबेस का।

 

कुल मिलाकर, SIM की सीमा सख्त करना, DIP के जरिए जानकारी साझा करना और CNAP लागू करना सरकार की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य फर्जी मोबाइल कनेक्शन के जरिए पहचान छिपाकर धोखाधड़ी करने वालों पर शिकंजा कसना है।

SBI ने करोड़ों की Bulk FD पर घटाई ब्याज दरें, 15 अगस्त से लागू हुए नए रेट; वरिष्ठ नागरिकों को भी झटका

SBI ने करोड़ों की Bulk FD पर घटाई ब्याज दरें, 15 अगस्त से लागू हुए नए रेट; वरिष्ठ नागरिकों को भी झटका

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट (Bulk Term Deposit) पर ब्याज दरों में कटौती की है। बैंक ने चुनिंदा अवधि की एफडी पर ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (bps) तक की कमी की है। SBI की वेबसाइट के मुताबिक, नई ब्याज दरें 15 अगस्त 2026 से प्रभावी हो गई हैं।

 

सामान्य ग्राहकों के लिए SBI Bulk FD की नई ब्याज दरें

 

SBI ने 7 दिन से लेकर 179 दिन तक की सभी बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट अवधि पर ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। वहीं, 180 से 210 दिन की अवधि पर ब्याज दर 10 बेसिस पॉइंट घटाई गई है। 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अन्य अवधि पर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

एफडी की अवधि पुरानी दर (%) नई दर (%)

  • 7 दिन से 14 दिन 4.50 4.25
  • 15 दिन से 45 दिन 5.00 4.75
  • 46 दिन से 179 दिन 5.10 4.85
  • 180 दिन से 210 दिन 5.60 5.50
  • 211 दिन से 1 साल से कम 5.60 5.60
  • 1 साल से 2 साल से कम 6.25 6.25
  • 2 साल से 3 साल से कम 6.15 6.15
  • 3 साल से 5 साल से कम 6.00 6.00
  • 5 साल से 10 साल तक 6.00 6.00
  • वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी कम हुई SBI Bulk FD की ब्याज दर

 

वरिष्ठ नागरिकों के लिए SBI ने 7 दिन से 179 दिन की अवधि वाली बल्क एफडी पर ब्याज दर में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। 180 से 210 दिन की अवधि पर ब्याज दर 10 बेसिस पॉइंट कम हुई है। वहीं, 211 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

एफडी की अवधि पुरानी दर (%) नई दर (%)

7 दिन से 14 दिन 5.00 4.75

15 दिन से 45 दिन 5.50 5.25

46 दिन से 179 दिन 5.60 5.35

180 दिन से 210 दिन 6.10 6.00

211 दिन से 1 साल से कम 6.10 6.10

1 साल से 2 साल से कम 6.75 6.75

2 साल से 3 साल से कम 6.65 6.65

3 साल से 5 साल से कम 6.50 6.50

5 साल से 10 साल तक 6.50 6.50

समय से पहले FD तोड़ने पर 1% पेनल्टी

 

SBI की बल्क डिपॉजिट के ग्राहकों के लिए सभी अवधि पर समय से पहले एफडी निकालने की स्थिति में 1 प्रतिशत की प्रीमैच्योर विदड्रॉल पेनल्टी लागू होगी। यह नियम नई जमा राशि पर लागू होगा।

 

3 करोड़ रुपये से कम की FD पर कोई बदलाव नहीं

 

SBI ने 3 करोड़ रुपये से कम की सामान्य फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। सामान्य ग्राहकों के लिए SBI की नियमित एफडी पर ब्याज दरें 3.05% से 6.40% तक हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये दरें सामान्य ग्राहकों की तुलना में अधिक हैं।

Tempsens Instruments IPO: खुलते ही छा गया यह IPO! 1 घंटे में फुल, लिस्टिंग पर बंपर मुनाफे का बड़ा इशारा

Tempsens Instruments IPO: राजस्थान बेस्ड टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स इंडिया के 650 करोड़ रुपये के आईपीओ को निवेशकों की तरफ से पहले ही दिन जबरदस्त रिस्पांस मिला है। 20 अगस्त को बोली खुलने के पहले ही घंटे में यह इश्यू 1.20 गुना सब्सक्राइब हो गया। ग्रे मार्केट में भी इसके अनलिस्टेड शेयरों की भारी डिमांड देखने को मिल रही है।

Tempsens Instruments IPO: सब्सक्रिप्शन स्टेटस

एनएससी (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, आईपीओ में ऑफर पर रखे गए 1,51,81,667 शेयरों के मुकाबले 1,89,88,300 शेयरों के लिए बोलियां मिल चुकी हैं:

गैर-संस्थागत निवेशक (NII): 2.31 गुना सब्सक्रिप्शन

रिटेल निवेशक (RII): 1.50 गुना सब्सक्रिप्शन

₹650 करोड़ रुपये के इस कुल आईपीओ में ₹95 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹555 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है। निवेशक इस आईपीओ में 24 अगस्त तक बोली लगा सकते हैं। इस आईपीओ के लिए ICICI Securities और JM Financial बुक-रनिंग लीड मैनेजर के रूप में काम कर रहे हैं।

एंकर इन्वेस्टर्स से जुटाए ₹194.5 करोड़

आईपीओ खुलने से ठीक एक दिन पहले 19 अगस्त को कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹194.5 करोड़ जुटाए। अरंडा इन्वेस्टमेंट्स और गोल्डमैन सैक्स जैसे दिग्गज इंटरनेशनल फंड्स के साथ एचडीएफसी, निप्पॉन लाइफ, कोटक महिंद्रा और टाटा जैसे 8 डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स को भी शेयर अलॉट किए गए।

जुटाये गए पैसों का कहां होगा इस्तेमाल?

फ्रेश इश्यू से मिलने वाले ₹95 करोड़ में से ₹18.1 करोड़ का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक हीटिंग और केबल सॉल्यूशंस बिजनेस के कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए। ₹55 करोड़ कंपनी का कर्ज चुकाने के लिए और बाकी रकम जनरल कॉर्पोरेट जरूरतों में इस्तेमाल होगी।

कंपनी की कमाई और बिजनेस प्रोफाइल

राजस्थान बेस्ड टेम्पसेंस इंस्ट्रूमेंट्स टेम्परेचर सेंसर्स बनाने वाली देश की प्रमुख कंपनी है। दुनिया भर में इसके 15 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं और भारत के टेम्परेचर सेंसर सेगमेंट में इसका 10.5% व नॉन-कॉन्टैक्ट टेम्परेचर सेंसर मार्केट में 21.3% मार्केट शेयर है।

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो FY26 में इसका कुल रेवेन्यू 17.5% बढ़कर ₹444.9 करोड़ रहा, जो FY25 में ₹378.5 करोड़ था। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट भी 11.2% की बढ़त के साथ ₹60.6 करोड़ से बढ़कर ₹67.3 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी को अपनी कुल कमाई का 71.5% हिस्सा घरेलू बाजार से और बाकी 28.5% हिस्सा एक्सपोर्ट्स से मिलता है।

GMP से तगड़ा लिस्टिंग गेन का इशारा

इन्वेस्टरगेन के अनुसार, Tempsens Instruments का शेयर ग्रे मार्केट में ₹220 के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ₹300 के अपर प्राइस बैंड पर इसका अनुमानित लिस्टिंग प्राइस करीब ₹520 (₹300 + ₹220) बैठता है। इस हिसाब से निवेशकों को करीब 73% का लिस्टिंग गेन की संभावना है।

सब्सक्राइब करें या नहीं? जानें ब्रोकरेज की राय

दिग्गज ब्रोकरेज हाउस आनंद राठी ने Tempsens Instruments के IPO को लंबी अवधि के नजरिए से ‘Subscribe’ करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज के मुताबिक, ₹300 के अपर प्राइस बैंड पर यह शेयर FY26 की कमाई के आधार पर 35.4x P/E और 25.64x EV/EBITDA के वैल्यूएशन पर उपलब्ध है।

कंपनी की मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ, टेम्परेचर सेंसर्स व केबल्स का डायवर्सिफाइड प्रोडक्ट पोर्टफोलियो और दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में फैलता बिजनेस इसकी सबसे बड़ी ताकत है। हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी सतर्क किया है कि अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का वैल्यूएशन पूरी तरह से फेयरली प्राइज्ड नजर आ रहा है, लेकिन इसके लंबे समय के बिजनेस फंडामेंटल्स बेहद मजबूत हैं।

SBI Securities ने भी Tempsens Instruments के IPO को लंबी अवधि के लिए ‘Subscribe’ करने की सलाह दी है। ₹300 के अपर प्राइस बैंड पर पोस्ट-इश्यू बेसिस पर कंपनी का वैल्यूएशन 37.3x FY26 P/E पर आंका है। ब्रोकरेज ने थर्मल इंजीनियरिंग सेगमेंट में कंपनी की मार्केट लीडरशिप, प्रोजेक्ट्स और मेंटेनेंस (MRO) के बीच बैलेंस रेवेन्यू मिक्स और FY24 से FY26 के बीच एक्सपोर्ट में मिली 46.5% की सालाना ग्रोथ को बड़ा पॉजिटिव बताया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।