तनाव के बावजूद यूएस आर्मी का प्लेन रूस में लैंड:इस पर क्या है या कौन सवार अभी रहस्य, मुख्य मिलिट्री बेस से उड़ान भरी थी

अमेरिका और रूस के बीच तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना का एक बड़ा मिलिट्री प्लेन मंगलवार को मॉस्को में उतरा। C-17A ग्लोबमास्टर III की इस लैंडिंग ने इसलिए ध्यान खींचा, क्योंकि रूस की राजधानी में किसी अमेरिकी सैन्य प्लेन का पहुंचना बेहद असामान्य है। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस प्लेन को रूस क्यों भेजा गया? फ्लाइट-ट्रैकिंग मॉनिटर के मुताबिक, प्लेन ने मॉस्को के समय के अनुसार सुबह करीब 8:50 बजे लातविया की राजधानी रीगा से उड़ान भरी और लगभग 74 मिनट बाद मॉस्को पहुंचा। इस उड़ान की एक और खास बात यह रही कि प्लेन रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। किसी अमेरिकी सैन्य प्लेन को इस रास्ते से उड़ान भरने के लिए रूसी अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। प्लेन के मिशन पर अब भी सस्पेंस रिकॉर्ड के मुताबिक, यही प्लेन 23 अगस्त को वॉशिंगटन डीसी के पास जॉइंट बेस एंड्रयूज से रीगा पहुंचा था। यह वही अमेरिकी सैन्य अड्डा है जहां राष्ट्रपति के विमानों का बेड़ा रहता है, जिसमें एयर फोर्स वन भी शामिल है। अमेरिका और रूस दोनों ने अब तक यह नहीं बताया कि प्लेन को मॉस्को क्यों भेजा गया था। प्लेन में कौन था और क्या सामान था, इसकी जानकारी भी सामने नहीं आई है। मॉस्को में अमेरिकी सैन्य प्लेन की असामान्य लैंडिंग के बाद प्लेन पर नजर रखने वाले लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कई कयास लगाए जाने लगे। कुछ लोगों ने इसे कैदियों की अदला-बदली, यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी गुप्त बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े काम से जोड़कर देखा। हालांकि, इनमें से किसी भी दावे की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अमेरिकी C-17 को मॉस्को भेजने के पीछे वजह क्या थी? C-17 ग्लोबमास्टर- टैंक से सैनिकों तक ले जाने में सक्षम C-17A ग्लोबमास्टर III अमेरिकी वायुसेना का बहुत बड़ा सामान ढोने वाला सैन्य प्लेन है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य गाड़ियों और भारी सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए किया जाता है। इस प्लेन को बोइंग ने बनाया है। इसकी लंबाई करीब 174 फीट और दोनों पंखों की चौड़ाई करीब 170 फीट है। यह प्लेन करीब 1,70,900 पाउंड यानी लगभग 77 टन वजन ले जा सकता है। इसमें एक साथ 102 पूरी तरह तैयार पैराट्रूपर्स या करीब 69 टन वजन वाला M1 अब्राम्स टैंक ले जाया जा सकता है। इसकी उड़ने की सामान्य रफ्तार करीब 518 मील प्रति घंटा है। ज्यादा से ज्यादा वजन के साथ यह बिना दोबारा ईंधन लिए करीब 2,760 मील तक उड़ सकता है। हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा मिलने पर यह इससे कहीं ज्यादा दूरी तय कर सकता है। इतना बड़ा प्लेन होने के बावजूद C-17 करीब 3,500 फीट लंबी रनवे से भी उड़ान भर सकता है और उतर सकता है। इसकी एक खासियत यह भी है कि यह अपनी ताकत से पीछे की ओर भी चल सकता है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल कहां करती है? C-17 का काम सिर्फ सैनिकों और हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नहीं है। अमेरिकी वायुसेना इसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान को पहुंचाने, हवा से सामान गिराने, घायल लोगों को बाहर निकालने और जरूरत के समय मदद पहुंचाने के लिए भी करती है। यह कोई लड़ाकू प्लेन या बम गिराने वाला प्लेन नहीं है। इसका मुख्य काम भारी सामान और सैन्य उपकरणों को जल्दी एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना है। प्लेन में क्या था, अभी पता नहीं मॉस्को जाने वाला यह प्लेन RCH4555 नाम से उड़ रहा था। सार्वजनिक फ्लाइट जानकारी से यह पता चलता है कि प्लेन कहां से चला और किस रास्ते से मॉस्को पहुंचा। लेकिन प्लेन में कौन था और उसके अंदर क्या सामान था, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि रूस और अमेरिका के बीच तनाव के इस दौर में इस उड़ान ने इतना ध्यान खींचा है। फिलहाल कैदियों की अदला-बदली, रूस-अमेरिका के बीच किसी खास बातचीत या अमेरिकी दूतावास से जुड़े काम जैसी बातें सिर्फ अंदाजे हैं। इनमें से किसी की भी पुष्टि नहीं हुई है। जब तक अमेरिका या रूस की तरफ से कोई जानकारी नहीं आती, तब तक यह साफ नहीं होगा कि अमेरिकी C-17 प्लेन को अचानक मॉस्को भेजने की असली वजह क्या थी।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आ सकती है तूफानी तेजी! ईरान पर अमेरिका के इस एक फैसले से भारत में पड़ेगी महंगाई की मार?

US Sanctions on Iran: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ‘आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नए और कड़े प्रतिबंधों का ऐलान किया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए इसे ‘इकोनॉमिक डी-डे’ करार दिया है।

वैसे तो भारत सीधे तौर पर ईरान से कच्चा तेल आयात नहीं करता है, लेकिन ग्लोबल ऑयल मार्केट के जरिए भारत पर इसका बड़ा असर पड़ने की आशंका है। चीन के विकल्प ढूंढने से लेकर भारत के क्रूड बिल, फ्रेट चार्ज और रुपए पर पड़ने वाले असर की पूरी डिटेल जानिए।

सीधे नहीं, ‘चीन फैक्टर’ से बढ़ेगी भारत की सिरदर्दी

एनर्जी इंटेलिजेंस फर्म Kpler के अनुसार, भारत ईरान से सीधे क्रूड नहीं खरीदता, इसलिए भारत पर प्रत्यक्ष प्रभाव नगण्य रहेगा। असली खतरा चीन के रुख से है। चीन हर महीने ईरान से औसतन 5 से 8 लाख बैरल प्रति दिन तेल खरीदता है। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में चीन को ईरान के अलावा दूसरे देशों का रुख करना पड़ा, तो वह उन मार्केट बैरल्स पर कब्जा करने की कोशिश करेगा जिन पर भारत निर्भर है।

चीन के अचानक ग्लोबल मार्केट में आने से कच्चे तेल की मांग और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे बेंचमार्क क्रूड प्राइस उछलेगा और भारत का कुल आयात बिल बढ़ जाएगा।

क्या रूस से मिलेगा सहारा?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल (25 से 28 लाख बैरल प्रति दिन) रूस से खरीद रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रूस पहले से ही अपनी क्षमता के मुताबिक भारत को अधिकतम तेल सप्लाई कर रहा है। मार्केट में सप्लाई तंग होने से रूसी क्रूड पर मिलने वाली छूट कम हो रही है और प्रीमियम बढ़ रहा है, जिसका सीधा नुकसान भारतीय रिफाइनरीज को होगा।

महंगा मालभाड़ा और इंश्योरेंस का झटका

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सिर्फ कच्चे तेल की कीमत ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत भी आसमान छू रही है। होर्मुज बंद होने के साथ ही फिलहाल लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घट गई है। मुख्य सप्लाई रूट्स पर फ्रेट दरें 137% से 411% तक बढ़ चुकी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए सिंगल ट्रिप का ‘वॉर-रिस्क इंश्योरेंस’ 7.5 से 10 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। दूर-दराज से तेल मंगाने पर जहाजों का फ्रेट और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ जाएगी।

महंगाई, रुपए और अर्थव्यवस्था पर कैसे होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 90% कच्चा तेल आयात करता है। अगर ब्रेंट क्रूड के दाम में तेजी बनी रहती है, तो क्रूड का आयात बिल बढ़ने से देश का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होगा। जुलाई 2026 में भारत का मर्चेंडाइज डेफिसिट $32 अरब तक पहुंच गया था।

ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग महंगी होने से पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस (LPG) के साथ-साथ एविएशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा के सामान महंगे हो सकते हैं।

भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार पर सीमित प्रभाव

भारत-ईरान प्रत्यक्ष व्यापार पर इसका खास प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 2018 में अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारत ने मई 2019 से ईरान से तेल खरीदना बंद कर दिया था।

भारत ईरान को बासमती चावल का बड़ा निर्यात करता है (अप्रैल-जून 2026 में $103 मिलियन का निर्यात)। यूएई के जरिए होने वाले पेमेंट और फ्रेट रूट में रुकावट से भारतीय बासमती एक्सपोर्टर्स को लॉजिस्टिक्स में थोड़ी दिक्कत आ सकती है।

ईरान ने हाल के सालों में अपनी घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग बढ़ा ली है, इसलिए भारतीय दवा निर्यातकों पर इसका बड़ा असर नहीं होगा।

कुल मिलाकर ईरान पर कसा गया अमेरिकी शिकंजा सीधे तौर पर भारत की तेल आपूर्ति को ठप नहीं करेगा, बल्कि यह ‘सेकंड-ऑर्डर इफेक्ट’ के रूप में सामने आएगा। चीन द्वारा वैकल्पिक तेल बाज़ारों पर निर्भरता बढ़ाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल, शिपिंग भाड़ा और इंश्योरेंस महंगा होगा, जिससे आखिरकार भारत का इंपोर्ट बिल और घरेलू महंगाई प्रभावित हो सकती है।

निफ्टी और बैंक निफ्टी में सपोर्ट के पास गिरावट में खरीदारी की रणनीति करेगी काम, यह रियल्टी शेयर कर सकता है कमाल

बाजार में कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा है। 11.10 बजे के आसपास सेंसेक्स 147.21 अंक या 0.19 प्रतिशत गिरकर 77,221.90 पर और निफ्टी 72.95 अंक या 0.30 प्रतिशत गिरकर 24,146.10 पर कारोबार कर रहा था। मेटल ,IT और डिफेंस शेयर बाजार पर दबाव बना रहे हैं। ऑटो रियल्टी और सीमेंट में भी कमजोरी है। हालांकि कैपिटल मार्केट शेयरों में खरीदारी आई है। फर्टिलाइजर शेयरों में जोरदार एक्शन देखने को मिल रहा है। FACT,मद्रास फर्टिलाइजर और RCF में 5 से 13 फीसदी तक की दमदार तेजी देखने को मिली है। NFL और चंबल जैसे दूसरे फर्टिलाइजर शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिल रही है। रूसी राष्ट्रपति पुतिन के भारत को फर्टिलाइजर सप्लाई बढ़ाने के भरोसे के बाद इन शेयरों का जोश बढ़ा है।

10 फीसदी डिस्काउंट में OFS आने के चलते हिंदुस्तान कॉपर में 7 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है। मार्केट रेगुलेटर सेबी से फ्रॉड और गड़बड़ी के आरोपों के मामले में क्लीन चिट मिलने से मैक्स फाइनेंशियल में भी तेजी है। यह शेयर एक फीसदी से ज्यादा ऊपर दिख रहा है। साथ ही LIC,न्यू इंडिया इंश्योरेंस और SBI LIFE में भी हल्की बढ़त है।

बाजार पर बात करते हुए www.sethamit.com के अमित सेठ ने कहा कि अगर हम निफ्टी की बात करें तो पिछले कुछ दिनों से यहां पर थोड़ा सा साइडवेज टू नेगेटिव मोमेंटम रहा है। अच्छी बात ये है कि पिछले दो-तीन दिनों में निफ्टी ने 24100 पर एक सपोर्ट लिया और यहां से थोड़ी रिकवरी दिखाने की कोशिश की है। निफ्टी के लिए 24100 का लेवल अब मेक और ब्रेक लेवल बन गया है। अगर यह लेवल तो दिक्कतें बढ़ सकती है। हाल में इसमें थोड़ी रिकवरी आई है लेकिन अगर हम इंट्राडे मूवमेंट की बात करें तो मार्केट थोड़ा सा ड्रैग डाउन कर रहा है। ऊपर की तरह 24350 पर स्थित 200 डेमा निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस है। उसके ऊपर निकलने पर ही नई तेजी आएगी।

इस समय बाजार 24100-24300 की एकदम टाइट रेंज में है। निफ्टी समय काफी अच्छे सपोर्ट के पास है। इसको ध्यान में रखते हुए अभी भी गिरावट पर खरीदारी की सलाह होगी। निफ्टी में कोई डिप मिलने पर 24100 के स्टॉप लॉस के साथ खरीदारी की जा सकती है। अगर निचले लेवल से 100-1010 पॉइंट की इंट्राडे बढ़त मिले तो वहां पर मुनाफा बांधना चाहिए।

Market Trend : बाजार में कमजोरी कायम, शॉर्ट टर्म में अच्छे रिटर्न के लिए इन दो शेयरों पर रहे नजर

बैंक निफ्टी व्यू

इसी तरह बैंक निफ्टी भी अपने अहम मूविंग एवरेजेज के आसपास ही है। यहां पर भी मोमेंटम थोड़ा सा कमजोर है। बैंक निफ्टी के लिए 57,000 का लेवल मेक ऑर ब्रेक लेवल है। जब तक 57,000 का स्तर कायम है बैंक निफ्टी में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने की सलाह होगी। लेकिन ओवरऑल नजरिए से देखें तो मार्केट में मोमेंटम गायब है।

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए अमित सेठ ने कहा कि इस समय रियलस्टेट सेक्टर काफी अच्छा लग रहा है। यहां पर एक-डेढ़ महीने पहले एक स्ट्रांग अप ट्रेंड देखने को मिला था। उसके बाद यह सेक्टर थोड़ा सा पुलबक मोड में चला गया था। चार्ट्स देख कर लग रहा है कि इस सेक्टर के अधिकांश स्टॉक्स में पुलबैक पूरा हो चुका और यह सेक्टर फिर से तेजी के लिए तैयार है। इस सेक्टर में गोदरेज प्रॉपर्टीज काफी अच्छा लग रहा है। इस स्टॉक ने पुलबैक में लगभग 50 डेमा के आसपास एक अच्छा सपोर्ट बेस बनाया और कल के सत्र में इसने एक बार फिर 10 और 20 डेमा क्रॉस कर लिया। यह स्टॉक अच्छा-खासा रिवर्सल दिखा रहा है। इंट्राडे में कोई भी गिरावट आती है तो भी गोदरेज प्रॉपर्टीज में 2040 रुपए के आसपास, 2020 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 2080 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है।

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शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ सकते हैं:चीनी राष्ट्रपति के साथ 400 अधिकारी होंगे; BRICS समिट में शामिल होने की उम्मीद

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। यह उनका 7 साल बाद भारत का पहला दौरा होगा। भारत 12-13 सितंबर को BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। रॉयटर्स के मुताबिक, जिनपिंग के साथ करीब 400 अधिकारियों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल आ सकता है। जिनपिंग आखिरी बार 2019 में भारत आए थे। तब उनके साथ 200 से कम अधिकारी थे। जिनपिंग से बातचीत में सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दा जिनपिंग के भारत दौरे की तैयारियों में LAC पर शांति और सीमा विवाद सबसे अहम मुद्दों में है। दोनों देश सीमा पर ऐसी व्यवस्था बनाने पर बात कर रहे हैं, जिससे किसी सैन्य घटना या तनाव का असर द्विपक्षीय रिश्तों पर न पड़े। व्यापार और जरूरी सामान की सप्लाई भी एजेंडे में भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है। इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं। भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… रूसी राष्ट्रपति पुतिन सितंबर में भारत आ सकते हैं: बोले- मोदी से मुलाकात जल्द रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल हो सकते हैं। मॉस्को में सोमवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जल्द मुलाकात की उम्मीद जताई। पूरी खबर पढ़ें…

बांग्लादेश के PM तारिक रहमान ने रद्द किया दिल्ली दौरा, सामने आया चौंकाने वाला कारण

बांग्लादेश के PM तारिक रहमान ने रद्द किया दिल्ली दौरा, सामने आया चौंकाने वाला कारण

Tariq Rehman

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का 3 दिवसीय दिल्ली दौरा टल गया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले अगस्त के तीसरे हफ्ते की तारीखें भी तय मानी जा रही थीं। दोनों तरफ के अधिकारी कूटनीतिक मोर्चे पर पूरी तैयारी में थे और राष्ट्रपति भवन से एक प्रेस विज्ञप्ति ने इस बात पर मुहर भी लगा दी थी। रहमान के रद्द हुए दौरे से पहले उनके एक वरिष्ठ सहयोगी ने कथित तौर पर तथाकथित ‘इस्लामिक NATO’ के प्रति खुलेपन का संकेत दिया था। इसी दौरान ढाका ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग भी दोहराई, ताकि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जा सके।

रिपोर्टों के मुताबिक तारिक रहमान आगामी BRICS Summit में शामिल होने को लेकर भी अनिच्छुक हैं, जबकि भारत ने उन्हें आमंत्रित किया है और चीन तथा रूस के नेता भी इसमें शामिल होने की पुष्टि कर चुके हैं।  ठीक आखिरी वक्त पर, ढाका और कूटनीतिक हलकों के सूत्रों के मुताबिक यह पूरा दौरा अचानक खटाई में पड़ गया। इस पूरे घटनाक्रम के अचानक रुक जाने के पीछे कोई आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में असमंजस की स्थिति बन गई।

पर्दे के पीछे बातचीत अभी भी जारी है, लेकिन दौरा फिलहाल अधर में लटक गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह ढाका के अंदर चल रही राजनीतिक उथल-पुथल है। सबसे बड़ा और तुरंत उभरने वाला कारण  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना हैं। बांग्लादेश सरकार चाहती है कि उन्हें वापस भारत से प्रत्यर्पित किया जाए।

रविवार को बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एकेएम शाहिदुल करीम ने एक बयान में साफ कर दिया कि तारिक रहमान के दौरे के लिए यह प्रत्यर्पण एक मुख्य शर्त है। खबरों के मुताबिक बांग्लादेशी विपक्षी दल और छात्र आंदोलन से जुड़े नेता भारत के साथ तब तक सामान्य कूटनीतिक संबंधों के पक्ष में नहीं हैं जब तक शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा हल नहीं हो जाता।

मॉस्को में विदेश मंत्री जयशंकर को देखते ही पुतिन ने पीएम मोदी के लिए कही ये बात फिर भारत संग दोस्ती पर दिया बड़ा बयान

रूस के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में भारत की कूटनीतिक सक्रियता जारी है। इसी सिलसिले में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस के रिश्तों, आर्थिक सहयोग और दुनिया में तेजी से बदल रहे घटनाक्रमों पर अहम बातचीत हुई।

बता दें कि जयशंकर रविवार को दो दिवसीय रूस दौरे पर मॉस्को पहुंचे थे। अपनी मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक और परमाणु क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।

जयशंकर ने क्या कहा?

पुतिन से मुलाकात के दौरान जयशंकर ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाओं से शुरुआत करना चाहता हूं। उन्होंने मुझे एक व्यक्तिगत संदेश दिया है, जिसे मैं आपको सौंपना चाहता हूं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच अंतर-सरकारी आयोग की बैठक हुई और इसके नतीजे काफी अच्छे रहे। जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ा है।”

विदेश मंत्री ने आगे कहा, प्रधानमंत्री मोदी SCO शिखर सम्मेलन में आपसे मिलने, फिर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत में आपका स्वागत करने और, उचित समय पर, आपकी आपसी सुविधा के अनुसार, वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित करने के लिए उत्सुक हैं, इसलिए हमारे पास सहयोग की एक बहुत मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करने के लिए है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह रूस दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 12-13 सितंबर को BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली आने की उम्मीद है।

जयशंकर और पुतिन की मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत और रूस अपने आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। इसके साथ ही दोनों देश कई दूसरे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

रूस और भारत के बीच व्यापार बढ़ा

पुतिन ने कहा कि इस साल रूस और भारत के बीच व्यापार बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस भारत को उर्वरक की आपूर्ति बढ़ा रहा है और भविष्य में भी ऐसा करना जारी रखने के लिए तैयार है।

पुतिन ने विदेश मंत्री से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान उनकी प्रधानमंत्री मोदी से जल्द मुलाकात होगी।

बता दें कि इससे पहले दिन में, विदेश मंत्री ने रूसी प्रथम उप प्रधान मंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को और अधिक विस्तार देने के तरीकों पर बातचीत की थी।

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पुतिन बोले- रूस-भारत के बीच इस साल कारोबार बढ़ा:दोनों देशों के दशकों से रिश्ते मजबूत; भारत के विदेश मंत्री जयशंकर से मॉस्को में मुलाकात की

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि इस साल रूस और भारत के बीच कारोबार बढ़ा है। उन्होंने यह बात रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन में सोमवार को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान कही। पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच दशकों से मजबूत रिश्ते बने हुए हैं। दोनों देश व्यावहारिक तौर पर लगभग सभी क्षेत्रों में अपना सहयोग जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि इस साल हमारा कारोबार बढ़ा है। पिछले साल इसमें थोड़ी कमी आई थी, लेकिन इस साल यह बढ़ रहा है। जयशंकर बोले- BRICS समिट के लिए राष्ट्रपति पुतिन का स्वागत है विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO समिट में उनसे मिलने का इंतजार कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी BRICS समिट के लिए पुतिन का भारत में स्वागत करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेताओं की सालाना बैठक भी आपसी सुविधा के मुताबिक जल्द होगी। जयशंकर रविवार को मॉस्को पहुंचे थे। वह रूस के अपने दो दिन के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट में शामिल होने की उम्मीद है। जयशंकर रूसी उपप्रधानमंत्री से भी मिले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को मॉस्को में रूस के उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर भी बात हुई। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

यूक्रेन को सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा ब्रिटेन:कीव में बनेगी लंबी दूरी की SCALP मिसाइल; रूस में अंदर तक हमला करने में सक्षम

रूस के खिलाफ जंग में मदद के लिए ब्रिटेन यूक्रेन को अपनी सीक्रेट मिसाइल तकनीक देगा। इससे कीव में ही लंबी दूरी की SCALP क्रूज मिसाइल बनाने का रास्ता साफ होगा। ब्रिटेन में इस मिसाइल को स्टॉर्म शैडो कहा जाता है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को अपनी पहली विदेश यात्रा पर यूक्रेन पहुंचे। इसी दौरान मिसाइल तकनीक साझा करने का ऐलान किया गया है। वे राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे। फ्रांस और यूक्रेन की योजना है कि इस साल के आखिर तक यूक्रेन में SCALP की उत्पादन लाइन शुरू की जाए। इससे यूक्रेन को मिसाइल की तकनीक समझने और उसे देश में बनाने में मदद मिलेगी। ब्रिटेन ने यूक्रेन को लंबे साथ का भरोसा दिया यूक्रेन के स्वतंत्रता दिवस के मौके ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम सोमवार को राजधानी कीव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका देश यूक्रेन के साथ लंबे समय तक खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की सुरक्षा ब्रिटेन की सुरक्षा से जुड़ी है। यूक्रेन अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों पर भी काम कर रहा है। यूक्रेनी कंपनी फायर प्वाइंट ने एफपी-5 फ्लेमिंगो क्रूज मिसाइल बनाई है, जिसकी बताई गई मारक क्षमता करीब 3,000 किमी है। वहीं, रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचाव के लिए यूक्रेन को हवाई हमले रोकने वाली मिसाइलों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी पैट्रियट प्रणाली के लिए जरूरी मिसाइलों की कमी भी उसकी बड़ी परेशानी है।
खबर अपडेट हो रही है….